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Detailed Chapter 21 शिक्षा में पुरस्कार और दंड UP Board Solutions for Class 12 Pedagogy
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Class 12 Pedagogy Chapter 21 शिक्षा में पुरस्कार और दंड UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Pedagogy Chapter 21 Reward And Punishment In Education (शिक्षा में पुरस्कार एवं दण्ड)
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. पुरस्कार का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा परिभाषा निर्धारित कीजिए। छात्रों को दिये जाने वाले पुरस्कारों के मुख्य प्रकारों का भी उल्लेख कीजिए।
Answer: पुरस्कार का अर्थ एवं परिभाषा सीखने की प्रक्रिया में पुरस्कार और दण्ड का विशेष महत्त्व है। अच्छा कार्य करने पर पुरस्कार और बुरा कार्य करने पर दण्ड मिलना एक स्वाभाविक बात है। पुरस्कार एक सुखद अनुभव के रूप में प्राप्त होता है, जो कि अच्छे कार्य करने पर व्यक्ति को प्राप्त होता है। किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा भी किसी व्यक्ति को अच्छे कार्य करने के उपलक्ष में पुरस्कार प्रदान किया जाता है। लेकिन शिक्षा में पुरस्कार का महत्त्व मुख्यतया अनुशासन स्थापित करने में है। वास्तव में पुरस्कार अच्छे कार्यों की प्रेरणा देते हैं, जबकि दण्ड बुरे कार्यों को करने से रोकते हैं।
पुरस्कार का अर्थ बालक को अच्छे कार्यों को करने के फलस्वरूप सुखद अनुभूति कराने से है। अच्छे कार्यों को करने से बालक को उल्लास तथा आनन्द की अनुभूति होती है और वह पुनः श्रेष्ठ कार्यों को करने के लिए उत्साहित तथा प्रेरित होता है। पुरस्कार-प्राप्ति की आकाँक्षा से ही बालक श्रेष्ठ कार्य करने के लिए तत्पर हो जाता है और अपनी क्षमताओं का अभूतपूर्व प्रदर्शन भी करता है। इस प्रकार पुरस्कार एक प्रेरणादायक तथा लाभकारी प्रेरक का कार्य करती है।
पुरस्कार की कुछ परिभाषाएँ इस प्रकार हैं
(i) सेवर्ड (Seward) के अनुसार, “पुरस्कार व्यवहार पर अनुकूल प्रभाव डालने के लिए सम्बन्धित कार्य के साथ सुखद स्मृति का संयोजन करना है।”
(ii) हरलॉक (Harlock) के अनुसार, "पुरस्कार वांछित कार्य के साथ सुखद साहचर्य स्थापित करने का साधन है।”
(iii) रायबर्न (Ryburn) के अनुसार, “पुरस्कार बालक में सर्वोत्तम कार्य करने की भावना जाग्रत करता है।”
उपर्युक्त वर्णित परिभाषाओं द्वारा 'पुरस्कार' का अर्थ स्पष्ट हो जाता है। वास्तव में पुरस्कार एक साधन है जो सम्बन्धित व्यक्ति को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करने हेतु इस्तेमाल किया जाता है।
पुरस्कार के प्रकार पुरस्कार के अनेक रूप या प्रकार हैं। कुछ प्रमुख प्रकारों का विवरण निम्नलिखित है
(i) आदर या सम्मान : जब कोई बालक, अध्ययन, खेलकूद, अनुशासन आदि के क्षेत्र में विशेष योग्यता का प्रदर्शन करता है, तो उसे छात्रों, अध्यापकों और विद्यालय की ओर से सम्मानित किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि विद्यालय का कोई छात्र बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश भर में प्रथम स्थान प्राप्त करता है, तो विद्यालय की ओर से उसे सम्मानित किया जाता है। इस प्रकार से दिये जाने वाले पुरस्कार को उच्च कोटि का पुरस्कार माना जाता है।
(ii) प्रशंसा : यदि कोई बालक पढ़ने-लिखने, खेलकूद, नाटक आदि में विशेष योग्यता प्रदर्शित करता हो तो विद्यालय के सभी छात्रों के समक्ष उसकी प्रशंसा की जाती है और उसे गौरवान्वित किया जाता है। इस प्रकार की प्रशंसा से बालक की आत्मसन्तुष्टि होती है और उसका उत्साहवर्धन होता है। प्रशंसा “पाने के लिए वह पहले से भी अधिक उत्तम कार्य करने के लिए प्रोत्साहित होता है।
(iii) छात्रवृत्ति : यदि कोई बालक अपनी कक्षा में निरन्तर विशिष्ट सफलता प्राप्त करता है और सदैव : * प्रथम स्थान प्राप्त करता है, तो उसे प्रतिमाह छात्रवृत्ति के रूप में एक निश्चित धनराशि प्रदान की जाती है। छात्रवृत्ति से छात्र को परिश्रम करने की सशक्त प्रेरणा मिलती है और उसका उत्साहवर्धन भी होता है।
(iv) सुविधाएँ : कक्षा में पढ़ाई-लिखाई तथा विद्यालय में खेलकूद में अग्रणी रहने वाले बालक को कुछ विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। विद्यालय शुल्क में छूट, छात्रावास में निःशुल्क रहने की सुविधा, पुस्तकों की निःशुल्क व्यवस्था आदि सुविधाएँ प्रतिभावान बालकों को प्रत्येक विद्यालय में प्राप्त होती हैं। इन सुविधाओं से बालकों को निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
(v) प्रमाण-पत्र : विद्यालयों में विभिन्न योग्यताओं के प्रदर्शन के उपलक्ष में छात्रों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किये जाते हैं। इन प्रमाण-पत्रों से भी छात्रों को अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
(vi) प्रगति-पत्र पर अंकन : छात्रों के प्रगति-पत्र पर उनकी विशिष्ट योग्यताओं से सम्बन्धित अंकन भी किये जाते हैं; जैसे परीक्षा में प्रथम श्रेणी या अनुशासन प्रिय छात्रों को 'ए' श्रेणी से विभूषित किया जाता है। इन प्रगति-पत्रों से ही छात्रों की विशेषताओं का ज्ञान लोगों को हो जाता है। दूसरी ओर छात्र भी उन्हें लोगों को दिखाते में हर्ष तथा गर्व का अनुभव करते हैं।
(vii) पदक तथा तसगे या मैडल : शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्टता प्राप्त करने पर छात्रों को स्वर्ण, रजत, काँस्य आदि धातु के पदक व तमगे आदि प्रदान किये जाते हैं।
(viii) उपयोगी वस्तुएँ : कॉलेज के वार्षिकोत्सव के अवसर पर प्रत्येक विद्यालय में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं। जो छात्र इन प्रतियोगिताओं में विजयी होते हैं, उन्हें पुस्तकें, बनियाने, घड़ी, कलम, हॉकी, जूते-मौजे आदि अनेक उपयोगी वस्तुएँ पुरस्कार के रूप में प्रदान की जाती हैं। इन वस्तुओं से भी छात्रों का उत्साहवर्धन होता है।
(ix) शील्ड और कप : खेल-कूद, वाद-विवाद तथा निबन्ध आदि की प्रतियोगिताओं में विजेताओं को व्यक्तिगत या सामूहिक दोनों रूपों में शील्ड या कप प्रदान किये जाते हैं; जैसे-फुटबॉल टूर्नामेण्ट के लिए निर्धारित विशेष कप। इनके अतिरिक्त विजेताओं को बहुत-सी अन्य वस्तुएँ भी पुरस्कार के रूप में प्रदान की जाती हैं।
(x) सफलता : किसी कार्य में सफलता का मिलना ही एक बड़ा पुरस्कार होता है, क्योंकि सफलता से बालक की आत्मसन्तुष्टि होती है तथा वह प्रगति-पथ पर बढ़ने के लिए प्रेरित तथा प्रोत्साहित होता है।In simple words: पुरस्कार अच्छे काम के बदले मिलने वाला सुखद अनुभव है जो छात्रों को और बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है। यह सम्मान, प्रशंसा, छात्रवृत्ति, सुविधाएँ, प्रमाण-पत्र, पदक और उपयोगी वस्तुओं के रूप में दिया जा सकता है, जिससे उनमें अच्छे कार्य करने की भावना जाग्रत होती है।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार की परिभाषाएँ और उसके प्रकारों का सटीक वर्णन करना अच्छे अंक दिलाता है।
Question 2. पुरस्कार देते समय ध्यान में रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बातों का उल्लेख कीजिए। या शिक्षा में पुरस्कार और दण्ड का महत्त्व अच्छी तरह से स्पष्ट कीजिए।
Answer: पुरस्कार देते समय ध्यान रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बातें। यह सत्य है कि शिक्षा के क्षेत्र में बालकों को पुरस्कार देने का विशेष महत्त्व है, परन्तु पुरस्कारों से अधिकतम लाभ तभी हो सकता है, जब उनको देते समय निम्नलिखित बातों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए
(i) पुरस्कार उसी छात्र को देना चाहिए जो कि पुरस्कार पाने का उचित अधिकारी हो, अर्थात् पुरस्कार देने में पक्षपात नहीं करना चाहिए। यदि अधिकारीगण निष्पक्ष भाव से पुरस्कार देने का कार्य नहीं करते हैं। और किसी छात्र के साथ पक्षपात करते हैं तो अन्य छात्रों में असन्तोष की भावना उत्पन्न होगी तथा उनमें अनुशासनहीनता बढ़ जाएगी।
(ii) पुरस्कार की घोषणा उचित अवसर पर की जानी चाहिए।
(iii) पुरस्कार विशेष रूप से उन बालकों को देना चाहिए जो विभिन्न क्षेत्रों में समान रूप से विशिष्ट योग्यता को प्रदर्शन करें, क्योंकि शिक्षा का मूल उद्देश्य लालक का सर्वांगीण विकास करना ही है।
(iv) पुरस्कार जीवन की साधारण बातों; जैसे-समयपालन, नियमपालन, स्वच्छता, शिष्ट व्यवहार, परिश्रम आदि पर देने चाहिए। जीवन की बड़ी बातों; जैसे-सत्यप्रियता, संयम, प्रेम, ईमानदारी आदि पर छोटे-छोटे पुरस्कार नहीं देने चाहिए। इससे उनका महत्त्व कम हो जाता है।
(v) पुरस्कार उन गुणों के लिए देना चाहिए जो छात्र ने अपने प्रयत्न या परिश्रम द्वारा विकसित किये हों। जन्मजात विशेषताओं के लिए पुरस्कार नहीं देना चाहिए।
(vi) छात्रों को केवल प्रेरणा देने के लिए ही पुरस्कार दिये जाने चाहिए। पुरस्कार मिलने के लालच में ही अच्छे कार्य करने की आदत उनमें नहीं पड़ने दी जानी चाहिए।
(vii) पुरस्कार मूल्यवान नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे छात्रों में ईष्या-द्वेष की भावना में वृद्धि होती है।
(viii) छोटे बच्चों को वर्ष में कई बार पुरस्कार देने चाहिए, जबकि बड़े बालकों को केवल महत्त्वपूर्ण अवसरों पर ही पुरस्कार देने चाहिए।
(ix) पुरस्कार तभी दिया जाना चाहिए, जब आलक ने कठोर परिश्रम किया हो। बिना परिश्रम के पुरस्कार मिलने से विपरीत प्रभाव पड़ता है।
(x) पुरस्कार इस विधि से वितरित करने चाहिए कि बालकों में व्यक्तिगत भावना के साथ सामूहिक भावना का विकास हो।
(xi) पुरस्कार इतनी अधिक संख्या में नहीं देने चाहिए, जिससे प्रत्येक छात्र को पुरस्कार मिल जाए। ऐसा करने से पुरस्कार का महत्त्व कम हो जाता है।In simple words: पुरस्कार देते समय निष्पक्षता, उचित समय पर घोषणा, वास्तविक योग्यता को पहचानना, साधारण गुणों को पुरस्कृत करना, और केवल अर्जित गुणों के लिए देना महत्वपूर्ण है। पुरस्कार प्रेरणादायी होने चाहिए, बहुत महंगे नहीं, और बच्चों की उम्र के अनुसार दिए जाने चाहिए ताकि उनका महत्व बना रहे और उनमें गलत भावनाएं विकसित न हों।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार देते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ अनुशासन और छात्र विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, इन्हें विस्तार से समझाना चाहिए।
Question 3. दण्ड से आप क्या समझते हैं ? छात्रों को दिये जाने वाले दण्ड के मुख्य प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
Answer: दण्ड का अर्थ एवं परिभाषा जब भी कहीं 'पुरस्कार' की चर्चा होती है, वहीं साथ-ही-साथ दण्ड की भी बात की जाती है। दण्ड और पुरस्कार दो विरोधी अवधारणाएँ हैं। पुरस्कार जहाँ सुखदायक है, क्हीं दण्ड कष्टदायी है। पुरस्कार को उद्देश्य बालकों को आनन्द की अनुभूति कराना है, जबकि दण्ड का लक्ष्य बालक को कष्ट की अनुभूति कराना है। जब किसी बालक को किसी कार्य के परिणामस्वरूप कष्टदायक अनुभव प्राप्त होता है, चाहे वह प्रकृति-प्रदत्त हो या अर्जित, तब उसे दण्ड कहा जाता है। सृष्टि के प्रारम्भ से ही दण्ड व्यवस्था रही है, जब कोई व्यक्ति प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करता है तो समाज उसे दण्ड देता है।
सामान्य अर्थ में निर्धारित नियमों का पालन न करना तथा उनके अनुकूल बाबर ने करना ही अपराध है और दण्ड अफ्ष की वह प्रतिक्रिया है, जो विद्यालय या समाज द्वारा अपराधी के आचरण के विरुद्ध प्रदर्शित की जाती है। इस प्रकार “दण्ड का अर्थ है-कष्ट, जुर्माना या न्यायानुसार दण्ड, शारीरिक पीड़ा अथवा डाँट-फटकार देना ।” देण्ड के सामान्य अर्थ को जान लेने के उपरान्त दण्ड की कुछ व्यवस्थित परिभाषाओं का उल्लेख करना भी आवश्यक है। दण्ड की कुछ मुख्य परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं।
(i) सदरलैण्ड के अनुसार, “दण्ड में वह पीड़ा या कष्ट निहित है जो जानबूझकर दी जाती है और किसी ऐसे मूल्य द्वारा उचित ठहराई जाती है, जिसे उसे पीड़ा में छिपा माना जाता है।”
(ii) टेफ्ट के अनुसार, “हम दण्ड की परिभाषा उस चेतन दबाव के रूप में कर सकते हैं, जो समाज की शान्ति भंग करने वाले व्यक्ति को अवांछनीय अनुभवों वाला कष्ट देता है। यह कष्ट सदैव ही उस व्यक्ति के हित में नहीं होता।”
(iii) थॉमसन के अनुसार, “दण्ड एक साधन है, जिसके द्वारा अवांछनीय कार्य के साथ दुःखद भवना को सम्बन्धित करके उसको दूर करने का प्रयास किया जाता है।
(iv) सेना के अनुसार, “दण्ड एक प्रकार की सामाजिक निन्दा है और इसमें यह आवश्यक नहीं है। कि पीड़ा या कष्ट सम्मिलित हो ।”
दण्ड के प्रकार दण्ड अनेक प्रकार के होते हैं, जिन्हें हम दो वर्गों में रख सकते हैं।
I. सरल दण्ड सरल दण्ड वे होते हैं, जिसके देने से दण्डित होने वाले को कोई बड़ी शारीरिक क्षति नहीं पहुँचती है। सरल दण्ड निम्नलिखित होते हैं
(a) डाँटना व फटकारना : छोटे-मोटे अपराधों के लिए बालक को सबके सामने डाँटना, फटकारना या झिड़क देना ही पर्याप्त है। सबके सामने डाँटे जाने पर बालक लज्जित हो जाते हैं। और साधारणतया अपराध की पुनरावृत्ति नहीं करते हैं। लेकिन डाँटना, फटकारना समयानुकूल हो और केवल आवश्यकता पड़ने पर ही इसका प्रयोग किया जाए, अन्यथा बहुत अधिक डॉटने पर बालक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(b) अवकाश के बाद रोकना : जब कोई छात्र नियमित रूप से कक्षा में देर से आने लगे या गृह-कार्य नियमित रूप से न करें तो विद्यालय के अवकाश के बाद भी उसे रोका जा सकता है। इस समय उसे पढ़ने-लिखने का कार्य नहीं देना चाहिए, अन्यथा अध्ययन से अरुचि हो जाएगी, किन्तु रोक लेने पर उसके घर में सूचना अवश्य भिजवा देनी चाहिए।
(c) आर्थिक दण्ड : कक्षा में देर से आने, लगातार कई दिनों तक कक्षा में अनुपस्थित रहने या विद्यालय की कोई वस्तु तोड़ देने पर छात्र को आर्थिक दण्ड दिया जा सकता है। किन्तु वास्तव में यह दण्ड तो अभिभावकों को दिया जाता है, क्योंकि उसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से बालक पर नहीं पड़ता। तथापि बालकों की गलतियों के लिए उन्हें इस रूप में दण्डित किया जा सकता है। आजकल विद्यालयों में आर्थिक दण्ड बहुत प्रचलित है, क्योंकि यह दण्ड देनी आसान होता है और अन्य प्रकार के दण्डों के लिए अध्यापकों को सोच-विचार करना पड़ता है।
(d) नैतिक दण्ड : इसके अन्तर्गत निम्नलिखित दण्ड दिये जाते हैं
(1) अपमानित करना : कक्षा में गलती करने वाले छात्र को मूर्ख बनाकर अपमानित किया जाता है, किन्तु इससे छात्र में अध्यापक के प्रति प्रतिशोध की भावना उत्पन्न होती है।
(2) क्षमा-याचना : अपराधी बालक को भरी कक्षा में या विद्यालय के सभी छात्रों के सामने क्षमा-याचना करने का आदेश दिया जाता है।
(3) स्थान परिवर्तन : गलती करने वाले छात्र को कक्षा में सबसे पीछे बिठा देना या एक कोने से दूसरे कोने में बिठा देना ही इस प्रकार का दण्ड है।
(4) सुविधाओं से वंचित करना : अपराध करने पर परिस्थिति के अनुकूल छात्रों को अनेक सुविधाओं से वंचित कर देना भी एक दण्ड है। ये सुविधाएँ हैं-आधी या पूरी शुल्क छूट को रद्द करना, पुस्तकीय सहायता से वंचित कर देना, छात्रावास में निःशुल्क रहने की सुविधा समाप्त कर देना आदि।
(5) कक्षा में प्रवेश निषेध : कक्षा में निरन्तर अन्य छात्रों को परेशान करने पर उस छात्र को कक्षा के अन्दर आने की अनुमति न देना भी एक दण्ड है। कुछ अध्यापक देर से आने वाले छात्रों को भी कक्षा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देते हैं। इससे उनकी पढ़ाई में क्षति पहुँचती है और वे अन्य बुराइयों में लिप्त हो जाते हैं। अतः यह दण्ड किन्हीं विशेष परिस्थितियों में ही दिया जाना चाहिए।
(6) विद्यालय से निष्कासन : गम्भीर अपराध करने या बार-बार अपराध करने पर छात्र को विद्यालय से निष्काषित भी कर दिया जाता है। लेकिन मनोवैज्ञानिक इस दण्ड को अनुचित मानते हैं, क्योंकि इससे छात्र का सुधार नहीं होता है।
(7) अतिरिक्त कार्य देना : ऐसे छात्रों को जो, खाली समय होने के कारण या जल्दी कार्य कर लेने पर बदमाशी करते हैं, अतिरिक्त कार्य दे, देना चाहिए ताकि वे काम में लगे रहें। लेकिन यह दण्ड भी बड़ी सावधानी के साथ देना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि अधिक कार्य से उसे अरुचि हो जाए।
(8) खेल तथा अन्य सामूहिक कार्यों से वंचित करना : छात्रों में एक साथ कार्य करने, खेलने तथा बातें करने की भावना बड़ी प्रबल होती है। अतः सामूहिक कार्यों से वंचित कर देने पर और कुछ समय के लिए अकेला हो जाने पर छात्र को कष्ट होता है। इसलिए समयानुकूल यह एक उपयोगी दण्ड है।
(9) प्रगति-पत्र पर उल्लेख छात्र के प्रगति : पत्र पर अपराध का विवरण लिख दिया जाए, जिससे छात्र तथा उसके प्रगति-पत्र को पढ़ने वाले अपराध के विषय में जान जाएँ और छात्र को उससे लज्जा का अनुभव हो।
II. शारीरिक दण्ड या कठोर दण्ड शारीरिक दण्ड के अन्तर्गत थप्पड़ मारना, घूसा जमाना, कान उमेठना, बेंत मारना, मुर्गा बनाना तथा दण्ड-बैठक कराना आदि हैं। पहले विद्यालयों में इस प्रकार के दण्डों का विशेष प्रचलन था, लेकिन कभी-कभी इनके भयंकर परिणाम होते थे और बालक अंगहीन तक हो जाते थे। लेकिन आजकल सामान्यतया इसका प्रयोग वर्जित है। इन दण्डों का प्रयोग तभी करना चाहिए, जब अन्य सभी उपाय असफल हो जाएँ।
जहाँ तक सम्भव हो सुधारात्मक दण्ड ही देने चाहिए। यदि शारीरिक दण्ड देने आवश्यक ही हों तो यह केवल शारीरिक रूप से हृष्ट-पुष्ट बच्चों को ही दिये जाएँ, कमजोर तथा चौदह वर्ष से कम आयु वाले छात्रों को ये दण्ड न दिये जाएँ, न ही क्रोध के आवेश में दिये जाएँ। लेकिन ऐसे दण्ड अपराध करने के तुरन्त बाद ही दिये जाने चाहिए।In simple words: दण्ड एक कष्टदायक अनुभव है जो बुरे कार्यों या नियमों के उल्लंघन के परिणामस्वरूप दिया जाता है। इसके मुख्य प्रकारों में सरल दण्ड जैसे डाँटना, अवकाश के बाद रोकना, आर्थिक दण्ड, नैतिक दण्ड (अपमानित करना, क्षमा-याचना, स्थान परिवर्तन, सुविधाओं से वंचित करना, कक्षा प्रवेश निषेध, विद्यालय से निष्कासन, अतिरिक्त कार्य, सामूहिक कार्यों से वंचित करना, प्रगति-पत्र पर उल्लेख) और शारीरिक दण्ड शामिल हैं, हालाँकि आजकल शारीरिक दण्ड को वर्जित माना जाता है और सुधारात्मक दण्ड पर जोर दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: दण्ड की परिभाषा, उसके विभिन्न प्रकारों का वर्गीकरण और उनके प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए।
Question 4. दण्ड देते समय ध्यान में रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बातों का उल्लेख कीजिए। या विद्यालय में दण्ड देते समय किन-किन सावधानियों को ध्यान में रखना आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: दण्ड देते समय ध्यान रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बातें विद्यालय में अनुशासन स्थापित करने में दण्डों का अपना एक विशेष महत्त्व है। इसके बिना अनुशासन स्थापित होना कठिन है। दण्ड अनेक प्रकार के होते हैं। कौन-सा दण्ड कब दिया जाए, कितनी मात्रा में दिया जाए, किसके द्वारा दिया जाए आदि कुछ ऐसे प्रश्न हैं, जिनका उत्तर जाने बिना हम दण्डों से यथोचित लाभ प्राप्त नहीं कर सकते। इसीलिए दण्ड देते समय बहुत-सी सावधानियाँ रखनी पड़ती हैं। इनका विवरण इस प्रकार है
(i) दण्ड अपराध के अनुरूप हो : जिस प्रकार का अपराध किया जाए, उसी के अनुरूप या उसी प्रकार का दण्ड भी दिया जाए। यदि कोई छत्र कक्षा में देर से आता है तो उसे छुट्टी के बाद देर तक रोका जाए। यदि वह गृहकार्य करके नहीं लाता तो अपने सामने उसे गृह-कार्य करायें। आजकल अधिकतर अपराधों के लिए आर्थिक दण्ड दिया जाता है, जो कि उचित नहीं है। केवल विद्यालय की कोई वस्तु तोड़ने पर ही आर्थिक दण्ड देना चाहिए।
(ii) दण्ड अपराध के अनुपात में हो : छोटे अपराध करने पर छोटा दण्ड और बड़ा अपराध करने पर बड़ा दण्ड देना चाहिए। दण्ड की मात्रा अपराध की गम्भीरता के अनुकूल होनी चाहिए, तभी उसका यथोचित प्रभाव पड़ता है।
(iii) दण्ड बालक की प्रकृति के अनुरूप हो : कुछ बालक शरीर से कमजोर होते हैं। ऐसे बालकों को कठोर शारीरिक दण्ड नहीं देना चाहिए। कुछ बालकों को थोड़ा डाँटने भर से ही गहरा प्रभाव पड़ जाता है, उन्हें अधिक मात्रा में दण्ड नहीं देना चाहिए। कुछ बालकों पर साधारण झिड़कियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, ऐसे बालक के लिए कठोर दण्ड की व्यवस्था होनी चाहिए।
(iv) दण्ड गम्भीरता के साथ देना चाहिए : दण्ड देते समय अध्यापक को गम्भीर रहना चाहिए। प्रफुल्ल मुद्रा या मजाक करते हुए दण्ड नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसका अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता और छात्र दण्ड के महत्त्व को नहीं समझ पाता।
(v) दण्ड के कारण का ज्ञान : दण्डित होने वाले छात्र को यह अवश्य ज्ञान होना चाहिए कि उसे किस कारण से दण्ड दिया जा रहा है, तभी छात्र अपराध के कारण को दूर करने का प्रयास करेगा।
(vi) समयानुकूल दण्ड : अपराध और दण्ड के मध्य समय का अन्तराल अधिक नहीं होना चाहिए। जहाँ तक सम्भव हो सके अपराध करने के तुरन्त बाद दण्ड दिया जाना चाहिए ताकि अपराध और दण्ड में सम्बन्ध बना रहे। अपराध के बहुत समय बाद दण्ड देने से दोनों के बीच सम्बन्ध स्थापित नहीं हो पाता।
(vii) उचित दण्ड : किसी अपराध के लिए जो दण्ड दिया जाए, वह अध्यापक, दण्डित होने वाले छात्र और अन्य छात्रों की दृष्टि में उचित होना चाहिए। दण्ड अनुचित होने पर छात्रों में असन्तोष की भावना उत्पन्न होती है।
(viii) सम्पूर्ण समूह को दण्ड नहीं देना चाहिए : कभी-कभी कक्षा के कुछ छात्र शोरगुल करते हैं या गलती करते हैं तो कक्षा के सभी छात्रों पर मार पड़ती है या जुर्माना किया जाता है। यह सुधारक दण्ड अनुचित है। दण्ड केवल उन्हीं छात्रों को देना चाहिए, जिन्होंने कोई दण्ड देने वाले का व्यक्हार अपराध किया हो।
(ix) दण्ड विचारपूर्वक दिया जाए : अपराध के कारण को जानकर तथा अपराध की गुरुता को समझकर ही दण्ड देना चाहिए, अन्यथा कभी-कभी गलत दण्ड दे दिया जाता है। अतः दण्ड देने से पूर्व विचार-विमर्श करना आवश्यक है।
(x) उदाहरण बोध दण्ड : अपराधी बालक को इस प्रकार दण्डित करना चाहिए कि अन्य देखने वाले छात्रों के सामने वह एक उदाहरण का कार्य करे और अन्य छात्र इस प्रकार का अपराध करने की ओर प्रवृत्त न हों।
(xi) सुधारक दण्ड : दण्ड में बदले या प्रतिशोध की भावना नहीं होनी चाहिए। दण्ड सुधार करने की भावना से दिये जाने चाहिए, तभी उनको यथेष्ट प्रभाव पड़ता है।
(xii) दण्ड देने वाले का व्यवहार सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए : दण्ड क्रोध या बदले की भावना से न देकर सहानुभूतिपूर्ण तरीके से देना चाहिए ताकि छात्र यह समझे कि अध्यापक हमारा हितचिन्तक है। इसलिए मुझे अमुक अपराध के लिए दण्डित किया गया है।In simple words: दण्ड देते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह अपराध के अनुरूप हो, बालक की प्रकृति के अनुकूल हो, और गंभीरता से दिया जाए। छात्र को दण्ड का कारण पता होना चाहिए और दण्ड तुरंत बाद दिया जाए। दण्ड उचित, विचारपूर्वक और सुधारात्मक होना चाहिए, पूरे समूह को नहीं देना चाहिए, और अध्यापक का व्यवहार सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए ताकि छात्र इसे हितैषी मान सकें।
🎯 Exam Tip: दण्ड के उद्देश्यों और उसके नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए इन महत्वपूर्ण बातों का वर्णन करना आवश्यक है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. छात्रों को पुरस्कार देने के मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: छात्रों को पुरस्कार देने के निम्नलिखित उद्देश्य हो सकते हैं।
(i) अनुशासन के प्रति आस्था : जब अनुशासित रहने पर या अनुशासन सम्बन्धी उत्तम कार्य करने पर छात्रों को पुरस्कृत किया जाता है, तो उनकी अनुशासन के प्रति आस्था अधिक बढ़ जाती है। दूसरे शब्दों में, पुरस्कार द्वारा छात्रों में अनुशासन स्थापित किया जा सकता हैं।
(ii) स्वस्थ प्रतियोगिता जाग्रत करना : प्रायः यह देखा गया है कि पढ़ने-लिखने या खेल-कूद में छात्रों में फ्रस्पर प्रतिस्पर्धा होने लगती है। एक छात्र दूसरे छात्र से आगे निकलने की भरसक कोशिश करता है। इससे विकास तथा सीखने की क्रिया अति तीव्र हो जाती है। अतः पुरस्कार छात्रों में स्वस्थ प्रतियोगिता को उत्पन्न करते हैं और छात्रों को अधिक परिश्रम करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसीलिए सीखने तथा अनुशासन में पुरस्कार का विशेष महत्त्व है।
(iii) अध्यापकों के प्रति आदर की भावना : पुरस्कार द्वारा छात्रों का उत्साहवर्धन होता है। उन्हें प्रसन्नता प्राप्त होती है तथा अपने अध्यापकों के प्रति उनके हृदय में आदर के भाव उत्पन्न होते हैं और बढ़ते हैं। अतः अध्यापकों के प्रति आदर की भावना उत्पन्न करना पुरस्कार का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है।
(iv) अच्छे मर्दों के प्रति उत्साह उत्पन्न करना : यह निर्विवाद सत्य है कि पुरस्कार प्राप्त होने पर छात्र को सुख मिलता है। अतः जिस कार्य से पुरस्कार का सम्बन्ध होता है उस कार्य से छात्र को लगाव हो जाता है और वह अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित तथा उत्साहित होता है।
(v) कार्यों में रुचि जाग्रत करना : जिन कार्यों के लिए पुरस्कार दिये जाते हैं, उनमें छात्रों की रुचि उत्पन्न हो जाती है और वे उन कार्यों को मन लगाकर करना पसन्द करते हैं।
(vi) चरित्र का विकास : पुरस्कारों द्वारा उत्तम कार्यों तथा अच्छी बातों के प्रति छात्र के मन में स्थायी भाव बन जाते हैं। इस प्रकार पुरस्कार छात्र के चरित्र के विकास में भी सहायक होते हैं।In simple words: पुरस्कार देने के मुख्य उद्देश्य छात्रों में अनुशासन के प्रति विश्वास बढ़ाना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, शिक्षकों के प्रति सम्मान पैदा करना, अच्छे कार्यों के प्रति उत्साह बढ़ाना, सीखने में रुचि जगाना और उनके चरित्र का विकास करना है।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से लिखना, विशेषकर उनके शैक्षिक और नैतिक प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
Question 2. पुरस्कार देने के मुख्य लाभों का उल्लेख कीजिए।
Answer: पुरस्कार देने से निम्नांकित लाभ होते हैं
(i) पुरस्कार बालकों को प्रेरित करते हैं तथा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
(ii) पुरस्कार सुर्खदायक होते हैं। अतः वे बालक में कार्य के प्रति रुचि तथा उत्साह उत्पन्न करते हैं।
(iii) पुरस्कार व्यक्ति के आत्म-सम्मान में वृद्धि करते हैं तथा उसके अहम् की सन्तुष्टि करते हैं। इसके साथ ही वे उसमें उच्च अनुशासन का भाव उत्पन्न करते हैं।
(iv) पुरस्कार अच्छे कार्यों को उल्लास से प्रतिबद्ध कर देते हैं और इस प्रकार उनकी आवृत्ति अधिक होने लगती है।
(v) पुरस्कार बालकों की आकाँक्षा स्तर को भी ऊँचा उठाते हैं। इसके फलस्वरूप बालक अपने को सदैव अच्छा बनाने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं।
(vi) पुरस्कारों से प्रेरित होकर बालक आत्म-निर्देशित होता है तथा उसमें विचारों की सक्रियता और गतिशीलता उत्पन्न होती है।
(vii) आर्थिक लाभ से युक्त पुरस्कार छात्रों को आर्थिक दृष्टि से भी लाभ पहुँचाते हैं।
(viii) पुरस्कार बालक को उत्तम आचरण की दिशा में प्रवृत्त करते हैं। इनसे उसका आचरण नियन्त्रित भी होती है।
(ix) बालकों में परस्पर प्रतिस्पर्धा तथा प्रतियोगिता का विकास होता है और उनमें आगे बढ़ने की होड़ लग जाती है।
(x) बालकों के पुरस्कृत होने पर उनसे सम्बन्धित अध्यापक, माता-पिता और अभिभावक आदि भी गौरवान्वित होते हैं और बालक को आगे तथा उन्नति करने के लिए सदैव प्रेरित करते रहते हैं। बालक भी उनकी असलेता तथा अपनी आत्म-सन्तुष्टि कायम रखने के लिए कठोर परिश्रम करते हैं।In simple words: पुरस्कार बच्चों को प्रेरित करते हैं, उनमें खुशी और काम के प्रति रुचि बढ़ाते हैं, आत्म-सम्मान में वृद्धि करते हैं, अच्छे कामों को दोहराने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाते हैं, आत्म-निर्देशित होने में मदद करते हैं, आर्थिक लाभ पहुंचाते हैं, उत्तम आचरण विकसित करते हैं और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार के लाभों को बिंदुवार प्रस्तुत करने से उत्तर अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनता है।
Question 3. पुरस्कार वितरण से होने वाली हानियों का सामान्य परिचय दीजिए।
Answer: इसमें सन्देह नहीं है कि पुरस्कारों का शिक्षा में विशेष महत्त्व है, तथापि थॉमसन (Thomson) व अन्य मनोवैज्ञानिकों ने पुरस्कारों द्वारा होने वाली अनेक हानियों का भी उल्लेख किया है, जिनमें प्रमुख अलिखित हैं
(i) पुरस्कार पाने के लालच में कभी-कभी बालक खेलकूद तथा पाठ्य सहगामी क्रियाओं में अधिक भाग लेने लगते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई-लिखाई चौपट हो जाती है तथा उनकाशैक्षिक स्तर काफी गिर जाता है।
(ii) पुरस्कार छात्रों में पारस्परिक ईर्ष्या-द्वेष की भावना उत्पन्न कर देते हैं। इस भावना के कारण छात्र कभी-कभी एक-दूसरे को भारी अहित कर बैठते हैं।
(iii) जब बालकों को ध्यान पुरस्कार पर केन्द्रित हो जाता है तो वे प्रत्येक कार्य पुरस्कार प्राप्त करने के लिए ही करते हैं। यदि किसी कार्य में पुरस्कार मिलने वाला नहीं होता तो वे उसकी ओर समुचित ध्यान नहीं देते हैं।
(iv) पुरस्कार बालकों का ध्यान कार्य या कर्तव्य से हटाकर परिणाम पर केन्द्रित करते हैं। इससे कभी-कभी कर्तव्य की अवहेलना हो जाती है।
(v) पुरस्कार छात्रों को प्रायः बाह्य रूप से प्रेरित करते हैं तथा कार्य में उनकी वास्तविक रुचि उत्पन्न नहीं करते।
(vi) पुरस्कार न पाने वाले छात्रों में हीनता की भावना उत्पन्न होती है और वे कुण्ठाग्रस्त हो जाते हैं।
(vii) प्रायः बालक धोखा देकर भी पुरस्कार पाने का प्रयास करते हैं।In simple words: पुरस्कार के लालच में बच्चे पढ़ाई से भटक सकते हैं, उनमें ईर्ष्या और द्वेष पैदा हो सकता है, वे सिर्फ पुरस्कार के लिए काम करने लगते हैं, जिससे उनकी आंतरिक रुचि खत्म हो जाती है। जो बच्चे पुरस्कार नहीं पाते, उनमें हीन भावना और कुंठा आ सकती है, और वे धोखाधड़ी का सहारा भी ले सकते हैं।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार की हानियों को विस्तार से समझाते हुए, उनके नकारात्मक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर जोर देना चाहिए।
Question 4. दण्ड क्या है? शिक्षा में इसकी क्या उपयोगिता है?
Answer: जब किसी व्यक्ति को किसी कार्य के परिणामस्वरूप कष्टदायक अनुभव प्राप्त होता है, चाहे वह प्रकृति-प्रदत्त हो या अर्जित, तब उसे दण्ड किसी व्यक्ति को अनुचित कार्य करने पर दिया जाता हैं।
शिक्षा में दण्ड की उपयोगिता शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन स्थापित करने में दण्ड का विशेष महत्त्व है। मध्यकालीन शिक्षा में 'दण्ड' को अनुशासन स्थापना का प्रमुख साधन समझा जाता था। उस समय उक्ति प्रचलित थी कि डण्डा छूटा बालक बिगड़ा (Spare the rod and spoil the child)। उस समय छात्र द्वारा गलती करने पर उसे कठोरतम दण्ड दिया जाता था। मध्यकाल में शारीरिक दण्ड की प्रधानता थी।
लेकिन बाद में शिक्षा के क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक विचारधारा के प्रवेश के फलस्वरूप शारीरिक दण्ड की प्रधानता समाप्त हो गयी, किन्तु अन्य प्रकार को दण्ड आज भी प्रचलित है, क्योंकि दण्ड के अभाव में अनुशासन की स्थापना करना एक कल्पना ही है। छात्रों की बुरी आदतों को छुड़ाने, उन्हें अनुचित कार्य करने से रोकने तथा बुराइयों से बचाने के लिए दण्ड अत्यन्त आवश्यक है। दण्ड के स्वरूप को निर्धारित करने में विशेष सूझ-बूझ से काम लेना चाहिए। दण्ड का उद्देश्य सदैव सुधारात्मक ही होना चाहिए।In simple words: दण्ड किसी अनुचित कार्य के परिणाम स्वरूप होने वाला कष्टदायक अनुभव है। शिक्षा में दण्ड का महत्व बच्चों में अनुशासन स्थापित करने, बुरी आदतों को छुड़ाने और गलत कार्यों को रोकने में है। हालांकि शारीरिक दण्ड की बजाय सुधारात्मक दण्ड पर अधिक जोर दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: दण्ड की परिभाषा के साथ उसकी शैक्षिक उपयोगिता और सुधारात्मक दृष्टिकोण को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 5. विद्यालयों में दण्ड की व्यवस्था के मुख्य लाभ क्या हैं? या दण्ड के दो लाभ बताइए।
Answer: शिक्षा के क्षेत्र में दण्ड से निम्नांकित लाभ हैं
(i) गलतियों पर रोक : किसी गलती पर यदि छात्र को दण्ड मिल जाता है तो वह उसे गलती से दूर रहने की कोशिश करता है और उसकी पुनरावृत्ति नहीं करता।
(ii) अपराधों में कमी : दण्ड द्वारा छात्र की अपराधी प्रवृत्ति में सुधार हो जाता है, जिससे उसके अपराधों में निरन्तर कमी आने लगती है। अपराध के फलस्वरूप मिला हुआ दण्ड दुःख की अनुभूतियों से जुड़ जाता है और बालक अपराधी कार्य से दूर रहता है।
(iii) अपराधों पर नियन्त्रणं : किसी छात्र को जब किसी अनुचित कार्य के लिए दण्ड मिलता है तो अन्य छात्र भी उस कार्य को नहीं करते, क्योंकि उन्हें भी दण्ड पाने का भय लगने लगता है। इस प्रकार दण्डों से भावी अपराधों पर नियन्त्रण हो जाता है।
(iv) अनुशासन की स्थापना : कुछ छात्र ऐसे भी होते हैं, जो सकारात्मक उपायों से नहीं सुधरे सकते। उन्हें सुधारने और अनुशासित रखने के लिए दण्ड बहुत आवश्यक तथा उपयोगी होते हैं।
(v) बुरी आदतों को छुड़ाना : बुरी आदतों को छुड़ाने के लिए उनके साथ दुःखद या अप्रिय अनुभूतियों को प्रतिबद्ध करना उपयोगी होता है। बुरी आदतों के फलस्वरूप दण्ड पाने पर छात्र उन आदतों से बचते हैं।
(vi) चरित्र : निर्माण में सहायक- दण्ड के फलस्वरूप छात्रों में अनेक प्रकार के दुर्गुणों का विकास नहीं हो पाता। इससे भी उनके चरित्र की समुचित विकास होता है।In simple words: दण्ड के मुख्य लाभों में गलतियों और अपराधों को रोकना, अनुशासन स्थापित करना, बुरी आदतों को छुड़ाना और चरित्र निर्माण में सहायता करना शामिल है। यह छात्रों को नकारात्मक व्यवहार से दूर रहने के लिए प्रेरित करता है।
🎯 Exam Tip: दण्ड के सकारात्मक लाभों को स्पष्ट करते हुए उसके सुधारात्मक पहलू पर जोर देना चाहिए।
Question 6. विद्यालयों में दण्ड की व्यवस्था होने की क्या हानियाँ हो सकती हैं? या दण्ड की दो हानियाँ लिखिए।
Answer: प्रायः यह देखा गया है कि दण्ड देने वालों की असावधानी से दण्डों का दुरुपयोग हो जाता है। ऐसी दशा में दण्ड से अनेक हानियाँ होती हैं। इन हानियों का विवेचन निम्नलिखित है
(i) प्रतिशोध की भावना : दण्डिस होने पर दण्ड देने वाले के प्रति छात्रों में बदला या प्रतिशोध लेने की भावना प्रबल हो जाती है और अवसर पाने पर वे अपने दण्ड का प्रतिशोध लेने की कोशिश करते हैं।
(ii) अपराधों पर अधिक बल : प्रायः देखा गया है कि अध्यापक दण्ड देते समय छात्र के अपराध या गलती का बार-बार लेख करता है और बताता है कि उसी गलती के लिए उसे दण्ड दिया जा रहा है। इस प्रकार छात्र के मन पर अपराध या गलती की गहरी छाप पड़ जाती है, जो हानिकारक होती है।
(iii) मानसिक विकास में अवरोध : अधिक कठोर दण्ड देने से छात्रों में असन्तोष की भावना उत्पन्न होती है और उनका मानसिक विकास भी अवरुद्ध हो जाता है।
(iv) भावना-ग्रन्थियों का निर्माण : कठोर दण्ड छात्रों की इच्छा या भावनाओं को दबा देते हैं, जिससे वे अचेतन मन में जाकर ग्रन्थियों का निर्माण करती हैं तथा उन्हें कुण्ठाग्रस्त बना देती हैं।
(v) अस्थायी प्रभाव : छात्र पर दण्ड का प्रभाव स्थायी नहीं हो पाता। दण्ड के भय से छात्र भले ही कोई कार्य करना छोड़ दे, किन्तु दण्ड से उसके हृदय का परिवर्तन नहीं होता है।
(vi) दण्ड का आदी होना : बार-बार दण्डित होने पर छात्र दण्ड का आदी हो जाता है और दण्ड का उस पर क्षणिक प्रभाव ही पड़ता है।In simple words: दण्ड के दुरुपयोग से छात्रों में प्रतिशोध की भावना, अपराध बोध की गहरी छाप, मानसिक विकास में बाधा, भावना-ग्रन्थियों का निर्माण, अस्थायी प्रभाव और दण्ड का आदी होने जैसी हानियाँ हो सकती हैं, जिससे इसका उद्देश्य विफल हो सकता है।
🎯 Exam Tip: दण्ड की हानियों का वर्णन करते समय मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभावों पर विशेष ध्यान दें।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. विद्यालय में छात्रों को किन-किन क्षेत्रों में पुरस्कार दिये जा सकते हैं ?
Answer: जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मनुष्य विशिष्ट या उल्लेखनीय कार्य कर सकता है। अतः प्रत्येक क्षेत्र में पुरस्कार दिये जा सकते हैं। विद्यालय में भी छात्रों द्वारा अनेक क्षेत्रों में प्रशंसनीय कार्य किये जाते हैं। कुछ प्रमुख क्षेत्र, जिनमें पुरस्कार देने चाहिए, निम्नलिखित हैं
(i) बौद्धिक क्षेत्र – बौद्धिक कार्यो; जैसे-पढ़ने-लिखने, वाद-विवाद तथा निबन्ध प्रतियोगिताओं आदि के लिए पुरस्कारों की व्यवस्था होनी चाहिए।
(ii) शारीरिक कार्य – शारीरिक स्वास्थ्य, कुश्ती, खेलकूद आदि के लिए भी पुरस्कार देने चाहिए।
(iii) नैतिक श्रेष्ठता – नैतिक दृष्टि से उत्तम आचरण करने वाले छात्रों को भी पुरस्कार दिये जाने चाहिए।
(iv) सामुदायिक कार्य – सामुदायिक कार्य के सम्पादन तथा सामुदायिक भावना के विकास के लिए पुरस्कार दिये जाने चाहिए।
(v) उपस्थिति व आचरण – कक्षा में नियमित उपस्थिति तथा सदाचरण के लिए भी पुरस्कार दिये। जाने चाहिए।In simple words: विद्यालय में छात्रों को बौद्धिक, शारीरिक, नैतिक, सामुदायिक कार्यों और अच्छी उपस्थिति व आचरण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार दिए जा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार के क्षेत्रों का उल्लेख करते समय शैक्षिक और सह-पाठ्यचर्या दोनों गतिविधियों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. दण्ड के प्रतिशोधात्मक उद्देश्य का उल्लेख कीजिए।
Answer: प्रतिशोध को उचित दण्ड कहा जाता है। इसके अनुसार जिस व्यक्ति ने जैसा किया है, उसे उसी प्रकार का दण्ड दिया जाना चाहिए। प्राचीनकाल में दण्ड का यह उद्देश्य सर्वमान्य था और जैसे को तैसा (Tit for Tat) का सिद्धान्त प्रचलित था। उस समय प्रतिशोध या बदला लेने के उद्देश्य से दण्ड दिया जाता था। आज भी अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्देश्य से दण्ड दिया जाता है।In simple words: दण्ड का प्रतिशोधात्मक उद्देश्य 'जैसे को तैसा' के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ अपराधी को उसके किए गए अपराध के समान ही कष्ट दिया जाता है। इसका लक्ष्य बदला लेना या न्याय की भावना को संतुष्ट करना होता है, जो प्राचीनकाल में अधिक प्रचलित था।
🎯 Exam Tip: प्रतिशोधात्मक दण्ड के ऐतिहासिक संदर्भ और उसके मूल सिद्धांत को स्पष्ट करना चाहिए।
Question 3. दण्ड के प्रतिरोधात्मक उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रतिरोधात्मक शब्द प्रतिरोध से बना है। इसका अर्थ है- रोकना या रास्ते पर रोक लगा देना तांकि चलने वाला उस रास्ते पर न जा सके। दूसरे शब्दों में, समाज के द्वारा उन व्यक्तियों पर रोक लगाना जो गलत रास्तों पर चलकर समाज को हानि या चोट पहुँचाते हैं। यह उद्देश्य कठोर दण्ड पर आधारित है। दण्ड की कठोरता के कारण बालक भविष्य में कभी भी अपराध की ओर उन्मुख होने का साहस नहीं करेगा। दण्ड कठोर होने के कारण विद्यालय के अन्य छात्र भी अपराध की ओर अग्रसर नहीं होंगे। आजकल विद्यालयों में दण्ड के इस उद्देश्य को अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता।In simple words: दण्ड का प्रतिरोधात्मक उद्देश्य किसी व्यक्ति या समाज को गलत रास्ते पर जाने से रोकना है। इसमें दण्ड की कठोरता से ऐसी भावना पैदा की जाती है कि लोग अपराध करने से डरें और भविष्य में ऐसा करने से बचें।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोधात्मक दण्ड के निवारक पहलू और उसके समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर प्रकाश डालना चाहिए।
Question 4. दण्ड के सुधारात्मक उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह उद्देश्य इस तथ्य पर आधारित है कि बालक की शारीरिक विशेषताएँ और वंशानुक्रम अपराध के कारण नहीं हैं, बल्कि विद्यालय, परिवार तथा समाज का वातावरण अपराध के लिए जिम्मेदार है, न कि बालक। इस उद्देश्य के अनुसार अपराधियों को सुधार किया जाए और उन्हें योग्य नागरिक के समान जीना और जीने देने का पाठ सिखाया जाए। विद्यालय व समाज के वातावरण का सुधार किया जाए, क्योंकि इससे ही अपराधियों का जन्म होता है। इस उद्देश्य के अन्तर्गत कारावास के महत्त्व को स्वीकार किया गया है। इन कारागारों को सुधार गृह भी कहा जाता है।In simple words: दण्ड का सुधारात्मक उद्देश्य यह मानता है कि अपराध का कारण बालक की जन्मजात प्रकृति नहीं, बल्कि उसके आसपास का वातावरण है। इसका लक्ष्य अपराधियों को सुधारना और उन्हें समाज का जिम्मेदार सदस्य बनाना है, जिसके लिए उन्हें 'सुधार गृहों' में भेजा जा सकता है।
🎯 Exam Tip: सुधारात्मक दण्ड के मनोवैज्ञानिक आधार और समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण को समझाना महत्वपूर्ण है।
निश्चित उत्तरीय प्रश्न
Question 1. पुरस्कार से क्या आशय है ?
Answer: पुरस्कार का आशय बालक को अच्छे कार्यों को करने के फलस्वरूप सुखद अनुभूति कराने से है।In simple words: पुरस्कार का अर्थ है बच्चों को अच्छे काम करने पर खुशी का अनुभव कराना।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार की संक्षिप्त और सटीक परिभाषा देना पर्याप्त है।
Question 2. 'पुरस्कार' की एक परिभाषा दीजिए।
Answer: “पुरस्कर वांछित कार्य के साथ सुखद साहचर्य स्थापित करने का साधन है।” [ हरलॉक ]In simple words: हरलॉक के अनुसार, पुरस्कार एक ऐसा माध्यम है जिससे वांछित कार्य के साथ सुखद जुड़ाव बनता है।
🎯 Exam Tip: किसी प्रसिद्ध विचारक की परिभाषा को उद्धृत करना उत्तर को अधिक प्रामाणिक बनाता है।
Question 3. बालकों को विद्यालय में सामान्य रूप से दिये जाने वाले पुरस्कार के चार प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
Answer:
(i) प्रशंसा
(ii) पदक या मैडल
(iii) प्रमाण-पत्र तथा
(iv) छात्रवृत्ति।In simple words: विद्यालय में बच्चों को आमतौर पर प्रशंसा, पदक, प्रमाण-पत्र और छात्रवृत्ति के रूप में पुरस्कार दिए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार के सामान्य प्रकारों को बिंदुवार सूचीबद्ध करना चाहिए।
Question 4. पुरस्कार प्रदान करने के चार मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: पुरस्कार प्रदान करने के मुख्य उद्देश्य हैं
(i) अनुशासन के प्रति आस्था
(ii) स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करना
(iii) कार्यों के प्रति रुचि जाग्रत करना तथा
(iv) अच्छे कार्यों के प्रति उत्साह उत्पन्न करनाIn simple words: पुरस्कार देने के मुख्य उद्देश्य बच्चों में अनुशासन, स्वस्थ प्रतियोगिता, कार्यों में रुचि और अच्छे काम करने के लिए उत्साह बढ़ाना है।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार के मुख्य उद्देश्यों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करना चाहिए।
Question 5. विद्यालय में पुरस्कार प्रदान करने में ध्यान रखने योग्य प्रमुख तथ्य क्या है ?
Answer: पुरस्कार प्रदान करते समय ध्यान में रखने योग्य प्रमुख बात यह है कि पुरस्कार देने का निर्णय हर प्रकार से तटस्थ हो, अर्थात् उसमें कोई पक्षपात न हो।In simple words: विद्यालय में पुरस्कार देते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्णय पूरी तरह निष्पक्ष और पक्षपातरहित होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: निष्पक्षता पुरस्कार प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण है और इसे हाइलाइट किया जाना चाहिए।
Question 6. दण्ड कितने प्रकार का होता है?
Answer: दण्ड दो प्रकार का होता है।
(i) सरल दण्ड तथा
(ii) शारीरिक दण्ड या कठोर दण्डIn simple words: दण्ड मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं- सरल दण्ड (जो कम गंभीर होते हैं) और शारीरिक या कठोर दण्ड (जो अधिक गंभीर होते हैं)।
🎯 Exam Tip: दण्ड के प्रकारों का सीधा वर्गीकरण करना चाहिए।
Question 7. दण्ड-व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य क्या होना चाहिए ?
Answer: दण्ड-व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सुधारात्मक होना चाहिए।In simple words: दण्ड देने का मुख्य लक्ष्य अपराधी को सुधारना होना चाहिए, न कि केवल उसे सजा देना।
🎯 Exam Tip: दण्ड का सुधारात्मक उद्देश्य आधुनिक शिक्षाशास्त्र का एक प्रमुख सिद्धांत है।
Question 8. सीखने में दण्ड का क्या स्थान है ?
Answer: सीखने में दण्ड का महत्त्वपूर्ण स्थान है, परन्तु यह सुधारात्मक होना चाहिए।In simple words: सीखने की प्रक्रिया में दण्ड का एक महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन इसका उपयोग छात्रों को सुधारने के उद्देश्य से ही किया जाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: दण्ड के महत्व को स्वीकार करते हुए उसके सुधारात्मक पहलू पर बल देना आवश्यक है।
Question 9. मध्यकाल में भारत में किस प्रकार के दण्ड का प्रचलन था?
Answer: मध्यकाल में भारत में कठोर दण्ड-व्यवस्था का प्रचलन था।In simple words: मध्यकालीन भारत में, कठोर शारीरिक दण्ड सामान्य रूप से प्रचलित थे।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक संदर्भों को संक्षिप्त और सटीक रखना चाहिए।
Question 10. बालकों को दिया जाने वाला आर्थिक दण्ड क्यों अनुचित माना जाता है?
Answer: आर्थिक दण्ड का प्रत्यक्ष प्रभाव अलक पर नहीं बल्कि उसके अभिभावकों पर पड़ती है। अतः इसे अनुचित माना जाता है।In simple words: बच्चों को आर्थिक दण्ड देना अनुचित है क्योंकि इसका सीधा असर बच्चों के अभिभावकों पर पड़ता है, न कि स्वयं बच्चों पर।
🎯 Exam Tip: आर्थिक दण्ड की नैतिक और व्यावहारिक कमियों को स्पष्ट करना चाहिए।
Question 11. दण्ड-व्यवस्था से प्राप्त होने वाले चार लाभों का उल्लेख कीजिए।
Answer:
(i) गलतियों पर रोक
(ii) अपराधों पर नियन्त्रण एवं कमी
(iii) अनुशासन की स्थापना तथा
(iv) बुरी आदतों को समाप्त करना।In simple words: दण्ड-व्यवस्था के चार मुख्य लाभ हैं- गलतियों को रोकना, अपराधों को नियंत्रित और कम करना, अनुशासन स्थापित करना और बुरी आदतों को खत्म करना।
🎯 Exam Tip: दण्ड के प्रमुख सकारात्मक प्रभावों को बिंदुवार प्रस्तुत करना चाहिए।
Question 12. मूर्त पुरस्कार किसे कहते हैं? तीन उदाहरण दीजिए।
Answer: किसी वस्तु अथवा सामग्री के रूप में दिया जाने वाला पुरस्कार मूर्त पुरस्कार कहलाता है। इसके उदाहरण हैं कोई उपयोगी वस्तु (बैट, फुटबॉल आदि), शील्ड तथा धनराशि।In simple words: मूर्त पुरस्कार वे होते हैं जो किसी भौतिक वस्तु या सामग्री के रूप में दिए जाते हैं, जैसे बैट, फुटबॉल, शील्ड या पैसे।
🎯 Exam Tip: मूर्त पुरस्कार की परिभाषा के साथ उसके ठोस उदाहरण देना महत्वपूर्ण है।
Question 13. सीखने में पुरस्कार का क्या स्थान है?
Answer: सीखने की प्रक्रिया में पुरस्कार एक प्रबल प्रेरक के रूप में कार्य करता है।In simple words: पुरस्कार सीखने की प्रक्रिया में एक बहुत मजबूत प्रेरणा स्रोत का काम करता है, जो छात्रों को और अधिक सीखने के लिए प्रोत्साहित करता है।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार की भूमिका को प्रेरक के रूप में स्पष्ट करना चाहिए।
Question 14. निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य
(i) पुरस्कार-व्यवस्था पूर्णरूप से अनावश्यक है।
(ii) विद्यालय में पुरस्कार-व्यवस्था से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का विकास होता है।
(iii) सार्वजनिक रूप से की गयी प्रशंसा भी पुरस्कार ही है।
(iv) बालकों के लिए कठोर शारीरिक दण्ड ही सर्वोत्तम दण्ड है।
(v) दण्ड का उद्देश्य सुधारात्मक होना चाहिए।
Answer:
(i) असत्य
(ii) सत्य
(iii) सत्य
(iv) असत्य
(v) सत्य।In simple words: पुरस्कार-व्यवस्था पूरी तरह अनावश्यक नहीं है और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है; सार्वजनिक प्रशंसा एक प्रकार का पुरस्कार है। कठोर शारीरिक दण्ड सर्वोत्तम नहीं है और दण्ड का मुख्य उद्देश्य सुधार होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़कर सत्य या असत्य निर्धारित करें और अपने ज्ञान का प्रदर्शन करें।
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. “पुरस्कार वांछित कार्य के प्रति सुखद साहचर्य स्थापित करने का साधन है।” यह किसकी परिभाषा है ?
(क) हरलॉक की
(ख) थॉर्नडाइक की
(ग) टरमन की
(घ) रायबर्न की
Answer: (क) हरलॉक कीIn simple words: यह परिभाषा हरलॉक ने दी है, जो बताती है कि पुरस्कार वांछित काम से खुशी को जोड़ता है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों की परिभाषाएँ याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों में सहायक होता है।
Question 2. “पुरस्कार व्यक्ति में अच्छा कार्य करने की भावना जाग्रत करता है।” यह कथन है
(क) मैक्डूगल का
(ख) वुडवर्थ का
(ग) हिलगार्ड को
(घ) रायबर्न का
Answer: (घ) रायबर्न काIn simple words: यह कथन रायबर्न का है, जो मानते हैं कि पुरस्कार व्यक्तियों में अच्छे काम करने की इच्छा जगाता है।
🎯 Exam Tip: विचारक और उनके कथनों को याद रखना सही उत्तर चुनने में मदद करेगा।
Question 3. अमूर्त पुरस्कार है
(क) छात्रवृत्ति
(ख) प्रमाण-पत्र
(ग) उपयोगी वस्तुएँ
(घ) प्रशंसा
Answer: (घ) प्रशंसाIn simple words: अमूर्त पुरस्कार वह है जिसे छुआ या देखा नहीं जा सकता, जैसे कि प्रशंसा, जो एक भावना या अनुभव है।
🎯 Exam Tip: मूर्त और अमूर्त पुरस्कारों के बीच का अंतर समझना आवश्यक है। मूर्त पुरस्कार भौतिक होते हैं, जबकि अमूर्त पुरस्कार गैर-भौतिक होते हैं।
Question 4. पुरस्कार का प्रमुख उद्देश्य है
(क) छात्रों को खेलने की प्रेरणा देना
(ख) कक्षा में अनुशासन स्थापित करना
(ग) छात्रों को प्रतिस्पर्धी बनाना।
(घ) छात्रों में रुचि, उत्साह एवं लगन से कार्य करने की भावना उत्पन्न करना
Answer: (घ) छात्रों में रुचि, उत्साह एवं लगन से कार्य करने की भावना उत्पन्न करनाIn simple words: पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य छात्रों में किसी कार्य के प्रति रुचि, उत्साह और लगन पैदा करना है, जिससे वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार के सबसे व्यापक और सकारात्मक उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 5. थार्नडाइक के सीखने के किस नियम का समान्य पुरस्कार व्यवस्था से है?
(के) यारी का नियम
(ख) अध्याय का नियम
(ग) प्रभाव का नियम
(घ) उपर्युक्त तीनों नियम
Answer: (ग) प्रभाव का नियमIn simple words: थॉर्नडाइक का 'प्रभाव का नियम' कहता है कि यदि किसी कार्य का परिणाम सुखद होता है (जैसे पुरस्कार), तो वह कार्य दोहराया जाता है; इसी प्रकार पुरस्कार व्यवस्था काम करती है।
🎯 Exam Tip: थॉर्नडाइक के सीखने के नियमों और उनके शैक्षिक निहितार्थों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 6. दण्ड एकू.सीथन है, जिसके द्वेय अवांछनीय कार्य के साथ कुःखद भावना को सम्बन्विं करके उसे दूर करने म प्रयास किया जात है। यह परिभाषा सिक्की है?
(क) थॉमसन
(ख) रॉसेक
(ग) जे० एस० रॉस
(घ) थॉर्नडाइक
Answer: (क) थॉमसनIn simple words: यह परिभाषा थॉमसन की है, जो बताती है कि दण्ड अवांछनीय कार्यों को दुःखद भावनाओं से जोड़कर उन्हें हटाने का प्रयास करता है।
🎯 Exam Tip: दण्ड की परिभाषाओं और उन्हें देने वाले विचारकों के नामों को याद रखें।
Question 7. “दण्ड अवांछनीय व्यवहार को दूर करने का दमनात्मक साधन है।” यह परिभाषा दी
(क) बी० एन० झा ने
(ख) क्रो एवं क्रो ने
(ग) किलपैट्रिक ने
(घ) रॉसेक व अन्य ने
Answer: (घ) रॉसेक व अन्य नेIn simple words: यह परिभाषा रॉसेक व अन्य ने दी है, जो दण्ड को अवांछनीय व्यवहार को रोकने का एक दमनकारी साधन मानती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न शिक्षाशास्त्रियों द्वारा दी गई परिभाषाओं को याद रखना आवश्यक है।
Question 8. उपेक्षात्मक दण्ड का उदाहरण है
(क) विद्यालय का कमरा साफ करवाना
(ख) विद्यालय में अवकाश के बाद गृहकार्य पूरा करवाना
(ग) दूसरों के सामने लज्जित करना
(घ) कक्षा में पीछे बैठाना
Answer: (घ) कक्षा में पीछे बैठानाIn simple words: उपेक्षात्मक दण्ड का मतलब है किसी छात्र को नजरअंदाज करना या उसे कम महत्व देना, जैसे कक्षा में पीछे बैठाना।
🎯 Exam Tip: दण्ड के विभिन्न प्रकारों को उनके उदाहरणों सहित समझना महत्वपूर्ण है।
Question 9. दण्ड और पुरस्कार है
(क) मनोवैज्ञानिक प्रेरक
(ख) स्वाभाविक प्रेरक
(ग) कृत्रिम प्रेरक
(घ) सामाजिक प्रेरक
Answer: (घ) सामाजिक प्रेरकIn simple words: दण्ड और पुरस्कार दोनों सामाजिक प्रेरक हैं क्योंकि वे समाज द्वारा निर्धारित नियमों और मूल्यों पर आधारित होते हैं और व्यक्ति के व्यवहार को सामाजिक संदर्भ में प्रभावित करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रेरक के विभिन्न प्रकारों को समझना और दण्ड-पुरस्कार के सामाजिक संदर्भ को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 10. उद्दण्ड छात्रों के लिए कौन-सा दण्ड लाभकारी है?
(क) नसिक दण्ड
(ख) आर्थिक दण्ड
(ग) शारीरिक दण्ड
(घ) सामाजिक दण्छ
Answer: (ग) शारीरिक दण्डIn simple words: उद्दण्ड छात्रों के लिए, कुछ स्थितियों में, शारीरिक दण्ड को लाभकारी माना गया है, हालांकि आधुनिक शिक्षाशास्त्र में इसे कम प्राथमिकता दी जाती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर ऐतिहासिक संदर्भ या विशेष परिस्थितियों में दिया जाता है, जहां शारीरिक दण्ड को प्रभावी माना गया। आधुनिक दृष्टिकोण सुधारात्मक दण्डों पर अधिक जोर देता है।
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