UP Board Solutions Class 12 Home Science Chapter 19 शिशु मृत्यु की समस्या

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Detailed Chapter 19 शिशु मृत्यु की समस्या UP Board Solutions for Class 12 Home Science

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Class 12 Home Science Chapter 19 शिशु मृत्यु की समस्या UP Board Solutions PDF

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. शिशु मृत्यु का आशय है। (2014)
(a) जन्म लेते ही मृत्यु हो जाना
(b) स्कूल जाने से पूर्व मृत्यु हो जाना
(c) जन्म से शैशवावस्था तक की अवधि में होने वाली मृत्यु
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं (None of the options)
Answer: (c) जन्म से शैशवावस्था तक की अवधि में होने वाली मृत्यु
In simple words: Infant mortality means the death of a baby from the time of birth until the end of their infancy period.

🎯 Exam Tip: Clearly define the time frame (birth to the end of infancy) to score full marks in definition-based questions.

 

Question 2. शिशु मृत्यु-दर की गणना की जाती है।
(a) जन्म लेने वाले प्रति 100 शिशुओं के आधार पर
(b) जन्म लेने वाले प्रति हजार शिशुओं के आधार पर
(c) विभिन्न रोगों के संक्रमण के आधार पर
(d) जन्म एवं मृत्यु संख्या के अन्तर के आधार पर
Answer: (b) जन्म लेने वाले प्रति हजार शिशुओं के आधार पर
In simple words: Infant mortality rate is calculated by counting how many babies pass away out of every 1,000 live births.

🎯 Exam Tip: Remember that mortality rates are standardly calculated per 1,000 births, not 100. Do not confuse these two numbers.

 

Question 3. शिशु मृत्यु-दर सबसे अधिक है।
(a) भारत में
(b) जापान में
(c) इंग्लैण्ड में
(d) अमेरिका में
Answer: (a) भारत में
In simple words: Among the countries listed, India has the highest rate of infant deaths due to challenges in healthcare and awareness.

🎯 Exam Tip: Keep general knowledge facts about developing versus developed nations in mind when answering comparative demographic questions.

 

Question 4. बाल मृत्यु का कारण है। (2006, 17)
(a) स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी एवं सुविधाओं का अभाव
(b) यौन शिक्षा का अभाव
(c) बाल विवाह
(d) उपरोक्त सभी (All of the options)
Answer: (d) उपरोक्त सभी (All of the options)
In simple words: Lack of healthcare facilities, early marriage, and lack of proper education all combine to cause high child mortality rates.

🎯 Exam Tip: When multiple social and medical factors contribute to a problem, "All of the options" is highly likely to be the correct answer.

 

Question 5. बाल मृत्यु को कम किया जा सकता है। (2010)
(a) शिक्षा एवं ज्ञान के प्रसार के द्वारा
(b) उपयुक्त प्रसव एवं स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना करके
(c) संक्रामक रोगों की रोकथाम करके
(d) उपरोक्त सभी (All of the options)
Answer: (d) उपरोक्त सभी (All of the options)
In simple words: We can reduce child deaths by spreading education, setting up proper health centers, and preventing infectious diseases.

🎯 Exam Tip: Read all options carefully, as solutions to public health issues usually require a combination of multiple preventive measures.

 

Question 6. उचित समय पर टीकाकरण (2009)
(a) बालक में रोग क्षमता को कम करता है।
(b) बाल मृत्यु की दर कम होती है।
(c) बच्चे की जान को खतरा रहता है।
(d) None of the options
Answer: (b) बाल मृत्यु की दर कम होती है।
In simple words: टीकाकरण से बच्चों की बीमारियों से रक्षा होती है जिससे बाल मृत्यु दर में कमी आती है।

🎯 Exam Tip: टीकाकरण के लाभों को याद रखें, यह बाल मृत्यु दर को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है।

 

Question 7. परिवार नियोजन द्वारा किस समस्या का समाधान हो सकता है? (2017)
(a) जनसंख्या नियन्त्रण
(b) देश के विकास की वृद्धि
(c) माँ तथा शिशु की मृत्यु में कमी
(d) All of the options
Answer: (d) All of the options
In simple words: परिवार नियोजन से जनसंख्या नियंत्रित होती है, माँ-शिशु का स्वास्थ्य सुधरता है और देश का विकास होता है।

🎯 Exam Tip: जब सभी विकल्प सकारात्मक और सही लगें, तो 'All of the options' को ध्यान से चुनें।

 

Question 8. गर्भावस्था में महिला को मिलना चाहिए। (2007, 16)
(a) केवल फल
(b) केवल दूध
(c) सन्तुलित आहार
(d) जो भी उपलब्ध हो
Answer: (c) सन्तुलित आहार
In simple words: गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए सभी पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार जरूरी है।

🎯 Exam Tip: गर्भावस्था में पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान दें, संतुलित आहार इसका मुख्य आधार है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)

 

Question 1. शिशु मृत्यु से क्या आशय है?
Answer: जन्म लेते ही अथवा जन्म लेने से एक वर्ष की आयु तक होने वाली मृत्यु को ‘शिशु मृत्यु’ कहते हैं। यह दर किसी भी समाज के स्वास्थ्य स्तर को दर्शाती है।
In simple words: जन्म से लेकर एक साल की उम्र के अंदर होने वाली बच्चे की मौत को शिशु मृत्यु कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: शिशु मृत्यु की परिभाषा में 'एक वर्ष की आयु तक' समय सीमा लिखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. बाल मृत्यु के प्रमुख कारण क्या हैं? (2006, 13)
Answer: शिक्षा का अभाव, निर्धनता, गर्भावस्था में असावधानी, अव्यवस्थित प्रसूतिका गृह, बाल विवाह, चिकित्सा सुविधाओं की कमी आदि शिशु मृत्यु के प्रमुख कारण हैं। इन सामाजिक और आर्थिक कारणों को दूर करना आवश्यक है।
In simple words: गरीबी, अशिक्षा, कम उम्र में शादी और अच्छी डॉक्टरों की कमी के कारण बच्चों की मौतें अधिक होती हैं।

🎯 Exam Tip: बाल मृत्यु के कारणों में कम से कम 3-4 मुख्य बिंदु जैसे निर्धनता, अशिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की कमी अवश्य लिखें।

 

Question 3. शिशु मृत्यु-दर को रोकने के दो उपाय बताएँ। (2005, 10, 11)
Answer: शिक्षा का प्रसार एवं लोगों में जागरूकता फैलाकर तथा प्रसव एवं स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना करके बाल मृत्यु-दर को रोका जा सकता है। इसके साथ ही माताओं के पोषण पर भी ध्यान देना चाहिए।
In simple words: लोगों को जागरूक बनाकर और अच्छे अस्पताल व प्रसव केंद्र खोलकर बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

🎯 Exam Tip: उपायों को लिखते समय 'जागरूकता' और 'स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50 शब्द)

 

Question 1. शिशु मृत्यु-दर को स्पष्ट कीजिए।
Answer: किसी देश में एक वर्ष में जन्म लेने वाले प्रति हजार बच्चों में से जितने बच्चे जन्म लेने के समय या अपने जन्म के एक वर्ष के अन्दर मर जाते हैं, उसे 'शिशु मृत्यु दर' कहते हैं। उदाहरण माना कि किसी देश में एक वर्ष के अन्दर एक लाख बच्चों ने जन्म लिया और 500 बच्चे जन्म लेने के तुरन्त बाद या 1 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पूर्व ही मर गए, तो उस देश की शिशु मृत्यु-दर की गणना इस प्रकार करेंगे:
\( \frac { 500 } { 100000 } \times 1000 = 5 \)
अर्थात् शिशु मृत्यु दर = 5/हजार है। यह गणना स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
In simple words: एक साल में पैदा हुए हर 1,000 बच्चों में से जितने बच्चों की मौत एक साल की उम्र से पहले हो जाती है, उसे शिशु मृत्यु दर कहते हैं।

🎯 Exam Tip: परिभाषा के साथ दिया गया गणितीय उदाहरण और सूत्र लिखने से आपको पूरे अंक प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

 

Question 2. बाल मृत्यु-दर पर निर्धनता को प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: बाल मृत्यु-दर पर निर्धनता का प्रभाव तीन स्तरों पर देख सकते हैं:
प्रसव से पूर्व (गर्भावस्था के दौरान): गर्भावस्था में निर्धनता के कारण गर्भवती महिलाएँ सन्तुलित एवं पौष्टिक आहार नहीं ले पाती हैं, जिससे शिशु की मृत्यु होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
प्रसव के दौरान: धन की कमी के कारण अनेक महिलाएँ प्रसव कराने के लिए चिकित्सक के पास न जाकर घर पर ही दाइयों की सहायता से बच्चे को जन्म दे देती हैं, अतः प्रसव की समुचित व्यवस्था उपलब्ध न होने के कारण शिशु की मृत्यु की सम्भावना अधिक होती है।
प्रसव के बाद: धन की कमी के कारण नवजात शिशु को सन्तुलित व पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है। अतः वे विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। निर्धनता के कारण इन बच्चों का समुचित उपचार भी नहीं हो पाता है, जो शिशु मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। आर्थिक तंगी के कारण बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा भी नहीं मिल पाती है।
In simple words: गरीबी के कारण गर्भवती महिलाओं को अच्छा खाना नहीं मिलता, प्रसव सुरक्षित अस्पतालों में नहीं हो पाता, और जन्म के बाद बच्चों को सही पोषण व इलाज नहीं मिल पाता, जिससे बाल मृत्यु दर बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर को तीन स्पष्ट शीर्षकों (प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान, प्रसव के बाद) में विभाजित करके लिखें ताकि परीक्षक को समझने में आसानी हो।

 

Question 3. शिशु के जीवन में माता-पिता के स्वास्थ्य का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।
Answer: एक स्वस्थ शिशु को, एक स्वस्थ माता ही जन्म दे सकती है। आनुवंशिकी के कारण माता-पिता में व्याप्त रोगों का शिशु में भी हस्तान्तरण हो जाता है। गर्भावस्था में शिशु माता के रक्त से ही पोषक तत्त्वों को प्राप्त करता है। यदि माता पहले से ही कमजोर एवं अस्वस्थ है, तो वह कदापि एक स्वस्थ बच्चे को जन्म नहीं दे सकती है। जन्म के बाद भी माँ को संक्रमित दूध पीकर शिशु अस्वस्थ हो जाता है। अतः यह स्पष्ट है कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता के अभाव के कारण रोगी माता-पिता की सन्तान भी रोगग्रस्त होगी। इस तरह से शिशु के माता-पिता के स्वास्थ्य का शिशु के जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। माता-पिता का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य ही बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।
In simple words: अगर माता-पिता स्वस्थ होंगे, तो उनका बच्चा भी स्वस्थ पैदा होगा। माँ के बीमार होने पर गर्भ में पल रहे बच्चे को भी पोषण नहीं मिलता और वह कमजोर पैदा होता है।

🎯 Exam Tip: आनुवंशिकी (genetics) और गर्भावस्था के दौरान पोषण के महत्व को मुख्य बिंदुओं के रूप में रेखांकित करें।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक, 100 शब्द)

 

Question 1. बाल मृत्यु की समस्या का वर्णन करें एवं इसके मुख्य कारणों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: किसी देश में एक वर्ष के भीतर जन्म लेने वाले प्रति हजार शिशुओं में मृत शिशुओं की गणना ‘शिशु मृत्यु-दर’ कहलाती है। शिशु मृत्यु-दर की गणना में 0 से 1 वर्ष तक के बच्चों को सम्मिलित किया जाता है। बाल मृत्यु दर की गणना पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मौत के मामलों के आधार पर की जाती है। अर्थात् बाल मृत्यु-दर नवजात शिशुओं के साथ-साथ पाँच वर्ष तक की आयु के बच्चों की मौत को इंगित करती है। आज का बालक कल का नागरिक होता है और यदि नागरिक न रहे, तो राष्ट्र कैसा, इसलिए बाल मृत्यु को किसी भी देश की प्रगति का शुभ संकेत नहीं माना जाता है। आज भारत में बाल मृत्यु दर बहुत अधिक है। यह देश के विकास में एक बड़ी बाधा है।

भारत में बाल मृत्यु की ऊँची दर के कारण:
भारत में उच्च बाल मृत्यु दर के कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
• शिक्षा का अभाव
• निर्धनता
• गर्भावस्था में असावधानी
• बाल-विवाह
• अनुचित प्रसूति-गृह
• रोगी माता-पिता
• परिवार नियोजन का पालन न करना
• मातृ-शिशु कल्याणकारी संस्थाओं की कमी
• चिकित्सा एवं निःसंक्रमण सम्बन्धी सुविधा की कमी

1. शिक्षा का अभाव: बाल मृत्यु-दर के अधिक होने के कारणों में अशिक्षा एक महत्त्वपूर्ण कारक है। शिक्षा के अभाव में महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी नहीं होती है। शिक्षा के अभाव में महिलाओं को शिशु सुरक्षा, प्रसव पूर्व एवं प्रसव के बाद की जाने वाली परिचर्या की जानकारी नहीं हो पाती है, जो बाल मृत्यु-दर को बढ़ावा देती है। शिक्षा के अभाव में महिलाएँ सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का भी लाभ नहीं उठा पा रही हैं।

2. निर्धनता: बाल मृत्यु-दर पर निर्धनता का प्रभाव तीनों स्तर पर देखा जा सकता है—जन्म के पूर्व, जन्म के दौरान एवं जन्म के बाद। निर्धनता के कारण गर्भावस्था के दौरान महिलाएँ स्वयं को सन्तुलित एवं पौष्टिक आहार नहीं दे पाती हैं, जिससे माता और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वहीं चिकित्सा सम्बन्धी विभिन्न सुविधाएँ होते हुए भी निर्धन जनता उसका लाभ नहीं उठा पाती है। ऐसी स्थिति में गरीब लोग घर पर ही दाइयों से प्रसव करा लेते हैं। इस मजबूरी के कारण अनेक बार जन्म के समय ही शिशु की मृत्यु हो जाती है। जन्म के बाद भी शिशु को निर्धनता के कारण पौष्टिक और सन्तुलित आहार नहीं मिल पाता है। इस स्थिति में इन नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य खराब हो जाता है, लेकिन धन के अभाव के कारण बच्चों का समुचित उपचार नहीं हो पाता है।

3. गर्भावस्था में असावधानी: गर्भावस्था के दौरान यदि माता अपने स्वास्थ्य, पोषण एवं अन्य आवश्यक देखभाल का ध्यान रखती है, तो जन्म लेने वाला बच्चा भी स्वस्थ होता है। इसके विपरीत यदि माता अपने स्वास्थ्य एवं पोषण का ध्यान नहीं रखती है, तो नवजात शिशु भी दुर्बल तथा अस्वस्थ हो जाता है। प्रायः इन दशाओं में जन्म लेने वाले बच्चे रोगों से संक्रमित हो जाते हैं, जो शिशु-मृत्यु का कारण बनते हैं।
In simple words: बाल मृत्यु दर का मतलब है छोटे बच्चों की असमय मौत होना। इसके मुख्य कारणों में अशिक्षा, गरीबी और गर्भावस्था के दौरान सही पोषण व देखभाल की कमी शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय बाल मृत्यु दर की परिभाषा के साथ-साथ इसके मुख्य कारणों (जैसे अशिक्षा, निर्धनता और असावधानी) को अलग-अलग शीर्षकों के अंतर्गत स्पष्ट रूप से लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 2. बाल मृत्यु-दर कम करने के मुख्य उपायों पर चर्चा करें। (2005) अथवा शिशु मृत्यु-दर कम करने हेतु अपने सुझाव दीजिए। (2016)
Answer: बाल मृत्यु दर का अधिक होना देश की प्रगति में बाधक होता है। आज हमारे देश में जनसंख्या काफी अधिक है, जिसे नियन्त्रित करना अति आवश्यक है। इस समस्या के समाधान के लिए जन्म दर को कम किया जाना चाहिए न कि मृत्यु-दर को बढ़ाया जाए। देश के विकास में बाल मृत्यु-दर को कम करना एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

बाल मृत्यु-दर कम करने के उपाय:
देश के विकास के लिए बाल मृत्यु-दर को नियन्त्रित करने के लिए निम्न उपाय किए जा सकते हैं:
• शिक्षा का प्रसार
• यौन शिक्षा
• जीवन-स्तर में उन्नयन
• स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्रसूति-गृह की स्थापना
• बाल कल्याण योजनाएँ
• बाल चिकित्सालय
• बाल-विवाह पर रोक
• परिवार नियोजन
• माता एवं शिशु का पोषण
In simple words: To reduce child deaths, we must focus on improving education, healthcare facilities, preventing child marriage, and providing proper nutrition to both mothers and infants.

🎯 Exam Tip: List at least 5 to 6 measures clearly using bullet points and highlight the importance of healthcare and education to score full marks.

 

Question 1. शिशु मृत्यु दर को कम करने के मुख्य उपायों का वर्णन कीजिए।
Answer: शिशु मृत्यु दर को कम करने के मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं:
1. शिक्षा का प्रसार: देश के नागरिकों में रूढ़िवादिता और अज्ञानता को कम करने के लिए शिक्षा का प्रसार जरूरी है। शिक्षा का प्रसार होने से नागरिकों में नए-नए विचार आएँगे और जागृति उत्पन्न होगी। अतः बाल मृत्यु को रोकने के लिए स्त्रियों का शिक्षित होना अति आवश्यक है।
2. यौन शिक्षा: भारत में यौन शिक्षा का अभाव है। प्रत्येक बच्चे को यौनसम्बन्धी प्रत्येक बात की लाभ-हानि की शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि वे पति-पत्नी के रूप में विवेकपूर्ण जीवन व्यतीत कर सकें। ऐसे माँ-बाप अपने बच्चों के पालन-पोषण के प्रति जागरूक होते हैं, इससे बाल मृत्यु दर में गिरावट आती है। भारत सरकार ने इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए स्कूल के पाठ्यक्रमों में यौन शिक्षा को भी जोड़ दिया है।
3. जीवन-स्तर में उन्नयन: जीवन-स्तर के सुधार में निर्धनता बड़ी बाधक है। सभी के पास रोजगार होगा, तो निर्धनता दूर होगी। फलस्वरूप गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक एवं सन्तुलित आहार के साथ-साथ उपयुक्त वातावरण भी प्राप्त होगा, इससे बाल मृत्यु दर में कमी आएगी।
4. स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्रसूति-गृह की स्थापना: देश के शहरों में जहाँ अस्पतालों की अधिकता है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्तरीय स्वास्थ्य केन्द्रों का काफी अभाव है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार नए स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्रसूति-गृह की व्यवस्था कर रही है, साथ ही योग्य डॉक्टर, नर्स आदि की नियुक्ति भी कर रही है। इन सभी सुविधाओं के साथ-साथ सरकार गरीबों को निःशुल्क दवाइयाँ तथा उचित समय पर निःशुल्क टीकाकरण की भी सुविधाएँ प्रदान कर रही है।
5. बाल कल्याण योजनाएँ: शिशु देश का भविष्य होते हैं, इसलिए सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की बाल-कल्याण योजनाएँ चलाई जा रही हैं, लेकिन हमारे देश की ग्रामीण जनता इन सरकारी कार्यक्रमों से अनभिज्ञ रहती है। अतः कुछ निःस्वार्थ नागरिकों को आगे आकर इन योजनाओं के बारे में लोगों को बताना चाहिए, ताकि इसका अधिक-से-अधिक लाभ लेकर शिशु मृत्यु-दर को कम किया जा सके।
6. बाल चिकित्सालय: देश के प्रत्येक क्षेत्र में एक बाल चिकित्सालय की व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें जन्म के बाद बच्चों की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का समाधान अतिशीघ्र किया जा सके, जिससे बाल मृत्यु-दर में कमी आ सके।
7. बाल विवाह पर रोक: बाल विवाह में 14-15 वर्ष की उम्र में बच्चों का विवाह कर दिया जाता है, ऐसी स्थिति में स्वस्थ बच्चा पैदा होने की सम्भावना न के बराबर होती है। अतः सरकार ने शादी की उम्र लड़कों के लिए 21 वर्ष तथा लड़कियों के लिए 18 वर्ष निश्चित कर दी है, इससे शिशु मृत्यु-दर में काफी कमी आई है।
8. परिवार नियोजन: परिवार नियोजन ने शिशु मृत्यु-दर में कमी लाने में काफी सहायता की है। ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ एवं ‘बच्चे दो या तीन ही अच्छे’ का नारा भी लोगों की मानसिकता बदलने में कारगर सिद्ध हुआ। अतः परिवार नियोजन के बारे में लोगों को और जागरूक होने की तथा समाज में व्याप्त कुप्रथाओं को समाप्त करने की आवश्यकता है।
9. माता एवं शिशु का पोषण: बाल मृत्यु-दर को कम करने के लिए गर्भावस्था एवं प्रसव के बाद भी शिशु एवं माता को पौष्टिक एवं सन्तुलित भोजन मिलना आवश्यक है। इसके लिए सरकार विभिन्न योजनाएँ चलाती है; जैसे-‘जननी सुरक्षा योजना’ इत्यादि। इन सभी उपायों के सामूहिक प्रयास से ही हम एक स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं।
In simple words: शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ, सही उम्र में विवाह, परिवार नियोजन और माँ-बच्चे को अच्छा पोषण देना बहुत ज़रूरी है। इससे बच्चे स्वस्थ रहेंगे और उनकी जान बचाई जा सकेगी।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय सभी 9 बिंदुओं को हेडिंग के साथ स्पष्ट रूप से लिखें। मुख्य शब्दों जैसे 'शिक्षा का प्रसार', 'परिवार नियोजन' और 'पोषण' को रेखांकित (underline) करने से पूरे अंक मिलते हैं।

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