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Detailed Chapter 5 जननतन्त्रःशास्त्रीय क्रिया विज्ञान एवं अन्तः स्त्रायी गाइयाँ UP Board Solutions for Class 12 Home Science
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Class 12 Home Science Chapter 5 जननतन्त्रःशास्त्रीय क्रिया विज्ञान एवं अन्तः स्त्रायी गाइयाँ UP Board Solutions PDF
बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. बाह्य मादा जननांगों को सम्मिलित रूप से कहते हैं
(a) जघन उत्थान
(b) भग
(c) भगशेफ
(d) प्रकोष्ठ
Answer: (b) भग
In simple words: The external female reproductive organs are collectively known as the vulva (भग) in anatomy.
🎯 Exam Tip: Remember the collective term for external female genitalia is 'vulva' (भग), which is a very common direct question in board exams.
Question 2. नर जनन अंगों से सम्बन्धित ग्रन्थि है
(a) प्रोस्टेट ग्रन्थि
(b) स्वेद ग्रन्थि
(c) एड्रीनल ग्रन्थि
(d) एपिडिडाइमिस
Answer: (a) प्रोस्टेट ग्रन्थि
In simple words: The prostate gland is a male reproductive gland that helps produce semen, while the other options are either sweat glands, adrenal glands, or duct systems.
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between male reproductive glands (like prostate and seminal vesicles) and general endocrine or exocrine glands.
Question 3. नर में शुक्राणुजनन किन नलिकाओं में होता है?
(a) अपवाही नलिका में
(b) शुक्रवाहिनी में
(c) शुक्रनलिका में
(d) स्खलन नलिका में
Answer: (c) शुक्रनलिका में
In simple words: Sperm production (spermatogenesis) takes place inside the seminiferous tubules (शुक्रनलिका) of the testes.
🎯 Exam Tip: Memorize the exact site of sperm production, which is the seminiferous tubules (शुक्रनलिका), as this is frequently asked in multiple-choice questions.
Question 4. वृषण की अन्तराली (लीडिंग) कोशिकाओं से स्रावित हार्मोन है
(a) टेस्टोस्टेरॉन
(b) एस्ट्रोजन
(c) FSH
(d) प्रोजेस्टेरॉन
Answer: (a) टेस्टोस्टेरॉन
In simple words: Leydig cells in the testes produce testosterone, which is the primary male sex hormone responsible for male characteristics.
🎯 Exam Tip: Associate Leydig cells (अन्तराली कोशिकाएं) directly with testosterone production to quickly answer hormone-related questions.
Question 5. निम्न में से कौन मानव में मादा जनन तन्त्र का भाग नहीं हैं?
(a) अण्डाशय
(b) गर्भाशय
(c) शुक्रवाहिनी
(d) योनि
Answer: (c) शुक्रवाहिनी
In simple words: The vas deferens (शुक्रवाहिनी) is a tube that carries sperm in males, so it is not part of the female reproductive system.
🎯 Exam Tip: Read the question carefully to see if it asks for 'part of' or 'NOT a part of' (नहीं हैं) to avoid silly mistakes.
Question 6. ग्राफियन पुटिका पाई जाती है
(a) स्तनधारियों के अण्डाशय में
(b) लसीका गाँठों में
(c) स्तनधारियों की प्लीहा में
(d) मेंढक के अण्डाशय में
Answer: (a) स्तनधारियों के अण्डाशय में
In simple words: Graafian follicles are tiny fluid-filled sacs found in the ovaries of mammals, where the female egg develops and matures.
🎯 Exam Tip: Remember that Graafian follicles are characteristic features of mammalian ovaries, so associate them directly with female mammalian reproduction.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)
Question 1. लैंगिक जनन की इकाइयाँ क्या कहलाती हैं? केवल उनके नाम लिखिए।
Answer: नर तथा मादा युग्मकों का संयुग्मन लैंगिक जनन कहलाता है। दो युग्मकों के संयुग्मन (fusion) से युग्मनज (Zygote) बनता है। समान युग्मकों को संयुग्मन (Isogamy) कहते हैं। लैंगिक जनन की मुख्य इकाइयाँ नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अण्डाणु) होती हैं।
In simple words: The basic units of sexual reproduction are male and female reproductive cells, called gametes, which fuse together to form a new life.
🎯 Exam Tip: Clearly state the names of the gametes (sperm and ovum) as they are the primary units of sexual reproduction.
Question 2. अनिषेकजनन की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
Answer: अनिषेकजनन (Parthenogenesis) निषेचन के बिना अण्डाणु से वृद्धि और विभाजन द्वारा वयस्क का निर्माण होना अनिषेकजनन कहलाता है। नर मधुमक्खी और ततैया में अनिषेकजनन होता है। यह प्रक्रिया बिना किसी नर युग्मक के योगदान के ही नए जीव को जन्म देती है।
In simple words: Parthenogenesis is a special way of reproduction where a female egg develops into a complete adult without being fertilized by a male sperm.
🎯 Exam Tip: Always mention honeybees (नर मधुमक्खी) as a classic example of parthenogenesis to secure full marks.
Question 3. वृषण जालिका क्या है?
Answer: वृषण जालिका (Rete testes) शुक्रजनन नलिकाएँ वृषण की भीतरी सतह पर नलिकाओं के एक घने जाल में खुलती हैं, इसे वृषण जालिका कहते हैं। इससे 5-20 शुक्र वाहिकाएँ निकलकर एपिडिडाइमिस वाहिका (Epididymis duct) में खुलती है। एपिडिडाइमिस या अधिवृषण के अन्तिम भाग से शुक्रवाहिनी निकलती है। यह जाल शुक्राणुओं के सुरक्षित परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: Rete testis is a network of tiny tubes inside the testes that helps collect and transport sperm from the producing tubes to the storage tubes.
🎯 Exam Tip: Draw a quick mental map of the sperm pathway: Seminiferous tubules -> Rete testis -> Vasa efferentia -> Epididymis.
Question 4. शुक्राणुजनन का क्या अर्थ है?
Answer: वह प्रक्रिया, जिसके द्वारा वृषणों में शुक्राणुओं का निर्माण होता है, शुक्राणुजनन कहलाती हैं। वृषणों की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई शुक्रजनन नलिकाएँ होती हैं। यहीं पर शुक्राणु जनन होता हैं। यह प्रक्रिया पुरुषों में यौवनारंभ के समय शुरू होती है।
In simple words: Spermatogenesis is the biological process by which male sperm cells are produced inside the testes.
🎯 Exam Tip: Mention 'शुक्रजनन नलिकाएँ' (seminiferous tubules) as the exact site of sperm production to show precise knowledge.
Question 5. सर्टोली कोशिकाओं पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: वृषण की शुक्रजनन नलिकाओं (Seminiferous tubules) की जननिक एपिथीलियम में जनन कोशिकाओं के मध्य में स्थान-स्थान पर फूली हुई लम्बी सर्टोली कोशिकाएँ पाई जाती हैं। ये शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं। इन्हें 'नर्स कोशिकाएं' भी कहा जाता है क्योंकि ये विकासशील शुक्राणुओं की देखभाल करती हैं।
In simple words: Sertoli cells are special long cells in the testes that act like nurses, providing food and support to growing sperm cells.
🎯 Exam Tip: The keyword 'पोषण' (nutrition/nourishment) is highly critical when describing the function of Sertoli cells.
Question 6. शुक्राणु में एक्रोसोम का क्या महत्त्व है?
Answer: शुक्राणु में एक्रोसोम से हायल्युरोनिडेज एन्जाइम का स्रावण होता है, जो अण्डाणु की बाह्य भित्ति के पाचन में सहायक हैं, जिसके कारण शुक्राणु अण्डाणु में सुगमता से प्रवेश कर पाता है। यह निषेचन की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: The acrosome is the cap on the sperm's head that releases enzymes to dissolve the egg's outer layer, helping the sperm enter and fertilize it.
🎯 Exam Tip: Remember the name of the enzyme 'हायल्युरोनिडेज' (hyaluronidase) as it is a key term examiners look for.
Question 7. मानव, स्त्री के एक अण्डाणु में कितने और किस प्रकार के गुणसूत्र पाए जाते हैं?
Answer: मानव, स्त्री के एक अण्डाणु में 23 गुणसूत्र उपस्थित होते हैं, जिसमें 22 कायिक गुणसूत्र और एक लिंग गुणसूत्र (Sex chromosome) ‘X’ होता है। ये गुणसूत्र भावी संतान के आनुवंशिक लक्षणों को निर्धारित करने में मदद करते हैं।
In simple words: A human female egg contains 23 chromosomes in total, consisting of 22 body-building chromosomes and 1 female sex chromosome (X).
🎯 Exam Tip: Be careful not to write 46 chromosomes; gametes (eggs/sperm) are haploid and contain only half the number, which is 23.
Question 8. युग्मनज़ क्या है? इसमें गुणसूत्रों की संख्या कितनी होती है?
Answer: शुक्राणु (n) और अण्डाणु (n) के संयोजन से युग्मनज का निर्माण होता है। इसमें गुणसूत्रों की संख्या द्विगुणित (2n) होती है। यह एक एकल कोशिका होती है जिससे आगे चलकर पूरे जीव का विकास होता है।
In simple words: A zygote is the single cell formed when a sperm and an egg join together, and it contains a double set of chromosomes (one set from each parent).
🎯 Exam Tip: Clearly state that the zygote is diploid (2n) because it combines the haploid (n) sets of both parents.
Question 9. स्तनधारियों में निषेचन कहाँ होता है?
Answer: नर शुक्राणु (n) व मादा अण्डाणु (n) युग्मकों के संयोजन को निषेचन कहते हैं। स्तनधारियों में निषेचन फैलोपियन नलिका में होता है। फैलोपियन नलिका को डिम्बवाहिनी भी कहा जाता है।
In simple words: Fertilization is the joining of sperm and egg, and in mammals, this process takes place inside the Fallopian tube.
🎯 Exam Tip: 'फैलोपियन नलिका' (Fallopian tube) is the exact anatomical location required for full marks in this question.
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50 शब्द)
Question 1. लैंगिक जनन से आप समझते हैं? मानव शरीर में नर तथा मादा युग्मक कहाँ बनते हैं? पूर्णशक्त युग्मनज क्या है?
Answer: लैंगिक जनन (Sexual reproduction) नर तथा मादा युग्मकों अर्थात् शुक्राणु और अण्डाणु का संयुग्मन लैंगिक जनन कहलाता है, जिसके फलस्वरूप युग्मनज़ बनता है। नर युग्मक का निर्माण वृषण (Testis) की शुक्रजनन नलिकाओं में होता है। मादा युग्मक (अण्डाणु) का निर्माण अण्डाशय की ग्राफियन पुटिका में होता है। एक युग्मनज, जिसमें वृद्धि एवं विभाजन द्वारा भ्रूण का निर्माण होता है, पूर्णशक्त युग्मनज कहलाता है। यह पूर्णशक्त कोशिका शरीर के किसी भी अंग को विकसित करने की क्षमता रखती है।
In simple words: Sexual reproduction is the joining of male and female cells to create a zygote. Male cells are made in the testes, female cells in the ovaries, and the resulting zygote has the full power to grow into a complete baby.
🎯 Exam Tip: This question has three parts; ensure you answer all three clearly (definition of sexual reproduction, sites of gamete formation, and definition of totipotent zygote).
प्रश्न 2. नर मनुष्य में वृषण उदर गुहा के बाहर क्यों होते हैं?
Answer: नर मनुष्य में वृषण शरीर से बाहर वृषण कोष (Scrotum) में उपस्थित होते हैं। वृषण कोष का तापमान शरीर के तापमान से 3°C कम होता है, जिस पर शुक्राणुओं का निर्माण होता है। शरीर का तापमान अधिक होने के कारण शरीर के अन्दर शुक्राणुओं का निर्माण सम्भव नहीं हैं। अतः जन्म के समय वृषण अपने मूल स्थान से हटकर वृषण कोष में आ जाते हैं। यह तापमान नियंत्रण शुक्राणुओं की जीवनक्षमता और उनकी गतिशीलता को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: Sperm cells need a temperature slightly lower than normal body temperature to develop properly. That is why the testes are located outside the abdomen in a protective pouch called the scrotum.
🎯 Exam Tip: Always mention the specific temperature difference (about 2-3°C lower than body temperature) as it is the key scientific reason examiners look for.
प्रश्न 3. शुक्रजनन नलिका की अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: शुक्रजनन नलिका (वृषण) की अनुप्रस्थ काट का नामांकित विवरण निम्नलिखित है। यह चित्र वृषण की आंतरिक संरचना और शुक्राणु उत्पादन की विभिन्न परतों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है:
• शुक्राणु (Spermatozoa)
• पूर्वशुक्राणु कोशिकाएँ (Spermatids)
• संयोजी ऊतक (Connective tissue)
• अन्तराली कोशिकाएँ (Interstitial cells)
• शुक्राणुजनन की विभिन्न अवस्थाओं की कोशिकाएँ (Cells of different stages of spermatogenesis)
• सर्टोली कोशिकाएँ (Sertoli cells)
• द्वितीयक शुक्रकोशिकाएँ (Secondary spermatocytes)
• रुधिर वाहिकाएँ (Blood vessels)
• शुक्राणुजन कोशिकाएँ (Spermatogonia)
• प्रारम्भिक जननिक कोशिकाएँ (Primary germ cells)
• शुक्रजन नलिकाएँ (Seminiferous tubules)
In simple words: This diagram shows the inner cross-section of the tube where sperms are produced, highlighting key cells like Sertoli cells which provide nourishment to developing sperm.
🎯 Exam Tip: Practice drawing the circular seminiferous tubules and make sure to clearly label the Sertoli cells and the developing stages of sperm from outer to inner layers.
प्रश्न 4. शुक्राणुजनन क्या है? शुक्राणुजनन की विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन कीजिए।
Answer: शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) वह प्रक्रिया, जिसके द्वारा वृषणों में शुक्राणुओं का निर्माण होता है, शुक्राणुजनन कहलाती है। यह प्रक्रिया लैंगिक हार्मोन्स द्वारा नियमित होती है। यह पूरी प्रक्रिया वृषण की शुक्रजनन नलिकाओं में निरंतर चलती रहती है ताकि निरंतर शुक्राणु उत्पादन सुनिश्चित हो सके। शुक्राणुजनन की प्रक्रिया निम्नलिखित तीन चरणों में पूर्ण होती है:
1. गुणन प्रावस्था (Multiplication Phase): शुक्रजनन नलिकाओं की जनन उपकला की कोशिकाओं में समसूत्री विभाजन द्वारा शुक्राणुजन कोशिकाओं या स्पर्मेटोगोनिया का निर्माण होता है। ये कोशिकाएँ द्विगुणित (2n) होती हैं।
2. वृद्धि प्रावस्था (Growth Phase): शुक्राणुजन कोशिकाएँ पोषक पदार्थों का संचय करके प्राथमिक शुक्रकोशिका (Primary spermatocytes) में रूपान्तरित हो जाती हैं।
3. परिपक्वन प्रावस्था (Maturation Phase): प्राथमिक शुक्रकोशिकाओं स्पर्मेटोसाइट्स में अर्द्धसूत्री प्रथम विभाजन द्वारा अगुणित या द्वितीयक शुक्राणु कोशिकाओं का निर्माण होता है। यह अर्द्धसूत्री द्वितीय विभाजन द्वारा प्राक्शुक्राणु कोशिका या स्पर्मेटिड बनाती हैं। अतः एक प्राथमिक शुक्राणु कोशिकाओं से चार प्राक्शुक्राणु कोशिकाओं का निर्माण होता है। शुक्र-कायान्तरण (Spermiogenesis) द्वारा अचल प्राक्शुक्राणु परिपक्व से चल शुक्राणु बनता है।
In simple words: Spermatogenesis is the process of making sperm cells. It happens in three main stages: multiplying the cells, growing them larger, and finally dividing and maturing them into active swimming sperm.
🎯 Exam Tip: Clearly define each of the three phases (Multiplication, Growth, and Maturation) and remember to mention that the final transformation of spermatids into sperm is called spermiogenesis.
प्रश्न 5. मानव के शुक्राणु की संरचना का वर्णन कीजिए। अथवा मानव शुक्राणु का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: शुक्राणु की संरचना प्रत्येक शुक्राणु तीन भागों में विभेदित होता है। ये तीन मुख्य भाग सिर (Head), मध्य भाग (Middle piece) और पूंछ (Tail) होते हैं जो इसके कार्य और गतिशीलता में मदद करते हैं।
In simple words: A human sperm cell is divided into three main parts: the head which carries genetic information, the middle piece which provides energy, and the tail which helps it swim.
🎯 Exam Tip: Even if only a description is asked, drawing a neat labeled diagram showing the Head (with acrosome), Middle piece (with mitochondria), and Tail will help you score full marks.
मानव शुक्राणु की संरचना (Structure of Human Sperm)
1. शीर्ष (Head): शीर्ष प्रायः फूला हुआ, घुंडीदार होता है, परन्तु अनेक जन्तु जातियों में यह लम्बा, दण्डनुमा होता है। इसमें केन्द्रक स्थित होता है और केन्द्रक के चारों ओर थोड़ा-सा कोशिकाद्रव्य होता है। इसके शीर्ष पर गॉल्जीकाय की बनी एक्रोसोम नामक रचना टोपी की भाँति की होती है।
2. मध्य खण्ड (Middle piece): यह केन्द्र शीर्ष से पतला, दण्डनुमा भाग होता है, जो छोटी-सी ग्रीवा (Neck) द्वारा शीर्ष से जुड़ा रहता है। मध्य खण्ड में माइटोकॉन्ड्रिया उपस्थित होते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया के आगे ग्रीवा में एवं पीछे दो तारक केन्द्र (Centrioles) उपस्थित होते हैं।
3. पुच्छ (Tail): पुच्छ प्रायः लम्बी, चाबुकनुमा और अत्यधिक गतिशील होती है। पुच्छ द्वारा शुक्राणु तरल माध्यम में तैरता है।
मानव शुक्राणु की संरचना के मुख्य भाग (चित्र के नाम):
• जीवद्रव्यकला
• एक्रोसोम
• केन्द्रक (गुणसूत्रीय पदार्थ)
• ग्रीवा
• समीपस्थ तारककेन्द्र
• मध्य भाग
• माइटोकॉन्ड्रिया (तैरने के लिए ऊर्जा स्रोत)
• पुच्छ
• तन्तुमय आवरण
Question 6. मानव के स्त्रीजनन तन्त्र का नामांकित आरेखीय चित्र बनाइए।
Answer:
मानव स्त्रीजनन तन्त्र (Human Female Reproductive System) के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
• फैलोपियन नलिका या अण्डवाहिनी (Fallopian Tube): यह अण्ड को गर्भाशय तक पहुँचाने का मार्ग है।
• गर्भाशय (Uterus): यहाँ भ्रूण का विकास और रोपण होता है।
• तुम्बिका (Ampulla): यह फैलोपियन नलिका का चौड़ा भाग है जहाँ निषेचन की क्रिया होती है।
• अण्डाशय (Ovary): यह मादा प्राथमिक जनन अंग है जो अण्डाणु और हार्मोन उत्पन्न करता है।
• झालरदार कीप (Fimbriae): यह अण्डोत्सर्ग के समय अण्डाणु को ग्रहण करती है।
• योनि (Vagina): यह मैथुन कक्ष और प्रसव मार्ग के रूप में कार्य करती है।
• अन्तःस्तर (Endometrium) और मध्यस्तर (Myometrium): ये गर्भाशय की दीवार की परतें हैं।
In simple words: The female reproductive system consists of ovaries that produce eggs, fallopian tubes where fertilization occurs, and the uterus where the baby grows.
🎯 Exam Tip: Draw a neat, symmetrical diagram of the female reproductive system and clearly label the ovary, fallopian tube, uterus, and vagina to score full marks.
Question 7. अण्डाशय की अनुप्रस्थ काट (TS) का एक नामांकित आरेख बनाइए।
Answer:
अण्डाशय की अनुप्रस्थ काट (T.S. of Ovary) में दिखाई देने वाली मुख्य संरचनाएँ निम्नलिखित हैं:
• रुधिर वाहिकाएँ (Blood Vessels): अण्डाशय को पोषण और ऑक्सीजन प्रदान करती हैं।
• प्राथमिक पुटक (Primary Follicles): विकासशील पुटक जो अण्डाणु को घेरे रहते हैं।
• ग्राफी पुटक (Graafian Follicle): परिपक्व पुटक जो फटने के लिए तैयार होता है।
• अण्डोत्सर्ग (Ovulation): परिपक्व पुटक से अण्डाणु के बाहर निकलने की प्रक्रिया।
• पीत पिण्ड (Corpus Luteum): फटा हुआ पुटक जो प्रोजेस्टेरोन हार्मोन स्रावित करता है।
In simple words: The cross-section of an ovary shows eggs at different stages of growth, from tiny follicles to a fully mature Graafian follicle ready for release.
🎯 Exam Tip: When drawing the T.S. of an ovary, make sure to show the sequential stages of follicle development (primary, secondary, Graafian) and the formation of the corpus luteum after ovulation.
Question 8. मानव अण्डाणु का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: मानव अण्डाणु (Human Ovum) एक गोलाकार, अचल कोशिका है जिसमें निम्नलिखित मुख्य भाग दिखाई देते हैं जो इसके विकास और निषेचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
• पीतक कला (Vitelline membrane)
• केन्द्रक (Nucleus)
• कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm)
• जोना पेल्युसिडा (Zona pellucida)
• कोरोना रेडिएटा (Corona radiata)
In simple words: A human egg cell is a round cell that contains a nucleus in the center, surrounded by cytoplasm and protective outer layers called zona pellucida and corona radiata.
🎯 Exam Tip: परीक्षा में अण्डाणु का चित्र बनाते समय बाहरी सुरक्षात्मक परतों जैसे जोना पेल्युसिडा और कोरोना रेडिएटा को स्पष्ट रूप से नामांकित करें।
Question 9. यौवनारम्भ क्या है? इस अवस्था में बालक एवं बालिकाओं के शरीर में होने वाले परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।
Answer: पुरुष में यौवनारम्भ का प्रारम्भ:
यौवनारम्भ (Puberty) प्राणी के प्रजनन के योग्य हो जाने को यौवनारम्भ कहते हैं। पुरुष (बालक) में यौवनारम्भ 13-16 वर्ष की आयु में होता है। वृषण द्वारा स्रावित टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) और एण्ड्रोस्टेरॉन (Androsterone) लिंग हार्मोन्स से यौवनारम्भ प्रेरित होता है, जिसके फलस्वरूप बालकों में निम्नलिखित लक्षण विकसित होने लगते हैं। यह शारीरिक बदलाव उनके वयस्क होने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं।
1. पुरुष की आवाज भारी होने लगती है और शरीर की लम्बाई में वृद्धि होती है।
2. अस्थियाँ और मांसपेशियाँ अधिक सुदृढ़ हो जाती हैं, कन्धे भी चौड़े हो जाते हैं।
3. दाढ़ी, मूँछ निकल आती हैं।
4. मैथुन अंग शिश्न और वृषण कोष सुविकसित हो जाते हैं।
5. शुक्रजनन नलिकाओं में शुक्राणुओं का निर्माण आरम्भ हो जाता है।
स्त्री में यौवनारम्भ का प्रारम्भ:
बालिकाओं में, यौवनारम्भ लड़कों की अपेक्षा जल्दी प्रारम्भ हो जाता है। इनमें 12-13 वर्ष की आयु में आर्तव चक्र प्रारम्भ हो जाता है। एस्ट्रोजन (Oestrogen) और FSH हार्मोन्स यौवनावस्था को प्रेरित करते हैं, जिसके फलस्वरूप बालिकाओं में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं।
1. बाह्य जननांगों और स्तनों का विकास होने लगता है।
In simple words: Puberty is the stage when a child's body develops into an adult body capable of reproduction. In boys, it starts around 13-16 years with changes like voice deepening and beard growth, while in girls, it starts around 12-13 years with the beginning of the menstrual cycle and development of reproductive organs.
🎯 Exam Tip: यौवनारम्भ के उत्तर में लड़कों और लड़कियों में होने वाले हार्मोनल बदलावों (जैसे टेस्टोस्टेरॉन और एस्ट्रोजन) का नाम लिखना न भूलें, इससे पूरे अंक मिलते हैं।
Question 10. हॉर्मोन्स का क्या महत्त्व है? अथवा हॉर्मोन्स क्या है? शरीर में इसका क्या महत्त्व है? अथवा मानव शरीर में हॉर्मोन्स के विभिन्न कार्यों को लिखिए।
Answer: अन्त:स्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित रासायनिक यौगिकों को हॉर्मोन्स कहते हैं। ये ग्रन्थियों द्वारा सीधे रुधिर में मुक्त होकर शरीर के अन्य अंगों तक पहुँचते हैं। हॉर्मोन्स सक्रिय उत्प्रेरक के रूप में विभिन्न शारीरिक क्रियाओं का नियन्त्रण एवं समन्वय करते हैं। इनकी सूक्ष्म मात्रा ही विशेष अंगों की कायिकी को वातावरणीय दशाओं की आवश्यकतानुसार अनुकूलित करती है। ये रासायनिक संदेशवाहक हमारे शरीर के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ, तन्त्रिका तन्त्र के नियन्त्रण में कार्य करती हैं, किन्तु इनका स्वयं तन्त्रिका तन्त्र पर भी नियन्त्रण होता है। इस प्रकार शरीर में विभिन्न तन्त्रों की क्रियाओं का परस्पर समन्वय सुनिश्चित होता हैं।
हॉर्मोन्स का महत्त्व अथवा कार्य:
1. हॉर्मोन्स शरीर की कोशिकाओं के उपापचय का नियन्त्रण करके शरीर की कार्यात्मक क्षमता को बनाए रखते हैं। ये शरीर की समुचित वृद्धि एवं विकास को सुनिश्चित करते हैं। कुछ हॉर्मोन्स, रक्त में ग्लूकोज, लवण, आयरन आदि की मात्रा को नियन्त्रित करते हैं एवं शरीर के अन्त: वातावरण के सन्तुलन की अवस्था को बनाए रखते हैं।
2. कुछ हॉर्मोन्स हृदय स्पन्दन दर, श्वास दर आदि को नियमित रखते हैं।
3. लिंग हॉर्मोन्स द्वारा प्रजनन से सम्बन्धित अंगों का विकास तथा उनको सम्पूर्ण क्रियाविधि पर नियन्त्रण का कार्य किया जाता है।
4. आहारनाल के विभिन्न भागों की श्लेष्मिका से स्रावित हॉर्मोन पाचक रसों के स्रावण को प्रेरित करते हैं।
5. कुछ हॉर्मोन्स; जैसे-एड्रीनेलिन, शरीर को संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। इस प्रकार हॉर्मोन्स की हमारे शरीर में विशेष भूमिका होती है। यदि इनका स्रावण समुचित रूप से न हो, तो शरीर कई कार्यात्मक रोगों (Functional diseases) से ग्रस्त हो जाता है।
In simple words: Hormones are chemical messengers in our body that control growth, metabolism, and heart rate. They help our body adapt to different situations and keep all our internal systems working together smoothly.
🎯 Exam Tip: Clearly define hormones first, and then list at least 4-5 key functions with examples like adrenaline to score full marks.
Question 11. पीयूष ग्रन्थि पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: पीयूष ग्रन्थि (Pituitary gland) एक नलिकाविहीन (अन्तःस्रावी) ग्रन्थि है। यह अग्र मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस की दीवार के पास, स्फेनॉइड हड्डी के गर्त में पाई जाती है। यह अन्य अन्त:स्रावी ग्रन्थियों के स्रावण को नियन्त्रित करती है। अतः इसे मास्टर ग्रन्थि भी कहा जाता है। यह ग्रन्थि आकार में बहुत छोटी, मटर के दाने के समान होती है। ग्रन्थि के दो मुख्य भाग होते हैं- अग्र पिण्ड तथा पश्च पिण्ड। दोनों के मध्य एक संकरा मध्य पिण्ड होता हैं।
पीयूष ग्रन्थि की संरचना के मुख्य भाग (Diagram Labels):
- तन्त्रिका स्रावी कोशिकाएँ
- हेरिंगकाय
- रक्त कोशिकाएँ
- पश्च पिण्ड
- पिट्यूसाइट्स
- मध्य पिण्ड
- शिरा
- अग्र पिण्ड
- धमनी
In simple words: The pituitary gland is called the 'master gland' because it controls other hormone-producing glands in the body. It is located near the brain and is divided into anterior, intermediate, and posterior parts.
🎯 Exam Tip: Remember to mention why the pituitary gland is called the 'Master Gland' and list its main parts (anterior and posterior lobes) in your description.
पीयूष ग्रन्थि के विभिन्न भागों से स्रावित हॉर्मोन्स के कार्य
ग्रन्थि के विभिन्न भागों से स्रावित हॉर्मोन्स के कार्य इस प्रकार हैं:
1. वृद्धि हॉर्मोन्स, शरीर की उचित वृद्धि के लिए आवश्यक है। बाल्यकाल में इसके अल्पस्रावण से बौनेपन (Dwarfism) एवं अतिस्रावण से भीमकायता (Giantism) की समस्या उत्पन्न होती है। वृद्धिकाल के बाद अतिस्रावण से शरीर बेडौल, भीमकाय एवं कुरूप हो जाता है। इस अवस्था को एक्रोमीगेली कहते हैं। थायराइड प्रेरक हॉर्मोन्स, थायराइड ग्रन्थि की क्रियाशीलता को बनाए रखता है।
2. ACTH (एड्रीनल कॉर्टेक्स ट्रॉपिक हॉर्मोन) हॉर्मोन्स, एड्रीनल ग्रन्थि के कॉर्टेक्स भाग को क्रियाशील बनाता है।
3. इस ग्रन्थि से स्रावित हॉर्मोन्स पुरुषों में शुक्राणुजनन एवं स्त्रियों में अण्डजनन को प्रेरित करता है। ल्यूटिन प्रेरक हॉर्मोन्स, स्त्री एवं पुरुष में लैंगिक हॉर्मोन्स के स्रावण को प्रेरित करता है।
4. प्रोलैक्टिन या मैमोट्रॉपिक हॉर्मोन, गर्भकाल में स्तनों की वृद्धि तथा दुग्ध स्रावण को प्रेरित करता है।
वैसोप्रेसिन, वृक्क की वाहिनियों एवं कोशिकाओं में जल के अवशोषण को नियन्त्रित करता है एवं मूत्र की मात्रा को कम करता है, इसी कारण इसे मूत्ररोधी कहते हैं। ऑक्सीटोसिन, प्रसव के समय गर्भाशय को फैलने तथा प्रसव के पश्चात् गर्भाशय के सिकुड़ने को प्रेरित करता है। यह दुग्ध स्रावण को प्रेरित करता है।
विस्तृत उत्तर प्रश्न (5 अंक 100 शब्द)
Question 1. नर जनन तन्त्र या पुरुष के जनन अंगों का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: नर जनन अंगों को निम्नलिखित तीन भागों में बाँट सकते हैं:
1. मुख्य जनन अंग: इन अंगों में युग्मकों का निर्माण होता है।
(i) वृषण (Testis): वृषण एक जोड़ी होते हैं। ये उदर गुहा से बाहर वृषण कोष (Scrotal sac) में स्थित होते हैं। वृषण लगभग 4-5 सेमी लम्बा, 2.5 सेमी चौड़ा व 3 सेमी मोटा होता है। वृषण अनेक कुण्डलित नलिकाओं के बने होते हैं, जो शुक्रजनन नलिकाएँ कहलाती हैं। शुक्रजनन नलिकाओं में शुक्राणुओं का निर्माण होता है।
मानव नर जनन तन्त्र के चित्र में दर्शाए गए मुख्य भाग:
• शुक्राशय (Seminal vesicle)
• मूत्राशय (Urinary bladder)
• शुक्रवाहिनी (Vas deferens)
• प्रोस्टेट (Prostate)
• शिश्न (Penis)
• मूत्रमार्ग (Urethra)
• वृषण (Testis)
• वृषण कोष (Scrotal sac)
• प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate gland)
• एम्पुला (Ampulla)
• मलाशय (Rectum)
2. सहायक जनन अंग: ये अंग जनन की प्रक्रिया में सहायक अंग होते हैं। इनका वर्णन निम्नलिखित है:
(i) अधिवृषण (Epididymis): ये लगभग 6 मीटर लम्बी, पतली तथा अत्यधिक कुण्डलित नलिका होती है, जो वृषण के अग्र, पश्च तथा भीतरी भाग को ढकने में सहायक है। यह अति कुण्डलित होकर लगभग 4 सेमी लम्बी, चपटी, कोमा के आकार की संरचना बनाती है। एपीडिडाइमिस में शुक्राणु का संग्रहण व परिपक्वन होता है। एपीडिडाइमिस के तीन भाग होते हैं - शीर्ष एपीडिडाइमिस (Caput epididymis), मध्य भाग या एपौडिडाइमिस काय (Corpus epididymis) तथा पुच्छ एपीडिडाइमिस। यह नर जनन तंत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है जो शुक्राणुओं को परिपक्वता प्रदान करता है।
In simple words: The male reproductive system consists of primary organs like testes that produce sperm, and accessory organs like the epididymis that store and help sperm mature. These parts work together to enable reproduction.
🎯 Exam Tip: परीक्षा में नर जनन तंत्र का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाने से पूरे अंक मिलते हैं। मुख्य अंगों जैसे वृषण और अधिवृषण के कार्यों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 1. (Continued)
Answer:
(ii) शुक्रवाहिनी (Vas deferens): एपोडिडाइमिस से एक शुक्रवाहिनी निकलकर वृषण नाल से होती हुई उदरगुहा में प्रवेश करते हुए मूत्रमार्ग के अधर भाग में खुलती है।
(iii) शुक्राशय (Seminal vesicle): यह एक द्विपालित थैलीनुमा ग्रन्थिल संरचना होती है। इससे चिपचिपा द्रव स्रावित होता है, जो वीर्य का मुख्य भाग बनाता है तथा शुक्राणुओं का पोषण करता हैं।
(iv) शिश्न (Penis): यह मैथुन अंग है। यह वृषण कोषों के मध्य स्थित होता है। शिश्न के मध्य मूत्रमार्ग (Urethra) गुजरता है, जो शिश्न के अग्र छोर पर खुलता है। मूत्रमार्ग द्वारा ही वीर्य के साथ शुक्राणु बाहर निकलते हैं।
3. सहायक जनन ग्रन्थियाँ: इन ग्रन्थियों का स्रावण जनन प्रक्रिया में सहायक है। वर्णन निम्नलिखित हैं:
(i) प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate gland): यह ग्रन्थि मूत्रमार्ग के अधर तल पर स्थित होती है। यह अनेक पिण्डों (Lobules) की बनी होती है। इस ग्रन्थि से हल्का क्षारीय तरल स्रावित होता है। यह मूत्रमार्ग की अम्लीयता को नष्ट करता है, जिससे शुक्राणु सक्रिय बने रहते हैं।
(ii) काउपर्स ग्रन्थियाँ (Cowper's glands): ये एक जोड़ी ग्रन्थियाँ होती हैं तथा मूत्रमार्ग के दाएँ व बाएँ ओर स्थित होती हैं। काउपर्स ग्रन्थियाँ मैथुन से पहले एक क्षारीय एवं चिकने द्रव का स्रावण करती हैं। यह मूत्रमार्ग की अम्लता को समाप्त करता है तथा योनि मार्ग को चिकना बनाकर मैथुन में सहायक है।
(iii) पेरीनियल ग्रन्थियाँ (Perineal glands): एक जोड़ी ग्रन्थियाँ मलाशय के पास स्थित होती हैं। इनसे स्रावित रसायन विशेष गन्ध प्रदान करता है।
In simple words: These are the different parts and supporting glands of the male reproductive system that help in the production, nourishment, and safe transport of sperm.
🎯 Exam Tip: Remember the specific functions of each gland, especially how Prostate and Cowper's glands neutralize acidity to protect sperm.
Question 2. अण्डाणुजनन क्या है? अण्डाणुजनन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। अण्डाणुजनन तथा शुक्राणुजनन में समानताएँ एवं असमानताएँ बताइए।
अथवा
युग्मकजनन किसे कहते हैं? शुक्रजनन एवं अण्डजनन का तुलनात्मक विवरण दीजिए। युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या के आधार पर युग्मकजनन के महत्व की विवेचना कीजिए।
अथवा
अण्डाणुजनन तथा शुक्राणुजनन में अन्तर लिखिए।
अथवा
युग्मकजनन की परिभाषा लिखिए। अण्डाणुजनन की क्रिया समझाइए। अण्डाणुजनन तथा शुक्राणुजनन में अन्तर बताइए।
Answer:
युग्मकजनन (Gametogenesis): युग्मकजनन एक जटिल प्रक्रम है, इसमें अर्द्धसूत्री और समसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित (Haploid) युग्मकों (शुक्राणु/अण्डाणु) का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया जीवों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणसूत्रों की संख्या को निश्चित बनाए रखने में मदद करती है।
अण्डाणुजनन (Oogenesis): अण्डाशय की ग्राफियन पुटिका (Graafian follicles) के निर्माण की प्रक्रिया, अण्डाणुजनन कहलाती है।
अण्डाणुजनन प्रक्रिया: अण्डजनन की प्रक्रिया को तीन भागों में बाँटा गया है:
1. गुणन प्रावस्था (Multiplication Phase): अण्डाशय के निर्माण के समय ही प्राथमिक जनन कोशिकाएँ अण्डाशयी पुटिकाओं (Ovarian follicles) के रूप में एकत्रित हो जाती हैं, जिसमें से एक कोशिका अण्डाणु मातृ कोशिका (Egg mother cell) के रूप में विभेदित होती है।
In simple words: Gametogenesis is the process of making reproductive cells (sperm and egg), while Oogenesis is the specific process of forming female egg cells in the ovaries through three main stages starting with the multiplication phase.
🎯 Exam Tip: Clearly define Gametogenesis and Oogenesis first before describing the phases, and use flowcharts if possible to represent the multiplication, growth, and maturation phases.
2. वृद्धि प्रावस्था (Growth Phase)
यह प्रावस्था बहुत लम्बी होती है। अण्डाणु मातृ कोशिका, अण्डाणु जनन कोशिका या ऊगोनियम (Oogonium) में विभेदित होकर वृद्धि प्रावस्था में प्रवेश करती हैं। यह अधिक मात्रा में पोषक पदार्थों को संचित करके आकार में वृद्धि कर लेती है। इसे पूर्व अण्डाणु कोशिका या प्राथमिक ऊसाइट (Primary Oocyte) कहते हैं।
अण्डजनन की प्रक्रिया (Process of Oogenesis) - रेखाचित्र के मुख्य बिंदु:
- चरण व प्रक्रियाएँ: गुणन (समसूत्री) विभाजन, वृद्धि, परिपक्वता, द्वितीय अर्द्धसूत्री विभाजन, निषेचन
- प्रावस्थाएँ: प्रारम्भिक जननिक कोशिकाएँ (2x) → अण्डजनन → प्राथमिक अण्ड कोशिकाएँ (2x) → प्रथम लोपिका काय (x) और द्वितीयक अण्ड कोशिकाएँ (x) → अण्डाणु (x)
3. परिपक्वन अवस्था (Maturation Phase)
ग्राफियन पुटिका के परिपक्व होने के बाद इसमें उपस्थित प्राथमिक ऊसाइट (Primary Oocyte) में प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन होता है, जो असमान होता है, जिसके फलस्वरूप एक अगुणित द्वितीयक ऊसाइट (Haploid Secondary Oocyte) और एक छोटी लोपिका (Polar body) का निर्माण होता है। ग्राफियन पुटिका के फटने से यह द्वितीयक अण्डाणु कोशिका मुक्त होकर फैलोपियन नलिका में प्रवेश कर जाती है। इसमें द्वितीय अर्धसूत्री विभाजन शुक्राणु के अण्डाणु में प्रवेश के पश्चात् होता है।
शुक्राणुजनन और अण्डाणुजनन में अन्तर निम्नलिखित हैं:
| शुक्राणुजनन | अण्डाणुजनन |
|---|---|
| यह प्रक्रिया वृषणों में होती है। | यह प्रक्रिया अण्डाशयों में होती है। |
| इसमें वृद्धि प्रावस्था छोटी होती है। | वृद्धि प्रावस्था बहुत लम्बी होती है। |
| एक प्राथमिक शुक्राणु कोशिका से चार अगुणित शुक्राणुओं का निर्माण होता है। | प्राथमिक अण्डाणु कोशिका से केवल एक अगुणित अण्डाणु का निर्माण होता है। |
| स्पर्मेटिड्स से रूपान्तरण द्वारा गतिशील शुक्राणुओं का निर्माण होता है। | अचल अण्डाणु में कायान्तरण नहीं होता है। |
| दोनों अर्द्धसूत्री विभाजन शुक्राणु निर्माण से पूर्व हो जाते हैं। | दूसरा अर्द्धसूत्री विभाजन अण्डाणु में शुक्राणु के प्रवेश के बाद पूर्ण होता है। |
शुक्राणुजनन और अण्डाणुजनन में समानताएँ
1. दोनों क्रियाएँ तीन प्रावस्था में पूर्ण होती हैं- गुणन प्रावस्था, वृद्धि प्रावस्था और परिपक्वन प्रावस्था।
2. दोनों क्रियाएँ जनदों की जनन उपकला कोशिकाओं में होती हैं।
युग्मकजनन का महत्त्व (Importance of Gametogenesis)
युग्मकजनन एक जटिल प्रक्रम है। इसमें अर्द्धसूत्री और समसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित युग्मकों का निर्माण होता है। नर और मादा युग्मकों के निषेचन के समय समेकन (Fusion) से द्विगुणित युग्मनज का निर्माण होता है। युग्मकजनन और निषेचन के फलस्वरूप जीवधारी का गुणसूत्र प्रारूप निश्चित बना रहता है।
Question 3. मादा जनन तन्त्र का वर्णन करते हुए मासिक चक्र की विभिन्न प्रावस्थाओं के सन्दर्भ में संक्षेप में लिखिए।
Answer: मादा जनन तन्त्र इसके अन्तर्गत निम्नलिखित जनन अंग आते हैं:
1. अण्डाशय: एक जोड़ी अण्डाशय उदरगुहा में स्थित होते हैं। अण्डाशय संयोजी ऊतक से बनी ठोस अण्डाकार संरचना (लगभग 3 सेमी लम्बा, 2 सेमी चौड़ा तथा 1 सेमी मोटा) होती है। अण्डाशय में ग्राफियन पुटिकाएँ छोटे-छोटे दानों-जैसी रचनाओं के रूप में उभरी होती हैं। यहीं अण्डाणु का निर्माण होता है।
2. अण्डवाहिनी: इसका प्रारम्भिक भाग अण्डाशय से सटी हुई झालरदार कीपनुमा संरचना अण्डवाहिनी मुखिका (Oviducal funnel) बनाता है, जो फैलोपियन नलिका में खुलती हैं। अण्डवाहिनी का प्रारम्भिक संकरा भाग फैलोपियन नलिका तथा पश्च भाग गर्भाशय कहलाता है। अण्डे का निषेचन फैलोपियन नलिका में होता है।
3. गर्भाशय: दोनों अण्डवाहिनी मिलकर पेशीय थैलीनुमा एवं उल्टे नाशपाती के आकार की संरचना गर्भाशय में खुलती हैं। इसका सामान्य आकार 8 सेमी लम्बा, 5 सेमी चौड़ा तथा 2 सेमी मोटा होता है। गर्भाशय अत्यधिक फैल सकता है। गर्भावस्था में भ्रूण का रोपण गर्भाशय में होता हैं। यह प्रक्रिया शिशु के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
4. योनि: यह लगभग 8 सेमी लम्बी नलिका रूपी संरचना होती है। मूत्राशय तथा योनि मादा जनन छिद्र द्वारा शरीर से बाहर खुलती है। मादा जनन छिद्र भाग की बाह्य सतह पर एक पेशीय संरचना क्लाइटोरिस होती हैं।
5. बार्थोलिन ग्रन्थियाँ: ये योनि के पार्श्व में स्थित होती हैं। इनसे स्रावित तरल योनि को क्षारीय तथा चिकना बनाता है।
6. पेरीनियल ग्रन्थियाँ: इनसे विशिष्ट गन्धवत् तरल स्रावित होता है, जो लैंगिक आकर्षण पैदा करता है।
मादा की उदर गुहा में स्थित जनन अंग (चित्र के मुख्य भाग):
• वृक्क
• मूत्रवाहिनी
• अण्डवाहिनी
• झालरदार कीप
• अण्डाशय
• गर्भाशय
• गर्भाशय ग्रीवा
• योनि
• मूत्राशय
मासिक चक्र (Menstrual Cycle):
व्यस्क स्त्रियों में एक माह की अवधि के दौरान गर्भाशय में चक्रीय परिवर्तन होते हैं, जिसे मासिक चक्र या आर्तव चक्र कहते हैं। मासिक चक्र की तीन अवस्थाएँ होती हैं।
1. क्रम प्रसारी अवस्था (Proliferative Phase): FSH, पुटिकाओं को एस्ट्रोजन के स्रावण के लिए प्रेरित करता है। इस अवस्था का अन्तराल 10-12 दिनों का होता हैं। यह पुटिकीय अवस्था (Follicular phase) भी कहलाती हैं।
In simple words: The female reproductive system consists of organs like ovaries, fallopian tubes, and uterus that help in reproduction. The menstrual cycle is a monthly series of changes in a woman's body, starting with the proliferative phase where hormones prepare the body.
🎯 Exam Tip: Draw a neat labeled diagram of the female reproductive system and list all major organs with their functions to score full marks.
2. स्रावित अवस्था (Secretory Phase)
कॉर्पस ल्यूटियम, प्रोजेस्टेरॉन का स्रावण करती हैं। इस अवस्था का अन्तराल 12-14 दिन का होता है।
3. मासिक अवस्था (Menstrual Phase)
यह पुराने मासिक चक्र की अन्तिम तथा नए मासिक चक्र की प्रारम्भिक अवस्था होती है। यदि अण्डाणु निषेचित नहीं होता है, तो कॉर्पस ल्यूटियम, प्रोजेस्टेरॉन स्तर में कमी के कारण नष्ट हो जाता है। एण्डोमीट्रियम के टूटने से रुधिर का स्राव होता है। यह स्राव लगभग पाँच दिन चलता है। यह FSH, LH, एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरॉन के द्वारा नियन्त्रित होता है। मासिक चक्र गर्भावस्था तथा दुग्ध स्रावण (Lactation) के दौरान नहीं होता है।
रजोनिवृत्ति (Menopause)
इसमें अण्डोत्सर्ग तथा मासिक चक्र स्थायी रूप से रुक जाता है। यह 45 या 50 साल की आयु में होता हैं। इस अवस्था में स्त्री में जनन की क्षमता नहीं होती है।
Question 4. नलिकाविहीन ग्रन्थियों पर टिप्पणी लिखिए। (2004) अथवा अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ क्या हैं? मानव शरीर में पाई जाने वाली अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के काव्यों का वर्णन कीजिए। (2016) अथवा मानव शरीर के विभिन्न अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के नाम लिखिए। (2018)
Answer: मानव शरीर में पाई जाने वाली ऐसी विशिष्ट ग्रन्थियाँ, जिनमें स्रावित पदार्थ को लक्ष्य स्थान तक ले जाने के लिए नलिकाएँ नहीं होतीं, नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ कहलाती हैं। इन ग्रन्थियों को अन्त:स्रावी ग्रन्थि भी कहते हैं। इनसे स्रावित पदार्थ, सीधे रक्त में मुक्त होकर शरीर के अन्य अंगों तक पहुँचता है। इन स्रावित पदार्थों को हार्मोन्स कहते हैं। हार्मोन्स रासायनिक यौगिक हैं, जो प्राणियों में विभिन्न शारीरिक क्रियाओं का नियन्त्रण एवं समन्वय करते हैं। ये उपापचय क्रियाओं, शारीरिक वृद्धि एवं विकास, लैंगिक लक्षणों एवं जनन आदि के नियन्त्रण में भाग लेते हैं। ये ग्रन्थियाँ हमारे शरीर के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: Endocrine glands are special glands in our body that do not have tubes (ducts). They release chemical messengers called hormones directly into the blood to control various body functions like growth, metabolism, and reproduction.
🎯 Exam Tip: Clearly define 'ductless glands' and mention that their secretions (hormones) travel directly through the bloodstream to target organs to secure maximum marks.
शरीर में अन्तःस्रावी ग्रन्थियों की स्थिति (Position of Endocrine Glands in the Body):
- हाइपोथैलेमस (Hypothalamus)
- पीयूष ग्रन्थि (Pituitary Gland)
- पीनियल (Pineal)
- थायरॉइड एवं पैराथायरॉइड (Thyroid and Parathyroid)
- थायमस ग्रन्थि (Thymus Gland)
- अग्न्याशय (Pancreas)
- अधिवृक्क ग्रन्थि (Adrenal Gland)
- अण्डाशय (मादा में) (Ovary - in female)
- वृषण (नर में) (Testis - in male)
मानव शरीर में नलिकाविहीन/अन्त: स्रावी ग्रन्थियाँ
मानव शरीर में निम्नलिखित नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं:
1. पीयूष ग्रन्थि (Pituitary Gland)
यह अग्र मस्तिष्क के ‘हाइपोथैलेमस’ की दीवार के पास, स्फेनॉइड हड्डी के गर्त में पाई जाती है।
...जाती है। इसे मास्टर ग्रन्थि भी कहा जाता है, क्योंकि यह अन्य अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के स्रावण को नियन्त्रित करती है। इसके साथ यह व्यक्ति के स्वभाव, स्वास्थ्य वृद्धि एवं लैंगिक विकास को भी प्रेरित करती है।
2. थायराइड ग्रन्थि (Thyroid Gland)
यह दो पिण्डों की रचना है एवं श्वासनली के दोनों ओर लैरिक्स (Larynx) के नीचे स्थित रहती है। इससे स्रावित थायरोक्सिन हॉर्मोन शरीर की उपापचयी क्रियाओं का नियमन तथा नियन्त्रण करता है।
3. पैराथायराइड ग्रन्थि (Parathyroid Gland)
यह थायराइड ग्रन्थि के पीछे स्थित रहती है। इसके द्वारा स्रावित पैराथॉर्मोन नामक हॉर्मोन रक्त में कैल्शियम तथा फॉस्फोरस की मात्रा का नियन्त्रण करता है। यह अस्थि एवं दाँतों के निर्माण में सहायक होता है।
4. थाइमस ग्रन्थि (Thymus Gland)
यह ग्रन्थि वक्ष में हृदय के सामने स्थित होती है। युवावस्था तक यह लुप्त हो जाती है। इस ग्रन्थि से स्रावित थायमोसिन हॉर्मोन, लिम्फोसाइट्स को भिन्न-भिन्न प्रकार के जीवाणुओं और एण्टीजन को नष्ट करने हेतु प्रेरित करता है।
5. अधिवृक्क ग्रन्थि (Adrenal Gland)
यह ग्रन्थि प्रत्येक वृक्क (Kidney) के ऊपरी भाग पर स्थित होती है, इसका बाहरी भाग कॉर्टेक्स व आन्तरिक भाग मेड्यूला कहलाता है। कॉर्टेक्स से स्रावित हॉर्मोन उपापचयी नियन्त्रण, रक्त में लवण की मात्रा का नियन्त्रण एवं लैंगिक परिपक्वता आदि को नियन्त्रित करते हैं। मेड्यूला से स्रावित, एड्रीनलीन तथा नॉर एड्रीनेलीन हॉर्मोन्स शरीर को संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।
6. अग्न्याशय (Pancreas)
यह एक मिश्रित ग्रन्थि है, इसका बाहरी स्रावी भाग, अग्न्याशय रस स्रावित करता है। अग्न्याशय में विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं के समूह पाए जाते हैं, जिन्हें लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ (Islets of Langerhans) कहते हैं। ये अन्तःस्रावी ग्रन्थि का काम करती हैं। इनसे स्रावित हॉर्मोन्स निम्नलिखित हैं:
- इन्सुलिन: यह आवश्यकता से अधिक ग्लूकोज का ग्लाइकोजन में परिवर्तन करता है। इसकी कमी से शरीर से शर्करा की मात्रा मूत्र में आने लगती है, जिसे मधुमेह (Diabetes) रोग कहते हैं।
- ग्लूकैगॉन: यह ग्लाइकोजन से ग्लूकोज का संश्लेषण करता है।
7. जनन ग्रन्थियाँ (Gonads)
स्त्री में अण्डाशय (Ovary) तथा पुरुष में वृषण (Testes) विशेष हॉर्मोन्स स्रावित करते हैं, जिनसे लैंगिक लक्षणों का विकास होता है। स्त्रियों में एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरॉन का स्रावण होता है, जबकि पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन स्रावित होता है।
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