UP Board Solutions Class 6 Hindi Chapter 19 Shershah Suri

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Class 6 Hindi Chapter 19 शेरशाह सूरी UP Board Solutions PDF

पाठ का सारांश

शेरशाह सूरी के बचपन का नाम फरीद था। इसके पिता हसन खाँ सहसराम के जागीरदार थे। फरीद अपनी सौतेली माँ के व्यवहार से दुखी रहता था। ये सहसराम छोड़कर जौनपूर रहने लगा। वहाँ इसने अरबी, फारसी, इतिहास और दर्शन का अध्ययन किया। बाद में हसन खाँ फरीद को सहसराम ले गए और उसे जागीर की व्यवस्था सौंप दी। फरीद ने बहुत कुशलता से जागीर को प्रबन्ध किया। जागीर की देख-भाल करते समय फरीद को प्रशासन का अत्यधिक अनुभव प्राप्त हुआ। आगे चलकर यह सफल शासक बना। सौतेली माँ ने फिर पिता-पुत्र में संघर्ष करा दिया। फरीद ने भरे मन से फिर सहसराम छोड़ दिया। शिकार के समय फरीद ने एक शेर से बिहार के, सुल्तान की रक्षा की। इससे प्रसन्न होकर सुल्तान ने उसे शेरखाँ की उपाधि दी।

शेरखाँ का कहना था कि मैं मुगलों को निकाल दूंगा। बाबर शेरखाँ की प्रतिभा से सतर्क हो गया। आगे चलकर शेरखाँ शेरशाह सूरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसने एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया। शेरशाह चरित्रवान था। वह अच्छा सेनापति था। साम्राज्य की सुरक्षा के लिए इसने ऐसी सेना तैयार की, जिसमें उत्तम चरित्र के आधार पर सीधी भर्ती होती थी।

शेरशाह नीति कुशल शासक था। वह न्यायप्रिय भी था। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसने कड़े आदेश दिए थे। चोरी होने पर गाँव का मुखिया या जमींदार उत्तरदायी होता था। सजा के डर से अपराध नहीं होते थे तथा प्रजा पूर्णतः सुरक्षित थी। शेरशाह ने व्यापार की उन्नति के लिए सड़कें बनवाईं तथा सड़कों के किनारे छायादार वृक्ष लगवाए । सरायों में सुरक्षा का विशेष प्रबन्ध था। ग्रैंड ट्रंक रोड शेरशाह सूरी ने ही बनवाई थी। यह अपनी सड़कों को साम्राज्य की धमनियाँ कहता था। इससे व्यापार में सहायता मिलती थी।

रुपये के सिक्के सर्वप्रथम शेरशाह ने ही ढलवाए। खोटे और मिली-जुली धातु के सिक्कों का चलन बन्द कर दिया गया। शेरशाह ने पाँच वर्ष तक शासन किया। कालिंजर की विजय के समय तोप के गोले से घायल हो जाने से सन 1545 ई० में इसकी मृत्यु हो गई।

अभ्यास

 

Question 1. फरीद एक साधारण व्यक्ति से सम्राट किस प्रकार बना?
Answer: फरीद ने अपने पिता की जागीर का काम संभाला और अपनी योग्यता दिखाई। इस तरह उसे शासन चलाने का बहुत अनुभव मिला। बाद में उसने बिहार के सुल्तान की नौकरी की। एक बार शिकार के समय उसने सुल्तान को एक शेर से बचाया। सुल्तान बहुत खुश हुए और उन्होंने फरीद को 'शेरखाँ' की उपाधि दी। बाद में शेरखाँ ने मुगल बादशाह बाबर के यहाँ भी काम किया, लेकिन वह मुगलों को भारत से हटाना चाहता था। अपनी तेज बुद्धि और बहादुरी से शेरखाँ ने शेरशाह सूरी के नाम से एक बड़ा साम्राज्य बनाया और दिल्ली का सम्राट बन गया। उसकी रणनीतिक समझ और सैन्य कौशल ने उसे एक सामान्य व्यक्ति से सम्राट बनने में मदद की।
In simple words: फरीद ने जागीर का काम कुशलता से संभाला और सुल्तान को शेर से बचाकर 'शेरखाँ' की उपाधि पाई। उसने मुगलों को हटाने की कसम खाई और अपनी बुद्धि से एक बड़ा साम्राज्य बनाकर दिल्ली का सम्राट बन गया।

🎯 Exam Tip: यह समझाने के लिए कि कोई व्यक्ति साधारण से असाधारण कैसे बना, उनके प्रमुख कार्यों और गुणों को क्रम से बताएँ, खासकर उन घटनाओं को जिनसे उन्हें पहचान मिली।

 

Question 2. शेरशाह ने कौन-कौन से कार्य किए?
Answer: शेरशाह ने अपने 5 साल के शासन काल में कई महत्वपूर्ण काम किए:
1. **व्यापार में सुधार:** उसने व्यापार को अच्छा बनाया। आने-जाने के रास्ते सुधारे और सड़कें बनवाईं। सड़कों के दोनों ओर पेड़ लगवाए और थोड़ी-थोड़ी दूरी पर सराय (आराम करने की जगह) और कुएँ बनवाए। उसने ग्रैंड ट्रंक रोड भी बनवाया, जिसे अब शेरशाह सूरी मार्ग कहते हैं। यह सड़क आज भी देश के महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है।
2. **भूमि का माप:** उसने जमीन की नाप करवाई और लगान तय किया।
3. **नए सिक्के:** सबसे पहले शेरशाह ने ही रुपये के सिक्के चलवाए। उसने खराब और मिली-जुली धातुओं के सिक्कों को बंद करके सोने, चाँदी और ताँबे के शुद्ध सिक्के बनवाए।
4. **माप-तौल में सुधार:** उसके राज में बाट और माप की प्रणाली को बेहतर बनाया गया।
5. **नया शहर:** उसने दिल्ली के पास यमुना नदी के किनारे एक नया शहर बसाया।
In simple words: शेरशाह ने व्यापार के लिए सड़कें बनवाईं और व्यापार बढ़ाया। उसने जमीन मापी और नए सिक्के चलवाए। उसने माप-तौल की व्यवस्था सुधारी और दिल्ली के पास एक नया शहर भी बसाया।

🎯 Exam Tip: जब कार्यों की सूची पूछी जाए, तो प्रत्येक कार्य को स्पष्ट और अलग बिंदु में लिखें ताकि सभी उपलब्धियों को आसानी से दिखाया जा सके।

 

Question 3. शेरशाह ने व्यापार को किस प्रकार उन्नत किया?
Answer: शेरशाह ने व्यापार को बढ़ाने के लिए आवागमन के साधनों को सुधारा। उसने बहुत सी नई सड़कें बनवाईं। वह अपनी इन सड़कों को अपने साम्राज्य की 'धमनियाँ' कहता था, क्योंकि इनसे व्यापार करने में बहुत मदद मिलती थी। उसने सोने, चाँदी और ताँबे के सिक्के भी चलवाए, जिससे व्यापार में लेनदेन आसान हो गया। उसके शासन काल में बाट और माप की प्रणाली में भी सुधार किया गया, जिससे खरीद-बिक्री में ईमानदारी बढ़ी। इन सभी कामों से शेरशाह ने व्यापार को बहुत आगे बढ़ाया।
In simple words: शेरशाह ने अच्छी सड़कें बनवाईं और व्यापार के लिए नए सिक्के चलवाए। उसने माप-तौल की व्यवस्था भी सुधारी, जिससे व्यापार बहुत बढ़ा।

🎯 Exam Tip: व्यापार की उन्नति के कारण बताते समय परिवहन, मुद्रा और माप-तौल प्रणालियों में किए गए सुधारों पर ध्यान दें।

 

Question 4. शेरशाह एक नीति-कुशल शासक थे, स्पष्ट कीजिए ।
Answer: शेरशाह एक बहुत ही नीति-कुशल शासक थे क्योंकि उन्होंने हमेशा अपनी प्रजा के भले का ध्यान रखा। उसने सरकारी कर्मचारियों और जमींदारों पर कड़ा अनुशासन लागू किया। उसने रिश्वत लेने वाले अधिकारियों को हटाया और न्याय को अपने शासन का आधार बनाया। वह जनता से बहुत अच्छा व्यवहार करते थे। उसके आदेशों का पालन न करने वालों को कड़ी सजा मिलती थी, जिससे कानून का राज स्थापित हुआ। प्रजा उनकी बहुत प्रशंसा करती थी और उनसे बहुत प्रेम करती थी। शेरशाह न्यायप्रिय थे और सभी धर्मों का सम्मान करते थे। उसने यात्रियों की सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया था। अगर कहीं चोरी हो जाती थी, तो गाँव का मुखिया या जमींदार जिम्मेदार होता था। यदि वे चोर को नहीं पकड़ पाते, तो उन्हें खुद सजा भुगतनी पड़ती थी। रास्ते में अगर किसी की हत्या हो जाती, तो मुखिया या जमींदार को ही जिम्मेदार ठहराया जाता था। इन सब कारणों से शेरशाह को एक नीति-कुशल शासक माना जाता है। उसकी प्रशासनिक व्यवस्था बहुत मजबूत और प्रभावी थी।
In simple words: शेरशाह ने प्रजा के हित में शासन किया। उसने भ्रष्टाचार हटाया और न्याय को महत्व दिया। यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान दिया और चोर पकड़े न जाने पर मुखिया को जिम्मेदार ठहराया। इसलिए वह एक कुशल शासक थे।

🎯 Exam Tip: नीति-कुशल शासक को स्पष्ट करने के लिए न्याय व्यवस्था, प्रजा-हितैषी नीतियों, और कानून-व्यवस्था के उदाहरणों का प्रयोग करें।

 

Question 5. शेरशाह में कौन-कौन-से गुण थे?
Answer: शेरशाह में निम्नलिखित मुख्य गुण थे:
1. वह बहुत चरित्रवान और एक कुशल सेनापति था। उसका नैतिक चरित्र बहुत ऊंचा था और वह अपनी सेना का बखूबी नेतृत्व करता था।
2. वह नीति-कुशल शासक था, जिसने अपने शासन को न्याय और प्रजा के कल्याण पर आधारित किया।
3. वह न्यायप्रिय शासक था और सभी धर्मों का सम्मान करता था। उसने किसी भी धर्म के प्रति भेदभाव नहीं किया।
4. उसने राज्य के अधिकारियों को आदेश दे रखे थे कि वे यात्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करें और उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।
5. उसने आवागमन के साधनों को सुधारा, सड़कें बनवाईं और उनके दोनों ओर छायादार पेड़ लगवाए ताकि यात्रियों को सुविधा हो।
6. शेरशाह में अद्भुत क्षमता थी; वह हमेशा अपने लक्ष्य पर ध्यान रखता था और उसे प्राप्त करने के लिए जी-जान से मेहनत करता था।
7. वह समय का सही उपयोग करता था और बहुत कठोर परिश्रम करता था। प्रजा की स्थिति जानने के लिए वह देश का दौरा भी करता था, जिससे उसे जमीनी हकीकत का पता चलता रहता था।
In simple words: शेरशाह एक चरित्रवान, कुशल सेनापति, न्यायप्रिय और नीति-कुशल शासक था। वह सभी धर्मों का सम्मान करता था, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता था, सड़कों में सुधार किया, और हमेशा अपने लक्ष्य पर ध्यान देते हुए कठोर परिश्रम करता था।

🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के गुणों को बताते समय, उनके विभिन्न पहलुओं जैसे नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक कौशल, व्यक्तिगत चरित्र और सामाजिक नीतियों को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।

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