Download UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 05 छठी शताब्दी बीसी का भारत धार्मिक आंदोलन
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प्रश्न 1. निम्नलिखित के विषय में लिखिए -
Answer:
| विवरण | महावीर स्वामी | गौतमबुद्ध |
|---|---|---|
| 1. जन्म का समय | 599 वर्ष पूर्व | 563 वर्ष पूर्व |
| 2. जन्म का स्थान | वैशाली | लुम्बिनी |
| 3. बचपन का नाम | वर्धमान | सिद्धार्थ |
| 4. माता का नाम | त्रिशला | महामाया |
| 5. पिता का नाम | सिद्धार्थ | शुद्धोधन |
| 6. उपदेश की भाषा | प्राकृत भाषा | पाली भाषा |
In simple words: यह तालिका महावीर स्वामी और गौतमबुद्ध के जन्म, माता-पिता और उपदेशों की भाषाओं जैसी महत्वपूर्ण जानकारी को दिखाती है।
🎯 Exam Tip: ऐसे तुलनात्मक प्रश्नों के लिए, तथ्यों को तालिका के रूप में प्रस्तुत करना जानकारी को स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से दिखाता है, जिससे पूरे अंक प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 2. त्रिरत्न और अष्टांगिक मार्ग क्या हैं ? यह किनसे सम्बन्धित हैं ? लिखिए।
Answer: त्रिरत्न और अष्टांगिक मार्ग भारतीय दर्शन के महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं, जो जीवन जीने का तरीका बताते हैं। महावीर स्वामी के अनुसार, त्रिरत्न जैन धर्म से संबंधित हैं। ये तीन सिद्धांत हैं-
1. सही बातों में विश्वास रखना
2. सही बातों को ठीक से समझना
3. सही कर्म करना
ये तीनों सिद्धांत व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने में मदद करते हैं और आत्मा की शुद्धि पर जोर देते हैं।
अष्टांगिक मार्ग सरल और मानवतापूर्ण व्यवहार के नियम हैं। गौतमबुद्ध के अनुसार, अष्टांगिक मार्ग बौद्ध धर्म से संबंधित हैं। ये आठ सिद्धांत हैं-
1. जीवन को सुचारु रूप से चलाने के लिए सही सोच रखना
2. सही बात और सही कार्य करना
3. हमेशा सत्य बोलना
4. अच्छा कार्य करना
5. अच्छे कार्यों से आजीविका कमाना
6. मानसिक और नैतिक उन्नति के लिए हमेशा प्रयास करना
7. अपने कार्य और व्यवहार पर हमेशा ध्यान रखना
8. ज्ञान प्राप्ति के लिए ध्यान केंद्रित करना
ये अष्टांगिक मार्ग दुख से मुक्ति और निर्वाण प्राप्त करने का मार्ग दिखाते हैं।
In simple words: त्रिरत्न जैन धर्म से जुड़े सही विश्वास, ज्ञान और आचरण के तीन नियम हैं। अष्टांगिक मार्ग बौद्ध धर्म के आठ नियम हैं जो जीवन जीने का सही तरीका और दुख खत्म करने का रास्ता बताते हैं।
🎯 Exam Tip: त्रिरत्न और अष्टांगिक मार्ग के प्रत्येक सिद्धांत को स्पष्ट रूप से लिखें और यह भी बताएं कि वे क्रमशः जैन धर्म और बौद्ध धर्म से कैसे संबंधित हैं।
प्रश्न 3. जैन और बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों को लोगों ने क्यों अपनाया ?
Answer: जैन और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को लोगों ने कई कारणों से अपनाया। इन धर्मों के आने से शाकाहारी संस्कृति को बहुत बढ़ावा मिला, जिससे समाज में अहिंसा का विचार मजबूत हुआ। भारत की अहिंसावादी छवि इन्हीं धर्मों के कारण बनी। ये धर्म लोकतांत्रिक और उदार थे, यानी सभी लोग इसमें शामिल हो सकते थे, जिससे ये धर्म दूर-दूर तक फैल गए। चीन और दक्षिण-पूर्वी एशिया में भी इन्हें अपनाया गया। इन धर्मों के संघों में महिलाओं को पुरुषों के बराबर ऊँचा स्थान दिया गया, जो उस समय के समाज में एक बड़ी बात थी। साथ ही, जातक और हितोपदेश जैसी कहानियों के माध्यम से इनके उपदेशों को बहुत ही सरल तरीके से लोगों तक पहुँचाया गया, जिससे आम लोग भी आसानी से समझ सके।
In simple words: लोगों ने जैन और बौद्ध धर्मों को अपनाया क्योंकि वे शाकाहार और अहिंसा को बढ़ावा देते थे, सभी को बराबर मानते थे, और उनकी शिक्षाएं सरल कहानियों के जरिए आम लोगों तक पहुंचाई जाती थीं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय उन मुख्य सामाजिक और धार्मिक कारणों पर ध्यान केंद्रित करें जिन्होंने लोगों को इन धर्मों की ओर आकर्षित किया, जैसे अहिंसा, समानता और सरल शिक्षाएं।
प्रश्न 4. महावीर स्वामी द्वारा बताए गए पाँच महाव्रतों के बारे में लिखिए ।
Answer: महावीर स्वामी ने मोक्ष प्राप्त करने और आत्म-शुद्धि के लिए पाँच महाव्रतों का पालन करने का उपदेश दिया। ये पाँच महाव्रत हैं-
1. जीवों को न मारना: इसका अर्थ है किसी भी प्राणी को मन, वचन या कर्म से कष्ट न पहुँचाना।
2. सच बोलना: हमेशा सत्य बोलना और किसी को झूठ से धोखा न देना।
3. चोरी न करना: दूसरों की वस्तुओं को उनकी अनुमति के बिना न लेना।
4. अनुचित धन न जुटाना: इसका मतलब है कि व्यक्ति को अपनी जरूरत से ज्यादा धन जमा नहीं करना चाहिए और न ही गलत तरीके से धन कमाना चाहिए।
5. इन्द्रियों को वश में रखना: इसका अर्थ है मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना, विशेषकर ब्रह्मचर्य का पालन करना।
ये नियम जैन धर्म के अनुयायियों के लिए नैतिक जीवन जीने का आधार हैं।
In simple words: महावीर स्वामी ने पाँच बड़े नियमों (महाव्रतों) के बारे में बताया: किसी जीव को नुकसान न पहुंचाना, सच बोलना, चोरी न करना, ज्यादा धन इकट्ठा न करना और अपनी इंद्रियों पर काबू रखना।
🎯 Exam Tip: इन महाव्रतों को याद रखने के लिए उनके मूल अर्थों पर ध्यान दें - अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य।
प्रोजेक्ट वर्क -
Answer: यह कार्य विद्यार्थियों को स्वयं करना चाहिए। इस कार्य में छात्रों को अपनी रचनात्मकता और समझ का उपयोग करना होता है।
In simple words: छात्र इस काम को खुद करेंगे।
🎯 Exam Tip: जब कोई प्रोजेक्ट वर्क दिया जाता है, तो उसे गंभीरता से लें और अपनी समझ का उपयोग करके पूरा करें।
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