Official UP Board Solutions for Class 12 Physics: Chapter 15 संचार प्रणालियाँ
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Chapter-wise Solutions for Physics: Chapter 15 संचार प्रणालियाँ
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UP Board Solutions For Class 12 Physics Chapter 15 Communication Systems (संचार व्यवस्था)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. व्योम तरंगों के उपयोग द्वारा क्षितिज के पार संचार के लिए निम्नलिखित आवृत्तियों में से कौन-सी आवृत्ति उपयुक्त रहेगी?
(a) 10 kHz
(b) 10 MHz
(c) 1 GHz
(d) 1000 GHz
Answer: (b) 10 MHz 3 MHz से 30 MHz आवृत्ति तक की तरंगें व्योम तरंगों की श्रेणी में आती हैं। इससे उच्च आवृत्ति की तरंगें (जैसे-1GHz, 1000 GHz) आयन मण्डल को भेदकर पार निकल जाती हैं जबकि 10 kHz आवृत्ति की तरंगें ऐन्टीना की ऊँचाई अधिक होने के कारण उपयोगी नहीं हैं।
In simple words: व्योम तरंगें, जो 3 MHz से 30 MHz की आवृत्ति रेंज में आती हैं, क्षितिज के पार संचार के लिए आदर्श हैं क्योंकि वे आयनमंडल से परावर्तित होकर लंबी दूरी तय कर सकती हैं।
🎯 Exam Tip: व्योम तरंगों की आवृत्ति रेंज को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संचार प्रणालियों में उनकी उपयुक्तता निर्धारित करती है।
Question 2. UHF परिसर की आवृत्तियों का प्रसारण प्रायः किसके द्वारा होता है?
(a) भू-तरंगें
(b) व्योम तरंगें
(c) पृष्ठीय तरंगें
(d) आकाश तरंगें
Answer: (d) आकाश तरंगें। UHF परिसर में प्रसारण आकाश तरंगों द्वारा ही होता है।
In simple words: अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी (UHF) रेंज में संचार के लिए आकाश तरंगों का उपयोग किया जाता है, जो सीधे प्रेषक से अभिग्राही तक यात्रा करती हैं।
🎯 Exam Tip: आकाश तरंगें और भू-तरंगें के बीच के अंतर और उनके विशिष्ट आवृत्ति उपयोगों को समझें, खासकर UHF रेंज के लिए।
Question 3. अंकीय सिगनल :
(i) मानों का संतत समुच्चय प्रदान नहीं करते।
(ii) मानों को विविक्त चरणों के रूप में निरूपित करते हैं।
(iii) द्विआधारी पद्धति का उपयोग करते हैं।
(iv) दशमलव के साथ द्विआधारी पद्धति का भी उपयोग करते हैं।
उपरोक्त प्रकथनों में कौन-से सत्य ?
(a) केवल (i) तथा (ii)
(b) केवल (ii) तथा (iii)
(c) (i), (ii) तथा (iii) परन्तु (iv) नहीं
(d) (i), (ii), (iii) तथा (iv) सभी
Answer: (c) (i), (ii) तथा (iii) सत्य हैं परन्तु (iv) सत्य नहीं है। अंकीय सिगनल द्विआधारी पद्धति (अंकों 0 तथा 1) का उपयोग करते हैं। अतः मानों का सतत समुच्चय प्रदान करने के स्थान पर उन्हें विविक्त चरणों में निरूपित करते हैं।
In simple words: अंकीय सिगनल केवल विशिष्ट, अलग-अलग मानों का प्रतिनिधित्व करते हैं और बाइनरी सिस्टम (0 और 1) का उपयोग करते हैं, जो सतत मानों के विपरीत होता है।
🎯 Exam Tip: अंकीय सिगनलों की प्रमुख विशेषताओं को जानें- विशेष रूप से वे सतत नहीं होते, विविक्त चरणों में निरूपित होते हैं, और द्विआधारी पद्धति का उपयोग करते हैं।
Question 4. दृष्टिरेखीय संचार के लिए क्या यह आवश्यक है कि प्रेषक ऐन्टीना की ऊँचाई अभिग्राही ऐन्टीना की ऊँचाई के बराबर हो? कोई TV प्रेषक ऐन्टीना 81m ऊँचा है। यदि अभिग्राही ऐन्टीना भूस्तर पर है तो यह कितने क्षेत्र में सेवाएँ प्रदान करेगा?
Answer: हलः नहीं, प्रायः ग्राही ऐन्टीना की ऊँचाई प्रेषी ऐन्टीना से अधिक होती है। प्रेषी को रेडियो-क्षितिज, \(d_1 =\) जिसमें Re पृथ्वी की त्रिज्या है।
सेवा-क्षेत्रफल (service area),
\(A = \pi\)
\(= \pi. 2Rh_T\)
दिया है, \(h_T = 81 \text{ m}\),
\(R_e = 6.4 \text{ x } 100 \text{ ml}\)
\(= 3.14 \text{ x } 2 \text{ x } 6.4 \text{ x } 10^6 \text{ x } 81 \text{ m}^2\)
\(= 3258 \text{ x } 10^6 \text{ m}^2 = 3258 \text{ km}^2\)
In simple words: दृष्टिरेखीय (Line-of-Sight) संचार के लिए, प्रेषक और अभिग्राही ऐन्टीना की ऊँचाई बराबर होना आवश्यक नहीं है, लेकिन वे एक-दूसरे के प्रत्यक्ष दृश्य में होने चाहिए। एक TV ऐन्टीना की ऊँचाई उसके सेवा क्षेत्र को निर्धारित करती है, जिसकी गणना पृथ्वी की त्रिज्या और ऐन्टीना की ऊँचाई का उपयोग करके की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: LOS संचार की शर्तों और किसी दिए गए ऐन्टीना के प्रसारण क्षेत्र की गणना के सूत्र को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें पृथ्वी की वक्रता को ध्यान में रखा जाता है।
Question 5. 12v शिखर वोल्टता की वाहक तरंग का उपयोग किसी संदेश सिगनल के प्रेषण के लिए किया गया है। माडुलन सूचकांक 75% के लिए माडुलक सिगनल की शिखर वोल्टता कितनी होनी चाहिए?
Answer: हल: माडुलन सूचकांक, \(m_a= \frac{\text{E}_{\text{m}}}{\text{E}_{\text{c}}}\)
माडुलक सिगनल का शिखर मान, \(E_m = m_a E_a\)
दिया है, \(m_a = 75\% = 0.75\),
\(E_c = 12\text{V}\)
\(\therefore E_m = 0.75 \text{ x } 12\text{V} = 9\text{V}\)
In simple words: माडुलन सूचकांक (Modulation Index) यह बताता है कि एक वाहक तरंग को कितनी गहराई से मॉडुलित किया गया है। यदि वाहक तरंग की शिखर वोल्टता और माडुलन सूचकांक दिया गया हो, तो माडुलक सिगनल की आवश्यक शिखर वोल्टता की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: माडुलन सूचकांक के सूत्र `\(m_a = E_m / E_c\)` को याद रखें और इसे वाहक तथा माडुलक सिगनलों के लिए शिखर वोल्टता की गणना के लिए कैसे उपयोग किया जाता है, यह समझें।
Question 6. चित्र 15.1 में दर्शाए अनुसार कोई माडुलक सिगनल वर्ग तरंग है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक वर्ग तरंग माडुलक सिगनल (m(t)) को समय (t) के फलन के रूप में दर्शाता है। सिगनल का आयाम +1V और -1V के बीच बदलता है, और इसका आवर्तकाल 2 सेकंड है, जिसमें प्रत्येक अर्ध-चक्र 1 सेकंड का है।
दिया गया है कि वाहक तरंग \(c(t) = 2 \sin (8\pi t)\text{V}\)
(i) आयाम माडुलित तरंग रूप आलेखित कीजिए।
(ii) माडुलन सूचकांक क्या है?
Answer: हलः
(i) वाही तरंग की आवृत्ति, \(f_c = \frac{\omega}{2\pi} = \frac{8\pi}{2\pi} = 4\)
आयाम-माडुलित तरंग चित्र 15.2 में प्रदर्शित है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक आयाम-माडुलित (AM) तरंग को समय (सेकण्ड में) के फलन के रूप में दर्शाता है। इसमें वाहक तरंग का आयाम संदेश सिगनल (वर्ग तरंग) के अनुसार बदल रहा है, जिससे आयाम में वृद्धि और कमी होती है, जबकि आवृत्ति स्थिर रहती है।
(ii) माडुलन (मॉड्यूलेशन) सूचकांक,
\(m_a = \frac{m_0}{C_0} \left(\text{अथवा } \frac{E_m}{E_c}\right) = \frac{1}{2} = 0.5\)
चित्र से \(m_0 = 1\) तथा वाही तरंग की समीकरण \(c (t) = 2 \sin 8\pi t\) से
\(C_0 = 2\)
\(m_a = \frac{m_0}{C_0} = \frac{1}{2} = 0.5\)
In simple words: आयाम माडुलन में, वाहक तरंग के आयाम को संदेश सिगनल के अनुसार बदला जाता है। माडुलन सूचकांक यह दर्शाता है कि वाहक आयाम संदेश सिगनल द्वारा कितना परिवर्तित होता है, और इसे ग्राफिकल रूप से या सूत्र का उपयोग करके निर्धारित किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: आयाम माडुलन तरंग के आरेख को समझने और माडुलन सूचकांक `\(m_a = (E_{max} - E_{min}) / (E_{max} + E_{min})\)` की गणना करने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है, खासकर जब तरंग के आयाम दिए गए हों।
Question 7. किसी माडुलित तरंग का अधिकतम आयाम 10V तथा न्यूनतम आयाम 2V पाया जाता है। माडुलन सूचकांक \(\mu\) का मान निश्चित कीजिए। यदि न्यूनतम आयाम शून्य वोल्ट हो तो माडुलन सूचकांक क्या होगा?
Answer: हलः दिया है, \(E_{max} = 10 \text{ V}, E_{min} = 2\text{V}\)
माडुलन सूचकांक, \(m_a = \frac{E_{max} - E_{min}}{E_{max} + E_{min}} = \frac{10-2}{10+2} = \frac{8}{12} = \frac{2}{3} = 0.67\)
यहाँ \(E_{min} = 0\)
\(m_a = \frac{E_{max} - 0}{E_{max} + 0} = 1\), (\(E_{max}\) के मान पर अनिर्भर)
In simple words: माडुलन सूचकांक माडुलित तरंग के अधिकतम और न्यूनतम आयामों के बीच के संबंध को दर्शाता है। यदि न्यूनतम आयाम शून्य हो, तो माडुलन सूचकांक 1 होता है, जिसका अर्थ है कि वाहक तरंग का आयाम पूरी तरह से संदेश सिगनल द्वारा नियंत्रित होता है।
🎯 Exam Tip: माडुलन सूचकांक के सूत्र को याद रखें और अधिकतम तथा न्यूनतम आयामों का उपयोग करके उसकी गणना कैसे करें, इसे समझें। न्यूनतम आयाम शून्य होने पर विशेष स्थिति पर ध्यान दें।
Question 8. आर्थिक कारणों से किसी AM तरंग का केवल ऊपरी पाश्र्व बैंड ही प्रेषित किया जाता है, परन्तु ग्राही स्टेशन पर वाहक तरंग उत्पन्न करने की सुविधा होती है। यह दर्शाइए कि यदि कोई ऐसी युक्ति उपलब्ध हो जो दो सिगनलों की गुणा कर सके तो ग्राही स्टेशन पर माडुलक सिगनल की पुनःप्राप्ति सम्भव है।
Answer: हलः माना वाही तरंग, \(e_c = E_c \cos \omega_c t \text{ ... (1)}\)
यदि सूचना माडुलक सिगनल की कोणीय आवृत्ति \(\omega_m t\) हो, तो ग्रहण किया गया सिगनल होगा है
\(e_r = E_r \cos (\omega_c +\omega_m) t \text{ ... (2)}\)
समीकरण (1) व (2) को गुणा करने पर,
\(e= E_c E_r \cos \omega_c t \cos (\omega_c + \omega_m)t\)
सूत्र \(2 \cos A \cos B = \cos (A + B) + \cos (A - B)\) का प्रयोग करने पर,
\(e = [\cos (2\omega_c +\omega_m) t + \cos \omega_m t]\)
यदि इस सिगनल को लो-पास फिल्टर (low pass filter) में से गुजारा जाए, तो उच्च आवृत्ति (\(2\omega_c +\omega_m\)) का सिगनले रुक जाएगा तथा केवल \(\omega_m\) आवृत्ति को सिगनल ही गुजरेगा।
अतः हमें माडुलक सिगनल, \(e_m = \cos \omega_m t\) प्राप्त हो जायेगा।
In simple words: एम्पलीट्यूड माडुलन (AM) तरंगों से संदेश सिगनल को पुनः प्राप्त करने के लिए, ग्राही स्टेशन पर वाहक तरंग को उत्पन्न किया जाता है और प्राप्त सिगनल से गुणा किया जाता है। एक लो-पास फिल्टर का उपयोग करके, केवल संदेश सिगनल की कम आवृत्ति को अलग किया जा सकता है, जिससे मूल सूचना पुनः प्राप्त हो जाती है।
🎯 Exam Tip: AM तरंग से संदेश सिगनल को पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया (डिमॉडयूलेशन) को समझें, विशेष रूप से गुणा करने की क्रिया और उच्च-आवृत्ति घटकों को हटाने के लिए लो-पास फिल्टर की भूमिका को।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. वाहक तरंग की आवृत्ति \(f_c\) के साथ श्रव्य तरंग आवृत्ति \(f_m\) के मॉड्यूलेशन से प्राप्त बैण्ड चौड़ाई का मान होगा
(i) \(2f_c\)
(ii) \(2f_m\)
(iii) \(f_m +f_c\)
(iv) \(f_m - f_c\)
Answer: (ii) \(2f_m\)
In simple words: आयाम माडुलन (AM) में, एक वाहक तरंग की आवृत्ति \(f_c\) को एक श्रव्य तरंग \(f_m\) द्वारा मॉडुलित किया जाता है। परिणामी माडुलित सिगनल की बैण्ड चौड़ाई हमेशा माडुलक आवृत्ति \(f_m\) के दोगुने के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: AM सिगनल की बैण्ड चौड़ाई को याद रखना महत्वपूर्ण है, जो हमेशा माडुलक सिगनल की आवृत्ति के दोगुने \( (2f_m) \) के बराबर होती है।
Question 2. 200 KHz की वाहक आवृत्ति और 10 kHz के मॉडुलन संकेत के लिए आयाम मॉडुलित (AM) सिगनल की बैण्ड चौड़ाई होगी
(i) 20 kHz
(ii) 210 kHz
(iii) 400 kHz
(iv) 190 kHz
Answer: (iii) 400 kHz
In simple words: आयाम माडुलन (AM) में, बैण्ड चौड़ाई माडुलक संकेत की आवृत्ति के दोगुने के बराबर होती है, वाहक आवृत्ति पर निर्भर नहीं करती। इसलिए, 10 kHz के माडुलन संकेत के लिए बैण्ड चौड़ाई 20 kHz होगी।
🎯 Exam Tip: AM सिगनल की बैण्ड चौड़ाई की गणना करते समय, केवल माडुलन आवृत्ति \(f_m\) पर ध्यान केंद्रित करें और इसे दोगुना करें; वाहक आवृत्ति \(f_c\) को अनदेखा करें।
Question 3. आयर्न मण्डल से निम्न में से कौन-सी आवृत्ति परावर्तित हो सकती है?
(i) 5 KHz
(ii) 5 MHz
(iii) 5 GHz
(iv) 500 MHz
Answer: (ii) 5 MHz
In simple words: आयनमंडल पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जो कुछ रेडियो आवृत्तियों को परावर्तित करती है, जिससे वे लंबी दूरी की यात्रा कर पाती हैं। 5 MHz की आवृत्ति इस परत से परावर्तित हो सकती है, जिससे इसे रेडियो संचार के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: आयनमंडल द्वारा परावर्तित हो सकने वाली आवृत्तियों की रेंज को जानें; 5 MHz जैसी मध्य-श्रेणी की आवृत्तियां आमतौर पर परावर्तित होती हैं, जबकि बहुत कम या बहुत अधिक आवृत्तियां नहीं।
Question 4. UHF परास की आवृत्तियाँ सामान्यतः संचरित होती हैं
(i) भू-तरंगों द्वारा
(i) व्योम तरंगों द्वारा
(iii) पृष्ठ तरंगों द्वारा
(iv) आकाश तरंगों द्वारा
Answer: (iv) आकाश तरंगों द्वारा
In simple words: अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी (UHF) रेंज में, रेडियो तरंगें मुख्य रूप से सीधी रेखा में यात्रा करती हैं और पृथ्वी की सतह के साथ नहीं मुड़ती हैं। इस प्रकार के संचरण को आकाश तरंगें कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: UHF आवृत्तियों के लिए उपयोग किए जाने वाले संचरण के प्रकार को पहचानना सीखें, जो आमतौर पर आकाश तरंगें (दृष्टिरेखीय संचरण) होती हैं।
Question 5. निम्न में से कौन विद्युत चुम्बकीय तरंग नहीं है?
(i) प्रकाश तरंगें
(ii) रेडियो तरंगें
(iii) X-किरणें
(iv) ध्वनि तरंगें
Answer: (iv) ध्वनि तरंगें
In simple words: प्रकाश, रेडियो और X-किरणें सभी विद्युत चुम्बकीय तरंगें हैं, जो ऊर्जा को तरंगों के रूप में संचारित करती हैं और यात्रा करने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। ध्वनि तरंगें, इसके विपरीत, यांत्रिक तरंगें हैं जिन्हें संचरण के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: विद्युत चुम्बकीय तरंगों और यांत्रिक तरंगों के बीच के मूलभूत अंतर को समझें, और प्रत्येक श्रेणी के सामान्य उदाहरणों को जानें।
Question 6. उच्च आवृत्ति तरंगों पर संदेश संकेत के अध्यारोपण की प्रक्रिया कहलाती है
(i) संचरण
(ii) मॉड्यूलन
(iii) संसूचन
(iv) अभिग्रहण
Answer: (ii) मॉड्यूलन
In simple words: माडुलन वह प्रक्रिया है जिसमें एक उच्च आवृत्ति वाली वाहक तरंग के गुणों (आयाम, आवृत्ति या कला) को कम आवृत्ति वाले संदेश सिगनल के अनुसार बदला जाता है।
🎯 Exam Tip: माडुलन की परिभाषा और इसके उद्देश्य को याद रखना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से संदेश सिगनल को उच्च आवृत्ति वाली वाहक तरंग पर अध्यारोपित करना।
Question 7. यदि संप्रेषी ऐण्टीना की ऊँचाई \(h_1\) तथा अभिग्राही ऐण्टीना की ऊँचाई \(h_2\) हो तब दृष्टिरेखीय (LOS) संचरण विधि में संतोषजनक संचरण के लिए दोनों ऐण्टीनों के बीच की अधिकतम दूरी होती है। (पृथ्वी की त्रिज्या = R)
Answer:
In simple words: दृष्टिरेखीय (LOS) संचार में, प्रेषक और अभिग्राही ऐन्टीना के बीच अधिकतम दूरी की गणना पृथ्वी की त्रिज्या और दोनों ऐन्टीना की ऊँचाई का उपयोग करके की जाती है।
🎯 Exam Tip: LOS संचार में ऐन्टीना की ऊँचाई और अधिकतम संचरण दूरी के बीच संबंध के सूत्र को समझना महत्वपूर्ण है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. संचार व्यवस्था की तीन मूल इकाइयाँ (तत्त्व) क्या हैं?
Answer: 1. प्रेषित्र,
2. संचार चैनल,
3. अभिग्राही ।
In simple words: एक संचार व्यवस्था में तीन मुख्य तत्व होते हैं: प्रेषित्र जो सूचना को भेजता है, संचार चैनल जो माध्यम प्रदान करता है, और अभिग्राही जो सूचना को प्राप्त करता है।
🎯 Exam Tip: संचार व्यवस्था के तीन मुख्य घटकों और उनकी भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से पहचानना सीखें।
Question 2. ट्रांसड्यूसर क्या है?
Answer: यह वह युक्ति है जिसका उपयोग ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।
In simple words: ट्रांसड्यूसर एक ऐसा उपकरण है जो ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित करता है, जैसे ध्वनि को विद्युत सिगनल में बदलना।
🎯 Exam Tip: ट्रांसड्यूसर की परिभाषा और ऊर्जा रूपांतरण में उसकी भूमिका को याद रखें।
Question 3. दिए गए ब्लॉक आरेख में संचार व्यवस्था के X तथाY भागों को पहचानिए
Answer: X-सूचना स्रोत, Y-चैनल
In simple words: संचार व्यवस्था में, X आमतौर पर सूचना स्रोत का प्रतिनिधित्व करता है, जो वास्तविक संदेश को उत्पन्न करता है, और Y संचार चैनल का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके माध्यम से संदेश यात्रा करता है।
🎯 Exam Tip: संचार प्रणाली के ब्लॉक आरेख के मूल घटकों - सूचना स्रोत और चैनल - को समझें।
Question 4. सूचना सिगनल किसे कहते हैं?
Answer: सूचना, भाषण, संगीत आदि को किसी उचित ट्रांसड्यूसर द्वारा विद्युत सिगनल में परिवर्तित किया जाता है। यह सिगनल ही सूचना (संदेश) सिगनल कहलाता है।
In simple words: सूचना सिगनल मूल संदेश है, जैसे भाषण या संगीत, जिसे एक ट्रांसड्यूसर द्वारा विद्युत रूप में परिवर्तित किया जाता है ताकि इसे संचारित किया जा सके।
🎯 Exam Tip: सूचना सिगनल की परिभाषा और संचार प्रक्रिया में उसकी भूमिका को जानें।
Question 5. सिगनल की बैण्ड-चौड़ाई से आप क्या समझते हैं?
या
बैण्ड चौड़ाई को परिभाषित कीजिए।
Answer: किसी सिगनल में अधिकतम तथा न्यूनतम आवृत्तियों के अन्तर को आवृत्ति परास कहते हैं। यही बैण्ड-चौड़ाई भी कहलाती है।
In simple words: सिगनल की बैण्ड-चौड़ाई, किसी सिगनल में उच्चतम और न्यूनतम आवृत्तियों के बीच का अंतर होती है, जो उस सिगनल द्वारा उपयोग किए जाने वाले आवृत्ति रेंज को दर्शाती है।
🎯 Exam Tip: बैण्ड-चौड़ाई की परिभाषा और इसकी गणना कैसे की जाती है, इसे याद रखें।
Question 6. व्योम तरंग संचरण (sky wave propagation) क्या है? इनकी आवृत्ति बताइए।
Answer: वह संचरण प्रक्रिया जिसमें वाहक तरंगों का संचरण आयन मण्डल से तरंगों के परावर्तन से होता है, व्योम तरंग संचरण कहलाती है। व्योम तरंगों की आवृत्ति 1.5 मेगाहर्ट्ज से 30 मेगाहर्ट्ज तक होती है।
In simple words: व्योम तरंग संचरण तब होता है जब रेडियो तरंगें आयनमंडल से परावर्तित होकर पृथ्वी पर वापस आती हैं, जिससे लंबी दूरी का संचार संभव होता है। यह 1.5 MHz से 30 MHz की आवृत्ति रेंज में होता है।
🎯 Exam Tip: व्योम तरंग संचरण की प्रक्रिया और उसकी विशिष्ट आवृत्ति रेंज को समझें।
Question 7. आकाश तरंगें क्या हैं? इनकी आवृत्ति बताइए ।
Answer: अति उच्च आवृत्ति (30 मेगाहर्ट्ज से 300 मेगाहर्ट्ज), परा उच्च आवृत्ति (300 मेगाहर्ट्ज से 3000 मेगाहर्ट्ज) तथा 3000 मेगाहर्ट्ज से उच्च आवृत्ति की रेडियो तरंगें आकाश तरंगें कहलाती हैं।
In simple words: आकाश तरंगें अत्यधिक उच्च आवृत्तियों (30 MHz से 3000 MHz) पर काम करती हैं और प्रेषण ऐन्टीना से अभिग्राही ऐन्टीना तक सीधी रेखा में यात्रा करती हैं।
🎯 Exam Tip: आकाश तरंगों की आवृत्ति रेंज और LOS (दृष्टिरेखीय) संचरण में उनकी भूमिका को याद रखें।
Question 8. आकाश तरंग संचरण से आप क्या समझते हैं? इन तरंगों का संचरण किन विधियों के द्वारा किया जाता है?
Answer: वह तरंग संचरण जिसमें आकाश तरंगें प्रेषण ऐण्टीना से अभिग्राही ऐण्टीना तक दृष्टि रेखा पथ पर गमन करती हैं। इन तरंगों का संचरण निम्न दो प्रकार से किया जा सकता है
1. भू-स्थिर संचार उपग्रहों के द्वारा।
2. सीधे प्रेषित ऐण्टीना के द्वारा ।
In simple words: आकाश तरंग संचरण एक सीधी रेखा में होता है, जहां तरंगें प्रेषक ऐन्टीना से अभिग्राही ऐन्टीना तक सीधे यात्रा करती हैं। यह भू-स्थिर उपग्रहों और सीधे प्रेषित ऐन्टीना के माध्यम से किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: आकाश तरंग संचरण की अवधारणा और इसे प्राप्त करने के दो मुख्य तरीकों को जानें।
Question 9. मॉडयूलेशन (modulation) से क्या तात्पर्य है? या मॉडयूलेशन से आप क्या समझते हैं?
Answer: यह वह क्रिया है जिसमें उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों के आयाम, आवृत्ति अथवा कला को निम्न आवृत्ति के सूचना सिगनल के तात्क्षणिक मानों के अनुकूल परस्पर इनके अध्यारोपण के माध्यम से बदला जाता है ।
In simple words: माडुलन वह प्रक्रिया है जिसमें उच्च आवृत्ति वाहक तरंग के गुणों (आयाम, आवृत्ति, या कला) को कम आवृत्ति सूचना सिगनल के अनुसार बदला जाता है।
🎯 Exam Tip: माडुलन की परिभाषा और संचार प्रणालियों में इसके महत्व को समझें।
Question 10. मॉडयूलित तरंग क्या है?
Answer: मॉडयूलेशन की क्रिया में सूचना सिगनल अर्थात् निम्न आवृत्ति की वैद्युत-चुम्बकीय तरंगों को उच्च आवृत्ति की वैद्युत-चुम्बकीय तरंगों पर अध्यारोपित किया जाता है। इनमें सूचना सिगनल को मॉड्यूलक या मॉड्यूलेटिंग तरंगें, उच्च आवृत्ति की वैद्युत-चुम्बकीय तरंगों को वाहक तरंगें तथा इन दोनों के अध्यारोपण के फलस्वरूप प्राप्त परिणामी तरंगों को मॉडयूलित तरंगें कहते हैं।
In simple words: माडुलित तरंग वह परिणामी तरंग है जो माडुलन प्रक्रिया के बाद बनती है, जिसमें सूचना सिगनल को उच्च आवृत्ति वाहक तरंग पर अध्यारोपित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: माडुलक तरंग, वाहक तरंग और माडुलित तरंग के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 11. ऐण्टीना का क्या कार्य है? इसकी न्यूनतम लम्बाई कितनी होती है?
Answer: ऐण्टीना एक प्रकार का ट्रान्सड्यूसर है जो वैद्युत चुम्बकीय तरंगों को प्रसारित करने या ग्रहण करने के काम आता है। ऐण्टीना की न्यूनतम लम्बाई 75 मीटर होती है जो कि व्यावहारिक है।
In simple words: ऐन्टीना एक ट्रांसड्यूसर है जो विद्युत चुम्बकीय तरंगों को प्रसारित या प्राप्त करता है। कुशल कार्य के लिए इसकी न्यूनतम लम्बाई आमतौर पर 75 मीटर होती है।
🎯 Exam Tip: ऐन्टीना के कार्य और संचार में इसकी आवश्यक न्यूनतम लम्बाई को जानें।
Question 12. \(3 \text{ x } 10^8 \text{ Hz}\) आवृत्ति की वाहक तरंगों के लिए द्विध्रुव ऐण्टीना की लम्बाई क्या होनी चाहिए?
Answer: हलः
वांछित लम्बाई \(= \frac{\lambda}{2} = \frac{c/v}{2} = \frac{c}{2\nu}\)
\(= \frac{3\text{ x }10^8}{2\text{ x }3\text{ x }10^8} \text{ मी} = 0.5 \text{ मी}\)
In simple words: एक द्विध्रुव ऐन्टीना की लंबाई सामान्यतः संचरित की जाने वाली तरंग की तरंगदैर्ध्य की आधी होती है। दी गई आवृत्ति के लिए, तरंगदैर्ध्य की गणना प्रकाश की गति और आवृत्ति का उपयोग करके की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: ऐन्टीना की लंबाई और तरंग की तरंगदैर्ध्य के बीच के संबंध को समझें, विशेष रूप से द्विध्रुव ऐन्टीना के लिए `\(\lambda/2\)` या `\(\lambda/4\)` के रूप में।
Question 13. एक दूरदर्शन टॉवर की ऊँचाई 75 मीटर है। अधिकतम दूरी क्या है जो यह दूरदर्शन प्रसारण ग्रहण कर सकती है?
Answer: हल:
दिया है, \(h= 75 \text{ मीटर}, d = ?, R_e = 6.4 \text{ x } 10^6 \text{ मीटर}\)
\(= \sqrt{150 \text{ x } 64 \text{ x } 10^5}\)
\(= \sqrt{960 \text{ x } 10^6}\)
\(= 30.983 \text{ x } 10^3 \text{ मीटर}\)
In simple words: एक प्रसारण टॉवर का अधिकतम संचरण परास पृथ्वी की वक्रता और टॉवर की ऊँचाई पर निर्भर करता है। इस परास की गणना `\(d = \sqrt{2R_eh}\)` सूत्र का उपयोग करके की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: प्रसारण परास के सूत्र `\(d = \sqrt{2R_eh}\)` को याद रखें और इसे पृथ्वी की त्रिज्या और ऐन्टीना की ऊँचाई का उपयोग करके लागू करना सीखें।
Question 14. एक टी.वी. टॉवर की ऊँचाई एक दिए गए स्थान पर 500 मी है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या 6400 किमी हो तो इसके प्रसारण परास की गणना कीजिए।
Answer: हलः
दिया है, \(h = 500 \text{ मी}, R_e = 6400 \text{ किमी} = 6.4 \text{ x } 10^6 \text{ मी}\)
\(d = \sqrt{2R_e h}\)
\(= \sqrt{2 \text{ x } 6.4 \text{ x } 10^6 \text{ x } 500}\)
\(= 80 \text{ x } 10^3 \text{ मी}\)
In simple words: एक टीवी टॉवर का प्रसारण परास उसकी ऊँचाई और पृथ्वी की त्रिज्या पर निर्भर करता है। इस परास की गणना `\(d = \sqrt{2R_eh}\)` सूत्र का उपयोग करके की जाती है, जहां h टॉवर की ऊँचाई है और Re पृथ्वी की त्रिज्या है।
🎯 Exam Tip: टीवी प्रसारण के लिए प्रसारण परास की गणना करने के सूत्र और उसमें उपयोग होने वाले मापदंडों को जानें।
Question 15. एक वाहक तरंग जिसकी शिखर वोल्टता 12 वोल्ट है किसी संदेश सिगनल को प्रेषित करने के लिए उपयोग की जाती है। मॉडयूलित सिगनल की शिखर वोल्टता क्या होनी चाहिए?
Answer: हलः
मॉड्यूलन सूचकांक \(m_a = \frac{E_m}{E_c}\)
\(\therefore E_m = m_a \text{ x } E_c = \frac{75}{100} \text{ x } 12 = 9 \text{ वोल्ट}\)
In simple words: माडुलन सूचकांक, जो माडुलक सिगनल और वाहक तरंग के आयामों का अनुपात है, हमें यह निर्धारित करने में मदद करता है कि संदेश सिगनल वाहक तरंग के आयाम को कितना बदल सकता है।
🎯 Exam Tip: माडुलन सूचकांक के सूत्र `\(m_a = E_m / E_c\)` को याद रखें और इसे वाहक और माडुलक सिगनल के शिखर वोल्टता की गणना के लिए कैसे उपयोग किया जाता है, इसे समझें।
Question 16. आयाम मॉडयूलन क्या है?
Answer: मॉडयूलन की वह प्रक्रिया जिसमें वाहक तरंग के आयाम को मॉडयूलक या मॉड्यूलेटिंग तरंग (सूचना संकेत) के तात्क्षणिक मान द्वारा परिवर्तित किया जाता है, जबकि वाहक तरंग के अन्य दो प्राचल आवृत्ति तथा कला अपरिवर्तित रहते हैं, आयाम मॉडयूलन कहलाती है।
In simple words: आयाम माडुलन (AM) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें संदेश सिगनल के तात्क्षणिक मानों के अनुसार उच्च आवृत्ति वाहक तरंग के आयाम को बदला जाता है, जबकि वाहक की आवृत्ति और कला स्थिर रहती है।
🎯 Exam Tip: आयाम माडुलन की परिभाषा और इसके मूलभूत सिद्धांत, विशेष रूप से वाहक तरंग के किस गुण को संशोधित किया जाता है, को जानें।
Question 17. आयाम मॉडयूलेशन संचार व्यवस्था की बैण्ड-चौड़ाई का सूत्र लिखिए।
Answer: बैण्ड-चौड़ाई = 2 x मॉड्यूलक सिगनल की आवृत्ति ।
In simple words: आयाम माडुलन (AM) संचार में, बैण्ड चौड़ाई हमेशा माडुलक सिगनल की आवृत्ति के दोगुने के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: AM संचार में बैण्ड चौड़ाई के सूत्र `\(2 \times \text{माडुलक सिगनल की आवृत्ति}\)` को याद रखें।
Question 18. मॉड्यूलन सूचकांक क्या है? इसकी क्या महत्ता है?
Answer: मॉडयूलक तरंग के आयाम तथा वाहक तरंग के आयाम के अनुपात को मॉडयूलन सूचकांक कहते हैं। यह उस सीमा को प्रदर्शित करता है जहाँ तक वाहक तरंग का आयाम सूचना सिगनल द्वारा परावर्तित होता है।
In simple words: माडुलन सूचकांक, माडुलक सिगनल के आयाम और वाहक तरंग के आयाम का अनुपात है। यह दर्शाता है कि संदेश सिगनल वाहक तरंग के आयाम को कितनी गहराई तक संशोधित करता है।
🎯 Exam Tip: माडुलन सूचकांक की परिभाषा और संचार की गुणवत्ता पर इसके महत्व को समझें।
Question 19. आवृत्ति मॉडयूलन (FM) से आप क्या समझते हैं?
Answer: जब उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों की आवृत्ति को श्रव्य संकेतों के संगत आयामों के अनुरूप परिवर्तित किया जाता है, तो उनके परस्पर अध्यारोपण की प्रक्रिया आवृत्ति मॉड्यूलन कहलाती है।
In simple words: आवृत्ति माडुलन (FM) एक प्रक्रिया है जिसमें उच्च आवृत्ति वाहक तरंग की आवृत्ति को श्रव्य संकेतों के आयामों के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति माडुलन की परिभाषा को समझें, विशेष रूप से वाहक तरंग के किस गुण को संशोधित किया जाता है (आवृत्ति)।
Question 20. एक वाहक तरंग प्रदर्शित की जाती है। \(c(t) = 4 \sin (8\pi t)\) volt यदि मॉडुलक सिगनल तरंग का आयाम 1.0 volt हो तब मॉडुलन सूचकांक का मान क्या है?
Answer: हलः
दिया है, \(E_m = 1.0\text{V}\)
\(E_c = 4\text{V}\)
मॉडुलन सूचकांक, \(m_a = \frac{E_m}{E_c} = \frac{1.0}{4} = 0.25\)
In simple words: माडुलन सूचकांक, माडुलक सिगनल के आयाम और वाहक तरंग के आयाम का अनुपात होता है, और यह दर्शाता है कि वाहक तरंग कितनी गहराई से मॉडुलित हुई है।
🎯 Exam Tip: माडुलन सूचकांक के सूत्र `\(m_a = E_m / E_c\)` को याद रखें और इसे दिए गए वाहक और माडुलक आयामों के साथ कैसे लागू किया जाता है, इसे समझें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. संचार व्यवस्था के मुख्य अवयव कौन-कौन से हैं? ब्लॉक आरेख खींचकर समझाइए ।
या
रेडियो संचार व्यवस्था का नामांकित ब्लॉक आरेख बनाइए ।
Answer: संचार व्यवस्था के अवयव ऐसी व्यवस्था जिसके द्वारा सन्देशों अथवा सूचनाओं को एक स्थान से किसी विधि द्वारा (जैसे केबल्स द्वारी अथवा विद्युत-चुम्बकीय तरंगों द्वारा) सम्प्रेषित किया जाता है तथा दूसरे स्थान पर इनको ग्रहण किया जाता है, संचार व्यवस्था कहते हैं। संचार व्यवस्था के निम्नलिखित तीन अवयव होते हैं
1. प्रेषित्र (Transmitter):
यह मूल सन्देश (सूचना, भाषण) सिगनल को एक उचित सिगनल में बदलता है, जिसे उचित माध्यम से गुजारा जा सके; इसे सम्प्रेषण चैनल कहते हैं। जब वक्ता तथा श्रोता के बीच बहुत अधिक दूरी होती है। ३) मॉडयूलेटर प्रवर्धक तो केबल्स (cables) सम्प्रेषण चैनल का कार्य नहीं कर सकतीं ऐसी स्थिति में ध्वनि को
माइक्रोफोन द्वारा विद्युत सिगनलों में बदला जाता है, उनकी शक्ति, प्रवर्धक द्वारा बढ़ायी जाती है। अभिग्राही तत्पश्चात् इसको रेडियो आवृत्ति की वाहक तरंगों (carrier waves) के साथ मॉडयूलित किया जाता है और अन्त में ऐण्टीना द्वारा विद्युत-चुम्बकीय तरंगों के रूप में अन्तरिक्ष (space) में प्रेषित किया जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक संचार व्यवस्था के ब्लॉक डायग्राम को दर्शाता है। प्रेषित्र अनुभाग में माइक्रोफोन, मॉड्यूलेटर और प्रवर्धक होते हैं जो संदेश सिगनल को वाहक तरंग के साथ मिलाकर प्रेषण ऐन्टीना के माध्यम से संचारित करते हैं। अभिग्राही अनुभाग में अभिग्राही ऐन्टीना, ट्यूनेबिंल प्रवर्धक, डिमॉड्यूलेटर, श्रव्य प्रवर्धक और लाउडस्पीकर होते हैं जो माडुलित सिगनल को प्राप्त कर संदेश को पुनः प्राप्त करते हैं।
2. संचार चैनल (Transmission Channel): वह माध्यम जिसके द्वारा प्रेषित्र से भेजी गई विद्युत-चुम्बकीय तरंगों के रूप में सूचना अथवा भाषण अभिग्राही के ऐण्टीना तक पहुँचती हैं, संचार चैनल कहलाता है। यह तारों का एक युग्म अथवा केबल, बेतार अर्थात् मुक्त आकाश हो सकता है।
3. अभिग्राही (Receiver):
यह प्रेषित्र द्वारा भेजे गये परावर्द्धित सिगनल को वास्तविक सन्देश अथवा सूचना में परिवर्तित करता है। यह प्रक्रिया डिमॉडयूलेशन (demodulation) कहलाती है। जब अभिग्राही के ऐण्टीना पर मॉडयूलित तरंग पहुँचती है तो वहाँ श्रव्य तरंगें उनसे अलग कर . ली जाती हैं। इनको प्रवर्धित करके लाउडस्पीकर में भेजा जाता है। जहाँ इन्हें पुनः ध्वनि तरंगों में परिवर्तित कर लेते हैं। संचार व्यवस्था का योजनाबद्ध ब्लॉक आरेख चित्र 15.4 में प्रदर्शित है।
In simple words: संचार व्यवस्था में प्रेषित्र, संचार चैनल और अभिग्राही जैसे मुख्य अवयव होते हैं जो सूचना को स्रोत से गंतव्य तक भेजने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: संचार प्रणाली के ब्लॉक आरेख को स्पष्ट रूप से खींचना और उसके प्रत्येक घटक (प्रेषित्र, चैनल, अभिग्राही) के कार्य को समझाना सीखें।
Question 2. वायुमण्डल में आकाश तरंगों के संचरण को स्पष्ट कीजिए। या सिद्ध कीजिए कि आकाश तरंगों के संचरण हेतु एक टी.वी.प्रेषी ऐण्टीना जो पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर है, का प्रसारण परास \(d =\) है, जहाँ पृथ्वी की त्रिज्या है?
या
आकाश तरंगों के संचरण को समझाइए। इन तरंगों के संचरण के लिए प्रयुक्त आवृत्ति परास क्या है?
या
तरंग संचरण में दृष्टि रेखा पक्ष (LOS)' से क्या तात्पर्य है? किन तरंगों में इसका प्रयोग होता है?
Answer: आकाश तरंगों का संचरण (Propagation of space waves or tropospherical waves):
रेडियो तरंग संचरण की अन्य विधा आकाश तरंग है। आकाश तरंग, प्रेषण ऐण्टीना से अभिग्राही ऐण्टीना तक दृष्टि रेखा पथों (line of sight : LOS) पर गमन करती है। 40 MHz से ऊँची आवृत्तियों के
लिये संचार मुख्यतः दृष्टि रेखा पथों तक ही सीमित रहता है। इन आवृत्तियों पर ऐण्टीना का साइज अपेक्षाकृत छोटा होता है तथा इसे पृथ्वी के पृष्ठ से कई तरंगदैर्यो की ऊँचाई पर स्थापित किया जा सकता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 15.5 में पृथ्वी की वक्रता के ऊपर स्थित एक प्रेषक ऐन्टीना (h ऊँचाई पर) और एक अभिग्राही ऐन्टीना को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि कैसे रेडियो तरंगें (S) सीधे (दृष्टिरेखीय पथ) यात्रा करती हैं और पृथ्वी की सतह के साथ-साथ क्षितिज (d) तक पहुँचती हैं, पृथ्वी की त्रिज्या (R) को भी दर्शाया गया है।
टी०वी० सिगनलों (80-200 MHz) को न तो भू-तरंगों द्वारा (पृथ्वी के समीप वायुमण्डल द्वारा उनके उच्च अवशोषण के कारण) संचरित किया जा सकता है और न व्योम तरंगों द्वारा (आयनमण्डल से उनके परावर्तन न होने के कारण)। इन सिगनलों को केवल तभी प्राप्त किया जा सकता है जब ग्राही ऐण्टीना प्रेषक ऐण्टीना से चलने वाले सिगनल के मार्ग में पड़े। टी०वी० का अधिक क्षेत्र विस्तार प्राप्त करने के लिये प्रसारण ऊँचे ऐन्टीना से करना चाहिए ।
टी०वी० ऐन्टीन्ना की ऊँचाई है तथा वह दूरी व जहाँ तक सिगनल प्रेषित किये जा सकते हैं, सम्बन्ध ज्ञात करने के लिये, माना ST टी०वी० का है ऊँचाई को प्रेषित्र ऐण्टीना है तथा पृथ्वी का केन्द्र O एवं त्रिज्या R है (चित्र 15.5) । पृथ्वी की वक्रता के कारण पृथ्वी की सतह के बिन्दुओं P तथा २ के परे सिगनल प्राप्त नहीं किये जा सकते। यहाँ PT तथ QT क्रमशः P तथा Q पर स्पर्श रेखाएँ हैं। माना \(d \text{ (= SP अथवा SQ)}\) ऐण्टीना के आधार से पृथ्वी की दूरी है, जहाँ तक सिगनल प्राप्त होते हैं। समकोण त्रिभुज OPT में,
\((OT)^2 = (OP)^2 + (TP)^2\) जहाँ
\(OT = R+h, OP= R\) तथा
\(TP = SP= d\) (क्योंकि \(h<
\(h^2+2Rh = d^2\)
चूंकि \(h<
अथवा \(d =\)
टी०वी० प्रसारण में क्षेत्र विस्तार \(A= \pi d^2 =2\pi Rh\)
संचार परास (Range of communication) अथवा दृष्टि रेखा दूरी (Line of sight – distance)-प्रेषी ऐण्टीना तथा ग्राही ऐण्टीना के बीच सरल रेखीय दूरी को संचार परास अथवा दृष्टि रेखा दूरी कहते हैं। इसको । अथवा \(d\) से प्रदर्शित करते हैं। यह प्रेषक ऐण्टीना की परास तथा ग्राही ऐण्टीना की परास के योग के बराबर होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख (चित्र 15.6) दृष्टिरेखीय (Line-of-Sight, LOS) संचार में प्रेषक ऐन्टीना (\(h_T\)) और अभिग्राही ऐन्टीना (\(h_R\)) के बीच अधिकतम संचरण दूरी (\(d_m\)) को दर्शाता है। इसमें प्रेषक और अभिग्राही ऐन्टीना के क्षितिज परास (\(d_T\) और \(d_R\)) को दर्शाया गया है, और पृथ्वी की वक्रता को भी ध्यान में रखा गया है।
यदि प्रेषक ऐटीना की ऊँचाई \(h_T\) तथा ग्राही ऐण्टीना की ऊँचाई \(h_R\) हो एवं इनसे क्षैतिज दूरियाँ अर्थात् इनकी परास क्रमशः
\(d_T\) व \(d_R\) हो, तो
\(d_T = \text{तथा } d_R = ;\)
जहाँ, \(R_e =\) पृथ्वी की वक्रता त्रिज्या।
दोनों ऐण्टीनाऔं के बीच की रेखीय दूरी \(r = d_m = d_T + d_R = +\) इस तरंग संचरण का प्रयोग टेलीविजन प्रसारण, माइक्रोवेव-लिंक तथा सैटेलाइट संचार आदि संचार प्रणालियों में किया जाता है।
In simple words: आकाश तरंगें सीधी रेखा में यात्रा करती हैं, विशेष रूप से उच्च आवृत्तियों पर। वे भू-स्थिर उपग्रहों या सीधे प्रेषित ऐन्टीना के माध्यम से संचारित होती हैं, और उनका संचरण परास ऐन्टीना की ऊँचाई और पृथ्वी की वक्रता पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: आकाश तरंग संचरण की अवधारणा, दृष्टिरेखीय (LOS) पथ और उनके प्रसारण के तरीकों को समझें, विशेष रूप से टीवी प्रसारण के लिए प्रासंगिक सूत्र।
Question 3. निम्नलिखित आवृत्तियों की वाहक तरंगों के लिए ऐण्टीना की आवश्यक ऊँचाई ज्ञात कीजिए
(i) 30 MHz
(ii) 300 MHz
(iii) \(6 \text{ x } 10^8 \text{ Hz}\)
प्राप्त परिणामों से किस फल को प्राप्त करोगे?
Answer: हलः
(i) \(\nu = 30 \text{ MHz} = 30 \text{ x } 10^6 \text{ सेकण्ड -1}\)
संगत तरंगदैर्ध्य \(\lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3.0 \text{ x } 10^8 \text{ मीटर/सेकण्ड}}{30 \text{ x } 10^6 \text{ सेकण्ड - 1}} = 10 \text{ मीटर}\)
ऐण्टीना की ऊँचाई तरंग की तरंगदैर्ध्य की एक-चौथाई (1/4) होनी चाहिए।
\(\therefore l = \frac{\lambda}{4} = \frac{10 \text{ मीटर}}{4} = 2.5 \text{ मीटर}\)
(ii) \(\nu = 300 \text{ MHz} = 300 \text{ x } 10^6 \text{ सेकण्ड-1}\)
\(\lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3.0 \text{ x } 10^8 \text{ मीटर/सेकण्ड}}{300 \text{ x } 10^6 \text{ सेकण्ड - 1}} = 1.0 \text{ मीटर}\)
इस प्रकार \(l = \frac{\lambda}{4} = \frac{1.0 \text{ मीटर}}{4} = 0.25 \text{ मीटर}\)
(iii) \(\lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3.0 \text{ x } 10^8 \text{ मीटर/सेकण्ड}}{6 \text{ x } 10^8 \text{ सेकण्ड - 1}} = 0.5 \text{ मीटर}\)
इस प्रकार \(l = \frac{\lambda}{4} = \frac{0.5 \text{ मीटर}}{4} = 0.125 \text{ मीटर}\)
अतः वाहक तरंग की आवृत्ति बढ़ने पर ऐण्टीना की ऊँचाई घटती है।
In simple words: किसी वाहक तरंग को कुशलता से प्रसारित करने के लिए, ऐन्टीना की आवश्यक ऊँचाई तरंग की तरंगदैर्ध्य की एक-चौथाई होती है। जैसे-जैसे आवृत्ति बढ़ती है, तरंगदैर्ध्य घटती है, जिससे ऐन्टीना की आवश्यक ऊँचाई भी कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: ऐन्टीना की ऊँचाई, तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति के बीच के व्युत्क्रम संबंध को याद रखें, और विभिन्न आवृत्तियों के लिए ऐन्टीना की आवश्यक ऊँचाई की गणना कैसे करें, यह जानें।
Question 4. आयाम मॉडुलन से आप क्या समझते हैं? एक आयाम मॉडलित तरंग प्राप्त करने का नामांकित परिपथ बनाइए।
Answer: जब उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों के आयाम को निम्न आवृत्ति के श्रव्य सिगनलों के संगत आयामों के अनुरूप परिवर्तित किया जाता है तो उनके परस्पर अध्यारोपण की प्रक्रिया आयाम मॉडुलन कहलाती है। चित्र 15.7 में परिणामी आयाम मॉडुलित तरंग प्रदर्शित है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख (चित्र 15.7) एक आयाम मॉडुलित तरंग (e(t)) को दर्शाता है। इस तरंग में, वाहक तरंग का आयाम एक निम्न आवृत्ति के संदेश सिगनल के अनुसार बदलता है, जबकि इसकी आवृत्ति स्थिर रहती है, जिससे एक लिफाफा बनता है जो संदेश सिगनल की आकृति को दर्शाता है।
मॉड्यूलित तरंग
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र (15.10) आयाम मॉडुलित तरंग के उत्पादन की प्रक्रिया को ब्लॉक आरेख के रूप में दर्शाता है। इसमें सूचना संकेत जनित्र से एक माडुलक तरंग और दोलित्र से वाहक तरंग को एक मॉड्यूलेटर में भेजा जाता है, जहाँ वे मिलकर आयाम मॉडुलित तरंग उत्पन्न करते हैं।
आयाम मॉडयूलित तरंग के उत्पादन के लिए आवश्यक परिपथ आरेख चित्र 15.9 में दर्शाया गया है। यह परिपथ वाहक तरंग सिगनल के लिए
सामान्यतः एक उभयनिष्ठ उत्सर्जक वाहक प्रवर्धक है। मॉडयूलक सिगनल \([\text{e}_{\text{m}} = \text{E}_{\text{m}} \sin \omega_{\text{m}} \text{ .t}]\) आधार पर आरोपित किया जाता है। इस प्रकार निर्गम आधार बायसिंग वोल्टता नियत d.c वोल्टता नहीं है, बल्कि यह नियत d.c. वोल्टता \(V_{BB}\) तथा मॉडयूलक वोल्टता a.c \([\text{e}_{\text{m}} = \text{E}_{\text{m}} \sin \omega_{\text{m}} \text{t}]\) का योग है।
चित्र 15.9 अतः आधार वोल्टता नियत न रहकरे । मॉडयूलक सिगनल के तात्कालिक मान के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। इस प्रकार प्रवर्धन भी परिवर्तित होता है। अतः निर्गम वोल्टता भी उसी के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। इस प्रकार निर्गम में आयाम मॉडयूलित तरंग प्राप्त हो जाती है। उत्पादन प्रक्रिया को ब्लॉक चित्र 15.10 में प्रदर्शित है।
आयाम मॉडयूलित तरंग का संसूचन
आयाम मॉडयूलेटिड तरंग को संसूचित करने में निम्नलिखित दो क्रियाएँ होती हैं
(i) मॉडयूलित तरंग का दिष्टीकरण (Rectification),
(ii) मॉझ्यालित तरंग से वाहक तरंग (रेडियो आवृत्ति) घटक को अलग करना। आयाम मॉडयूलित तरंग के संसूचन अर्थात् विमॉड्यूलेशन के लिए आवश्यक परिपथ आरेख चित्र 15.11 में दर्शाया गया है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र (15.9) एक आयाम मॉडुलन परिपथ को दर्शाता है। इसमें एक वाहक सिगनल (\(e_c\)) और एक माडुलक सिगनल (\(e_m\)) को एक ट्रांजिस्टर सर्किट के माध्यम से फीड किया जाता है ताकि एक आयाम मॉडुलित तरंग उत्पन्न हो सके, जिसे निर्गम पर प्राप्त किया जाता है। यह परिपथ वाहक तरंग के आयाम को माडुलक सिगनल के अनुसार संशोधित करता है।
निवेशी परिपथ स्वप्रेरकत्व \(L_1\) तथा परिवर्ती संधारित्र \(C_1\) का समान्तर संयोजन है। इसको टयून्ड परिपथ (tuned circuit) कहते हैं। ग्राही के ऐण्टीना पर प्राप्त विभिन्न सिगनलों से वांछित मॉडयूलित रेडियो सिगनल \(C_1\) की आवृत्ति को व्यवस्थित करके अनुनाद के आधार पर चयनित कर लिया जाता है।
डायोड D इस सिगनल को दिष्टीकृत कर देता है। अतः डायोड का निर्गम, रेडियो आवृत्ति की धारा स्पन्दों के धनात्मक आधे वक्रों की चेन है। इन सिगनलों के शिखर श्रव्य सिगनलों के अनुसार परिवर्तित होते हैं। श्रव्य सिगनलों को पुनः प्राप्त करने के लिए डायोड दिष्टीकृत निर्गम को कम मान के संधारित्र \(C_2\) तथा एक लोड प्रतिरोध \(R_L\) के समान्तर संयोजन पर आरोपित किया जाता है। संधारित्र \(C_2\) उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों के लिए निम्न
In simple words: आयाम माडुलन एक प्रक्रिया है जहां एक उच्च आवृत्ति वाहक तरंग के आयाम को एक कम आवृत्ति संदेश सिगनल के अनुसार संशोधित किया जाता है। एक नामांकित परिपथ आरेख यह दर्शाता है कि कैसे माडुलक और वाहक सिगनल को मिलाकर एक आयाम माडुलित तरंग बनाई जाती है।
🎯 Exam Tip: आयाम माडुलन की परिभाषा को समझें और आयाम माडुलित तरंग के उत्पादन के लिए एक ब्लॉक आरेख या परिपथ आरेख को सही ढंग से लेबल करना सीखें।
Question 5. एक मॉडयूलित तरंग का अधिकतम आयाम 11 वोल्ट तथा न्यूनतम आयाम 3 वोल्ट है। मॉडयूलन सूचकांक का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हलः
दिया है, \(E_{max} = 11 \text{ V}, E_{min} = 3\text{V}\)
\(\therefore E_c + E_m = 11\text{V \dots(1)}\)
तथा \(E_c – E_m = 3\text{V \dots(2)}\)
समी० (1) व समी० (2) को हल करने पर,
\(E_c = 7 \text{ v}\) तथा
\(E_m = 4\text{V}\)
मॉडयूलन सूचकांक \(m_a= \frac{E_m}{E_c} = \frac{4}{7} = 0.57\)
In simple words: माडुलन सूचकांक एक माडुलित तरंग के अधिकतम और न्यूनतम आयामों का उपयोग करके गणना की जाती है, और यह दर्शाता है कि वाहक तरंग के आयाम में कितना परिवर्तन होता है।
🎯 Exam Tip: माडुलन सूचकांक के सूत्र \(m_a = (E_{max} - E_{min}) / (E_{max} + E_{min})\) को याद रखें और इसे दिए गए आयामों के साथ लागू करना सीखें।
Question 6. मॉडयूलित वाहक तरंग के अधिकतम एवं न्यूनतम आयाम क्रमशः 900 mV तथा 300 mV हैं। मॉडयूलन सूचकांक की गणना कीजिए।
Answer: हलः
दिया है, \(E_{max} = 900 \text{ mV}, E_{min} = 300 \text{ mV}\)
\(\therefore E_c + E_m = 900 \text{ mV \dots(1)}\)
तथा \(E_c – E_m = 300 \text{ mV \dots(2)}\)
समी० (1) वे समी० (2) को हल करने पर,
\(E_c = 600 \text{ mV}, E_m = 300 \text{ mV}\)
\(\therefore \text{मॉडयूलन सूचकांक } m_a = \frac{E_m}{E_c} = \frac{300}{600} = 0.5\)
In simple words: माडुलित वाहक तरंग के अधिकतम और न्यूनतम आयामों का उपयोग करके माडुलन सूचकांक की गणना की जा सकती है, जो यह दर्शाता है कि वाहक तरंग कितनी गहराई तक मॉडुलित हुई है।
🎯 Exam Tip: माडुलित तरंग के अधिकतम और न्यूनतम आयामों का उपयोग करके माडुलन सूचकांक की गणना करने का अभ्यास करें।
Question 7. \(2 \text{ x } 10^5\) हर्ट्ज आवृत्ति तथा अधिकतम वोल्टेज 60 वोल्ट की वाहक तरंग को श्रव्य तरंग \(e_m = 30 \sin 2\pi \text{ x } 2500t\) वोल्ट द्वारा मॉडुलित किया जाता है। ज्ञात कीजिए
(i) मॉडुलन प्रतिशतता
(ii) मॉडुलित तरंग के घटक की आवृत्ति
Answer: दिया है, \(E_c = 60 \text{ वोल्ट}\) तथा \(f_c = 2 \text{ x } 10^5 \text{ हज}\)
श्रव्ये तरंग \(e_m = 30 \sin 2\pi \text{ x } 2500t \text{ वोल्ट}\)
अतः \(E_m = 30 \text{ वोल्ट}\) तथा \(f_m = 2500 \text{ वोल्ट}\)
(i) मॉडुलन गुणक \((m_a) = \frac{E_m}{E_c} = \frac{30}{60} = 0.5\)
अतः मॉडुलन प्रतिशतता = \(0.5 \text{ x } 100 = 50\%\)
(ii) मॉडुलित तरंग के घटक की आवृत्ति = \(f_c +f_m\)
\(= 2 \text{ x } 10^5 + 2500 = 202500 \text{ हर्ट्ज} = 202.5 \text{ किलोहर्ट्ज}\)
In simple words: माडुलन प्रतिशतता माडुलन सूचकांक का प्रतिशत रूप है, जो दर्शाता है कि माडुलक सिगनल वाहक तरंग के आयाम को कितना बदलता है। माडुलित तरंग में, घटक आवृत्तियाँ वाहक आवृत्ति और माडुलक आवृत्ति के योग और अंतर के रूप में होती हैं।
🎯 Exam Tip: माडुलन गुणक (सूचकांक) की गणना करना सीखें और माडुलित तरंग के घटक आवृत्तियों को पहचानें, जो `\(f_c \pm f_m\)` होती हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. उपग्रह संचार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: उतरः उपग्रह संचार (Satellite communication): अन्तरिक्ष तरंग संचरण विधि द्वारा पृथ्वी के सम्पूर्ण क्षेत्र को आवरित नहीं किया जा सकता, क्योंकि विषम भौगोलिक परिस्थितियों (जैसे, मध्य में कई महासागर आदि) के कारण निरन्तर पुनरावर्तक (repeater) लगाना सम्भव नहीं है। अतः इसके लिए आवश्यक है कि संचार उच्च आवृत्ति पर हो । 30 MHz से अधिक आवृत्ति की तरंगें परम्परागत विधियों द्वारा संचारित नहीं की जा सकतीं। इसके लिए संचार उपग्रहों का प्रयोग किया जाता है।
संचार उपग्रह एक ऐसा उपग्रह है जो पृथ्वी के चारों ओर पश्चिम से पूर्व की ओर वृत्ताकार कक्षा में इस प्रकार परिक्रमण करता है कि इसका आवर्त काल पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः घूर्णन काल के बराबर अर्थात् 24 घण्टे हो। इसलिए यह उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष सदैव स्थिर प्रतीत होता है। इस प्रकार लम्बी दूरी के संचरण के लिए इन संचार उपग्रहों का प्रयोग किया जाता है। इनको भूस्थिर उपग्रह अथवा तुल्यकालिक उपग्रह भी कहते हैं।
इस प्रकार के संचार उपग्रहों में माइक्रो तरंग सिगनल के अभिग्रहण तथा प्रेषण के लिए आवश्यक उपकरण (रेडियो ट्रॉन्सपोंडर) लगे रहते हैं। पृथ्वी के प्रेषित्र स्टेशन से एक आवृत्ति (अपलिंक) के माइक्रो तरंग सिगनल उपग्रह की ओर प्रेषित किये जाते हैं। ये सिगनल उपग्रह पर लगे उपकरणों द्वारा ग्रहण कर संशोधित एवं प्रवर्धित किये जाते हैं तथा तत्पश्चात् एक अन्य आवृत्ति (डाउनलिंक) पर पृथ्वी पर ग्राही स्टेशन की ओर प्रेषित कर दिये जाते हैं। अपलिंक तथा डाउनलिंक की दोनों भिन्न आवृत्तियाँ सूक्ष्म तरंग अथवा UHF क्षेत्र में पड़ती हैं। इतनी उच्च आवृत्ति की तरंगें आयन मण्डल को पार कर जाती हैं। अतः पृथ्वी पर प्रेषित तथा ग्राही ऐण्टीनों को निश्चित झुकाव कोणों पर रखा जाता है। उपग्रह संचार प्रणाली की आवृत्ति परास 1GHz से 10 GHz होती है। इस संचार प्रणाली की विशेषता यह है कि उपग्रह संचार बिना किसी विक्षोभ के काफी बड़ी दूरियों को आवंटित करता है। यह लम्बी दरियों, दरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के लिए संचार का आसान तथा अपव्ययी संचार माध्यम है। यह टेलीविजन, टेलीफोन तथा मोबाइल फोन सेवाओं के लिए उपयुक्त संचार माध्यम है। गोपनीयता की दृष्टि से यह संचार माध्यम उपयुक्त नहीं है। चित्र 16.8 में वैद्युत-चुम्बकीय तरंगों, के संचरण की विभिन्न विधियों को दर्शाया गया है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख (चित्र 15.8) उपग्रह संचार की प्रक्रिया को दर्शाता है। प्रेषी ऐन्टीना से 'अपलिंक तरंगें' उपग्रह तक जाती हैं, जो उन्हें प्राप्त कर 'डाउनलिंक तरंगों' के रूप में ग्राही ऐन्टीना तक भेजता है। चित्र आयनमंडल और पृथ्वी पर भू-तरंगों को भी दिखाता है, जो विभिन्न संचरण मार्गों को दर्शाते हैं।
In simple words: उपग्रह संचार में, भू-स्थिर उपग्रहों का उपयोग करके रेडियो सिगनलों को लंबी दूरी तक प्रेषित किया जाता है। उपग्रह माइक्रोवेव सिगनलों को प्राप्त करता है (अपलिंक), उन्हें संशोधित करता है और पृथ्वी पर वापस भेजता है (डाउनलिंक), जिससे व्यापक कवरेज मिलता है।
🎯 Exam Tip: उपग्रह संचार की अवधारणा, इसके लाभ और अपलिंक/डाउनलिंक आवृत्तियों की भूमिका को समझें।
Question 2. मॉडयूलेशन से क्या तात्पर्य है? इसकी आवश्यकता संचार निकाय में क्यों पड़ती है?
या
दो कारणों को लिखिए जिससे किसी सिगनल के मॉड्यूलन की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
या
सिगनल संचरण के लिए मॉडयूलेशन की आवश्यकता क्यों है?
Answer: सामान्यतः भेजे जाने वाले डिजिटल एवं एनालॉग सिगनलों को इनके मूलरूप में नहीं भेजा जा सकता है, चूंकि इन सिगनलों की आवृत्ति बहुत कम होती है। इस तरह के सिगनलों को भेजने के लिए वाहक की आवश्यकता होती है। ये वाहक उच्च आवृत्ति की तरंगें (संकेत या सिगनल) होती हैं। मॉड्यूलेशन को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है ।
“अल्प आवृत्ति के संकेत (सिगनल) को उच्च आवृत्ति के संकेते पर लंदना 'भाँड्यूलेशन' कहलाता है।”
मॉड्यूलेशन की आवश्यकता (Need of Modulation): संचार निकाय में संदेश सिगनलों को (जिन्हें आधार बैण्ड सिगनल भी कहते हैं) दूरस्थ स्थानों को प्रेषित करना होता है। संदेश सिगनल श्रव्य
आवृत्ति परास (20 Hz से 20000 Hz) में होते हैं। इनको पहले माइक्रोफोन द्वारा वैद्युत सिगनल में बदला जाता है जिनकी आवृत्ति परास भी (20 Hz से 20000 Hz) ही होती है। इन सिगनलों को अधिक दूरी तक संप्रेषित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इसमें निम्नलिखित कठिनाइयाँ आती हैं
1. ऐण्टीना का आकार (Size of antenna):
किसी सिगनल के सम्प्रेषण के लिए आवश्यक है। कि ऐण्टीना का आकार प्रेषित किये जाने वाले सिगनल की तरंगदैर्ध्य की कोटि का होना चाहिए।
अतः
\(\nu = 20 \text{ Hz}\) के संगत तरंगदैर्ध्य
\(\lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3\text{ x }10^8 \text{ मी/से}}{20 \text{ से-1}} = 1.5\text{ x }10^7 \text{ मीटर}\)
\(\nu = 20000 \text{ Hz}\) के संगत तरंगदैर्ध्य
\(\lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3\text{ x }10^8 \text{ मी / से}}{20000 \text{ से-1}} = 1.5\text{ x }10^4 \text{ मीटर}\)
अतः इन
अतः श्रव्य आवृत्ति को वैद्युत-चुम्बकीय तरंगों को संप्रेषित करने के लिए ऐण्टीना का आकार
\(1.5\text{ x }10^7 \text{ मीटर}\) कोटि का होना चाहिए जो व्यवहार में सम्भव नहीं है।
अब यदि \(\nu = 3\text{ x }10^6 \text{ Hz}\) तो
\(\lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3\text{ x }10^8}{3\text{ x }10^6} = 100 \text{ मीटर}\)
तरंगों को प्रेषित करने के लिए 100 मीटर लम्बाई के ऐण्टीना की आवश्यकता होगी जिसको आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। अतः प्रेषण से पूर्व न्यून आवृत्ति आधार बैण्ड सिगनल में निहित सूचना को उच्च रेडियो आवृत्तियों में रूपान्तरित करने की आवश्यकता होती है।
2. कम शक्ति का प्रभावी विकिरण (Effect low power radiation):
विकिरण के सैद्धान्तिक अध्ययन के आधार पर । लम्बाई के रेखीय ऐण्टीना द्वारा विकरित शक्ति P तरंगदैर्ध्य \(\lambda\) के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है। चूंकि P a \((1/\lambda) 2\) अतः । के नियत मान के लिए P a 1/2 अतः स्पष्ट है कि लम्बी तरंगदैर्ध्य (निम्न आवृत्ति) के आधार बैण्ड सिगनल द्वारा प्रभावी शक्ति विकिरण कम होगा। परन्तु अच्छे प्रेषण के लिए उच्च शक्ति
चाहिए जो कम तरंगदैर्ध्य (उच्च आवृत्ति) के आधार बैण्ड सिगनल से सम्भव है। इस प्रकार यह तथ्य प्रेषण के लिए उच्च आवृत्ति के उपयोग की आवश्यकता दर्शाता है।
3. विभिन्न प्रेषित्रों से प्राप्त सिगनलों का मिश्रणः आधार बैण्ड सिगनलों के सीधे प्रेषण के विरूद्ध निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण तर्क अधिक व्यावहारिक हैं जब एक ही क्षण कई आधार बैण्ड सिगनल प्रेषित किये जा रहे होते हैं तो ये परस्पर मिल जाते हैं। तथा उनमें विभेद करने का कोई सरल उपाय नहीं है। इस कठिनाई को दूर करने के लिए सिगनलों को उच्च आवृत्ति पर प्रेषित करते हैं तथा प्रत्येक प्रसारण स्टेशन को एक बैण्ड आवंटित करते हैं। उपरोक्त सभी बिन्दुओं से यह स्पष्ट होता है कि न्यून आवृत्ति के मूल आधार बैण्ड अर्थात् सूचना सिगनल को प्रेषण से पूर्व किसी उच्च आवृत्ति तरंग में रूपान्तरित करना आवश्यक है। यह रूपान्तरण क्रिया इस प्रकार की होनी चाहिए कि रूपान्तरित सिगनल में उन सभी सूचनाओं का समावेश रहे जो मूल सिगनल में समाहित थे। ऐसा करने के लिए हम किसी उच्च आवृत्ति सिगनल की सहायता लेते हैं। इस सिगनल को वाहक तरंग (carrier wave) कहते हैं। इस प्रकार उपर्युक्त सभी बिन्दु मॉडयूलेशन की आवश्यकता को स्पष्ट करते हैं।
In simple words: माडुलन आवश्यक है क्योंकि कम आवृत्ति वाले संदेश सिगनल सीधे लंबी दूरी तक नहीं जा सकते (ऐन्टीना आकार, शक्ति विकिरण, और सिगनल मिश्रण की समस्याओं के कारण)। माडुलन इन समस्याओं को हल करने के लिए संदेश सिगनल को उच्च आवृत्ति वाहक तरंग पर अध्यारोपित करता है।
🎯 Exam Tip: माडुलन की आवश्यकता के तीन मुख्य कारणों को जानें: ऐन्टीना का आकार, प्रभावी शक्ति विकिरण, और सिगनलों के मिश्रण से बचाव। इन कारणों को विस्तृत रूप से समझाना सीखें।
Question 3. मॉडयूलन तथा विमॉडयूलन से क्या अभिप्राय है? एक आयाम मॉडयूलित तरंग को प्राप्त करने व संसूचित करने को परिपथ आरेख द्वारा समझाइए ।
या
आयाम मॉड्यूलन की व्याख्या कीजिए तथा किसी आयाम मॉड्यूलन को परिपथ आरेख बनाइए।
या
मॉडयूलन से आप क्या समझते हैं? आयाम मॉडयूलित तरंग के उत्पादन हेतु आवश्यक नामांकित परिपथ आरेख बनाइए ।
Answer: मॉडयलनः दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 2 के उत्तर के अन्तर्गत देखिए।
विमॉड्यूलिन : मॉडयूलित तरंग से श्रव्य सिगनल (audio signal) अर्थात् सूचना सिगनल को पुनः प्राप्त करने की क्रिया संसूचन अथवा विमॉडयूलन (Demodulation) कहलाती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र (15.9) एक आयाम मॉडुलन परिपथ को दर्शाता है। इसमें एक वाहक सिगनल (\(e_c\)) और एक माडुलक सिगनल (\(e_m\)) को एक ट्रांजिस्टर सर्किट के माध्यम से फीड किया जाता है ताकि एक आयाम मॉडुलित तरंग उत्पन्न हो सके, जिसे निर्गम पर प्राप्त किया जाता है। यह परिपथ वाहक तरंग के आयाम को माडुलक सिगनल के अनुसार संशोधित करता है।
आयाम मॉडयूलित (मॉड्यूलेटिड) तरंग प्राप्त करना
In simple words: माडुलन वह प्रक्रिया है जिसमें एक संदेश सिगनल को वाहक तरंग पर रखा जाता है, जबकि विमॉडयूलन (संसूचन) माडुलित तरंग से मूल संदेश सिगनल को पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया है। इन प्रक्रियाओं के लिए विशिष्ट परिपथ आरेख होते हैं, जिनमें डायोड और फिल्टर का उपयोग शामिल है।
🎯 Exam Tip: माडुलन और विमॉडयूलन दोनों की परिभाषाओं को समझें और इन प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक परिपथ आरेखों को खींचना और उनके घटकों के कार्य को समझाना सीखें।
आयाम मॉडयूलित तरंग के उत्पादन के लिए आवश्यक परिपथ आरेख चित्र 15.9 में दर्शाया गया है। यह परिपथ वाहक तरंग सिगनल के लिए सामान्यतः एक उभयनिष्ठ उत्सर्जक वाहक प्रवर्धक है। मॉडयूलक सिगनल [em = Em sin\( \omega_m \).t] आधार पर आरोपित किया जाता है। इस प्रकार निर्गम आधार बायसिंग वोल्टता नियत d.c वोल्टता नहीं है, बल्कि यह नियत d.c. वोल्टता VBB तथा मॉडयूलक वोल्टता a.c [em = Em sin\( \omega_m \).t] का योग है। चित्र 15.9 अतः आधार वोल्टता नियत न रहकरे । मॉडयूलक सिगनल के तात्कालिक मान के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। इस प्रकार प्रवर्धन भी परिवर्तित होता है। अतः निर्गम वोल्टता भी उसी के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। इस प्रकार निर्गम में आयाम मॉडयूलित तरंग प्राप्त हो जाती है। उत्पादन प्रक्रिया को ब्लॉक चित्र 15.10 में प्रदर्शित है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 15.9 एक आयाम मॉडयूलित तरंग प्राप्त करने के लिए एक ट्रांजिस्टर आधारित परिपथ दिखाता है, जिसमें वाहक सिग्नल और मॉडयूलिंग सिग्नल इनपुट के रूप में दिए जाते हैं। चित्र 15.10 आयाम मॉडुलन की उत्पादन प्रक्रिया का एक ब्लॉक आरेख है, जिसमें सूचना संकेत जनरेटर, मॉडुलक, वाहक तरंग दोलित्र, और मॉड्यूलित तरंग उत्पादन को दर्शाया गया है।
आयाम मॉडयूलित तरंग का संसूचन
आयाम मॉडयूलेटिड तरंग को संसूचित करने में निम्नलिखित दो क्रियाएँ होती हैं
(i) मॉडयूलित तरंग का दिष्टीकरण (Rectification),
(ii) मॉझ्यालित तरंग से वाहक तरंग (रेडियो आवृत्ति) घटक को अलग करना। आयाम मॉडयूलित तरंग के संसूचन अर्थात् विमॉड्यूलेशन के लिए आवश्यक परिपथ आरेख चित्र 15.11 में दर्शाया गया है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 15.11 एक आयाम मॉडुलित तरंग के विमॉडुलन (डिटेक्शन) के लिए एक परिपथ आरेख है, जिसमें एक डायोड, ट्यून्ड परिपथ (L1, C1), संधारित्र C2, लोड प्रतिरोध Rl और हेडफोन का उपयोग किया गया है। यह परिपथ आयाम मॉडुलित सिग्नल से मूल ऑडियो सिग्नल को निकालने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
निवेशी परिपथ स्वप्रेरकत्व L₁ तथा परिवर्ती संधारित्र C₁ का समान्तर संयोजन है। इसको टयून्ड परिपथ (tuned circuit) कहते हैं। ग्राही के ऐण्टीना पर प्राप्त विभिन्न सिगनलों से वांछित मॉडयूलित रेडियो सिगनल C₁ की आवृत्ति को व्यवस्थित करके अनुनाद के आधार पर चयनित कर लिया जाता है। डायोड D इस सिगनल को दिष्टीकृत कर देता है। अतः डायोड का निर्गम, रेडियो आवृत्ति की धारा स्पन्दों के धनात्मक आधे वक्रों की चेन है। इन सिगनलों के शिखर श्रव्य सिगनलों के अनुसार परिवर्तित होते हैं। श्रव्य सिगनलों को पुनः प्राप्त करने के लिए डायोड दिष्टीकृत निर्गम को कम मान के संधारित्र C2 तथा एक लोड प्रतिरोध R₁ के समान्तर संयोजन पर आरोपित किया जाता है। संधारित्र C2 उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों के लिए निम्न प्रतिघात \( (X_c = \frac{1}{2\pi fC}) \) तथा निम्न आवृत्ति की श्रव्य तरंगों के लिए उच्च प्रतिघात उत्पन्न करता है। अतः उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगें इस संधारित्र से निकल जाती हैं। तथा निम्न आवृत्ति की श्रव्य तरंगें लोड प्रतिरोध R₁ पर प्राप्त हो जाती हैं। अतः यह हैडफोन में धारा भेजता है जिससे कि मूल श्रव्य सिगनल पुनः प्राप्त हो जाता है।।
संसूचन प्रक्रिया (विमॉडयूलेशन) का ब्लॉक आरेख
संसूचन के लिए संतोषजनक प्रतिबन्ध: फिल्टर परिपथ से जुड़े संधारित्र की धारिता इतनी होनी चाहिए कि रेडियो आवृत्ति \(f_c\) के लिए इसका प्रतिघात \( (X_c = \frac{1}{2\pi f_c C}) \) प्रतिरोध R की तुलना में बहुत कम हो अर्थात्
\( X_c \ll R \) अथवा
\( \frac{1}{2\pi f_c C} \ll R \)
जबकि श्रव्य-आवृत्ति \(f\) के लिए इसका प्रतिघात, प्रतिरोध है की तुलना में बहुत अधिक हो अर्थात्
\( \frac{1}{2\pi f C} \gg R \) या
\( X_c \gg R \)
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