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Detailed Chapter 6 अंतर्राष्ट्रीय संगठन UP Board Solutions for Class 12 Civics
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Class 12 Civics Chapter 6 अंतर्राष्ट्रीय संगठन UP Board Solutions PDF
UP Board Class 12 Civics Chapter 6 Text Book Questions
UP Board Class 12 Civics Chapter 6 पाठ्यपुस्तक से अभ्यास प्रश्न
Question 1. निषेधाधिकार (वीटो) के बारे में नीचे कुछ कथन दिए गए हैं। इनमें प्रत्येक के आगे सही (√) या गलत (X) का चिह्न लगाएँ
(क) सुरक्षा परिषद् के सिर्फ स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार है। (√)
(ख) यह एक तरह की नकारात्मक शक्ति है। (√)
(ग) सुरक्षा परिषद् के फैसले से असन्तुष्ट होने पर महासचिव 'वीटो' का प्रयोग करता है। (X)
(घ) एक 'वीटो' से भी सुरक्षा परिषद् का प्रस्ताव नामंजूर हो सकता है। (√)
Answer:
(क) सुरक्षा परिषद् के सिर्फ स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार है। (√)
(ख) यह एक तरह की नकारात्मक शक्ति है। (√)
(ग) सुरक्षा परिषद् के फैसले से असन्तुष्ट होने पर महासचिव 'वीटो' का प्रयोग करता है। (X)
(घ) एक 'वीटो' से भी सुरक्षा परिषद् का प्रस्ताव नामंजूर हो सकता है। (√)
In simple words: वीटो शक्ति सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों को किसी भी प्रस्ताव को रोकने की नकारात्मक शक्ति है, जो महासचिव द्वारा प्रयोग नहीं की जाती और एक अकेला वीटो भी किसी प्रस्ताव को नामंजूर कर सकता है।
🎯 Exam Tip: वीटो शक्ति से संबंधित तथ्यों और उसके प्रयोग की सही-गलत जानकारी को समझना महत्त्वपूर्ण है।
Question 2. संयुक्त राष्ट्र संघ के कामकाज के बारे में नीचे कुछ कथन दिए गए हैं। इनमें प्रत्येक के सामने (√) या गलत (X) का चिह्न लगाएँ-
(क) सुरक्षा और शान्ति से सम्बन्धित सभी मसलों का निपटारा सुरक्षा परिषद् में होता है। (√)
(ख) मानवतावाद नीतियों का क्रियान्वयन विश्व भर में फैली मुख्य शाखाओं तथा एजेन्सियों के मार्फत होता है। (√)
(ग) सुरक्षा के किसी मसले पर पाँचों स्थायी सदस्य देशों का सहमत होना उसके बारे में लिए गए फैसले के क्रियान्वयन के लिए जरूरी है । (√)
(घ) संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के सभी सदस्य संयुक्त राष्ट्र संघ के बाकी प्रमुख अंगों और विशेष एजेन्सियों के स्वतः सदस्य हो जाते हैं। (X)
Answer:
(क) सुरक्षा और शान्ति से सम्बन्धित सभी मसलों का निपटारा सुरक्षा परिषद् में होता है। (√)
(ख) मानवतावाद नीतियों का क्रियान्वयन विश्व भर में फैली मुख्य शाखाओं तथा एजेन्सियों के मार्फत होता है। (√)
(ग) सुरक्षा के किसी मसले पर पाँचों स्थायी सदस्य देशों का सहमत होना उसके बारे में लिए गए फैसले के क्रियान्वयन के लिए जरूरी है । (√)
(घ) संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के सभी सदस्य संयुक्त राष्ट्र संघ के बाकी प्रमुख अंगों और विशेष एजेन्सियों के स्वतः सदस्य हो जाते हैं। (X)
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ के कामकाज में सुरक्षा परिषद् शांति और सुरक्षा के मसलों को निपटाती है, मानवीय नीतियां वैश्विक शाखाओं द्वारा लागू होती हैं, और सुरक्षा फैसलों के लिए पाँचों स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक है। हालांकि, महासभा के सभी सदस्य स्वचालित रूप से अन्य अंगों और एजेंसियों के सदस्य नहीं होते।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न अंगों की भूमिका और उनके कामकाज के नियमों को समझना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव को ज्यादा वजनदार बनाता है
(क) परमाणु क्षमता ।
(ख) भारत संयुक्त राष्ट्र संघ के जन्म से ही उसका सदस्य है।
(ग) भारत एशिया में है।
(घ) भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और स्थिर राजनीतिक व्यवस्था ।
Answer: (घ) भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और स्थिर राजनीतिक व्यवस्था।
In simple words: भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और स्थिर राजनीतिक व्यवस्था उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता के लिए एक मजबूत दावेदार बनाती है, क्योंकि ये कारक वैश्विक स्थिरता और सहयोग में उसके योगदान को बढ़ाते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी देश की स्थायी सदस्यता के दावे के लिए उसके आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक महत्व को समझना आवश्यक है।
Question 4. परमाणु प्रौद्योगिकी के शान्तिपूर्ण उपयोग और उसकी सुरक्षा से सम्बद्ध संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेन्सी का नाम है
(क) संयुक्त राष्ट्र संघ निरस्त्रीकरण समिति
(ख) अन्तर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेन्सी
(ग) संयुक्त राष्ट्र संघ अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा समिति
(घ) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ख) अन्तर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेन्सी
In simple words: परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग और सुरक्षा से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी को अंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेन्सी (IAEA) कहते हैं, जिसका मुख्य कार्य परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित और शांतिपूर्ण अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ की विशिष्ट एजेंसियों और उनके कार्यों को याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए उपयोगी है।
Question 5. विश्व व्यापार संगठन निम्नलिखित में से किस संगठन का उत्तराधिकारी है-
(क) जनरल एग्रीमेण्ट ऑन ट्रेड एण्ड टैरिफ
(ख) जनरल अरेन्जमेण्ट ऑन ट्रेड एण्ड टैरिफ
(ग) विश्व स्वास्थ्य संगठन
(घ) संयुक्त राष्ट्र संघ विकास कार्यक्रम ।
Answer: (क) जनरल एग्रीमेण्ट ऑन ट्रेड एण्ड टैरिफ
In simple words: विश्व व्यापार संगठन (WTO) जनरल एग्रीमेण्ट ऑन ट्रेड एण्ड टैरिफ (GATT) का उत्तराधिकारी है, जिसे वैश्विक व्यापार नियमों को अधिक व्यापक और स्थायी बनाने के लिए बनाया गया था।
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठनों के पूर्ववर्ती और वर्तमान स्वरूप को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके नाम और भूमिकाएं।
Question 6. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
(क) संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य उद्देश्य ......... है ।
(ख) संयुक्त राष्ट्र संघ का सबसे जाना-पहचाना पद ...... का है।
(ग) संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् में ......... स्थायी और ......... अस्थायी सदस्य हैं।
(घ) ........ संयुक्त राष्ट्र संघ के वर्तमान महासचिव हैं।
(च) मानवाधिकारों की रक्षा में सक्रिय दो स्वयंसेवी संगठन ......... और ......... हैं।
Answer:
(क) संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य उद्देश्य विश्व में शान्ति व सुरक्षा बनाए रखना है।
(ख) संयुक्त राष्ट्र संघ का सबसे जाना-पहचाना पद महासचिव का है।
(ग) संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् में पाँच स्थायी और दस अस्थायी सदस्य हैं।
(घ) एण्टोनियो गुटेरेस (पुर्तगाल से) संयुक्त राष्ट्र संघ के वर्तमान महासचिव हैं।
(च) मानवाधिकारों की रक्षा में सक्रिय दो स्वयंसेवी संगठन एमनेस्टी इण्टरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच हैं।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य लक्ष्य विश्व में शांति और सुरक्षा बनाए रखना है, जिसके सबसे प्रमुख पद पर महासचिव होता है; सुरक्षा परिषद् में पाँच स्थायी और दस अस्थायी सदस्य होते हैं, और मानवाधिकारों की रक्षा में एमनेस्टी इण्टरनेशनल तथा ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठन सक्रिय हैं।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख उद्देश्य, संरचना और मानवाधिकार से जुड़े संगठनों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।
Question 7. संयुक्त राष्ट्र संघ की निम्नलिखित मुख्य शाखाओं और एजेन्सियों का सुमेल उनके काम से करें
(1) आर्थिक एवं सामाजिक परिषद्
(क) वैश्विक वित्त-व्यवस्था की देख-रेख।
(2) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
(ख) अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा का संरक्षण।
(3) अन्तर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेन्सी
(ग) सदस्य देशों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण की चिन्ता।
(4) सुरक्षा परिषद्
(घ) परमाणु प्रौद्योगिकी का शान्तिपूर्ण उपयोग और सुरक्षा।
(5) संयुक्त राष्ट्र संघ शरणार्थी उच्चायोग
(ङ) सदस्य देशों के बीच मौजूद विवादों का निपटारा।
(च) आपातकाल में आश्रय तथा चिकित्सीय सहायता मुहैया करना।
(6) विश्व व्यापार संगठन
(7) अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
(छ) वैश्विक मामलों पर बहस-मुबाहिसा।
(ज) संयुक्त राष्ट्र संघ के मामलों का समायोजन और प्रशासन।
(8) आम सभा
(9) विश्व स्वास्थ्य संगठन
(झ) सबके लिए स्वास्थ्य।
(ञ) सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार की राह आसान करना।
(10) सचिवालय
Answer:
(1) आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् - (ग) सदस्य देशों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण की चिन्ता।
(2) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय - (ङ) सदस्य देशों के बीच मौजूद विवादों का निपटारा।
(3) अन्तर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेन्सी - (घ) परमाणु प्रौद्योगिकी का शान्तिपूर्ण उपयोग और सुरक्षा।
(4) सुरक्षा परिषद् - (ख) अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा का संरक्षण।
(5) संयुक्त राष्ट्र संघ शरणार्थी उच्चायोग - (च) आपातकाल में आश्रय तथा चिकित्सीय सहायता मुहैया करना।
(6) विश्व व्यापार संगठन - (ञ) सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार की राह आसान करना।
(7) अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष - (क) वैश्विक वित्त-व्यवस्था की देख-रेख।
(8) आम सभा - (छ) वैश्विक मामलों पर बहस-मुबाहिसा।
(9) विश्व स्वास्थ्य संगठन - (झ) सबके लिए स्वास्थ्य।
(10) सचिवालय - (ज) संयुक्त राष्ट्र संघ के मामलों का समायोजन और प्रशासन।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न शाखाएँ और एजेंसियां विशिष्ट कार्य करती हैं, जैसे आर्थिक और सामाजिक परिषद् विकास देखती है, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय विवाद सुलझाता है, सुरक्षा परिषद् शांति बनाए रखती है, और सचिवालय संघ के दैनिक कार्यों का प्रबंधन करता है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंगों और उनकी विशिष्ट एजेंसियों के कार्यों को सही ढंग से सुमेलित करना परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 8. सुरक्षा परिषद् के कार्य क्या हैं?
Answer: सुरक्षा परिषद्, संयुक्त राष्ट्र संघ का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंग है। वर्तमान में इसके कुल 15 सदस्य हैं जिनमें 5 स्थायी सदस्य हैं और 10 अस्थायी सदस्य । स्थायी सदस्यों में अमेरिका, इंग्लैण्ड, रूस, फ्रांस एवं चीन हैं। प्रारम्भ में सुरक्षा परिषद् के सदस्यों की कुल संख्या 11 थी, सन् 1965 में इनकी संख्या बढ़ाकर 15 कर दी गई। अस्थायी सदस्यों (10 सदस्यों) को साधारण सभा दो-तिहाई बहुमत से दो वर्ष के लिए चुनती है। सुरक्षा परिषद् संयुक्त राष्ट्र संघ का निरन्तर कार्य करने वाला निकाय है। यह स्थायी रूप से सत्र में रहती है। सामान्यतः इसकी बैठक 14 दिन में एक बार होती है। प्रत्येक स्थायी सदस्य को सभी महत्त्वपूर्ण विषयों में निषेधाधिकार (veto) प्राप्त है।
सुरक्षा परिषद् के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-
(1) विश्व शान्ति एवं सुरक्षा के प्रति उत्तरदायी होती है। यह विरोधी देशों को बाध्य करती है कि वे विवाद का निपटारा शान्तिपूर्ण तरीकों से करें ।
(2) सुरक्षा परिषद् के क्षेत्राधिकार में आने वाले बहुत-से संगठनात्मक विषयों में उसे कानूनी रूप से बाध्यकारी अधिकार प्राप्त है। नए राष्ट्रों को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता प्रदान करना, महासचिव का चयन, अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति आदि सभी ऐसे कार्य जो महासभा से मिलकर करती है, बाध्यकारी प्रभाव रखते हैं।
(3) सुरक्षा परिषद् अपने आन्तरिक मामलों का स्वयं निर्णय करती है।
(4) सुरक्षा परिषद् शान्ति भंग करने वाले किसी भी देश के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कर सकती है।
(5) यदि किसी राष्ट्र ने दूसरे राष्ट्र पर आक्रमण कर दिया है तो उसे क्रूटनीतिक, आर्थिक एवं सैन्य कार्रवाई करने का आदेश देने का अधिकार है एवं सदस्य राष्ट्र चार्टर की इच्छानुसार उक्त निर्णय को मानने एवं लागू करने को बाध्य है।
सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर ही कोई भी राष्ट्र, जिसके खिलाफ अनुशासन की कार्रवाई की गयी हो, सदस्यता के अधिकार से अनिश्चित काल के लिए वंचित किया जा सकता है।
In simple words: सुरक्षा परिषद् संयुक्त राष्ट्र संघ का एक महत्वपूर्ण अंग है जो विश्व शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है; यह विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाती है, नए सदस्यों को स्वीकृति देती है, महासचिव का चयन करती है, और शांति भंग करने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, जिसमें वीटो शक्ति भी शामिल है।
🎯 Exam Tip: सुरक्षा परिषद् की संरचना, सदस्यों के प्रकार (स्थायी और अस्थायी), वीटो शक्ति का महत्व और उसके प्रमुख कार्यों को विस्तार से समझना आवश्यक है।
Question 9. भारत के नागरिक के रूप में सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष का समर्थन आप कैसे करेंगे? अपने प्रस्ताव का औचित्य सिद्ध करें ।
Answer: मेरी दृष्टि में आज भारत विश्व के प्रमुख शक्तिशाली देशों में गिना जाता है, अतः उसे सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता प्राप्त होनी चाहिए। इस तर्क के पीछे निम्नलिखित कारण हैं
1. भारत विश्व का सबसे बड़ी जनसंख्या वाला दूसरा देश है।
2. भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है।
3. संयुक्त राष्ट्र संघ के शान्ति बहाली के प्रयासों में भारत लम्बे समय से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है।
4. भारत अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर आर्थिक शक्ति बनकर उभर रहा है।
5. भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में नियमित रूप से अपना योगदान दिया है और यह कभी भी अपने भुगतान से चूका नहीं है।
6. भारत ने सदैव शीतयुद्ध और सैन्य गुटबन्दी आदि का विरोध किया है।
7. भारतीय संस्कृति सदैव ही अहिंसा, शान्ति, सहयोग की समर्थक रही है, अतः भारत को सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य बनाना चाहिए ।
In simple words: भारत की बड़ी जनसंख्या, लोकतांत्रिक व्यवस्था, आर्थिक शक्ति, शांति प्रयासों में योगदान, वित्तीय प्रतिबद्धता और गुटनिरपेक्षता की नीति के कारण, उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए ताकि वह वैश्विक मंच पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
🎯 Exam Tip: भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन में दिए गए तर्कों को बिन्दुवार याद रखना और उनका विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।
Question 10. संयुक्त राष्ट्र संघ के ढाँचे को बदलने के लिए सुझाए गए उपायों के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों का आलोचनात्मक मूल्याकंन करें।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ के ढाँचे को बदलने के लिए सुझाए गए उपाय-
1. संयुक्त राष्ट्र संघ शान्ति और सुरक्षा से जुड़े अभियानों में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाए ताकि सभी देशों का इसके प्रति विश्वास बढ़े ।
2. सुरक्षा परिषद् के स्थायी तथा अस्थायी सदस्यों की संख्या में वृद्धि की जाए।
3. सुरक्षा परिषद् में केवल पाँच स्थायी सदस्य देशों को विशेषाधिकार दिया गया है। ये अपनी वीटो शक्ति से किसी भी प्रस्ताव को निरस्त कर सकते हैं, इस अधिकार को समाप्त कर देना चाहिए।
4. कोई भी निर्णय महासभा में बहुमत से होना चाहिए। सभी सदस्यों को एक मत देने का अधिकार होना चाहिए और व्यक्तिगत रूप में गुप्त मतदान के रूप में इसका प्रयोग होना चाहिए।
5. भारत, जापान, जर्मनी, कनाडा, ब्राजील तथा दक्षिणी अफ्रीका को सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता प्रदान करनी चाहिए ।
उपर्युक्त सुझावों के क्रियान्वयन में निम्नलिखित कठिनाइयाँ आ रही हैं-
1. सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों की संख्या 5 है जबकि साधारण सभा के सदस्यों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। अतः इस आधार पर सुरक्षा परिषद् की सदस्य संख्या में भी वृद्धि होनी चाहिए, लेकिन इनमें किन सदस्यों को शामिल किया जाए यह समस्या आती है।
2. जनसंख्या, आर्थिक स्थिति, अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में प्रभाव आदि किस आधार पर देशों को शामिल किया जाए।
3. स्थायी सदस्यों की वीटो पावर आदि समाप्त कर दी जाएगी तो वे देश इस संघ में उतनी रुचि नहीं लेंगे। यह भी अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टि से उचित नहीं रहेगा।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ के ढांचे में सुधार के लिए वीटो शक्ति को समाप्त करने, सदस्य संख्या बढ़ाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने जैसे सुझाव दिए गए हैं, लेकिन इन सुझावों को लागू करने में स्थायी सदस्यों की संख्या, नए सदस्यों के चयन के मानदंड और वीटो शक्ति के उन्मूलन से संबंधित देशों की अरुचि जैसी चुनौतियां हैं।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार के प्रस्तावित उपायों और उनके क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों का विस्तृत विश्लेषण परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 11. हालाँकि संयुक्त राष्ट्र संघ युद्ध और इससे उत्पन्न विपदा को रोकने में नाकामयाब रहा है, लेकिन विभिन्न देश अभी भी इसे बनाए रखना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ को एक अपरिहार्य संगठन मानने के क्या कारण हैं?
Answer: हालाँकि संयुक्त राष्ट्र संघ युद्ध और उससे उत्पन्न विपदा को रोकने में नाकामयाब रहा है परन्तु फिर भी प्रत्येक देश इसे एक महत्त्वपूर्ण एवं अपरिहार्य संगठन मानता है। संयुक्त राष्ट्र संघ अपने पूर्ववर्ती संगठन राष्ट्र-संघ की तरह द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद असफल नहीं रहा। अतः संयुक्त राष्ट्र संघ को बनाए रखना आवश्यक है। इसके अन्य प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
(1) संयुक्त राष्ट्र संघ अमेरिका और विश्व के अन्य देशों के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करवा सकता है। इसी के माध्यम से छोटे एवं निर्बल देश अमेरिका से किसी भी मसले पर बात कर सकते हैं।
(2) सन् 2011 तक संयुक्त राष्ट्र संघ में 193 देश सदस्य बन चुके हैं। यह विश्व का सबसे प्रभावशाली मंच है। यहाँ पर अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति, सुरक्षा तथा सामाजिक, आर्थिक समस्याओं पर खुले मस्तिष्क से वाद-विवाद और विचार-विमर्श होता है।
(3) संयुक्त राष्ट्र संघ के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वह किसी देश को बाध्य करे, परन्तु वह ऐसे देशों की शक्तियों पर अंकुश अवश्य लगा सकता है चाहे वह अमेरिका जैसा देश ही क्यों न हो । संयुक्त राष्ट्र संघ अपने सदस्यों (देशों) के माध्यम से अमेरिका तक की नीतियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकता है।
(4) आज कुछ राष्ट्रों के पास अणु व परमाणु बम हैं, किन्तु बड़ी शक्तियों के प्रभाव के कारण काफी सीमा तक सर्वाधिक भयंकर हथियारों के निर्माण और रयायन व जैविक हथियारों का प्रयोग और निर्माण को रोकने में संयुक्त राष्ट्र संघ को सफलता मिली है।
(5) संयुक्त राष्ट्र संघ अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, पिछड़े और गरीब राष्ट्रों को ऋण भुगतान और आपातकाल में अनेक प्रकार की सहायता दिलाने में सक्षम रहा है। इसलिए इसका बना रहना आवश्यक है।
(6) आज प्रत्येक देश पारस्परिक निर्भरता को समझने लगा है और पारस्परिक निर्भरता बढ़ रही है। इसके पीछे भी संयुक्त राष्ट्र संघ है। यह एक ऐसा मंच है जिस पर विश्व के अधिकांश देश उपलब्ध रहते हैं। कोई भी देश पूर्ण नहीं होता उसे सदैव दूसरे देश के सहयोग की आवश्यकता होती है फिर चाहे वह अमेरिका हो या इंग्लैण्ड ।
उपर्युक्त कारणों से स्पष्ट होता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रयोग और अधिक मानव-मूल्यों, विश्वबन्धुत्व एवं पारस्परिक सहयोग की भावना से किया जाना चाहिए। इसका अस्तित्व आज अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति व सहयोग के लिए परम आवश्यक है।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ, भले ही सभी युद्धों को न रोक पाया हो, फिर भी वैश्विक बातचीत का एक अनिवार्य मंच है, जहां 193 सदस्य देश शांति, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं पर चर्चा करते हैं, बड़ी शक्तियों पर अंकुश लगा सकते हैं, सामूहिक विनाश के हथियारों को रोकने में मदद करते हैं, और आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता और उसके अस्तित्व के कारणों को विस्तृत रूप से समझना चाहिए, विशेष रूप से उसकी बहुपक्षीय भूमिका और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में योगदान।
Question 12. संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार का अर्थ है सुरक्षा परिषद् के ढाँचे में बदलाव । इस कथन का सत्यापन करें।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ के अंगों में सुरक्षा परिषद् अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार का अर्थ है- सुरक्षा परिषद् के ढाँचे में निश्चित रूप से बदलाव । सुरक्षा परिषद् में वर्तमान में कुल 15 सदस्य हैं जिनमें 10 अस्थायी और 5 स्थायी हैं। इन 5 स्थायी सदस्य देशों में अमेरिका, फ्रांस, रूस, इंग्लैण्ड और चीन हैं। इन पाँचों देशों को किसी भी प्रस्ताव पर वीटो शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार है अतः इनका सुरक्षा परिषद् में आधिपत्य है। एक प्रकार से समस्त निर्णय इन्हीं 5 स्थायी सदस्यों द्वारा किए जाते हैं। ऐसे में अन्य देशों को असन्तोष होता है, वे चाहते हैं कि इन सदस्यों की इस वीटो शक्ति को समाप्त किया जाना चाहिए। यदि इस प्रकार का कोई सुधार संयुक्त राष्ट्र संघ में किया गया तो सुरक्षा परिषद् के ढाँचे में बदलाव होगा।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार मुख्य रूप से सुरक्षा परिषद् के ढांचे में बदलाव से संबंधित है, खासकर इसके 5 स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति और अत्यधिक प्रभाव को कम करने तथा सदस्यों की संख्या और प्रतिनिधित्व को अधिक न्यायसंगत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है ताकि यह संगठन अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी बन सके।
🎯 Exam Tip: सुरक्षा परिषद् की वर्तमान संरचना, स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति, और इसके ढाँचे में सुधार की आवश्यकताओं को गहराई से समझना चाहिए, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर सीधा असर डालता है।
UP Board Class 12 Civics Chapter 6 InText Questions
UP Board Class 12 Civics Chapter 6 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर
Question 1. यही बात तो वे संसद के बारे में कहते हैं। क्या हमें बतकही की ऐसी चौपालें वास्तव में चाहिए?
Answer: हाँ, ऐसी चौपालें वास्तव में होनी चाहिए क्योंकि इनमें हुए वाद-विवाद के पश्चात् समस्याओं के समाधान सरलता से तलाश किए जा सकते हैं।
In simple words: हाँ, ऐसी सार्वजनिक चर्चा मंच महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे वाद-विवाद के माध्यम से समस्याओं का सरल और प्रभावी समाधान खोजने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक चर्चा और संवाद मंचों के महत्व को समझना और उनके लाभों को रेखांकित करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. ऐसे मुद्दों और समस्याओं की सूची बनाइए, जिन्हें सुलझाना किसी एक देश के लिए सम्भव नहीं है और जिनके लिए एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन की जरूरत है।
Answer: मुद्दे व समस्याओं की सूची-
1. अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद ।
2. अन्तर्राष्ट्रीय विवादों का शान्तिपूर्ण समाधान ।
3. युद्धों का रोकना ।
4. प्राकृतिक आपदाएँ; जैसे-ज्वालामुखी विस्फोट, भूकम्प, सुनामी व बाढ़ आदि ।
5. वैश्विक ताप वृद्धि को रोकना।
6. विभिन्न देशों के मध्य नदी-जल बँटवारा।
7. महामारियाँ।
In simple words: अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, प्राकृतिक आपदाएं, जलवायु परिवर्तन, महामारियां, युद्ध और नदी-जल विवाद जैसी समस्याएं इतनी जटिल और व्यापक होती हैं कि कोई एक देश उन्हें अकेले हल नहीं कर सकता, इसलिए इनके समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: उन वैश्विक समस्याओं को पहचानना और सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है जिनके समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और संगठनों की भूमिका अपरिहार्य है।
Question 3. क्या हम पाँच बड़े दादाओं (सदस्यों) की दादागीरी खत्म करना चाहते हैं या उनमें शामिल होकर एक और दादा बनना चाहते हैं?
Answer: हम संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होकर पाँच बड़े दादाओं अर्थात् सुरक्षा परिषद् के वर्तमान स्थायी सदस्य-चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस व संयुक्त राज्य अमेरिका की दादागीरी को खत्म करना चाहते हैं। भारत सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य बनकर निषेधाधिकार शक्ति (वीटो पावर) प्राप्त कर लेगा तो सुरक्षा परिषद् के निर्णयों को न्यायसंगत दिशा में मोड़ना चाहेगा तथा उन देशों की पैरवी करेगा जो दादाओं के व्यवहार से पीड़ित हैं।
भारत, संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से छोटे देशों के आर्थिक विकास के प्रस्तावों को सुरक्षा परिषद् में लाकर स्वीकृत कराने का प्रयास करेगा। इस तरह हम सुरक्षा परिषद् में सम्मिलित होकर एक और दादा नहीं बनना चाहते बल्कि पाँच बड़े दादाओं की दादागीरी को खत्म करना चाहते हैं।
In simple words: भारत सुरक्षा परिषद् में शामिल होकर मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों की दादागीरी खत्म करना चाहता है, ताकि वीटो शक्ति का उपयोग न्यायसंगत निर्णय लेने और कमजोर देशों के हितों की पैरवी करने के लिए किया जा सके, न कि एक और प्रभावशाली देश बनने के लिए।
🎯 Exam Tip: सुरक्षा परिषद् में भारत की संभावित भूमिका और उसके स्थायी सदस्यता के पीछे के उद्देश्यों को तार्किक रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 4. अगर संयुक्त राष्ट्र संघ किसी को न्यूयॉर्क बुलाए और अमेरिका उसे वीजा न दे तो क्या होगा?
Answer: अगर संयुक्त राष्ट्र संघ किसी को न्यूयॉर्क बुलाए और अमेरिका उसे वीजा न दे तो वह संयुक्त राष्ट्र संघ नहीं जा सकेगा क्योंकि संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित है। इसलिए वीजा देने या न देने का निर्णय करना अमेरिका के क्षेत्राधिकार में आता है।
In simple words: यदि संयुक्त राष्ट्र संघ किसी को न्यूयॉर्क बुलाता है लेकिन अमेरिका उसे वीजा नहीं देता, तो वह व्यक्ति संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में नहीं जा पाएगा, क्योंकि मुख्यालय अमेरिका में है और वीजा जारी करना अमेरिकी सरकार के क्षेत्राधिकार में आता है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय की भौगोलिक स्थिति और मेजबान देश के वीजा नियमों के प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. आसियान क्षेत्रीय मंच के सदस्यों के नाम पता करें।
Answer: आसियान सदस्य-इण्डोनेशिया, मलयेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैण्ड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यानमार तथा कम्बोडिया ।
In simple words: आसियान (ASEAN) क्षेत्रीय मंच के सदस्य दक्षिण-पूर्व एशिया के देश हैं जिनमें इण्डोनेशिया, मलयेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैण्ड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यानमार और कम्बोडिया शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के सदस्य देशों के नाम याद रखना सामान्य ज्ञान और परीक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
UP Board Class 12 Civics Chapter 6 Other Important Questions
UP Board Class 12 Civics Chapter 6 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
Question 1. संयुक्त राष्ट्र संघ का विकास-क्रम, स्थापना तथा उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए । अथवा द्वितीय विश्वयुद्ध काल में संयुक्त राष्ट्र संघ के विकास क्रम का विस्तार से वर्णन कीजिए ।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ का विकास-क्रम एवं स्थापना-
1. राष्ट्र संघ की असफलता-प्रथम विश्वयुद्ध ने सम्पूर्ण विश्व को इस बात के लिए सचेत किया कि अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों के समाधान के लिए एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन के निर्माण का प्रयास आवश्यक रूप से किया जाना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप राष्ट्र संघ (लीग ऑफ नेशंस) का जन्म हुआ, लेकिन प्रारम्भिक सफलताओं के बावजूद यह संगठन द्वितीय विश्वयुद्ध को रोकने में सफल नहीं हो पाया। प्रथम विश्वयुद्ध की तुलना में द्वितीय विश्वयुद्ध में जन-धन की बहुत हानि हुई ।
2. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के प्रयास-
(i) अटलाण्टिक चार्टर (अगस्त 1941)-द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान वैश्विक शान्ति की स्थापना हेतु एक नयी विश्व संस्था की स्थापना की दिशा में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट एवं ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री चर्चिल ने विश्व शान्ति के आधारभूत सिद्धान्तों की व्यवस्था की। इस पर दोनों देशों के नेताओं ने अगस्त 1941 में हस्ताक्षर किए जिसे 'अटलाण्टिक चार्टर' के नाम से जाना जाता है।
(ii) संयुक्त राष्ट्र घोषणा-पत्र (जनवरी 1942)-धुरी शक्तियों के विरुद्ध लड़ रहे 26 मित्र राष्ट्र अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट एवं ब्रितानी प्रधानमन्त्री चर्चिल द्वारा हस्ताक्षरित किए गए। ये नेता अटलाण्टिक चार्टर के समर्थन में जनवरी 1942 में वाशिंगटन (संयुक्त राज्य अमेरिका) में मिले और दिसम्बर 1943 में संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
(iii) याल्टा सम्मेलन (फरवरी 1945)—विश्व के तीन बड़े नेताओं-अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट, ब्रितानी प्रधानमन्त्री चर्चिल एवं सोवियत राष्ट्रपति स्टालिन ने फरवरी 1945 में याल्टा सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ के गठन, प्रकृति व उसकी सदस्यता पर चर्चा की गयी। इस सम्मेलन में ही प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र संघ के बारे में विचार करने के लिए एक सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया।
(iv) सेन-फ्रांसिस्को सम्मेलन (अप्रैल-मई 1945)-अप्रैल-मई 1945 के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के सेन-फ्रांसिस्को में संयुक्त राष्ट्र संघ का अन्तर्राष्ट्रीय संगठन बनाने के मुद्दे पर केन्द्रित सम्मेलन हुआ। यह सम्मेलन दो महीने तक चला। इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ का चार्टर तैयार किया गया।
(v) संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर पर हस्ताक्षर (जून 1945)-सेन-फ्रांसिस्को सम्मेलन के दौरान तैयार किए गए संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर पर 26 जून, 1945 को 50 देशों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए। पोलैण्ड ने इस चार्टर पर 15 अक्टूबर, 1945 को हस्ताक्षर किए। इस तरह संयुक्त राष्ट्र संघ के 51 मूल संस्थापक सदस्य हैं।
3. संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना-24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गयी। तभी से प्रतिवर्ष 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के पश्चात् राष्ट्र संघ के अस्तित्व को समाप्त कर दिया गया। भारत 30 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ में शामिल हो गया। वर्तमान में इसकी सदस्य संख्या 193 है। इसका अन्तिम सदस्य दक्षिणी सूडान है जो सन् 2011 में इसका सदस्य बना था।
संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य
संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
1. अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना एवं शान्ति स्थापित करना।
2. राष्ट्रों के मध्य सहयोग स्थापित करना।
3. समस्त विश्व में सामाजिक-आर्थिक विकास की सम्भावनाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों को एक-साथ लाना।
4. किसी कारणवश विभिन्न देशों के मध्य युद्ध छिड़ने की स्थिति में शत्रुता के दायरे को सीमित करना।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ का विकास राष्ट्र संघ की असफलता के बाद, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अटलांटिक चार्टर, संयुक्त राष्ट्र घोषणा-पत्र, याल्टा और सेन-फ्रांसिस्को सम्मेलनों के माध्यम से हुआ, जिसकी स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 को वैश्विक शांति, सहयोग और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के ऐतिहासिक विकास-क्रम, उसकी स्थापना की तारीख, संस्थापक सदस्य संख्या और उसके चार प्रमुख उद्देश्यों को क्रमबद्ध तरीके से याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ क्या अमेरिका को अपनी मनमानी करने से रोक सकता है? यदि नहीं तो क्यों? एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता को बताइए।
Answer: सन् 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद विश्व एक-ध्रुवीय हो गया है। इस एक-ध्रुवीय विश्व की एकमात्र महाशक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका है। वर्तमान में इसका कोई प्रतिद्वन्द्वी देश नहीं है। ऐसी स्थिति में संयुक्त राष्ट्र संघ अमेरिका को अपनी मनमानी करने से रोक नहीं सकता। एक-धुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ अमेरिका को अपनी मनमानी करने से नहीं रोक सकता एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ निम्नलिखित कारणों से संयुक्त राज्य अमेरिका को अपनी मनमानी करने से नहीं रोक सकता-
1. एकमात्र मजबूत सैन्य व आर्थिक शक्ति-सोवियत संघ की अनुपस्थिति में अब संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व की एकमात्र महाशक्ति है। अपनी सैन्य और आर्थिक शक्ति के बल पर संयुक्त राज्य अमेरिका संयुक्त राष्ट्र संघ अथवा किसी अन्य अन्तर्राष्ट्रीय संगठन की अनदेखी कर सकता है।
2. संयुक्त राष्ट्र संघ पर अमेरिकी प्रभाव की अधिकता-संयुक्त राष्ट्र संघ में संयुक्त राज्य अमेरिका का अत्यधिक प्रभाव है। वह संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में सबसे अधिक योगदान करने वाला देश है। अमेरिका की वित्तीय ताकत बेजोड़ है। संयुक्त राष्ट्र संघ अमेरिकी भू-क्षेत्र में स्थित है और इस कारण भी अमेरिका का प्रभाव इसमें बढ़ जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के कई नौकरशाह इसके नागरिक हैं।
3. संयुक्त राज्य अमेरिका के पास निषेधाधिकार की शक्ति होना-संयुक्त राज्य अमेरिका के पास निषेधाधिकार (वीटो पावर) की शक्ति है। यदि अमेरिका को कभी यह लगे कि कोई प्रस्ताव उसके अथवा उसके साथी राष्ट्रों के हितों के अनुकूल नहीं है अथवा अमेरिका को यह प्रस्ताव ठीक न लगे तो अपनी निषेधाधिकार शक्ति से वह इसे रोक सकता है।
4. संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के चयन में अमेरिकी प्रभाव-संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी ताकत और निषेधाधिकार शक्ति के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के चयन में भी अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उसकी बात को महत्त्व प्रदान किया जाता है।
5. विश्व समुदाय में फूट डालने में सक्षम-संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी सैन्य एवं आर्थिक ताकत के बल पर विश्व समुदाय में फूट डाल सकता है और डालता है ताकि उसकी नीतियों का विरोध संयुक्त राष्ट्र संघ में कमजोर हो जाए। इससे स्पष्ट होता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ संयुक्त राज्य अमेरिका की मनमानी पर अंकुश लगाने में विशेष सक्षम नहीं है।
एक-धुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता
यद्यपि संयुक्त राष्ट्र संघ इस एक-ध्रुवीय विश्व में अमेरिका को अपनी मनमानी करने से नहीं रोक सकता, लेकिन इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता को नकारा नहीं जा सकता।
एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया जा सकता है-
1. वार्तालाप के मंच के रूप में उपयोगिता-संयुक्त राष्ट्र संघ संयुक्त राज्य अमेरिका एवं शेष विश्व के मध्य विभिन्न मुद्दों पर बातचीत स्थापित कर सकता है। आवश्यकता पड़ने पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने ऐसा कई बार किया भी है।
2. अमेरिकी दृष्टि से उपयोगिता-अमेरिकी नेता संयुक्त राष्ट्र संघ की आलोचना करते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन वे इस बात को भी समझते हैं कि झगड़ों एवं सामाजिक-आर्थिक विकास के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से 193 देशों को एक-साथ किया जा सकता है।
3. शेष विश्व के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता-शेष विश्व के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ एक ऐसा मंच है जहाँ अमेरिकी रवैये एवं नीतियों पर कुछ अंकुश लगाया जा सकता है। यह बात ठीक है कि अमेरिका के विरुद्ध शेष विश्व शायद ही कभी एकजुट हो पाता है और अमेरिका की ताकत पर अंकुश लगाना एक सीमा तक असम्भव है, लेकिन इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र संघ ही वह स्थान है जहाँ अमेरिका के किसी विशेष रवैये एवं नीति की आलोचना की सुनवाई हो सकती है और कोई मध्य का रास्ता निकालने एवं रियायत देने की बात कही जा सकती है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था होने के बावजूद वर्तमान विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता बनी हुई है।
In simple words: एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ अपनी सीमित शक्तियों, अमेरिकी सैन्य-आर्थिक शक्ति, वीटो पावर और इसके आंतरिक प्रभाव के कारण अमेरिका की मनमानी को पूरी तरह से रोक नहीं पाता है; फिर भी, यह बातचीत का मंच प्रदान करता है, अमेरिकी नेताओं के लिए समस्याओं का समाधान करता है, और शेष विश्व को अमेरिकी नीतियों पर अंकुश लगाने का अवसर देता है, जिससे इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
🎯 Exam Tip: एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र की सीमाओं और उसकी निरंतर प्रासंगिकता दोनों पहलुओं का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है, खासकर अमेरिका के प्रभाव के संदर्भ में।
Question 3. संयुक्त राष्ट्र संघ के सुधारों में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका का परीक्षण कीजिए ।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ के सुधारों में भारत की भूमिका भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के ढाँचे में सुधार के मुद्दे का निम्नलिखित आधारों पर समर्थन किया है
1. संयुक्त राष्ट्र संघ की मजबूती पर बल-बदलते हुए विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ की मजबूती और दृढ़ता आवश्यक है।
2. विकास के मुद्दे पर बल-संयुक्त राष्ट्र संघ विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और विकास को बढ़ावा देने में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाए ।
3. सुरक्षा परिषद् की संरचना में सुधार किया जाए-इस सन्दर्भ में भारत के प्रमुख तर्क निम्नलिखित-
• सुरक्षा परिषद् की संरचना प्रतिनिधिमूलक हो-भारत का तर्क है कि सुरक्षा परिषद् का विस्तार करने पर वह ज्यादा प्रतिनिधिमूलक होगी तथा उसे विश्व बिरादरी का अधिक समर्थन मिलेगा ।
• सुरक्षा परिषद् में विकासशील देशों की संख्या बढ़ाई जाए-संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में ज्यादातर विकासशील सदस्य देश हैं। इसलिए सुरक्षा परिषद् में उनका यथोचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
• सुरक्षा परिषद् की गतिविधियों का दायरा बढ़ा है-सुरक्षा परिषद् के काम-काज की सफलता विश्व-बिरादरी के समर्थन पर निर्भर है। इस कारण सुरक्षा परिषद् के पुनर्गठन की कोई योजना व्यापक धरातल पर बननी चाहिए ।
संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका
24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई। भारत संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रारम्भिक सदस्य है। संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है-
1. संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता बढ़ाने में भारत की भूमिका-भारत की सदा ही यह नीति रही है कि विश्व शान्ति को बनाए रखने के लिए तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की सफलता के लिए संसार के सभी देशों को सदस्य बनना चाहिए।
2. संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य अंगों में भारत की भूमिका-संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य अंगों तथा विशेष अभिकरणों में भारत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है।
3. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति तथा सुरक्षा की दृष्टि से भारत का योगदान-भारत ने विश्व शान्ति एवं सुरक्षा को बनाए रखने में संयुक्त राष्ट्र संघ में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसने कोरिया समस्या के समाधान, स्वेज नहर की समस्या, कांगो की समस्या के समाधान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है।
4. उपनिवेशवाद तथा रंगभेद की नीति का विरोध-भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा में उपनिवेशवाद तथा रंगभेद की नीति के विरुद्ध आवाज उठायी है।
5. निःशस्त्रीकरण के प्रयास-भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के निःशस्त्रीकरण सम्बन्धी प्रयासों का हमेशा समर्थन किया है।
6. मानवाधिकारों का समर्थन-भारत ने अपने नागरिकों को लगभग वे सभी अधिकार प्रदान किए हैं, जो संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित किए गए हैं।
7. गुटनिरपेक्ष आन्दोलन-भारत ने शीतयुद्ध काल में गुटनिरपेक्षता की नीति को सामने रखकर गुटनिरपेक्ष आन्दोलन को मजबूत बनाया तथा संयुक्त राष्ट्र संघ को पूरी तरह से दो गुटों में विभक्त होने से बचाया।
In simple words: भारत संयुक्त राष्ट्र संघ की मजबूती, विकास और सुरक्षा परिषद् में सुधार का समर्थन करता है, जिसमें स्थायी और विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना शामिल है; साथ ही, भारत संघ का एक प्रारंभिक सदस्य रहा है जिसने अंतर्राष्ट्रीय शांति, उपनिवेशवाद-रंगभेद विरोध, निःशस्त्रीकरण, मानवाधिकारों के समर्थन और गुटनिरपेक्षता के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका को सुधारों के समर्थन और ऐतिहासिक योगदान दोनों संदर्भों में विश्लेषित करना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
लघुउत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. विश्व शान्ति बनाए रखने में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
Answer: विश्व शान्ति स्थापित करने की दिशा में संयुक्त राष्ट्र संघ ने निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण कार्य किए हैं-
1. कोरिया युद्ध को रोकना-सन् 1950 में उत्तरी कोरिया ने दक्षिणी कोरिया पर हमला किया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस युद्ध को रोकने के लिए 16 देशों के सैन्य बलों को कोरिया में प्रतिरोध के लिए भेजा। इस सेना की सहायता से संयुक्त राष्ट्र संघ ने दोनों देशों में युद्ध समाप्त करवाया।
2. स्वेज नहर संकट-मिस्र ने जुलाई 1965 में स्वेज नहर के राष्ट्रीकरण की घोषणा की। इसके विरोध में इंग्लैण्ड, फ्रांस तथा इजराइल ने मिस्र पर हमला कर दिया। इस युद्ध को रुकवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रयास किए और अन्ततः यह अपने प्रयासों में सफल रहा।
3. खाड़ी युद्ध-सन् 1991 में खाड़ी युद्ध के प्रारम्भ होने के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपनी बैठक बुलाई तथा वहाँ शान्ति स्थापित करने के लिए प्रस्ताव पारित किया। इस प्रकार खाड़ी युद्ध रुकवाने में भी संयुक्त राष्ट्र संघ की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।
4. निःशस्त्रीकरण-संयुक्त राष्ट्र संघ ने निःशस्त्रीकरण को लागू करने तथा विध्वंसक परमाणु हथियारों पर रोक लगाने हेतु समय-समय पर अनेक सम्मेलन आयोजित किए तथा प्रस्ताव पारित किए।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ ने कोरिया युद्ध, स्वेज नहर संकट और खाड़ी युद्ध जैसे बड़े संघर्षों को रोकने या शांत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, साथ ही इसने निःशस्त्रीकरण के प्रयासों को भी बढ़ावा दिया है, जिससे वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने में इसका योगदान अमूल्य है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व शांति स्थापित करने के लिए किए गए प्रमुख हस्तक्षेपों और निःशस्त्रीकरण के प्रयासों के उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. संयुक्त राष्ट्र संघ की सफलताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ की सफलताएँ-
1. शान्ति एवं सुरक्षा की स्थापना-संयुक्त राष्ट्र संघ ने अनेक अन्तर्राष्ट्रीय विवादों, मतभेदों व तनावों को अनेक बार युद्ध में परिणत होने से बचाया है।
2. आतंकवाद का विरोध-संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 24 दिसम्बर, 1994 को सब प्रकार के आतंकवाद के विरुद्ध एक प्रस्ताव पारित कर विश्व समुदाय से आतंकवाद की चुनौती को मिलकर सामना करने का आग्रह किया है।
3. निःशस्त्रीकरण-संयुक्त राष्ट्र संघ ने निःशस्त्रीकरण के लिए अनेक प्रयास किए हैं और आज भी कर रहा है।
4. साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद का विरोध-संयुक्त राष्ट्र संघ ने साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद को समाप्त करने में बहुत सहायता दी है।
5. अन्तर्राष्ट्रीय भावना का विकास-संयुक्त राष्ट्र संघ निरन्तर अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग, सद्भावना और सह-अस्तित्व की भावना का विकास कर रहा है।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतर्राष्ट्रीय विवादों को युद्ध में बदलने से रोका है, आतंकवाद, साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद का विरोध किया है, निःशस्त्रीकरण को बढ़ावा दिया है, और निरंतर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा सद्भावना की भावना को विकसित किया है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रमुख सफलताओं को बिन्दुवार याद रखना और प्रत्येक बिंदु को संक्षिप्त में समझाना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. हमें अन्तर्राष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता क्यों है?
Answer: हमें अन्तर्राष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता अग्रलिखित कारणों से है-
1. अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के शान्तिपूर्ण समाधान के लिए-दो या दो से अधिक देशों के मध्य उपजे हुए विवाद का शान्तिपूर्ण समाधान बातचीत द्वारा ही हो सकता है। बातचीत के माध्यम से ऐसे विवादों को बिना युद्ध के हल करने की दृष्टि से अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। ऐसे संगठन समस्याओं के शान्तिपूर्ण समाधान के सदस्य देशों की सहायता करते हैं।
2. चुनौतीपूर्ण समस्याओं के समाधान में विभिन्न देशों को मिलकर कार्य करने में सहायता करना-अन्तर्राष्ट्रीय संगठन ऐसी चुनौतीपूर्ण समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक होते हैं जिनसे निपटने के लिए विभिन्न देशों को मिलकर सहयोग करना आवश्यक होता है।
3. सहयोग करने के उपाय एवं सूचनाएँ जुटाने में सहायता करना—एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन नियमों एवं नौकरशाही की एक रूपरेखा दे सकता है ताकि सदस्यों को यह विश्वास हो कि आने वाली लागत में सभी की समुचित साझेदारी होगी, लाभ का बँटवारा न्यायोचित होगा और कोई सदस्य उस समझौते में शामिल हो जाता है तो वह इस समझौते के नियम व शर्तों का पालन करेगा।
In simple words: अंतर्राष्ट्रीय संगठन वैश्विक समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान, साझा चुनौतियों से निपटने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुविधाजनक बनाने और देशों के बीच समझौतों के लिए एक विश्वसनीय ढांचा प्रदान करने हेतु आवश्यक हैं।
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता के पीछे के मुख्य कारणों को समझना और उन्हें उदाहरणों के साथ स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न अंगों का संक्षिप्त परिचय दीजिए ।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न अंग संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न अंगों का परिचय निम्नवत् है-
1. आम सभा-यह संयुक्त राष्ट्र संघ का सबसे बड़ा अंग है। इसे महासभा भी कहा जाता है। यह एक तरह से विश्व की संसद है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्य देश इसके सदस्य होते हैं। सभी सदस्यों को एकसमान मत का अधिकार होता है। प्रमुख निर्णयों के लिए दो-तिहाई तथा अन्य निर्णयों के लिए सामान्य बहुमत की आवश्यकता होती है।
2. सुरक्षा परिषद्-सुरक्षा परिषद् के 15 सदस्य होते हैं जिनमें से 5 स्थायी एवं 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। स्थायी सदस्य-संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस व इंग्लैण्ड हैं जो वीटो का अधिकार रखते हैं।
3. सचिवालय–सचिवालय में महासचिव एवं संघ की आवश्यकतानुसार कर्मचारी होते हैं। महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासभा द्वारा पाँच साल के लिए की जाती है।
4. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय-अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय हेग में है। इसमें 15 न्यायाधीश होते हैं। इनका चुनाव 9 वर्षों के लिए आम सभा व सुरक्षा परिषद् द्वारा पूर्ण बहुमत से किया जाता है।
5. आर्थिक और सामाजिक परिषद्-इसके सदस्य देशों का चुनाव आम सभा द्वारा तीन वर्षों के लिए किया जाता है। इसके 54 सदस्य होते हैं।
6. न्यासिता परिषद्-संयुक्त राष्ट्र संघ का यह अंग 1 नवम्बर, 1994 से स्थगित है। इसका कार्य पलाउ के स्वतन्त्र होने के साथ समाप्त हो चुका है।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंग महासभा, सुरक्षा परिषद्, सचिवालय, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, आर्थिक और सामाजिक परिषद् तथा न्यासिता परिषद् हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशिष्ट कार्य और सदस्य संरचना है, जैसे महासभा विश्व की संसद है, सुरक्षा परिषद् शांति बनाए रखती है और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय विवादों का निपटारा करता है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रत्येक प्रमुख अंग का नाम, उसकी संरचना और मुख्य कार्य को संक्षिप्त में याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 5. 1991 के पश्चात् विश्व की राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों में क्या परिवर्तन आए हैं?
Answer: सन् 1991 के बाद वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों में निम्नलिखित परिवर्तन आए हैं-
1. 25 दिसम्बर, 1991 को शीतयुद्ध के काल की दो महाशक्तियाँ संयुक्त राज्य अमेरिका एवं सोवियत संघ में से एक महाशक्ति सोवियत संघ का विघटन हो गया।
2. सोवियत संघ के विघटन के बाद विश्व एक-ध्रुवीय हो गया है जिसमें सबसे ताकतवर देश संयुक्त राज्य अमेरिका है।
3. वर्तमान में सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य रूस एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य कहीं अधिक सहयोगात्मक सम्बन्ध हैं।
4. चीन बड़ी तीव्र गति से एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।
5. भारत भी तीव्र गति से एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।
6. एशिया की अर्थव्यवस्था अप्रत्याशित दर से उन्नति कर रही है।
7. पूर्वी सोवियत संघ के विघटन से नए बने राष्ट्र एवं पूर्वी यूरोप के पूर्व साम्यवादी देश संयुक्त राष्ट्र संघ में शामिल हो गए हैं।
8. वर्तमान विश्व के समक्ष अनेक चुनौतियाँ विद्यमान हैं जिनमें जनसंहार, गृहयुद्ध, जातीय संघर्ष, आतंकवाद, परमाण्विक प्रसार, महामारी, जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण की हानि आदि प्रमुख हैं।
In simple words: 1991 के बाद सोवियत संघ के विघटन से विश्व एक-ध्रुवीय हो गया, अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बना, चीन और भारत जैसी एशियाई अर्थव्यवस्थाएं तेजी से उभरीं, और रूस-अमेरिका संबंध सुधरे, लेकिन साथ ही आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, जनसंहार और महामारियों जैसी नई वैश्विक चुनौतियां भी सामने आईं।
🎯 Exam Tip: 1991 के बाद के वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों को बिन्दुवार याद रखना, खासकर शीतयुद्ध के अंत, नई शक्तियों के उदय और उभरती चुनौतियों के संदर्भ में, महत्वपूर्ण है।
Question 6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों के नाम बताइए तथा उनकी कार्य-प्रणाली की कमियाँ बताइए।
Answer: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के पाँच स्थायी सदस्य हैं-
1. संयुक्त राज्य अमेरिका,
2. फ्रांस,
3. ब्रिटेन,
4. रूस,
5. चोन ।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की कार्य-प्रणाली की कमियाँ सन् 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में एक प्रस्ताव स्वीकृत कर निम्नलिखित कमियाँ बतायी गईं-
1. वर्तमान समय में सुरक्षा परिषद् राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती।
2. सुरक्षा परिषद् के फैसलों पर पश्चिमी मूल्यों एवं हितों की छाप होती है। इसमें कुछ देशों के दबाव में रहकर फैसले लिए जाते हैं।
3. सुरक्षा परिषद् में बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं है। केवल पाँच देशों को ही वीटो का अधिकार दिया गया है। शेष विश्व के देशों की बातों को सुरक्षा परिषद् में कोई महत्त्व नहीं दिया गया है। समस्त फैसलों पर केवल पाँच देशों का ही प्रभाव रहता है।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन हैं, जिनकी कार्यप्रणाली की कमियों में राजनीतिक वास्तविकताओं का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व, पश्चिमी मूल्यों का प्रभुत्व, कुछ देशों के दबाव में फैसले लेना, और वीटो शक्ति के कारण अन्य देशों के हितों की उपेक्षा शामिल है।
🎯 Exam Tip: सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों के नाम और उनकी कार्य-प्रणाली की आलोचनाओं को याद रखना, विशेषकर प्रतिनिधित्व और वीटो शक्ति के संदर्भ में, परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. सुरक्षा परिषद् की कार्यप्रणाली में सुधार लाने हेतु नए स्थायी, स्थायी तथा अस्थायी सदस्यों के लिए प्रस्तावित मानदण्डों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए ।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ के संगठन में परिवर्तन की उठती हुई माँग के परिप्रेक्ष्य में 1 जनवरी, 1997 को तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान ने रचनात्मक कदम उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार के लिए सुझावों को आमन्त्रित किया। यहाँ यह तथ्य उल्लेखनीय है कि इस प्रक्रिया में इस प्रश्न को भी शामिल किया गया है कि क्या सुरक्षा परिषद् के नए सदस्य होने चाहिए।
इस दौरान अनेक सुझाव आए, जिनके द्वारा सुरक्षा परिषद् की स्थायी तथा अस्थायी सदस्यता हेतु मापदण्ड सुझाए गए। इनमें से कुछ प्रमुख सुझाव निम्नलिखित थे-
1. संयुक्त राष्ट्र संघ के एक नए सदस्य को बड़ी आर्थिक तथा सैन्य शक्ति होनी चाहिए।
2. ऐसे देश का संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में अधिकाधिक योगदान होना चाहिए।
3. नए सदस्य को जनसंख्या के दृष्टिकोण से विशाल देश होना चाहिए।
4. नई सदस्यता पाने वाले देश के लोकतन्त्र तथा मानवाधिकारों का सम्मान करने वाला होना चाहिए।
5. यह देश ऐसा हो जो अपनी भौगोलिक संरचना, अर्थव्यवस्था तथा संस्कृति के दृष्टिकोण से दुनिया की विविधताओं का प्रतिनिधित्व करता हो
उक्त से स्पष्ट है कि इन मापदण्डों में से प्रत्येक की कुछ-न-कुछ वैधता है। सरकारें अपने-अपने हित एवं महत्त्वाकांक्षाओं के दृष्टिकोण से कुछ कसौटियों को लाभप्रद तो कुछ को नुकसानदेह मानती हैं। चाहे कोई देश सुरक्षा परिषद् की सदस्यता हेतु इच्छुक न हो, वह इसके बावजूद यह बता सकता है कि इन कसौटियों में अमुक परेशानी है।
In simple words: सुरक्षा परिषद् में नए स्थायी और अस्थायी सदस्यों के लिए प्रस्तावित मानदण्डों में बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्ति, संयुक्त राष्ट्र बजट में योगदान, विशाल जनसंख्या, लोकतांत्रिक शासन और मानवाधिकारों का सम्मान, तथा भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व शामिल है, हालांकि इन मानदंडों की वैधता पर अलग-अलग राय है।
🎯 Exam Tip: सुरक्षा परिषद् की सदस्यता के लिए प्रस्तावित मानदण्डों को याद रखना और उनके पीछे के तर्कों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 8. सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों के विशेषाधिकार को क्यों समाप्त किया जा सकता है?
Answer: विश्व में स्थिरता बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणापत्र के अनुरूप उसके पाँचों स्थायी सदस्यों को विशेषाधिकार अर्थात् वीटो शक्ति प्रदान करना उनकी सदस्यता को स्थायी बनाए रखने के लिए परमावश्यक है। दुनिया में ये देश परमाणु हथियारों से सम्पन्न बड़ी शक्तियाँ हैं। हालाँकि शीतयुद्ध का अन्त हो चुका है, लेकिन अभी भी साम्यवाद का अन्त नहीं हुआ है। यह तथ्य भी विश्व शान्ति, उदारवाद, वैश्वीकरण, व्यक्तिगत-राजनीतिक स्वतन्त्रताओं तथा समाप्ति के अधिकार इत्यादि हेतु भयंकर खतरा बन सकता है। दुनिया अभी भी इतने विशाल स्तर पर परिवर्तनों के लिए तैयार नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी 193 सदस्यों को समानता का स्तर प्रदान कर दिया जाए।
इस तथ्य को भी नजर अन्दाज नहीं किया जा सकता कि वीटो पावर को समाप्त किए जाने की परिस्थिति में इन शक्तिशाली देशों की रुचि संयुक्त राष्ट्र संघ में नहीं रहेगी। संयुक्त राष्ट्र संघ से अलग होकर ये राष्ट्र अपनी इच्छानुसार कार्य करेंगे तथा इनके जुड़ाव अथवा समर्थन के अभाव में यह संगठन प्रभावहीन हो जाएगा। ऐसी परिस्थिति में विश्व सुरक्षा एवं अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति तथा विकास को अपार क्षति उठानी पड़ेगी ।
In simple words: सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों के वीटो विशेषाधिकार को समाप्त करना वैश्विक स्थिरता को खतरे में डाल सकता है, क्योंकि ये परमाणु शक्तियां हैं और इनके संगठन से अलग होने पर संयुक्त राष्ट्र संघ कमजोर पड़ जाएगा, जिससे अंतर्राष्ट्रीय शांति और विकास को भारी नुकसान हो सकता है।
🎯 Exam Tip: वीटो शक्ति को समाप्त करने के पक्ष और विपक्ष में तर्कों को संतुलित तरीके से समझना और वैश्विक राजनीति पर इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।
Question 9. विश्व बैंक की स्थापना एवं कार्यों के बारे में बताइए ।
Answer: विश्व बैंक की औपचारिक स्थापना द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सन् 1945 में हुई ।
विश्व बैंक के कार्य विश्व बैंक की गतिविधियाँ मुख्य रूप से विकासशील देशों से सम्बन्धित हैं, जो निम्नलिखित हैं-
(1) विश्व बैंक मानवीय विकास (शिक्षा, स्वास्थ्य), कृषि एवं ग्रामीण विकास (सिंचाई, ग्रामीण सेवाएँ), आधारभूत ढाँचा (सड़क, विद्युत, शहरी विकास), पर्यावरण सुरक्षा (प्रदूषण में कमी, नियमों का निर्माण व उन्हें लागू करना) एवं सुशासन (कदाचार का विरोध, विविध संस्थाओं का विकास) के लिए कार्य करता है।
(2) यह अपने सदस्य देशों को आसान शर्तों पर ऋण देता है।
(3) यह अपने सदस्य देशों को अनुदान प्रदान करता है, अधिक निर्धन देशों को यह अनुदान वापस नहीं चुकाना पड़ता है।
इस तरह विश्व बैंक समकालीन वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है। यह निर्धन देशों के विकास में अनुदान व ऋण आदि के माध्यम से पर्याप्त सहायता प्रदान कर रहा है।
In simple words: विश्व बैंक की स्थापना 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुई थी, जिसका मुख्य कार्य विकासशील देशों को आसान शर्तों पर ऋण और अनुदान देना है, साथ ही यह मानवीय विकास, ग्रामीण विकास, आधारभूत ढांचे, पर्यावरण सुरक्षा और सुशासन जैसे क्षेत्रों में सहायता करके वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: विश्व बैंक की स्थापना का वर्ष, उसके मुख्य कार्यक्षेत्र (मानवीय विकास, आधारभूत ढाँचा, पर्यावरण) और विकासशील देशों के लिए उसकी भूमिका को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 10. संयुक्त राष्ट्र संघको सशक्त बनाने हेतु क्या कदम उठाए जाने चाहिए? सुझाव दीजिए।
Answer: बदलते हुए परिवेश में संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रासंगिक तथा सशक्त बनाने हेतु उसमें सुधारों की आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए निम्नलिखित सुधारात्मक कदम उठाए जाने जरूरी हैं
1. विश्व के जो देश अभी तक संयुक्त राष्ट्र के सदस्य नहीं हैं उन्हें सदस्यता हेतु सहमत किया जाना चाहिए।
2. समस्त सदस्यों को एक मत देने की शक्ति होनी चाहिए तथा वह व्यक्तिगत रूप से गुप्त मतदान के रूप में प्रयुक्त किया जाना चाहिए। सभी निर्णय अर्थात् फैसले महासभा द्वारा बहुमत के आधार पर किए जाने चाहिए।
3. सुरक्षा परिषद् में पाँच के स्थान पर पन्द्रह स्थायी सदस्य होने चाहिए तथा वीटो का अधिकार समाप्त कर दिया जाना चाहिए ।
4. परिवर्तित विश्व में भारत, जापान, जर्मनी, कनाडा, ब्राजील तथा दक्षिण अफ्रीका को स्थायी सदस्यता प्रदान की जानी चाहिए ।
5. पर्यावरण, जनसंख्या तथा आतंकवाद जैसी समस्याओं और परमाणु हथियारों को नष्ट करने में सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों को पूर्ण सहयोग करना चाहिए।
6. सुरक्षा परिषद् में अस्थायी सदस्यों की संख्या में भी वृद्धि होनी चाहिए।
7. संयुक्त राष्ट्र संघ के कोष में अभिवृद्धि की जानी चाहिए जिससे वह विकास एवं वृद्धि के और अधिकाधिक कार्यक्रमों को संचालित कर सके ।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए सभी देशों को सदस्य बनाना, महासभा में गुप्त मतदान और बहुमत से निर्णय लेना, सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना, वीटो शक्ति समाप्त करना, भारत जैसे देशों को स्थायी सदस्यता देना, और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए दिए गए विभिन्न सुधारात्मक कदमों को समझना और उनका विस्तृत विश्लेषण करना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 11. विश्व व्यापार संगठन के विषय में आप क्या जानते हैं?
Answer: विश्व व्यापार संगठन की स्थापना 'जनरल एग्रीमेण्ट ऑन ट्रेड एण्ड टैरिफ' (GATT) के स्थान पर 1 जनवरी, 1945 को हुई थी।
कार्य-विश्व व्यापार संगठन एक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का संगठन है। यह वैश्विक व्यापार के नियमों को निश्चित करने का कार्य करता है।
इस संगठन के सदस्य देशों की संख्या 150 है। इसमें होने वाले फैसले समस्त सदस्यों की आपसी सहमति से लिए जाते हैं। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ व जापान जैसी बड़ी आर्थिक शक्तियों ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों को इस तरह बनाने में सफलता प्राप्त कर ली है जिससे इनके हित सधते हों। इस संगठन के अधिकांश विकासशील देशों को यह शिकायत रहती है कि इस संगठन की कार्यविधि पारदर्शी नहीं है और बड़ी आर्थिक शक्तियों को अधिक महत्त्व प्रदान किया जाता है। अर्थात् यह संगठन बड़ी आर्थिक शक्तियों के प्रभाव में कार्य करता है।
In simple words: विश्व व्यापार संगठन (WTO), जिसकी स्थापना 1995 में GATT के स्थान पर हुई थी, एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो वैश्विक व्यापार नियमों को तय करता है, जिसमें 150 से अधिक सदस्य देश हैं; हालांकि इसके निर्णय आपसी सहमति से लिए जाते हैं, फिर भी विकासशील देशों को अक्सर शिकायत रहती है कि यह संगठन बड़ी आर्थिक शक्तियों के प्रभाव में काम करता है।
🎯 Exam Tip: विश्व व्यापार संगठन की स्थापना का वर्ष, उसके पूर्ववर्ती संगठन, प्रमुख कार्य, सदस्य संख्या और उसकी कार्यप्रणाली की आलोचनाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. संयुक्त राष्ट्र संघ एक अनिवार्य संगठन है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर की पुष्टि में कोई दो तर्क दीजिए।
Answer: हाँ, हम इस कथन से सहमत हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ एक अनिवार्य संगठन है। संयुक्त राष्ट्र संघ निम्नलिखित कारणों से एक अनिवार्य संगठन है-
1. संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व में शान्ति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। सम्पूर्ण विश्व में बढ़ते आतंकवाद एवं भय को समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे संगठनों की ही आवश्यकता है।
2. संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व के देशों को एक ऐसा मंच प्रदान किया है, जहाँ अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं पर विचार-विमर्श होता है।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ एक अनिवार्य संगठन है क्योंकि यह विश्व शांति और सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक है, और यह अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं पर चर्चा व समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ की अनिवार्यता के कारणों को संक्षेप में और तार्किक रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब और क्यों की गयी? वर्तमान में इसके कितने सदस्य हैं?
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-45) की भयानक तबाही को देखकर विश्व के सभी भागों में प्रत्येक, व्यक्ति यह सोचने लगा कि यदि ऐसा एक और युद्ध हुआ तो सम्पूर्ण विश्व और मानव जाति का सर्वनाश हो जाएगा। अतः अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति स्थापित किए जाने की दिशा में प्रयास किए जाने प्रारम्भ हुए। इसके लिए एक ऐसे संगठन की स्थापना जरूरी थी जिसको विश्व के सभी देश महत्त्व दें। अतः 24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गयी। आरम्भ में 51 राष्ट्र इसके सदस्य थे। वर्तमान में 193 राष्ट्र इसके सदस्य हैं। सन् 2011 में दक्षिणी सूडान 193वाँ सदस्य बना है।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 को द्वितीय विश्वयुद्ध की तबाही के बाद वैश्विक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी, जिसमें शुरुआत में 51 सदस्य थे और वर्तमान में इसकी सदस्य संख्या 193 है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की तिथि, कारण और वर्तमान सदस्य संख्या को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. “संयुक्त राष्ट्र की स्थापना मानवता को स्वर्ग में पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि उसे नरक से बचाने के लिए हुई है।” डेग हैमरशोल्ड के इस कथन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: संयुक्त राष्ट्र के द्वितीय महासचिव डेग हैमरशोल्ड के उक्त कथन का तात्पर्य है कि संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्था का प्रमुख उद्देश्य दुनिया के समस्त लोगों की खराब स्थिति से उन्हें बचाना है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव की मान्यता है कि इसके माध्यम से संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों की दीर्घ समयावधि से चली आ रही समस्याएँ तथा विवाद, युद्ध लड़े बिना वार्ता के द्वारा हल किए जा सकते हैं। इसी तरह यह संगठन भयंकर जानलेवा बीमारियों; जैसे-एड्स तथा बर्ड फ्लू इत्यादि के कारगर तरीके से निपटने के लिए पूर्ण सहयोग देगा।
In simple words: डेग हैमरशोल्ड के कथन का अर्थ है कि संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य उद्देश्य मानवता को युद्ध, विवादों और जानलेवा बीमारियों जैसी गंभीर समस्याओं से बचाना है, न कि उसे पूर्ण आदर्श स्थिति में लाना, बल्कि विभिन्न देशों के बीच बातचीत और सहयोग से इन चुनौतियों का समाधान करना है।
🎯 Exam Tip: डेग हैमरशोल्ड के प्रसिद्ध कथन का अर्थ और संयुक्त राष्ट्र संघ के यथार्थवादी उद्देश्यों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 4. सुरक्षा परिषद् के पाँच स्थायी सदस्यों को ही वीटो का अधिकार क्यों दिया गया है?
Answer: सुरक्षा परिषद् के पाँच स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार इसलिए दिया गया है कि जिस समय संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई तब ये देश द्वितीय विश्वयुद्ध के विजेता थे और इस मामले पर इनकी सहमति सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण थी। संयुक्त राष्ट्र के शिल्पियों के मन-मस्तिष्क में यह डर समाया हुआ था कि यदि इन देशों को कुछ विशेषाधिकार प्रदान नहीं किए जाएँगे तो ये विश्व की समस्याओं में अधिक रुचि नहीं लेंगे।
In simple words: सुरक्षा परिषद् के पाँच स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार इसलिए दिया गया क्योंकि वे द्वितीय विश्वयुद्ध के विजेता थे और उनकी सहमति संगठन के लिए महत्वपूर्ण थी; यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे वैश्विक समस्याओं में सक्रिय रूप से भाग लेते रहें, उन्हें यह विशेषाधिकार प्रदान किया गया था।
🎯 Exam Tip: वीटो शक्ति के ऐतिहासिक संदर्भ और स्थायी सदस्यों को यह अधिकार देने के पीछे के कारणों को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 5. संयुक्त राष्ट्र संघ की सामाजिक और आर्थिक मुद्दों से निबटने के लिए कौन-कौन सी एजेन्सियाँ हैं? नाम लिखिए।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ की सामाजिक और आर्थिक मुद्दों से निबटने के लिए निम्नलिखित एजेन्सियाँ हैं –
1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO),
2. संयुक्त राष्ट्र संघ विकास कार्यक्रम (UNDP),
3. संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार आयोग (UNHRC),
4. संयुक्त राष्ट्र संघ शरणार्थी आयोग (UNHCR),
5. संयुक्त राष्ट्र संघ बाल कोष (UNICEF),
6. संयुक्त राष्ट्र संघ शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं सास्कृतिक संगठन (UNESCO)।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ सामाजिक और आर्थिक मुद्दों से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों पर निर्भर करता है, जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, मानवाधिकार आयोग, शरणार्थी आयोग, बाल कोष और शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रमुख सामाजिक और आर्थिक एजेंसियों के नाम और उनके संबंधित कार्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य कौन-कौन से हैं?
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
1. अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना एवं शान्ति स्थापित करना।
2. राष्ट्रों के मध्य सहयोग स्थापित करना।
3. समस्तं विश्व में सामाजिक-आर्थिक विकास की समानताओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों को एक साथ लाना।
4. किसी कारणवश विभिन्न देशों के मध्य युद्ध छिड़ने की स्थिति में शत्रुता के दायरे को सीमित करना।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना, विश्व शांति स्थापित करना, राष्ट्रों के बीच सहयोग बढ़ाना, सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और युद्ध की स्थिति में शत्रुता को सीमित करना है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के चार प्रमुख उद्देश्यों को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से याद रखना चाहिए।
Question 7. वैश्विक ताप वृद्धि से क्या आशय है?
Answer: वैश्विक ताप वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) से आशय कई कारणों से विश्व के तापमान के बढ़ने से है। वैश्विक ताप वृद्धि क्लोरो फ्लोरो कार्बन कहलाने वाले कुछ रसायनों के फैलाव के कारण हो रही है। वैश्विक ताप वृद्धि से समुद्र तल की ऊँचाई बढ़ने लगी है जिससे तटीय देशों के डूबने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
In simple words: वैश्विक ताप वृद्धि, या ग्लोबल वार्मिंग, पृथ्वी के औसत तापमान में कई कारणों से हो रही वृद्धि है, विशेषकर क्लोरो फ्लोरो कार्बन जैसे रसायनों के कारण, जिससे समुद्र का स्तर बढ़ रहा है और तटीय क्षेत्रों के डूबने का खतरा है।
🎯 Exam Tip: वैश्विक ताप वृद्धि की परिभाषा, उसके प्रमुख कारणों और परिणामों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 8. संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा/आम सभा के सम्बन्ध में आप क्या जानते हैं?
Answer: आम सभा (महासभा) संयुक्त राष्ट्र संघ का सबसे बड़ा अंग है। यह एक प्रकार से विश्व की संसद है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्य देश इसके सदस्य होते हैं। सभी सदस्यों को एक-समान मत का अधिकार होता है। आम सभा के लिए जाने वाले प्रमुख निर्णयों के लिए दो-तिहाई एवं अन्य निर्णयों के लिए सामान्य बहुमत की आवश्यकता होती है। इसके निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी नहीं होते । वर्तमान में इसके सदस्यों की संख्या 193 है।
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा, जिसे आम सभा भी कहते हैं, संघ का सबसे बड़ा अंग है और इसे विश्व की संसद के रूप में देखा जाता है, जहाँ सभी 193 सदस्य देशों को एक समान मत का अधिकार होता है और निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं, हालांकि इसके निर्णय बाध्यकारी नहीं होते।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र महासभा की संरचना, सदस्यों के अधिकार और निर्णयों की प्रकृति को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 9. वीटो पावर क्या है?
Answer: निषेधाधिकार या वीटो पावर सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन तथा फ्रांस को प्राप्त महत्त्वपूर्ण शक्ति है। निषेधाधिकार का अर्थ है कि यहाँ पाँच सदस्यों में से कोई भी एक सदस्य संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् में रखे गए प्रस्ताव के विरोध में वोट डाल दे तो वह प्रस्ताव पारित नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि सुरक्षा परिषद् का यदि कोई स्थायी सदस्य अनुपस्थित रहता है तो उसे निषेधाधिकार का प्रयोग नहीं माना जाएगा।
In simple words: वीटो पावर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के पांच स्थायी सदस्यों (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस) को प्राप्त एक विशेष नकारात्मक शक्ति है, जिसके तहत यदि कोई भी एक स्थायी सदस्य किसी प्रस्ताव के खिलाफ वोट करता है, तो वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता।
🎯 Exam Tip: वीटो पावर की परिभाषा, इसे धारण करने वाले देश और इसके प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।
Question 10. सुरक्षा परिषद् के लिए चार आवश्यक मापदण्ड बताइए जो उसकी सदस्यता के लिए आवश्यक हैं।
Answer: एक नए सदस्य देश के लिए सुरक्षा परिषद् की स्थायी एवं अस्थायी सदस्यता हेतु निम्नलिखित मानदण्ड सुझाए गए हैं-
1. एक नए सदस्य को बड़ी आर्थिक शक्ति होना चाहिए।
2. बड़ी सैन्य शक्ति होना चाहिए।
3. संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में ऐसे देश का योगदान अधिक होना चाहिए।
4. जनसंख्या की दृष्टि से एक बड़ा राष्ट्र होना चाहिए।
In simple words: सुरक्षा परिषद् की सदस्यता के लिए चार मुख्य मापदंड हैं- देश की बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्ति, संयुक्त राष्ट्र के बजट में महत्वपूर्ण योगदान, और विशाल जनसंख्या, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि नया सदस्य वैश्विक स्थिरता और सहयोग में प्रभावी भूमिका निभा सके।
🎯 Exam Tip: सुरक्षा परिषद् की सदस्यता के लिए निर्धारित प्रमुख मानदंडों को याद रखना और उन्हें संक्षेप में समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 11. सन् 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में एक प्रस्ताव पारित हुआ था। वह प्रस्ताव क्या था?
Answer: सन् 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में स्वीकृत प्रस्ताव में निम्नलिखित तीन शिकायतों का उल्लेख था
1. सुरक्षा परिषद् अब राजनीतिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती है।
2. सुरक्षा परिषद् के फैसले पर पश्चिमी मूल्यों और हितों की छाप होती है और इन फैसलों पर कुछ ही देशों का वर्चस्व होता है।
3. सुरक्षा परिषद् में विभिन्न देशों को बराबरी का प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं है।
In simple words: 1992 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद् के प्रतिनिधित्व की कमी, उसके फैसलों पर पश्चिमी मूल्यों और कुछ देशों के वर्चस्व, तथा विभिन्न देशों को समान प्रतिनिधित्व न मिलने जैसी शिकायतें उठाई गई थीं।
🎯 Exam Tip: 1992 के प्रस्ताव की प्रमुख शिकायतों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे सुरक्षा परिषद् में सुधार की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
Question 12. शीतयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र में हुए सुधारों का उल्लेख कीजिए ।
Answer: शीतयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र में निम्नलिखित सुधार लाए गए हैं-
1. इसके सदस्यों की संख्या लगातार बढ़ी है। आण्विक ऊर्जा एजेन्सी, साधारण सभा तथा सुरक्षा परिषद् को उत्तरदायी बनाया गया है।
2. विशिष्ट कार्यों हेतु विशेष आयोग गठित किए गए हैं। उदाहरणार्थ-मानवाधिकार, मादक द्रव्य, टिकाऊ विकास तथा महिलाओं की स्थिति सम्बन्धी आयोग ।
3. विश्वव्यापी आतंकवाद के खिलाफ अनेक प्रस्ताव पारित किए गए हैं।
In simple words: शीतयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र में सदस्यों की संख्या बढ़ी, आण्विक ऊर्जा एजेन्सी, महासभा और सुरक्षा परिषद् को अधिक उत्तरदायी बनाया गया, मानवाधिकार, मादक द्रव्य और टिकाऊ विकास जैसे विशिष्ट कार्यों के लिए आयोग गठित किए गए, और आतंकवाद के खिलाफ कई प्रस्ताव पारित किए गए।
🎯 Exam Tip: शीतयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र में हुए प्रमुख संरचनात्मक और कार्यात्मक सुधारों को बिन्दुवार याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 1. संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा ने 'शान्ति के लिए एकता' प्रस्ताव को स्वीकृत किया है-
(a) 24 अक्टूबर, 1945
(b) 3 नवम्बर, 1950
(c) 1 जनवरी, 1955
(d) 11 जून, 1960
Answer: (b) 3 नवम्बर, 1950
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने 3 नवम्बर, 1950 को 'शान्ति के लिए एकता' प्रस्ताव अपनाया था, जिससे महासभा को शांति भंग या आक्रमण के मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार मिला जब सुरक्षा परिषद् वीटो के कारण निष्क्रिय हो।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख प्रस्तावों और उनकी तारीखों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर वे जो शांति और सुरक्षा से संबंधित हैं, क्योंकि यह अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Question 2. संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य अंग हैं-
(a) 4
(b) 5
(c) 6
(d) 7
Answer: (c) 6
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ के छह मुख्य अंग हैं: महासभा, सुरक्षा परिषद्, आर्थिक एवं सामाजिक परिषद्, न्यास परिषद्, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय और सचिवालय।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न अंगों और उनके कार्यों की सूची याद रखना आपको संगठन की संरचना और कार्यप्रणाली को समझने में मदद करेगा।
Question 3. संयुक्त राष्ट्र का कौन-सा अंग संयुक्त राष्ट्र का बजट पारित करता है-
(a) सुरक्षा परिषद्
(b) ट्रस्टीशिप (न्यास) परिषद्
(c) आर्थिक व सामाजिक परिषद्
(d) साधारण सभा (महासभा)
Answer: (d) साधारण सभा (महासभा)
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ की साधारण सभा, जिसे महासभा भी कहते हैं, सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करती है और संगठन का बजट पारित करने के लिए जिम्मेदार है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रत्येक अंग के विशिष्ट कार्य और जिम्मेदारियों को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर बजट जैसे प्रशासनिक पहलुओं से संबंधित।
Question 4. संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव की नियुक्ति की जाती है-
(a) महासभा द्वारा
(b) सुरक्षा परिषद् द्वारा
(c) महासभा की सिफारिश पर सुरक्षा परिषद् द्वारा
(d) सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासभा द्वारा
Answer: (d) सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासभा द्वारा
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद् की सिफारिश के आधार पर महासभा द्वारा की जाती है, जो यह सुनिश्चित करता है कि दोनों प्रमुख अंग इस महत्वपूर्ण पद पर सहमत हों।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया और शामिल अंगों को जानना परीक्षा के लिए आवश्यक है।
Question 5. संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब की गई
(a) 24 अक्टूबर, 1945
(b) 11 जनवरी, 1945
(c) 11 जून, 1946
(d) 17 फरवरी, 1948
Answer: (a) 24 अक्टूबर, 1945
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से 24 अक्टूबर, 1945 को हुई थी।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की तारीख और उसके पीछे के ऐतिहासिक संदर्भ को याद रखना अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के अध्ययन में मौलिक है।
Question 6. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय कहाँ है-
(a) वाशिंगटन में
(b) न्यूयॉर्क में
(c) हेग में
(d) जिनेवा में
Answer: (c) हेग में
In simple words: अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रमुख न्यायिक अंग, नीदरलैंड के हेग शहर में स्थित है, जो सदस्य देशों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा करता है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न अंगों और उनकी संबंधित मुख्यालयों को जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अक्सर सामान्य ज्ञान और परीक्षा के प्रश्नों में आता है।
Question 7. मानव अधिकार दिवस प्रतिवर्ष कब मनाया जाता है-
(a) 10 दिसम्बर को
(b) 10 नवम्बर को
(c) 10 मार्च को
(d) 10 अप्रैल को
Answer: (a) 10 दिसम्बर को
In simple words: मानव अधिकार दिवस हर साल 10 दिसम्बर को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा को अपनाया था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय दिवसों और उनके पीछे के ऐतिहासिक कारणों को याद रखना सामान्य ज्ञान और नागरिक शास्त्र के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 8. संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस प्रतिवर्ष कब मनाया जाता है-
(a) 24 अक्टूबर को
(b) 24 जून को
(c) 10 अगस्त को
(d) 11 मार्च को
Answer: (a) 24 अक्टूबर को
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस 24 अक्टूबर को मनाया जाता है, जो 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के लागू होने की वर्षगांठ का प्रतीक है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण संगठनों की स्थापना तिथियों और संबंधित दिवसों को याद रखना परीक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए उपयोगी है।
Question 9. 1 नवम्बर, 1994 से संयुक्त राष्ट्र संघ का कौन सा अंग स्थगित है-
(a) सुरक्षा परिषद्
(b) न्यासिता परिषद्
(c) आर्थिक और सामाजिक परिषद्
(d) आम सभा
Answer: (b) न्यासिता परिषद्
In simple words: न्यासिता परिषद् को 1 नवम्बर, 1994 से निलंबित कर दिया गया, जब अंतिम शेष न्यास क्षेत्र, पलाऊ, स्वतंत्र हो गया, जिससे इसका मिशन पूरा हो गया।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के अंगों के वर्तमान स्थिति और उनके ऐतिहासिक विकास को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर निलंबित या निष्क्रिय किए गए अंगों के संदर्भ में।
Question 10. संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रथम महासचिव थे-
(a) ट्राइग्व ली
(b) यू थांट
(c) बुतरस-बुतरस घाली
(d) कोफी ए० अन्नान
Answer: (a) ट्राइग्व ली
In simple words: नॉर्वे के ट्राइग्व ली संयुक्त राष्ट्र संघ के पहले महासचिव थे, जिन्होंने 1946 से 1952 तक सेवा की और संगठन की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के महत्वपूर्ण व्यक्तियों, खासकर इसके महासचिवों की सूची और उनके कार्यकाल को याद रखना सामान्य ज्ञान और नागरिक शास्त्र के प्रश्नों के लिए आवश्यक है।
UP Board Solutions For Class 12 Civics
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