Official UP Board Solutions for Class 12 Economics: Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें
Access comprehensive textbook solutions for Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें using the official curriculum guides for Class 12 Economics. Designed to align with the 2026 27 UP Board standards, these detailed answers help students reinforce core academic concepts.
Chapter-wise Solutions for Economics: Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें
View or download the dedicated Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें solution resource below. Engaging with these textbook answers under focused study conditions ensures continuous academic progress and mastery of the 2026 27 curriculum for Economics.
UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 17 Source of Income and Items of Expenditure of Local Governing Body (स्थानीय निकाय की आय के स्रोत व व्यय की मदें)
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)
Question 1. स्थानीय निकाय की आय के स्रोतों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
Answer: आधुनिक युग में स्थानीय निकायों का विशेष महत्त्व है। साधारण रूप से स्थानीय प्रकृति के कार्यों को स्थानीय संस्थाओं को सौंप देने से राज्य सरकारें अपने दायित्वों से मुक्त हो जाती हैं। स्थानीय आवश्यकताओं के कार्य स्थानीय संस्थाओं द्वारा अधिक कुशलतापूर्वक सम्पन्न किये जा सकते हैं। स्थानीय संस्थाओं के सीमित कार्यक्षेत्र होने पर भी उनके दायित्व अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। स्थानीय संस्थाओं की आय के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं
(अ) कर स्रोत,
(ब) गैर-कर स्रोत ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 'आय के स्रोत' को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित करता है- 'कर स्रोत' और 'गैर कर स्रोत'। 'कर स्रोत' के अंतर्गत 'स्थानीय संस्थाओं के कर' और 'राज्य सरकारों के कर' दिखाए गए हैं, जबकि 'गैर कर स्रोत' में 'सहायक अनुदान', 'ऋण एवं उपादान' और 'अन्य साधन' शामिल हैं, जो स्थानीय निकायों की आय के विभिन्न माध्यमों को दर्शाते हैं।
(अ) कर-स्रोत - स्थानीय संस्थाओं को कर से पर्याप्त आय प्राप्त होती है, जो कि कुल आय का 70% भाग तक होती है। करों में निम्नलिखित दो प्रकार के कर आते हैं
1. स्थानीय संस्थाओं द्वारा लगाये गये कर।
2. राज्य सरकारों द्वारा लगाये व वसूल किये गये करों में स्थानीय संस्थाओं का भाग।
(ब) गैर-कर स्रोत - गैर-कर स्रोतों में निम्नलिखित को सम्मिलित किया जा सकता है
- सहायता अनुदान,
- ऋण तथा उपादान तथा
- अन्य साधन ।
स्थानीय संस्थाओं की आय के साधनः
- कर स्रोत आय तथा
- गैर-कर स्रोत आय ।
1. प्रत्यक्ष कर - प्रत्यक्ष कर में निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है
- सम्पत्ति कर - सम्पत्ति कर प्रायः वे कर होते हैं जो कि अचल सम्पत्ति के क्रय-विक्रय पेड़ लगाये जाते हैं। यह स्थानीय संस्थाओं की आय का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। सम्पत्ति कर चार प्रकार के होते हैं-सुधार कर, भूमि पर उपकर, भवन पर कर एवं सम्पत्ति के हस्तान्तरण पर कर।
- हैसियत कर - यह कर व्यक्ति की आर्थिक अवस्था, सामाजिक स्थिति एवं परिवार के सदस्यों की संख्या को ध्यान में रखकर लगाया जाता है।
- गाड़ियों पर कर - यह कर स्थानीय संस्थाओं द्वारा रिक्शा, ठेले आदि पर लगाया जाता है।
- बाजार कर - यह कर बाजारों में माल बेचने वाले व्यक्तियों पर नगरपालिकाओं द्वारा लगाये जाते हैं।
- पशु कर - यह कर जानवरों; जैसे - गाय, बैल, भैंस, कुत्ते आदि पालतू पशुओं पर लगाये जाते हैं।
- मार्ग शुल्क - यह कर उन पुलों से गुजरने वाले व्यक्तियों एवं माल पर लगाया जाता है। जिनकी लागत के Rs.5 लाख से अधिक होती है।
- चुंगी कर - चुंगी कर ऐसा कर है जो किसी विशेष स्थानीय क्षेत्र में उपभोग करने अथवा वहाँ पर बिक्री के लिए आने वाली वस्तुओं पर लगाया जाता है। यह कर वस्तु की मात्रा या मूल्य के आधार पर लगाया जा सकता है।
- सीमा कर - जब कोई सामान नगरपालिका की सीमा में प्रवेश करे या सीमा से बाहर जाए या सीमा से गुजरे तो उस पर लगने वाले कर को सीमा कर कहते हैं। रेलों से यात्रा करने वाले यात्रियों के रेल-भाड़े में सीमा कर सम्मिलित होता है, जो रेल-भाड़े के साथ वसूल करके नगर निकायों को दे दिया जाता है।
- सुधार कर - विकास प्रन्यासों द्वारा सम्पत्ति के मूल्य बढ़ाने पर लगने वाले कर को सुधार कर कहते हैं। इन संस्थाओं द्वारा ऐसे कार्य किये जाते हैं, जिससे सम्पत्ति के मूल्य बढ़ जाते हैं और इस बढ़े हुए मूल्य को कर के रूप में प्राप्त करते हैं।
- अन्य कर - स्थानीय सरकारों द्वारा लगाये जाने वाले अन्य करों में थियेटर कर, विज्ञापन कर आदि हैं।
गैर-कर स्रोत में निम्नलिखित प्रकार की आय को सम्मिलित करते हैं
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 'गैर-कर स्रोत' को तीन मुख्य उप-श्रेणियों में विभाजित करता है- 'अनुदान', 'ऋण एवं उपदान' और 'अन्य साधन'। यह विभाजन स्थानीय निकायों की गैर-कर राजस्व प्राप्तियों के विभिन्न तरीकों को स्पष्ट करता है, जो करों से भिन्न होते हैं।
(a) अनुदान - सभी राज्यों में राज्य सरकारों द्वारा स्थानीय निकायों को अनुदान दिये जाते हैं। सामान्यतः अनुदान शिक्षा, चिकित्सालय तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़क, जलापूर्ति इत्यादि की सहायता के लिए प्रदान किये जाते हैं।
(b) ऋण तथा उपदान - नगर पालिकाओं एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं को जलापूर्ति, नालियों की व्यवस्था, गन्दी बस्तियों की सफाई आदि कार्यों के लिए ऋण एवं उपादान प्राप्त करने होते हैं।
(c) अन्य साधन - स्थानीय संस्थाओं को प्राप्त होने वाली आय के अन्य साधनों में निम्नलिखित को सम्मिलित करते हैं
1. विनियोग से आय,
2. चिकित्सालयों से प्राप्त आय,
3. भूमि का लगान एवं मकानों के किराये की आय,
4. भूमि एवं भूमि की उपज से आय,
5. शिक्षण संस्थाओं से आय,
6. बाजारों से प्राप्त आर्य आदि ।
In simple words: स्थानीय निकायों की आय के मुख्य स्रोत कर और गैर-कर होते हैं। करों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर शामिल हैं, जबकि गैर-कर स्रोतों में अनुदान, ऋण, उपादान और अन्य विविध आय शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में स्थानीय निकायों की आय के विभिन्न स्रोतों को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है, जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के प्रकारों का स्पष्ट उल्लेख करना और गैर-कर स्रोतों को भी सूचीबद्ध करना शामिल है।
Question 2. जिला परिषदों (जिला पंचायतों) की आय के स्रोतों और व्यय की प्रधान मदों की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए। या जिला परिषद् की आय के प्रमुख स्रोतों को समझाइए ।
Answer: जिला परिषदों (जिला पंचायतों) की आय के प्रमुख स्रोत
1. हैसियत एवं सम्पत्ति - कर-जिला पंचायत अपने क्षेत्र में व्यक्तियों की हैसियत एवं सम्पत्ति पर अथवा उद्योगों व व्यापार पर कर लगाती है। इससे जिला परिषद् को आय प्राप्त होती है। इस कर की प्रकृति प्रगतिशील होती है, अर्थात् अमीर व्यक्तियों पर यह कर ऊँची दर से लगाया जाता है।
2. भूमि पर उपकर - यह जिला पंचायत की आय का प्रमुख स्रोत है। इस मद से सम्पूर्ण आय का लगभग 70% भाग प्राप्त होता है। इस कर को लगान के साथ राज्य सरकारें वसूल करती हैं और वह इसे जिला परिषद् में वितरित कर देती हैं। उत्तर प्रदेश में यह कर राज्य सरकार लगान के साथ ही वसूल करती है तथा जिला पंचायतों को प्रतिकारी अनुदान (Compensatory grant) प्रदान करती है।
3. मार्ग शुल्क - जिला पंचायत अपने क्षेत्र में नदियों के पुल, घाट, सड़क आदि पर कर लेती है। जो व्यक्ति अपने पशु अथवा वाहन इन पुलों, सड़कों या घाट से लाते व ले जाते हैं, उन्हें यह मार्ग शुल्क देना पड़ता है।
4. काँजी हाउस से आय - आवारा घूमने वाले पशुओं को कॉजी हाउस में बन्द कर दिया जाता है। जब उनके मालिक उन्हें छुड़ाने आते हैं तो उनसे जुर्माना प्राप्त किया जाता है। इस मद से भी जिला पंचायत को आय प्राप्त होती है।
5. मेलों, प्रदर्शनियों व बाजारों से आय - जिला पंचायतों के क्षेत्र में जिन प्रमुख मेलों व प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाता है, उसका प्रबन्ध जिला पंचायत को करना पड़ता है। इनके आयोजन से जो आय प्राप्त होती है वह जिला पंचायत की आय है; उदाहरण के लिए-मुजफ्फरनगर में शुक्रताल, गढ़मुक्तेश्वर में गंगास्नान मेला आदि। इनसे प्राप्त होने वाली आय जिला पंचायतों को प्राप्त होती है।
6. किराया व शुल्क - जिला पंचायत के भूमि, मकानों, दुकानों, डाक-बंगलों आदि के किराये से आय प्राप्त होती है। स्कूलों में अस्पतालों से कुछ शुल्क भी आय के रूप में मिलता है।
7. राज्य सरकारों से प्राप्त अनुदान - राज्य सरकार जिला पंचायतों को अनुदान के रूप में आर्थिक सहायता प्रदान करती है। राज्य सरकारें यह अनुदान उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा आदि के विकास के लिए देती हैं। जिला पंचायतों की आय की यह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण मद है।
8. अनुज्ञा-पत्र शुल्क - जिला परिषद् कसाइयों से, गोश्त की दुकानों से, वनस्पति घी की दुकानों से, आटे की चक्की के रूप में आय प्राप्त करती है।
9. कृषि उपकरणों की बिक्री से आय - जिला पंचायत खाद, बीज, कृषि यन्त्र आदि की बिक्री की भी व्यवस्था करती है। इनकी बिक्री से भी लाभ के रूप में कुछ आय प्राप्त होती है।
जिला पंचायतों की व्यय की प्रमुख मदें जिला पंचायत की व्यय की मदें निम्नलिखित हैं
1. शिक्षा पर व्यय - जिला पंचायत सबसे अधिक व्यय शिक्षा पर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का प्रचार व प्रसार का उत्तरदायित्व जिला पंचायतों पर है। इसके लिए जिला पंचायत गाँवों में प्राइमरी स्कूल तथा जूनियर हाईस्कूल खोलती है। गाँवों में वाचनालय एवं पुस्तकालयों की भी व्यवस्था करती है।
2. सामान्य प्रशासन एवं करों की प्राप्ति पर व्यय - जिला पंचायत को अपने कार्यालय में कर्मचारियों के वेतन तथा करों की वसूली पर भी व्यय करना पड़ता है।
3. सार्वजनिक स्वास्थ्य - जिला पंचायतें ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल एवं जच्चा-बच्चा गृहों की व्यवस्था करती हैं। ये गाँवों में हैजा, चेचक, प्लेग आदि संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए टीके लगवाने की व्यवस्था करती हैं।
4. सार्वजनिक निर्माण कार्य - जिला पंचायत अपने क्षेत्र में सड़कें बनवाना, वृक्ष लगवाना, पुलों को निर्माण एवं मरम्मत की व्यवस्था करती है। इन कार्यों पर जिला पंचायत को पर्याप्त व्यय करना पड़ता है।
5. मेले तथा प्रदर्शनी पर व्यय - जिला पंचायत को जिले में लगने वाले मेलों तथा प्रदर्शनियों की व्यवस्था पर भी व्यय करना पड़ता है।
6. पंचायतों की आर्थिक सहायता - जिला पंचायत, ग्राम पंचायतों तथा क्षेत्रीय समितियों के कार्यों का निरीक्षण करती है तथा अनुदान के रूप में ग्राम पंचायतों को आर्थिक सहायता भी देती है।
7. ऋण पर ब्याज - जिला पंचायत कभी-कभी जिले के आर्थिक विकास के लिए ऋण भी ले लेती है। इन ऋणों पर उसे ब्याज देना पड़ता है।
8. अन्य मदें - जिला पंचायतें दीन-दुःखियों तथा अपाहिजों की सहायता करती हैं, जन्म-मृत्यु का विवरण रखती हैं, कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करती हैं तथा पशुओं आदि की बीमारी से रोकथाम की व्यवस्था करती हैं। इन सब कार्यों के लिए जिला पंचायते पर्याप्त धन व्यय करती हैं।
In simple words: जिला परिषदों की आय मुख्यतः हैसियत कर, भूमि उपकर, मार्ग शुल्क, काँजी हाउस, मेलों से आय, किराया, राज्य अनुदान और विभिन्न शुल्कों से होती है। उनके व्यय में शिक्षा, प्रशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, निर्माण कार्य और मेलों के आयोजन जैसी मदें शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: जिला परिषदों की आय और व्यय की मदों को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करके विस्तार से समझाएं, यह सुनिश्चित करते हुए कि प्रत्येक मद का उद्देश्य और प्रकृति स्पष्ट हो।
लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
Question 1. अपने राज्य की नगर महापालिकाओं की आय के स्रोतों की व्याख्या कीजिए। या नगर महापालिकाओं की आय की प्रमुख मदें (मुख्य स्रोत) लिखिए।
Answer: नगर महापालिकाओं की आय के प्रमुख स्रोत (प्रमुख मदें) नगर महापालिकाओं की आय के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं
1. सम्पत्ति-कर - यह नगर महापालिकाओं की आय का एक प्रमुख स्रोत है। यह कर नगर महापालिकाओं की सीमा में स्थित भूमि, मकान तथा सम्पत्तियों के स्वामियो पर लगाया जाता है। यह दो प्रकार का होता हैं
- गृह कर - भवन कर नगर महापालिका की आय का एक प्रमुख स्रोत है। यह कर नगर महापालिकाओं की सीमा में स्थित भूमि, मकान तथा सम्पत्तियों से वसूल किया जाता है।
- विकास कर - नगर महापालिकाओं द्वारा जब किसी क्षेत्र में विकास; जैसे-सड़कों का निर्माण, पुलों का निर्माण आदि किया जाता है तो नगर महापालिका कर वसूल करती है। इसे विकास कर कहते हैं।
3. चुंगी कर - चुंगी कर के द्वारा नगर महापालिकाओं को पर्याप्त आय होती है। चुंगी उन वस्तुओं पर लगायी जाती है जिनका नगर महापालिकाओं के क्षेत्र में आयात होता है अर्थात् जो वस्तुएँ नगर की सीमा से बाहर के क्षेत्रों से नगर की सीमा में आती हैं। उत्तर प्रदेश में अब यह कर बन्द कर दिया गया है।
4. सीमा कर - यह कर उन वस्तुओं पर लगाया जाता है जो रेल द्वारा नगर महापालिका के क्षेत्र में आती हैं।।
5. मार्ग कर - यह कर नगर महापालिकाओं की सीमा में पड़ने वाले पुलों, सड़कों, नदियों पर से गुजरने वाले व्यक्तियों, पशुओं तथा वाहनों पर उनके भार अथवा संख्या के आधार पर लगाया जाता है।
6. यात्री कर - यह कर तीर्थस्थानों की नगर महापालिकाओं या नगर पालिकाओं द्वारा लगाया जाता है। नगर महापालिकाएँ बाहर से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यय स्वास्थ्य, सफाई व जलापूर्ति पर करती हैं। इस कारण वे यह कर वसूल करती हैं। अब इस कर को केन्द्रीय सरकार ने अपने हाथ में ले लिया है।
7. तहबाजारी - यह कर अस्थायी दुकानदारों से वसूल किया जाता है। जो दुकानदार सड़क की पटरियों पर रखकर सामान बेचते हैं; जैसे-खोमचे वाले, फेरी वाले, हॉकर्स आदि; इनसे यह कर प्रतिदिन वसूल किया जाता है।
8. वाहन कर या लाइसेंस से आय - नगर महापालिकाएँ मोटरों, ऊँटगाड़ियों, बैलगाड़ियो. घोड़े-ताँगों, ठेलों, रिक्शा आदि पर कर लगाती हैं तथा उन्हें लाइसेंस प्रदान करती हैं।
9. राज्य सरकार से अनुदान - राज्य सरकार नगर महापालिकाओं को उनके व्यय की पूर्ति हेतु अनुदान देती है।
In simple words: नगर महापालिकाओं को सम्पत्ति कर (गृह कर, विकास कर), जल कर, चुंगी कर, सीमा कर, मार्ग कर, यात्री कर, तहबाजारी, वाहन कर और राज्य सरकारों से अनुदान के माध्यम से आय प्राप्त होती है।
🎯 Exam Tip: नगर महापालिकाओं के आय स्रोतों की सूची बनाते समय, प्रत्येक कर या शुल्क का संक्षिप्त विवरण दें ताकि उसकी प्रासंगिकता स्पष्ट हो सके।
Question 2. नगर महापालिकाओं की व्यय की मदों को लिखिए।
Answer: नगर महापालिकाओं के व्यय की मदें।
1. प्रशासन और कर-संग्रह पर व्यय - नगर महापालिकाओं को अपने प्रशासन हेतु कार्यालय व्यवस्था करनी होती है। अतः कार्यालयों के कर्मचारियों के वेतन तथा सामग्री पर व्यय करना पड़ता है। करों को वसूल करने में भी आय का पर्याप्त भाग व्यय होता है।
2. सार्वजनिक सुरक्षा पर व्यय - नगर महापालिकाएँ सार्वजनिक सुरक्षा की दृष्टि से आग बुझाने के लिए दमकलें रखती हैं, सड़कों के चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस के उड़े होने के लिए चबूतरे बनवाती हैं तथा सार्वजनिक स्थानों पर बिजली व रोशनी का प्रबन्ध करती हैं। इन मदों पर भी प्रतिवर्ष काफी व्यय होता है।
3. सार्वजनिक स्वास्थ्य व चिकित्सा - नगर महापालिकाएँ निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था प्रदान करती हैं। चेचक, हैजा, प्लेग आदि रोगों की रोकथाम के लिए टीके लगवाती हैं, नगर की सफाई की व्यवस्था करती हैं तथा बाजार में बिकने वाली अशुद्ध वस्तुओं पर रोक लगाती हैं। इन सब कार्यों को पूरा करने के लिए नगर महापालिकाओं का पर्याप्त धन व्यय होता है।
4. शिक्षा पर व्यय - नगर महापालिकाएँ अपने क्षेत्र में प्राइमरी शिक्षा की व्यवस्था करती हैं। कुछ नगर महापालिकाएँ जू० हा० स्कूल, हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट कॉलेज भी चलाती हैं। इस मद पर भी नगर महापालिकाएँ धन व्यय करती हैं।
5. सार्वजनिक निर्माण कार्य - नगर महापालिकाओं को उद्योगों व पार्कों की व्यवस्था करनी पड़ती है। खेल के मैदान एवं व्यायामशालाओं आदि का निर्माण भी करना पड़ता है तथा अपने क्षेत्र में टूटी-फूटी सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत भी करानी पड़ती है। इन सभी कार्यों को सम्पादित करने में प्रतिवर्ष पर्याप्त धन व्यय करना पड़ता है।
6. पेयजल की व्यवस्था पर व्यय - नगर महापालिकाओं का एक प्रमुख कर्तव्य अपने क्षेत्र के नागरिकों को पीने के लिए शुद्ध जल की व्यवस्था करना है। इस कार्य के लिए नगर महापालिकाएँ नलकूपों का निर्माण कराकर टंकियों के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था करती हैं। सार्वजनिक स्थानों पर नल भी लगवाती हैं। इस मद पर भी धन व्यय करना पड़ता है।
In simple words: नगर महापालिकाओं के प्रमुख व्यय प्रशासन, कर-संग्रह, सार्वजनिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक निर्माण कार्य और पेयजल की व्यवस्था पर होते हैं।
🎯 Exam Tip: नगर महापालिकाओं की व्यय की मदों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक मद के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों का उल्लेख करें, जैसे शिक्षा में स्कूल चलाना या स्वास्थ्य में टीके लगवाना।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. स्थानीय संस्थाओं की व्यय की मदों का उल्लेख कीजिए।
Answer: स्थानीय संस्थाओं की व्यय की मदें निम्नलिखित हैं
1. चिकित्सा व स्वास्थ्य - इस कार्य में अस्पताल, दवा, डॉक्टर आदि का व्यय सम्मिलित होता है।
2. परिवहन - स्थानीय संस्थाओं को परिवहन पर भी पर्याप्त व्यय करना पड़ता है। सड़कों के निर्माण पर अधिक व्यय किया जाता है।
3. शिक्षा - माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा की मुफ्त व्यवस्था की गयी है।
4. नागरिक सेवाएँ - इसमें सफाई, जन स्वास्थ्य, प्रकाश, विद्यालयों की देख-रेख व जल की व्यवस्था सम्मिलित की जाती है।
5. कल्याण कार्य - समाज कल्याण कार्यों को इसमें सम्मिलित किया जाता है; जैसे - मनोरंजन व्यय, कल्याण केन्द्र, विश्राम-गृह आदि ।।
6. विकास कार्य - कृषि, परिवहन, उद्योग, सिंचाई आदि के विकास पर आवश्यक धन व्यय करना होता है।
In simple words: स्थानीय संस्थाओं के मुख्य व्यय चिकित्सा, परिवहन, शिक्षा, नागरिक सेवाओं (सफाई, प्रकाश), कल्याण कार्यों और विकास गतिविधियों पर होते हैं।
🎯 Exam Tip: स्थानीय संस्थाओं के व्यय की मदों को बताते हुए, यह ध्यान रखें कि ये व्यय स्थानीय जनता के कल्याण और आधारभूत सुविधाओं से संबंधित होते हैं।
निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. राज्यों की आय के दो कर-स्रोतों के नाम लिखिए ।
Answer: (1) भू-राजस्व या मालगुजारी तथा (2) विद्युत कर ।
In simple words: राज्यों के आय के दो प्रमुख कर-स्रोत भू-राजस्व/मालगुजारी और विद्युत कर हैं, जो सरकार को राजस्व प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: निश्चित उत्तरीय प्रश्नों के लिए, सटीक और संक्षिप्त उत्तर देना महत्वपूर्ण है, जिसमें केवल मांगी गई जानकारी शामिल हो।
Question 2. जिला परिषद् की आय के दो साधन बताइए ।
Answer: (1) हैसियत या सम्पत्ति कर तथा (2) राज्य सरकार से अनुदान ।
In simple words: जिला परिषदों की आय के दो मुख्य साधन हैसियत या सम्पत्ति कर और राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान हैं।
🎯 Exam Tip: जिला परिषद् के आय स्रोतों को सीधे और स्पष्ट रूप से पहचानें, जैसे कि कर और अनुदान।
Question 3. इस प्रदेश की जिला परिषद् की व्यय की दो प्रमुख मदों को लिखिए।
Answer: (1) शिक्षा पर व्यय तथा (2) करों की प्राप्ति पर व्यय ।
In simple words: जिला परिषद् के व्यय की दो प्रमुख मदें शिक्षा पर व्यय और करों की प्राप्ति पर होने वाला व्यय हैं।
🎯 Exam Tip: जिला परिषद् के व्यय की मदों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें, जो उनके प्राथमिक खर्चों को दर्शाते हैं।
Question 4. नगर महापालिकाओं की आय के दो साधन लिखिए।
Answer: (1) सम्पत्ति-कर या गृहकर तथा (2) जल-कर ।
In simple words: नगर महापालिकाओं की आय के दो मुख्य साधन सम्पत्ति-कर (गृहकर) और जल-कर हैं, जिनसे उन्हें राजस्व मिलता है।
🎯 Exam Tip: नगर महापालिकाओं के आय स्रोतों को पहचानते समय, दो सबसे महत्वपूर्ण और सामान्य स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 5. नगर महापालिकाओं की व्यय की दो प्रमुख मदों को लिखिए।
Answer: (1) शिक्षा तथा (2) सार्वजनिक स्वास्थ्य व चिकित्सा ।
In simple words: नगर महापालिकाओं की व्यय की दो प्रमुख मदें शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य व चिकित्सा हैं, जो उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों को दर्शाती हैं।
🎯 Exam Tip: नगर महापालिकाओं के व्यय की प्रमुख मदों को सूचीबद्ध करते हुए, यह स्पष्ट करें कि ये व्यय जनता की बुनियादी सेवाओं से संबंधित हैं।
Question 6. उत्तर प्रदेश के नगर निगमों के नगरों के नाम लिखिए।
Answer: (1) कानपुर, (2) आगरा, (3) वाराणसी, (4) इलाहाबाद, (5) लखनऊ, (6) मेरठ, (7) बरेली, (8) गोरखपुर, झॉसी, मथुरा, सहारनपुर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़ ।।
In simple words: उत्तर प्रदेश के कुछ प्रमुख नगर निगम कानपुर, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ, मेरठ, बरेली, गोरखपुर, झाँसी, मथुरा, सहारनपुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, पूछे गए राज्यों के नगर निगमों के नाम सूचीबद्ध करना सीधा और तथ्यात्मक उत्तर होता है।
Question 7. स्थानीय निकाय की आय का एक स्रोत लिखिए।
Answer: गृह-कर ।
In simple words: स्थानीय निकाय की आय का एक स्रोत गृह-कर है, जो घरों पर लगाया जाता है।
🎯 Exam Tip: स्थानीय निकाय के आय स्रोत को स्पष्ट रूप से बताएं, जैसे कि गृह-कर, जो उनकी आय का एक सामान्य माध्यम है।
Question 8. स्थानीय निकाय की व्यय की दो मदों के नाम लिखिए।
Answer: (1) शिक्षा, (2) सार्वजनिक स्वास्थ्य व चिकित्सा ।
In simple words: स्थानीय निकाय की व्यय की दो मुख्य मदें शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य व चिकित्सा हैं, जो उनकी प्राथमिक सेवाएँ हैं।
🎯 Exam Tip: स्थानीय निकाय के व्यय की मदों को बताते हुए, उनके समुदाय-केंद्रित सेवाओं पर जोर दें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. नगर निगम के मुख्य पदाधिकारी को कहते हैं (क) जिलाधीश (ख) नगर-प्रमुख (ग) स्वास्थ्य अधिकारी (घ) पुलिस अधीक्षक
Answer: (ख) नगर-प्रमुख ।
In simple words: नगर निगम के मुख्य पदाधिकारी को नगर-प्रमुख कहते हैं, जो शहर के प्रशासन का मुखिया होता है।
🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सही विकल्प की पहचान करें और सुनिश्चित करें कि उत्तर स्पष्ट रूप से चयनित विकल्प और उसके पूर्ण पाठ को दर्शाता है।
Question 2. जिला पंचायत एक संस्था है (क) स्थायी (ख) अस्थायी (ग) स्थायी एवं अस्थायी दोनों (घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) स्थायी ।
In simple words: जिला पंचायत एक स्थायी संस्था है, जिसका अर्थ है कि यह एक नियमित और निरंतर संचालित होने वाली इकाई है।
🎯 Exam Tip: जिला पंचायत की प्रकृति को स्थायी संस्था के रूप में समझें, जो उसकी निरंतरता और विधायी स्थिति को दर्शाता है।
Question 3. स्थानीय निकायों को अनुदान दिये जाते हैं (क) राज्य सरकार द्वारा (ख) केन्द्रीय सरकार द्वारा (ग) केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा (घ) इनमें से किसी के द्वारा नहीं।
Answer: (क) राज्य सरकार द्वारा।
In simple words: स्थानीय निकायों को राज्य सरकार द्वारा अनुदान दिए जाते हैं, जिससे उन्हें अपने कार्यों को पूरा करने में वित्तीय सहायता मिलती है।
🎯 Exam Tip: स्थानीय निकायों को प्राप्त होने वाले अनुदान के स्रोत को पहचानें, जो कि राज्य सरकार है।
Question 4. निम्नलिखित में से कौन-सा कर स्थानीय निकायों द्वारा लगाया जाता है? (क) गृह-कर (ख) बिक्री-कर (ग) भू-राजस्व (घ) आय-कर
Answer: (क) गृह-कर ।
In simple words: गृह-कर स्थानीय निकायों द्वारा लगाया जाने वाला एक कर है, जो उनके राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है।
🎯 Exam Tip: स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले विशिष्ट करों को पहचानें, जैसे कि गृह-कर।
Question 5. कौन-सी सरकार गृह कर लगाती है? (क) केन्द्र सरकार (ख) राज्य सरकार (ग) स्थानीय सरकार (घ) येसभी
Answer: (ग) स्थानीय सरकार।
In simple words: गृह-कर स्थानीय सरकार द्वारा लगाया जाता है, क्योंकि यह स्थानीय निकायों की आय का एक मुख्य स्रोत है।
🎯 Exam Tip: गृह-कर लगाने वाली सरकार के स्तर को स्पष्ट रूप से पहचानें, जो कि स्थानीय सरकार है।
Free study material for Economics
Economics Class 12 Curriculum Solutions: Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें
Accessing Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें Solutions
Access structured UP Board textbook solutions for Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 12 Economics, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.
Concept-Driven Answers for Class 12 Economics
Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 12 Economics module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for UP Board exams.
Maximizing Study Efficiency
These resources act as an effective roadmap for daily homework tasks and independent study. Supplement your review of Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें with official sample papers and interactive practice tests available on our platform free of charge.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Economics are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Economics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Economics. You can access UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 17 स्थानीय शासी निकाय की आय के स्रोत और व्यय की मदें in printable PDF format for offline study on any device.