Step-by-Step Textbook Solutions for Class 6 Hindi Chapter 37 पंडित दीनदयाल उपाध्याय
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पाठ का सारांश
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर, 1916 को राजस्थान के जयपुर जिले के धनकिया गांव में हुआ था। जब वे ढाई साल के थे, उनके पिता भगवती प्रसाद का देहांत हो गया। सात साल की उम्र में उनकी माता रामप्यारी देवी का भी निधन हो गया। उन्होंने अपनी ननिहाल में रहकर अपनी शुरुआती और माध्यमिक पढ़ाई पूरी की। उन्होंने कानपुर के सनातन धर्म कॉलेज से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। आगरा के सेंट जॉन कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. करते समय वे नाना जी देशमुख से मिले। अपनी बीमार ममेरी बहन की सेवा करने के कारण पंडित दीनदयाल एम.ए. की अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। पंडित दीनदयाल समाज के लिए कुछ खास करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने नौकरी का विचार छोड़ दिया। उन्होंने समाज सेवा का सपना देखा और भाऊराव देवरस के पास गए, फिर खुद को जीवन भर समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय को एक बहादुर पत्रकार, तेज लेखक और गहरे विचारक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। 1947 में श्री भाऊराव देवरस की प्रेरणा से उन्होंने 'राष्ट्रधर्म' नाम की पत्रिका शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने 'पांचजन्य' और दैनिक 'स्वदेश' का प्रकाशन भी शुरू किया। उन्होंने 'सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य' और 'जगत गुरु शंकराचार्य' जैसे प्रसिद्ध उपन्यास भी लिखे। उनकी सबसे महत्वपूर्ण रचना 'अखण्ड भारत क्यों' है।
उनका मानना था कि समाज में छुआछूत और भेदभाव देश की एकता के लिए बहुत हानिकारक हैं। वे स्वदेशी चीजों का समर्थन करते थे। एक बार उन्होंने कहा था- "हम विश्व के ज्ञान और आज तक की पूरी परंपरा के आधार पर एक ऐसा भारत बनाएंगे, जो हमारे पूर्वजों के भारत से भी ज्यादा गौरवशाली होगा।" हम सभी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे ऊर्जावान, मेहनती और सफल महापुरुष के सपनों का भारत बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
अभ्यास
प्रश्न 1. पंडित दीनदयाल उपाध्याय को बचपन में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
Answer: पंडित दीनदयाल उपाध्याय जब ढाई साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। उनके पिता रेलवे कर्मचारी थे। पिता की मृत्यु के बाद, उनकी माँ उन्हें लेकर पिता के पैतृक गांव चली गईं। जब वे सात साल के हुए, तब उनकी माता का भी निधन हो गया। इस तरह उनका बचपन अपने ननिहाल में बीता। इतनी छोटी उम्र में ही उन्होंने कई बड़ी कठिनाइयों का सामना किया था, जिससे उनका जीवन संघर्षपूर्ण रहा।
In simple words: पंडित दीनदयाल उपाध्याय के पिता का निधन ढाई साल की उम्र में हो गया और सात साल की उम्र में उनकी माँ का भी देहांत हो गया। इसलिए उनका बचपन बहुत मुश्किलों भरा रहा।
🎯 Exam Tip: बचपन की कठिनाइयों को बताते हुए उनकी उम्र और माता-पिता के निधन के समय का उल्लेख करें।
प्रश्न 2. बालक दीनदयाल ने किस प्रसंग पर यह कहा था कि मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए?
Answer: दीनदयाल जी ने पिलानी के बिरला कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पहली श्रेणी में पास की थी। इसके बाद वे समाजसेवक और उद्योगपति घनश्याम दास बिरला से मिलने गए। बिरला जी ने उन्हें पुरस्कार के रूप में एक स्वर्ण पदक और दो सौ पचास रुपये दिए, फिर उनसे पूछा कि "तुम्हें क्या चाहिए बेटा?" इसी प्रसंग पर दीनदयाल जी ने कहा था कि "मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए।" उनके लिए आशीर्वाद किसी भी भौतिक इनाम से अधिक मूल्यवान था।
In simple words: जब घनश्याम दास बिरला ने उन्हें पुरस्कार देकर पूछा कि उन्हें क्या चाहिए, तब दीनदयाल जी ने कहा कि उन्हें उनका आशीर्वाद चाहिए।
🎯 Exam Tip: घटना का वर्णन करते हुए बताएं कि किसने पुरस्कार दिया और दीनदयाल जी ने उसके जवाब में क्या कहा।
प्रश्न 3. पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कौन-कौन सी पुस्तकों की रचना की?
Answer: पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने 'सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य', 'जगत गुरु शंकराचार्य' और 'अखंड भारत क्यों' जैसी पुस्तकों की रचना की। ये पुस्तकें उनके गहन चिंतन और भारत के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
In simple words: उन्होंने 'सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य', 'जगत गुरु शंकराचार्य' और 'अखंड भारत क्यों' जैसी किताबें लिखीं।
🎯 Exam Tip: उनकी सभी प्रमुख साहित्यिक रचनाओं के नाम सही-सही याद रखें।
प्रश्न 4. राष्ट्रधर्म प्रकाशन से प्रकाशित होने वाली पत्र-पत्रिकाओं का नाम बताइए।
Answer: राष्ट्रधर्म प्रकाशन से 'राष्ट्रधर्म' और 'पांचजन्य' पत्रिकाएं, 'दैनिक स्वदेश' अखबार, तथा 'सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य', 'जगत गुरु शंकराचार्य' उपन्यास और 'अखंड भारत क्यों' जैसी पुस्तकें प्रकाशित होती थीं। यह प्रकाशन राष्ट्रीय विचारों को फैलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम था।
In simple words: राष्ट्रधर्म प्रकाशन 'राष्ट्रधर्म', 'पांचजन्य', 'दैनिक स्वदेश', और कुछ प्रसिद्ध किताबें जैसे 'सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य' और 'अखंड भारत क्यों' छापता था।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रधर्म प्रकाशन द्वारा प्रकाशित सभी पत्रिकाओं, समाचार पत्रों और किताबों के नामों की सूची बनाएं।
प्रश्न 5. पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चरित्र की किसी एक विशेषता के बारे में लिखिए?
Answer: पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक बार वाराणसी से बलिया जा रहे थे। तृतीय श्रेणी के डिब्बे में इतनी भीड़ थी कि तिल रखने की भी जगह नहीं थी। कार्यकर्ताओं ने उनका बिस्तर प्रथम श्रेणी में लगा दिया। बलिया पहुंचने पर उन्होंने अपनी सादगी और ईमानदारी दिखाते हुए दोनों श्रेणियों के किराये का अंतर स्टेशन मास्टर के पास जमा करा दिया। यह उनकी ईमानदारी और सिद्धांतों के प्रति निष्ठा को दर्शाता है।
In simple words: एक बार जब उनके लिए गलत तरीके से प्रथम श्रेणी में यात्रा का इंतजाम किया गया, तो उन्होंने अंतर का किराया अपनी तरफ से चुकाया, जो उनकी ईमानदारी दिखाता है।
🎯 Exam Tip: इस घटना को याद रखें जो उनकी ईमानदारी और आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर करती है।
प्रश्न 6. 'एकात्म मानववाद से राष्ट्र की उन्नति कैसे होगी? स्पष्ट कीजिए।
Answer: पंडित दीनदयाल उपाध्याय 'एकात्म मानववाद' के जनक थे। एकात्म मानववाद का अर्थ है कि सभी मनुष्यों के लिए एक ही धर्म, यानी मानव धर्म हो, जिसमें कोई भेदभाव न हो। यदि समाज के हर व्यक्ति को समान साधन, समान अवसर और समान स्वतंत्रता मिले, तो भारत तेजी से उन्नति करेगा और राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी।
In simple words: एकात्म मानववाद का मतलब है कि सभी इंसान एक समान हैं और उनमें कोई भेदभाव न हो। जब सबको बराबर मौके और आजादी मिलेगी, तभी देश आगे बढ़ेगा।
🎯 Exam Tip: 'एकात्म मानववाद' की परिभाषा और उसके सिद्धांतों को राष्ट्र की प्रगति से जोड़कर समझाएं।
प्रश्न 7. राष्ट्रधर्म पत्रिका का प्रकाशन किसकी प्रेरणा से दीनदयाल जी ने किया था?
Answer: राष्ट्रधर्म पत्रिका का प्रकाशन दीनदयाल जी ने भाऊराव देवरस की प्रेरणा से शुरू किया था। भाऊराव देवरस उस समय के एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने दीनदयाल जी को राष्ट्रीय विचारों के प्रसार के लिए प्रेरित किया।
In simple words: दीनदयाल जी ने भाऊराव देवरस की प्रेरणा से राष्ट्रधर्म पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया था।
🎯 Exam Tip: प्रेरणा देने वाले व्यक्ति का नाम और उसके महत्व को याद रखें।
प्रश्न 8. पंडित दीनदयाल के अनुसार राष्ट्रीयता का आधार क्या है?
Answer: पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीयता का आधार भारत माता को मानते थे। उनके लिए भारत सिर्फ एक भूमि का टुकड़ा नहीं था, बल्कि एक जीवित देवी थी जिससे सभी नागरिक जुड़े हुए थे।
In simple words: पंडित दीनदयाल का मानना था कि भारत माता ही राष्ट्रीयता का असली आधार हैं।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीयता के आधार पर दीनदयाल जी के विचार को स्पष्ट रूप से बताएं।
प्रश्न 9. पंडित दीनदयाल जी के अनुसार 'एकात्म मानववाद' क्या है?
Answer: पंडित दीनदयाल जी के अनुसार एकात्म मानववाद का अर्थ है ऐसी व्यवस्था बनाना जहां विविध संस्कृतियां विकसित हों और एक ऐसा मानव धर्म बने, जिसमें समाज के हर व्यक्ति को समान अवसर, समय और स्वतंत्रता मिले। यह व्यक्ति और समाज के बीच संतुलन स्थापित करने का एक तरीका है।
In simple words: 'एकात्म मानववाद' एक ऐसा विचार है जहाँ सभी संस्कृतियों को बढ़ने दिया जाता है और हर व्यक्ति को समाज में बराबर के मौके और आजादी मिलती है।
🎯 Exam Tip: एकात्म मानववाद की विस्तृत परिभाषा को याद रखें, जिसमें सांस्कृतिक विकास और समान अधिकारों पर जोर दिया गया हो।
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Hindi Class 6 Curriculum Solutions: Chapter 37 पंडित दीनदयाल उपाध्याय
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