UP Board Solutions Class 6 Hindi Chapter 9 Bharat Ke Mahan Khagolvid

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UP Board Textbook Solutions for Class 6 Hindi Chapter 9 भारत के महान खगोलविद

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Class 6 Hindi Chapter 9 भारत के महान खगोलविद UP Board Solutions PDF

पाठ का सारांश

भारतीय खगोल विज्ञान में आर्यभट्ट, वराहमिहिर और सवाई जयसिंह जैसे महान लोग प्रमुख थे। इन सभी ने खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण काम किया।

आर्यभट्ट

आर्यभट्ट एक महान गणितज्ञ और खगोल वैज्ञानिक थे। भारत ने उनके नाम पर 19 अप्रैल, 1975 को पहला उपग्रह 'आर्यभट्ट' अंतरिक्ष में भेजा। नालंदा विश्वविद्यालय में बहुत गहरा खगोल ज्ञान सीखने के बाद, आर्यभट्ट ने 'आर्यभट्टीय' नामक संस्कृत ग्रंथ लिखा। यह ग्रंथ इतना प्रभावशाली था कि गुप्त राजा बुद्धदेव ने आर्यभट्ट को नालंदा विश्वविद्यालय का मुख्य अधिकारी बना दिया। आर्यभट्ट ने पता लगाया कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमने से दिन-रात बनते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चंद्रमा सूर्य के प्रकाश से चमकता है और ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। उनका कहना था कि राहु द्वारा सूर्य और चंद्रमा को निगलना एक अंधविश्वास है। उनके ये विचार आज भी सही माने जाते हैं। आर्यभट्ट ने एक और किताब 'आर्यभट्ट सिद्धांत' भी लिखी, जो हर दिन की खगोलीय गणना और शुभ समय बताने में मदद करती है। आज भी पंचांग बनाने में आर्यभट्ट की गणना का उपयोग होता है, जिससे हमें त्योहारों और शुभ मुहूर्तों की जानकारी मिलती है।

वराहमिहिर

वराहमिहिर सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के राज ज्योतिषी थे। बचपन में उनका नाम मिहिर था। मगध राज्य में उन्हें 'वराह का चिह्न' नाम का सबसे बड़ा पुरस्कार मिला, जिसके बाद उनका नाम वराहमिहिर पड़ गया। आर्यभट्ट से प्रभावित होकर उन्होंने ज्योतिष और खगोल विज्ञान को अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बना लिया। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे विद्या और संस्कृति के केंद्र उज्जैन आ गए। सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने उनकी बुद्धिमत्ता से प्रभावित होकर उन्हें अपने नौ रत्नों में शामिल कर लिया। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान, जल विज्ञान और भू-विज्ञान से जुड़े कई खास तथ्य बताए। उन्होंने कहा था कि कोई शक्ति चीजों को जमीन से चिपकाए रखती है। पौधे और दीमक संकेत देते हैं कि जमीन के नीचे पानी है। वराहमिहिर की मुख्य किताबें 'पंच सिद्धांतिका', 'वृहत्संहिता' और 'बृहज्जातक' हैं, जो संस्कृत भाषा में लिखी गई हैं। ज्योतिष के क्षेत्र में वराहमिहिर की किताबें आज भी बहुत खास हैं।

सवाई जयसिंह

राजा जयसिंह को खगोलशास्त्र में बहुत रुचि थी। इसी वजह से वे बाद में एक महान खगोलविद् और गणितज्ञ के रूप में जाने गए। वे सिर्फ तेरह साल की उम्र में आमेर के राजा बन गए थे। 1701 ईस्वी में औरंगजेब ने उन्हें 'सवाई' की उपाधि दी। उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की और खगोलशास्त्र का ज्ञान हासिल किया। उन्होंने अपने दरबार में खगोलविदों की सभाएं कीं। उन्होंने पुर्तगाल, अरब और यूरोप से खगोल विज्ञान से जुड़ी किताबें, नियम और सारणियाँ इकट्ठा कीं। उन्होंने कई किताबों का संस्कृत में अनुवाद भी करवाया, जैसे 'सिद्धांत सूरी कौस्तम', 'तुरूसुरणी' और 'मिथ्या जीव छाया'। सवाई जयसिंह ने यूरोप से दूरबीन मंगवाई और खगोलीय चीजों को देखने के लिए अपनी दूरबीनों का निर्माण भी शुरू करवाया।

1724 ईस्वी में दिल्ली में जंतर-मंतर वेधशाला बनाई गई थी। इसका मकसद लोगों में विज्ञान को लोकप्रिय बनाना था। राजा जयसिंह ने बड़ी-बड़ी ईंटों और चूने की चीजें बनवाकर खगोल विज्ञान में बहुत रिसर्च की। दिल्ली और जयपुर की वेधशालाएँ (जंतर-मंतर) इसके अच्छे उदाहरण हैं। इन वेधशालाओं से ग्रहों और तारों की गति का अध्ययन किया जाता था।

अभ्यास

 

प्रश्न 1. आर्यभट्ट ने गणित में क्या योगदान दिया?
Answer: आर्यभट्ट ने 'आर्यभट्ट सिद्धांत' नामक पुस्तक लिखी। यह किताब हर दिन की खगोलीय गणना और किसी भी शुभ काम के लिए सही समय निकालने में मदद करती है। पंचांग बनाने के लिए आर्यभट्ट की खगोलीय गणना का उपयोग आज भी किया जाता है, जिससे लोगों को महत्वपूर्ण तिथियों की जानकारी मिलती है।
In simple words: आर्यभट्ट ने 'आर्यभट्ट सिद्धांत' नाम की एक किताब लिखी। यह किताब रोज की खगोलीय गणना और शुभ समय जानने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: जब आर्यभट्ट के योगदान के बारे में पूछा जाए, तो उनकी मुख्य पुस्तक और उसके उपयोग का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 2. पृथ्वी के बारे में वराहमिहिर ने कौन-सी प्रमुख टिप्पणियाँ की हैं?
Answer: पृथ्वी के बारे में वराहमिहिर ने बताया था कि कोई शक्ति है जो चीजों को जमीन पर रोके रखती है। इसी विचार के आधार पर बाद में गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत बना। यह बल सभी चीजों को पृथ्वी की ओर खींचता है।
In simple words: वराहमिहिर ने कहा था कि कोई शक्ति चीजों को जमीन पर बनाए रखती है। इसी बात से गुरुत्वाकर्षण का विचार आया।

🎯 Exam Tip: वराहमिहिर की टिप्पणी को गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के शुरुआती विचार के रूप में याद रखना चाहिए।

 

प्रश्न 3. जन्तर-मन्तर क्या है और कहाँ है?
Answer: जंतर-मंतर एक पुरानी वेधशाला है। यह दिल्ली और जयपुर शहरों में स्थित है। इन जगहों पर प्राचीन खगोलीय उपकरण हैं जो तारों और ग्रहों की चाल देखने में मदद करते थे।
In simple words: जंतर-मंतर एक वेधशाला है। यह दिल्ली और जयपुर में मिलती है।

🎯 Exam Tip: जंतर-मंतर के बारे में बताते समय, यह क्या है (वेधशाला) और कहाँ स्थित है (दिल्ली, जयपुर) दोनों बातों का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 4. आर्यभट्ट और वराहमिहिर के दो-दो ग्रंथों के नाम लिखिए।
Answer:
आर्यभट्ट के ग्रंथ हैं: आर्यभट्टीय, आर्यभट्ट सिद्धांत।
वराहमिहिर के ग्रंथ हैं: वृहत्संहिता, वृहज्जातक। इन ग्रंथों में खगोल विज्ञान और ज्योतिष से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है।
In simple words: आर्यभट्ट ने 'आर्यभट्टीय' और 'आर्यभट्ट सिद्धांत' लिखे। वराहमिहिर ने 'वृहत्संहिता' और 'वृहज्जातक' लिखे।

🎯 Exam Tip: जब ग्रंथों के नाम पूछे जाएं, तो उनके लेखकों के साथ सही नाम याद रखना जरूरी है।

 

प्रश्न 5. सही तथ्यों के सामने सही (√) तथा गलत के सामने गलत (X) के निशान लगाइए (निशान लगाकर) –
Answer:
(क) आर्यभट्ट हर बात को वैज्ञानिक आधार पर परखने में विश्वास करते थे। (√)
(ख) दिल्ली की वेधशाला का नाम जन्तर-मन्तर नहीं है। (X)
(ग) दूरबीन से दूर की चीजें देखी जा सकती हैं। (√)
(घ) आर्यभट्ट, पाणिनि, सवाई जयसिंह सभी खगोलविद् हैं। (X)
In simple words: सही और गलत बताएं। आर्यभट्ट विज्ञान मानते थे, दिल्ली की वेधशाला जंतर-मंतर ही है, दूरबीन से दूर की चीजें दिखती हैं, और पाणिनि एक व्याकरणविद् थे, खगोलविद् नहीं।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, हर कथन को ध्यान से पढ़ें और उसकी सच्चाई को दिए गए जानकारी के अनुसार जांचें।

 

प्रश्न 6. किसने कहा -
(क) सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय राहु द्वारा सूर्य या चन्द्रमा को निगल जाने की धारणा अन्धविश्वास है।
(ख) पौधे और दीमक इस बात की ओर इंगित करते हैं कि जमीन के नीचे पानी है।
Answer:
(क) यह बात आर्यभट्ट ने कही थी। वे खगोलीय घटनाओं को वैज्ञानिक नजरिए से देखते थे।
(ख) यह बात वराहमिहिर ने कही थी। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान पर कई महत्वपूर्ण खोजें की थीं।
In simple words: सूर्यग्रहण-चंद्रग्रहण अंधविश्वास है, यह बात आर्यभट्ट ने कही थी। पौधे और दीमक से जमीन में पानी का पता चलता है, यह वराहमिहिर ने बताया था।

🎯 Exam Tip: किसी भी कथन को सही व्यक्ति से जोड़ना महत्वपूर्ण है। इसके लिए आपको हर खगोलविद् के मुख्य योगदानों को याद रखना चाहिए।

 

प्रश्न 7. अपने शिक्षक/शिक्षिका से चर्चा कीजिए –
(क) जंतर-मंतर क्या है और कहाँ स्थित है ?
(ख) वेधशाला किसे कहते हैं? हमारे देश में कहाँ-कहाँ वेधशालाएँ हैं?
(ग) आकाशगंगा किसे कहते हैं?
Answer: इन प्रश्नों पर छात्रों को अपने शिक्षक या शिक्षिका के साथ मिलकर चर्चा करनी चाहिए। इससे उन्हें विषय की गहरी समझ मिलेगी और वे अपने ज्ञान को बढ़ा पाएंगे।
In simple words: इन सवालों पर बच्चों को अपने टीचर से बात करनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: चर्चा वाले प्रश्नों का उत्तर देने के लिए, पहले विषय से जुड़ी सभी जानकारी इकट्ठी करें और फिर अपने विचारों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

Hindi Class 6 Curriculum Solutions: Chapter 9 भारत के महान खगोलविद

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