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Detailed Chapter 1 भौगोलिक और सांस्कृतिक वातावरण और उनके UP Board Solutions for Class 12 Sociology
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Class 12 Sociology Chapter 1 भौगोलिक और सांस्कृतिक वातावरण और उनके UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Sociology Chapter 1 Geographical And Cultural Environment And Their Effect On Social Life (भौगोलिक और सांस्कृतिक पर्यावरण का सामाजिक जीवन पर प्रभाव)
विस्तृत उत्तीय प्रश्न (6 अंक)
Question 1. पर्यावरण की परिभाषा दीजिए भौगोलिक पर्यावरण से मानव-जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए या पर्यावरण क्या है? इसके दो प्रकार भी बताइए मानव-व्यवहारों पर प्राकृतिक पर्यावरण के प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए या भौगोलिक पर्यावरण क्या है तथा इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है ? विवेचना कीजिए या भौगोलिक पर्यावरण क्या है ? यह सामाजिक जीवन को किस प्रकार से प्रभावित करता है ? या सामाजिक जीवन पर भौगोलिक पर्यावरण के प्रभावों को व्यक्त कीजिए या मनुष्य के जीवन में पर्यावरणीय प्रदूषण के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभावों का वर्णन कीजिए या सम्पूर्ण पर्यावरण की अवधारणा स्पष्ट कीजिए या पर्यावरण को परिभाषित कीजिए या प्राकृतिक पर्यावरण एवं मानव समाज में सम्बन्ध बताइए या पर्यावरण से आप क्या अर्थ लगाते हैं ? भौगोलिक पर्यावरण के अप्रत्यक्ष प्रभावों का उल्लेख कीजिए या पर्यावरण क्या है? भौगोलिक पर्यावरण का मनुष्य के सामाजिक तथा सांस्कृतिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है? या भौगोलिक पर्यावरण के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभावों का उल्लेख कीजिए
Answer:
पर्यावरण का अर्थ
पर्यावरण 'परि + आवरण' दो शब्दों के मेल से बना है 'परि' का अर्थ है 'चारों ओर' तथा 'आवरण' का अर्थ है 'घेरा इस प्रकार पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ हुआ चारों ओर का घेरा जीव के चारों ओर जो प्राकृतिक और सांस्कृतिक शक्तियाँ और परिस्थितियाँ विद्यमान हैं उनके प्रभावी रूप को ही पर्यावरण कहा जाता है पर्यावरण का क्षेत्र अत्यन्त विशद् है पर्यावरण उन समस्त शक्तियों, वस्तुओं और दशाओं का योग है जो मानव को चारों ओर से आवृत्त किये हुए हैं मानव से लेकर वनस्पति तथा सूक्ष्म जीव तक सभी पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं पर्यावरण उन सभी बाह्य दशाओं एवं प्रभावों का योग है जो जीव के कार्यों एवं प्रगति पर अपना गहरा प्रभाव डालता है पर्यावरण को मानव-जीवन से पृथक् करना उतना ही असम्भव है जैसे शरीर से आत्मा को मैकाइवर एवं पेज ने तो कहा भी है कि “जीवन और परिस्थिति आपस में सम्बन्ध रखती हैं वास्तव में, जल, वायु, आकाश, पृथ्वी, परम्पराओं, धर्म और संस्कृति को समग्र रूप में पर्यावरण ही कहा जा सकता है
पर्यावरण की परिभाषा
पर्यावरण का ठीक-ठीक अर्थ समझने के लिए हमें इसकी परिभाषाओं को अनुशीलन करना होगा विभिन्न विद्वानों ने पर्यावरण को निम्नवत् परिभाषित किया है ई-ए- रॉस के अनुसार, “पर्यावरण हमें प्रभावित करने वाली कोई भी बाहरी शक्ति है' जिसबर्ट के अनुसार, “पर्यावरण वह सब कुछ है जो किसी वस्तु को चारों ओर से घेरे हुए है तथा उस पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है" टी-डी- इलियट के अनुसार, चेतन पदार्थ की इकाई के प्रभावकारी उद्दीपन और अन्तःक्रिया के क्षेत्र को पर्यावरण कहते हैं" हर्सकोविट्स ने पर्यावरण को इस प्रकार परिभाषित किया है, “यह सभी बाह्य दशाओं और प्रभावों का योग है जो जीवों के कार्यों एवं विकास को प्रभावित करता है”
पर्यावरण का वर्गीकरण अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से स्थूल रूप में पर्यावरण को निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है 1. प्राकृतिक पर्यावरण - इस पर्यावरण के अन्तर्गत सभी प्राकृतिक और भौगोलिक शक्तियों का समावेश होता है पृथ्वी, आकाश, वायु, जल, वनस्पति और जीव-जन्तु प्राकृतिक पर्यावरण के अंग हैं प्राकृतिक पर्यावरण का प्रभाव मानव-जीवन पर सर्वाधिक पड़ता है
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2. सामाजिक पर्यावरण - सम्पूर्ण सामाजिक ढाँचा सामाजिक पर्यावरण कहलाता है इसे सामाजिक सम्बन्धों को पर्यावरण भी कहा जा सकता है परिवार, पड़ोस, सम्बन्धी, खेल के साथी और विद्यालय सामाजिक पर्यावरण के अंग हैं
3. सांस्कृतिक पर्यावरण - मनुष्य द्वारा निर्मित वस्तुओं का समग्र रूप का परिवेश सांस्कृतिक पर्यावरण कहलाता है सांस्कृतिक पर्यावरण भौतिक और अभौतिक दो प्रकार का होता - है- आवास, विद्यालय, टेलीविजन, कुर्सी, मशीनें, भौतिक पर्यावरण तथा धर्म, संस्कृति, भाषा, लिपि, रूढ़ियाँ, कानून और प्रथा अभौतिक पर्यावरण हैं
उपर्युक्त तीनों पर्यावरणों को समग्र रूप में सम्पूर्ण पर्यावरण (Total Environment) कहा जाता है मनुष्य पर सम्पूर्ण पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है
भौगोलिक (प्राकृतिक) पर्यावरण का अर्थ एवं परिभाषा
भौगोलिक पर्यावरण या प्राकृतिक पर्यावरण प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण है मनुष्य पर जिन प्राकृतिक शक्तियों को चारों ओर से प्रभाव पड़ता है, उसे भौगोलिक पर्यावरण कहा जाता है ये सभी शक्तियाँ स्वतन्त्र रहकर मानव को प्रभावित करती हैं पर्वत, सरिता, वन, पवन, आकाश, पृथ्वी तथा जीव-जगत् सभी भौगोलिक पर्यावरण के अंग हैं प्रमुख विद्वानों ने इसे निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया है
मैकाइवर एवं पेज के अनुसार, “भौगोलिक पर्यावरण उन दशाओं से मिलकर बनता है जो प्रकृति मनुष्य को प्रदान करती है इसे पर्यावरण में इन्होंने पृथ्वी का धरातल एवं उसकी सभी प्राकृतिक दशाओं, प्राकृतिक साधनों, भूमि और पानी, पर्वतों व मैदानों, खनिज पदार्थों, पौधों, पशुओं, जलवायु की शक्ति, गुरुत्वाकर्षण, विद्युत एवं विकिरण शक्तियाँ, जो पृथ्वी पर क्रियाशील हैं, को सम्मिलित किया है इन सबका मानव-जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है
सोरोकिन के अनुसार, “भौगोलिक पर्यावरण को सम्बन्ध ऐसी भौगोलिक दशाओं से है जिनका अस्तित्व मानवीय क्रियाओं से स्वतन्त्र है और जो मानव के अस्तित्व तथा कार्यों की छाप पड़े बगैर अपनी प्रकृति के अनुसार बदलती हैं इस परिभाषा से यह स्पष्ट हो जाता है कि मनुष्य द्वारा सभी अनियन्त्रित शक्तियों को भौगोलिक पर्यावरण के अन्तर्गत रखा जा सकता है
डॉ- डेविस के अनुसार, “मनुष्य के सम्बन्ध में भौगोलिक पर्यावरण से अभिप्राय भूमि या मानव के चारों ओर फैले उन सभी भौतिक स्वरूपों से है जिनमें वह रहता है, जिनका उसकी आदतों और क्रियाओं पर प्रभाव पड़ता है”
भौगोलिक पर्यावरण का मानव-जीवन पर प्रभाव
भौगोलिक पर्यावरण बहुत अधिक प्रभावी और शक्तिमान होता है जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य इसके प्रभाव में रहता है मनुष्य का रंग, रूप, आकार, स्वभाव से लेकर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवेश सब कुछ भौगोलिक पर्यावरण की ही देन हैं भौगोलिक पर्यावरण के मानव-जीवन पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के प्रभाव पड़ते हैं
भौगोलिक पर्यावरण के प्रत्यक्ष प्रभाव
भौगोलिक पर्यावरण से मानव के जीवन पर निम्नलिखित प्रत्यक्ष प्रभाव दृष्टिगोचर होते हैं
1. जनसंख्या पर प्रभाव - किसी देश की जनसंख्या कितनी होगी, यह वहाँ की अनुकूल या भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है यदि भौगोलिक परिस्थितियाँ प्रतिकूल होंगी, अर्थात् भूमि कम उपजाऊ है, रेगिस्तान, बंजर, पर्वत इत्यादि अधिक हैं तो वहाँ जनसंख्या कम होगी इसके विपरीत, यदि भूमि समतल है, उपजाऊ है और सिंचाई के अच्छे साधन हैं तो जनसंख्या अधिक होगी इस प्रकार भौगोलिक परिस्थितियाँ जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करती हैं गंगा, सतलुज और ब्रह्मपुत्र के मैदान में अनुकूल पर्यावरण होने के कारण ही जनसंख्या सघन है, जब कि थार का मरुस्थल कठोर पर्यावरणीय दशाओं के कारण विरल जनसंख्या वाला क्षेत्र है
आलोचनात्मक मूल्यांकन - यह सत्य है कि भौगोलिक पर्यावरण का 'मानव जनसंख्या पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है, किन्तु अन्य कारकों को भी जनसंख्या एवं जनसंख्या के घनत्व पर प्रभाव पड़ता है उदाहरणार्थ-अनेक स्थान ऐसे हैं जहाँ भौगोलिक पर्यावरण में कोई अन्तर न होने पर भी वहाँ की जनसंख्या में निरन्तर अत्यधिक वृद्धि हो रही है; जैसे-1901ई- से लेकर अब तक दिल्ली, कोलकाता आदि की जनसंख्या में कई गुना वृद्धि हो गयी है, जब कि वहाँ की भौगोलिक दशाओं में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ
2. आवास पर प्रभाव - भौगोलिक पर्यावरण मनुष्य के निवास हेतु प्रयुक्त मकानों तथा इनकी सामग्री को भी प्रभावित करता है उदाहरणार्थ-पर्वतीय क्षेत्रों में पत्थरों और लकड़ियों का प्रयोग मकानों में अधिक होता है इनकी छतें ढलावदार होती हैं, जिससे वर्षा का पानी न रुके इसके विपरीत, मैदानी इलाकों में ईंटों या मिट्टी इत्यादि का अधिक प्रयोग होता है जापान में भूचाल से बचने के लिए लकड़ी के मकान बनाये जाते हैं न्यूयॉर्क में कठोर धरातल होने के कारण गगनचुम्बी भवन बनाये जाते हैं इस प्रकार मकानों की बनावट तथा इसमें प्रयुक्त सामग्री भौगोलिक पर्यावरण द्वारा प्रभावित होती है
आलोचनात्मक मूल्यांकन - इसमें सन्देह नहीं कि भौगोलिक पर्यावरण ‘मानव निवास' की सम्पूर्ण व्यवस्था में सहायता करता है, परन्तु उस पर अन्य कारकों का भी प्रभाव रहता है उदाहरणार्थ-महल और झोंपड़ी एक ही भौगोलिक पर्यावरण में सामाजिक पर्यावरण की दुहाई देते रहते हैं
3. वेश-भूषा पर प्रभाव - भौगोलिक पर्यावरण का लोगों की वेश-भूषा पर पर्याप्त प्रभाव पड़ता है गर्म जलवायु वाले देशों में लोग बारीक व ढीले वस्त्र पहनते हैं, जब कि ठण्डे देशों में गर्म व चुस्त कपड़ों का अधिक इस्तेमाल होता है अनेक ठण्डे प्रदेशों में जानवरों की खाल से भी कोट इत्यादि बनाकर पहने जाते हैं टुण्ड्रा प्रदेश में लोग समूरधारी पशुओं की खाल के वस्त्र पहनते हैं
आलोचनात्मक मूल्यांकन - यह सत्य है कि ‘वस्त्रों' पर भौगोलिक पर्यावरण का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, तथापि मानव वस्त्र केवल भौगोलिक पर्यावरण पर ही आधारित नहीं होते, इस पर संस्कृति (Culture) का भी विशेष प्रभाव पड़ता है उदाहरणार्थ-गरीबों और अमीरों की वेश-भूषा भी अलग-अलग होती है, जब कि वे एक ही भौगोलिक पर्यावरण में निवास करते हैं
4. खान-पान पर प्रभाव - भोजन की सामग्री भी भौगोलिक पर्यावरण से प्रभावित होती है जिस क्षेत्र में जो खाद्य पदार्थ अधिक होते हैं उनको प्रचलने वहीं पर अधिक होता है बंगाल व चेन्नई में चावल अधिक खाये जाते हैं, जब कि उत्तर भारत में गेहूं का अधिक प्रयोग होता है ठण्डे क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्ति मांसाहारी अधिक होते हैं, जब कि गर्म क्षेत्रों में रहने वाले शाकाहारी अधिक होते हैं यदि आसपास कोई नदी आदि है तो मछली इत्यादि का प्रयोग अधिक होता है पंजाब के निवासी दाल-रोटी खाते हैं, जब कि बंगाली चावल और मछली का भोजन करते हैं
आलोचनात्मक मूल्यांकन - भौगोलिक पर्यावरण तथा खान-पान में इतना सम्बन्ध होते हुए भी भौगोलिक निर्धारणवाद का सिद्धान्त ठीक नहीं उतरता वास्तव में, मानव-जीवन का सम्बन्ध संस्कृति और आर्थिक स्थिति से अधिक होता है, पर्यावरण से कम एक ही स्थान पर रहने वाले कुछ व्यक्ति शाकाहारी भी होते हैं और मांसाहारी भी इस प्रकार एक ही क्षेत्र में रहने वाले निर्धन और धनवान का भोजन भी एक-दूसरे से अलग होता है
5. पशु-जीवन पर प्रभाव - पशुओं को भी एक विशेष पर्यावरण की आवश्यकता होती है, क्योंकि इनमें मनुष्य की तरह अनुकूलन की शक्ति नहीं होती; जैसे-शेर के लिए जंगल में तथा ऊँट के लिए रेगिस्तान में भौगोलिक परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं और ये यहीं अधिक प्रसन्न रहते हैं इसी प्रकार मछली भी समुद्र में ही प्रसन्न रहती है
आलोचनात्मक मूल्यांकन - यह सत्य है कि पशुओं को प्राकृतिक पर्यावरण की ही आवश्यकता होती है और वे इसमें ही प्रसन्न रहते हैं, परन्तु आजकल बड़े-बड़े चिड़ियाघरों में कृत्रिम पर्यावरण उत्पन्न करके देश-विदेश के विभिन्न पशु-पक्षियों को रखा जाता है
भौगोलिक पर्यावरण के अप्रत्यक्ष प्रभाव भौगोलिक पर्यावरण अप्रत्यक्ष रूप से भी मानव की सामाजिक दशाओं को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित करता है
1. सामाजिक संगठन पर प्रभाव-भौगोलिक पर्यावरण अप्रत्यक्ष रूप से सामाजिक संगठन को प्रभावित करता है लीप्ले का कथन है कि “ऐसे पहाड़ी व पठारी देशों में जहाँ खाद्यान्न की कमी होती है, वहाँ जनसंख्या की वृद्धि अभिशाप मानी जाती है और ऐसी विवाह संस्थाएँ स्थापित की जाती हैं जिनसे जनसंख्या में वृद्धि न हो जौनसार बाबर में खस जनजाति में सभी भाइयों की एक ही पत्नी होती है इससे जनसंख्या-वृद्धि रुक जाती है विवाह की आयु, परिवार का आकार तथा प्रकार भी अप्रत्यक्ष रूप से भौगोलिक परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं मानसूनी प्रदेश घनी जनसंख्या के अभिशाप से ग्रसित हैं
आलोचना - परन्तु यह सदैव ठीक नहीं है और अनेक एकसमान क्षेत्रों में परिवार व विवाह की भिन्न-भिन्न प्रथाएँ देखी गयी हैं
2. आर्थिक संरचना पर प्रभाव - भौगोलिक पर्यावरण उद्योगों के विकास की गति निर्धारित करता है यदि खनिज पदार्थों की प्रचुरता है तो आर्थिक विकास अधिक होगा और लोगों का जीवन-स्तर उच्च होगा यदि प्राकृतिक साधनों की कमी है तो आर्थिक विकास प्रभावित होगा और लोगों का रहन-सहन व जीवन-स्तर अपेक्षाकृत निम्न कोटि का होगा व्यावसायिक संरचना भी इससे प्रभावित होती है इस प्रकार भौगोलिक पर्यावरण आर्थिक संरचना को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है भूमध्यरेखीय प्रदेश में कच्चे मालों की प्रचुरता होते हुए भी तकनीक एवं विज्ञान का विकास न हो पाने के कारण उद्योग-धन्धों की स्थापना नहीं हो पायी है
आलोचना - आर्थिक संरचना पर भौगोलिक पर्यावरण के प्रभाव के विपक्ष में समीक्षकों द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि एकसमान जलवायु में समान उद्योग-धन्धों का विकास नहीं हो पाता है
3. राजनीतिक संगठन पर प्रभाव - राज्य तथा राजनीतिक संस्थाएँ भी भौगोलिक परिस्थितियों द्वारा प्रभावित होती हैं प्रतिकूल पर्यावरण में लोगों का जीवन घुमन्तू होता है और स्थायी संगठनों का विकास नहीं हो पाता अनुकूल पर्यावरण आर्थिक विकास में सहायता प्रदान करता है, राजनीति को स्थायी रूप प्रदान करता है और समानता पर आधारित प्रजातन्त्र या साम्यवाद जैसी राजनीतिक व्यवस्थाएँ विकसित होती हैं अत्यधिक आर्थिक समानता कुलीनतन्त्र का विकास करती है इस प्रकार सरकार के स्वरूप तथा राज्य के संगठन पर भी भौगोलिक पर्यावरण का प्रभाव देखा गया है
आलोचना - इस प्रभाव की भी आलोचना इस आधार पर की गयी है कि एकसमान भौगोलिक परिस्थितियों वाले देशों में एकसमान राजनीतिक संगठन व सरकारें नहीं हैं एक ही देश में समयसमय पर होने वाली राजनीतिक उथल-पुथल और सरकारों के स्वरूप में होने वाले हेर-फेर भी इसके प्रतीक हैं कि राजनीतिक संस्थाएँ भौगोलिक पर्यावरण द्वारा प्रभावित नहीं होतीं
4. धार्मिक जीवन पर प्रभाव - धर्म प्रत्येक समाज का एक महत्त्वपूर्ण अंग है भौगोलिक निश्चयवादी इस बात पर बल देते हैं कि भौगोलिक पर्यावरण अथवा प्राकृतिक शक्तियाँ धर्म के विकास को प्रभावित करती हैं मैक्समूलर ने धर्म की उत्पत्ति का सिद्धान्त ही प्राकृतिक शक्तियों के भय से उनकी पूजा करने के रूप में प्रतिपादित किया है जिन देशों में प्राकृतिक प्रकोप अधिक हैं, वहाँ पर धर्म का विकास तथा धर्म पर आस्था रखने वाले लोगों की संख्या अधिक होती है एशिया की मानसूनी जलवायु के कारण ही यहाँ के लोग भाग्यवादी बने हैं कृषिप्रधान देशों में इन्द्र की पूजा होना सामान्य बात है वृक्ष, गंगा और गाय भारतीयों के लिए उपयोगी हैं अतः ये सब पूजनीय हैं
आलोचना - भौगोलिकवादियों के इस तर्क को कि “प्राकृतिक शक्तियाँ ही धर्म के विकास को निर्धारित करती हैं स्वीकार नहीं किया जा सकता एकसमान भौगोलिक परिस्थितियों अथवा प्राकृतिक शक्तियों वाले देशों में धर्म का विकास एकसमान रूप से नहीं हुआ है समाज-विशेष की सामाजिक आवश्यकताओं तथा सामाजिक मूल्यों से धर्म अधिक प्रभावित होता है
5. साहित्य पर प्रभाव - साहित्य पर भी भौगोलिक पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है भौगोलिक पर्यावरण जितना सुन्दर व अनुकूल होता है उतनी ही सृजनता अधिक होती है और साहित्य भी उतना ही सजीव और सुन्दर बन जाता है भारत में साहित्य के विकास को भौगोलिक व प्राकृतिक शक्तियों से पृथक् करके नहीं समझा जा सकता है यूनान ने सुकरात जैसे दार्शनिक और साहित्यकार दिये, यह सब वहाँ के भौगोलिक पर्यावरण की ही देन थी
आलोचना - यद्यपि साहित्य कुछ सीमा तक अप्रत्यक्ष रूप से भौगोलिक पर्यावरण से प्रभावित होता है, तथापि समान परिस्थितियों वाले समाजों में साहित्य का विकास समान नहीं हुआ है साहित्य के विकास में समाज की सामाजिक-आर्थिक दशाओं का गहरा प्रभाव पड़ता है
6. कला पर प्रभाव - साहित्य के साथ वास्तुकला, चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, नृत्य तथा नाटकों पर भी भौगोलिक परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है सुन्दर प्राकृतिक पर्यावरण में चित्रकारी और कृत्रिम पर्यावरण में होने वाली चित्रकारी का केन्द्रबिन्दु अलग-अलग होता है चित्रकार, संगीतकार, नर्तक इत्यादि प्राकृतिक पर्यावरण से अलग होकर अपनी कलाओं का विकास नहीं कर सकते हैं यूनान और रोम में ललित कलाओं का विकास वहाँ की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ही हुआ था
आलोचना - आज कला का विकास भौगोलिक परिस्थितियों से प्रभावित नहीं है, क्योंकि यातायात व संचार साधनों के विकास से इसमें अन्तर्राष्ट्रीय आयाम जुड गया है तथा यह किसी एक देश की सम्पत्ति नहीं रहा है साथ ही इसके विकास में समाज की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियाँ भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट हो जाता है कि मानव का सामाजिक जीवन पूरी तरह भौगोलिक पर्यावरण पर टिका है भौगोलिक पर्यावरण उसके सामाजिक जीवन को पग-पग पर दिग्दर्शन करता है
In simple words: पर्यावरण वह सब कुछ है जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है और हमारे जीवन पर सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव डालता है। इसमें प्रकृति, समाज और संस्कृति से जुड़े सभी तत्व शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर लिखते समय भौगोलिक पर्यावरण की परिभाषा, उसके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावों को उदाहरण सहित स्पष्ट करना महत्त्वपूर्ण है।
Question 2. सांस्कृतिक पर्यावरण से क्या तात्पर्य है ? सांस्कृतिक पर्यावरण के समाज पर प्रभावों को बताइए या सांस्कृतिक पर्यावरण क्या है? इसके भिन्न-भिन्न प्रभावों का उल्लेख कीजिए या सांस्कृतिक पर्यावरण की परिभाषा दीजिए यह सामाजिक जीवन को किस प्रकार से प्रभावित करता है?
Answer:
सांस्कृतिक पर्यावरण का अर्थ और परिभाषा
पर्यावरण के निर्माण में प्रकृति के साथ-साथ मनुष्य का भी हाथ रहता है मनुष्य द्वारा निर्मित पर्यावरण सांस्कृतिक पर्यावरण कहलाता है सांस्कृतिक पर्यावरण के स्वरूप को सँभालने में प्रत्येक आगामी पीढ़ी का योगदान रहता है इस प्रकार भौतिक और अभौतिक रूप में पीढ़ी को अपने पूर्वजों से जो प्राप्त होता है उसे ही सांस्कृतिक पर्यावरण कहा जाता है भवन, विद्यालय, बाँध, शक्तिगृह, जलयान, रेलगाड़ी, मेज, पेन व चश्मा सभी सांस्कृतिक पर्यावरण के अंग हैं इन्हें भौतिक संस्कृति के अन्तर्गत रखा जाता है रीति-रिवाज, धर्म, आचरण, भाषा, लिपि व साहित्य भी सांस्कृतिक पर्यावरण के अंग हैं इन्हें अभौतिक संस्कृति कहा जाता है विभिन्न विद्वानों ने सांस्कृतिक पर्यावरण को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया है
हर्सकोविट्स के अनुसार, “सांस्कृतिक पर्यावरण के अन्तर्गत वे सभी भौतिक और अभौतिक वस्तुएँ सम्मिलित हैं जिनका निर्माण मानव ने किया है”
मैकाइवर एवं पेज के अनुसार, “सम्पूर्ण सामाजिक विरासत सांस्कृतिक पर्यावरण है' उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि भूमण्डल की समस्त भौतिक और अभौतिक सांस्कृतिक धरोहर सांस्कृतिक पर्यावरण है हर्सकोविट्स का मानना है कि सांस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण मानव द्वारा होता है प्राकृतिक पर्यावरण से मानव जिस कृति को निर्माण करती है, इन्हीं कृतियों के सम्पूर्ण योग को सांस्कृतिक पर्यावरण कही जाता है सम्पूर्ण भौतिक, अभौतिक सांस्कृतिक विरासत को सांस्कृतिक पर्यावरण कहा जाता है सांस्कृतिक पर्यावरण पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तान्तरित होता है प्रत्येक काल में इसमें सुधार होता है और इसकी अभिवृद्धि होती है सांस्कृतिक पर्यावरण को इस प्रकार भी समझा जा सकता है यदि सम्पूर्ण पर्यावरण में से भौगोलिक पर्यावरण को घटा दें तो जो कुछ बचता है उसे सांस्कृतिक पर्यावरण कहा जाता है प्राकृतिक पर्यावरण की तरह सांस्कृतिक पर्यावरण भी मानव के सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग होता है
सांस्कृतिक पर्यावरण का सामाजिक जीवन पर प्रभाव
संस्कृति सीखा हुआ व्यवहार है यह मानव के सामाजिक जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है संस्कृति से सांस्कृतिक पर्यावरण जन्म लेता है सम्पूर्ण सांस्कृतिक विरासत सांस्कृतिक पर्यावरण के रूप में सामाजिक मानव का प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन करती है यह पग-पग पर मानव-व्यवहार को नियन्त्रित कर उसे सुखी और सम्पन्न जीवनयापन का मार्ग दिखाती है सम्पूर्ण सांस्कृतिक विरासत मनुष्य को पशुवत् व्यवहार करने से रोककर समाज में सद्गुणों का समावेश करती है सांस्कृतिक पर्यावरण के समाज पर पड़ने वाले प्रभावों को निम्नलिखित रूप में स्पष्ट किया जा सकता है-
1. सामाजिक संगठन पर प्रभाव - सांस्कृतिक पर्यावरण सामाजिक संगठन को प्रभावित करता है, क्योंकि संस्कृति के अनुरूप ही सामाजिक संगठन, सामाजिक संरचना तथा सामाजिक संस्थाओं का विकास होता है उदाहरण के लिए, किसी समाज में परिवार तथा विवाह का क्या रूप होगा, यह वहाँ के सांस्कृतिक मूल्यों और आदर्शों पर निर्भर करता है व्यक्ति की सामाजिक स्थिति, महिलाओं की सामाजिक स्थिति, उत्तर :अधिकार के नियम, विवाह-विच्छेद के नियम इत्यादि सांस्कृतिक मान्यताओं से प्रभावित होते हैं इसीलिए विभिन्न संस्कृतियों में पनपने वाले सामाजिक संगठन भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं सांस्कृतिक पर्यावरण की परिवर्तनशील प्रकृति होने पर सामाजिक संगठन में भी तेजी से परिवर्तन आता है
2. आर्थिक जीवन पर प्रभाव - सांस्कृतिक पर्यावरण व्यक्तियों के आर्थिक जीवन को भी प्रभावित करता है। यदि सांस्कृतिक मूल्य आर्थिक विकास में सहायता देने वाले हैं तो वहाँ व्यक्तियों का आर्थिक जीवन अधिक उन्नत होगा। मैक्स वेबर (Max Weber) ने हमें बताया है कि प्रोटेस्टेण्ट ईसाइयों की धार्मिक मान्यताएँ पूँजीवादी प्रवृत्ति के विकास में सहायक हुई हैं। इसीलिए प्रोटेस्टेण्ट ईसाइयों के बहुमत वाले देशों में पूँजीवाद अधिक है। यदि सांस्कृतिक मूल्ये आर्थिक विकास में बाधक हैं तो व्यक्तियों के आर्थिक जीवन पर इनका कुप्रभाव पड़ता है तथा वे आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए रहते हैं।
3. प्रौद्योगिकीय विकास पर प्रभाव - सांस्कृतिक पर्यावरण आर्थिक जीवन को प्रभावित करने के साथ-साथ प्रौद्योगिकीय विकास की गति को भी निर्धारित करता है। भौतिकवादी संस्कृति भौतिक उपलब्धियों तथा भोग-विलास पर अधिक बल देती है तथा वैज्ञानिक आविष्कारों को तीव्र गति प्रदान करती है। आध्यात्मिकता पर बल देने वाली संस्कृति में रचनात्मक व आध्यात्मिक सुख के साधनों के विकास पर अधिक बल दिया जाता है। इस प्रकार प्रौद्योगिकीय विकास व आविष्कार भी सांस्कृतिक पर्यावरण द्वारा प्रभावित होते हैं।
4. राजनीतिक संगठन पर प्रभाव - सांस्कृतिक पर्यावरण का राजनीतिक संगठन तथा राजनीतिक संस्थाओं पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। किसी देश में सरकार का स्वरूप क्या होगा, सभी व्यक्तियों को समान रूप से वयस्क मताधिकार मिलेगा या नहीं, सभी को राजनीतिक क्रियाओं में भाग लेने की स्वतन्त्रता होगी या नहीं इत्यादि सभी बातों पर सांस्कृतिक मूल्यों का गहरा प्रभाव पड़ता है। राज्य द्वारा सभी नागरिकों की रक्षा या विशेष वर्ग की रक्षा करना अथवा राज्य द्वारा बनाये जाने वाले कानूनों व अधिनियमों पर भी सांस्कृतिक पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है। इसी कारण विभिन्न संस्कृतियों वाले समाजों में राजनीतिक संगठन की दृष्टि से अन्तर पाये जाते हैं।
5. धार्मिक व्यवस्था पर प्रभाव - व्यक्तियों का धार्मिक जीवन भी सांस्कृतिक पर्यावरण द्वारा प्रभावित होता है। धार्मिक संस्थाओं व संगठनों का रूप संस्कृति द्वारा निर्धारित होता है; उदाहरणार्थ-भारतीय संस्कृति ने धर्म के विकास में सहायता दी है और इसी कारण आज सभी प्रमुख धर्मों के लोग भारत में विद्यमान हैं। आज भी भारतीय अलौकिक शक्तियों में विश्वास करते हैं, जब कि पश्चिमी देशों में लौकिकीकरण तेजी से हुआ है और धर्म का प्रभाव भौतिकवादी संस्कृति के कारण दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है। सांस्कृतिक पर्यावरण में परिवर्तन आने पर ही धर्म का स्वरूप भी बदल जाता है। भारतीय संस्कृति के कारण ही धर्म जीवन पद्धति का अंग बना हुआ है। यहाँ सामाजिक जीवन में अध्यात्मवाद विशेष स्थान प्राप्त कर चुका है।
6. समाजीकरण की प्रक्रिया पर प्रभाव - सांस्कृतिक पर्यावरण समाजीकरण की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। बच्चा जन्म के समय तो केवल एक जीवित पुतला होता है जिसे सामाजिक गुण वहाँ की संस्कृति के अनुरूप प्राप्त होते हैं। सांस्कृतिक आदर्शों के अनुरूप वह बोलना, खाना-पीना, वस्त्र पहनना तथा प्रथाओं व रीति-रिवाजों को सीखता है। भारतीय समाज में समाजीकरण की प्रक्रिया भारतीय संस्कृति से प्रभावित है, जब कि पश्चिमी देशों में समाजीकरण की प्रक्रिया वहाँ की संस्कृति के अनुरूप है। अतः व्यक्ति में विकसित होने वाले सामाजिक गुण उसके सांस्कृतिक पर्यावरण की उपज होते हैं।
7. व्यक्तित्व के निर्माण पर प्रभाव - संस्कृति का व्यक्तित्व से गहरा सम्बन्ध है। व्यक्ति को व्यक्तित्व किस प्रकार से निर्मित होगा, यह वहाँ की संस्कृति पर निर्भर करता है। समाजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से ही व्यक्ति उन बातों को ग्रहण करता है जो वहाँ की संस्कृति के अनुरूप होती हैं। अहिंसा, त्याग, सम्मान, नैतिकता, स्वतन्त्रता आदि मूल्यों का अधिग्रहण व्यक्ति संस्कृति द्वारा ही करता है। अनेक अध्ययनों से हमें पता चला है कि संस्कृति के अनुरूप ही व्यक्तित्व का विकास होता है। उपर्युक्त विवेचना से यह स्पष्ट हो जाता है कि सांस्कृतिक पर्यावरण का व्यक्ति के सामाजिक जीवन तथा अन्य सभी पक्षों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। समाज का सम्पूर्ण ढाँचा सांस्कृतिक पर्यावरण के अनुरूप ही बनता है। सांस्कृतिक पर्यावरण वह महत्त्वपूर्ण शक्ति है जो मानव-जीवन को समग्र रूप से प्रभावित और परिवर्तित करती है। यद्यपि सांस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण मनुष्य द्वारा ही होता है फिर भी वह उससे पूरी तरह प्रभावित होता है। एक व्यक्ति जिस सांस्कृतिक पर्यावरण में रहता है उसमें वैसी ही संस्कृति का उविकास होता है। वहाँ के सांस्कृतिक मूल्य उसके व्यवहार में पूरी तरह रच-बस जाते हैं। मानवीय जीवन की दशाएँ और सामाजिक जीवन के प्रतिमान सांस्कृतिक पर्यावरण द्वारा ही निर्धारित होते हैं
In simple words: सांस्कृतिक पर्यावरण मानव निर्मित होता है और इसमें भौतिक व अभौतिक दोनों तत्व शामिल होते हैं। यह समाज के संगठन, आर्थिक जीवन, प्रौद्योगिकी, राजनीति, धर्म, समाजीकरण और व्यक्तित्व के निर्माण को प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक पर्यावरण की परिभाषा और समाज पर उसके विभिन्न प्रभावों को बिन्दुवार समझाना, साथ ही उदाहरण देना अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायक होगा।
Question 3. आधुनिकीकरण के भारतीय समाज एवं संस्कृति पर पड़ने वाले प्रभावों की विवेचना कीजिए।
Answer: भारतीय समाज आज आधुनिकीकरण की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय समाज एवं संस्कृति पर आधुनिकीकरण के प्रभाव से उत्पन्न होने वाले प्रमुख परिवर्तनों को निम्नलिखित क्षेत्रों में देखा जा सकता है|
1. प्रौद्योगिक विकास - भारत में आधुनिकीकरण का सर्वप्रमुख परिणाम प्रौद्योगिक विकास के रूप में देखने को मिलता है। आज भारत में सूती कपड़ों, रासायनिक खादों, सीमेण्ट, जूट, भारी मशीनों, दवाइयों, कारों आदि के उत्पादन के बड़े-बड़े कारखाने स्थापित हो चुके हैं। प्रौद्योगिक विकास के साथ विभिन्न प्रकार के व्यवसायों में इतनी वृद्धि हुई कि हमारे समाज में अनेक संरचनात्मक परिवर्तन होने लगे।
2. जीवन-स्तर में सुधार - भारत में भूमि-सुधारों तथा विभिन्न विकास कार्यक्रमों के फलस्वरूप जीवन के सभी पक्षों में आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन मिला। कुछ समय पहले तक समाज के जो दुर्बल वर्ग जीवन की अनिवार्य सुविधाएँ पाने से भी वंचित थे, उनमें भी चीनी और स्टील के बर्तनों का उपयोग देखने को मिलता है। जीवन-स्तर में होने वाला यह सुधार उन मनोवृत्तियों का परिणाम है, जो आधुनिकता की उपज हैं।
3; कृषि का आधुनिकीकरण - आधुनिकता का स्पष्ट प्रभाव ग्रामीण समाज पर देखने को मिलता है, जहाँ कृषि की नयी प्रविधियों का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। अब अधिकांश ग्रामीण ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, पम्पिंग सैटों, थ्रेसर तथा स्प्रेयर आदि का प्रयोग करके कृषि उत्पादन को बढ़ाने में लगे हैं। कृषि के आधुनिकीकरण से गाँव और नगर के लोगों की दूरी कम हुई तथा ग्रामीणों का विस्तृत जगत से सम्पर्क बढ़ने लगा।
4. समाज-सुधार को प्रोत्साहन - आधुनिकीकरण का सामाजिक संरचना पर सबसे स्पष्ट प्रभाव समाज-सुधार की प्रक्रिया के रूप में देखने को मिलता है। आधुनिकीकरण से उत्पन्न होने वाली मनोवृत्तियों के परिणामस्वरूप उन अन्धविश्वासों और कुरीतियों का प्रभाव तेजी से कम होने लगा जो सैकड़ों वर्षों से भारतीय सामाजिक जीवन को विघटित कर रही थीं। अस्पृश्यता, पर्दा प्रथा, बहुपत्नी विवाह तथा दहेज-प्रथा जैसी सामाजिक कमजोरियाँ क्षीण होती जा रही हैं।
5. शिक्षा का प्रसार - आधुनिकीकरण का एक अन्य प्रभाव शिक्षा के प्रति लोगों की मनोवृत्तियों में व्यापक परिवर्तन होना है। आज अधिकांश माता-पिता आर्थिक तंगी के बाद भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के पक्षधर हैं। इसी के फलस्वरूप शिक्षित लोगों के प्रतिशत तथा शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार हो सका ।
6. सामाजिक मूल्यों एवं मनोवृत्तियों में परिवर्तन - आधुनिकीकरण के प्रभाव से भारत के परम्परागत मूल्यों में परिवर्तन होने के साथ ही विभिन्न वर्गों की मनोवृत्तियों में भी व्यापक परिवर्तन हुए। अब अधिकांश लोग भाग्य की अपेक्षा व्यक्तिगत योग्यता और परिश्रम को अधिक महत्त्व देने लगे हैं। जातिगत विभेदों की जगह समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों के प्रभाव में वृद्धि हुई है।
In simple words: आधुनिकीकरण ने भारतीय समाज और संस्कृति में कई बदलाव लाए हैं, जिनमें प्रौद्योगिकी का विकास, जीवन-स्तर में सुधार, कृषि में आधुनिक तकनीक का उपयोग, समाज-सुधार, शिक्षा का प्रसार और सामाजिक मूल्यों व सोच में परिवर्तन शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: आधुनिकीकरण के विभिन्न प्रभावों को बिन्दुवार स्पष्ट करते हुए, प्रत्येक प्रभाव के साथ प्रासंगिक उदाहरणों का उल्लेख करें।
Question 4. संस्कृति की परिभाषा दीजिए। भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में अन्तर स्पष्ट कीजिए। या भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में अन्तर बताइए । या भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में चार अन्तर लिखिए।
Answer: संस्कृति का अर्थ मनुष्य ने आदिकाल से प्राकृतिक बाधाओं को दूर करने के लिए व अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक समाधानों की खोज की है। इन खोजे गए उपायों को मनुष्य ने आगे आने वाली पीढ़ी को ही हस्तान्तरित किया। प्रत्येक पीढ़ी ने अपने पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान और कला का और अधिक विकास किया है। दूसरे शब्दों में, प्रत्येक पीढ़ी ने अपने पूर्वजों के ज्ञान को संचित किया है। और इसे ज्ञान के आधार पर नवीन ज्ञान और अनुभव का भी अर्जन किया है। इस प्रकार के ज्ञान व अनुभव के अन्तर्गत यन्त्र, प्रविधियाँ, प्रथाएँ, विचार और मूल्य आदि आते हैं। ये मूर्त और अमूर्त वस्तुएँ संयुक्त रूप से संस्कृति' कहलाती है। इस प्रकार, वर्तमान पीढ़ी ने अपने पूर्वजों तथा स्वयं के प्रयासों से जो अनुभव व व्यवहार सीखी है, वही संस्कृति है।
संस्कृति की परिभाषा
प्रमुख विद्वानों ने संस्कृति को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया है। 1. हॉबल के अनुसार “संस्कृति सम्बन्धित सीखे हुए व्यवहार प्रतिमानों का सम्पूर्ण योग है जो कि एक समाज के सदस्यों की विशेषताओं को बतलाता है और जो इसलिए प्राणिशास्त्रीय विरासत का परिणाम नहीं होता।”
2. ई-एस- बोगार्डस के अनुसार “संस्कृति किसी समूह के कार्य करने में सोचने की समस्त विधियाँ हैं।”
3. मैकाइवर तथा पेज के अनुसार “संस्कृति हमारे दैनिक व्यवहार में कला, साहित्य, धर्म, मनोरंजन और आनन्द में पाए जाने वाले रहन-सहन और विचार के ढंगों में हमारी प्रकृति - की अभिव्यक्ति है।”
4. हर्सकोविट्स के अनुसार “संस्कृति पर्यावरण का मानव निर्मित भाग है।”
5. मैलिनोव्स्की के अनुसार 'संस्कृति प्राप्त आवश्यकताओं की एक व्यवस्था और उद्देश्यात्मक क्रियाओं को संगठित व्यवस्था है।”
6. बीरस्टीड के अनुसार “संस्कृति वह सम्पूर्ण जटिलता है, जिसमें वे सभी वस्तुएँ सम्मिलित हैं जिन पर हम विचार करते हैं, कार्य करते हैं और समाज का सदस्य होने के नाते अपने पास रखते हैं।”
उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि संस्कृति में दैनिक जीवन में पायी जाने वाली समस्त वस्तुएँ आती हैं। मनुष्य भौतिक, मानसिक तथा प्राणिशास्त्रीय रूप में जो कुछ पर्यावरण से सीखता है, उसी को संस्कृति कहा जाता है।
संस्कृति के प्रकार
टायलर के अनुसार संस्कृति एक जटिल समग्रता है, जिसमें ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता, कानून, प्रथा तथा ऐसी ही अन्य किसी भी योग्यता और आदत का समावेश रहता है, जिन्हें मनुष्य समाज का सदस्य होने के नाते अर्जित करता है। ऑगबर्न ने संस्कृति को दो भागों में विभाजित किया है।
(क) भौतिक संस्कृति मनुष्यों ने अपनी आवश्यकताओं के कारण अनेक आविष्कारों को जन्म दिया है। ये आविष्कार हमारी संस्कृति के भौतिक तत्त्व माने जाते हैं। इस प्रकार भौतिक संस्कृति उन आविष्कारों का नाम है जिनको मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं के कारण जन्म दिया है। यह भौतिक संस्कृति मानव जीवन है। बाह्य रूप से सम्बन्धित है भौतिक संस्कृति को ही सभ्यता कहा जाता है। मोटर, रेलगाड़ी, हवाईजहाज, मेज-कुर्सी, बिजली का पंखा आदि सभी भतिक तत्त्व; भौतिक संस्कृति अथवा सभ्यता के ही प्रतीक हैं। संस्कृति के भौतिक पक्ष को मैथ्यू आरनोल्ड, अल्फ्रेड वेबर तथा मैकाइवर और पेज ने सभ्यता कहा है। भौतिक संस्कृति अथवा सभ्यता को परिभाषित करते हुए मैकाइवर तथा पेज ने लिखा है कि “मनुष्य ने अपने जीवन की दशाओं पर नियन्त्रण करने के प्रयत्न में जिस सम्पूर्ण कला विन्यास की रचना की है, उसे सभ्यता कहते हैं।” क्लाइव बेल के अनुसार “सभ्यता मूल्यों के ज्ञान के आधार पर स्वीकृत किया गया तर्क और तर्क के आधार पर कठोर एवं भेदनशील बनाया गया मूल्यों का ज्ञान है।”
(ख) अभौतिक संस्कृति मानव जीवन को संगठित करने के लिए मनुष्य ने अनेक रीतिरिवाजों, प्रथाओं, रूढ़ियों आदि को जन्म दिया है। ये सभी तत्त्व मनुष्य की अभौतिक संस्कृति के रूप हैं। ये तत्त्व अमूर्त तत्त्वों का योग है, जो नियमों, उपनियमों, रूढ़ियों, रीति-रिवाजों आदि के रूप में मानव व्यवहार को नियन्त्रित करते हैं। इस प्रकार संस्कृति के अन्तर्गत वे सभी चीजें सम्मिलित की जा सकती हैं, जो व्यक्ति की आन्तरिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। दूसरे शब्दों में, संस्कृति में वे भी पदार्थ सम्मिलित किए जा सकते हैं, जो मनुष्य के व्यवहारों को प्रभावित करते हैं। टायलर ने लिखा है कि “संस्कृति मिश्रित-पूर्ण व्यवस्था है, जिसमें समस्त ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता के सिद्धान्त, विधि-विधान, प्रथाएँ एवं अन्य समस्त योग्यताएँ सम्मिलित हैं तथा जिन्हें व्यक्ति समाज का सदस्य होने के नाते प्राप्त करता है।”
भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में अन्तर
भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में निम्नलिखित प्रमुख भेद या अन्तर पाए जाते हैं
1. भौतिक संस्कृति के अन्तर्गत मनुष्य द्वारा निर्मित वे सभी वस्तुएँ आ जाती हैं, जिनका उनकी उपयोगिता द्वारा मूल्यांकन किया जाता है, जबकि अभौतिक संस्कृति का सम्बन्ध मूल्यों, विचारों व ज्ञान से है।
2. भौतिक संस्कृति का सम्बन्ध व्यक्ति की बाहरी दशा से होता है, जबकि अभौतिक संस्कृति का सम्बन्ध व्यक्ति की आन्तरिक अवस्था से होता है।
3. भौतिक संस्कृति में तीव्रता से परिवर्तन होता रहता है, जबकि अभौतिक संस्कृति धीरे-धीरे परिवर्तित होती है।
4. भौतिक संस्कृति का प्रसार तीव्रता से होता है तथा इसे ग्रहण करने हेतु बुद्धि की आवश्यकता नहीं होती, जबकि अभौतिक संस्कृति का प्रसार बहुत धीमी गति से होता है।
5. भौतिक संस्कृति आविष्कारों से सम्बन्धित है, जबकि अभौतिक संस्कृति आध्यात्मिकता से सम्बन्धित है।
6. भौतिक संस्कृति का कितना विकास होगा, यह निश्चय अभौतिक संस्कृति ही करती है।
7. भौतिक संस्कृति मानव द्वारा निर्मित वस्तुओं का योग है, जबकि अभौतिक संस्कृति रीति रिवाजों, रूढ़ियों, प्रथाओं, मूल्यों, नियमों, व उपनियमों का योग है।
8. भौतिक संस्कृति मूर्त होती है, जबकि अभौतिक संस्कृति अमूर्त होती है।
9. भौतिक संस्कृति मानव आवश्यकताओं की पूर्ति से सम्बन्धित होने के कारण एक साधन है, जबकि अभौतिक संस्कृति व्यक्ति को जीवन-यापन का तरीका बतलाती है।
10. भौतिक संस्कृति का मापदण्ड उपयोगिता पर आधारित है, जबकि अभौतिक संस्कृति हमारी आन्तरिक भावनाओं से सम्बन्धित है।
In simple words: संस्कृति मनुष्य द्वारा सीखी गई और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होने वाली जीवनशैली है, जिसमें भौतिक वस्तुएँ (जैसे भवन) और अभौतिक तत्व (जैसे रीति-रिवाज) दोनों शामिल होते हैं। भौतिक संस्कृति मूर्त और तेजी से बदलती है, जबकि अभौतिक संस्कृति अमूर्त और धीरे-धीरे विकसित होती है।
🎯 Exam Tip: संस्कृति की परिभाषा और भौतिक व अभौतिक संस्कृति के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए, उदाहरणों का उपयोग करें और प्रमुख बिंदुओं को सूचीबद्ध करें।
लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
Question 1. लैण्डिस द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण के वर्गीकरण को लिखिए।
Answer: लैण्डिस ने सम्पूर्ण पर्यावरण को निम्नलिखित तीन भागों में बाँटा है
1. प्राकृतिक पर्यावरण - इसके अन्तर्गत वे सभी प्राकृतिक शक्तियाँ एवं वस्तुएँ आती हैं, जिनका निर्माण प्रकृति ने किया है; जैसे-भूमि, तारे, सूर्य, चन्द्र, नदी, पहाड़, समुद्र, जलवायु, पेड़-पौधे, पशु-जगत्, भूकम्प, बाढ़ आदि । ये सभी मानव एवं समाज को प्रभावित करते हैं।
2. सामाजिक पर्यावरण - इसके अन्तर्गत मानवीय सम्बन्धों से निर्मित सामाजिक समूह, संगठन, समाज, समुदाय, समिति, संस्था आदि आते हैं, जो व्यक्ति को जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रभावित करते हैं, उसका समाजीकरण करते हैं और उसे मानव की संज्ञा प्रदान करने में सहायक होते हैं।
3. सांस्कृतिक पर्यावरण - इसके अन्तर्गत धर्म, नैतिकता, प्रथाएँ, लोकाचार, कानून, प्रौद्योगिकी, व्यवहार-प्रतिमान आदि आते हैं, जिन्हें मनुष्य अपने अनुभवों एवं सामाजिक सम्पर्क के कारण सीखता है और उनके अनुरूप अपने को ढालने का प्रयास करता है।
In simple words: लैण्डिस ने पर्यावरण को तीन भागों में वर्गीकृत किया है: प्राकृतिक (भूमि, जलवायु, जीव-जन्तु), सामाजिक (मानवीय सम्बन्ध, समूह) और सांस्कृतिक (धर्म, नैतिकता, प्रथाएँ)।
🎯 Exam Tip: लैण्डिस के पर्यावरण वर्गीकरण के तीनों प्रकारों को उनके मुख्य घटकों के साथ संक्षेप में समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. भौगोलिक निश्चयवादी (निर्धारणवादी) विचारधारा की समालोचना कीजिए ।
Answer: भौगोलिक निश्चयवादी विचारधारा की आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं
1. भौगोलिक निश्चयवादियों ने मनुष्य को कीड़े-मकोड़े एवं पशु-पक्षियों की भाँति असहाय एवं निरुपाय मान लिया है। वे यह भूल जाते हैं कि मानव बुद्धिमान एवं चिन्तनशील प्राणी है जिसने आविष्कारों के बल पर भाग्य और जीवन की दीन दशी को ही बदल दिया है।
2. यदि भौगोलिक पर्यावरण ही मानव की सभ्यता, संस्कृति एवं व्यवहार को तय करता है तो फिर एक ही पर्यावरण में रहने वाले लोगों के भोजन, वस्त्र, मकान, प्रथाओं एवं परम्पराओं में अन्तर क्यों होता है, इसका उत्तर : भौगोलिक निश्चयवाद के आधार पर नहीं दिया जा सकता।
3. मानव के प्रत्येक कार्य को केवल भौगोलिक पर्यावरण की ही उपजे मानकर भूगोलविदों ने अतिवाद का परिचय दिया, जब कि मानव-कार्य एवं व्यवहार को प्रभावित करने में, भौगोलिक कारक कई कारकों में से एक है, न कि सब कुछ ।
In simple words: भौगोलिक निश्चयवादी विचारधारा की आलोचना की जाती है क्योंकि यह मानव को पर्यावरण के सामने असहाय मानती है, जबकि मानव अपनी बुद्धिमत्ता से बदलाव ला सकता है, और यह एक ही पर्यावरण में विभिन्न संस्कृतियों के अस्तित्व की व्याख्या नहीं कर पाती।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक निश्चयवाद की आलोचना को बिन्दुवार प्रस्तुत करें और प्रत्येक बिंदु के लिए ठोस तर्क दें।
Question 3. भौगोलिक पर्यावरण सामाजिक संस्थाओं को कैसे प्रभावित करता है ?
Answer: कई भूगोलविदों ने भौगोलिक कारकों एवं सामाजिक संस्थाओं का सम्बन्ध प्रकट किया है। उदाहरण के लिए, जिन स्थानों पर खाने-पीने एवं रहने की सुविधाएँ होती हैं, वहाँ संयुक्त परिवार पाये जाते हैं और जहाँ इनका अभाव होता है वहाँ एकाकी परिवार । जहाँ प्रकृति से संघर्ष करना होता है, वहाँ पुरुष-प्रधान समाज होते हैं। इसी प्रकार से जहाँ जीविकोपार्जन की सुविधाएँ सरलता से मिल जाती हैं और कृषि की प्रधानता होती है, वहाँ बहुपत्नी-प्रथा तथा जहाँ जीवनयापन कठिन होता है, वहाँ बहुपति-प्रथा अथवा एक-विवाह की प्रथा पायी जाती है। इसका कारण यह है कि संघर्षपूर्ण पर्यावरण में स्त्रियों का भरण-पोषण सम्भव न होने से कन्या-वध आदि की प्रथा पायी जाती है जिससे उनकी संख्या घट जाती है। जिन स्थानों पर जीवन-यापन के लिए कठोर श्रम एवं सामूहिक प्रयास करना होता है, वहाँ सामाजिक संगठन सुदृढ़ होता है।
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण सामाजिक संस्थाओं को प्रभावित करता है; जैसे-अनुकूल स्थानों पर संयुक्त परिवार, संघर्षपूर्ण वातावरण में पुरुष-प्रधान समाज, और कठिन जीवनयापन वाले क्षेत्रों में बहुपति-प्रथा या एक-विवाह जैसी संस्थाएँ विकसित होती हैं।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक कारकों और सामाजिक संस्थाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए विशिष्ट उदाहरण दें, जैसे परिवार का प्रकार या विवाह की प्रथाएँ।
Question 4. “मानव पहले प्रकृति का दास था, परन्तु अब स्वामी बनता जा रहा है।” इस कथन पर टिप्पणी कीजिए ।
Answer: भौगोलिक निश्चयवादी मानव के खान-पान, वेश-भूषा, मकान, व्यवहार, धर्म, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं आदि पर भौगोलिक प्रभाव को प्रमुख मानते हैं। वे मानव को प्रकृति के हाथों में खिलौना मात्र ही समझते हैं। भौगोलिक निश्चयवादियों की बात कुछ समय पहले तक उचित मानी जा सकती थी, जब मानव ने आज जितनी प्रगति, विकास और आविष्कार नहीं किये थे और उसका सम्पूर्ण जीवन प्रकृति पर निर्भर था, उससे ही नियन्त्रित व निर्देशित होता था। शिकारी अवस्था से कृषि अवस्था तक मानव की प्रकृति की दासता अधिक थी, किन्तु आज के वैज्ञानिक युग में मानव ने प्रकृति पर विजय पायी है। विज्ञान के सहारे ही मानव ने चन्द्रमा पर विजय की है, समुद्रों का मंथन है, आकाश में उड़ा है। अब दलदल, पहाड़ और रेगिस्तान उसके मार्ग में बाधा नहीं रहे। मानव ने अपने प्रयत्नों से रेगिस्तानों व टुण्ड्रा प्रदेशों को रहने योग्य एवं हरे-भरे खेतों में बदल दिया है। कृत्रिम वर्षा की जाने लगी है। मौसम के प्रभाव से बचने के लिए वातानुकूलित कमरे बनने लगे हैं। प्रत्येक क्षेत्र में आज मानव प्रकृति की दासता से मुक्त होता जा रहा है और नवीन आविष्कारों, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान के सहारे प्रकृति के रहस्यों को ज्ञात कर उन्हें अपनी इच्छानुसार प्रयोग में ला रहा है।
In simple words: यह कथन दर्शाता है कि कैसे मानव ने अपनी तकनीकी प्रगति और वैज्ञानिक ज्ञान के माध्यम से प्राकृतिक बाधाओं को पार करके प्रकृति पर अपनी निर्भरता कम की है, जिससे वह अब पर्यावरण को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ढाल रहा है।
🎯 Exam Tip: मानव-प्रकृति सम्बन्धों के ऐतिहासिक विकास (दास से स्वामी तक) को स्पष्ट करें और आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति के उदाहरणों से अपने तर्क को पुष्ट करें।
Question 5. भौतिक संस्कृति की विशेषताओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए ।
Answer: भौतिक संस्कृति की विशेषताओं को हम संक्षेप में इस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं
1. भौतिक संस्कृति मूर्त होती है।
2. भौतिक संस्कृति संचयी होती है; अतः इसके अंगों एवं मात्रा में निरन्तर वृद्धि होती जाती
3. चूंकि भौतिक संस्कृति मूर्त है, अतः उसे मापा जा सकता है।
4. भौतिक संस्कृति की उपयोगिता एवं लाभ का मूल्यांकन सरल है।
5. भौतिक संस्कृति में परिवर्तन शीघ्र होते हैं।
6. एक स्थान से दूसरे स्थान पर संस्कृति का प्रसार होने पर भौतिक संस्कृति में बिना परिवर्तन हुए ही उसे ग्रहण किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अमेरिकन फर्नीचर की डिजाइन, पेन, वेश-भूषा एवं मशीनों को हम बिना परिवर्तन के ग्रहण कर सकते हैं।
7. भौतिक संस्कृति में कई विकल्प पाये जाते हैं। अतः व्यक्ति अपनी रुचि एवं आवश्यकता के अनुसार उनमें से चुनाव कर सकता है।
In simple words: भौतिक संस्कृति मूर्त, संचयी, मापी जा सकने वाली, तेजी से बदलने वाली और आसानी से फैलने वाली होती है, जिसमें कई विकल्प होते हैं और जिसकी उपयोगिता का मूल्यांकन सरल होता है।
🎯 Exam Tip: भौतिक संस्कृति की विशेषताओं को बिन्दुवार स्पष्ट करें और प्रत्येक विशेषता के साथ संक्षिप्त उदाहरण दें।
Question 6. सांस्कृतिक पर्यावरण व्यक्तित्व-निर्माण को कैसे प्रभावित करता है ?
Answer: मानव जन्म से कुछ शारीरिक गुण एवं क्षमताएँ लेकर पैदा होता है, किन्तु संस्कृति लेकर नहीं। सांस्कृतिक पर्यावरण में ही मानव के गुणों व क्षमता का विकास होता है। समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति को समाज व संस्कृति की अनेक बातें सिखायी जाती हैं। व्यक्तित्व संस्कृति की ही देन है, संस्कृति के अभाव में व्यक्तित्व का समुचित विकास नहीं हो सकता। सांस्कृतिक पर्यावरण में रहकर ही व्यक्ति परम्पराओं, विश्वासों, नैतिकता, आदर्श आदि को ग्रहण करता है, जो उसके व्यक्तित्व का अंग बन जाते हैं। सांस्कृतिक पर्यावरण में भिन्नता के कारण ही हमें विभिन्न प्रकार के व्यक्तित्व देखने को मिलते हैं और व्यक्ति की मनोवृत्तियों, विचारों, विश्वासों एवं व्यवहारों में भिन्नता पायी जाती है। उदाहरणार्थ-भारत में किसी व्यक्ति का सम्मान करने के लिए लोग खड़े हो जाते हैं और हाथ जोड़ते हैं, जब कि अंग्रेज लोग सम्मान प्रकट करने के लिए सिर से अपना टोप उतार देते हैं। मुस्लिम स्त्रियाँ बुर्का पहनती हैं, किन्तु अमेरिकन स्त्रियाँ नहीं। स्पष्ट है कि व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में सांस्कृतिक पर्यावरण महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: सांस्कृतिक पर्यावरण व्यक्ति के गुणों और क्षमताओं को विकसित करता है, उसे परंपराओं, विश्वासों और आदर्शों को सिखाता है, जिससे उसका व्यक्तित्व आकार लेता है; विभिन्न संस्कृतियाँ विभिन्न प्रकार के व्यक्तित्वों को जन्म देती हैं।
🎯 Exam Tip: व्यक्तित्व निर्माण में समाजीकरण की भूमिका को सांस्कृतिक पर्यावरण से जोड़कर स्पष्ट करें, और सांस्कृतिक भिन्नताओं से व्यक्तित्व में अंतर के उदाहरण दें।
Question 7. भौगोलिक तथा सांस्कृतिक पर्यावरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: भौगोलिक़ पर्यावरण से अभिप्राय प्राकृतिक पर्यावरण से है, जब कि सांस्कृतिक पर्यावरण मानव या समाज द्वारा निर्मित पर्यावरण है। दोनों में पर्याप्त अन्तर हैं, जो इस प्रकार हैं
1. भौगोलिक पर्यावरण का सम्बन्ध प्रकृति से है; अतः यह मानव से स्वतन्त्र है, जब कि सांस्कृतिक पर्यावरण, मानव द्वारा निर्मित पर्यावरण है।
2. भौगोलिक पर्यावरण में भौतिक वस्तुएँ, जल, वायु, आकाश, सूर्य, चन्द्रमा आदि आते हैं, जब कि सांस्कृतिक पर्यावरण में भौतिक और अभौतिक दोनों प्रकार की वस्तुएँ आती हैं।
3. भौगोलिक पर्यावरण मूर्त होता है, जब कि सांस्कृतिक पर्यावरण अमूर्त होती है।
4. भौगोलिक पर्यावरण की अपेक्षा सांस्कृतिक पर्यावरण व्यक्तियों के जीवन को अधिक प्रभावित करता है।
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण प्रकृति निर्मित होता है और इसमें प्राकृतिक तत्व होते हैं, जबकि सांस्कृतिक पर्यावरण मानव निर्मित होता है और इसमें भौतिक व अभौतिक दोनों तत्व शामिल होते हैं। भौगोलिक पर्यावरण मूर्त है, जबकि सांस्कृतिक पर्यावरण अमूर्त।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक और सांस्कृतिक पर्यावरण के बीच के मुख्य अंतरों को बिन्दुवार स्पष्ट करें, जिसमें उनकी उत्पत्ति, प्रकृति (मूर्त/अमूर्त) और घटक शामिल हों।
Question 8. भौगोलिक पर्यावरण का धर्म तथा मानव-व्यवहार पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए। या भौगोलिक पर्यावरण के चार प्रभावों का उल्लेख कीजिए । भौगोलिक पर्यावरण के दो अप्रत्यक्ष प्रभाव लिखिए। या भौगोलिक पर्यावरण के अप्रत्यक्ष प्रभावों का वर्णन कीजिए। या भौगोलिक पर्यावरण के मानव व्यवहार पर दो प्रभाव बताइए ।
Answer: भौगोलिक पर्यावरण के चार प्रभाव निम्नलिखित हैं
1. धर्म पर प्रभाव - धर्म प्रत्येक समाज का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। भौगोलिक निश्चयवादी इस बात पर बल देते हैं कि भौगोलिक पर्यावरण अथवा प्राकृतिक शक्तियाँ धर्म के विकास को प्रभावित करती हैं। मैक्स मूलर ने धर्म की उत्पत्ति का सिद्धान्त ही प्राकृतिक शक्तियों के भय से उनकी पूजा करने के रूप में प्रतिपादित किया है। जिन देशों में प्राकृतिक प्रकोप अधिक हैं, वहाँ पर धर्म का विकास तथा धर्म पर आस्था रखने वाले लोगों की संख्या अधिक होती है। एशिया की मानसूनी जलवायु के कारण ही यहाँ के लोग भाग्यवादी बने हैं। कृषिप्रधान देशों में इन्द्र की पूजा होना सामान्य बात है। वृक्ष, गंगा और गाय भारतीयों के लिए उपयोगी हैं; अतः ये सब पूजनीय हैं।
2. मानव-व्यवहार पर प्रभाव - भूगोलविदों का मत है कि मानवीय व्यवहारों, कार्यक्षमता, मानसिक योग्यता, आत्महत्या, अपराध एवं जन्म-दर और मृत्यु-दर पर जलवायु, तापक्रम एवं आर्द्रता आदि भौगोलिक कारकों का प्रभाव पड़ता है। लकेसन के अनुसार, “अपराध ऋतुओं के हिसाब में परिवर्तित होते हैं। सर्दियों में सम्पत्ति सम्बन्धी अपराध अधिक होते हैं और गर्मियों में व्यक्ति सम्बन्धी”; उदाहरणार्थ-उपजाऊ भूमि, अनुकूल वर्षा तथा ठण्डे मौसम वाले क्षेत्रों में अपराध कम होते हैं। उनकी कार्यक्षमता भी अपेक्षाकृत अधिक होती है।
3. आर्थिक जीवन पर प्रभाव - किसी देश या समाज के आर्थिक क्षेत्र का निर्धारण वहाँ की भौगोलिक दशाओं से होता है। यदि किसी देश में उपजाऊ मैदान अधिक हैं, तो वहाँ का आर्थिक ढाँचा कृषि पर निर्भर होगा। यदि किसी देश में खनिज पदार्थों की अधिकता है, तो उस देश की आर्थिक उन्नति करने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं। इसी प्रकार यदि भौगोलिक पर्यावरण ने उस देश को कच्चा माल और शक्ति के साधन प्रदान किये हैं, तो उस देश का आर्थिक संगठन उद्योगों पर आधारित होता है।
4. सामाजिक संगठन पर प्रभाव - कुछ लोगों का कहना है कि सामाजिक संगठनों का स्वरूप भौगोलिक दशाओं से निर्धारित होता है। जंगली प्रदेशों में कुटुम्ब बड़े होते हैं, क्योंकि लोगों को जंगली जानवरों से अपनी रक्षा सामूहिक रूप से करनी पड़ती है और उदर-पूर्ति के लिए भी मिलकर कार्य करना पड़ता है। नगरों में परिवार छोटे होते हैं, क्योंकि स्त्री-पुरुष अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति परिवार के बिना भी कर लेते हैं और इसलिए तलाकों की संख्या भी वहाँ अधिक होती है। रेगिस्तानों और घास के मैदानों में लोगों को अपने जानवरों को लेकर घूमना-फिरना पड़ता है, इसलिए उनके जीवन में स्थायित्व नहीं आ पाता। इसके विपरीत, खेती और उद्योग-धन्धे वाले क्षेत्रों के परिवारों में अधिक स्थायित्व होता है और उनके सामाजिक संगठनों में स्थिरता होती है।
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण धर्म (प्राकृतिक प्रकोप से भय), मानव व्यवहार (जलवायु से प्रभावित कार्यक्षमता, अपराध दर), आर्थिक जीवन (कृषि या उद्योग की प्रकृति) और सामाजिक संगठन (परिवार का आकार, स्थिरता) को प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक पर्यावरण के विभिन्न प्रभावों को उदाहरणों के साथ बिन्दुवार स्पष्ट करें, विशेषकर धर्म, मानव-व्यवहार, आर्थिक जीवन और सामाजिक संगठन पर।
Question 9. संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer: संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ संस्कृति की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं
1. सीखा हुआ व्यवहार - व्यक्ति समाज की प्रक्रिया में कुछ-न-कुछ सीखता ही रहता है। ये सीखे हुए अनुभव, विचार-प्रतिमान आदि की संस्कृति के तत्त्व होते हैं। इसलिए संस्कृति को सीखा हुआ व्यवहार कहा जाता है।
2. संगठित प्रतिमा - संस्कृति में सीखे हुए आचरण संगठित प्रतिमानों के रूप में होते हैं। संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति के आचरणों या इकाइयों में एक व्यवस्था और सम्बन्ध होता है। किसी भी मनुष्य का आचरण उसके पृथक् पृथक् आचरणों की सूची नहीं होती ।
3. हस्तान्तरण की विशेषता - संस्कृति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित हो जाती है। संस्कृति का अस्तित्व हस्तान्तरण के कारण ही स्थायी बना रहता है। हस्तान्तरण की यह प्रक्रिया निरन्तर होती रहती है। समाजीकरण की प्रक्रिया संस्कृति के हस्तान्तरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
4. पार्थिव तथा अपार्थिव दोनों तत्त्वों का विद्यमान रहना - संस्कृति के अंतर्गत दो प्रकार के तत्त्व आते हैं-एक पार्थिव व दूसरा अपार्थिव । ये दोनों ही तत्त्व संस्कृति का निर्माण करते हैं। अपार्थिव स्वरूप को हम आचरण या क्रिया कह सकते हैं; अर्थात् जिन्हें छुआ या देखा न जा सके या जिनका कोई स्वरूप ही नहीं है; जैसे-बोलना, गाना, अभिवादन करना आदि । जिन पार्थिव या साकार वस्तुओं का मनुष्य सृजन करता है वे पार्थिव तत्त्वों के अन्तर्गत आती हैं; जैसे-रेडियो, मोटर साइकिल, टेलीविजन, सिनेमा आदि ।
5. परिवर्तनशीलता - संस्कृति सदा परिवर्तनशील है। इसमें परिवर्तन होते रहते हैं, चाहे वे परिवर्तन धीरे-धीरे हों या आकस्मिक रूप में। वास्तव में संस्कृति मनुष्य की विभिन्न प्रकार की आवश्यकताओं की पूर्ति की विधियों का नाम है। चूंकि समाज में परिस्थितियाँ सदा एक-सी नहीं रहती हैं, इसलिए आवश्यकताओं की पूर्ति की विधियों में भी परिवर्तन करना पड़ता है।
6. आदर्शात्मक - संस्कृति में सामाजिक विचार, व्यवहार प्रतिमान आदर्श रूप में होते हैं। इनके अनुसार कार्य करना सुसंस्कृत होने का प्रतीक माना जाता है। सभी मनुष्य संस्कृति के आदर्श प्रतिमानों के अनुसार अपने जीवन को बनाने का प्रयास करते हैं।
7. सामाजिकता का गुण - संस्कृति का जन्म समाज में तथा समाज के सदस्यों द्वारा होता है। मानव समाज के बाहर संस्कृति की रक्षा नहीं की जा सकती है। दूसरी ओर पशु-समाज में किसी प्रकार की संस्कृति नहीं पाई जाती है।
8. भिन्नता - प्रत्येक समाज की संस्कृति भिन्न होती है; अर्थात् प्रत्येक समाज की अपनी पृथक् प्रथाएँ, परम्पराएँ, धर्म, विश्वास, कला का ज्ञान आदि होते हैं। संस्कृति में भिन्नता के कारण ही विभिन्न समाजों में रहने वाले लोगों का रहन-सहन भिन्न होता है।
In simple words: संस्कृति एक सीखा हुआ, संगठित, हस्तांतरणीय व्यवहार है जिसमें मूर्त और अमूर्त दोनों तत्व होते हैं। यह परिवर्तनशील, आदर्शात्मक, सामाजिक और भिन्न होती है।
🎯 Exam Tip: संस्कृति की प्रमुख विशेषताओं को बिन्दुवार समझाएं, प्रत्येक विशेषता के साथ एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें ताकि उसकी प्रकृति स्पष्ट हो सके।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. ‘भौगोलिक पर्यावरण क्या है? यह किस प्रकार मानव-समाज को प्रभावित करता है?
Answer: भौगोलिक पर्यावरण प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण है। मनुष्य पर जिन प्राकृतिक शक्तियों का चारों ओर से प्रभाव पड़ता है, उसे 'भौगोलिक पर्यावरण' कहा जाता है। ये सभी शक्तियाँ स्वतन्त्र रहकर मानव को प्रभावित करती हैं। पर्वत, सरिता, वन, पवन, आकाश, पृथ्वी तथा जीव जगत् सभी भौगोलिक पर्यावरण के अंग हैं।
भौगोलिक पर्यावरण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मानव-समाज को प्रभावित करता है। प्रत्यक्ष रूप में यह मानव-समाज को जनसंख्या, आवास, वेश-भूषा, खान-पान, पशु-जीवन आदि पर प्रभाव डालकर उसको प्रभावित करता है। अप्रत्यक्ष रूप में यह मानव-समाज को सामाजिक संगठन, आर्थिक संरचना, राजनीतिक संगठन, धार्मिक जीवन, साहित्य, कला आदि पर प्रभाव डालकर उनको प्रभावित करता है।
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण प्रकृति निर्मित होता है और इसमें पर्वत, नदियाँ, जलवायु जैसे तत्व शामिल हैं। यह मानव-समाज को प्रत्यक्ष रूप से जनसंख्या और आवास जैसी चीजों को प्रभावित करता है, और अप्रत्यक्ष रूप से सामाजिक संगठन और आर्थिक संरचना को प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक पर्यावरण की परिभाषा को स्पष्ट करें और मानव समाज पर उसके प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभावों को अलग-अलग बताएं।
Question 2. मैकाइवर एवं पेज ने सम्पूर्ण पर्यावरण को क्या वर्गीकरण किया है ?
Answer: मैकाइवर एवं पेज ने सम्पूर्ण पर्यावरण को दो प्रमुख भागों में विभाजित किया हैसामाजिक पहलू एवं भौतिक पहलू। सामाजिक पहलू के अन्तर्गत लोकरीतियों, प्रथाओं, कानूनों, संस्थाओं, सामाजिक सम्बन्धों, जातीय समूहों, वंशानुगत प्रथाओं, सामाजिक विरासत आदि को सम्मिलित किया गया है। भौतिक या प्राकृतिक पहलू बहुत विस्तृत है, इसे दो भागों में बाँटा गया है-
• मानव द्वारा असंशोधित एवं
• मानव द्वारा संशोधित ।
In simple words: मैकाइवर एवं पेज ने पर्यावरण को सामाजिक और भौतिक दो मुख्य भागों में बांटा है। सामाजिक पहलू में रीति-रिवाज और संबंध शामिल हैं, जबकि भौतिक पहलू में मानव द्वारा असंशोधित और संशोधित प्राकृतिक तत्व आते हैं।
🎯 Exam Tip: मैकाइवर एवं पेज के वर्गीकरण के दोनों मुख्य भागों (सामाजिक और भौतिक) को स्पष्ट करें और प्रत्येक के अन्तर्गत आने वाले तत्वों का उल्लेख करें।
Question 3. भौगोलिक पर्यावरण का जन्म-दर व मृत्यु-दर पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: भौगोलिक पर्यावरण एवं जन्म व मृत्यु-दर के बीच सह-सम्बन्ध बताते हुए जेनकिन (Jenkin) कहते हैं कि भूमध्य रेखा की ओर मृत्यु-दर अधिक व ध्रुवीय प्रदेशों की ओर कम होती जाती है। उष्ण प्रदेशों में शीत प्रदेशों की तुलना में जीवन-अवधि कम होती है। इसी प्रकार से जुलाई, अगस्त, सितम्बर व अक्टूबर में जन्म-दर अन्य महीनों की अपेक्षा अधिक एवं जनवरी, फरवरी व मार्च में बहुत कम होती है। मौसम का परिवर्तन यौन-व्यवहारों को प्रभावित करता है, जिससे जन्म-दर पर भी असर पड़ता है। प्राकृतिक विपदाएँ, रोग एवं महामारियाँ मृत्यु-दर को प्रभावित करती हैं। इस तरह प्राकृतिक कारक एवं जन्म तथा मृत्यु-दर परस्पर सम्बन्धित हैं।
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण जैसे जलवायु, मौसम और प्राकृतिक आपदाएं जन्म और मृत्यु दर को सीधे प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, गर्म क्षेत्रों में मृत्यु दर अधिक होती है, और विशिष्ट महीनों में जन्म दर अधिक होती है।
🎯 Exam Tip: जन्म-दर और मृत्यु-दर पर भौगोलिक कारकों के प्रभाव को समझाते हुए विशिष्ट उदाहरण दें, जैसे भूमध्य रेखा पर मृत्यु दर का अधिक होना।
Question 5. भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति के दो-दो उदाहरण दीजिए।
Answer: अमेरिकन समाजशास्त्री ऑगबर्न ने संस्कृति को भौतिक और अभौतिक दो भागों में बाँटा है। उनके इस वर्गीकरण को अन्य वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार किया है।
भौतिक संस्कृति के दो उदाहरण – भौतिक संस्कृति के अन्तर्गत मानव द्वारा निर्मित सभी भौतिक एवं मूर्त वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है जिन्हें हम देख सकते हैं, छू सकते हैं और इन्द्रियों द्वारा महसूस कर सकते हैं। भौतिक संस्कृति के दो उदाहरण हैं-मशीनें तथा परिवहन के साधन।
अभौतिक संस्कृति के दो उदाहरण – अभौतिक संस्कृति के अन्तर्गत उन सभी सामाजिक तथ्यों को सम्मिलित किया जाता है जो अमूर्त हैं; जिनकी कोई माप-तोल, आकार व रंग-रूप नहीं होता, वरन् जिन्हें हम महसूस कर सकते हैं। अभौतिक संस्कृति के दो उदाहरण हैं-आदर्श नियम तथा विचार।
In simple words: भौतिक संस्कृति में वे चीजें आती हैं जिन्हें हम देख, छू और महसूस कर सकते हैं, जैसे मशीनें और वाहन। वहीं, अभौतिक संस्कृति में अमूर्त चीजें जैसे आदर्श नियम और विचार शामिल होते हैं, जिन्हें मापा नहीं जा सकता।
🎯 Exam Tip: भौतिक और अभौतिक संस्कृति के उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अवधारणा अक्सर छोटे प्रश्नों में पूछी जाती है।
Question 6. सभ्यता सदैव आगे बढ़ती है, किन्तु संस्कृति नहीं। कैसे ?
Answer: सभ्यता सदैव आगे बढ़ती है, किन्तु संस्कृति नहीं; इसका प्रमुख कारण यह है कि सभ्यता उन्नतिशील है, वह निरन्तर प्रगति करती रहती है। आविष्कारों एवं खोजों के कारण उसमें समय-समय पर नवीन तत्त्व जुड़ते जाते हैं, किन्तु संस्कृति के बारे में यह बात नहीं कही जा सकती। वैदिककालीन साहित्य, मनोरंजन, नैतिक आदर्श, प्रथाएँ, धर्म, कला, चित्रकारी आदि को आज के युग से कम या अधिक श्रेष्ठ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि संस्कृति की प्रगति की कोई दिशा निर्धारित नहीं होती है।
In simple words: सभ्यता हमेशा नई खोजों और आविष्कारों के साथ आगे बढ़ती है और उसमें लगातार सुधार होता रहता है। लेकिन संस्कृति में ऐसे तत्त्व होते हैं जो समय के साथ अपनी श्रेष्ठता नहीं बदलते, जैसे कला या नैतिक आदर्श, इसलिए यह जरूरी नहीं कि वह हमेशा 'प्रगति' करे।
🎯 Exam Tip: सभ्यता और संस्कृति के बीच के इस मूलभूत अन्तर को समझें, क्योंकि यह समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
Question 7. सभ्यता साधन है, जब कि संस्कृति साध्य । कैसे ?
Answer: सभ्यता साधन है, जब कि संस्कृति साध्य; इसका कारण यह है कि संस्कृति से मानव को सन्तुष्टि एवं आनन्द का अनुभव होता है। संस्कृति को प्राप्त करना स्वयं में एक उद्देश्य या साध्य है। इस संस्कृति (साध्य) को अपनाने के लिए सभ्यता का साधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। उदाहरणार्थ-धर्म, कला एवं संगीत आदि हमें मानसिक शान्ति एवं आनन्द प्रदान करते हैं। इन्हें प्राप्त करने के लिए हम कई पवित्र भौतिक वस्तुओं, कलाकारी के उपकरणों एवं वाद्य-यन्त्रों का प्रयोग करते हैं, जो कि सभ्यता के अंग हैं।
In simple words: संस्कृति हमें संतुष्टि और आनंद देती है, इसलिए वह अपने आप में एक लक्ष्य (साध्य) है। सभ्यता के भौतिक उपकरण जैसे वाद्य यंत्र या कलाकृतियाँ इस संस्कृति के लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक माध्यम (साधन) होते हैं।
🎯 Exam Tip: सभ्यता को साधन और संस्कृति को साध्य के रूप में समझना इस विषय की गहरी समझ को दर्शाता है और अच्छे अंक दिला सकता है।
Question 8. संस्कृति एवं सभ्यता के चार अन्तर बताइए।
Answer: संस्कृति एवं सभ्यता के चार अन्तर निम्नलिखित हैं
1. सभ्यता की माप सरल है, पर संस्कृति की नहीं - क्योंकि सभ्यता का सम्बन्ध भौतिक वस्तुओं की उपयोगिता से है। संस्कृति की माप सम्भव नहीं है, क्योंकि प्रत्येक समाज में अपनी मूल्य-व्यवस्था होती है तथा मूल्यों में भिन्नता का कोई सर्वमान्य पैमाना नहीं जिसके आधार पर संस्कृति को मापा जा सके।
2. सभ्यता सदैव आगे बढ़ती है, किन्तु संस्कृति नहीं - सभ्यता उन्नतिशील होती हैं और वह एक दिशा में निरन्तर प्रगति करती है, जब तक उसके मार्ग में बाधा न आये। संस्कृति के बारे में यह बात नहीं कही जा सकती। उदाहरणार्थ-हम यह नहीं कह सकते कि कालिदास के नाटक आज के नाटकों से अच्छे हैं या बुरे।
3. सभ्यता साधन है, जब कि संस्कृति साध्य - संस्कृति से मानव को सन्तुष्टि प्राप्त होती है। संस्कृति को प्राप्त करना अपने आप में एक उद्देश्य, एक साध्य है। इस संस्कृति और साध्य को अपनाने के लिए, सभ्यता का साधने के रूप में प्रयोग किया जाता है। उदाहरणार्थ-संगीत का आनन्द प्राप्त करने के लिए विभिन्न उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
4. सभ्यता बाह्य है, जब कि संस्कृति आन्तरिक - सभ्यता का सम्बन्ध जीवन की भौतिक वस्तुओं से है, जिनका अस्तित्व मूर्त रूप में मानव अस्तित्व के बाहर है। संस्कृति का सम्बन्ध मानव के आन्तरिक गुणों से है, उसके विचारों, विश्वासों, मूल्यों, भावनाओं एवं आदर्शों से है।
In simple words: सभ्यता भौतिक और बाहरी होती है, जिसकी प्रगति मापी जा सकती है और यह एक साधन के रूप में कार्य करती है। वहीं, संस्कृति आंतरिक, अमूर्त और व्यक्तिगत मूल्यों से जुड़ी होती है, जिसकी प्रगति मापी नहीं जा सकती और यह स्वयं में एक साध्य है।
🎯 Exam Tip: सभ्यता और संस्कृति के इन चारों अन्तरों को बिन्दुवार याद रखना उत्तर को व्यवस्थित और प्रभावशाली बनाता है।
Question 9. सांस्कृतिक पर्यावरण का समाजीकरण की प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: समाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा एक व्यक्ति सामाजिक प्राणी बनता है, वह अपने समाज की संस्कृति को आत्मसात् करता है और अपने व्यक्तित्व का विकास करता है। परिवार, क्रीड़ासमूह, पड़ोस, नातेदारी-समूह, जाति एवं द्वितीयक समूहों के सम्पर्क से व्यक्ति का समाजीकरण होता है। वह अपने समाज के धर्म, रीति-रिवाजों, प्रथाओं, परम्पराओं आदि को ग्रहण करता है, जो कि सांस्कृतिक पर्यावरण के ही अंग हैं। हम समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा ही भाषा का प्रयोग करना सीखते हैं, किस शब्द का क्या अर्थ होगा, यह संस्कृति ही तय करती है। व्यक्ति में मानवीय गुणों का विकास भी समाजीकरण के द्वारा ही होता है। समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा हम किन बातों को सीखेंगे, यह हमारे सांस्कृतिक पर्यावरण पर ही निर्भर है।।
In simple words: सांस्कृतिक पर्यावरण ही निर्धारित करता है कि व्यक्ति समाजीकरण की प्रक्रिया में क्या सीखेगा, जैसे भाषा, रीति-रिवाज, मूल्य और परम्पराएँ, जो उसके व्यक्तित्व और सामाजिक व्यवहार को आकार देते हैं।
🎯 Exam Tip: समाजीकरण और सांस्कृतिक पर्यावरण के इस गहरे सम्बन्ध को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।
Question 10. चेतनात्मक (भौतिक) संस्कृति की चार विशेषताएँ लिखिए।
Answer: चेतनात्मक (भौतिक) संस्कृति की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. भौतिक संस्कृति मूर्त होती है।
2. चूँकि भौतिक संस्कृति मूर्त है; अतः उसे मापा जा सकता है।
3. भौतिक संस्कृति संचयी है; अतः इसके अंगों एवं मात्रा में निरन्तर वृद्धि होती जाती है।
4. भौतिक संस्कृति की उपयोगिता एवं लाभ का मूल्यांकन सरल है।
In simple words: भौतिक संस्कृति को देखा, छुआ और मापा जा सकता है; यह समय के साथ बढ़ती जाती है, और इसके लाभों का मूल्यांकन करना आसान होता है।
🎯 Exam Tip: भौतिक संस्कृति की विशेषताओं को याद रखना इसके अमूर्त पक्ष से तुलना करने में मदद करता है, जो अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
Question 11. “हम जो भी सोचते हैं, करते हैं और रखते हैं वही हमारी संस्कृति है।” स्पष्ट कीजिए ।
Answer: संस्कृति की सर्वोत्तम परिभाषा रॉबर्ट बीरस्टीड द्वारा दी गयी है। इनके अनुसार, संस्कृति एक जटिल सम्पूर्णता है जिसमें वे सभी विशेषताएँ सम्मिलित हैं जिन पर हम विचार करते हैं (we think), कार्य करते हैं (we do) और समाज के सदस्य होने के नाते उन्हें अपने पास रखते हैं (we have) ।' इस परिभाषा में संस्कृति के भौतिक और अभौतिक दोनों पक्षों को सम्मिलित किया गया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि संस्कृति जैविकीय विरासत से सम्बन्धित न होकर सामाजिक विरासत का परिणाम है।
In simple words: रॉबर्ट बीरस्टीड की परिभाषा बताती है कि संस्कृति वह सब कुछ है जो हम सोचते हैं, करते हैं और अपने पास रखते हैं, इसमें भौतिक और अभौतिक दोनों पहलू शामिल होते हैं, और यह हमें समाज से मिलती है, जैविक रूप से नहीं।
🎯 Exam Tip: रॉबर्ट बीरस्टीड की परिभाषा को याद रखें और इसे अपने शब्दों में समझाएँ, यह संस्कृति की व्यापक समझ को दर्शाता है।
Question 12. प्राकृतिक पर्यावरण तथा सांस्कृतिक पर्यावरण का सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए ।
Answer: प्राकृतिक पर्यावरण के अन्तर्गत सभी प्राकृतिक और भौगोलिक शक्तियों का समावेश होता है। पृथ्वी, आकाश, वायु, जल, वनस्पति और जीव-जन्तु पर्यावरण के अंग हैं। प्राकृतिक पर्यावरण का मानव-जीवन पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। मनुष्य द्वारा निर्मित वस्तुओं का समग्र रूप का परिवेश सांस्कृतिक पर्यावरण कहलाता है। आवास, विद्यालय, टेलीविजन, मशीनें, धर्म, संस्कृति, भाषा, रूढ़ियाँ, सभी सांस्कृतिक पर्यावरण के अंग हैं। इन सभी का निर्धारण प्राकृतिक पर्यावरण द्वारा किया जाता है। इस प्रकार प्राकृतिक पर्यावरण हमारे रहनसहन, भोज्य पदार्थ, वस्त्र-चयन आदि सभी को प्रभावित करता है। इन दोनों में घनिष्ठ सम्बन्ध है।
In simple words: प्राकृतिक पर्यावरण प्रकृति द्वारा निर्मित होता है और मानव जीवन को सीधे प्रभावित करता है, जबकि सांस्कृतिक पर्यावरण मनुष्य द्वारा बनाया जाता है और इसमें हमारे जीवनशैली, रीति-रिवाज, भाषा और भौतिक वस्तुएँ शामिल होती हैं। ये दोनों प्रकार के पर्यावरण आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यावरण के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट करते समय उदाहरणों का उपयोग करना आपके उत्तर को अधिक सटीक बनाता है।
Question 13. प्राकृतिक पर्यावरण और सांस्कृतिक पर्यावरण की किन्हीं दो विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।
Answer: प्राकृतिक पर्यावरण की दो विशेषताएँ-
1. प्राकृतिक पर्यावरण प्रकृति-प्रदत्त है तथा इसमें भौतिक वस्तुएँ; जैसे-नदी, पहाड़, नक्षत्र, पृथ्वी, समुद्र आदि आते हैं तथा
2. प्राकृतिक पर्यावरण मानव, पशु और वनस्पति सभी को प्रभावित करता है।
सांस्कृतिक पर्यावरण की दो विशेषताएँ-
1. सांस्कृतिक पर्यावरण केवल मानव को प्रभावित करता है तथा
2. सांस्कृतिक पर्यावरण परिवर्तनशील है, मानव अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इसमें संशोधन एवं परिवर्तन करता रहता है।
In simple words: प्राकृतिक पर्यावरण प्रकृति द्वारा दिया जाता है, सभी जीवों को प्रभावित करता है, और इसमें नदियाँ, पहाड़ आदि शामिल हैं। सांस्कृतिक पर्यावरण मानव निर्मित है, केवल मानव को प्रभावित करता है, और यह हमारी आवश्यकताओं के अनुसार बदलता रहता है।
🎯 Exam Tip: दोनों पर्यावरणा की प्रमुख विशेषताओं को अलग-अलग समझना उनकी तुलना करने में सहायता करता है।
Question 14. प्राकृतिक पर्यावरण को उपयुक्त उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्राकृतिक पर्यावरण-जो भी वस्तुएँ प्रकृति ने मानव को प्रदान की हैं; जैसे-पानी, मिट्टी, जलवायु, भूमि, वनस्पति, नदियाँ आदि, वे सभी इसके अन्तर्गत आती हैं। प्राकृतिक पर्यावरण के दो भाग किये जा सकते हैं
1. अनियन्त्रित पर्यावरण - इसके अन्तर्गत उन भौतिक तत्त्वों का समावेश होता है जिन पर मानव का कोई नियन्त्रण नहीं होता है।
2. नियन्त्रित पर्यावरण - इसमें मानव द्वारा नियन्त्रण होता है; जैसे-मकान आदि । इसे औद्योगिक पर्यावरण भी कहा जाता है।
In simple words: प्राकृतिक पर्यावरण में वे सभी प्राकृतिक चीज़ें शामिल हैं जो प्रकृति हमें देती है, जैसे पानी, मिट्टी, जलवायु और नदियाँ। इसके दो मुख्य भाग हैं- अनियन्त्रित पर्यावरण (जिस पर हमारा नियंत्रण नहीं) और नियन्त्रित पर्यावरण (जिसे हमने अपनी ज़रूरतों के हिसाब से बदला है, जैसे मकान)।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक पर्यावरण को उदाहरणों और उसके दो मुख्य भागों के साथ समझाना, इस अवधारणा को स्पष्ट करता है।
Question 15. 'भौगोलिक निश्चयवादी' तथा 'भौगोलिक निश्चयवाद' से क्या तात्पर्य है ?
Answer: जो विद्वान् यह मानते हैं कि मानव के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक एवं शारीरिक सभी पक्ष भौगोलिक पर्यावरण से प्रभावित होते हैं, उन्हें भौगोलिक निश्चयवादी (निर्धारणवादी) एवं उनकी विचारधारा को भौगोलिक निश्चयवाद कहते हैं।
In simple words: भौगोलिक निश्चयवादी वे विचारक हैं जो मानते हैं कि मनुष्य के जीवन के हर पहलू (सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आदि) पर भौगोलिक पर्यावरण का सीधा और मुख्य प्रभाव पड़ता है, और उनकी इसी सोच को भौगोलिक निश्चयवाद कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक निश्चयवाद की परिभाषा और उसके समर्थकों को याद रखना, इस सिद्धांत की समझ को मजबूत करता है।
Question 16. सांस्कृतिक पर्यावरण किसे कहते हैं ?
Answer: सांस्कृतिक पर्यावरण के अन्तर्गत धर्म, नैतिकता, प्रथाएँ, लोकाचार, कानून, व्यवहारप्रतिमान, समस्त भौतिक और अभौतिक वस्तुएँ; जैसे-रेल, मकान, सड़क आदि आते हैं, जिन्हें मनुष्य अपने अनुभवों एवं सामाजिक सम्पर्क के कारण सीखता है और उनके अनुरूप अपने को ढालने का प्रयास करता है।
In simple words: सांस्कृतिक पर्यावरण वे सभी चीजें हैं जो मनुष्य ने खुद बनाई हैं या समाज से सीखी हैं, इसमें हमारी परंपराएँ, मूल्य, कानून और भौतिक वस्तुएँ (जैसे मकान, सड़कें) शामिल हैं, जो हमारे व्यवहार और जीवन को आकार देती हैं।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक पर्यावरण की परिभाषा को उदाहरणों के साथ याद रखना, अवधारणा को स्पष्ट करता है।
Question 17. संस्कृति केवल मानव-समाज में ही क्यों पायी जाती है ?
Answer: मनुष्य में कुछ ऐसी मानसिक एवं शारीरिक विशेषताएँ हैं जिनके कारण वह संस्कृति को निर्मित एवं विकसित कर सका है। अन्य प्राणियों में, मानवे के समान शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं के अभाव के कारण संस्कृति का निर्माण नहीं हो सका।
In simple words: संस्कृति सिर्फ मनुष्य समाज में पायी जाती है क्योंकि इंसानों में ही वह खास मानसिक और शारीरिक क्षमताएँ होती हैं जिनसे वे संस्कृति को बना और विकसित कर सकते हैं, जबकि अन्य जीवों में ऐसी क्षमताएँ नहीं होतीं।
🎯 Exam Tip: मानव की विशिष्ट क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करें जो संस्कृति के विकास में सहायक हैं, यह इस प्रश्न का मुख्य उत्तर है।
Question 18. भौतिक संस्कृति के अन्तर्गत किन वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है ?
Answer: भौतिक संस्कृति के अन्तर्गत मानव द्वारा निर्मित सभी भौतिक एवं मूर्त वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है, जिन्हें हम देख सकते हैं, छू सकते हैं और इन्द्रियों द्वारा महसूस कर सकते हैं।
In simple words: भौतिक संस्कृति में वे सभी चीजें आती हैं जिन्हें इंसानों ने बनाया है और जिन्हें हम अपनी इंद्रियों से देख, छू या महसूस कर सकते हैं, जैसे कपड़े, इमारतें और औजार।
🎯 Exam Tip: भौतिक संस्कृति की परिभाषा देते समय, 'मानव निर्मित', 'भौतिक' और 'मूर्त' शब्दों पर जोर दें।
निश्चित उत्तररीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. सामाजिक पर्यावरण से क्या तात्पर्य है ?
Answer: सामाजिक पर्यावरण के अन्तर्गत मानवीय सम्बन्धों से निर्मित सामाजिक समूह, संगठन, समुदाय, समिति आदि आते हैं, जो व्यक्ति को जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रभावित करते हैं और उसका समाजीकरण करते हैं।
In simple words: सामाजिक पर्यावरण में वे सभी मानवीय रिश्ते, समूह और संस्थाएँ शामिल हैं जो व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक उसके जीवन को प्रभावित करती हैं और उसे सामाजिक प्राणी बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: सामाजिक पर्यावरण में मानवीय सम्बन्धों और उनके प्रभावों को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 2. भौगोलिक सम्प्रदाय से सम्बन्धित विचारकों के नाम लिखिए।
या
प्रमुख भौगोलिकविदों के नाम लिखिए।
या
भौगोलिक सम्प्रदाय के दो विचारकों के नाम लिखिए।
या
भौगोलिक सम्प्रदाय से सम्बन्धित दो समाजशास्त्रियों का नाम लिखिए।
Answer: भौगोलिक सम्प्रदाय के प्रमुख विचारक मॉण्टेस्क्यू, लीप्ले, बकल, हंटिंग्टन आदि हैं।।
In simple words: भौगोलिक सम्प्रदाय के मुख्य विचारकों में मॉण्टेस्क्यू, लीप्ले, बकल और हंटिंग्टन जैसे नाम शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख भौगोलिक विचारकों के नामों को याद रखना सीधे अंकों के लिए उपयोगी है।
Question 3. भौगोलिक निश्चयवादी (निर्धारणवाद) विचारधारा को मानने वाले चार विद्वानों के नाम बताइए।
Answer: भौगोलिक निश्चयवादी विचारधारा को मानने वाले चार विद्वान् हैं- अरस्तू, हिप्पोक्रेटिज, मॉण्टेस्क्यू और बकल।
In simple words: भौगोलिक निश्चयवाद के चार प्रमुख समर्थकों में अरस्तू, हिप्पोक्रेटिज, मॉण्टेस्क्यू और बकल शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक निश्चयवाद से जुड़े विद्वानों के नामों को याद रखना परीक्षा में सीधे पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. हंटिंग्टन ने प्रतिभा व सभ्यताओं के विकास के लिए क्या आवश्यक माना है ?
Answer: हंटिंग्टन ने प्रतिभा व सभ्यताओं के विकास के लिए अनुकूल जलवायु का होना आवश्यक माना है।
In simple words: हंटिंग्टन के अनुसार, प्रतिभा और सभ्यताओं के विकास के लिए अनुकूल जलवायु सबसे महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: हंटिंग्टन के इस विशिष्ट विचार को याद रखना उनके योगदान को दर्शाता है।
Question 5. भौगोलिक निर्णयवाद की अवधारणा के जनक कौन हैं ?
Answer: भौगोलिक निर्णयवाद की अवधारणा के जनक हंटिंग्टन हैं।
In simple words: भौगोलिक निर्णयवाद की अवधारणा हंटिंग्टन द्वारा विकसित की गई थी।
🎯 Exam Tip: अवधारणाओं और उनके जनकों को सुमेलित करना एक सामान्य परीक्षा पैटर्न है।
Question 6. “पर्यावरण वह सब कुछ है, जो किसी वस्तु को चारों ओर से घेरे हुए है और उसे प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहा है।” यह कथन किसका है ?
Answer: यह कथन जिसबर्ट का है।
In simple words: पर्यावरण की यह परिभाषा, जो इसे एक वस्तु के चारों ओर के घेराव और उसके प्रत्यक्ष प्रभाव के रूप में देखती है, जिसबर्ट ने दी है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख परिभाषाओं और उनके विचारकों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. 'संस्कृति पर्यावरण का मानव-निर्मित भाग है।' यह कथन किसका है ?
Answer: यह कथन प्रमुख समाजशास्त्री हर्सकोविट्स का है।
In simple words: हर्सकोविट्स ने कहा था कि संस्कृति वह सब कुछ है जिसे मनुष्य ने पर्यावरण में खुद बनाया है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध समाजशास्त्रियों के महत्त्वपूर्ण कथनों को उद्धरण के साथ याद रखना प्रभावी होता है।
Question 8. समाजशास्त्र में संस्कृति का क्या अर्थ है ?
Answer: समाजशास्त्र में संस्कृति का अर्थ मानव-जाति के रहन-सहन, आचार-विचार, भावनाएँ, विश्वास और विचारों के समग्र रूप से है।
In simple words: समाजशास्त्र में संस्कृति का मतलब है किसी मानव समूह के जीवन जीने का तरीका- जिसमें उनकी आदतें, सोच, भावनाएँ, विश्वास और विचार शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: संस्कृति की व्यापक परिभाषा को संक्षेप में समझना समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 9. ऑगबर्न द्वारा दिए गए संस्कृति के दो प्रकारों को लिखिए।
Answer:
• प्रौद्योगिकीय विलम्बना,
• सांस्कृतिक विलम्बना।
In simple words: ऑगबर्न ने संस्कृति के दो मुख्य प्रकार बताए हैं- प्रौद्योगिकीय विलम्बना और सांस्कृतिक विलम्बना।
🎯 Exam Tip: ऑगबर्न की संस्कृति के प्रकारों को याद रखना समाजशास्त्रीय अवधारणाओं को स्पष्ट करने में मदद करता है।
Question 10. किस विद्वान ने प्राकृतिक परिस्थितियों को धार्मिक व्यवहार के साथ जोड़ने का प्रयास किया है ?
Answer: मैक्स मूलर।
In simple words: मैक्स मूलर ने प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक आचरण के बीच सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयास किया था।
🎯 Exam Tip: मैक्स मूलर का यह विचार धर्म के समाजशास्त्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है, इसे याद रखें।
Question 11. संस्कृति के भौतिक पक्ष को क्या कहा गया है ?
Answer: संस्कृति के भौतिक पक्ष को सांस्कृतिक पर्यावरण कहा गया है।
In simple words: संस्कृति के उन हिस्सों को जो भौतिक रूप से मौजूद होते हैं, सांस्कृतिक पर्यावरण कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: भौतिक संस्कृति और सांस्कृतिक पर्यावरण के बीच इस सम्बन्ध को स्पष्ट रखें।
Question 12. आदर्शात्मक संस्कृति की अवधारणा किसने दी ?
Answer: आदर्शात्मक संस्कृति की अवधारणा पिटरिम ए० सोरोकिन ने दी।
In simple words: पिटरिम ए० सोरोकिन ने आदर्शात्मक संस्कृति की अवधारणा प्रस्तुत की।
🎯 Exam Tip: विभिन्न समाजशास्त्रीय अवधारणाओं और उनके प्रतिपादकों को जानना परीक्षा में सीधे अंक दिला सकता है।
Question 13. संस्कृति को चेतनात्मक, विचारात्मक एवं आदर्शात्मक-तीनों प्रकारों में प्रस्तुत करने वाले समाजविज्ञानी कौन हैं?
Answer: संस्कृति को तीनों प्रकारों में प्रस्तुत करने वाले समाजविज्ञानी चार्ल्स कूले हैं।
In simple words: चार्ल्स कूले ने संस्कृति को चेतनात्मक, विचारात्मक और आदर्शात्मक-इन तीनों रूपों में परिभाषित किया है।
🎯 Exam Tip: चार्ल्स कूले का संस्कृति का यह त्रि-आयामी वर्गीकरण महत्वपूर्ण है, इसे याद रखें।
Question 14. चेतनात्मक संस्कृति किस समाजशास्त्री की अवधारणा है ?
Answer: चेतनात्मक संस्कृति सोरोकिन की अवधारणा है।
In simple words: चेतनात्मक संस्कृति की अवधारणा सोरोकिन ने दी थी।
🎯 Exam Tip: सोरोकिन की विभिन्न सांस्कृतिक अवधारणाओं को उनके सही नाम के साथ याद रखें।
Question 15. भौतिक एवं अभौतिक संस्कृति की अवधारणा किस समाजशास्त्री की है ?
Answer: भौतिक एवं अभौतिक संस्कृति की अवधारणा अमेरिकन समाजशास्त्री ऑगबर्न की है।
In simple words: भौतिक और अभौतिक संस्कृति की अवधारणा ऑगबर्न द्वारा दी गई थी।
🎯 Exam Tip: ऑगबर्न का संस्कृति का वर्गीकरण समाजशास्त्र में एक मौलिक अवधारणा है, इसे हमेशा याद रखें।
Question 16. 'सांस्कृतिक विलम्बना या पिछड़न किसकी अवधारणा है ? या सांस्कृतिक विलम्बना का सिद्धान्त किसने प्रस्तुत किया ?
Answer: 'सांस्कृतिक विलम्बना या पिछड़न' ऑगबर्न की अवधारणा है।
In simple words: सांस्कृतिक विलम्बना की अवधारणा समाजशास्त्री ऑगबर्न ने प्रस्तुत की थी।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक विलम्बना की अवधारणा और ऑगबर्न का नाम एक साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 17. विचारात्मक (संवेदनात्मक) संस्कृति की अवधारणा किस समाजशास्त्री से . सम्बन्धित है ?
Answer: विचारात्मक संस्कृति की अवधारणा मैकाइवर एवं पेज से सम्बन्धित है।
In simple words: विचारात्मक संस्कृति की अवधारणा मैकाइवर एवं पेज द्वारा विकसित की गई थी।
🎯 Exam Tip: मैकाइवर और पेज के योगदानों को उनकी संबंधित अवधारणाओं के साथ याद रखें।
Question 18. मैकाइवर और पेज ने मानव द्वारा निर्मित पर्यावरण को क्या संज्ञा दी है ?
Answer: मैकाइवर और पेज ने मानव द्वारा निर्मित पर्यावरण को 'सम्पूर्ण सामाजिक विरासत' की संज्ञा दी है।
In simple words: मैकाइवर और पेज के अनुसार, मनुष्य द्वारा बनाया गया पर्यावरण ही 'सम्पूर्ण सामाजिक विरासत' है।
🎯 Exam Tip: मैकाइवर और पेज द्वारा दिए गए विशेष शब्दों और अवधारणाओं पर ध्यान दें।
Question 19. सोरोकिन द्वारा वर्णित दो संस्कृतियों के नाम लिखिए।
Answer: (i) भावात्मक संस्कृति, (ii) संवेदनात्मक संस्कृति ।
In simple words: सोरोकिन ने भावात्मक और संवेदनात्मक नामक दो प्रकार की संस्कृतियों का वर्णन किया है।
🎯 Exam Tip: सोरोकिन के संस्कृति के वर्गीकरण के इन दो प्रकारों को याद रखना उपयोगी है।
Question 20. समाजशास्त्र में प्रत्यक्षवाद के प्रणेता कौन हैं?
Answer: आगस्त कॉम्टे ।
In simple words: समाजशास्त्र में प्रत्यक्षवाद की शुरुआत आगस्त कॉम्टे ने की थी।
🎯 Exam Tip: आगस्त कॉम्टे को समाजशास्त्र के जनक और प्रत्यक्षवाद के प्रणेता के रूप में जानना आवश्यक है।
Question 21. सभ्यता के विकास के लिए आदर्श जलवायु' की कल्पना किसने की है?
Answer: सभ्यता के विकास के लिए आदर्श जलवायु की कल्पना टॉयनबी ने की है।
In simple words: टॉयनबी ने सभ्यता के विकास के लिए आदर्श जलवायु की कल्पना की थी।
🎯 Exam Tip: टॉयनबी के इस विशेष विचार को याद रखना उनके ऐतिहासिक और सामाजिक विश्लेषण को समझने में मदद करता है।
Question 22. संस्कृति के दो प्रकार लिखिए।
Answer: संस्कृति के दो प्रकार हैं-
• भौतिक संस्कृति तथा
• अभौतिक संस्कृति ।
In simple words: संस्कृति के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं- भौतिक संस्कृति (जैसे वस्तुएँ) और अभौतिक संस्कृति (जैसे विचार और मूल्य)।
🎯 Exam Tip: संस्कृति के इन दो बुनियादी प्रकारों को हमेशा याद रखें।
Question 23. सभ्यता की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer:
• सभ्यता संस्कृति के विकास का उच्च व जटिल स्तर है।
• सभ्यता में परिवर्तनशीलता का गुण पाया जाता है।
In simple words: सभ्यता संस्कृति का एक विकसित और जटिल रूप है, जिसमें लगातार बदलाव होते रहते हैं और यह समय के साथ उन्नत होती जाती है।
🎯 Exam Tip: सभ्यता की विशेषताओं को संस्कृति से अलग करके समझना महत्वपूर्ण है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. “पर्यावरण एक बाहरी शक्ति है, जो हमें प्रभावित करती है।” यह कथन किसका है ?
(क) जिसबर्ट
(ख) लैण्डिस
(ग) मोटवानी
(घ) रॉस
Answer: (घ) रॉस
In simple words: यह कथन रॉस का है, जो पर्यावरण को एक बाहरी शक्ति के रूप में परिभाषित करते हैं जो हमें प्रभावित करती है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण परिभाषाओं को उनके संबंधित विचारकों के साथ याद रखें।
Question 2. “भौगोलिक पर्यावरण में वे समस्त दशाएँ सम्मिलित हैं जो प्रकृति मनुष्य को प्रदान करती है।” यह कथन किसका है?
(क) सोरोकिन
(ख) पी० जिसबर्ट
(ग) मैकाइवर एवं पेज
(घ) एफ०एच० गिडिंग्स।
Answer: (ग) मैकाइवर एवं पेज
In simple words: यह परिभाषा मैकाइवर एवं पेज ने दी है, जिसमें भौगोलिक पर्यावरण को प्रकृति द्वारा मनुष्य को प्रदान की गई सभी दशाओं का योग बताया गया है।
🎯 Exam Tip: मैकाइवर एवं पेज की इस विशिष्ट परिभाषा को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. भौतिक संस्कृति का गुण होता है।
(क) स्थिरता
(ख) अमूर्तता
(ग) परिवर्तनशीलता
(घ) जटिलता
Answer: (ग) परिवर्तनशीलता
In simple words: भौतिक संस्कृति का एक मुख्य गुण यह है कि यह समय के साथ बदलती रहती है, यानी इसमें परिवर्तनशीलता होती है।
🎯 Exam Tip: भौतिक और अभौतिक संस्कृति के गुणों को तुलनात्मक रूप से याद रखें।
Question 4. निम्नलिखित नामों में कौन भौगोलिकविद् नहीं है ?
(क) मॉण्टेस्क्यू
(ख) मैकाइवर
(ग) हंटिंग्टन
(घ) एच०टी० बकल
Answer: (ख) मैकाइवर
In simple words: मैकाइवर एक समाजशास्त्री हैं, जबकि मॉण्टेस्क्यू, हंटिंग्टन और बकल भौगोलिक निश्चयवाद से जुड़े भौगोलिकविद् हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख विचारकों को उनके संबंधित क्षेत्रों (समाजशास्त्र, भूगोल) के साथ जानना महत्वपूर्ण है।
Question 5. निम्नलिखित में कौन भौगोलिक (प्राकृतिक) पर्यावरण का तत्त्व है ?
(क) कृत्रिम वर्षा
(ख) पत्थर का मकान
(ग) मिट्टी के बर्तन
(घ) पेड़-पौधे
Answer: (घ) पेड़-पौधे
In simple words: पेड़-पौधे प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं और भौगोलिक (प्राकृतिक) पर्यावरण का हिस्सा हैं, जबकि अन्य विकल्प मानव निर्मित या कृत्रिम हैं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक और मानव निर्मित तत्वों के बीच का अंतर स्पष्ट रखें।
Question 6. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राकृतिक पर्यावरण से सम्बन्धित है ?
(क) सड़क के किनारे के पेड़
(ख) मकान
(ग) खनिज पदार्थ
(घ) पुराने मन्दिर
Answer: (ग) खनिज पदार्थ
In simple words: खनिज पदार्थ प्राकृतिक रूप से भूमि में पाए जाते हैं और इसलिए प्राकृतिक पर्यावरण का हिस्सा हैं, जबकि अन्य विकल्प मानव निर्मित या विकसित हैं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक संसाधनों और मानव निर्मित वस्तुओं के बीच भेद करना सीखें।
Question 7. भौगोलिक पर्यावरण किन तत्त्वों से बनता है ?
(क) मनुष्य
(ख) प्राकृतिक दशाएँ
(ग) धार्मिक विश्वास
(घ) प्रथाएँ।
Answer: (ख) प्राकृतिक दशाएँ
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण मुख्य रूप से प्राकृतिक स्थितियों और तत्वों से मिलकर बनता है, जैसे भूमि, जल, वायु आदि।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक पर्यावरण के मूल घटकों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 8. निम्नलिखित में से कौन भौगोलिक तत्त्व नहीं है ?
(क) नदी
(ख) आकाश
(ग) सूर्य
(घ) लकड़ी का फर्नीचर
Answer: (घ) लकड़ी का फर्नीचर
In simple words: नदी, आकाश और सूर्य सभी प्राकृतिक भौगोलिक तत्व हैं, जबकि लकड़ी का फर्नीचर मानव निर्मित वस्तु है और इसलिए भौगोलिक तत्व नहीं है।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक और कृत्रिम तत्वों को पहचानने का अभ्यास करें।
Question 9. निम्नलिखित में भौतिक संस्कृति का गुण है।
(क) बाध्यता का गुण
(ख) क्रमिक विकास का गुण
(ग) माप का गुण ।
(घ) स्थिरता का गुण
Answer: (ग) माप का गुण
In simple words: भौतिक संस्कृति मूर्त होती है, जिसे देखा और मापा जा सकता है, इसलिए 'माप का गुण' इसकी एक विशेषता है।
🎯 Exam Tip: भौतिक संस्कृति के मूर्त स्वरूप पर ध्यान दें, जो इसे मापने योग्य बनाता है।
Question 10. सांस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण होता है।
(क) धार्मिक विश्वासों द्वारा
(ख) प्राकृतिक दशाओं द्वारा
(ग) मनुष्य द्वारा
(घ) अलौकिक शक्तियों द्वारा
Answer: (ग) मनुष्य द्वारा
In simple words: सांस्कृतिक पर्यावरण मनुष्यों द्वारा उनके अनुभवों, विचारों और व्यवहारों के माध्यम से निर्मित होता है।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक पर्यावरण की प्रकृति को समझें कि यह मानवीय रचना है।
Question 11. निम्नलिखित में आप किसे अभौतिक संस्कृति के अन्तर्गत नहीं रखेंगे ?
(क) उपन्यास को
(ख) भवन को
(ग) अन्धविश्वास को
(घ) संस्कार को
Answer: (ख) भवन को
In simple words: भवन एक भौतिक वस्तु है, जबकि उपन्यास (विचारों का संग्रह), अंधविश्वास और संस्कार अमूर्त होते हैं और अभौतिक संस्कृति का हिस्सा हैं।
🎯 Exam Tip: भौतिक और अभौतिक संस्कृति के बीच के अन्तर को समझने के लिए उदाहरणों का उपयोग करें।
Question 12. निम्नलिखित में से आप किसे सांस्कृतिक पर्यावरण में सम्मिलित करेंगे ?
(क) मौसम को
(ख) मन्दिर को
(ग) भाषा को
(घ) नदी को
Answer: (ग) भाषा को
In simple words: भाषा मानव निर्मित है और सामाजिक संचार का माध्यम है, इसलिए यह सांस्कृतिक पर्यावरण का हिस्सा है। मौसम और नदी प्राकृतिक हैं, जबकि मंदिर एक भौतिक संरचना है।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक पर्यावरण में मानव निर्मित अमूर्त तत्वों को प्राथमिकता दें।
Question 13. निम्नलिखित में से किसे आप सांस्कृतिक पर्यावरण में सम्मिलित नहीं करेंगे ?
(क) भाषा को
(ख) रीति-रिवाज को
(ग) मार्गों की बनावट को
(घ) धार्मिक विश्वास को
Answer: (ग) मार्गों की बनावट को
In simple words: मार्गों की बनावट एक भौतिक वस्तु है, जबकि भाषा, रीति-रिवाज और धार्मिक विश्वास अमूर्त सांस्कृतिक तत्व हैं।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक पर्यावरण के अमूर्त पहलुओं पर विशेष ध्यान दें।
Question 14. निम्नलिखित में से कौन-सा अभौतिक संस्कृति का गुण है ?
(क) परिवर्तनशीलता का गुण
(ख) स्थिरता का गुण
(ग) माप का गुण
(घ) वैकल्पिकता का गुण
Answer: (ख) स्थिरता का गुण
In simple words: अभौतिक संस्कृति, जैसे मूल्य और विश्वास, अक्सर भौतिक संस्कृति की तुलना में अधिक स्थिर और धीरे-धीरे बदलती है।
🎯 Exam Tip: अभौतिक संस्कृति के स्थायी और अपरिवर्तनशील पहलुओं पर जोर दें।
Question 15. निम्नांकित में किसने 'द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद' की अवधारणा प्रस्तुत की हैं?
(क) आगस्त कॉम्टे
(ख) कार्ल मार्क्स
(ग) हरबर्ट स्पेन्सर
(घ) जॉर्ज सिपेल
Answer: (ख) कार्ल मार्क्स
In simple words: कार्ल मार्क्स ने 'द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद' की अवधारणा दी, जो सामाजिक परिवर्तन और संघर्षों को भौतिक परिस्थितियों और आर्थिक कारकों के आधार पर समझाती है।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स और उनकी प्रमुख अवधारणा 'द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद' को याद रखना समाजशास्त्र के इतिहास में महत्वपूर्ण है।
Question 16. संस्कृति की विशेषता है?
(क) संस्कृति मनुष्य द्वारा निर्मित होती है।
(ख) संस्कृति एक लिखित व्यवहार है।
(ग) संस्कृति अनुसूचित नहीं होती है।
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) संस्कृति मनुष्य द्वारा निर्मित होती है।
In simple words: संस्कृति मनुष्य द्वारा बनाई जाती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती है, यह इसका एक मौलिक गुण है।
🎯 Exam Tip: संस्कृति के मानव निर्मित होने की विशेषता को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 17. संस्कृतिकरण की अवधारणा किसने विकसित की?
(क) एम० एन० श्रीनिवास
(ख) ए० आर० देसाई
(ग) एस० सी० दूबे
(घ) राधाकमल मुखर्जी
Answer: (क) एम० एन० श्रीनिवास
In simple words: एम० एन० श्रीनिवास ने 'संस्कृतिकरण' की अवधारणा को विकसित किया, जो भारतीय समाज में निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों की जीवनशैली अपनाने की प्रक्रिया का वर्णन करती है।
🎯 Exam Tip: संस्कृतिकरण की अवधारणा और एम० एन० श्रीनिवास का नाम भारतीय समाजशास्त्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
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