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Detailed Chapter 9 किराया की परिभाषा और सिद्धांत UP Board Solutions for Class 12 Economics
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Class 12 Economics Chapter 9 किराया की परिभाषा और सिद्धांत UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Economics Chapter 9 Rent: Definition And Theory (लगान : परिभाषा एवं सिद्धान्त)
विस्तृत उतरीय प्रश्न (6 अंक)
Question 1. आभास लगान की व्याख्या कीजिए।
या
आभास लगान की संकल्पना को समझाइए।
Answer: आभास लगान - आभास लगान का विचार सर्वप्रथम प्रो० मार्शल ने प्रस्तुत किया। प्रो० मार्शल के अनुसार, “कुछ ऐसे साधन हो सकते हैं जिनकी पूर्ति अल्पकाल में निश्चित होती है और जिनके कारण उन्हें लगान के प्रकार का भुगतान प्राप्त होता है। मनुष्य के द्वारा निर्मित मशीनों तथा अन्य, यन्त्रों की पूर्ति अल्पकाल में तो निश्चित होती है किन्तु दीर्घकाल में उसमें परिवर्तन किये जा सकते हैं, क्योंकि उनकी पूर्ति भूमि की भाँति दीर्घकाल में निश्चित नहीं होती, इसलिए इनकी आय को लगान नहीं कहा जा सकता; परन्तु इनकी पूर्ति अल्पकाल में निश्चित होती है. इसलिए अल्पकाल में इनकी आय लगान की भाँति होती है, जिसे आभास लगान कहा जाता है।” आभास लगान, जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह आय वास्तव में लगान न होकर लगान की प्रकार आभासित होती है। मनुष्य द्वारा निर्मित पूँजीगत वस्तुओं की पूर्ति अल्पकाल में निश्चित होती है, इस कारण उन्हें लगान मिलता है। जिस प्रकार भूमि की पूर्ति सीमित होती है, उसी प्रकार अन्य साधनों की पूर्ति भी अल्पकाल में सीमित हो सकती है। भूमि में सीमितता का गुण स्थायी रूप से विद्यमान है, इसी कारण इसकी आय को लगान कहा जाता है। भूमि तथा अल्पकाल में सीमित साधनों में सीमितता का गुण समान होने के कारण अन्य साधन जो अस्थायी रूप से सीमित हैं, उनकी आय को आभास लगान कहते हैं। इस प्रकार अल्पकाल में मनुष्य द्वारा निर्मित पूँजीगत वस्तुओं, अधिक योग्यता वाले श्रमिकों और साहसियों की आय में भी आभास लगान सम्मिलित होता है।
प्रो० मार्शल के अनुसार, “उत्पत्ति के उपकरणों (मशीन अर्थात् पूँजीगत वस्तुओं) से प्राप्त होने वाली शुद्ध आय को उनका आभास लगान इसलिए कहा जा सकता है, क्योंकि बहुत अधिक अल्पकाल में उन उपकरणों की पूर्ति अस्थायी रूप से स्थिर होती है और उसे माँग के अनुसार घटाना-बढ़ाना सम्भव नहीं होता। कुछ समय तक वे उन वस्तुओं के मूल्य के साथ, जिनके पैदा करने में उन्हें प्रयोग किया जाता है, वही सम्बन्ध रखते हैं जो भूमि अथवा सीमित पूर्ति वाले किसी अन्य प्राकृतिक उपहार का होता है और जिनकी आय शुद्ध लगान होती है।” इस प्रकार प्रो० मार्शल ने पूँजीगत वस्तुओं, जिनकी पूर्ति अल्पकाल में बेलोचदार तथा दीर्घकाल में लोचदार होती है, की अल्पकालीन आयों के लिए आभास लगान शब्द का प्रयोग किया है।
मार्शल के अनुसार, “मशीन (अर्थात् पूँजीगत वस्तुओं) की अल्पकालीन आय में से उसको चलाने की अल्पकालीन लागत को घटाने से जो बचत प्राप्त होती है, उसे आभास लगान कहते हैं। आभास लगान यह बताता है कि मशीन की अल्पकालीन आय उसके चलाने की अल्पकालीन लागत से कितनी अधिक है। इस प्रकार आभास लगान अल्पकालीन लागत के ऊपर एक प्रकार की अल्पकालीन बचत है।'
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि आभास लगान केवल अल्पकाल में प्राप्त होता है। यह एक अस्थायी आधिक्य है जो पूँजीगत वस्तुओं पर केवल अल्पकाल में प्राप्त होता है और दीर्घकाल में उसकी पूर्ति बढ़ जाने के कारण समाप्त हो जाता है।
प्रो० स्टोनियर व हेग के शब्दों में - “मशीनों की पूर्ति अल्पकाल में निश्चित होती है, भले ही उससे प्राप्त आय अधिक हो अथवा कम, फिर भी वे एक प्रकार का लगान अर्जित करती हैं। हाँ, दीर्घकाल में यह आभास लगान समाप्त हो जाता है, क्योकि यह पूर्ण लगान न होकर समाप्त हो जाने वाला अर्द्ध-लगान ही होता है।”
मार्शल के अनुसार, “आभास लगान पूँजीगत साधनों की अल्पकालीन लागत के ऊपर अल्पकालीन बचत है, जिसको अल्पकालीन आय में से अल्पकालीन लागत को घटाकर प्राप्त किया जाता है।”
सिल्वरमैन के अनुसार, “आभास लगान तकनीकी रूप में उत्पत्ति के उन साधनों को किया गया अतिरिक्त भुगतान है जिनकी पूर्ति अल्पकाल में स्थिर तथा दीर्घकाल में परिवर्तनशील होती है।” संक्षेप में, आभास लगान कुल आगम तथा कुल परिवर्तनशील लागत को अन्तर है। सूत्र रूप में, आभास लगान = कुल आगम - परिवर्तनशील लागते QR = TR - TVC
In simple words: आभास लगान एक अस्थायी आय है जो पूंजीगत वस्तुओं को अल्पकाल में उनकी सीमित आपूर्ति के कारण मिलती है। यह वास्तविक लगान नहीं बल्कि लगान जैसा प्रतीत होता है, क्योंकि दीर्घकाल में इसकी आपूर्ति बढ़ सकती है और यह समाप्त हो सकता है।
🎯 Exam Tip: आभास लगान की परिभाषा और इसकी प्रकृति (अस्थायी/अल्पकालीन) को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है, साथ ही विभिन्न अर्थशास्त्रियों के विचारों को उद्धृत करना भी स्कोरिंग होता है।
Question 2. रिकार्डों के लगान सिद्धान्त की व्याख्या विस्तृत एवं सघन खेती के अन्तर्गत कीजिए।
या
रिकार्डों के लगान सिद्धान्त का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
या
लगान को परिभाषित कीजिए। विस्तृत खेती के अन्तर्गत लगान के निर्धारण को समझाइए ।
या
लगान भूमि की उपज का वह भाग है जो भूमि के स्वामी को भूमि की मौलिक व अविनाशी शक्तियों के प्रयोग के लिए दिया जाता है।” व्याख्या कीजिए।
या
रिकार्डों के लगान सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।
या
विस्तृत खेती के अन्तर्गत रिकार्डों के लगान सिद्धान्त को समझाइए ।
या
रिकार्डों के लगान सिद्धान्त की आलोचनात्मक व्याख्या केवल विस्तृत खेती के अन्तर्गत कीजिए।
या
रिकार्डों के लगान सिद्धान्त की उपयुक्त चित्र की सहायता से व्याख्या कीजिए।
या
गहन खेती के अन्तर्गत रिकार्डों के लगान सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए।
Answer: रिकार्डों का लगान सिद्धान्त - लगान के विचार को सर्वप्रथम रिकाडों ने एक निश्चित सिद्धान्त के रूप में प्रस्तुत किया था। इसलिए इसे 'रिका का लगान सिद्धान्त के नाम से सम्बोधित किया जाता है। रिकार्डों के अनुसार, केवल भूमि ही लगाने प्राप्त कर सकती है, क्योंकि भूमि में कुछ ऐसी विशेषताएँ विद्यमान हैं जो अन्य साधनों में नहीं होती; जैसे-भूमि प्रकृति का निःशुल्क उपहार है, भूमि सीमित होती है आदि । इस कारण रिकाडों ने इस सिद्धान्त की व्याख्या भूमि के आधार पर की है।
रिकार्डों के अनुसार, “लगाने भूमि की उपज का वह भाग है जो भूमि के स्वामी को भूमि की मौलिक तथा अविनाशी शक्तियों के प्रयोग के लिए दिया जाता है।”
रिकार्डों के अनुसार, सभी भूमियाँ एकसमान नहीं होतीं और उनमें उपजाऊ शक्ति तथा स्थिति में अन्तर पाया जाता है। कुछ भूमियाँ अधिक उपजाऊ तथा अच्छी स्थिति वाली होती हैं तथा कुछ अपेक्षाकृत घटिया होती हैं। जो भूमि स्थिति एवं उर्वरता दोनों ही दृष्टिकोण से सबसे घटिया भूमि हो तथा जिससे उत्पादन व्यय के बराबर ही उपज मिलती हो, अधिक नहीं; उस भूमि को रिकाडों ने सीमान्त भूमि कहा है। सीमान्त भूमि से अच्छी भूमि को रिकाडों ने अधिसीमान्त भूमि बताया है। अतः रिकार्डों के अनुसार, “लगान अधिसीमान्त (Supermarginal) और सीमान्त भूमि (Marginal Land) से उत्पन्न होने वाली उपज का अन्तर होता है। चूंकि सीमान्त भूमि से केवल उत्पादन व्यय के बराबर उपज मिलती है और कुछ अतिरेक (Surplus) नहीं मिलता। इसलिए रिकार्डों के अनुसार, ऐसी भूमि पर कुछ अधिशेष (लगान) भी नहीं होता अर्थात् सीमान्त भूमि लगानरहित भूमि (No Rent Land) होती है।
सिद्धान्त की व्याख्या विस्तृत खेती के अन्तर्गत लगान-रिकाडों ने भू-प्रधान खेती (Extensive Cultivation) के आधार पर इस सिद्धान्त को समझाने के लिए एक नये देश का उदाहरण लिया जिसमें थोड़े-से लोग बसे हों। आरम्भ में ऐसे देश की जनसंख्या कम होती है तथा भूमि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती है। अतः सर्वप्रथम सर्वोत्तम कोटि की भूमि पर खेती की जाती है। जनसंख्या कम होने के कारण अनाज की समस्त आवश्यकताएँ केवल प्रथम श्रेणी की भूमि पर खेती करने से ही पूरी हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में कोई लगान पैदा नहीं होता है, क्योंकि भूमि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। भूमि के लिए किसी प्रकार की कोई प्रतियोगिता नहीं है, किन्तु यदि जनसंख्या में वृद्धि हो जाती है तो अनाज की बढ़ती हुई माँग को पूरा करने के लिए दूसरी श्रेणी की भूमि पर खेती करना आवश्यक हो जाता है और पहली श्रेणी की।
भूमि लगान देने लगती है, क्योंकि श्रम व पूँजी की समान मात्रा लगाने पर दूसरी श्रेणी की भूमि पर पहली श्रेणी की भूमि की अपेक्षा कम उत्पत्ति होगी। दूसरी श्रेणी की भूमि सीमान्त भूमि कहलाएगी। यह । लगानरहित भूमि होगी तथा पहली श्रेणी की भूमि अधिसीमान्त भूमि कहलाएगी। इसी प्रकार जब तीसरी श्रेणी की भूमि भी कृषि के अन्तर्गत आ जाती है तो दूसरी श्रेणी की भूमि लगान देने लगती है तथा प्रथम श्रेणी की भूमि पर लगान बढ़ जाता है। इस प्रकार किसी समय पर सबसे घटिया भूमि, जिस पर खेती की जाती है, को रिकाडों ने सीमान्त भूमि कहा है। यह भूमि लगानरहित भूमि (No Rent Land) होती है। इससे प्राप्त उपज केवल उत्पादन लागत के बराबर होती है, किसी प्रकार का अतिरेक नहीं देती है।
उदाहरण द्वारा स्पष्टीकरण - रिका के लगान सिद्धान्त को एक उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है। मान लीजिए, किसी स्थान पर A, B, C, D, E श्रेणी की समान क्षेत्रफल की भूमियों पर समान लागत लगाकर खेती की जाती है। A श्रेणी की भूमि पर 100 क्विटल, B श्रेणी की भूमि पर 80 किंवटल, c श्रेणी की भूमि पर 50 क्विटल, D श्रेणी की भूमि पर 30 क्विटल तथा E श्रेणी की भूमि पर 20 क्विटल अनाज उत्पन्न किया जाता है। यदि प्रत्येक प्रकार की भूमि पर अनाज उत्पन्न करने की लागत Rs. 3300 हो और अनाज का मूल्य Rs. 165 प्रति क्विटल हो तो E श्रेणी की भूमि । सीमान्त भूमि होगी, क्योंकि उस पर उत्पन्न होने वाली उपज या लगान 20 क्विटल को बेचकर केवल उत्पादन लागत अर्थात् Rs. 3,300 ही प्राप्त किये जा सकते हैं। अतः E श्रेणी की भूमि लगानरहित भूमि होगी तथा A, B, C, D श्रेणी की भूमि पर तालिका के अनुसार लगान हो
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भूमि की विभिन्न श्रेणियों (A, B, C, D, E) और उन पर प्राप्त होने वाले उत्पादन (क्विंटल में) को दर्शाता है। E श्रेणी की भूमि सीमान्त भूमि है और लगानरहित है, जबकि A, B, C, D श्रेणियों पर प्राप्त होने वाला अधिशेष या लगान छायांकित क्षेत्र से इंगित किया गया है। यह दर्शाता है कि घटिया भूमि का उपयोग करने पर अतिरिक्त अधिशेष (लगान) कैसे बदलता जाता है।
| श्रम व पूँजी आदि की लागत (Rs. में) | भूमि | कुल उत्पादन (क्विटल में) | लगान (उपज में) | विशेष |
|---|---|---|---|---|
| 3,300 | A श्रेणी | 100 | 100-20 = 80 | अधिसीमान्त भूमि |
| 3,300 | B श्रेणी | 80 | 80-20 = 60 | |
| 3,300 | C श्रेणी | 50 | 50-20 = 30 | |
| 3,300 | D श्रेणी | 30 | 30-20 = 10 | |
| 3,300 | E श्रेणी | 20 | 20-20 = 0 | सीमान्त भूमि (लगानरहित भूमि) |
संलग्न चित्र में Ox-अक्ष पर भूमि की विभिन्न श्रेणियाँ तथा OY-अक्ष पर उत्पादन की मात्रा किंवटल में दिखाई गयी है। विभिन्न श्रेणियों की भूमि पर उनकी उपज के आधार पर आयत बनाये गये हैं। E सीमान्त भूमि है; अतः उस पर कुछ अधिशेष नहीं है। शेष चारों प्रकार की भूमि पर जितना अधिशेष है उसे प्रत्येक आयत में रेखांकित किया गया है। आयत A, B, C को देखने से पता चलता है। कि रेखांकित भाग भी कई उप-विभागों में बँटा हुआ है। यह इस ओर संकेत करता है कि जब भी घटिया श्रेणी की भूमि का उपयोग किया जाता है तभी अतिरिक्त अधिशेष (लगान) में परिवर्तन हो जाता है।
गहन खेती के अन्तर्गत लगान - यद्यपि रिकार्डो ने लगान सिद्धान्त की व्याख्या भू-प्रधान खेती (Extensive Cultivation) के आधार पर की है, परन्तु रिकाडों के अनुसार, लगान विस्तृत और गहन दोनों ही प्रकार की खेती से प्राप्त होता है। जब भूमि की मात्रा (क्षेत्रफल) को स्थिर रखकर, श्रम व पूँजी की इकाइयों में वृद्धि करके कृषि उत्पादन को बढ़ाया जाता है, उसे श्रम प्रधान या गहन खेती कहते हैं।” रिकार्डों का विचार है कि गहन खेती से भी लगान प्राप्त होता है, क्योंकि गहन खेती या श्रम-प्रधान खेती में उत्पत्ति ह्रास नियम क्रियाशील रहता है। इस कारण श्रम व पूँजी की प्रत्येक अगली इकाई के लगाने से भूमि से जो उपज प्राप्त होती है वह क्रमशः घटती जाती है।
इस प्रकार अन्त में एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जब श्रम व पूँजी की एक और अतिरिक्त इकाई लगाने पर, जो उसे भूमि पर कुल उपज में जो वृद्धि होती है वह उस इकाई की उत्पादन लागत के बराबर होती है। श्रम व पूँजी की इस अतिरिक्त इकाई को सीमान्त इकाई कहते हैं। सीमान्त इकाई से प्राप्त उत्पादन, सीमान्त इकाई के उत्पादन लागत के बराबर होता है, इसलिए उससे कोई अतिरेक अथवा लगान प्राप्त नहीं होता। अधिसीमान्त इकाइयों की उपज सीमान्त इकाई की उपज़ से अधिक होती है। इसलिए उस पर अतिरेक अथवा आर्थिक लगान होता है। इस प्रकार गहन खेती में लगान श्रम और पूँजी की अधिसीमान्त इकाई और सीमान्त इकाई की उपज के अन्तर के बराबर होता है।
उदाहरण - माना कोई उत्पादक अपनी भूमि पर श्रम व पूँजी की चार इकाइयाँ लगाता है, जिससे उसे क्रमशः 40, 30, 20 लगानरहित व 10 क्विटल गेहूँ की उपज प्राप्त होती है। इस प्रकार चौथी इकाई सीमान्त इकाई है। सीमान्त इकाई की अपेक्षा पहली, दूसरी और तीसरी इकाइयों से क्रमशः 40 - 10 = 30, 30 - 10 = 20 तथा 20 - 10 = 10 क्विटल अधिक उपज प्राप्त होती है। यही इन इकाइयों का आर्थिक लगान है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र श्रम और पूँजी की विभिन्न इकाइयों (1, 2, 3, 4) के उपयोग से प्राप्त उपज (क्विंटल में) को दर्शाता है। चौथी इकाई सीमान्त इकाई है और लगानरहित है, जबकि पहली, दूसरी और तीसरी इकाइयों से प्राप्त होने वाला लगान छायांकित क्षेत्र द्वारा इंगित किया गया है।
चित्र में Ox-अक्ष पर श्रम व पूँजी की इकाइयाँ तथा श्रम व पूँजी की इकाइयाँ OY-अक्ष पर उपज क्विटलों में प्रदर्शित की गयी है। चित्र में रेखांकित आयत भाग लगान की ओर इंगित करता है। चौथी इकाई सीमान्त इकाई है; अतः यह लगानरहित है।
सिद्धान्त की आलोचनाएँ
आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने रिकाडों के लगान (अधिशेष) सिद्धान्त की कटु आलोचनाएँ की हैं। प्रमुख आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं
1. भूमि में मौलिक एवं अविनाशी शक्तियाँ नहीं होतीं - रिकोड़ों के अनुसार, लगान भूमि की मौलिक एवं अविनाशी शक्तियों के प्रयोग के लिए दिया जाने वाला प्रतिफल है। आलोचकों का मत है। कि भूमि में मौलिक एवं अविनाशी शक्तियाँ नहीं होती। भूमि की उपजाऊ शक्ति प्राकृतिक होती है। उसमें सिंचाई, खाद व अन्य प्रकार के भूमि सुधारों से भूमि की उपजाऊ शक्ति में वृद्धि की जा सकती है; अतः भूमि की उपजाऊ शक्ति मौलिक नहीं है। भूमि की शक्ति को अविनाशी भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि भूमि के निरन्तर प्रयोग से उसकी उपजाऊ शक्ति का ह्रास होता है। इस प्रकार रिका का मते उचित प्रतीत नहीं होता।
2. खेती करने का क्रम ऐतिहासिक दृष्टि से ठीक नहीं - रिकार्डों के अनुसार, सबसे पहले खेती अधिक उपजाऊ तथा अच्छी स्थिति वाली भूमि पर की जाती है तथा उसके बाद घटिया भूमि पर, परन्तु कैरे और रोशर आदि अर्थशास्त्रियों के अनुसार खेती का यह क्रम ठीक नहीं है। लोग सबसे पहले उन भूमियों पर खेती करते हैं जो सबसे अधिक सुविधापूर्ण होती हैं चाहे वह कम उपजाऊ ही क्यों न हों।।
3. अपूर्ण एवं अस्पष्ट सिद्धान्त - यह सिद्धान्त लगान उत्पन्न होने के कारणों पर उचित प्रकाश नहीं डालता। यह सिद्धान्त केवल यह बताता है कि श्रेष्ठ भूमि का लगान निम्न श्रेणी की भूमि की तुलना में अधिक क्यों होता है। यह इस बात को स्पष्ट नहीं करता कि लगान क्यों उत्पन्न होता है और न ही लगान को उत्पन्न करने वाले कारणों का विश्लेषण करता है।
4. यह सिद्धान्त काल्पनिक है - यह सिद्धान्त अवास्तविक मान्यताओं पर आधारित है। वास्तविक जीवन में पूर्ण प्रतियोगिता नहीं पायी जाती है। अतः यह सिद्धान्त व्यावहारिक दृष्टि से उचित प्रतीत नहीं होता। इसलिए कहा जा सकता है कि यह सिद्धान्त काल्पनिक है।
5. कोई भी भूमि लगानरहित नहीं होती - रिकाडों की यह मान्यता कि सीमान्त भूमि लगानरहित भूमि होती है, उचित नहीं है। विकसित देशों में ऐसी कोई भूमि नहीं होती जिस पर लगाने न दिया जाता हो । अतः सीमान्त भूमि तथा लगानरहित भूमि की मान्यता केवल कल्पना मात्र है।
6. लगान केवल भूमि को प्राप्त होता है - रिकाडों की यह धारणा गलत है कि लगान केवल भूमि को ही प्राप्त होता है। आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार, लगान अवसर लागत पर अतिरेक है जो उत्पत्ति के किसी भी साधन को प्राप्त हो सकता है।
7. लगान कीमत को प्रभावित करता है - रिकाडों का यह विचार कि लगान कीमत को प्रभावित नहीं करता, ठीक नहीं है। केवल कुछ दशाओं में अधिशेष कीमत में सम्मिलित रहता है और कीमत का निर्धारण भी करता है। व्यक्तिगत किसान की दृष्टि से लागत एक लगान होती है, इसलिए वह अनाज की कीमत को प्रभावित करता है।
8. कृषि पर सदैव ही उत्पत्ति ह्रास नियम लागू नहीं होता - लगान का यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि कृषि में केवल उत्पत्ति ह्रास नियम लागू होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि कृषि में उत्पत्ति वृद्धि नियम तथा उत्पत्ति समता नियम भी लागू हो सकते हैं।
9. लगान कीमत में सम्मिलित होता है - रिकाड तथा प्राचीन अर्थशास्त्रियों के अनुसार अधिशेष (लगान) खेती की उपज की कीमत में सम्मिलित नहीं रहता अर्थात् खेती की उपज की कीमत के निर्धारण में लगान का कुछ भी प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि लगान और कीमत एक-दूसरे से भिन्न या असम्बन्धित नहीं हैं। यद्यपि अधिशेष (लगान) कीमत का निर्धारण नहीं करता, परन्तु स्वयं अधिशेष का निर्धारण भूमि की कीमत द्वारा होता है।
In simple words: रिकार्डो का लगान सिद्धान्त बताता है कि लगान उपजाऊ और सीमान्त भूमि की उपज के अन्तर के कारण उत्पन्न होता है। यह भूमि की मौलिक और अविनाशी शक्तियों पर आधारित है, लेकिन इसकी कई मान्यताओं और आलोचनाओं के कारण यह पूर्णतः व्यवहारिक नहीं है।
🎯 Exam Tip: रिकार्डो के लगान सिद्धान्त की विस्तृत एवं सघन खेती के तहत व्याख्या करते समय, सीमान्त भूमि की अवधारणा और विभिन्न श्रेणियों की भूमि पर लगान के निर्धारण को उदाहरणों और तालिका के साथ स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। आलोचनात्मक विश्लेषण में सिद्धान्त की कमियों को उजागर करें।
Question 3. लगान के आधुनिक सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए। यह रिकार्डों के लगान सिद्धान्त से किस प्रकार श्रेष्ठ है ?
Answer: लगान का आधुनिक सिद्धान्त - लगान का आधुनिक सिद्धान्त माँग और पूर्ति के सामान्य सिद्धान्त का ही एक संशोधित रूप है। इस सिद्धान्त के अनुसार लगान दुर्लभता के कारण प्राप्त होता है। लगान केवल भूमि की ही विशेषता नहीं, बल्कि वह अन्य उत्पत्ति के साधनों को भी मिल सकता है; क्योंकि आधुनिक अर्थशास्त्रियों का मत है कि उत्पत्ति के अन्य साधन भी भूमि की भाँति सीमितता अथवा भूमि तत्त्व को प्राप्त कर सकते हैं। आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार लगान का भी एक सामान्य सिद्धान्त होना चाहिए; अतः इन अर्थशास्त्रियों ने माँग और पूर्ति के सिद्धान्त को लगान के निर्धारण के सम्बन्ध में लागू करने का प्रयत्न किया है। आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने लगान के दुर्लभता सिद्धान्त' को विकसित किया है। इस सिद्धान्त के अनुसार, भूमि की दुर्लभता के कारण लगान उत्पन्न होता है। यदि भूमि असीमित होती तो कीमत या लगान देने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
लगान के आधुनिक सिद्धान्त का आधार - लगान के आधुनिक सिद्धान्त का आधार साधनों की विशिष्टता का होना है। वॉन वीजर (Von wieser) ने विशिष्टता के आधार पर उत्पत्ति के साधनों को निम्नलिखित दो भागों में बाँटा है
1. पूर्णतया विशिष्ट साधन - पूर्णतया विशिष्ट साधन वे साधन होते हैं जिनका उपयोग केवल एक विशिष्ट कार्य में ही किया जा सकता है। इस प्रकार के साधनों को किसी अन्य उपयोग में नहीं लाया जा सकता, इसलिए इनकी अवसर लागत शून्य होती है।
2. पूर्णतया अविशिष्ट साधन - पूर्णतया अविशिष्ट साधन वे साधन होते हैं जिन्हें किसी भी उपयोग में लाया जा सकता है अर्थात् जिनमें गतिशीलता पायी जाती है।
परन्तु कोई भी साधन न तो पूर्णतया विशिष्ट होता है और न पूर्णतया अविशिष्ट । प्रायः साधन आंशिक रूप से विशिष्ट और आंशिक रूप से अविशिष्ट होते हैं।
आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार, लगान साधनों की विशिष्टता का परिणाम है। 'विशिष्टता एवं 'भूमि तत्त्व' एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं, अर्थात् विशिष्टता शब्द के लिए भूमि तत्त्व' शब्द का भी प्रयोग किया जा सकता है।
श्रीमती जॉन रॉबिन्सन के अनुसार, “लगान के विचार का सार वह बचत है जो कि एक साधन की इकाई को उस न्यूनतम आय के ऊपर प्राप्त होती है जो कि साधन को अपने कार्य करते रहने के लिए आवश्यक है।”
प्रो० बोल्डिग के शब्दों में, “आर्थिक बचत अथवा आर्थिक लागत उत्पत्ति के किसी साधन की एक इकाई का वह भुगतान है जो कि कुल पूर्ति मूल्य के ऊपर आधिक्य है अर्थात् साधन को वर्तमान व्यवसाय में बनाये रखने के लिए आवश्यक न्यूनतम धनराशि के ऊपर आधिक्य है।” उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि लगान एक बचत है जो किसी साधन को उसके न्यूनतम पूर्ति मूल्य अर्थात् अवसर लागत के ऊपर प्राप्त होती है। अर्थात् लगान = वास्तविक आय - अवसर लागत
स्पष्ट है कि लगाने प्रत्येक साधन को विशिष्टता के गुण के कारण प्राप्त होता है।
लगान के आधुनिक सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ
1. इस सिद्धान्त के अनुसार उत्पत्ति का प्रत्येक साधन लगान प्राप्त कर सकता है।
2. साधने की वास्तविक आय में से अवसर लागत को घटाकर लगान ज्ञात किया जा सकता है।
3. लगान की उत्पत्ति का कारण साधन की विशिष्टता या सीमितता का होना है।
4. लगान का सिद्धान्त माँग और पूर्ति का ही सिद्धान्त है।
रिकार्डों के सिद्धान्त से आधुनिक सिद्धान्त की भिन्नता - आधुनिक लगान सिद्धान्त व रिकार्डों के लगान सिद्धान्त में निम्नलिखित भिन्नताएँ पायी जाती हैं
(1) प्राचीन अर्थशास्त्री यह समझते थे कि लगान केवल भूमि के सम्बन्ध में ही प्राप्त होता है। रिकाडों ने भी केवल लगान की व्याख्या भूमि के सन्दर्भ में ही की, परन्तु आधुनिक लगान सिद्धान्त के अनुसार उत्पत्ति के अन्य साधनों को भी लगान प्राप्त हो सकता है। उदाहरण के लिए—‘योग्यता के लगान का विचार' यह बताता है कि मनुष्य की प्राकृतिक योग्यता एक प्रकार की भूमि ही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल भूमिपति ही अतिरिक्त आय प्राप्त नहीं करता, बल्कि उत्पत्ति के अन्य साधनों को भी इसी प्रकार की आय प्राप्त हो सकती है।
(2) रिकार्डों का लगाने सिद्धान्त एक संकुचित धारणा है, जबकि आधुनिक लगान सिद्धान्त का दृष्टिकोण व्यापक है। आधुनिक अर्थशास्त्रियों की यह धारणा है कि लगान उत्पादन के सभी साधनों को प्राप्त हो सकता है, अपेक्षाकृत व्यापक धारणा है।
(3) रिकाडों के लगान सिद्धान्त के अनुसार भूमि प्रकृति का उपहार है, इसकी पूर्ति सीमित है। भूमि की सीमितता के गुण अन्य साधनों में नहीं पाये जाते, इसलिए उन्हें लगान प्राप्त नहीं होता है। आधुनिक लगान सिद्धान्त के अनुसार अल्पकाल में सभी साधनों की पूर्ति सीमित होती है तथा लगान सिद्धान्त भी माँग और पूर्ति का सामान्य सिद्धान्त ही है। इसके लिए किसी पृथक् सिद्धान्त की आवश्यकता नहीं थी।
रिकार्डों का लगान सिद्धान्त लगान उत्पन्न होने के कारणों पर उचित प्रकाश नहीं डालता। यह केवल यह बताता है कि श्रेष्ठ भूमि का लगान निम्नकोटि की भूमि की तुलना में अधिक क्यों होता है ? यह इस बात को स्पष्ट नहीं करता कि लगान क्यों उत्पन्न होता है। इसके विपरीत आधुनिक लगाने सिद्धान्त यह बताता है कि लगाने की उत्पत्ति किसी साधन की विशिष्टता या सीमितता के कारण होती है; अतः यह तर्क उचित व न्यायसंगत है। उपर्युक्त कारणों से रिकार्डों के लगान सिद्धान्त की अपेक्षा, लगान के आधुनिक सिद्धान्त को श्रेष्ठ माना जाता है।
In simple words: आधुनिक लगान सिद्धान्त बताता है कि लगान किसी भी साधन को उसकी दुर्लभता या विशिष्टता के कारण प्राप्त होता है, न कि केवल भूमि को। यह माँग और पूर्ति पर आधारित एक व्यापक सिद्धान्त है जो वास्तविक आय और अवसर लागत के अन्तर को लगान मानता है।
🎯 Exam Tip: आधुनिक लगान सिद्धान्त की व्याख्या में 'दुर्लभता' और 'अवसर लागत' की अवधारणाओं को शामिल करना महत्वपूर्ण है। रिकार्डो के सिद्धान्त से इसकी श्रेष्ठता बताते हुए, साधनों की विशिष्टता और माँग-पूर्ति के प्रभाव पर जोर दें।
लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
Question 1. “अनाज का मूल्य इसलिए ऊँचा नहीं होता है, क्योंकि लगान दिया जाता है, बल्कि लगान इसलिए दिया जाता है, क्योंकि अनाज महँगा है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
या
लगान तथा कीमत के सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए।
Answer: लगान तथा कीमतों में सम्बन्ध लगान कीमत का निर्धारण नहीं करता, परन्तु स्वयं अधिशेष का निर्धारण भूमि की कीमत द्वारा होता है। इस विचार को रिकार्डो ने इन शब्दों में व्यक्त किया है-“अनाज इसलिए महँगा नहीं है, क्योंकि अधिशेष दिया जाता है; बल्कि अधिशेष इसलिए दिया जाता है, क्योंकि अनाज महँगा है।” रिकार्डों के इस कथन की व्याख्या दो भागों में बाँटकर की जा सकती है
1. लगान मूल्य को प्रभावित नहीं करता या अधिशेष कीमत का निर्धारण नहीं करता - अधिशेष न तो कीमत में सम्मिलित होता है और न उसका निर्धारण ही करता है। रिकाडों के लगाने सिद्धान्त से यह तथ्य पूर्णतया स्पष्ट हो जाता है। रिकार्डों के अनुसार, अनाज की कीमत सीमान्त भूमि पर होने वाले उत्पादन व्यय द्वारा निश्चित होती है। चूंकि रिकार्डों के अधिशेष सिद्धान्त के अनुसार सीमान्त भूमि लगानहीन भूमि होती है। अतः अधिशेष (लगान) न तो सीमान्त भूमि की उत्पादन लागत का अंश ही होता है और न कीमत का निर्धारण ही करता है। इस प्रकार अनाज के मूल्य में जो सीमान्त भूमि के उत्पादन व्यय द्वारा निश्चित होता है, लगान सम्मिलित नहीं होता है। अतः यदि लगान कम कर दिया जाए अथवा भूमि को लगाने-मुक्त कर दिया जाए तो भी अनाज के मूल्य पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
2. मूल्य लगान को प्रभावित करता है या लगान का निर्धारण कीमत द्वारा होता है - अधिशेष कीमत का निर्धारण नहीं करता, परन्तु स्वयं अधिशेष का निर्धारण खेती की उपज की कीमत के अनुसार होता है। कृषि पदार्थों का मूल्य बढ़ जाने पर खेती की सीमा या क्षेत्र विस्तृत हो जाता है अर्थात् घटिया भूमि पर भी खेती की जाने लगती है। जैसे-जैसे घटिया भूमि का उपयोग खेती में किया जाता है वैसे-वैसे अच्छी भूमि का लगान बढ़ता जाता है। मूल्य बढ़ जाने से सीमान्त भूमि अधिसीमान्त हो जाती है, जिसके कारण लगानहीन भूमि पर भी लगान उत्पन्न हो जाता है। इसके अतिरिक्त जो भूमि पहले से ही अधिसीमान्त थी उस पर अधिशेष (लगान) की मात्रा बढ़ जाती है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि कृषि वस्तुओं के मूल्यों में होने वाली वृद्धि भूमि के लगान को बढ़ाती है। इनका मूल्य गिरने पर लगान भी कम हो जाता है। इसलिए रिकार्डो का यह कथन सत्य है कि “अनाज का मूल्य इसलिए ऊँचा नहीं है कि लगान दिया जाता है, वरन् लगान इसलिए दिया जाता है, क्योंकि अनाज की कीमत ऊँची है।”
In simple words: रिकार्डो के अनुसार, अनाज का मूल्य अधिक होने के कारण ही लगान उत्पन्न होता है, न कि लगान के कारण अनाज महँगा होता है। यह सिद्धान्त बताता है कि लगान कीमत का निर्धारण नहीं करता, बल्कि कृषि उत्पादों की कीमत ही लगान की मात्रा को प्रभावित करती है।
🎯 Exam Tip: लगान और कीमत के बीच रिकार्डो के सम्बन्ध को स्पष्ट करते समय, सीमान्त भूमि की अवधारणा और यह कैसे मूल्य निर्धारण को प्रभावित नहीं करती, इस पर ध्यान केंद्रित करें। अनाज के मूल्य में वृद्धि से लगान कैसे बढ़ता है, यह समझाना भी महत्वपूर्ण है।
Question 2. रिकार्डों के लगान सिद्धान्त तथा आधुनिक लगान सिद्धान्त में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: रिकार्डों के लगान सिद्धान्त तथा आधुनिक लगान सिद्धान्त में अन्तर
| क्र० सं० | रिकार्डो का लगान सिद्धान्त | आधुनिक लगान सिद्धान्त |
|---|---|---|
| 1. | रिकाडों के अनुसार, "लगान भूमि की उपज का वह भाग है जो भूमि के स्वामी को भूमि की मौलिक तथा अविनाशी शक्तियों के प्रयोग के लिए दिया जाता है।" | आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार, "लगान के विचार का सार वह बचत है जो कि एक साधन की इकाई उस न्यूनतम आय के ऊपर प्राप्त करती है जो साधन को अपने कार्य करते रहने के लिए आवश्यक है।" |
| 2. | रिकार्डों के लगान सिद्धान्त के अनुसार केवल भूमि ही लगान प्राप्त कर सकती है। | आधुनिक लगान सिद्धान्त के अनुसार, लगान केवल भूमि को ही नहीं, बल्कि उत्पादन के अन्य साधनों को भी मिल सकता है। |
| 3. | रिकार्डों के अनुसार, "लगान वह अतिरेक है जो श्रेष्ठ भूमि के ऊपर प्राप्त होता है।" दूसरे शब्दों में, लगान सीमान्त भूमि और अधिसीमान्त भूमि के बीच का अन्तर होता है। | आधुनिक लगान सिद्धान्त के अनुसार लगान एक बचत है जो किसी भी साधन की इकाई को उसकी न्यूनतम पूर्ति कीमत अथवा अवसर लागत के ऊपर प्राप्त होती है। साधन की वास्तविक आय में से उसकी अवसर लागत को घटाकर लगान मालूम किया जा सकता है। संक्षेप में, लगान = वास्तविक आय - अवसर लागत |
| 4. | रिकाडों के अनुसार, ऊँचे लगान प्रकृति की उदारता के कारण उत्पन्न नहीं होते, बल्कि उसकी कंजूसी के कारण उत्पन्न होते हैं, क्योंकि कृषि में उत्पत्ति ह्रास नियम लागू होता है। | लगान की उत्पत्ति किसी साधन की विशिष्टता या सीमितता के कारण होती है। आधुनिक सिद्धान्त के समर्थकों के अनुसार, लगान का कारण केवल उन साधनों की विशिष्टता ही है तथा लगान केवल विशिष्ट साधनों को ही मिलता है। |
| 5. | रिकार्डों के अनुसार, लगान भू-स्वामी को ही प्राप्त होता है। | आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार, लगान उत्पत्ति के प्रत्येक साधन के स्वामी प्राप्त कर सकते हैं। |
| 6. | रिकार्डों के अनुसार, सीमान्त भूमि लगानरहित भूमि होती है। | आधुनिक सिद्धान्त के अनुसार जो साधन पूर्णतया अविशिष्ट होता है, उसे कोई लगान प्राप्त नहीं होता। |
| 7. | रिकार्डों के लगान सिद्धान्त के अनुसार, लगान का निर्धारण अधिसीमान्त भूमि और सीमान्त भूमि से उत्पन्न होने वाली उपज से होता है। | आधुनिक लगान सिद्धान्त के अनुसार लगान का निर्धारण साधन की माँग व पूर्ति के द्वारा होता है। |
| 8. | रिकाडों का लगान सिद्धान्त पूर्ण प्रतियोगिता और दीर्घकाल की अवास्तविक मान्यताओं के कारण व्यावहारिक दृष्टि से बहुत कम महत्त्वपूर्ण है। | आधुनिक लगान सिद्धान्त, लगान का सामान्य सिद्धान्त है तथा व्यावहारिक दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है। |
In simple words: रिकार्डो का लगान सिद्धान्त केवल भूमि पर केंद्रित है, इसे भूमि की मौलिक शक्तियों का प्रतिफल मानता है और सीमान्त भूमि को लगानरहित मानता है। इसके विपरीत, आधुनिक लगान सिद्धान्त एक व्यापक अवधारणा है जो किसी भी साधन की दुर्लभता या विशिष्टता के कारण लगान की उत्पत्ति को मानता है, और इसे अवसर लागत से अधिक आय के रूप में परिभाषित करता है।
🎯 Exam Tip: दोनों सिद्धान्तों के बीच अन्तर बताते समय, उनकी परिभाषाएँ, लगान के प्राप्तकर्ता, उत्पत्ति के कारण और अवधारणा की व्यापकता पर विशेष ध्यान दें। एक तुलनात्मक तालिका बनाना अत्यंत प्रभावी होता है।
Question 3. क्या लगान केवल भूमि को ही प्राप्त होता है ?
Answer: रिकार्डों के अनुसार, केवल भूमि ही लगान प्राप्त कर सकती है, क्योंकि भूमि में कुछ ऐसी विशेषताएँ पायी जाती हैं जो अन्य साधनों में नहीं होतीं; जैसे-भूमि प्रकृति का निःशुल्क उपहार है। अर्थात् समाज के लिए भूमि की उत्पादन लागत शून्य होती है। भूमि सीमित होती है और समाज की दृष्टि से उसकी कुल मात्रा को घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता। सीमितता केवल भूमि की ही विशेषता है जो उसे उत्पत्ति के अन्य साधनों से अलग कर देती है। आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार लगान अवसर लागत (Opportunity cost) पर अतिरेक है जो उत्पत्ति के किसी भी साधन को प्राप्त हो सकता है। जिस साधन की पूर्ति बेलोचदार हो जाती है। वही साधन लगान प्राप्त करने लगता है। लगान के आधुनिक सिद्धान्त के अनुसार किसी साधन को लगान उसकी दुर्लभता के कारण प्राप्त होता है। लगान केवल भूमि की विशेषता नहीं है, बल्कि वह अन्य उत्पत्ति के साधनों को मिल सकता है। आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अन्य साधन भूमि की भाँति सीमितता (Limitedness) अथवा भूमि तत्त्व (Land element) को प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए लगान उन्हें भी प्राप्त हो सकता है।
प्रो० मार्शल ने योग्यता के लगान का विश्लेषण करके लगान के विचार को विस्तृत कर दिया है। प्राचीन अर्थशास्त्री यह समझते थे कि लगान केवल भूमि के सम्बन्ध में ही उत्पन्न होता है, किन्तु मार्शल के अनुसार, लगान कई प्रकार के हो सकते हैं और भूमि का लगान उसका एक विशेष उदाहरण है। इस प्रकार, प्रो० मार्शल ने योग्यता के लगान का विचार देकर लगान के आधुनिक सिद्धान्त की नींव डाली। योग्यता का लगान का विचार हमें यह बताता है कि मनुष्य में भी भूमि (Land) का कुछ अंश पाया जाता है। मनुष्य की प्राकृतिक योग्यता एक प्रकार से भूमि ही है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि केवल भूमिपति ही अतिरेक आय प्राप्त नहीं करता, बल्कि उत्पत्ति के अन्य साधनों को भी इस प्रकार की आय प्राप्त हो सकती है। अतः लगान केवल भूमि को ही प्राप्त नहीं होता है, बल्कि उत्पादन के अन्य उपादानों श्रमिकों, पूंजीपतियों तथा उद्यमियों आदि को भी प्राप्त होता है।
In simple words: रिकार्डो के अनुसार लगान केवल भूमि को मिलता है क्योंकि यह प्रकृति का उपहार और सीमित है। आधुनिक अर्थशास्त्री इसे अवसर लागत से अधिक मानते हैं और कहते हैं कि यह किसी भी दुर्लभ या विशिष्ट साधन को मिल सकता है, जैसे योग्य श्रमिकों या पूंजीपतियों को भी।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, रिकार्डो के और आधुनिक अर्थशास्त्रियों के विचारों का तुलनात्मक विश्लेषण करें। भूमि की विशिष्ट विशेषताओं के साथ-साथ अन्य साधनों की दुर्लभता को भी स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 4. रिकार्डों के लगान सिद्धान्त व आभास लगान की तुलना कीजिए ।
Answer: रिकार्डों के लगान सिद्धान्त तथा आभास लगान में तुलना
समानताएँ (Similarities)
1. दोनों के उत्पन्न होने के कारण समान हैं। लगान कृषि उपज की माँग बढ़ने के कारण उत्पन्न होता है और आभास लगान मानव द्वारा निर्मित पूँजीगत वस्तुओं की माँगे बढ़ने के कारण उत्पन्न होता है।
2. लगान भूमि की पूर्ति निश्चित होने के कारण उत्पन्न होता है। इसी प्रकार आभास लगान अल्पकाल में पूँजीगत वस्तुओं की पूर्ति निश्चित होने के कारण उत्पन्न होता है।
3. लगान कीमत को प्रभावित नहीं करता, अपितु कीमत द्वारा प्रभावित होता है। इसी प्रकार आभास लगान भी कीमत को प्रभावित नहीं करता, अपितु कीमत द्वारा प्रभावित होता है।
असमानताएँ (Dissimilarities)
1. रिकार्डों के अनुसार, “लगान प्राकृतिक उपहारों (भूमि) पर प्राप्त होता है, जबकि आभास लगान मनुष्य द्वारा निर्मित वस्तुओं पर प्राप्त होता है।”
2. आभास लगान केवल अल्पकाल में प्राप्त होता है, जबकि रिकार्डों के अनुसार लगान अल्पकाल व दीर्घकाल दोनों में प्राप्त होता है।
3. रिकाडों के अनुसार, लगान एक स्थायी आधिक्य हैं, जबकि आभास लगन एक अस्थायी आधिक्य है।
In simple words: रिकार्डो का लगान प्राकृतिक उपहारों (भूमि) पर मिलता है और दीर्घकालीन होता है, जबकि आभास लगान मानव निर्मित पूंजीगत वस्तुओं पर अल्पकाल के लिए मिलता है। दोनों ही माँग में वृद्धि और सीमित आपूर्ति के कारण उत्पन्न होते हैं और कीमत को प्रभावित नहीं करते, बल्कि कीमत से प्रभावित होते हैं।
🎯 Exam Tip: रिकार्डो के लगान और आभास लगान की तुलना करते समय, उनकी उत्पत्तिके कारण, प्रकृति (प्राकृतिक बनाम मानव निर्मित), समय-सीमा (अल्पकाल/दीर्घकाल) और कीमत पर प्रभाव की समानताएँ व असमानताएँ स्पष्ट रूप से बताएँ।
Question 5. आर्थिक लगान तथा ठेका लगान में क्या अन्तर है ?
Answer:
| क्र० सं० | आर्थिक लगान | ठेका लगान |
|---|---|---|
| 1. | आर्थिक लगान का निर्धारण समझौते के आधार पर न होकर भूमि की उपज पर निर्भर होता है। | यह दो व्यक्तियों के बीच समझौते के आधार पर निश्चित होता है। |
| 2. | आर्थिक लगान अधिसीमान्त और सीमान्त भूमि की उपज के अन्तर के बराबर होता है। | ठेके का लगान अधिशेष से कम अथवा अधिक भी हो सकता है। |
| 3. | आर्थिक लगान पूर्व-निश्चित नहीं होता; इसमें घट-बढ़ हो सकती है। यह भूमि की उपज के पश्चात् निर्धारित होता है। | यह लगान समझौते के अनुसार पूर्व-निश्चित रहता है। इसमें घट-बढ़ नहीं होती। |
| 4. | आर्थिक लगान प्रत्येक स्थिति में उत्पन्न होता है, चाहे भूमि किराये पर दूसरे को दी जाए अथवा चाहे भूमिपति स्वयं उसका उपयोग करे। | यह केवल उसी दशा में उत्पन्न होता है जब भूमि किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर दी जाती है। |
| 5. | यह न्यायोचित है। इसमें किसी का शोषण नहीं होता है। | जब समझौते के अनुसार किराया अधिशेष से अधिक होता है तब यह आर्थिक और नैतिक दोनों ही दृष्टिकोणों से अनुचित होता है। |
In simple words: आर्थिक लगान भूमि की वास्तविक उपज से निर्धारित होता है और इसमें घट-बढ़ संभव है, जबकि ठेका लगान दो व्यक्तियों के बीच पूर्व-निश्चित समझौते पर आधारित होता है। आर्थिक लगान न्यायोचित है, लेकिन ठेका लगान शोषणकारी हो सकता है यदि यह वास्तविक लगान से अधिक हो।
🎯 Exam Tip: आर्थिक लगान और ठेका लगान के अन्तर को स्पष्ट करते समय, उनके निर्धारण का आधार, राशि में घट-बढ़ की संभावना, उत्पत्ति की शर्तें और नैतिक औचित्य के बिन्दुओं पर ध्यान दें। तुलनात्मक तालिका का उपयोग प्रभावी होता है।
Question 6. जनसंख्या की वृद्धि का लगान पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: जनसंख्या में वृद्धि होने पर लगान में वृद्धि हो जाती है। जनसंख्या की वृद्धि से खाद्य-पदार्थों की माँग बढ़ती है। इस माँग की पूर्ति हेतु खाद्य-पदार्थों का उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। उत्पादन बढ़ाने के लिए या तो भू-प्रधान खेती की जाएगी या श्रम-प्रधान खेती । इन दोनों प्रकार की खेती में लगान बढ़ेगा।
भू-प्रधान खेती में लगान पर प्रभाव - मान लीजिए खाद्य-पदार्थों की माँग की पूर्ति हेतु विस्तृत खेती का प्रयोग किया जाता है। तब हम कम अच्छी अर्थात् 'घटिया' प्रकार की भूमि पर भी खेती करना आरम्भ कर देंगे। इससे खेती की सीमा (क्षेत्रफल) में वृद्धि होगी, जिससे सीमान्त भूमि अब अधिसीमान्त भूमि हो जाएगी तथा सीमान्त भूमि और अधिसीमान्त भूमि की उपज का अन्तर बढ़ जाएगा, परिणामस्वरूप अधिशेष (लगान) में वृद्धि होगी ।
श्रम-प्रधान खेती में लगान पर प्रभाव - यदि उपज बढ़ाने के लिए श्रम-प्रधान खेती की जाती है अर्थात् उसी भूमि पर श्रम तथा पूँजी की मात्रा बढ़ाकर उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जाता है तब भी अधिशेष में वृद्धि होगी, क्योंकि श्रम और पूँजी से सीमान्त इकाई तथा अधिसीमान्त इकाई की उपज का अन्तर अधिक हो जाएगा। इस प्रकार लगान में वृद्धि होगी ।
भूमि का अधिशेष या लगान इस कारण भी बढ़ जाता है, क्योंकि जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ रहने के लिए आवास, पार्क, क्रीड़ास्थल, कारखाने, विद्यालय, चिकित्सालय आदि के लिए भी भूमि की आवश्यकता पड़ती है। अतः अतिरिक्त भूमि की माँग बढ़ जाती है या उपयोग में आने लगती है, परिणामस्वरूप लगान में वृद्धि हो जाती है।
In simple words: जनसंख्या वृद्धि से खाद्य पदार्थों और आवास की मांग बढ़ती है, जिससे भूमि पर खेती का विस्तार होता है (भू-प्रधान खेती) या गहन खेती की जाती है (श्रम-प्रधान खेती)। दोनों ही स्थितियों में सीमान्त और अधिसीमान्त भूमि के बीच का अन्तर बढ़ता है, परिणामस्वरूप लगान में वृद्धि होती है।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि के कारण लगान पर प्रभाव समझाते समय, खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग और भूमि के विस्तृत तथा गहन उपयोग पर इसके प्रभाव को स्पष्ट करें। भू-प्रधान और श्रम-प्रधान खेती के अलग-अलग प्रभावों का उल्लेख करें।
Question 7. परिवहन के साधनों के विकास का लगान पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: परिवहन के साधनों के विकास का लगाने पर प्रभाव-यदि यातायात के साधनों की उन्नति हो जाती है तो यातायात के साधन उत्तम, सस्ते एवं सुविधापूर्वक उपलब्ध होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में लगान पर दोनों प्रकार के प्रभाव पड़ते हैं। लगान की मात्रा में वृद्धि भी हो जाती है तथा कमी भी। यातायात के उत्तम और सस्ते साधन उपलब्ध होने से दूर-दूर से कृषि उत्पादन को बाजार व मण्डियों में भेजकर फसल की उचित कीमत प्राप्त की जा सकती है, जिसका परिणाम यह होता है कि घटिया श्रेणी की भूमि पर भी कृषि कार्य प्रारम्भ हो जाता है, जिसके कारण सीमान्त भूमि अधिसीमान्त हो जाती है तथा लगान उत्पन्न हो जाता है।
परिवहन के साधन विकसित हो जाने से सुदूर स्थानों से जनसंख्या आकर बसने लगती है, जिसके कारण भूमि व अनाज की माँग बढ़ती है और लगाने में भी वृद्धि हो जाती है। यातायात के साधनों में विकास हो जाने से कभी-कभी लगाने की मात्रा पर विपरीत प्रभाव भी पड़ता है, क्योंकि यदि अनाज का विदेशों से कम मूल्य पर आयात कर लिया जाता है तब वहाँ पर घटिया भूमि अर्थात् सीमान्त भूमि पर खेती होनी बन्द हो जाएगी, जिससे लगान की मात्रा कम हो जाएगी।
In simple words: परिवहन साधनों के विकास से कृषि उत्पादों को दूर के बाजारों में भेजना आसान और सस्ता हो जाता है, जिससे घटिया भूमियों पर भी खेती शुरू होती है और लगान बढ़ता है। हालांकि, सस्ते आयात से कुछ भूमियों पर खेती बंद हो सकती है, जिससे लगान कम भी हो सकता है।
🎯 Exam Tip: परिवहन के साधनों के विकास से लगान पर पड़ने वाले प्रभावों की व्याख्या करते समय, सकारात्मक (बाजार पहुँच, घटिया भूमि का उपयोग, लगान में वृद्धि) और नकारात्मक (सस्ते आयात से खेती का बंद होना, लगान में कमी) दोनों पहलुओं को स्पष्ट करें।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. लगान और लाभ में क्या अन्तर है ?
Answer: लगान और लाभ में अन्तर
| क्र० सं० | लगान | लाभ |
|---|---|---|
| 1. | वितरण की प्रक्रिया में भूस्वामी को राष्ट्रीय आय का जो भाग प्राप्त होता है वह लगान है। | वितरण की प्रक्रिया में उद्यमी के पास जाने वाले राष्ट्रीय आय के भाग को लाभ कहा जाता है। |
| 2. | लगान भूस्वामी को भूमि से प्राप्त होता है। | लाभ उद्यमी को जोखिम सहन करने अर्थात् उद्यम से प्राप्त होता है। |
| 3. | लगान भूमि की मौलिक व अविनाशी शक्तियों के उपयोग के बदले भूस्वामी को दिया जाता है। | लाभ उद्यमी को उसकी योग्यता, उसके मानसिक श्रम आदि के कारण प्राप्त होता है। |
| 4. | लगान ऋणात्मक नहीं हो सकता। | लाभ ऋणात्मक भी हो सकता है। |
| 5. | लगान में अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता है। प्रायः यह स्थिर रहता है। | लाभ की दर में अधिक उतार-चढ़ाव पाये जाते हैं। |
| 6. | लगान पहले से ही अनुबन्धित होता है। इस प्रकार लगान में निश्चितता पायी जाती है। | लाभ पहले से ही निश्चित नहीं होता है; अतः लाभ में काफी अनिश्चितता पायी जाती है। |
| 7. | रिकार्डों के अनुसार केवल भूमि ही लगान प्राप्त कर सकती है। | आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार लगान अवसर लागत पर अतिरेक होता है; अतः उत्पत्ति के किसी भी साधन को प्राप्त हो सकता है। |
In simple words: लगान भूमि के उपयोग के लिए भूस्वामी को प्राप्त होता है, जबकि लाभ उद्यमी को उसके जोखिम और योग्यता के लिए मिलता है। लगान अपेक्षाकृत स्थिर और अनुबन्धित होता है, जबकि लाभ अनिश्चित और परिवर्तनशील होता है।
🎯 Exam Tip: लगान और लाभ के बीच अन्तर बताते समय, उनके प्राप्तकर्ता, उत्पत्ति के कारण, प्रकृति (निश्चितता, उतार-चढ़ाव, धनात्मक/ऋणात्मक) और आधुनिक सिद्धान्तों के परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट तुलना करें।
Question 2. कुल लगान किसे कहते हैं ? कुल लगान के तत्त्व बताइए।
Answer: कुल लगान - कुल लगान के अन्तर्गत आर्थिक लगान के अतिरिक्त कुछ अन्य तत्त्व भी सम्मिलित होते हैं, जो इस प्रकार हैं
1. केवल भूमि के प्रयोग के लिए भुगतान अर्थात् आर्थिक लगान ।
2. भूमि सुधार पर व्यय की गयी पूँजी पर ब्याज ।
3. भूस्वामी के द्वारा उठाई गयी जोखिम का प्रतिफल ।
4. भूमि की देख-रेख अथवा उसके प्रबन्ध के लिए पुरस्कार ।
In simple words: कुल लगान में केवल भूमि के उपयोग के लिए दिया जाने वाला आर्थिक लगान ही नहीं, बल्कि भूमि सुधार पर किए गए निवेश का ब्याज, भूस्वामी द्वारा उठाई गई जोखिम का प्रतिफल और भूमि के प्रबंधन के लिए पुरस्कार भी शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: कुल लगान की परिभाषा देते समय, आर्थिक लगान के साथ-साथ इसमें शामिल अन्य घटकों जैसे पूंजी पर ब्याज, जोखिम प्रतिफल और प्रबंधन पुरस्कार को सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. रिकार्डों के अनुसार भूमि को ही लगान क्यों प्राप्त होता है ?
Answer: रिकाडों के अनुसार, भूमि ही लगान प्राप्त कर सकती है, क्योंकि भूमि में ही कुछ ऐसी विशेषताएँ पायी जाती हैं जो अन्य साधनों में नहीं होती। ये विशेषताएँ इस प्रकार हैं
1. भूमि प्रकृति का निःशुल्क उपहार है अर्थात् समाज के लिए भूमि की उत्पादन लागत शून्य होती है।
2. भूमि सीमित होती है और समाज की हानि से उसकी कुल मात्रा को घटाया-बढ़ाया नहीं जा सकता। सीमितता का यह गुण केवल भूमि की ही विशेषता है जो उसे उत्पत्ति के अन्य साधनों से अलग कर देती है। भूमि की पूर्ति बेलोचदार होने के कारण ही उस पर लगान प्राप्त होता है।
In simple words: रिकार्डो के अनुसार, भूमि को लगान इसलिए प्राप्त होता है क्योंकि यह प्रकृति का एक निःशुल्क और सीमित उपहार है। इसकी आपूर्ति बेलोचदार होती है और समाज के लिए इसकी उत्पादन लागत शून्य होती है, जो इसे अन्य साधनों से अलग करती है।
🎯 Exam Tip: रिकार्डो के दृष्टिकोण से भूमि को लगान क्यों मिलता है, यह समझाते समय, भूमि की मौलिकता, सीमितता, अविनाशी शक्तियाँ और शून्य उत्पादन लागत जैसे गुणों को उजागर करें।
Question 4. रिकार्डों के अनुसार 'सीमान्त भूमि' क्यों लगानरहित भूमि होती है ?
Answer: रिकाडों ने लगान को एक अन्तरीय अतिरेक (Differential surplus) माना है। उनके अनुसार सभी भूमियाँ एकसमान नहीं होतीं और उनमें उपजाऊ शक्ति तथा स्थिति का अन्तर पाया जाता है। कुछ भूमियाँ अधिक उपजाऊ तथा अच्छी स्थिति वाली होती हैं तथा कुछ उनकी तुलना में घटिया होती हैं। सीमान्त भूमि पर उपज कम होती है, ऐसी स्थिति में अच्छी भूमि (उपसीमान्त भूमि) अतिरेक देती है सीमान्त भूमि नहीं। इस कारण सीमान्त भूमि लगानरहित भूमि होती है।
In simple words: रिकार्डो के अनुसार, सीमान्त भूमि वह भूमि है जिसकी उपज केवल उत्पादन लागत के बराबर होती है और कोई अतिरिक्त अधिशेष (लगान) उत्पन्न नहीं करती। यह सबसे कम उपजाऊ भूमि होती है, और इससे बेहतर भूमियाँ ही अधिसीमान्त भूमि कहलाती हैं, जो लगान अर्जित करती हैं।
🎯 Exam Tip: सीमान्त भूमि के लगानरहित होने का कारण बताते समय, 'अन्तरीय अतिरेक' की अवधारणा और यह कैसे सीमान्त भूमि पर उत्पादन लागत के बराबर उपज से जुड़ा है, इसे स्पष्ट करें।
निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. ठेके का लगान क्या है?
Answer: किसान द्वारा भूमिपति को भूमि के उपयोग के बदले में जो धनराशि देने का वादा किया जाता है, उसे 'ठेके का लगान' कहा जाता है।
In simple words: ठेके का लगान वह निश्चित राशि है जिसका किसान भूमि के मालिक को भूमि के उपयोग के लिए भुगतान करने का वादा करता है, यह एक अनुबन्धित किराया होता है।
🎯 Exam Tip: ठेके के लगान को परिभाषित करते समय, इसे एक अनुबन्धित और पूर्व-निर्धारित भुगतान के रूप में स्पष्ट करें जो भूमि के उपयोग के बदले में दिया जाता है।
Question 2. आर्थिक लगान किसे कहते हैं ?
Answer: आर्थिक लगान को शुद्ध लगान भी कहते हैं। केवल भूमि के प्रयोग के बदले में दिये जाने वाले भुगतान को आर्थिक लगान कहा जाता है। रिकार्डों के अनुसार, “श्रेष्ठ भूमि की उपज और सीमान्त भूमि की उपज में जो अन्तर होता है, उसे आर्थिक लगान कहते हैं।”
In simple words: आर्थिक लगान वह अतिरिक्त आय है जो किसी साधन को उसके वैकल्पिक उपयोग से प्राप्त होने वाली न्यूनतम आय से अधिक मिलती है, खासकर भूमि के मामले में। यह उपजाऊ और सीमान्त भूमि की उपज का अन्तर होता है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक लगान की परिभाषा देते समय, इसे 'शुद्ध लगान' के रूप में और रिकार्डो के 'अन्तर' के सिद्धान्त से जोड़कर स्पष्ट करें। अवसर लागत के संदर्भ में भी इसका उल्लेख करें।
Question 3. आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार लगान किसे कहते हैं ?
Answer: आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार आर्थिक लगान एक साधन को उसकी अवसर लागत से प्राप्त होने वाला अतिरेक है। यह लगान केवल भूमि पर ही प्राप्त नहीं होता बल्कि उत्पत्ति के किसी भी उस साधन को आर्थिक लगान प्राप्त हो सकता है जिसकी पूर्ति बेलोचदार हो ।
In simple words: आधुनिक अर्थशास्त्री लगान को किसी भी उत्पादन साधन को उसकी अवसर लागत से अधिक प्राप्त होने वाली अतिरिक्त आय मानते हैं, खासकर यदि उस साधन की आपूर्ति बेलोचदार हो।
🎯 Exam Tip: आधुनिक लगान की परिभाषा में 'अवसर लागत पर अतिरेक' और 'बेलोचदार पूर्ति' जैसे मुख्य शब्दों पर जोर दें, और यह स्पष्ट करें कि यह केवल भूमि तक सीमित नहीं है।
Question 4. रिकार्डों के अनुसार सीमान्त भूमि लगानरहित भूमि होती है, क्यों ?
Answer: क्योंकि सीमान्त भूमि से केवल उत्पादन व्यय के बराबर उपज मिलती है और कुछ अतिरेक नहीं मिलता है। इसलिए रिकार्डों के अनुसार, ऐसी भूमि पर कुछ अधिशेष (लगान) भी नहीं होता अर्थात् सीमान्त भूमि लगानरहित भूमि होती है।
In simple words: सीमान्त भूमि को लगानरहित इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस भूमि पर होने वाला उत्पादन केवल उत्पादन की लागतों को ही पूरा कर पाता है, कोई अतिरिक्त लाभ या अधिशेष (लगान) उत्पन्न नहीं होता।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में, सीमान्त भूमि की परिभाषा को उत्पादन लागत और उपज के बीच के सम्बन्ध से जोड़कर समझाएँ, यह बताते हुए कि यहाँ कोई 'अतिरेक' क्यों नहीं होता।
Question 5. 'लगान का दुर्लभता सिद्धान्त' से क्या आशय है ?
Answer: आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने माँग एवं पूर्ति के सिद्धान्त को लगान के निर्धारण के सम्बन्ध में लागू करने का प्रयत्न किया है। इस सिद्धान्त के अनुसार भूमि की दुर्लभता के कारण लगान उत्पन्न होता है क्योकि यदि भूमि असीमित होती तो भूमि की कीमत या लगान देने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
In simple words: लगान का दुर्लभता सिद्धान्त यह बताता है कि लगान भूमि की सीमित उपलब्धता या दुर्लभता के कारण उत्पन्न होता है। यदि भूमि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती तो उसके उपयोग के लिए कोई भुगतान (लगान) की आवश्यकता नहीं होती।
🎯 Exam Tip: दुर्लभता सिद्धान्त को समझाते समय, माँग और पूर्ति के सिद्धान्त से इसके सम्बन्ध और भूमि की सीमितता के महत्व पर विशेष बल दें, यह बताते हुए कि असीमित भूमि की स्थिति में क्या होगा।
Question 6. लगान के परम्परागत सिद्धान्त के जन्मदाता कौन हैं?
Answer: जे०बी० क्लार्क ।
In simple words: जे.बी. क्लार्क को लगान के परम्परागत सिद्धान्त के जन्मदाता के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने इस आर्थिक अवधारणा को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के सीधे प्रश्न के लिए, अर्थशास्त्री का नाम सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. रिका द्वारा दी गई लगान की परिभाषा लिखिए।
या
लगान का अर्थ लिखिए।
Answer: रिकार्डों के अनुसार, “लगान भूमि की उपज का वह भाग है जो भूमि के स्वामी को भूमि की मौलिक तथा अविनाशी शक्तियों के प्रयोग के लिए दिया जाता है।"
In simple words: रिकार्डो ने लगान को भूमि की उपज का वह हिस्सा बताया है जो भूमि के मालिक को भूमि की प्राकृतिक और कभी न खत्म होने वाली शक्तियों के उपयोग के बदले दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: रिकार्डो की परिभाषा को सटीक रूप से उद्धृत करें, जिसमें भूमि की 'मौलिक व अविनाशी शक्तियों' और 'उपज का भाग' जैसे कीवर्ड शामिल हों।
Question 8. रिकाड़ों के लगान सिद्धान्त एवं आधुनिक लगान सिद्धान्त का एक अन्तर लिखिए।
Answer: रिकार्डों के लगान सिद्धान्त के अनुसार केवल भूमि ही लगान प्राप्त कर सकती है, जबकि आधुनिक लगान सिद्धान्त के अनुसार लगान केवल भूमि को ही नहीं, बल्कि उत्पादन के अन्य साधनों को भी मिल सकता है।
In simple words: रिकार्डो के लगान सिद्धान्त के अनुसार लगान केवल भूमि को मिलता है, जबकि आधुनिक लगान सिद्धान्त कहता है कि उत्पादन के किसी भी साधन को उसकी दुर्लभता के कारण लगान मिल सकता है।
🎯 Exam Tip: दोनों सिद्धान्तों के बीच एक प्रमुख अन्तर यह है कि रिकार्डो इसे केवल भूमि तक सीमित मानते हैं, जबकि आधुनिक सिद्धान्त इसे सभी दुर्लभ साधनों पर लागू करता है। इस बिन्दु को स्पष्ट करें।
Question 9. रिकार्डों के लगान सिद्धान्त की दो आलोचनाएँ लिखिए।
Answer: रिकार्डों के लगान सिद्धान्त की दो आलोचनाएँ इस प्रकार हैं
1. आलोचकों का मत है कि भूमि में मौलिक एवं अविनाशी शक्तियाँ नहीं होती हैं।
2. खेती करने का क्रम ऐतिहासिक दृष्टि से ठीक नहीं है।
In simple words: रिकार्डो के लगान सिद्धान्त की मुख्य आलोचनाएँ यह हैं कि भूमि की शक्तियाँ मौलिक या अविनाशी नहीं होतीं और खेती करने का क्रम हमेशा पहले सबसे उपजाऊ भूमि पर नहीं होता, जैसा कि रिकार्डो ने माना था।
🎯 Exam Tip: रिकार्डो के सिद्धान्त की आलोचनाएँ बताते समय, उसकी मान्यताओं (भूमि की मौलिकता और खेती का क्रम) की कमियों पर ध्यान दें।
Question 10. रिकार्डों के अनुसार लगान किसे प्राप्त होता है ?
या
रिकाडों के अनुसार, लगान उत्पादन के मात्र एक साधन को मिलता है। उस उत्पादन के साधन का नाम बताइए।
Answer: रिकार्डों के अनुसार केवल भूमि ही लगान प्राप्त कर सकती है।
In simple words: रिकार्डो के सिद्धान्त के अनुसार, लगान उत्पादन के एकमात्र साधन भूमि को प्राप्त होता है, क्योंकि भूमि में मौलिक और अविनाशी शक्तियाँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का सीधा उत्तर 'भूमि' है, लेकिन साथ ही रिकार्डो के तर्क का संक्षिप्त उल्लेख भी करें कि क्यों केवल भूमि को ही लगान प्राप्त होता है।
Question 11. आभास लगान से क्या तात्पर्य है ?
Answer: प्रो० मार्शल ने पूँजीगत वस्तुओं, जिनकी पूर्ति अल्पकाल में बेलोचदार तथा दीर्घकाल में लोचदार होती है, की अल्पकालीन आयों के लिए आभास लगान शब्द का प्रयोग किया है।
In simple words: आभास लगान उन मानव-निर्मित पूंजीगत वस्तुओं को अल्पकाल में प्राप्त होने वाली अस्थायी अतिरिक्त आय है जिनकी पूर्ति अल्पकाल में स्थिर रहती है, लेकिन दीर्घकाल में बढ़ सकती है।
🎯 Exam Tip: आभास लगान की परिभाषा देते समय, प्रो. मार्शल के नाम, 'पूंजीगत वस्तुओं', 'अल्पकाल में बेलोचदार पूर्ति' और 'अल्पकालीन आय' जैसे कीवर्ड्स को शामिल करें।
Question 12. रिकार्डो ने सीमान्त भूमि किसे कहा है ?
Answer: रिकार्डों के अनुसार, जो भूमि स्थिति एवं उर्वरता दोनों ही दृष्टिकोण से सबसे घटिया हो तथा जिससे उत्पादन व्यय के बराबर ही उपज मिलती हो अधिक नहीं, उसे रिकाडों ने सीमान्त भूमि कहा है।
In simple words: रिकार्डो के अनुसार, सीमान्त भूमि वह सबसे घटिया भूमि है जिससे प्राप्त उपज केवल उत्पादन लागतों को ही पूरा करती है और कोई अतिरिक्त लगान उत्पन्न नहीं होता।
🎯 Exam Tip: सीमान्त भूमि की परिभाषा में उसकी 'घटिया' प्रकृति और 'उत्पादन व्यय के बराबर उपज' वाले गुणों पर विशेष जोर दें।
Question 13. रिकार्डों के अनुसार अधिसीमान्त भूमि किसे कहते हैं ?
Answer: सीमान्त भूमि से कुछ अच्छी भूमि को रिकाड ने अधिसीमान्त भूमि कहा है।
In simple words: रिकार्डो के अनुसार, अधिसीमान्त भूमि वह भूमि है जो सीमान्त भूमि से अधिक उपजाऊ होती है और उत्पादन लागत से अधिक अधिशेष या लगान उत्पन्न करती है।
🎯 Exam Tip: अधिसीमान्त भूमि की परिभाषा में इसकी 'अच्छी' प्रकृति और सीमान्त भूमि की तुलना में 'अधिक उपज' या 'अधिशेष' उत्पन्न करने की क्षमता को बताएं।
Question 14. क्या सीमान्त भूमि अथवा लगानरहित भूमि एक कल्पनामात्र है ?
Answer: आधुनिक अर्थशास्त्रियों के मतानुसार विकसित देशों में ऐसी कोई भूमि नहीं होती जिस पर लगान न दिया जाता हो । अतः रिकाडों की यह मान्यता कि सीमान्त भूमि लगानरहित भूमि होती है, एक कोरी कल्पना है।
In simple words: आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार, सीमान्त या लगानरहित भूमि की अवधारणा एक कल्पना मात्र है, खासकर विकसित देशों में जहाँ सभी भूमि पर कुछ न कुछ लगान अवश्य दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय आधुनिक अर्थशास्त्रियों के दृष्टिकोण को उजागर करें और बताएं कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में व्यावहारिक रूप से कोई भी भूमि पूरी तरह से लगानरहित नहीं होती।
Question 15. “लगान मूल्य को प्रभावित नहीं करता है।” यह किस अर्थशास्त्री का विचार है ?
Answer: रिकाडों का ।
In simple words: यह विचार रिकार्डो का है, जिन्होंने अपने लगान सिद्धान्त में यह तर्क दिया कि लगान, उत्पादों के मूल्य को निर्धारित नहीं करता, बल्कि उत्पादों का मूल्य ही लगान की मात्रा को प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्न में, सही अर्थशास्त्री का नाम जानना महत्वपूर्ण है।
Question 16. आर्थिक लगान की परिभाषा दीजिए।
Answer: आर्थिक लगान को शुद्ध लगान भी कहते हैं। केवल भूमि के प्रयोग के बदले में दिये जाने वाले भुगतान को आर्थिक लगान कहा जाता है। रिकाडों के अनुसार श्रेष्ठ भूमि की उपज और सीमान्त भूमि की उपज में जो अन्तर होता है उसे आर्थिक लगान कहते हैं।
In simple words: आर्थिक लगान वह अतिरिक्त आय है जो भूमि के उपयोग के बदले में प्राप्त होती है, और यह श्रेष्ठ भूमि तथा सीमान्त भूमि की उपज के बीच का अन्तर होता है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक लगान की परिभाषा को शुद्ध लगान के पर्यायवाची के रूप में प्रस्तुत करें और रिकार्डो के 'अन्तर' की अवधारणा को शामिल करें।
Question 17. अर्थशास्त्र में 'आभास लगान' का विचार किसने प्रस्तुत किया ?
या
आभास लगान की अवधारणा किसने प्रतिपादित की है ?
Answer: आभास लगाने का विचार सर्वप्रथम मार्शल के द्वारा प्रस्तुत किया गया।
In simple words: अर्थशास्त्र में 'आभास लगान' की अवधारणा का प्रतिपादन प्रो. मार्शल ने किया था, जो अल्पकालीन अतिरिक्त आय को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: आभास लगान के प्रतिपादक के रूप में प्रो. मार्शल का नाम याद रखना आवश्यक है।
Question 18. रिकार्डो ने भूमि की उपजाऊ शक्ति को किस प्रकार की शक्ति माना है ?
Answer: रिकाडों ने भूमि की उपजाऊ शक्ति को उसकी मूल तथा अविनाशी शक्ति माना है।
In simple words: रिकार्डो ने भूमि की उपजाऊ शक्ति को एक मौलिक और अविनाशी विशेषता माना है, जिसका क्षय नहीं होता।
🎯 Exam Tip: रिकार्डो के दृष्टिकोण से भूमि की उपजाऊ शक्ति की प्रकृति को 'मूल' और 'अविनाशी' के रूप में स्पष्ट करें।
Question 19. लगान के सिद्धान्त के प्रवर्तक का नाम लिखिए।
या
लगान सिद्धान्त की विधिवत व्याख्या सर्वप्रथम किसने की?
Answer: रिका ।
In simple words: लगान सिद्धान्त की विधिवत व्याख्या सर्वप्रथम डेविड रिकार्डो ने की, इसलिए उन्हें इस सिद्धान्त का प्रवर्तक माना जाता है।
🎯 Exam Tip: लगान सिद्धान्त के प्रवर्तक के रूप में डेविड रिकार्डो का नाम याद रखें।
Question 20. लगान के किन्हीं दो प्रकारों का उल्लेख कीजिए ।
Answer:
(1) आर्थिक लगान तथा
(2) ठेका लगान ।
In simple words: लगान के दो मुख्य प्रकार आर्थिक लगान और ठेका लगान हैं, जहाँ आर्थिक लगान वास्तविक अतिरिक्त आय है और ठेका लगान अनुबन्धित किराया है।
🎯 Exam Tip: लगान के दो प्रकारों को बताते समय, उनके मुख्य भेदों को ध्यान में रखें- एक वास्तविक अतिरिक्त आय (आर्थिक लगान) है, जबकि दूसरा अनुबन्धित भुगतान (ठेका लगान) है।
Question 21. लगान उत्पत्ति के किस साधन को प्राप्त होता है?
Answer: भूमि को ।
In simple words: रिकार्डो के पारंपरिक सिद्धान्त के अनुसार, लगान केवल भूमि नामक उत्पत्ति के साधन को प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: रिकार्डो के अनुसार, लगान केवल 'भूमि' को प्राप्त होता है, यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
Question 22. लगान किसे दिया जाता है?
Answer: लगान भूमि के स्वामी को दिया जाता है।
In simple words: लगान भूमि के उपयोग के बदले में उसके स्वामी को भुगतान किया जाता है।
🎯 Exam Tip: लगान का प्राप्तकर्ता हमेशा 'भूमि का स्वामी' होता है।
Question 23. आभासी लगान प्राप्त होता है-अल्पकाल में अथवा दीर्घकाल में?
Answer: अल्पकाल में ।
In simple words: आभासी लगान केवल अल्पकाल में उत्पन्न होता है क्योंकि यह उन साधनों को मिलता है जिनकी आपूर्ति इस अवधि में स्थिर होती है, लेकिन दीर्घकाल में परिवर्तित हो सकती है।
🎯 Exam Tip: आभासी लगान की प्रकृति 'अल्पकालीन' होती है, यह महत्वपूर्ण बिन्दु है।
Question 24. 'लगान निर्धारण के किन्हीं दो सिद्धान्तों के नाम लिखिए।
Answer:
(1) विस्तृत खेती के अन्तर्गत लगान
(2) गहन खेती के अन्तर्गत लगान ।
In simple words: लगान निर्धारण के दो मुख्य सिद्धान्त विस्तृत खेती के अन्तर्गत लगान और गहन खेती के अन्तर्गत लगान हैं, जो क्रमशः भूमि के विस्तार और गहन उपयोग से संबंधित हैं।
🎯 Exam Tip: लगान निर्धारण के सिद्धान्तों के नाम बताते समय, विस्तृत और गहन खेती के सन्दर्भ में रिकार्डो के सिद्धान्तों को याद रखें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. लगान सिद्धान्त के जन्मदाता थे
(क) एडम स्मिथ
(ख) रिकाड
(ग) प्रो० मार्शल
(घ) जे० बी० से
Answer: (ख) रिका
In simple words: लगान सिद्धान्त को सर्वप्रथम डेविड रिकार्डो ने एक व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया, जिसके कारण उन्हें इसका जन्मदाता माना जाता है।
🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्रीय सिद्धान्तों के जन्मदाताओं के नाम सीधे तौर पर याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. आभास लगान की अवधारणा के प्रतिपादक हैं
(क) रिका
(ख) माल्थस
(ग) प्रो० मार्शल
(घ) इनमें से किसी ने नहीं
Answer: (ग) प्रो० मार्शल।
In simple words: आभास लगान की अवधारणा का प्रतिपादन प्रोफेसर मार्शल ने किया था, जो अल्पकालीन उत्पादन के संदर्भ में अस्थिर आय को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: आभास लगान का अवधारणात्मक स्रोत और उसके प्रतिपादक का नाम अक्सर पूछा जाता है।
Question 3. रिकार्डों के अनुसार लगान प्रभावित नहीं करता
(क) माँग को
(ख) कीमत को
(ग) विनिमय को
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) कीमत को।
In simple words: रिकार्डों के सिद्धांत के अनुसार, लगान वस्तुओं की कीमत को सीधे प्रभावित नहीं करता, बल्कि स्वयं कीमत द्वारा निर्धारित होता है।
🎯 Exam Tip: रिकार्डों के लगान सिद्धांत के अनुसार लगान का कीमत पर प्रभाव एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
Question 4. लगान सिद्धान्त का यथाक्रम व्यवस्थित विकास सबसे पहले किसने किया ?
(क) मार्शल
(ख) माल्थस
(ग) रिकाड
(घ) एडम स्मिथ
Answer: (ग) रिका।
In simple words: लगान सिद्धांत का व्यवस्थित विकास सर्वप्रथम डेविड रिकार्डो ने किया था, जिन्होंने इसे भूमि की उपज और उसकी मौलिक शक्तियों से जोड़ा।
🎯 Exam Tip: लगान सिद्धांत के ऐतिहासिक विकास में रिकार्डो का योगदान महत्वपूर्ण है, इसे याद रखें।
Question 5. सही उत्तर चुनें
(क) लगान मूल्य को प्रभावित करता है।
(ख) मूल्य लगान को प्रभावित करता है।
(ग) मूल्य और लगाने में कोई सम्बन्ध नहीं होता है
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) मूल्य लगान को प्रभावित करता है।
In simple words: वस्तुओं का मूल्य (कीमत) ही लगान के निर्धारण को प्रभावित करता है, न कि लगान सीधे मूल्य को।
🎯 Exam Tip: मूल्य और लगान के बीच का संबंध अक्सर भ्रमित करता है, स्पष्ट रहें कि मूल्य ही लगान को निर्धारित करता है।
Question 6. आभासी लगान प्राप्त होता है ?
(क) भूमि को
(ख) पूँजी को
(ग) श्रम को
(घ) पूँजीगत वस्तुओं को
Answer: (घ) पूँजीगत वस्तुओं को।
In simple words: आभास लगान अल्पकाल में उन मानव-निर्मित पूँजीगत वस्तुओं से प्राप्त होता है जिनकी पूर्ति उस अवधि में सीमित होती है।
🎯 Exam Tip: आभास लगान का संबंध केवल अल्पकाल और मानव-निर्मित पूँजीगत वस्तुओं से है, इसे ध्यान में रखें।
Question 7. ठेके का लगान आर्थिक लगान से हो सकता है
(क) अधिक
(ख) कम
(ग) अधिक या कम
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ग) अधिक या कम।
In simple words: ठेके का लगान, जो एक समझौते पर आधारित होता है, वास्तविक आर्थिक लगान से या तो अधिक हो सकता है या कम, क्योंकि इसमें मांग और आपूर्ति के अलावा अन्य कारक भी शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: ठेके का लगान आर्थिक लगान से भिन्न हो सकता है क्योंकि यह संविदात्मक होता है, जबकि आर्थिक लगान वास्तविक अतिरेक है।
Question 8. “ऊँचे लगान प्रकृति की उदारता के कारण उत्पन्न नहीं होते बल्कि उसकी कंजूसी के कारण उत्पन्न होते हैं।” यह कथन है
(क) प्रो० मार्शल का
(ख) रिकाडों का
(ग) माल्थस का
(घ) रॉबिन्स का
Answer: (ख) रिकाडों का।
In simple words: डेविड रिकार्डो ने यह तर्क दिया कि लगान प्रकृति की उदारता के कारण नहीं, बल्कि भूमि की सीमितता या उसकी कंजूसी के कारण उत्पन्न होता है।
🎯 Exam Tip: यह कथन रिकार्डो के लगान सिद्धांत का मूल आधार है, जो भूमि की सीमितता पर जोर देता है।
Question 9. लगान की सर्वप्रथम एक स्पष्ट व सन्तोषजनक व्याख्या दी
(क) एडम स्मिथ ने
(ख) मार्शल ने
(ग) रिकाड ने
(घ) जे० एस० मिल ने
Answer: (ग) रिकाडों ने।
In simple words: लगान की सर्वप्रथम व्यवस्थित और व्यापक व्याख्या डेविड रिकार्डो ने अपने लगान सिद्धांत के माध्यम से प्रस्तुत की।
🎯 Exam Tip: रिकार्डो को अक्सर लगान सिद्धांत के जनक के रूप में जाना जाता है क्योंकि उन्होंने इसे पहली बार एक ठोस सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया।
Question 10. विस्तृत खेती में सीमान्त भूमि के आधार पर लगाने का विचार किसका है ?
(क) प्रो० मार्शल का
(ख) रिकाडों का
(ग) कीन्स का
(घ) माल्थस का
Answer: (ख) रिकाडों का।
In simple words: डेविड रिकार्डो ने अपने सिद्धांत में विस्तृत खेती के संदर्भ में सीमान्त भूमि की अवधारणा का उपयोग किया, जहाँ सीमान्त भूमि वह भूमि होती है जिस पर कोई लगान नहीं मिलता।
🎯 Exam Tip: विस्तृत खेती और सीमान्त भूमि का संबंध रिकार्डो के लगान सिद्धांत की एक केंद्रीय विशेषता है।
Question 11. निम्नलिखित में से कौन-सा एक अल्पकाल से सम्बन्धित है ?
(क) आर्थिक लगान
(ख) दुर्लभता लगान
(ग) आभासी लगान
(घ) वास्तविक लगान
Answer: (ग) आभासी लगान।
In simple words: आभास लगान केवल अल्पकाल में उत्पन्न होता है और उन साधनों से संबंधित है जिनकी पूर्ति अल्पकाल में स्थिर होती है।
🎯 Exam Tip: अल्पकाल और दीर्घकाल के संदर्भ में विभिन्न प्रकार के लगानों को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 12. आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार, 'लगान' प्राप्त होता है
(क) भूमि को
(ख) श्रम को
(ग) पूँजी को
(घ) ये सभी
Answer: (क) भूमि को।
In simple words: आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुसार, लगान मुख्य रूप से भूमि को प्राप्त होता है, जो उसकी सीमितता और विशिष्टता के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: आधुनिक लगान सिद्धांत पारंपरिक विचारों से थोड़ा भिन्न है, जो लगान को भूमि की विशिष्टता से जोड़ता है।
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