UP Board Solutions Class 12 Psychology Chapter 12 Natural Disasters

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Class 12 Psychology Chapter 12 प्राकृतिक आपदाएं UP Board Solutions PDF

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. आपदाओं से आप क्या समझते हैं? आपदाओं के विभिन्न प्रकारों का सामान्य परिचय दीजिए।
Answer: इस जगत में घटित होने वाली असंख्य घटनाओं की निरन्तरता ही जीवन है। घटनाएँ असंख्य प्रकार की होती हैं। कुछ घटनाएँ सामान्य जीवन की प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होने में सहायक होती हैं, जबकि कुछ अन्य घटनाएँ बाधक होती हैं। सामान्य जीवन की गति को अवरुद्ध करने वाली घटनाओं को हम दुर्घटना की श्रेणी में रखते हैं। जब कुछ दुर्घटनाएँ व्यापक तथा विकराल रूप में घटित होती हैं तो उन्हें हम ‘आपदा’ या ‘विपत्ति’ कहते हैं। ये आपदाएँ अचानक आती हैं और इनके कारण बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि होती है। सामान्य रूप से जब गम्भीर आपदा या विपत्ति की बात की जाती है तो हमारा आशय मुख्य रूप से उन प्राकृतिक घटनाओं से होता है जो जनजीवन एवं सम्पत्ति आदि पर गम्भीर, प्रतिकूल और विनाशकारी प्रभाव डालती हैं। प्राकृतिक आपदाओं के मुख्य रूप या प्रकार हैं - भूकम्प, बाढ़, सूखा, भूस्खलन, ज्वालामुखी का फटना, तूफान, समुद्री तूफान, ओलावृष्टि, बादल फटना, सूनामी या समुद्री लहरें, उल्कापात, महामारियाँ। इन सभी प्राकृतिक आपदाओं का यदि विश्लेषण किया जाए तो हम कह सकते हैं कि उन विषम या प्रतिकूल प्रभाव वाली दशाओं को आपदाएँ कहा जाता है जो मनुष्यों, जीव-जगत तथा सामान्य जनजीवन को व्यापक रूप से प्रभावित करती हैं तथा पहले से चली आ रही जीवन सम्बन्धी सामान्य गतिविधियों में बाधा डालती हैं।
In simple words: Disasters are sudden, extreme events like earthquakes or floods that cause massive damage to life and property, completely disrupting normal daily life.

🎯 Exam Tip: Mention at least 5-6 examples of natural disasters (like earthquakes, floods, landslides) to secure full marks in classification questions.

डालती हैं। इस तथ्य को इन शब्दों में भी कहा जा सकता है, उन समस्त दशाओं को आपदा कहा जाता है, जिनमें मनुष्य तथा जैव समुदाय, प्राकृतिक, मानवीय, पर्यावरणीय या सामाजिक कारणों से गम्भीर जान-माल की क्षति सहन करने के लिए बाध्य हो जाता है।

हिन्दी भाषा में प्रयोग होने वाला ‘आपदा’ शब्द का अंग्रेजी पर्याय Disaster है। अंग्रेजी भाषा का यह शब्द वास्तव में फ्रेंच भाषा के शब्द Desastre से लिया गया है, जिसका आशय ग्रह से है। प्राचीन विश्वासों के अनुसार प्राकृतिक आपदाएँ कुछ अनिष्टकारी तारों या ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव के कारण उत्पन्न होती हैं। वर्तमान वैज्ञानिक खोजों ने इस प्राचीन विश्वास को खण्डित कर दिया है। अब यह जान लिया गया है कि प्रायः सभी आपदाएँ अपने आप में प्राकृतिक घटनाएँ ही हैं तथा उनके कारण भी प्राकृतिक ही होते हैं। प्राकृतिक आपदाएँ उन गम्भीर प्राकृतिक घटनाओं को कहा जाता है, जिनके प्रभाव से हमारे सामाजिक ढाँचे व विभिन्न व्यवस्थाओं को गम्भीर क्षति पहुँचती है।

इनसे मनुष्यों एवं अन्य जीव-जन्तुओं का जीवन समाप्त हो जाता है तथा हर प्रकार की सम्पत्ति को भी नुकसान होता है। इस प्रकार की आपदाओं से मनुष्यों का सामाजिक-आर्थिक जीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसे में जनजीवन को पुनः सामान्य बनाने के लिए तथा पुनर्वास के लिए व्यापक स्तर पर बाहरी सहायता की आवश्यकता होती है। वर्तमान समय में विश्व-मानव प्राकृतिक आपदाओं के प्रति पर्याप्त सचेत है तथा इन अवसरों पर विश्व के कोने-कोने से सहायता एवं सहानुभूति प्राप्त हो जाती है।

आपदाओं के प्रकार (Kinds of Disasters)

यह सत्य है कि गम्भीर एवं व्यापक आपदाएँ मुख्य रूप से प्राकृतिक कारकों से ही उत्पन्न होती हैं, परन्तु कुछ आपदाएँ अन्य कारकों के परिणामस्वरूप भी उत्पन्न हो सकती हैं। इस स्थिति में आपदाओं के व्यवस्थित अध्ययन के लिए आपदाओं का समुचित वर्गीकरण करना भी आवश्यक माना जाता है। आपदाओं के मुख्य प्रकार या वर्ग निम्नलिखित हो सकते हैं:

1. आकस्मिक रूप से घटित होने वाली आपदाएँ: कुछ आपदाएँ या प्राकृतिक घटनाएँ ऐसी हैं जो एकाएक या आकस्मिक रूप से घटित हो जाती हैं तथा अल्प समय में ही गम्भीर प्रतिकूल प्रभाव डाल देती हैं। इनकी न तो कोई पक्की पूर्व-सूचना होती है और न निश्चित भविष्यवाणी ही की जा सकती है। इस वर्ग की आपदाओं को आकस्मिक रूप से घटित होने वाली आपदाएँ कहा जाता है। इस वर्ग की मुख्य आपदाएँ हैं—भूकम्प, ज्वालामुखी का विस्फोट, सुनामी, बादल का फटना, चक्रवातीय तूफान, भूस्खलन तथा हिम की आँधी। इन आपदाओं के प्रति सचेत न होने के कारण जान-माल की भारी क्षति हो जाती है।

2. धीरे-धीरे अथवा क्रमशः आने वाली आपदाएँ: दूसरे वर्ग में उन आपदाओं को सम्मिलित किया जाता है जो आकस्मिक रूप से नहीं बल्कि धीरे-धीरे आती हैं तथा उनकी गम्भीरता क्रमशः बढ़ती है। इस वर्ग की आपदाओं की समुचित पूर्व-सूचना होती है तथा उनकी भावी गम्भीरता की भी भविष्यवाणी की जा सकती है। इस वर्ग की आपदाओं के पीछे प्रायः प्राकृतिक कारकों के साथ-ही-साथ मनुष्य के कुप्रबंधन या पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ सम्बन्धी कारक भी निहित होते हैं। इस वर्ग की मुख्य आपदाएँ हैं—सूखा, अकाल, किसी क्षेत्र का मरुस्थलीकरण, मौसम एवं जलवायु सम्बन्धी परिवर्तन, कृषि पर कीड़ों का प्रभाव तथा पर्यावरण-प्रदूषण। इन आपदाओं का मुकाबला किया जा सकता है तथा इन्हें नियंत्रित करने के भी उपाय किये जा सकते हैं।

3. मानवजनित अथवा सामाजिक आपदाएँ: तीसरे वर्ग की आपदाओं को हम मानव-जनित अथवा सामाजिक आपदाएँ कहते हैं। इस प्रकार की आपदाओं के लिए कोई भी प्राकृतिक कारक जिम्मेदार नहीं होता बल्कि ये आपदाएँ मानवीय लापरवाही, कुप्रबंधन, षड्यंत्र अथवा समाज-विरोधी तत्त्वों की गतिविधियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती हैं। इस वर्ग की आपदाओं में मुख्य हैं—युद्ध, दंगा, आतंकवाद, अग्निकांड, सड़क दुर्घटनाएँ, वातावरण को दूषित करना तथा जनसंख्या विस्फोट आदि। इस वर्ग की आपदाओं को विभिन्न प्रयासों एवं जागरूकता से नियंत्रित किया जा सकता है।

4. जैविक आपदाएँ या महामारी
चतुर्थ वर्ग की आपदाओं में उन आपदाओं को सम्मिलित किया जाता है जिनका सम्बन्ध मनुष्यों के शरीर एवं स्वास्थ्य से होता है। साधारण शब्दों में हम कह सकते हैं कि व्यापक स्तर पर फैलने वाले संक्रामक एवं घातक रोगों को इस वर्ग की आपदा माना जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक समय था जब प्लेग, हैजा, चेचक आदि संक्रामक रोग प्रायः गंभीर आपदा के रूप में देखे जाते थे। इन रोगों के प्रकोप से प्रतिवर्ष लाखों व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती थी। वर्तमान समय में एड्स, तपेदिक, हेपेटाइटिस-बी, डेंगू तथा चिकनगुनिया जैसे रोगों को जैविक आपदा के रूप में देखा जा रहा है।

 

Question 2. आग लगना या अग्निकाण्ड किस प्रकार की आपदा है? इसके कारणों, बचाव तथा सम्बन्धित प्रबन्धन के उपायों का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: सभ्य मानव-जीवन तथा आग का घनिष्ठ सम्बन्ध है। सभ्यता के विकास से पूर्व मनुष्य आग से परिचित नहीं था। वह आग जलाना नहीं जानता था। इस ज्ञान के अभाव में वह जंगल के कन्द-मूल, फल तथा पशुओं का कच्चा मांस खाकर ही जीवन-यापन करता था। स्पष्ट है कि आग जलाने के ज्ञान के अभाव में व्यक्ति का जीवन पशु-तुल्य ही था। जैसे ही मनुष्य ने आग जलाना सीख लिया, वैसे ही उसने सभ्यता के मार्ग पर अग्रसर होना प्रारम्भ कर दिया। आज हमारे जीवन की असंख्य गतिविधियाँ आग पर ही निर्भर हैं। सर्वप्रथम हमारा आहार या भोजन पूर्ण रूप से आग (ताप) पर ही निर्भर है। पाक-क्रिया की चाहे जिस विधि को अपनाया जाए, प्रत्येक दशा में ताप अर्थात् आग एक अनिवार्य कारक है। इस प्रकार आग हमारे रसोईघर का अनिवार्य साधन है। आहार के अतिरिक्त जीवन के अन्य सभी क्षेत्रों में भी आग की महत्त्वपूर्ण एवं अनिवार्य भूमिका है। औद्योगिक क्षेत्र में, परिवहन एवं यातायात के क्षेत्र में भी आग या ईंधन को अनिवार्य कारक माना जाता है।

इस प्रकार स्पष्ट है कि आग एक अति महत्त्वपूर्ण एवं प्रबल कारक है जो मानव-जीवन के लिए उपयोगी एवं सहायक है। अग्नि का उपयोग मानव आदिकाल से कर रहा है। अग्नि यदि नियन्त्रण में रहे तो मानव की सबसे अच्छी सेवक व मित्र है। मानव के लिए यह ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। यदि मानव के नियन्त्रण से अग्नि निकल जाए, तो यह विनाशकारी रूप धारण कर लेती है। उस अवस्था में यह मानव की सबसे बड़ी शत्रु और संहारक बन जाती है। प्रत्येक वर्ष अग्नि लाखों लोगों के प्राण लेती है तथा लाखों को विकलांग बना देती है। लाखों इमारतें तथा अनेक वन प्रतिवर्ष अग्नि की भेंट चढ़ जाते हैं। एक बार अग्नि अपनी जकड़ बना ले तो इसको नियन्त्रित करना आसान नहीं होता। आग के अनियन्त्रित रूप को 'आग लगना' या 'अग्निकाण्ड' कहा जाता है। आग लगना भी एक गंभीर आपदा है। यह एक ऐसी आपदा है जो किसी-न-किसी रूप में मनुष्य द्वारा उत्पन्न की गयी आपदा है। आग लगना प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह मानवकृत आपदा है। यह लापरवाही से, दुर्घटना वश अथवा दुर्भावनाजनित भी हो सकती है। अग्निकाण्ड से सुरक्षा के लिए सदैव सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है।

अग्निकाण्ड के कारण (Causes of Fire)
आग लगाने के लिए तीन बातों का एक स्थान पर होना आवश्यक है। ये हैं:
1. ऑक्सीजन गैस।
2. ईंधन; जैसे-पेट्रोल, कागज, लकड़ी आदि।
3. ऊष्मा; शेष दो वस्तुएँ एक साथ हों, तो अग्नि को जन्म देती हैं। आग लगने के मुख्य कारण:
1. मानव लापरवाही
In simple words: आग मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी है, लेकिन जब यह नियंत्रण से बाहर हो जाती है तो विनाशकारी अग्निकाण्ड का रूप ले लेती है। यह एक मानव-निर्मित आपदा है जो लापरवाही या दुर्घटना के कारण होती है।

🎯 Exam Tip: अग्निकाण्ड के कारणों को लिखते समय ऑक्सीजन, ईंधन और ऊष्मा के त्रिकोण (Fire Triangle) का उल्लेख अवश्य करें और स्पष्ट करें कि यह एक मानवकृत आपदा है।

  • घर पर हम आग का प्रयोग खाना पकाने के लिए करते हैं। खाना पकाते समय ढीले-ढाले तथा ज्वलनशील कपड़े पहनने पर बहुधा आग लग जाती है। महिलाएँ अक्सर साड़ी या चुनरी पहनकर खाना बनाती हैं और इसी कारण वे रसोईघर में आग पकड़ लेती हैं तथा इसका शिकार हो जाती हैं।
  • हम, धूम्रपान करने के लिए अक्सर माचिस को जलाते हैं। सिगरेट-बीड़ी सुलगा लेने पर जलती हुई तिल्ली को बिना सोचे-समझे इधर-उधर फेंक देते हैं। इसके कारण भी आग लग जाती है।
  • कभी-कभी हम घर पर कपड़ों पर बिजली की इस्तरी करते-करते, इस्तरी को बिना बन्द किये उसे खुला छोड़कर किसी और काम में लग जाते हैं। परिणामस्वरूप गर्म इस्तरी कपड़ों में आग लगा देती है।
  • त्योहारों और खुशी के अन्य अवसरों पर नवयुवक व बच्चे आतिशबाजी चलाते हैं। यह आतिशबाजी भी आग लगने का कारण बन जाती है।
  • प्रायः झुग्गी-झोंपड़ियों में आग लग जाया करती है। यह भी लापरवाही के ही कारण लगती है।

 

2. बिजली के दोषपूर्ण उपकरण व फिटिंग

  • बिजली सम्बन्धी दोषपूर्ण वायरिंग, शॉर्ट सर्किट व ओवरलोड आग लगने के कारण हैं। दुकानों व वर्कशॉपों में, जो रात को बन्द रहते हैं तथा कोई व्यक्ति उनकी देखभाल नहीं करता, अक्सर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की दुर्घटनाएँ होती हैं।
  • दोषपूर्ण तथा अनाधिकृत विद्युत उपकरण भी आग लगने के कारण। मल्टी प्वाइंट अडॉप्टर भी शीघ्र गर्म हो जाने के कारण आग पकड़ लेते हैं।

 

3. ज्वलनशील पदार्थों के प्रति लापरवाही

कुछ पदार्थ ऐसे हैं जो अत्यन्त ज्वलनशील हैं; जैसे-पेट्रोल, सरेस, ग्रीस तथा ज्वलनशील गैसें। इनके भण्डारण में लापरवाही के कारण प्रायः आग लग जाती है।

 

4. अन्य कारण

(1) आज के आतंकवादी समय में शरारती तत्त्व भी आगजनी करते हैं। वे बहुधा धार्मिक स्थलों, बाजारों व बस्तियों में आग लगा देते हैं।

(2) वनों की आग का मुख्य कारण जैविक अथवा मानवजनित लापरवाही है। बाँस के वनों में आपसी घर्षण से उत्पन्न चिंगारी द्वारा अथवा थण्डरबोल्ट से भी दावाग्नि उत्पन्न हो जाती है।

(3) वनाग्नि कभी-कभी निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा लगाई जाती है।

(क) शहद निकालने वाले श्रमिक
(ख) शाक-बीज एकत्र करने वाले श्रमिक
(ग) अवैध कटान को छिपाने वाले व्यक्ति
(घ) अवैध शिकारी
(ङ) वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति।

 

आग से बचाव (Protection from Fire)

1. हमें आग से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

2. हमें अपने कार्यस्थल, घर (विशेषकर रसोई में), फैक्ट्री आदि में अग्नि-शमन उपकरण लगाने चाहिए।

3. घर में ज्वलनशील पदार्थों का भण्डारण नहीं करना चाहिए। यदि यह अपरिहार्य हो, तो पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

4. रसोई में...

आग लगने पर प्रबन्धन (Fire Management)

यदि आग लग जाए तो उसके कारण क्षति को कम करने तथा उसकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • 1. आग बुझाना एक खतरनाक काम है। इसके लिए तभी प्रयास करें जब आपका जीवन खतरे में न पड़े।
  • 2. सर्वप्रथम आग में फँसे व्यक्ति को वहाँ से निकालना चाहिए।
  • 3. 101 पर फोन करके फायर ब्रिगेड को बुलाना चाहिए तथा आग की सूचना आस-पास के व्यक्तियों को शोर मचाकर दे देनी चाहिए।
  • 4. यदि आग छोटी है तो अग्निशमन उपकरण का प्रयोग करना चाहिए।
  • 5. यदि आग फैल चुकी है तो उस स्थान से निकलकर सुरक्षित जगह आ जाना चाहिए।
  • 6. आग लगने के स्थान की बिजली आपूर्ति बन्द कर देनी चाहिए।
  • 7. आग के धुएँ से दूर रहना चाहिए अन्यथा आपका दम घुट सकता है।
  • 8. बिजली के जलते हुए उपकरणों पर पानी मत डालिए, बल्कि रेत व मिट्टी डालिए।

आग बुझने के पश्चात् निम्नलिखित बातों का ध्यान रखिए:

  • आग लगने के कारणों का पता लगाइए।
  • घायल व्यक्ति के उपचार का प्रबन्ध कीजिए।
  • भविष्य में आग से बचने के लिए आवश्यक उपाय कीजिए।
  • अग्निशमन उपकरण, पंखों और बिजली के तारों का पूरा निरीक्षण कीजिए। जहाँ कहीं कोई दोष मिले, उसे दूर कीजिए।

 

Question 3. सूखा नामक आपदा से आप क्या समझते हैं? इसके मुख्य कारणों तथा सूखा शमन की युक्तियों का उल्लेख कीजिए।
या
सूखे के प्रभाव को कम करने के उपायों के बारे में लिखिए। (2011, 16)

Answer: सूखा : एक आपदा (Draught : Apisaster)
सूखा वह स्थिति है जिसमें किसी स्थान पर अपेक्षित तथा सामान्य वर्षा से कहीं कम वर्षा पड़ती है। यह स्थिति एक लम्बी अवधि तक रहती है। सूखा गर्मियों में भयंकर रूप धारण कर लेता है जब सूखे के साथ-साथ ताप भी आक्रमण करता है। सूखा मानव, वनस्पति व पशु-पक्षियों को भूखा मार देता है। सूखे की स्थिति में कृषि, पशुपालन तथा मनुष्यों को सामान्य आवश्यकता से कम जल प्राप्त होता है। सूखा पड़ने पर फसलों के नष्ट होने से भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

शुष्क तथा अर्द्ध-शुष्क प्रदेशों में सूखा एक सामान्य समस्या है, किन्तु पर्याप्त वर्षा वाले क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। मानसूनी वर्षा के क्षेत्र सूखे से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। सूखा एक मौसम सम्बन्धी आपदा है तथा किसी अन्य विपत्ति की अपेक्षा अधिक धीमी गति से आती है।
In simple words: सूखा (Drought) तब होता है जब बहुत लंबे समय तक बारिश नहीं होती है। इससे पानी की भारी कमी हो जाती है, फसलें सूख जाती हैं और इंसानों व जानवरों को पीने के पानी और भोजन के लिए तरसना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: सूखे की परिभाषा लिखते समय 'औसत से कम वर्षा' और 'लम्बी अवधि' जैसे मुख्य शब्दों का उपयोग अवश्य करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

सूखा के कारण (Causes of Draught)

वैसे यूँ तो सूखा के अनेक कारण हैं, परन्तु प्रकृति तथा मानव दोनों ही इसके मूल में हैं। सूखा के कारण इस प्रकार हैं:

  • 1. अत्यधिक चराई तथा जंगलों की कटाई: अत्यधिक चराई तथा जंगलों की कटाई के कारण हरियाली की पट्टी धीरे-धीरे समाप्त हो रही है, परिणामस्वरूप वर्षा कम मात्रा में होती है। यदि होती भी है, तो जल भूतल पर तेजी से बह जाता है। इसके कारण मिट्टी का कटाव होता है तथा सतह से नीचे जल-स्तर कम हो जाता है, परिणामस्वरूप कुएँ, नदियाँ और जलाशय सूखने लगते हैं।
  • 2. ग्लोबल वार्मिंग: ग्लोबल वार्मिंग वर्षा की प्रवृत्ति में बदलाव का कारण बन जाती है। परिणामस्वरूप वर्षा वाले क्षेत्र सूखाग्रस्त हो जाते हैं।
  • 3. कृषि योग्य समस्त भूमि का उपयोग: बढ़ती हुई आबादी के लिए खाद्य-सामग्री उगाने के लिए लगभग समस्त कृषि योग्य भूमि पर जुताई व खेती की जाने लगी है, परिणामस्वरूप मृदा की उर्वरा शक्ति क्षीण होती जा रही है तथा वह रेगिस्तान में परिवर्तित होती जा रही है। ऐसी स्थिति में वर्षा की थोड़ी कमी भी सूखे का कारण बन जाती है।
  • 4. वर्षा का असमान वितरण: वर्षा का असमान वितरण दोनों तरीके से व्याप्त है। विभिन्न स्थानों पर न तो वर्षा की मात्रा समान है और न ही अवधि। हमारे देश में कुल जोती जाने वाली भूमि का लगभग 70 प्रतिशत भाग सूखा संभावित क्षेत्र है। इस क्षेत्र में यदि कुछ वर्षों तक लगातार वर्षा न हो तो सूखे की अत्यन्त दयनीय स्थिति पैदा हो जाती है।

सूखा शमन की प्रमुख युक्तियाँ (साधन) (Means to Prevent Draught)

  • 1. हरित पट्टियाँ: हरित पट्टी कालान्तर में वर्षा की मात्रा में वृद्धि तो करती ही है, साथ में ये वर्षा जल को रिसकर भूतल के नीचे जाने में सहायक भी होती हैं। परिणामस्वरूप कुओं, तालाबों आदि में जल-स्तर बढ़ जाता है और मानव उपयोग के लिए अधिक जल उपलब्ध हो जाता है।
  • 2. जल संचय: वर्षा कम होने की स्थिति में जल आपूर्ति को बनाये रखने के लिए, जल को संचय करके रखना एक दूरदर्शी युक्ति है। जल का संचय बाँध बनाकर या तालाब बनाकर किया जा सकता है।
  • 3. प्राकृतिक तालाबों का निर्माण: यह भी सूखे की स्थिति से निपटने के लिए एक उत्तम उपाय है। प्राकृतिक तालाबों में जल संचय भू-जल के स्तर को भी बढ़ाता है।
  • 4. विभिन्न नदियों को आपस में जोड़ने: विभिन्न नदियों को आपस में जोड़ने से उन क्षेत्रों में भी जल उपलब्ध किया जा सकता है जहाँ वर्षा का अभाव रहा हो। भारत सरकार नदियों को जोड़ने की एक महत्त्वाकांक्षी योजना अगस्त 2005 ई० में प्रारम्भ कर चुकी है।
  • 5. भूमि का उपयोग: सूखा संभावित क्षेत्रों में भूमि उपयोग पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, विशेषकर हरित पट्टी बनाने के लिए कम-से-कम 35 प्रतिशत भूमि को आरक्षित कर दिया जाना चाहिए। इस भूमि पर अधिकाधिक वृक्षारोपण किया जाना चाहिए।

 

Question 4. बाढ़ से आप क्या समझते हैं? बाढ़ के मुख्य कारणों का उल्लेख कीजिए तथा बाढ़ शमन की प्रमुख युक्तियों का भी वर्णन कीजिए।
या
बाढ़ आने के मुख्य कारणों का उल्लेख कीजिए।

Answer: बाढ़ का अर्थ: अत्यधिक जल जमाव के कारण जब कोई विस्तृत स्थलीय क्षेत्र जलमग्न हो जाता है, तो उसे बाढ़ कहते हैं। सामान्यतः भारी वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आती है।

बाढ़ के मुख्य कारण:
(i) अत्यधिक और तीव्र वर्षा होना।
(ii) वनों की अंधाधुंध कटाई जिससे मिट्टी का कटाव बढ़ता है और पानी का बहाव तेज होता है।
(iii) नदियों के तल में गाद (मिट्टी) जमा होने से उनकी जल धारण क्षमता का कम होना।
(iv) मानव बस्तियों का नदियों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण करना।

बाढ़ शमन की प्रमुख युक्तियाँ (उपाय):
(i) नदियों पर जलाशयों और बाँधों का निर्माण करना ताकि अतिरिक्त पानी को नियंत्रित किया जा सके।
(ii) नदी घाटियों और पर्वतीय ढलानों पर सघन वृक्षारोपण (वनीकरण) करना।
(iii) नदियों के किनारों पर मजबूत तटबंधों का निर्माण करना।
(iv) बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना ताकि समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें।
In simple words: बाढ़ का मतलब है बहुत ज्यादा पानी का जमा हो जाना जिससे जमीन डूब जाती है। इसे रोकने के लिए हमें पेड़ लगाने चाहिए, बाँध बनाने चाहिए और नदियों के किनारों को मजबूत करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: बाढ़ के कारणों और उपायों को अलग-अलग बिंदुओं (points) में लिखें। मुख्य शब्दों जैसे 'वनीकरण', 'तटबंध' और 'गाद' को रेखांकित करने से अच्छे अंक मिलते हैं।

 

Question. बाढ़ से बचने के उपाय लिखिए।
Answer: बाढ़ : एक प्राकृतिक आपदा (Flood : A Natural Disaster)
बाढ़ का अर्थ किसी क्षेत्र में निरन्तर वर्षा होने या नदियों का जल फैल जाने से उस क्षेत्र का जलमग्न होना है। वर्षाकाल में अधिक वर्षा होने पर नदी प्रायः अपने सामान्य जल-स्तर से ऊपर बहने लगती है। उनका जल तटबन्धों को तोड़कर आस-पास के निम्न क्षेत्रों में फैल जाता है, जिससे वे क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं। नदियों या धाराओं के मुहाने पर, तेज ढालों पर या जलमार्ग के अत्यन्त निकट बस्तियों को बाढ़ का खतरा बना रहता है।
बाढ़ एक प्राकृतिक घटना है, किन्तु जब यह मानव-जीवन व सम्पत्ति को क्षति पहुँचाती है तो यह प्राकृतिक आपदा कहलाती है। बाढ़ों के कारण दामोदर नदी ‘बंगाल का शोक’, कोसी ‘बिहार का शोक’ तथा ब्रह्मपुत्र ‘असम का शोक’ कहलाती है। ह्वांगहो नदी ‘चीन का शोक’ कहलाती है। आपदा प्रबंधन के तहत बाढ़ नियंत्रण के उचित उपाय करना अत्यंत आवश्यक है।

बाढ़ के कारण (Causes of Flood)
1. निरन्तर भारी वर्षा – जब किसी क्षेत्र में निरन्तर भारी वर्षा होती है तो वर्षा का जल धाराओं के रूप में मुख्य नदी में मिल जाता है। यह जल नदी के तटबन्धों को तोड़कर आस-पास के क्षेत्रों को जलमग्न कर देता है। भारी मानसूनी वर्षा तथा चक्रवातीय वर्षा बाढ़ों के प्रमुख कारण हैं।
2. भूस्खलन – भूस्खलन भी कभी-कभी बाढ़ों का कारण बनते हैं। भूस्खलन के कारण नदी का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है, परिणामस्वरूप नदी का जल मार्ग बदलकर आस-पास के क्षेत्रों को जलमग्न कर देता है।
3. वन-विनाश – वन पानी के वेग को कम करते हैं। नदी के ऊपरी भागों में बड़ी संख्या में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से भी बाढ़ें आती हैं। हिमालय में बड़े पैमाने पर वन विनाश ही हिमालय-नदियों में बाढ़ का मुख्य कारण है।
4. दोषपूर्ण जल निकास प्रणाली – मैदानी क्षेत्रों में उद्योगों और बहुमंजिले मकानों की परियोजनाएँ बाढ़ की सम्भावना को बढ़ाती हैं। इसका कारण यह है कि पक्की सड़कें, नालियाँ, निर्मित क्षेत्र, पक्के पार्किंग स्थल आदि के कारण यहाँ जल रिसकर भू-सतह के नीचे नहीं जा पाता। यहाँ पर जल निकास की भी पूर्ण व्यवस्था नहीं होने के कारण, वर्षा का पानी नीचे स्थानों पर भरता चला जाता है तथा बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
5. बर्फ का पिघलना – सामान्य से अधिक बर्फ का पिघलना भी बाढ़ का एक कारण है। बर्फ के अत्यधिक पिघलने से नदियों में जल की मात्रा उसी अनुपात में अधिक हो जाती है तथा नदियों का जल तट-बन्ध तोड़कर आस-पास के इलाकों को जलमग्न कर देता है।

देश भर में केन्द्रीय जल आयोग के लगभग 132 पूर्वानुमान केन्द्र हैं। ये केन्द्र देश में लगभग सभी बाढ़-सम्भावी नदियों पर नजर रखते हैं। जल-स्तरों पर खतरे का निशान चिह्नित होता है। खतरे वाले जल-स्तर बढ़ने के विषय में टी.वी., रेडियो तथा पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से चेतावनी प्रसारित की जाती है। समय रहते ही बाढ़ संभावित क्षेत्रों को लोगों से खाली करा लिया जाता है।

बाढ़ शमन की प्रमुख युक्तियाँ (Means to Prevent Flood)
In simple words: बाढ़ तब आती है जब अत्यधिक बारिश या बर्फ पिघलने से नदियों का पानी किनारों को तोड़कर आस-पास के सूखे इलाकों में फैल जाता है। इसके मुख्य कारणों में भारी वर्षा, जंगलों की कटाई और शहरों में पानी की निकासी की खराब व्यवस्था शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में बाढ़ के कारणों को बिन्दुओं (points) में लिखें और महत्वपूर्ण नदियों के उपनाम जैसे 'बिहार का शोक' (कोसी) को रेखांकित (underline) करना न भूलें।

बाढ़ नियंत्रण के उपाय

  • 1. सीधा जलमार्ग: बाढ़ की स्थिति में जलमार्ग को सीधा रखना चाहिए जिससे वह तेजी से एक सीमित मार्ग से बह सके। टेढ़ी-मेढ़ी धाराओं में बाढ़ की सम्भावना अधिक होती है।
  • 2. जल मार्ग परिवर्तन: बाढ़ के उन क्षेत्रों की पहचान की जानी चाहिए जहाँ प्रायः बाढ़ें आती हैं। ऐसे स्थानों से जल के मार्ग को मोड़ने के लिए कृत्रिम ढाँचे बनाये जाने हैं। यह कार्य वहाँ किया जाता है जहाँ कोई बड़ा जोखिम न हो।
  • 3. कृत्रिम जलाशयों का निर्माण: वर्षा के जल से आबादी-क्षेत्र को बचाने के लिए कृत्रिम जलाशयों का निर्माण किया जाना चाहिए। इन जलाशयों में भण्डारित जल को बाद में सिंचाई अथवा पीने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इन जलाशयों में बाढ़ के जल को मोड़ने के लिए जल कपाट लगे होते हैं।
  • 4. बाँध निर्माण: आबादी वाले क्षेत्रों को बाढ़ से बचाने के लिए तथा जल का प्रवाह उस ओर रोकने के लिए रेत के थैलों का बाँध बनाया जा सकता है।
  • 5. कच्चे तालाबों का निर्माण: अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में कच्चे तालाबों का अधिक-से-अधिक निर्माण कराया जाना चाहिए। ये तालाब वर्षा के जल को संचित कर सकते हैं तथा संचित जल आवश्यकता के समय उपयोग में लाया जा सकता है।
  • 6. नदियों को आपस में जोड़ना: विभिन्न क्षेत्रों में बहने वाली नदियों को आपस में जोड़कर बाढ़ के प्रकोप को कम किया जा सकता है। अधिक जल वाली नदियों का जल कम जल वाली नदियों में चले जाने से बाढ़ की स्थिति से बचा जा सकता है।
  • 7. बस्तियों का बुद्धिमत्तापूर्ण निर्माण: बस्तियों का निर्माण नदियों के मार्ग से हटकर किया जाना चाहिए। नदियों के आस-पास अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में, सुरक्षा के लिए मकान ऊँचे चबूतरे पर बनाये जाने चाहिए।

 

Question 5. भूकम्प से आप क्या समझते हैं? भूकम्प के मुख्य कारणों का उल्लेख कीजिए। भूकम्प से होने वाली क्षति से बचाव के उपायों का भी उल्लेख कीजिए।
Answer: भूकम्प : एक प्राकृतिक आपदा (Earthquake : A Natural Disaster)
भूकम्प भूतल की आन्तरिक शक्तियों में से एक है। भूगर्भ में प्रतिदिन कम्पन होते हैं। जब ये कम्पन तीव्र होते हैं तो ये भूकम्प कहलाते हैं। साधारणतया भूकम्प एक प्राकृतिक एवं आकस्मिक घटना है जो भू-पटल में हलचल पैदा कर देती है। इन हलचलों के कारण पृथ्वी अनायास ही वेग से काँपने लगती है जिसे भूचाल या भूकम्प कहते हैं। यह एक विनाशकारी घटना है। हमारे देश में भी विभिन्न क्षेत्रों में समय-समय पर हल्के या तीव्र भूकम्प आते रहते हैं। भूकम्प के आने से जान-माल की भारी हानि होती है और इसके प्रभाव को कम करने के लिए हमें सदैव सतर्क रहना चाहिए।

भूकम्प मूल एवं भूकम्प केन्द्र:
भूगर्भ में भूकम्पीय लहरें चलती रहती हैं। जिस स्थान से इन लहरों का प्रारम्भ होता है, उसे भूकम्प मूल कहते हैं। जिस स्थान पर भूकम्पीय लहरों का अनुभव सर्वप्रथम किया जाता है, उसे अभिकेन्द्र या भूकम्प केन्द्र कहते हैं। (भूकम्प की तीव्रता की माप के लिए 'रिक्टर स्केल' का निर्धारण किया गया है।)

भूकम्प के कारण (Causes of Earthquake):
भूगर्भशास्त्रियों ने भूकम्प के निम्नलिखित कारण बताये हैं...
In simple words: An earthquake is a sudden shaking of the Earth's surface caused by deep internal movements. The point where the earthquake starts underground is called the focus, and the point directly above it on the surface is called the epicenter.

🎯 Exam Tip: Always define both 'Earthquake Focus' (भूकम्प मूल) and 'Epicenter' (भूकम्प केन्द्र) clearly, as examiners look for these specific terms and their definitions.

1. ज्वालामुखी उद्गार- जब विवर्तनिक हलचलों के कारण भूगर्भ में गैसयुक्त द्रवित लावा भूपटल की ओर प्रवाहित होती है तो उसके दबाव से भू-पटल की शैलें हिल उठती हैं। यदि लावा के मार्ग में कोई भारी चट्टान आ जाए तो प्रवाहशील लावा उस चट्टान को वेग से ढकेलता है, जिससे भूकम्प आ जाता है।

2. भू-असन्तुलन में अव्यवस्था- भू-पटल पर विभिन्न बल समतल समायोजन में लगे रहते हैं जिससे भूगर्भ की सियाल एवं सिमा की परतों में परिवर्तन होते रहते हैं। यदि ये परिवर्तन एकाएक तथा तीव्र हो जाएँ तो पृथ्वी का कम्पन्न प्रारम्भ हो जाता है तथा उस क्षेत्र में भूकम्प के झटके आने प्रारम्भ हो जाते हैं।

3. जलीय भार- मानव द्वारा निर्मित जलाशय, झील अथवा तालाब के धरातल के नीचे की चट्टान के भार एवं दबाव के कारण अचानक परिवर्तन आ जाते हैं तथा इनके कारण ही भूकम्प आ जाता है। 1967 ई० में कोयना भूकम्प (महाराष्ट्र) कोयना जलाशय में जल भर जाने के कारण ही आया था।

4. भू-पटल में सिकुड़न– विकिरण के माध्यम से भूगर्भ की गर्मी धीरे-धीरे कम होती रहती है। जिसके कारण पृथ्वी की ऊपरी पपड़ी में सिकुड़न आती है। यह सिकुड़न पर्वत निर्माणकारी क्रिया को जन्म देती है। जब यह प्रक्रिया तीव्रता से होती है, तो भूपटल पर कम्पन प्रारम्भ हो जाता है।

5. प्लेट विवर्तनिकी- महाद्वीप तथा महासागरीय बेसिन विशालकाय दृढ़ भूखण्डों से बने हैं, जिन्हें प्लेट कहते हैं। सभी प्लेटें विभिन्न गति से सरकती रहती हैं। कभी-कभी दो प्लेटें परस्पर टकराती हैं तब भूकम्प आते हैं। 26 जनवरी, 2001 को गुजरात के भुज क्षेत्र में उत्पन्न भूकम्प की उत्पत्ति का कारण प्लेटों का टकरा जाना ही था।

भूकम्प से भवन-सम्पत्ति की क्षति का बचाव (Protection of Damaged Land and Property from Earthquake)

भूकम्प अपने आप में किसी प्रकार से नुकसान नहीं पहुँचाता, परन्तु भूकम्प के प्रभाव से हमारे भवन एवं इमारतें टूटने लगती हैं तथा उनके गिरने से जान-माल की अत्यधिक हानि होती है। अतः भूकम्प से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भवन-निर्माण में ही कुछ सावधानियाँ अपनायी जानी चाहिए तथा आवश्यक उपाय किये जाने चाहिए।

1. भवनों की आकृति- भवन का नक्शा साधारणतया आयताकार होना चाहिए। लम्बी दीवारों को सहारा देने के लिए ईंट-पत्थर या कंक्रीट के कॉलम होने चाहिए। जहाँ तक हो सके T, L, U और X आकार के नक्शों वाले बड़े भवनों को उपयुक्त स्थानों पर अलग-अलग खण्डों में बाँटकर आयताकार खण्ड बना लेना चाहिए। खण्डों के बीच खास अन्तर से चौड़ी जगह छोड़ दी जानी चाहिए ताकि भूकम्प के समय भवन हिल-डुल सके और क्षति न हो।

2. नींव- जहाँ आधार भूमि में विभिन्न प्रकार की अथवा नरम मिट्टी हो वहीं नींव में कॉलमों को भिन्न-भिन्न व्यवस्था में स्थापित करना चाहिए। ठण्डे देशों में मिट्टी में आधार की गहराई जमाव-बिन्दु क्षेत्र के काफी नीचे तक होनी चाहिए, जबकि चिकनी मिट्टी में यह गहराई दरार के सिकुड़ने के स्तर से नीचे तक होनी चाहिए। ठोस मिट्टी वाली परिस्थितियों में किसी भी प्रकार के आधार का प्रयोग कर सकते हैं। चूने या सीमेण्ट के कंक्रीट से बना इसका ठोस आधार होना चाहिए।

3. दीवारों में खुले स्थान- दीवारों में दरवाजों और खिड़कियों की बहुलता के कारण, उनकी भार-रोधक क्षमता कम हो जाती है। अतः ये कम संख्या में तथा दीवारों के बीचों-बीच स्थित होने चाहिए।

4. कंक्रीट से बने बैंडों का प्रयोग- भूकम्प संवेदनशील क्षेत्रों में, दीवारों को मजबूती प्रदान करने तथा उनकी कमजोर जगहों पर समतल रूप से मुड़ने की क्षमता को बढ़ाने के लिए कंक्रीट के मजबूत बैंड बनाए जाने चाहिए जो स्थिर विभाजक दीवारों सहित सभी बाह्य तथा आन्तरिक दीवारों पर लगातार काम करते रहते हैं। इन बैंडों में प्लिंथ बैंड, लिटल बैंड, रूफ बैंड तथा गेबल बैंड आदि सम्मिलित हैं।

 

Question 6. एक प्राकृतिक आपदा के रूप में समुद्री लहरों का सामान्य परिचय दीजिए। इनके मुख्य कारण क्या होते हैं? समुद्री लहरों की चेतावनी तथा बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों का भी उल्लेख कीजिए।
Answer: समुद्री लहरें : प्राकृतिक आपदा (Sea Waves : Natural Disaster)
समुद्री लहरें कभी-कभी विनाशकारी रूप धारण कर लेती हैं। इनकी ऊँचाई 15 मीटर और कभी-कभी इससे भी अधिक तक होती है। ये तट के आस-पास की बस्तियों को तबाह कर देती हैं। ये लहरें मिनटों में ही तट तक पहुँच जाती हैं। जब ये लहरें उथले पानी में प्रवेश करती हैं, तो भयावह शक्ति के साथ तट से टकराकर कई मीटर ऊपर तक उठती हैं। तटवर्ती मैदानी इलाकों में इनकी रफ्तार 50 किमी प्रति घण्टा तक हो सकती है। यह तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर देती है और भारी तबाही मचाती है।
इन विनाशकारी समुद्री लहरों को ‘सूनामी’ कहा जाता है। ‘सूनामी’, जापानी भाषा का शब्द है, जो दो शब्दों ‘सू’ अर्थात् ‘बन्दरगाह’ और ‘नामी’ अर्थात् ‘लहर’ से बना है। सूनामी लहरें अपनी भयावह शक्ति के द्वारा विशाल चट्टानों, नौकाओं तथा अन्य प्रकार के मलबे को भूमि पर कई मीटर अन्दर तक धकेल देती हैं। ये तटवर्ती इमारतों, वृक्षों आदि को नष्ट कर देती हैं। 26 दिसम्बर, 2004 को दक्षिण-पूर्व एशिया के 11 देशों में सूनामी द्वारा फैलाई गयी विनाशलीला से हम सब परिचित हैं।

समुद्री लहरों के कारण (Causes of Sea Waves)
1. ज्वालामुखी विस्फोट: वर्ष 1993 में इण्डोनेशिया में क्रकटू नामक विख्यात ज्वालामुखी में भयानक विस्फोट हुआ और इसके कारण लगभग 40 मीटर ऊँची सूनामी लहरें उत्पन्न हुईं। इन लहरों ने जावा व सुमात्रा में जन-धन की अपार क्षति पहुँचायी।
2. भूकम्प: समुद्र तल के पास या उसके नीचे भूकम्प आने पर समुद्र में हलचल पैदा होती है। और यही हलचल विनाशकारी सूनामी का रूप धारण कर लेती है। 26 दिसम्बर, 2004 को दक्षिण-पूर्व एशिया में आई विनाशकारी सूनामी लहरें, भूकम्प का ही परिणाम थीं।
3. भूस्खलन: समुद्र की तलहटी में भूकम्प व भूस्खलन के कारण ऊर्जा निर्गत होने से बड़ी-बड़ी लहरें उत्पन्न होती हैं जिनकी गति अत्यन्त तेज होती है। मिनटों में ही ये लहरें विकराल रूप धारण कर, तट की ओर दौड़ती हैं।

चेतावनी व अन्य युक्तियाँ (Warning and Other Means)
1. उपग्रह प्रौद्योगिकी: उपग्रह प्रौद्योगिकी के प्रयोग से सूनामी सम्भावित भूकम्पों की तुरन्त चेतावनी देना सम्भव हो गया है। चेतावनी का समय तट रेखा से अभिकेन्द्र की दूरी पर निर्भर करता है। फिर भी उन तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जहाँ सूनामी कुछ घण्टों में विनाश फैला सकती है, सूनामी के अनुमानित समय की सूचना दे दी जाती है।
In simple words: Tsunamis are giant, destructive ocean waves caused by underwater earthquakes, landslides, or volcanic eruptions. They travel very fast and can destroy buildings and trees near the coast, but modern satellite technology helps warn people in advance to save lives.

🎯 Exam Tip: To score full marks, structure your answer clearly with subheadings like 'Introduction', 'Causes', and 'Warning Systems', and highlight key terms like 'Tsunami' and 'Satellite Technology'.

2. तटीय ज्वार जाली – तटीय ज्वार जाली का निर्माण करके सूनामियों को तट के निकट रोका जा सकता है। गहरे समुद्र में इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता।

3. सूनामीटर – सूनामीटर के द्वारा समुद्र तल में होने वाली हलचलों का पता लगाकर, उपग्रह के माध्यम से चेतावनी प्रसारित की जा सकती है। इसके लिए सूनामी सतर्कता यन्त्र समुद्री केबुलों के द्वारा भूमि से जोड़े जाते हैं और उन्हें समुद्र में 50 किमी तक आड़ा-तिरछा लगाया जाता है।

सूनामी की आशंका पर सावधानियाँ (Precautions on the Probability of Tsunami)

यदि आप ऐसे तटवर्ती क्षेत्र में रहते हैं जहाँ सूनामी की आशंका है, तो आपको निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए:

  • 1. तट के समीप न तो मकान बनवाएँ और न ही किसी तटवर्ती बस्ती में रहें।
  • 2. तट के समीप रहना आवश्यक हो, तो घर को ऊँचे स्थान पर बनवाएँ। ये स्थान 10 फुट से ऊँचे स्थान पर ही हों, क्योंकि सूनामी लहरें अधिकांशतः इससे कम ऊँची होती हैं।
  • 3. अपने घरों को बनाते समय भवन निर्माण विशेषज्ञ की राय लें तथा मकान को सूनामी निरोधक बनाएँ।
  • 4. सूनामी के विषय में प्राप्त चेतावनी के प्रति लापरवाही न बरतें तथा आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए तैयारी रखें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भवन या गृह के अग्नि-अवरोधन के मुख्य उपायों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भवन एवं भवन में रहने वालों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है कि भवन को अग्नि से बचाव के योग्य बनाया जाए। अग्नि एक ऐसा कारक है जो कभी भी दुर्घटनावश या लापरवाही के परिणामस्वरूप सक्रिय हो जाता है। भवन-निर्माण की प्रक्रिया में कोई ऐसा उपाय सम्भव नहीं है कि भवन में आग लगे ही नहीं। भवन में रखी हुई प्रायः सभी वस्तुएँ कम या अधिक ज्वलनशील होती हैं; अतः असावधानी, दुर्घटनावश अथवा किसी शरारत के परिणामस्वरूप मकान में आग लग सकती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए केवल इस प्रकार के उपाय किये जा सकते हैं जिनसे भवन में आग लग जाने पर उसका फैलाव तेजी से न हो तथा शीघ्र ही भवन गिर न जाए। इस उद्देश्य से भवन की संरचना को अधिक-से-अधिक अग्निसह (Fire Resisting) बनाना चाहिए। भवन के अग्नि-अवरोधन (Fire proofing of house) के लिए भवन-निर्माण में अधिक-से-अधिक अग्निसह पदार्थों को इस्तेमाल करना चाहिए। भवन संरचना के सभी भाग कम-से-कम इतने अग्निसह तो अवश्य होने चाहिए कि इतने समय तक टूटकर न गिरें, जितने समय तक भवन में रहने वाले व्यक्ति सुरक्षापूर्वक उसमें से बाहर न निकल जाएँ। सुरक्षित निर्माण तकनीकों का उपयोग करके हम बहुमूल्य जीवन और संपत्ति दोनों की रक्षा कर सकते हैं। भवन को आग सम्बन्धी दुर्घटना के दृष्टिकोण से सुरक्षित बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं:
1. भवन की समस्त भारवाही दीवारें तथा स्तम्भ पर्याप्त मोटे तथा सुदृढ़ होने चाहिए, क्योंकि मोटे स्तम्भ एवं दीवारें पर्याप्त अग्निसह होते हैं।
2. जहाँ तक हो सके भवन के अन्दर की विभाजक दीवारें भी अग्निसह पदार्थों की बनानी चाहिए। लकड़ी या प्लाईबोर्ड की दीवारें शीघ्र आग पकड़ लेती हैं। ये विभाजक दीवारें R.C.C., R.B.C., धातु की जाली, ऐस्बेस्टस, सीमेण्ट, बोर्ड अथवा कंक्रीट में खोखले ब्लॉकों द्वारा बनाई जानी चाहिए।
3. भवन की सभी दीवारों पर अग्नि अवरोधक प्लास्टर किया जाना चाहिए।
4. भवन में यदि ढाँचेदार संरचनाएँ हों तो उनके फ्रेम ताप पाकर टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं।
In simple words: To protect a house from fire, we should use fire-resistant materials like concrete, R.C.C., and thick walls. This prevents the fire from spreading quickly and gives people enough time to safely escape.

🎯 Exam Tip: Mention key fire-resistant materials like R.C.C. and asbestos, and emphasize that the main goal of fire-proofing is to allow safe evacuation during an emergency.

 

Question 2. जल जाने या झुलस जाने पर क्या प्राथमिक उपचार किया जाना चाहिए?
Answer: आग से जल जाने पर तुरन्त निम्नलिखित प्राथमिक उपचार किया जाना चाहिए:
1. जलने अर्थात् आग लग जाने पर सर्वप्रथम आवश्यक उपाय है-आग को बुझाना। इसके लिए पानी, मिट्टी या रेत तथा कम्बल आदि डाले जा सकते हैं। जिस व्यक्ति के कपड़ों में आग लग गयी हो वह जमीन पर लेटकर निरन्तर करवटें बदल-बदल कर एवं लुढ़ककर भी आग बुझाने का प्रयास कर सकता है। आग बुझ जाने पर आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा के उपाय तुरन्त करने चाहिए। प्राथमिक उपचार के समय शांत रहना और पीड़ित को ढाँढस बंधाना भी अत्यंत आवश्यक है।
2. जल जाने वाले शरीर के भाग पर से वस्त्रों को सावधानीपूर्वक हटा देना चाहिए, किन्तु वस्त्र चिपकने की दशा में उसे चारों ओर से काट देना चाहिए और शरीर पर चिपक गये वस्त्र पर नारियल का तेल लगा देना चाहिए।
3. अलसी के तेल तथा चूने के पानी को समान अनुपात में मिलाकर उसमें स्वच्छ कपड़ा या रुई का फोहा भिगोकर जले भाग पर रखने चाहिए।
4. फफोलों को फोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि इस स्थिति में विभिन्न प्रकार के बाहरी संक्रमणों का भय बढ़ जाता है।
5. जले भाग पर टैनिक एसिड, कोई अच्छा मरहम जैसे कि बरनॉल आदि धीरे-धीरे लगाना चाहिए।
6. जले हुए स्थानों पर नारियल का तेल भी लगाने से आराम मिलता है।
7. जले भाग को साफ कपड़े या रुई से ढककर हल्की पट्टी बाँध देनी चाहिए।
8. दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को लगे आघात का उपचार करना चाहिए।
9. जले हुए व्यक्ति को साधारण प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने के उपरान्त शीघ्रतिशीघ्र किसी योग्य चिकित्सक को अवश्य दिखाना चाहिए तथा समुचित उपचार करवाना चाहिए।
In simple words: If someone gets burned, first put out the fire using water, sand, or a blanket. Do not pop any blisters, apply soothing ointments or coconut oil, and take the person to a doctor immediately.

🎯 Exam Tip: Write the points clearly in a numbered list and highlight key steps like not popping blisters to score full marks.

 

Question 3. चक्रवातीय तूफान से क्या आशय है?
Answer: प्रकृति द्वारा संचालित क्रियाओं में से एक अनोखी तथा अत्यधिक विस्मयकारी क्रिया चक्रवातीय तूफान या चक्रवात भी है। चक्रवातीय तूफानों को अमेरिका में सामान्य रूप से ‘हरीकेन’ कहा जाता है। ऑस्ट्रेलिया में इसे ‘विलीविलीज’ तथा चीन में ‘टाइफून’ कहा जाता है। चक्रवातीय तूफान सामान्य रूप से समुद्रतटीय भागों में आया करते हैं। ये अति तीव्र गति से चलने वाली हवाओं के रूप में होते हैं तथा इन हवाओं के साथ-साथ सम्बन्धित क्षेत्र में प्रचण्ड वर्षा भी होती है। सामान्य रूप से हवाओं की गति 400 किमी प्रति घण्टा तक वर्षा 1000 से 1500 मिमी या इससे भी अधिक प्रतिदिन होती है। चक्रवातीय तूफान अल्प समय के लिए ही होते हैं, परन्तु इनसे अत्यधिक क्षति हो जाती है, क्योंकि ये अचानक तथा एकाएक विकराल रूप ग्रहण कर लिया करते हैं। चक्रवातीय तूफानों में हवाओं के न्यून वायुदाब के परिणामस्वरूप समुद्र तल में अत्यधिक लहरें तथा उभार उत्पन्न होते हैं। इस स्थिति में तल से ऊपर की ओर उठने वाली तीव्र गति वाली हवाएँ समुद्र के जल को तट की ओर खींचती हैं। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है तथा बाढ़ की भयंकर स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार तेज हवाओं तथा भारी वर्षा से सम्बन्धित क्षेत्र में जान-माल का भारी नुकसान होता है। चक्रवातों के आने की पूर्व चेतावनी मिलने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए।
In simple words: A cyclonic storm is a powerful, fast-spinning storm with very strong winds and heavy rain that usually hits coastal areas. It causes huge damage to life and property in a very short time.

🎯 Exam Tip: Mention the different regional names of cyclones (like Hurricane in America, Typhoon in China) to make your answer stand out and score full marks.

 

Question 4. चक्रवातीय तूफानों के मुख्य प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
Answer: जैसा कि हम जानते हैं, चक्रवातीय तूफानों की स्थिति में अत्यधिक तेज हवाएँ चलती हैं, वर्षा होती है तथा बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। चक्रवातीय तूफानों के मुख्य प्रतिकूल प्रभाव निम्नलिखित होते हैं। इन प्रभावों के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाता है:
1. चक्रवातीय तूफान के समय जो जलयान सम्बन्धित क्षेत्र में होते हैं, उन्हें बहुत अधिक हानि होती है। यह प्रतिकूल प्रभाव समुद्र में चलते हुए जलयान तथा लंगर डाले खड़े जलयान एवं बन्दरगाह सभी पर पड़ता है।
2. चक्रवात के सम्मुख आने वाले क्षेत्र में हर प्रकार से जान-माल की भारी क्षति होती है।
3. चक्रवातीय तूफान के कारण प्रायः तेज हवाओं के साथ-ही-साथ बाढ़, कीचड़ के प्रवाह तथा भू-स्खलन के माध्यम से भी सम्बन्धित क्षेत्र में गम्भीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं।
4. चक्रवातीय तूफान के बाद सम्बन्धित क्षेत्र में अनेक संक्रामक रोग भी तेजी से फैलने लगते हैं।
5. चक्रवातीय तूफान से सम्बन्धित क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति, पेयजल, यातायात सेवाएँ तथा संचार सेवाएँ भी प्रायः ठप्प हो जाती हैं।
6. चक्रवातीय तूफान से फ़सलों तथा अन्य सम्पत्ति को भी बहुत अधिक हानि होती है।
In simple words: चक्रवाती तूफान अपने साथ तेज हवाएं और भारी बारिश लाते हैं। इससे जहाजों, घरों, फसलों और बिजली-संचार जैसी जरूरी सेवाओं को बहुत नुकसान पहुंचता है।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय सभी 6 बिंदुओं को स्पष्ट रूप से लिखें और मुख्य शब्दों जैसे 'जान-माल की क्षति', 'संक्रामक रोग' और 'संचार सेवाएँ ठप्प' को रेखांकित करें।

 

Question 5. सूखा पड़ने के प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख कीजिए। (2011, 16, 17)
Answer: सूखा एक ऐसी आपदा है जिसके परिणामस्वरूप सम्बन्धित क्षेत्र में जल की कमी या अभाव हो जाता है। यह एक गम्भीर आपदा है तथा इसके विभिन्न प्रतिकूल प्रभाव क्रमशः स्पष्ट होने लगते हैं। सर्वप्रथम सूखे का प्रभाव कृषि-उत्पादनों पर पड़ता है। फसलें सूखने लगती हैं तथा क्षेत्र में खाद्य-पदार्थों की कमी होने लगती है। इस स्थिति में अनाज आदि के दाम बढ़ जाते हैं तथा गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो जाती है। सूखे का प्रतिकूल प्रभाव क्षेत्र के पशुओं पर भी पड़ता है क्योंकि उनको पर्याप्त मात्रा में चारा तथा जल उपलब्ध नहीं हो पाता। इससे क्षेत्र में दूध एवं मांस आदि की भी कमी होने लगती है। कृषि-कार्य घट जाने के कारण अनेक कृषि-श्रमिकों को रोजगार मिलना बन्द हो जाता है तथा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बिगड़ने लगती है। सूखे की दशा में कृषि-उत्पादनों में कमी आ जाती है। इस स्थिति में कृषि आधारित कच्चे माल से सम्बन्धित औद्योगिक संस्थानों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस स्थिति में सम्बन्धित उत्पादों की कमी हो जाती है तथा उनकी कीमत भी बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त किसी क्षेत्र में निरन्तर सूखे की स्थिति बने रहने से वहाँ के निवासी अन्य क्षेत्रों में चले जाते हैं। इससे सामाजिक ढाँचा प्रभावित होता है तथा जनसंख्या का क्षेत्रीय सन्तुलन बिगड़ने लगता है। सूखे की समस्या विकराल हो जाने की स्थिति में बेरोजगारी तथा भुखमरी की समस्याएँ भी प्रबल होने लगती हैं। जल संरक्षण के उचित उपायों द्वारा सूखे के इन दुष्प्रभावों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
In simple words: सूखा पड़ने से पानी और भोजन की भारी कमी हो जाती है। इससे फसलें बर्बाद होती हैं, पशुओं को चारा नहीं मिलता, लोगों का रोजगार छिन जाता है और भुखमरी की नौबत आ जाती है।

🎯 Exam Tip: सूखे के प्रभावों को कृषि, पशुधन, आर्थिक और सामाजिक श्रेणियों में बांटकर लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।

 

Question 6. आपदा-प्रबन्धन का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा वर्तमान समय में इसके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
Answer: यह एक सर्वविदित तथ्य है कि प्राकृतिक आपदाओं से जान-माल की व्यापक हानि होती है तथा इनके दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव भी होते हैं। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आज के वैज्ञानिक युग में आपदा-प्रबन्धन के अन्तर्गत विभिन्न आपदाओं के घटित होने की पूर्व जानकारी प्राप्त करने के अधिक-से-अधिक वैज्ञानिक उपाय किये जा रहे हैं। उदाहरण के लिए बाढ़, सुनामी, सूखा, चक्रवात आदि आने से पूर्व जानकारी प्राप्त की जाती है। इस जानकारी को ध्यान में रखते हुए सम्बन्धित क्षेत्र में पूर्व तैयारियाँ तथा बचाव के उपाय किये जाते हैं, उदाहरणस्वरूप बाढ़ की चेतावनी प्राप्त होते ही लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर जाते हैं। आपदा-प्रबन्धन के अन्तर्गत इस बात के भी सभी सम्भव उपाय किये जाते हैं जिससे आपदा के कारण कम-से-कम क्षति हो। इसके अतिरिक्त आपदा के आने के उपरान्त किये जाने वाले बचाव-कार्य भी आपदा प्रबन्धन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आधुनिक तकनीक और त्वरित निर्णय क्षमता आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाते हैं।
In simple words: आपदा प्रबंधन का मतलब है मुसीबतों (जैसे बाढ़ या तूफान) के आने से पहले तैयारी करना ताकि नुकसान कम से कम हो, और आपदा के बाद लोगों की मदद करना।

🎯 Exam Tip: आपदा प्रबंधन के दो मुख्य पहलुओं—'आपदा से पूर्व की तैयारी' और 'आपदा के बाद के बचाव कार्य'—को स्पष्ट रूप से समझाएं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. प्राकृतिक आपदा का अर्थ बताइए। (2017)
Answer: प्राकृतिक आपदाएँ उन गम्भीर प्राकृतिक घटनाओं को कहा जाता है, जिनके प्रभाव से हमारे सामाजिक ढाँचे व विभिन्न व्यवस्थाओं को गम्भीर क्षति पहुँचती है। इनसे मनुष्यों एवं अन्य जीव-जन्तुओं के जीवन को नुकसान होता है तथा हर प्रकार की सम्पत्ति को भी नुकसान होता है। इस प्रकार की आपदाओं से मनुष्यों का सामाजिक-आर्थिक जीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसे में जनजीवन को पुनः सामान्य बनाने के लिए तथा पुनर्वास के लिए व्यापक स्तर पर बाहरी सहायता की आवश्यकता होती है। वर्तमान समय में विश्व मानव प्राकृतिक आपदाओं के प्रति पर्याप्त सचेत है तथा इन अवसरों पर विश्व के कोने-कोने से सहायता एवं सहानुभूति प्राप्त हो जाती है। प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित राहत कार्य और आपसी सहयोग अत्यंत आवश्यक होता है।
In simple words: प्राकृतिक आपदा का मतलब ऐसी अचानक आने वाली प्राकृतिक मुसीबतें हैं जो जान-माल और समाज को भारी नुकसान पहुँचाती हैं। जैसे बाढ़ या भूकंप, जिससे लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय 'सामाजिक ढाँचे को क्षति' और 'जनजीवन का अस्त-व्यस्त होना' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 2. आग लगने के मुख्य प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
Answer: आग लगने से सबसे गम्भीर आशंका व्यक्तियों के जलने या झुलसने की होती है। आग की लपट लग जाने या कपड़ों में आग लग जाने पर व्यक्ति जल सकता है। आग से निकलने वाली गर्म हवा लग जाने से व्यक्ति झुलस सकता है। जलने तथा झुलसने से व्यक्ति के शरीर पर लगभग समान प्रभाव ही पड़ते हैं। इस स्थिति में शरीर की त्वचा लाल पड़ जाती है, फफोले पड़ जाते हैं, त्वचा के तन्तु नष्ट हो जाते हैं और अत्यधिक पीड़ा होती है। जब कोई अंग बहुत अधिक जल जाता है तो दिल की घबराहट अथवा आघात का भय रहता है। त्वचा के अधिक जलने पर अनेक प्रकार के संक्रमण की भी आशंका बढ़ जाती है। यह संक्रमण प्रायः घातक सिद्ध होता है। जलने के प्रभाव से व्यक्ति के गुर्दों, यकृत आदि आन्तरिक अंगों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है जो गम्भीर समस्या उत्पन्न कर देता है। जलने से व्यक्ति को गहरा मानसिक आघात या सदमा भी पहुँचता है। इसका भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गम्भीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आग से होने वाली शारीरिक क्षति के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
In simple words: आग लगने से शरीर बुरी तरह जल सकता है, त्वचा पर फफोले पड़ सकते हैं और असहनीय दर्द होता है। इसके अलावा, शरीर के अंदरूनी अंगों पर बुरा असर पड़ता है और व्यक्ति को गहरा मानसिक सदमा भी लग सकता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में शारीरिक प्रभावों (त्वचा का जलना, संक्रमण) के साथ-साथ आंतरिक अंगों और मानसिक प्रभाव का भी उल्लेख करना न भूलें।

 

Question 3. ‘जंगल की आग’ पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: आग लगने की दुर्घटना का एक रूप या प्रकार ‘जंगल की आग’ भी है। जंगल की आग को ‘दावानल’ कहते हैं। जंगल में आग प्रायः तीन कारणों से लग जाती है। जंगल में कुछ पेड़ ऐसे भी होते हैं जो आपस में रगड़ या घर्षण के कारण आग उत्पन्न कर देते हैं। तेज गर्मी के मौसम में इस प्रकार की घर्षण से प्रायः जंगलों में आग लग जाती है। इसके अतिरिक्त लापरवाही से भी आग लग जाती है। जंगल में विचरण करने वाले व्यक्ति द्वारा जलती हुई माचिस, बीड़ी-सिगरेट या उपले आदि से सूखे पत्तों में आग लग जाती है। तथा हवा से फैलकर भयंकर रूप ग्रहण कर लेती है। इसके अतिरिक्त कुछ स्वार्थी एवं समाज-विरोधी व्यक्ति भी जंगल में आग लगा दिया करते हैं। ये लोग कृषि योग्य भूमि ग्रहण करने के लिए पेड़ों की कटाई या भूमि अधिग्रहण के निहित स्वार्थ से जंगल में आग लगा देते हैं। जंगल में लगने वाली आग अति भयंकर एवं व्यापक होती है। इसे नियन्त्रित करना या बुझाना प्रायः एक कठिन कार्य होता है। यह आग या तो जंगल समाप्त होने पर बुझती है अथवा तेज वर्षा हो जाने पर ही बुझती है। जंगल की आग से अनेक हानियाँ हो जाती हैं। सर्वप्रथम वन सम्पदा की अत्यधिक हानि होती है। इसके साथ-ही-साथ वनों में रहने वाले पशु-पक्षियों का जीवन भी गम्भीर रूप से प्रभावित होता है। इसके अतिरिक्त जंगल की आग से पर्यावरण का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है तथा पर्यावरण-प्रदूषण में भी वृद्धि होती है। दावानल के कारण बहुमूल्य जड़ी-बूटियाँ और वनस्पतियाँ भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाती हैं।
In simple words: जंगल में लगने वाली आग को 'दावानल' कहते हैं। यह पेड़ों की आपसी रगड़, मानवीय लापरवाही या स्वार्थी लोगों द्वारा लगाई जाती है, जिससे वन संपदा, वन्यजीवों और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचता है।

🎯 Exam Tip: 'दावानल' शब्द को रेखांकित करें और आग लगने के तीनों कारणों (प्राकृतिक, लापरवाही और स्वार्थ) को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 4. ‘समुद्र की आग’ पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: आग लगने की दुर्घटना का एक रूप या प्रकार ‘समुद्र की आग’ भी है। समुद्र की आग को बड़वानल भी कहते हैं। यह सत्य है कि समुद्र जल का अथाह भण्डार होता है। ऐसे में समुद्र में आग लगना एक आश्चर्य की बात प्रतीत होती है परन्तु यथार्थ में समुद्र में प्रायः आग लगने की दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। समुद्र में आग लगने का कारण समुद्र में विद्यमान तेल के भण्डारों अथवा प्राकृतिक गैस में आग लगना हुआ करता है। यह आग समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जलीय जीवों के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित होती है।
In simple words: समुद्र में लगने वाली आग को 'बड़वानल' कहा जाता है। पानी के बीच आग लगना अजीब लगता है, लेकिन यह समुद्र के नीचे मौजूद तेल के कुओं या प्राकृतिक गैस में रिसाव और आग लगने के कारण होता है।

🎯 Exam Tip: समुद्र की आग के लिए 'बड़वानल' शब्द का प्रयोग करें और इसका मुख्य कारण 'तेल भंडारों या प्राकृतिक गैस में आग लगना' जरूर लिखें।

 

Question 5. आग लगने से बचाव के लिए अस्थायी पण्डालों में क्या उपाय किए जाने चाहिए?
Answer: विभिन्न समारोहों के आयोजन के लिए प्रायः पण्डाल लगाये जाते हैं। इन पण्डालों में आग लगने की कुछ अधिक आशंका रहती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए आग से सुरक्षा के लिए कुछ उपायों को अपनाना आवश्यक माना जाता है। इस प्रकार के कुछ मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं:
1. पण्डाल बनाने में सिंथेटिक कपड़ों, रस्सियों तथा अन्य सामग्री का इस्तेमाल न किया जाए।
2. पण्डाल कभी भी बिजली की तारों के नीचे या बहुत निकट नहीं लगाया जाना चाहिए।
3. पण्डाल के चारों ओर पर्याप्त खुला स्थान होना चाहिए ताकि आपदा के समय सरलता से बाहर जा सकें।
4. पण्डाल का द्वार कम-से-कम पाँच मीटर चौड़ा होना चाहिए तथा निकास द्वार अधिक-से-अधिक होने चाहिए।
5. पण्डाल में लगी कुर्सियों की कतारों में कम-से-कम डेढ़ मीटर की दूरी अवश्य होनी चाहिए।
6. बिजली का सर्किट तथा जेनरेटर आदि पण्डाल से कम-से-कम 15 मीटर दूर होने चाहिए।
7. अग्नि-सुरक्षा के यथासंभव अधिक-से-अधिक उपाय किये जाने चाहिए। पानी, रेत, आग बुझाने वाली गैस आदि की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
8. पण्डाल के अन्दर ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखे जाने चाहिए।
9. पण्डाल में अमोनियम सल्फेट, अमोनियम कार्बोनेट, बोरेक्स, बोरिक एसिड, एलम तथा पानी का घोल बनाकर छिड़काव किया जाना चाहिए। इन सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन करने से बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है।
In simple words: To prevent fires in temporary tents (pandals), we should avoid synthetic materials, keep them away from electric wires, ensure wide exits, keep space between chairs, and keep fire safety items like water and sand ready.

🎯 Exam Tip: Memorize at least 5 key points clearly, especially those related to electrical safety and exit width, to score full marks.

 

Question 6. बाढ़ के समय मुख्य रूप से क्या सावधानियाँ आवश्यक होती हैं?
Answer: बाढ़ के समय सबसे अधिक आवश्यक कार्य है-मनुष्य की जान बचाना। इसके लिए आवश्यक है कि यथासंभव शीघ्रतातिशीघ्र बाढ़ग्रस्त क्षेत्र से निकल जाएँ तथा किसी ऊँचे सुरक्षित स्थान पर पहुँच जाएँ। यदि मकान काफी मजबूत हो तो मकान की ऊपरी मंजिल पर चढ़ जाएँ। यदि मकान मजबूत न हो तो मकान से बाहर निकल जाएँ। बाढ़ के समय पेड़ों पर न चढ़ें क्योंकि पेड़ भी जड़ से ही उखड़ सकते हैं। यदि घर में रबड़ की ट्यूब हो तो उनको हवा भरकर अपने साथ रखें। बाढ़ के दौरान बहते पानी में चलने या गाड़ी चलाने की कोशिश कभी नहीं करनी चाहिए।
In simple words: During a flood, the main goal is to save lives by moving to high, safe ground. Avoid climbing trees as they can get uprooted, and use rubber tubes as floatation devices if available.

🎯 Exam Tip: Highlight the point about not climbing trees and moving to higher floors/safe areas, as these are critical safety measures examiners look for.

 

Question 7. बाढ़ के उपरान्त किये जाने वाले कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: सामान्य रूप से बाढ़ का प्रकोप कुछ समय में घटने लगता है, परन्तु बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में पानी, कीचड़, गन्दगी तथा सीलन बहुत अधिक हो जाती है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य अति आवश्यक होते हैं: घरों तथा गलियों में सफाई की व्यवस्था करें, पानी की निकासी के उपाय करें तथा कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें जिससे संक्रामक रोगों से बचाव हो सके। साफ पेय जल की व्यवस्था करें और जहाँ तक हो सके जल उबालकर ही पिएँ। चिकित्सकों से सम्पर्क बनाये रखें तथा संक्रामक रोगों से बचने के सभी सम्भव उपाय करें। बाढ़ग्रस्त लोगों को भारी नुकसान हो जाता है, अतः अन्य क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तथा सरकारी तन्त्र को बाढ़ग्रस्त लोगों की हर सम्भव सहायता करनी चाहिए। भोजन एवं कपड़ों आदि की तुरन्त पूर्ति होनी चाहिए। महामारी फैलने से रोकने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: After a flood, clean the mud and dirt, spray disinfectants to stop diseases, drink boiled water, and help victims with food and clothes.

🎯 Exam Tip: Divide the post-flood measures into health/hygiene steps and community help steps to make your answer structured and easy to read.

 

Question 8. भूकम्प आपदा के समय आवश्यक सावधानियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: यह सत्य है कि भूकम्प आकस्मिक रूप से आता है। भूकम्प के आने पर मानसिक सन्तुलन बनाये रखें तथा अधिक घबराएँ नहीं। इस समय कुछ सावधानियाँ नितान्त आवश्यक होती हैं। सामान्य रूप से आप जहाँ हों, वहीं टिके रहें। यदि हो सके तो दीवारों, छतों और दरवाजों से दूर रहें। इसके साथ-ही-साथ दीवारों के टूटने तथा मलबा गिरने पर ध्यान रखें तथा बचाव के उपाय करें। भूकम्प के समय यदि आप किसी वाहन में हों तो वाहन को सुरक्षित स्थान पर रोककर उसमें से बाहर खुले में आ जाएँ। भूकम्प के समय लिफ्ट का उपयोग न करें और सीढ़ियों का ही प्रयोग करें।
In simple words: During an earthquake, stay calm and do not panic. Stay away from walls and heavy objects, stop your vehicle in a safe open area if driving, and avoid using elevators.

🎯 Exam Tip: Mentioning "maintaining mental balance/not panicking" and "avoiding elevators" are key points that fetch full marks in earthquake safety questions.

 

Question 9. भूकम्प आपदा के पश्चात् किए जाने वाले कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: सामान्य रूप से भूकम्प की प्रबलता अल्प समय के लिए ही होती है, परन्तु अल्प समय में ही अचानक गम्भीर प्रतिकूल प्रभाव हो जाते हैं। भूकम्प के पश्चात् भी बहुत सजग रहना आवश्यक होता है। इस समय परिवार के बच्चों तथा वृद्ध सदस्यों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। इस समय घर में गैस के सिलेंडर को बन्द रखें तथा आग न जलाएँ। रेडियो तथा दूरदर्शन को चलाए रखें, सभी आवश्यक घोषणाओं को ध्यानपूर्वक सुनें तथा आवश्यक कार्य करें। भूकम्प से क्षतिग्रस्त होने वाले मकानों से दूर ही रहें। यदि भूकम्प के हल्के झटके आ रहे हों तो उनसे डरें नहीं। ऐसा कुछ समय तक होता रहता है। जहाँ जिस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है, उस कार्य को अवश्य करें। तुरन्त सहायता उपलब्ध हो जाने पर अनेक व्यक्तियों की जान बचाई जा सकती है। अपने क्षेत्र में यथासम्भव सफाई व्यवस्था को बनाये रखें ताकि संक्रामक रोगों से बचा जा सके। आपदा के समय धैर्य बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
In simple words: After an earthquake, we must stay very alert. We should turn off gas cylinders, listen to news updates, help others, and keep our surroundings clean to prevent diseases.

🎯 Exam Tip: Mention key safety measures like turning off gas cylinders, staying away from damaged buildings, and keeping emergency broadcasts on to score full marks.

 

Question 10. संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-‘भूकम्प की भविष्यवाणी’।
Answer: भूकम्प की भविष्यवाणी करने में निम्नलिखित बिन्दुओं का विशेष महत्त्व है:
1. किसी क्षेत्र में हो रही भूगर्भीय गतियों का उस क्षेत्र में हो रहे भू-आकृति परिवर्तनों से अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसे क्षेत्र जहाँ भूमि ऊपर-नीचे होती रहती है, अत्यधिक भूस्खलन होते हैं, नदियों का असामान्य मार्ग परिवर्तन होता है, प्रायः भूकम्प की दृष्टि से संवेदनशील होते हैं।
2. किसी क्षेत्र में सक्रिय अंशों, जिन दरारों से भूखण्ड टूटकर विस्थापित भी हुए हों, की उपस्थिति को भूकम्प का संकेत माना जा सकता है। इस प्रकार के भ्रंशों की गतियों को समय के अनुसार तथा अन्य उपकरणों से नापा जा सकता है।
3. भूकम्प संवेदनशील क्षेत्रों में भूकम्पमापी यन्त्र (Seismograph) लगाकर विभिन्न भूगर्भीय गतियों को रिकॉर्ड किया जाता है। इस अध्ययन से बड़े भूकम्प आने की पूर्व चेतावनी मिल जाती है। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकें इन संकेतों का विश्लेषण करने में लगातार सुधार कर रही हैं।
In simple words: Predicting earthquakes involves studying changes in the land, tracking active cracks in the earth, and using a machine called a seismograph to record underground movements.

🎯 Exam Tip: Clearly list the three main indicators (land changes, active faults, and seismograph readings) using numbered lists for better presentation.

 

Question 11. प्रतिबल की समस्या एवं उसके निराकरण के बारे में लिखिए। (2011)
Answer: गम्भीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने वाला व्यक्ति प्रायः प्रतिबल (Stress) का शिकार हो जाता है। प्रतिबल मुख्य रूप से समायोजनात्मक प्रक्रियाओं से सम्बन्धित होता है। प्रबल प्रतिबल की स्थिति में सम्बन्धित व्यक्ति को अपने व्यवहार में अनेक प्रकार के समायोजन करने पड़ते हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि यदि प्रतिबल सामान्य स्तर का है तो वह व्यक्तित्व के विकास में सहायक सिद्ध होता है, परन्तु निरन्तर प्रबल तथा गम्भीर प्रतिबल व्यक्तित्व के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि व्यक्ति को प्रबल प्रतिबल से बचने के उपाय करने चाहिए। इनके लिए प्रायः दो प्रकार की प्रतिक्रियाएँ की जा सकती हैं—प्रथम प्रकार की प्रतिक्रियाएँ कार्य निर्देशित प्रतिक्रियाएँ कहलाती हैं। इस प्रकार की प्रतिक्रियाओं में प्रतिबल निग्रस्त व्यक्ति समायोजन के लिए अपने आप में, परिष्करण में या दोनों में अपने अनुकूल परिवर्तन करने के उपाय करता है।

इस प्रकार की प्रतिक्रिया भी तीन प्रकार की हो सकती है। इन्हें क्रमशः आक्रमण, पलायन तथा समझौता कहा गया है:
1. आक्रमण के अन्तर्गत व्यक्ति प्रतिबल के कारण या बाधा की समाप्त करने के उपाय करता है। इस उपाय को अपनाने से व्यक्ति निराश नहीं होता तथा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रायः सफल हो जाता है।
2. द्वितीय उपाय पलायन है। पलायन के अन्तर्गत व्यक्ति सम्बन्धित समस्या का सामना नहीं करता, बल्कि उससे दूर भागता है।
3. तीसरा उपाय समझौता है। इस उपाय को उस स्थिति में अपनाया जाता है जब न तो आक्रमण सम्भव है और न ही पलायन। यह एक मध्यममार्गी उपाय है। मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए इन प्रतिक्रियाओं को समझना बेहद आवश्यक है।
In simple words: Stress happens when we face difficult situations like disasters. To handle stress, people usually react in three ways: fighting the problem (attack), running away from it (flight), or finding a middle ground (compromise).

🎯 Exam Tip: Explain both the positive and negative aspects of stress on personality, and clearly define the three coping mechanisms (attack, flight, compromise) to secure maximum marks.

 

Question 12. प्राकृतिक आपदाओं के कारण पड़ने वाले किन्हीं दो मनोवैज्ञानिक प्रभावों के बारे में लिखिए। या प्राकृतिक आपदा के दौरान चिन्ताग्रस्त व्यक्ति के लक्षणों के बारे में लिखिए। (2018)
Answer: प्राकृतिक आपदाओं के कारण व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे व्यक्ति विभिन्न साधारण अथवा गंभीर मानसिक रोगों का शिकार हो सकता है। वह निरन्तर चिन्ताग्रस्त रहता है। ऐसे में व्यक्ति कुण्ठा, अकारण भय, अति चिन्ता, तनाव आदि का शिकार हो सकता है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण व्यक्ति का सामान्य व्यवहार भी विकृत हो सकता है। व्यक्ति के व्यवहार में अस्थिरता, खीज, आक्रामकता या उत्साहहीनता के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। अति गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के कारण व्यक्ति में निराशावादी प्रवृत्ति प्रबल हो सकती है तथा इसकी प्रबलता इतनी बढ़ सकती है कि व्यक्ति आत्महत्या तक कर सकता है। प्राकृतिक आपदाओं के बाद मनोवैज्ञानिक सहायता और परामर्श व्यक्ति को पुनः सामान्य जीवन में लौटने में मदद करते हैं।
In simple words: प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोग बहुत अधिक तनाव, डर और चिंता महसूस करने लगते हैं। उनका व्यवहार चिड़चिड़ा या आक्रामक हो सकता है, और गंभीर मामलों में वे पूरी तरह निराश हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय 'मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव', 'चिंताग्रस्त' और 'निराशावादी प्रवृत्ति' जैसे मुख्य मनोवैज्ञानिक शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।

Nिश्चित उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्दों द्वारा कीजिए:
1. जीवन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली प्राकृतिक घटनाओं को ………….कहा जाता है।
2. भूकम्प, ज्वालामुखी का विस्फोट, बादल का फटना तथा सूनामी …………….प्राकृतिक आपदाएँ हैं। (2010, 11)
3. युद्ध, दंगा, आतंकवादी हमला ………….आपदाएँ हैं।
4. आग लगना या अग्निकाण्ड मानवीय………’या ’…………के कारण घटित होता है।
5. अधिकांश प्राकृतिक आपदाएँ…………. रूप से घटित होती हैं।
6. सूनामी, चक्रवात, सूखा, बाढ़……………आपदाएँ हैं। (2011)
7. युद्ध तथा साम्प्रदायिक दंगे…………..आपदा नहीं है।
8. सूखा एक………….वाली प्राकृतिक आपदा है।
9. सूखे का सर्वाधिक प्रभाव………..पर पड़ता है। (2010)
10. बाढ़ से……….:” एवं…………की हानि होती है।
11. भूकम्प के कारण सर्वाधिक हानि ………….के कारण होती है।
12. भूकम्प की तीव्रता की माप के लिए:……….’को अपनाया गया है।
13. सुनामी से सर्वाधिक क्षति ……………..‘में होती है।
14. प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति को कम करने के लिए………….आवश्यक है।
15. गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव से व्यक्ति में………..”प्रवृत्ति प्रबल हो जाती है।
16. समुद्र में गर्म पानी के तापमान और दबाव के कारण…………”उत्पन्न होता है। (2016)
17. प्राकृतिक आपदा के दौरान भय, असहायता और भारी हानि के कारण व्यक्ति में ………….. विचार उत्पन्न होते हैं। (2017)
Answer:
1. प्राकृतिक आपदा
2. आकस्मिक
3. मानव जनित
4. लापरवाही, दुर्भावना
5. आकस्मिक
6. प्राकृतिक
7. प्राकृतिक
8. धीरे-धीरे आने
9. कृषि कार्य एवं कृषि उत्पादों
10. फसलों, आवासीय क्षेत्रों
11. भवनों के गिरने
12. रिक्टर स्केल
13. तटीय क्षेत्रों
14. आपदा प्रबन्धन
15. निराशावादी
16. समुद्री तूफान
17. नकारात्मक
In simple words: रिक्त स्थानों को भरकर वाक्यों को पूरा किया गया है ताकि प्राकृतिक और मानव-जनित आपदाओं के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति वाले प्रश्नों में सही तकनीकी शब्दों (जैसे 'रिक्टर स्केल', 'आपदा प्रबन्धन') का सटीक प्रयोग करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

प्रश्न II. निम्नलिखित प्रश्नों का निश्चित उत्तर एक शब्द अथवा एक वाक्य में दीजिए

 

Question 1. गंभीर आपदाओं से क्या आशय है?
Answer: गंभीर आपदाओं से आशय उन विनाशकारी प्राकृतिक या मानव-जनित घटनाओं से है जो बड़े पैमाने पर जान-माल, संपत्ति और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाती हैं और सामान्य जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर देती हैं। ये घटनाएँ समाज की सामान्य सहन क्षमता से परे होती हैं।
In simple words: गंभीर आपदाएं वे बड़ी मुसीबतें या दुर्घटनाएं होती हैं जो बहुत सारे लोगों की जान और माल को भारी नुकसान पहुंचाती हैं और सब कुछ तबाह कर देती हैं।

🎯 Exam Tip: एक वाक्य वाले उत्तर में 'जान-माल की भारी हानि' और 'सामान्य जीवन का अस्त-व्यस्त होना' जैसे मुख्य वाक्यांशों को अवश्य शामिल करें।

 

Question 2. मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ कौन-कौन सी हैं? (2010)
Answer: भूकम्प, बाढ़, सूखा, भूस्खलन, ज्वालामुखी का फटना, तूफान, समुद्री तूफान, ओलावृष्टि, बादल फटना तथा सुनामी या समुद्री लहरें आदि मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ हैं। ये आपदाएं बिना किसी पूर्व चेतावनी के आती हैं और बड़े पैमाने पर तबाही मचाती हैं।
In simple words: Natural disasters are sudden extreme events caused by nature, like earthquakes, floods, or landslides, that cause great damage to life and property.

🎯 Exam Tip: Mention at least 4-5 major natural disasters like earthquakes, floods, and landslides to secure full marks.

 

Question 3. आपदाओं के मुख्य वर्गों का उल्लेख कीजिए।
Answer: आपदाओं के मुख्य रूप से चार वर्ग निर्धारित किये गये हैं—
1. आकस्मिक रूप से घटित होने वाली आपदाएँ
2. धीरे-धीरे अथवा क्रमशः आने वाली आपदाएँ
3. मानव जनित अथवा सामाजिक आपदाएँ तथा
4. जैविक आपदाएँ या महामारी। इन चारों वर्गों का वर्गीकरण आपदा के आने की गति और उसके कारणों के आधार पर किया गया है।
In simple words: Disasters are grouped into four main types based on how fast they happen and what causes them, ranging from sudden events to slow-moving ones like droughts.

🎯 Exam Tip: Remember to list all four categories in a neat numbered list as shown in the textbook.

 

Question 4. आकस्मिक रूप से घटित होने वाली मुख्य प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: भूकम्प, ज्वालामुखी का विस्फोट, सुनामी, बादल का फटना, चक्रवातीय तूफान, भू-स्खलन तथा हिम की आँधी आकस्मिक रूप से घटित होने वाली मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ हैं। ये आपदाएं इतनी तेजी से आती हैं कि लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थान पर जाने का समय नहीं मिलता।
In simple words: Sudden natural disasters are events like earthquakes or volcanic eruptions that happen instantly without warning, giving people no time to prepare.

🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between sudden (instant) disasters and slow-onset disasters by giving specific examples like earthquakes.

 

Question 5. धीरे-धीरे अथवा क्रमशः आने वाली मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: सूखा, अकाल, किसी क्षेत्र का मरुस्थलीकरण तथा मौसम एवं जलवायु सम्बन्धी परिवर्तन धीरे-धीरे अथवा क्रमशः आने वाली मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ हैं। इन आपदाओं का प्रभाव लंबे समय तक रहता है और ये धीरे-धीरे पूरे जनजीवन को प्रभावित करती हैं।
In simple words: Slow-onset disasters are events like droughts or climate change that develop gradually over months or years, making them hard to notice at first.

🎯 Exam Tip: Use keywords like 'drought' (सूखा) and 'desertification' (मरुस्थलीकरण) when describing slow-onset disasters.

 

Question 6. हमारे जीवन में आग का क्या स्थान है?
Answer: हमारे जीवन में आग का महत्त्वपूर्ण स्थान है। आग एक अति महत्त्वपूर्ण एवं प्रबल कारक है, जो मानव-जीवन के लिए उपयोगी एवं सहायक है। आदिम काल से ही आग ने मानव सभ्यता के विकास और दैनिक कार्यों को सुगम बनाने में मुख्य भूमिका निभाई है।
In simple words: Fire is very important in our daily lives because we use it for cooking, warmth, and running industries.

🎯 Exam Tip: Highlight both the utility and importance of fire in human civilization to write a balanced answer.

 

Question 7. आग लगने या ‘अग्निकाण्ड’ से क्या आशय है?
Answer: आग का अनियंत्रित होकर विनाशकारी रूप ग्रहण कर लेना ही ‘आग लगना’ या ‘अग्निकाण्ड’ कहलाती है। यह स्थिति जान-माल की भारी हानि का कारण बनती है और इसे नियंत्रित करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
In simple words: When fire goes out of control and starts destroying buildings, forests, or homes, it is called a fire disaster or outbreak.

🎯 Exam Tip: Define 'fire outbreak' clearly by emphasizing the word 'uncontrolled' (अनियंत्रित) to get full marks.

 

Question 8. आग के नितान्त अभाव में हमारा कौन-सा महत्त्वपूर्ण कार्य सम्पन्न नहीं हो सकता?
Answer: आग के नितान्त अभाव में भोजन पकाने अर्थात् पाक-क्रिया का कार्य सम्पन्न नहीं हो सकता। इसके बिना हमें कच्चे भोजन पर निर्भर रहना पड़ेगा जो स्वास्थ्य और पाचन के लिए अनुकूल नहीं होता।
In simple words: Without fire, we would not be able to cook our food, which is essential for our survival and health.

🎯 Exam Tip: Keep this answer short and direct, focusing on 'cooking food' (भोजन पकाने) as the primary activity.

 

Question 9. आग लगने पर सबसे गम्भीर आशंका क्या होती है?
Answer: आग लगने पर सबसे गम्भीर आशंका व्यक्तियों के जलने या झुलसने की होती है। इससे व्यक्तियों की मृत्यु भी हो सकती है। इसके अलावा जहरीले धुएं से दम घुटने का खतरा भी हमेशा बना रहता है।
In simple words: The biggest danger during a fire is that people can get severely burned or even lose their lives.

🎯 Exam Tip: Mention both physical burns (जलने या झुलसने) and the risk of death to write a complete answer.

 

Question 10. सूखे से क्या आशय है?
Answer: किसी क्षेत्र में मनुष्यों, पशुओं तथा कृषि-कार्यों के लिए सामान्य आवश्यकता से काफी कम मात्रा में जल की उपलब्ध होना ‘सूखा पड़ना’ कहलाता है। यह स्थिति लंबे समय तक वर्षा न होने या जल स्रोतों के सूख जाने के कारण उत्पन्न होती है।
In simple words: A drought happens when an area does not get enough rain for a long time, leading to a severe shortage of water for people, animals, and crops.

🎯 Exam Tip: Clearly state that drought is a shortage of water relative to the normal needs of humans, animals, and agriculture.

Question 11. सूखे का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव किस पर पड़ता है?
Answer: सूखे का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव कृषि-कार्यों तथा कृषि उत्पादों पर पड़ता है। इससे किसानों की आजीविका और देश की खाद्य सुरक्षा पर भी गहरा असर होता है।
In simple words: Drought affects farming and crops the most because plants cannot grow without water.

🎯 Exam Tip: Clearly mention 'कृषि-कार्यों' (farming activities) and 'कृषि उत्पादों' (agricultural products) to get full marks.

 

Question 12. अनावृष्टि के परिणामस्वरूप कौन-सी आपदा उत्पन्न हो सकती है?
Answer: अनावृष्टि के परिणामस्वरूप सूखे की आपदा उत्पन्न हो सकती है। पानी की भारी कमी के कारण पूरा क्षेत्र बंजर हो जाता है।
In simple words: When there is no rainfall (anavrishti) for a long time, it leads to a severe drought.

🎯 Exam Tip: Connect 'अनावृष्टि' (lack of rain) directly with 'सूखा' (drought) in your answer.

 

Question 13. बाढ़ से क्या आशय है?
Answer: उन क्षेत्रों का जलमग्न हो जाना बाढ़ कहलाता है, जिन क्षेत्रों में सामान्य दशाओं में जल-भराव नहीं होता। यह स्थिति अत्यधिक वर्षा या नदियों के उफान पर होने के कारण उत्पन्न होती है।
In simple words: Flood means flooding of land areas that are normally dry, usually due to heavy rains.

🎯 Exam Tip: Define flood as the submergence of normally dry land areas to secure full marks.

 

Question 14. किसी क्षेत्र में भयंकर बाढ़ आने के उपरान्त किस अन्य आपदा के आने की आशंका बढ़ जाती है?
Answer: किसी क्षेत्र में भयंकर बाढ़ आने के उपरान्त संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ जाती हैं। दूषित पानी और गंदगी के कारण बीमारियां तेजी से फैलती हैं।
In simple words: After a flood, dirty water accumulates, which easily spreads infectious diseases.

🎯 Exam Tip: Remember to mention 'संक्रामक रोगों' (infectious diseases) as the secondary disaster after floods.

 

Question 15. भूकम्प के परिणामस्वरूप सर्वाधिक हानि किस कारण से होती है?
Answer: भूकम्प के परिणामस्वरूप सर्वाधिक हानि मकानों के गिरने के कारण होती है। कमजोर संरचनाएं इस झटके को सहन नहीं कर पाती हैं।
In simple words: Most damage during an earthquake happens when buildings and houses collapse on people.

🎯 Exam Tip: Focus on 'मकानों के गिरने' (collapse of houses/buildings) as the primary cause of damage.

 

Question 16. भूकम्प की तीव्रता के मापन के पैमाने को क्या कहते हैं?
Answer: भूकम्प की तीव्रता के मापन के पैमाने को ‘रिक्टर स्केल’ या ‘रिक्टर पैमाना’ कहते हैं। यह पैमाना भूकंपीय तरंगों की ऊर्जा को मापता है।
In simple words: The tool used to measure how strong an earthquake is is called the Richter scale.

🎯 Exam Tip: Write 'रिक्टर स्केल' (Richter scale) clearly as it is the key term examiners look for.

 

Question 17. सूनामी से क्या आशय है?
Answer: जब समुद्री लहरें तेज गति से तट की ओर बढ़ती हैं तो उन्हें सूनामी कहते हैं। इन लहरों की ऊँचाई लगभग 15 मीटर तथा गति 50 किमी प्रति घण्टा तक हो सकती है। ये लहरें तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचाती हैं।
In simple words: Tsunami is a series of giant ocean waves caused by earthquakes under the sea that rush towards the coast.

🎯 Exam Tip: Mention both the height (15 meters) and speed (50 km/h) of the waves to score full marks.

 

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों में दिये गये विकल्पों में से सही विकल्प का चुनाव कीजिए

 

Question 1. आपदा हो सकती है।
(a) आकस्मिक आपदा
(b) धीरे-धीरे आने वाली आपदा
(c) जैविक आपदा
(d) इनमें से किसी भी प्रकार की आपदा
Answer: (d) इनमें से किसी भी प्रकार की आपदा
In simple words: Disasters can come in many forms—suddenly, slowly, or biologically—so any of these can be a disaster.

🎯 Exam Tip: Read all options carefully before choosing, as disasters can be of various types.

 

Question 2. संक्रामक रोगों का भयंकर प्रकोप किस वर्ग की आपदा है?
(a) प्राकृतिक आपदा
(b) मानव जनित आपदा
(c) जैविक आपदा
(d) अस्पष्ट आपदा
Answer: (c) जैविक आपदा
In simple words: Infectious diseases are caused by living organisms like viruses or bacteria, making them biological disasters.

🎯 Exam Tip: Diseases and epidemics always fall under the category of 'जैविक आपदा' (biological disasters).

 

Question 3. निम्नलिखित में से कौन प्राकृतिक आपदा नहीं है? (2008, 10, 14)
(a) सूखा
(b) भुखमरी/युद्ध
(c) बाढ़
(d) भूकम्प
Answer: (b) भुखमरी/युद्ध
In simple words: Natural disasters are caused by nature, like droughts or earthquakes. Starvation and war are caused by human actions, so they are not natural disasters.

🎯 Exam Tip: Remember that disasters caused by human conflict or social issues are classified as man-made, not natural.

 

Question 4. निम्नलिखित में से कौन प्राकृतिक आपदा नहीं है?
(a) भूकम्प
(b) साम्प्रदायिक दंगा
(c) बाढ़
(d) सुनामी
Answer: (b) साम्प्रदायिक दंगा
In simple words: Riots are caused by conflicts between groups of people, making them man-made events rather than natural disasters like earthquakes or tsunamis.

🎯 Exam Tip: Carefully distinguish between environmental events (natural) and social conflicts (man-made) to answer correctly.

 

Question 5. निम्नलिखित में से कौन मानव निर्मित आपदा से सम्बन्धित है? (2018)
(a) बाढ़
(b) नाभकीय परीक्षण
(c) सूखा
(d) चक्रवात
Answer: (b) नाभकीय परीक्षण
In simple words: Nuclear testing is done by humans and can cause severe harm, which makes it a man-made disaster, unlike floods or cyclones.

🎯 Exam Tip: Look for activities involving technology or scientific experiments, as these are always classified as man-made hazards.

 

Question 6. बाढ़, भूकम्प, चक्रवात तथा सूखा आदि आपदाओं के पीछे निहित कारक होते हैं
(a) दैवी प्रकोप सम्बन्धी कारक
(b) पाप में वृद्धि सम्बन्धी कारक
(c) प्राकृतिक कारक
(d) मानव द्वारा पर्यावरण-प्रदूषण में वृद्धि
Answer: (c) प्राकृतिक कारक
In simple words: Events like earthquakes, floods, and cyclones happen due to natural processes of the Earth, which are called natural factors.

🎯 Exam Tip: Avoid choosing superstitious options like "divine wrath" or "increase in sins"; always select scientific and logical options like natural factors.

 

Question 7. ‘आग लगना’ या ‘अग्निकाण्ड’ किस प्रकार की आपदा है?
(a) प्राकृतिक आपदा
(b) दैवी प्रकोप सम्बन्धी आपदा
(c) मानवकृत आपदा
(d) अज्ञाते आपदा
Answer: (c) मानवकृत आपदा
In simple words: Fires in buildings or forests are usually caused by human negligence or accidents, which is why they are classified as man-made disasters.

🎯 Exam Tip: Accidental fires are almost always caused by human activities, so they fall under the man-made category.

 

Question 8. आग का मौलिक गुण है
(a) भयंकर लपटें उत्पन्न करना
(b) ताप प्रदान करना
(c) जलाना
(d) भोजन पकाना
Answer: (b) ताप प्रदान करना
In simple words: The basic property of fire is to provide heat, which we use for warmth and cooking.

🎯 Exam Tip: Focus on the primary scientific characteristic of fire, which is producing heat energy, rather than its secondary effects.

 

Question 9. आग लगने या ‘अग्निकाण्ड’ का कारण हो सकता है
(a) मानवीय लापरवाही
(b) दुर्घटना के परिणामस्वरूप
(c) व्यक्तिगत दुर्भावना या षड्यन्त्र
(d) All of the options
Answer: (d) All of the options
In simple words: Fires can start due to human carelessness, accidents, or even bad intentions, so all these reasons are correct.

🎯 Exam Tip: When all options are valid causes for an event, look for the 'All of the options' choice to secure full marks.

 

Question 10. सूखा पड़ने का कारण है
(a) अधिक कृषि कार्य
(b) वर्षा का बहुत कम होना
(c) अधिक संख्या में नलकूप लगाना
(d) जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि
Answer: (b) वर्षा का बहुत कम होना
In simple words: A drought happens mainly when there is very little or no rainfall for a long time.

🎯 Exam Tip: Remember that lack of rainfall is the primary direct cause of natural droughts.

 

Question 11. बाढ़ नामक आपदा का स्रोत हैं
(a) तालाब
(b) झीलें
(c) नदियाँ
(d) नहरें
Answer: (c) नदियाँ
In simple words: Rivers are the main source of floods when they overflow due to heavy rains.

🎯 Exam Tip: Clearly identify rivers as the primary water bodies associated with large-scale flooding disasters.

 

Question 12. किसी भवन में आग लग जाने पर सर्वप्रथम क्या करना चाहिए?
(a) फायर ब्रिगेड को बुलाना
(b) भवन के अन्दर उपस्थित व्यक्तियों को भवन से बाहर निकालना
(c) प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था करना
(d) आग-बुझाने के उपाय करना
Answer: (b) भवन के अन्दर उपस्थित व्यक्तियों को भवन से बाहर निकालना
In simple words: Saving human lives by evacuating everyone safely from the burning building is always the first priority.

🎯 Exam Tip: In emergency situations, human safety and evacuation always take precedence over property preservation or other actions.

 

Question 13. भूकंप से जान-माल का नुकसान होता है
(a) पृथ्वी की गति से
(b) इमारतों के गिरने से
(c) अत्यधिक वर्षा से
(d) डर से
Answer: (b) इमारतों के गिरने से
In simple words: During an earthquake, the shaking causes buildings to collapse, which leads to loss of lives and property.

🎯 Exam Tip: Focus on the structural collapse of buildings as the main direct cause of casualties during earthquakes.

 

Question 14. सूनामी का सबसे अधिक प्रभाव कहाँ होता है?
(a) पहाड़ी क्षेत्रों में
(b) तटवर्ती क्षेत्रों में
(c) समुद्र के मध्यवर्ती क्षेत्र में
(d) मैदानी भागों में
Answer: (b) तटवर्ती क्षेत्रों में
In simple words: Tsunami waves are giant ocean waves that crash onto the land. Since coastal areas are right next to the sea, they face the maximum destruction when these waves hit.

🎯 Exam Tip: Remember that tsunamis originate in the ocean, so the land closest to the water (coastal areas) always suffers the most damage.

 

Question 15. समुद्री लहरों के समय समुद्र में विद्यमान जलयानों का बचाव हो सकता है
(a) तट की ओर तेजी से बढ़ने पर
(b) तट से दूर खुले समुद्र की ओर चले जाने पर
(c) एक स्थान पर रुक जाने पर
(d) बन्दरगाह पर लंगर डाल देने पर
Answer: (b) तट से दूर खुले समुद्र की ओर चले जाने पर
In simple words: Near the coast, shallow water causes waves to grow extremely tall and destructive. In the deep, open ocean, these waves are very small and safe for ships.

🎯 Exam Tip: Always remember that deep water is safer for ships during a tsunami or heavy waves because the wave height is negligible there.

 

Question 16. चक्रवातीय तूफान की दशा में होता है
(a) अत्यधिक तेज हवाएँ चलती हैं।
(b) भारी वर्षा होती है।
(c) ऊँची-ऊँची लहरें उठती हैं।
(d) उपरोक्त सभी विकल्प
Answer: (d) उपरोक्त सभी विकल्प
In simple words: A cyclone is a massive storm that brings very strong winds, heavy rain, and high sea waves all at the same time.

🎯 Exam Tip: When a question lists multiple correct characteristics of a natural disaster, look for the "All of the options" choice.

 

Question 17. गम्भीर प्राकृतिक आपदाओं का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर (2011)
(a) अच्छा प्रभाव पड़ता है
(b) कोई प्रभाव नहीं पड़ता
(c) गम्भीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है
(d) उत्साहवर्द्धक प्रभाव पड़ता है
Answer: (c) गम्भीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है
In simple words: Natural disasters cause loss of lives and homes, which leads to extreme stress, fear, and sadness, badly affecting people's mental health.

🎯 Exam Tip: Disasters are highly traumatic events, so they always have a negative or adverse (प्रतिकूल) effect on mental well-being.

 

Question 18. प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न विषद से रोकथाम में निम्नलिखित में से कौन सहायक नहीं है? (2018)
(a) जैविक चिकित्सा
(b) योग
(c) बहिष्कार
(d) संज्ञानात्मक चिकित्सा
Answer: (c) बहिष्कार
In simple words: While therapies and yoga help heal mental trauma, boycotting or isolating someone only increases their sadness and does not help them recover.

🎯 Exam Tip: Read the question carefully to identify the negative word "नहीं" (not) and choose the option that does not contribute to healing.

 

Question.
Answer: (ग) बहिष्कार
In simple words: The correct option is boycott, which means to socially exclude or reject something as a form of protest.

🎯 Exam Tip: Pay close attention to standard psychological and sociological terms in Hindi to select the most accurate option in multiple-choice questions.

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