Get the most accurate UP Board Solutions for Class 12 Civics Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 12 Civics. Our expert-created answers for Class 12 Civics are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम UP Board Solutions for Class 12 Civics
For Class 12 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Civics solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम solutions will improve your exam performance.
Class 12 Civics Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम UP Board Solutions PDF
Question 1. उन्नी-मुन्नी ने अखबार की कुछ कतरनों को बिखेर दिया है। आप इन्हें कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित करें (क) मण्डल आयोग की सिफारिशों और आरक्षण विरोधी हंगामा (ख) जनता दल का गठन (ग) बाबरी मस्जिद का विध्वंस (घ) इन्दिरा गांधी की हत्या (ङ) राजग सरकार का गठन (च) संप्रग सरकार का गठन (छ) गोधरा की दुर्घटना और उसके परिणाम।
Answer: (घ) इन्दिरा गांधी की हत्या (1984) (ख) जनता दल का गठन (1988) (क) मण्डल आयोग की सिफारिशों और आरक्षण विरोधी हंगामा (1990) (ग) बाबरी मस्जिद का विध्वंस (1992) (ङ) राजग सरकार का गठन (1999) (छ) गोधरा की दुर्घटना और उसके परिणाम (2002) (च) संप्रग सरकार का गठन (2004)। ये घटनाएँ भारतीय राजनीति की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण रहीं।
In simple words: इन घटनाओं को उनके होने वाले साल के हिसाब से पहले से बाद के क्रम में लगाया गया है, जैसे सबसे पहले 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई और सबसे आखिर में 2004 में संप्रग सरकार बनी।
🎯 Exam Tip: कालक्रम वाले प्रश्नों में घटनाओं के वर्ष याद रखना बहुत जरूरी है। उत्तर लिखते समय घटनाओं के सामने उनका वर्ष अवश्य लिखें ताकि परीक्षक को स्पष्टता रहे।
Question 2. निम्नलिखित में मेल करें-
| कॉलम अ | कॉलम ब |
|---|---|
| (क) सर्वानुमति की राजनीति | (i) शाहबानो मामला |
| (ख) जाति आधारित दल | (ii) अन्य पिछड़ा वर्ग का उभार |
| (ग) पर्सनल लॉ और लैंगिक न्याय | (iii) गठबन्धन सरकार |
| (घ) क्षेत्रीय पार्टियों की बढ़ती ताकत | (iv) आर्थिक नीतियों पर सहमति |
Answer:
| कॉलम अ | सही मिलान (कॉलम ब) |
|---|---|
| (क) सर्वानुमति की राजनीति | (iv) आर्थिक नीतियों पर सहमति |
| (ख) जाति आधारित दल | (ii) अन्य पिछड़ा वर्ग का उभार |
| (ग) पर्सनल लॉ और लैंगिक न्याय | (i) शाहबानो मामला |
| (घ) क्षेत्रीय पार्टियों की बढ़ती ताकत | (iii) गठबन्धन सरकार |
In simple words: यहाँ दी गई राजनीतिक घटनाओं और मुद्दों को उनके सही अर्थों और दलों के साथ मिलाया गया है।
🎯 Exam Tip: सही मिलान वाले प्रश्नों में उत्तर को स्पष्ट तालिका के रूप में प्रस्तुत करने से परीक्षक को जाँचने में आसानी होती है और पूरे अंक मिलते हैं।
Question 3. 1989 के बाद की अवधि में भारतीय राजनीति के मुख्य उद्देश्य क्या रहे हैं? इन मुद्दों से राजनीतिक दलों के आपसी जुड़ाव के क्या रूप सामने आए हैं?
Answer: 1989 के बाद भारतीय राजनीति के मुख्य मुद्दे – सन् 1989 के बाद भारतीय राजनीति में कई बदलाव आए जिनमें कांग्रेस का कमजोर होना, मण्डल आयोग की सिफारिशें एवं आन्दोलन, आर्थिक सुधारों को लागू करना, राजीव गांधी की हत्या तथा अयोध्या मामला प्रमुख हैं। इन स्थितियों में भारतीय राजनीति में अग्र मुद्दे प्रमुख रूप से उभरे-
1. कांग्रेस ने स्थिर सरकार का मुद्दा उठाया।
2. भाजपा ने राम मन्दिर बनाने का मुद्दा उठाया।
3. लोकदल व जनता दल ने मण्डल आयोग की सिफारिशों का मुद्दा उठाया।
इन मुद्दों ने देश की गठबंधन राजनीति को एक नया आकार दिया।
In simple words: 1989 के बाद भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव आए जैसे कांग्रेस का कमजोर होना और गठबंधन सरकारों का दौर शुरू होना। अलग-अलग पार्टियों ने राम मंदिर, मंडल आयोग और आर्थिक सुधारों जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाया।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में 1989 के बाद के मुख्य मुद्दों (जैसे मंडल आयोग, आर्थिक सुधार, अयोध्या मामला) को बिंदुवार (bullet points) लिखना अच्छे अंक दिलाने में मदद करता है।
p>Question 4. “गठबन्धन की राजनीति के इस दौर में राजनीतिक दल विचारधारा को आधार मानकर गठजोड़ नहीं करते हैं।” इस कथन के पक्ष या विपक्ष में आप कौन-कौन से तर्क देंगे?
Answer: वर्तमान युग में गठबन्धन की राजनीति का दौर चल रहा है। इस दौर में राजनीतिक दल विचारधारा को आधार बनाकर गठजोड़ नहीं कर रहे बल्कि अपने निजी स्वार्थी हितों की पूर्ति के लिए गठजोड़ करते हैं। वर्तमान समय में अधिकांश राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय हित की चिन्ता नहीं रहती, बल्कि वे सदैव इस प्रयास में रहते हैं कि किस प्रकार अपने राजनीतिक हितों को पूरा किया जाए, इसी कारण अधिकांश राजनीतिक दल विचारधारा और सिद्धान्तों के आधार पर गठजोड़ न करके स्वार्थी हितों की पूर्ति के लिए गठजोड़ करते हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में विचारधारा और व्यावहारिक हितों के बीच हमेशा एक द्वंद्व बना रहता है।
पक्ष में तर्क - गठबन्धन की राजनीति के भारत में चल रहे नए दौर में राजनीतिक दल विचारधारा को आधार मानकर गठजोड़ नहीं करते। इनके समर्थन में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं:
(1) सन् 1977 में जे०पी० नारायण के आह्वान पर जो जनता दल बना था उसमें कांग्रेस के विरोधी प्रायः सी०पी०आई० को छोड़कर अधिकांश विपक्षी दल जिनमें भारतीय जनसंघ, कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी, भारतीय क्रान्ति दल, तेलुगूदेशम, समाजवादी पार्टी, अकाली दल आदि शामिल थे। इन सभी दलों को हम एक ही विचारधारा वाले दल नहीं कह सकते।
(2) जनता दल की सरकार गिरने के बाद केन्द्र में राष्ट्रीय मोर्चा बना जिसमें एक ओर जनता पार्टी के वी०पी० सिंह तो दूसरी तरफ उन्हें समर्थन देने वाले सी०पी०एम० वामपन्थी और भाजपा जैसे तथाकथित हिन्दुत्व समर्थक गांधीवादी राष्ट्रवादी दल भी थे। कुछ महीनों बाद वी०पी० सिंह प्रधानमन्त्री नहीं रहे तो केवल सात महीनों के लिए कांग्रेस ने चन्द्रशेखर को समर्थन देकर प्रधानमन्त्री बनाया। चन्द्रशेखर वही नेता थे जिन्होंने इन्दिरा गांधी के आपातकाल के दौरान श्रीमती गांधी का विरोध किया था और श्रीमती गांधी ने चन्द्रशेखर और मोरारजी को कारावास में डाल दिया था।
(3) कांग्रेस की सरकार, सन् 1991 से सन् 1996 तक नरसिंह राव के नेतृत्व में अल्पमत होते हुए भी इसलिए चलती रही क्योंकि उसे अनेक दलों का समर्थन प्राप्त था।
(4) अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में जनतान्त्रिक गठबन्धन (एन०डी०ए०) की सरकार लगभग 6 वर्ष तक चली लेकिन उसे जहाँ एक ओर अकालियों ने तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस, बीजू पटनायक कांग्रेस, कुछ समय के लिए समता दल, जनता पार्टी आदि ने भी सहयोग और समर्थन दिया।
संक्षेप में हम कह सकते हैं कि राजनीति में किसी का कोई स्थायी शत्रु नहीं होता। अवसरवादिता हकीकत में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है।
विपक्ष में तर्क - उपर्युक्त कथन के विपक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं:
1. गठबन्धन की राजनीति के नए दौर में भी वामपन्थ के चारों दल अर्थात् सी०पी०एम०, सी०पी०आई०, फारवर्ड ब्लॉक, आर०एस० ने भारतीय जनता पार्टी से हाथ नहीं मिलाया, वे उसे अब भी राजनीतिक दृष्टि से अस्पृश्य पार्टी मानते हैं।
2. समाजवादी पार्टी, वामपन्थी मोर्चा, डी०पी०के० जैसे क्षेत्रीय दल किसी भी उस प्रत्याशी को खुला समर्थन नहीं देना चाहते जो एन०डी०ए० अथवा भाजपा का प्रत्याशी हो क्योंकि उनकी वोटों की राजनीति को ठेस पहुँचती है।
3. कांग्रेस पार्टी ने अधिकांश मोर्चों पर बीजेपी विरोधी और बीजेपी ने कांग्रेस विरोधी रुख अपनाया है.
In simple words: Political parties in India often join hands with rivals just to gain power, showing that practical benefits sometimes matter more than shared beliefs. However, some parties still refuse to ally with certain opponents due to strong ideological differences.
🎯 Exam Tip: When answering questions about political alliances, make sure to provide examples from both sides (in favor and against) to present a balanced and high-scoring argument.
Question 5. आपातकाल के बाद के दौर में भाजपा एक महत्त्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरी। इस दौर में इस पार्टी के विकास-क्रम का उल्लेख करें।
Answer: भारतीय जनता पार्टी का विकासक्रम आपातकाल के बाद भारतीय जनता पार्टी की शक्ति में निरन्तर वृद्धि हुई और एक सशक्त राजनीतिक दल के रूप में उभरी। भाजपा की इस विकास यात्रा को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है-
1. जनता पार्टी सरकार के पतन के बाद जनता पार्टी के भारतीय जनसंघ घटक ने वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया। श्री अटल बिहारी वाजपेयी इसके संस्थापक अध्यक्ष बने।
2. सन् 1984 के चुनावों में कांग्रेस के पक्ष में श्रीमती इन्दिरा गांधी की हत्या हो जाने के बाद पैदा हुई सहानुभूति की लहर में भाजपा को लोकसभा में केवल दो सीटें प्राप्त हुईं।
3. सन् 1989 के चुनावों में वी०पी० सिंह के जनमोर्चा के साथ गठनजोड़ कर भाजपा ने चुनाव में भाग लिया तथा राम मन्दिर बनवाने के नारे को उछाला। फलतः इस चुनाव में भाजपा को आशा से अधिक सफलता मिली। भाजपा ने वी०पी० सिंह को बाहर से समर्थन देकर संयुक्त मोर्चा सरकार का गठन करने में सहयोग दिया।
4. सन् 1991 के चुनाव में इसने अपनी स्थिति को लगातार मजबूत किया। इस चुनाव में राम मन्दिर निर्माण का नारा विशेष लाभदायक सिद्ध हुआ।
5. सन् 1996 के चुनावों में यह लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी लेकिन लोकसभा में स्पष्ट बहुमत का समर्थन प्राप्त नहीं कर सकी।
6. सन् 1998 के चुनावों में इसने कुछ क्षेत्रीय दलों से गठबन्धन कर सरकार बनाई तथा सन् 1999 के चुनावों में भाजपा नीत गठबन्धन ने फिर सत्ता प्राप्त की। राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन के काल में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमन्त्री बने।
7. सन् 2004 तथा सन् 2009 के चुनावों में भाजपा को पुनः अपेक्षित सफलता नहीं मिल पायी। फिर भी कांग्रेस के बाद आज यह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इस प्रकार भाजपा ने भारतीय राजनीति में अपनी एक मजबूत और स्थायी पहचान बनाई है।
In simple words: आपातकाल के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) धीरे-धीरे मजबूत हुई। 1980 में बनी यह पार्टी अलग-अलग चुनावों में गठबंधन और मुद्दों के सहारे आगे बढ़ी और देश की एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई।
🎯 Exam Tip: भाजपा के विकास-क्रम को दर्शाने के लिए वर्षवार (जैसे 1980, 1984, 1989 आदि) मुख्य घटनाओं और सीटों के बदलाव को बिंदुवार लिखें। इससे उत्तर स्पष्ट और प्रभावशाली बनता है।
Question 6. कांग्रेस के प्रभुत्व का दौर समाप्त हो गया है। इसके बावजूद देश की राजनीति पर कांग्रेस का असर लगातार कायम है। क्या आप इस बात से सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
Answer: देश की राजनीति से यद्यपि कांग्रेस का प्रभुत्व समाप्त हो गया है परन्तु अभी कांग्रेस का असर कायम है, क्योंकि अब भी भारतीय राजनीति कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूम रही है तथा सभी राजनीतिक दल अपनी नीतियां एवं योजनाएँ कांग्रेस को ध्यान में रखकर बनाते हैं। सन् 2004 के 14वें लोकसभा के चुनावों में इसने अन्य दलों के सहयोग से केन्द्र में सरकार बनाई। इसके साथ-साथ जुलाई 2007 में हुए राष्ट्रपति के चुनाव में भी इस दल की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। सन् 2009 के आम चुनावों में पहले से काफी अधिक सीटों पर जीत प्राप्त कर गठबन्धन की सरकार बनाई। अतः कहा जा सकता है कि कांग्रेस के कमजोर होने के बावजूद इसका असर भारतीय राजनीति पर कायम है। भारतीय लोकतंत्र में कांग्रेस का ऐतिहासिक योगदान आज भी इसकी प्रासंगिकता को बनाए रखता है।
In simple words: भले ही कांग्रेस पहले की तरह अकेले शासन नहीं कर रही है, लेकिन आज भी देश की राजनीति में उसका बड़ा प्रभाव है। कई दल कांग्रेस को ध्यान में रखकर अपनी नीतियां बनाते हैं और उसने गठबंधन सरकारों का नेतृत्व भी किया है।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में कांग्रेस के प्रभाव को सिद्ध करने के लिए 2004 और 2009 के चुनावों के उदाहरणों का उल्लेख अवश्य करें।
Question 7. अनेक लोग सोचते हैं कि सफल लोकतन्त्र के लिए दो-दलीय व्यवस्था जरूरी है। पिछले बीस सालों के भारतीय अनुभवों को आधार बनाकर एक लेख लिखिए और इसमें बताइए कि भारत की मौजूदा बहुदलीय व्यवस्था के क्या फायदे हैं।
Answer: कुछ लोगों का मानना है कि सफल लोकतन्त्र के लिए दो-दलीय व्यवस्था जरूरी है। इनका मानना है कि द्वि-दलीय व्यवस्था में साधारण बहुमत के दोष समाप्त हो जाते हैं, सरकार स्थायी होती हैं, भ्रष्टाचार कम फैलता है, निर्णय शीघ्रता से लिए जा सकते हैं। भारत में बहुदलीय प्रणाली है। कई विद्वानों का मत है कि भारत में बहुदलीय प्रणाली उचित ढंग से कार्य नहीं कर पा रही है। यह भारतीय लोकतन्त्र के लिए बाधा उत्पन्न कर रही है अतः भारत को द्वि-दलीय पद्धति अपनानी चाहिए परन्तु पिछले बीस वर्षों के अनुभव के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बहुदलीय प्रणाली से भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को निम्नलिखित फायदे हुए हैं- इससे समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रीय हितों को उचित प्रतिनिधित्व मिलता है, जिससे देश की एकता और अखंडता मजबूत होती है।
In simple words: कुछ लोग मानते हैं कि दो दलों वाली व्यवस्था बेहतर होती है, लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में बहुदलीय व्यवस्था अधिक फायदेमंद है। इससे हर क्षेत्र और वर्ग के लोगों को सरकार में अपनी बात रखने का मौका मिलता है।
🎯 Exam Tip: बहुदलीय व्यवस्था के फायदों को लिखते समय भारत की विविधता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के महत्व को रेखांकित करना न भूलें।
प्रश्न 8. निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें- भारत की दलगत राजनीति ने कई चुनौतियों का सामना किया है। कांग्रेस प्रणाली ने अपना खात्मा ही नहीं किया बल्कि कांग्रेस के जमावड़े के बिखर जाने से आत्म-प्रतिनिधित्व की नयी प्रवृत्ति का भी जोर बढ़ा। इससे दलगत व्यवस्था और विभिन्न हितों की समाई करने की इसकी क्षमता पर भी सवाल उठे। राज-व्यवस्था के सामने एक महत्त्वपूर्ण काम एक ऐसी दलगत व्यवस्था खड़ी करने अथवा राजनीतिक दलों को गढ़ने की है, जो कारगर तरीके से विभिन्न हितों को मुखर और एकजुट करें। -जोया हसन
(क) इस अध्याय को पढ़ने के बाद क्या आप दलगत व्यवस्था की चुनौतियों की सूची बना सकते हैं?
(ख) विभिन्न हितों का समाहार और उनमें एकजुटता का होना क्यों जरूरी है?
(ग) इस अध्याय में आपने अयोध्या विवाद के बारे में पढ़ा। इस विवाद ने भारत के राजनीतिक दलों की समाहार की क्षमता के आगे क्या चुनौती पेश की?
Answer:
(क) इस अध्याय में दलगत व्यवस्था की निम्नलिखित चुनौतियाँ उभरकर सामने आती हैं-
1. गठबन्धन की राजनीति को चलाना।
2. कांग्रेस के कमजोर होने से खाली हुए स्थान को भरना।
3. पिछड़े वर्गों की राजनीति का उभरना।
4. अयोध्या विवाद का उभरना।
5. गैर-सैद्धान्तिक राजनीतिक समझौते का होना।
6. गुजरात दंगों से साम्प्रदायिक दंगे होना।
(ख) विभिन्न हितों का समाहार और उनमें एकजुटता का होना जरूरी है, क्योंकि तभी भारत अपनी एकता और अखण्डता को बनाए रखकर विकास कर सकता है। यह देश की विविधता को संजोए रखने के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
(ग) अयोध्या विवाद ने भारत में राजनीतिक दलों के सामने साम्प्रदायिकता की चुनौती पेश की तथा भारत में साम्प्रदायिक आधार पर राजनीतिक दलों की राजनीति बढ़ गई।
In simple words: This question asks us to identify the challenges faced by India's party system. It highlights how different groups need to work together to keep the country united, and how events like the Ayodhya dispute tested the secular nature of Indian politics.
🎯 Exam Tip: Clearly label sub-parts (क), (ख), and (ग) in your answer sheet to ensure the examiner can easily grade each part of this passage-based question.
UP Board Class 12 Civics Chapter 9 InText Questions
UP Board Class 12 Civics Chapter 9 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. अगर हर सरकार एक-सी नीति पर अमल करे, तो मुझे नहीं लगता कि इससे राजनीति में कोई बदलाव आएगा।
Answer: यदि सभी सरकारें या उनसे सम्बद्ध राजनीतिक दल एक ही प्रकार की नीतियाँ अपनाएँ तो इससे राजनीतिक व्यवस्था स्थिर व जड़ हो जाएगी। लेकिन लोकतान्त्रिक व्यवस्था में इस प्रकार की नीति लागू होना सम्भव नहीं है क्योंकि लोकतान्त्रिक व्यवस्था में जनमत सर्वोपरि होता है और जनसामान्य के हित अलग-अलग होते हैं और यह हित समय और परिस्थितियों के अनुसार निरन्तर परिवर्तित भी होते रहते हैं, इसलिए प्रत्येक सरकार को जन इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सभी सरकारें एक जैसी नीति का अनुसरण नहीं कर सकतीं। लोकतंत्र में नीतियों का लचीला होना ही उसकी असली ताकत है।
In simple words: If every government followed the exact same policies, politics would become stagnant and boring. In a democracy, people's needs change over time, so governments must adapt their policies to match what the public wants.
🎯 Exam Tip: Explain both sides of the argument—why uniform policies lead to stagnation and how democracy naturally prevents this by prioritizing public opinion.
Question 2. चलो मान लिया कि भारत जैसे देश में लोकतान्त्रिक राजनीति का तकाजा ही गठबन्धन बनाना है। लेकिन क्या इसका मतलब यह निकाला जाए कि हमारे देश में हमेशा से गठबन्धन बनते चले आ रहे हैं? अथवा, राष्ट्रीय स्तर के दल एक बार फिर से अपना बुलन्द मुकाम हासिल करके दिखाएँगे?
Answer: भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में गठबन्धन का दौर हमेशा से चला आ रहा है। यह बात कुछ हद तक सही है, लेकिन इन गठबन्धनों के स्वरूप में व्यापक अन्तर है। पहले जहाँ एक ही पार्टी के भीतर गठबन्धन (जैसे—कांग्रेस पार्टी में क्रान्तिकारी और शान्तिवादी, कंजरवेटिव और रेडिकल, गरमपन्थी और नरमपन्थी, दक्षिणपन्थी और वामपन्थी आदि) होता था अब पार्टियों के बीच गठबन्धन होता है। जहाँ तक राष्ट्रीय दलों के प्रभुत्त्व का सवाल है, वर्तमान दलीय व्यवस्था के बदलते दौर में अपना बुलन्द मुकाम पाना बहुत कठिन है। क्योंकि वर्तमान में भारतीय दलीय व्यवस्था का स्वरूप बहुदलीय हो गया है, जिसमें राष्ट्रीय दलों के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों के महत्त्व को भी नकारा नहीं जा सकता। यही कारण है कि आज राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पा रहा और मिली-जुली सरकारों का निर्माण हो रहा है। भारत में नब्बे के दशक में गठबन्ध सरकारों का दौर शुरू हुआ और यह सिलसिला अभी तक जारी है। भारतीय लोकतंत्र में यह बदलाव क्षेत्रीय आकांक्षाओं को अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करता है।
In simple words: Earlier, coalitions happened within a single large party like Congress, which had different internal groups. Today, coalitions are formed between different distinct political parties because no single party gets a clear majority easily.
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकारों के बदलते स्वरूप को स्पष्ट करने के लिए 'एक दल के भीतर गठबंधन' और 'विभिन्न दलों के बीच गठबंधन' के अंतर को उदाहरण सहित समझाएं।
Question 3. मुझे इसकी चिन्ता नहीं है कि सरकार किसी एक पार्टी की है या गठबन्धन की। मसला तो यह है कि कोई सरकार काम कौन-से कर रही है। क्या गठबन्धन सरकार में ज्यादा समझौते करने पड़ते हैं? क्या गठबन्धन सरकार साहसी और कल्पनाशील नीतियाँ नहीं अपना सकती?
Answer: सरकारों का स्वरूप चाहे कैसा भी हो, चाहे वह गठबन्धन सरकार हो या एक ही दल की सरकार हो, लेकिन जो सरकार जनता की कसौटियों पर खरी उतरे वही सफल सरकार है। गठबन्धन सरकारों में विभिन्न दल आपसी समझौतों या शर्तों के आधार पर सरकार का गठन करते हैं। इन दलों के सभी के अपने-अपने हित व स्वार्थ होते हैं जिन्हें पूरा करने हेतु वे निरन्तर प्रयास करते रहते हैं। जहाँ आपसी हितों में रुकावट या टकराव आता है, वहीं दल अलग हो जाते हैं और सरकारें गिर जाती हैं। इस प्रकार गठबन्धन सरकारों में स्थिरता बहुत कम पायी जाती है और इस प्रकार की सरकारों में स्वतन्त्र निर्णय लेना सम्भव नहीं होता। इस प्रकार गठबन्धन सरकार साहसी और कल्पनाशील नीतियाँ नहीं अपना सकतीं क्योंकि उन्हें हमेशा अपने सहयोगियों को खुश रखना पड़ता है।
In simple words: Coalition governments have to make many compromises to keep all partner parties happy. Because of this constant pressure and fear of losing support, they often cannot make bold or creative decisions.
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकार की सीमाओं को दर्शाने के लिए 'अस्थिरता' और 'निर्णय लेने में देरी' जैसे मुख्य बिंदुओं को रेखांकित (underline) करें।
Question 4. क्या हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो लोग ऐसे जनसंहार की योजनाएँ बनाएँ, अमल करें और उसे समर्थन दें, वे कानून के हाथों से बच न पाएँ? ऐसे लोगों को कम-से-कम राजनीतिक रूप से तो सबक सिखाया ही जा सकता है।
Answer: भारत में धर्म, जाति व सम्प्रदाय के नाम पर अनेक बार साम्प्रदायिक दंगे हुए तथा देश की शांति और व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न भी लगा। इन साम्प्रदायिक दंगों के पीछे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न राजनीतिक दलों का हाथ रहा है। यह दल अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति हेतु दुष्प्रचार करते हैं जिससे जनसामान्य इनके बहकावे में आकर गलत कदम उठाते हैं। भारत में सन् 1984 के सिक्ख दंगे हों, सन् 1992 की अयोध्या की घटना हो या सन् 2002 में गुजरात का गोधरा काण्ड, इन सभी घटनाओं के पीछे राजनीतिक दलों की स्वार्थपूर्ण नीति रही है। इस प्रकार ये सभी घटनाएँ हमें आगाह करती हैं कि राजनीतिक उद्देश्यों के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काना खतरनाक है। इससे हमारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो सकता है, अतः यह जरूरत है कि ऐसी घटनाओं को रोका जाए। इन घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक है कि ऐसे राजनीतिक दल व उनके नेतृत्वकर्ता जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है या साम्प्रदायिक दंगों में लिप्त रहे हैं, उन पर चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने पर आजीवन प्रतिबन्ध लगा दिया जाना चाहिए। ऐसे कड़े कानून ही देश में सांप्रदायिक सद्भाव और कानून का राज स्थापित कर सकते हैं।
In simple words: To stop riots and violence, we must punish the politicians who use religion for votes. Banning leaders with criminal records from elections is a strong way to teach them a lesson and protect our democracy.
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में ऐतिहासिक उदाहरणों (जैसे 1984, 1992, 2002) का उल्लेख अवश्य करें और अंत में सुधारात्मक सुझाव (जैसे आजीवन प्रतिबंध) को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 1. वर्तमान में भारतीय दलीय व्यवस्था की उभरती प्रवृत्तियों का विवेचन कीजिए।
Answer: भारतीय दलीय व्यवस्था की उभरती प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं:
1. एक दल से साझा सरकारों की ओर-भारतीय राजनीति में सन् 1989 के बाद कांग्रेस की एक दलीय प्रभुत्व की स्थिति भी नहीं रही। 11वीं, 12वीं, 13वीं, 14वीं तथा 15वीं लोकसभा के चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। परिणामस्वरूप साझा सरकारें अस्तित्व में आईं। यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है।
2. क्षेत्रीय दलों का बढ़ता वर्चस्व-वर्तमान राजनीतिक दलीय स्थिति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ी है। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत के अभाव में सत्ता की जोड़-तोड़ में इन दलों की भूमिका बढ़ रही है।
3. निर्दलीय सदस्यों की बढ़ती भूमिका-भारत में प्रत्येक लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार बड़ी संख्या में रहे हैं। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका बढ़ जाती है।
4. दलीय प्रणाली का सत्ता केन्द्रित स्वरूप-वर्तमान समय में राजनीतिक दलों का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना रह गया है तथा उनके लिए विचारधाराएँ समस्याएँ गौण हो गई हैं।
5. भाषावाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद का प्रभाव-सत्ता प्राप्ति के लिए राजनीतिक दल भाषा, जाति एवं सम्प्रदायों का भी सहारा लेते हैं। चुनावी घोषणा-पत्र में इनका विरोध करते हैं, परन्तु दलीय प्रत्याशी खड़ा करते समय इन आधारों को महत्त्व प्रदान करते हैं।
6. दलों में आन्तरिक गुटबन्दी-भारत की दल प्रणाली का एक प्रमुख लक्षण विभिन्न दलों में आन्तरिक गुटबन्दी का होना है। सभी राजनीतिक दल इस समस्या से पीड़ित हैं। इन दलों में एक गुट तो वह होता है जो संगठन तथा सत्ता में पद प्राप्त किए हुए है और दूसरा गुट इन पदों से अलग रहने वाला असन्तुष्ट गुट होता है। भारतीय राजनीतिक दलों में व्याप्त गुटबन्दी की स्थिति भारतीय राजनीति का अभिशाप बनी हुई है।
7. राजनीतिक अपराधीकरण-राजनीतिक व्यवस्था में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। प्रायः सभी राजनीतिक दलों द्वारा आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को चुनावों में खड़ा किया जा रहा है जो धन-बल व भुज-बल के आधार पर मत प्राप्त करते हैं।
8. दल की कथनी व करनी में अन्तर-यद्यपि लोकतान्त्रिक देशों में राजनीतिक दलों व उनके नेताओं की कथनी और करनी में अन्तर रहता है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत में यह अन्तर अपने भीषणतम रूप में उभरा है।
9. केन्द्र व राज्य में टकराहट-केन्द्र व राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारें होती हैं जिससे केन्द्र व राज्यों के मध्य विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर टकराहट की स्थिति बनी रहती है। केन्द्र, राज्य की दूसरे दलों की सरकार को किसी-न-किसी बहाने दबाव व उलझन में रखते हैं।
In simple words: Over time, India's political system has shifted from being dominated by a single party to having coalition governments and stronger regional parties. However, issues like internal conflicts, corruption, and focusing only on winning power have also increased.
🎯 Exam Tip: To score full marks, list at least 5 to 6 key trends with clear headings like 'Rise of Coalition Governments' and 'Role of Regional Parties'.
Question 2. भारतीय दलीय व्यवस्था की प्रमुख समस्याओं की व्याख्या कीजिए।
Answer: भारतीय दलीय व्यवस्था की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
1. दलों की संख्या में वृद्धि-भारत में बहुदलीय व्यवस्था है। बहुदलीय व्यवस्था में राजनीतिक अस्थिरता का दौर जारी है। राजनीतिक दलों की भरमार ने अस्थिर राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ अन्य समस्याओं को भी जन्म दिया है। यह बहुलता कभी-कभी मतदाताओं को भ्रमित कर देती है।
2. वैचारिक प्रतिबद्धता का अभाव-राजनीतिक दल आर्थिक और राजनीतिक विचारधारा पर आधारित होना चाहिए तथा दल एवं उसके सदस्यों में वैचारिक प्रतिबद्धता होनी चाहिए लेकिन भारतीय राजनीतिक दलों में वैचारिक प्रतिबद्धता का अभाव है। वैचारिक प्रतिबद्धता से रहित इन दलों का मुख्य उद्देश्य येन-केन प्रकारेण सत्ता प्राप्त करना होता है तथा सत्ता से जुड़े लाभ प्राप्त करने के लिए ये अपने सिद्धान्तों की तिलांजलि देने में तत्पर रहते हैं।
In simple words: The main problems in India's party system are having too many political parties, which causes instability, and a lack of real values or ideologies, as parties often change their beliefs just to gain power.
🎯 Exam Tip: Clearly explain the terms 'multi-party system' and 'lack of ideological commitment' using bullet points to make your answer structured and easy to read.
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. शाहबानो मामला क्या था? इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस विरोधी रुख क्यों अपनाया?
Answer: शाहबानो मामला एक 62 वर्षीय तलाकशुदा मुस्लिम महिला शाहबानो का है। उसने अपने भूतपूर्व पति से गुजारा भत्ता हासिल करने के लिए अदालत में एक अर्जी दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो के पक्ष में निर्णय लिया। पुरातनपंथी मुसलमानों ने अदालत के इस निर्णय को अपने ‘पर्सनल लॉ’ में हस्तक्षेप माना। कुछ मुस्लिम नेताओं की माँग पर सरकार ने मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 पास किया जिसमें सर्वोच्च फैसले के निर्णय को निरस्त कर दिया गया। भाजपा ने कांग्रेस सरकार के इस कदम की आलोचना की और इसे अल्पसंख्यक समुदाय को दी गई अनावश्यक रियायत तथा तुष्टीकरण करार दिया। इस विवाद ने भारतीय राजनीति में धर्मनिरपेक्षता पर एक नई बहस छेड़ दी।
In simple words: Shah Bano, a 62-year-old divorced Muslim woman, won a court case for alimony from her ex-husband. However, under pressure from orthodox groups, the government passed a law to overturn the court's decision, which was strongly opposed by the BJP as appeasement politics.
🎯 Exam Tip: Mention the year of the Muslim Women Act (1986) and the core conflict between judicial decisions and personal laws to score full marks.
Question 2. जनता दल के प्रमुख कार्यक्रमों एवं नीतियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: जनता दल के प्रमुख कार्यक्रम एवं नीतियां निम्नलिखित हैं:
1. जनता दल का लोकतन्त्र में दृढ़ विश्वास है और उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था को अपनाने के पक्ष में है।
2. जनता दल ने भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए सात-सूत्रीय कार्यक्रम को अपनाने की बात कही है।
3. पार्टी राजनीति में बढ़ते हुए भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोकपाल की नियुक्ति के पक्ष में है।
4. पार्टी पंचायती राज संस्थाओं को अधिक स्वायत्तता देने के पक्ष में है।
5. जनता दल महिलाओं को संसद और राज्य विधानमण्डलों में 33 प्रतिशत और सरकारी, सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के पक्ष में है। ये नीतियां समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई थीं।
In simple words: Janata Dal focused on strengthening democracy, ending corruption through a 7-point program, appointing a Lokpal, giving more power to Panchayats, and providing reservation for women in politics and jobs.
🎯 Exam Tip: List all 5 key policy points clearly, especially the specific reservation percentages (33% in legislatures and 30% in jobs) for women.
Question 3. भारत में गठबंधन की राजनीति के प्रभाव समझाइए।
Answer: सन् 1989 में भारत में गठबंधन की राजनीति का श्रीगणेश हुआ। इस गठबंधन की राजनीति के निम्नलिखित प्रमुख प्रभाव पड़े:
1. एक दलीय प्रभुत्व की समाप्ति - गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस के दबदबे की समाप्ति हुई और बहुदलीय प्रणाली का युग शुरू हुआ। इस बदलाव ने क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक महत्व और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान की।
In simple words: Coalition politics started in India in 1989, which ended the single-party dominance of the Congress and started an era where multiple parties had to work together to run the government.
🎯 Exam Tip: Highlight the year 1989 as the starting point of coalition politics in India and explain how it led to the rise of multi-party systems.
Question 4. 1990 का दशक भारतीय राजनीति में नए बदलाव का दशक माना जाता है? कारण बताइए।
Answer: 1990 का दशक भारतीय राजनीति में नए बदलाव का दशक निम्नलिखित कारणों से माना जाता है-
1. सन् 1984 में भारत की प्रथम महिला प्रधानमन्त्री इन्दिरा गांधी की हत्या। लोकसभा के चुनाव व सहानुभूति की लहर में कांग्रेस का विजयी होना। लेकिन सन् 1989 में कांग्रेस की हार तथा सन् 1991 में मध्यावधि चुनाव होना तथा सन् 1991 में राजीव गांधी की हत्या।
2. राष्ट्रीय राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग से सम्बन्धित मण्डल मुद्दे का उदय होना।
3. अयोध्या में स्थित एक विवादित ढाँचे का विध्वंस, राष्ट्र में साम्प्रदायिक तनाव व दंगे।
4. देश में गठबन्धन की राजनीति का तीव्रता से उदय होना तथा नए राजनीतिक दलों के रूप में भाजपा, उसके सहयोगी एवं संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन के समर्थक दलों का तेजी से उत्थान।
5. विभिन्न सरकारों द्वारा नवीन आर्थिक नीति व सुधारों को अपनाकर उदारीकरण एवं वैश्वीकरण को बढ़ावा देना। ये सभी महत्त्वपूर्ण बदलाव हैं और आगामी राजनीति इन्हीं बदलावों के दायरे में आकार लेगी। इस प्रतिस्पर्धी राजनीति के बीच मुख्य राजनीतिक दलों में कुछ मसलों पर सहमति है। अगर राजनीतिक दल इस सहमति के दायरे में सक्रिय हैं तो जन-आन्दोलन और संगठन विकास के नए रूप, स्वप्न और तरीकों की पहचान कर रहे हैं। भारतीय लोकतंत्र में यह काल अत्यंत संवेदनशील और युगांतरकारी रहा है।
In simple words: The 1990s was a decade of big changes in Indian politics, including the rise of coalition governments, economic reforms like globalization, and major events like the Mandal commission and Ayodhya dispute.
🎯 Exam Tip: Mention all five key points clearly, especially the rise of coalition politics and economic reforms, to score full marks.
Question 5. 1990 के दशक में कांग्रेस के पतन के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: 1990 के दशक में कांग्रेस के पतन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
1. अन्य पिछड़ा वर्ग ओ०बी०सी० के कारण मण्डल एवं कमण्डल की राजनीति कुछ समय तक देश के क्षितिज पर छा गई।
2. देश की बहुदलीय प्रणाली व गठबन्धन राजनीति की बढ़ती लोकप्रियता।
3. बहुजन समाज पार्टी का जन्म, उदय एवं विकास होना।
4. कई प्रान्तों एवं क्षेत्रों में क्षेत्रीय दलों का उदय तथा अनेक वर्ग समूहों का कांग्रेस से हटकर अन्य बड़े राजनीतिक दलों से जुड़ना।
5. कुछ राजनीतिक दलों द्वारा साम्प्रदायिकता की राजनीति करने में सफल होना।
6. सन् 1971 के बाद बहुत बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों का आगमन तथा वोट की राजनीति के कारण उनकी वापसी के बारे में टालमटोल की राजनीति।
7. सन् 1984 के सिक्ख दंगे तथा उससे पूर्व अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर में सैन्य बलों का प्रवेश अथवा ऑपरेशन ब्लू स्टार की घटना। इन सभी कारकों ने मिलकर कांग्रेस के पारंपरिक जनाधार को कमजोर कर दिया।
In simple words: During the 1990s, Congress lost its dominant position because of the rise of regional parties, coalition politics, new social groups forming their own parties, and controversial events like Operation Blue Star.
🎯 Exam Tip: List at least 5 distinct reasons, such as the rise of regional parties and the Mandal issue, to write a comprehensive answer.
Question 6. ‘मण्डल कमीशन’ अथवा ‘मण्डल आयोग’ की नियुक्ति क्यों की गयी ? इसकी प्रमुख सिफारिशें बताइए।
Answer: मण्डल आयोग का गठन-केन्द्र सरकार ने सन् 1978 में एक आयोग का गठन किया और इसको पिछड़ा वर्ग की स्थिति को सुधारने के उपाय बताने का कार्य सौंपा गया। आमतौर पर इस आयोग को इसके अध्यक्ष बिन्देश्वरी प्रसाद मण्डल के नाम पर ‘मण्डल कमीशन’ कहा जाता है। मण्डल आयोग का गठन भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों के बीच शैक्षिक और सामाजिक पिछड़ेपन की पहचान करने के लिए किया गया था। इसकी प्रमुख सिफारिशें निम्नलिखित थीं:
1. अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 27% आरक्षण दिया जाए।
2. पिछड़े वर्गों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भूमि सुधार लागू किए जाएं।
In simple words: The Mandal Commission was set up to find ways to help backward classes in India. It recommended giving them 27% reservation in government jobs and colleges to help them grow.
🎯 Exam Tip: Clearly state the year of establishment (1978), the chairman's name (B.P. Mandal), and the key recommendation of 27% reservation for OBCs.
सामाजिक पिछड़ेपन की व्यापकता का पता लगाने और इन पिछड़े वर्गों की पहचान के तरीके बताने के लिए किया गया था। आयोग से यह भी अपेक्षा की गयी थी कि वह इन वर्गों के पिछड़ेपन को दूर करने के उपाय सुझाएगा।
Mandal Commission Recommendations (मण्डल आयोग की सिफारिशें)
मण्डल आयोग की सिफारिशें-आयोग ने सन् 1980 में अपनी सिफारिशें पेश कीं। इस समय तक जनता पार्टी की सरकार गिर चुकी थी। आयोग का मशविरा था कि पिछड़ा वर्ग को पिछड़ी जाति के अर्थ में स्वीकार किया जाए। आयोग ने एक सर्वेक्षण किया और पाया कि इन पिछड़ी जातियों की शिक्षा संस्थाओं तथा सरकारी नौकरियों में बड़ी कम मौजूदगी है। इस वजह से आयोग ने इन समूहों के लिए शिक्षा संस्थाओं तथा सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत सीट आरक्षित करने की सिफारिश की। मण्डल आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग की स्थिति सुधारने के लिए कई और समाधान सुझाए जिनमें भूमि-सुधार भी एक था।
Very Short Answer Questions (अति उत्तरीय प्रश्नोत्तर)
Question 1. भारतीय जनता पार्टी की स्थापना कब हुई? इसके प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
Answer: भारतीय जनता पार्टी की स्थापना सन् 1980 में हुई। अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के प्रथम अध्यक्ष थे। इस दल की स्थापना राष्ट्रवादी और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई थी।
In simple words: The Bharatiya Janata Party (BJP) was formed in the year 1980, and its very first president was Atal Bihari Vajpayee.
🎯 Exam Tip: Clearly mention both the year 1980 and the name of Atal Bihari Vajpayee to secure full marks for this factual question.
Question 2. दल-बदल से क्या अभिप्राय है?
Answer: कोई जन-प्रतिनिधि किसी खास दल के चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव लड़े और चुनाव जीतने के बाद इस दल को छोड़कर किसी दूसरे दल में शामिल हो जाए, तो इसे ‘दल-बदल’ कहते हैं। यह प्रक्रिया राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देती है।
In simple words: Defection (Dal-Badal) is when an elected leader leaves their political party to join another party after winning the election.
🎯 Exam Tip: Define the term precisely by highlighting the action of changing parties after winning an election under a specific symbol.
Question 3. संयुक्त मोर्चा सरकार कब और किसके नेतृत्व में बनी?
Answer: संयुक्त मोर्चा सरकार 1 जून, 1996 को एच०डी० देवगौड़ा के नेतृत्व में बनी। यह विभिन्न क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों का एक अनूठा गठबंधन था।
In simple words: The United Front government was formed on June 1, 1996, under the leadership of Prime Minister H. D. Deve Gowda.
🎯 Exam Tip: Remember to write the exact date (1 June 1996) and the correct spelling of H.D. Deve Gowda.
Question 4. भारतीय दलीय व्यवस्था की दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: भारतीय दलीय व्यवस्था की दो मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. बहुदलीय व्यवस्था, एवं
2. विभिन्न मतों का प्रतिनिधित्व। यह व्यवस्था समाज के सभी वर्गों को अपनी आवाज़ उठाने का अवसर देती है।
In simple words: Two features of the Indian party system are that it has many political parties (multi-party system) and it represents diverse opinions of different groups.
🎯 Exam Tip: Presenting the features in a numbered list format makes your answer neat and easy for the examiner to evaluate.
Question 5. राजनीतिक दल के कोई दो कार्य बताइए।
Answer: राजनीतिक दल के दो प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
1. राजनीतिक चेतना का प्रसार, एवं
2. शासन सत्ता को मर्यादित करना। ये दल जनता और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।
In simple words: Two functions of political parties are to spread political awareness among citizens and to keep a check on the power of the ruling government.
🎯 Exam Tip: Use clear headings or bullet points for each function to make your answer stand out.
Question 6. वर्तमान दलीय व्यवस्था की उभरती हुई दो प्रवृत्तियाँ बताइए।
Answer: वर्तमान दलीय व्यवस्था की उभरती हुई दो प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं:
1. जाति आधारित दलों का गठन, एवं
2. राजनीतिक अपराधीकरण। ये प्रवृत्तियाँ लोकतांत्रिक मूल्यों के समक्ष नई चुनौतियाँ उत्पन्न करती हैं।
In simple words: Two emerging trends in the current party system are the formation of parties based on caste and the increasing involvement of criminals in politics.
🎯 Exam Tip: Use precise terms like 'caste-based parties' and 'criminalization of politics' as they are key academic terms.
Question 7. भारतीय दलीय व्यवस्था के कोई दो अवगुण/दोष/कमियाँ बताइए।
Answer: भारतीय दलीय व्यवस्था के दो मुख्य दोष निम्नलिखित हैं:
1. साम्प्रदायिकता तथा क्षेत्रवाद की प्रबलता, एवं
2. नैतिकता का अभाव। ये कमियाँ देश की एकता और अखंडता को प्रभावित करती हैं।
In simple words: Two drawbacks of the Indian party system are the rise of communalism and regionalism, and the lack of moral values among politicians.
🎯 Exam Tip: Highlighting 'communalism' and 'lack of morality' helps show a deep understanding of political challenges.
Question 8. राजनीतिक दलों के दो आवश्यक तत्त्व बताइए।
Answer: राजनीतिक दलों के दो आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं:
1. संगठन, एवं
2. सामान्य सिद्धान्तों की एकता। इन तत्वों के बिना कोई भी राजनीतिक दल सुचारू रूप से कार्य नहीं कर सकता।
In simple words: Two essential elements of political parties are having a proper organization and sharing common principles or ideologies.
🎯 Exam Tip: Mention 'organization' and 'unity of principles' as they are the core pillars of any political party.
Question 9. किन्हीं चार क्षेत्रीय दलों के नाम लिखिए।
Answer: किन्हीं चार क्षेत्रीय दलों के नाम निम्नलिखित हैं:
1. शिवसेना (महाराष्ट्र)
2. शिरोमणि अकाली दल (पंजाब)
3. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम - डीएमके (तमिलनाडु)
4. समाजवादी पार्टी (उत्तर प्रदेश)। ये दल अपने-अपने राज्यों की क्षेत्रीय आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
In simple words: Four regional political parties in India are Shiv Sena, Shiromani Akali Dal, DMK, and Samajwadi Party.
🎯 Exam Tip: Always mention the state along with the regional party's name to make your answer more informative and complete.
1. डी०एम०के०2. ए०डी०एम०के०
3. अकाली दल, एवं
4. तेलुगू देशम।
Question 10. जन मोर्चा का गठन किसने और कब किया?
Answer: जन मोर्चा का गठन वी०पी० सिंह ने 2 अक्टूबर, 1987 को किया। यह दल भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया था जिसने आगे चलकर गठबंधन सरकार की नींव रखी।
In simple words: जन मोर्चा नाम की राजनीतिक पार्टी को वी. पी. सिंह ने 2 अक्टूबर 1987 को बनाया था।
🎯 Exam Tip: Remember the exact date (2 October 1987) and the founder's name (V.P. Singh) to score full marks in short-answer questions.
Question 11. बाबरी मस्जिद कब गिराई गई, उस समय केन्द्र में किस पार्टी की सरकार थी?
Answer: बाबरी मस्जिद 6 दिसम्बर, 1992 को गिराई गई, उस समय केन्द्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी तथा पी०वी० नरसिम्हा राव प्रधानमन्त्री थे। इस ऐतिहासिक घटना ने भारतीय धर्मनिरपेक्षता और राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला।
In simple words: बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को गिराया गया था, और उस समय देश के प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव थे और कांग्रेस की सरकार थी।
🎯 Exam Tip: Clearly mention both the date of the incident and the Prime Minister's name to secure complete marks.
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
Question 1. भारतीय दलीय व्यवस्था का स्वरूप है-
(a) एकदलीय
(b) द्विदलीय
(c) बहुदलीय
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) बहुदलीय
In simple words: भारत में बहुत सारे राजनीतिक दल (पार्टियां) चुनाव लड़ सकते हैं, इसलिए यहाँ बहुदलीय व्यवस्था है।
🎯 Exam Tip: India's multi-party system is a unique feature of its democracy; remember this term for direct questions.
Question 2. निर्बल व अस्थिर जिस शासन-प्रणाली का दोष है, वह है-
(a) एकदल की तानाशाही
(b) द्विदलीय प्रणाली
(c) बहुदलीय प्रणाली
(d) दलविहीन प्रणाली
Answer: (c) बहुदलीय प्रणाली
In simple words: जब बहुत सारी पार्टियां मिलकर सरकार बनाती हैं, तो आपसी मतभेदों के कारण सरकार कमजोर और अस्थिर हो सकती है।
🎯 Exam Tip: Understand the difference between single-party, bi-party, and multi-party systems to easily identify their pros and cons.
Question 3. जनता पार्टी का उदय कब हुआ-
(a) सन् 1980 में
(b) सन् 1998 में
(c) सन् 1999 में
(d) सन् 1977 में
Answer: (d) सन् 1977 में
In simple words: आपातकाल के बाद साल 1977 में कई विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी का गठन किया था।
🎯 Exam Tip: The year 1977 is highly significant in Indian political history as the first non-congress government was formed then.
Question 4. निम्नलिखित में कौन-सा दल अखिल भारतीय दल है-
(a) तेलुगू देशम
(b) कांग्रेस
(c) समाजवादी पार्टी
(d) राष्ट्रीय जनता दल
Answer: (b) कांग्रेस
In simple words: कांग्रेस एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी है जिसका प्रभाव पूरे देश में है, जबकि अन्य पार्टियां क्षेत्रीय स्तर की हैं।
🎯 Exam Tip: An 'All India Party' (National Party) has a presence across multiple states, unlike regional parties like TDP or SP.
Question 5. केन्द्र में मिली-जुली सरकार कब बनी-
(a) सन् 1977 में
(b) सन् 1978 में
(c) सन् 1979 में
(d) सन् 1980 में
Answer: (a) सन् 1977 में
In simple words: भारत के इतिहास में पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी मिली-जुली सरकार साल 1977 में बनी थी।
🎯 Exam Tip: Coalition governments (मिली-जुली सरकार) started gaining prominence at the center from 1977 onwards.
Free study material for Civics
UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम
Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Civics textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Civics chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Civics Class 12 Solved Papers
Using our Civics solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Civics are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Civics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Civics. You can access UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 9 भारतीय राजनीति में हाल के घटनाक्रम in printable PDF format for offline study on any device.