UP Board Solutions Class 4 Hindi Chapter Hindi Vyakaran

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 4 Hindi हिंदी व्याकरण

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Question 1. व्याकरण क्या है?
Answer: व्याकरण वह शास्त्र है जो हमें भाषा को सही ढंग से बोलने, लिखने और समझने का ज्ञान कराता है। यह हमें भाषा की शुद्धता और अशुद्धता के नियम सिखाता है, जिससे हम भाषा का सही उपयोग कर पाते हैं।
जैसे:
• राम स्कूल गया है। (शुद्ध)
• राम स्कूल गई है। (अशुद्ध)
In simple words: व्याकरण हमें बताता है कि भाषा को कैसे सही तरीके से इस्तेमाल करें, ताकि हम गलती न करें। यह हमें भाषा के नियम सिखाता है।

🎯 Exam Tip: व्याकरण की परिभाषा लिखते समय 'भाषा की शुद्धता और अशुद्धता का ज्ञान कराने वाला शास्त्र' इन मुख्य शब्दों का प्रयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. भाषा क्या है?
Answer: भाषा वह माध्यम है जिससे हम अपने विचारों और भावों को एक-दूसरे तक पहुँचाते हैं और समझते हैं। यह मनुष्यों को आपस में जुड़ने और जानकारी साझा करने में मदद करती है।
जैसे: हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, तेलुगू, मराठी, तमिल, मैथिली आदि।
In simple words: भाषा वह तरीका है जिससे हम अपनी बातें दूसरों को बताते हैं और उनकी बातें समझते हैं।

🎯 Exam Tip: भाषा की परिभाषा में 'विचारों या भावों को प्रकट करने का माध्यम' लिखना आवश्यक है, क्योंकि यही भाषा का मूल कार्य है।

भाषा के भेद

भाषा को उसके इस्तेमाल के आधार पर तीन हिस्सों में बाँटा जा सकता है:

(१) लिखित भाषा-यह वह भाषा है जिसका उपयोग लिखने और पढ़ने के लिए किया जाता है, जैसे किताबें या पत्र।
(२) कथित अथवा मौखिक भाषा-यह वह भाषा है जिसका उपयोग हम बातचीत करते समय करते हैं, यानी बोलकर।
(३) सांकेतिक भाषा-यह वह भाषा है जब हम संकेतों या इशारों का इस्तेमाल करके अपने विचारों को बताते हैं, जैसे किसी को हाथ हिलाकर बुलाना।

 

Question 3. लिपि किसे कहते हैं?
Answer: लिपि उन लिखित चिह्नों या संकेतों को कहते हैं, जिनका उपयोग हम किसी भाषा की ध्वनियों को लिखने के लिए करते हैं। हर भाषा को लिखने का एक अपना खास तरीका होता है।
जैसे: हिंदी की लिपि 'देवनागरी' है, उर्दू की लिपि 'फारसी' है और अंग्रेजी की लिपि 'रोमन' है।
In simple words: लिपि लिखने के वे निशान होते हैं जिनसे हम किसी भाषा की आवाज को कागज पर उतारते हैं।

🎯 Exam Tip: लिपि की परिभाषा में 'लिखित चिह्न' या 'संकेत' शब्द का प्रयोग करें और अलग-अलग भाषाओं की लिपियों के उदाहरण अवश्य दें।

 

Question 4. वर्ण या अक्षर किसे कहते हैं? तथा उसके भेद बताओ।
Answer: वर्ण (अक्षर) भाषा की सबसे छोटी मूल ध्वनि होती है, जिसके टुकड़े और नहीं किए जा सकते। यह भाषा की मूल इकाई है जिससे शब्द बनते हैं।
जैसे: अ, इ, ए, क्, ख् आदि।
वर्ण या अक्षर के दो मुख्य भेद होते हैं:
१. स्वर
२. व्यंजन
In simple words: वर्ण भाषा की सबसे छोटी आवाज है जिसे और छोटा नहीं किया जा सकता। इसके दो प्रकार होते हैं - स्वर और व्यंजन।

🎯 Exam Tip: वर्ण की परिभाषा में 'सबसे छोटी मूल ध्वनि' और 'टुकड़े न हो सकने' की बात को जरूर शामिल करें। भेदों के नाम साफ-साफ लिखें।

वर्ण या अक्षर के भेद

 

Question 5. स्वर किसे कहते हैं? उसके भेद बताओ।
Answer: स्वर वे वर्ण होते हैं जिनका उच्चारण करते समय हमें किसी और वर्ण की मदद नहीं लेनी पड़ती। ये स्वतंत्र रूप से बोले जाते हैं। हिंदी में कुल ग्यारह स्वर होते हैं, जो इस प्रकार हैं: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।
स्वरों के तीन भेद होते हैं:
(क) ह्रस्व स्वर – जिनके उच्चारण में कम समय लगता है, जैसे: अ, इ, उ, ऋ।
(ख) दीर्घ स्वर – जिनके उच्चारण में ह्रस्व स्वरों से दोगुना समय लगता है, जैसे: आ, ई, ऊ, ऐ, ओ, औ।
(ग) प्लुत स्वर – जिनके उच्चारण में सबसे अधिक समय लगता है, आमतौर पर किसी को पुकारने या गाने में प्रयोग होते हैं, जैसे: ओ३म।
In simple words: स्वर उन अक्षरों को कहते हैं जिन्हें बोलने के लिए किसी और अक्षर की मदद नहीं लेनी पड़ती। ये ग्यारह होते हैं और इनके तीन प्रकार हैं: ह्रस्व (कम समय), दीर्घ (ज्यादा समय) और प्लुत (सबसे ज्यादा समय)।

🎯 Exam Tip: स्वर की परिभाषा में 'बिना किसी दूसरे वर्ण की सहायता' और 'स्वतंत्र उच्चारण' शब्दों का प्रयोग करें। उनके भेद और सही उदाहरण लिखना भी महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. व्यंजन किसे कहते हैं? इसके प्रकार भी बताओ ।
Answer: व्यंजन वे वर्ण होते हैं जिनके उच्चारण में स्वरों की सहायता लेनी पड़ती है। व्यंजनों को बिना स्वर के बोला नहीं जा सकता, हर व्यंजन में 'अ' स्वर मिला होता है।
जैसे: क् में अ जोड़ने से 'क' बनता है और ख् में अ जोड़ने से 'ख' बनता है। हिंदी वर्णमाला में कुल उनतालीस (39) व्यंजन होते हैं।
व्यंजन के प्रकार इस प्रकार हैं:
१. क वर्ग – क, ख, ग, घ, ङ
२. च वर्ग – च, छ, ज, झ, ञ
३. ट वर्ग – ट, ठ, ड, ढ, ण
४. त वर्ग – त, थ, द, ध, न
५. प वर्ग – प, फ, ब, भ, म
६. अन्तःस्थ – य, र, ल, व
७. ऊष्म – श, ष, स, ह
८. संयुक्त – क्ष \( = \) क \( + \) ष \( + \) अ
त्र \( = \) त् \( + \) र \( + \) अ
ज्ञ \( = \) ज् \( + \) ञ \( + \) अ
श्र \( = \) श \( + \) र् \( + \) अ
In simple words: व्यंजन वे अक्षर हैं जिन्हें बोलने के लिए स्वरों की मदद लेनी पड़ती है। हिंदी में 39 व्यंजन होते हैं, जिनके कई समूह हैं जैसे 'क वर्ग', 'च वर्ग' आदि।

🎯 Exam Tip: व्यंजन की परिभाषा में 'स्वरों की सहायता' और 'अ स्वर का मिला होना' बताना जरूरी है। उनके विभिन्न वर्गों और संयुक्त व्यंजनों के उदाहरण भी दें।

अनुस्वार (अं)- सभी पंचम वर्णों (ङ, ञ, ण, न, म) को एक बिंदु (-) के रूप में लिखा जाता है, जिसे अनुस्वार कहते हैं। जैसे: गंगा, मंगल, जंगल आदि।

विसर्ग (अः)- इसे ऊपर-नीचे दो बिंदुओं (:) के रूप में दिखाया जाता है। जैसे: प्रातः, अतः आदि।

मात्रा- व्यंजन को पूरा करने के लिए जिन स्वर वर्णों के चिह्नों का उपयोग किया जाता है, उन्हें मात्रा कहते हैं। मात्राएं नीचे दी गई हैं। खास बात यह है कि 'अ' सभी व्यंजनों में मिला होता है, इसलिए इसकी अपनी कोई मात्रा नहीं होती।

प्रमुख विराम चिह्न- हिंदी में लिखते समय नीचे दिए गए मुख्य विराम चिह्नों का उपयोग किया जाता है:
१. अल्प विराम (,)
२. अर्ध विराम (;)
३. पूर्ण विराम (।)
४. प्रश्नवाचक चिह्न (?)
५. विस्मयादिबोधक चिह्न (!)
६. लाघव चिह्न (०)
७. विवरण चिह्न (:)
८. योजक चिह्न (-)
९. निर्देशक चिह्न (-)
१०. अवतरण चिह्न (” “), (' ')

शब्द

शब्द की परिभाषा- वर्णों के ऐसे समूह को शब्द कहते हैं जिसका कोई अर्थ होता है।
जैसे: राम, सीता, पुस्तक आदि।

शब्दों के भेद

अर्थ के आधार पर शब्द दो तरह के होते हैं:
(१) सार्थक शब्द- ऐसे शब्द जिनका कोई खास मतलब होता है, उन्हें 'सार्थक शब्द' कहते हैं। जैसे: पुस्तक, आम, लड़का आदि।
(२) निरर्थक शब्द- ऐसे शब्द जिनका कोई मतलब नहीं होता, उन्हें 'निरर्थक शब्द' कहते हैं। जैसे: कस्तपु, काड़ल, लमक आदि।

व्याकरण के अनुसार शब्द दो प्रकार के होते हैं:

1. विकारी तथा
2. अविकारी (अव्यय)

1. विकारी शब्द- वे शब्द जिनके रूप लिंग, वचन और कारक के कारण बदल जाते हैं, उन्हें 'विकारी शब्द' कहते हैं। ये चार तरह के होते हैं: संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया और विशेषण।

2. अविकारी शब्द (अव्यय) - वे शब्द जिनके रूप लिंग, वचन और कारक के कारण कभी नहीं बदलते, यानी हमेशा एक जैसे रहते हैं, उन्हें 'अविकारी शब्द' या 'अव्यय' कहते हैं। ये मुख्य रूप से चार तरह के होते हैं: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।

वाक्य

 

Question 7. वाक्य किसे कहते हैं?
Answer: शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं जिससे पूरी बात समझ में आ जाती है। यह हमारी भाषा का आधार है।
जैसे: भारत हमारी मातृभूमि है। यह वाक्य चार शब्दों से बना है और इन शब्दों के समूह से पूरी बात समझ में आ जाती है।
In simple words: वाक्य शब्दों का वह झुंड है जिससे हम अपनी बात पूरी तरह कह पाते हैं।

🎯 Exam Tip: वाक्य की परिभाषा में 'शब्दों का सार्थक समूह' और 'पूरी बात समझ में आने' वाले गुण को अवश्य शामिल करें।

१. संज्ञा- किसी वस्तु, स्थान, प्राणी या किसी भाव के नाम को 'संज्ञा' कहते हैं। यह किसी चीज की पहचान बताती है।
जैसे: पुस्तक, आगरा, राम, श्याम, राहुल आदि।

संज्ञा के भेद

संज्ञा के पाँच भेद होते हैं-

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा- जिस शब्द से किसी एक खास वस्तु, व्यक्ति या जगह का पता चलता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे: राम, सीता, गंगा, यमुना, भारत, उत्तर प्रदेश आदि।

2. जातिवाचक संज्ञा- जिस शब्द से एक ही प्रकार की सभी चीजों या प्राणियों का पता चलता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे: लड़की, गाय, नदी, गेंद, माता, पिता, भाई, बहन आदि।

3. समूहवाचक संज्ञा- जिस शब्द से प्राणियों या चीजों के समूह या एक साथ इकट्ठे होने का बोध होता है, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे: भीड़, मंडली, दल, सभा, कक्षा, सेना आदि।

4. भाववाचक संज्ञा- जिस संज्ञा शब्द से किसी के गुण, दशा या व्यापार का बोध होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। यह ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें हम छू नहीं सकते, केवल महसूस कर सकते हैं।
जैसे: सुंदरता, मोटापा, कालापन, मिठास, कड़वाहट, अधिकता, कठोरता आदि।

5. द्रव्यवाचक संज्ञा- ऐसे शब्द जिनसे मापे या तौले जाने वाले पदार्थों का ज्ञान होता है, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे: चावल, दाल, आटा, बेसन, कपड़ा, सब्जी, रस्सी आदि।

२. सर्वनाम- जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, उन्हें 'सर्वनाम' कहते हैं। यह भाषा को आसान और दोहराव रहित बनाता है।
जैसे: मैं, वह, तुम आदि।
उदाहरण- वीणा लखनऊ में रहती है। वह स्कूल जाती है। यहाँ 'वह' शब्द सर्वनाम है। मैं, हम, वह, तुम, आप, कौन, कोई आदि भी सर्वनाम हैं।

सर्वनाम के भेद

सर्वनाम के छः भेद होते हैं-

  • पुरुषवाचक सर्वनाम, जैसे: मैं, हम, तुम, वह आदि।
  • निश्चयवाचक सर्वनाम, जैसे: यह, ये, वह, वे आदि।
  • अनिश्चयवाचक सर्वनाम, जैसे: कोई, कुछ आदि।
  • संबंधवाचक सर्वनाम, जैसे: जो-सो, जैसा-वैसा आदि।
  • प्रश्नवाचक सर्वनाम, जैसे: क्या, कौन आदि।
  • निजवाचक सर्वनाम, जैसे: अपने आप, स्वयं, स्वतः, खुद, आप ही आप आदि।

३. क्रिया- जिस शब्द से किसी काम का करना या होना पाया जाता है, उसे 'क्रिया' कहते हैं। क्रिया वाक्य का एक महत्वपूर्ण अंग है जो कार्य को बताता है।
जैसे: दौड़ना, पढ़ना, खेलना, लिखना, खाना आदि।
उदाहरण- सीता खेलती है। राम पढ़ता है। इन वाक्यों में 'खेलना' और 'पढ़ना' क्रियाएँ हैं।
अन्य उदाहरण: चलना, जाना, गाना, इत्यादि।

क्रिया के भेद:
(i) सकर्मक क्रिया, जैसे: खाना, पीना, पहनना इत्यादि।
(ii) अकर्मक क्रिया, जैसे: रोना, हँसना, दौड़ना आदि।

४. विशेषण- जो शब्द किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं। यह किसी चीज के बारे में अतिरिक्त जानकारी देता है।
जैसे: काला, अच्छा, मोटा, सुंदर आदि।

विशेषण के भेद

  • गुणवाचक विशेषण, जैसे: अच्छा, बुरा, काला, मोटा, पीला आदि।
  • परिमाणवाचक विशेषण, जैसे: किलोग्राम, मीटर, लीटर आदि।
  • संख्यावाचक विशेषण, जैसे: एक, दो, दस, सौ, हजार आदि।
  • सार्वनामिक विशेषण, जैसे: वह, यह, ऐसा, वैसा, तुम्हारा, मेरा आदि।

क्रिया-विशेषण- क्रिया-विशेषण उन शब्दों को कहते हैं, जो क्रियाओं की विशेषताएँ बताते हैं। ये बताते हैं कि कोई काम कैसे, कब, कहाँ या कितनी मात्रा में हो रहा है।
जैसे: साइकिल तेज दौड़ती है। गौरव अच्छा लिखता है। यहाँ 'तेज' और 'अच्छा' क्रिया-विशेषण हैं।

लिंग

परिभाषा- जिस शब्द से किसी वस्तु या प्राणी के पुरुष या स्त्री जाति का बोध होता है, उसे 'लिंग' कहते हैं। यह व्याकरण में शब्द के भेद को समझने में मदद करता है।

लिंग के भेद

लिंग के दो भेद होते हैं-

1. पुल्लिंग- जिस शब्द से पुरुष जाति का बोध होता है, उसे 'पुल्लिंग' कहते हैं। यह पुरुष वर्ग की चीजों या प्राणियों को दर्शाता है।
जैसे: राम, आम, घोड़ा, हाथ, पैर, सिर, शरीर, टमाटर, आलू, बैंगन, अनार, काजू आदि।

2. स्त्रीलिंग- जिस शब्द से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे 'स्त्रीलिंग' कहते हैं। यह स्त्री वर्ग की चीजों या प्राणियों को दर्शाता है।
जैसे: सीता, गंगा, लड़की, आँख, नाक, गरदन, जाँघ, देह, काया, कोयल, भाषा, लिपि, वर्तनी आदि।

वचन

वचन की परिभाषा- संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से किसी वस्तु या प्राणी की संख्या का पता चलता है, उसे 'वचन' कहते हैं। यह बताता है कि कोई चीज एक है या अनेक।
जैसे: गाय-गायें, पुस्तक-पुस्तकें, आँख-आँखें, लड़का-लड़के, गाड़ी-गाड़ियाँ, डंडा-डंडे, कलम-कलमें आदि।

वचन के भेद

वचन के दो भेद होते हैं-

  • एकवचन- जिससे केवल एक वस्तु या प्राणी का पता चलता है, उसे 'एकवचन' कहते हैं।
    जैसे: गाय, पुस्तक, लड़का आदि।
  • बहुवचन- जिससे एक से ज्यादा वस्तुओं या प्राणियों का पता चलता है, उसे 'बहुवचन' कहते हैं।
    जैसे: गायें, पुस्तकें, लड़के आदि।

काल

काल की परिभाषा- किसी काम के होने का समय ही 'काल' कहलाता है। यह क्रिया के समय को बताता है।

काल के भेद

काल के तीन भेद होते हैं-

  • वर्तमानकाल- जिस क्रिया से काम का अभी चल रहे समय में होना पाया जाता है, उसे 'वर्तमानकाल' कहते हैं।
    जैसे: गीता खाना खा रही है।
  • भूतकाल- जिस क्रिया से काम का बीते हुए समय में होना पाया जाता है, उसे 'भूतकाल' कहते हैं।
    जैसे: गीता ने खाना खाया।
  • भविष्यत्काल- जिस क्रिया से काम का आने वाले समय में होना पाया जाता है, उसे 'भविष्यत्काल' कहते हैं।
    जैसे: गीता खाना खाएगी।

कारक

कारक की परिभाषा- संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों, खासकर क्रिया के साथ जाना जाता है, उसे कारक कहते हैं। हिंदी में कारक आठ होते हैं-

विभक्तिकारकचिह्नव्याख्या
प्रथमाकर्तानेजो काम करे
द्वितीयाकर्मकोजिस पर क्रिया का फल पड़े
तृतीयाकरणसे, के द्वाराजिस साधन से कार्य किया जाए
चतुर्थीसंप्रदानको, के लिएकर्ता जिसके लिए क्रिया करे
पंचमीअपादानसे (अलग होने में)जिससे अलग होने का पता चले
षष्ठीसंबंधका, के, कीजिससे संबंध का पता चले
सप्तमीअधिकरणमें, परजिससे क्रिया के होने के स्थान तथा समय का बोध हो
अष्टमीसंबोधनहे, अरे, ओजिससे किसी को बुलाया जाए

विभक्ति-कारक के चिह्नों को 'विभक्ति' कहते हैं। ये चिह्न वाक्य में शब्दों के बीच संबंध को दर्शाते हैं।
जैसे: ने, को, से, के लिए, को, से आदि।

विलोम शब्द (विपरीतार्थक शब्द)

विलोम शब्द- जो शब्द एक-दूसरे का उल्टा या विपरीत अर्थ बताते हैं, उन्हें विपरीतार्थक शब्द कहते हैं। ये शब्द अर्थ में एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत होते हैं।
जैसे: दिन का विलोम शब्द रात है।

शब्दविलोमशब्दविलोमशब्दविलोम
उदारअनुदारकमअधिकउठनाबैठना
कपूतसपूतउदयअस्तकठोरनम्र
अंतआदिएकअनेकपृथ्वीआकाश
स्वर्गनरककालासफेदसुखदुःख

शुद्ध-अशुद्ध शब्द

अशुद्धशुद्धअशुद्धशुद्धअशुद्धशुद्ध
आग्याआज्ञाप्रयाप्तपर्याप्तशांतीशांति
प्रगटप्रकटप्रभात्मापरमात्मापरीश्रमपरिश्रम
सुन्द्रसुंदरजन्ताजनतानदिनदी

पर्यायवाची शब्द

१. अश्व- घोड़ा, हय, तुरंग, घोटक, सैन्धव आदि।
२. अमृत- सुधा, सोम, पीयूष, अमिय, सुरभोग आदि।
३. असुर- राक्षस, निशाचर, दानव, दैत्य, आदि।
४. आग- पावक, अनल, अग्नि, कृशानु, हुताशन आदि।
५. आकाश- गगन, नभ, अंबर, शून्य, व्योम आदि।
६. आँख- नेत्र, नयन, चक्षु, लोचन, दृग आदि।
७. दिन- दिवस, वासर, अह्न, दिवा आदि।
८. नदी- सरिता, सलिला, तरंगिणी, तटिनी, निर्झरिणी आदि।

मुहावरे

१. प्राणों की बाजी लगाना = जान पर खेलना।
प्रयोग- मातृभूमि की रक्षा के लिए भारतीय वीरों ने प्राणों की बाजी लगा दी।

२. कमर तोड़ देना = बहुत नुकसान पहुँचाना।
प्रयोग- व्यापार में अचानक घाटा हो जाने से हमारी कमर टूट गई।

३. पीछे हट जाना = हार मान लेना।
प्रयोग- सैनिक पीछे हटना नहीं जानते।

लोकोक्तियाँ

भले का अंत भला – भलाई का फल हमेशा अच्छा होता है।

आ बैल मुझे मार – जान-बूझकर खुद मुसीबत मोल लेना।

एक और एक ग्यारह – एकता में बहुत शक्ति होती है।

एक हाथ से ताली नहीं बजती – गलती दोनों तरफ से होती है, सिर्फ एक की नहीं।

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