UP Board Solutions Class 12 Pedagogy Chapter 23 Intelligence and Intelligence Tests

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Detailed Chapter 23 बुद्धि और बुद्धि परीक्षण UP Board Solutions for Class 12 Pedagogy

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Class 12 Pedagogy Chapter 23 बुद्धि और बुद्धि परीक्षण UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions for Class 12 Pedagogy Chapter 23 Intelligence and Intelligence Tests (बुद्धि तथा बुद्धि परीक्षण)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

Question 1. बुद्धि से आप क्या समझते हैं ? बुद्धि की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: बुद्धि का स्वरूप एवं परिभाषा बुद्धि के स्वरूप के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों की भिन्न-भिन्न धारणाएँ हैं। प्रत्येक विद्वान ने अपनी धारणा के अनुसार ही बुद्धि को परिभाषित किया है। यहाँ पर हम कुछ विद्वानों द्वारा प्रतिपादित परिभाषाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं
1. वुडवर्थ Woodworth) के अनुसार, “बुद्धि कार्य करने की एक विधि है।”
2. टरमन (Turman) के अनुसार, “बुद्धि, अमूर्त विचारों के विषय में सोचने की योग्यता है।”
3. बकिंघम (Buckingham) के अनुसार, “बुद्धि सीखने की योग्यता है।'
4. रायबर्न (Ryhurm) के अनुसार, “बुद्धि वह शक्ति है, जो हमको समस्याओं का समाधान करने और अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने की योग्यता प्रदान करती है।”
5. क्रूज (Cruz) के अनुसार, “बुद्धि नवीन और विभिन्न परिस्थितियों में भली प्रकार से समायोजन की योग्यता है।”
6. रेक्स नाइट (Rex Knight) के अनुसार, “बुद्धि वह मानसिक योग्यता है, जिसके द्वारा हम किसी उद्देश्य की पूर्ति या किसी समस्या का समाधान करने के लिए सम्बन्धित वस्तुओं एवं विचारों को सीखते हैं।”
बुद्धि की विशेषताएँ बुद्धि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. बुद्धि व्यक्ति में जन्मजात होती है।
2. बुद्धि द्वारा व्यक्ति अतीत के अनुभवों से लाभ उठाता है।
3. बुद्धि द्वारा व्यक्ति परिस्थिति को समझता है।
4. बुद्धि व्यक्ति के नवीन परिस्थितियों से समायोजन करने में सहायक होती है।
5. बुद्धि व्यक्ति को अमूर्त चिन्तन करने की योग्यता प्रदान करती है।
6. बुद्धि व्यक्ति को विभिन्न क्रियाएँ सीखने में सहायता देती है।
7. बुद्धि व्यक्ति के आलोचनात्मक दृष्टिकोण का विकास करती है।
8. बुद्धि जटिल समस्याओं को हल करने तथा उन्हें सरल बनाने में सहायक होती है।
9. बुद्धि ही सत्य और असत्य, नैतिक और अनैतिक कार्यों में अन्तर करने की योग्यता देती है।
10. बुद्धि का विकास जन्म से किशोरावस्था के मध्यकाल तक होता है।
11. बालक तथा बालिकाओं की बुद्धि में कोई विशेष अन्तर नहीं होता है।
In simple words: बुद्धि विभिन्न विद्वानों द्वारा परिभाषित एक मानसिक क्षमता है, जिसमें सीखने, समस्याओं को हल करने, अमूर्त चिंतन करने और नई परिस्थितियों में समायोजन करने की योग्यता शामिल है। इसकी मुख्य विशेषताएँ जन्मजात होना, अनुभवों से सीखना, आलोचनात्मक सोच विकसित करना और समस्याओं को सरल बनाना हैं।

🎯 Exam Tip: बुद्धि की परिभाषाएँ और विशेषताएँ याद रखना इस प्रश्न के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये इसके मूल अवधारणा को स्पष्ट करती हैं।

 

Question 2. बुद्धि-परीक्षण से आप क्या समझते हैं ? बुद्धि-परीक्षणों के मुख्य प्रकारों का उल्लेख कीजिए। या बुद्धि-परीक्षण क्या है ? बुद्धि का परीक्षण कैसे होता है ? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए। या बुद्धि-परीक्षण से क्या तात्पर्य है? इसकी कोई एक परिभाषा दीजिए। या बुद्धि-परीक्षण के प्रकार बताइए तथा किसी एक बुद्धि-परीक्षण का वर्णन कीजिए।
Answer: बुद्धि-परीक्षण का अर्थ बुद्धि के वास्तविक स्वरूप को निर्धारित करने का प्रयास बुद्धि सम्बन्धी परीक्षण के आधार पर किया जाता है। प्राचीनकाल में बुद्धि और ज्ञान में कोई अन्तर नहीं समझा जाता था, किन्तु बाद में लोग इस भिन्नता से परिचित हुए और परीक्षा के माध्यम से बुद्धि का मापन करने लगे। इस प्रकार हम कह सकते हैं। कि जिन व्यवस्थित परीक्षणों के माध्यम से बुद्धि की परीक्षा एवं मापन का कार्य किया जाता है, उन्हें बुद्धि-परीक्षण कहा जाता है। बुद्धि-परीक्षण द्वारा मापी जाने वाली बौद्धिक योग्यताओं के अन्तर्गत तर्क, कल्पना, स्मृति, विश्लेषण एवं संश्लेषण की क्षमता आदि को सम्मिलित किया जाता है। बुद्धि-परीक्षण को निम्न प्रकार परिभाषित कर सकते हैं
“बुद्धि-परीक्षण, वे मनोवैज्ञानिक परीक्षण हैं जो मानव-व्यक्तित्व के सर्वप्रमुख तत्त्व एवं उसकी प्रधान मानसिक योग्यता 'बुद्धि का अध्ययन तथा मापन करते हैं।”
बुद्धि-परीक्षणों के प्रकार बुद्धि के मापन हेतु जितनी भी बुद्धि-परीक्षाओं का प्रयोग किया जाता है, उनमें निहित क्रियाओं के आधार पर बुद्धि-परीभणों को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया जा सकता है (A) शाब्दिक परीक्षण (B) अशाब्दिक परीक्षण
(A) शाब्दिक परीक्षण
ये बुद्धि-परीक्षण शब्द अथवा भाषायुक्त होते हैं। इस प्रकार के परीक्षणों में प्रश्नों के उत्तर भाषा के माध्यम से लिखित रूप में दिये जाते हैं। इन परीक्षणों को व्यक्तिगत तथा सामूहिक दो उपवर्गों में बाँटा जा सकता है। इस भाँति शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण दो प्रकार के होते हैं
1. शाब्दिक व्यक्ति बुद्धि-परीक्षण :
शाब्दिक व्यक्ति बुद्धि-परीक्षणों के प्रकार बुद्धि-परीक्षण ऐसे बुद्धि परीक्षण हैं जिनमें भाषा का पर्याप्त मात्रा में प्रयोग करके किसी एक व्यक्ति की बुद्धि-परीक्षा ली जाती है।
उदाहरणार्थ : बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण ।
2. शाब्दिक समूह बुद्धि-परीक्षण :
इस परीक्षण में किसी एक व्यक्ति की नहीं, अपितु समूह की बुद्धि-परीक्षा ली जाती है। इस प्रकार के परीक्षणों के अन्तर्गत भी भाषागत प्रश्न-उत्तर होते हैं।
उदाहरणार्थ : आर्मी एल्फा और बीटा परीक्षण ।
(B) अशाब्दिक परीक्षण इन बुद्धि-परीक्षणों के पदों में भाषा का कम-से-कम प्रयोग किया जाता है तथा चित्रों, गुटकों या रेखाओं के द्वारा काम कराया जाता है। व्यक्तिगत तथा सामूहिक आधार पर ये परीक्षण भी दो उपवर्गों में बाँटे जा सकते हैं
1. अशाब्दिक व्यक्ति बुद्धि-परीक्षण : अशाब्दिक व्यक्ति बुद्धि-परीक्षण में भाषा सम्बन्धी योग्यता की कम-से-कम आवश्यकता पड़ती है। ये परीक्षण प्रायः अशिक्षित (बे-पढ़े-लिखे) लोगों पर लागू किये जाते हैं, जिनके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के क्रियात्मक परीक्षण आयोजित किये जाते हैं और भाँति-भाँति के यान्त्रिक कार्य कराये जाते हैं। उदाहरणार्थ-घड़ी के पुर्जे खोलना-बाँधना ।
2. अशाब्दिक समूह बुद्धि-परीक्षण : अशाब्दिक समूह बुद्धि-परीक्षण, ऊपर वर्णित व्यक्ति परीक्षण से मिलते-जुलते हैं। समय, धन एवं शक्ति के अपव्यय को रोकने के लिए एक समूह को एक साथ परीक्षण दे दिया जाता है।
In simple words: बुद्धि-परीक्षण वे व्यवस्थित मनोवैज्ञानिक उपकरण हैं जो किसी व्यक्ति की तर्क, कल्पना, स्मृति और विश्लेषण जैसी बौद्धिक क्षमताओं को मापने का प्रयास करते हैं। ये मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- शाब्दिक (जो भाषा का उपयोग करते हैं, जैसे बिने-साइमन परीक्षण) और अशाब्दिक (जो चित्र या क्रियाओं का उपयोग करते हैं, जैसे घड़ी के पुर्जे जोड़ना, अशिक्षितों के लिए)।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-परीक्षणों की परिभाषा और उनके मुख्य प्रकारों (शाब्दिक, अशाब्दिक, व्यक्तिगत, सामूहिक) के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझें, क्योंकि ये वर्गीकरण अक्सर पूछे जाते हैं।

 

Question 3. व्यक्तिगत तथा सामूहिक बुद्धि-परीक्षणों का सामान्य परिचय दीजिए तथा इनके गुण-दोषों का भी उल्लेख कीजिए। या बुद्धि के व्यक्तिगत और सामूहिक परीक्षणों की तुलनात्मक विवेचना कीजिए। या व्यक्तिगत तथा सामूहिक बुद्धि-परीक्षण से आप क्या समझते हैं?
Answer: व्यक्तिगत तथा सामूहिक बुद्धि-परीक्षण यदि मनोवैज्ञानिक परीक्षण को प्रशासन की विधि के आधार पर देखा जाए तो बुद्धि – परीक्षणों को प्रशासन दो प्रकार से सम्भव है – प्रथम, व्यक्तिगत रूप से परीक्षा लेकर; एवं द्वितीय, सामूहिक रूप से परीक्षा संचालित करके । इसी दृष्टि से बुद्धि-परीक्षणों के दो भाग किये जा सकते हैं
(A) व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण तथा (B) सामूहिक बुद्धि-परीक्षण । अब हम बारी-बारी से इन दोनों के परिचय एवं गुण-दोषों का वर्णन करेंगे।
(A) व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण उन परीक्षणों को कहा जाता है जिनमें एक बार में एक ही व्यक्ति अपनी बुद्धि की परीक्षा दे सकता है। ये परीक्षण लम्बे तथा गहन अध्ययन के लिए प्रयोग किये जाते हैं। व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण दो प्रकार के होते हैं
1. शाब्दिक रीक्षण : शाब्दिक व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण में भाषा का प्रयोग किया जाता है तथा परीक्षार्थी को लिखकर कुछ प्रश्नों के उत्तर देने पड़ते हैं।
2. क्रियात्मक परीक्षण : इने बुद्धि-परीक्षणों में परीक्षार्थी को कुछ स्थूल वस्तुएँ या उपकरण प्रदान किये जाते हैं तथा उससे कुछ सुनिश्चित एवं विशेष प्रकार की क्रियाएँ करने को कहा जाता है। उन्हीं क्रियाओं के आधार पर उनकी बुद्धि का मापन होता है।
व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण के गुण-दोष व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण के गुण-दोष निम्न प्रकार वर्णित हैं
गुण :
1. व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण छोटे बालकों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। छोटे बालकों की चंचल प्रवृत्ति के कारण उनका ध्यान जल्दी भंग होने लगता है। परीक्षण की ओर ध्यान केन्द्रित करने के लिए व्यक्तिगत परीक्षा लाभकारी है।
2. इन परीक्षणों में परीक्षार्थी परीक्षक के व्यक्तिगत सम्पर्क में रहता है। उसकी बुद्धि का मूल्यांकन करने में उसके व्यवहार से भी सहायता ली जा सकती है और अधिक विश्वसनीय सूचनाएँ प्राप्त हो सकती हैं।
3. परीक्षा प्रारम्भ होने से पूर्व परीक्षार्थी से भाव सम्बन्ध स्थापित करके उसकी मनोदशा को परीक्षण के प्रति केन्द्रित किया जा सकता है। इससे वह उत्साहित होकर परीक्षा देता है।
4. आदेश/निर्देश सम्बन्धी कठिनाई का तत्काल निराकरण किया जाना सम्भव है।
5. इन परीक्षणों का निदानात्मक महत्त्व अधिक होता है; अतः इसके माध्यम से व्यक्तिगत निर्देशन कार्य को सुगम बनाया जा सकता है।
दोष :
1. व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षा केवल विशेषज्ञ परीक्षणकर्ता द्वारा सम्भव होती है।
2. इसके माध्यम से सामूहिक बुद्धि का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
3. समय तथा धन दोनों की अधिक आवश्यकता पड़ती है।
4. प्रयोग की जाने वाली सामग्री अपेक्षाकृत काफी महँगी पड़ती है। अतः ये परीक्षण बहुत खर्चीले हैं।
5. विभिन्न परीक्षार्थियों की परीक्षा भिन्न-भिन्न समय पर लेने के कारण परिस्थितियों में बदलाव आ जाता है। सभी परीक्षार्थियों की परीक्षा के प्रति एकसमान रुचि नहीं रहतीजिसकी वजह से परीक्षण की वस्तुनिष्ठता कम हो जाती है।
(B) सामूहिक बुद्धि-परीक्षण व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण की परिसीमाओं के कारण कुछ समय बाद एक ऐसी पद्धति की माँग की जाने लगी जिसमें कम समय में ही अधिक व्यक्तियों की बुद्धि-परीक्षा सम्पन्न हो सके । जब द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका ने युद्ध में प्रवेश किया तो लाखों की संख्या में कुशल सैनिकों तथा सैन्य अधिकारियों की आवश्यकता पड़ी। इस स्थिति में टरमन तथा थॉर्नडाइक आदि मनोवैज्ञानिकों ने प्रयास करके दो प्रकार के सामूहिक परीक्षण तैयार किये-आर्मी एल्फा तथा आर्मी बीटा। इन परीक्षणों की मदद से बहुत कम समय में बड़ी संख्या में सैनिकों तथा सैन्य अधिकारियों का चयन सम्भव हो सका। इस प्रकार, सामूहिक बुद्धि-परीक्षण वे परीक्षण हैं, जिनकी सहायता से एक साथ एक समय में बड़े समूह की बुद्धि-परीक्षा ली जा सके। ये भी दो प्रकार के हैं
1. शाब्दिक परीक्षण : शाब्दिक सामूहिक परीक्षणों में भाषा का प्रयोग होता है; अतः ये शिक्षित व्यक्तियों पर ही लागू हो सकते हैं।
2. अशाब्दिक परीक्षण : अशाब्दिक सामूहिक परीक्षणों में आकृतियों तथा चित्रों का प्रयोग किया जाता है। ये अनपढ़, अर्द्ध-शिक्षित या विदेशी लोगों के लिए होते हैं।
सामूहिक बुद्धि-परीक्षण के गुण-दोष सामूहिक बुद्धि-परीक्षण के गुण-दोष निम्न प्रकार हैं
गुण :
1. सामूहिक बुद्धि-परीक्षण में यह जरूरी नहीं होता कि परीक्षक विशेषज्ञ या विशेष रूप से प्रशिक्षित व्यक्ति हो ।
2. समय तथा धन दोनों की काफी बचत होती है।
3. जाँचे का कार्य तो आजकल मशीनों द्वारा होने लगा है।
4. विभिन्न स्थानों पर एक साथ एक ही प्रकार की परीक्षा का संचालन सम्भव है। परीक्षार्थियों का तुलनात्मक मूल्यांकने भी सुविधापूर्वक किया जा सकता है।
5. ये परीक्षण अधिक वस्तुनिष्ठ हैं, क्योंकि एक ही परीक्षक पूरे समूह को एकसमान आदेश देता है, जिसके परिणामतः भाव सम्बन्ध की स्थापना तथा परीक्षार्थियों की परीक्षा में रुचि सम्बन्धी भेद उत्पन्न नहीं होता।
6. शैक्षणिक तथा व्यावसायिक निर्देशन में सामूहिक परीक्षणों से बड़ा लाभ पहुँचा है।
दोष :
1. सामूहिका बुद्धि-परीक्षण में परीक्षक परीक्षार्थी की मनोदशा से परिचित नहीं हो पाता। अतः व्यक्तिगत सम्पर्क व भाव सम्बन्ध की स्थापना का अभाव रहता है।
2. परीक्षार्थी आदेश भली प्रकार नहीं समझ पाते जिसकी वजह से अधिक गलतियाँ होती हैं।
3. यह ज्ञात नहीं हो पाता कि परीक्षार्थी अभ्यास से, रटकर या सोच-समझकर, कैसे परीक्षण पदों को हल कर रहे हैं।
4. इन परीक्षणों का निदान तथा उपचार में सापेक्षिक दृष्टि से कम महत्त्व होता है।
5. परीक्षण अपेक्षाकृत कम विश्वसनीय, कम प्रामाणिक तथा बालक के लिए बहुत कम उपयोगी सिद्ध होते हैं।
In simple words: व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण एक समय में एक व्यक्ति की बुद्धि मापने के लिए होते हैं, गहन अध्ययन और छोटे बच्चों के लिए उपयुक्त होते हैं, परन्तु महंगे और समय लेने वाले होते हैं। सामूहिक बुद्धि-परीक्षण एक साथ कई व्यक्तियों की बुद्धि मापते हैं, समय और धन की बचत करते हैं, लेकिन इनमें व्यक्तिगत संपर्क का अभाव होता है और यह जानना कठिन होता है कि परीक्षार्थी कैसे हल कर रहे हैं।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत और सामूहिक बुद्धि-परीक्षणों के बीच अंतर, साथ ही उनके गुण और दोषों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण तुलनात्मक प्रश्न है।

 

Question 4. बुद्धि-लब्धि से आप क्या समझते हैं? इसे कैसे ज्ञात करेंगे ? या 'मानसिक आयु' और 'बुद्धि-लब्धि किसे कहते हैं ? मानसिक आयु और बुद्धि-लब्धि ज्ञात करने के उदाहरण दीजिए । या बुद्धि-लब्धि क्या है? इसे कैसे निकाला जाता है। शिक्षा में इसकी क्या उपयोगिता है?
Answer: बुद्धि-लब्धि
बालक की वास्तविक आयु और मानसिक आयु के आनुपातिक स्वरूप को 'बुद्धि-लब्धि' कहा जाता है। बुद्धि-लब्धि की यह अवधारणा सर्वप्रथम मनोवैज्ञानिक एम० एल० टरमन (M. L.Turman) द्वारा प्रस्तुत की गयी थी, जिसकी गणना के अन्तर्गत व्यक्ति की मानसिक आयु में वास्तविक आयु से भाग देकर उसे 100 से गुणा कर दिया जाता है। इसके लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है।
बुद्धि-लब्धि = मानसिक आयु / वास्तविक आयु x 100 उदाहरणस्वरूप, यदि किसी बालक की वास्तविक आयु 5 वर्ष है और उसकी मानसिक आयु 7 वर्ष है तो उसकी बुद्धि-लब्धि इस प्रकार निकाली जाएगी \(I.Q. = \frac{M.A.}{C.A.} \times 100\)
\( \implies I.Q. = \frac{7}{5} \times 100 = 140\) बालक की बुद्धि-लब्धि 140 होगी ।
बुद्धि-लब्धि का मापन बुद्धि-परीक्षण के माध्यम से 'बुद्धि-लब्धि' (Intelligence Quotient Or I.O.) का मापन किया जाता है। अपने संशोधित स्केल (1908) में बिने ने बुद्धि-मापन के लिए मानसिक आयु की अवधारणा प्रस्तुत की थी, जिसके आधार पर टरमन ने 1916 ई० में बुद्धि-लब्धि का विचार प्रस्तुत किया। आजकल मनोवैज्ञानिक लोग बुद्धि मापन के लिए बुद्धि-लब्धि का प्रयोग करते हैं। बुद्धि-लब्धि वास्तविक आयु और मानसिक आयु का पारस्परिक अनुपात है। अतः सर्वप्रथम वास्तविक आयु और मानसिक आयु के निर्धारण का तरीका समझना आवश्यक है।
वास्तविक आयु : वास्तविक आयु से अभिप्राय व्यक्ति की यथार्थ आयु से है, जिसका निर्धारण जन्मतिथि के आधार पर किया जाता है।
मानसिक आयु : मानसिक आयु निर्धारित करने के लिए पहले व्यक्ति की वास्तविक आयु पर ध्यान देना होगा। माना किसी बालक की वास्तविक आयु 9 वर्ष है और वह 9 वर्ष के लिए निर्धारित प्रश्नों को सही-सही हल कर देता है तो उसकी मानसिक आयु 9 वर्ष ही मानी जाएगी और इस दृष्टि से वह बालक सामान्य बुद्धि का बालक कहा जाएगा। किन्तु यदि वह 9वर्ष तथा 10 वर्ष के लिए निर्धारित प्रश्नों को सही-सही हल कर देता है तो उसकी मानसिक आयु 10 वर्ष समझी जाएगी और इस दृष्टि से बालक तीव्र बुद्धि का कहा जाएगा।
इस भाँति, यदि वही बालक 8 वर्ष के लिए निर्धारित सभी प्रश्नों को तो हल कर दे, किन्तु 9व के लिए निर्धारित किसी प्रश्न को हल न कर पाये तो उसकी मानसिक आयु 8 वर्ष होगी और इस आधार पर उसे मन्दबुद्धि कां बालक कहा जाएगा। व्यावहारिक रूप में आमतौर पर यह देखा जाता है कि कोई बालक किसी आयु-स्तर के सभी प्रश्नों का तो उत्तर सही-सही दे देता है। इसके अलावा कुछ दूसरे आयु-स्तर के कुछ प्रश्नों को भी हल कर लेता है। ऐसे मामलों में गणना हेतु बिने-साइमन स्केल में 2 वर्ष से 5 वर्ष तक के प्रत्येक परीक्षण-पद के लिए 1 महीना, 5 वर्ष से औसत प्रौढ़ तक के प्रत्येक परीक्षण-पद के लिए 2 माह और प्रौढ़ 1, 2 और 3 के हर एक परीक्षण-पद हेतु क्रमशः 4, 5 और 6 महीने की मानसिक आयु प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।
बुद्धि-लब्धि के आधार पर वर्गीकरण

क्रम संख्याबुद्धि-लब्धिगैरेट (Garret) के अनुसार I.Q. वर्गमैरिल (Merrill) के अनुसार I.Q. वर्गवेश्लर (Weshler) के अनुसार I.Q. विवरण
1.140 या अधिकअत्यन्त श्रेष्ठ (Very Superior)अत्युत्तम (Very Superior)अत्युत्तम (Very Superior)
2.120-139श्रेष्ठ (Superior)उत्तम (Superior)उत्तम (Superior)
3.110-119प्रभावशाली (Bright)औसत से उच्च (High Average)औसत से उच्च (Bright Average)
4.90-109औसत/सामान्य (Average or Normal)औसत (Average)औसत (Average)
5.80-89मन्द-सामान्य/पिछड़ा हुआ (Dull-Normal or Backward)औसत से निम्न (Below Average)औसत से कम (Dull Normal)
6.70-79अत्यन्त मन्द (Very Dull)बोर्डर लाइन (Border Line)सीमान्त (Border Line)
7.0-69दुर्बल बुद्धि (Feeble-minded)मानसिक रूप से दोषी (Mentally Defective)मानसिक रूप से दुर्बल (Mentally Retarded)

निष्कर्षत : बुद्धि-लब्धि मानसिक योग्यता का मात्रात्मक व तुलनात्मक रूप प्रस्तुत करती है। 5 वर्ष, की आयु से लेकर 14 वर्ष की आयु तक बुद्धि-लब्धि ज्यादातर स्थिर रहती है। वस्तुतः मानसिक आयु में वास्तविक आयु के साथ-साथ वृद्धि होती है, किन्तु 14 वर्ष के आसपास यह प्रायः रुक जाती है। परिवेश में परिवर्तन लेकर बुद्धि-लब्धि में परिवर्तन करना सम्भव है। गैरेट का मत है कि अच्छा या बुरा परिवेश होने से बुद्धि-लब्धि में 20 पाइण्ट तक वृद्धि या कमी पायी जाती है। यह सामाजिक अथवा आर्थिक स्तर के साथ-साथ घट-बढ़ सकती है। यह भी उल्लेखनीय है कि बुद्धि-लब्धि कभी शून्य नहीं होती, क्योंकि कोई भी व्यक्ति पूर्णरूप से बुद्धिहीन नहीं होता।
In simple words: बुद्धि-लब्धि (IQ) एक व्यक्ति की मानसिक आयु और वास्तविक आयु का अनुपात है, जिसे 100 से गुणा करके निकाला जाता है। यह टरमन द्वारा विकसित एक मापन है जो व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता को वर्गीकृत करता है (जैसे सामान्य, प्रतिभाशाली, मंदबुद्धि) और यह 5 से 14 वर्ष की आयु तक स्थिर रहता है, हालांकि परिवेश से प्रभावित हो सकता है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि का सूत्र \(I.Q. = \frac{M.A.}{C.A.} \times 100\) याद रखें और मानसिक तथा वास्तविक आयु के आधार पर IQ की गणना करने का अभ्यास करें। विभिन्न IQ वर्गीकरणों को जानना भी महत्वपूर्ण है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. बुद्धि एवं ज्ञान में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: बुद्धि और ज्ञान में निम्नलिखित अन्तर हैं।
1. बुद्धि जन्मजात और वंश-परम्परा से प्राप्त शक्ति है, जबकि ज्ञान वातावरण के द्वारा अर्जित शक्ति
2. बेलार्ड के अनुसार, “बुद्धि वह मानसिक योग्यता है, जिसका मापन ज्ञान, रुचि और आदतरूपी साधनों के द्वारा किया जा सकता है।
3. बुद्धि प्राप्त ज्ञान का जीवन में प्रयोग करना है, जब कि ज्ञान किसी तथ्य की जानकारी प्राप्त करना
4. तीव्र बुद्धिज्ञान के विकास में अधिक योग देती है, परन्तु अधिक ज्ञान बुद्धि के विकास में अधिक योग नहीं देता।
5. ज्ञान का विकास सरलता से किया जा सकता है, परन्तु बुद्धि का नहीं।
6. रॉस के अनुसार, “बुद्धि लक्ष्य है और ज्ञान उस तक पहुँचने का केवल साधन है।”
7. एडम्स (Adams) के अनुसार, व्यावहारिक जीवन में उपयोग में लाने योग्य ज्ञान अथवा विचार ही बुद्धि है।”
8. विभिन्न समस्याओं को हल करने में बुद्धि का योग ज्ञान की तुलना में अधिक रहता है।
9. एक व्यक्ति श्रम में विद्वान् या ज्ञानवान हो सकता है, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि वह बुद्धिमान भी हो। इसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह ज्ञानवान भी हो ।
10. ज्ञान का बुद्धि से घनिष्ठ सम्बन्ध है। यदि बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, तो ज्ञान भी नष्ट हो जाता है।
In simple words: बुद्धि जन्मजात क्षमता है जो समस्याओं को हल करने और जीवन में ज्ञान का उपयोग करने में मदद करती है, जबकि ज्ञान वातावरण से अर्जित जानकारी है। बुद्धि ज्ञान के विकास में सहायक होती है, लेकिन केवल ज्ञान का होना बुद्धिमान होने की गारंटी नहीं देता।

🎯 Exam Tip: बुद्धि और ज्ञान के बीच के मुख्य भेदों को स्पष्ट रूप से समझें, खासकर उनके जन्मजात या अर्जित होने और उनके कार्यात्मक उपयोग के संदर्भ में।

 

Question 2. बुद्धि के एक खण्डीय सिद्धान्त तथा दो खण्डों के सिद्धान्त का सामान्य परिचय दीजिए। या बुद्धि के द्वि-कारक सिद्धान्त की संक्षेप में व्याख्या कीजिए। या बुद्धि के द्वि-खण्ड (तत्त्व) सिद्धान्त के बारे में लिखिए।
Answer:
1. एक-खण्डीय सिद्धान्त : एक-खण्डीय सिद्धान्त के प्रमुख प्रतिपादक, बिने (Binet), टरमन (Turman) तथा स्टर्न (Stern) हैं। इनके अनुसार बुद्धि एक अखण्ड और अविभाज्य है। हमारी विभिन्न मानसिक योग्यताएँ एक इकाई के रूप में कार्य करती हैं, परन्तु यह सिद्धान्त अब अमान्य हो चुका है।
2. दो खण्डों का सिद्धान्त : इस सिद्धान्त के प्रतिपादक स्पीयरमैन (Spearman) हैं, उनके अनुसार बुद्धि के दो तत्त्व हैं – सामान्य योग्यता और विशिष्ट योग्यता । स्पीयरमैन सामान्य योग्यता को विशिष्ट योग्यता से अधिक महत्त्वपूर्ण मानता है। उसके अनुसार इसकी निम्नलिखित विशेषताएँ हैं।
1. सामान्य योग्यता जन्मजात होती है।
2. सामान्य योग्यता एक मानसिक शक्ति है।
3. इसका उपयोग मानसिक कार्यों में होता है।
4. सामान्य योग्यता प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न मात्रा में पायी जाती है।
5. सामान्य योग्यता किस व्यक्ति में कितनी है, इसका पता अन्तर्दृष्टि (Insight) द्वारा किये जाने वाले कार्यों में किया जा सकता है।
6. सामान्य योग्यता का तत्त्व शक्ति में सर्वदा एकसमान है।
7. जिन व्यक्तियों में जितनी सामान्य योग्यता पायी जाती है, उतना ही वह व्यक्ति सफल माना जाता
विशिष्ट योग्यता का सम्बन्ध व्यक्ति के विशिष्ट कार्यों से होता है। विशिष्ट योग्यता की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं।
1. विशिष्ट योग्यता भी व्यक्तियों में भिन्न-भिन्न मात्रा में पायी जाती है।
2. विशिष्ट योग्यता को प्रयास द्वारा अर्जित किया जा सकता है।
3. विशिष्ट योग्यता परस्पर एक-दूसरे से भिन्न होती है।
4. विशिष्ट योग्यताएँ अनेक होती हैं।
5. जिस व्यक्ति में जिस विशेष योग्यता की प्रधानता होती है, वह उसी में निपुणता प्राप्त करता है।
In simple words: एक-खण्डीय सिद्धान्त (बिने, टरमन) के अनुसार बुद्धि एक अविभाज्य इकाई है, जबकि द्वि-खण्ड सिद्धान्त (स्पीयरमैन) के अनुसार बुद्धि दो कारकों से बनी है: सामान्य योग्यता (जन्मजात, मानसिक कार्यों में प्रयुक्त) और विशिष्ट योग्यता (अर्जित, विभिन्न कार्यों से संबंधित)।

🎯 Exam Tip: बुद्धि के एक-खण्डीय और द्वि-खण्ड सिद्धान्तों के प्रतिपादकों के नाम और उनके मुख्य विचारों को स्पष्ट रूप से याद करें। स्पीयरमैन के 'G' और 'S' कारक विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 3. बुद्धि की व्याख्या करने वाले बहुखण्ड सिद्धान्त का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: बुद्धि के बहुखण्ड सिद्धान्त के प्रतिपादक कैली (Kelley) और थर्स्टन (Thurstone) हैं। कैली के अनुसार बुद्धि निम्नलिखित खण्डों या योग्यताओं का समूह होती है।
1. सामाजिक योग्यता (Social ability)
2. गामक योग्यता (Motor ability)
3. सांख्यिकीय योग्यता (Numerical ability)
4. रुचि (Interest)
5. सर्जनात्मक योग्यता (Productive ability)
6. शाब्दिक योग्यता (Verbal ability)
7. स्थान सम्बन्धी विचार की योग्यता (Ability deal with spatial relations)
8. यान्त्रिक योग्यता (Mechanical ability)
9. शारीरिक योग्यता (Physical ability)।
थस्टन ने भी बुद्धि को 13 मानसिक योग्यताओं का समूह माना है, जिसमें प्रमुख योग्यताएँ निम्नलिखित हैं
1. आगमनात्मक योग्यता (Inductive ability)
2. निगमनात्मक योग्यता (Deductive ability)
3. प्रत्यक्षीकरण की योग्यता (Perceptical ability)
4. सांख्यिकी योग्यता (Numerical ability)
5. स्थान सम्बन्धी योग्यता (Spatial ability)
6. शाब्दिक योग्यता (Verbal ability)
7. समस्या समाधान योग्यता (Problem solving ability)
8. स्मृति (Memory)।
वर्तमान में बुद्धि का बहुखण्ड सिद्धान्त अमान्य हो चुका है।
In simple words: बहुखण्ड सिद्धान्त (कैली, थर्स्टन) बुद्धि को विभिन्न स्वतंत्र मानसिक योग्यताओं का समूह मानते हैं, जैसे सामाजिक, गामक, शाब्दिक, संख्यात्मक और समस्या-समाधान योग्यताएँ। ये सिद्धांत बताते हैं कि बुद्धि एक अकेली क्षमता नहीं बल्कि कई विशिष्ट क्षमताओं का संयोजन है।

🎯 Exam Tip: बहुखण्ड सिद्धान्त के प्रतिपादकों (कैली और थर्स्टन) और उनके द्वारा प्रस्तावित विभिन्न मानसिक योग्यताओं के उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. शिक्षा में बुद्धि-परीक्षणों की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
Answer: बुद्धि-परीक्षण मानव जीवन के लिए अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हुए हैं। शाब्दिक एवं अशाब्दिक सभी प्रकार के बुद्धि परीक्षणों के लाभों या उपयोगिता के कुछ मुख्य बिन्दुओं पर अग्र प्रकार से प्रकाश डाला जा सकता है।
1. बुद्धि-परीक्षण एवं शैक्षिक निर्देशन : बालकों की शैक्षिक निर्देशन प्रदान करने में बुद्धि-परीक्षण अपनी विशिष्ट भूमिका निभाता है। बुद्धि-परीक्षण की सहायता से शिक्षार्थी की बुद्धि-लब्धि का मापन किया जाता है, जिसके आधार पर सामान्य, मन्द बुद्धि, पिछड़े तथा प्रतिभाशाली बालकों के मध्य विभेदीकरण हो जाता है। परीक्षण के परिणामों के आधार पर निर्देशन प्रदान किया जाता है। इसी से उनकी समस्याओं का निदान व उपचार करना सम्भव हो पाता है।
2. बुद्धि-परीक्षण एवं व्यावसायिक निर्देशन : व्यक्ति के बौद्धिक स्तर तथा उसकी मानसिक योग्यताओं के अनुकूल व्यवसाय तलाश करने तथा नियुक्ति के सम्बन्ध में बुद्धि-परीक्षण सहायक सिद्ध होता है। व्यावसायिक निर्देशन से जुड़े दो पहलुओं- प्रथम, व्यक्ति विश्लेषण जिसमें व्यक्ति की बुद्धि, योग्यता, रुचि तथा व्यक्तित्व सम्बन्धी जानकारियाँ आती हैं; तथा द्वितीय, व्यवसाय विश्लेषण जिसमें विशेष व्यवसाय के लिए विशेष गुणों की आवश्यकता का ज्ञान आवश्यक है-में बुद्धि-परीक्षण उपयोगी है।
3. नियुक्ति : विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थान व्यक्ति को रोजगार प्रदान करने में बौद्धिक स्तर का मूल्यांकन करते हैं। आजकल विभिन्न व्यवसायों से सम्बन्धित नियुक्ति से पूर्व की प्रायः सभी प्रतियोगिताओं में बुद्धि-परीक्षण लागू होते हैं।
4. वर्गीकरण : शिक्षक अपने शिक्षण को अधिक उपयोगी एवं प्रभावशाली बनाने के लिए कक्षा के छात्रों को विभिन्न वर्गों; यथा-प्रखर बुद्धि, मन्द बुद्धि तथा औसत बुद्धि में विभाजित कर पढ़ाना चाहता । है। अलग वर्ग के लिए अलग एवं विशिष्ट शिक्षण विधि आवश्यक होती है। इन वर्गीकरणों के आधार बुद्धि-परीक्षण होते हैं।
5. शोध : आजकल मनोवैज्ञानिक तथा शैक्षिक शोध-कार्यों में विषय-पात्रों के बौद्धिक स्तर तथा मानसिक योग्यता का सापन करना एक आम बात है। इसके लिए बुद्धि-परीक्षण काम में आते हैं।
In simple words: बुद्धि-परीक्षण शिक्षा में बहुत उपयोगी हैं क्योंकि ये बच्चों को शैक्षिक और व्यावसायिक मार्गदर्शन देने, उनकी समस्याओं का निदान करने, नौकरियों में नियुक्ति के लिए मूल्यांकन करने, छात्रों को विभिन्न बौद्धिक वर्गों में बांटने और मनोवैज्ञानिक शोध में सहायता करते हैं।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-परीक्षणों की उपयोगिताओं को शैक्षिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में उनके विशिष्ट अनुप्रयोगों के साथ याद रखें, जैसे मार्गदर्शन, वर्गीकरण और नियुक्ति।

 

Question 5. शाब्दिक एवं अशाब्दिक बुद्धि-परीक्षणों में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
Answer: शाब्दिक एवं अशाब्दिक बुद्धि-परीक्षणों में मुख्य अन्तर निम्नलिखित तालिका में वर्णित हैं।

क्र०सं०शाब्दिक परीक्षणअशाब्दिक परीक्षण
1.शाब्दिक परीक्षण का प्रयोग उस समय किया जाता है, जब परीक्षार्थी परीक्षा की भाषा भली प्रकार जानता हो।अशाब्दिक परीक्षण अशिक्षित या अन्य भाषा जानने वाले परीक्षार्थी के लिए उपयुक्त है।
2.यह परीक्षण उच्च स्तर की मानसिक योग्यता वालों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त समझा जाता है।यह परीक्षण सामान्य से निम्न स्तर की बुद्धि वाले लोगों के लिए ठीक रहता है।
3.इसका उपयोग उन दशाओं में करना उचित है, जब प्रतीकों के प्रयोग की योग्यता अथवा सूक्ष्म विचार की योग्यता अथवा सामान्य योग्यता का ज्ञान प्राप्त करना हमारा उद्देश्य हो।यहाँ हमारा उद्देश्य परीक्षार्थी की निष्पादन अथवा क्रियात्मक योग्यता अथवा विशेष योग्यता का पता लगाना होता है।
4.बड़ी उम्र के लोगों के लिए इसका प्रयोग सर्वथा उचित कहा जा सकता है।तीन से दस वर्ष तक की छोटी आयु के बालकों का प्रयोग किया जा सकता है।
5.यह परीक्षण सामान्य जनों के हितों की पूर्ति करता है।समाज के कुछ अशिक्षित, पिछड़े लोग; जैसे- ग्रामीण, उत्पीड़ित हरिजन या जनजातियों से सम्बन्धित लोगों के लिए प्रयुक्त हो सकता है, सभी के लिए नहीं।

In simple words: शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण भाषा पर आधारित होते हैं, शिक्षित और अधिक मानसिक योग्यता वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त होते हैं, जबकि अशाब्दिक बुद्धि-परीक्षण चित्रों या क्रियाओं पर आधारित होते हैं, अशिक्षितों, छोटे बच्चों और निम्न-बुद्धि स्तर वाले व्यक्तियों के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।

🎯 Exam Tip: शाब्दिक और अशाब्दिक परीक्षणों के बीच के अंतर को उनकी प्रकृति (भाषा बनाम चित्र/क्रिया), उपयोगिता (शिक्षित बनाम अशिक्षित) और आयु समूह के संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. व्यक्तिगत एवं सामूहिक बुद्धि-परीक्षणों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: व्यक्तिगत एवं सामूहिक बुद्धि-परीक्षणों में मुख्य अन्तर निम्नलिखित तालिका में वर्णित हैं।

क्र०सं०व्यक्तिगत परीक्षणसामूहिक परीक्षण
1.व्यक्तिगत परीक्षण में विशेष योग्यता से युक्त विश्वेषज्ञ की आवश्यकता पड़ती है।सामूहिक परीक्षा साधारण ज्ञान वाला व्यक्ति भी ले सकता है।
2.इस परीक्षा में अधिक समय खर्च होता है, क्योंकि एक समय में एक व्यक्ति की ही परीक्षा ली जा सकती है।इस परीक्षा में समय की बचत होती है, क्योंकि एक ही साथ बहुत सारे व्यक्तियों की परीक्षा ली जा सकती है।
3.व्यक्तिगत परीक्षण छोटे बालकों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होता है।यह परीक्षण बड़ी उम्र के लोगों के लिए ठीक रहता है।
4.इसके अन्तर्गत परीक्षण पद या प्रश्न कठिन स्तर के होते हैं। प्रश्नों के निर्धारण में भी कठिनाई होती है।इसमें प्रश्न सरल होते हैं और थोड़े समय में ही प्रखर, सामान्य तथा मन्द बुद्धि के बालकों का पता चल जाता है। यहाँ प्रश्नों के निर्धारण सम्बन्धी कठिनाई नहीं आती है।
5.बालक तथा परीक्षक का व्यक्तिगत सम्पर्क होने से उचित भाव सम्बन्ध स्थापित हो जाते हैं।इस प्रकार के सम्पर्क का अभाव रहने से ठीक प्रकार से भाव-सम्बन्ध स्थापित नहीं हो पाते।
6.इस परीक्षण में व्यक्ति के मन का सम्यक् ज्ञान नहीं हो पाता।इसमें सामूहिक बुद्धि का ज्ञान हो जाता है।
7.व्यक्तिगत परीक्षणों में भाषा, ज्ञान तथा व्यावहारिकता का विशेष प्रभाव पड़ता है।सामूहिक परीक्षा में ऐसा कुछ नहीं होने पाता।
8.इन परीक्षणों में बालक प्रायः घबरा जाते हैं।इनको संचालित करते समय व्यक्ति खुशी से सहयोग देता है।
9.व्यक्तिगत परीक्षण अधिक खर्चीले होते हैं।ये परीक्षण कम खर्चीली होने के कारण निर्धन देशों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होते हैं।
10.इन परीक्षणों की विश्वसनीयता तथा वैधता अधिक पायी जाती है।सामूहिक परीक्षणों में इन गुणों का अभाव रहने की सम्भावना रहती है।

In simple words: व्यक्तिगत बुद्धि-परीक्षण एक व्यक्ति पर विशेषज्ञ द्वारा संचालित होता है, गहन अध्ययन के लिए उपयुक्त, छोटे बच्चों के लिए बेहतर, पर अधिक समय और धन लेता है, जबकि सामूहिक बुद्धि-परीक्षण एक साथ कई लोगों पर साधारण व्यक्ति द्वारा हो सकता है, समय और पैसे बचाता है, बड़े समूहों के लिए अच्छा है, लेकिन व्यक्तिगत संपर्क और गहराई की कमी होती है।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत और सामूहिक परीक्षणों की तुलना करते समय उनकी लागत, समय, प्रशासन की विधि, विश्वसनीयता और किस आयु/समूह के लिए वे अधिक उपयुक्त हैं, इन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. बुद्धि के मुख्य प्रकारों का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: गैरेट (Garret) तथा थॉर्नडाइक (Thorndike) के अनुसार बुद्धि तीन प्रकार की होती हैं।
1. मूर्त बुद्धि : विभिन्न वस्तुओं को समझने तथा अनुकूल क्रिया करने में मूर्त (Concrete) बुद्धि का प्रयोग होता है। जिनमें यह बुद्धि होती है, वे यन्त्रों तथा मशीनों में विशेष रुचि लेते हैं। यह बुद्धि गामक (Motor) बुद्धि भी कहलाती है।
2. अमूर्त बुद्धि : अमूर्त (Abstract) बुद्धि का कार्य सूक्ष्म तथा अमूर्त प्रश्नों को चिन्तन तथा मनन के द्वारा हल करना होता है। इस बुद्धि का सम्बन्ध पुस्तकीय ज्ञान से होता है। दार्शनिकों, कवियों तथा साहित्यकारों में यह बुद्धि विशेष रूप से पायी जाती है।
3. सामाजिक बुद्धि : सामाजिक बुद्धि का तात्पर्य व्यक्ति की उस योग्यता से है, जो उसमें सामाजिक समायोजन की क्षमता उत्पन्न करती है। जिस व्यक्ति में यह बुद्धि होती है, वह मिलनसार तथा सामाजिक कार्यों में विशेष रुचि लेता है। राजनीतिज्ञों, कूटनीतिज्ञों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं में यह बुद्धि विशेष रूप से पायी जाती है।
In simple words: गैरेट और थॉर्नडाइक के अनुसार बुद्धि तीन प्रकार की होती है: मूर्त बुद्धि (जो मशीनों और वस्तुओं से संबंधित होती है), अमूर्त बुद्धि (जो वैचारिक और पुस्तकीय ज्ञान से संबंधित होती है), और सामाजिक बुद्धि (जो सामाजिक परिस्थितियों में समायोजित होने में मदद करती है)।

🎯 Exam Tip: बुद्धि के तीनों प्रकारों- मूर्त, अमूर्त और सामाजिक- को उनके व्यावहारिक उदाहरणों और किस प्रकार के व्यक्तियों में वे अधिक पाई जाती हैं, के साथ समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. बुद्धि-परीक्षणों की विश्वसनीयता से क्या आशय है ?
Answer: यदि बुद्धि-परीक्षण किसी व्यक्ति-विशेष की बुद्धि का एकरूपता से मापन करता है तो उसे विश्वसनीय (Reliable) कहा जाएगा। अनास्टेसी का कथन है कि “विश्वसनीयता से तात्पर्य स्थायित्व अथवा स्थिरता से है। उदाहरण के लिए, माना 'स्टेनफोर्ड बिने बुद्धि परीक्षण द्वारा एक बालक 'राजन' की बुद्धि का मापन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप उसकी बुद्धि-लब्धि 108 आती है। कुछ समय के पश्चात् साधारण परिस्थितियों में स्टेनफोर्ड बिने बुद्धि-परीक्षण' द्वारा राजन की बुद्धि को पुनः मापन किया गया, जिसका परिणाम वही बुद्धि-लब्धि 108 निकला ।
तीन-चार-पाँच बार जब परीक्षण द्वारा राजन की बुद्धि मापी गयी तो उसकी बुद्धि-लब्धि 108 ही प्राप्त हुई। निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि 'स्टेनफोर्ड बिने बुद्धि-परीक्षण पूर्णरूप से विश्वसनीय बुद्धि-परीक्षण है। एक विश्वसनीय बुद्धि-परीक्षण में वस्तुनिष्ठता तथा व्यापकता का गुण अनिवार्य रूप से होना चाहिए। एक बुद्धि-परीक्षण उस समय वस्तुनिष्ठ कहा जाएगा, जब कि वह परीक्षक के व्यक्तिगत विचारों से प्रभावित न हो और उसकी व्यापकता से अभिप्राय है कि वह बुद्धि के सभी पक्षों का मूल्यांकन करेगा। एक बुद्धि-परीक्षण में विश्वसनीयता का गुण उसे प्रामाणिक बनाने में सहायता देता है।
In simple words: बुद्धि-परीक्षण की विश्वसनीयता का अर्थ है कि वह परीक्षण एक व्यक्ति की बुद्धि को बार-बार मापने पर लगातार समान परिणाम दे, यानी उसके मापन में स्थिरता और स्थायित्व हो। एक विश्वसनीय परीक्षण वस्तुनिष्ठ और व्यापक भी होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: विश्वसनीयता की अवधारणा को उसके अर्थ (स्थिरता/एकरूपता), उदाहरण और वस्तुनिष्ठता/व्यापकता से संबंध के साथ याद रखें।

 

Question 3. आकृति-फलक परीक्षण को स्पष्ट कीजिए ।
Answer: आकृति-फलक परीक्षण एक अशाब्दिक बुद्धि : परीक्षण है। इस परीक्षण को सामान्य रूप से मन्द बुद्धि बालकों के बुद्धि-परीक्षण के लिए अपनाया जाता है। ऐसा ही एक परीक्षण सेग्युइन ने तैयार किया था। इस परीक्षण में लकड़ी का एक पटल होता है, जिसमें कि विभिन्न आकार के दस टुकड़े काटकर अलग कर दिये जाते हैं। परीक्षार्थी के सम्मुख छिद्रमुक्त पटल तथा ये दस टुकड़े रख दिये जाते हैं। अब परीक्षार्थी से इन टुकड़ों को बोर्ड में कटे हुए उपयुक्त स्थानों में फिट करने के लिए कहा जाता है। इस प्रकार के तीन प्रशास किये जाते हैं। जिस प्रयास में परीक्षार्थी को सबसे कम समय लगता है, उसी को आंधार मानकर फलॉक प्रदान कर बुद्धि का निर्धारण किया जाता है।
In simple words: आकृति-फलक परीक्षण एक अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण है, जो मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि मापने के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें एक लकड़ी के पटल पर कटे हुए विभिन्न आकार के टुकड़ों को सही स्थानों पर फिट करने के लिए कहा जाता है, और न्यूनतम समय में पूरा करने वाला प्रयास बुद्धि का संकेतक होता है।

🎯 Exam Tip: आकृति-फलक परीक्षण के अशाब्दिक स्वरूप, इसके लक्ष्य (मंदबुद्धि बालकों के लिए), और इसकी कार्यप्रणाली (लकड़ी के टुकड़ों को फिट करना) को स्पष्ट रूप से समझें।

निश्चित उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. बुद्धि की एक संक्षिप्त परिभाषा लिखिए।
Answer: “बुद्धि अमूर्त विचारों के विषय में सोचने की योग्यता है।” [टरमन]
In simple words: टरमन के अनुसार, बुद्धि अमूर्त विचारों के बारे में सोचने की क्षमता है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि की प्रमुख परिभाषाओं को उनके प्रतिपादकों के नाम के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. बुद्धि के मुख्य प्रकार कौन-कौन-से हैं ? या : थॉर्नडाइक ने बुद्धि के तीन भाग किये हैं, वे कौन-से हैं?
Answer: गैरेट तथा थॉर्नडाइक ने बुद्धि के तीन प्रकार निर्धारित किये हैं
1. मूर्त बुद्धि
2. अमूर्त बुद्धि तथा
3. सामाजिक बुद्धि
In simple words: गैरेट और थॉर्नडाइक ने बुद्धि को तीन मुख्य प्रकारों में बांटा है: मूर्त बुद्धि (ठोस वस्तुओं के साथ काम करने की क्षमता), अमूर्त बुद्धि (विचारों और अवधारणाओं के साथ काम करने की क्षमता), और सामाजिक बुद्धि (सामाजिक परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से बातचीत करने की क्षमता)।

🎯 Exam Tip: बुद्धि के तीन मुख्य प्रकारों (मूर्त, अमूर्त, सामाजिक) को उनके प्रतिपादकों के साथ याद रखें, यह वर्गीकरण अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 3. बुद्धि की व्याख्या के लिए कौन-कौन-से सिद्धान्त प्रस्तुत किये गये हैं ?
Answer:
1. एक खण्डीय सिद्धान्त
2. दो खण्डों का सिद्धान्त
3. बहुखण्ड को सिद्धान्त तथा
4. त्रा सिद्धान्त ।
In simple words: बुद्धि की व्याख्या के लिए कई प्रमुख सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें एक-खण्डीय, दो खण्डों का, बहुखण्ड और त्रा (कारक) सिद्धांत शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: बुद्धि के विभिन्न सिद्धान्तों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये बुद्धि की संरचना को समझने के विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।

 

Question 4. सामान्य एवं विशिष्ट कारक बुद्धि सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया है?
Answer: सामान्य एवं विशिष्ट कारक बुद्धि सिद्धान्त (दो खण्ड का सिद्धान्त) स्पीयरमैन ने प्रस्तुत किया हैं।
In simple words: सामान्य एवं विशिष्ट कारक बुद्धि सिद्धान्त, जिसे 'दो खण्ड का सिद्धान्त' भी कहते हैं, स्पीयरमैन द्वारा प्रतिपादित किया गया था।

🎯 Exam Tip: स्पीयरमैन के सामान्य (g) और विशिष्ट (s) कारक सिद्धांतों के प्रतिपादक के रूप में नाम याद रखें।

 

Question 5. विश्वसनीयता और वैधता किस प्रकार के परीक्षण की मुख्य विशेषताएँ हैं?
Answer: विश्वसनीयता और वैधता मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की मुख्य विशेषताएँ हैं ।
In simple words: विश्वसनीयता और वैधता किसी भी मनोवैज्ञानिक परीक्षण की दो सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि परीक्षण सटीक और सुसंगत परिणाम देता है।

🎯 Exam Tip: मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की मुख्य विशेषताओं के रूप में विश्वसनीयता और वैधता को हमेशा याद रखें।

 

Question 6. बुद्धि-परीक्षण से क्या आशय है ?
Answer: बुद्धि परीक्षण, वे मनोवैज्ञानिक परीक्षण हैं जो मानव-व्यक्तित्व के सर्वप्रमुख तत्त्व एवं उसकी प्रधान मानसिक योग्यता बुद्धि का अध्ययन तथा मापन करते हैं।
In simple words: बुद्धि-परीक्षण वे मनोवैज्ञानिक उपकरण हैं जिनका उपयोग किसी व्यक्ति की प्रमुख मानसिक योग्यता, यानी बुद्धि, का अध्ययन और मापन करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-परीक्षण की परिभाषा को याद रखें, जिसमें उसके उद्देश्य (मानसिक योग्यता का मापन) और प्रकृति (मनोवैज्ञानिक परीक्षण) को शामिल किया गया है।

 

Question 7. प्रथम विश्व युद्ध के समय किस प्रकार के बुद्धि-परीक्षण का जन्म हुआ?
Answer: प्रथम विश्व युद्ध के समय मुख्य रूप से शाब्दिक समूह-बुद्धि-परीक्षणों का जन्म हुआ। इनके उदाहरण हैं – आर्मी एल्फा और बीटा परीक्षण ।
In simple words: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर सैनिकों की भर्ती और वर्गीकरण के लिए शाब्दिक समूह-बुद्धि-परीक्षणों, जैसे आर्मी एल्फा और बीटा परीक्षण, का विकास हुआ।

🎯 Exam Tip: प्रथम विश्व युद्ध के संदर्भ में शाब्दिक समूह-बुद्धि-परीक्षणों के विकास और उनके प्रमुख उदाहरणों (आर्मी एल्फा, बीटा) को याद रखना उपयोगी है।

 

Question 8. बुद्धि-परीक्षणों में निहित क्रियाओं के आधार पर उनके मुख्य वर्ग कौन-से हैं?
Answer: बुद्धि-परीक्षणों में निहित क्रियाओं के आधार पर उनके मुख्य वर्ग हैं
1. शाब्दिक परीक्षण तथा अशाब्दिक या क्रियात्मक परीक्षण ।
In simple words: बुद्धि-परीक्षणों को उनमें निहित क्रियाओं के आधार पर मुख्यतः दो वर्गों में बांटा गया है: शाब्दिक परीक्षण (जो भाषा का उपयोग करते हैं) और अशाब्दिक या क्रियात्मक परीक्षण (जो गैर-मौखिक कार्यों पर आधारित होते हैं)।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-परीक्षणों के मूलभूत वर्गीकरण (शाब्दिक और अशाब्दिक/क्रियात्मक) को उनके मापन की विधि के आधार पर याद रखें।

 

Question 9. बुद्धि-लब्धि को ज्ञात करने का सूत्र क्या है? या बुद्धि-लब्धि का सूत्र लिखिए।
Answer: बुद्धि-लब्धि को ज्ञात करने का सूत्र
बुद्धि-लब्धि = मानसिक आयु / मानसिक आयु x 100
In simple words: बुद्धि-लब्धि (IQ) की गणना का सूत्र व्यक्ति की मानसिक आयु को उसकी वास्तविक आयु से भाग देकर 100 से गुणा करना है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि का सूत्र \(I.Q. = \frac{M.A.}{C.A.} \times 100\) हमेशा याद रखें, क्योंकि यह गणना पर आधारित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. “बुद्धि चार तत्त्वों का समूह है।” किसने कहा है?
Answer: वुडवर्थ ने ।
In simple words: वुडवर्थ नामक मनोवैज्ञानिक ने कहा था कि बुद्धि चार तत्त्वों का समूह है।

🎯 Exam Tip: मनोवैज्ञानिकों द्वारा दिए गए प्रमुख कथनों और परिभाषाओं को उनके प्रतिपादकों के साथ याद रखें।

 

Question 11. बुद्धि-लब्धि सूत्र के निर्माता कौन हैं।
Answer: बुद्धि-लब्धि सूत्र के निर्माता टरमन हैं।
In simple words: बुद्धि-लब्धि (IQ) के सूत्र को टरमन ने विकसित किया था।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि के सूत्र के प्रतिपादक (टरमन) का नाम याद रखना आवश्यक है।

 

Question 12. बुद्धि की प्रमुख विशेषता क्या होती है?
Answer: बुद्धि से व्यक्ति अतीत के अनुभवों से लाभ उठाता है। वर्तमान परिस्थिति को समझता है तथा नवीन परिस्थितियों से समायोजन करता है।
In simple words: बुद्धि की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह व्यक्ति को अपने पुराने अनुभवों से सीखने, वर्तमान परिस्थितियों को समझने और नई स्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह सीखने, समझने और समायोजन में सहायता करती है।

 

Question 13. मन्दबुद्धि बालक की बुद्धि-लब्धि लिखिए।
Answer: अत्यन्त मन्द बालक की बुद्धिलब्धि 70 से 79 होती है तथा मन्द सामान्य बालक की बुद्धिलब्धि 80 से 85 होती है।
In simple words: अत्यन्त मंदबुद्धि बालक की बुद्धि-लब्धि 70-79 के बीच होती है, जबकि मंद सामान्य बालक की बुद्धि-लब्धि 80-85 के बीच होती है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि के विभिन्न स्तरों और उनके संबंधित वर्गीकरणों (जैसे मंदबुद्धि) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. बुद्धि क्या है?
Answer: बुद्धि व्यक्ति की सम्पूर्ण शक्तियों का योग या सार्वभौमिक योग्यता है, जिसके द्वारा वह उद्देश्यपूर्ण कार्य करता है, तर्कपूर्ण ढंग से सोचता है तथा प्रभावी ढंग से वातावरण के साथ सम्पर्क स्थापित करता है।
In simple words: बुद्धि व्यक्ति की समग्र मानसिक क्षमता है जो उसे उद्देश्यपूर्ण कार्य करने, तार्किक रूप से सोचने और अपने पर्यावरण के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत करने में सक्षम बनाती है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि की व्यापक परिभाषा को याद रखें जिसमें उसके विभिन्न कार्य जैसे उद्देश्यपूर्ण कार्य, तर्कपूर्ण सोच और प्रभावी समायोजन शामिल हैं।

 

Question 15. किसने कहा है कि बुद्धि सात प्राथमिक योग्यताओं का समूह है?
Answer: लुईस थर्स्टन ।
In simple words: मनोवैज्ञानिक लुईस थर्स्टन ने प्रस्तावित किया कि बुद्धि सात प्राथमिक मानसिक योग्यताओं का एक समूह है।

🎯 Exam Tip: थर्स्टन और उनकी 'प्राथमिक मानसिक योग्यताओं' के सिद्धांत को याद रखें।

 

Question 16. बुद्धि-लब्धि क्या है?
Answer: बालक की वास्तविक आयु और मानसिक आयु के आनुपातिक स्वरूप को बुद्धि-लब्धि कहा जाता है।
In simple words: बुद्धि-लब्धि एक बच्चे की मानसिक आयु और उसकी वास्तविक (कालानुक्रमिक) आयु के बीच का संख्यात्मक अनुपात है, जो उसकी बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि की मूल परिभाषा को याद रखें, जो मानसिक और वास्तविक आयु के अनुपात पर आधारित है।

 

Question 17. “अमूर्त चिन्तन की योग्यता ही बुद्धि हैं।” यह परिभाषा किस मनोवैज्ञानिक द्वारा परिपादित है?
Answer: यह परिभाषा टरमन द्वारा प्रतिपादित है।
In simple words: टरमन ने बुद्धि को अमूर्त चिंतन करने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया।

🎯 Exam Tip: टरमन की बुद्धि की परिभाषा को उनके नाम के साथ याद रखें, विशेषकर 'अमूर्त चिंतन की योग्यता' पर जोर दें।

 

Question 18. मानसिक आयु कैसे ज्ञात की जाती है?
Answer: मानसिक आयु विभिन्न परीक्षणों द्वारा ज्ञात की जाती है।
In simple words: मानसिक आयु एक बच्चे की बौद्धिक विकास का स्तर है, जिसे विशेष बुद्धि परीक्षणों के माध्यम से निर्धारित किया जाता है, न कि उसकी वास्तविक उम्र से।

🎯 Exam Tip: मानसिक आयु को बुद्धि-परीक्षणों के माध्यम से मापा जाता है, यह तथ्य याद रखें।

 

Question 19. भारतीय शिक्षाशास्त्री भाटिया द्वारा तैयार किए गए बुद्धि परीक्षण किस वर्ग के बुद्धि परीक्षण है?
Answer: अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण ।
In simple words: भारतीय शिक्षाशास्त्री भाटिया द्वारा विकसित बुद्धि परीक्षण अशाब्दिक वर्ग में आते हैं, जिसका अर्थ है कि वे भाषा का उपयोग नहीं करते।

🎯 Exam Tip: भाटिया के बुद्धि परीक्षण का वर्ग (अशाब्दिक) याद रखें, जो भारतीय संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

 

Question 20. आर्मी एल्फा और बीटा परीक्षण किस वर्ग का परीक्षण है?
Answer: आर्मी एल्फा और बीटा परीक्षण सामूहिक शाब्दिक बुद्धि परीक्षण है।
In simple words: आर्मी एल्फा और बीटा परीक्षण सामूहिक शाब्दिक बुद्धि परीक्षण के उदाहरण हैं, जिनका उपयोग बड़े समूहों पर भाषा-आधारित बुद्धि के मापन के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: आर्मी एल्फा और बीटा परीक्षणों के वर्गीकरण (सामूहिक शाब्दिक) को याद रखें, क्योंकि यह उनके उपयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

 

Question 21. निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य
1. प्रत्येक व्यक्ति में जन्मजात रूप में बुद्धि विद्यमान होती है।
2. बुद्धि और ज्ञान में कोई अन्तर नहीं है।
3. बुद्धि के बहुखण्ड सिद्धान्त का प्रतिपादन स्पीयरमैन ने किया है।
4. मानसिक आयु और बुद्धि-लब्धि पर्यायवाची हैं।
Answer:
1. सत्य
2. असत्य
3. असत्य
4. असत्य
In simple words: प्रत्येक व्यक्ति में जन्मजात बुद्धि होती है (सत्य)। बुद्धि और ज्ञान भिन्न अवधारणाएँ हैं (असत्य)। बहुखण्ड सिद्धांत कैली और थर्स्टन ने दिया, स्पीयरमैन ने नहीं (असत्य)। मानसिक आयु बुद्धि-लब्धि का एक घटक है, पर्यायवाची नहीं (असत्य)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक कथन को व्यक्तिगत रूप से मूल्यांकन करें और बुद्धि, ज्ञान, सिद्धांतों के प्रतिपादकों और संबंधित अवधारणाओं के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. “बुद्धि पहचानने तथा सीखने की शक्ति है।” यह किसका कथन है ?
(क) स्टर्न का
(ख) बिनेट का
(ग) माल्टने का
(घ) टरमन का
Answer: (ग) माल्टन का
In simple words: "बुद्धि पहचानने और सीखने की शक्ति है" यह कथन माल्टन द्वारा दिया गया है, जो बुद्धि को ज्ञान प्राप्ति और अनुभव के माध्यम से सीखने की क्षमता के रूप में परिभाषित करता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न मनोवैज्ञानिकों द्वारा दी गई बुद्धि की परिभाषाओं को उनके प्रतिपादकों के साथ याद रखें, क्योंकि ये अक्सर बहुविकल्पीय प्रश्नों में पूछे जाते हैं।

 

Question 2. “बुद्धि अमूर्त वस्तुओं के विषय में सोचने की योग्यता है।” यह परिभाषा किसकी है?
(क) थॉर्नडाइक की
(ख) मैक्डूगल की
(ग) बकिंघम की
(घ) टरमन की
Answer: (घ) टरमन की
In simple words: टरमन ने बुद्धि को अमूर्त विचारों, यानी ऐसी चीज़ों के बारे में सोचने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया जिन्हें देखा या छुआ नहीं जा सकता।

🎯 Exam Tip: टरमन की परिभाषा, विशेषकर 'अमूर्त चिंतन की योग्यता' पर आधारित, को याद रखें, क्योंकि यह बुद्धि की एक प्रमुख अवधारणा है।

 

Question 3. बुद्धि की प्रमुख विशेषता
(क) बुद्ध जन्मजात होती है
(ख) बुद्धि अर्जित होती है
(ग) बुद्धि सामाजिक होती है
(घ) बुद्धि व्यक्तिगत होती है
Answer: (क) बुद्धि जन्मजात होती है
In simple words: बुद्धि की प्रमुख विशेषता यह है कि यह जन्मजात होती है, यानी व्यक्ति इसे पैदा होते ही प्राप्त करता है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि की प्रकृति से संबंधित प्रमुख विशेषताओं को समझें, विशेषकर यह कि यह जन्मजात होती है, अधिगम से प्रभावित होती है, लेकिन मूलभूत क्षमता जन्म से होती है।

 

Question 4. वुडवर्थ के अनुसार बुद्धि में कितने तत्त्व होते हैं ?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
Answer: (ग) चार
In simple words: वुडवर्थ के मतानुसार, बुद्धि चार मुख्य घटकों से मिलकर बनी होती है।

🎯 Exam Tip: वुडवर्थ द्वारा दिए गए बुद्धि के तत्वों की संख्या (चार) को याद रखें।

 

Question 5. किस मनोवैज्ञानिक ने बुद्धि को सात प्रमुख योग्यताओं का समूह बताया है ?
(क) स्पीयरमैन ने
(ख) थर्स्टन ने
(ग) थॉर्नडाइक ने
(घ) टरमन ने
Answer: (ख) थर्स्टन ने
In simple words: थर्स्टन वह मनोवैज्ञानिक हैं जिन्होंने बुद्धि को सात अलग-अलग प्राथमिक मानसिक योग्यताओं के समूह के रूप में वर्णित किया था।

🎯 Exam Tip: थर्स्टन के 'प्राथमिक मानसिक योग्यताओं' के सिद्धांत और उसके सात घटकों को याद रखें।

 

Question 6. “बुद्धि-परीक्षा, किस प्रकार का कार्य अथवा समस्या होती है, जिसकी सहायता से एक व्यक्ति की मानसिक योग्यता का मापन किया जाता है।” यह कथन किसका है ?
(क) टरमन का
(ख) ड्रेवर का
(ग) बिने का
(घ) रोर्शा का
Answer: (ख) ड्रेवर का
In simple words: ड्रेवर ने बुद्धि-परीक्षा को एक कार्य या समस्या के रूप में परिभाषित किया है जिसका उद्देश्य व्यक्ति की मानसिक क्षमताओं को मापना है।

🎯 Exam Tip: ड्रेवर द्वारा बुद्धि-परीक्षा की परिभाषा को याद रखें, जो उसके मापन कार्य पर केंद्रित है।

 

Question 7. एक समय में एक ही व्यक्ति को दिया जाने वाला बुद्धि परीक्षण कहलाता है।
(क) सामूहिक बुद्धि परीक्षण
(ख) क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण
(ग) सामाजिक बुद्धि परीक्षण
(घ) वैयक्तिक बुद्धि परीक्षण
Answer: (घ) वैयक्तिक बुद्धि परीक्षण
In simple words: वैयक्तिक बुद्धि परीक्षण वह होता है जो एक समय में केवल एक ही व्यक्ति की बुद्धि का आकलन करता है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-परीक्षणों के वर्गीकरण में 'वैयक्तिक' और 'सामूहिक' परीक्षणों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 8. सन 1910 में किसने गणित की बुद्धि-परीक्षा सम्पादित की ?
(क) बिने ने
(ख) टरमन ने
(ग) कैटेल ने
(घ) कोर्टिस ने
Answer: (घ) कोर्टिस ने
In simple words: कोर्टिस ने 1910 में गणित से संबंधित बुद्धि-परीक्षा का संचालन किया था।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट बुद्धि-परीक्षणों और उनके प्रतिपादकों से संबंधित ऐतिहासिक तथ्यों को याद रखें।

 

Question 9. सामूहिक बुद्धि-परीक्षा का आरम्भ सर्वप्रथम किस देश में हुआ ?
(क) भारत में
(ख) अमेरिका में
(ग) जर्मनी में
(घ) ब्रिटेन में
Answer: (ख) अमेरिका में
In simple words: सामूहिक बुद्धि-परीक्षाओं की शुरुआत अमेरिका में हुई थी, विशेषकर प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सैनिकों के बड़े पैमाने पर मूल्यांकन के लिए।

🎯 Exam Tip: सामूहिक बुद्धि-परीक्षणों की उत्पत्ति और संबंधित देश (अमेरिका) को याद रखें।

 

Question 10. प्रथम बिने-साइमन बुद्धि-परीक्षण की शुरुआत हुई थी, सन्
(क) 1906 ई० में
(ख) 1904 ई० में
(ग) 1907 ई० में
(घ) 1905 ई० में
Answer: (घ) 1905 ई० में
In simple words: पहला बिने-साइमन बुद्धि-परीक्षण वर्ष 1905 में विकसित किया गया था, जो आधुनिक बुद्धि परीक्षणों का आधार बना।

🎯 Exam Tip: बिने-साइमन परीक्षण के निर्माण वर्ष (1905) को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बुद्धि परीक्षणों के इतिहास में एक मील का पत्थर है।

 

Question 11. बुद्धि लब्धि (I.Q.) =
(क) \( \frac{\text{मानसिक आयु (M. A.)}}{\text{शारीरिक आयु (C. A.)}} \times 100 \)
(ख) \( \frac{\text{शारीरिक आयु (C. A.)}}{\text{मानसिक आयु (M. A.)}} \times 100 \)
(ग) \( \frac{100}{\text{शारीरिक आयु (C. A.)}} \times \text{मानसिक आयु (M. A.)} \)
(घ) \( \frac{100}{\text{मानसिक आयु (M.A.)}} \times \text{शारीरिक आयु (C. A.)} \)
Answer: (क) \( \frac{\text{मानसिक आयु (M. A.)}}{\text{शारीरिक आयु (C. A.)}} \times 100 \)
In simple words: बुद्धि-लब्धि (IQ) की गणना के लिए सही सूत्र मानसिक आयु को शारीरिक आयु से विभाजित कर 100 से गुणा करना है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि का सूत्र बिल्कुल सही याद रखें, जिसमें मानसिक आयु अंश में और शारीरिक आयु हर में हो, जिसे 100 से गुणा किया जाता है।

 

Question 12. 70-80 बुद्धि-लब्धि वाला व्यक्ति कहलाता है
(क) प्रखर
(ख) प्रतिभाशाली
(ग) सामान्य
(घ) दुर्बल बुद्धि
Answer: (घ) दुर्बल बुद्धि
In simple words: जिस व्यक्ति की बुद्धि-लब्धि 70-80 के बीच होती है, उसे दुर्बल बुद्धि की श्रेणी में रखा जाता है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि के विभिन्न स्तरों और उनके संबंधित मानसिक वर्गीकरणों को कंठस्थ कर लें।

 

Question 13. सामान्य बुद्धि के बालक की बुद्धि-लब्धि होती है
(क) 80 से 90
(ख) 90 से 110
(ग) 70 से 80
(घ) 110 से 120
Answer: (ख) 90 से 110
In simple words: एक सामान्य बुद्धि वाले बालक की बुद्धि-लब्धि आमतौर पर 90 से 110 के बीच होती है।

🎯 Exam Tip: सामान्य बुद्धि-लब्धि की श्रेणी (90-110) को याद रखें, क्योंकि यह सबसे आम वर्गीकरण है।

 

Question 14. “बुद्धि कार्य करने की एक विधि है” यह किसकी परिभाषा है ?
(क) वुडवर्थ
(ख) टरमन
(ग) थॉर्नडाइक
(घ) बिने
Answer: (क) वुडवर्थ
In simple words: यह परिभाषा वुडवर्थ ने दी थी, जो बुद्धि को किसी कार्य को करने के तरीके या प्रक्रिया के रूप में देखती है।

🎯 Exam Tip: वुडवर्थ की बुद्धि की परिभाषा को याद रखें, जो बुद्धि को एक 'कार्य करने की विधि' मानती है।

 

Question 15. उत्कृष्ट बुद्धि के बालक की बुद्धि-लब्धि होती है
(क) 80 से 90
(ख) 90 से 110
(ग) 70 से 80
(घ) 110 से 120
Answer: (घ) 110 से 120
In simple words: उत्कृष्ट बुद्धि वाले बालक की बुद्धि-लब्धि 110 से 120 के दायरे में होती है, जो सामान्य से उच्च बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न बुद्धि-लब्धि श्रेणियों को उनके संबंधित विवरणों (जैसे उत्कृष्ट बुद्धि) के साथ याद रखें।

 

Question 16. प्रतिभाशाली (Genius) बालक की बुद्धि-लब्धि होती है
(क) 90 से 110
(ख) 110 से 120
(ग) 120 से 140
(घ) 140 से अधिक
Answer: (घ) 140 से अधिक
In simple words: प्रतिभाशाली या जीनियस बालक वह होते हैं जिनकी बुद्धि-लब्धि 140 से भी अधिक होती है, जो असाधारण बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: प्रतिभाशाली वर्ग की बुद्धि-लब्धि (140 से अधिक) को विशेष रूप से याद रखें, क्योंकि यह उच्चतम श्रेणी है।

 

Question 17. एक बालक की मानसिक आयु (M.A.) 12 वर्ष है तथा उसकी शारीरिक आयु (C.A.) 16 वर्ष है, तो उसकी बुद्धि-लब्धि (I.d.) होगी
(क) 80
(ख) 75
(ग) 100
(घ) 133
Answer: (ख) 75
In simple words: बुद्धि-लब्धि (IQ) की गणना मानसिक आयु (12) को शारीरिक आयु (16) से भाग देकर 100 से गुणा करके की जाती है, जिससे परिणाम 75 आता है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि की गणना के सूत्र \(I.Q. = \frac{M.A.}{C.A.} \times 100\) का उपयोग करके ऐसे प्रश्नों को हल करने का अभ्यास करें।

 

Question 18. एक बालक की मानसिक आयु (M.A.) 15 वर्ष है तथा उसकी वास्तविक आयु (C.T:) 12 वर्ष है, तो उसकी बुद्धि-लब्धि (1.0.) होगी
(क) 100
(ख) 125
(ग) 150
(घ) 175
Answer: (ख) 125
In simple words: बुद्धि-लब्धि (I.Q.) की गणना मानसिक आयु (M.A.) को वास्तविक आयु (C.A.) से भाग देकर 100 से गुणा करके की जाती है। यहाँ \(I.Q. = \frac{15}{12} \times 100 = 1.25 \times 100 = 125\) है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि की गणना का सूत्र और उसके अनुप्रयोगों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऐसे व्यावहारिक प्रश्नों को हल करने में मदद करता है।

 

Question 19. आर्मी एल्फा और बीटा परीक्षा किस प्रकार के परीक्षण थे?
(क) शाब्दिक व्यक्ति बुद्धि परीक्षण
(ख) शाब्दिक समूह बुद्धि परीक्षण
(ग) क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) शाब्दिक समूह बुद्धि परीक्षण
In simple words: आर्मी एल्फा और बीटा परीक्षण प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में सैनिकों की योग्यता का आकलन करने के लिए विकसित सामूहिक बुद्धि परीक्षण थे, जिनमें एल्फा शाब्दिक और बीटा अशाब्दिक था।

🎯 Exam Tip: सामूहिक बुद्धि परीक्षणों के उदाहरण और उनके उपयोग के संदर्भ को याद रखना परीक्षा में सहायक होता है।

 

Question 20. अशाब्दिक समूह बुद्धि परीक्षण उपयोगी होते हैं
(क) अनपढ़ व्यक्तियों के लिए
(ख) बच्चों के परीक्षण के लिए
(ग) मानसिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए
(घ) इन सभी के लिए
Answer: (घ) इन सभी के लिए
In simple words: अशाब्दिक समूह बुद्धि परीक्षण विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं जो भाषा-आधारित निर्देशों को समझने में असमर्थ होते हैं, जैसे अनपढ़, बच्चे या मानसिक रूप से पिछड़े व्यक्ति।

🎯 Exam Tip: अशाब्दिक परीक्षणों की विशेषताओं और उनके लक्षित समूहों को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 21. जिन परीक्षणों में लकड़ी के गुटकों, कार्ड बोर्ड या ठोस वस्तुओं को हाथों से बर्ताव करना पड़ता है, उन्हें कहते हैं
(क) सामूहिक परीक्षण
(ख) मिश्रित परीक्षण
(ग) कार्यात्मक परीक्षण
(घ) व्यक्तिगत परीक्षण
Answer: (ग) कार्यात्मक परीक्षण
In simple words: कार्यात्मक परीक्षण वे होते हैं जहाँ परीक्षार्थी को वास्तविक वस्तुओं या उपकरणों के साथ भौतिक रूप से क्रियाएँ करनी होती हैं, जिससे उनकी बुद्धि का मापन होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के बुद्धि परीक्षणों की परिभाषा और उनके मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 23. बुद्धि-लब्धि के विषय में सत्य कथन है
(क) यह मानसिक आयु तथा वास्तविक आयु के बीच अनुपात है।
(ख) यह बुद्धि की मात्रा नहीं है।
(ग) यह बुद्धि की क्षमता है, जो समय-समय पर परिवर्तित हो सकती है।
(घ) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
Answer: (घ) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
In simple words: बुद्धि-लब्धि (I.Q.) मानसिक और वास्तविक आयु का अनुपात है, जो व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है और इसमें वातावरण के प्रभाव से कुछ परिवर्तन भी संभव हैं, हालांकि यह सीधे बुद्धि की 'मात्रा' नहीं बताता बल्कि एक तुलनात्मक माप है।

🎯 Exam Tip: बुद्धि-लब्धि की अवधारणा, उसके सूत्र और उसकी सीमाओं को जानना परीक्षा के लिए आवश्यक है।

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