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Chapter Solutions: Class 5 Naitik Evam Swasthya (UP Board) - Naitik Shiksha नैतिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा
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Naitik Shiksha नैतिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा Answers & Solutions for Class 5 Naitik Evam Swasthya (UP Board)
नैतिक शिक्षा का उद्देश्य
नैतिक शिक्षा का उद्देश्य छात्रों में निम्नलिखित गुणों को विकसित करना है:
- छात्रों में हमेशा सत्य बोलने की भावना जगाना।
- छात्रों में दूसरों की मदद करने और दया की भावना बढ़ाना।
- छात्रों में देश के प्रति प्रेम की भावना पैदा करना।
- छात्रों में अपने माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने की भावना विकसित करना।
योग-शिक्षा
Question 1. योग किसे कहते हैं?
Answer: योग का अर्थ है अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ना। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे व्यक्ति अपनी आंतरिक चेतना को सर्वोच्च शक्ति से मिलाता है और शारीरिक तथा मानसिक रूप से शांत होता है।
In simple words: योग यानी अपनी आत्मा को भगवान से जोड़ना।
🎯 Exam Tip: योग की परिभाषा को सरल शब्दों में याद करें और उसके मुख्य बिंदु पर ध्यान दें।
Question 2. आसन करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Answer: आसन करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, ताकि आसन का पूरा लाभ मिल सके और चोट लगने का खतरा भी कम हो जाए:
1. आसन हमेशा खाली पेट करने चाहिए, जिससे पेट पर दबाव न पड़े।
2. आसन करते समय ढीले-ढाले कपड़े पहनने चाहिए, ताकि शरीर को हिलने-डुलने में आसानी हो।
3. आसन करने के लिए ऐसी जगह चुनें जहाँ हवा आती हो और खुली हो।
4. जमीन पर एक मोटा कपड़ा या चटाई बिछाकर आसन करने चाहिए, ताकि शरीर को आराम मिले।
5. हर आसन के बाद शरीर को ढीला छोड़ना चाहिए, जिससे मांसपेशियों को आराम मिल सके और तनाव कम हो।
In simple words: आसन करते समय पेट खाली रखें, ढीले कपड़े पहनें, खुली जगह पर मोटे कपड़े पर बैठें और हर आसन के बाद शरीर को आराम दें।
🎯 Exam Tip: आसन करते समय की सावधानियों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें और हर बिंदु का महत्व समझाएं।
Question 3. आसनों से प्राप्त होनेवाले लाभ का वर्णन कीजिए।
Answer: आसन करने से हमें कई तरह के फायदे मिलते हैं। नियमित अभ्यास से ये सभी लाभ धीरे-धीरे हमारे जीवन का हिस्सा बन जाते हैं:
1. आसन शरीर को सेहतमंद, सुडौल, सुंदर और बीमारियों से मुक्त रखते हैं।
2. यह शरीर के हर हिस्से को मजबूत बनाते हैं, जिससे मांसपेशियां ताकतवर बनती हैं।
3. आसन से शरीर में फुर्ती आती है और थकान दूर होती है।
4. यह शरीर को लचीला बनाते हैं, जिससे हम आसानी से मुड़ सकते हैं।
5. आसन करने से शरीर का आलस्य खत्म हो जाता है और व्यक्ति सक्रिय महसूस करता है।
6. आसन से मन शांत होता है, सोचने की शक्ति बढ़ती है और हम खुद को बेहतर समझ पाते हैं।
In simple words: आसन से शरीर स्वस्थ, मजबूत, फुर्तीला और लचीला बनता है। यह आलस्य दूर करता है और मन को शांत रखता है।
🎯 Exam Tip: आसनों के लाभों को विस्तार से समझाएं और प्रत्येक बिंदु को सरल भाषा में व्यक्त करें।
सुखासन
जिन छात्रों को पद्मासन कठिन लगता है, उनके लिए सुखासन आसान होता है। इस आसन में पालथी मारकर सीधा बैठना चाहिए, लेकिन ध्यान रहे कि कमर झुकी न हो। बाएँ हाथ की हथेली बाएँ घुटने पर और दाएँ हाथ की हथेली दाएँ घुटने पर आराम से रखनी चाहिए। हाथों की उँगलियों और आँखों को सहज रखें।
इस आसन से हाथों और पैरों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और पाचनशक्ति बढ़ती है। घुटनों में जमा हुआ रक्तविकार भी दूर हो जाता है।
वज्रासन
वज्रासन में बैठनेवाला व्यक्ति दृढ़ और मजबूत स्थिति प्राप्त करता है। इस स्थिति में सरलता से हिला-डुला नहीं जा सकता, इसीलिए इसे वज्रासन कहते हैं।
पैरों के दोनों तलवों को गुदा के दोनों ओर इस प्रकार रखिए कि दोनों जांघें पैरों पर और कूल्हे तलवों पर आएं। टखनों से घुटनों तक का भाग जमीन को छूना चाहिए। पूरे शरीर का वजन घुटनों और टखनों पर रखिए। इस आसन के अभ्यास के दौरान सांस लेते-छोड़ते रहिए। शुरुआत में घुटनों और टखनों में दर्द हो सकता है, लेकिन बाद में अपने आप दूर हो जाएगा। दोनों हाथ सीधे करके घुटनों पर रखिए।
दोनों घुटनों को एकदम नजदीक रखिए। शरीर, गर्दन और सिर एक सीध में रखकर बिल्कुल सीधा बैठिए। यह एक बहुत सामान्य आसन है। इस आसन में काफी लंबे समय तक आराम से बैठा जा सकता है।
लाभ:
1. इस आसन से पाचक रस अधिक मात्रा में बनते हैं, पेट ठीक से काम करता है और गैस की समस्या खत्म होती है।
2. यह आसन लगातार करने से घुटनों, पैरों, पंजों और जांघों में होनेवाला दर्द दूर होता है।
3. इस आसन का लंबे समय तक अभ्यास करने से रसग्रंथियों या प्लीहा, गले के कॉकल, अस्थिमज्जा जैसे स्थानों पर श्वेतकणों की संख्या बढ़ती है, जिससे स्वास्थ्य बहुत अच्छा बनता है।
4. नियमित रूप से यह आसन करनेवाला व्यक्ति बुखार, कब्ज, मंदाग्नि या अजीर्ण जैसे छोटे-बड़े किसी भी रोग से पीड़ित नहीं होता।
उत्कट आसन
अपने पंजों पर एड़ियों को जितना उठा सकें, उठाकर खड़े हो जाइए। इसके बाद धीरे-धीरे अपने शरीर को साधते हुए पंजों के सहारे जमीन पर बैठने की कोशिश कीजिए। आपके शरीर का सारा भार पंजों पर ही होना चाहिए। कूल्हे और एड़ियाँ एक-दूसरे से मिली रहनी चाहिए। दोनों इस अवस्था में रहें कि जमीन से समानांतर रेखाएँ बनाएं। आपके शरीर का बाकी हिस्सा सीधा और समकोण रहना चाहिए। दोनों हाथ घुटनों पर और आँखें खुली रखकर गहरी साँस लेनी चाहिए।
उत्कट आसन के निम्न लाभ होते हैं:
1. इसमें मांसपेशियों का गठन अच्छा होता है।
2. पैरों के अंगूठे तथा घुटने स्वस्थ रहते हैं।
3. आसन शरीर की शुद्धि में सहायक होते हैं।
4. रीढ़ की हड्डी ठीक बनी रहती है।
कोणासन
इस आसन में दोनों हाथ और दोनों पैरों से शरीर का आधार कोण जैसा बनता है। इसलिए इसे 'कोणासन' कहते हैं। इस आसन में दोनों हाथों के पंजों और पैरों की एड़ियों पर पूरे शरीर का संतुलन बनाए रखना पड़ता है।
विधि – दोनों पैर साथ में जोड़े रखिए। दोनों हाथों के बीच कंधों के बराबर अंतर रखकर हाथ और पैर लंबे करें। इसके बाद साँस खींचिए और हथेलियों तथा एड़ियों की सहायता से शरीर को ऊपर की ओर ले जाइए। गर्दन को पीछे की ओर मोड़िए। दोनों हाथ सीधे और सीना आसमान की तरफ रखिए। इस स्थिति में आठ-दस सेकंड तक रहिए; फिर धीरे-धीरे मूल स्थिति में आइए। यह आसन चार से छह बार कर सकते हैं।
लाभ:
1. इस आसन से कंधे मजबूत बनते हैं और पेट की तकलीफें दूर होती हैं।
2. इस आसन से पैरों और रीढ़ को पर्याप्त मात्रा में व्यायाम मिलता है।
3. यह आसन पश्चिमोत्तानासन का उप-आसन माना जाता है। इसलिए इसे पश्चिमोत्तानासन के बाद करने से बहुत लाभ होता है।
आसन करते समय सावधानी
आसन करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए:
1. आसन नियमपूर्वक करना चाहिए तथा कभी भी शीघ्रता नहीं करनी चाहिए।
2. आसन करने के पश्चात् कभी भी तुरंत स्नान नहीं करना चाहिए।
3. आसन करते समय आपस में बातचीत नहीं करनी चाहिए।
4. आसन प्रतिदिन निश्चित समय पर करना चाहिए।
दिशाओं का ज्ञान
निर्देश –
- बच्चों से पूछें कि सूर्योदय के समय सूर्य की ओर मुंह करके खड़े होने पर उनके:
- मुंह की ओर कौन-सी दिशा होगी?
- पीठ की ओर कौन-सी दिशा होगी?
- बाएँ हाथ की ओर कौन-सी दिशा होगी?
- दाएँ हाथ की ओर कौन-सी दिशा होगी?
- कक्षा के अंदर भी यह गतिविधि करवाएँ।
- नक्शे के आधार पर भी दिशाओं की पहचान करवाएँ।
महीनों और त्योहारों के नाम
| भारतीय महीने | अंग्रेजी महीने | हमारे त्योहार |
|---|---|---|
| माघ | जनवरी | मकर संक्रांति |
| फाल्गुन | फरवरी | महाशिवरात्रि |
| चैत्र | मार्च | होली |
| वैशाख | अप्रैल | वैशाखी |
| ज्येष्ठ | मई | बुद्ध पूर्णिमा |
| आषाढ़ | जून | गंगा दशहरा |
| श्रावण | जुलाई | हरियाली तीज (हरैला) |
| भाद्रपद | अगस्त | स्वतंत्रता दिवस |
| आश्विन | सितंबर | रक्षाबंधन, दशहरा |
| कार्तिक | अक्टूबर | दीपावली |
| मार्गशीर्ष | नवंबर | गुरु नानक जयंती, कार्तिक स्नान |
| पौष | दिसंबर | क्रिसमस-डे |
निर्देश
- प्रत्येक माह में प्रकृति में होनेवाले परिवर्तन के बारे में चर्चा करें।
- भारतीय कैलेंडर के अनुसार आनेवाले तीज-त्योहारों के बारे में बातचीत करें।
- अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार आनेवाले प्रमुख त्योहारों के विषय में बातचीत करें।
- ऋतुओं के बारे में चर्चा करें कि कौन-सी ऋतु किस अंग्रेजी अथवा भारतीय महीने में आती है।
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