UP Board Solutions Class 12 Home Science Chapter 3 श्वासोच्छ्वास

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Detailed Chapter 3 श्वासोच्छवास UP Board Solutions for Class 12 Home Science

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Class 12 Home Science Chapter 3 श्वासोच्छवास UP Board Solutions PDF

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

 

प्रश्न 1. श्वसन क्रिया पूर्ण होती है।
(a) एक चरण में
(b) दो चरण में
(c) चार चरण में
(d) ये सभी
Answer: (b) दो चरण में
In simple words: The process of breathing is completed in two main steps: breathing in (inspiration) and breathing out (expiration).

🎯 Exam Tip: Remember that respiration involves both taking in oxygen and releasing carbon dioxide, which makes it a two-step process.

 

प्रश्न 2. मानव शरीर में श्वसन का अंग नहीं है
(a) नासिका
(b) कण्ठ
(c) श्वासनली
(d) पटेला
Answer: (d) पटेला
In simple words: Patella is actually the kneecap in our leg, so it has nothing to do with our breathing system.

🎯 Exam Tip: Carefully read the options to identify bones or other body parts that do not belong to the respiratory system.

 

प्रश्न 3. नाक के छिद्र को कहा जाता है
(a) नथुने
(b) कुपिकाएँ
(c) कण्ठद्वार
(d) श्वसनी
Answer: (a) नथुने
In simple words: The two openings of our nose through which we breathe air in and out are called nostrils (nathune).

🎯 Exam Tip: Use common terms like nostrils to easily identify the external openings of the nasal cavity.

 

प्रश्न 4. ग्रसनी में भोजन निगलने वाला द्वार कहलाता है
(a) नासाद्वार
(b) अवटु
(c) कण्ठद्वार
(d) ये सभी
Answer: (c) कण्ठद्वार
In simple words: The opening in our throat that helps guide food down into the food pipe is called the gullet or glottis (kanthdwar).

🎯 Exam Tip: Do not confuse the windpipe opening with the food passage; the throat has specific structures to keep food out of the lungs.

 

प्रश्न 5. श्वसन तन्त्र का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है
(a) वायु
(b) प्रश्वसन
(c) स्नायुतन्त्र
(d) फेफड़े
Answer: (d) फेफड़े
In simple words: Lungs are the main organs of our breathing system where the actual exchange of gases takes place.

🎯 Exam Tip: Always highlight the lungs as the primary site of respiration when asked about the most important respiratory organ.

 

प्रश्न 6. व्यायाम से श्वसन क्रिया होती है
(a) गहरी
(b) उथली
(c) तीव्र
(d) स्फूर्ति
Answer: (a) गहरी
In simple words: When we exercise, our body needs more oxygen, so we start taking deeper breaths to fill our lungs completely.

🎯 Exam Tip: Exercise increases the demand for oxygen, which naturally makes our breathing deeper and more efficient.

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)

 

प्रश्न 1. श्वासोच्छ्वास किसे कहते हैं?
Answer: वायुमण्डल से ऑक्सीजन ग्रहण करना और शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने की क्रिया को श्वासोच्छ्वास कहते हैं। यह एक भौतिक प्रक्रिया है जो हमारे जीवित रहने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: Breathing is the physical act of taking in fresh oxygen from the air and throwing out harmful carbon dioxide from our body.

🎯 Exam Tip: Clearly define both inhalation of oxygen and exhalation of carbon dioxide to get full marks for this definition.

Question 2. मानव के श्वसन तन्त्र में सहायक अंगों के नाम लिखिए।
Answer: मानव श्वसन तन्त्र के निम्नलिखित सहायक अंग हैं - नासिका, कण्ठ, श्वासनली, श्वसनी तथा फेफड़े। ये सभी अंग मिलकर शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
In simple words: Our breathing system has different parts like the nose, windpipe, and lungs. They all work together to help us breathe in fresh air and stay healthy.

🎯 Exam Tip: List all the organs in a proper sequence from nose to lungs to show a clear understanding of the respiratory pathway.

 

Question 3. नासाद्वार किसे कहते हैं?
Answer: वायु के आवागमन के लिए नाक में जो छिद्र होता है, उसे नासाद्वार कहते हैं। यह श्वसन मार्ग का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार होता है।
In simple words: Nasadwar refers to the nostrils, which are the two openings in our nose. They let the air enter and leave our body when we breathe.

🎯 Exam Tip: Define the term clearly and mention its primary function of facilitating air passage to score full marks.

 

Question 4. स्वर यन्त्र से आप क्या समझते हैं?
Answer: कण्ठ को ही स्वर यन्त्र कहते हैं। कण्ठ उपास्थि का बना हुआ एक ढक्कन होता है, जो कण्ठद्वार पर स्थित होता है। यह बोलते समय ध्वनि उत्पन्न करने में मुख्य भूमिका निभाता है।
In simple words: The larynx or voice box is located in our throat. It contains vocal cords that vibrate to produce sound when we speak.

🎯 Exam Tip: Remember to mention that the larynx (स्वर यन्त्र) is made of cartilage (उपास्थि) and acts as a lid over the windpipe.

 

Question 5. श्वासनली कितने भागों में विभाजित होती है?
Answer: श्वासनली वक्ष में जाकर दो भागों में विभाजित होती है – श्वसनी तथा ब्रॉन्कस। ये दोनों शाखाएं हवा को सीधे दोनों फेफड़ों तक पहुंचाने का कार्य करती हैं।
In simple words: The windpipe divides into two smaller tubes in our chest. Each tube goes into one of our lungs to carry air.

🎯 Exam Tip: Clearly state the division of the trachea into two bronchi and specify that they lead to the left and right lungs.

 

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50 शब्द)

 

Question 1. श्वसन क्रिया की उपक्रियाएँ या चरण की प्रक्रिया समझाइए।
Answer: श्वसन क्रिया की दो उपक्रियाएँ निम्न प्रकार हैं:
1. अन्त:श्वास (Inspiration): इस प्रक्रिया में वायु अन्दर ली जाती है, जिससे डायाफ्राम की पेशियाँ संकुचित होती हैं एवं डायाफ्राम समतल (Flattened) हो जाता हैं। निचली पसलियाँ बाहर एवं ऊपर की ओर फैलती हैं तथा छाती फूल जाती है। फेफड़ों में वायु का दाब कम हो जाता है और वायु फेफड़ों में प्रवेश कर जाती है।
2. नि:श्वसन/उच्छ्वास (Expiration): नि:श्वसन की क्रिया में वायु फेफड़ों से बाहर निकाली जाती है। इसमें डायाफ्राम एवं पसलियों की पेशियाँ शिथिल हो जाती हैं तथा डायाफ्राम फिर से गुम्बद आकार (Dome-Shaped) का हो जाता है। छाती संकुचित होती है तथा वायु बाहर की ओर नाक एवं वायुनाल द्वारा निकलती है। मनुष्य एक मिनट में 12-15 बार साँस लेता हैं, जबकि नवजात शिशु एक मिनट में लगभग 40 बार साँस लेता है। सोते समय श्वसन की दर सबसे कम होती है। मनुष्य में वायु का मार्ग इस प्रकार होता हैं: नासारन्ध्र → ग्रसनी → कण्ठ → श्वासनाल → श्वसनी कोशिका → रुधिर → वायुकोष्ठक → श्वसनिकाएँ। यह पूरी प्रक्रिया शरीर को निरंतर ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होती है।
In simple words: Breathing has two steps: breathing in (inspiration) where fresh air enters the lungs, and breathing out (expiration) where used air is pushed out. Our chest and diaphragm move up and down to make this happen.

🎯 Exam Tip: Use bullet points or numbered lists to describe both phases clearly, and write the flow of air pathway to secure maximum marks.

 

Question 2. श्वसन तन्त्र में श्वासोच्छ्वास का क्या प्रयोजन है?
Answer: मनुष्य में फुफ्फुसीय वायु आयतन और क्षमता को निम्नलिखित रूपों में समझाया जा सकता है:
1. अवरीय या प्रवाही आयतन (Tidal Volume or TV): सामान्य श्वसन के दौरान एक बार में ली गई या निकाली गई वायु का आयतन प्रवाही आयतन कहलाता है। यह लगभग 500 मिली होता है।
2. उच्छ्वसन आरक्षित आयतन (Expiratory Reserve Volume or ERV): उच्छ्वसन के बाद फेफड़ों में कुछ वायु रह जाती है, उसमें से बलपूर्वक निकाली गई वायु के आयतन को उच्छ्वसन आरक्षित आयतन (ERV) कहते हैं। इसका आयतन लगभग 1000 मिली होता है।
3. नि:श्वसन आरक्षित आयतन (Inspiratory Reserve Volume or IRV): एक सामान्य नि:श्वसन के बाद बलपूर्वक फेफड़ों के द्वारा ली जाने वाली वायु के आयतन को नि:श्वसन आरक्षित आयतन (IRV) कहते हैं। इसका आयतन लगभग 2500-3000 मिली होता है।
4. अवशेषी आयतन (Residual Volume or RV): पूरे प्रयास से फेफड़ों से वायु निकालने के बाद फेफड़ों में शेष बची वायु का आयतन अवशेष आयतन (RV) कहलाता है। यह लगभग 1500 मिली होता है।
5. निःश्वसन क्षमता (Inspiratory Capacity or IC): प्रवाही आयतन के अतिरिक्त अभ्यास द्वारा फेफड़ों में अधिक-से-अधिक ली जा सकने वाली वायु की मात्रा को नि:श्वसन क्षमता कहते हैं। IC = TV + IRV = 500 मिली + 3000 मिली = 3500 मिली। ये विभिन्न आयतन फेफड़ों के स्वस्थ कार्य संचालन को मापने में मदद करते हैं।
In simple words: Our lungs hold different amounts of air depending on how deeply we breathe. These measurements, like normal breathing volume or extra air we can force out, show how strong and healthy our lungs are.

🎯 Exam Tip: Memorize the exact numerical values (like 500 ml, 1000 ml, etc.) for each volume type, as examiners look for these precise figures.

 

Question 3. उचित श्वसन क्रिया के लिए आप किन-किन बातों का ध्यान रखेंगी? (2018)
Answer: श्वसन क्रिया, मानवीय स्वास्थ्य एवं शरीर के लिए लाभकारी होती है, जो मानवीय कार्यक्षमता के साथ-साथ कार्यक्षमता को भी व्यापक रूप से प्रभावित करती है। उचित श्वसन क्रिया के लिए हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
1. हमेशा नाक से ही सांस लेनी चाहिए, मुंह से नहीं, क्योंकि नाक के बाल हवा को छानते हैं।
2. स्वच्छ, खुली और ताजी हवा में नियमित रूप से प्राणायाम या व्यायाम करना चाहिए।
3. बैठते या खड़े होते समय रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना चाहिए ताकि फेफड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त स्थान मिले।
4. गहरी और शांत सांस लेने का अभ्यास करना चाहिए जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके।
In simple words: To breathe properly, we should always breathe through our nose, sit straight, and spend time in fresh air doing deep breathing exercises. This keeps our body energetic and healthy.

🎯 Exam Tip: Write at least 3-4 practical points in a clean bulleted list to easily score full marks in this application-based question.

श्वसन क्रिया के लिए आवश्यक बातें:
1. हमेशा शुद्ध वायु का उपयोग श्वसन क्रिया में हो, इसके लिए शुद्ध वायु में श्वास लेनी चाहिए, जिसमें ऑक्सीजन की मात्रा अधिक तथा कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम होती है। ऐसा वातावरण अधिकांशतः गाँवों, पार्कों एवं उद्यानों में मिलता है।
2. श्वास सदैव गहरी लेनी चाहिए, क्योंकि इससे फेफड़े एवं श्वसन अंगों की क्रियाशीलता बढ़ती है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है, इसलिए दिन में कई बार गहरी श्वास लेनी चाहिए।
3. श्वास सदैव नाक से ही लेनी चाहिए, क्योंकि श्वास लेने की यह एक उचित विधि है। नाक से श्वास लेने पर अशुद्धियाँ नाक के रोएँ एवं नाक की नम झिल्ली में फंसकर रह जाती हैं और शुद्ध वायु आन्तरिक भाग तक पहुँचती है।
4. धूल के कणों आदि में श्वास हल्की लेनी चाहिए, अन्यथा अशुद्ध वायु का प्रवेश अधिक मात्रा में श्वास के द्वारा शरीर में हो जाता है.
5. बैठने एवं चलने के समय शरीर की उचित स्थिति होनी चाहिए, क्योंकि इससे श्वसन क्रिया प्रभावित होती है।

 

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक, 100 शब्द)

 

Question 1. मानव के श्वसन में सहायक अंगों के नाम लिखते हुए उनके कार्यों का उल्लेख कीजिए। अथवा श्वसन तन्त्र के विभिन्न अंगों का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए। (2018)
Answer: श्वसन क्रिया सम्पन्न करने के लिए विभिन्न अंगों का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। मानव के प्रमुख श्वसनांग फेफड़े होते हैं तथा इनके सहायक अंग नासिका, कण्ठ या स्वर यन्त्र, श्वासनली तथा श्वसनी होते हैं। श्वसन तन्त्र के मुख्य अंग निम्नलिखित हैं:

1. नासिका: श्वसन के लिए वायु सर्वप्रथम नासिका (नाक) में प्रवेश करती है। वायु आवागमन के लिए नाक में जो छिद्र होता है, उसे नासाद्वार या नथुने कहा जाता है। इससे अन्दर की ओर दो मार्ग जाते हैं। दोनों मार्गों को एक पर्दे के माध्यम से एक-दूसरे से पृथक किया जाता है। तालु की हड्डी नासिका को मुँह से पृथक करती है, जो नासागुहा के निचले आधार में स्थित होती है। श्लेष्मिक कला द्वारा स्रावित चिपचिपे पदार्थ से नासागुहा का मार्ग चिकना बना रहता है। वायु में उपस्थित धूल के कणों एवं जीवाणुओं को रोकने के लिए नासागुहा की सतह पर छोटे-छोटे रोएँ होते हैं। श्लेष्मिक कला का चिपचिपा पदार्थ भी जीवाणुओं को चिपकाकर अन्दर प्रवेश करने से रोकता है। यह प्रक्रिया हमारे शरीर को बाहरी संक्रमणों से सुरक्षित रखने में मदद करती है। दोनों नासाद्वारों को मिलाकर एक नली बनती है, जो कि ग्रसनी में खुलती है। नाक से श्वास लेने के निम्नलिखित लाभ हैं:
• वायु में उपस्थित धूल के कण एवं अन्य प्रकार की गन्दगी को नाक में स्थित बालों द्वारा रोक लिया जाता है, जिससे फेफड़ों तक स्वच्छ वायु पहुँचती है।
• नाक तथा श्वासनली आदि की रक्त कोशिकाओं द्वारा नाक से प्रवेश करने वाली वायु को गर्म किया जाता है, जिससे कि फेफड़ों को गर्म वायु उपलब्ध होती है। अधिक ठण्डी वायु फेफड़ों के लिए हानिकारक होती है।
• श्लेष्मिक कला से मढ़ी हुई वायु नलिका भित्ति द्वारा वायु में उपस्थित जीवाणुओं एवं धूल के कणों को रोक लिया जाता है। इस कारण फेफड़ों तक पहुँचने वाली वायु जीवाणुओं से मुक्त होती है।

2. कण्ठ या स्वर यन्त्र: ग्रसनी में भोजन निगलने वाले द्वार से पहले एक छिद्र होता है, जो घाँटी या कण्ठद्वार कहलाता है। कण्ठ उपास्थि का बना हुआ एक ढक्कन होता है, जो कण्ठद्वार पर स्थित होता है। कण्ठ भोजन को श्वासनली में जाने से रोकता है। श्वासनली को बनाने वाली उपास्थि के अधूरे छल्लों में से ऊपरी छल्ला अवटु उपास्थि सामने से चौड़ा तथा उभरा हुआ होता है। पुरुषों के कण्ठ में इसे बाहर से स्पर्श कर अनुभव किया जा सकता है अर्थात् यह सामने की ओर उभरा हुआ होता है, जिसे टेंटुआ या आदम एप्पल कहा जाता है। दूसरा छल्ला चारों ओर से पूरा होता है तथा मुद्रिका उपास्थि कहलाता है। दोनों छल्लों के बीच में स्वर-रज्जु स्थित होते हैं जो ध्वनि उत्पन्न करने में सहायक होते हैं।
In simple words: Human respiration involves main organs like lungs and supporting organs like the nose and windpipe. The nose filters, warms, and moistens the air we breathe, while the larynx (voice box) prevents food from entering the windpipe and helps us speak.

🎯 Exam Tip: श्वसन तन्त्र के अंगों का वर्णन करते समय नासिका के लाभ और कण्ठ (स्वर यन्त्र) के कार्य जैसे मुख्य बिन्दुओं को रेखांकित (underline) अवश्य करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

3. श्वासनली या वायुनलिका: कण्ठ से होकर वायु श्वासनली अथवा वायुनलिका में प्रवेश करती है। इसकी गोलाई 2.5 सेमी तथा लम्बाई लगभग 10-12 सेमी होती है, जो कण्ठ से लेकर पूर्ण ग्रीवा (Neck) में विद्यमान होती है। यह नली ‘C’ के आकार के रेशेदार तन्तुओं से निर्मित छल्लों से बनी होती हैं, जो कि पीछे की ओर खुले रहते हैं। इनके ऊपर श्लेष्मिक कला ढकी होती है। नली के ऊपर तथा पिछले भाग में श्लेष्मिक कला ढकी होती है। जब भोजन ग्रासनली से गुजरता है, तो ग्रासनली फूलती है और श्वासनली की पिछली झिल्ली दब जाती है। इस प्रकार ग्रासनली को फूलने का स्थान मिल जाता हैं।

4. वायु प्रणालियाँ या श्वसनी: श्वासनली वक्ष में जाकर दो भागों में विभक्त हो जाती है-श्वसनी तथा ब्रॉन्कस। ये दोनों शाखाएँ ही वायु प्रणालियाँ कहलाती हैं। दोनों वायु प्रणालियाँ दोनों भागों के फेफड़ों में अलग-अलग प्रवेश करके असंख्य उप-शाखाओं में बँट जाती हैं। श्वसनिका के अन्त में छोटे-छोटे थैले लगे रहते हैं, जिनको वायुकोष कहते हैं। वायुकोष लौह तत्त्व के कारण लाल रंग का होता है। इन वायुकोषों में वायु रुकी रहती है, जहाँ पर रक्त का शुद्धीकरण होता है।

5. फेफड़े: ये मानव श्वसन तन्त्र के सबसे महत्त्वपूर्ण अंग हैं। इनकी संख्या दो होती है एवं ये वक्षगुहा में दाईं तथा बाईं ओर स्थित होते हैं। इनका रंग नीलापन लिए भूरा होता है। जन्म से पहले इनका रंग लाल तथा नवजात शिशु के फेफड़ों का रंग गुलाबी होता है।

मानव का श्वसन तंत्र (Human Respiratory System Diagram Labels)

  • नासामार्ग (Nasal passage)
  • ग्रसनी (Pharynx)
  • कण्ठद्वार (Larynx)
  • श्वासनली (Trachea)
  • श्वसनी (Bronchus)
  • फेफड़ा (Lung)
  • हृदय (Heart)
  • तन्तुपट या डायाफ्राम (Diaphragm)

 

Question 2. फेफड़ों का चित्र बनाते हुए इसकी संरचना तथा कार्य लिखिए।
Answer: फेफड़ों की संरचना: दायाँ फेफड़ा बाएँ फेफड़े की अपेक्षा बड़ा होता है। फेफड़े वक्षगुहा के बाएँ एवं दाएँ स्थित होते हैं तथा तन्तुपट (Diaphragm) पर उभरे हिस्से पर चिपके रहते हैं। इनकी संरचना अत्यन्त कोमल, लचीली, स्पंजी तथा गहरे स्लेटी भूरे रंग की होती है। इनके चारों ओर एक पतली झिल्ली का आवरण होता हैं, जिनके भीतर एक लसदार तरल पदार्थ भरा रहता है, जिसे प्लूरा अथवा फुफ्फुसीय आवरण कहा जाता है। गुहा को फुफ्फुसीय गुहा कहते हैं। ये सब रचनाएँ फेफड़ों की सुरक्षा करती हैं। दायाँ फेफड़ा दो अधूरी खाँचों द्वारा तीन पिण्डों में बँटा रहता है। बाएँ फेफड़े में एक अधूरी खाँच होती है तथा यह दो पिण्डों में बँटा होता है। फेफड़ों में मधुमक्खी के छत्ते की तरह असंख्य वायुकोष होते हैं। एक वयस्क मनुष्य में इन वायुकोषों की संख्या लगभग 15 करोड़ तक होती है। प्रत्येक वायुकोष का मुख्य कार्य शरीर में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का विनिमय करना है। ये वायुकोष गैसों के आदान-प्रदान के लिए सतह क्षेत्र को बढ़ाते हैं।
In simple words: फेफड़े हमारे छाती में स्थित दो स्पंजी अंग होते हैं जो सांस लेने में मदद करते हैं। दायाँ फेफड़ा बाएँ से थोड़ा बड़ा होता है और इनमें लाखों छोटे-छोटे वायुकोष होते हैं जहाँ हवा से ऑक्सीजन खून में मिलती है।

🎯 Exam Tip: फेफड़ों की संरचना लिखते समय दाएँ और बाएँ फेफड़े के पिण्डों (lobes) की संख्या (दायाँ - 3, बायाँ - 2) और सुरक्षात्मक आवरण 'प्लूरा' का नाम अवश्य लिखें।

Question 1. मनुष्य के श्वसन तंत्र में श्वसनी (Bronchue) और कूपिका-नलिकाओं (Alveolar ducts) की संरचना और कार्य समझाइए।
Answer: सम्बन्ध एक श्वसन (Bronchue) से होता है। प्रत्येक श्वसनी, जो श्वासनली के दो भागों में बँटने से बनती है, फेफड़े के अन्दर प्रवेश कर अनेक शाखा अर्थात् उप-शाखाओं में बंट जाती है। अत्यन्त महीन उप-शाखाएँ, जो अन्तिम रूप से बनती हैं, कूपिका-नलिकाएँ (Alveolar ducts) कहलाती हैं। प्रत्येक कुपिका नलिका के सिरे पर अंगूर के गुच्छे की भाँति अनेक वायुकोष (Alveoli) जुड़े रहते हैं। प्रत्येक वायुकोष अति महीन झिल्ली का बना होता है। इसको बनाने वाली कोशिकाएँ चपटी होती हैं। इसकी बाहरी सतह पर रुधिर केशिकाओं (Blood capillaries) का जाल फैला रहता है। यह जाल फुफ्फुस धमनी के अत्यधिक शाखान्वित होने से बनता है। इन केशिकाओं में शरीर का ऑक्सीजन रहित रक्त आता है तथा इसमें कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है। यह कार्बन डाइऑक्साइड वायुकोष की वायु में विसरित हो जाती है, बाद में ये कोशिकाएँ मिलकर फुफ्फुस शिरा बनाती हैं।

मानव श्वसन तंत्र के मुख्य भाग:

  • स्वरनली
  • श्वासनली
  • उपनली
  • उपनलिकाएँ
  • तन्तुपट या डायाफ्राम

In simple words: श्वासनली फेफड़ों में जाकर छोटी-छोटी नलियों में बँट जाती है जिन्हें कूपिका-नलिकाएँ कहते हैं। इनके सिरों पर अंगूर जैसे वायुकोष (Alveoli) होते हैं, जहाँ खून में ऑक्सीजन मिलती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में कूपिका (Alveoli) और रुधिर केशिकाओं के बीच गैसों के विनिमय (diffusion) की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से लिखना न भूलें।

 

Question 2. फेफड़ों की विभिन्न सामर्थ्य (Lung Capacities) जैसे प्रवाही वायु, प्रश्वसन सामर्थ्य, सजीव सामर्थ्य और मृत स्थान वायु को स्पष्ट कीजिए।
Answer: फेफड़ों की विभिन्न सामर्थ्य निम्नलिखित हैं:
(i) कार्यात्मक अवशेष वायु (Functional residual air): फेफड़े कभी रिक्त नहीं रहते हैं। इनमें लगभग 2,500 मिली हवा या वायु हमेशा भरी रहती है। यह वायु कार्यात्मक अवशेष वायु कहलाती है।
(ii) प्रवाही वायु (Tidal air): सामान्य रूप से प्रत्येक श्वास में लगभग 500 मिली वायु हम फेफड़ों में भरते व निकालते हैं। यह प्रवाही वायु कहलाती है।
(iii) प्रश्वसन सामर्थ्य (Inspiratory capacity): लम्बी श्वास लेकर हम प्रवाही वायु को 3,500 मिली तक अर्थात् सामान्य से 3,000 मिली अधिक ले सकते हैं। यह प्रश्वसन सामर्थ्य कहलाती है। प्रश्वसन सामर्थ्य तथा कार्यात्मक अवशेष वायु का आयतन संयुक्त रूप से लगभग 6,000 मिली हो जाता है। यह फेफड़ों की मूल सामर्थ्य (Total lung capacity) कहलाती है।
(iv) सजीव सामर्थ्य (Vital capacity): मनुष्य प्रश्वसन सामर्थ्य द्वारा वायु से फेफड़ों को पूरी तरह से भरकर एक निःश्वसन में प्रवाही वायु के अतिरिक्त लगभग 4,000 मिली वायु और बाहर निकाल सकता है। दूसरे शब्दों में, कुल 4,500 मिली वायु बाहर निकाल सकता है। यह फेफड़ों की सजीव सामर्थ्य कहलाती है। सजीव सामर्थ्य प्रश्वसन सामर्थ्य से लगभग 1,000 मिली अधिक होती है।
(v) अवशेष वायु (Residual air): सजीव सामर्थ्य के बाद भी फेफड़ों में लगभग 1,500 मिली वायु रह जाती है, जो अवशेष वायु कहलाती है।
(vi) मृत स्थान वायु (Dead space air): ग्रहण की गई 500 मिली वायु में से 150 मिली वायु श्वासनाल तथा श्वसनी (Bronchioles) में बची रह जाती है। यह मात्रा गैसीय विनिमय में भाग नहीं लेती है। यह मृत स्थान वायु कहलाती है।
In simple words: हमारे फेफड़ों में हवा रोकने और सांस लेने की अलग-अलग क्षमताएं होती हैं। सामान्य सांस में हम 500 मिली हवा अंदर-बाहर करते हैं, जबकि फेफड़ों की कुल क्षमता लगभग 6,000 मिली होती है।

🎯 Exam Tip: सभी श्वसन आयतनों (जैसे Tidal Air = 500 ml, Vital Capacity = 4500 ml) के सटीक मानों को याद रखें, ये सीधे अंकों वाले प्रश्नों में पूछे जाते हैं।

 

Question 3. फेफड़ों में रुधिर का शुद्धिकरण किस प्रकार होता है और हीमोग्लोबिन को श्वसनरंगा क्यों कहा जाता है?
Answer: फेफड़ों में रुधिर का शुद्धिकरण या फेफड़ों के कार्य श्वसन क्रिया में दो प्रकार की क्रियाएँ होती हैं– प्रश्वसन व निःश्वसन। प्रश्वसन में बाहरी वायु (ऑक्सीजन युक्त) को ग्रहण किया जाता है, जबकि निःश्वसन में वायु (कार्बन डाइऑक्साइड युक्त) बाहर निकलती है। रुधिर में पाई जाने वाली असंख्य लाल रुधिर कणिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है। इस पदार्थ में विद्यमान लौह तत्त्व की प्रचुरता के कारण रुधिर का रंग लाल होता है। हीमोग्लोबिन वायु की ऑक्सीजन को सरलता से अपने साथ बन्धित कर लेता है, इस कारण इस पदार्थ को श्वसनरंगा (Respiratory pigment) कहते हैं। अवशोषित ऑक्सीजन के कारण हीमोग्लोबिन तथा सम्पूर्ण रुधिर का रंग अधिक चटकीला लाल हो जाता है। ऐसे रुधिर को शुद्ध रुधिर कहते हैं।
In simple words: जब हम सांस लेते हैं, तो हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को सोखकर पूरे शरीर में पहुंचाता है जिससे खून का रंग चमकीला लाल हो जाता है। ऑक्सीजन सोखने की इसी क्षमता के कारण इसे श्वसनरंगा कहते हैं।

🎯 Exam Tip: हीमोग्लोबिन और ऑक्सीजन के जुड़ने से बनने वाले यौगिक (ऑक्सीहीमोग्लोबिन) और रक्त के शुद्धिकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 3. उचित रूप से श्वास का योग पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: योग श्वसन तन्त्र का एक विशेष व्यायाम है, जो फेफड़ों को मजबूत बनाने और रक्तसंचार बढ़ाने में मदद करता है। फिजियोलॉजी के अनुसार, जो वायु हम श्वसन क्रिया के दौरान भीतर खींचते हैं, वह हमारे फेफड़ों में जाती है और फिर पूरे शरीर में फैल जाती है। इस तरह शरीर को जरूरी ऑक्सीजन मिलती है। नियमित योगाभ्यास से हमारे फेफड़ों की कार्यक्षमता का पूर्ण विकास होता है। यदि श्वसन कार्य नियमित और सुचारु रूप से चलता रहे, तो फेफड़े स्वस्थ रहते हैं, लेकिन सामान्यतः लोग गहरी साँस नहीं लेते, जिसके चलते फेफड़े का एक चौथाई हिस्सा ही काम करता है और बाकी का तीन चौथाई हिस्सा स्थिर रहता है। मधुमक्खी के छत्ते के समान फेफड़े लगभग 75 मिलियन कोशिकाओं से बने होते हैं। इनकी संरचना स्पंज के समान होती है। सामान्य श्वास जो हम सभी आमतौर पर लेते हैं, उससे फेफड़ों के मात्र 20 मिलियन छिद्रों तक ही ऑक्सीजन पहुँचती है, जबकि 55 मिलियन छिद्र इसके लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस कारण से फेफड़ों से सम्बन्धी कई बीमारियाँ; जैसे- ट्यूबरकुलोसिस, रेस्पिरेटरी डिजीज (श्वसन सम्बन्धी रोग) खाँसी और ब्रॉन्काइटिस आदि पैदा हो जाती हैं। फेफड़ों के सही तरीके से काम न करने से रक्त शुद्धिकरण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इस कारण हृदय भी कमजोर हो जाता है और असमय मृत्यु की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए लम्बे एवं स्वस्थ जीवन के लिए योग बहुत जरूरी है। नियमित योग से बहुत-सी बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। व्यायाम मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है, जो मनुष्य के शरीर को स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनाता है। व्यायाम से श्वसन क्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों का विवरण निम्नलिखित हैं:
1. श्वास का गहरा होना: व्यायाम से साँस तेजी से चलती है, जिसके कारण ऑक्सीजन अधिक मात्रा में तीव्रता से फेफड़े में पहुँचती है, जिससे उसी मात्रा में रक्त भी शुद्ध होता है। अतः यह मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।
2. रक्त प्रवाह की गति को तीव्र होना: तीव्र गति से रक्त प्रवाहित होने से शरीर के विभिन्न भागों में उचित मात्रा में ऊर्जा का संचरण होता है और कार्बन डाइऑक्साइड भी जल्दी बाहर निकल जाती है।
3. कोशिकाओं का अधिक क्रियाशील होना: व्यायाम से शरीर की विभिन्न कोशिकाएँ अधिक क्रियाशील हो जाती हैं, जिसके फलस्वरूप शरीर से यूरिया, यूरिक एसिड, लवण आदि पसीने के साथ बाहर निकलने से शरीर चुस्त एवं स्वस्थ होता है।
4. अधिक भूख लगना: व्यायाम से शरीर की ऊर्जा का ह्रास होता है, जिसके बाद मनुष्य को पर्याप्त भूख लगती है, तत्पश्चात् सन्तुलित भोजन ग्रहण करने के पश्चात् शरीर को आवश्यक पोषक तत्त्व एवं ऊर्जा पुनः प्राप्त होते हैं।
In simple words: Yoga and deep breathing exercises help make our lungs stronger and improve blood circulation. When we do yoga regularly, our body gets more oxygen, which keeps our heart healthy and protects us from respiratory diseases. Regular exercise also increases our appetite and helps remove waste from our body through sweat.

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय योग और व्यायाम के फेफड़ों तथा रक्त प्रवाह पर पड़ने वाले प्रभावों को बिंदुवार (point-wise) स्पष्ट करें। मुख्य शब्दों जैसे 'ऑक्सीजन', 'रक्तसंचार' और 'फेफड़ों की क्षमता' को रेखांकित करें।

 

Question 5. स्फूर्ति व्यायाम का शरीर और मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: स्फूर्ति व्यायाम से अधिक मात्रा में शरीर में प्राण वायु (ऑक्सीजन) का प्रवेश होता है, जिससे मनुष्य का रक्त उचित अनुपात में शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचता है। इससे मस्तिष्क सुचारु रूप से कार्य करता है तथा साथ ही मनुष्य भी दिनभर ताजगी और स्फूर्ति महसूस करता है। नियमित रूप से किया गया यह व्यायाम हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।
In simple words: Doing energetic exercises brings more oxygen into our body, which helps blood reach all parts properly. This makes our brain work better and keeps us feeling active and fresh all day.

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय 'प्राण वायु (ऑक्सीजन)' और 'मस्तिष्क का सुचारु कार्य' जैसे मुख्य शब्दों को अवश्य शामिल करें ताकि आपको पूरे अंक मिल सकें।

UP Board Solutions Class 12 Home Science Chapter 3 श्वासोच्छवास

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