UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 26 Problems of Scheduled Castes and Tribes

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Detailed Chapter 26 अनुसूचित जाति और जनजाति की समस्याएं UP Board Solutions for Class 12 Sociology

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Class 12 Sociology Chapter 26 अनुसूचित जाति और जनजाति की समस्याएं UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

 

Question 1. अनुसूचित जाति से क्या आशय है ? इनकी समस्याओं का उल्लेख करते हुए भारत सरकार द्वारा किये गये निराकरण के प्रयास बताइए। [2010, 15]
या
भारत में अनुसूचित जातियों की दशाओं का वर्णन कीजिए। [2016]
या
अनुसूचित जातियों की प्रमुख समस्याओं को स्पष्ट कीजिए। [2007, 08, 09, 10, 11, 12, 13]
या
अनुसूचित जातियों की प्रगति के लिए चार सुझाव दीजिए। [2011]
या
भारत में अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं की व्याख्या कीजिए। [2015]

Answer: अनुसूचित जाति का अर्थ (Meaning of Scheduled Castes):
भारतीय समाज में ऐतिहासिक रूप से जिन जातियों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा माना गया और जिन्हें अस्पृश्यता का सामना करना पड़ा, उन्हें 'अनुसूचित जातियां' (Scheduled Castes) कहा जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी सूची में शामिल जातियों को यह दर्जा प्राप्त है।

अनुसूचित जातियों की प्रमुख समस्याएं (Major Problems of Scheduled Castes):
1. सामाजिक समस्याएं: इन्हें समाज में निम्न स्थान दिया गया और लंबे समय तक अस्पृश्यता (छुआछूत) का सामना करना पड़ा। सार्वजनिक कुओं, मंदिरों और तालाबों के उपयोग पर प्रतिबंध जैसी सामाजिक अक्षमताएं इनके साथ जुड़ी रहीं।
2. आर्थिक समस्याएं: अधिकांश अनुसूचित जातियां भूमिहीन कृषि मजदूर हैं। वे गरीबी, कर्ज और बंधुआ मजदूरी के जाल में फंसे रहे हैं और उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलता।
3. शैक्षणिक समस्याएं: गरीबी और सामाजिक भेदभाव के कारण इन जातियों में साक्षरता दर बहुत कम रही है। शिक्षा के उचित अवसरों की कमी के कारण इनका बौद्धिक विकास बाधित हुआ।
4. धार्मिक अक्षमताएं: इन्हें धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन और मंदिरों में प्रवेश से वंचित रखा गया।

भारत सरकार द्वारा निराकरण के प्रयास (Government Efforts for Upliftment):
1. संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 17 द्वारा अस्पृश्यता का पूर्णतः अंत कर दिया गया है। अनुच्छेद 46 के तहत इनके शैक्षणिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है।
2. कानूनी उपाय: अस्पृश्यता निवारण के लिए 'नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955' और 'अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989' लागू किए गए हैं।
3. आरक्षण की व्यवस्था: सरकारी नौकरियों, लोकसभा, विधानसभाओं और शैक्षणिक संस्थानों में इनके लिए सीटें आरक्षित की गई हैं ताकि इनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
4. कल्याणकारी योजनाएं: सरकार द्वारा मुफ्त शिक्षा, छात्रवृत्ति, छात्रावास की सुविधा और स्वरोजगार के लिए कम ब्याज पर ऋण प्रदान किया जाता है।

प्रगति के लिए चार प्रमुख सुझाव (Four Suggestions for Progress):
1. ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।
2. भूमिहीन परिवारों को कृषि योग्य भूमि का आवंटन किया जाए ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
3. कुटीर और लघु उद्योगों के माध्यम से स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं।
4. सामाजिक जागरूकता अभियानों के जरिए जातिगत भेदभाव और पूर्वाग्रहों को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
In simple words: Scheduled Castes are groups of people who historically faced social discrimination and unfair treatment. The government has made special laws, provided reservations in education and jobs, and started welfare schemes to help them live with dignity and equality.

🎯 Exam Tip: To score full marks, clearly divide your answer into subheadings like 'Meaning', 'Major Problems', and 'Government Measures'. Mentioning constitutional articles like Article 17 (abolition of untouchability) will impress the examiner.

 

Question. भारत में अनुसूचित जातियों की स्थिति सुधारने के प्रमुख उपायों को लिखिए। [2010, 11]
या
अनुसूचित जातियों की प्रमुख समस्याओं के उन्मूलन के लिए किए गये प्रयासों को बताइए। [2011, 12]
या
अनुसूचित जनजातियों के विकास सम्बन्धी कार्यक्रमों का मूल्यांकन कीजिए। भारत में अनुसूचित जातियों की मुख्य समस्याएँ बताइए। [2014]
या
भारत में अनुसूचित जातियों की प्रमुख समस्याएँ क्या हैं? स्पष्ट कीजिए। [2015, 16]
या
अनुसूचित जातियों की प्रगति के लिए प्रमुख उपायों का सुझाव दें। [2015, 16]
या
जनजातियों की समस्याओं को दूर करने के महत्त्वपूर्ण उपायों का वर्णन कीजिए। [2016]
या
भारत में अनुसूचित जनजातियों की प्रमुख समस्याओं का विवेचन कीजिए। [2016]

Answer: अनुसूचित जाति का अर्थ एवं परिभाषाएँ: भारत अनेक धर्मों और जातियों का देश है। समाज में व्याप्त विसंगतियों के कारण यहाँ की कुछ जातियाँ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में पिछड़ गयीं। इन जातियों की नियोग्यताओं के कारण इन्हें अछूत या अस्पृश्य कहा गया। 2011 ई० की जनगणना के अनुसार भारत में अनुसूचित जातियाँ और अनुसूचित जनजातियाँ राष्ट्र की कुल जनसंख्या का लगभग एक-चौथाई भाग थीं। आर्थिक-धार्मिक नियोग्यताएँ लाद देने के कारण अनुसूचित जातियाँ राष्ट्र की मुख्य धारा से कट गयीं। सुख-सुविधाओं से वंचित रह जाने के कारण ये जातियाँ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में पिछड़ गयीं। इन्हें समाज से बहिष्कृत कर दूर एक कोने में रहने के लिए बाध्य कर दिया गया। भारतीय संविधान में इन पिछड़ी और दुर्बल जातियों को सूचीबद्ध किया गया तथा इन्हें अनुसूचित जाति कहकर सम्बोधित किया गया। अनुसूचित जाति को विभिन्न विद्वानों ने निम्नवत् परिभाषित किया है:

डॉ० जी० एस० घुरिये के अनुसार, “मैं अनुसूचित जातियों को उस समूह के रूप में परिभाषित कर सकता हूँ जिनका नाम इस समय अनुसूचित जातियों के अन्तर्गत आदेशित है।”

डॉ० डी० एन० मजूमदार के अनुसार, “वे सभी समूह जो अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक नियोग्यताओं से पीड़ित हैं तथा जिनके प्रति इन नियोग्यताओं को समाज की उच्च जातियों ने परम्परागत तौर पर लागू किया था, अस्पृश्य जातियाँ कही जा सकती हैं।”

“संविधान की धारा 341 और 342 में सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से जिन जातियों को सूचीबद्ध करके राष्ट्रपति द्वारा विज्ञप्ति जारी करके अनुसूचित घोषित किया है, अनुसूचित जातियाँ कहलाती हैं।”

संविधान की पाँचवीं अनुसूची में विशेष कार्यक्रम के लिए जिन जातियों का चुनाव किया गया है, उन्हें अनुसूचित जाति कहा जाता है। भारतीय संविधान में उत्तर प्रदेश की 66 जातियों को सूचीबद्ध करके अनुसूचित जाति घोषित किया गया है। इनमें घुसिया, जाटव, वाल्मीकि, धोबी, पासी और खटीक मुख्य हैं।

अनुसूचित जातियों की समस्याएँ: भारत की अनुसूचित जातियाँ अनेक समस्याओं और कठिनाइयों से ग्रसित हैं। ये समस्याएँ इनके विकास-मार्ग की प्रमुख बाधाएँ हैं। अनुसूचित जातियों की मुख्य समस्याएँ निम्नलिखित हैं:

1. अस्पृश्यता की समस्या – भारत में अनुसूचित जातियों के सम्मुख सबसे बड़ी समस्या अस्पृश्यता की रही है। उच्च जाति के व्यक्ति कुछ व्यवसायों; जैसे- चमड़े का काम, सफाई का काम, कपड़े धोने का काम आदि करने वाले व्यक्तियों को अपवित्र मानते थे। उनके साथ भोजन-पानी का सम्बन्ध नहीं रखते थे। इन्हें लोग अछूत कहते थे। अनुसूचित जातियों को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं दिया जाता था और उन्हें सार्वजनिक स्थानों के उपयोग से भी वंचित रखा जाता था।
In simple words: अनुसूचित जातियाँ समाज का वह हिस्सा हैं जिन्हें ऐतिहासिक रूप से भेदभाव और छुआछूत का सामना करना पड़ा। संविधान और कानून के माध्यम से अब उनकी स्थिति को सुधारने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय समाजशास्त्रियों जैसे डॉ. घुरिये और डॉ. मजूमदार की परिभाषाओं को सटीक रूप से लिखें और महत्वपूर्ण संवैधानिक धाराओं (341 और 342) को रेखांकित करें।

अर्थात् नीची जाति की छाया पड़ना तक बुरा माना जाता था। पूजा-पाठ के स्थानों पर इनके जाने पर प्रतिबन्ध था, कहीं-कहीं पर तो अन्तिम-संस्कार के लिए भी इनका स्थान अलग निर्धारित किया जाता था। अतः अनुसूचित जातियों को अस्पृश्यता की समस्या का सामना करना पड़ता था।

 

2. निर्धनता की समस्या
अनुसूचित जाति के लोग आर्थिक दृष्टि से बहुत अधिक पिछड़ी स्थिति में रहे हैं। इनके पास स्वयं के साधन (खेती, व्यापार आदि) नहीं थे। अतः अधिकांशतः इन्हें किसानों के यहाँ अथवा अन्य स्थानों पर मजदूरी करनी पड़ती थी। कृषि-क्षेत्र में इन्हें फसल का बहुत ही कम भाग मिल पाता था तथा मजदूरी भी नाम-मात्र की मिल पाती थी। आज भी अनुसूचित जाति के लोग निर्धनता की रेखा के नीचे अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। निर्धनता के कारण अनुसूचित जाति के सदस्य ऋणों के भार से दब गये हैं। निर्धनता इनके लिए एक अभिशाप बनी हुई है।

 

3. अशिक्षा की समस्या
अनुसूचित जाति के लोग अज्ञानी व अशिक्षित हैं। सामान्य जनसंख्या के अनुपात में इनमें साक्षरता भी आधी है। परिवार के छोटे-छोटे बच्चों को ही काम पर लगा दिया जाता है, वे स्कूल से दूर रहते हैं और यदि स्कूल जाते भी हैं तो उनमें से आधे प्राथमिक स्तर पर ही रुक जाते हैं। अशिक्षा और अज्ञानता सभी बुराइयों का आधार होती है। इस कारण अनुसूचित जाति के लोगों में अनेक प्रकार की बुराइयों ने घर बना लिया है। अशिक्षा इनके विकास के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है।

 

4. ऋणग्रस्तता की समस्या
अनुसूचित जाति के लोग निर्धन हैं, इसलिए ऋणग्रस्तता से पीड़ित हैं। ऋणग्रस्तता के कारण ये जिस किसान के यहाँ एक बार काम पर लग जाते हैं, पूरे जीवन वहीं पर बन्धक बने रहते हैं तथा जीवन भर ऋण मुक्त नहीं हो पाते हैं। ऋण चुकाने का काम पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है, परन्तु उन्हें ऋण से मुक्ति ही नहीं मिल पाती। ऋणों से छुटकारा न मिल पाना इनकी नियति बन जाती है।

 

5. रहन-सहन का स्तर नीचा
अनुसूचित जाति के लोगों का जीवन-स्तर निम्न है। वे आधा पेट खाकर व अर्द्ध-नग्न रहकर जीवन व्यतीत करते हैं। निर्धनता और बेरोजगारी इनके रहनसहन के नीचे स्तर के लिए उत्तरदायी हैं।

 

6. आवास की समस्या
अनुसूचित जाति के निवास स्थान भी बहुत ही शोचनीय दशा में हैं। ये लोग गाँव के सबसे गन्दे और खराब भागों में ऐसी झोंपड़ियों में रहते हैं जहाँ सफाई का नामोनिशान नहीं होता। बरसात में ये झोंपड़े चूने लगते हैं। कच्चा फर्श और वर्षा का जल मिलकर इनके जीवन को नारकीय बना देता है। धन के अभाव में ये लोग कच्ची मिट्टी के घास-फूस के ढके आवास ही बना पाते हैं।

 

7. शोषण की समस्या
अनुसूचित जाति के लोगों को बेगार करनी पड़ती है। उच्च जाति के लोग उन्हें बिना मजदूरी दिये अनेक प्रकार के कार्य कराते हैं, इन लोगों के पास ऋण लेते समय गिरवी रखने के लिए भी कुछ नहीं होता। इसलिए वे ऋण के बदले में अपने परिवार के स्त्री तथा बच्चों की स्वतन्त्रता को गिरवी रख देते हैं। यह दोस्ती पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती है। शोषण इनके जीवन को अभावमय और खोखला बना देता है। शोषण की समस्या के कारण इनका जीवन दुःखपूर्ण हो जाता है।

 

8. बेरोजगारी की समस्या
अनुसूचित जाति के सामने बेकारी और अर्द्ध-बेकारी की समस्या भी गम्भीर है। रोजगार के अभाव में अनुसूचित जाति के लोग अपना गाँव छोड़कर अपने परिवार के सदस्यों के साथ नगरीय क्षेत्रों की ओर पलायन कर जाते हैं, जिसके कारण उनके बच्चों की शिक्षा नहीं हो पाती तथा उनका चारित्रिक व नैतिक पतन भी होता है। बेरोजगारी के कारण निर्धनता का जन्म होता है, जो उनके जीवन में विष घोल देती है।

 

भारत सरकार द्वारा निराकरण (विकास) के लिए किये गये प्रयत्न (सुविधाएँ)

सरकार द्वारा अनुसूचित जाति व जनजाति की समस्याओं का निराकरण कर उन्हें सामान्य सामाजिक स्तर तक लाने के लिए अनेक प्रयत्न किये जा रहे हैं, जो निम्नवत् हैं:

Question 1. लोकसभा व विधानमण्डलों में स्थान आरक्षित
Answer: अनुसूचित जातियों के लिए लोकसभा में 545 सीटों में से 79 सीटें और 41 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं। विधानसभाओं में भी अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित हैं। यह आरक्षण इन वर्गों को देश की मुख्य राजनीतिक धारा में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किया गया है।
In simple words: लोकसभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए कुछ सीटें सुरक्षित रखी गई हैं ताकि वे भी देश के कानून बनाने में भाग ले सकें।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में आरक्षित सीटों की सही संख्या (79 और 41) लिखना न भूलें, इससे पूरे अंक मिलते हैं।

 

Question 2. सरकारी सेवाओं में स्थान सुरक्षित
Answer: सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों के लिए 15 प्रतिशत स्थान सुरक्षित रखे गये हैं। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जनजातियों के लिए भी उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
In simple words: सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जातियों के लोगों के लिए 15% सीटें आरक्षित की गई हैं ताकि उन्हें रोजगार के समान अवसर मिल सकें।

🎯 Exam Tip: सरकारी सेवाओं में आरक्षण के प्रतिशत (15%) को स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।

 

Question 3. पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था
Answer: अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्यों के लिए जनसंख्या के अनुपात में तीनों स्तरों की पंचायतों (अर्थात् ग्राम-पंचायतों, क्षेत्र-समितियों तथा जिला परिषदों) में आरक्षण की व्यवस्था की गयी है, जिससे सामाजिक न्याय का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस व्यवस्था से स्थानीय स्वशासन में समाज के सबसे निचले तबके की भागीदारी मजबूत हुई है।
In simple words: गाँव और जिले के स्तर पर होने वाले चुनावों (पंचायतों) में इन वर्गों के लिए उनकी आबादी के हिसाब से सीटें सुरक्षित की गई हैं ताकि वे अपने क्षेत्र का विकास खुद कर सकें।

🎯 Exam Tip: तीनों स्तरों (ग्राम-पंचायत, क्षेत्र-समिति, जिला परिषद) के नाम लिखना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

 

Question 4. अनुसूचित जातियों के लिए अस्पृश्यता निवारण सम्बन्धी कानून
Answer: संविधान में भी अस्पृश्यता को अपराध घोषित किया गया है। अस्पृश्यता अपराध अधिनियम, 1955 को और अधिक प्रभावशाली बनाने एवं दण्ड-व्यवस्था कठोर करने के लिए इसमें संशोधन कर 19 नवम्बर, 1976 से इसका नाम नागरिक अधिकार सुरक्षा अधिनियम, 1955 कर दिया गया है। इस अधिनियम के अनुसार किसी भी प्रकार से अस्पृश्यता के बारे में प्रचार करना या ऐतिहासिक व धार्मिक आधार पर अस्पृश्यता को व्यवहार में लाना अपराध माना जाएगा। इस अधिनियम का उल्लंघन करने पर जेल और दण्ड दोनों का प्रावधान है। यह कानून समाज में समानता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
In simple words: छुआछूत को पूरी तरह से गैरकानूनी घोषित किया गया है। अगर कोई छुआछूत को बढ़ावा देता है या ऐसा व्यवहार करता है, तो उसे जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अधिनियमों के वर्ष (1955 और 1976) को सही-सही लिखना अच्छे अंक प्राप्त करने की कुंजी है।

 

Question 5. शैक्षिक कार्यक्रम
Answer: अनुसूचित जाति/जनजातियों के छात्रों को निःशुल्क शिक्षा, छात्रवृत्ति तथा पुस्तकीय सहायता दी जाती है। इन जातियों के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावासों की व्यवस्था के अतिरिक्त इनके लिए निःशुल्क प्रशिक्षण की भी व्यवस्था है। मेडिकल कॉलेजों, इन्जीनियरिंग कॉलेजों व अन्य प्राविधिक शिक्षण-संस्थानों में अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के छात्रों के लिए स्थान सुरक्षित हैं। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य इन वर्गों के बच्चों को उच्च शिक्षा के समान अवसर प्रदान करना है।
In simple words: गरीब बच्चों को पढ़ाई के लिए मुफ्त किताबें, रहने के लिए हॉस्टल और वजीफा (स्कॉलरशिप) दिया जाता है। बड़े कॉलेजों में भी उनके लिए सीटें सुरक्षित होती हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तर में निःशुल्क शिक्षा, छात्रवृत्ति और छात्रावास जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 6. आर्थिक उत्थान योजना
Answer: अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के आर्थिक उत्थान और कुटीर उद्योगों व कृषि आदि के लिए सरकार द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। अनुसूचित जनजाति के बहुलता वाले क्षेत्रों में विशेष विकास खण्ड खोले जा रहे हैं, जहाँ सामान्य से दोगुनी धनराशि विकास कार्यों के लिए व्यय की जाती है। मेडिकल, इन्जीनियरिंग तथा कानून के स्नातकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु निजी व्यवसाय करने के लिए राज्य द्वारा आर्थिक अनुदान प्रदान किया जाता है। भारत सरकार ने कुछ ऐसे आर्थिक कार्यक्रम प्रारम्भ भी किये हैं जिनका उद्देश्य अनुसूचित जातियों के लिए विशेष ऋण की सुविधा उपलब्ध कराना है। इन योजनाओं से इन वर्गों के युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने में बहुत मदद मिलती है।
In simple words: सरकार इन वर्गों के लोगों को खेती और छोटे उद्योग शुरू करने के लिए पैसे की मदद और कम ब्याज पर लोन देती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

🎯 Exam Tip: 'विशेष विकास खण्ड' और 'आर्थिक अनुदान' जैसे तकनीकी शब्दों को अपने उत्तर में शामिल करें।

 

Question 7. स्वास्थ्य, आवास एवं रहन-सहन के उत्थान की योजनाएँ
Answer: अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों की दीन दशा के कारण सरकार द्वारा इन्हें भूमि और अनुदान प्रदान किया जाता है। भूमिहीन श्रमिकों को निःशुल्क कानूनी सहायता भी दी जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1993 में निर्णय लिया था कि अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में 47 में और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में 5 में राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय स्थापित किये जाएँगे। अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्यों की जमीन जिलाधिकारी के पूर्वानुमोदन के बिना गैरअनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य को हस्तान्तरित करने सम्बन्धी नियम का कड़ाई के साथ पालन कराया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बल वर्ग आवास-निर्माण तथा इन्दिरा आवास निर्माण और मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। यही नहीं, भूमिहीनों को सीलिंग भूमि का आवंटन किया जा रहा है। एकीकृत ग्राम्य विकास कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, लघु औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, समस्याग्रस्त ग्रामों में पेयजल व्यवस्था, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना के माध्यम से अनुसूचित जाति-जनजाति के स्वास्थ्य, रहन-सहन एवं आवास आदि के उत्थान के लिए सरकार द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं। इन व्यापक कल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों के जीवन स्तर में काफी सुधार आया है।
In simple words: सरकार गरीब और भूमिहीन लोगों को घर बनाने के लिए जमीन और पैसे देती है। गाँवों में पीने के पानी, अस्पताल और रोजगार की योजनाएँ चलाई जा रही हैं ताकि उनका जीवन बेहतर हो सके।

🎯 Exam Tip: उत्तर प्रदेश सरकार के 1993 के निर्णय और भूमि हस्तान्तरण के कड़े नियमों का उल्लेख करने से उत्तर बहुत मजबूत बनता है।

 

Question 2. भारत में जनजातियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए। [2016]
या
भारतीय जनजातियों की मुख्य समस्याएँ क्या हैं? उनके निवारण के सुझाव दीजिए। [2014]
या
अनुसूचित जनजातियों की मुख्य आर्थिक समस्याएँ बताइए। [2007]
या
जनजातियों की प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश डालिए। [2013, 15]
या
अनुसूचित जनजातियों की चार मुख्य समस्याएँ लिखिए। [2015]

Answer: जनजातीय नर-नारी भारतीय समाज के अभिन्न अंग हैं। भारत की जनजातियों की समस्याएँ बहुत ही जटिल और विस्तृत हैं, क्योंकि आधुनिक विज्ञान और प्रगति से दूर रहने के कारण ये भारतीय समाज के पिछड़े हुए वर्ग हैं। इन समस्याओं का समय पर समाधान करना हमारे देश के समावेशी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में जनजातियों का उल्लेख है। उन्हें अनुसूचित जनजातियाँ कहा गया है। भारतीय जनजातियों की समस्याएँ निम्नवत् हैं:

(अ) सांस्कृतिक समस्याएँ:
भारतीय जनजातियाँ बाहरी संस्कृतियों के सम्पर्क में आती जा रही हैं, जिसके कारण जनजातियों के जीवन में अनेक गम्भीर सांस्कृतिक समस्याएँ उत्पन्न हो गयी हैं और उनकी सभ्यता के सामने एक गम्भीर स्थिति उत्पन्न हो गयी है। मुख्य सांस्कृतिक समस्याएँ निम्नलिखित हैं:

1. भाषा सम्बन्धी समस्या: भारतीय जनजातियाँ बाहरी संस्कृतियों के सम्पर्क में आ रही हैं, जिसके कारण 'दो भाषावाद' की समस्या उत्पन्न हो गयी है। अब जनजाति के लोग अपनी भाषा बोलने के साथ-साथ सम्पर्क भाषा भी बोलने लगे हैं। कुछ लोग तो अपनी भाषा के प्रति इतने उदासीन हो गये हैं कि वे अपनी भाषा को भूलते जा रहे हैं। इससे विभिन्न जनजातियों के लोगों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान में बाधा उपस्थित हो रही है। इस बाधा के उत्पन्न होने से जनजातियों में सामुदायिक भावना में कमी आती जा रही है तथा सांस्कृतिक मूल्यों और आदतों का पतन होता जा रहा है।

2. जनजाति के लोगों में सांस्कृतिक विभेद, तनाव और दूरी की समस्या: जनजाति के कुछ लोग ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में आकर ईसाई बन गये हैं तथा कुछ लोगों ने हिन्दुओं की जाति-प्रथा को अपना लिया है, परन्तु ऐसा सभी लोगों ने नहीं किया है, जिसके कारण जनजाति के लोगों में आपसी सांस्कृतिक विभेद, तनाव और सामाजिक दूरी या विरोध उत्पन्न हुआ है। अन्य संस्कृति को अपनाने वाले व्यक्ति अपने जातीय समूह और संस्कृति से दूर होते गये, साथ-ही-साथ वे उस संस्कृति को भी पूरी तरह नहीं अपना पाये जिस संस्कृति को उन्होंने ग्रहण किया था।

3. युवा-गृहों का नष्ट होना: जनजातियों की अपनी संस्थाएँ व युवा-गृह, जो कि जनजातीय सामाजिक जीवन के प्राण थे, धीरे-धीरे नष्ट होते जा रहे हैं; क्योंकि जनजातीय लोग ईसाई तथा हिन्दू लोगों के सम्पर्क में आते जा रहे हैं, जिससे युवा-गृह नष्ट होते जा रहे हैं।

4. जनजातीय ललित कलाओं का ह्रास: जैसे-जैसे जनजातियों के लोग बाहरी संस्कृतियों के प्रभाव में आते जा रहे हैं, उससे जनजातीय ललित कलाओं का ह्रास होता जा रहा है। नृत्य, संगीत, ललित कलाएँ, लकड़ी पर नक्काशी आदि का काम दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है। जनजातियों के लोग अब इन ललित कलाओं के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं।
In simple words: Tribal communities in India face major cultural challenges due to contact with outside cultures. They are losing their native languages, experiencing internal social conflicts, losing their traditional youth community centers, and seeing a decline in their unique arts and crafts.

🎯 Exam Tip: To score full marks, list the cultural problems point-by-point with clear headings like language issues, cultural conflicts, and decline of traditional arts. Mentioning the 6th Schedule of the Constitution adds great value to your answer.

(ब) धार्मिक समस्याएँ

जनजातियों के लोगों पर ईसाई धर्म व हिन्दू धर्म का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। राजस्थान के भील लोगों ने हिन्दू धर्म के प्रभाव के कारण एक आन्दोलन चलाया, जिसका नाम था ‘भगत आन्दोलन’ और इस आन्दोलन ने भीलों को भगत तथा अभगत दो वर्गों में विभाजित कर दिया। इसी प्रकार बिहार और असम की जनजातियाँ ईसाई धर्म से प्रभावित हुईं, जिसके परिणामस्वरूप एक ही समूह में नहीं, वरन् एक ही परिवार में धार्मिक भेद-भाव दिखाई पड़ने लगा। आज जनजातीय लोगों में धार्मिक समस्या ने विकट रूप धारण कर लिया है, क्योंकि नये धार्मिक दृष्टिकोण के कारण सामुदायिक एकता और संगठन टूटने लगे हैं और पारिवारिक तनाव, भेद-भाव व लड़ाई-झगड़े बढ़ते जा रहे हैं। इसी के साथ-साथ जनजाति के लोग अपनी अनेक आर्थिक व सामाजिक समस्याओं का समाधान अपने धर्म के द्वारा कर लेते थे, परन्तु नये धर्मों के नये विश्वास और नये संस्कारों ने उन पुरानी मान्यताओं को भी समाप्त कर दिया है, जिसके कारण जनजातियों में असन्तोष की भावना व्याप्त होती जा रही है।

 

(स) सामाजिक समस्याएँ

जनजातियाँ सभ्य समाज के सम्पर्क में आती जा रही हैं, जिनके कारण उनके सम्मुख अनेक सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न हो गयी हैं, जो निम्नलिखित हैं:

  • 1. कन्या-मूल्य: हिन्दुओं के प्रभाव में आने के कारण जनजातियों में कन्या-मूल्य रुपये के रूप में माँगा जाने लगा है। दिन-प्रतिदिन यह मूल्य अधिक तीव्रता के साथ बढ़ता जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सामान्य स्थिति के पुरुषों के लिए विवाह करना कठिन हो गया है। इस कारण जनजातीय समाज में ‘कन्या-हरण’ की समस्या बढ़ती जा रही है।
  • 2. बाल-विवाह: जनजातीय समाज में बाल-विवाह की समस्या भी उग्र रूप धारण करती जा रही है। जिस समय से जनजाति के लोग हिन्दुओं के सम्पर्क में आये हैं, तभी से बाल-विवाह की प्रथा भी बढ़ी है।
  • 3. वैवाहिक नैतिकता का पतन: जैसे-जैसे जनजातियों के लोग सभ्य समाज के सम्पर्क में आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे विवाह-पूर्व और विवाह के पश्चात् बाहर यौन सम्बन्ध बढ़ते जा रहे हैं, जिससे विवाह-विच्छेद की संख्या भी बढ़ रही है।
  • 4. वेश्यावृत्ति, गुप्त रोग आदि: जनजातीय समाज में वेश्यावृत्ति, गुप्त रोग आदि से सम्बन्धित सामाजिक समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। जनजातीय लोगों की निर्धनता से लाभ उठाकर विदेशी व्यापारी, ठेकेदार, एजेण्ट आदि रुपयों का लोभ दिखाकर उनकी स्त्रियों के साथ अनुचित यौन-सम्बन्ध स्थापित कर लेते हैं। इन्हीं औद्योगिक केन्द्रों में काम करने वाले जनजातीय श्रमिक वेश्यागमन आदि में फंस जाते हैं और गुप्त रोगों के शिकार हो जाते हैं।

 

(द) आर्थिक समस्याएँ

आज भारत की जनजातियों में सबसे गम्भीर आर्थिक समस्या है, क्योंकि उनके पास पेटभर भोजन, तन ढकने के लिए वस्त्र और रहने के लिए अपना मकान नहीं है। कुछ प्रमुख आर्थिक समस्याएँ निम्नलिखित हैं:

  • 1. स्थानान्तरित खेती सम्बन्धी समस्या: जनजातीय व्यक्ति प्राचीन ढंग की खेती करते हैं, जिसे स्थानान्तरित खेती कहते हैं। इस प्रकार की खेती से किसी प्रकार की लाभदायक आय उन्हें प्राप्त नहीं होती है। इस प्रकार की खेती से केवल भूमि का दुरुपयोग ही होता है। अतः खेती में अच्छी पैदावार नहीं होती है, जिससे वे खेती करना छोड़ देते हैं और भूखे मरने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • 2. भूमि-व्यवस्था सम्बन्धी समस्या: पहले जनजातियों का भूमि पर एकाधिकार था, वे मनमाने ढंग से उसका उपयोग करते थे। अब भूमि सम्बन्धी नये कानून आ गये हैं, अब वे मनमाने ढंग से जंगल काटकर स्थानान्तरित खेती नहीं कर सकते।
  • 3. वनों से सम्बन्धित समस्याएँ: पहले जनजातियों को वनों से पूर्ण एकाधिकार प्राप्त था। वे जंगल की वस्तुओं, पशु, वृक्ष आदि का उपयोग स्वेच्छापूर्वक करते थे, परन्तु अब ये सब वस्तुएँ सरकारी नियन्त्रण में हैं।
  • 4. अर्थव्यवस्था सम्बन्धी समस्याएँ: जनजाति के लोग अब मुद्रा-रहित अर्थव्यवस्था से मुद्रा-युक्त अर्थव्यवस्था में आ रहे हैं; अतः उनके सम्मुख नयी-नयी समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं।
  • 5. ऋणग्रस्तता की समस्या: सेठ, साहूकार, महाजन उनकी अशिक्षा, अज्ञानता तथा निर्धनता का लाभ उठाकर उन्हें...

... ऊँची ब्याज दर पर ऋण देते हैं, जिससे वे सदैव ऋणी ही बने रहते हैं।

 

6. औद्योगिक श्रमिक समस्याएँ: चाय बागानों, खानों और कारखानों में काम करने वाले जनजातीय श्रमिकों की दशा अत्यन्त दयनीय है। उन्हें उनके कार्य के बदले में उचित मजदूरी नहीं मिलती है, उनके पास रहने के लिए मकान नहीं हैं, काम करने की स्थिति एवं वातावरण भी ठीक नहीं है। जनजाति के श्रमिकों को अपने अधिकारों के विषय में भी ज्ञान नहीं है, वे पशुओं की भाँति कार्य करते हैं और उनके साथ पशुओं जैसा ही व्यवहार होता है।

 

(य) स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ: जनजाति के लोगों के सम्मुख स्वास्थ्य सम्बन्धी अनेक समस्याएँ हैं, जो निम्नवत् हैं:

  • 1. खान-पान: निर्धनता के कारण जनजाति के लोगों को संतुलित व पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है। वे शराब आदि मादक पदार्थों का सेवन करते हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ता है।
  • 2. वस्त्र: जनजाति के लोग अब नंगे (वस्त्रहीन) न रहकर वस्त्र धारण करने लगे हैं, परन्तु निर्धनता के कारण उनके पास पर्याप्त वस्त्र उपलब्ध नहीं होते हैं। वस्त्रों के अभाव में वे लगातार एक ही वस्त्र को धारण किये रहते हैं, जिससे अनेक प्रकार के चर्म रोग आदि हो जाते हैं तथा वे बीमार भी हो जाते हैं।
  • 3. रोग व चिकित्सा का अभाव: अनुसूचित जनजाति के लोग हैजा, चेचक, तपेदिक आदि अनेक प्रकार के भयंकर रोगों से ग्रस्त रहते हैं। इसके अतिरिक्त चाय बागानों व खानों में काम करने वाले स्त्री-पुरुष श्रमिकों में व्यभिचार बढ़ता जा रहा है। वे अनेक प्रकार के गुप्त रोगों से ग्रस्त होते जा रहे हैं। निर्धनता व चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में जनजाति के लोगों के सम्मुख स्वास्थ्य सम्बन्धी गम्भीर समस्याएँ हैं।
  • 4. शिक्षा सम्बन्धी समस्याएँ: जनजातियाँ आज भी अशिक्षा तथा अज्ञानता के वातावरण में रह रही हैं। कुछ लोग ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में आकर अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। अशिक्षा समस्त समस्याओं का आधार है। अशिक्षा के कारण ही जनजातीय समाज में आज भी अनेक प्रकार के अन्धविश्वास पनप रहे हैं। (निवारण के सुझाव - इसके लिए लघु उत्तरीय प्रश्न संख्या 4 का उत्तर देखें।)

 

Question 3. भारत में अल्पसंख्यकों अर्थात् अल्पसंख्यक वर्गों की कुछ समस्याओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: भारत एक विभिन्नताओं वाला देश है। इस देश में विभिन्न प्रकार की भूमि, विभिन्न प्रकार की जलवायु, विभिन्न धर्म, विभिन्न जातियाँ, विभिन्न भाषाएँ एवं विभिन्न प्रकार के रीतिरिवाज पाये जाते हैं। दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि यहाँ के लोग विभिन्न आधारों पर अनेक समूहों में विभाजित रहते हैं। यह विभाजन धर्म, सम्प्रदाय, जाति, व्यवसाय, आयु, लिंग, शिक्षा आदि किसी भी आधार पर हो सकता है। इन सभी समूहों की सदस्य संख्या समान नहीं है। किसी समूह में अधिक लोग रहते हैं और किसी में सदस्यों की संख्या बहुत कम होती है।

इस प्रकार किसी विशेष आधार पर बने सामाजिक समूहों में, जिनकी संख्या अपेक्षाकृत कम होती है, उन्हें हम अल्पसंख्यक समूह अथवा अल्पसंख्यक (Minorities) कहते हैं। भारत में मुसलमान, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध, जैन, पारसी आदि धर्मावलम्बियों तथा जनजातियों को अल्पसंख्यकों की श्रेणी में रखा जाता है। भारतीय समाज में पाया जाने वाला सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समूह मुस्लिम है। दूसरा प्रमुख अल्पसंख्यक सम्प्रदाय ईसाइयों का है। सिक्खों का भी अल्पसंख्यक वर्गों में महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसके अतिरिक्त बौद्ध, जैन, पारसी एवं जनजातियाँ अन्य अल्पसंख्यक समूह हैं।

अल्पसंख्यकों की समस्या:
भारत में रहने वाले अल्पसंख्यक समूहों की अनेक समस्याएँ हैं। यद्यपि संविधान द्वारा अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रखने का पूर्ण अधिकार दिया गया है, किन्तु संविधान में तथा प्रचलित कानूनों में उपलब्ध संरक्षणों के बावजूद भी अल्पसंख्यकों में यह भावना बनी हुई है कि उनके साथ समानता का व्यवहार नहीं किया जाता। अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना किसी भी लोकतांत्रिक समाज का मुख्य कर्तव्य होता है। यहाँ हम भारत के प्रमुख अल्पसंख्यकों की कुछ प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश डालेंगे।
In simple words: Minorities are groups of people who are fewer in number compared to the rest of the population, such as Muslims, Christians, and Sikhs in India. Even though the constitution protects their rights, they often feel they are not treated equally and face various social and economic challenges.

🎯 Exam Tip: When answering about minorities, clearly define who they are first, list the major minority groups in India, and then highlight their constitutional rights and key challenges to score full marks.

 

Question 1. मुसलमानों की समस्याएँ – समकालीन भारत में मुसलमानों की कुछ प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं
Answer:
1. यद्यपि संविधान में कहा गया है कि धार्मिक आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता, किन्तु सामान्य मुसलमान स्वयं को मानसिक दृष्टि से असुरक्षित समझता है।
2. मुस्लिम समुदाय का अधिकांश भाग अपने रूढ़िवादी विचारों के कारण अशिक्षित रह गया है जिसके कारण उन्हें विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अशिक्षा एवं रूढ़िवादिता के कारण उन्हें आर्थिक विकास के पूर्ण अवसर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। आमतौर पर वे परम्परागत व्यवसायों को ही अपनाते हैं तथा सरकारी नौकरियों व श्वेतवसन व्यवसायों में नहीं जा पाते।
3. मुस्लिम समाज सांस्कृतिक दृष्टि से भी स्वयं को बहुसंख्यक वर्गों से भिन्न समझता है। उनकी यह भावना पृथकता के भाव को प्रोत्साहित करती है। समाज में आपसी भाईचारा बढ़ाने से इस दूरी को कम किया जा सकता है।
4. स्वाधीन भारत का मुस्लिम सम्प्रदाय राजनीतिक दृष्टि से दिशाहीन प्रतीत होता है। योग्य मुस्लिम नेतृत्व का अभाव दिखायी देता है। जिन नेताओं ने स्वयं को राजनीतिक मंच पर प्रतिष्ठित किया है, वे कठिनता से ही मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
In simple words: Muslims in India face challenges like feeling unsafe, lack of modern education due to old traditions, feeling culturally isolated, and not having strong political leaders to represent them.

🎯 Exam Tip: Write all four points clearly with headings like education, security, culture, and leadership to score full marks.

 

Question 2. ईसाइयों की समस्याएँ – ईसाइयों की कुछ प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं
Answer:
1. ईसाइयों का रहन-सहन, मौज-मस्ती का होता है। यह प्रवृत्ति उनमें ऋणग्रस्तता को जन्म देती है।
2. यद्यपि ईसाई लोग स्वयं को अंग्रेजों से सम्बन्धित मानते हैं, किन्तु वे किसी निश्चित जीवन शैली (अंग्रेजी अथवा भारतीय) को नहीं अपना पाते। एक से उनका लगाव नहीं है, तो दूसरा उनके लिए सम्भव नहीं है। वे अक्सर अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर असमंजस में रहते हैं।
3. चूंकि ईसाइयों में विवाह-विच्छेद (Divorce) एक आम-बात है, इसलिए इसका बुरा प्रभाव स्त्रियों की स्थिति और आश्रितों पर पड़ता है।
In simple words: Christians in India often face financial issues due to high spending, struggle with identity between Western and Indian lifestyles, and face family issues due to high divorce rates.

🎯 Exam Tip: Highlight the three main areas of concern: financial habits, cultural identity confusion, and social/family issues like divorce.

 

Question 3. सिक्खों की समस्याएँ – सिक्खों की प्रमुख समस्याएँ निम्न प्रकार हैं
Answer:
1. सिक्खों का एक वर्ग अधिक सम्पन्न है, तो दूसरा वर्ग दरिद्र भी है।
2. सिक्खों के साथ भारत के अन्य भागों के लोग अन्त:क्रिया के पक्ष में नहीं हैं।
3. सिक्खों के एक वर्ग द्वारा धर्म को राजनीति से जोड़ने का प्रयत्न किया गया है। अतः उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती धर्म को राजनीति से पृथक् करने की है। धर्म और राजनीति का यह घालमेल समाज में तनाव पैदा करता है।
In simple words: Sikhs face economic inequality within their community, lack of social interaction with other regions, and the big challenge of keeping religion separate from politics.

🎯 Exam Tip: Focus on the economic divide, social integration, and the separation of religion from politics as the key points.

 

Question 4. भारत में अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के विकास के लिए सामाजिक चेतना संवैधानिक आरक्षण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। सविस्तार वर्णन कीजिए।
Answer: अनुसूचित जातियाँ तथा जनजातियाँ भारत के एक विशाल वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं। समाज के इतने बड़े वर्ग की उपेक्षा करके उन्हें मानवोचित अधिकारों से वंचित रखकर, दीन-हीन और दासों के समान जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य करके सामाजिक प्रगति और राष्ट्र को समृद्ध एवं वैभवशाली बनाने की कल्पना नहीं की जा सकती। यद्यपि शासकीय स्तर पर इन जातियों व जनजातियों के उत्थान के लिए आरक्षण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, तथापि आवश्यकता इस बात की है कि इनकी समस्याओं के प्रति जनसाधारण को जाग्रत किया जाए। सच्चा बदलाव केवल कागजी कानूनों से नहीं बल्कि लोगों की सोच बदलने से आता है।

अनुसूचित जातियों व जनजातियों के विकास हेतु यह आवश्यक है कि अधिकांश हिन्दुओं के हृदय परिवर्तित हों। हमें सही रूप से इनकी वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करना चाहिए तथा निष्कर्ष निकालना चाहिए कि हमने तथा हमारे पूर्वजों ने क्यों इनके प्रति अन्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया? हमें इनके प्रति पाली गयी सभी भ्रान्तियों से अपने-आप को मुक्त करना चाहिए। यह एक वास्तविकता है कि इनके प्रति अस्पृश्यता का भाव रखने का सम्बन्ध हिन्दू धर्म के मौलिक ग्रन्थों से नहीं है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वे भी हमारी तरह इन्सान हैं तथा केवल शोर मचाने, नारे लगाने, हरिजन दिवस मनाने तथा आरक्षण से इनका विकास नहीं हो सकता। इनके विकास के लिए जनसाधारण में इनके प्रति न्यायपूर्ण एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार होना अति आवश्यक है।
In simple words: While government reservation helps, real progress for Scheduled Castes and Tribes can only happen when society changes its mindset, treats them with respect and equality, and removes historical prejudices from their hearts.

🎯 Exam Tip: Emphasize that social awareness, empathy, and heart-change are far more powerful than legal reservations alone for true equality.

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

 

प्रश्न 1. राष्ट्रीय जीवन में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के योगदान का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। या ‘भारतीय जनजातीय जीवन का बदलता दृश्य’ पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए। [2010] या राष्ट्रीय जीवन में जनजातियों के योगदान का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों का राष्ट्रीय जीवन में योगदान निम्नलिखित रूपों में दर्शाया जा सकता है:
1. भारतीय राजनीति में प्रभावक भूमिका – संसद और राज्य विधानमण्डलों में अनुसूचित जनजातियों की सदस्य संख्या, विभिन्न चुनावों में उनकी सक्रिय भागीदारी तथा उच्च राजनीतिक पदों पर उनकी नियुक्ति से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि देश के राष्ट्रीय जीवन में इनका सक्रिय सहभाग अर्थात् योगदान बढ़ रहा है और इनमें राजनीतिक चेतना तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में लोकसभा में अनुसूचित जातियों के 79 एवं जनजातियों के 41 स्थान तथा राज्यों की विधानसभाओं में क्रमशः 557 तथा 527 सीटें आरक्षित की गयी हैं। पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में जनसंख्या के अनुपात में इनकी सीटें आरक्षित की गयी हैं।
2. राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाओं में वृद्धि – अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों को आरक्षण एवं संवैधानिक रियायतें प्राप्त हैं जिसका एक परिणाम यह सामने आया है कि इनके नेताओं की महत्त्वाकांक्षाओं में वृद्धि हुई है। अब वे राजनीतिक और प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर ऊँची जातियों के लोगों से प्रतिस्पर्धा करने एवं आगे बढ़ने की आकांक्षा रखते हैं।
3. दबाव समूहों के रूप में संगठित होने की प्रवृत्ति – आरक्षण के परिणामस्वरूप जाति का राजनीति में प्रभाव बढ़ा है। स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद बनने वाले जातीय समुदायों में अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों द्वारा निर्मित दबाव गुटों का विशेष महत्त्व है। जिला स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक इन जातियों एवं जनजातियों के संगठन पाये जाते हैं। इन्हीं संगठनों की माँग एवं संगठित प्रयासों के फलस्वरूप आरक्षण की अवधि सन् 2020 तक के लिए बढ़ा दी गयी थी।
4. निर्वाचनों में संगठित भूमिका – यह माना जाता है कि विभिन्न आम चुनावों में कांग्रेस दल के विजयी होने और सत्ता में आने का मुख्य कारण इन्हें हरिजनों, अन्य अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों को मिलने वाला समर्थन है। इन जातियों ने अपनी संख्या की शक्ति को पहचाना है और राजनीति में संगठित रूप में भूमिका निभाते हैं। इससे राष्ट्रीय जीवन में इनकी भूमिका बढ़ी है। आज तो सभी राजनीतिक दल यह महसूस करने लगे हैं कि सत्ता में आने के लिए इन जातियों का समर्थन प्राप्त करना आवश्यक है।
5. भारतीय राजनीति में सन्तुलनकर्ता की भूमिका – अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों की देश में कुल जनसंख्या 25 करोड़ है, जो देश की कुल जनसंख्या का 24.35 प्रतिशत है। इस संख्या के बल पर ही ये जातियाँ भारतीय राजनीति में शक्ति-संतुलन की स्थिति में हैं। जिस राजनीतिक दल को इनका समर्थन प्राप्त हो जाता है, उसकी राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत हो जाती है।
6. अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के कई लोगों ने स्वतन्त्रता – आन्दोलन में भाग लिया। उन्होंने महात्मा गाँधी के असहयोग आन्दोलन में योग दिया। इससे उनमें राजनीतिक चेतना बढ़ी है। अनेक नेताओं ने अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों की स्थिति को उन्नत करने और उन्हें राष्ट्रीय जीवन-धारा में सम्मिलित करने हेतु प्रयास किये हैं। यह प्रयास देश की एकता को और अधिक मजबूत बनाता है।
In simple words: Scheduled Castes and Scheduled Tribes play a very important role in India's national and political life. They participate actively in elections, hold reserved seats in parliament, and help make important decisions for the country.

🎯 Exam Tip: Mention key statistics like reserved seats in Lok Sabha (79 for SCs and 41 for STs) and highlight their role as political balance-makers to score full marks.

 

Question 2. अनुसूचित जाति व जनजाति की भारतीय राजनीति में सन्तुलनकर्ता के नाते क्या भूमिका है ?
Answer: अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों की देश में कुल जनसंख्या वर्तमान में 25 करोड़ है, जो देश की कुल जनसंख्या का 24.35 प्रतिशत है। इस संख्या के बल पर ही ये जातियाँ भारतीय राजनीति में शक्ति-संतुलन की स्थिति में हैं। जिस राजनीतिक दल को इनका समर्थन प्राप्त हो जाता है, उसकी राजनीतिक स्थिति पर्याप्त मजबूत हो जाती है। इन जातियों ने अपने हितों को ध्यान में रखकर पहले कांग्रेस दल को समर्थन दिया था। वर्तमान में कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक दलों ने भी अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों में अपना नाम बढ़ाया है और अपने जनाधार को मजबूत किया है। यह राजनीतिक जागरूकता लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और मजबूत बनाती है। निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है वर्तमान समय में भारतीय राजनीति में अनुसूचित जाति और जनजाति की सन्तुलनकर्ता के रूप में एक प्रभावशाली भूमिका है, जिसके महत्त्व को नकारा नहीं जा सकता।
In simple words: Scheduled Castes and Scheduled Tribes make up a big part of India's population. Because of their large numbers, political parties need their support to win, making them very important decision-makers in Indian politics.

🎯 Exam Tip: Highlight the percentage of population (24.35%) and use the term 'balance of power' (शक्ति-संतुलन) to score full marks.

 

Question 3. सीमाप्रान्त जनजातियों की समस्याएँ बताइए।
Answer: उत्तर-पूर्वी सीमाप्रान्तों में निवास करने वाली जनजातियों की समस्याएँ देश के विभिन्न भागों की समस्याओं से कुछ भिन्न हैं। देश के उत्तर-पूर्वी प्रान्तों के नजदीक चीन, म्याँमार एवं बांग्लादेश हैं। चीन से हमारे सम्बन्ध पिछले कुछ वर्षों से मधुर नहीं रहे हैं। बांग्लादेश, जो पहले पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था, भारत का कट्टर शत्रु रहा है। चीन एवं पाकिस्तान ने सीमाप्रान्तों की जनजातियों में विद्रोह की भावना को भड़काया है, उन्हें अस्त्र-शस्त्रों से सहायता दी है एवं विद्रोही नागा और अन्य जनजातियों के नेताओं को भूमिगत होने के लिए अपने यहाँ शरण दी है। शिक्षा एवं राजनीतिक जागृति के कारण इस क्षेत्र की जनजातियों ने स्वायत्त राज्य की माँग की है। इसके लिए उन्होंने आन्दोलन एवं संघर्ष किए हैं। इन बाहरी हस्तक्षेपों के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। आज सबसे बड़ी समस्या सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करने वाली जनजातियों की स्वायत्तता की माँग से निपटना है।
In simple words: The tribes living near India's borders face unique challenges because neighboring countries like China and Pakistan sometimes try to cause trouble. These tribes are also demanding more independence and their own separate states.

🎯 Exam Tip: Mention the geographical location (North-East border) and the role of neighboring countries to write a complete answer.

 

Question 4. जनजातियों की प्रगति के लिए प्रमुख उपायों का सुझाव दीजिए। [2009, 13]
Answer: जनजातियों की प्रगति के लिए निम्नलिखित प्रमुख उपाय किये जा सकते हैं:
1. जनजातियों के पेशे गन्दे होते हैं। इनको पेशों से मुक्त होने का अवसर दिया जाए।
2. विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ।
3. कुटीर उद्योग लगाने के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए।
4. भूमिहीन किसानों को भूमि उपलब्ध करायी जाए तथा फसल को बोने के लिए उत्तम बीज व खाद उपलब्ध करायी जाए।
5. इन्हें सवर्णो के साथ बस्तियों में मकान बनाने की सुविधा उपलब्ध करायी जाए।
6. अन्य जातियों के साथ उत्पन्न होने वाले मतभेदों को दूर किया जाए।
7. जनजातियों की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को सुलझाया जाए।
8. इन्हें शिक्षित बनाने के लिए मुफ्त शिक्षा और प्रौढ़ शिक्षा व्यवस्था को कारगर बनाया जाए।
9. सरकारी सेवाओं में इनके लिए कुछ स्थान सुरक्षित किये जाएँ।
10. जनजातियों की प्रगति के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना चलाने की भी आवश्यकता है। इन उपायों को सही तरीके से लागू करने से जनजातीय समाज मुख्यधारा से जुड़ सकेगा।
In simple words: To help tribal communities grow, the government should provide them with better jobs, free education, interest-free loans for business, and proper healthcare.

🎯 Exam Tip: Try to list at least 5 to 6 points clearly with proper numbering to secure maximum marks in long-answer questions.

 

Question 5. अनुसूचित जनजातियों पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए किये गये उपायों की विवेचना कीजिए।
Answer: अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार रोकने के प्रभावी उपाय के लिए, भारत सरकार ने अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989' 30 जनवरी, 1990 से लागू किया। इसमें अत्याचार की श्रेणी में आने वाले अपराधों के उल्लेख के साथ-साथ उनके लिए कड़े दण्ड की भी व्यवस्था की गयी। वर्ष 1995 में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अन्तर्गत व्यापक नियम भी बनाये गये, जिनमें अन्य बातों के अतिरिक्त प्रभावित लोगों के लिए राहत और पुनर्वास की भी व्यवस्था है। राज्यों से कहा गया कि वे इस तरह के अत्याचारों की रोकथाम के उपाय करें और पीड़ितों के आर्थिक तथा सामाजिक पुनर्वास की व्यवस्था करें। अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड को छोड़कर अन्य सभी राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों में इस तरह के मामलों में इस कानून के तहत मुकदमा चलाने के लिए विशेष अदालतें बनायी गयी हैं। यह कानून समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है।
In simple words: To stop crimes against Scheduled Castes and Scheduled Tribes, the Indian government made a strong law in 1989 called the Prevention of Atrocities Act. This law sets strict punishments for offenders and sets up special courts to solve these cases quickly.

🎯 Exam Tip: Do not forget to mention the year of the Act (1989) and its implementation date (30 January 1990) as these are key details examiners look for.

 

प्रश्न 6. अनुसूचित जातियों की प्रगति हेतु अपने सुझाव लिखिए। [2016]
उत्तर: अनुसूचित जातियों की प्रगति हेतु निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं। अनुसूचित जातियों की प्रगति हेतु निम्न कदम उठाए जा सकते हैं:
1. अनुसूचित जातियों में शिक्षा के स्तर में सुधार करके उनके दृष्टिकोण व आर्थिक स्थिति को सुधारा जाना चाहिए।
2. इनके जीवन स्तर को उठाना चाहिए जिससे इन्हें बेहतर अवसरों की प्राप्ति हो सके।
3. अस्पृश्यता निवारण के लिए विभिन्न माध्यमों का प्रयोग कर जनमत का निर्माण किया जाना चाहिए।
4. समाज में इनके विरुद्ध असमान नीति अपनाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
5. सरकार द्वारा विभिन्न नीतियों के माध्यम से अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
6. इन्हें अन्य जातियों के समान धार्मिक व सामाजिक स्वतन्त्रता और समानता व्यावहारिक रूप में प्रदान करनी चाहिए।
7. सभी जाति के बच्चों को एक समान व्यवहार व शिक्षा प्रदान कर उनमें आपसी सद्भाव की भावना का विकास किया जाना चाहिए।
8. राजनीतिक स्तर पर सरकार द्वारा इनको प्रोत्साहन प्रदान करना इनकी राजनीतिक निम्न स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक है। शिक्षा और समानता के अवसर ही समाज में वास्तविक बदलाव ला सकते हैं।
In simple words: अनुसूचित जातियों के विकास के लिए शिक्षा, समानता, और समाज में उनके प्रति भेदभाव को खत्म करना बहुत जरूरी है।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय सभी मुख्य बिंदुओं को क्रमानुसार लिखें ताकि परीक्षक को समझने में आसानी हो और पूरे अंक मिलें।

 

प्रश्न 7. अनुसूचित जातियों की चार समस्याएँ बताइए। [2007, 09, 11]
या
अनुसूचित जातियों की दो समस्याएँ बताइए। [2009, 16]

उत्तर: अनुसूचित जातियों की चार समस्याएँ निम्नवत् हैं:
1. अस्पृश्यता की समस्या – अनुसूचित जातियों के सम्मुख सबसे बड़ी समस्या अस्पृश्यता की रही है। उच्च जाति के कुछ व्यक्ति कुछ व्यवसायों; जैसे-चमड़े का काम, सफाई का काम, कपड़े धोने का काम आदि करने वालों को आज भी अपवित्र मानते हैं।
2. अशिक्षा की समस्या – अनुसूचित जाति के अधिकांश लोग अशिखित तथा अज्ञानी हैं। इस कारण अनेक बुराइयों ने इन लोगों में घर कर लिया है। निर्धनता के कारण इनके बालक भी शिक्षा शुरू कर पाने में असमर्थ होते हैं।
3. रहन-सहन का नीचा स्तर – इनका जीवन स्तर निम्न होता है तथा वे आधा पेट खाकर तथा अर्द्धनग्न रहकर जीवन व्यतीत करते हैं। निर्धनता तथा बेरोजगारी इनके रहन-सहन के निम्न स्तर के लिए उत्तरदायी हैं।
4. आवास की समस्या – इनके आवास की दशा भी शोचनीय होती है। ये ऐसे स्थानों में रहते हैं जहाँ सफाई का नामोनिशान भी नहीं होता। बरसात में इनकी दशा दयनीय हो जाती है। ये लोग बहुधा झोंपड़ी या कच्चे मकानों में रहते हैं। इन मूलभूत समस्याओं का समाधान करना समाज और सरकार दोनों का परम कर्तव्य है।
In simple words: अनुसूचित जातियों को मुख्य रूप से छुआछूत, अनपढ़ता, गरीबी और रहने के लिए अच्छे घरों की कमी जैसी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: समस्याओं के नाम (जैसे अस्पृश्यता, अशिक्षा) को बोल्ड या रेखांकित करें ताकि मुख्य बिंदु स्पष्ट रूप से दिखाई दें।

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

 

प्रश्न 1. संविधान के अनुच्छेद 46 में समाज के दलित, दुर्बल और कमजोर वर्गों के लोगों के सम्बन्ध में क्या कहा गया है?
उत्तर: संवैधानिक दृष्टि से कमजोर, दुर्बल या दलित वर्ग के अन्तर्गत अनुसूचित जातियाँ, अनुसूचित जनजातियाँ तथा कुछ अन्य पिछड़े हुए समूह आते हैं। इसमें समाज के साधन-हीन वर्ग को सम्मिलित किया गया है। भारतीय संविधान भ्रातृत्व एवं समानता पर जोर देता है। अतः संविधाननिर्माताओं ने सोचा कि यदि समानता को एक वास्तविक रूप प्रदान करना है, तो समाज के इन दलित, दुर्बल और कमजोर वर्गों को ऊँचा उठाना होगा और उन्हें विकास की सुविधाएँ प्रदान करनी होंगी। संविधान के अनुच्छेद 46 में इस सम्बन्ध में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि राज्य जनता के दुर्बलतर अंगों के, विशेषतः अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की विशेष सावधानी से उन्नति करेगा और सामाजिक अन्याय तथा सभी प्रकार के शोषण से उनका संरक्षण करेगा।
In simple words: संविधान का अनुच्छेद 46 कहता है कि सरकार को गरीब, कमजोर और पिछड़े वर्गों के लोगों की पढ़ाई-लिखाई और आर्थिक मदद करनी चाहिए ताकि उनके साथ कोई अन्याय न हो।

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 46 का उल्लेख करते समय 'कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की रक्षा' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 2. अनुसूचित जाति से क्या तात्पर्य है?
Answer: भारतीय संविधान में अछूत, दलित, बाहरी जातियों, हरिजन आदि लोगों को कुछ विशेष सुविधाएँ प्रदान करने की दृष्टि से एक अनुसूची तैयार की गयी जिसमें विभिन्न अस्पृश्य जातियों को सम्मिलित किया गया। इस अनुसूची के आधार पर वैधानिक दृष्टिकोण से इन जातियों के लिए अनुसूचित जाति (Schedule Caste) शब्द को काम में लिया गया। वर्तमान में सरकारी प्रयोग में इनके लिए ‘अनुसूचित जाति’ शब्द को ही काम में लिया जाता है। इनके लिए तैयार की गयी सूची में जिन अस्पृश्य जातियों को रखा गया उन्हें अनुसूचित जातियाँ कहा गया। यह वर्गीकरण सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए अत्यंत आवश्यक कदम था।
In simple words: अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) उन जातियों को कहा जाता है जिन्हें समाज में बराबरी और विशेष अधिकार देने के लिए संविधान की एक खास सूची में शामिल किया गया है।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में 'अनुसूचित जाति' की परिभाषा लिखते समय 'संवैधानिक दृष्टिकोण' और 'अस्पृश्य जातियों की सूची' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 3. अस्पृश्यता को दूर करने एवं अनुसूचित जातियों के कल्याण की दृष्टि से कार्य कर रहे चार ऐच्छिक संगठनों के नाम लिखिए।
Answer: अस्पृश्यता को दूर करने एवं अनुसूचित जातियों के कल्याण की दृष्टि से अनेक ऐच्छिक संगठन कार्य कर रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
1. अखिल भारतीय हरिजन सेवक संघ, दिल्ली;
2. भारतीय दलित वर्ग लीग, दिल्ली;
3. ईश्वर सरन आश्रम, इलाहाबाद तथा
4. भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी, दिल्ली।
ये संगठन समाज में समानता और भाईचारा बढ़ाने का निरंतर प्रयास करते हैं।
In simple words: छुआछूत को मिटाने और पिछड़ी जातियों की मदद के लिए कई संस्थाएं काम कर रही हैं, जैसे दिल्ली का हरिजन सेवक संघ और इलाहाबाद का ईश्वर सरन आश्रम।

🎯 Exam Tip: चारों संगठनों के नाम और उनके स्थान (जैसे दिल्ली, इलाहाबाद) को स्पष्ट रूप से याद रखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 4. अनुसूचित जातियों के लोगों को कौन-सी शिक्षा सम्बन्धी सुविधाएँ दी गयी हैं ?
Answer: अनुसूचित जातियों व जनजातियों के लोगों को अन्य लोगों के समान स्तर पर लाने और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने में सहायता करने के उद्देश्य से शिक्षा का विशेष प्रबन्ध किया गया। देश की सभी सरकारी शिक्षण संस्थाओं में इन जातियों के विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की गयी है। वर्ष 1944-45 से अस्पृश्य जातियों के छात्रों को छात्रवृत्तियाँ देने की योजना प्रारम्भ की गयी तथा इनके लिए पृथक् छात्रावासों की व्यवस्था भी की गयी है। बुक बैंक के माध्यम से इनके छात्रों के लिए पाठ्य-पुस्तकें भी उपलब्ध करायी जाती हैं। इन सुविधाओं से वंचित वर्ग के बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ने का अवसर मिला है।
In simple words: अनुसूचित जातियों के बच्चों को पढ़ाई में मदद के लिए मुफ्त शिक्षा, रहने के लिए हॉस्टल, वजीफा (स्कॉलरशिप) और मुफ्त किताबें दी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: शिक्षा संबंधी सुविधाओं में निःशुल्क शिक्षा, छात्रवृत्ति और बुक बैंक जैसी सरकारी योजनाओं का उल्लेख करना न भूलें।

 

Question 5. अनुसूचित जातियों की मुख्य आर्थिक समस्याएँ बताइए।
Answer: गरीबी, बेरोजगारी, स्थानान्तरित खेती, ऋणग्रस्तता तथा आधारभूत संरचना का अभाव आदि अनुसूचित जातियों की मुख्य आर्थिक समस्याएँ हैं। इन समस्याओं के कारण उनका जीवन स्तर काफी प्रभावित होता है।
In simple words: अनुसूचित जातियों के लोगों को मुख्य रूप से गरीबी, नौकरी न मिलना, कर्ज में डूबे रहना और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: मुख्य आर्थिक समस्याओं को बिंदुवार (जैसे गरीबी, ऋणग्रस्तता) लिखने से उत्तर अधिक प्रभावी और स्पष्ट दिखता है।

 

Question 6. अनुसूचित जातियों व जनजातियों के लोगों को सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व कैसे दिया गया है ?
Answer: अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लोगों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने, अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार करने तथा उच्च जाति के लोगों के सम्पर्क में आने को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी नौकरियों में स्थान सुरक्षित रखे गये हैं। खुली प्रतियोगिता द्वारा अखिल भारतीय आधार पर की जाने वाली नियुक्तियों में इनके लिए क्रमशः 15 एवं 7.5 प्रतिशत स्थान सुरक्षित रखे गये हैं। इससे समाज के पिछड़े वर्गों को प्रशासन और देश के विकास में भागीदारी का अवसर मिलता है।
In simple words: सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जातियों के लिए 15% और जनजातियों के लिए 7.5% सीटें आरक्षित (सुरक्षित) की गई हैं ताकि वे भी आगे बढ़ सकें।

🎯 Exam Tip: सरकारी नौकरियों में आरक्षण के सही प्रतिशत (15% और 7.5%) को बिल्कुल सही-सही लिखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. डॉ० अम्बेडकर ने अनुसूचित जाति परिसंघ की स्थापना क्यों की तथा इसका क्या लक्ष्य था ?
Answer: राजनीति में अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा के लिए डॉ० अम्बेडकर ने 'अनुसूचित जाति परिसंघ' की स्थापना की थी। इसका लक्ष्य अनुसूचित जातियों के राजनीतिक आन्दोलन को आगे बढ़ाना था। स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद अम्बेडकर के नेतृत्व में इस दल का उद्देश्य यह देखना रह गया था कि संविधान में वर्णित आरक्षण के प्रावधानों का समुचित रूप से क्रियान्वयन किया जा रहा है या नहीं। यह संगठन दलितों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत मंच साबित हुआ।
In simple words: डॉ. अम्बेडकर ने अनुसूचित जातियों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करने और यह देखने के लिए इस संघ को बनाया था कि उन्हें संविधान में मिला आरक्षण सही से मिल रहा है या नहीं।

🎯 Exam Tip: डॉ. अम्बेडकर के इस संगठन का मुख्य उद्देश्य और स्वतंत्रता के बाद इसके बदले हुए दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 8. जनजाति क्या है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: जनजाति एक ऐसा क्षेत्रीय मानव समूह है जिसकी एक सामान्य संस्कृति, भाषा, राजनीतिक संगठन एवं व्यवसाय होता है तथा जो सामान्यतः अन्तर्विवाह के नियमों का पालन करता है। यह समूह आधुनिक समाज के प्रभावों से दूर अपनी पारंपरिक जीवन शैली को बनाए रखता है।
In simple words: जनजाति (Tribe) लोगों का एक ऐसा समूह होता है जो एक खास इलाके में रहता है, जिनकी अपनी अलग भाषा, संस्कृति और रीति-रिवाज होते हैं और वे आपस में ही शादी करते हैं।

🎯 Exam Tip: जनजाति की परिभाषा में 'क्षेत्रीय मानव समूह', 'सामान्य संस्कृति' और 'अन्तर्विवाह' जैसे समाजशास्त्रीय शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।

गि लिन और गिलिन के अनुसार, “स्थानीय आदिम समूहों के किसी भी संग्रह को जो कि एक सामान्य क्षेत्र में रहता हो, एक सामान्य भाषा बोलता हो और एक सामान्य संस्कृति का अनुसरण करता हो, एक जनजाति कहते हैं।”

 

Question 9. जनजातियों की दो महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ लिखिए।
Answer: जनजातियों की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. अन्तर्विवाही – एक जनजाति के सदस्य केवल अपनी ही जनजाति में विवाह करते हैं, जनजाति के बाहर नहीं। यह नियम उनकी सांस्कृतिक शुद्धता को बनाए रखने में मदद करता है।
2. सामान्य संस्कृति – एक जनजाति में सभी सदस्यों की सामान्य संस्कृति होती है, जिससे उनके रीति-रिवाजों, खान-पान, प्रथाओं, नियमों, लोकाचारों, धर्म, कला, नृत्य, जादू, संगीत, भाषा, रहन-सहन, विश्वासों, विचारों, मूल्यों आदि में समानता पायी जाती है।
In simple words: Tribes have two main features: they only marry within their own tribe, and they share the same language, culture, and traditions.

🎯 Exam Tip: Clearly list both points with headings like 'अन्तर्विवाही' and 'सामान्य संस्कृति' to secure full marks.

 

Question 10. जनजातीय परिवार की दो मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
Answer: जनजातीय परिवार की दो मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. जनजातीय परिवार में बाल-विवाह का प्रचलन होता है तथा कन्या-मूल्य की प्रथा भी है। विवाह के समय वर-पक्ष कन्या-पक्ष को कन्या-मूल्य देता है। यह प्रथा दर्शाती है कि कन्या को परिवार की आर्थिक संपत्ति माना जाता है।
2. जनजातीय परिवारों में वेश्यावृत्ति आम बात है। जनजातीय परिवार निर्धन होने के कारण अपनी स्त्रियों को अनुचित यौनसम्बन्ध स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं।
In simple words: Tribal families often practice child marriage and bride-price, where the groom's family pays the bride's family. Due to extreme poverty, some families also face social evils like exploitation.

🎯 Exam Tip: Write point-wise answers and highlight terms like 'कन्या-मूल्य' to show a strong understanding of tribal social structures.

 

Question 11. अनुसूचित जनजातियों की शिक्षा सम्बन्धी क्या समस्याएँ हैं ?
Answer: जनजातियों में शिक्षा का अभाव है और वे अज्ञानता के अन्धकार में पल रही हैं। अशिक्षा के कारण वे अनेक अन्धविश्वासों, कुरीतियों एवं कुसंस्कारों से घिरी हुई हैं। आदिवासी लोग वर्तमान शिक्षा के प्रति उदासीन हैं, क्योंकि यह शिक्षा उनके लिए अनुत्पादक है। जो लोग आधुनिक शिक्षा ग्रहण कर लेते हैं, वे अपनी जनजातीय संस्कृति से दूर हो जाते हैं और अपनी मूल संस्कृति को घृणा की दृष्टि से देखते हैं। आज की शिक्षा जीवन-निर्वाह का निश्चित साधन प्रदान नहीं करती; अतः शिक्षित व्यक्तियों को बेकारी का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, जनजातीय क्षेत्रों में स्कूलों की कमी भी एक बड़ा कारण है।
In simple words: Tribal people face educational challenges because modern education doesn't help them earn a living, and those who get educated often feel disconnected from their traditional culture.

🎯 Exam Tip: Explain how modern education is perceived as unproductive by tribals to add depth to your answer.

 

Question 12. दुर्गम निवासस्थान में रहने के कारण अनुसूचित जनजातियों को क्या हानि है ? या जनजातियों में ‘दुर्गम निवास स्थल : एक समस्या विषय पर प्रकाश डालिए।
Answer: लगभग सभी जनजातियाँ पहाड़ी भागों, जंगलों, दलदल-भूमि और ऐसे स्थानों में निवास करती हैं, जहाँ सड़कों का अभाव है और वर्तमान यातायात एवं संचार के साधन अभी वहाँ उपलब्ध नहीं हो पाये हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि उनसे सम्पर्क करना एक कठिन कार्य हो गया है। यही कारण है कि वैज्ञानिक आविष्कारों के मधुर फल से वे अभी अपरिचित ही हैं और उनकी आर्थिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य सम्बन्धी एवं राजनीतिक समस्याओं का निवारण नहीं हो पाया है। इस भौगोलिक अलगाव के कारण वे मुख्यधारा के विकास से पूरी तरह कट चुके हैं।
In simple words: Because tribes live in remote forests and mountains without roads or internet, they cannot access modern healthcare, education, or technology.

🎯 Exam Tip: Mention the lack of transport and communication as the primary reason for their isolation to score high.

 

Question 13. पर-संस्कृतिग्रहण के परिणामस्वरूप जनजातियों के सामने कौन-सी समस्या उत्पन्न हुई है ?
Answer: पर-संस्कृतिग्रहण के परिणामस्वरूप जनजातियों के सामने निम्नलिखित समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं: भाषा की समस्या, सांस्कृतिक विभेद, तनाव और दूरी की समस्या, जनजातीय ललित कलाओं का ह्रास, बाल-विवाह, वेश्यावृत्ति एवं गुप्त रोग की समस्या, स्थानान्तरित खेती सम्बन्धी समस्या, खान-पान व वस्त्रों की समस्या, धार्मिक समस्याएँ आदि। इन समस्याओं ने उनके पारंपरिक सामाजिक ढांचे को काफी कमजोर कर दिया है।
In simple words: When tribal people adopt outside cultures, they lose their own language, art, and traditions, leading to social confusion and health issues.

🎯 Exam Tip: List at least 4-5 specific problems like language issues, loss of art, and health problems to get full marks.

 

Question 14. अनुसूचित जाति विकास निगम क्यों बनाये गये ?
Answer: वर्तमान में अनुसूचित जातियों के विकास एवं कल्याण हेतु विभिन्न राज्यों में 'अनुसूचित जाति विकास निगम' बनाये गये हैं, जो अनुसूचित जातियों के परिवारों तथा वित्तीय संस्थाओं के बीच सम्बन्ध स्थापित कराने तथा उन्हें आर्थिक साधन उपलब्ध कराने में सहयोग देते हैं। यह निगम उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए कम ब्याज पर ऋण भी प्रदान करता है।
In simple words: These corporations were set up to help Scheduled Caste families get financial help and loans from banks so they can start businesses and improve their lives.

🎯 Exam Tip: Focus on the role of these corporations as a bridge between families and financial institutions.

 

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. भारत में अनुसूचित जातियों के लोगों की वर्तमान में कितनी संख्या है ?
Answer: भारत में अनुसूचित जातियों के लोगों की वर्तमान में संख्या अनुमानतः 17 करोड़ हो गयी है। यह संख्या देश की कुल जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दर्शाती है।
In simple words: The population of Scheduled Castes in India is estimated to be around 17 crores.

🎯 Exam Tip: Write the exact figure (17 crores) clearly to get full marks in 1-mark questions.

Question 2. डॉ० भीमराव अम्बेडकर की जन्मतिथि क्या है ?
Answer: डॉ० भीमराव अम्बेडकर की जन्मतिथि है-14 अप्रैल, 1891। उनका जन्म मध्य प्रदेश के महू में हुआ था।
In simple words: डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उन्हें भारतीय संविधान का जनक माना जाता है।

🎯 Exam Tip: Remember the exact date and year (14 April 1891) as it is frequently asked in objective questions.

 

Question 3. अनुसूचित जातियों के लोगों के लिए कितने प्रतिशत स्थान नौकरियों में आरक्षित है?
Answer: अनुसूचित जातियों के लोगों के लिए नौकरियों में 22.5 प्रतिशत स्थान आरक्षित है। यह आरक्षण उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए दिया गया है।
In simple words: सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति (SC) के लोगों के लिए 22.5% सीटें आरक्षित की गई हैं ताकि उन्हें समान अवसर मिल सकें।

🎯 Exam Tip: Clearly mention the percentage '22.5%' to secure full marks.

 

Question 4. ‘हरिजन सेवक संघ’ कहाँ स्थित है ?
Answer: ‘हरिजन सेवक संघ’ दिल्ली में स्थित है। इसकी स्थापना महात्मा गांधी द्वारा वर्ष 1932 में की गई थी।
In simple words: हरिजन सेवक संघ महात्मा गांधी द्वारा स्थापित एक संगठन है, जिसका मुख्यालय दिल्ली में है।

🎯 Exam Tip: Mention 'Delhi' clearly as the location of Harijan Sevak Sangh.

 

Question 5. अस्पृश्यता अपराध अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था? [2011]
Answer: अस्पृश्यता अपराध अधिनियम 1955 ई० में पारित किया गया था। इस कानून का मुख्य उद्देश्य समाज से छुआछूत की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करना था।
In simple words: छुआछूत को खत्म करने और इसे दंडनीय अपराध बनाने के लिए साल 1955 में अस्पृश्यता अपराध कानून पास किया गया था।

🎯 Exam Tip: Write the year '1955' clearly. This act was later renamed as the Protection of Civil Rights Act.

 

Question 6. जनजाति को परिभाषित कीजिए। [2007, 08, 11, 13, 14]
Answer: जनजाति एक ऐसा क्षेत्रीय मानव-समूह है, जिसकी एक सामान्य संस्कृति, भाषा, राजनीतिक संगठन एवं व्यवसाय होता है तथा जो सामान्यतः अन्तर्विवाह के नियमों का पालन करता है। ये समूह आमतौर पर जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं।
In simple words: जनजाति लोगों का एक ऐसा समूह है जो एक निश्चित क्षेत्र में रहते हैं, जिनकी अपनी भाषा और संस्कृति होती है और वे आपस में ही शादी करते हैं।

🎯 Exam Tip: Include key terms like 'regional group', 'common culture', and 'endogamy' (अन्तर्विवाह) in your definition.

 

Question 7. किन्हीं दो जनजातियों के नाम लिखिए। [2013]
Answer: दो जनजातियों के नाम निम्नलिखित हैं:
(1) मुण्डा (बिहार)
(2) नागा (नागालैण्ड)। ये दोनों भारत की बहुत ही प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जनजातियाँ हैं।
In simple words: मुंडा और नागा भारत की दो प्रमुख जनजातियाँ हैं जो क्रमशः बिहार और नागालैंड में पाई जाती हैं।

🎯 Exam Tip: Always write the state names along with the tribe names to make your answer more complete.

 

Question 8. अनुसूचित जनजातियों के लिए नौकरियों में कितने प्रतिशत स्थान सुरक्षित है?
Answer: अनुसूचित जनजातियों के लिए नौकरियों में 7.5 प्रतिशत स्थान सुरक्षित है। यह संवैधानिक प्रावधान उनके आर्थिक और सामाजिक उत्थान में मदद करता है।
In simple words: सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों के लिए 7.5% सीटें सुरक्षित रखी गई हैं।

🎯 Exam Tip: Do not confuse SC reservation (22.5%) with ST reservation (7.5%).

 

Question 9. राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों व जनजातियों के लिए कब तक स्थान सुरक्षित रखे गये हैं ?
Answer: राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों व जनजातियों के लिए सन् 2020 तक स्थान सुरक्षित रखे गये हैं। इस व्यवस्था को समय-समय पर संवैधानिक संशोधनों द्वारा आगे बढ़ाया जाता रहा है।
In simple words: विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण की अवधि को समय-समय पर बढ़ाया जाता है, जो पहले 2020 तक तय की गई थी।

🎯 Exam Tip: Mention the year '2020' clearly. Note that this has been further extended by recent amendments.

 

Question 10. 1951 ई० की जनगणना के अनुसार भारत में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या कितनी थी ? [2011]
Answer: लगभग 1 करोड़ 91 लाख। यह संख्या उस समय की कुल भारतीय जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी।
In simple words: साल 1951 की जनगणना के समय भारत में अनुसूचित जनजातियों की कुल आबादी लगभग 1 करोड़ 91 लाख थी।

🎯 Exam Tip: Write '1 crore 91 lakhs' clearly. Accurate figures from census data help score full marks.

 

Question 11. संविधान के कौन-से अनुच्छेद अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए लोकसभा, विधानसभाओं तथा स्थानीय निकायों में स्थान सुरक्षित करने पर जोर देते हैं ? [2007]
Answer: अनुच्छेद 243, 330 एवं 332 अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए लोकसभा विधानसभाओं तथा स्थानीय निकायों में स्थान सुरक्षित करने पर जोर देते हैं। ये अनुच्छेद समाज के वंचित वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।
In simple words: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243, 330 और 332 पिछड़े और जनजातीय वर्गों को चुनाव और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व देने के लिए सीटें सुरक्षित करते हैं।

🎯 Exam Tip: Memorize the specific article numbers (243, 330, 332) as they are crucial for scoring full marks.

 

Question 12. जनजातियों की समस्याओं के समाधान हेतु ‘राष्ट्रीय उपवन’ की अवधारणा किसने दी ? [2007]
Answer: यह अवधारणा रॉय तथा एल्विन ने दी। इस अवधारणा का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति को बाहरी हस्तक्षेप से बचाना था।
In simple words: जनजातियों के विकास और उनकी संस्कृति को बचाने के लिए 'राष्ट्रीय उपवन' (National Park) बनाने का सुझाव रॉय और एल्विन ने दिया था।

🎯 Exam Tip: Remember the names 'Roy' and 'Elwin' as the proponents of the National Park concept for tribes.

 

Question 13. जनजातियों में जीवन-साथी चुनने के तरीके का उल्लेख कीजिए। [2007, 13]
Answer: जनजातियों में ‘टोटम बहिर्विवाह’ का प्रचलन है जो कि बहिर्विवाह का ही एक रूप है। इसके तहत एक ही टोटम या गोत्र के लोग आपस में विवाह नहीं कर सकते हैं।
In simple words: जनजातियों में अपने ही कुल या टोटम से बाहर शादी करने का नियम होता है, जिसे टोटम बहिर्विवाह कहते हैं।

🎯 Exam Tip: Use the term 'Totem Exogamy' (टोटम बहिर्विवाह) as it is the key sociological concept here.

 

Question 14. सन 1980 में मण्डल कमीशन की रिपोर्ट पर आधारित अन्य पिछड़े वर्ग को कितने प्रतिशत आरक्षण दिया गया है ? [2007]
Answer: 27 प्रतिशत। यह आरक्षण अन्य पिछड़े वर्गों के सामाजिक और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया था।
In simple words: मण्डल आयोग की सिफारिशों के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 27% आरक्षण दिया गया है।

🎯 Exam Tip: The Mandal Commission recommended 27% reservation for OBCs; highlight this percentage in your answer.

 

Question 15. क्या केरल के नायर एक जनजाति हैं ? [2007]
Answer: हाँ। नायर समुदाय पारंपरिक रूप से केरल की एक मातृसत्तात्मक व्यवस्था वाली जाति रही है।
In simple words: हाँ, केरल के नायर समुदाय को सामाजिक रूप से एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, लेकिन उन्हें जनजाति की श्रेणी में माना गया है।

🎯 Exam Tip: A simple 'Yes' (हाँ) is sufficient, but you can add a brief line about their social structure if asked for more marks.

 

Question 16. निम्नलिखित पुस्तकों से सम्बन्धित लेखकों/विचारकों के नाम लिखिए:
(क) सामाजिक मानवशास्त्र
(ख) एन इण्ट्रोडक्शन टू सोशल ऐन्थ्रोपोलॉजी
(ग) मैन इन प्रिमिटिव वर्ल्ड

Answer: इन पुस्तकों के लेखक के नाम निम्नलिखित हैं:
(क) मजूमदार एवं मदान
(ख) मजूमदार एवं मदान
(ग) हॉबेल। ये पुस्तकें समाजशास्त्र और मानवशास्त्र के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
In simple words: इन प्रसिद्ध समाजशास्त्रीय पुस्तकों को मजूमदार, मदान और हॉबेल जैसे प्रसिद्ध विचारकों ने लिखा है।

🎯 Exam Tip: Match the books with their respective authors carefully. Double-check the spelling of 'Majumdar and Madan'.

Question 17. अनुसूचित नामक शब्द किसके द्वारा बनाया गया था?
Answer: अनुसूचित नामक शब्द साइमन कमीशन द्वारा 1927 ई० में बनाया गया था। यह शब्द भारतीय प्रशासनिक और कानूनी संदर्भों में विभिन्न वर्गों को वर्गीकृत करने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
In simple words: The term 'Scheduled' was first created by the Simon Commission in 1927. It was used to group certain communities for official purposes.

🎯 Exam Tip: Remember the year 1927 and the Simon Commission as key terms to score full marks in this question.

 

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. ‘ओरिजिन ऑफ स्पीसीज’ (Origin of Species) किसके द्वारा लिखी गयी?
(a) चार्ल्स डार्विन के
(b) हरबर्ट स्पेन्सर के
(c) कार्ल मॉनहीन के
(d) जॉर्ज सिमेल के
Answer: (a) चार्ल्स डार्विन के
In simple words: The famous book 'Origin of Species' was written by Charles Darwin, who explained how living things evolve over time.

🎯 Exam Tip: Associate Charles Darwin with the theory of evolution and this book to easily remember the answer.

 

Question 2. खासी जनजातीय समाज किस प्रकार का कार्य करता है?
(a) पौध-उत्पादक का
(b) खेती का
(c) पशुपालन का
(d) कुटीर उद्योग का
Answer: (a) पौध-उत्पादक का
In simple words: The Khasi tribal society mainly works as plant producers or cultivators to earn their living.

🎯 Exam Tip: Focus on the traditional occupation of the Khasi tribe, which is plant production, to answer correctly.

 

Question 3. हिमाचल प्रदेश की किस जनजाति के पुरुष अपनी पत्नियों के वेश में रहते हैं?
(a) संथाल के
(b) थारू के
(c) नागी के
(d) कोटा के
Answer: (b) थारू के
In simple words: In the Tharu tribe of Himachal Pradesh, men traditionally dress up in their wives' attire during certain customs.

🎯 Exam Tip: Tharu tribe is known for this unique cultural practice, so keep this name in mind.

 

Question 4. निम्नलिखित में कौन-सी जनजाति उत्तराखण्ड के गढ़वाल एवं कुमाऊँ क्षेत्र की है?
(a) लुसाई
(b) बिरहोर
(c) भोटिया
(d) गारो
Answer: (c) भोटिया
In simple words: The Bhotiya tribe lives in the hilly regions of Garhwal and Kumaon in Uttarakhand.

🎯 Exam Tip: Bhotiya is a very prominent tribe of Uttarakhand; matching the region with the tribe name helps avoid confusion.

 

Question 5. निम्नलिखित में कौन-सी जनजातीय समाज की एक विशेषता है?
(a) जटिल सामाजिक सम्बन्ध
(b) क्षेत्रीय समूह
(c) औपचारिकता
(d) व्यक्तिवादिता
Answer: (b) क्षेत्रीय समूह
In simple words: A tribal society is characterized by living together as a specific regional group with shared territory.

🎯 Exam Tip: Remember that a defined territory or regional group is a primary feature of any tribal community.

 

Question 6. निम्नलिखित में से किसको भारतीय संविधान द्वारा एक जनजाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में निर्दिष्ट करने का अधिकार है?
(a) उस राज्य का राज्यपाल जहाँ जनजाति निवास करती है।
(b) भारत का राष्ट्रपति
(c) आयुक्त अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति
(d) समाज कल्याण मन्त्रालय
Answer: (b) भारत का राष्ट्रपति
In simple words: Only the President of India has the official power to declare a community as a Scheduled Tribe under the constitution.

🎯 Exam Tip: The President holds the ultimate constitutional authority for notifying Scheduled Castes and Scheduled Tribes.

 

Question 7. भारतीय संविधान की कौन-सी धारा किसी भी प्रकार की अस्पृश्यता पर रोक लगाती है?
(a) धारा 17
(b) धारा 22
(c) धारा 45
(d) धारा 216
Answer: (a) धारा 17
In simple words: Article 17 of the Indian Constitution completely bans the practice of untouchability in any form.

🎯 Exam Tip: Article 17 (धारा 17) is a very frequently asked constitutional provision regarding social equality.

 

Question 8. ‘नागरिक अधिकार संरक्षण कानून’ किस वर्ष में लागू किया गया?
(a) 1950 ई० में
(b) 1956 ई० में
(c) 1970 ई० में
(d) 1986 ई० में
Answer: (b) 1956 ई० में
In simple words: The Protection of Civil Rights Act was officially implemented in the year 1956 to protect citizens from discrimination.

🎯 Exam Tip: Do not confuse this with the year the Constitution was adopted; the Civil Rights Protection Act came in 1956.

 

Question 9. लोकसभा के कुल 542 स्थानों में से कितने स्थान अनुसूचित जनजातियों के लिए सुरक्षित हैं?
(a) 30 स्थान
(b) 40 स्थान
(c) 50 स्थान
(d) 60 स्थान
Answer: (b) 40 स्थान
In simple words: Out of the total seats in the Lok Sabha, 40 seats are reserved specifically for candidates from Scheduled Tribes.

🎯 Exam Tip: Memorize the exact number of reserved seats for Scheduled Tribes to secure full marks.

 

Question 10. जनजातियों को ‘पिछड़े हिन्दू’ किसने कहा है?
(a) जी० एस० घुरिये
(b) एस० सी० दुबे
(c) एस० सी० राय
(d) जे० एच० हट्टन
Answer: (a) जी० एस० घुरिये
In simple words: The famous sociologist G.S. Ghurye referred to tribal people as 'Backward Hindus' due to their cultural similarities.

🎯 Exam Tip: Associate the term 'Backward Hindus' directly with G.S. Ghurye for quick recall.

 

Question 11. ‘अस्पृश्य वे जातियाँ हैं जो अनेक सामाजिक और राजनीतिक निर्योग्यताओं की शिकार हैं। इसमें से अनेक निर्योग्यताओं उच्च जातियों द्वारा परम्परात्मक तौर पर निर्धारित और सामाजिक तौर पर लागू की गई हैं।” यह परिभाषा किसने दी है?
(a) जी० एस० घुरिये
(b) डी० एन० मजूमदार
(c) जे० एन० हट्टन
(d) एम० एन० श्रीनिवास
Answer: (b) डी० एन० मजूमदार
In simple words: This definition of untouchability, highlighting social and political disadvantages imposed by upper castes, was given by D.N. Majumdar.

🎯 Exam Tip: Look for keywords like 'social and political disadvantages' to identify D.N. Majumdar's definition.

 

Question 12. ओ० बी० सी० का अर्थ है
(a) अन्य पिछड़ा वर्ग
(b) अन्य पिछड़ी जातियाँ
(c) सभी पिछड़ी जातियाँ
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) अन्य पिछड़ा वर्ग
In simple words: OBC stands for Other Backward Classes, which refers to socially and educationally backward communities.

🎯 Exam Tip: OBC translates directly to 'Other Backward Classes' (अन्य पिछड़ा वर्ग) in Hindi.

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FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 26 अनुसूचित जाति और जनजाति की समस्याएं for the 2026 27 session?

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Are the Sociology UP Board solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 26 अनुसूचित जाति और जनजाति की समस्याएं as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sociology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 26 अनुसूचित जाति और जनजाति की समस्याएं will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 26 अनुसूचित जाति और जनजाति की समस्याएं in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Sociology. You can access UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 26 अनुसूचित जाति और जनजाति की समस्याएं in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Sociology UP Board solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 26 अनुसूचित जाति और जनजाति की समस्याएं in printable PDF format for offline study on any device.