UP Board Solutions Class 12 Computer Chapter 4 Programming Avadharna

Get the most accurate UP Board Solutions for Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 12 Computer Science. Our expert-created answers for Class 12 Computer Science are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग UP Board Solutions for Class 12 Computer Science

For Class 12 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Computer Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग solutions will improve your exam performance.

Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग UP Board Solutions PDF

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. कम्प्यूटर समस्या का क्या अर्थ है? [2017]
(a) समस्या जिसे कम्प्यूटर द्वारा हल किया जा सकता है।
(b) हार्डवेयर सम्बन्धी समस्या
(c) सॉफ्टवेयर सम्बन्धी समस्या
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (a) समस्या जिसे कम्प्यूटर द्वारा हल किया जा सकता है।
In simple words: A computer problem refers to any task, calculation, or issue that can be solved using a computer system.

🎯 Exam Tip: Remember that in computer science, a "problem" specifically refers to any logical or mathematical challenge that can be processed and resolved by a computer.

 

Question 2. प्रोग्रामिंग के ‘कोडिंग’ स्टेप में वास्तव में हम करते हैं [2016]
(a) प्लानिंग
(b) डिबगिंग
(c) टेस्टिंग
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (d) इनमें से कोई नहीं
In simple words: In the coding step, we actually write the program instructions in a programming language, which is not listed in the options.

🎯 Exam Tip: Be careful with "None of the options" choices; coding is the actual process of writing code, which is distinct from planning, debugging, or testing.

 

Question 3. तैयार किए प्रोग्राम में रन-टाइम त्रुटि किस चरण में दूर की जाती है? [2014]
अथवा
किस चरण में प्रोग्राम त्रुटि सुधारी जा सकती है? [2014]

(a) प्लानिंग
(b) कोडिंग
(c) डिबगिंग
(d) टेस्टिंग
Answer: (c) डिबगिंग
In simple words: Debugging is the process of finding and fixing errors or bugs in a computer program so that it runs smoothly.

🎯 Exam Tip: Always associate the term 'debugging' with finding and correcting errors (bugs) in a program to score full marks.

 

Question 4. इस बात का निर्धारण किस चरण में होता है कि दिया गया प्रोग्राम समस्त आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है? [2013]
(a) प्लानिंग
(b) डिजाइनिंग
(c) कोडिंग
(d) टेस्टिंग
Answer: (d) टेस्टिंग
In simple words: Testing is the phase where we run the program to check if it works correctly and meets all the user's requirements.

🎯 Exam Tip: Clearly state that testing is the phase used to verify and validate that the software meets all specified requirements.

Question. किस तकनीक में प्रोग्राम प्लान में परिवर्तन आसान है? [2013]
(a) फ्लोचार्ट
(b) निर्णय तालिका
(c) स्यूडोकोड
(d) एल्गोरिथ्म
Answer: (d) एल्गोरिथ्म
In simple words: एल्गोरिथ्म में बदलाव करना सबसे आसान होता है क्योंकि यह केवल साधारण भाषा में लिखे गए चरणों का समूह होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि एल्गोरिथ्म केवल टेक्स्ट आधारित होता है, इसलिए इसमें बदलाव करना फ्लोचार्ट की तुलना में बहुत आसान होता है।

 

Question 6. प्रोग्राम प्लान की कौन-सी तकनीक इसे वास्तविक प्रोग्राम के नजदीक बनाती है? [2014]
(a) फ्लोचार्ट
(b) निर्णय तालिका
(c) स्यूडोकोड
(d) एल्गोरिथ्म
Answer: (b) निर्णय तालिका
In simple words: निर्णय तालिका प्रोग्राम के नियमों और शर्तों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिससे यह वास्तविक कोडिंग के बहुत करीब होती है।

🎯 Exam Tip: निर्णय तालिका जटिल तार्किक समस्याओं को हल करने के लिए सबसे उपयुक्त तकनीक मानी जाती है।

 

Question 7. एक प्रोग्राम में कुल तीन कण्डीशन है। उसकी निर्णय तालिका में अधिकतम नियमों की संख्या क्या होगी? [2017]
(a) 3
(b) 6
(c) 8
(d) 12
Answer: (c) 8
In simple words: यदि किसी प्रोग्राम में 3 शर्तें (conditions) हैं, तो कुल संभावित नियम \( 2^3 = 8 \) होंगे।

🎯 Exam Tip: नियमों की अधिकतम संख्या निकालने के लिए हमेशा \( 2^n \) सूत्र का उपयोग करें, जहाँ n कण्डीशन की संख्या है।

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. एल्गोरिथ्म का अर्थ समझाइए। [2006]
Answer: एल्गोरिथ्म किसी कार्य को करने के लिए एक विशेष क्रम में लिखे गए निर्देशों का समूह होता है। यह किसी भी प्रोग्रामिंग प्रक्रिया का पहला और महत्वपूर्ण चरण है।
In simple words: एल्गोरिथ्म किसी भी काम को पूरा करने के लिए क्रम से लिखे गए आसान स्टेप्स या निर्देशों को कहते हैं।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में पूरे अंक पाने के लिए परिभाषा के साथ यह जरूर लिखें कि यह एक 'क्रमबद्ध' (sequential) प्रक्रिया है।

 

Question 2. फ्लोचार्ट को परिभाषित कीजिए। [2016]
Answer: किसी भी समस्या का एल्गोरिथ्म तैयार करने के बाद उसका चित्रों के माध्यम से प्रदर्शन ही फ्लोचार्ट कहलाता है। इसके उपयोग से प्रोग्राम की रूपरेखा को समझना बहुत सरल हो जाता है।
In simple words: जब हम एल्गोरिथ्म के चरणों को चित्रों या बॉक्स के जरिए दर्शाते हैं, तो उसे फ्लोचार्ट कहते हैं।

🎯 Exam Tip: फ्लोचार्ट की परिभाषा लिखते समय 'चित्रमय प्रदर्शन' (graphical representation) शब्द का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 3. फ्लोचार्ट में प्रयुक्त चिह्नों के नाम लिखिए। [2012]
Answer: फ्लोचार्ट में प्रयोग होने वाले चिह्नों के नाम इस प्रकार हैं: टर्मिनल बॉक्स, इनपुट-आउटपुट बॉक्स, प्रोसेसिंग बॉक्स, डिसीजन बॉक्स, फ्लो लाइन्स, कनेक्टर्स लाइन आदि। ये सभी चिह्न प्रोग्राम के प्रवाह को दर्शाने में मदद करते हैं।
In simple words: फ्लोचार्ट में अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग डिब्बे (जैसे इनपुट, आउटपुट, डिसीजन बॉक्स) और उन्हें जोड़ने वाली लाइनें होती हैं।

🎯 Exam Tip: कम से कम 4-5 मुख्य बॉक्स के नाम याद रखें, जैसे टर्मिनल, इनपुट-आउटपुट और डिसीजन बॉक्स।

 

Question 4. स्यूडोकोड्स पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए। [2009] अथवा स्यूडोकोड शब्द का अर्थ समझाइए। [2008]
Answer: किसी समस्या के समाधान को अंग्रेजी भाषा में बिन्दुवार लिखना स्यूडोकोड कहलाता है। यह वास्तविक कोडिंग शुरू करने से पहले विचारों को व्यवस्थित करने का एक आसान तरीका है।
In simple words: स्यूडोकोड का मतलब है प्रोग्राम के लॉजिक को बिना किसी कोडिंग भाषा के, साधारण अंग्रेजी में स्टेप-बाय-स्टेप लिखना।

🎯 Exam Tip: स्यूडोकोड लिखते समय ध्यान रखें कि इसमें किसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के सिंटैक्स का उपयोग नहीं किया जाता है।

 

Question 5. निर्णय तालिका शब्द को समझाइए। [2012]
Answer: निर्णय तालिका में प्रोग्राम लॉजिक को एक तालिका के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। यह जटिल तार्किक परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से समझने में सहायक होती है।
In simple words: निर्णय तालिका एक ऐसी टेबल होती है जो अलग-अलग शर्तों और उनके आधार पर लिए जाने वाले फैसलों को आसानी से दिखाती है।

🎯 Exam Tip: निर्णय तालिका (Decision Table) की परिभाषा में 'तालिका के माध्यम से लॉजिक प्रदर्शन' कीवर्ड को रेखांकित करें।

 

Question 6. निर्णय तालिका के प्रारूप को ड्रा (Draw) कीजिए। [2018]
Answer: निर्णय तालिका का प्रारूप इस प्रकार है:

कण्डीशनकण्डीशन के मार्ग
एक्शनएक्शन एण्ट्री
यह प्रारूप जटिल निर्णयों को सरल और व्यवस्थित रूप में प्रदर्शित करने में मदद करता है।
In simple words: निर्णय तालिका को चार मुख्य भागों में बांटा जाता है जिसमें शर्तें (conditions) और उनके अनुसार किए जाने वाले काम (actions) लिखे होते हैं।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में निर्णय तालिका का प्रारूप बनाते समय चारों भागों (कण्डीशन, कण्डीशन के मार्ग, एक्शन, एक्शन एण्ट्री) को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न I (2 अंक)

 

Question 1. मॉड्यूलर प्रोग्राम डिजाइन तकनीक की व्याख्या कीजिए। [2014, 13]
Answer: मॉड्यूलर प्रोग्राम डिजाइन तकनीक में, एक प्रोग्राम को छोटे-छोटे मॉड्यूलों में विभाजित किया जाता है। इन छोटे मॉड्यूलों को सब–प्रोग्राम भी कहा जाता है। जब किसी प्रोग्राम में त्रुटि आती है, तो पूरे प्रोग्राम को चैक न करके केवल उस मॉड्यूल को जाँचा जाता है, जिसमें त्रुटि है तथा उसे ठीक किया जाता है। इससे प्रोग्राम को बनाने और व्यवस्थित करने में कम समय लगता है। यह बड़े और जटिल सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन को अत्यधिक सरल बना देता है।
In simple words: मॉड्यूलर प्रोग्रामिंग में एक बड़े प्रोग्राम को छोटे-छोटे टुकड़ों (मॉड्यूल्स) में बांट दिया जाता है ताकि गलतियों को ढूंढना और सुधारना आसान हो जाए।

🎯 Exam Tip: मॉड्यूलर डिजाइन के लाभ जैसे 'त्रुटि सुधारने में आसानी' और 'समय की बचत' को बुलेट पॉइंट्स में लिखें।

 

Question 2. एल्गोरिथ्म की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए। [2011] अथवा एल्गोरिथ्म का वर्णन कीजिए। [2018]
Answer: एल्गोरिथ्म किसी कार्य को करने के लिए एक विशेष क्रम में लिखे गए निर्देशों का समूह होता है। ये निर्देश इस प्रकार लिखे जाते हैं कि कोई भी व्यक्ति इन्हें आसानी से समझ सके। उदाहरण के लिए, दो संख्याओं को जोड़ने का एल्गोरिथ्म:
1. प्रारंभ (Start)
2. दो संख्याएं A और B इनपुट लें।
3. दोनों संख्याओं को जोड़ें (C = A + B)।
4. परिणाम C को प्रदर्शित करें।
5. समाप्त (Stop)
In simple words: एल्गोरिथ्म किसी समस्या को हल करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका है, जैसे चाय बनाने या दो नंबरों को जोड़ने की विधि।

🎯 Exam Tip: एल्गोरिथ्म की व्याख्या करते समय हमेशा एक सरल उदाहरण (जैसे दो संख्याओं का योग) जरूर लिखें, इससे पूरे अंक मिलते हैं।

एल्गोरिथ्म और फ्लोचार्ट (Algorithms and Flowcharts)

एल्गोरिथ्म किसी कार्य को पूरा करने के लिए क्रमानुसार निर्देशों का समूह होता है। यदि कोई यूजर उसे समझकर उसी क्रम में सही तरीके से पालन करता जाए, तो कार्य पूरा हो जाता है। एल्गोरिथ्म जोड़ने, घटाने, गुणा एवं भाग की क्रियाओं के लिए क्रमशः +, -, * एवं / चिह्नों का प्रयोग करती है।

उदाहरण: 1 से 20 तक के मध्य सभी सम संख्याओं का योग ज्ञात करने के लिए एल्गोरिथ्म:
चरण 1: प्रारम्भ (Start)
चरण 2: a तथा sum का प्रारम्भिक मान क्रमशः 2 तथा 0 लीजिए।
चरण 3: a में 2 जोड़कर sum में निर्धारित कीजिए।
चरण 4: यदि sum का मान 20 या 20 से छोटा है तो चरण 3 दोहराएँ।
चरण 5: अन्त (Stop)

 

Question 3. फ्लोचार्ट के कोई दो लाभ व दो सीमाएँ लिखिए।
Answer:
फ्लोचार्ट के लाभ:
(i) किसी प्रोग्राम के फ्लोचार्ट के माध्यम से कोई भी प्रोग्रामर उस प्रोग्राम की कोडिंग सरलता से कर सकता है।
(ii) फ्लोचार्ट में प्रोग्राम की त्रुटि ढूँढने और उसे दूर करने में सरलता होती है। फ्लोचार्ट जटिल समस्याओं को समझने में भी मदद करता है।

फ्लोचार्ट की सीमाएँ:
(i) फ्लोचार्ट तैयार करने में अधिक समय लगता है।
(ii) एक बार तैयार करने के बाद इसमें परिवर्तन करना कठिन है।
In simple words: Flowcharts make it easy to write and debug computer programs by showing steps visually, but they take a lot of time to draw and are hard to modify once completed.

🎯 Exam Tip: Write the advantages and limitations under clear, separate headings with bullet points to score full marks.

 

Question 4. छात्रों के हिन्दी, अंग्रेजी व गणित के अंक इनपुट करा के उनके पास अथवा फेल होने की जाँच करने हेतु फ्लोचार्ट बनाइए। [2010]
Answer: छात्रों के पास अथवा फेल होने की जाँच हेतु फ्लोचार्ट के मुख्य चरण और उनकी संरचना नीचे दी गई है:

  • Start (प्रारम्भ): फ्लोचार्ट की शुरुआत को दर्शाता है।
  • Input (इनपुट): तीन विषयों के अंक इनपुट करें - Hindi, Eng, Maths.
  • Process (प्रक्रिया): औसत ग्रेड की गणना करें: GRADE = (Hindi + Eng + Maths) / 3.
  • Decision (निर्णय): जाँचें कि क्या GRADE < 35 है?
    • यदि Yes (हाँ): PRINT "FAIL" (अनुत्तीर्ण दर्शाएं)
    • यदि No (नहीं): PRINT "PASS" (उत्तीर्ण दर्शाएं)
  • Stop (अन्त): फ्लोचार्ट की समाप्ति को दर्शाता है।
यह फ्लोचार्ट छात्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया को बहुत सरल और स्पष्ट बनाता है।
In simple words: This flowchart takes marks of three subjects, calculates their average, and checks if it is less than 35 to decide if the student has passed or failed.

🎯 Exam Tip: Always use standard shapes in flowcharts: ovals for Start/Stop, parallelograms for Input/Output, rectangles for processing, and diamonds for decision-making.

 

Question 5. दी गई तीन संख्याओं का योग निकालने के लिए फ्लोचार्ट बनाइए। [2018]
Answer: तीन संख्याओं का योग निकालने के लिए फ्लोचार्ट के मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:

  • Start (प्रारम्भ): फ्लोचार्ट शुरू करें।
  • Input (इनपुट): तीन संख्याएँ A, B और C इनपुट करें।
  • Process (प्रक्रिया): तीनों संख्याओं को जोड़ें: Sum = A + B + C.
  • Output (आउटपुट): योगफल (Sum) को प्रिंट करें।
  • Stop (अन्त): फ्लोचार्ट समाप्त करें।
यह सरल फ्लोचार्ट किसी भी तीन संख्याओं को जोड़ने की तार्किक प्रक्रिया को दर्शाता है।
In simple words: To find the sum of three numbers, we start the process, take three numbers as input, add them together, print the result, and then stop.

🎯 Exam Tip: Clearly label the input variables (like A, B, C) and the final output variable (like Sum) to make your flowchart easy to understand.

Flowchart (Sum of Three Numbers)

  • Start
  • Input A, B, C
  • Sum = A + B + C
  • Print Sum
  • Stop

 

Question 6. विभिन्न प्रोग्राम तकनीकों के गुण व दोष बताइए। [2018]
Answer: प्रोग्राम प्लानिंग तकनीकों के गुण निम्नलिखित हैं:
(i) प्रोग्राम प्लानिंग के माध्यम से प्रोग्राम की कोडिंग करना सरल होता है।
(ii) त्रुटि को ढूंढने और उसे दूर करने में सरलता होती है। यह प्रक्रिया प्रोग्राम के विकास को अधिक व्यवस्थित और त्रुटिहीन बनाती है।

प्रोग्राम प्लानिंग के दोष निम्नलिखित हैं:
(i) प्रोग्राम की प्लानिंग करने में अधिक समय लगता है।
(ii) प्रोग्रामर प्रत्येक तकनीक का उपयोग अपने अनुसार करता है, जिसे दूसरे प्रोग्रामर द्वारा समझना कठिन होता है।
In simple words: Program planning makes writing code and finding mistakes much easier. However, it takes a lot of time to plan, and different programmers might use different styles that are hard for others to understand.

🎯 Exam Tip: परीक्षा में गुण और दोष दोनों को अलग-अलग शीर्षकों के अंतर्गत बिंदुवार (bullet points) लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 7. स्यूडोकोड तकनीक की सुविधाएँ एवं कमियाँ बताइए। [2017]
Answer: स्यूडोकोड प्रोग्राम प्लानिंग तकनीक के निम्नलिखित लाभ हैं:
(i) यह फ्लोचार्ट, एल्गोरिथ्न तथा डिसीजन टेबल की तुलना में सरल माध्यम है।
(ii) इसे तैयार करने में कम समय लगता है।
(iii) स्यूडोकोड को प्रोग्राम में सरलता से परिवर्तित किया जा सकता है। यह कोडिंग प्रक्रिया को बहुत तेज और कुशल बना देता है।

स्यूडोकोड की सीमाएँ निम्नलिखित हैं:
(i) इसे लिखने का कोई नियम नहीं है। इस कारण एक प्रोग्रामर द्वारा लिखा गया स्यूडोकोड दूसरे प्रोग्रामर द्वारा सरलता से नहीं समझा जा सकता है।
(ii) एक प्रारम्भिक उपयोगकर्ता इसे सरलता से नहीं समझ सकता।
In simple words: Pseudocode is a quick and simple way to plan programs without drawing complex charts. But because there are no strict rules for writing it, it can be confusing for beginners and other programmers to read.

🎯 Exam Tip: स्यूडोकोड के लाभ और सीमाओं को लिखते समय 'सरलता' और 'नियमों का अभाव' जैसे मुख्य शब्दों को रेखांकित (underline) करें।

लघु उत्तरीय प्रश्न II (3 अंक)

 

Question 1. यदि आरम्भ में 3 व 5 अंक हों, तो 10 फिबोनेकी (Fibonacci) अंकों को लिखने के लिए फ्लोचार्ट बनाइए। [2004]
Answer: फिबोनेकी अंकों का फ्लोचार्ट बनाने के चरण निम्नलिखित हैं:
(i) Start (प्रारंभ करें)
(ii) मान घोषित करें: A = 3, B = 5, Count = 2
(iii) A और B को प्रिंट करें
(iv) जब तक Count < 10 है, तब तक निम्नलिखित प्रक्रिया दोहराएं:
- Next_Term = A + B
- Next_Term को प्रिंट करें
- A = B सेट करें
- B = Next_Term सेट करें
- Count = Count + 1 करें
(v) Stop (समाप्त करें)
यह श्रृंखला गणितीय गणनाओं और तार्किक सोच को मजबूत करने में बहुत सहायक होती है।
In simple words: To write a flowchart for 10 Fibonacci numbers starting with 3 and 5, we start with these two numbers, add them to get the next number, and repeat this process 8 more times to get a total of 10 numbers.

🎯 Exam Tip: फ्लोचार्ट बनाते समय सभी मानक प्रतीकों (जैसे ओवल, पैरेललोग्राम, रेक्टेंगल) का सही उपयोग करें और तीरों (arrows) की दिशा स्पष्ट रखें।

Question 1. दिए गए फ्लोचार्ट का विश्लेषण कीजिए।
Answer: चित्र में दर्शाए गए फ्लोचार्ट का चरण-दर-चरण विवरण निम्नलिखित है, जो यह दर्शाता है कि प्रोग्राम किस प्रकार क्रमिक रूप से मानों को परिवर्तित करता है:
Start (प्रारंभ)
x = 3, y = 5, count = 0, num = 10, z (चरों का प्रारंभिक मान निर्धारित करना)
Is count < num? (शर्त की जाँच)
    - यदि No (नहीं): Stop (प्रोग्राम समाप्त)
    - यदि Yes (हाँ): निम्नलिखित प्रक्रियाएँ करें:
        1. z = x + y
        2. Print z
        3. x = y
        4. y = z
        5. count = count + 1 (इसके बाद पुनः शर्त की जाँच पर जाएँ)
In simple words: This flowchart runs a loop 10 times. In each step, it adds two numbers, prints the result, updates the numbers, and increases the count until the count reaches 10.

🎯 Exam Tip: लूप वाले फ्लोचार्ट में 'Yes' और 'No' की दिशाओं को स्पष्ट रूप से तीर (arrows) द्वारा दर्शाना आवश्यक है ताकि लूप का प्रवाह स्पष्ट रहे।

 

Question 2. 0 से 20 के मध्य आने वाली सभी सम संख्याओं को जोड़ने तथा अन्त में योगफल प्रिण्ट कराने हेतु फ्लोचार्ट बनाइए। [2007]
Answer: 0 से 20 के मध्य सम संख्याओं के योगफल का फ्लोचार्ट निम्नलिखित चरणों द्वारा दर्शाया गया है। यह फ्लोचार्ट कंप्यूटर को क्रमिक रूप से सम संख्याओं को जोड़ने के निर्देश देता है:
Start (प्रारंभ)
N = 0, Sum = 0 (मान सेट करना)
N = N + 2 (अगली सम संख्या प्राप्त करना)
Sum = Sum + N (योगफल में संख्या जोड़ना)
Is CN <= 20? (जाँच करें कि क्या संख्या 20 या उससे कम है?)
    - यदि Yes (हाँ): वापस N = N + 2 पर जाएँ।
    - यदि No (नहीं): आगे बढ़ें।
Print Sum (योगफल प्रदर्शित करें)
Stop (समाप्त)
In simple words: This flowchart shows how to add even numbers from 0 to 20. It starts with 0, keeps adding 2 to get the next even number, adds it to the total sum, and repeats this until it reaches 20, finally printing the total sum.

🎯 Exam Tip: Flowchart बनाते समय सही symbols (जैसे Start/Stop के लिए Oval, Process के लिए Rectangle और Decision के लिए Diamond) का उपयोग करना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 3. स्यूडोकोड का वर्णन कीजिए। [2010, 09 08, 04]
Answer: किसी समस्या के समाधान को अंग्रेजी भाषा में बिन्दुवार लिखना स्यूडोकोड कहलाता है। स्यूडोकोड प्रोग्राम की प्लानिंग करने तथा प्रोग्राम के लॉजिक को सरल भाषा में लिखने की तकनीक है, इस कोड को लिखने में किसी विशेष नियम का पालन नहीं किया जाता। प्रत्येक प्रोग्रामर अपनी सुविधा के अनुसार प्रोग्राम की प्लानिंग को शीघ्र समझने के लिए इस कोड को लिखता है। इसे प्रोग्राम डिजाइन लैंग्वेज (Program Design Language-PDL) भी कहा जाता है। इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को तीन प्रकार से लिखा जा सकता है, जो निम्नलिखित हैं। यह विधि प्रोग्रामिंग शुरू करने से पहले विचारों को व्यवस्थित करने का एक बेहतरीन साधन है।
In simple words: Pseudocode is writing the steps of a computer program in simple, everyday English before writing the actual code. It has no strict rules and helps programmers plan their logic easily.

🎯 Exam Tip: स्यूडोकोड की परिभाषा लिखते समय 'Program Design Language (PDL)' कीवर्ड का उल्लेख अवश्य करें, इससे उत्तर अधिक प्रभावशाली बनता है।

1. सिक्वेन्स लॉजिक (Sequence Logic)

इस प्रकार के लॉजिक में निर्देशों को क्रमानुसार ऊपर से नीचे की ओर लिखा जाता है। जैसे-

  • प्रोसेस 1 (Process 1)
  • प्रोसेस 2 (Process 2)
  • प्रोसेस n (Process n)

2. सिलेक्शन लॉजिक (Selection Logic)

इस लॉजिक में निर्देश का क्रियान्वयन (Execution) डिसीजन से प्राप्त सत्य तथा असत्य रिजल्ट से होता है। यदि कण्डीशन सत्य होती है तो ही निर्देश रन होता है अन्यथा अगला (Next) निर्देश क्रियान्वित होता है।

  • कण्डीशन (Condition)
    • यदि False → स्टेटमेंट 1 (Statement 1)
    • यदि True → स्टेटमेंट 2 (Statement 2)

3. इटरेशन लॉजिक (Iteration Logic)

जब एक से अधिक निर्देशों का क्रियान्वयन करना हो, तब इटरेशन लॉजिक का प्रयोग करते हैं। इसे लूपिंग भी कहते हैं। जैसे-

  • कण्डीशन (Condition)
    • यदि True → स्टेटमेंट 1 (Statement 1) → स्टेटमेंट 2 (Statement 2) → (वापस कण्डीशन पर लूप)
    • यदि False → (लूप से बाहर)

 

Question 4. डिसीजन टेबल का वर्णन कीजिए। [2009] अथवा निर्णय तालिका की उपयोगिता का वर्णन कीजिए। [2018]
Answer: डिसीजन टेबल या निर्णय तालिका तकनीक में प्रोग्राम के लॉजिक को एक तालिका के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। यह लॉजिक का ग्राफिक रूप में चित्रण करता है। इसके प्रयोग से कठिन-से-कठिन प्रोग्राम लॉजिक को प्रस्तुत किया जा सकता है। यह जटिल समस्याओं को सरल और समझने योग्य बनाने में अत्यंत सहायक है। डिसीजन टेबल के प्रारूप को चार भागों में विभाजित किया जाता है:
1. कण्डीशन: यह डिसीजन टेबल का पहला भाग होता है, जिसमें प्रोग्राम लॉजिक में उपस्थित शर्त (Conditions) को लिखा जाता है।
2. कण्डीशन के मार्ग: यह डिसीजन टेबल में शर्तों के दो या दो से अधिक मार्गों को दिखाता है।
In simple words: डिसीजन टेबल एक ऐसी तालिका (table) है जो प्रोग्राम के कठिन नियमों और शर्तों को आसान तरीके से समझने में मदद करती है। इसके चार मुख्य भाग होते हैं जो शर्तों और उनके परिणामों को दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए डिसीजन टेबल के चारों भागों के नाम स्पष्ट रूप से लिखें और इसकी उपयोगिता को बिंदुओं में समझाएं।

3. एक्शन यह भाग डिसीजन टेबल के पहले भाग के नीचे होता है, इसमें प्रोग्राम प्लान में लिए जाने वाले सभी एक्शन पंक्तिबद्ध (Rowwise) होते हैं।
4. एक्शन एण्ट्री इस भाग में अनेक कॉलम्स तथा पंक्तियाँ होती हैं, जो एक्शन के कॉलम के बराबर होती हैं।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

 

Question 1. प्रोग्राम प्लानिंग के चरण के प्रमुख उद्देश्य बताइए। प्रोग्रामिंग के विभिन्न चरणों का उदाहरण देकर वर्णन कीजिए। [2007]
अथवा
प्रोग्रामिंग के विभिन्न चरणों का उदाहरण देकर वर्णन कीजिए। [2007]
अथवा
प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में हुए विकास का वर्णन कीजिए। [2018]

Answer: कम्प्यूटर के लिए प्रोग्राम लिखना एक कला है। किसी कार्य के लिए प्रोग्राम लिखने से पहले पूरी योजना बनानी पड़ती है। प्रोग्राम प्लानिंग को प्रोग्राम विकास प्रक्रिया चक्र भी कहते हैं। इस विकास प्रक्रिया में विभिन्न चरण होते हैं, प्रत्येक चरण (Step) का अनुसरण करते हुए प्रोग्राम को बनाया जाता है। यह व्यवस्थित प्रक्रिया प्रोग्राम को त्रुटिहीन और कुशल बनाने में मदद करती है।

प्रोग्रामिंग के चरण:
कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के चरणों का विवरण इस प्रकार है:

(i) समस्या को समझना: कम्प्यूटर द्वारा हल हो सकने वाली समस्याओं को कम्प्यूटर समस्याएँ कहा जाता है। इस चरण में प्रोग्रामर द्वारा क्लाइंट से बातचीत करने के उपरान्त प्रोग्राम की सभी आवश्यकताओं को ज्ञात किया जाता है; जैसे प्रोग्राम के इनपुट-आउटपुट, उनकी प्रोसेसिंग का तरीका एवं रिस्पॉन्स टाइम आदि।

(ii) समस्या के समाधान का मॉडल बनाना: समस्या के समाधान को समझने के बाद उसका मॉडल तैयार किया जाता है। जब प्रोग्राम का प्रारूप/मॉडल बन जाता है, तो प्रोग्रामर उसी का अनुसरण करता है। उसके लिए एल्गोरिथ्म, फ्लोचार्ट एवं स्यूडोकोड आदि के रूप में प्रारूप तैयार किया जाता है। जैसे दो अंकों की गुणा ज्ञात करने के लिए एल्गोरिथ्म के निम्न चरण होंगे:
चरण 1: दो वैरिएबल्स M, N के प्रारम्भिक मान सेट कीजिए।
चरण 2: M, N का इनपुट ग्रहण कीजिए।
चरण 3: M * N
चरण 4: गुणा प्रिंट कीजिए।

(iii) प्रोग्राम को डिजाइन करना: प्रोग्राम को प्रारूप के आधार पर डिजाइन किया जाता है। एक प्रोग्राम को डिजाइन करने की विभिन्न तकनीक प्रचलन में हैं, इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

  • मॉड्यूलर डिजाइन तकनीक: इस तकनीक में प्रोग्राम को छोटे मॉड्यूल्स में बाँटकर डिजाइनिंग की जाती है।
  • टॉप-डाउन डिजाइन तकनीक: इस तकनीक में प्रोग्राम को ऊपर से नीचे की ओर सब-टास्क में विभाजित किया जाता है।
  • बॉटम-अप डिजाइन तकनीक: यह तकनीक टॉप-डाउन डिजाइन तकनीक के विपरीत होती है। इसमें प्रोग्राम को सब-टास्क में नीचे से ऊपर की ओर विभाजित किया जाता है।

In simple words: Programming is a step-by-step process of writing instructions for a computer. It starts with understanding the problem, creating a logical plan (like a recipe), and then designing the structure of the program using different techniques.

🎯 Exam Tip: दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में एल्गोरिथ्म के चरणों (जैसे गुणा करने का उदाहरण) को स्पष्ट रूप से लिखने से पूरे अंक प्राप्त करने में मदद मिलती है।

उदाहरण: टॉप-डाउन डिजाइन तकनीक के माध्यम से प्रोग्राम की डिजाइनिंग

  • Home
    • Books
      • Chemistry
      • Story
    • Cloths
    • Toys
    • Electronics
      • ipods
      • Computer
        • Desktop
        • Laptop
        • Tablet

 

(iv) प्रोग्राम कोडिंग: प्रोग्राम की डिजाइनिंग के बाद उसे प्रोग्रामिंग भाषा के रूप में लिखा जाता है। इस प्रोसेस को प्रोग्राम कोडिंग कहते हैं। प्रोग्राम लिखने के बाद कम्पाइलर उसे कम्पाइल करता है। एक अच्छा कोड लिखने के लिए उसे त्रुटिहीन (Errorless), स्पष्ट, सरल तथा सार्वजनिक होना चाहिए।
(v) प्रोग्राम परीक्षण: इस चरण में, एक परीक्षण डाटा तैयार कर प्रोग्राम का परीक्षण किया जाता है। इसमें हम ऐसा इनपुट लेते हैं, जिसका आउटपुट हमें पहले से पता हो, जिससे हम देख सकें कि प्रोग्राम वही आउटपुट देता है या नहीं।

 

Question 2. कम्प्यूटर प्रोग्राम प्लानिंग तकनीकों का विस्तृत वर्णन कीजिए। [2017]
Answer: प्रोग्राम का प्रारूप तैयार करने के लिए विभिन्न तकनीकें प्रदान की गई हैं, जो निम्न हैं:
(i) एल्गोरिथ्म: किसी कार्य को करने के लिए एक विशेष क्रम में लिखे गए निर्देशों का समूह एल्गोरिथ्म कहलाता है। एल्गोरिथ्म में जोड़ने, घटाने, गुणा एवं भाग की क्रियाओं के लिए क्रमशः +, -, * एवं / चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। एल्गोरिथ्म में प्रत्येक निर्देश ऐसा होना चाहिए, जिसका अनुपालन एक निश्चित समय में किया जा सके। इसका पहला कथन Start तथा अन्तिम कथन Stop होना चाहिए। यह प्रोग्रामिंग की नींव को मजबूत बनाता है।
(ii) फ्लोचार्ट: किसी भी समस्या का एल्गोरिथ्म तैयार करने के बाद उसका चित्रों के माध्यम से प्रदर्शन ही फ्लोचार्ट कहलाता है। फ्लोचार्ट मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं - प्रोग्राम फ्लोचार्ट तथा सिस्टम फ्लोचार्ट। फ्लोचार्ट बनाने के लिए विभिन्न चिह्नों का प्रयोग किया जाता है; जैसे – टर्मिनल बॉक्स, इनपुट/आउटपुट बॉक्स, प्रोसेसिंग बॉक्स, डिसीजन बॉक्स, फ्लो लाइन्स, कनेक्टर्स, कमेन्ट आदि।
(iii) स्यूडोकोड: किसी समस्या के समाधान को अंग्रेजी भाषा में बिन्दुवार लिखना स्यूडोकोड कहलाता है। यह प्रोग्रामिंग लॉजिक को परिभाषित एवं उसका अनुसरण करने का एक उत्तम माध्यम है। इसमें नियमबद्ध संरचना की आवश्यकता नहीं होती। स्यूडोकोड को तीन तरीकों से लिखा जा सकता है; जैसे - सिक्वेन्स लॉजिक, सिलेक्शन लॉजिक एवं इटरेशन लॉजिक।
(iv) डिसीजन टेबल: डिसीजन टेबल में प्रोग्राम लॉजिक को टेबल या तालिका के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। डिसीजन टेबल का प्रारूप मुख्यतः चार भागों में बँटा होता है।
In simple words: Computer program planning techniques like algorithms, flowcharts, pseudocode, and decision tables help us plan and design a program step-by-step before writing the actual code. This makes programming much easier and error-free.

🎯 Exam Tip: Clearly define each of the four planning techniques with their key features and symbols to secure full marks in this long-answer question.

 

Question 3. ‘एल्गोरिथ्म’ से आप क्या समझते हैं? इसकी संरचना क्यों करते हैं? समझाइए। [2002]
Answer: एल्गोरिथ्म किसी कार्य को करने के लिए एक विशेष क्रम में लिखे गए निर्देशों का समूह होता है। यह समस्या के समाधान की क्रमबद्ध रूपरेखा देता है। इस चरण में दिए गए इनपुट से आउटपुट तक पहुंचने में सारे चरण क्रमानुसार लिखे जाते हैं। एल्गोरिथ्म की मदद से जटिल से जटिल समस्याओं को भी छोटे और सरल हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है।
In simple words: An algorithm is a step-by-step guide or set of rules to solve a problem. We write it to plan the exact steps our program needs to follow from start to finish.

🎯 Exam Tip: Always mention that an algorithm has a definite start and end point, and write the steps in a logical, chronological order.

एल्गोरिथ्म (Algorithm) लिखने के नियम

एक एल्गोरिथ्म को लिखने में निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • 1. एल्गोरिथ्म का प्रत्येक वाक्य स्पष्ट होना चाहिए।
  • 2. एल्गोरिथ्म का पहला स्टेटमेंट START तथा अन्तिम स्टेटमेंट STOP होना चाहिए।
  • 3. प्रत्येक स्टेटमेंट ऐसा होना चाहिए, जिसका एक निश्चित पालन किया जा सके।
  • 4. एक या एक से अधिक स्टेटमेंट्स को बार-बार नहीं दोहराना (Repeat) चाहिए।
  • 5. एल्गोरिथ्म के अन्त में इच्छित आउटपुट प्राप्त होना चाहिए।

एल्गोरिथ्म में जोड़ने, घटाने, गुणा एवं भाग की क्रियाओं के लिए क्रमशः \( +, -, * \) एवं \( / \) के चिह्नों का प्रयोग करते हैं।

उदाहरण: किसी वृत्त की त्रिज्या ज्ञात होने पर उसकी परिधि तथा क्षेत्रफल ज्ञात करना। यदि उसकी परिधि \( P = 2\pi r \), त्रिज्या \( r \) तथा क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 \) है, जहाँ \( \pi \) का मान लगभग \( 3.1416 \) होता है। इसके लिए एल्गोरिथ्म निम्न प्रकार से लिखा जा सकता है:

  • चरण 1: प्रारम्भ (Start)
  • चरण 2: \( r \) का मान इनपुट कीजिए।
  • चरण 3: \( P \) के लिए \( 2 \), \( 3.1416 \) तथा \( r \) की गुणा कीजिए।
  • चरण 4: \( A \) के लिए \( 3.1416 \) तथा \( r * r \) की गुणा कीजिए।
  • चरण 5: \( P \) तथा \( A \) को प्रिंट कीजिए।
  • चरण 6: अन्त (End)

 

Question 4. ‘फ्लोचार्ट’ क्या है? इसमें प्रयुक्त विभिन्न चिह्नों की व्याख्या कीजिए। साथ ही दी हुई तीन संख्याओं में सबसे बड़ी संख्या निकालने हेतु एक फ्लोचार्ट भी बनाइए।
अथवा
एक फ्लोचार्ट की क्या उपयोगिता है? इसमें प्रयोग किए जाने वाले सिम्बल्स का वर्णन कीजिए।
अथवा
फ्लोचार्ट का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

Answer: किसी भी समस्या का एल्गोरिथ्म तैयार करने के बाद उसका चित्रों के माध्यम से प्रदर्शन ही फ्लोचार्ट कहलाता है। फ्लोचार्ट में एल्गोरिथ्म के आदेशों को विशेष प्रकार की आकृतियों के रूप में दिखाया जाता है। इसमें हम उन प्रतीकों का प्रयोग करते हैं जो स्टार्ट, इनपुट, प्रोसेस, डिसीजन, कनेक्टर्स, आउटपुट, गति की दिशा एवं स्टॉप का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह प्रोग्राम की तार्किक संरचना को समझने में बहुत सहायक होता है।

अलग-अलग कथनों (Statements) के लिए अलग-अलग आकृतियाँ होती हैं तथा उन आकृतियों के भीतर उस कथन को संक्षेप में लिखा जाता है। इन आकृतिियों को उनके पालन के क्रम की दिशा में तीर (\( \downarrow \)) के चिह्नों द्वारा जोड़ दिया जाता है।

फ्लोचार्ट के मुख्य चिह्न निम्नलिखित हैं:

1. टर्मिनल बॉक्स (Terminal Box): यह प्रत्येक प्रोग्राम का पहला एवं अन्तिम प्रतीक होता है। इसे ओवल (Oval) सिम्बल से प्रदर्शित किया जाता है।
2. इनपुट/आउटपुट बॉक्स (Input/Output Box): यह बॉक्स इनपुट लेने तथा आउटपुट देने का कार्य करता है। इसे समान्तर चतुर्भुज (Parallelogram) सिम्बल से प्रदर्शित करते हैं।
3. प्रोसेसिंग बॉक्स (Processing Box): यह बॉक्स गणना, गणितीय ऑपरेशन, तार्किक ऑपरेशन या किसी अन्य प्रकार की प्रोसेसिंग करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे आयत (Rectangle) सिम्बल से दर्शाते हैं।
4. डिसीजन बॉक्स (Decision Box): इसे कण्डीशनल बॉक्स भी कहते हैं। इसका प्रयोग प्रोग्राम में निर्णय लेने के लिए किया जाता है। इसे डायमंड (Diamond) सिम्बल से दर्शाते हैं।
5. फ्लो लाइन्स (Flow Lines): ये लाइनें तीर की भाँति होती हैं, ये डाटा के फ्लो की दिशा को दर्शाती हैं।
6. कनेक्टर्स (Connectors): इस सिम्बल को प्रोग्राम की जटिलता को कम करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे वृत्त (Circle) से दर्शाते हैं।
7. कमेंट (Comment): इसका प्रयोग फ्लोचार्ट में कमेंट, रिमार्क, नोट या संक्षिप्त व्याख्या लिखने के लिए किया जाता है।
In simple words: फ्लोचार्ट किसी प्रोग्राम या एल्गोरिथ्म को चित्रों और आकृतियों के माध्यम से समझाने का एक आसान तरीका है। इसमें अलग-अलग आकृतियाँ जैसे आयत, डायमंड और तीर के निशान अलग-अलग निर्देशों को दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में फ्लोचार्ट के सभी प्रतीकों के नाम के साथ उनके चित्र (shapes) अवश्य बनाएं, इससे पूरे अंक प्राप्त करने में मदद मिलती है।

 

Question. तीन संख्याओं में सबसे बड़ी संख्या प्रिण्ट करने का फ्लोचार्ट (Flowchart to find the largest of three numbers)
Answer:
The logical flow of the flowchart is represented below:
Start
Declare variable A, B, C and read
Decision: Is A > B?
    - If True: Is A > C?
        * If True: Print A
        * If False: Print C
    - If False: Is B > C?
        * If True: Print B
        * If False: Print C
Stop
In simple words: This flowchart helps us find the biggest number among three numbers by comparing them step-by-step. First, it compares A and B, and then compares the winner with C to print the largest value.

🎯 Exam Tip: Remember to clearly label the 'True' and 'False' branches of your decision diamonds so the examiner can easily follow the logic flow.

UP Board Solutions Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग

Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Computer Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Computer Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Computer Science Class 12 Solved Papers

Using our Computer Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Computer Science are as per latest UP Board curriculum.

Are the Computer Science UP Board solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Computer Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Computer Science. You can access UP Board Solutions Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Computer Science UP Board solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Computer Science Chapter 4 अवधर्ना प्रोग्रामिंग in printable PDF format for offline study on any device.