UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 30 Index Numbers

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Detailed Chapter 30 अनुक्रमणिका संख्याएँ UP Board Solutions for Class 12 Economics

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Class 12 Economics Chapter 30 अनुक्रमणिका संख्याएँ UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

 

Question 1. सूचकांक क्या होते हैं ? इनको परिभाषित करते हुए इनके प्रकारों पर प्रकाश डालिए।
Answer: सूचकांक मुद्रा के मूल्य में होने वाले परिवर्तनों को नापने का एक साधन है। इसके द्वारा मूल्य के स्तर की केन्द्रीय प्रवृत्ति को मापा जा सकता है। सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर ही हम मुद्रा की क्रय-शक्ति में होने वाले परिवर्तनों को जान सकते हैं। बढ़ता हुआ सूचकांक हमें यह बताता है कि सामान्य मूल्य-स्तर बढ़ रहा है तथा मुद्रा का मूल्य गिर रहा है। इसके विपरीत, यदि सूचकांक गिरता है तो वह इस बात का संकेत देता है कि सामान्य मूल्य-स्तर गिर रहा है और मुद्रा का मूल्य बढ़ रहा है। सूचकांक मुद्रा के मूल्य की निरपेक्ष माप प्रस्तुत नहीं करते। उनके द्वारा केवल मुद्रा के मूल्य में होने वाले सापेक्षिक परिवर्तनों को मापा जा सकता है तथा विभिन्न समय में मूल्य-स्तर की तुलना की जा सकती है। किसी निश्चित समय पर मूल्य-स्तर कितना है, इसे सूचकांक द्वारा नहीं बताया जा सकता अपितु किसी दूसरे समय की अपेक्षा यह कितना बढ़ गया है अथवा कम हो गया है, इसे हम सूचकांकों की सहायता से जान सकते हैं। सूचकांक आर्थिक गतिविधियों के बैरोमीटर के रूप में कार्य करते हैं। मान लीजिए कि भारत में 2014 ई० में गेहूं का भाव ₹1,500 प्रति क्विंटल था तथा 2016 ई० में बढ़कर ₹1,600 प्रति क्विंटल हो गया, तो 2014 ई० की तुलना में 2016 ई० में गेहूँ के भाव में 10% की वृद्धि हुई। इस प्रकार के तुलनात्मक
In simple words: सूचकांक एक ऐसा पैमाना है जो समय के साथ पैसों की कीमत और चीजों के दामों में होने वाले बदलावों को मापता है। इससे हमें यह पता चलता है कि महंगाई बढ़ रही है या घट रही है।

🎯 Exam Tip: सूचकांक की परिभाषा लिखते समय यह स्पष्ट करें कि यह सापेक्षिक परिवर्तनों को मापता है, न कि निरपेक्ष मूल्यों को। उदाहरण देकर समझाने से पूरे अंक मिलते हैं।

सूचकांक (Index Numbers)

 

Question 1. सूचकांक (Index Number) किसे कहते हैं? विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई इसकी परिभाषाओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: दृष्टिकोण से प्राप्त प्रतिशतों को ही निर्देशांक या सूचकांक कहा जाता है। सूचकांक का आविष्कार इटली निवासी कार्ल ने 1764 ई० में किया था। यह आर्थिक गतिविधियों को मापने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण यंत्र है। विभिन्न विद्वानों द्वारा सूचकांक या निर्देशांक को निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया गया है:
(i) डॉ. बाउले के अनुसार: “सूचकांक किसी मात्रा में होने वाले ऐसे परिवर्तनों की माप करते हैं, जिनका हम प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन नहीं कर सकते हैं।”
(ii) वेसेल, विलेट तथा सिमोन के अनुसार: “सूचकांक एक विशिष्ट प्रकार का माध्य है जो समय या स्थान के आधार पर होने वाले सापेक्ष परिवर्तनों का मापन करता है।”
(iii) होरेस सेक्रिस्ट के अनुसार: “सूचकांक अंकों की एक ऐसी श्रेणी है, जिसके द्वारा किसी भी तथ्य के परिमाण में होने वाले परिवर्तनों को समय या स्थान के अनुसार मापा जा सकता है।”
(iv) मरे स्पाइगल के अनुसार: “सूचकांक एक सांख्यिकीय माप है जो समय, भौगोलिक स्थिति अथवा अन्य विशेषताओं के आधार पर किसी चर मूल्य अथवा सम्बन्धित चर मूल्यों के समूह में होने वाले परिवर्तनों को प्रदर्शित करता है।”
(v) चैण्डलर के अनुसार: “कीमतों का सूचकांक आधार वर्ष की औसत कीमतों की ऊँचाई की तुलना में किसी अन्य समय पर उनकी ऊँचाई को प्रकट करने वाली संख्या होता है।”
निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि सूचकांक के द्वारा हम किसी समय के मूल्य-स्तर की तुलना आधार वर्ष के मूल्य-स्तर के साथ करके यह पता लगा सकते हैं कि वर्तमान समय में कीमतें आधार वर्ष की अपेक्षा कितनी बढ़ गयी हैं अथवा कम हो गयी हैं। सूचकांकों को विभिन्न प्रकार की वस्तुओं तथा सेवाओं के मूल्य-परिवर्तनों को सूचित करने वाले सांख्यिकीय औसत भी कहा जाता है।
In simple words: सूचकांक एक ऐसा सांख्यिकीय साधन है जो समय के साथ कीमतों या अन्य आर्थिक बदलावों को मापता है। इससे हमें यह पता चलता है कि पहले की तुलना में आज महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न विद्वानों की परिभाषाओं को लिखते समय उनके नाम और मुख्य शब्दों (जैसे 'सापेक्ष परिवर्तन' या 'सांख्यिकीय माप') को रेखांकित (underline) करें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 2. सूचकांकों के विभिन्न प्रकारों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
Answer: सूचकांक विभिन्न उद्देश्यों को लेकर बनाये जाते हैं। इनके द्वारा हम केवल मुद्रा की क्रय-शक्ति को ही नहीं मापते, वरन् उनकी सहायता से आर्थिक जीवन की विभिन्न क्रियाओं को भी माप सकते हैं। विभिन्न उद्देश्यों के लिए विभिन्न प्रकार के सूचकांकों का निर्माण किया जाता है, जिनमें से निम्नलिखित मुख्य हैं:
1. सामान्य मूल्य सूचकांक (General Price Index): इस सूचकांक का निर्माण मुद्रा की क्रय-शक्ति में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है। इस प्रकार के सूचकांकों को बनाने के लिए उन वस्तुओं तथा सेवाओं को सम्मिलित किया जाता है, जो लोगों के द्वारा सामान्यतः उपभोग की जाती हैं। विभिन्न वस्तुओं को उन पर व्यय की जाने वाली आय के अनुपात में भार दिया जाता है। इसका निर्माण करते समय, उपभोग की जाने वाली समस्त वस्तुओं को सम्मिलित करना सम्भव नहीं होता, इसलिए इसे केवल प्रतिनिधि वस्तुओं के आधार पर ही बनाया जाता है। इस प्रकार के सूचकांक बनाते समय मुख्यतया थोक मूल्यों का प्रयोग किया जाता है। इसे बनाना अत्यधिक कठिन होता है और इनकी उपयोगिता भी सीमित है, क्योंकि ये मुद्रा की क्रय-शक्ति में होने वाले परिवर्तनों का सही अनुमान नहीं दे पाते।
2. श्रमिकों के जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक (Consumer Price Index / Cost of Living Index): यह सूचकांक मजदूरों के रहन-सहन के व्यय में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिए बनाये जाते हैं। इनकी सहायता से हम श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में होने वाले परिवर्तनों का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। रहन-सहन व्यय सूचकांक बनाने के लिए केवल उन्हीं वस्तुओं को लिया जाता है, जिन पर श्रमिक वर्ग प्रायः अपनी आय को व्यय करता है। विभिन्न वस्तुओं को उनके महत्त्व के अनुसार भार दिया जाता है। वस्तुओं को दिये जाने वाले भार किसी विशेष मण्डल द्वारा निश्चित किये जाते हैं।
3. थोक कीमतों के सूचकांक (Wholesale Price Index): इस प्रकार के सूचकांक वस्तुओं के थोक मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिए बनाये जाते हैं। इन्हें बनाते समय कच्चे माल, अर्द्धनिर्मित वस्तुओं तथा तैयार माल के मूल्यों को सम्मिलित किया जाता है। विभिन्न वस्तुओं को देश की अर्थव्यवस्था में उनके तुलनात्मक महत्त्व के अनुसार भार दिया जाता है, जो उत्पत्ति की गणना के आधार पर निश्चित किये जाते हैं। इन सूचकांकों का प्रयोग भी मुद्रा की क्रय-शक्ति को नापने के लिए किया जाता है, किन्तु इस कार्य के लिए वे पूर्णतया सन्तोषजनक नहीं होते। वे केवल थोक मूल्यों के आधार पर बनाये जाते हैं, जबकि उपभोक्ता अपनी वस्तुओं को फुटकर मूल्य पर खरीदते हैं। इसलिए ये उपभोक्ताओं के लिए मुद्रा की क्रय-शक्ति में होने वाले परिवर्तनों को नहीं बता सकते।
In simple words: सूचकांक मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं: पहला सामान्य मूल्य सूचकांक जो मुद्रा की क्रय-शक्ति मापता है, दूसरा जीवन-निर्वाह सूचकांक जो मजदूरों के खर्चों को दर्शाता है, और तीसरा थोक मूल्य सूचकांक जो थोक बाजार में कीमतों के बदलाव को मापता है।

🎯 Exam Tip: सूचकांकों के प्रकारों को लिखते समय तीनों प्रकारों के नाम हेडिंग के रूप में लिखें और उनके मुख्य अंतर (जैसे थोक मूल्य बनाम फुटकर मूल्य) को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

4. औद्योगिकी सूचकांक (Industrial Index)

इन सूचकांकों का प्रयोग देश की औद्योगिक स्थिति में परिवर्तन तथा विभिन्न उद्योगों की प्रगति को जानने के लिए किया जाता है। प्रायः विभिन्न उद्योगों की उत्पत्ति का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए इन्हें बनाया जाता है। सर्वप्रथम आधार वर्ष में भिन्न-भिन्न उद्योगों के उत्पादन सम्बन्धी आँकड़े इकट्ठे किये जाते हैं और फिर अन्य वर्षों की उत्पत्ति के आँकड़े इकट्ठे करते हैं। आधार वर्ष के उत्पादन को 100 मानकर अन्य वर्षों के उत्पादन की उससे तुलना की जाती है। उत्पादन सूचकांक में जितने प्रतिशत की वृद्धि होती है, उसी अनुपात में उस उद्योग का उत्पादन बढ़ा हुआ होता है।

उपर्युक्त प्रकार के सूचकांकों के अतिरिक्त कुछ अन्य प्रकार के सूचकांक भी होते हैं; जैसे- आय सूचकांक, आर्थिक स्थिति के सूचकांक, अन्तर्राष्ट्रीय सूचकांक आदि। वास्तव में, सूचकांकों का प्रयोग प्रत्येक आर्थिक घटना के तुलनात्मक परिवर्तनों को मापने के लिए किया जा सकता है।

 

Question 2. सूचकांकों की विशेषताएँ और सीमाओं पर संक्षेप में प्रकाश डालिए। [2009]
Answer:
सूचकांकों की विशेषताएँ: सूचकांकों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(1) सूचकांक हमेशा सापेक्षिक माप के रूप में ही कार्य करते हैं, क्योंकि निरपेक्ष रूप में प्रस्तुतीकरण की स्थिति में उसका तुलनात्मक अध्ययन नहीं किया जा सकता; अतः तुलनात्मक अध्ययन करने हेतु इन्हें सापेक्षिक बनाया जाता है।
(2) सूचकांक परिवर्तन की दिशा को औसत के रूप में व्यक्त करता है। ये किसी एक वस्तु के मूल्यों में परिवर्तन की केवल एक ही दिशा का मापन नहीं करते बल्कि सामान्य रूप से परिवर्तन की दिशा का सूचकांक मापन करते हैं। उदाहरण के लिए- यदि कुछ वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं तो सम्भव है कि कुछ की कीमतें घट भी रही हों, पर सामान्य या औसत प्रवृत्ति बढ़ने की हो। इस प्रकार सूचकांक सामान्य या औसत प्रवृत्ति को बताते हैं।
(3) सूचकांक केवल संख्या में ही व्यक्त किए जाते हैं; अर्थात् ये केवल ऐसे उच्चावचनों एवं परिवर्तनों को प्रदर्शित करते हैं जो अंकों या संख्याओं में व्यक्त किए जा सकें। किसी तथ्य में होने वाले परिवर्तन की वर्णनात्मक व्याख्या सूचकांक नहीं करते।
(4) सूचकांक एक विशेष प्रकार के माध्य होते हैं जो परिवर्तनों को औसत रूप में मापते हैं। साधारण माध्य में समंक एक रूप में होते हैं तथा उनकी मापन इकाई समान होती है, लेकिन सूचकांकों में विभिन्न इकाइयों में व्यक्त समंकों का माध्य लिया जाता है। वास्तव में, सूचकांक मूल्य अनुपातों का औसत है; अतः ये विशेष प्रकार के माध्य हैं।
(5) निर्देशांक या सूचकांक का प्रयोग केवल मूल्य-स्तर के मापन हेतु ही नहीं किया जाता, वरन् ऐसे सभी तथ्यों के लिए किया जाता है जिनकी निरपेक्ष माप या प्रत्यक्ष माप सम्भव नहीं होती। आधुनिक युग में सामान्यतः सरकार की नीतियां के आधार सूचकांक ही होते हैं। अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों, नीतियों तथा गतिविधियों का संचालन सूचकांकों के आधार पर ही किया जाता है। आज अनेक देशों ने नियोजन को विकास का आधार बनाया है और नियोजन का आधार निर्देशांक या सूचकांक होते हैं।

सूचकांकों की सीमाएँ: सूचकांक यद्यपि एक उपयोगी सांख्यिकीय उपकरण है, किन्तु इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं। इन सीमाओं को जाने बिना सूचकांकों के निष्कर्ष भ्रम उत्पन्न कर सकते हैं। इसलिए इनका उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ये सीमाएँ निम्नलिखित हैं:
1. सूचकांक परिवर्तन की केवल औसत प्रवृत्ति को ही प्रकट करते हैं; अतः इनसे परिवर्तनों की पूर्ण वास्तविकता का पता नहीं चलता।
2. सूचकांकों के निष्कर्ष समूह पर सामान्य रूप से ही लागू होते हैं। यह भी सम्भव है कि किन्हीं एक या अधिक इकाइयों पर वे निष्कर्ष लागू न हों।
In simple words: सूचकांक हमें किसी बदलाव की दिशा और औसत को समझने में मदद करते हैं, जैसे महंगाई का बढ़ना या घटना। हालांकि, ये केवल एक औसत दिखाते हैं और हर एक व्यक्तिगत वस्तु पर पूरी तरह लागू नहीं होते।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए सूचकांकों की विशेषताओं और सीमाओं को अलग-अलग स्पष्ट हेडिंग्स के साथ बिंदुवार (point-wise) लिखें।

 

Question 3. निर्देशांकों का अर्थ एवं महत्त्व बताइए। [2008, 11]
या
सूचकांक क्या है? इसका क्या उपयोग है? [2009, 10]
या
सूचकांकों के महत्त्व और उपयोगों पर प्रकाश डालिए। [2013, 15]
या
सूचकांकों का अर्थ समझाइए। इनके महत्त्व का वर्णन कीजिए। [2014, 15, 16]
या
निर्देशांक को परिभाषित कीजिए। इसकी किन्हीं चार विशेषताओं की विवेचना कीजिए। [2015]

Answer: निर्देशांकों या सूचकांकों का अर्थ निर्देशांक मुद्रा के मूल्य में होने वाले परिवर्तनों को मापने का एकमात्र साधन है। इनके द्वारा मूल्य-स्तर की केन्द्रीय प्रवृत्ति को मापा जा सकता है। सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर ही इस मुद्रा की क्रय-शक्ति में होने वाले परिवर्तनों को जान सकते हैं।

चैण्डलर के अनुसार, “कीमतों का सूचकांक आधार वर्ष की औसत कीमतों की ऊँचाई की तुलना में किसी अन्य समय पर उसकी ऊँचाई को प्रकट करने वाली संख्या होती है।”

सूचकांकों का महत्त्व या उपयोग वर्तमान समय में आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों के मापन तथा उनके विश्लेषण की दृष्टि से सूचकांक अथवा निर्देशांक एक महत्त्वपूर्ण आर्थिक उपकरण बन चुका है। यही कारण है कि सूचकांकों को आर्थिक वायुमापक यन्त्र कहकर सम्बोधित किया गया है। सूचकांक का महत्त्व आर्थिक, व्यावसायिक एवं राजनीतिक सभी दृष्टिकोणों से है। यह आर्थिक नीतियों के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है। सूचकांकों के अभाव में उपभोग, उत्पादन, मुद्रा का मूल्य, वस्तुओं का मूल्य, माँग-पूर्ति जैसी प्रमुख समस्याओं का व्यापक अध्ययन व समाधान असम्भव ही है।

सूचकांकों के महत्त्व या उपयोग को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है:
1. किसी भी राष्ट्र की राष्ट्रीय आय की वास्तविकता का ज्ञान सूचकांकों के द्वारा ही होता है। सूचकांकों के द्वारा यह जानकारी प्राप्त हो जाती है कि वास्तविक राष्ट्रीय आय में परिवर्तन की सामान्य प्रवृत्ति क्या है? इसके ज्ञात होने पर ही आर्थिक विकास के नियोजित कार्यक्रमों की रूपरेखा बनायी जा सकती है।
2. सूचकांकों के माध्यम से सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया जा सकता है, अर्थात् इसके माध्यम से मुद्रा की क्रय-शक्ति में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया जा सकता है।
3. निर्वाह व्यय सूचकांकों द्वारा मजदूरी के परिवर्तनों को जाना जाता है। इसी आधार पर मजदूरी, महँगाई भत्ते आदि में वृद्धि या कमी की जाती है। वर्तमान समय में मजदूरी एवं महँगाई भत्तों के निर्धारण में सूचकांक ही आवश्यक सूचनाएँ प्रदान करते हैं।
In simple words: Index numbers act like an economic thermometer that measures changes in prices and the value of money over time. They help governments and businesses understand financial trends and plan future budgets or salaries easily.

🎯 Exam Tip: To score full marks, write the definition of index numbers clearly, include Chandler's definition, and list all three points of importance with neat headings.

4. सूचकांक आर्थिक जगत् में होने वाले परिवर्तनों का ज्ञान कराते हैं। इसके आधार पर ही सरकार करारोपण, सार्वजनिक व्यय, ऋण, बैंक साख, ब्याजदर सम्बन्धी नीतियों का निर्धारण करती है। सरकार को बजट-निर्माण में भी इससे सहायता मिलती है।

5. सूचकांकों की सहायता से जटिलतम एवं कठिनतम तथ्यों को भी सरल रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। उदाहरण के लिए-व्यापारिक क्रियाओं का मापन केवल किसी एक तथ्य के अध्ययन से सम्भव नहीं होता वरन् इसके लिए उत्पादन, आयात-निर्यात, लाभ, बैंकिंग एवं यातायात से सम्बन्धित अनेक तथ्यों का अध्ययन करना होता है जो कि केवल सूचकांक की सहायता से ही हो सकता है।

6. सूचकांक सापेक्ष परिवर्तनों को मापते हैं; अतः इनकी सहायता से तुलनात्मक अध्ययन सुविधाजनक हो जाता है। यह तुलना विभिन्न स्थानों या समयों के बीच भी की जा सकती है।

7. विश्व के सभी राष्ट्रों के द्वारा सूचकांक तैयार किये जाते हैं। मूल्यों में परिवर्तन, उत्पादनों, व्यावसायिक परिवर्तनों आदि के सूचकांक की रचना करके अन्य राष्ट्रों से उनका तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। विश्व बैंक मुद्रा कोष द्वारा भी विभिन्न राष्ट्रों से सम्बन्धित आर्थिक स्थिति में परिवर्तन के सूचकांक तैयार किये जाते हैं।

8. सूचकांक अनेक प्रकार के होते हैं एवं इनकी रचना अनेक प्रकार से की जाती है। अतः विभिन्न प्रकार के सूचकांक जनसाधारण को अनेक प्रकार से लाभ पहुँचाते हैं। सूचकांकों द्वारा प्रदत्त सूचनाओं के आधार पर ही लोग भावी परिवर्तन का पूर्वानुमान लगाते हैं। उन्हें आय की वास्तविक क्रय-शक्ति की जानकारी भी सूचकांकों के माध्यम से ही प्राप्त होती है।

9. सूचकांकों द्वारा भूतकाल को आधार मानकर वर्तमान का अध्ययन किया जाता है, जिससे प्राप्त निष्कर्षों में भावी प्रवृत्तियों की एक झलक भी छिपी रहती है जिसके आधार पर विद्वान् भावी योजनाओं व प्रवृत्तियों का निर्माण एवं पूर्वानुमान करते हैं।

संक्षेप में, सूचकांक राष्ट्र की आर्थिक गतिविधियों के उतार-चढ़ाव के सूचक होते हैं। सिम्पसन एवं काफ्का के शब्दों में, “वर्तमान में सूचकांक सर्वाधिक प्रयुक्त सांख्यिकीय विधि है। इसका प्रयोग अर्थव्यवस्था की नाड़ी देखने में किया जाता है।”

 

Question 4. सूचकांक बनाते समय आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
Answer: सूचकांक बनाते समय अग्रलिखित सावधानियाँ बरती जानी चाहिए:
(1) सूचकांक की रचना करने से पूर्व यह जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए कि उसका उद्देश्य क्या है; क्योंकि प्रत्येक उद्देश्य के लिए अलग-अलग प्रकार के कीमत सूचकांक बनाये जाते हैं; जैसे – मुद्रा की क्रय-शक्ति में परिवर्तन का अध्ययन करने के लिए 'थोक कीमत सूचकांक' का निर्माण किया जाता है तथा 'मुद्रा के मूल्य परिवर्तन का उपभोक्ता पर क्या प्रभाव होगा' इसके लिए फुटकर कीमतों का सूचकांक अर्थात् जीवन-निर्वाह सूचकांक का निर्माण किया जाता है। यह उद्देश्य की स्पष्टता सूचकांक को अधिक सटीक और उपयोगी बनाती है।
(2) सूचकांक बनाने के लिए सबसे पहले उस वर्ष का चुनाव करना पड़ता है जिसकी कीमतों से वर्तमान वर्ष की कीमतों की तुलना करनी है। इस वर्ष को आधार वर्ष कहते हैं तथा वर्तमान वर्ष को चालू वर्ष। आधार वर्ष हमेशा एक सामान्य वर्ष होना चाहिए, जिसमें सामान्य कीमत-स्तर सामान्य रहा हो, अर्थात् न तो बहुत अधिक और न ही बहुत कम। आधार वर्ष बहुत पुराना नहीं होना चाहिए तथा उससे सम्बन्धित समस्त सूचनाएँ उपलब्ध होनी चाहिए अन्यथा तुलनात्मक परिणाम सही ज्ञात नहीं होंगे।
(3) सूचकांक बनाते समय देश में उत्पादित सभी वस्तुओं व सेवाओं को सम्मिलित नहीं किया जा सकता; अतः प्रतिनिधि वस्तुओं का चयन करना आवश्यक होता है।
(4) प्रतिनिधि वस्तुओं का चयन करने के पश्चात् उनसे सम्बन्धित कीमत के आँकड़ों का संकलन मण्डियों, दुकानों, सरकार तथा व्यापारिक संस्थाओं द्वारा प्रकाशित पत्र-पत्रिकाओं से कर लिया जाता है। थोक मूल्य सूचकांक के लिए थोक मूल्य लिये जाते हैं। सही प्रचलित कीमतों को ही सूचकांकों की गणना में सम्मिलित किया जाना चाहिए।
In simple words: When making an index number, we must be careful about its purpose, choose a normal base year for comparison, select representative goods, and collect accurate price data from reliable sources. This ensures the index truly reflects economic changes.

🎯 Exam Tip: Clearly list all four steps (Purpose, Base Year, Representative Goods, and Price Collection) with numbers to secure full marks.

(5) विभिन्न वस्तुओं की महत्ता को महत्त्व देने के लिए भारों का प्रयोग किया जाता है। सूचकांकों की रचना करने से पहले विभिन्न वस्तुओं के भार निश्चित करने के लिए विभिन्न मानदण्ड निश्चित किये जाते हैं। विभिन्न महत्त्व एवं उपयोगिता वाली वस्तुओं को समान भार देने पर गणना से प्राप्त सूचकांक असत्य होंगे।

(6) जब सूचकांकों की गणना में दो से अधिक वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है तब सही माध्य का चयन किया जाना आवश्यक होता है। भिन्न-भिन्न उद्देश्यों के लिए भिन्न-भिन्न माध्यमों का चयन किया जाना चाहिए। एक ही माध्य सभी उद्देश्यों की समस्या का समाधान नहीं कर सकता।

 

Question 5. भार के आधार पर सूचकांक को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है? सरल सूचकांक बनाने की रीतियों को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: भार के आधार पर सूचकांक को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:
(1) सरल अथवा साधारण सूचकांक
(2) भारित सूचकांक

सभी वस्तुओं को समान महत्त्व दिया जाए तो उसे सरल या साधारण सूचकांक कहते हैं। जब विभिन्न वस्तुओं से सम्बन्धित भार को ध्यान में रखकर सूचकांक तैयार किये जाते हैं तो इसे भारित सूचकांक कहते हैं। यह वर्गीकरण आर्थिक विश्लेषण को अधिक सटीक और व्यावहारिक बनाने में मदद करता है।

सरल सूचकांक की रचना – सरल सूचकांक बनाने की निम्नलिखित दो विधियाँ हैं:

1. सरल मूल्य अनुपात माध्य रीति: सरल सूचकांक की रचना की पहली रीति को सरल मूल्य अनुपात माध्य रीति के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार के सूचकांक की रचना में सर्वप्रथम प्रत्येक वस्तु के मूल्य अनुपात \( R = \frac{P_1}{P_0} \times 100 \) ज्ञात करने होते हैं। इसके लिए चालू वर्ष के मूल्य में आधार वर्ष के मूल्य का भाग देकर 100 से गुणा करते हैं। इन मूल्य अनुपातों के योग में वस्तुओं की संख्या का भाग दे देते हैं। प्राप्त परिणाम ही सूचकांक होता है।

सूत्र — सूचकांक = \( \frac{\sum \left(\frac{P_1}{P_0} \times 100\right)}{N} \) या, सूचकांक = \( \frac{\sum R}{N} \)
यहाँ, \( N = \) वस्तुओं की संख्या, \( R = \) मूल्य अनुपात, \( P_1 = \) चालू वर्ष की कीमत, \( P_0 = \) आधार वर्ष की कीमत।

2. सरल समूही रीति: इस रीति में चुनी हुई विभिन्न वस्तुओं के मूल्य प्रति इकाई में दिये होते हैं। आधार वर्ष और चालू वर्ष की सभी वस्तुओं के मूल्यों का अलग-अलग योग ज्ञात कर लेते हैं। चालू वर्ष के योग में आधार वर्ष के योग का भाग देकर प्राप्त संख्या को 100 से गुणा कर दिया जाता है। इस सूचकांक द्वारा वर्तमान वर्ष के कुल मूल्य की तुलना आधार वर्ष के कुल मूल्य से की जाती है। इस प्रकार के सूचकांकों की रचना सरल होती है तथा इनको समझना भी आसान होता है। परन्तु वस्तुओं की मात्रा पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता तथा मूल्य भी वस्तुओं की इकाई के लिए होते हैं; अतः ये तुलनीय नहीं होते। यदि इकाई बदल जाए तो सूचकांक का मान भी बदल सकता है।

सूत्र — सूचकांक \( P_{01} = \frac{\sum P_1}{\sum P_0} \times 100 \)
यहाँ, \( P_1 = \) चालू वर्ष की कीमत तथा \( P_0 = \) आधार वर्ष की कीमत।
In simple words: Index numbers show how prices change over time. They can be simple (treating all items as equally important) or weighted (giving more importance to key items). Simple index numbers are calculated using either the average of price changes or by comparing total prices.

🎯 Exam Tip: Clearly state the formulas for both the Simple Average of Price Relatives method and the Simple Aggregative method, defining each term like \( P_1 \) and \( P_0 \) to secure full marks.

 

Question. उदाहरण 1: निम्नलिखित आँकड़ों से सरल मूल्यानुपात तथा सरल समूही रीति से सूचकांक ज्ञात कीजिए:

वस्तुइकाईआधार वर्ष 2001 के मूल्य (Rs. में)चालू वर्ष 2002 के मूल्य (Rs. में)
गेहूँप्रति क्विंटल8001,000
चावलप्रति क्विंटल1,2001,500
चनाप्रति क्विंटल2,2002,500
दालप्रति क्विंटल3,0003,300

Answer: हल:
1. सरल मूल्यानुपात रीति (समान्तर माध्य) को प्रयोग करते हुए:
वस्तु\( P_0 = 2001 \)\( P_1 = 2002 \)\( R = \frac{P_1}{P_0} \times 100 \)
गेहूँ8001,000\( \frac{1,000}{800} \times 100 = 125 \)
चावल1,2001,500\( \frac{1,500}{1,200} \times 100 = 125 \)
चना2,2002,500\( \frac{2,500}{2,200} \times 100 = 113.64 \)
दाल3,0003,300\( \frac{3,300}{3,000} \times 100 = 110 \)
योग\( \sum P_0 = 7,200 \)\( \sum P_1 = 8,300 \)\( \sum R = 473.64 \)
अभीष्ट सूचकांक = \( \frac{\sum R}{N} \) या, सूचकांक = \( \frac{473.64}{4} = 118.41 \)

2. सरल समूही रीति का प्रयोग करते हुए:
2002 के लिए 2001 के आधार पर कीमत सूचकांक:
\[ = \frac{\text{चालू वर्ष की कीमतों का योग}}{\text{आधार वर्ष की कीमतों का योग}} \times 100 \] \[ = \frac{\sum P_1}{\sum P_0} \times 100 = \frac{8,300}{7,200} \times 100 = 115.28 \]
इस प्रकार, दोनों विधियों से प्राप्त सूचकांकों में थोड़ा अंतर होता है क्योंकि दोनों की गणना का आधार भिन्न है।
In simple words: To find the index number, we can either calculate the percentage change for each item individually and then average them, or we can sum up all the prices first and then find the overall percentage change.

🎯 Exam Tip: Always write down the formulas clearly before substituting the values to ensure you get step-marks even if there is a minor calculation error.

 

Question 6. भारित सूचकांक बनाने की कौन-कौन-सी विधियाँ हैं? प्रत्येक को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: भारित सूचकांक बनाने की मुख्य रूप से दो विधियाँ हैं:
1. भारित माध्य मूल्य अनुपात विधि (Weighted Average of Price Relatives Method): इस विधि में सबसे पहले मूल्य अनुपात \( (R) \) ज्ञात किये जाते हैं। इसके बाद प्रत्येक मूल्य अनुपात को संगत भार \( (W) \) से गुणा किया जाता है। भार प्रायः वस्तुओं की मात्रा के रूप में होते हैं या अन्य उद्देश्य के अनुसार निर्धारित होते हैं। उसके बाद गुणनफलों के योग से भाग दे दिया जाता है। संकेत रूप में, सूचकांक = \( \frac{\sum RW}{\sum W} \)। यह विधि विभिन्न वस्तुओं के सापेक्षिक महत्व को ध्यान में रखकर अधिक सटीक परिणाम प्रदान करती है।
In simple words: In this method, we give different importance (weights) to different items based on how much they are used, and then calculate the average change in their prices.

🎯 Exam Tip: Remember that the formula for the weighted average of price relatives is \( \frac{\sum RW}{\sum W} \), where \( R = \frac{P_1}{P_0} \times 100 \).

 

Question. उदाहरण 2: नीचे दिये गये आँकड़ों से वर्ष 2001 की कीमतों को आधार मानकर वर्ष 2002 का सूचकांक ज्ञात कीजिए:

वस्तुवर्षगेहूँचावलचनादाल
कीमत200110522
200212734
भार-4321

Answer: हल:
भारित माध्य मूल्य अनुपात विधि का प्रयोग करते हुए सूचकांक की गणना निम्न प्रकार है:
वस्तु\( P_0 \) (2001)\( P_1 \) (2002)भार \( (W) \)\( R = \frac{P_1}{P_0} \times 100 \)\( RW \)
गेहूँ10124\( \frac{12}{10} \times 100 = 120 \)480
चावल573\( \frac{7}{5} \times 100 = 140 \)420
चना232\( \frac{3}{2} \times 100 = 150 \)300
दाल241\( \frac{4}{2} \times 100 = 200 \)200
योग--\( \sum W = 10 \)-\( \sum RW = 1,400 \)
भारित सूचकांक = \( \frac{\sum RW}{\sum W} = \frac{1,400}{10} = 140 \)
इस प्रकार, वर्ष 2001 की तुलना में वर्ष 2002 में कीमतों में औसतन 40% की वृद्धि हुई है।
In simple words: By multiplying each item's price change by its importance (weight) and dividing by the total weight, we find that the overall prices increased by 40% in 2002 compared to 2001.

🎯 Exam Tip: Double-check your calculations for \( RW \) as a single multiplication error can affect the final sum and the entire answer.

Question. भारित मूल्य अनुपात विधि (Weighted Average of Price Relatives Method) द्वारा सूचकांक की गणना कीजिए।
Answer:

वस्तुभार (W)2001 (\( P_0 \))2002 (\( P_1 \))\( R = \frac{P_1}{P_0} \times 100 \)RW
गेहूँ41012120480
चावल357140420
चना223150300
दाल124200200
योग\( \Sigma W = 10 \)\( \Sigma RW = 1,400 \)

2002 का सूचकांक = \( \frac{\Sigma RW}{\Sigma W} = \frac{1400}{10} = 140 \)
In simple words: To find the weighted index, we multiply each price relative (R) by its weight (W), sum them up, and divide by the total weight.

🎯 Exam Tip: Always double-check the sum of weights (\( \Sigma W \)) and the sum of weighted relatives (\( \Sigma RW \)) to avoid simple calculation errors.

 

Question 2. भारित समूही मूल्य विधि (Weighted Aggregative Price Method) को समझाइए।
Answer: इस विधि में प्रत्येक वस्तु का संगत भार लिया जाता है जिसे निर्धारित करने के बहुत-से तरीके हैं। यहाँ संगत भार को w से प्रदर्शित किया जाता है। इस चालू वर्ष की कीमत (\( p_1 \)) को w से गुणा करके उनका जोड़ (\( \Sigma p_1 w \)) ज्ञात किया जाता है। फिर आधार वर्ष की कीमत (\( p_0 \)) को w से गुणा करके उनका जोड़ (\( \Sigma p_0 w \)) ज्ञात किया जाता है। चालू वर्ष के योग (\( \Sigma p_1 w \)) को आधार वर्ष के योग (\( \Sigma p_0 w \)) से भाग दिया जाता है। इस भागफल को 100 से गुणा कर दिया जाता है। इस प्रकार, अभीष्ट सूचकांक = \( \frac{\Sigma p_1 w}{\Sigma p_0 w} \times 100 \)
In simple words: In this method, we multiply the prices of both current and base years by their respective weights, sum them up, and then find the percentage ratio of the current year's total to the base year's total.

🎯 Exam Tip: Remember that in the weighted aggregative method, the weights (w) remain constant for both the base year and the current year calculations.

 

Question 3. निम्नलिखित आँकड़ों से भारित समूही रीति द्वारा वर्ष 1999 को आधार मानकर वर्ष 2001 के लिए सूचकांक तैयार कीजिए:

वस्तुभारमूल्य
19992001
A4016.0020.00
B2540.0060.00
C50.500.50
D205.126.25
E102.001.50

Answer:
वस्तुभार (W)1999 (\( P_0 \))2001 (\( P_1 \))\( P_1 W \)\( P_0 W \)
A4016.0020.00800.00640.00
B2540.0060.001,500.001,000.00
C50.500.502.502.50
D205.126.25125.00102.40
E102.001.5015.0020.00
योग\( 2,442.50 \)\( 1,764.90 \)

2001 के लिए भारित समूही सूचकांक = \( \frac{\Sigma p_1 w}{\Sigma p_0 w} \times 100 \)
= \( \frac{2442.50}{1764.90} \times 100 = 138.39 \)
In simple words: We calculate the total value of current year items with weights (\( \Sigma P_1 W \)) and base year items with weights (\( \Sigma P_0 W \)), then divide current by base and multiply by 100 to get the index.

🎯 Exam Tip: Ensure all decimal multiplications (like \( 20 \times 5.12 = 102.40 \)) are calculated carefully to avoid losing marks on final rounding.

 

Question 7. भारित सूचकांक बनाने की अन्य कौन-कौन-सी विधियाँ हैं? संक्षेप में उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: विभिन्न विद्वानों ने सूचकांक की रचना करने के लिए भार देने की अलग-अलग विधियों का प्रतिपादन किया है। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:
In simple words: Different economists have created various methods to assign weights to items for calculating index numbers.

🎯 Exam Tip: When asked about other methods, mention popular ones like Laspeyres' Method, Paasche's Method, and Fisher's Ideal Method as key examples.

 

Question 1. लैस्पियरे की विधि (Laspeyre’s Method)
Answer: प्रो० लैस्पियरे ने आधार वर्ष की मात्रा \( q_0 \) को दोनों वर्षों के लिए भार माना है। लैस्पियरे का सूत्र इस प्रकार है:
\[ \text{लैस्पियरे सूचकांक} = \frac{\sum p_1 q_0}{\sum p_0 q_0} \times 100 \]
जहाँ,
\( p_1 \) = चालू वर्ष का मूल्य
\( p_0 \) = आधार वर्ष का मूल्य
\( q_0 \) = आधार वर्ष की मात्रा
यह विधि आधार वर्ष के उपभोग प्रतिरूप को प्राथमिकता देती है।
In simple words: Laspeyre's method calculates the price index by keeping the quantities of the base year constant as weights.

🎯 Exam Tip: Remember that Laspeyre's index uses base year quantities (\( q_0 \)) in both the numerator and denominator.

 

Question 2. पाशे विधि (Paasche’s Method)
Answer: इस विधि के अन्तर्गत चालू वर्ष तथा आधार वर्ष दोनों के लिए चालू वर्ष की मात्रा \( q_1 \) का भार माना जाता है। सूत्र के अनुसार:
\[ \text{पाशे सूचकांक} = \frac{\sum p_1 q_1}{\sum p_0 q_1} \times 100 \]
जहाँ,
\( p_1 \) = चालू वर्ष का मूल्य
\( q_1 \) = चालू वर्ष की मात्रा
\( p_0 \) = आधार वर्ष का मूल्य
यह विधि वर्तमान उपभोग प्रतिरूप को दर्शाने में सहायक होती है।
In simple words: Paasche's method calculates the price index by using the current year's quantities as weights.

🎯 Exam Tip: In Paasche's index, current year quantities (\( q_1 \)) are used as weights in both numerator and denominator.

 

Question 3. फिशर विधि (Fisher’s Method)
Answer: इस विधि के अन्तर्गत लैस्पियरे तथा पाशे के सूत्रों का गुणोत्तर माध्य (Geometric Mean) लिया जाता है। इसे फिशर का आदर्श सूचकांक कहा जाता है। सूत्र के अनुसार:
\[ \text{फिशर सूचकांक} = \sqrt{\text{लैस्पियरे सूचकांक} \times \text{पाशे सूचकांक}} \]
अर्थात्,
\[ \text{फिशर सूचकांक} = \sqrt{\left(\frac{\sum p_1 q_0}{\sum p_0 q_0}\right) \times \left(\frac{\sum p_1 q_1}{\sum p_0 q_1}\right)} \times 100 \]
यह सूचकांक दोनों विधियों के दोषों को संतुलित करता है।
In simple words: Fisher's index is the geometric mean of Laspeyre's and Paasche's indexes, which is why it is considered the most balanced and ideal method.

🎯 Exam Tip: Fisher's index is called 'ideal' because it satisfies both the Time Reversal Test and the Factor Reversal Test.

 

Question 4. निम्नलिखित आँकड़ों से लैस्पियरे, पाशे तथा फिशर सूचकांकों की रचना कीजिए:

वस्तु19912001
मूल्यमात्रामूल्यमात्रा
A420610
B315520
C225315
D510440

Answer:
गणना तालिका (Calculation Table):
वस्तु19912001\( p_0 q_0 \)\( p_0 q_1 \)\( p_1 q_0 \)\( p_1 q_1 \)
\( p_0 \)\( q_0 \)\( p_1 \)\( q_1 \)
A420610804012060
B315520456075100
C22531550307545
D5104405020040160
योग (\( \sum \))----225330310365

1. लैस्पियरे सूचकांक (Laspeyre's Index):
\( \text{लैस्पियरे सूचकांक} = \frac{\sum p_1 q_0}{\sum p_0 q_0} \times 100 \)
\( = \frac{310}{225} \times 100 = 137.78 \)

2. पाशे सूचकांक (Paasche's Index):
\( \text{पाशे सूचकांक} = \frac{\sum p_1 q_1}{\sum p_0 q_1} \times 100 \)
\( = \frac{365}{330} \times 100 = 110.61 \)

3. फिशर सूचकांक (Fisher's Index):
\( \text{फिशर सूचकांक} = \sqrt{137.78 \times 110.61} = 123.45 \)
यह गणना दर्शाती है कि तीनों विधियों से प्राप्त सूचकांक अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
In simple words: We multiply the respective prices and quantities to find the sums, then plug them into the formulas to get Laspeyre's (137.78), Paasche's (110.61), and Fisher's (123.45) index numbers.

🎯 Exam Tip: Double-check your calculations for each column sum (\( \sum p_1 q_0 \), etc.) as a single multiplication error will affect all three final answers.

Question. उदाहरण 5. निम्न समंकों से खाद्य पदार्थों के लिए 1980 को आधार वर्ष मानकर वर्ष 1990 के लिए भारित सूचकांक ज्ञात कीजिए:

मदभारप्रति किलो कीमत
19801990
गेहूँ405.006.00
चावल306.007.00
चना1516.0020.00
अरहर515.0030.00
दूध68.0010.00
तेल1030.0035.00
चीनी39.0015.00
नमक11.502.00
योग110--

Answer:
हल:
मदभार (\( W \))प्रति किलो कीमत\( P_1W \)\( P_0W \)
1980 (\( P_0 \))1990 (\( P_1 \))
गेहूँ405.006.00240.00200.00
चावल206.007.00140.00120.00
चना1516.0020.00300.00240.00
अरहर515.0030.00150.0075.00
दूध68.0010.0060.0048.00
तेल1030.0035.00350.00300.00
चीनी39.0015.0045.0027.00
नमक11.502.002.001.50
योग---1,287.001,011.50

सूत्र:
\( \text{Index Number} = \frac{\sum P_1W}{\sum P_0W} \times 100 \)
\( \therefore \text{भारित सूचकांक} = \frac{\sum P_1W}{\sum P_0W} \times 100 \)

संकेत:
\( \sum = \text{योग} \)
\( P_1 = \text{वर्तमान वर्ष का मूल्य} \)
\( W = \text{भार (Weight)} \)
\( P_0 = \text{आधार वर्ष का मूल्य} \)

गणना:
\( = \frac{1,287}{1011.50} \times 100 \)
\( \implies = \frac{1,28,70,000}{1,01,150} \)
\( \implies = 127.23 \)
\( \implies \text{अतः भारित सूचकांक} = 127.23 \)
In simple words: Weighted index number calculates the average price change by giving more importance (weight) to items we buy more, like wheat, and less importance to items we buy less, like salt.

🎯 Exam Tip: Always write down the formula clearly and define each symbol (\( P_0, P_1, W \)) to secure full step-marking in the exam.

 

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

 

Question 1. नीचे दी गयी तालिका में वर्ष 2000 और 2001 में छः वस्तुओं के अलग-अलग मूल्य दिये गये हैं। सरल समूही रीति और सरल मूल्यानुपात रीति का प्रयोग करते हुए साधारण सूचकांक की गणना कीजिए।

 

Question 1. निम्नलिखित आँकड़ों से सरल समूह रीति तथा सरल मूल्य अनुपात रीति द्वारा कीमत सूचकांक ज्ञात कीजिए:

वस्तुएँABCDEF
मूल्य (2000)3070205080100
मूल्य (2001)5060406090110

Answer:
फिशर सूचकांक का सूत्र निम्नलिखित है: \[ \text{फिशर सूचकांक} = \sqrt{ \text{लैस्पियरे सूचकांक} \times \text{पाशे सूचकांक} } \]
सूचकांकों की गणना:
वस्तुएँ\( p_0 = 2000 \)\( p_1 = 2001 \)\( R = \frac{p_1}{p_0} \times 100 \)
A3050\( R = \frac{50}{30} \times 100 \) या, \( R = 166.66 \)
B7060\( R = \frac{60}{70} \times 100 \) या, \( R = 85.71 \)
C2040\( R = \frac{40}{20} \times 100 \) या, \( R = 200.00 \)
D5060\( R = \frac{60}{50} \times 100 \) या, \( R = 120.00 \)
E8090\( R = \frac{90}{80} \times 100 \) या, \( R = 112.50 \)
F100110\( R = \frac{110}{100} \times 100 \) या, \( R = 110.00 \)
योग\( \sum p_0 = 350 \)\( \sum p_1 = 410 \)\( \sum R = 794.87 \)

अतः, सरल समूह रीति द्वारा कीमत सूचकांक = \( \frac{\text{चालू वर्ष की कीमतों का योग}}{\text{आधार वर्ष की कीमतों का योग}} \times 100 \)
\( \implies \frac{410}{350} \times 100 = 117.48 \)
एवं सरल मूल्य अनुपात रीति द्वारा कीमत सूचकांक = \( \frac{\sum R}{N} \)
\( \implies \frac{794.88}{6} = 132.48 \)
In simple words: To find the simple aggregative index, we divide the total price of the current year by the total price of the base year and multiply by 100. For the simple average of price relatives, we calculate the percentage change for each item individually, add them up, and divide by the number of items.

🎯 Exam Tip: Always write the formulas clearly before substituting values, and double-check your calculations for price relatives (\(R\)) up to two decimal places to avoid rounding errors.

 

Question 2. निम्नलिखित आँकड़ों से वर्ष 1990 को आधार मानते हुए वर्ष 2001 तथा 2002 के लिए भारित मूल्य सूचकांक की गणना मूल्य अनुपात विधि से ज्ञात कीजिए:

वस्तुभारमूल्य प्रति इकाई (Rs. में)
199020012002
A420.0021.0024.00
B31.251.001.50
C25.008.002.00
D12.002.003.25

Answer:
भारित मूल्य अनुपात विधि द्वारा सूचकांक की गणना के लिए निम्नलिखित सारणी तैयार करते हैं:
वस्तुभार (\(W\))मूल्य 1990 (\(p_0\))वर्ष 2001वर्ष 2002
\(R_1 = \frac{p_1}{p_0} \times 100\)\(W R_1\)\(R_2 = \frac{p_2}{p_0} \times 100\)\(W R_2\)
A420.00105.00420.00120.00480.00
B31.2580.00240.00120.00360.00
C25.00160.00320.0040.0080.00
D12.00100.00100.00162.50162.50
योग\( \sum W = 10 \)\( \sum W R_1 = 1080 \)\( \sum W R_2 = 1082.5 \)

1. वर्ष 2001 के लिए भारित मूल्य सूचकांक:
\( \text{सूचकांक} = \frac{\sum W R_1}{\sum W} \)
\( \implies \frac{1080}{10} = 108 \)
2. वर्ष 2002 के लिए भारित मूल्य सूचकांक:
\( \text{सूचकांक} = \frac{\sum W R_2}{\sum W} \)
\( \implies \frac{1082.5}{10} = 108.25 \)
यह व्यवस्थित गणना दर्शाती है कि आधार वर्ष की तुलना में दोनों वर्षों में औसत कीमतों में वृद्धि हुई है।
In simple words: To find the weighted index, we first calculate the price relative (percentage change) for each item, multiply it by its weight, sum these products up, and then divide by the total sum of weights.

🎯 Exam Tip: When calculating weighted index numbers, ensure that you multiply the price relative (\(R\)) by the weight (\(W\)) and not by the original price to avoid calculation errors.

भारित मूल्य सूचकांक की मूल्य अनुपात विधि से गणना

वस्तुभार (W)19902002
\( P_0 \)\( P_1 \)\( R = \frac{P_1}{P_0} \times 100 \)\( RW \)\( P_2 \)\( R = \frac{P_2}{P_0} \times 100 \)\( RW \)
A420.0021.0010542024.00120480
B31.001.00802401.50120360
C28.008.001603202.004080
D12.002.001001003.25162.5162.5
योग\( \sum W = 10 \)\( \sum RW = 1080 \)1082.5

2001 के लिए सूचकांक = \( \frac{\sum RW}{\sum W} = \frac{1080}{10} = 108 \)

2002 के लिए सूचकांक = \( \frac{\sum RW}{\sum W} = \frac{1082.5}{10} = 108.25 \)

 

Question 3. निम्नलिखित आँकड़ों से वर्ष 2002 का भारित समूह रीति द्वारा उत्पादन सूचकांक ज्ञात कीजिए

वस्तुभारउत्पादन
19992002
180175190
275190210
32501,0001,200
4402024
560250700

Answer:
हल: भारित समूही रीति द्वारा सूचकांक की गणना
वस्तुभार (W)19992002\( p_1 W \)\( p_0 W \)
\( p_0 \)\( p_1 \)
18017519015,20014,000
27519021015,70014,250
32501,0001,2003,00,0002,50,000
4402024960800
56025070042,00015,000
योग3,73,9102,94,050

2002 के लिए भारित समूही सूचकांक = \( \frac{\sum p_1 W}{\sum p_0 W} \times 100 \)
\( = \frac{3,73,910}{2,94,050} \times 100 \)
\( = 127.16 \)
इस प्रकार, वर्ष 1999 की तुलना में वर्ष 2002 में उत्पादन में लगभग 27.16% की वृद्धि दर्ज की गई है।
In simple words: To find the weighted index, we multiply each year's production by its weight, sum them up, and then divide the current year's total by the base year's total before multiplying by 100. This shows how much overall production has changed.

🎯 Exam Tip: Always double-check your calculations for \( p_1 W \) and \( p_0 W \) columns, as a single multiplication error can affect the entire sum and final index value.

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

Question 1. सूचकांकों का निर्माण करते समय हमें क्या-क्या प्रक्रियाएँ करनी पड़ती हैं? समझाइए।
Answer: सामायतः सूचकांकों का निर्माण करते समय हमें निम्नलिखित प्रक्रियाएँ अपनानी पड़ती हैं:
1. सर्वप्रथम, हमें एक ऐसे आधार-वर्ष को निश्चित करना होता है जिसके साथ वर्तमान मूल्य-स्तर की तुलना की जाती है। यह आधार-वर्ष सामान्य और स्थिर होना चाहिए।
2. सूचकांक बनाने के लिए हमें कुछ प्रतिनिधि वस्तुओं तथा सेवाओं को चुनना होता है। क्योंकि सब वस्तुओं के मूल्यों को लेकर सूचकांक बनाना सम्भव नहीं है।
3. प्रतिनिधि वस्तुओं के चुनाव के पश्चात् हमें इनके मूल्यों को इकट्ठा करना होता है। आधार वर्ष तथा वर्तमान वर्ष में इन वस्तुओं की मूल्य सूची तैयार की जाती है।
4. प्रतिनिधि वस्तुओं के मूल्यों को इकट्ठा करने के पश्चात् उनका औसत निकाला जाता है।
In simple words: सूचकांक बनाने के लिए सबसे पहले एक आधार वर्ष चुना जाता है, फिर कुछ खास वस्तुओं को चुनकर उनके मूल्यों का औसत निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में चारों चरणों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 2. उपभोक्ता कीमत सूचकांक क्या है? इनकी क्या उपयोगिता है?
Answer: उपभोक्ता कीमत सूचकांक के सूचकांकों को बनाने के लिए उन वस्तुओं तथा सेवाओं को सम्मिलित किया जाता है जो लोगों के द्वारा सामान्यतः उपभोग की जाती हैं। विभिन्न वस्तुओं को उन पर व्यय की जाने वाली आय के अनुपात में भार दिया जाता है। इनका निर्माण करते समय, उपभोक्ता की जाने वाली समस्त वस्तुओं को सम्मिलित करना सम्भव नहीं होता, इसलिए इन्हें केवल प्रतिनिधि वस्तुओं के आधार पर ही बनाया जाता है। इस प्रकार के सूचकांक बनाते समय मुख्यतया थोक मूल्यों का प्रयोग किया जाता है। यह सूचकांक समाज के विभिन्न वर्गों के रहन-सहन के खर्च में बदलाव को दर्शाता है।

महत्त्व: इन सूचकांकों का निर्माण मुद्रा की क्रयशक्ति में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है, परन्तु इनकी उपयोगिता सीमित है क्योंकि ये मुद्रा की क्रयशक्ति में होने वाले परिवर्तनों का सही अनुमान नहीं दे पाते हैं।
In simple words: उपभोक्ता कीमत सूचकांक यह दिखाता है कि आम लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीजों के दाम कितने बदले हैं। इससे महंगाई का पता चलता है।

🎯 Exam Tip: उपभोक्ता कीमत सूचकांक की परिभाषा के साथ इसके महत्त्व (क्रयशक्ति मापना) को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।

 

Question 3. साधारण सूचकांक का निर्माण किस प्रकार किया जाता है?
Answer: साधारण सूचकांक निर्माण करने के लिए सर्वप्रथम आधार-वर्ष का चुनाव कर लिया जाता है, तत्पश्चात् प्रतिनिधि वस्तुओं का चुनाव करके उनके मूल्य एकत्रित कर लिये जाते हैं तथा उनका औसत ज्ञात कर लिया जाता है। इन सब बातों को निश्चित करने के पश्चात् प्रत्येक प्रतिनिधि वस्तु आधार-वर्ष के मूल्यों को 100 के बराबर कर लिया जाता है और उन सबको जोड़कर वस्तुओं की संख्या से भाग दे देते हैं। इस प्रकार आधार-वर्ष के मूल्यों का गणितीय औसत प्राप्त हो जाता है जो आधार-वर्ष का सूचकांक होता है। आधार-वर्ष का सूचकांक प्रत्येक दशा में 100 आता है। इसके पश्चात् वर्तमान वर्ष के मूल्यों को लेकर उनके मूल्य सम्बन्धी (Price relatives) निकाले जाते हैं जो वस्तुओं के वर्तमान मूल्यों को आधार-वर्ष के मूल्यों के प्रतिशत के रूप में व्यक्त करते हैं। इस प्रकार प्राप्त होने वाले सब वस्तुओं के मूल्य सम्बन्धियों को जोड़कर वस्तुओं की संख्या से भाग दे देते हैं और इस प्रकार वर्तमान वर्ष का सूचकांक ज्ञात हो जाता है। यह विधि गणना में बेहद सरल और समझने में आसान होती है।
In simple words: साधारण सूचकांक में आधार वर्ष का मूल्य हमेशा 100 माना जाता है। फिर वर्तमान वर्ष के मूल्यों का प्रतिशत निकालकर उनका औसत निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: उत्तर में 'मूल्य सम्बन्धी' (Price relatives) और आधार वर्ष का सूचकांक हमेशा 100 होने की बात लिखना न भूलें।

 

Question 4. सूचकांकों की चार सीमाएँ बताइए। [2008]
Answer: सूचकांकों की चार सीमाएँ निम्नलिखित हैं:
(1) सूचकांक मुद्रा के मूल्य परिवर्तनों का बिल्कुल सही माप प्रस्तुत नहीं करते हैं।
(2) सूचकांकों की सहायता से दो देशों के सम्बन्ध में किसी प्रकार की तुलना करना काफी कठिन है।
(3) सूचकांक केवल वर्ग विशेष के लिए ही मूल्य परिवर्तनों को माप सकते हैं।
(4) भार निर्धारण अवैज्ञाानिक होता है। ये सीमाएँ दर्शाती हैं कि सूचकांकों का उपयोग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
In simple words: सूचकांक पूरी तरह से सटीक नहीं होते हैं। ये केवल एक विशेष वर्ग के लिए काम करते हैं और इनसे दो देशों की तुलना करना मुश्किल होता है।

🎯 Exam Tip: सीमाओं को लिखते समय चारों बिंदुओं को स्पष्ट रूप से नंबर डालकर लिखें ताकि परीक्षक को पढ़ने में आसानी हो।

 

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. सूचकांक क्या होते हैं? [2007, 09, 15, 16]
Answer: सूचकांक मुद्रा के मूल्य में होने वाले परिवर्तनों को मापने का एकमात्र साधन है। उनके द्वारा मूल्य-स्तर की केन्द्रीय प्रवृत्ति को मापा जा सकता है। यह आर्थिक गतिविधियों में होने वाले बदलावों को समझने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
In simple words: सूचकांक एक ऐसा साधन है जिससे हम यह मापते हैं कि समय के साथ पैसों की कीमत या चीजों के दामों में कितना बदलाव आया है।

🎯 Exam Tip: एक अंक वाले प्रश्नों में सीधे और सटीक शब्दों में परिभाषा लिखें, जैसे 'मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन मापने का साधन'।

 

Question 2. सूचकांक कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: सूचकांक सामान्यतः चार प्रकार के होते हैं:
1. सामान्य मूल्य सूचकांक,
2. श्रमिकों के जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक,
3. थोक कीमतों के सूचकांक,
4. औद्योगिक सूचकांक। ये सभी प्रकार अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने में मदद करते हैं।
In simple words: सूचकांक मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं जो अलग-अलग क्षेत्रों जैसे थोक बाजार, उद्योगों और मजदूरों के खर्चों को मापते हैं।

🎯 Exam Tip: चारों प्रकारों के नाम स्पष्ट और सही वर्तनी (spelling) के साथ लिखें ताकि पूरे अंक मिलें।

प्रश्न 3. सूचकांक के निर्माण की प्रक्रिया बताइए।
उत्तर: सूचकांक के निर्माण की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
(1) आधार-वर्ष का चुनाव करना,
(2) प्रतिनिधि वस्तुओं का चुनाव,
(3) वस्तुओं के मूल्यों को इकट्ठा करना तथा
(4) औसत ज्ञात करना। यह व्यवस्थित प्रक्रिया सूचकांक को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाती है।
In simple words: To make an index number, we first choose a base year, select the items we want to track, collect their prices, and then find their average.

🎯 Exam Tip: Memorize these four steps in chronological order as they are frequently asked in short-answer questions.

 

प्रश्न 4. सूचकांक बनाते समय उत्पन्न होने वाली चार कठिनाइयाँ लिखिए। [2009]
उत्तर: सूचकांक बनाते समय उत्पन्न होने वाली चार प्रमुख कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं:
(1) आधार-वर्ष के चुनने में कठिनाई।
(2) प्रतिनिधि वस्तुओं के चुनाव में कठिनाई।
(3) मूल्यों को इकट्ठा करने में कठिनाई।
(4) भार देने में कठिनाई। इन व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण कभी-कभी सूचकांक के परिणाम पूरी तरह शुद्ध नहीं होते।
In simple words: Making index numbers is hard because it is difficult to choose the right starting year, select the right items, collect accurate prices, and decide how much importance to give to each item.

🎯 Exam Tip: Clearly list all four points with proper numbering to secure full marks in this question.

 

प्रश्न 5. आधार वर्ष का निर्देशांक क्या होना चाहिए? [2014]
उत्तर: आधार वर्ष का सूचकांक (निर्देशांक) हमेशा 100 होना चाहिए। यह तुलना करने के लिए एक मानक पैमाना प्रदान करता है।
In simple words: The base year's index value is always set to 100 so that we can easily compare other years' prices against it.

🎯 Exam Tip: Always remember that the base year index is always 100; this is a very common one-mark question.

 

प्रश्न 6. सूचकांक के आर्थिक उपयोग बताइए। [2008]
उत्तर: सूचकांक आर्थिक जगत में होने वाले परिवर्तनों का ज्ञान कराते हैं। इसके आधार पर ही सरकार करारोपण, सार्वजनिक व्यय, ऋण, बैंक-साख, ब्याज दर सम्बन्धी नीतियों का निर्धारण करती है। इसी कारण सूचकांकों को आर्थिक वायुमापक यन्त्र (Economic Barometer) कहकर सम्बोधित किया गया है। यह देश की आर्थिक सेहत को मापने का एक बेहतरीन जरिया है।
In simple words: Index numbers help the government and businesses understand economic changes so they can make good policies about taxes, loans, and interest rates.

🎯 Exam Tip: Do not forget to mention the term 'Economic Barometer' (आर्थिक वायुमापक यन्त्र) as it is a key phrase that examiners look for.

 

प्रश्न 7. सूचकांक का अर्थ स्पष्ट कीजिए। [2013]
उत्तर: सूचकांक मुद्रा के मूल्य में होने वाले परिवर्तनों को नापने का एक साधन है। इसके द्वारा मूल्य के स्तर की केन्द्रीय प्रवृत्ति को मापा जा सकता है। सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर ही हम मुद्रा की क्रय-शक्ति में होने वाले परिवर्तनों को जान सकते हैं। बढ़ता हुआ सूचकांक हमें यह बताता है कि सामान्य मूल्य-स्तर बढ़ रहा है तथा मुद्रा का मूल्य गिर रहा है। इसके विपरीत, यदि सूचकांक गिरता है तो वह इस बात का संकेत देता है कि सामान्य मूल्य-स्तर गिर रहा है और मुद्रा का मूल्य बढ़ रहा है। सूचकांक मुद्रा के मूल्य की निरपेक्ष माप प्रस्तुत नहीं करते। उनके द्वारा केवल मुद्रा के मूल्य में होने वाले सापेक्षिक परिवर्तनों को मापा जा सकता है तथा विभिन्न समय में मूल्य-स्तर की तुलना की जा सकती है। किसी निश्चित समय पर मूल्य-स्तर कितना है, इसे सूचकांक द्वारा नहीं बताया जा सकता अपितु किसी दूसरे समय की अपेक्षा यह कितना बढ़ गया है अथवा कम हो गया है, इसे हम सूचकांकों की सहायता से जान सकते हैं। यह आर्थिक विश्लेषण को सरल और व्यावहारिक बनाता है।
In simple words: An index number is a tool that shows how prices and the value of money change over time. It does not show the exact price but tells us how much prices have gone up or down compared to the past.

🎯 Exam Tip: Explain the relationship between price level and purchasing power of money clearly to get maximum marks.

 

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

 

प्रश्न 1. श्रृंखला मूल्य अनुपात का सूत्र है:
(a) \( \frac{\text{चालू वर्ष का मूल्य}}{\text{आधार-वर्ष का मूल्य}} \times 100 \)
(b) \( \frac{\text{आधार-वर्ष का मूल्य}}{\text{चालू वर्ष का मूल्य}} \times 100 \)
(c) \( \frac{\text{चालू वर्ष का मूल्य}}{\text{पिछले वर्ष का मूल्य}} \times 100 \)
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) \( \frac{\text{चालू वर्ष का मूल्य}}{\text{पिछले वर्ष का मूल्य}} \times 100 \)
In simple words: Chain base index or link relative is calculated by dividing the current year's price by the previous year's price and multiplying by 100.

🎯 Exam Tip: Remember that in chain base index, the base changes every year to the immediately preceding year.

 

प्रश्न 2. “सूचकांक की श्रेणी एक ऐसी श्रेणी होती है, जो अपने झुकाव तथा उच्चावचनों द्वारा जिस परिमाण से सम्बन्धित है, में होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट करती है।” यह परिभाषा दी है:
(a) प्रो० चैण्डलर ने
(b) प्रो० बाउले ने
(c) किनले ने
(d) हार्पर ने
Answer: (b) प्रो० बाउले ने
In simple words: This definition of index numbers, which focuses on trends and fluctuations, was given by the famous economist Professor Bowley.

🎯 Exam Tip: Associate key terms like 'fluctuations' (उच्चावचन) and 'trends' (झुकाव) with Professor Bowley to easily remember this definition.

 

प्रश्न 3. “कीमत का सूचकांक आधार-वर्ष की तुलना में किसी अन्य समय में कीमतों की औसत ऊँचाई को प्रकट करने वाली संख्या है।” यह परिभाषा दी है:
(a) प्रो० चैण्डलर ने
(b) प्रो० बाउले ने
(c) किनले ने
(d) हार्पर ने
Answer: (a) प्रो० चैण्डलर ने
In simple words: Professor Chandler defined price index as a number that shows the average height of prices at a given time compared to the base year.

🎯 Exam Tip: Look for the keyword 'average height of prices' (कीमतों की औसत ऊँचाई) to identify Professor Chandler's definition.

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