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कम्प्यूटर का इतिहास

बच्चो, अभी तक आप कम्प्यूटर की उपयोगिता, प्रयोग क्षेत्र और उसके प्रमुख भागों के साथ-साथ यह तो जान ही गए हैं कि कम्प्यूटर की कक्षा में क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए। अब आप इस अध्याय में कम्प्यूटर के विकास तथा इसमें किन प्रमुख लोगों का योगदान रहा है, इसके बारे में जानेंगे।

पहला कम्प्यूटर: अबाकस

बच्चो, प्राचीन काल में लोग गणना करने के लिए कंकड़ों और पत्थरों का प्रयोग करते थे। जब इस तरह से गणना का कार्य कठिन लगने लगा तो उन्होंने अबाकस नामक एक उपकरण का आविष्कार किया। इस उपकरण को आज से लगभग दो हज़ार वर्ष पहले चीन में बनाया गया था। चित्र में आप इसे देख सकते हैं। यह उपकरण एक लकड़ी के फ्रेम का बना था, जिसमें कई छड़ें थीं। ये छड़ें एक समानान्तर छड़ से दो असमान भागों में बँटी होती थीं। लम्बवत छड़ों के ऊपरी भाग में दो गोलियाँ और निचले भाग में पाँच गोलियाँ होती थीं। ऊपर की एक गोली को पाँच इकाइयों के बराबर माना जाता था और नीचे की एक गोली को एक इकाई के। इन गोलियों को कुछ निश्चित नियमों के साथ प्रयोग करके गणना का कार्य किया जाता था, जिससे गणितीय समस्याओं का समाधान आसानी से हो जाता था।

कम्प्यूटर के जनक: चार्ल्स बैवेज़

चार्ल्स बैवेज़ एक अंग्रेज गणितज्ञ थे। सबसे पहले इन्होंने कम्प्यूटर जैसी किसी मशीन की परिकल्पना की थी। इसी वजह से इन्हें कम्प्यूटर का जनक कहा जाता है। सन् 1823 में इन्होंने एक ऐसी मशीन का आविष्कार किया जो तेजी से गणना करने में सक्षम थी। इस मशीन को डिफरेन्स इंजिन का नाम दिया गया। यह मशीन वर्तमान समय के कम्प्यूटर से काफी मिलती-जुलती थी।

कम्प्यूटर परिचय

कम्प्यूटर परिचय बच्चो, पिछले अध्याय में आपने पढ़ा कि प्राचीन काल में मनुष्य गिनने के लिए और हिसाब-किताब रखने के लिए कंकड़ों और पत्थरों का प्रयोग करता था। इसके बाद उसने अबाकस नामक एक उपकरण बनाया जो चीन में दो हजार साल पहले बना था। सन् 1823 में एक अंग्रेज गणितज्ञ, जिनका नाम चार्ल्स बैवेज़ था, उन्होंने डिफरेन्श इंजिन नामक एक मशीन बनायी, जो हमारे आज के कम्प्यूटर से काफी मिलती-जुलती थी। इसलिए चार्ल्स बैवेज़ को कम्प्यूटर का जनक कहा गया। आइए इस अध्याय में कम्प्यूटर के बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करें।

कम्प्यूटर क्या है?

कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसके द्वारा सभी तरह की गणितीय और तार्किक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। हम कम्प्यूटर से गणित के सवाल हल कर सकते हैं, चित्र बना सकते हैं, गेम खेल सकते हैं, पत्र लिखकर उन्हें प्रिंट कर सकते हैं, कार्ड बना सकते हैं और इसी तरह से अनेक कार्य कर सकते हैं।

कम्प्यूटर बहुत ही तेजी व शुद्धता से कार्य करने वाली मशीन है। कम्प्यूटर की कार्य करने की गति हमसे बहुत तेज होती है। यदि हम किसी सवाल को एक मिनट में हल करते हैं तो कम्प्यूटर इस कार्य को एक सेकंड के हजारवें हिस्से में कर देगा। कम्प्यूटर की एक विशेषता यह भी है कि यह हमेशा सही उत्तर देता है।

कम्प्यूटर और हम

कम्प्यूटर एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जिसका निर्माण मनुष्य ने किया है। इसलिए हम यह कह सकते हैं कि मनुष्य का दिमाग ही कम्प्यूटर का मालिक है। कम्प्यूटर मनुष्य के द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य करता है और इसमें खुद की सोचने व समझने की शक्ति नहीं होती है।

कम्प्यूटर का प्रयोग क्यों?

कम्प्यूटर हमारे ऊपर पूरी तरह से निर्भर होते हैं, फिर भी हम इनका प्रयोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में करते हैं। इसके निम्न कारण हैं -

  • कम्प्यूटर की मेमोरी बहुत बड़ी होती है।
  • कम्प्यूटर कभी भी थकते नहीं हैं।
  • कम्प्यूटर बहुत तेजी से कार्य कर सकते हैं।
  • कम्प्यूटर हमेशा सही परिणाम देते हैं।
  • कम्प्यूटर बहुत बड़ी मात्रा में डेटा स्टोर कर सकते हैं।

कम्प्यूटर की सीमाएँ

जहाँ एक ओर कम्प्यूटर के बहुत से फायदे हैं, वहीं दूसरी ओर इसकी कार्य संबंधी कुछ सीमाएँ भी हैं। आइए जानें कि ये सीमाएँ क्या हैं –

  • कम्प्यूटर खुद कोई कार्य नहीं कर सकता है।
  • कम्प्यूटर में मेमोरी तो होती है, लेकिन सोचने वाला दिमाग नहीं होता है।
  • कम्प्यूटर बुद्धिमान नहीं होता है।
  • कम्प्यूटर कारणों की व्याख्या नहीं कर सकता है।
  • कम्प्यूटर हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों का ही पालन कर सकता है।

कम्प्यूटर के मुख्य भाग

बच्चो, पिछले अध्याय में आपने कम्प्यूटर की विशेषताओं और सीमाओं के बारे में पढ़ा। इस अध्याय में आइए अब यह जानकारी प्राप्त करते हैं कि कम्प्यूटर के मुख्य भाग कौन-कौन से होते हैं।

कम्प्यूटर में क्या-क्या?

बच्चो, जिस तरह से हमारे शरीर में अलग-अलग कार्यों को करने के लिए अलग-अलग भाग होते हैं, ठीक उसी तरह से कम्प्यूटर में भी अलग-अलग कार्यों को करने के लिए अलग-अलग भाग होते हैं। इन भागों को हम दो वर्गों में बाँट सकते हैं। पहले वर्ग में इसके अनिवार्य भाग होते हैं।

कम्प्यूटर के अनिवार्य भाग:-

बच्चो, कम्प्यूटर के तीन अनिवार्य भाग होते हैं। ये भाग निम्न हैं – की-बोर्ड, सीपीयू, मॉनीटर। ये तीनों भाग जुड़कर एक कम्प्यूटर का निर्माण करते हैं।

की-बोर्ड

कम्प्यूटर का की-बोर्ड कम्प्यूटर का पहला अनिवार्य भाग है। देखने में यह टाइपराइटर की तरह ही होता है। इसके द्वारा टाइप करके डेटा और निर्देशों को कम्प्यूटर के सीपीयू में भेजते हैं, इसीलिए इसे इनपुट डिवाइस भी कहते हैं। टाइप करने के लिए जिन बटनों को दबाया जाता है, उन्हें कीज़ कहते हैं। की-बोर्ड को कम्प्यूटर के सीपीयू से जोड़ा जाता है। आजकल जिस तरह के की-बोर्ड प्रयोग किए जा रहे हैं, उनमें 104 से लेकर 124 तक कीज़ हो सकते हैं।

कम्प्यूटर का सीपीयू

यह कम्प्यूटर का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग होता है। इसका पूरा नाम सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट है। इसे आप कम्प्यूटर का दिमाग भी कह सकते हैं। सभी तरह की गणनाओं और तार्किक कार्यों को पूरा करने का काम सीपीयू द्वारा ही सम्पन्न होता है। वर्तमान समय में इसके दो रूप हैं। इन्हें आप निम्न चित्र में देख सकते हैं –

कम्प्यूटर का मॉनीटर

यह एक मॉनीटर है। मॉनीटर देखने में टेलीविजन की तरह ही दिखाई देता है। मॉनीटर के जिस भाग पर हमें चित्र या अक्षर दिखाई देते हैं, उसे स्क्रीन कहते हैं। तकनीकी भाषा में इसे सीआरटी कहा जाता है। इसका पूरा नाम है केथोड रे ट्यूब। की-बोर्ड के द्वारा जो भी टाइप किया जाता है, वह मॉनीटर पर ही दिखाई देता है। काम पूरा होने पर हमें परिणाम भी मॉनीटर पर ही दिखाई देते हैं, इसलिए इसे आउट पुट डिवाइस कहा जाता है।

कम्प्यूटर का माउस

माउस भी कम्प्यूटर की इनपुट डिवाइस है। इसके ऊपर दो या तीन बटनें होती हैं और यह एक तार के द्वारा सीपीयू से जुड़ा रहता है। (आजकल बिना तार के माउस भी आ गए हैं।) माउस को एक चौकोर पैड पर रखा जाता है, इसे माउस पैड कहते हैं। जब आप माउस पैड पर माउस को घुमाएँगे तो एक तीर के निशान की तरह का संकेतक (प्वाइन्टर) मॉनीटर पर हिलता हुआ दिखाई देगा। इसे आम बोलचाल की भाषा में माउस प्वाइन्टर कहा जाता है। माउस के द्वारा कम्प्यूटर को निर्देश देने का काम भी किया जाता है, इसीलिए यह भी एक इनपुट डिवाइस है। की-बोर्ड, मॉनीटर, सीपीयू और माउस को जोड़कर सम्पूर्ण पीसी अर्थात् पर्सनल कम्प्यूटर बनता है। वर्तमान समय में माउस भी एक महत्त्वपूर्ण इनपुट डिवाइस है। विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम में इसके बिना काम करना बहुत ही मुश्किल है। तो यह तो थे आज के कम्प्यूटर के अनिवार्य भाग। आइए अब एक नजर कम्प्यूटर के सहायक उपकरणों पर डालें।

प्रिंटर

प्रिंटर कम्प्यूटर का एक प्रमुख उपकरण है। इसके द्वारा आप कम्प्यूटर में स्टोर सूचनाओं (डेटा) को कागज पर प्रिंट कर सकते हैं। इस समय कई तरह के प्रिंटर प्रयोग किए जा रहे हैं। इनमें डॉट मैट्रिक्स, इंकजेट और लेज़र प्रिंटर प्रमुख हैं। सामान्य प्रिंटर देखने में इस तरह से दिखाई देता है – चित्र में जो प्रिंटर दिखाई दे रहा है, वह डॉट मैट्रिक्स है। चूंकि प्रिंटर कम्प्यूटर में स्टोर सूचनाओं को कागज पर प्रिंट करता है, इसलिए इसे आउटपुट डिवाइस या आउटपुट उपकरण भी कहते हैं।

फ्लॉपी डिस्क

फ्लॉपी डिस्क कम्प्यूटर में डेटा स्टोर करने का माध्यम है। कम्प्यूटर में स्टोर या उपलब्ध सूचनाओं को फ्लॉपी में भी कॉपी कर सकते हैं। इस समय सामान्य तौर पर जिस फ्लॉपी का प्रयोग किया जा रहा है, वह आकार में 3.5 इंच की होती है और यह वर्गाकार होती है। चित्र में आप इसे देख सकते हैं। आप फ्लॉपी में कम्प्यूटर का डेटा स्टोर कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर फ्लॉपी में स्टोर डेटा वापस कम्प्यूटर में ले जा सकते हैं। डेटा स्टोर करने की वजह से इसे स्टोरेज़ डिवाइस कहा जाता है।

सीडी अर्थात् कॉम्पैक्ट डिस्क

सीडी का प्रयोग वर्तमान समय में प्रमुख स्टोरेज डिवाइस के तौर पर किया जा रहा है। चित्र में आप इसे देख सकते हैं। सीडी का डेटा स्टोर करने की क्षमता फ्लापी से कई सौ गुना ज्यादा होती है। इसमें आप संगीत, फिल्म और फोटो जैसा डेटा भी स्टोर कर सकते हैं।

कम्प्यूटर की कार्य प्रणाली

अभी आपने कम्प्यूटर के अनिवार्य और सहायक उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त की। कम्प्यूटर के अनिवार्य अंग आपस में जुड़कर एक सम्पूर्ण पीसी अर्थात् पर्सनल कम्प्यूटर का निर्माण करते हैं। जबकि सहायक उपकरण प्रिंटिंग करने और डेटा स्टोर करने जैसे कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। आइए, अब आगे यह समझते हैं कि कम्प्यूटर काम कैसे करता है।

कैसे काम करता है कम्प्यूटर?

कम्प्यूटर के तीन प्रमुख अंगों को इनपुट डिवाइस (की-बोर्ड), प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू) और आउटपुट डिवाइस (मॉनीटर) के नाम से जाना जाता है। अर्थात् इनपुट डिवाइस सूचनाओं को कम्प्यूटर के अन्दर भेजती है। प्रोसेसिंग यूनिट इन्हें प्रोसेस करती है जबकि आउटपुट यूनिट हमें परिणाम दर्शाती है। आइए इसे एक और उदाहरण के द्वारा समझें।

यदि आप सन्तरे का रस (जूस) निकालना चाहते हैं तो आपको जूसर नामक उपकरण में सन्तरे डालने होंगे। इस क्रिया में सन्तरे जूसर में इनपुट हो रहे हैं। इसके पश्चात यह जूसर-मिक्सर प्रोसेसिंग करके इनका रस निकालेगा। इसे आप ग्लास या किसी तरह के किसी दूसरे बर्तन में इकट्ठा करेंगे। यहाँ पर आउटपुट को हमने ग्लास में एकत्रित किया। अर्थात इस क्रिया में इनपुट, प्रोसेसिंग और आउटपुट जैसे तीनों कार्य सम्पन्न हुए। इस कार्य प्रणाली को आप नीचे बने रेखा चित्र से समझ सकते हैं -

इसी तरह से जब आपको अपने घर के फ्रिज का प्रयोग करके बर्फ जमानी होती है तो आप ट्रे में पानी लेकर फ्रीज़र प्रोसेसिंग करके बर्फ जमा लेते हैं, जिसे हम ट्रे से निकालकर एक बड़ी ट्रे में स्टोर कर देते हैं। यहाँ पर भी इनपुट, प्रोसेसिंग और आउटपुट जैसे तीनों कार्य होते हैं।

इस तरह आप समझ गए होंगे कि मशीनों की कार्यप्रणाली किस तरह से इन तीन प्रक्रियाओं से संचालित होती हैं और ये तीन चरण हैं –

  • इनपुट
  • प्रोसेसिंग
  • आउटपुट

बच्चो, कम्प्यूटर इसी तरह से अपना कार्य करता है। कम्प्यूटर पर जब आप उसे किन्हीं दो संख्याओं को जोड़ने के लिए कहते हैं, उसमें सबसे पहले ये दो संख्याएँ की-बोर्ड के द्वारा टाइप करके इनपुट की जाती हैं। इनपुट होते ही ये सीपीयू में पहुँचती हैं। सीपीयू में प्रोसेसिंग यूनिट के द्वारा गणना करने का कार्य पूरा होता है और इस प्रक्रिया में ये दोनों संख्याएँ आपस में जुड़ जाती हैं। इन्हें जोड़ने के लिए हम कम्प्यूटर को कुछ निर्देश देते हैं। इसी निर्देश के परिणामस्वरूप प्रोसेसिंग यूनिट अपना कार्य करती है। निर्देश का पालन करते हुए प्रोसेसिंग यूनिट संख्याओं को आपस में जोड़कर उनका परिणाम आउटपुट यूनिट पर भेजती है और हमें मॉनीटर के स्क्रीन पर यह रिजल्ट दिखाई देता है। जोड़ने की तरह ही दूसरे कार्य भी इन्हीं चरणों का पालन करते हुए सम्पन्न होते हैं। निम्न रेखा चित्र में आप इन तीनों चरणों को समझ सकते हैं –

इनपुट (5+8) > प्रोसेसिंग (5+8 = 13) > आउटपुट (13)

इनपुट उपकरण

अभी तक आप यह तो समझ ही गए हैं कि कम्प्यूटर में डेटा और निर्देशों को इनपुट किया जाता है। डेटा इनपुट करने के बाद निर्देश देकर उसे प्रोसेस करते हैं और परिणाम प्राप्त करते हैं। कम्प्यूटर डेटा और निर्देशों के बगैर कोई भी कार्य नहीं कर सकता है। जिन उपकरणों को इसके लिए प्रयोग किया जाता है, उन्हें इनपुट उपकरण कहते हैं। निम्न रेखाचित्र में आप इस प्रक्रिया को समझ सकते हैं – कम्प्यूटर में इनपुट करने के लिए वैसे तो आजकल कई उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन सबसे ज्यादा की-बोर्ड और माउस को इसके लिए इस्तेमाल करते हैं। की-बोर्ड को प्राइमरी इनपुट डिवाइस भी कहा जाता है। इस अध्याय में आइए की-बोर्ड और माउस के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

की-बोर्ड

कम्प्यूटर का की-बोर्ड टाइपराइटर के की-बोर्ड जैसा होता है। इसके बटन टाइपराइटर के बटनों की अपेक्षा आसानी से दबते हैं। इससे कार्य करने में आसानी होती है। इसकी एक खासियत यह है कि यदि एक बटन को लम्बे समय तक दबाए रखें तो अक्षर स्वयं को दोहराने लगता है। की-बोर्ड एक केबल (तार) के जरिए कंप्यूटर से जुड़ा होता है। इस तार के दूसरे सिरे पर लगा प्लग कम्प्यूटर के पीछे के बने एक सॉकेट में लग जाता है। यह केबल ही दोनों के बीच संपर्क का काम करता है।

की-बोर्ड की कीज़

की-बोर्ड में कुछ अतिरिक्त कीज़ होती हैं, जो टाइपराइटर में नहीं होती हैं। जैसे – तीर (एरो कीज) तथा दूसरे संचालन करने वाली विशेष कीज़। आइए, इन्हें क्रम में समझें –

फंक्शन कीज़

फंक्शन कीज़ का प्रयोग कम्प्यूटर को विशेष कमांड देने के लिए किया जाता है। वर्तमान समय में जो की-बोर्ड प्रयोग किए जाते हैं, उनमें इनकी संख्या बारह होती है। चित्र में आप इन्हें देख सकते हैं-

बैकस्पेस की

इस की का प्रयोग टाइप किए हुए अक्षरों को दाएँ से बाईं ओर मिटाने के लिए किया जाता है। की-बोर्ड में यह अपनी तरह की एक ही की होती है। चित्र में आप इसे देख सकते हैं-

स्पेसबार की

यह की-बोर्ड की सबसे लम्बी की होती है। इसका प्रयोग अक्षरों और शब्दों के बीच स्पेस देने के लिए किया जाता है। चित्र में आप इसे देख सकते हैं –

एंटर या रिटर्न की

इस की का प्रयोग सीपीयू में डेटा और कमांड्स को भेजने के लिए किया कुछ की-बोर्ड में इस पर रिटर्न भी लिखा होता है। देखने में यह इस तरह से है।

कैप्स लॉक की

इस की का प्रयोग की-बोर्ड में कैपिटल लेटर्स (बड़े अक्षर) को स्मॉल लेटर्स (छोटे अक्षर) में या फिर स्मॉल लेटर्स को कैपिटल लेटर्स में बदलने के लिए किया जाता है।

एरो कीज़

इन कीज़ के द्वारा आप कर्सर को स्क्रीन पर चारों दिशाओं में ले जा सकते हैं। यह संख्या में चार होती हैं। चित्र में आप देख सकते हैं –

कर्सर कंट्रोल कीज़

इन पर अलग-अलग दिशा के तीर के निशान बने होते हैं। कर्सर कंट्रोल की इन कीज़ को लेफ्ट, राइट, अप एंड डाउन कीज़ कहा जाता है। यह कीज़ कर्सर को ऊपर-नीचे, दाएँ, बाएँ ले जाने का काम करती हैं। कर्सर नियंत्रक चार दूसरी कीज़ होम, एंड, पेजअप, पेज डाउन हैं। इन पर (Home. End, PgUp, PgDn) लिखा होता है। पेजअप का मतलब इस की को दबाकर पहले वाले पेज को स्क्रीन पर देखना और काम करना है। पेज डाउन से पेज के नीचले हिस्से को सामने लाकर वहाँ काम करना है। होम कीज़ को दबाने से स्क्रीन पर लगे दस्तावेज की शुरुआत में पहुँचा या लाइन के शुरू में जाया जा सकता है। एंड वाली कीज़ को दबाने से लाइन के आखिर में जाया जा सकता है।

न्यूमेरिक कीज़

ये की-बोर्ड के दायीं तरफ होती हैं। इनमें से कुछ के दोहरे काम होते हैं। जब नम लॉक ऑन होता है तो (मतलब ऊपर की हरी लाइट चालू होना) ये सभी नंबर की तरह काम करती हैं और लॉक बन्द या लाइट बन्द होने पर ये कीज कर्सर की तरह काम करती हैं। यह ० से लेकर ६ तक होती है –

शिफ्ट कीज़

यदि किसी की पर दो संकेत या कैरक्टर हैं तो उसके ऊपर के अक्षर को टाइप करने के लिए शिफ्ट कीज़ को अक्षर कीज़ के साथ दबाना होता है।

एस्केप की

इसे दबाने का मतलब, पहले दी कमांड या प्रविष्टि को रद्द करना है। देखने में यह Esed इस तरह से दिखाई देती है -

पॉज या ब्रेक की

यदि डॉस मोड में काम कर रहे हैं और किसी कमांड के प्रयोग से स्क्रीन पर एक के बाद एक लगातार मैटर आता जाए तो इस कीज़ को दबाने पर वह रुक जाएगा।

टैब की

यह ऐज में पैराग्राफ, टेक्स्ट, संख्या आदि पहले तय करने यानी कर्सर को एक लाइन के साथ नि-सेट जगह पर ले जाने वाली की है।

डिलीट को

स्क्रीन पर जहाँ कर्सर है और उस शब्द को मिटाना है तो इसे दबाने से वह मिट जाएगा।

टाइपिंग कीज़

ज्यादातर यह सफेद रंग की कीज़ होती है। इन पर अक्षर (A-Z) संख्या और विराम के संकेत होते हैं। यह टाइपराइटर के कीज़ जैसी होती है।

माउस यह बहुत छोटा उपकरण है, जिसे हाथ से मेज की सतह पर इधर-उधर सरकाया जाता है। इसमें दो-तीन बटन होते हैं, जिन्हें अंगुलियों से क्लिक किया जाता है अथवा दबाया जाता है। यह एक इनपुट उपकरण है जो पीसी से एक केबल द्वारा जुड़ा हो है। इसके कई तार होते हैं। केबल के दूसरे सिरे पर लगा प्लग पीसी पीछे लगे सीरियल पोर्ट वाले सॉकेट में दिया जाता है।

माउस को मेज की सतह पर जब इधर-उधर सरकाया जाता है मॉनीटर के पटल पर एक तीर की आकृति का चिह्न इधर-उधर चल दिखाई पड़ता है। इस तीर के निशान को माउस का प्वाइंट कहते हैं। माउस बहुपयोगी है। इससे अनेक कार्य सम्पन्न किए जा सकते। विशेष रूप से ग्राफिक्स के लिए तो इसका बहुत अधिक उपयोग है। जब आपका मन ग्राफिक्स के प्रोग्राम में रेखा खींचने का हो तो यह माउस प्वाइन्टर तीर की बजाए एक पेंसिल की शक्ल अख्तियार कर लेता है। यदि किसी रेखा या चित्र को मिटाना चाहें तो रबड़ और यदि रंग भरने का विचार रखेंगे तो रंग के डिब्बे की आकृति ग्रहण कर लेगा। वैसे सामान्य स्थिति में यह अपने पूर्ववत रूप में यानी प्वाइन्टर रूप में चला आएगा। माउस के नीचे एक छोटी गेंद लगी होती है, जिससे माउस को सतह पर इधर-उधर सरकाने में आसानी होती है। इसे एक पैड पर घुमाते हैं, जिसे माउस पैड के नाम से जाना जाता है। आजकल ऐसे माउस भी चलन में हैं, जिनमें प्रकाश परावर्तन तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इन्हें ऑप्टिकल माउस कहते हैं। इसके अलावा बिना तार वाले वायरलेस माउस भी अब खूब इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

माउस से जुड़ी शब्दावली

जब आप माउस से कम्प्यूटर पर कार्य करेंगे तो कई शब्द आपको इस तरह के पता चलेंगे, जिन्हें आप अभी तक जानते ही नहीं हैं। माउस को सरलता से प्रयोग किया जा सके, इसलिए पहले इन शब्दों के अर्थ जानते हैं।

क्लिक करना

जब माउस के प्वाइन्टर अर्थात संकेतक को मॉनीटर की स्क्रीन पर किसी आइकन (चित्र) पर ले जाकर उसकी बाईं बटन को दबाते हैं तो यह क्रिया क्लिक करना कहलाती है। क्लिक करने से आप मॉनीटर के ऑब्जेक्ट को सिलेक्ट कर सकते हैं।

डबल क्लिक करना

जब आप किसी ऑब्जेट पर एक बार क्लिक करके उसे सिलेक्ट करते हैं तो वह केवल सिलेक्ट होता है। उस ऑब्जेक्ट या उससे जुडे प्रोग्राम को खोलने के लिए ऑब्जेक्ट पर तेजी से दो बार लगातार क्लिक करते हैं तो इससे प्रोग्राम क्रियान्वित हो जाता है। यह क्रिया डबल क्लिकिंग कहलाती है।

ड्रैग एंड ड्रॉप करना

मॉनिटर की स्क्रीन पर दिखाई दे रहे ऑब्जेक्ट पर माउस प्वांइटर ले जाकर जब एक बार क्लिक करके उसे सिलेक्ट करते हैं तथा आप इस बाएँ बटन को यदि दबाए रखें और माउस को पैड पर घुमाएँ तो ऑब्जेक्ट भी स्क्रीन पर स्थान बदलेगा। इस क्रिया को ड्रैग करना कहते हैं। ड्रैग करके ऑब्जेक्ट को नए स्थान पर लाकर छोड़ना (अर्थात् नए स्थान पर आने के बाद बाएँ बटन को छोड़ देना) ड्राप करना कहलाता है।

प्रोसेसिंग उपकरण

जैसा कि आप अभी तक यह जान गए होंगे कि सभी कम्प्यूटर तीन अनिवार्य भागों में विभाजित होते है। ये भाग हैं – इनपूट यूनिट, प्रोसेसिंग यूनिट और आउटपुट यूनिट। पिछले अध्याय में आपने इनपुट यूनिट के बारे में पढ़ा। इस अध्याय में आप प्रोसेसिंग यूनिट के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट

कम्प्यूटर की प्रोसेसिंग यूनिट को सीपीयू अर्थात सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट कहते हैं। इसमें कम्प्यूटर के बहुत ही जरूरी उपकरण होते हैं जो प्रोसेसिंग का कार्य सम्पन्न करते हैं। सभी तरह की गणनाएँ यहीं पूरी होती हैं, इसलिए इसे कम्प्यूटर का दिमाग भी कहते हैं। आजकल जिस तरह के सीपीयू का सर्वाधिक प्रयोग किया जा रहा है, उसे चित्र में दर्शाया गया है। सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट तीन मुख्य भागों में विभाजित होती हैं-

  • अर्थमेटिक एंड लॉजिक यूनिट
  • मेमोरी यूनिट
  • कंट्रोल यूनिट

ये तीनों भाग मिलकर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण करते हैं।

अर्थमेटिक एंड लॉजिक यूनिट, मेमोरी यूनिट और कंट्रोल यूनिट तीनों मिलकर इनपुट डिवाइस से डेटा प्राप्त करते हैं, उसे प्रोसेस करते हैं, और फिर आउटपुट डिवाइस को परिणाम भेजते हैं।

अर्थमेटिक एंड लॉजिक यूनिट

सीपीयू के इस भाग में ही सभी तरह की गणनाओं के कार्य सम्पन्न होते हैं। इसके अलावा कम्प्यूटर तार्किक कार्य भी इसी के द्वारा पूरा करता है। इस तरह के कार्यों में एक कम्प्यूटर की तुलना दूसरे से कर सकते है। उदाहरण के लिए यदि यह पता लगाना है कि १० और ४० में छोटा कौन है तो यह तुलना करने वाला काम भी अर्थमेटिक एंड लॉजिक यूनिट ही करेगा।

मेमोरी यूनिट

कम्प्यूटर की मेमोरी यूनिट डेटा को स्टोर करती है। इसके अलावा कम्प्यूटर को दिए जाने वाले निर्देश भी इसी में जमा रहते हैं। प्रोसेसिंग के पहले और बाद दोनों स्थितियों में डेटा और परिणाम मेमोरी यूनिट में ही रहते हैं।

कंट्रोल यूनिट

कम्प्यूटर की यह यूनिट इसके सभी भागों पर नियन्त्रण बनाए रखती है। इसके द्वारा इनपुट डिवाइस, आउटपुट डिवाइस और अर्थमेटिक एंड लॉजिक यूनिट से प्रोसेसिंग के पश्चात परिणाम प्राप्त करने की प्रक्रिया भी नियंत्रित होती है अर्थात् कम्प्यूटर का पूरा कंट्रोल यहीं से होता है।

आउटपुट उपकरण

जैसा कि आप अभी तक यह जान गए होंगे कि सभी कम्प्यूटर तीन अनिवार्य भागों में विभाजित होते हैं। ये भाग हैं – इनपुट यूनिट, प्रोसेसिंग यूनिट और आउटपूट यूनिट। पिछले अध्याय में आपने सीपीयू के बारे में पढ़ा। इस अध्याय में आप आउटपुट यूनिट के बारे में पढ़ेंगे। प्राइमरी तौर पर मॉनीटर मुख्य आउटपुट डिवाइस है और प्रिंटर सहायक आउटपुट डिवाइस की श्रेणी में आता है।

मॉनीटर

मॉनीटर देखने में टेलीविज़न की तरह ही होता है। इनपुट होते समय सूचना और निर्देश तथा प्रोसेसिंग के बाद सभी परिणाम इस पर ही दिखाई देते हैं। हमारे देश में दो तरह के मॉनीटर प्रयोग किए जा रहे हैं। मॉनीटरों का यह वर्गीकरण रंगों के आधार पर है और ये हैं –

  • मोनोक्रोम मॉनीटर
  • कलर मॉनीटर

मोनोक्रोम मॉनीटर

इस श्रेणी में आने वाले सभी मॉनीटर केवल एक रंग में ही सूचनाओं को दर्शाते हैं, इसीलिए इनके संदर्भ में मोनो शब्द का प्रयोग किया जाता है। अब इनका चलन लगातार कम होता जा रहा है।

कलर मॉनीटर

इस श्रेणी में आने वाले मॉनीटर सभी रंगों में सूचनाओं को दर्शाते हैं, इसीलिए इनके संदर्भ में कलर शब्द का प्रयोग किया जाता है। हमारे देश में कीमतें कम होने से इनका चलन लगातार बढ़ रहा है।

प्रिंटर

प्रिंटर कम्प्यूटर का एक प्रमुख सहायक उपकरण है। इसके द्वारा आप कम्प्यूटर में स्टोर सूचनाओं (डेटा) को कागज पर प्रिंट कर सकते हैं। इस समय कई तरह के प्रिंटर प्रयोग किए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख है

  • डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर
  • इंकजेट प्रिंटर
  • लेज़र प्रिंटर

निम्न चित्रों में आप इन तीनों तरह के प्रिंटर देख सकते हैं –

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर

इस तकनीक से काम करने वाले सभी प्रिंटर पिन की सहायता से प्रिंटिंग करते हैं। ये पिनें एक रिबन पर दबाव बनाती हैं, जिससे कागज पर अक्षर छप जाता है। ये बहुत ही साधारण क्वालिटी की प्रिंटिंग करते हैं। इन्हें बैंकों और इसी तरह के बड़े-बड़े संस्थानों में बहुत बड़ी मात्रा में डेटा प्रिंट करने के लिए प्रयोग करते हैं। इनकी छपाई की लागत भी बहुत कम होती है।

इंक जेट प्रिंटर

इस तकनीक से काम करने वाले सभी प्रिंटर एक जेट से फुहार छोड़कर प्रिंटिंग करते हैं। यह भी कीमत में सस्ते होते हैं और ये काली तथा रंगीन दोनों तरह की प्रिंटिंग करने की क्षमता रखते हैं। इनके द्वारा आप फोटो क्वालिटी की प्रिंटिंग भी कर सकते हैं। लेकिन इनके द्वारा होने वाली छपाई बहुत महँगी होती है और ये धीमी गति से कार्य करते हैं।

लेज़र प्रिंटर

इस तकनीक से काम करने वाले सभी प्रिंटर लेज़र किरण की सहायता से प्रिंटिंग करते हैं। इसमें लेज़र किरण टोनर नामक पाउडर जैसी स्याही को पिघलाकर कागज पर अक्षरों को प्रिंट करती है। ये कीमत में बहुत महँगे होते हैं और इनके द्वारा तीव्र गति से बेहतरीन प्रिंटिंग की जा सकती है।

कम्प्यूटर ऑन/ऑफ करना

अभी तक आप कम्प्यूटर के प्रमुख भागों और सहायक उपकरणों के साथ-साथ उसकी कार्य-प्रणाली के बारे में जान गए होंगे। आइए अब यह सीखते हैं कि कम्प्यूटर पर काम की शुरुआत कैसे करते हैं।

कम्प्यूटर ऑन करना

  • सबसे पहले अपनी कम्प्यूटर किताब लें।
  • कम्प्यूटर प्रयोगशाला में हमेशा टीचर के साथ जाएँ।
  • मुख्य पॉवर स्विच को ऑन करें।
  • सीवीटी या यूपीएस को ऑन करने के बाद कम्प्यूटर को ऑन करें।
  • यदि मॉनीटर सीपीयू के विद्युत् प्रवाह से नहीं जुड़ा है तो मॉनीटर का स्विच ऑन करें।
  • इसके पश्चात् सीपीयू का स्विच ऑन करें।
  • विंडोज़ डेस्कटॉप आने का इंतजार करें।

विंडोज़ के डेस्कटॉप में आपको जो छोटे-छोटे चित्र दिखाई देते हैं, उन्हें आइकन कहते हैं। इसमें सबसे नीचे टास्क बार होता है। टास्कबार के बाएँ कोने पर स्टार्ट बटन होती है, जिस पर क्लिक करके आप अपने काम की शुरुआत कर सकते हैं। आपको विंडोज़ के डेस्कटॉप पर माउस प्वाइन्टर भी दिखाई देगा। जब आप माउस को पैड पर घुमाएँगे तो यह भी घूमेगा। यदि आप विंडोज़ में कोई काम करना चाहते हैं तो आपको वह प्रोग्राम शुरू करना होगा। इस कक्षा में आप पेंट जैसे प्रोग्रामों में काम कर सकते हैं। इसमें आप तरह-तरह की पिक्चर बना सकते हैं। इस सम्बन्ध में आप अपने अध्यापक से कहें।

कम्प्यूटर ऑफ करना

काम समाप्त होने के पश्चात् कम्प्यूटर को निम्न क्रम में बन्द करें –

  • सबसे पहले विंडोज़ के स्टार्ट बटन पर क्लिक करें। आपके सामने यह इस तरह से खुलकर आ जायेगा-
  • इसमें दिए शटडाउन या टर्न ऑफ विकल्प पर क्लिक करें। आपके सामने यह विकल्प बॉक्स आ जाएगा।
  • इसमें शटडाउन या टर्न ऑफ विकल्प पर क्लिक करके ओके बटन पर क्लिक करें। आपके सामने यह संदेश आएगा।

It's now safe to turn off your computer

  • इस संदेश को पढ़ने के बाद सीपीयू का स्विच बन्द करें।
  • मॉनीटर का स्विच बन्द करें।
  • सीवीटी या यूपीएस को बन्द करें।

मुख्य विद्युत् आपूर्ति स्विच बन्द करें।

UP Board Solutions Class 6 Computer Science Computer कंप्यूटर शिक्षा

Students can now access the UP Board Solutions for Computer कंप्यूटर शिक्षा prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 6 Computer Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.

Detailed Explanations for Computer कंप्यूटर शिक्षा

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 6 Computer Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 6 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Computer Science Class 6 Solved Papers

Using our Computer Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 6 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Computer कंप्यूटर शिक्षा to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 6 Computer Science Computer कंप्यूटर शिक्षा for the 2026 27 session?

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Are the Computer Science UP Board solutions for Class 6 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 6 Computer Science Computer कंप्यूटर शिक्षा as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Computer Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 6 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 6 Computer Science Computer कंप्यूटर शिक्षा will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 6 Computer Science Computer कंप्यूटर शिक्षा in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 6 Computer Science. You can access UP Board Solutions Class 6 Computer Science Computer कंप्यूटर शिक्षा in both English and Hindi medium.

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