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Class 12 Sahityik Hindi धातु रूप UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Sahityik Hindi धातु रूप
परिभाषा
क्रिया के मूल रूप को 'धातु' कहते हैं; जैसे- पठ, गम्, लिखू, नम् आदि । लकार की परिभाषा संस्कृत भाषा में काल को 'लकार' कहते हैं, जैसे-वर्तमान काल-लेट् लकार, भूतकाल-लङ्ग लकार, भविष्यत् काल तृट् लकार आदि ।लकार के भेद
संस्कृत में दस लकार होते हैं।1. लट् लकार
2. लङ्ङ्ग लकार
3. तृट् लकार
4. लोट् लकार
5. विधिलिङ्ग लकार
6. लुट् लकार
7. लिट् लकार
8. लुङ्ङ्ग लकार
9. लेट् लकार
10. नृङ्ग लकार
नोट
पाठ्यक्रम के अनुसार पाँच (लट्, लृट्, लोट्, विधिलिङ्ग एवं लङ् लकार) लकारों के बारे में ही चर्चा करेंगे। संस्कृत में जितने शब्द होते हैं, उन सभी शब्दों को कारक और वचन के अनुसार तो प्रयोग किया ही जाता है, इसके अतिरिक्त संस्कृत के समस्त शब्दों को पुरुष में भी बाँटा (विभाजित) जाता है। 'पुरुष' शब्द का अर्थ 'व्यक्ति से है अर्थात् कर्ता (क्रिया को करने वाला) इस प्रकार संस्कृत के सभी शब्दों को तीन प्रकार के शब्दों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार हैं1. प्रथम पुरुष जिसके विषय में बात की जाती है। (जो प्रत्यक्ष न हो) उसे प्रथम पुरुष कहते हैं, जैसे वह, वे दोनों, वे सब/ ये ही प्रथम पुरुष के कर्ता हैं।
2. मध्यम पुरुष जो बात करने का माध्यम होता है, उसे मध्यम पुरुष कहते हैं; जैसे-तुम, तुम दोनों, तुम सब/ये ही मध्यम पुरुष के कर्ता है।
3. उत्तम पुरुष किसी विषय पर स्वयं बोलने वाले को उत्तम पुरुष कहते हैं; जैसे मैं, हम दोनों, हम सब/ये ही उत्तम पुरुष के कर्ता हैं।
धातु-भेद
अर्थ-भेद के आधार पर धातु के निम्न तीन भेद होते हैं।1. परस्मैपदी जिन धातुओं के अन्त में ति, तः, अन्ति आदि प्रत्यय लगते हैं, उन्हें 'परस्मैपदी' धातु कहते हैं। नोट पाठयक्रम के अनुसार, परस्मैपदी के अन्तर्गत स्था, पा, नी, कृ, चुर एवं दा 'सम्मिलित किए गए हैं।
2. आत्मनेपदी जिन धातुओं के अन्त में ते, एते, अन्ते आदि प्रत्यय लगते हैं, उन्हें आत्मनेपदी धातु कहते हैं; जैसे-सेवते, सेवेते, सेवन्ते
3. भयपदी जिन धातुओं के रूप दोनों पदों (परस्मैपद एवं आत्मनेपद) में चलते हैं, उन्हें उभयपदी धातु कहते हैं, जैसे 'याच' धातु परस्मैपद में रूप-याचति याचतः याचन्ति 'याच' धातु आत्मनेपदी में रूप-याचते याचेते याचन्ते
Question 1. 'दा' धातु लुट्लकार प्रथम पुरुष, द्विवचन का रूप है।
(क) दास्यतः
(ख) दत्तः
(ग) दास्यावः
(घ) दास्यथः
Answer: (क) दास्यतः
In simple words: 'दा' धातु का लुट्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन का रूप 'दास्यतः' होता है, जो भविष्य काल में दो के लिए देने की क्रिया को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: लुट्लकार भविष्य काल को दर्शाता है। 'दा' धातु के प्रथम पुरुष, द्विवचन के रूप को सही से पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 2. 'नेष्यावः' रूप है 'नी' धातु का
(क) लट्, उत्तम, द्विवचन
(ख) लोट्, मध्यम, द्विवचन
(ग) लृट्, मध्यम, बहुवचन
(घ) लृट्, उत्तम, द्विवचन
Answer: (घ) लृट्, उत्तम, द्विवचन
In simple words: 'नेष्यावः' रूप 'नी' धातु का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के उत्तम पुरुष के द्विवचन में बनता है, जिसका अर्थ है 'हम दोनों ले जाएंगे'।
🎯 Exam Tip: 'लृट्' लकार भविष्य काल की क्रियाओं को व्यक्त करता है। उत्तम पुरुष और द्विवचन की पहचान क्रिया के अंत में 'आवः' से होती है।
Question 3. नयतः रूप है 'नी' धातु का
(क) लट्, प्रथम, द्विवचन
(ख) लङ्, मध्यम, एकवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, एकवचन,
(घ) लोट्, उत्तम, एकवचन
Answer: (क) लट्, प्रथम, द्विवचन
In simple words: 'नयतः' रूप 'नी' धातु (ले जाना) का लट् लकार (वर्तमान काल) के प्रथम पुरुष के द्विवचन में है, जिसका अर्थ है 'वे दोनों ले जाते हैं'।
🎯 Exam Tip: लट् लकार वर्तमान काल को इंगित करता है। प्रथम पुरुष द्विवचन की पहचान 'तः' प्रत्यय से होती है।
Question 4. 'तिष्ठ' रूप है 'स्था' धातु का
(क) लट्, प्रथम पुरुष, एकवचन
(ख) लोट्, मध्यम पुरुष, एकवचन
(ग) विधिलिङ, उत्तम पुरुष, एकवचन
(घ) लङ, उत्तम पुरुष, एकवचन
Answer: (ख) लोट्, मध्यम पुरुष, एकवचन
In simple words: 'तिष्ठ' रूप 'स्था' धातु (ठहरना) का लोट् लकार (आज्ञार्थक) के मध्यम पुरुष के एकवचन में है, जिसका अर्थ है 'तुम ठहरो'।
🎯 Exam Tip: लोट् लकार आज्ञा या प्रार्थना व्यक्त करता है। मध्यम पुरुष एकवचन में कुछ धातुओं के रूप बिना किसी प्रत्यय के मूल धातु के समान होते हैं।
Question 5. 'पास्यामः' रूप है-'पिबु धातु का
(क) लट्, उत्तम, बहुवचन
(ख) लृट्, उत्तम, बहुवचन
(ग) लङ्, मध्यम, एकवचन
(घ) लोट्, प्रथम, बहुवचन
Answer: (ख) लृट्, उत्तम, बहुवचन
In simple words: 'पास्यामः' रूप 'पिब्' धातु (पीना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के उत्तम पुरुष के बहुवचन में है, जिसका अर्थ है 'हम सब पिएंगे'।
🎯 Exam Tip: 'लृट्' लकार भविष्य काल की क्रिया को दर्शाता है। उत्तम पुरुष बहुवचन की पहचान '-स्यामः' प्रत्यय से होती है।
Question 6. 'एधि' रूप है 'अस्' धातु का
(क) लट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लडु, उत्तम, एकवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, बहुवचन
(घ) लोट्, मध्यम, एकवचन
Answer: (घ) लोट्, मध्यम, एकवचन
In simple words: 'एधि' रूप 'अस्' धातु (होना) का लोट् लकार (आज्ञार्थक) के मध्यम पुरुष के एकवचन में है, जिसका अर्थ है 'तुम हो जाओ'।
🎯 Exam Tip: 'अस्' धातु के लोट् लकार के रूप अनियमित होते हैं। मध्यम पुरुष एकवचन में 'एधि' इसका विशिष्ट रूप है।
Question 7. 'स्था' धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) तिष्ठेयुः
(ख) तिष्ठे:
(ग) तिष्ठेव
(घ) तिष्ठेयम्
Answer: (ख) तिष्ठे:
In simple words: 'स्था' धातु का विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप 'तिष्ठे:' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम्हें ठहरना चाहिए'।
🎯 Exam Tip: विधिलिङ्लकार 'चाहिए' या 'संभाव्यता' का अर्थ देता है। मध्यम पुरुष एकवचन का प्रत्यय सामान्यतः '-एः' या '-इः' होता है।
Question 8. 'कृ' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) करोतु
(ख) कुरु
(ग) कुरुत
(घ) अकरोत्
Answer: (ख) कुरु
In simple words: 'कृ' धातु (करना) का लोट्लकार (आज्ञार्थक) के मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप 'कुरु' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम करो'।
🎯 Exam Tip: 'कृ' धातु के लोट्लकार के रूप थोड़े अनियमित होते हैं। मध्यम पुरुष एकवचन में यह 'कुरु' बनता है।
Question 9. 'स्था' धातु विधिलिङ्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा
(क) तिष्ठामि
(ख) तिष्ठ
(ग) स्थास्यति
(घ) तिष्ठेम
Answer: (घ) तिष्ठेम
In simple words: 'स्था' धातु का विधिलिङ्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन का रूप 'तिष्ठेम' होता है, जिसका अर्थ है 'हमें ठहरना चाहिए'।
🎯 Exam Tip: विधिलिङ्लकार में उत्तम पुरुष बहुवचन का प्रत्यय '-एम' होता है, जो धातु के साथ जुड़कर 'तिष्ठेम' बनाता है।
Question 10. 'कृ' धातु लोट्, मध्यम, द्विवचन का रूप होगा।
(क) कुरुताम्
(ख) कुरुथः
(ग) कुरुत
(घ) कुरुतम्
Answer: (घ) कुरुतम्
In simple words: 'कृ' धातु (करना) का लोट्लकार (आज्ञार्थक) के मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप 'कुरुतम्' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम दोनों करो'।
🎯 Exam Tip: लोट्लकार के मध्यम पुरुष, द्विवचन में 'तम्' प्रत्यय का प्रयोग होता है, जो 'कृ' धातु के साथ जुड़कर 'कुरुतम्' बनाता है।
Question 11. 'भविष्यथ' रूप है 'अस्' धातु का
(क) लोट्, प्रथम, द्विवचन
(ख) विधिलिङ, उत्तम, एकवचन
(ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
(घ) लट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन
Answer: (ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
In simple words: 'भविष्यथ' रूप 'अस्' धातु (होना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के मध्यम पुरुष के द्विवचन में है, जिसका अर्थ है 'तुम दोनों होगे'।
🎯 Exam Tip: लृट् लकार भविष्य काल को दर्शाता है। मध्यम पुरुष द्विवचन में 'थः' या 'स्यथः' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
Question 12. 'कृ' धातु लृट्, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप होगा
(क) करोति
(ख) करिष्यथः
(ग) करिष्यामि
(घ) करिष्यत
Answer: (ख) करिष्यथः
In simple words: 'कृ' धातु (करना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप 'करिष्यथः' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम दोनों करोगे'।
🎯 Exam Tip: लृट् लकार में मध्यम पुरुष द्विवचन का प्रत्यय '-स्यथः' होता है। 'कृ' धातु में यह 'करिष्यथः' बनता है।
Question 13. 'चोरयाव' रूप है 'चुर्' (चुराना) धातु का
(क) लट्, प्रथम, द्विवचन
(ख) विधिलिड्., मध्यम, एकवचन
(ग) लोट्, उत्तम, द्विवचन
(घ) लङ्, उत्तम, बहुवचन
Answer: (ग) लोट्, उत्तम, द्विवचन
In simple words: 'चोरयाव' रूप 'चुर्' धातु (चुराना) का लोट् लकार (आज्ञार्थक) के उत्तम पुरुष के द्विवचन में है, जिसका अर्थ है 'हम दोनों चुराएं' (या 'हम दोनों को चुराना चाहिए')।
🎯 Exam Tip: लोट् लकार उत्तम पुरुष द्विवचन का प्रत्यय '-आव' होता है, जो 'चुर्' धातु के साथ 'चोरयाव' बनाता है।
Question 14. 'स्था' धातु लुट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा
(क) स्थास्यति
(ख) स्थास्यावः
(ग) स्थास्यथ
(घ) स्थास्यामि
Answer: (ग) स्थास्यथ
In simple words: 'स्था' धातु (ठहरना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप 'स्थास्यथ' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम सब ठहरोगे'।
🎯 Exam Tip: लृट् लकार में मध्यम पुरुष बहुवचन का प्रत्यय '-स्यथ' होता है, जिससे 'स्थास्यथ' बनता है।
Question 15. 'अस्' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा
(क) स्थः
(ख) स्त
(ग) स्थ
(घ) भविष्यथ
Answer: (घ) भविष्यथ
In simple words: 'अस्' धातु (होना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप 'भविष्यथ' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम सब होगे'।
🎯 Exam Tip: 'अस्' धातु के लृट् लकार के रूप 'भू' धातु के समान होते हैं। मध्यम पुरुष बहुवचन में '-स्यथ' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
Question 16. 'अतिष्ठः' रूप है 'स्था' थातु का
(क) लृट्, प्रथम, एकवचन
(ख) लोट्, मध्यम, बहुवचन
(ग) विधिलङ, उत्तम, एकवचन
(घ) लङ्, मध्यम, एकवचन
Answer: (घ) लङ्, मध्यम, एकवचन
In simple words: 'अतिष्ठः' रूप 'स्था' धातु (ठहरना) का लङ् लकार (भूतकाल) के मध्यम पुरुष के एकवचन में है, जिसका अर्थ है 'तुम ठहरे'।
🎯 Exam Tip: लङ् लकार भूतकाल की क्रिया को दर्शाता है और इसके रूपों में अक्सर 'अ-' उपसर्ग होता है। मध्यम पुरुष एकवचन का प्रत्यय '-ः' या '-अः' होता है।
Question 17. 'आदः' रूप है 'अद्' धातु का
(क) लट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) बृद्, प्रथम, एकवचन
(ग) लङ्, मध्यम, एकवचन
(घ) लट्, प्रथम, द्विवचन
Answer: (घ) लट्, प्रथम, द्विवचन
In simple words: 'आदः' रूप 'अद्' धातु (खाना) का लट् लकार (वर्तमान काल) के प्रथम पुरुष के द्विवचन में है, जिसका अर्थ है 'वे दोनों खाते हैं'।
🎯 Exam Tip: 'अद्' धातु के लट् लकार के रूप थोड़े अनियमित होते हैं। प्रथम पुरुष द्विवचन में यह 'आदः' बनता है।
Question 18. 'चुर्' धातु लुट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) चोरयति
(ख) चोरयिष्यति
(ग) अचोरयत
(घ) चोरयतु
Answer: (ख) चोरयिष्यति
In simple words: 'चुर्' धातु (चुराना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप 'चोरयिष्यति' होता है, जिसका अर्थ है 'वह चुराएगा'।
🎯 Exam Tip: लृट् लकार भविष्य काल को दर्शाता है। प्रथम पुरुष एकवचन में '-स्यति' या '-यिष्यति' प्रत्यय का उपयोग होता है।
Question 19. 'पा' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा
(क) पिबथ
(ख) पिविष्यथ
(ग) पास्यथ
(घ) पास्यन्ति
Answer: (ग) पास्यथ
In simple words: 'पा' धातु (पीना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप 'पास्यथ' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम सब पियोगे'।
🎯 Exam Tip: 'पा' धातु भविष्यत् काल में 'पा' रूप लेता है और मध्यम पुरुष बहुवचन में '-स्यथ' प्रत्यय के साथ 'पास्यथ' बनता है।
Question 20. 'दा' धातु लृट्लकार प्रथम पुरुष बहुवचन का रूप होगा।
(क) देहि
(ख) अददुः
(ग) दास्यन्ति
(घ) ददाति
Answer: (ग) दास्यन्ति
In simple words: 'दा' धातु (देना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के प्रथम पुरुष, बहुवचन का रूप 'दास्यन्ति' होता है, जिसका अर्थ है 'वे सब देंगे'।
🎯 Exam Tip: लृट् लकार में प्रथम पुरुष बहुवचन का प्रत्यय '-स्यन्ति' होता है, जो 'दा' धातु के साथ 'दास्यन्ति' बनाता है।
Question 21. 'कृ' धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप होगा
(क) कुर्याताम्
(ख) कुर्याम्
(ग) कुर्यातम्
(घ) कुर्यात
Answer: (ग) कुर्यातम्
In simple words: 'कृ' धातु (करना) का विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप 'कुर्यातम्' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम दोनों को करना चाहिए'।
🎯 Exam Tip: विधिलिङ्लकार के मध्यम पुरुष द्विवचन में प्रत्यय '-यात्म्' होता है, जो 'कृ' धातु के साथ 'कुर्यातम्' बनता है।
Question 22. 'भू' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) भवताम्
(ख) भव
(ग) भवन्तु
(घ) भवानि
Answer: (ख) भव
In simple words: 'भू' धातु (होना) का लोट्लकार (आज्ञार्थक) के मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप 'भव' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम हो जाओ'।
🎯 Exam Tip: लोट्लकार मध्यम पुरुष एकवचन में धातु का मूल रूप या बिना किसी प्रत्यय के रूप ही प्रयोग होता है, जैसे 'भू' से 'भव'।
Question 23. 'पठतु' रूप है 'पठ' (पढ़ना) धातु का
(क) लट्, प्रथम, एकवचन
(ख) लोट्, प्रथम, एकवचन
(ग) लोट्, मध्यम, द्विवचन,
(घ) लृट्, उत्तम, एकवचन
Answer: (ख) लोट्, प्रथम, एकवचन
In simple words: 'पठतु' रूप 'पठ' धातु (पढ़ना) का लोट् लकार (आज्ञार्थक) के प्रथम पुरुष के एकवचन में है, जिसका अर्थ है 'वह पढ़े'।
🎯 Exam Tip: लोट्लकार प्रथम पुरुष एकवचन का प्रत्यय '-तु' होता है, जिससे 'पठतु' बनता है।
Question 24. 'पा' (पिब) धातु लट्लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन का रूप हैं।
(क) पिबसि
(ख) पिबामि
(ग) पिबन्ति
(घ) पिबति
Answer: (ग) पिबन्ति
In simple words: 'पा' धातु (पीना) का लट् लकार (वर्तमान काल) के प्रथम पुरुष, बहुवचन का रूप 'पिबन्ति' होता है, जिसका अर्थ है 'वे सब पीते हैं'।
🎯 Exam Tip: लट् लकार प्रथम पुरुष बहुवचन का प्रत्यय '-न्ति' होता है, जो 'पिब' धातु के साथ 'पिबन्ति' बनाता है।
Question 25. 'स्थास्यथः' रूप है 'स्था' धातु का
(क) विधिलिङ, मध्यम, बहुवचन
(ख) लोट् प्रथम, एकवचन
(ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
(घ) लट्, प्रथम, बहुवचन
Answer: (ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
In simple words: 'स्थास्यथः' रूप 'स्था' धातु (ठहरना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के मध्यम पुरुष के द्विवचन में है, जिसका अर्थ है 'तुम दोनों ठहरोगे'।
🎯 Exam Tip: लृट् लकार में मध्यम पुरुष द्विवचन का प्रत्यय '-स्यथः' होता है।
Question 26. 'ददाम' रूप है 'दा' धातु का
(क) लोट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन
(ख) ट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन
(ग) लृट्लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन
(घ) विधिलिङ्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
Answer: (क) लोट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन
In simple words: 'ददाम' रूप 'दा' धातु (देना) का लोट्लकार (आज्ञार्थक) के उत्तम पुरुष के बहुवचन में है, जिसका अर्थ है 'हम सब दें'।
🎯 Exam Tip: 'दा' धातु के लोट्लकार उत्तम पुरुष बहुवचन का रूप 'ददाम' होता है।
Question 27. 'तिष्ठेव' रूप है 'स्था' धातु का
(क) विधिलिङ्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन
(ख) विधिलिङ्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन
(ग) लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन
(घ) लोट्लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन
Answer: (ख) विधिलिङ्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन
In simple words: 'तिष्ठेव' रूप 'स्था' धातु (ठहरना) का विधिलिङ्लकार (चाहिए अर्थ में) के उत्तम पुरुष के द्विवचन में है, जिसका अर्थ है 'हम दोनों को ठहरना चाहिए'।
🎯 Exam Tip: विधिलिङ्लकार उत्तम पुरुष द्विवचन का प्रत्यय '-एव' होता है, जो 'तिष्ठ' धातु के साथ 'तिष्ठेव' बनाता है।
Question 28. 'भू' (होना) धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) भवति
(ख) भवसि
(ग) भवामि
(घ) भवामः
Answer: (ख) भवसि
In simple words: 'भू' धातु (होना) का लट् लकार (वर्तमान काल) के मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप 'भवसि' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम होते हो'।
🎯 Exam Tip: लट् लकार मध्यम पुरुष एकवचन का प्रत्यय '-सि' होता है, जो 'भू' धातु के 'भव' रूप के साथ 'भवसि' बनाता है।
Question 29. 'नी' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) नय
(ख) नयत
(ग) नयतु
(घ) नयति
Answer: (क) नय
In simple words: 'नी' धातु (ले जाना) का लोट्लकार (आज्ञार्थक) के मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप 'नय' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम ले जाओ'।
🎯 Exam Tip: लोट्लकार मध्यम पुरुष एकवचन में धातु का मूल रूप 'नय' ही होता है।
Question 30. 'कुर्मः' रूप है 'कृ' धातु का
(क) लङ्, उत्तम, बहुवचन
(ख) लृट्, मध्यम, एकवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, द्विवचन
(घ) लट्, उत्तम, बहुवचन
Answer: (घ) लट्, उत्तम, बहुवचन
In simple words: 'कुर्मः' रूप 'कृ' धातु (करना) का लट् लकार (वर्तमान काल) के उत्तम पुरुष के बहुवचन में है, जिसका अर्थ है 'हम सब करते हैं'।
🎯 Exam Tip: लट् लकार उत्तम पुरुष बहुवचन का प्रत्यय '-मः' होता है, जो 'कृ' धातु के साथ 'कुर्मः' बनाता है।
Question 31. 'कृ' धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा।
(क) कुरुथ
(ख) कुरुत
(ग) कुर्यात
(घ) कुर्यात्
Answer: (ग) कुर्यात
In simple words: 'कृ' धातु (करना) का विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप 'कुर्यात' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम सबको करना चाहिए'।
🎯 Exam Tip: विधिलिङ्लकार मध्यम पुरुष बहुवचन का प्रत्यय '-यात' होता है, जो 'कृ' धातु के साथ 'कुर्यात' बनाता है।
Question 32. 'पिबामः' रूप है 'पा' (पिब्) धातु का
(क) लृट्, उत्तम, बहुवचन
(ख) लोट्, मध्यम, बहुवचन
(ग) लङ्, प्रथम, बहुवचन
(घ) लट्, उत्तम, बहुवचन
Answer: (घ) लट्, उत्तम, बहुवचन
In simple words: 'पिबामः' रूप 'पा' धातु (पीना) का लट् लकार (वर्तमान काल) के उत्तम पुरुष के बहुवचन में है, जिसका अर्थ है 'हम सब पीते हैं'।
🎯 Exam Tip: लट् लकार उत्तम पुरुष बहुवचन का प्रत्यय '-आमः' होता है, जो 'पिब्' धातु के साथ 'पिबामः' बनाता है।
Question 33. 'अकरोत्' रूप होता है 'कृ' धातु का
(क) लङ्, प्रथम, एकवचन
(ख) विधिलिङ, मध्यम, द्विवचन
(ग) लृट्, उत्तम, बहुवचन
(घ) लट्, प्रथम, एकवचन
Answer: (क) लङ्, प्रथम, एकवचन
In simple words: 'अकरोत्' रूप 'कृ' धातु (करना) का लङ् लकार (भूतकाल) के प्रथम पुरुष के एकवचन में है, जिसका अर्थ है 'उसने किया'।
🎯 Exam Tip: लङ् लकार भूतकाल को दर्शाता है और इसमें 'अ-' उपसर्ग होता है। प्रथम पुरुष एकवचन का प्रत्यय '-त्' होता है।
Question 34. 'नयतम्' रूप है 'नी' धातु का
(क) लोट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लट्, मध्यम, बहुवचन
(ग) लृद्, प्रथम, एकवचन
(घ) लोट्, प्रथम, द्विवचन
Answer: (क) लोट्, मध्यम, द्विवचन
In simple words: 'नयतम्' रूप 'नी' धातु (ले जाना) का लोट् लकार (आज्ञार्थक) के मध्यम पुरुष के द्विवचन में है, जिसका अर्थ है 'तुम दोनों ले जाओ'।
🎯 Exam Tip: लोट् लकार मध्यम पुरुष द्विवचन का प्रत्यय '-तम्' होता है, जो 'नय' धातु के साथ 'नयतम्' बनाता है।
Question 35. 'स्युः' रूप है 'अस्' धातु का
(क) लोट्, मध्यम, एकवचन
(ख) लृट्, उत्तम, द्विवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, बहुवचन
(घ) लङ्, प्रथम, एकवचन
Answer: (ग) विधिलिङ, प्रथम, बहुवचन
In simple words: 'स्युः' रूप 'अस्' धातु (होना) का विधिलिङ्लकार (चाहिए अर्थ में) के प्रथम पुरुष के बहुवचन में है, जिसका अर्थ है 'वे सब हों' या 'उन्हें होना चाहिए'।
🎯 Exam Tip: 'अस्' धातु के विधिलिङ्लकार के रूप अनियमित होते हैं। प्रथम पुरुष बहुवचन में यह 'स्युः' बनता है।
Question 36. 'नयानि' रूप है 'नी' धातु का
(क) लट्, प्रथम, एकवचन
(ख) लोट्, उत्तम, एकवचन
(ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
(घ) लोट्, मध्यम, बहुवचन
Answer: (ख) लोट्, उत्तम, एकवचन
In simple words: 'नयानि' रूप 'नी' धातु (ले जाना) का लोट् लकार (आज्ञार्थक) के उत्तम पुरुष के एकवचन में है, जिसका अर्थ है 'मैं ले जाऊं'।
🎯 Exam Tip: लोट् लकार उत्तम पुरुष एकवचन का प्रत्यय '-आनि' होता है, जो 'नय' धातु के साथ 'नयानि' बनाता है।
Question 37. 'अपिबत' रूप है 'पा' धातु का
(क) लङ्, प्रथम, एकवचन
(ख) लङ्, मध्यम, बहुवचन
(ग) विधिलिङ, उत्तम, एकवचन
(घ) लट्, प्रथम, द्विवचन
Answer: (क) लङ्, प्रथम, एकवचन
In simple words: 'अपिबत' रूप 'पा' धातु (पीना) का लङ् लकार (भूतकाल) के प्रथम पुरुष के एकवचन में है, जिसका अर्थ है 'उसने पिया'।
🎯 Exam Tip: लङ् लकार भूतकाल को दर्शाता है और इसमें 'अ-' उपसर्ग होता है। प्रथम पुरुष एकवचन में '-त्' प्रत्यय होता है।
Question 38. 'अनयः रूप है 'नी' धातु का
(क) लट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लङ्, मध्यम, एकवचन
(ग) लङ्, प्रथम, बहुवचन
(घ) लृट्, प्रथम, एकवचने
Answer: (ख) लङ्, मध्यम, एकवचन
In simple words: 'अनयः' रूप 'नी' धातु (ले जाना) का लङ् लकार (भूतकाल) के मध्यम पुरुष के एकवचन में है, जिसका अर्थ है 'तुम ले गए'।
🎯 Exam Tip: लङ् लकार मध्यम पुरुष एकवचन में 'अ-' उपसर्ग के साथ '-अः' प्रत्यय जुड़ता है, जैसे 'अनयः'।
Question 39. 'स्था' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप होगा
(क) स्थास्यथः
(ख) स्थास्यतः
(ग) तिष्ठथः
(घ) तिष्ठतम्
Answer: (क) स्थास्यथः
In simple words: 'स्था' धातु (ठहरना) का लृट् लकार (भविष्यत् काल) के मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप 'स्थास्यथः' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम दोनों ठहरोगे'।
🎯 Exam Tip: लृट् लकार मध्यम पुरुष द्विवचन का प्रत्यय '-स्यथः' होता है।
Question 40. 'अतिष्ठाव' रूप है 'स्था' धातु का
(क) लोट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लङ्, उत्तम, द्विवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, बहुवचन
(घ) लृटु, मध्यम, एकवचन
Answer: (ख) लङ्, उत्तम, द्विवचन
In simple words: 'अतिष्ठाव' रूप 'स्था' धातु (ठहरना) का लङ् लकार (भूतकाल) के उत्तम पुरुष के द्विवचन में है, जिसका अर्थ है 'हम दोनों ठहरे'।
🎯 Exam Tip: लङ् लकार उत्तम पुरुष द्विवचन में 'अ-' उपसर्ग के साथ '-आव' प्रत्यय जुड़ता है, जैसे 'अतिष्ठाव'।
Question 41. निम्नलिखित धातुओं के यथानिर्देश रूप लिखिए।'पा' (पिब) धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = पिबामः
'नी' धातु लट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = नयामः
'पा' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = पिबत
'दा' धातु लुट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = दास्यथः
'नी' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = नय, नयतात्
'दा' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = देहि
'कृ' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = अकुतम्
'दा' धातु लृट्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = दत्तः
'पा' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = पिबावः
'नी' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = नयावः।
'दा' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = दत्त
'चुर' धातु लृट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन = अचोरयत्
'नी' धातु लोट्लकार' मध्यम पुरुष, बहुवचने = नयत
'कृ' धातु 'लोट्लकार' मध्यम पुरुष, बहुवचन = कुरूत
'पा' धातु 'लृट्लकार' मध्यम पुरुष, द्विवचन = पिबतम्
'दा' धातु 'लृट्लकार' मध्यम पुरुष, द्विवचन = अदत्तम्
'चुर' धातु 'लृट्लकार' मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप लिखिए = चोरयसि
'स्था' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = तिष्ठथ
'कृ' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = कृथ
'नी' धातु लुट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = नेष्यामः
'कृ' धातु लुट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = करिष्यम्
'मा' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = अपिषाव
'अस्' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = आस्थ
'स्था' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = तिष्ठतम्
'नी' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = नयतम्
'या' धातु विधिलिङ् लकार, मध्यम पुरुष, द्विवधन = पिबेतम्
'नी' धातु विधिलिङ् लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = नयेतम्
'कृ' धातु लोट्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = कुरुताम्
दा' धातु लोट्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = दत्ताम् ।
'दा' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = दोहि
'पा' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = पिब
'स्था' धातु लृट्लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठन् ।
'दा' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = देहि, दत्तात् ।
'नी' धातु लृट्लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = अनयन् ।
'दा' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = अदम्
'स्था' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = अतिष्ठतम्
'चुर्' धातु लृट्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = चोरयतः
'स्था' धातु लट्लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = तिष्ठन्ति
'दा' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = दास्यावः
'स्था' धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = तिष्ठे:
'पा' (पिब) धातु लृट्लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = पिबन्ति
'कृ' धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = कुर्यात
'ढा' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = अढद्म
'स्था' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = तिष्ठ
'स्था' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठत
'दा' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = दाः
'नी' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = नयस
'स्था' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = स्थास्यावः
'नी' धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = नयेत
'स्था' धातु लुट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठाम
'दा' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = दास्यामः
'स्था' लृट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठाम
'पा' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन = पिबामि
'दा' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = अददाः
'नी' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = नयथ :
'चुर' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = चोरय
'स्था' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन = तिष्ठामि.
'स्था' धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = तिष्ठेत
'पा' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = पिब
'नी' धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = नयेः
'पा' धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = पास्यथ
'दा' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन = अददाम्।
'दा' धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = अदद्वः
'पठ' धातु लृट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन = पठिष्यति
'कृ' धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = कुरु कुरुताम्
Answer: उपर्युक्त सभी धातु रूपों का सही पदनिर्देशन किया गया है।
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न धातुओं के विभिन्न लकारों, पुरुषों और वचनों में सही रूपों की पहचान और लेखन पर केंद्रित है, जो संस्कृत व्याकरण का एक मूलभूत हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: धातु रूपों को याद करते समय, लकारों (काल और विधि), पुरुषों (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) के प्रत्ययों पर ध्यान दें। अनियमित धातुओं के रूपों को विशेष रूप से याद करें।
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