UP Board Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 8 Shankaracharyah

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Detailed Chapter 8 शंकरचार्य UP Board Solutions for Class 6 Sanskrit

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Class 6 Sanskrit Chapter 8 शंकरचार्य UP Board Solutions PDF

शब्दार्थाः

दिवंगतः = मृत्यु हो गई
पूर्णानदी तीरे = पूर्णानदी के तट पर
प्राविशत = प्रवेश किए
आक्रोशत् = चिल्लाये
श्रुत्वा = सुनकर
सद्यः - तुरन्त
शीघ्र, लब्ध्वा = प्राप्त किये
निरच्छन् = निकल गए
संस्थापितवान = संस्थापित किये
द्वात्रिंशे वयसि = बत्तीसवें वर्ष में

केरलराज्यस्य...............आसीत् ।

हिन्दी अनुवाद – केरल प्रदेश की पूर्णा नदी के किनारे पर एक शङ्कराचार्य का जन्म हुआ। उनके पिता का नाम 'शिवगुरु' और माता का नाम आर्याम्बा था। शङ्कर के बचपन में ही शिवगुरु स्वर्ग सिधार गये। अतः आर्याम्बा ने ही शङ्कर का पालन-पोषण किया। बाल्यकाल से ही वह अत्यधिक प्रतिभासम्पन्न था।

एकदा...............लिखितवान् ।

हिन्दी अनुवाद – एक बार शङ्कर ने स्नान के लिए नदी में प्रवेश किया। वहाँ एक मगरमच्छ ने उनको पकड़ लिया। वह जोर-जोर से चिल्लाया। माता उस (चिल्लाने) को सुनकर नदी के किनारे पर आ गयी। तब शङ्कर ने माता से कहा- माता! सन्यास ग्रहण करने के लिए मुझे अनुमति दे दो। तब ही मैं मगरमच्छ से मुक्त होऊगा।” आर्याम्बा शङ्कर का सन्यास ग्रहण करना नहीं चाहती थी। किन्तु पुत्र का कष्ट देखकर 'जैसा तुम चाहते हो वैसा करो' ऐसा कहा। शीघ्र ही शङ्कर मगरमच्छ से मुक्त हो गया। सन्यास के लिए अनुमति पाकर शङ्कर घर से निकल गया। आठ वर्षीय उसने (शङ्कर ने) ओंकारेश्वर क्षेत्र में आचार्य गोविन्द पाद से ज्ञान प्राप्त किया। बारह वर्षीय शङ्कर पूरे देश का भ्रमण करके काशी पहुँचा। सोलह वर्ष की अल्प अवस्था में उस (शङ्कर) ने ब्रह्मसूत्र का भाष्य (टीका) लिखा।

आदिशङ्कर..................... विद्यते । |

हिन्दी अनुवाद – आदिशंकर ने अनेक प्रकार के मधुर स्तोत्रकाव्य भी रचे। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए देश की चारों दिशाओं में चार मठों को संस्थापित किया। केवल बत्तीस वर्ष की अवस्था में ही शङ्कराचार्य ने ब्रह्मभाव प्राप्त किया। (अर्थातू वैकुण्ठ धाम को प्राप्त किया)। आदि शङ्कराचार्यः भारतवर्ष की एकता को बनाये रखने में और सनातन धर्म की प्रतिष्ठा करने में सब प्रकार से स्मरणीय हैं।

अभ्यासः

 

प्रश्न 1. उच्चारणं कुरुत
Answer: विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से स्वयं करें। इस प्रश्न का उद्देश्य संस्कृत शब्दों का सही उच्चारण अभ्यास करना है। संस्कृत शब्दों को ठीक से बोलना सीखने के लिए गुरु का मार्गदर्शन बहुत जरूरी होता है।
In simple words: छात्रों को शिक्षक की मदद से शब्दों का सही उच्चारण करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: संस्कृत में उच्चारण बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए प्रत्येक शब्द को ध्यान से सुनें और दोहराएं ताकि आपकी बोली स्पष्ट हो।

 

प्रश्न 2. यथायोग्यं योजयत (मिलान करके)
यथा-
मातरम्
भाष्यम्
ज्ञानम्
प्रचारम्
जन्म
नदीम्
Answer: यहाँ पर सही मिलान नीचे दिए गए हैं:
मातरम् - अवदत्
भाष्यम् - अलिखत्
ज्ञानम् - अलभत्
प्रचारम् - अकरोत्
जन्म - प्राप्नोत्
नदीम् - अगच्छत्
इन मिलानों से पता चलता है कि कौन सा शब्द किस क्रिया से जुड़ा है, जैसे माता से बात की जाती है या नदी की ओर जाया जाता है।
In simple words: सही शब्दों को उनकी सही क्रियाओं के साथ मिलाएं।

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, पहले उन जोड़ों को पहचानें जिनके अर्थ आपको निश्चित रूप से पता हैं, फिर बाकी विकल्पों को अनुमान से मिलाएं।

 

प्रश्न 3. एकपदेन उत्तरत
यथा-
(क) कालडीग्रामः कस्मिन् राज्ये अस्ति?
(ख) शङ्करस्य पिता कदा दिवंगतः?
(ग) माता पुत्रं केन गृहीतम् अपश्यतु?
(घ) शङ्करः कस्य पर्यटनं कृत्वा काशीं प्राप्तवान्?
(ङ) सम्पूर्णभारतवर्षे शङ्करः कस्य प्रचारम् अकरोतु?
Answer:
(क) केरलराज्ये
(ख) बाल्यकाले
(ग) मकरेण
(घ) सम्पूर्ण देशस्य
(ङ) सनातन धर्मस्य
ये सभी उत्तर कहानी में दी गई जानकारी के आधार पर एक शब्द में दिए गए हैं, जो मुख्य तथ्यों को बताते हैं।
In simple words: दिए गए प्रश्नों का उत्तर एक शब्द में दें।

🎯 Exam Tip: 'एकपदेन उत्तरत' वाले प्रश्नों में केवल मुख्य शब्द लिखें, पूरा वाक्य लिखने की आवश्यकता नहीं होती।

 

प्रश्न 4. सन्धि-विच्छेद कृत्वा सन्धि-नाम लिखत (लिखकर)
पदम्
यथा - शङ्कराचार्यः
सर्वोदयः
ओंकारेश्वरम्ः
Answer: यहाँ दिए गए शब्दों का सन्धि-विच्छेद और सन्धि का नाम इस प्रकार है:

पदम्सन्धि-विच्छेदःसन्धि-नाम
शङ्कराचार्यःशङ्कर+आचार्यःदीर्घ सन्धि
सर्वोदयःसर्व+उदयःगुण सन्धि
ओंकारेश्वरम्ःओंकार+ईश्वरम्गुण सन्धि
सन्धि-विच्छेद से शब्दों के मूल अर्थ को समझने में मदद मिलती है और सन्धि का प्रकार बताता है कि वे कैसे जुड़े हैं।
In simple words: शब्दों को अलग करके और उनके जुड़ने के नियम (सन्धि का नाम) बताएं।

🎯 Exam Tip: सन्धि-विच्छेद करते समय ध्यान दें कि अलग किए गए शब्द अपने आप में अर्थपूर्ण होने चाहिए, और सन्धि के नियमों का पालन करें।

 

प्रश्न 5. वाक्यानि रचयत (करके) –
Answer: यहाँ दिए गए शब्दों का उपयोग करके बनाए गए वाक्य इस प्रकार हैं:
पूर्णानदीतीरे – पूर्णानदीतीरे एकः ग्रामः अस्ति ।
शङ्करस्य, – शङ्करस्य माता आर्याम्बा आसीत् ।।
सन्यासाय – शङ्करः सन्यासाय मातरं न्यवेदयत् ।
धर्मरक्षार्थम् – धर्मरक्षार्थम् श्री शङ्करः मठान संस्थापयत।
इन वाक्यों से शब्दों का सही प्रयोग और उनके अर्थ को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। प्रत्येक शब्द को वाक्य में इस तरह से इस्तेमाल किया गया है कि वह व्याकरणिक रूप से सही हो।
In simple words: दिए गए शब्दों का प्रयोग करके पूरे वाक्य बनाएं।

🎯 Exam Tip: वाक्य बनाते समय, शब्द के अर्थ और उसके सही कारक-विभक्ति का ध्यान रखें ताकि वाक्य व्याकरणिक रूप से शुद्ध हो।

 

प्रश्न 6. रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
यथा – शङ्करस्य पितुः शिवगुरुः आसीत् ।
शङ्करस्य पितुः कः आसीत्?
(क) आचार्यशङ्करः बाल्यकालादेव प्रतिभासम्पन्नः आसीत् ।।
(ख) मातुः अनुमतिं लब्ध्वा शङ्करः गृहात निरगच्छत् ।
(ग) धर्मरक्षार्थ देशस्य चतुर्दिक्षु चतुरः मठान् संस्थापितवान् ।।
Answer: रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्न निर्माण इस प्रकार हैं:
(क) आचार्यशङ्करः बाल्यकालादेव कीदृशः आसीतू? ।
(ख) मातुः किं लब्ध्वा शङ्करः गृहात् निरगच्छतु? ।
(ग) धर्मरक्षार्थं कस्य चतुर्दिक्षु चतुरः मठाने संस्थापितवान्? ।
प्रश्न निर्माण करने से वाक्य के किस हिस्से पर जोर दिया जा रहा है, यह पता चलता है और यह समझने में मदद मिलती है कि किस जानकारी की तलाश की जा रही है।
In simple words: दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्द की जगह प्रश्नवाचक शब्द लगाकर प्रश्न बनाएं।

🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण करते समय, रेखांकित शब्द के लिंग, वचन और कारक के अनुसार सही प्रश्नवाचक शब्द (जैसे कः, का, किम्, कदा, कुत्र, कथम्, कीदृशः) का प्रयोग करें।

 

प्रश्न 7. अद्योलिखितानि वाक्यानि घटनाक्रमेण पुस्तिकायां लिखत (करके) –
(क) 788 तमे वर्ष शङ्कराचर्यस्य जन्म अभवत् ।
(ख) अष्टवर्षीयः सः ओंकारेश्वरक्षेत्रे आचार्यगोविन्दात् ज्ञानं प्राप्तवान् ।
(ग) द्वाद्वशवर्षीयः शंङ्करः सम्पूर्णदेशस्य पर्यटनं कृत्वा काश प्राप्तवान् ।
(घ) केवलं द्वात्रिंशे एव वयसि शङ्कराचार्यः ब्रह्मावम उपगतः।।
Answer: दिए गए वाक्य घटनाक्रम के अनुसार पहले से ही सही क्रम में हैं:
(क) 788 तमे वर्ष शङ्कराचर्यस्य जन्म अभवत् ।
(ख) अष्टवर्षीयः सः ओंकारेश्वरक्षेत्रे आचार्यगोविन्दात् ज्ञानं प्राप्तवान् ।
(ग) द्वाद्वशवर्षीयः शंङ्करः सम्पूर्णदेशस्य पर्यटनं कृत्वा काश प्राप्तवान् ।
(घ) केवलं द्वात्रिंशे एव वयसि शङ्कराचार्यः ब्रह्मावम उपगतः।।
इन वाक्यों से शङ्कराचार्य के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का कालक्रमिक वर्णन होता है, जिससे उनकी जीवनी को समझना आसान हो जाता है।
In simple words: घटनाओं को उनके होने के समय के हिसाब से सही क्रम में लिखें।

🎯 Exam Tip: जब घटनाओं को क्रम में लगाना हो, तो प्रमुख तिथियों या आयु के विवरण पर ध्यान दें ताकि सही अनुक्रम स्थापित किया जा सके।

नोट – विद्यार्थी शिक्षण-सङ्केतः, 'एतपि जानीत' और स्मरणीयम् शिक्षक की सहायता से स्वयं करें।

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FAQs

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