UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 19 Development of Indian Population

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Detailed Chapter 19 भारतीय जनसंख्या का विकास UP Board Solutions for Class 12 Economics

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Class 12 Economics Chapter 19 भारतीय जनसंख्या का विकास UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 12 Economics Chapter 19 Development Of Indian Population (भारतीय जनशक्ति का विकास)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

Question 1. जनसंख्या घनत्व क्या है? भारत में जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों/तत्त्वों का विश्लेषण कीजिए।
Answer: जनसंख्या के घनत्व से अभिप्राय मनुष्य-भूमि अनुपात से है, अर्थात् देश के कुल भूमि के क्षेत्रफल को कुल जनसंख्या से भाग देने पर जो भागफले आता है, उसे देश की जनसंख्या का घनत्व कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, “किसी देश के प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों की औसत संख्या को ही जनसंख्या का घनत्व कहते हैं ।” जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाले तत्त्व किसी स्थान-विशेष पर जनसंख्या का घनत्व निम्नलिखित मुख्य तत्त्वों द्वारा प्रभावित होता है
1. जलवायु - जनसंख्या का घनत्व जलवायु पर निर्भर करता है। जिस क्षेत्र यो स्थान की जलवायु उत्तम और स्वास्थ्यवर्द्धक होती है, वहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। इसके विपरीत, यदि किसी स्थान की जलवायु अधिक गर्म या अधिक ठण्डी होती है तो ऐसे स्थान पर जनसंख्या का घनत्व कम होता है।
2. वर्षा - जिन स्थानों पर वर्षा न तो बहुत अधिक होती है और न ही बहुत कम, उन स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। इसके विपरीत, जिन स्थानों पर अत्यधिक वर्षा होती है या बहुत कम वर्षा होती है, उन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व भी कम पाया जाता है। यही कारण है कि राजस्थान में वर्षा कम होने के कारण तथा असम में अधिक वर्षा होने के कारण जनसंख्या का घनत्व कम है।
3. भूमि की बनावट व उर्वरा-शक्ति - मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पर्वतीय तथा पठारी क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व कम होता है, क्योंकि ऊँची-नीची भूमि होने के कारण कृषि कार्य करने तथा उद्योगों को स्थापित करने में कठिनाई होती है। इसके विपरीत, मैदानी भागों में मिट्टी समतल व अधिक उपजाऊ होती है इसलिए इन स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में गंगा-यमुना के मैदानी भाग में जनसंख्या का घनत्व अधिक है।
4. सिंचाई की सुविधाएँ - जिन क्षेत्रों में वर्षा की कमी को सिंचाई के साधनों द्वारा पूरा कर लिया जाता है या ज़िन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती हैं, उन क्षेत्रों में भी जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।
5. यातायात एवं संवहन/संचार के साधन - जिन क्षेत्रों में यातायात तथा संवहन/संचार के साधन विकसित होते हैं, उन क्षेत्रों में भी जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है, क्योंकि ऐसे क्षेत्रों में उद्योग तथा व्यापार की सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र आदि राज्यों में यातायात एवं संवहन/संचार के साधनों के कारण ही जनसंख्या का घनत्व अधिक है।
6. औद्योगिक विकास - औद्योगिक स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। इसका प्रमुख कारण श्रमिकों को रोजगार तथा व्यापारियों को व्यापार आदि की सुविधाएँ सरलता से मिल जाना है। जमशेदपुर, कानपुर, अहमदाबाद, मुम्बई आदि स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व इसी कारण अधिक है।
7. खनिज पदार्थ या खनिज सम्पत्ति - जिन क्षेत्रों में खनिज भण्डार अधिक मात्रा में होते हैं, वहाँ पर भी जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है; क्योंकि इन स्थानों पर आधारित अनेक उद्योग-धन्धों में इन्हें व्यवसाय मिल जाता है। बिहार व पश्चिम बंगाल में जनसंख्या का घनत्व अधिक होने का यही कारण है।
8. राजधानी - देश अथवा प्रदेश की राजधानी में भी जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है, क्योंकि इन स्थानों पर सचिवालय, संसद व विधानसभा भवन, राष्ट्रपति भवन, संसद-सदस्य निवास, विधायक निवास आदि के साथ-साथ अनेक कार्यालय, संस्थाएँ तथा व्यापार एवं वाणिज्य के केन्द्र होते हैं। दिल्ली, लखनऊ, चण्डीगढ़ आदि स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक होने का प्रमुख कारण राजधानी होना ही है।
9. ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थान - ऐतिहासिक तथा धार्मिक महत्त्व के स्थानों पर भी जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। आगरा व दिल्ली ऐतिहासिक महत्त्व के स्थान हैं और मथुरा, काशी, हरिद्वार आदि धार्मिक स्थल । इसी कारण से इन स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक है।
10. शान्ति एवं सुरक्षा - जिन क्षेत्रों में शान्ति एवं सुरक्षा की व्यवस्था होती है, उन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर लोग अपने जीवन और सम्पत्ति को सुरक्षित समझते हैं। इसके विपरीत, जो स्थान सीमा के समीप होते हैं, सुरक्षा व शान्ति की दृष्टि से वे अशान्त क्षेत्र माने जाते हैं; अतः वहाँ जनसंख्या का घनत्व कम होता है। पंजाब तथा असम के सीमान्त क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व कम होने का प्रमुख कारण यही है।
11. अप्रवास एवं उत्प्रवास - अप्रवास तथा उत्प्रवास का भी जनसंख्या के घनत्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है। देश के विभाजन के समय दिल्ली में जनसंख्या का घनत्व बढ़ गया। इसका प्रमुख कारण पाकिस्तान से आये हुए शरणार्थियों का अप्रवास था। भारत में रीति-रिवाज, भाषा एवं धर्म तथा संस्कृति में विभिन्नताएँ पायी जाती हैं। फलस्वरूप जनसंख्या के घनत्व में भिन्नता पायी जाती है।
12. शिक्षा के केन्द्र - जिन स्थानों पर शिक्षा के केन्द्र स्थापित होंगे, वहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक होगा। रुड़की, इलाहाबाद, वाराणसी आदि शिक्षा के केन्द्र हैं, इसी कारण ऐसे स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है।
13. व्यापारिक केन्द्र - जो स्थान व्यापारिक महत्त्व के होते हैं, वहाँ पर भी जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। मुम्बई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, कानपुर आदि व्यापारिक केन्द्र हैं, इसी कारण इन स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक है।In simple words: जनसंख्या घनत्व भूमि के प्रति व्यक्ति अनुपात को दर्शाता है, जिसमें भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जैसे कई कारक प्रभावित करते हैं। उत्तम जलवायु, उपजाऊ भूमि, पर्याप्त वर्षा, सिंचाई, परिवहन, औद्योगिक विकास, खनिज संपदा, राजधानी क्षेत्र, ऐतिहासिक/धार्मिक स्थान, शांति/सुरक्षा, शिक्षा और व्यापारिक केंद्र अधिक घनत्व को आकर्षित करते हैं, जबकि इनके विपरीत कारक कम घनत्व का कारण बनते हैं।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या घनत्व को परिभाषित करते समय "मनुष्य-भूमि अनुपात" और "प्रति वर्ग किलोमीटर निवास करने वाले व्यक्तियों की औसत संख्या" जैसे वाक्यांशों का उपयोग करें। प्रभावित करने वाले कारकों को विभिन्न श्रेणियों (भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक) में विभाजित करके स्पष्टीकरण दें, जिससे उत्तर की समग्रता और अंक प्राप्ति सुनिश्चित होगी।

 

Question 2. भारत में जनसंख्या-वृद्धि के कारणों एवं जनसंख्या-वृद्धि को रोकने के उपाय बताइए ।या“भारत में जनसंख्या की समस्या विस्फोटक है।” विवेचना कीजिए। इसे हल करने के लिए आप क्या सुझाव देंगे?याभारत में जनाधिक्य की समस्या हल करने के लिए सुझाव दीजिए ।
Answer: भारत में तीव्र गति से जनसंख्या वृद्धि के कारण निम्नलिखित हैं
1. जन्म-दर एवं मृत्यु-दर के मध्य अन्तराल का बढ़ना - भारत में 1921 ई० से पूर्व तक जन्म-दर तथा मृत्यु-दर के बीच का अन्तर बहुत कम रहा। 1921 ई० के बाद से यह अन्तर बढ़ने लगा। पिछले तीस वर्षों से जन्म-दर जिस गति से घटी है उसकी अपेक्षा मृत्यु-दर कहीं अधिक घटी है, जिससे दोनों दरों में अन्तर बढ़ गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं के बढ़ जाने के कारण मृत्यु-देर में कमी आयी। 1921 ई० में जन्म-दर 46.4 प्रति हजार थी और मृत्यु-दर 36.3 प्रति हजार; जबकि 2011 ई० में जन्म-दर 23 प्रति हजार तथा मृत्यु-दर 9 प्रति हजार है। इससे स्पष्ट हो कि मृत्यु-दर में तेजी से कमी हुई है।
2. विवाह की औसत आयु - जन्म का सीधा सम्बन्ध विवाह से होता है। भारत में लड़कियों का विवाह कम आयु में हो जाया करता है, जिससे वे कम आयु में ही माँ बन जाती हैं। शारदा ऐक्ट के द्वारा लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु 14 वर्ष थी, जो अब 18 वर्ष कर दी गयी है। विकसित देशों में लड़कियों के विवाह की औसत आयु 22-25 वर्ष है।
3. प्रजनन दर - विकसित देशों की अपेक्षा भारत में प्रजनन दर ऊँची है जिसका मुख्य कारण विवाह की अनिवार्यता, न्यूनतम आयु का कम होना, गर्भ निरोधक उपायों का सीमित उपयोग, साक्षरता में कमी, जीवन-स्तर की निम्नता, परम्परागत जीवन-दर्शन तथा 80% जनसंख्या का ग्रामीण होना है। कर्म आयु में विवाहित स्त्री कम आयु में ही माँ बन जाती है। इस प्रकार अपनी जीवन-अवधि में एक स्त्री 6 से 7 बच्चों तक की माँ बन जाती है। विकसित देशों में यह संख्या 2 से 3 तक ही है।
4. प्रचलित अन्धविश्वास - वंश चलाने एवं श्राद्ध कर्म हेतु पुत्र की कामना करना तथा अन्य धार्मिक अन्धविश्वासों के कारण परिवार में बच्चों की संख्या अधिक हो जाती है।
5. वृद्धावस्था की सुरक्षा - वृद्धावस्था में सन्तान उनकी देख-रेख करेगी; यह धारणा भी जनसंख्या वृद्धि में सहायक होती है।
6. ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े परिवारों का होना - भारत कृषि प्रधान देश है। बड़ा परिवार कृषि के कामों में बाधक न होकर सहायक सिद्ध होता है। ग्रामीण स्त्रियों के कार्य इस प्रकार के होते हैं कि कार्य करने के साथ-साथ वे बच्चों की देख-रेख भी कर लेती हैं। इसी से अधिक बच्चों को जन्म देना उन्हें बाधक प्रतीत नहीं होता है।
7. अधिकांश लोगों का घर पर रहना - भारत में समस्त जनसंख्या का केवल 33% कार्यशील है। कुल कार्यशील जनसंख्या का लगभग 70% कृषि एवं सम्बन्धित कार्यों में संलग्न होने के कारण अधिकांश लोग घर पर ही रहते हैं, जिसके कारण जनसंख्या में वृद्धि होती है।
8. शरणार्थियों का आगमन - देश की स्वतन्त्रता के पश्चात् पाकिस्तान तथा बांग्लादेश से आने वाले लाखों-करोड़ों शरणार्थियों के कारण भी देश में जनसंख्या में वृद्धि हुई है।
9. परिवार नियोजन के प्रति अज्ञानता - ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के अशिक्षित होने के कारण परिवार के आकार के सम्बन्ध में उदासीनता पायी जाती है। परिणामस्वरूप परिवार नियोजन के साधन देश में लोकप्रिय नहीं हो पा रहे हैं। परिवार नियोजन के उपायों के प्रति संकोच, लज्जा तथा निराधार शंकाओं के कारण दम्पती बच्चों को जन्म देते रहते हैं। जनसंख्या-वृद्धि को रोकने के उपाय जनसंख्या की समस्या के समाधान के लिए हमें एक साथ कई उपाय करने पड़ेंगे। जन्म-दर को कम करने के लिए तत्कालीन एवं दीर्घकालीन उपाय किये जाने चाहिए। तत्कालीन उपायों में निरोध, नसबन्दी, लूप, ऑपरेशन आदि के लिए लोगों को प्रेरित करना तथा दीर्घकालीन उपायों में विवाह की न्यूनतम आयु में वृद्धि, बाल-विवाह पर रोक, मनोरंजन के साधनों में वृद्धि, आत्म-संयम वे ब्रह्मचर्य के पालन के लिए लोगों को प्रेरित करना आदि हैं। इन उपायों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है
1. जन्म-दर में कमी करना - जनसंख्या-वृद्धि को सीमित करने के लिए यह आवश्यक है कि मृत्यु-दरे के साथ-साथ जन्म-दर में भी गिरावट लायी जाए। वर्ष 1951-60 में जन्म-दर 41.7% थी, जो 2011 ई० में 23% हो गयी। जन्म-दर में और अधिक कमी लायी जानी चाहिए।
2. साक्षरता तथा शिक्षा का प्रसार आवश्यक - शिक्षा के माध्यम से ही जन-साधारण में जनसंख्या-वृद्धि के विषय में जागरूकता लायी जा सकेगी। विकसित देशों में जनसंख्या-वृद्धि की समस्या न होने का प्रमुख कारण उनकी शत-प्रतिशत साक्षरता है। भारत में केवल केरल में ही साक्षरता अन्य प्रदेशों की अपेक्षा अधिक है।
3. स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल - जनसंख्या-वृद्धि के परिप्रेक्ष्य में स्त्री-शिक्षा का विशेष महत्त्व है। केरल में स्त्रियों की साक्षरता प्रतिशत 91.98 है, जबकि उत्तर प्रदेश में 59.26 है। इसी कारण से उत्तर प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि की दर भी उच्च है। अतः जनसंख्या-वृद्धि पर नियन्त्रण हेतु स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल देने की आवश्यकता है।
4. विवाह सम्बन्धी कानूनों का सख्ती से पालन - यद्यपि विवाह की न्यूनतम आयु कानूनी तौर पर निर्धारित है। बाल-विवाह वर्जित है, फिर भी ये बुराइयाँ समाज में यथावत् बनी हुई हैं। इनका सख्ती से पालन किया जाना भी आवश्यक है। इस प्रकार जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाया जा सकता है।
5. मनोरंजन के साधनों में वृद्धि - विशेष रूप से ग्रामीण तथा पिछड़े क्षेत्रों में मनोरंजन के साधनों में वृद्धि की जानी चाहिए। इनमें सिनेमा, सार्वजनिक दूरदर्शन की व्यवस्था, शिक्षाप्रद छोटी-छोटी फिल्मों का प्रदर्शन, अखाड़े, खेल-कूद प्रतियोगिताएँ आदि मुख्य हैं। मनोरंजन के साधनों में वृद्धि होने से जनसंख्या-वृद्धि पर भी नियन्त्रण लगेगा।
6. आत्म-संयम/नैतिक शिक्षा का प्रसार - नैतिकतापूर्ण संयमित जीवन जनसंख्या को सीमित रखने का आदर्श उपाय है। अतः इस बात को समुचित प्रचार किया जाना चाहिए कि शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य अच्छी कार्यक्षमता, सुखद पारिवारिक जीवन तथा देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए संयमी जीवन बिताना उपयोगी है। इससे न केवल जन्म-दर कम होगी, वरन् अनेक सामाजिक समस्याओं; जैसे-चोरी, डकैती, व्यभिचार आदि; में भी कमी आएगी।
7. परिवार नियोजन का प्रचार तथा सम्बद्ध सुविधाओं को उपलब्ध कराना - परिवार तथा देश के कल्याण के लिए परिवार नियोजन के महत्त्व को देखते हुए 1977 ई० से इसे परिवार-कल्याण का नाम दिया गया है। परिवार-कल्याण के द्वारा दम्पति अपने बच्चों की संख्या सीमित रखने तथा दो बच्चों के जन्म के मध्य पर्याप्त समयान्तर रखते हैं। ग्रामीण जनता तक परिवार कल्याण कार्यक्रमों का लाभ पहुंचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार नियोजन का प्रचार तथा सुविधाओं को उपलब्ध कराने की अधिक आवश्यकता है। परिवार कल्याण कार्यक्रम को 'जन-अभियान' बनाया जाना चाहिए।
8. विज्ञापन व संवहन/संचार के साधनों का उपयोग - जनसंख्या वृद्धि के कारणों, परिणामों एवं जनसंख्या को नियन्त्रित करने के उपायों का विज्ञापन एवं प्रचार रेडियो, दूरदर्शन व चलचित्रों के माध्यम से ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों में करने की आवश्यकता है। इसके माध्यम से भी जनसंख्या को सीमित करने में सहायता मिलेगी ।
9. सीमित परिवारों को पुरस्कृत करना - जिन दम्पतियों के एक या दो ही बच्चे हैं, उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए। इससे अन्य व्यक्तियों को भी सीमित परिवार की प्रेरणा मिलेगी।
10. जनमानस में जनसंख्या के प्रति अनुकूल चेतना का विकास करना - जनसंख्या को नियन्त्रित करने के लिए हमें जनमानस में अनुकूल चेतना का विकास करना होगा, जिससे आज के बालक-बालिकाएँ जो कल वयस्क नागरिक बनेंगे, वे यह निर्णय करने में सक्षम हो सकें कि उनके परिवार का आकार क्या होना चाहिए। संक्षेप में, देश के तरुण वर्ग को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि जनसंख्या-वृद्धि की समस्या का हल उनके अपने ही हाथों में है। जागरूक एवं सक्रिय बनकर ही वे अपने वर्तमान और भविष्य को सुखद बना सकते हैं। जन-जन में जनसंख्या के प्रति अनुकूल चेतना का विकास होने पर ही हम जनसंख्या-वृद्धि पर नियन्त्रण पाने में सफल हो सकते हैं।In simple words: भारत में जनसंख्या वृद्धि के मुख्य कारणों में जन्म-मृत्यु दर में अंतर का बढ़ना, कम आयु में विवाह, उच्च प्रजनन दर, अंधविश्वास, वृद्धावस्था सुरक्षा की धारणा और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े परिवारों का प्रचलन शामिल हैं। इसे नियंत्रित करने के उपायों में जन्म-दर में कमी लाना, शिक्षा का प्रसार, स्त्री-शिक्षा पर जोर, विवाह कानूनों का सख्ती से पालन, मनोरंजन के साधनों की वृद्धि, आत्म-संयम, परिवार नियोजन का व्यापक प्रचार और सीमित परिवारों को प्रोत्साहन देना प्रमुख हैं।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि के कारणों और उपायों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक बिंदु को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से समझाएँ। सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं को शामिल करने से उत्तर अधिक व्यापक बनेगा। आंकड़ों (जैसे जन्म-मृत्यु दर) का उल्लेख करना उत्तर को अधिक प्रामाणिक बनाता है।

 

Question 3. परिवार-नियोजन देश के लिए अत्यन्त आवश्यक है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।याभारत जैसे विकासशील देश के सन्दर्भ में परिवार-नियोजन के महत्त्व पर प्रकाश डालिए। निरन्तर प्रयत्नों के होते हुए भी भारत में परिवार-नियोजन कार्यक्रम सफल क्यों नहीं हो पा रहा है? समझाइए ।यापरिवार-कल्याण कार्यक्रम की अवधारणा की विवेचना कीजिए।
Answer:परिवार-नियोजन या परिवार-कल्याण कार्यक्रम सन् 1952 ई० में जनगणना आयुक्त ने परिवार नियोजन की आवश्यकता और महत्त्व को स्वीकार किया तथा परिवार नियोजन को अपनाने पर विशेष महत्त्व दिया था। भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना में जनसंख्या को नियन्त्रित करने का कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया, जिसे ‘परिवार-नियोजन' का नाम दिया गया। सन् 1977 ई० में जनता पार्टी की सरकार ने परिवार नियोजन' का नाम बदलकर 'परिवार-कल्याण' कार्यक्रम रखा। श्रीमती इन्दिरा गांधी के अनुसार, “हमारी परिस्थितियों में परिवार नियोजन का अर्थ माँ और बच्चे का बेहतर स्वास्थ्य तथा पूरे परिवार के लिए अधिक अवसर है।” परिवार नियोजन की आवश्यकता - भारत में विश्व की जनसंख्या का 17.5 प्रतिशत भाग निवास करता है, जबकि दुनिया के कुल भू-भाग का मात्र 2.4 प्रतिशत ही भारत है। भारत की जनसंख्या में प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ अस्सी लाख की वृद्धि हो जाती है। 1951 ई० में भारत की जनसंख्या 36.11 करोड़ थी, 2011 की जनगणना के अनुसार, 121 करोड़ हो चुकी है। तेजी के साथ बढ़ती हुई जनसंख्या विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है, जिसके कारण देश की प्रगति आशा के अनुकूल नहीं हो पा रही है। अतः देश के आर्थिक विकास की दर में तेजी लाने के लिए परिवार नियोजन एक आवश्यकता ही नहीं, अपितु परम आवश्यकता है, कम-से-कम भारत के लिए। अतः परिवार नियोजन भारत जैसे विकासशील देश के लिए निम्नलिखित कारणों से परमावश्यक है
1. पूँजी-निर्माण की गति में वृद्धि हेतु - बढ़ती हुई जनसंख्या बचतों की दर व पूँजी-निर्माण की गति में कमी लाती है; अतः इस बात की आवश्यकता है कि जनसंख्या-वृद्धि में कमी करके बचतों को बढ़ाया जाये, जिससे पूँजी निर्माण में वृद्धि हो सके ।
2. खाद्यान्नों के अभाव की पूर्ति हेतु - खाद्यान्नों का मन्द गति से बढ़ता हुआ उत्पादन तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या की पूर्ति नहीं कर पाता, जिससे खाद्यान्नों की कमी बनी रहती है। अतः खाद्यान्नों के अभाव को दूर करने के लिए यह उचित है कि बढ़ती हुई जनसंख्या को परिवार नियोजन के माध्यम से रोका जाए।
3. भुगतान-सन्तुलन की समस्या के हल हेतु - बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए जब खाद्यान्नों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात किया जाता है तो भुगतान-सन्तुलन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। अतः इससे बचने का एक मात्र रास्ता है कि परिवार नियोजन को अपनाकर जनसंख्या की वृद्धि को रोका जाए।
4. बेरोजगारी की समस्या के हल हेतु - बढ़ती हुई जनसंख्या बेरोजगारी में प्रति वर्ष वृद्धि करती जा रही है; अतः इसमें कमी करने के लिए परिवार नियोजन को अपनाया जाना चाहिए।
5. मूल्य-स्तर में वृद्धि को कम करने हेतु - जनसंख्या-वृद्धि से वस्तुओं की माँग बढ़ जाती है, जब कि उत्पादन उस अनुपात में नहीं बढ़ता है। इससे मूल्य-स्तर बढ़ जाता है; अतः बढ़ती हुई जनसंख्या में कमी करने के लिए परिवार नियोजने अपनाकर मूल्य-स्तर में वृद्धि को रोका जा सकता है।
6. उत्पादन तकनीक में सुधार हेतु - जनसंख्या में वृद्धि व बेरोजगारी होने से श्रम प्रधान उत्पादन तकनीकें अपनायी जाती हैं तथा पूँजी-प्रधान आधुनिक उत्पादन तकनीकों को त्याग दिया जाता है; अतः उन्नत उत्पादन तकनीकों को अपनाने के लिए यह उचित होगा कि परिवार नियोजन को अपनाकर जनसंख्या वृद्धि को रोका जाए।
7. कृषि पर भार में कमी करने हेतु - जनसंख्या की वृद्धि कृषि पर भार को बढ़ा देती है। कृषि की औसत उत्पादकता में वृद्धि के लिए जनसंख्या-वृद्धि को रोका जाना आवश्यक है।
8. सामाजिक-कल्याण में वृद्धि हेतु - जनसंख्या-वृद्धि देश के आर्थिक विकास की गति को धीमा कर देती है। परिवार-कल्याण, शिक्षा, परिवहन व अन्य स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों को उचित रूप में नहीं मिल पाती हैं; अतः इनमें सुधार करने व जन-कल्याण में वृद्धि करने के लिए उचित है कि परिवार नियोजन प्रणाली को अपनाया जाए। उपर्युक्त आधार पर हमें कह सकते हैं कि भारत की आर्थिक प्रगति के लिए परिवार नियोजन एक आवश्यक कदम है। परिवार नियोजन का महत्त्व परिवार नियोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रीमती इन्दिरा गांधी ने कहा था, “कहा जाता है कि समृद्धि एक बढ़िया गर्भ-निरोधक है, किन्तु विकास का प्रभाव कम हो जाता है जब तक कि हम जन्म-दर में कमी न लाएँ। परिवार नियोजन विकास का आधार है, निवेश है और मानव पूँजी के संगठन में एक अनिवार्य प्रयास है। शिक्षा, उत्पादन और आय की बेहतर क्षमताएँ तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि तभी सम्भव है जब जनसंख्या-वृद्धि पर अंकुश लगाया जा सके भारत जैसे विकासशील देश के सन्दर्भ में परिवार नियोजन का निम्नलिखित महत्त्व है
1. यह देश के आर्थिक विकास का आधार है।
2. इसके द्वारा ही नागरिकों का जीवन-स्तर ऊँचा हो सकता है।
3. इसके माध्यम से ही प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि सम्भव है, जिससे निर्धनता की समस्या हल होगी।
4. सभी व्यक्तियों को 'खाद्यान्न' या सन्तुलित आहार इसके माध्यम से ही सुलभ हो सकता है।
5. कृषि पर जनसंख्या की निर्भरता भी परिवार नियोजन से ही कम हो सकती है। इससे कृषि की उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी ।
6. यह बेरोजगारी समाप्त करने की अचूक औषध है।
7. इसके माध्यम से ही महँगाई को नियन्त्रित किया जा सकता है।
8. माँ के स्वास्थ्य को ठीक बनाए रखने के लिए भी परिवार नियोजन का महत्त्व है।
9. सभी को शिक्षा-दीक्षा व मनोरंजन के अवसर प्राप्त करने में यह अप्रत्यक्ष रूप से सहायक होता है।
10. इसके द्वारा ही तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या के आवास की समस्या को हल किया जा सकता है।
11. बढ़ते हुए अपराधों, नगरीकरण के दोषों तथा प्रदूषण से बचने के लिए भी इसका महत्त्व अधिक है।
12. परिवार नियोजन शिशुओं के प्रति स्नेह उत्पन्न करता है तथा अच्छे माता-पिता व अच्छे समाज का निर्माण करता है।
13. परिवार नियोजन के द्वारा प्रदूषण की समस्या, पारिस्थितिकी के असन्तुलन की समस्या, जन-जीवन के कल्याण एवं सुरक्षा की समस्या आदि को भी हल किया जा सकता है। परिवार नियोजन कार्यक्रम की असफलता यद्यपि भारत सरकार ने इस कार्यक्रम को पूर्ण प्राथमिकता के साथ लागू किया है, तथापि इस कार्यक्रम को अभी तक वांछित सफलता प्राप्त नहीं हो सकी है। केवल 23% दम्पती ही अभी तक इस कार्यक्रम के दायरे में लाये जा सके हैं। शेष 77% दम्पतियों ने अभी तक इस कार्यक्रम को नहीं अपनाया है। जूनियर हक्सले के शब्दों में, “जनसंख्या के सम्बन्ध में भारत की स्थिति अत्यन्त संकटपूर्ण है। यदि वह अपनी जनसंख्या की समस्या को हल करने में असफल रहता है तो वह एक बड़ा आर्थिक एवं सामाजिक विनाश उत्पन्न कर लेगा। यदि वह सफल होता है तो न केवल उसे एशिया का नेतृत्व प्राप्त होगा, वरन् वह सम्पूर्ण विश्व की आशा का केन्द्र बन जाएगा। इस कार्यक्रम की आंशिक सफलता के कारण निम्नलिखित हैं
1. अशिक्षा एवं जन-सहयोग का अभाव ।
2. अन्धविश्वास एवं धार्मिक अवरोध ।
3. जन-आन्दोलन का स्वरूप प्राप्त करने में असफल।
4. शहरों तक ही सीमित, ग्रामीण क्षेत्रों में आंशिक रूप से सफल ।
5. यौन शिक्षा का अभाव । निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि आज के छात्र जो कल के कर्णधार हैं, जनसंख्या की वृद्धि से उत्पन्न होने वाली समस्याओं के बारे में गम्भीरता से सोचें और विचारों तथा बड़े होने पर उनके समाधान में सहयोग देने का दृढ़ निश्चय अभी से कर लें, तब ही इस समस्या का सार्थक समाधान सम्भव होगा ।In simple words: परिवार नियोजन भारत जैसे विकासशील देश के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि बढ़ती जनसंख्या पूंजी निर्माण, खाद्यान्न आपूर्ति, भुगतान संतुलन, बेरोजगारी, मूल्य वृद्धि, उत्पादन तकनीक में सुधार, कृषि पर बोझ और सामाजिक कल्याण जैसी समस्याओं को जन्म देती है। हालाँकि, यह कार्यक्रम अशिक्षा, अंधविश्वास, धार्मिक बाधाओं, जन-सहयोग की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित पहुंच के कारण पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है।

🎯 Exam Tip: परिवार नियोजन की आवश्यकता और महत्त्व को आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय तथा व्यक्तिगत लाभों के संदर्भ में स्पष्ट करें। कार्यक्रम की सफलताओं के साथ-साथ उसकी असफलता के कारणों पर भी प्रकाश डालें, जिससे विश्लेषण संतुलित और व्यापक होगा।

 

Question 4. नयी राष्ट्रीय जनसंख्या-नीति, 2000 पर एक लेख लिखिए।याभारत की जनसंख्या-नीति पर प्रकाश डालिए।याराष्ट्रीय जनसंख्या-नीति, 2000 की मुख्य विशेषताएँ बताइए ।याभारत की जनसंख्या-नीति, 2000 पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: केन्द्र सरकार ने नयी जनसंख्या-नीति की घोषणा 15 फरवरी, 2000 ई० को की थी। राष्ट्रीय जनसंख्या-नीति, 2000 ई० का निर्धारण तीन मुख्य उद्देश्यों या लक्ष्यों को सामने रखकर किया गया; जो निम्नलिखित हैं,
1. नयी नीति का तात्कालिक उद्देश्य है - छोटे परिवार अर्थात् प्रति दम्पती 2 बच्चों के मानक को प्रोत्साहन देना। इसके लिए वांछित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में गर्भनिरोधकों, स्वास्थ्य सुरक्षा ढाँचा व स्वास्थ्यकर्मियों की आपूर्ति करने के साथ-साथ प्रोत्साहन पुरस्कारों की योजना भी है।
2. मध्यकालीन उद्देश्य के अन्तर्गत परिवार नियोजन के उपायों को प्रभावी बनाकर 2010 ई० तक कुल प्रजननता दर को 2: 1 के प्रतिस्थापना स्तर तक लाना है तथा 2010 ई० तक देश की जनसंख्या को 110 करोड़ पर सीमित करना है।
3. दीर्घकालीन उद्देश्य के अन्तर्गत 2045 ई० तक स्थिर जनसंख्या को ऐसे स्तर पर स्थिर बनाने की बात कही गयी है जो आर्थिक वृद्धि, सामाजिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि के अनुरूप हो । नयी जनसंख्या नीति में राज्यों की निर्भय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा की संरचना को 2001 ई० के पश्चात् 25 वर्ष आगे तक अपरिवर्तित रखने की घोषणा की गयी है। इसका अर्थ है कि लोकसभा में निर्वाचित सीटों की संख्या अब 2026 ई० तक 543 ही बनी रहेगी तथा प्रत्येक राज्य में सीटों की संख्या भी तब तक यथावत् रहेगी। 15 फरवरी, 2000 ई० को केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल द्वारा अनुमोदित नयी जनसंख्या नीति की घोषणा करते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्री ने बताया कि छोटे परिवार (प्रति दम्पती 2 बच्चे) का मानक अपनाने के लिए प्रोत्साहन एवं प्रेरणा प्रदान करने हेतु इसमें 16 उपायों को सम्मिलित किया गया है, जो निम्नलिखित हैं
1. केन्द्र सरकार उन पंचायतों और जिला पंचायतों को पुरस्कृत करेगी जो अपने क्षेत्र में रहने वाले लोगों को जनसंख्या नियन्त्रण के उपायों को अधिकाधिक अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।
2. नयी नीति के अन्तर्गत बाल-विवाह निरोधक अधिनियम तथा प्रसव पूर्व लिंग-परीक्षण निरोधक अधिनियम को कड़ाई के साथ लागू किया जाएगा।
3. गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले उन परिवारों को पाँच हजार रुपये की स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दी जाएगी जिनके मात्र दो बच्चे होंगे और दो बच्चों के जन्म के बाद उन्होंने बन्ध्याकरण करा लिया होगा ।
4. ऐसे लोगों को पुरस्कृत किया जाएगा, जो निर्धारित आयु में विवाह करने के पश्चात् पहले बच्चे को तब तक जन्म न दें जब तक माँ की उम्र 21 वर्ष की न हो और छोटे परिवारों के सिद्धान्त में विश्वास रखते हुए दो बच्चों को जन्म देने के पश्चात् बन्ध्याकरण करा लें।
5. ग्रामीण क्षेत्रों में एम्बुलेन्स की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उदार शर्तों पर ऋण एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
6. गर्भपात सुविधा योजना को और सुदृढ़ किया जाएगा।
7. अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं को इस कार्य से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
8. लड़कियों की विवाह की न्यूनतम आयु को 18 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष से भी अधिक किया जाएगा।
9. ऐसी सुविधाएँ जुटाने के प्रयास किए जाएँगे जिससे तीन-चौथाई से अधिक (80%) प्रसवों के लिए प्रशिक्षित कर्मियों, नियमित डिस्पेन्सरियों, अस्पतालों व चिकित्सा संस्थानों का प्रयोग किया जा सके ।
10. शिशु मृत्यु-दर (1,000 जीवित जन्मे शिशुओं पर) को 30% से कम किया जाएगा।
11. मातृ मृत्यु दर को एक लाख जीवित जन्मों के लिए 100 से भी कम करने के प्रयास किए जाएँगे ।
12. भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का प्रजनन और बाल-स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उपयोग किया जाएगा।
13. एड्स के बारे में सूचना उपलब्ध कराना तथा संक्रामक रोगों पर नियन्त्रण के प्रयास करना।
14. प्राथमिक शिक्षा की उपलब्धता को निःशुल्क और अनिवार्य करना।
15. जन्म और मृत्यु के साथ ही विवाह और गर्भ के पंजीकरण को भी अनिवार्य किया गया है।
16. जनसंख्या नीति के कार्यान्वयन पर निगरानी रखने के लिए प्रधानमन्त्री की अध्यक्षता में जनसंख्या पर एक राष्ट्रीय आयोग नियुक्त करना, जिससे जनसंख्या नियन्त्रण की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जा सके । नयी जनसंख्या नीति के कार्यान्वयन एवं समीक्षा के लिए 11 मई, 2000 ई० को प्रधानमन्त्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय 100 सदस्यीय राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन किया गया। केन्द्रीय परिवार-कल्याण मन्त्री व अन्य कुछ सम्बन्धित केन्द्रीय मन्त्रियों के अतिरिक्त सभी राज्यों व केन्द्रशासित क्षेत्रों के मुख्यमन्त्री इस आयोग के सदस्य बनाये गये। जाने-माने जनसंख्याशास्त्रियों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों व गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इसमें सम्मिलित किया गया। योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष के०सी० पन्त को इस आयोग का भी उपाध्यक्ष बनाया गया था। सरकार ने जनसंख्या नियन्त्रण की आधार-संरचना को उन्नत करने के उद्देश्य से Rs.3,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया है, जिससे गर्भ-निरोध की अभी तक पूरी न हो सकी जरूरतों को पूरा किया जा सके ।In simple words: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 का उद्देश्य तत्काल, मध्यकालीन और दीर्घकालीन लक्ष्यों के माध्यम से जनसंख्या को नियंत्रित करना है। इसमें छोटे परिवार को प्रोत्साहन देना, 2010 तक प्रजनन दर को 2:1 के स्तर पर लाना और 2045 तक जनसंख्या को स्थिर करना शामिल है। नीति में बाल-विवाह निरोधक अधिनियम का सख्ती से पालन, स्वास्थ्य बीमा, वित्तीय प्रोत्साहन, एम्बुलेंस सुविधा, गर्भपात सुविधाओं को मजबूत करना, लड़कियों की विवाह आयु बढ़ाना, प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा प्रसव, शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी, और प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य करना जैसे 16 उपाय शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के तात्कालिक, मध्यकालीन और दीर्घकालीन उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से उजागर करें। नीति में शामिल प्रमुख 16 उपायों को संक्षिप्त बिंदुओं में प्रस्तुत करें ताकि उत्तर संरचनात्मक और आसानी से याद रखने योग्य हो।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

Question 1. भारतीय जनसंख्या का विभिन्न आधारों पर वर्गीकरण कीजिए।
Answer: भारत में जनसंख्या का वितरण समान नहीं है। सन् 2011 के आँकड़ों के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ थी। भारत की जनसंख्या का विभिन्न आधारों पर वितरण निम्नलिखित है
1. जनसंख्या घनत्व के आधार पर - देश में जनसंख्या का घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी थाः परन्तु विभिन्न राज्यों में जनसंख्या का घनत्व समान नहीं है। राज्यों में सर्वाधिक घनत्व बिहार का (1102 व्यक्ति) तथा सबसे कम अरुणाचल प्रदेश का (17 व्यक्ति) है। इसी प्रकार केन्द्रशासित क्षेत्रों में सर्वाधिक घनत्व दिल्ली में (11,297 व्यक्ति) तथा सबसे कम अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में (46 व्यक्ति) था।
2. स्त्री-पुरुष के आधार पर - 2011 के आँकड़ों के अनुसार कुल जनसंख्या 121 करोड़ रही, जिसमें पुरुष जनसंख्या 62.37 करोड़ (51.73 प्रतिशत) तथा स्त्री जनसंख्या 58.64 करोड़ (48.27 प्रतिशत) थी। स्त्री-पुरुष अनुपात 940 रहा। राज्यों में प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की सर्वाधिक संख्या केरल (1,084) तथा सबसे कम हरियाणा में (877) रही।
3. साक्षरता के आधार पर - पूरे देश के लिए साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत थी, जिसमें पुरुषों की साक्षरता 82.14 प्रतिशत तथा महिलाओं की 65.46 प्रतिशत थी। सर्वाधिक साक्षरता केरल में 93.91 प्रतिशत तथा सबसे कम बिहार में 63.82 प्रतिशत थी। महिलाओं में सर्वाधिक साक्षरता केरल में 91.98 प्रतिशत तथा सबसे कम राजस्थान में 52.66 प्रतिशत थी।
4. जनसंख्या के आधार पर - देश में सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 19.95 करोड़ तथा सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य सिक्किम है, जिसकी जनसंख्या 6.07 लाख है। सर्वाधिक जनसंख्या वाला केन्द्रशासित क्षेत्र दिल्ली है। दिल्ली की जनसंख्या 167.53 लाख तथा सबसे कम जनसंख्या वाला केन्द्रशासित राज्य लक्षद्वीप है जहाँ की जनसंख्या 64.42 हजार है।
5. जनसंख्या-वृद्धि दर - वर्ष 2001 की जनगणना की तुलना में 2011 में जनसंख्या में कुल 18.14 करोड़ व्यक्तियों की वृद्धि हुई। इस प्रकार वर्ष 2001-11 के दशक में जनसंख्या में 17.64 प्रतिशत की वृद्धि हुई । वर्ष 2001-11 के दशक में जनसंख्या में वार्षिक घातांकी वृद्धि दर 1.64 प्रतिशत रही । राज्यों में सर्वाधिक दशक वृद्धि दर दादर नगर हवेली में 55.50 प्रतिशत रही, जबकि न्यूनतम केरल में 0.47 प्रतिशत रही ।In simple words: भारतीय जनसंख्या का वर्गीकरण मुख्य रूप से घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता दर, कुल जनसंख्या और वार्षिक वृद्धि दर के आधार पर किया जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति/किमी² था, लिंगानुपात 940 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष, साक्षरता दर 74.04% थी, कुल जनसंख्या 121 करोड़ थी और वार्षिक वृद्धि दर 1.64% थी, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में काफी विविधताएँ हैं।

🎯 Exam Tip: भारतीय जनसंख्या के वर्गीकरण को प्रस्तुत करते समय 2011 की जनगणना के नवीनतम आंकड़े शामिल करें। प्रत्येक आधार (घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता, कुल जनसंख्या, वृद्धि दर) के लिए प्रमुख राज्यवार अंतरों का उल्लेख करें, जिससे उत्तर की सटीकता और प्रासंगिकता बढ़ेगी।

 

Question 2. जनसंख्या-विस्फोट के परिणामों पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।याभारत की सबसे कठिन समस्या उसकी तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या है।” विवेचना कीजिए।यासन् 1951 से भारत में मुख्य जनांकीय प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।याजनसंख्या विस्फोट क्या है? जनसंख्या विस्फोट के परिणाम लिखिए।
Answer: तीव्र गति से जनसंख्या का बढ़ना, जनसंख्या विस्फोट कहलाता है। विश्व में चीन के बाद भारत ही सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत की वर्तमान जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग छठवाँ हिस्सा है, जबकि भारत के पास विश्व के कुल भू-भाग का केवल 2.4 प्रतिशत भाग है। भारत की जनगणना आँकड़ों के अनुसार, सन् 1901 में भारत की जनसंख्या 23.84 करोड़ थी जो 1941 में बढ़कर 31.87 करोड़, 1951 में 36.11 करोड़, 1961 में 43.92 करोड़, 1971 में 54.82 करोड़, 1981 में 68.33 करोड़, 1991 में 84.64 करोड़, 2001 में 102.7 करोड़ तथा वर्तमान में भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ के ऊपर हो चुकी है। भारत में जनसंख्या वृद्धि के विगत दशकों के आँकड़े लें तो हमें ज्ञात होगा कि जनसंख्या वृद्धि दर 1921 ई० तक तो बहुत कम थी, परन्तु उसके उपरान्त वृद्धि-दर तेजी से बढ़ी है। वर्ष 1961-71 के मध्य वृद्धि दर 2.22 प्रतिशत प्रति वर्ष थी जो 1971-81 में 2.20 प्रतिशत प्रति वर्ष रही । भारत में इस समय जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि-दर लगभग 1.64 प्रतिशत प्रति वर्ष है। भारत की जनसंख्या 1.80 करोड़ वार्षिक वृद्धि की दर से बढ़ रही है अर्थात् हम भारत में प्रति वर्ष एक ऑस्ट्रेलिया एवं प्रति दस वर्षों में एक उत्तर प्रदेश को जन्म देते जा रहे हैं। पिछले दो दशकों से समस्त विश्व में यह अनुभव किया जाने लगा है कि बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण आर्थिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में अनेक समस्याएँ सामने आ रही हैं। इसका प्रभाव विकास योजनाओं पर भी पड़ रहा है, क्योंकि विकास से उपलब्ध लाभों का वितरण अत्यधिक जनसंख्या में होने से प्रति व्यक्ति पर्याप्त सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं, जिसके कारण देश की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो पा रही हैं। यही कारण है। कि भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अतिशय जनसंख्या अभिशाप मानी जाती है, क्योंकि इसके कारण ऐसी विकट समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं जो विकास के प्रयासों तथा परिणामों को मटियामेट कर देती हैं। भारत में जनसंख्या-वृद्धि से उत्पन्न होने वाली प्रमुख समस्याएँ (परिणाम) निम्नलिखित हैं।
1. खाद्य सामग्री की आपूर्ति की समस्या।
2. वस्त्र आपूर्ति की समस्या
3. आवास समस्या ।
4. शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की समस्या।
5. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं की समस्या ।
6. रोजगार की समस्या ।
7. यातायात सुविधाओं की समस्या ।
8. प्रदूषण की समस्या।
9. पारिस्थितिकी के असन्तुलन की समस्या।
10. जीवन-स्तर को ऊँचा उठाने की समस्या।
11. जन-जीवन के कल्याण एवं सुरक्षा की समस्या।
12. गरीबी में वृद्धि व निम्न प्रति व्यक्ति आय की समस्या आदि । अतः संक्षेप में हम कह सकते हैं कि भारत में आज जो भी महत्त्वपूर्ण समस्याएँ; जैसे-अपराध, भ्रष्टाचार, हिंसा, बेरोजगारी, अपहरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास आदि हैं, उनको मूल कारण भारत में तीव्रगति से बढ़ती जनसंख्या है।In simple words: जनसंख्या विस्फोट का अर्थ है जनसंख्या का तीव्र गति से बढ़ना, जिसके परिणामस्वरूप खाद्य, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, यातायात, प्रदूषण, पारिस्थितिकी असंतुलन, जीवन-स्तर में गिरावट, गरीबी और निम्न प्रति व्यक्ति आय जैसी गंभीर आर्थिक और सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। यह देश के विकास प्रयासों को बाधित करता है और इसकी प्रगति को धीमा कर देता है, जिससे भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह एक बड़ा अभिशाप बन जाता है।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या विस्फोट की परिभाषा संक्षिप्त और स्पष्ट रखें। इसके परिणामों को सूची के रूप में प्रस्तुत करें और प्रत्येक बिंदु को एक वाक्य में समझाएँ। यह दर्शाएँ कि ये समस्याएँ देश के आर्थिक और सामाजिक विकास को कैसे प्रभावित करती हैं।

 

Question 3. परिवार-नियोजन कार्यक्रम और प्रभावी कैसे हो सकता है? इस सम्बन्ध में अपने सुझाव प्रस्तुत करें।याभारत में परिवार-कल्याण कार्यक्रम की सफलता के लिए दो/चार सुझाव दीजिए।
Answer: भारत की पूर्व प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गांधी के अनुसार, “मृत्यु-दर में गिरावट संगठित सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के परिणामस्वरूप आती है। जन्म-दर में गिरावट शिक्षा-प्रसार तथा जीवन-स्तर में सुधार का परिणाम होती है। हम कह सकते हैं कि मृत्यु-देर में गिरावट समाज की व्यक्ति के प्रति दायित्व के कारण तथा जन्म-दर में गिरावट व्यक्ति की समाज के प्रति दायित्व के कारण आती हैं। मानव-जाति का प्रारम्भ शिशु से होता है। जो व्यक्ति शिशु की परवाह करता है, वह मानव-जाति की परवाह करता है।” उपर्युक्त विचार से यह स्पष्ट होता है कि परिवार नियोजन को प्रभावी बनाने में मनुष्य का सहयोग या दायित्व महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव निम्नलिखित हैं
1. परिवार कल्याण कार्यक्रम का प्रचार एवं प्रसार पूरे देश में किया जाना चाहिए, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, क्योंकि भारत की 75% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में ही निवास करती है।
2. परिवार कल्याण कार्यक्रम को 'जन-अभियान' बनाया जाना चाहिए।
3. 'सेक्स शिक्षा' को हेय दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए, वरन् परिवार-कल्याण कार्यक्रम एवं सेक्स शिक्षा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए।
4. परिवार-कल्याण कार्यक्रम के साधन आधुनिक बाजारवाद से लिप्त नहीं होने चाहिए, वरन् आयुर्वेद, होम्योपैथी आदि से सम्बन्धित गर्भनिरोधक होने चाहिए जो सस्ते, प्रयोग में आसान तथा बिना किसी अनुचित प्रभाव वाले हों ।
5. प्रौढ़ शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार भी होना चाहिए।
6. परिवार नियोजन की शिक्षा सभी व्यक्तियों को दी जानी चाहिए, जिससे वे नियोजित परिवार के महत्त्व को समझ सकें ।
7. परिवार नियोजन कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्त्व को समझा जाना चाहिए।
8. उन डॉक्टरों को विशेष सुविधाएँ दी जानी चाहिए जो इस कार्यक्रम को लागू करने और सफल बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर काम करने को तैयार हैं।
9. परिवार नियोजन कार्यक्रम में स्वैच्छिक संगठनों का सहयोग लिया जाना चाहिए, उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए तथा इन संगठनों के कर्मचारियों को भी उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
10. शिक्षाविदों तथा जन-माध्यम में लगे व्यक्तियों का कर्तव्य है कि वे ऐसे व्यक्तियों के प्रति. जो परिवार नियोजन के विचार से असहमत हैं और इसके बारे में भ्रामक प्रचार करते हैं, की कड़ी छानबीन करें तथा उन्हें गलत प्रचार करने से रोकें ।।
11. अधिक-से-अधिक जनसंख्या को शिक्षित करके कट्टर धार्मिक विचारधारा को मानने वाले लोगों के कारण जो अवरोध उत्पन्न हो रहे हैं, उन्हें समाप्त किया जाना चाहिए।
12. गर्भ निरोधक औषधियाँ या अन्य उपकरण निःशुल्क या कम मूल्य पर सरकार द्वारा वितरित की जानी चाहिए।
13. अधिक-से-अधिक परिवार कल्याण केन्द्र ग्रामीण क्षेत्रों तथा औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित किए जाने चाहिए।
14. चलचित्र, नाटक, रेडियो, टेलीविजन आदि के माध्यम से परिवार नियोजन कार्यक्रम का प्रसार किया जाना चाहिए।
15. स्त्री-पुरुषों को दीर्घकालीन प्रतिरक्षा प्रदान करने के लिए सम्बन्धित शोध-संस्थानों को अधिक प्रभावशाली तथा सुरक्षित तरीके खोज निकालने चाहिए ।
16. परिवार नियोजन से सम्बन्धित साधनों से दम्पती न केवल इसमें सक्षम हों कि वे गर्भ से बच सकें, बल्कि वे इच्छानुसार शिक्षा भी प्राप्त कर सकें।In simple words: परिवार नियोजन कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए उनका व्यापक प्रचार-प्रसार विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में एक जन-अभियान के रूप में आवश्यक है। इसमें यौन शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करना, सस्ते और सुलभ गर्भनिरोधक उपलब्ध कराना, डॉक्टरों को ग्रामीण सेवा के लिए प्रोत्साहित करना, स्वैच्छिक संगठनों का सहयोग लेना, गलत प्रचार रोकना, धार्मिक अवरोधों को दूर करना, और शिक्षा के माध्यम से जागरूकता बढ़ाना शामिल है, ताकि नागरिक अपने जीवन और समाज के प्रति दायित्व को समझ सकें।

🎯 Exam Tip: परिवार नियोजन कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के सुझावों को व्यावहारिक और समाज-उन्मुख रखें। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करें और शिक्षा, जागरूकता तथा सुलभ सेवाओं के महत्व पर जोर दें।

 

Question 4. परिवार-कल्याण कार्यक्रम के सम्बन्ध में सरकार द्वारा क्या कदम उठाए गये हैं ?
Answer: स्वाधीनता के बहुत पहले ही हमने यह अनुभव कर लिया था कि गरीबी से तब तक नहीं निपटा जा सकता जब तक कि परिवार का आकार सीमित न हो। भारत परिवार नियोजन को सरकारी नीति के रूप में अपनाने वाला पहला देश है। जनसंख्या नियन्त्रण हमारी योजनाओं का एक अभिन्न अंग है। सरकार द्वारा किये गये प्रयासों के कारण जन्म-दर, जो सन् 1951 में 40.8 प्रति हजार से अधिक थी, वह 2011 में घटकर 23 प्रति हजार तक आ गयी है। हमारा लक्ष्य औसत राष्ट्रीय जन्म दर को घटाकर 21 प्रति हजार से भी कम करना है। सन् 1951 के जनगणना आयुक्त ने परिवार नियोजन की आवश्यकता पर बल दिया था। इसलिए प्रथम तथा द्वितीय पंचवर्षीय योजनाओं में सरकार ने कुछ अप्रत्यक्ष प्रयास किये, लेकिन इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। सन् 1961 ई० की जनगणना में हुई जनसंख्या-वृद्धि से सरकार अत्यधिक चिन्तित हुई । अतः 1966 ई० में इसके लिए एक पृथक् स्वतन्त्र विभाग खोला गया। पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा सरकार जनसंख्या नियन्त्रित करने तथा परिवार कल्याण के लिए निम्नलिखित प्रयास किये हैं
1. परिवार-कल्याण मन्त्रालय की स्थापना - परिवार-कल्याण कार्यक्रमों के उचित संचालन के लिए परिवार कल्याण मन्त्रालय स्थापित किया गया है। यह मन्त्रालय परिवार कल्याण सम्बन्धी कार्यों एवं नीतियों के साथ-साथ इस बात का भी निर्धारण करता है कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत हमने कितनी सफलता प्राप्त की है।
2. परिवार-कल्याण केन्द्र की स्थापना - जनता को परिवार-कल्याण सम्बन्धी सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु देश के प्रत्येक भाग में यहाँ तक कि ब्लॉक-स्तर पर परिवार-कल्याण केन्द्रों की स्थापना की गयी है, जिससे जनसाधारण को नियोजन सम्बन्धी सामग्रियाँ; जैसे - ओषधि, निरोध आदि निःशुल्क वितरित की जाती हैं तथा नसबन्दी कराने की भी सुविधा उपलब्ध रहती है।
3. पुरस्कार एवं दण्ड को प्रावधान - परिवार नियोजन कार्यक्रमों को सफल बनाने हेतु पुरस्कार एवं दण्ड के प्रावधान की व्यवस्था भी की गयी है। इसके अन्तर्गत जिसके तीन या अधिक बच्चे हैं, उनकी बहुत-सी सुविधाओं को समाप्त कर दिया गया है। ऑपरेशन कराने वालों तथा प्रेरकों को कुछ नकद रुपये भी प्रोत्साहन राशि के रूप में दिये जाते हैं। जिन दम्पतियों के दो या दो से कम बच्चे हैं, उन्हें सरकार एक विशेष वार्षिक वेतन वृद्धि दे रही है जिसका लाभ उन्हें सेवाकाल तथा उसके बाद भी मिलती रहता है।
4. अनुकूल जनमत तैयार करना - परिवार नियोजन के प्रचार व प्रसार के लिए समय-समय पर परिवार-कल्याण सप्ताह तथा ऑपरेशन शिविरों का भी प्रबन्ध किया जाता है। स्वास्थ्य शिक्षकों की नियुक्तियाँ भी की गयी हैं। ये गाँवों में घर-घर जाकर परिवार-कल्याण की शिक्षा देते हैं। परिवार नियोजन के प्रति जनमत तैयार करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर रेडियो, समाचार-पत्रों, चलचित्रों आदि के माध्यम से प्रचार किया जाता हैं।
5. गर्भपात को वैधानिक मान्यता - हमारे देश में अप्रैल, स सन् 1972 से ‘Medical Termination of Pregnancy Act' जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में लागू किया गया है। इस कानून के द्वारा गर्भपात को वैधानिक मान्यता प्राप्त हो गयी है।
6. विवाह की आयु में वृद्धि - वैवाहिक आयु की सीमा को बढ़ाकर लड़कियों के लिए 18 वर्ष तथा लड़कों के लिए 21 वर्ष कर दिया गया है।
7. जनसंख्या-शिक्षा - सरकार ने यह अनुभव किया है कि जनसंख्या सम्बन्धी नीतियों एवं कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने हेतु शिक्षा का महत्त्वपूर्ण योगदान हो सकता है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सन् 1970 में राष्ट्रीय स्तर पर एक जनसंख्या शिक्षा कोष्ठ' तथा प्रशिक्षण संस्थाओं के लिए पाठयक्रम तैयार किया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ की शाखा 'यूनाइटेड नेशन्स फण्ड फॉर पॉपुलेशन एक्टीविटीज' के सहयोग से भारत सरकार ने जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम को देश में कार्यान्वित करने के लिए कदम उठाया।In simple words: भारत सरकार ने परिवार कल्याण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें परिवार कल्याण मंत्रालय की स्थापना, ब्लॉक स्तर पर केंद्रों की स्थापना, मुफ्त गर्भनिरोधक और नसबंदी सुविधाएँ, पुरस्कार और दंड का प्रावधान, जनमत तैयार करने के लिए व्यापक प्रचार, गर्भपात को कानूनी मान्यता, विवाह की आयु में वृद्धि, और जनसंख्या शिक्षा का प्रसार शामिल है। इन प्रयासों का उद्देश्य जन्म-दर को कम करना और जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना है।

🎯 Exam Tip: सरकारी कदमों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक उपाय के पीछे के तर्क को स्पष्ट करें। स्थापनाओं (मंत्रालय, केंद्र), कानूनी परिवर्तनों (विवाह आयु, गर्भपात), प्रोत्साहन/दंड और जागरूकता अभियानों जैसे विभिन्न प्रकार के प्रयासों को दर्शाएँ।

 

Question 5. भारत में परिवार-कल्याण कार्यक्रमों के मार्ग में आने वाली बाधाओं को समझाइए ।
Answer: भारत परिवार नियोजन को सरकारी नीति के रूप में अपनाने वाला संसार का पहला देश है। जनसंख्या-नियन्त्रण हमारी विकास योजनाओं का अभिन्न अंग-पूर्णतया स्वैच्छिक है। परिवार-कल्याण कार्यक्रम के मार्ग में अनेक बाधाएँ हैं, जिससे यह कार्यक्रम पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पा रहा है। इस कार्यक्रम की प्रमुख बाधाएँ अग्रलिखित हैं
1. कार्यक्रम जन-अभियान न बन पाना - परिवार-कल्याण कार्यक्रम 50 वर्षों के पश्चात् भी जन-अभियान नहीं बन पाया है। इसका मूल कारण हमारे देश की जटिल सामाजिक व्यवस्था के द्वारा 'सेक्स शिक्षा' को हेय दृष्टि से देखना रहा है।
2. कार्यक्रम का पूरा दायित्व महिलाओं पर - परिवार कल्याण कार्यक्रम का पूरा दायित्व महिलाओं पर डाल दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप इस कार्यक्रम की कमर टूट गयी है। गर्भाधान रोकने के सबसे अधिक उपाय महिलाओं के हैं, जबकि पुरुषों के लिए मात्र एक गर्भ निरोधक है, उसे भी एड्स जैसे रोगों से बचाव के माध्यम के रूप में ही प्रचारित किया जा रहा है।
3. भारतीय समाज का पुरुष-प्रधान होना - परिवार-कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत महिला नसबन्दी की दर तो 35 प्रतिशत तक पहुँच गयी है, परन्तु पुरुष नसबन्दी की दर 3 प्रतिशत से भी कम है। इसका प्रमुख कारण भारतीय समाज का पुरुष-प्रधान होना है, जो परिवार कल्याण कार्यक्रम में बाधक है।
4. अशिक्षा एवं अन्धविश्वास - हमारे देश में अधिकांश व्यक्ति अशिक्षित हैं। इस कारण वे परिवार के आकार के सम्बन्ध में उदासीन रहते हैं। भारत में 26 प्रतिशत तथा उत्तर प्रदेश में 31 प्रतिशत व्यक्ति अशिक्षित हैं। लाखों दम्पतियों, जिनमें से अधिकांश अशिक्षित हैं, को परिवार नियोजन के प्रति सहमत करना कठिन है। सन्तान ईश्वर की देन है और आने वाली सन्तान को नहीं रोका जाना चाहिए, यह धारणा तथा शिक्षा की कमी परिवार नियोजन के विकास में सर्वाधिक बाधक है।
5. आर्थिक व धार्मिक दृष्टि से पुत्र का महत्त्व - धार्मिक दृष्टि से यह समझा जाता है कि पुत्र का जन्म होना अनिवार्य है तथा पुत्र के बिना मोक्ष प्राप्त नहीं होता। इसलिए परिवार में कई लड़कियाँ होने पर भी पुत्र की अभिलाषा बनी ही रहती है। अधिक आर्थिक समृद्धि अधिक पुत्र सन्तति से ही मिल सकती है, यह धारणा भी परिवार कल्याण कार्यक्रम में बाधक है।
6. राष्ट्रीय भावना की कमी या राजनीतिक कारण - प्रजातन्त्रात्मक सरकार होने के कारण भारत का नागरिक-नेतृत्व किसी भी कार्यक्रम पर राष्ट्रीय दृष्टिकोण से विचार न करके अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण से विचार करता है तथा अपने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति करता है। यह मनोवृत्ति भी इस कार्यक्रम में बाधक बनती है।
7. धार्मिक मान्यताएँ - भारत में विभिन्न धर्मों व सम्प्रदायों के व्यक्ति निवास करते हैं। कुछ धर्मावलम्बी इस कार्यक्रम में अपना सहयोग नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि हमारा धर्म इन कार्यक्रमों को अपनाने की अनुमति नहीं देता है।
8. परिवार-नियोजन की विधियाँ - भारत में परिवार नियोजन की सरल एवं प्रभावी विधियों का अभाव है। भारत में अभी तक केवल एक ही विधि सफल रही है-बन्ध्याकरण। इसलिए उत्तम व श्रेष्ठ तथा सरल विधि का न होना भी परिवार नियोजन कार्यक्रम में बाधक है।In simple words: भारत में परिवार-कल्याण कार्यक्रम की राह में कई बाधाएँ हैं, जिनमें इसका जन-अभियान न बन पाना, कार्यक्रम का दायित्व मुख्य रूप से महिलाओं पर होना, भारतीय समाज का पुरुष-प्रधान होना, व्यापक अशिक्षा और अंधविश्वास, पुत्र के धार्मिक व आर्थिक महत्त्व की धारणा, राष्ट्रीय भावना की कमी, धार्मिक मान्यताएँ, और प्रभावी नियोजन विधियों का अभाव शामिल हैं। ये सभी कारक मिलकर कार्यक्रम की सफलता में अवरोध उत्पन्न करते हैं।

🎯 Exam Tip: बाधाओं का वर्णन करते समय सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक और तकनीकी पहलुओं को शामिल करें। प्रत्येक बाधा को स्पष्ट उदाहरणों या आँकड़ों (जैसे पुरुष/महिला नसबंदी दर) से समझाएँ, जिससे उत्तर में गहराई और विश्वसनीयता आएगी।

 

Question 6. ‘जनसंख्या शिक्षा क्या है ? संक्षेप में समझाइए।
Answer: जनसंख्या शिक्षा वह शिक्षा है जो मनुष्य को विश्व, देश तथा राज्य की जनसंख्या के सभी पक्षों का ज्ञान दे। जनसंख्या और इसकी समस्याओं के प्रति ऐसी अवधारणाओं तथा व्यवहार का विकास करने में सहायक हो, जो व्यक्ति और राष्ट्र के लिए हितकारी हों। दूसरे शब्दों में, “जनसंख्या शिक्षा एक शैक्षिक प्रयास है, जिसके द्वारा विभिन्न वर्गों, विशेषकर छात्र-छात्राओं को विश्व के परिप्रेक्ष्य में देश, प्रदेश तथा क्षेत्र की जनसंख्या-स्थिति, जनांकिकी के प्रमुख तत्त्वों, जनसंख्या और पर्यावरण के पारस्परिक सम्बन्ध, जनसंख्या-वृद्धि का आर्थिक एवं सामाजिक विकास पर प्रभाव आदि का बोध कराया जा सकेगा। साथ ही जनसंख्या-वृद्धि से उत्पन्न समस्याओं और जनसाधारण के जीवन-स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में भी जागरूक कराया जा सकेगा। जनसंख्या शिक्षा न तो परिवार नियोजन सम्बन्धी कार्यक्रम है, न यौन शिक्षा और न कोई प्रचार या विशिष्ट दीक्षा सम्बन्धी कार्यक्रम । जनसंख्या शिक्षा का स्वरूप अति व्यापक है, जनसंख्या शिक्षा एक, सतत प्रक्रिया है। यह एक बार में ही अपना उद्देश्य पूरा कर समाप्त हो जाने वाली नहीं है। यह एक व्यापक विद्या है, जिसकी उपादेयता वर्तमान में भी है और भविष्य में भी रहेगी, क्योंकि इसका उद्देश्य मानव-कल्याण है। जनसंख्या शिक्षा मानव जनसंख्या का वह अध्ययन है जिसका सम्बन्ध पर्यावरण से है तथा जिसके द्वारा पर्यावरण को प्रभावित किये बिना मानव-जीवन में गुणात्मक सुधार लाया जा सकता है। विडरमैन ने लिखा है, “जनसंख्या शिक्षा एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा विद्यार्थी जनसंख्या प्रक्रिया की प्रवृत्ति एवं अर्थ, जनसंख्या की विशेषताओं, जनसंख्या परिवर्तन के कारण एवं परिणाम तथा इन परिवर्तनों के अपने परिवार, अपने समाज तथा विश्व पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में ज्ञान प्राप्त करता है।'In simple words: जनसंख्या शिक्षा एक व्यापक शैक्षिक प्रक्रिया है जो व्यक्तियों को जनसंख्या के विभिन्न पहलुओं जैसे स्थिति, जनांकिकी, पर्यावरण संबंध और जनसंख्या वृद्धि के आर्थिक-सामाजिक प्रभावों का ज्ञान देती है। इसका उद्देश्य जनसंख्या संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और ऐसे दृष्टिकोण विकसित करना है जो व्यक्तिगत और राष्ट्रीय कल्याण के लिए लाभकारी हों, यह केवल परिवार नियोजन या यौन शिक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि मानव कल्याण पर केंद्रित एक सतत प्रक्रिया है।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या शिक्षा की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें, यह भी बताएँ कि यह परिवार नियोजन या यौन शिक्षा से कैसे भिन्न है। इसके व्यापक दायरे और मानव कल्याण के दीर्घकालिक उद्देश्य पर बल दें, साथ ही किसी विशेषज्ञ की परिभाषा उद्धृत करना उत्तर को मजबूत करेगा।

 

Question 7. जनसंख्या शिक्षा के उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
Answer: भारत सरकार ने जनसंख्या सम्बन्धी नीतियों एवं कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने के लिए 1970 ई० में राष्ट्रीय स्तर पर एक ‘जनसंख्या शिक्षा कोष्ठ' स्थापित किया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ की शाखा 'यूनाइटेड नेशन्स फण्ड फॉर पॉपुलेशन एक्टीविटीज' के सहयोग से जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम को देश में कार्यान्वित करने के लिए कदम उठाया, जिसके निम्नलिखित उद्देश्य हैं
1. जनसंख्या को नियन्त्रित करने के लिए हमें जनसाधारण में ऐसी चेतना का विकास करना है। जो व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र के लिए हितकारी हो ।
2. जनसंख्या शिक्षा माध्यम के द्वारा हमें छात्र-छात्राओं को इस योग्य बनाना है कि जो भविष्य में यह निर्णय लेने में सक्षम हों कि उनके परिवार का क्या आकार होना चाहिए।
3. जनसंख्या शिक्षा के द्वारा राष्ट्र के समस्त निवासियों, विशेष रूप से छात्र-छात्राओं को विश्व के परिप्रेक्ष्य में अपने देश, राज्य एवं क्षेत्र की जनसंख्या स्थिति के सम्बन्ध में जानकारी देना है।
4. जनसंख्या शिक्षा के माध्यम से जनसाधारण को जनसंख्या में होने वाली वृद्धि के कारणों एवं कुप्रभावों को भी बताना है।
5. जनसंख्या शिक्षा के द्वारा जनसंख्या के सिद्धान्तों का ज्ञान तथा उन सिद्धान्तों का परिपालन्। करना भी बताया जाता है।
6. जनसाधारण को यह बताना कि प्राकृतिक साधनों एवं जनसंख्या का घनिष्ठ सम्बन्ध है और यदि जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों का सन्तुलन ठीक है तो यह हमारे सुख का आधार हो सकता है।
7. जनसंख्या शिक्षा माध्यम के द्वारा मानव अधिकारों का ज्ञान कराना तथा व्यक्तियों में प्रेम और सहानुभूति की भावना का विकास करना।In simple words: जनसंख्या शिक्षा का मुख्य उद्देश्य जनसाधारण में जनसंख्या नियंत्रण के प्रति जागरूकता विकसित करना, युवाओं को भविष्य में परिवार के आकार पर निर्णय लेने में सक्षम बनाना, जनसंख्या वृद्धि के कारणों और कुप्रभावों का ज्ञान देना, जनसंख्या सिद्धांतों से अवगत कराना, और प्राकृतिक संसाधनों के साथ जनसंख्या के संतुलन का महत्व समझाना है। इसका लक्ष्य व्यक्तियों में प्रेम और सहानुभूति का विकास करना और मानव अधिकारों का ज्ञान प्रदान करना भी है।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या शिक्षा के उद्देश्यों को बिंदुवार सूचीबद्ध करें, प्रत्येक उद्देश्य को एक स्पष्ट और संक्षिप्त वाक्य में व्यक्त करें। यह सुनिश्चित करें कि इसमें व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या के मुद्दों के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी बढ़ाने के पहलू शामिल हों।

 

Question 8. जनसंख्या शिक्षा के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
Answer: यह आशंका प्रकट की जाती है कि विश्व की जनसंख्या, जो 1980 ई० में 4 अरब के करीब थी, सन् 2000 तक 6 अरब की संख्या को पार कर चुकी थी। दूसरे शब्दों में, आने वाले दो दशकों में आज पृथ्वी पर जितने लोग रहते हैं उसका आधा हिस्सा उसमें और जुड़ जाएगा, यानि जनसंख्या डेढ़ गुना अधिक हो जाएगी। इस वृद्धि में 90% जनसंख्या की वृद्धि विकासशील देशों में होगी, जो कि पहले से ही भूमि, भोजन, पानी, आवास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की समस्याओं से ग्रस्त हैं। इन सब कारणों से आज जनसंख्या शिक्षा का महत्त्व स्पष्ट हो जाता है। यदि विकासशील देशों को भोजन, आवास, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य की समस्याओं का निवारण करना है तो इन सबका एकमात्र उपाय जनसंख्या शिक्षा है, क्योंकि जनसंख्या शिक्षा के माध्यम से जन्म-दर में गिरावट आएगी तथा जनसंख्या को नियन्त्रित करने में सफलता मिलेगी। उपर्युक्त सभी समस्याओं, विशेष रूप से बेरोजगारी, निर्धनता, भोजन व आवास तथा शिक्षा और स्वास्थ्य की समस्याओं से तब तक सुचारु रूप से नहीं निपटा जा सकता, जब तक कि परिवार का आकार सीमित न हो जिससे हर शिशु को संसाधनों तथा अवसरों का उचित अंश मिल सके। यह सब जनसंख्या शिक्षा के प्रचार एवं प्रसार द्वारा ही सम्भव है।In simple words: जनसंख्या शिक्षा का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि तेजी से बढ़ती विश्व जनसंख्या, विशेष रूप से विकासशील देशों में, भोजन, आवास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भारी दबाव डाल रही है। जनसंख्या शिक्षा जन्म-दर को नियंत्रित कर इन समस्याओं को हल करने का एकमात्र उपाय है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति को संसाधनों का उचित हिस्सा मिल सके और जीवन-स्तर में सुधार हो।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या शिक्षा के महत्व को जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न होने वाली समस्याओं (जैसे भोजन, आवास, रोजगार) के संदर्भ में समझाएँ। यह स्पष्ट करें कि कैसे जनसंख्या शिक्षा इन चुनौतियों का समाधान कर सकती है और देश के समग्र विकास में योगदान दे सकती है।

 

Question 9. नगरीकरण का आर्थिक विकास से क्या सम्बन्ध है? नगरों में जनसंख्या-वृद्धि के क्या कारण हैं?
Answer: किसी भी देश के नगरीकरण में प्रगति उस देश के विकास की गति को सूचित करती है। यही कारण है जिसकी वजह से कहा जाता है कि नगरीकरण व आर्थिक विकास का घनिष्ठ सम्बन्ध है। जिस देश में नगरीकरण का अनुपात जितना अधिक होगा वह देश उतना ही अधिक विकसित होगा। भारत की सन् 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या की 30 प्रतिशत नगरों में रहती है तथा शेष 70 प्रतिशत गाँवों में । वर्ष 1991 में यह अनुपात 26 : 74 था। नगरों में जनसंख्या वृद्धि के कारण निम्नलिखित हैं
1. उद्योगीकरण एवं नवीन उद्योगों का विकास,
2. देश-विभाजन,
3. गाँवों की सुरक्षा में कमी,
4. नगरों में चिकित्सा, शिक्षा, मनोरंजन प्रशिक्षण व रोजगार की सुविधाओं व क्षमता का होना तथा
5. जमींदारों की शहरों में बसने की प्रवृत्ति आदि । भारत में भी नगरों में रहने वाली जनसंख्या का प्रतिशत बढ़ा है, जो वर्तमान में 30 प्रतिशत है, जबकि चेक गणराज्य, स्लोवाकिया में 66 प्रतिशत, रूस और अमेरिका में 77 प्रतिशत, जापान में 79 प्रतिशत, कनाडा में 77 प्रतिशत, ऑस्ट्रेलिया में 85 प्रतिशत व ब्रिटेन में 89 प्रतिशत व्यक्ति शहरों में रहते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जिन चार महानगरों की आबादी सबसे अधिक है, वे हैं-मुम्बई 1 करोड़ 24 लाख, दिल्ली 1 करोड़ 10 लाख, बंगलुरु 84 लाख व हैदराबाद 68 लाख।।In simple words: नगरीकरण और आर्थिक विकास का गहरा संबंध है, क्योंकि नगरीकरण देश की विकास दर का एक संकेतक है। नगरों में जनसंख्या वृद्धि के मुख्य कारणों में औद्योगीकरण, नए उद्योगों का विकास, देश विभाजन, ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा की कमी, शहरों में बेहतर चिकित्सा, शिक्षा, मनोरंजन, प्रशिक्षण और रोजगार की सुविधाएँ, तथा जमींदारों का शहरों में पलायन शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: नगरीकरण और आर्थिक विकास के बीच सीधा संबंध स्थापित करें। नगरों में जनसंख्या वृद्धि के कारणों को विभिन्न पहलुओं (आर्थिक, सामाजिक, ऐतिहासिक) में वर्गीकृत करके समझाएँ, जिससे उत्तर की संरचना और स्पष्टता बेहतर होगी।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

 

Question 1. भारत में तीव्र जनसंख्या-वृद्धि के किन्हीं चार प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: जनसंख्या-वृद्धि को रोकने के उपाय जनसंख्या की समस्या के समाधान के लिए हमें एक साथ कई उपाय करने पड़ेंगे। जन्म-दर को कम करने के लिए तत्कालीन एवं दीर्घकालीन उपाय किये जाने चाहिए। तत्कालीन उपायों में निरोध, नसबन्दी, लूप, ऑपरेशन आदि के लिए लोगों को प्रेरित करना तथा दीर्घकालीन उपायों में विवाह की न्यूनतम आयु में वृद्धि, बाल-विवाह पर रोक, मनोरंजन के साधनों में वृद्धि, आत्म-संयम वे ब्रह्मचर्य के पालन के लिए लोगों को प्रेरित करना आदि हैं। इन उपायों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है
1. जन्म-दर में कमी करना - जनसंख्या-वृद्धि को सीमित करने के लिए यह आवश्यक है कि मृत्यु-दरे के साथ-साथ जन्म-दर में भी गिरावट लायी जाए। वर्ष 1951-60 में जन्म-दर 41.7% थी, जो 2011 ई० में 23% हो गयी। जन्म-दर में और अधिक कमी लायी जानी चाहिए।
2. साक्षरता तथा शिक्षा का प्रसार आवश्यक - शिक्षा के माध्यम से ही जन-साधारण में जनसंख्या-वृद्धि के विषय में जागरूकता लायी जा सकेगी। विकसित देशों में जनसंख्या-वृद्धि की समस्या न होने का प्रमुख कारण उनकी शत-प्रतिशत साक्षरता है। भारत में केवल केरल में ही साक्षरता अन्य प्रदेशों की अपेक्षा अधिक है।
3. स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल - जनसंख्या-वृद्धि के परिप्रेक्ष्य में स्त्री-शिक्षा का विशेष महत्त्व है। केरल में स्त्रियों की साक्षरता प्रतिशत 91.98 है, जबकि उत्तर प्रदेश में 59.26 है। इसी कारण से उत्तर प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि की दर भी उच्च है। अतः जनसंख्या-वृद्धि पर नियन्त्रण हेतु स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल देने की आवश्यकता है।
4. विवाह सम्बन्धी कानूनों का सख्ती से पालन - यद्यपि विवाह की न्यूनतम आयु कानूनी तौर पर निर्धारित है। बाल-विवाह वर्जित है, फिर भी ये बुराइयाँ समाज में यथावत् बनी हुई हैं। इनका सख्ती से पालन किया जाना भी आवश्यक है। इस प्रकार जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाया जा सकता है।
In simple words: यह प्रश्न भारत में तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारणों की जानकारी मांगता है, लेकिन दिए गए उत्तर में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के उपायों का विवरण है। इसमें जन्म-दर कम करने, शिक्षा का प्रसार, स्त्री-शिक्षा पर जोर और विवाह संबंधी कानूनों का सख्ती से पालन जैसे तरीके बताए गए हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में जनसंख्या वृद्धि के कारणों और इसे नियंत्रित करने के उपायों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है, भले ही दिए गए उत्तर में केवल उपाय ही हों।

 

Question 2. जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाले चार प्रमुख कारकों का उल्लेख कीजिए।
Answer: किसी स्थान-विशेष पर जनसंख्या का घनत्व निम्नलिखित मुख्य तत्त्वों द्वारा प्रभावित होता है
1. जलवायु - जनसंख्या का घनत्व जलवायु पर निर्भर करता है। जिस क्षेत्र यो स्थान की जलवायु उत्तम और स्वास्थ्यवर्द्धक होती है, वहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। इसके विपरीत, यदि किसी स्थान की जलवायु अधिक गर्म या अधिक ठण्डी होती है तो ऐसे स्थान पर जनसंख्या का घनत्व कम होता है।
2. वर्षा - जिन स्थानों पर वर्षा न तो बहुत अधिक होती है और न ही बहुत कम, उन स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। इसके विपरीत, जिन स्थानों पर अत्यधिक वर्षा होती है या बहुत कम वर्षा होती है, उन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व भी कम पाया जाता है। यही कारण है कि राजस्थान में वर्षा कम होने के कारण तथा असम में अधिक वर्षा होने के कारण जनसंख्या का घनत्व कम है।
3. भूमि की बनावट व उर्वरा शक्ति - मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पर्वतीय तथा पठारी क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व कम होता है, क्योंकि ऊँची-नीची भूमि होने के कारण कृषि कार्य करने तथा उद्योगों को स्थापित करने में कठिनाई होती है। इसके विपरीत, मैदानी भागों में मिट्टी समतल व अधिक उपजाऊ होती है इसलिए इन स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में गंगा-यमुना के मैदानी भाग में जनसंख्या का घनत्व अधिक है।
4. सिंचाई की सुविधाएँ - जिन क्षेत्रों में वर्षा की कमी को सिंचाई के साधनों द्वारा पूरा कर लिया जाता है या ज़िन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती हैं, उन क्षेत्रों में भी जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।
In simple words: जनसंख्या घनत्व को जलवायु, वर्षा, भूमि की बनावट और उर्वरा शक्ति तथा सिंचाई की सुविधाओं जैसे कारक प्रभावित करते हैं। अनुकूल परिस्थितियाँ अधिक घनत्व को बढ़ावा देती हैं, जबकि प्रतिकूल परिस्थितियाँ इसे कम करती हैं।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाले मुख्य भौगोलिक और आर्थिक कारकों को सूचीबद्ध करते समय स्पष्ट और संक्षिप्त रहें।

 

Question 3. भारत में जनसंख्या को नियन्त्रित करने के लिए कोई चार उपाय बताइए।
Answer: जनसंख्या की समस्या के समाधान के लिए हमें एक साथ कई उपाय करने पड़ेंगे। जन्म-दर को कम करने के लिए तत्कालीन एवं दीर्घकालीन उपाय किये जाने चाहिए। तत्कालीन उपायों में निरोध, नसबन्दी, लूप, ऑपरेशन आदि के लिए लोगों को प्रेरित करना तथा दीर्घकालीन उपायों में विवाह की न्यूनतम आयु में वृद्धि, बाल-विवाह पर रोक, मनोरंजन के साधनों में वृद्धि, आत्म-संयम वे ब्रह्मचर्य के पालन के लिए लोगों को प्रेरित करना आदि हैं। इन उपायों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है
1. जन्म-दर में कमी करना - जनसंख्या-वृद्धि को सीमित करने के लिए यह आवश्यक है कि मृत्यु-दरे के साथ-साथ जन्म-दर में भी गिरावट लायी जाए। वर्ष 1951-60 में जन्म-दर 41.7% थी, जो 2011 ई० में 23% हो गयी। जन्म-दर में और अधिक कमी लायी जानी चाहिए ।
2. साक्षरता तथा शिक्षा का प्रसार आवश्यक - शिक्षा के माध्यम से ही जन-साधारण में जनसंख्या-वृद्धि के विषय में जागरूकता लायी जा सकेगी। विकसित देशों में जनसंख्या-वृद्धि की समस्या न होने का प्रमुख कारण उनकी शत-प्रतिशत साक्षरता है। भारत में केवल केरल में ही साक्षरता अन्य प्रदेशों की अपेक्षा अधिक है।
3. स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल - जनसंख्या-वृद्धि के परिप्रेक्ष्य में स्त्री-शिक्षा का विशेष महत्त्व है। केरल में स्त्रियों की साक्षरता प्रतिशत 91.98 है, जबकि उत्तर प्रदेश में 59.26 है। इसी कारण से उत्तर प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि की दर भी उच्च है। अतः जनसंख्या-वृद्धि पर नियन्त्रण हेतु स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल देने की आवश्यकता है।
4. विवाह सम्बन्धी कानूनों का सख्ती से पालन - यद्यपि विवाह की न्यूनतम आयु कानूनी तौर पर निर्धारित है। बाल-विवाह वर्जित है, फिर भी ये बुराइयाँ समाज में यथावत् बनी हुई हैं। इनका सख्ती से पालन किया जाना भी आवश्यक है। इस प्रकार जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाया जा सकता है।
5. मनोरंजन के साधनों में वृद्धि - विशेष रूप से ग्रामीण तथा पिछड़े क्षेत्रों में मनोरंजन के साधनों में वृद्धि की जानी चाहिए। इनमें सिनेमा, सार्वजनिक दूरदर्शन की व्यवस्था, शिक्षाप्रद छोटी-छोटी फिल्मों का प्रदर्शन, अखाड़े, खेल-कूद प्रतियोगिताएँ आदि मुख्य हैं। मनोरंजन के साधनों में वृद्धि होने से जनसंख्या-वृद्धि पर भी नियन्त्रण लगेगा ।
In simple words: जनसंख्या नियंत्रण के लिए जन्म-दर में कमी, शिक्षा का प्रसार, स्त्री-शिक्षा पर जोर, विवाह संबंधी कानूनों का सख्ती से पालन और मनोरंजन के साधनों में वृद्धि जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं ताकि लोग छोटे परिवार को अपना सकें।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या नियंत्रण के विभिन्न उपायों को स्पष्ट रूप से समझाना और उनके प्रभावों का उल्लेख करना उच्च अंक प्राप्त करने में सहायक है।

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. जनसंख्या के घनत्व की परिभाषा अपने शब्दों में दीजिए।
Answer: जनसंख्या के घनत्व से अभिप्राय मनुष्य-भूमि अनुपात से है अर्थात् “किसी देश के प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या को जनसंख्या का घनत्व कहते हैं।”
In simple words: जनसंख्या घनत्व का अर्थ है कि प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में औसतन कितने लोग रहते हैं।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या घनत्व की परिभाषा को सटीक और संक्षिप्त रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. परिवार-कल्याण कार्यक्रम के मार्ग में उत्पन्न होने वाली चार बाधाएँ लिखिए।
Answer: परिवार-कल्याण कार्यक्रम के मार्ग में निम्नलिखित चार बाधाएँ उत्पन्न होती हैं
1. अशिक्षा एवं अन्धविश्वास,
2. राष्ट्रीय भावना की कमी,
3. परिवार-कल्याण कार्यक्रम का जन अभियान न बन पाना तथा
4. भारतीय समाज का पुरुष-प्रधान होना।
In simple words: परिवार कल्याण कार्यक्रम की सफलता में अशिक्षा, अंधविश्वास, राष्ट्रीय भावना की कमी और भारतीय समाज में पुरुष प्रधानता मुख्य बाधाएँ हैं।

🎯 Exam Tip: परिवार कल्याण कार्यक्रमों की बाधाओं को सूचीबद्ध करते समय, उनके सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर ध्यान दें।

 

Question 3. जन्म-दर से आप क्या समझते हैं? भारत में जन्म-दर के नवीनतम आँकड़े दीजिए।
Answer: जन्म-दर से अर्थ एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के पीछे बच्चों के जन्म से है। वर्ष 2011 में यह 23 प्रति हजार हो गयी। यह दर अन्य देशों की तुलना में अत्यधिक ऊँची है।
In simple words: जन्म-दर बताती है कि एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या पर कितने बच्चे पैदा हुए। 2011 में भारत की जन्म-दर 23 प्रति हजार थी, जो वैश्विक औसत से अधिक है।

🎯 Exam Tip: जन्म-दर की परिभाषा के साथ नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों को उद्धृत करना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

 

Question 4. मृत्यु-दर से आप क्या समझते हैं?
Answer: मृत्यु-दर से अर्थ एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के पीछे मृत्युओं की संख्या से है। भारत में इस दर में भी अत्यधिक कमी हुई है। वर्ष 2011 में यह 9 प्रति हजार है। यह अन्य देशों की तुलना में ऊँची है।
In simple words: मृत्यु-दर का मतलब है कि एक साल में हर हज़ार लोगों में कितनी मौतें हुईं। 2011 में भारत की मृत्यु-दर 9 प्रति हज़ार थी, जो अभी भी कुछ अन्य देशों से ज़्यादा है।

🎯 Exam Tip: मृत्यु-दर की परिभाषा और उसके वर्तमान रुझानों (कमी या वृद्धि) को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक है।

 

Question 5. जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न होने वाली दो समस्याओं को लिखिए।
Answer: (1) खाद्य-सामग्री की आपूर्ति की समस्या । (2) आवास की समस्या ।
In simple words: जनसंख्या वृद्धि से खाद्य सामग्री और आवास की कमी जैसी मूलभूत समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि के नकारात्मक प्रभावों को सूचीबद्ध करते समय, सबसे तात्कालिक और महत्वपूर्ण समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 6. जनसंख्या का घनत्व किस प्रकार ज्ञात किया जाता है?
Answer: देश के कुलं भूमि क्षेत्रफल को कुल जनसंख्या से भाग देने पर जनसंख्या का घनत्व ज्ञात किया जाता है।
In simple words: जनसंख्या घनत्व निकालने के लिए, देश की कुल जनसंख्या को उसके कुल भूमि क्षेत्रफल से विभाजित किया जाता है।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या घनत्व के सूत्र को सरल भाषा में व्यक्त करें।

 

Question 7. परिवार नियोजन के दो लाभ बताइए।
Answer: (1) देश के आर्थिक विकास का आधार । (2) बेरोजगारी कम करने की अचूक औषधि ।
In simple words: परिवार नियोजन आर्थिक विकास का आधार है और बेरोजगारी कम करने में सहायक होता है।

🎯 Exam Tip: परिवार नियोजन के लाभों को सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से बताएं।

 

Question 8. वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या कितनी है?
Answer: वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 102.7 करोड़ है।
In simple words: 2001 की जनगणना के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या 102.7 करोड़ थी।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट जनगणना वर्षों के जनसंख्या आंकड़ों को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. वर्ष 1951 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या कितनी थी?
Answer: वर्ष 1951 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 36.11 करोड़ थी।
In simple words: 1951 की जनगणना के मुताबिक, भारत की जनसंख्या 36.11 करोड़ थी।

🎯 Exam Tip: विभिन्न ऐतिहासिक जनगणना के महत्वपूर्ण जनसंख्या आंकड़ों को याद रखना परीक्षा में मदद करेगा।

 

Question 10. वर्ष 2011 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार पुरुष जनसंख्या तथा स्त्री जनसंख्या बताइए।
Answer: वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 62.37 करोड़ पुरुष एवं 58.64 करोड़ स्त्री जनसंख्या है।
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 62.37 करोड़ पुरुष और 58.64 करोड़ महिलाएँ थीं।

🎯 Exam Tip: लिंग-आधारित जनसंख्या आंकड़ों को प्रस्तुत करते समय सटीक संख्याएं और लिंग अनुपात भी ध्यान में रखें।

 

Question 11. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुष-स्त्री प्रतिशत बताइए।
Answer: 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुष 51.73 प्रतिशत तथा स्त्री 48.27 प्रतिशत है।
In simple words: 2011 की जनगणना में, पुरुषों का प्रतिशत 51.73% और महिलाओं का प्रतिशत 48.27% था।

🎯 Exam Tip: लिंग-आधारित प्रतिशतता की जानकारी जनसंख्या संरचना विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में जनसंख्या का घनत्व कितना है?
Answer: वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में जनसंख्या का घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में प्रति वर्ग किलोमीटर 382 व्यक्ति निवास करते थे।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या घनत्व के राष्ट्रीय औसत आंकड़े को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. किस राज्य में जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक है?
Answer: सर्वाधिक जनसंख्या का घनत्व बिहार में (1,102 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) है।
In simple words: बिहार में जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है, जहाँ प्रति वर्ग किलोमीटर 1,102 लोग रहते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न राज्यों के जनसंख्या घनत्व के आंकड़े याद रखना तुलनात्मक विश्लेषण में मदद करेगा।

 

Question 14. किस राज्य में जनसंख्या का घनत्व सबसे कम है?
Answer: सवसे कम जनसंख्या का घनत्व अरुणाचल प्रदेश में (17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) है।
In simple words: अरुणाचल प्रदेश में जनसंख्या घनत्व सबसे कम है, जहाँ प्रति वर्ग किलोमीटर केवल 17 व्यक्ति रहते हैं।

🎯 Exam Tip: सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य की पहचान भौगोलिक कारकों से भी संबंधित है।

 

Question 15. केन्द्रशासित क्षेत्रों में सर्वाधिक जनसंख्या का घनत्व किसका है?
Answer: केन्द्रशासित क्षेत्रों में सर्वाधिक जनसंख्या का घनत्व दिल्ली में (11, 297 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) है।
In simple words: केंद्रशासित प्रदेशों में, दिल्ली का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है, जहाँ प्रति वर्ग किलोमीटर 11,297 लोग रहते हैं।

🎯 Exam Tip: केंद्रशासित प्रदेशों में जनसंख्या घनत्व शहरीकरण और आर्थिक अवसरों से अधिक प्रभावित होता है।

 

Question 16. केन्द्रशासित क्षेत्रों में सबसे कम जनसंख्या का घनत्व किसका है?
Answer: केन्द्रशासित क्षेत्रों में सबसे कम जनसंख्या का घनत्व अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में (46 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) है।
In simple words: केंद्रशासित प्रदेशों में, अंडमान निकोबार द्वीप समूह में जनसंख्या घनत्व सबसे कम है, जहाँ प्रति वर्ग किलोमीटर 46 व्यक्ति रहते हैं।

🎯 Exam Tip: कम जनसंख्या घनत्व वाले केंद्रशासित प्रदेशों का भौगोलिक स्थान और पर्यावरण अक्सर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Question 17. 2011 की जनगणना के आधार पर भारत में साक्षरता-दर क्या थी?
Answer: वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर भारत की साक्षरता-दर 74.04 प्रतिशत थी।
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की साक्षरता दर 74.04% थी।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय साक्षरता दर के आंकड़े को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 18. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुष साक्षरता-दर क्या थी?
Answer: वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुषों में साक्षरता दर 82.14 प्रतिशत थी।
In simple words: 2011 की जनगणना में, पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% थी।

🎯 Exam Tip: लिंग-विशिष्ट साक्षरता दरों को याद रखना सामाजिक विकास के संकेतकों को समझने में मदद करता है।

 

Question 19. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार स्त्री की साक्षरता दर क्या थी?
Answer: वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार स्त्री साक्षरता दर 65.46 प्रतिशत थी।
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार, महिलाओं की साक्षरता दर 65.46% थी।

🎯 Exam Tip: महिला साक्षरता दर को याद रखना लिंग समानता और शैक्षिक प्रगति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

 

Question 20. भारत के किस राज्य में साक्षरता का प्रतिशत सबसे अधिक है?
Answer: सर्वाधिक साक्षरता दर केरल में (93.91) प्रतिशत है।
In simple words: केरल में भारत की साक्षरता दर सबसे अधिक है, जो 93.91% है।

🎯 Exam Tip: सर्वाधिक साक्षरता वाले राज्य का नाम और उसके पीछे के कारणों को समझना उपयोगी है।

 

Question 21. सबसे कम साक्षरता दर किस राज्य में है?
Answer: सबसे कम साक्षरता दर बिहार राज्य में (63.82 प्रतिशत) है।
In simple words: बिहार में भारत की साक्षरता दर सबसे कम है, जो 63.82% है।

🎯 Exam Tip: सबसे कम साक्षरता वाले राज्य और उसके प्रतिशत को याद रखना क्षेत्रीय असमानताओं को उजागर करता है।

 

Question 22. देश में सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य कौन-सा है?
Answer: उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है।
In simple words: उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है।

🎯 Exam Tip: भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य को पहचानना सामान्य ज्ञान और जनसांख्यिकी के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 23. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की जनसंख्या कितनी थी?
Answer: वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की जनसंख्या (19.95) करोड़ थी।
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जनसंख्या लगभग 19.95 करोड़ थी।

🎯 Exam Tip: प्रमुख राज्यों की जनसंख्या के आंकड़े याद रखना क्षेत्रीय जनसंख्या पैटर्न को समझने में मदद करता है।

 

Question 24. भारत में सर्वप्रथम नियमित रूप से जनगणना कब प्रारम्भ हुई?
Answer: भारत में 1881 ई० में सर्वप्रथम नियमित रूप में अखिल भारतीय जनगणना सम्पन्न हुई। या भारत में परिवार नियोजन कार्यक्रम प्रथम पंचवर्षीय योजना में 1952 से आरम्भ किया गया था।
In simple words: भारत में पहली नियमित जनगणना 1881 में हुई, जबकि परिवार नियोजन कार्यक्रम 1952 में प्रथम पंचवर्षीय योजना के दौरान शुरू किया गया था।

🎯 Exam Tip: जनगणना के इतिहास और परिवार नियोजन कार्यक्रमों की शुरुआत की महत्वपूर्ण तिथियों को याद रखना प्रासंगिक है।

 

Question 25. भारत में अन्तिम जनगणना कब हुई तथा अगली जनगणना कब होगी?
Answer: भारत में अन्तिम जनगणना सन् 2011 में हुई तथा अगली जनगणना वर्ष 2021 में होगी।
In simple words: भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी और अगली जनगणना 2021 में होनी थी।

🎯 Exam Tip: जनगणना के चक्र और इसकी नियमितता को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 26. जनसंख्या विस्फोट का क्या अर्थ है?
Answer: तीव्र गति से जनसंख्या का बढ़ना, जनसंख्या विस्फोट कहलाता है।
In simple words: जनसंख्या विस्फोट का अर्थ है जब किसी क्षेत्र की जनसंख्या बहुत तेज़ी से बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या विस्फोट की सटीक और संक्षिप्त परिभाषा याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 27. जनसंख्या के घनत्व का सूत्र लिखिए।
Answer:
In simple words: जनसंख्या घनत्व का सूत्र है: कुल जनसंख्या को कुल क्षेत्रफल से भाग देना।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या घनत्व का सूत्र याद रखना और उसे लागू करना जनसांख्यिकी की गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 28. तीव्र जनसंख्या वृद्धि के किन्हीं चार दुष्परिणामों का उल्लेख कीजिए।
Answer: (1) यह आर्थिक प्रगति में बाधक है। (2) इससे खाद्य एवं बेरोजगारी की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। (3) प्रति व्यक्ति उत्पादकता में कमी आती है। (4) उपभोग व्यय बढ़ जाने के कारण बचत एवं पूँजी निर्माण की दर कम होती है।
In simple words: तीव्र जनसंख्या वृद्धि से आर्थिक विकास बाधित होता है, खाद्य और बेरोजगारी की समस्याएँ बढ़ती हैं, प्रति व्यक्ति उत्पादकता घटती है और बचत व पूँजी निर्माण की दर कम हो जाती है।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि के नकारात्मक आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 29. परिवार कल्याण कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु चार सुझाव दीजिए।
Answer:
1. कमजोर वर्गों को इस अभियान का केन्द्रबिन्दु बनाया जाए।
2. गहन परिवार जिला कार्यक्रमों का संचालन किया जाए।
3. शिक्षा का प्रसार किया जाए।
4. बन्ध्यकरण के लिए विशेष सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
In simple words: परिवार कल्याण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कमजोर वर्गों को लक्षित करना, गहन जिला कार्यक्रम चलाना, शिक्षा का प्रसार करना और बंध्यकरण की विशेष सुविधाएँ उपलब्ध कराना आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: परिवार कल्याण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए व्यापक और बहुआयामी सुझाव देना महत्वपूर्ण है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. भारत का विश्व में जनसंख्या की दृष्टि से स्थान है
(क) पहला
(ख) दूसरा
(ग) तीसरा
(घ) चौथा
Answer: (ख) दूसरा
In simple words: जनसंख्या के मामले में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।

🎯 Exam Tip: भारत की जनसंख्या संबंधी वैश्विक रैंकिंग को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. भारत में परिवार नियोजन कार्यक्रम है
(क) सफल
(ख) असफल
(ग) सन्तोषजनक
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) असफल
In simple words: भारत में परिवार नियोजन कार्यक्रम को अभी तक असफल माना जाता है।

🎯 Exam Tip: परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता-असफलता के कारणों को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. जनसंख्या घनत्व का अभिप्राय है
(क) देश में घनी जनसंख्या वाला क्षेत्र
(ख) देश की सम्पूर्ण जनसंख्या
(ग) प्रति वर्ग किलोमीटर निवास करने वालों की औसत संख्या
(घ) उत्पादन कार्य में लगी हुई जनसंख्या
Answer: (ग) प्रति वर्ग किलोमीटर निवास करने वालों की औसत संख्या
In simple words: जनसंख्या घनत्व का मतलब है कि एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में औसतन कितने लोग रहते हैं।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या घनत्व की सटीक परिभाषा याद रखना आवश्यक है।

 

Question 4. वर्ष 1991 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या थी
(क) 43.92 करोड़
(ख) 54.82 करोड़
(ग) 68.33 करोड़
(घ) 84.63 करोड़
Answer: (घ) 84.63 करोड़
In simple words: 1991 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 84.63 करोड़ थी।

🎯 Exam Tip: विभिन्न जनगणना वर्षों के प्रमुख जनसंख्या आंकड़ों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात (प्रति हजार पुरुषों पर महिलाएँ है
(क) 930
(ख) 934
(ग) 927
(घ) 940
Answer: (घ) 940.
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में प्रति हजार पुरुषों पर 940 महिलाएँ थीं।

🎯 Exam Tip: लिंगानुपात के आंकड़ों को याद रखना सामाजिक-जनसांख्यिकीय विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. भारत का सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य है
(क) महाराष्ट्र
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) केरल
(घ) बिहार
Answer: (ग) केरल
In simple words: केरल भारत का सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य है।

🎯 Exam Tip: सर्वाधिक साक्षरता वाले राज्य का नाम और उसके पीछे के कारणों को समझना उपयोगी है।

 

Question 7. भारत में जनसंख्या का (2011 के अनुसार) प्रति वर्ग किलोमीटर घनत्व है
(क) 274
(ख) 382
(ग) 300
(घ) 364
Answer: (ख) 382
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में जनसंख्या का घनत्व प्रति वर्ग किलोमीटर 382 व्यक्ति था।

🎯 Exam Tip: भारत के राष्ट्रीय जनसंख्या घनत्व को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. भारत में विश्व की कितने प्रतिशत आबादी निवास करती है?
(क) 17.5%
(ख) 20.6%
(ग) 12.4%
(घ) 18.8%
Answer: (क) 17.5%.
In simple words: विश्व की लगभग 17.5% आबादी भारत में निवास करती है।

🎯 Exam Tip: वैश्विक जनसंख्या में भारत के प्रतिशत को याद रखना उसकी जनसांख्यिकीय महत्वता को दर्शाता है।

 

Question 9. उत्तर प्रदेश में भारत की जनसंख्या निवास करती है
(क) 20.6%
(ख) 12.4%
(ग) 16.6%
(घ) 18.8%
Answer: (ग) 16.6%.
In simple words: भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 16.6% उत्तर प्रदेश में रहता है।

🎯 Exam Tip: भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य (उत्तर प्रदेश) में निवास करने वाली जनसंख्या का प्रतिशत याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. देश के किस महानगर में सबसे अधिक जनसंख्या है ?
(क) दिल्ली
(ख) मुम्बई
(ग) कोलकाता
(घ) चेन्नई
Answer: (ख) मुम्बई
In simple words: मुंबई भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला महानगर है।

🎯 Exam Tip: भारत के सबसे बड़े महानगरों की जनसंख्या संबंधी जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. नयी जनसंख्या नीति में किस वर्ष तक जनसंख्या को स्थिर करने का लक्ष्य रखा गया है?
(क) 2015 ई० तक
(ख) 2025 ई० तक
(ग) 2035 ई० तक
(घ) 2045 ई० तक
Answer: (घ) 2045 ई० तक
In simple words: नई जनसंख्या नीति का लक्ष्य 2045 तक देश की जनसंख्या को स्थिर करना है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के दीर्घकालिक लक्ष्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. जनसंख्या का घनत्व दर्शाता है
(क) पूँजी-भूमि अनुपात
(ख) भूमि-उत्पाद अनुपात
(ग) भूमि-श्रम अनुपात
(घ) व्यक्ति- भूमि अनुपात
Answer: (घ) व्यक्ति- भूमि अनुपात
In simple words: जनसंख्या घनत्व यह दर्शाता है कि प्रति इकाई भूमि पर कितने व्यक्ति निवास करते हैं।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या घनत्व की अवधारणा को उसके मूल अनुपात के संदर्भ में समझना आवश्यक है।

 

Question 13. भारत के जनसंख्या इतिहास में महान विभाजन वर्ष है
(क) 1901
(ख) 1921
(ग) 1931
(घ) 1951
Answer: (ख) 1921
In simple words: 1921 को भारत के जनसंख्या इतिहास में 'महान विभाजन वर्ष' कहा जाता है क्योंकि इसके बाद जनसंख्या वृद्धि दर में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया।

🎯 Exam Tip: भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में 'महान विभाजन वर्ष' (Great Demographic Divide) की महत्वपूर्ण तिथि को याद रखें।

 

Question 14. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 2011 की जनगणना के अनुसार सही है?
(क) भारत में लिंगानुपात घट रहा है।
(ख) भारत में लिंगानुपात स्थिर रहा है।
(ग) भारत में लिंगानुपात बढ़ा है।
(घ) भारत में लिंगानुपात के बारे में सूचना उपलब्ध नहीं है।
Answer: (ग) भारत में लिंगानुपात बढ़ा है।
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में लिंगानुपात में वृद्धि दर्ज की गई है।

🎯 Exam Tip: जनगणना के नवीनतम आंकड़ों के आधार पर लिंगानुपात के रुझानों को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. निम्न में से किस दशक में जनसंख्या की वृद्धि दर अधिकतम रही?
(क) 1961-1971
(ख) 1971-1981
(ग) 1981-1991
(घ) 1991-2001
Answer: (क) 1961-1971
In simple words: 1961-1971 के दशक में भारत की जनसंख्या वृद्धि दर सबसे अधिक थी।

🎯 Exam Tip: भारत के जनसंख्या वृद्धि दर के ऐतिहासिक रुझानों और अधिकतम वृद्धि वाले दशक को पहचानना जनसांख्यिकी अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की घोषणा किस वर्ष की गयी थी?
(क) 1999
(ख) 2000
(ग) 2001
(घ) 2002
Answer: (ख) 2000
In simple words: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की घोषणा वर्ष 2000 में की गई थी।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की घोषणा के वर्ष को याद रखना नीतिगत निर्णयों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. सन् 2001 की जनसंख्या के अनुसार 1991-2001 के मध्य जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि कितनी थी ?
(क) 2.5%
(ख) 2.2%
(ग) 2.1%
(घ) 1.9%
Answer: (क) 2.5%
In simple words: 1991-2001 के दशक में भारत की जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर 2.5% थी।

🎯 Exam Tip: विभिन्न दशकों की वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दरों को याद रखना जनसांख्यिकीय विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 18. भारत में परिवार-नियोजन कार्यक्रम किस वर्ष प्रारम्भ किया गया था?
(क) 1949 में
(ख) 1952 में
(ग) 1972 से
(घ) 1977 से
Answer: (ख) 1952 में
In simple words: भारत में परिवार नियोजन कार्यक्रम 1952 में शुरू किया गया था।

🎯 Exam Tip: परिवार नियोजन कार्यक्रम की शुरुआत का वर्ष याद रखना नीति के इतिहास को समझने में मदद करता है।

 

Question 19. निम्नलिखित में से किस वर्ष में राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन हुआ?
(क) 1998
(ख) 2000
(ग) 2001
(घ) 2002
Answer: (ख) 2000
In simple words: राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन वर्ष 2000 में हुआ था।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के गठन के वर्ष को याद रखना नीतिगत संस्थाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

 

Question 20. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का पदेन अध्यक्ष होता है
(क) भारत का राष्ट्रपति
(ख) भारत का उपराष्ट्रपति
(ग) भारत का प्रधानमंत्री
(घ) भारत का स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मन्त्री
Answer: (घ) भारत का स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मन्त्री
In simple words: राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का पदेन अध्यक्ष भारत का स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री होता है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण आयोगों के पदेन अध्यक्षों की जानकारी सरकारी संरचना और नीति-निर्माण को समझने में मदद करती है।

 

Question 21. भारत के किस राज्य में लिंगानुपात सर्वाधिक है?
(क) केरल
(ख) पंजाब
(ग) राजस्थान
(घ) हिमाचल प्रदेश
Answer: (क) केरल
In simple words: केरल राज्य में भारत का लिंगानुपात सर्वाधिक है।

🎯 Exam Tip: सर्वाधिक लिंगानुपात वाले राज्य की पहचान सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों के विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 22. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर कितनी है?
(क) 1.00%
(ख) 1.50%
(ग) 1.64%
(घ) 1.92%
Answer: (ग) 1.64%.
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर 1.64% थी।

🎯 Exam Tip: नवीनतम जनगणना के वार्षिक वृद्धि दर को याद रखना जनसंख्या गतिशीलता को समझने में सहायक है।

 

Question 23. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कितनी जनसंख्या है?
(क) 100 करोड़
(ख) 105 करोड़
(ग) 121 करोड़
(घ) 122 करोड़
Answer: (ग) 121 करोड़
In simple words: 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ थी।

🎯 Exam Tip: नवीनतम जनगणना के कुल जनसंख्या आंकड़े को सटीक रूप से याद रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

Question 24. भारत में जनगणना की जाती है, प्रत्येक
(क) 5 वर्ष में
(ख) 8 वर्ष में
(ग) 10 वर्ष में
(घ) 20 वर्ष में
Answer: (ग) 10 वर्ष में
In simple words: भारत में जनगणना हर दस साल में एक बार की जाती है।

🎯 Exam Tip: जनगणना के आवधिक चक्र को समझना इसकी नियमितता और डेटा संग्रह के महत्व को दर्शाता है।

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