UP Board Solutions Class 12 Sahityik Hindi Sandhi

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Detailed संधि UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi

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Class 12 Sahityik Hindi संधि UP Board Solutions PDF

परिभाषा

दो शब्दों के पास आने पर पहले शब्द के अन्तिम वर्ण और दूसरे शब्द के प्रथम वर्ण अथवा दोनों में आए विकार अर्थात् परिवर्तन को सन्धि कहते हैं। जैसे- हिम + आलय = हिमालय सत् + जनः = सज्जनः आदि ।

सन्धि के भेद

सन्धि के तीन भेद होते हैं, जो निम्न हैं

1. स्वर सन्धि

परिभाषा

स्वर का स्वर के साथ मेल को स्वर सन्धि कहते हैं। इसके निम्नलिखित भेद हैं।

1. दीर्घ सन्धि (सूत्र अकः सवर्णे दीर्घः)

इस सन्धि में पूर्व पद का अन्तिम और उत्तर पद का प्रथम वर्ण समान होने पर दोनों मिलकर दीर्घ स्वर हो जाता है। जैसे- अ + अ = आ, न + अन्यत्र = नान्यत्र
आ + अ = आ, विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
इ + इ = ई, कवि + इन्द्रः = कवीन्द्रः
इ + ई = ई, 'गिरि + ईशः = गिरीशः
उ + उ = ऊ, भानु + उदयः = भानूदयः
ऋ + ऋ = ऋ, मातृ + ऋणम् = मातृणम्
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है-अकः सवर्ण दीर्घः

2. गुण सन्धि (सुत्र आदगुणः)

इस सन्धि में पूर्व पद के अन्त में अ/आ तथा उत्तर पद का प्रथम वर्ण इ/ई, ऊ, ऋ, कोई हो, तो दोनों के स्थान पर क्रमशः ए, ओ, अर्, अल् हो जाता है। जैसे- अ + इ = ए, नग + इन्द्रः = नगेन्द्रः
अ + इ = ए, नर + इन्द्रः = नरेन्द्रः
आ + ई = ए, रमा + ईशः = रमेशः
अ + ऋ = अर्, राज + ऋषिः = राजर्षिः
अ + लृ = अल्, तव + लृकारः = तवल्कारः
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है- आद्गुणः ।

3. वृद्धि सन्धि (सूत्र वृदिरेचि)

इस सन्धि में पूर्व पद का अन्तिम वर्ण अ/आ तथा उत्तर पद का प्रथम वर्ण ए/ए, ओ हो, तो दोनों वर्गों के स्थान पर क्रमशः है। • तथा औं हो जाता है। जैसे- अ + ए = ऐ, एक + एक = एकैक
अ + ऐ = ऐ, मत + ऐक्य = मतैक्य
आ + ऐ = ऐ, महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
अ +ओ = औ, परम + ओषधि = परमौषधि
आ + औ = औ, महा + औदार्य = महौदार्य
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है- वृद्धिरेचि ।

4. यण सन्धि (सूत्र इकोयणचि)

इस सन्धि में इ/ई, उऊ, ऋ/लू किसी भी वर्ण के बाद असमान वर्ण आने पर दोनों मिलकर क्रमशः य, व, र, ल हो जाते हैं। जैसे- इ + अ = य, यदि + अपि = यद्यपि
इ + आ = या, इति + आदि = इत्यादि
इ + उ = यु, प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है-इकोयणचि ।

5. अयादि सन्धि (सूत्र एचोऽयवायावः)

इस सन्धि में ए, ओ, ऐ, औं में से किसी भी वर्ण के बाद कोई स्वर आए तो ये वर्ण क्रमशः अय्, अव्, आयू, आद् में बदल जाते हैं। जैसे- हरे + ए = (हर् + ए + ए) = हर् + अय् + ए = हरये
ने + अनम् = (न् + ए + अनम्) = न् + अय् + अनम् = नयनम्
शे + अनम् = (श् + ए + अनम्) = श् + अय् + अनम् = शयनम्
नै + अकः = (न् + ऐ + अकः) + न् + आय् + अकः = नायकः
पौ + अकः = (प् + आ + अकः) = प् + आ + अकः = पावकः
पो + अनः = (प् + आ + अनः) = प् + अय् + अनः = पवनः
नौ + इकः = (न् + औ + इकः) = - + आ + इकः = नाविकः
गै + अकः = (गु + ऐ + अकः) = ग् + आय् + अकः = गायकः
पौ + अनम् = (१ + औ + अनम्) = १ + आ + अनम् = पावनम्
भों + अनम् = (भू + ओ + अनम्) = + + अ + अनम् = भवनम्
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम हैं- एचोऽयवायावः ।

6. पूर्वरूप सन्धि (सूत्र एङ पदान्तादति)

इस सन्धि के अन्तर्गत पूर्व पद के अन्त में एड् = 'ए' अथवा 'ओ' रहने तथा दूसरे पद के प्रारम्भ में 'अ' के आने पर 'अ' का लोप हो जाता है और पूर्वरूप हुए 'अ' को दर्शाने के लिए अवग्रह (5) का प्रयोग किया जाता है। जैसे- ग्राम + अपि = ग्रामेऽपि (इस ग्राम में भी)
देवो + अपि = देवोऽपि (देवता भी)
हरे + अत्र = हरेऽत्र (हे हरि! रक्षा कीजिए)।
विष्णो + अव = विष्णोऽब (हे विष्णु! रक्षा कीजिए)
हरे + अव = हरेऽव (हे हरि ! रक्षा कीजिए)
पुस्तकालये + अस्मिन् = पुस्तकालयेऽस्मिन् (इस पुस्तकालय में) विद्यालये + अस्मिन = विद्यालयेऽस्मिन्
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है-एङ पदान्तादति ।

विशेष

1. पद से तात्पर्य धातु के लकार एवं शब्द के विभक्ति में बने रूप से है।
2. पूर्वरूप सन्धि अयादि सन्धि का अपवाद है।

7. पररूप सन्धि (सूत्र एङि पररूपम्)

इस सन्धि के अन्तर्गत अकारान्त उपसर्ग के बाद ए = ए अथवा ओं से प्रारम्भ होने वाली धातुओं के आने पर उपसर्ग का अ अपने बाद वाले ए अथवा ओं में बदल जाता है। जैसे- प्र + एजते = प्रेजत (अधिक काँपता है)
उप + औषति = उपौषति (जलता है)
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में प्रयुक्त नियम है-एड़ि पररूपम्।

विशेष

पररूप सन्धि वृद्धि सन्धि का अपवाद है।

2. व्यंजन सन्धि

परिभाषा

व्यंजन का स्वर अथवा व्यंजन के साथ मेल को व्यंजन सन्धि कहते हैं। इसके निम्नलिखित भेद हैं, जो निम्न हैं।

1. श्चुत्व सन्धि (सूत्र स्तोः श्चुना श्चुः)

इस सन्धि के अन्तर्गत सकार या तवर्ग (त्, थ, ६, ७, न्) के बाद शकार अथवा चवर्ग (चु, छ, ज, झू,,) के आने पर सकार शकार में और तवर्ग क्रम से चवर्ग में बदल जाता है। जैसे- निस् + छलम् = निश्छलम्
निस् + चय = निश्चय हरिस् + शेते = हरिश्शेते
सत् + चित् = सच्चित्
सत् + चयनम् = सच्चयनम्
कस् + चित् = कश्चित् सत् + चरितम् = सच्चरितम्
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियाँ स्तोः बुना श्वः नियम पर आधारित हैं।।

2. ष्टुत्व सन्धि (सूत्र ष्टुनाष्टुः)

इस सन्धि के नियमानुसार सकार (स्) अथवा तवर्ग (त्, थ, द, ध, न ) के बाद षकार (७) अथवा वर्ग (द्, ठ, ड, ढ, ण) के आने पर सकार धकार में और तवर्ग क्रमशः टबर्ग में बदल जाता है। जैसे- रामस् + धष्ठः = रामष्यः
रामस् + टीकते = रामष्टीकते
पैष् + ता = पेष्टा तत् + टीका = तट्टीका
चक्रिन + दौकसे = चक्रिण्ढौकसे उत् + डयनम् = उड्डयनम्
⇒ ध्यान दें उपर्युक्त सन्धियाँ ष्टुनाष्टुः नियम पर आधारित हैं।

3. जश्त्व सन्धि (सूत्र झलां जश् झशि)

इस सन्धि के नियमानुसार झल् वर्णों अर्थात् अन्तःस्थ (य, र्, ल्, व्), शल् (श, ष, स, ह) तथा अनुनासिक व्यंजन के अतिरिक्त आए अन्य व्यंजन के बाद झश् (किसी वर्ग का तीसरा अथवा चौथा वर्ण) के आने पर प्रथम व्यंजन झल्, जश् (उसी वर्ग का तीसरा वर्ण ज्, ग्, ड्, द्, ब) में बदल जाता है। जैसे- सिध् + धिः = सिद्धिः
दध् + धा = दोग्ध ।
योध् + धा = योद्धा
लभ् + धः = लब्धः दुधः + धम् = दुग्धम् ।
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है-झलां जश् झशि ।

4. घर्त्य सन्धि (सूत्र खरि च)

इस सन्धि के नियमानुसार झलू प्रत्याहार वर्णों (य्, र, ल, व्, ड्, ञ, ण्, न्, म् के अतिरिक्त अन्य व्यंजन अर्थात् वर्ग के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ वर्ण तथा श्, धू, स्, इ) के पश्चात् खर् प्रत्याहार वर्ण (वर्ग के प्रथम, द्वितीय वर्ण तथा शू, धू, सू) के आने पर प्रथम व्यंजन झलू प्रत्याहार, घर प्रत्याहार (वर्ग के प्रथम वर्ण अर्थात् क्, च्, ट्, त्, प्) में बदल जाता है। जैसे- सम्पद् + समयः = सम्पत्समयः
विपद् + काल = विपत्काल
ककुभ् + प्रान्तः = ककुप्रान्तः उद् + साहः = उत्साहः
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है-खरि च ।

5. लत्व सन्धि (सूत्र तोलिं)

इस सन्धि के नियमानुसार तवर्ग (त्, थ, द, ध, न्) के पश्चात् ल के आने पर तंवर्ग परसवर्ण ल में बदल जाता है। उल्लेखनीय है। कि न के पश्चात् ल के आने पर न् अनुनासिक लै में बदल जाता है। जैसे- उत् + लेखः = उल्लेखः
उद् + लिखितम् = उल्लिखितम्
तत् + लयः = तल्लयः विद्वान् + लिखति = विद्वान्लिखति
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियाँ तोर्लि नियम पर आधारित हैं।

6. अनुस्वार सन्धि (सूत्र मोऽनुस्वारः)

इस सन्धि के नियमानुसार पदान्त म् (विभक्तियुक्त शब्द के अन्त का मू) के पश्चात् किसी व्यंजन के आने पर म् अनुस्वार (-) में बदल जाता है। जैसे- गृहम् + गच्छ = गृहंगच्छ
गृहम् + गच्छति = गृहं गच्छति
धनम् + जय = धनञ्जय
हरिम् + वन्दे = हरि बन्दै दुःखम् + प्राप्नोति = दुःखं प्राप्नोति
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है-मोऽनुस्वारः ।

7. परसवर्ण सन्धि (सूत्र अनुस्वारस्य ययि परसवर्णः)

इस सन्धि के नियमानुसार पद के मध्य अनुस्वार के पश्चात् श्, ष, स्, हू के अतिरिक्त किसी व्यंजन के आने पर अनुस्वार आने वाले वर्ग के पाँचवें वर्ण में बदल जाता है। जैसे- सम् + धिः = सन्धिः
त्वम् + करोषि = त्वङ्करोषि = त्वं करोषि नगरम् + चलति = नगरचलति = नगरं चलति रामम् + नमामि = रामन्नमामि = रामं नमामि सम् + नद्ध = सन्नद्धः
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है- अनुस्वारस्य ययि परसवर्णः ।

3. विसर्ग सन्धि

परिभाषा

विसर्ग का स्वर अथवा व्यंजन के साथ मेल को विसर्ग सन्धि कहते हैं। इसके निम्नलिखित भेद हैं-

1. सत्व सन्धि (सूत्र विसर्जनीयस्य सः)

इस सन्धि में विसर्ग के पश्चात् खर् प्रत्याहार वर्गों के प्रथम वर्ण, द्वितीय वर्ण तथा शु, ष, स् के आने पर विसर्ग स् में बदल जाता है। जैसे- नमः + ते = नमस् + ते = नमस्ते
गौः + चरति = गौस् + चरति = गौश्चरति
पूर्णः + चन्द्रः = पूर्णस् + चन्द्रः = पूर्णश्चन्द्रः
हरिः + चन्द्रः = हरिस् + चन्द्रः = हरिश्चन्द्रः
हरिः + चरति = हरिस् + चरति = हरिश्चरति
⇒ ध्यान दें उक्त सन्धियों में निर्दिष्ट नियम है-विसर्जनीयस्य सः।

विशेष

उपर्युक्त प्रथम उदाहरण को छोड़कर शेष सभी उदाहरण स् और चवर्ग का मेल होने से श्चुत्व सन्धि के 'स्तोः श्चुनी श्चुः' नियम पर भी आधारित है।'

2. रुत्व सन्धि (सूत्र 1 ससजुषोः रुः)

इस सन्धि के नियमानुसार पदान्त सू एवं सजु शब्द का ष् रू () र् में बदल जाता है। (सूत्र 2 खरवसानयोर्विसर्जनीय) पदान्त र के पश्चात् खर् प्रत्याहार के किसी वर्ण के आने अथवा न आने पर है विसर्ग में बदल जाता है। जैसे- सजु = सजुर् = सजुः ।
कवेः + आभावात् = कवेरभावात् रामस् = राम = रामः रामस् + पठति = राम + पठति = रामः पठति

3. उत्त सन्धि (सूत्र 1 अतोरोरप्लुतादप्लुते)

स् के स्थान पर आए र के पूर्व अ एवं पश्चात् में अ अथवा (सूत्र 2 हशि च) हश् प्रत्याहार के किसी वर्ण (वर्ग तृतीय, चतुर्थ, पंचम के वर्षों एवं य, र, ल, व, ह) के आने पर १ छ में बदल जाता है। जैसे- सस् + अपि = सर् + अपि = स + उ + अपि = सो + अपि = सोऽपि
शिवस् + अर्थ्यः = शिबर् + अर्व्यः = शिव + उ + अर्व्यः = शिव + अर्ध्यः = शिवोऽर्थ्यः
रामस् + अस्ति = रामर् + अस्ति = राम + उ + अस्ति = राम + अस्ति = रामोऽस्ति बालकस् + अति = बालक + अपि = बालक + उ । अपि = बालको + अपि = बालकोऽपि

4. विसर्ग लोप (सुत्र 1 रोरि)

विसर्ग अथवा र बाद र के आने पर प्रथम र् का लोप हो जाता है। (सूत्र 2 ठूलोपे पूर्वस्य दीर्घाs:) पूर्ववर्ती र के पहले अ, इ, उ के आने पर वे दीर्घ हो जाते हैं। जैसे- गौः + रम्भते = गौर् + रम्भते = गौरम्भते
हरेः + रमणम् = हरेर् + रमणम् = हरेरमणम्
हरिः + रम्यः = हरिर् + रम्यः = रम्यः
पुनः + रमते = पुनर् + रमते = पुनारमते भानुः + राजते = भानुर् + राजते = भानुराजते।

बहविकल्पीय प्रश्न

Question 1. ‘नयनम्' का सन्धि विच्छेद होगा । (क) ने + अन्नम्। (ख) नय + नम्। (ग) नै + अनम् (घ) नय + अनम्
Answer: (क) ने + अन्नम्।
In simple words: 'नयनम्' का सही सन्धि विच्छेद 'ने + अन्नम्' है, जो अयादि सन्धि का उदाहरण है। इसमें 'ए' स्वर के बाद कोई अन्य स्वर आने पर 'अय' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि के नियमों को याद रखें, विशेषकर 'ए' और 'ऐ' के बाद भिन्न स्वर आने पर होने वाले परिवर्तनों को।

 

Question 2. 'पावनः' का सन्धि विच्छेद होगा। (क) पाव + अनः (ख) पो + अनः (ग) पौ + अनमः (घ) पद + अनः
Answer: (ग) पौ + अनमः
In simple words: 'पावनः' का सही सन्धि विच्छेद 'पौ + अनमः' है, यह भी अयादि सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'औ' के बाद भिन्न स्वर आने पर 'आव' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि में 'औ' के बाद स्वर आने पर 'आव' में परिवर्तन के नियम को ध्यान से समझें, यह एक सामान्य गलती है।

 

Question 3. उत् + लेख' की सन्धि होगी। (क) उत्लेख (ख) उद्लेख (ग) उज्लेख (घ) उल्लेख
Answer: (घ) उल्लेख
In simple words: 'उत् + लेख' की सन्धि 'उल्लेख' होगी। यह लत्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'त्' के बाद 'ल' आने पर 'त्' भी 'ल' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: व्यंजन सन्धि के लत्व नियम को समझें, विशेष रूप से 'त्' और 'ल' के मेल से होने वाले परिवर्तन।

 

Question 4. 'प्रेजतेः' में सन्धि है। (क) गुण सन्धि (ख) पररूप सन्धि (ग) पूर्वरूप सन्धि (घ) अयादि सन्धि
Answer: (ख) पररूप सन्धि
In simple words: 'प्रेजतेः' में पररूप सन्धि है, क्योंकि इसमें 'प्र' उपसर्ग के 'अ' का 'ए' में पररूप हो गया है, जो 'एङि पररूपम्' सूत्र द्वारा होता है।

🎯 Exam Tip: पररूप सन्धि को वृद्धि सन्धि के अपवाद के रूप में याद रखें, खासकर उपसर्गों के बाद 'ए' या 'ओ' आने पर।

 

Question 5. 'नायक' का सन्धि विच्छेद होगा (क) नै + अकः (ख) नाय + अकः (ग) नाय + क (घ) नौ + अकः
Answer: (क) नै + अकः
In simple words: 'नायक' का सही सन्धि विच्छेद 'नै + अकः' है, यह अयादि सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'ऐ' के बाद 'अ' आने पर 'आय' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि में 'ऐ' के बाद अन्य स्वर आने पर 'आय' में परिवर्तन के नियम को अच्छी तरह से दोहराएं।

 

Question 6. 'तद् + लीन' की सन्धि होगी। (क) तल्लीनः (ख) तलीनः (ग) तल्लिनः (घ) तद्दीनः
Answer: (क) तल्लीनः
In simple words: 'तद् + लीन' की सन्धि 'तल्लीनः' है। यह लत्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'द्' के बाद 'ल' आने पर 'द्' भी 'ल' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: लत्व सन्धि के उदाहरणों का अभ्यास करें, विशेष रूप से 'द्' और 'ल' के मेल से बनने वाले शब्द।

 

Question 7. 'रमयागच्छ' का सन्धि विच्छेद होगा। (क) रमें + आगछ (ख) रमा + आगच्छ (ग) राम + आगच्छ (घ) रमया + गछ
Answer: (क) रमें + आगछ
In simple words: 'रमयागच्छ' का सन्धि विच्छेद 'रमया + आगच्छ' होना चाहिए, लेकिन दिए गए विकल्पों में सबसे उपयुक्त 'रमें + आगछ' लग रहा है, जो व्याकरणिक रूप से थोड़ा भिन्न है, परंतु सन्धि के नियम यहाँ स्पष्ट नहीं हैं।

🎯 Exam Tip: विच्छेद करते समय शब्दों के मूल रूप और सन्धि के नियमों पर ध्यान दें।

 

Question 8. 'नश्चलति' का सन्धि विच्छेद होगा (क) नरस् + चलति (ख) नरश् + चलति (ग) नर् + सचलि (घ) न + चलति
Answer: (क) नरस् + चलति
In simple words: 'नश्चलति' का सही सन्धि विच्छेद 'नरस् + चलति' है। यह सत्व सन्धि के अंतर्गत श्चुत्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'स्' के बाद 'च्' आने पर 'स्' 'श्' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: विसर्ग सन्धि के सत्व नियम और उसके बाद श्चुत्व सन्धि के नियम को समझें।

 

Question 9. 'विद्वान् + लिखति' की सन्धि है। (क) विद्वन्लिखति । (ख) विद्वांलिखति (ग) विद्वाल्लिखति (घ) विद्वांलिखति
Answer: (घ) विद्वांलिखति
In simple words: 'विद्वान् + लिखति' की सन्धि 'विद्वांलिखति' है, यह लत्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'न्' के बाद 'ल' आने पर 'न्' अनुनासिक 'ल' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: लत्व सन्धि के विशेष नियम, जहाँ 'न्' के बाद 'ल' आने पर अनुनासिक 'ल' बनता है, उसे याद रखें।

 

Question 10. 'पुनारमते' में सन्धि है। (क) रोरि (ख) खरि च (ग) विसर्जनीयस्य सः (घ) ष्टुना ष्टुः
Answer: (ख) रोरि
In simple words: 'पुनारमते' में रोरि सन्धि है, जहाँ 'पुनर् + रमते' में पहले 'र्' का लोप होता है और उसके पूर्व का 'अ' दीर्घ होकर 'आ' बन जाता है।

🎯 Exam Tip: रोरि सन्धि में 'र' के लोप और पूर्ववर्ती स्वर के दीर्घीकरण के नियम को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 11. 'पौ + इत्रम्” की सन्धि है। (क) पवित्र (ख) पवित्रम् (ग) परित्राण (घ) परित्रम्
Answer: (ख) पवित्रम्
In simple words: 'पौ + इत्रम्' की सन्धि 'पवित्रम्' है, जो अयादि सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'औ' के बाद 'इ' आने पर 'अवि' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि के नियमों में 'औ' के बाद भिन्न स्वर आने पर 'अवि' में परिवर्तन को पहचानना सीखें।

 

Question 12. 'विष्णोऽव' का सन्धि विच्छेद होगा (क) विष्णु + अव (ख) विष्णु + इव (ग) विष्णो + अव (घ) विष्णों + आव
Answer: (ग) विष्णो + अव
In simple words: 'विष्णोऽव' का सही सन्धि विच्छेद 'विष्णो + अव' है। यह पूर्वरूप सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'ओ' के बाद 'अ' आने पर 'अ' का लोप हो जाता है और अवग्रह चिह्न (ऽ) लग जाता है।

🎯 Exam Tip: पूर्वरूप सन्धि के 'ओ' के बाद 'अ' के लोप और अवग्रह चिह्न के प्रयोग को याद रखें।

 

Question 13. 'इत्यादि का सन्धि विच्छेद होगा (क) इति + आदि (ख) इत्य + आदि (ग) इत्या + दि (घ) इत् + यदि
Answer: (क) इति + आदि
In simple words: 'इत्यादि' का सही सन्धि विच्छेद 'इति + आदि' है। यह यण सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'इ' के बाद 'आ' आने पर 'इ' 'य' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: यण सन्धि में 'इ/ई' के बाद भिन्न स्वर आने पर 'य' में परिवर्तन के नियम को समझें।

 

Question 14. 'पौ + अकः' की सन्धि है (क) पोअकः (ख) पावकः (ग) पावाकः (घ) पौवाकः
Answer: (ख) पावकः
In simple words: 'पौ + अकः' की सन्धि 'पावकः' है। यह अयादि सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'औ' के बाद 'अ' आने पर 'आव' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि में 'औ' के बाद 'अ' आने पर 'आव' में परिवर्तन के नियम को याद रखें।

 

Question 15. 'गुरो + अनु' की सन्धि हैं। (क) गुरवनु (ख) गुरोऽनु (ग) गुरावनु (घ) गुरोरनु
Answer: (ख) गुरोऽनु
In simple words: 'गुरो + अनु' की सन्धि 'गुरोऽनु' है। यह पूर्वरूप सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'ओ' के बाद 'अ' आने पर 'अ' का लोप होकर अवग्रह चिह्न (ऽ) बनता है।

🎯 Exam Tip: पूर्वरूप सन्धि में 'ओ' या 'ए' के बाद 'अ' के लोप और अवग्रह चिह्न के प्रयोग को पहचानें।

 

Question 16. 'पशवश्चरन्ति' में सन्धि हैं। (क) हशि च (ख) रोरि (ग) विसर्जनीयस्य सः (घ) खर च
Answer: (ग) विसर्जनीयस्य सः
In simple words: 'पशवश्चरन्ति' में विसर्जनीयस्य सः सन्धि है, जहाँ विसर्ग का 'स्' में और फिर 'श्' में परिवर्तन होता है (श्चुत्व)।

🎯 Exam Tip: विसर्ग सन्धि के नियमों को, विशेषकर सत्व और श्चुत्व सन्धि के संयुक्त प्रभाव को समझें।

 

Question 17. ससजुषोः रुः सन्धि है (क) अरिस् + गच्छति (ख) प्रभुः + चलति (ग) बालकः + याति (घ) शिवः + अपि
Answer: (क) अरिस् + गच्छति
In simple words: 'अरिस् + गच्छति' में ससजुषोः रुः सन्धि है, जो 'सस्' और 'सजुष्' शब्द के 'स्' को 'र्' में बदल देती है।

🎯 Exam Tip: रुत्व सन्धि के मूल नियम 'ससजुषोः रुः' को याद रखें और इसके उदाहरणों को पहचानना सीखें।

 

Question 18. 'पुत्रस् + षष्ठः' की सन्धि है। (क) पुत्रस्षष्ठः (ख) पुत्रोषष्ठः (ग) पुत्रर्षष्ठः (घ) पुत्रष्षष्ठः
Answer: (घ) पुत्रष्षष्ठः
In simple words: 'पुत्रस् + षष्ठः' की सन्धि 'पुत्रष्षष्ठः' है। यह ष्टुत्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'स्' के बाद 'ष्' आने पर 'स्' भी 'ष्' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: ष्टुत्व सन्धि के नियम को ध्यान से समझें, जहाँ 'स्' या तवर्ग के बाद 'ष्' या टवर्ग आने पर परिवर्तन होता है।

 

Question 19. 'दोग्धा' का सन्धि-विच्छेद होगा (क) दोग् + धा (ख) दो + ग्धा (ग) दोध् + धा (घ) दोक + धा।
Answer: (ग) दोध् + धा
In simple words: 'दोग्धा' का सही सन्धि विच्छेद 'दोध् + धा' है। यह जश्त्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'ध्' (चौथा वर्ण) के बाद 'ध्' आने पर 'ध्' 'घ्' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: जश्त्व सन्धि के नियम को याद रखें, जिसमें वर्ग के चौथे या तीसरे वर्ण के बाद समान वर्ण आने पर पहले वर्ण का तीसरे या चौथे में परिवर्तन होता है।

 

Question 20. 'सज्जनः' का सन्धि-विच्छेद होगा (क) सत् + जनः (ख) सद् + जनः (ग) सज्ज + नः (घ) सज़ + जनः
Answer: (क) सत् + जनः
In simple words: 'सज्जनः' का सही सन्धि विच्छेद 'सत् + जनः' है। यह श्चुत्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'त्' के बाद 'ज्' आने पर 'त्' भी 'ज्' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: श्चुत्व सन्धि के नियमों को अच्छी तरह समझें, विशेष रूप से तवर्ग के बाद चवर्ग आने पर होने वाले परिवर्तन।

 

Question 21. 'उज्ज्वल' का सन्धि-विच्छेद है (क) उद् + ज्वल (ख) उर् + ज्वल (ग) उज् + ज्वल (घ) उस् + ज्वल
Answer: (ख) उद् + ज्वल
In simple words: 'उज्ज्वल' का सही सन्धि विच्छेद 'उद् + ज्वल' है। यह श्चुत्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'द्' के बाद 'ज्' आने पर 'द्' भी 'ज्' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: श्चुत्व सन्धि में तवर्ग के वर्णों (जैसे 'द्') के बाद चवर्ग के वर्ण (जैसे 'ज्') आने पर होने वाले परिवर्तन को पहचानें।

 

Question 22. विसर्जनीयस्य सः सन्धि है (क) शिया + अस्ति (ख) रामः + गच्छति (ग) हरिः + भाति (घ) चन्द्रः + चकोर:
Answer: (घ) चन्द्रः + चकोर:
In simple words: 'चन्द्रः + चकोरः' में विसर्जनीयस्य सः सन्धि है, जहाँ विसर्ग के बाद 'च्' आने पर विसर्ग 'श्' में बदल जाता है (सत्व-श्चुत्व)।

🎯 Exam Tip: विसर्ग सन्धि में विसर्ग के बाद चवर्ग या शकार आने पर 'स्' या 'श्' में परिवर्तन के नियम को समझें।

 

Question 23. 'निस + छलम्' की सन्धि है (क) निस्छलम् (ख) निष्छलम् (ग) निश्छलम् (घ) निलम्
Answer: (ग) निश्छलम्
In simple words: 'निस + छलम्' की सन्धि 'निश्छलम्' है। यह सत्व सन्धि के अंतर्गत श्चुत्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'स्' के बाद 'छ्' आने पर 'स्' 'श्' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: 'स्' के बाद 'छ्' आने पर 'श्' में परिवर्तन के श्चुत्व नियम को याद रखें।

 

Question 24. 'तत् + चौरः' की सन्धि हैं। (क) तदचौरः (ख) तचौरः (ग) तच्छौरः (घ) तच्चौरः
Answer: (घ) तच्चौरः
In simple words: 'तत् + चौरः' की सन्धि 'तच्चौरः' है। यह श्चुत्व सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'त्' के बाद 'च्' आने पर 'त्' भी 'च्' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: श्चुत्व सन्धि में तवर्ग (त्) के बाद चवर्ग (च्) आने पर होने वाले परिवर्तन को पहचानें।

 

Question 25. 'एचोऽयवायावः' सन्धि है। (क) उप + ओषति (ख) नौ + इकः (ग) रामस् + च (घ) तत् + टीका
Answer: (ख) नौ + इकः
In simple words: 'नौ + इकः' एचोऽयवायावः (अयादि) सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'औ' के बाद 'इ' आने पर 'नाविकः' बनता है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि के 'एचोऽयवायावः' सूत्र को याद रखें और इसके विभिन्न वर्ण-संयोजनों को पहचानना सीखें।

 

Question 26. अयादि सन्धि है। (क) ने + अनम् (ख) नय + नम (ग) यदि + अपि (घ) सत् + चित्
Answer: (क) ने + अनम्
In simple words: 'ने + अनम्' अयादि सन्धि का उदाहरण है, जो 'नयनम्' बनता है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि में 'ए', 'ओ', 'ऐ', 'औ' के बाद भिन्न स्वर आने पर होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 27. ‘विष्णो + अत्र' की सन्धि होगी (क) विष्ण्वत्र (ख) विष्णवत्र (ग) विष्पावत्र (घ) विष्णोऽत्र
Answer: (घ) विष्णोऽत्र
In simple words: 'विष्णो + अत्र' की सन्धि 'विष्णोऽत्र' है। यह पूर्वरूप सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'ओ' के बाद 'अ' आने पर 'अ' का लोप होकर अवग्रह चिह्न (ऽ) बनता है।

🎯 Exam Tip: पूर्वरूप सन्धि के अवग्रह चिह्न के प्रयोग को पहचानना और उसके नियम को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 28. 'प्रभुश्चलति' का सन्धि-विच्छेद है। (क) प्रभुः + चलति (ख) प्रभु + चलति (ग) प्रभो + चलति (घ) प्रभा + चलति
Answer: (क) प्रभुः + चलति
In simple words: 'प्रभुश्चलति' का सही सन्धि विच्छेद 'प्रभुः + चलति' है। यह विसर्ग सन्धि (सत्व-श्चुत्व) का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: विसर्ग सन्धि के नियमों को, विशेषकर विसर्ग के बाद 'च्' आने पर 'श्' में परिवर्तन को पहचानें।

 

Question 29. 'झलां जशु झशि' सन्धि है। (क) लब्धम् (ख) रामष्षष्ठः (ग) सत्कारः (घ) रामश्च
Answer: (क) लब्धम्
In simple words: 'लब्धम्' (लभ् + धः) झलां जशु झशि सन्धि का उदाहरण है, जहाँ झल् वर्ण के बाद झश् वर्ण आने पर झल् का जश् में परिवर्तन होता है।

🎯 Exam Tip: जश्त्व सन्धि के सूत्र 'झलां जशु झशि' को याद रखें और इसके उदाहरणों को पहचानना सीखें।

 

Question 30. पररूप सन्धि है। (क) प्रभो + अत्र (ख) प्र + एजते (ग) देव + आलयः (घ) प्रति + उदारः ।
Answer: (ख) प्र + एजते
In simple words: 'प्र + एजते' पररूप सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'अ' का 'ए' में पररूप होकर 'प्रेजते' बनता है।

🎯 Exam Tip: पररूप सन्धि को वृद्धि सन्धि के अपवाद के रूप में समझें और उपसर्गों के साथ इसके प्रयोग को याद रखें।

 

Question 31. विसर्ग सन्धि है। (क) समस्तरति (ख) सिद्धिः (ग) पुस्तकालयः (घ) नयनम्
Answer: (क) समस्तरति
In simple words: 'समस्तरति' विसर्ग सन्धि का उदाहरण है (सम् + अस्तरति), जहाँ विसर्ग का 'स्' में परिवर्तन होता है।

🎯 Exam Tip: विसर्ग सन्धि के विभिन्न भेदों और उनके नियमों को पहचानें, खासकर 'स्' में परिवर्तन वाले उदाहरणों को।

 

Question 32. 'रामावग्रतः' का सन्धि-विच्छेद है। (क) राम + अग्रतः (ख) रामौ + अग्रतः (ग) राम + अग्रतः (घ) रामे + अग्न
Answer: (ख) रामौ + अग्रतः
In simple words: 'रामावग्रतः' का सन्धि विच्छेद 'रामौ + अग्रतः' है। यहाँ 'औ' के बाद 'अ' आने पर 'आव' में परिवर्तन हुआ है, जो अयादि सन्धि का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि में 'औ' के बाद 'अ' आने पर 'आव' में परिवर्तन को पहचानना सीखें।

 

Question 33. 'पूर्णश्चन्द्रः' में कौन-सी सन्धि है? (क) रोरि (ख) वृद्धिरेचि (ग) वीसर्जनीयस्य सः (घ) पररूपम्
Answer: (ग) वीसर्जनीयस्य सः
In simple words: 'पूर्णश्चन्द्रः' में विसर्जनीयस्य सः सन्धि है, जहाँ विसर्ग का 'स्' में और फिर 'श्' में परिवर्तन होता है (सत्व-श्चुत्व)।

🎯 Exam Tip: विसर्ग सन्धि के सत्व और श्चुत्व नियमों के संयुक्त प्रभाव को याद रखें।

 

Question 34. 'विष्णवे' का सन्धि-विच्छेद होगा (क) विष्णु + वे (ख) विष्णोः + ए (ग) विष्णु+ए (घ) विष्णो +ए ।
Answer: (घ) विष्णो +ए ।
In simple words: 'विष्णवे' का सही सन्धि विच्छेद 'विष्णो + ए' है। यह अयादि सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'ओ' के बाद 'ए' आने पर 'अव्' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि में 'ओ' के बाद भिन्न स्वर आने पर 'अव्' में परिवर्तन के नियम को समझें।

 

Question 35. अयादि सन्धि है (क) सत् + चित्त (ख) प्र + एजते (ग) पौ + अकः (घ) योघ् + धा ।
Answer: (ग) पौ + अकः
In simple words: 'पौ + अकः' अयादि सन्धि का उदाहरण है, जो 'पावकः' बनता है।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि के 'औ' के बाद 'अ' आने पर 'आव' में परिवर्तन के नियम को पहचानें।

 

Question 36. 'सः + अक्षरः' की सन्धि होगी । (क) साक्षरः (ख) सोऽक्षरः (ग) साक्षरः (घ) सःक्षर
Answer: (ग) साक्षरः
In simple words: 'सः + अक्षरः' की सन्धि 'साक्षरः' होगी। यह दीर्घ सन्धि का एक प्रकार है, जहाँ 'अ' और 'अ' मिलकर 'आ' बनते हैं।

🎯 Exam Tip: स्वर सन्धि के दीर्घीकरण के नियमों को अच्छी तरह समझें, खासकर समान स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तनों को।

 

Question 37. 'लू + आकृतिः' की सन्धि होगी (क) लाकृतिः (ख) लुकृति (ग) अकृतिः (घ) लआकृति
Answer: (क) लाकृतिः
In simple words: 'लू + आकृतिः' की सन्धि 'लाकृतिः' होगी। यह यण सन्धि का उदाहरण है, जहाँ 'लू' के बाद 'आ' आने पर 'लू' 'ला' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: यण सन्धि में 'लू' के बाद भिन्न स्वर आने पर 'ल' में परिवर्तन के नियम को याद रखें।

 

Question 38. 'वधूत्सवः' में सन्धि है। (क) यण् (ख) पूर्वरूप (ग) अयादि (घ) दीर्घ
Answer: (घ) दीर्घ
In simple words: 'वधूत्सवः' (वधू + उत्सवः) में दीर्घ सन्धि है, जहाँ 'ऊ' और 'उ' मिलकर दीर्घ 'ऊ' बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: दीर्घ सन्धि के नियमों को अच्छी तरह समझें, विशेष रूप से 'उ' और 'ऊ' के मेल से होने वाले दीर्घीकरण को।

 

Question 39. चर्व सन्धि (खरि च) है। (क) दोघ् + धा (ख) उद् + कीर्णः (ग) मत् + चित्ते (घ) हरिम् + वन्दै
Answer: (ख) उद् + कीर्णः
In simple words: 'उद् + कीर्णः' चर्व सन्धि (खरि च) का उदाहरण है, जहाँ झल् वर्ण के बाद खर् वर्ण आने पर झल् का चर्व में परिवर्तन होता है।

🎯 Exam Tip: चर्व सन्धि के नियम को याद रखें, जिसमें वर्ग के तीसरे या चौथे वर्ण के बाद खर् वर्ण आने पर पहले वर्ण का पहले वर्ण में परिवर्तन होता है।

सूत्रों की व्याख्या पर आधारित प्रश्नोत्तर

Question 1. ‘एचायवायावः सूत्र का सादाहरण व्याख्या उत्तरः यदि ए, ओ, ऐ, औ में से किसी भी वर्ण के बाद कोई स्वर आए तो ये वर्ण क्रमशः अय्, अ, आयु, आव् में बदल जाते हैं; जैसे- ने + अनम् = नयनम्ः पौ + अकः = पावकः, कलौ + इव = कलाविव
Answer: एचोऽयवायावः सूत्र अयादि सन्धि का नियम है। इसके अनुसार यदि 'ए', 'ओ', 'ऐ', 'औ' के बाद कोई भी भिन्न स्वर आए तो 'ए' का 'अय्', 'ओ' का 'अव्', 'ऐ' का 'आय्' और 'औ' का 'आव्' हो जाता है। उदाहरण:
ने + अनम् = नयनम् (ए + अ = अय्)
पौ + अकः = पावकः (औ + अ = आव्)
कलौ + इव = कलाविव (औ + इ = आवि)
In simple words: अयादि सन्धि में 'ए, ओ, ऐ, औ' के बाद कोई भी दूसरा स्वर आए तो ये अक्षर क्रमशः 'अय्, अव्, आय्, आव्' में बदल जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अयादि सन्धि के चारों मुख्य परिवर्तनों (अय, अव, आय, आव) को उनके उदाहरणों के साथ याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. 'एछ पदान्तादति' (अथवा पूर्वरूप) सूत्र की सोदाहरण व्याख्या कीजिए। उत्तरः यदि पूर्व पद के अन्त में ए और ओ में से कोई वर्ण रहे और उसके बाद दूसरे पद में अ आए तो अ का लोप हो जाता है और उसके स्थान पर अवग्रह (5) लिखा जाता है। जैसे- विष्णो + अव = विष्णोऽव; देवो + अपि = देवोऽपि
Answer: पूर्वरूप सन्धि का सूत्र 'एङ पदान्तादति' है। इस सूत्र के अनुसार, यदि पूर्व पद के अंत में 'ए' या 'ओ' हो और उसके बाद दूसरे पद के प्रारंभ में 'अ' आए, तो 'अ' का लोप हो जाता है और उस 'अ' के स्थान पर अवग्रह चिह्न (ऽ) का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण:
विष्णो + अव = विष्णोऽव
देवो + अपि = देवोऽपि
In simple words: जब किसी शब्द के आखिर में 'ए' या 'ओ' हो और उसके तुरंत बाद 'अ' से शुरू होने वाला शब्द आए, तो 'अ' गायब हो जाता है और उसकी जगह 'ऽ' चिह्न लग जाता है।

🎯 Exam Tip: पूर्वरूप सन्धि में 'अ' का लोप और अवग्रह चिह्न का प्रयोग इसके मुख्य पहचान चिह्न हैं, इन्हें ध्यान से समझें।

 

Question 3. 'एहि पररूपम्' सूत्र की सोदाहरण परिभाषा लिखिए। उत्तर: यदि अकारान्त उपसर्ग के पश्चात् ए अथवा ओ से प्रारम्भ होने वाली धातु आए तो उपसर्ग का अ अपने बाद वाले ए अथवा ओ में बदल जाता हैं । जैसे-प्र + एजते = प्रेजते, उप + ओषति = उपोषति
Answer: पररूप सन्धि का सूत्र 'एङि पररूपम्' है। इस सूत्र के अनुसार, यदि अकारान्त (जिसके अंत में 'अ' हो) उपसर्ग के बाद 'ए' या 'ओ' से प्रारंभ होने वाली धातु आए, तो उपसर्ग का 'अ' अपने बाद वाले 'ए' या 'ओ' में मिल जाता है (यानी पररूप हो जाता है)। उदाहरण:
प्र + एजते = प्रेजते
उप + ओषति = उपोषति
In simple words: अगर 'अ' पर समाप्त होने वाले उपसर्ग के बाद 'ए' या 'ओ' से शुरू होने वाली क्रिया आए, तो उपसर्ग का 'अ' उसी 'ए' या 'ओ' में मिल जाता है।

🎯 Exam Tip: पररूप सन्धि को वृद्धि सन्धि का अपवाद माना जाता है; यह समझना महत्वपूर्ण है कि उपसर्ग के 'अ' का लोप क्यों होता है।

 

Question 4. 'स्तोः श्चुना श्चुः सूत्र की सोदाहरण व्याख्या कीजिए। उत्तरः यदि सकार या तवर्ग के बाद शकार अथवा चवर्ग का कोई वर्ण आए तो । सकार (स्) शकार (श) में तथा तवर्ग क्रमानुसार चवर्ग में बदल जाता है। जैसे-सत् + चरितम् = सच्चरितम्, हरिस् + शेते = हरिश्शेते
Answer: श्चुत्व सन्धि का सूत्र 'स्तोः श्चुना श्चुः' है। इस सूत्र के अनुसार, यदि 'स्' (सकार) या तवर्ग (त्, थ्, द्, ध्, न्) के बाद 'श्' (शकार) या चवर्ग (च्, छ्, ज्, झ्, ञ्) आए, तो 'स्' 'श्' में बदल जाता है, और तवर्ग के वर्ण क्रमानुसार चवर्ग के वर्णों में बदल जाते हैं। उदाहरण:
सत् + चरितम् = सच्चरितम् (त् + च = च्च)
हरिस् + शेते = हरिश्शेते (स् + श = श्श)
In simple words: जब 'स्' या 'त' वर्ग के अक्षर (जैसे त, थ, द, न) के बाद 'श्' या 'च' वर्ग के अक्षर (जैसे च, छ, ज, झ) आएं, तो 'स्' 'श्' में और 'त' वर्ग के अक्षर 'च' वर्ग के अक्षरों में बदल जाते हैं।

🎯 Exam Tip: श्चुत्व सन्धि में तवर्ग के पांचों वर्णों का चवर्ग के संगत वर्णों में परिवर्तन का क्रम याद रखें।

 

Question 5. 'टुनाष्टुः सूत्र की सोदाहरण व्याख्या कीजिए। उत्तरः यदि सकार अथवा तवर्ग के किसी वर्ण के बाद षकार अथवा वर्ग का कोई वर्ण आए तो सकार (स्) षकार (७) में तथा तवर्ग क्रमशः टवर्ग में बदल जाता है; जैसे -रामस् + टीकते = रामष्टीकते, तत् + टीका = तट्टीका
Answer: ष्टुत्व सन्धि का सूत्र 'ष्टुनाष्टुः' है। इस सूत्र के अनुसार, यदि 'स्' (सकार) या तवर्ग (त्, थ्, द्, ध्, न्) के बाद 'ष्' (षकार) या टवर्ग (ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण्) आए, तो 'स्' 'ष्' में बदल जाता है, और तवर्ग के वर्ण क्रमानुसार टवर्ग के वर्णों में बदल जाते हैं। उदाहरण:
रामस् + टीकते = रामष्टीकते (स् + ट = ष्ट)
तत् + टीका = तट्टीका (त् + ट = ट्ट)
In simple words: जब 'स्' या 'त' वर्ग के अक्षर के बाद 'ष्' या 'ट' वर्ग के अक्षर (जैसे ट, ठ, ड, ढ) आएं, तो 'स्' 'ष्' में और 'त' वर्ग के अक्षर 'ट' वर्ग के अक्षरों में बदल जाते हैं।

🎯 Exam Tip: ष्टुत्व सन्धि में भी श्चुत्व सन्धि की तरह ही तवर्ग का टवर्ग में क्रमिक परिवर्तन होता है, इसे ध्यान से समझें।

 

Question 6. 'झलां जश् झशि' सूत्र की सोदाहरण व्याख्या कीजिए। उत्तरः यदि झल् वर्षों (य्, र, ल, व्, श, ष, स्, ह तथा अनुनासिक व्यंजनों को छोड़कर आए अन्य व्यंजन) के बाद झश् (वर्ग का तीसरा या चौथा वर्ण) आए तो प्रथम व्यंजन झलू जश् (उसी वर्ग का तीसरा वर्ण जु, बु, गु, डू, ६) में बदल जाता है; जैसे- योध् + धा = योद्धा, दुधः + धम् = दुग्धम् ।
Answer: जश्त्व सन्धि का सूत्र 'झलां जश् झशि' है। इस सूत्र के अनुसार, यदि झल् प्रत्याहार (प्रत्येक वर्ग का पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा वर्ण और श्, ष्, स्, ह) के बाद झश् प्रत्याहार (प्रत्येक वर्ग का तीसरा या चौथा वर्ण) आए, तो पहले पद का झल् वर्ण उसी वर्ग के जश् (तीसरे वर्ण) में बदल जाता है। उदाहरण:
योध् + धा = योद्धा (ध् + ध = ध् का द् में परिवर्तन, फिर द्ध)
दुधः + धम् = दुग्धम् (ध् + ध = ध् का ग् में परिवर्तन, फिर ग्ध)
In simple words: अगर किसी व्यंजन (झल्) के बाद वर्ग का तीसरा या चौथा अक्षर (झश्) आए, तो पहला व्यंजन अपने ही वर्ग के तीसरे अक्षर में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: जश्त्व सन्धि में 'झल्' और 'झश्' प्रत्याहारों के वर्णों को समझना महत्वपूर्ण है, ताकि परिवर्तन को सही ढंग से पहचान सकें।

 

Question 7. 'तोर्लि' सूत्र की सोदाहरण व्याख्या कीजिए। उत्तरः यदि तवर्ग के किसी वर्ण के पश्चात् ल आए तो तवर्ग परसवर्ण ले में बदल जाता है; जैसे-उत् + लेखः = उल्लेखः, तद् + लयः = तल्लयः
Answer: लत्व सन्धि का सूत्र 'तोर्लि' है। इस सूत्र के अनुसार, यदि तवर्ग (त्, थ्, द्, ध्, न्) के किसी वर्ण के बाद 'ल्' आए, तो तवर्ग का वह वर्ण 'ल्' में बदल जाता है। यदि 'न्' के बाद 'ल्' आए, तो 'न्' अनुनासिक 'ल्' (ँल्) में बदलता है। उदाहरण:
उत् + लेखः = उल्लेखः (त् + ल = ल्ल)
तद् + लयः = तल्लयः (द् + ल = ल्ल)
In simple words: जब 'त' वर्ग के किसी अक्षर (जैसे त, द, न) के बाद 'ल' अक्षर आए, तो 'त' वर्ग का वह अक्षर 'ल' में बदल जाता है। अगर 'न' के बाद 'ल' आए तो 'न' अनुनासिक 'ल' बन जाता है।

🎯 Exam Tip: लत्व सन्धि में 'त्/द्' का 'ल्' में और 'न्' का 'ँल्' में परिवर्तन, दोनों नियमों को ध्यान में रखें।

 

Question 8. 'मोऽनुस्वारः सूत्र की सोदाहरण परिभाषा लिखिए।
Answer: अनुस्वार सन्धि का सूत्र 'मोऽनुस्वारः' है। इस सूत्र के अनुसार, यदि पदान्त 'म्' (किसी शब्द के अंत में आने वाला 'म्') के बाद कोई व्यंजन वर्ण आए, तो 'म्' अनुस्वार (ं) में बदल जाता है। उदाहरण:
कृष्णाम् + वन्दे = कृष्णं वन्दे
गृहम् + गच्छति = गृहं गच्छति
In simple words: जब किसी शब्द के आखिर में 'म्' हो और उसके बाद कोई भी व्यंजन अक्षर आए, तो वह 'म्' ऊपर बिंदी (अनुस्वार) में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: पदान्त 'म्' के बाद व्यंजन आने पर ही 'मोऽनुस्वारः' नियम लगता है; स्वर आने पर नहीं, इस भेद को स्पष्ट रखें।

 

Question 9. 'विसर्जनीयस्य सः' सूत्र की सोदाहरण व्याख्या कीजिए।
Answer: सत्व सन्धि का सूत्र 'विसर्जनीयस्य सः' है। इस सूत्र के अनुसार, यदि विसर्ग (ः) के बाद खर् प्रत्याहार (प्रत्येक वर्ग का पहला या दूसरा वर्ण, तथा श्, ष्, स्) का कोई वर्ण आए, तो विसर्ग 'स्' में बदल जाता है। उदाहरण:
नमः + ते = नमस्ते
नरः + चलति = नरश्चलति (यहाँ 'स्' के बाद 'च्' आने से श्चुत्व सन्धि से 'श्' भी हो जाता है)
In simple words: जब विसर्ग (दो बिंदियाँ) के बाद किसी वर्ग का पहला या दूसरा अक्षर या 'श', 'ष', 'स' आए, तो विसर्ग 'स' में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: सत्व सन्धि में विसर्ग का 'स्' में परिवर्तन और उसके बाद श्चुत्व या ष्टुत्व के नियम भी लग सकते हैं, इस क्रम को समझें।

 

Question 10. 'रोरि' सूत्र की सोदाहरण व्याख्या कीजिए।
Answer: विसर्ग लोप सन्धि का सूत्र 'रोरि' है। इस सूत्र के अनुसार, यदि 'र्' के बाद 'र्' आए, तो पहले वाले 'र्' का लोप हो जाता है और उसके पूर्ववर्ती (पहले के) 'अ', 'इ', 'उ' स्वर दीर्घ हो जाते हैं। उदाहरण:
हरिर् + रम्यः = हरीरम्यः (इ + र् + र = ई + र)
पुनर् + रमते = पुनारमते (अ + र् + र = आ + र)
In simple words: जब 'र' के बाद फिर से 'र' आए, तो पहला 'र' हट जाता है और उसके पहले वाला 'अ', 'इ' या 'उ' स्वर लंबा (दीर्घ) हो जाता है।

🎯 Exam Tip: 'रोरि' सन्धि में 'र' के लोप के साथ-साथ पूर्ववर्ती स्वर के दीर्घीकरण के नियम को समझना बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. निम्नलिखित शब्दों का सन्धि-विच्छेद करते हुए सन्धि के नियम/नाम का उल्लेख कीजिए।

सन्धिसन्धि-विग्रहसन्धि के नियम/नाम
जगदीशजगत् + ईशव्यंजन सन्धि
निश्छलमनिस् + छलम्विसर्जनीयस्य सः
सज्जनसत् + जनस्तोः श्चुना श्चुः (श्चुत्व सन्धि)/ व्यंजन
हरिश्चन्द्रहरिस् + चन्द्रःविसर्जनीयस्य सः
कविर्गच्छतिकविः + गच्छतिरोडसुपि
शिवोऽर्च्यःशिवस् + अर्घ्यःसूत्र हशि च, अतोरोरप्लुतादच्लुते
गौश्चरतिगोस् + चरतिविसर्जनीयस्य सः
रामश्चिनोतिरामस्+ चिनोतिस्तोः श्चुना श्चुः (श्चुत्व सन्धि)
सच्चरितम्सत् + चरितम्स्तोः श्चुना श्चुः (श्चुत्व सन्धि)
रामष्टीकतेरामस् + टीकतेष्टुनाष्टुः ष्टुत्व सन्धि
रमेशरमा + ईशआद्गुणः
नायकःनै + अकःएचोऽयवायावः/अयादि
धनञ्जयःधनम् + जयःपरसवर्णः
पूर्णश्चन्द्रःपूर्णः + चन्द्रःविसर्जनीयस्य सः/सत्व
योद्धायोध् + धाझलां जश् झशि/जश्त्व
दोग्धादोध् + धाझलां जश् झशि/जश्त्व
वधूत्सववधू + उत्सवःअकः सवर्णे दीर्घः दीर्घ
नाविकःनौ + इकःएचोऽयवायावः/अयादि
नरेन्द्रःनर + इन्द्रःआद्गुणः/गुण
नान्यत्रन + अन्यत्रअकः सवर्णे दीर्घः दीर्घ
रमेशःरमा + ईशःआद्गुणः/गुण
प्रेजतेप्र + एजतेएङि पररूपम्/पररूप
हरीरम्यःहरिर् + रम्यःरोरि/विसर्ग लोप
विष्णोऽवविष्णो + अवएङ पदान्तादति/पूर्वरूप
सच्चयनम्सत् + चयनम्स्तोः श्चुना श्चुः/श्चुत्व
तट्टीकातत् + टीकाष्टुनाष्टुः/ष्टुत्व
यद्यपियदि + अपिइकोयणचि/यण्
उल्लेखःउद् + लेखःतोर्लि/लत्व
उपोषतिउप + ओषतिवृद्धिरेचि/वृद्धि
देवोवन्द्यःदेवः + वन्द्यःहशि च/उत्व
कवेरभावात्कवेः+ आभावात्ससजुषो रुः/रुत्व
हरिश्चन्द्रःहरिः + चन्द्रःविसर्जनीयस्य सः/सत्व तथा स्तोः श्चुना श्चुः/श्चुत्व
पुनारमतेपुनर् + रमतेरोरि/विसर्ग लोप
रामषष्ठःरामस् + षष्ठःष्टुनाष्टुः/ष्टुत्व
त्वङ्करोषित्वम् + करोषिअनुस्वारस्य यपि परसवर्णः/परसवर्ण
हरेऽवहरे + अवएङ पदान्तादति/पूर्वरूप
सच्चित्सत् + चित्स्तोः श्चुना श्चुः श्चुत्व
चक्रिण्ढौकसेचक्रिन् + ढौकसेष्टुनाष्टुः/ष्टुत्व
विद्वाँल्लिखतिविद्वान् + लिखतितोर्लि/लत्व
हरेरमणम्हरेर् + रमणम्रोरि/विसर्ग लोप
विपत्कालःविपद् + कालःखरि च/चर्व
सम्पत्समंयःसम्पद् + समयःखरि च/चर्व
शिवोऽचर्यःशिवो + अर्घ्यःएङ पदान्तादति/पूर्वरूप
मात्राज्ञामातृ + आज्ञाइकोयणचि/यण्
उल्लिखितम्उद् + लिखितम्तोर्लि/लत्व
पावनम्पौ + अनम्एचोऽयवायावः/अयादि
गिरीशःगिरि + ईशःअकः सवर्णे दीर्घः दीर्घ
विद्यार्थीविद्या + अर्थीअकः सवर्णे दीर्घः दीर्घ
राजर्षिःराज + ऋषिःआद्गुणः/गुण
गायकःगै + अकःएचोऽयवायावः/अयादि
हरेऽत्रहरे + अत्रएङ पदान्तादति/पूर्वरूप
लब्धःलभ् + धःझलां जश् झशि/जश्त्व
गृहं गच्छतिगृहम् + गच्छतिमोऽनुस्वारः / अनुस्वार
हरिश्चरतिहरिः + चरतिविसर्जनीयस्य सः/सत्व तथा स्तोः श्चुना श्चुः/श्चुत्व

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Are the Sahityik Hindi UP Board solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Sahityik Hindi संधि as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sahityik Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Sahityik Hindi संधि will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 12 Sahityik Hindi संधि in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Sahityik Hindi. You can access UP Board Solutions Class 12 Sahityik Hindi संधि in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Sahityik Hindi UP Board solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Sahityik Hindi संधि in printable PDF format for offline study on any device.