UP Board Solutions Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life

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Detailed Chapter 16 रोजमर्रा की जिंदगी में रसायन विज्ञान UP Board Solutions for Class 12 Chemistry

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Class 12 Chemistry Chapter 16 रोजमर्रा की जिंदगी में रसायन विज्ञान UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry In Everyday Life (दैनिक जीवन में रसायन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

 

Question 1. अनिद्राग्रस्त रोगियों को चिकित्सक नींद लाने वाली गोलियाँ लेने का परामर्श देते हैं, परन्तु बिना चिकित्सक से परामर्श लिए इनकी खुराक लेना उचित क्यों नहीं है?
Answer: नींद की गोलियों में प्रशांतक या प्रतिअवसादक होते हैं। ये तंत्रिका तन्त्र को प्रभावित करके नींद लाते हैं। यदि इनकी खुराक भली प्रकार नियन्त्रित न हो तब ये हानिकारक प्रभाव डालते हैं तथा विष की तरह कार्य करके मृत्यु तक कारित करते हैं। अतः यह सलाह दी जाती है कि इन नींद की गोलियों को चिकित्सक की सलाह से लेना चाहिए।
In simple words: अनिद्राग्रस्त रोगियों को नींद की गोलियाँ बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इनमें प्रशांतक या प्रतिअवसादक होते हैं जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं, और अनियंत्रित खुराक विषैली होकर जानलेवा हो सकती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में रासायनिक यौगिकों के उपयोग और उनके साइड इफेक्ट्स को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. किस वर्गीकरण के आधार पर वक्तव्य, रेनिटिडीन प्रतिअम्ल हैं, दिया गया है?
Answer: यह वक्तव्य औषध के फार्माकोलोजिकल (pharmacological) आधार पर वर्गीकरण की ओर संकेत करता है क्योंकि औषध जिसका प्रयोग आमाशय में उपस्थित अम्ल के आधिक्य को उदासीन करता है, प्रतिअम्ल (antacid) कहलाता है।
In simple words: रेनिटिडीन को प्रतिअम्ल के रूप में वर्गीकृत करने का आधार उसका औषधीय प्रभाव है, क्योंकि यह पेट में अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करके काम करता है।

🎯 Exam Tip: औषधों के वर्गीकरण के विभिन्न आधारों जैसे फार्माकोलॉजिकल प्रभाव, अणु लक्ष्य आदि को समझना चाहिए।

 

Question 3. हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
Answer: हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता कैलोरी कम करने तथा दंतक्षय को रोकने के लिए पड़ती है।
In simple words: हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता इसलिए होती है ताकि हम कैलोरी का सेवन कम कर सकें और दाँतों को सड़ने से बचा सकें, जबकि मिठास का अनुभव बना रहे।

🎯 Exam Tip: कृत्रिम मधुरकों के मुख्य लाभों (जैसे कैलोरी नियंत्रण, दंतक्षय रोकथाम) को याद रखें।

 

Question 4. ग्लिसरिल ओलिएट तथा ग्लिसरिल पामिटेट से सोडियम साबुन बनाने के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए। इनके संरचनात्मक सूत्र नीचे दिए गए हैं
(i) (C15H31COO)3 C3H5 – ग्लिसरिल पामिटेट
(ii) (C15H32COO)3C3H5 – ग्लिसरिल ओलिएट ।
Answer:
(i)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह रासायनिक अभिक्रिया ग्लिसरिल पामिटेट को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर ग्लिसरॉल और सोडियम पामिटेट (साबुन) में परिवर्तित होने को दर्शाती है। ग्लिसरिल पामिटेट एक ट्राइग्लिसराइड है, जो हाइड्रोलिसिस पर ग्लिसरॉल और फैटी एसिड का सोडियम लवण देता है।
\(CH_2-O-CO-C_{15}H_{31}\)
\(|\)
\(CH-O-CO-C_{15}H_{31} + 3NaOH \xrightarrow{\Delta} CH_2OH\)
\(|\)
\(CH_2-O-CO-C_{15}H_{31}\)
ग्लिसरिल पामिटेट
\((C_{15}H_{31}COO)_3C_3H_5\)
\(CHOH + 3C_{15}H_{31}COONa\)
\(|\)
\(CH_2OH\)
सोडियम पामिटेट
ग्लिसरॉल
(ii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह अभिक्रिया ग्लिसरिल ओलिएट के साबुनीकरण को दर्शाती है, जहाँ यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड की उपस्थिति में ग्लिसरॉल और सोडियम ओलिएट (साबुन) में टूट जाता है। ग्लिसरिल ओलिएट एक वसा है जो हाइड्रोलिसिस द्वारा साबुन का निर्माण करती है।
\(CH_2-O-CO-C_{17}H_{32}\)
\(|\)
\(CH-O-CO-C_{17}H_{32} + 3NaOH \xrightarrow{\Delta} CH_2OH\)
\(|\)
\(CH_2-O-CO-C_{17}H_{32}\)
ग्लिसरिल ओलिएट
\((C_{17}H_{32}COO)_3C_3H_5\)
\(CHOH + 3C_{17}H_{32}COONa\)
\(|\)
\(CH_2OH\)
सोडियम ओलिएट
ग्लिसरॉल
In simple words: ग्लिसरिल पामिटेट और ग्लिसरिल ओलिएट से सोडियम साबुन बनाने की प्रक्रिया साबुनीकरण कहलाती है, जिसमें ये ट्राइग्लिसराइड्स सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया करके ग्लिसरॉल और संबंधित फैटी एसिड के सोडियम लवण (साबुन) बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: साबुनीकरण अभिक्रिया के रासायनिक समीकरणों को उनके अभिकारकों और उत्पादों के साथ याद रखें, खासकर ग्लिसरॉल और साबुन के निर्माण को।

 

Question 5. निम्नलिखित प्रकार के अनायनिक अपमार्जक, द्रव अपमार्जकों, इमल्सीकारकों और क्लेदन कारकों (wetting agents) में उपस्थित होते हैं। अणु में जलरागी तथा जलविरागी हिस्सों को दर्शाइए । अणु में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह की पहचान कीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक अनायनिक अपमार्जक की संरचना को दर्शाता है, जिसमें एक हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (जलविरागी भाग) एक पॉलीथीन ऑक्साइड श्रृंखला (जलरागी भाग) से जुड़ी होती है, जिसका उपयोग सफाई और पायसीकरण जैसे कार्यों में होता है।
\(C_9H_{19}-O(CH_2CH_2O)_xCH_2CH_2OH\)
(x = 5 to 10)
Answer:
\(C_9H_{19}-O(CH_2CH_2O)_xCH_2CH_2OH\)
जलविरागी या अध्रुवीय भाग जलरागी या ध्रुवीय भाग
अपमार्जक अणु में उपस्थित विभिन्न प्रकार्यात्मक समूह हैं
1. ईथर,
2. प्राथमिक (1°) ऐल्कोहॉलीय समूह ।
In simple words: अनायनिक अपमार्जक में एक जलविरागी हाइड्रोकार्बन पूँछ और एक जलरागी पॉलीथीन ग्लाइकॉल सिर होता है, जिसमें ईथर और प्राथमिक अल्कोहोलिक समूह जैसे कार्यात्मक समूह होते हैं, जो इसे सफाई एजेंट के रूप में प्रभावी बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: अनायनिक अपमार्जकों की संरचना को पहचानें और उनके जलरागी तथा जलविरागी भागों को इंगित करें, साथ ही उनमें मौजूद कार्यात्मक समूहों को भी जानें।

अतिरिक्त अभ्यास

 

Question 1. हमें औषधों को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत करने की आवश्यकता क्यों है?
Answer: औषधों को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत करने के अनेक लाभ हैं। उदाहरणार्थ, फार्माकोलोजिकल प्रभाव के आधार पर वर्गीकरण डॉक्टरों के लिए लाभदायक है क्योंकि इससे उन्हें किसी रोग विशेष के उपचार के लिए उपलब्ध सभी औषधों की जानकारी मिलती है। इसी प्रकार जैवरासायनिक प्रक्रम पर प्रभाव के आधार पर वर्गीकरण से वांछित औषध के संश्लेषण के लिए सही यौगिक के चयन में सहायता मिलती है। अणु लक्ष्यों के आधार पर वर्गीकरण से केमिस्टों को किसी विशेष ग्राही स्थल के लिए सर्वाधिक प्रभावी औषध के निर्माण में सहायता मिलती है। स्पष्ट है कि प्रत्येक प्रकार के वर्गीकरण की अपनी उपयोगिता है।
In simple words: औषधों को वर्गीकृत करना डॉक्टरों को सही दवा चुनने, केमिस्टों को नई दवाएँ विकसित करने और जैविक प्रक्रियाओं पर उनके प्रभावों को समझने में मदद करता है, जिससे उपचार अधिक प्रभावी होता है।

🎯 Exam Tip: औषध वर्गीकरण के विभिन्न आधारों और प्रत्येक के विशिष्ट लाभों को संक्षेप में समझाने का अभ्यास करें।

 

Question 2. औषध रसायन के पारिभाषिक शब्द, लक्ष्य-अणु अथवा औषध-लक्ष्य को समझाइए ।
Answer: औषध सामान्यतः जैविक वृहदाणुओं जैसे-कार्बोहाइड्रेट, लिपिड, प्रोटीन, न्यूक्लीक अम्ल के साथ अन्योन्यक्रियाएँ करते हैं जिन्हें औषध लक्ष्य कहते हैं।
In simple words: औषध-लक्ष्य वे बड़े जैविक अणु होते हैं, जैसे प्रोटीन या कार्बोहाइड्रेट, जिनके साथ दवाएँ शरीर में अपना प्रभाव दिखाने के लिए जुड़ती हैं।

🎯 Exam Tip: औषध-लक्ष्य की परिभाषा और इसके उदाहरणों को याद रखें। यह अवधारणा दवा के कार्यप्रणाली को समझने में महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. उन वृहद-अणुओं के नाम लिखिए जिन्हें औषध-लक्ष्य चुना जाता है।
Answer: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड, न्यूक्लीक अम्ल आदि ।
In simple words: औषध-लक्ष्य के रूप में चुने जाने वाले वृहद-अणु प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लीक अम्ल जैसे शरीर के महत्वपूर्ण जैविक अणु होते हैं।

🎯 Exam Tip: जैविक वृहद-अणुओं के मुख्य प्रकारों को पहचानें जो औषधों के लिए लक्ष्य के रूप में कार्य करते हैं।

 

Question 4. बिना डॉक्टर से फ्रामर्श लिए दबाइयाँ क्यों नहीं लेनी चाहिए?
Answer: बिना डॉक्टर के परामर्श के दवाइयाँ इसलिए नहीं लेनी चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में दवा विषैला प्रभाव डालती है तथा जीवधारी के कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करती है।
In simple words: बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएँ लेने से बचना चाहिए क्योंकि वे अत्यधिक मात्रा में जहरीली हो सकती हैं और शरीर के सामान्य कार्यों में बाधा डाल सकती हैं।

🎯 Exam Tip: दवाइयों के दुरुपयोग के खतरों और चिकित्सकीय परामर्श के महत्व पर जोर दें।

 

Question 5. रसायनचिकित्सा शब्द की परिभाषा लिखिए।
Answer: रसायन विज्ञान की वह शाखा जो रसायनों के द्वारा रोगों के उपचार से संबंधित होती है, रसायन चिकित्सा कहलाती है।
In simple words: रसायन चिकित्सा रसायन विज्ञान की वह शाखा है जो रोगों का इलाज करने के लिए रासायनिक पदार्थों का उपयोग करती है।

🎯 Exam Tip: रसायन चिकित्सा की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से याद करें।

 

Question 6. एन्जाइम की सतह पर औषध को थामने के लिए कौन-से बल कार्य करते हैं?
Answer: आयनिक बन्धन, हाइड्रोजन बन्धन, द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ या वाण्डरवाल्स अन्योन्यक्रियाएँ।
In simple words: औषध एन्जाइम की सतह पर आयनिक बंधन, हाइड्रोजन बंधन, द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रिया और वाण्डरवाल्स बलों जैसे विभिन्न अंतर-आणविक बलों के माध्यम से जुड़ते हैं।

🎯 Exam Tip: औषध-एन्जाइम अन्योन्यक्रिया में शामिल विभिन्न प्रकार के आबंधों और बलों को जानें।

 

Question 7. प्रतिअम्ल एवं प्रति-एलर्जी औषध हिस्टैमिन के कार्य में बाधा डालती हैं, परन्तु ये एक-दूसरे के कार्य में बाधक क्यों नहीं होती?
Answer: औषधों का प्रयोग अंग विशेष की व्याधियों को दूर करने में किया जाता है लेकिन ये अन्य को प्रभावित नहीं करती हैं क्योंकि ये अलग-अलग ग्राहियों (receptors) पर कार्य करती हैं। उदाहरणार्थ : हिस्टैमिन का स्रावण एलर्जी (allergy) उत्पन्न करता है। यह आमाशय में HCl विमोचित करने के कारण अम्लता (acidity) भी उत्पन्न करता है। प्रतिएलर्जिक तथा प्रतिअम्ल भिन्न ग्राहियों पर कार्य करते हैं। अतः प्रतिहिस्टैमिन एलर्जी दूर करते हैं जबकि प्रतिअम्ल अम्लता दूर करते हैं।
In simple words: प्रतिअम्ल और प्रति-एलर्जी दवाएँ हिस्टैमिन के कार्य में बाधा डालती हैं लेकिन एक-दूसरे के कार्य में बाधा नहीं डालतीं क्योंकि वे शरीर में हिस्टैमिन के लिए अलग-अलग ग्राही (रिसेप्टर्स) पर कार्य करती हैं, जिससे उनका प्रभाव विशिष्ट होता है।

🎯 Exam Tip: औषधों की विशिष्टता को समझें, विशेष रूप से यह कि वे विभिन्न ग्राही स्थलों पर कार्य करके कैसे विशिष्ट रोगों का इलाज करते हैं।

 

Question 8. नॉरऐड्रीनेलिन का कम स्तर अवसाद का कारण होता है। इस समस्या के निदान के लिए किस प्रकार की औषध की आवश्यकता होती है? दो औषधों के नाम लिखिए।
Answer: इस समस्या के निदान के लिए प्रतिअवसादक औषधों (antidepressant drugs) की आवश्यकता होती है। ये औषध नोरएड्रिनेलिन के निम्नीकरण को उत्प्रेरित करने वाले एंजाइमों को बाधित करते हैं। इससे नेरएड्रिनेलिन धीरे उपापचयित होता है और ग्राही को लंबे समय तक सक्रियित रखता है। जिससे अवसाद कम हो जाता है। उदाहरणार्थ : इप्रोनाइजिड, फिनल्जिन आदि ।
In simple words: नॉरऐड्रीनेलिन के निम्न स्तर से होने वाले अवसाद के इलाज के लिए प्रतिअवसादक औषधों का उपयोग किया जाता है, जो इस रसायन को शरीर में अधिक समय तक सक्रिय रखकर अवसाद को कम करते हैं।

🎯 Exam Tip: अवसाद के रासायनिक कारणों को जानें और प्रतिअवसादक दवाओं के कार्यप्रणाली तथा उनके उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 9. 'वृहद्-स्पेक्ट्रम जीवाणुनाशी' शब्द से आप क्या समझते हैं? समझाइए ।
Answer: वे प्रतिजैविक जो कि कई प्रकार के हानिकारक सूक्ष्म-जीवों के प्रति प्रभावी होते हैं, 'वृहद-स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक' कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-टेट्रासाइक्लिन, क्लोरम्फेनिकोल आदि ।
In simple words: वृहद्-स्पेक्ट्रम जीवाणुनाशी वे एंटीबायोटिक्स होते हैं जो विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी होते हैं, जिससे वे कई तरह के संक्रमणों का इलाज कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: वृहद्-स्पेक्ट्रम प्रतिजैविकों की परिभाषा और उनके उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 10. पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी किस प्रकार से भिन्न हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए ।
Answer: पूतिरोधी वे रसायन होते हैं जो सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं या उनकी वृद्धि रोकते है तथा जीवित ऊतकों को हानि नहीं पहुंचाते हैं। विसंक्रामी सूक्ष्म-जीवों को मार देते हैं तथा जीवित मानव ऊतकों को हानि पहुँचाते हैं। उदाहरणार्थ :
1. पूतिरोधी (Antiseptic) : डिटॉल, आयोडोफॉर्म, टिंक्चर आयोडीन ।
2. विसंक्रामी (Disinfectants) : क्लोरीन (> 0.4 ppm), फीनॉल (> 1% विलयन)।
In simple words: पूतिरोधी जीवित ऊतकों पर सुरक्षित रूप से सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकते या मारते हैं (जैसे डिटॉल), जबकि विसंक्रामी सूक्ष्मजीवों को मारते हैं लेकिन जीवित ऊतकों के लिए हानिकारक होते हैं (जैसे क्लोरीन), इसलिए इन्हें निर्जीव सतहों पर उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: पूतिरोधी और विसंक्रामी के बीच का अंतर उनके उपयोग और जीवित ऊतकों पर उनके प्रभाव के आधार पर स्पष्ट रूप से समझाएँ, साथ ही प्रत्येक का एक-एक उदाहरण भी दें।

 

Question 11. सिमेटिडीन तथा दैनिटिडीन सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट अथवा मैग्नीशियम या । ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड की तुलना में श्रेष्ठ प्रतिअम्ल क्यों हैं?
Answer: सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन श्रेष्ठ प्रतिअम्ल हैं क्योंकि ये आमाशय भित्ति में उपस्थित ग्राहियों (receptors) तथा हिस्टैमिन के मध्य अन्योन्यक्रिया को रोकते हैं जिसके परिणामस्वरूप कम मात्रा में अम्ल मुक्त होता है। दूसरी ओर, सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट अथवा मैग्नीशियम या ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड केवल लक्षणों पर कार्य करते हैं. कारण पर नहीं
In simple words: सिमेटिडीन और रैनिटिडीन बेहतर प्रतिअम्ल हैं क्योंकि वे पेट की दीवारों पर हिस्टैमिन के ग्राहियों को ब्लॉक करके अम्ल के उत्पादन को कम करते हैं, जबकि सोडियम बाइकार्बोनेट या मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड केवल पेट में मौजूद अम्ल को निष्क्रिय करके लक्षणों को अस्थायी रूप से कम करते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रतिअम्लों के कार्यप्रणाली के अंतर को समझें, विशेष रूप से वे जो ग्राही पर कार्य करते हैं बनाम वे जो केवल अम्ल को उदासीन करते हैं।

 

Question 12. एक ऐसे पदार्थ का उदाहरण दीजिए जिसे पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है।
Answer: फीनॉल का 0.2% विलयन पूतिरोधी का कर्य करता है जबकि 1% विलक्नविसंक्रामी का कार्य करता है।
In simple words: फीनॉल एक ऐसा पदार्थ है जिसका उपयोग अलग-अलग सांद्रता पर पूतिरोधी (0.2% विलयन) और विसंक्रामी (1% विलयन) दोनों के रूप में किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: फीनॉल के विभिन्न सांद्रताओं पर उसके अनुप्रयोगों को याद रखें, जो पूतिरोधी और विसंक्रामी के बीच के अंतर को दर्शाता है।

 

Question 13. डेटॉल के प्रमुख संघटक कौन-से हैं?
Answer: डेटॉल क्लोरोजाइलिनोल तथा α -टरपीनिऑल का मिश्रण होता है।
In simple words: डेटॉल के मुख्य घटक क्लोरोजाइलिनोल और अल्फा-टरपीनिऑल हैं, जो इसे एक प्रभावी कीटाणुनाशक बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: डेटॉल जैसे सामान्य उपयोग के कीटाणुनाशकों के रासायनिक संघटकों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. आयोडीन का टिंक्चर क्या होता है? इसके क्या उपयोग हैं? ।
Answer: आयोडीन का ऐल्कोहॉल या जल में 2 – 3 % विलयन आयोडीन का टिंक्चर कहलाता है। यह शक्तिशाली पूतिरोधी होता है। इसका प्रयोग घावों पर किया जाता है।
In simple words: आयोडीन का टिंक्चर आयोडीन का 2-3% ऐल्कोहॉलिक या जलीय घोल होता है, जो एक मजबूत पूतिरोधी के रूप में घावों पर लगाया जाता है।

🎯 Exam Tip: टिंक्चर आयोडीन की परिभाषा, संरचना और उसके पूतिरोधी गुणों को याद रखें।

 

Question 15. खाद्य पदार्थ परिरक्षक क्या होते हैं?
Answer: खाद्य परिरक्षक वे पदार्थ होते हैं जो सूक्ष्म-जीवों द्वारा होने वाले किण्वन, अम्लीकरण या अन्य विघटन को बाधित करके भोजन को खराब होने से रोकते हैं।
In simple words: खाद्य परिरक्षक ऐसे पदार्थ होते हैं जो सूक्ष्मजीवों की वृद्धि या क्रिया को रोककर भोजन को सड़ने या खराब होने से बचाते हैं, जिससे खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: खाद्य परिरक्षकों की परिभाषा और उनके कार्य को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 16. ऐस्पार्टेम का प्रयोग केवल ठण्डे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक सीमित क्यों है?
Answer: यह पकाने के ताप पर विघटित हो जाता है अतः इसका प्रयोग केवल ठण्डे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक सीमित है।
In simple words: ऐस्पार्टेम को केवल ठंडे खाद्य और पेय पदार्थों में उपयोग किया जाता है क्योंकि यह गर्मी के संपर्क में आने पर विघटित हो जाता है, जिससे इसकी मिठास खत्म हो जाती है।

🎯 Exam Tip: एस्पार्टेम की तापीय अस्थिरता और इसके अनुप्रयोगों पर पड़ने वाले प्रभावों को याद रखें।

 

Question 17. कृत्रिम मधुरक क्या हैं? दो उदाहरण दीजिए ।
Answer: कृत्रिम मधुरक रासायनिक पदार्थ होते हैं जो स्वाद में मीठे होते हैं लेकिन हमारे शरीर को कैलोरी प्रदान नहीं करते हैं। ये हमारे शरीर से अपरिवर्तित अवस्था में उत्सर्जित हो जाते हैं। उदाहरणार्थ : सैकरीन, एस्पार्टेम, सुक्रोलोस आदि ।
In simple words: कृत्रिम मधुरक वे रासायनिक पदार्थ हैं जो मीठे होते हैं पर कैलोरी नहीं देते और शरीर से अपरिवर्तित रूप में बाहर निकल जाते हैं, जैसे सैकरीन और एस्पार्टेम।

🎯 Exam Tip: कृत्रिम मधुरकों की परिभाषा, उनके गुण (कैलोरी-मुक्त) और दो सामान्य उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 18. मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले मधुरक का क्या नाम है?
Answer: सैकरीन ।
In simple words: मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने में सैकरीन नामक कृत्रिम मधुरक का उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को नहीं बढ़ाता।

🎯 Exam Tip: मधुमेह रोगियों के लिए उपयुक्त कृत्रिम मधुरकों के नाम याद रखें।

 

Question 19. ऐलिटेम को कृत्रिम मधुरक की तरह उपयोग में लाने पर क्या समस्याएँ होती हैं?
Answer: ऐलिटेम उच्च क्षमता का कृत्रिम मधुरक है इसलिए इसका प्रयोग करने पर भोजन की मिठास को नियंत्रित करना कठिन होता है।
In simple words: ऐलिटेम का उपयोग करने में यह समस्या है कि यह बहुत मीठा होता है, जिससे भोजन की मिठास को सटीक रूप से नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।

🎯 Exam Tip: ऐलिटेम की उच्च मिठास क्षमता और उसके नियंत्रण में आने वाली चुनौतियों को याद रखें।

 

Question 20. साबुनों की अपेक्षा संश्लेषित अपमार्जक किस प्रकार श्रेष्ठ हैं?
Answer: अपमार्जक का प्रयोग मृदु तथा कठोर जल दोनों में किया जा सकता है क्योंकि ये कठोर जल में भी झाग देते हैं। इसका कारण यह है कि सल्फोनिक अम्ल तथा इनके कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण जल में विलेय होते हैं जबकि वसीय अम्ल तथा इनके कैल्सियम और मैग्नीशियम लवण अविलेय होते हैं।
In simple words: संश्लेषित अपमार्जक साबुनों से बेहतर होते हैं क्योंकि वे कठोर और मृदु दोनों प्रकार के पानी में प्रभावी रूप से काम करते हैं, कठोर जल में भी झाग उत्पन्न करते हैं, क्योंकि उनके कैल्शियम और मैग्नीशियम लवण घुलनशील होते हैं।

🎯 Exam Tip: संश्लेषित अपमार्जकों की कठोर जल में कार्य करने की क्षमता और इसके पीछे के रासायनिक कारणों को स्पष्ट करें।

 

Question 21. निम्नलिखित शब्दों को उपयुक्त उदाहरणों द्वारा समझाइए (क) धनात्मक अपमार्जक
(ख) ऋणात्मक अपमार्जक
(ग) अनायनिक अपमार्जक
Answer:
(क)
धनात्मक अपमार्जक (Cationic detergents) : धनात्मक अपमार्जक ऐमीनों के ऐसीटेट, क्लोराइड या ब्रोमाइड ऋणायनों के साथ बने चतुष्क लवण होते हैं। उदाहरणार्थ सेटिल ट्राइमेथिल अमोनियम क्लोराइड ।
In simple words: धनात्मक अपमार्जक वे डिटर्जेंट होते हैं जिनमें सफाई करने वाला भाग धनात्मक आयन होता है, जैसे चतुष्क अमोनियम लवण, और इनका उपयोग अक्सर कीटाणुनाशक के रूप में होता है।

🎯 Exam Tip: धनात्मक अपमार्जकों की परिभाषा, उनकी संरचना (चतुष्क अमोनियम लवण) और एक उदाहरण याद रखें।

 

(ख)
ऋणात्मक अपमार्जक (Anionic detergents) :
ऋणात्मक अपमार्जक लम्बी श्रृंखला वाले ऐल्कोहॉलों अथवा हाइड्रोकार्बनों के सल्फोनेटित व्युत्पन्न होते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं
(i) सोडियम ऐल्किल सल्फेट (Sodium alkyl sulphates)
उदाहरणार्थ :
सोडियम लॉरिल सल्फेट, \(C_{11}H_{23}CH_2OSO_3Na\).
(ii) सोडियम ऐल्किल बेन्जीन सल्फेट (Sodium alkyl benzene sulphate) : सर्वाधिक प्रयोग किया जाने वाला घरेलू अपमार्जक सोडियम-4-(-1-डोडेसिल) बेन्जीन सल्फोनेट (SDS) हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना सोडियम-4-(-1-डोडेसिल) बेन्जीन सल्फोनेट (SDS) को दर्शाती है, जो एक ऋणात्मक अपमार्जक है। इसमें एक लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला होती है जो जलविरागी है, और एक सल्फोनेट समूह (SO₃⁻) होता है जो जलरागी होता है, जिससे यह सफाई क्रिया में प्रभावी होता है।
\(CH_3(CH_2)_{11} \)

सोडियम-4-(-1-डोडेसिल) बेन्जीन सल्फोनेट
In simple words: ऋणात्मक अपमार्जक वे डिटर्जेंट होते हैं जिनमें सफाई करने वाला भाग ऋणात्मक आयन होता है, जैसे सोडियम लॉरिल सल्फेट और सोडियम डोडेसिलबेंजीन सल्फोनेट, और ये व्यापक रूप से घरेलू सफाई में उपयोग किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक अपमार्जकों की विशेषता (ऋणावेशित समूह), उनके प्रकार (ऐल्किल सल्फेट, ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेट), और उनके उदाहरणों पर ध्यान दें।

 

(ग)
अनायनिक अपमार्जक (Non-ionic detergents) :
अनायनिक अपमार्जक, उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले ऐल्कोहॉलों के साथ वसा अम्लों के एस्टरे होते हैं।
उदाहरणार्थ :
पॉलिएथिलीन ग्लाइकॉल स्टिऐरेट \(CH_3 (CH_2)_6 COO (CH_2CH_2O)_n CH_2CH_2OH\).
In simple words: अनायनिक अपमार्जक वे डिटर्जेंट होते हैं जिनमें कोई आयनिक भाग नहीं होता, बल्कि वे वसा अम्लों के एस्टर होते हैं जो उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले अल्कोहल से बने होते हैं, जैसे पॉलीएथिलीन ग्लाइकॉल स्टिअरेट।

🎯 Exam Tip: अनायनिक अपमार्जकों की परिभाषा और उनके आयनिक गुणों की अनुपस्थिति को याद रखें, साथ ही एक उदाहरण भी दें।

 

Question 22. जैव-निम्नीकृत होने वाले और जैव-निम्नीकृत न होने वाले अपमार्जक क्या हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
Answer: जैव-अपघटय (निम्नीकृत) अपमार्जक सीधी हाइड्रोकार्बन शृंखलायुक्त होते हैं। ये अपमार्जक जीवाणुओं द्वारा नष्ट हो जाते हैं। जैव-अनपघटय (अनिम्नीकृत) अपमार्जक शाखित हाइड्रोकार्बन श्रृंखलायुक्त होते हैं। ये अपमार्जक जीवाणुओं द्वारा नष्ट नहीं होते हैं। अनपघटय अपमार्जक प्रदूषण का स्रोत होते हैं।
1. जैव अपघटच अपमार्जक : सोडियम लॉरिल सल्फेट
2. अनपघटय अपमार्जक : सोडियम 4 – (1, 3, 5, 7 – टेट्रामेथिलऑक्टिल) बेन्जीनसल्फोनेट ।
In simple words: जैव-निम्नीकृत अपमार्जक सीधी श्रृंखला वाले होते हैं और जीवाणुओं द्वारा विघटित हो जाते हैं (जैसे सोडियम लॉरिल सल्फेट), जबकि जैव-अनिम्नीकृत अपमार्जक शाखित श्रृंखला वाले होते हैं और विघटित नहीं होते, जिससे प्रदूषण होता है (जैसे शाखित बेन्जीनसल्फोनेट)।

🎯 Exam Tip: जैव-निम्नीकृत और जैव-अनिम्नीकृत अपमार्जकों के बीच उनके संरचनात्मक अंतर (सीधी बनाम शाखित श्रृंखला) और पर्यावरणीय प्रभाव को स्पष्ट करें।

 

Question 23. साबुन कठोर जल में कार्य क्यों नहीं करता?
Answer: कठोर जल में कैल्सियम और मैग्नीशियम के लवण होते हैं। साबुन को कठोर जल में डालने पर साबुन कैल्सियम और मैग्नीशियम साबुन के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं। ये साबुन अविलेय होने के कारण कपड़ों पर चिपचिपे पदार्थ के रूप में चिपक जाते हैं।
In simple words: साबुन कठोर जल में काम नहीं करता क्योंकि कठोर जल में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम आयन साबुन के साथ अघुलनशील अवक्षेप बनाते हैं, जो कपड़ों पर चिपक जाता है और सफाई को बाधित करता है।

🎯 Exam Tip: कठोर जल की परिभाषा और उसमें मौजूद आयनों की साबुन के साथ अभिक्रिया को समझाएँ।

 

Question 24. क्या आप साबुन तथा संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए कर सकते हैं?
Answer: साबुन कठोर जल में अविलेय कैल्सियम तथा मैग्नीशियम साबुनों के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं, लेकिन अपमार्जक नहीं। इसलिए साबुन का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए किया जा सकता है, अपमार्जकों का नहीं।
In simple words: हाँ, हम साबुन का उपयोग जल की कठोरता जानने के लिए कर सकते हैं क्योंकि यह कठोर जल में अघुलनशील अवक्षेप बनाता है, जबकि संश्लेषित अपमार्जक नहीं बनाते।

🎯 Exam Tip: जल की कठोरता के परीक्षण में साबुन की उपयोगिता और संश्लेषित अपमार्जकों की अनुपयोगिता को स्पष्ट करें।

 

Question 25. साबुन की शोधन क्रिया समझाइए।
Answer: साबुन की शोधन क्रिया (Cleansing Action of Soaps) : साबुन का अणु दो भागों का बना होता है। साबुन के अणु का एक भाग तो लम्बी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला होती है जो अनायनिक होती है तथा साबुन के अणु का दूसरा भाग छोटा कार्बोक्सिलिक समूह (\(COO^- Na^+\)) होता है जो आयनिक होता है। साबुन के अणु को चित्र – 1 द्वारा दर्शाया जाता है जिसमें टेढ़ी-मेढ़ी लम्बी रेखा तो हाइड्रोकार्बन श्रृंखला को निरूपित करती है, जबकि काला गोर्लीय भाग आयनिक समूह (\(COO^-\)) को निरूपित करता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक साबुन के अणु की संरचना दर्शाता है, जिसमें एक जलविरागी (हाइड्रोकार्बन पूँछ) और एक जलरागी (आयनिक सिर) भाग होता है। जलविरागी पूँछ मैल के कणों से जुड़ती है, जबकि जलरागी सिर जल की ओर आकर्षित होता है, जिससे सफाई क्रिया होती है।

साबुन के अणु का हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाला भाग जल को प्रतिकर्षित करने वाला होता है (या जलविरोधी होता है), परन्तु वह धूल तथा चिकनाई जैसे मैल के कार्बनिक कणों को अपने साथ जोड़ लेता है। इसलिए मैले कपड़ों की सतह पर उपस्थित धूल तथा चिकनाई के कण साबुन के अणु के हाइड्रोकार्बन वाले भाग से जुड़ जाते हैं। साबुन के अणु का आयनिक भाग (\(COO^-\)) जलस्नेही होता है जो जल के अणुओं की ओर आकर्षित होता है और अपने हाइड्रोकार्बन भाग में चिपके धूल तथा चिकनाई के कणों को अपने साथ खींचकर जल में ले आता है। इस प्रकार मैले कपड़े की सतह पर लगे धूल तथा चिकनाई के सारे कण साबुन के अणुओं के साथ लगकर जल में आ जाते हैं तथा मैला कपड़ा साफ हो जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र साबुन द्वारा सफाई की क्रियाविधि को दर्शाता है, जिसमें (क) साबुन के अणु मिलकर मिसेल बनाते हैं और (ख) मैल के कण मिसेल के अंदर फंस जाते हैं। मिसेल में साबुन के अणु रेडियली व्यवस्थित होते हैं, जिसमें जलविरागी पूँछ केंद्र की ओर और जलरागी सिर बाहर की ओर होता है, जिससे मैल जल में घुलनशील हो जाता है।

जब साबुन को जल में घोलते हैं तो वह मिसेल (micelles) बनाता है (क) इस मिसेल में साबुन के अणु अरीय (radially) ढंग से व्यवस्थित होते हैं जिसमें हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाला भाग केन्द्र की ओर होता है। तथा जल को आकर्षित करने वाला कार्बोक्सिलिक भाग बाहर की ओर रहता है जैसा कि (ख) में दिखाया गया है।
जब साबुन के पानी में धूल तथा चिकनाई लगा मैला कपड़ा डालते हैं तो मिसेलों के हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाओं वाले सिरे मैले कपड़े की सतह पर उपस्थित धूल तथा चिकनाई के कणों के साथ जुड़ जाते हैं तथा उन्हें अपने बीच फंसा लेते हैं। इसके बाद मिसेलों के बाहर की ओर वाले आयनिक सिरे जल के अणुओं की ओर आकर्षित होते हैं जिससे हाइड्रोकार्बन वाले सिरों में फँसे मैल के कण कपड़े की सतह से खिंचकर जल में आ जाते हैं तथा कपड़ा साफ हो जाता है। साबुन द्वारा चिकनाई
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र साबुन द्वारा कपड़ों से चिकनाई और धूल के कणों को हटाने की प्रक्रिया को दर्शाता है, जहाँ साबुन के जलस्नेही (हाइड्रोफिलिक) सिरे जल की ओर और जलविरोधी (हाइड्रोफोबिक) सिरे चिकनाई/धूल के कणों से जुड़कर उन्हें कपड़े से अलग कर देते हैं और जल में निलंबित कर देते हैं।
In simple words: साबुन के अणु में जलविरागी (मैल से जुड़ने वाला) और जलरागी (पानी से जुड़ने वाला) भाग होता है; यह पानी में मिसेल बनाता है, जो मैल के कणों को घेर लेते हैं और उन्हें कपड़े की सतह से हटाकर पानी में निलंबित कर देते हैं, जिससे सफाई होती है।

🎯 Exam Tip: साबुन की शोधन क्रिया (मिसेल निर्माण) की पूरी प्रक्रिया को क्रमबद्ध तरीके से समझाएँ, जिसमें जलविरागी और जलरागी भागों की भूमिका स्पष्ट हो।

 

Question 26. यदि जल में कैल्सियम हाइड्रोजनकार्बोनेट घुला हो तो आप कपड़े धोने के लिए साबुन एवं संश्लेषित अपमार्जकों में से किसका प्रयोग करेंगे?
Answer: कैल्सियम बाइकार्बोनेट जले को कठोर बनाता है, अतएव साबुन इस जल में अवक्षेपित हो जाएगा। इसके विपरीत, अपमार्जक के कैल्सियम लवण जल में विलेय होते हैं। अतः संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग, कठोर जल में कपड़े धोने के लिए किया जाता है।
In simple words: यदि जल में कैल्शियम हाइड्रोजनकार्बोनेट है, तो कपड़े धोने के लिए संश्लेषित अपमार्जकों का उपयोग करेंगे क्योंकि वे कठोर जल में भी झाग देते हैं और अघुलनशील अवक्षेप नहीं बनाते, जैसा कि साबुन करता है।

🎯 Exam Tip: कठोर जल में साबुन और संश्लेषित अपमार्जकों के प्रदर्शन के अंतर को समझें, और प्रत्येक के अनुप्रयोग को याद रखें।

 

Question 27. निम्नलिखित यौगिकों में जलरागी एवं जलविरागी भाग दर्शाइए
(क) \(CH_3(CH_2)_{10} CH_2OSO_3^- Na^+\)
(ख) \(CH_3(CH_2)_{15}N^+(CH_3)_3 Br^-\)
(ग) \(CH_3(CH_2)_{16} COO(CH_2CH_2O)_n CH_2CH_2OH\)
Answer:
(i)
\(CH_3 (CH_2)_{10} CH_2-OSO_3^- Na^+\)
जलविरागी भाग जलरागी भाग
(ii)
\(CH_3(CH_2)_{15} - N^+(CH_3)_3 Br^-\)
जलविरागी भाग जलरागी भाग
(iii)
\(CH_3(CH_2)_{16} - COO(CH_2CH_2O)_n CH_2CH_2OH\)
जलविरागी भाग जलरागी भाग
In simple words: इन यौगिकों में लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाएं जलविरागी भाग होती हैं, क्योंकि वे अध्रुवीय होती हैं और पानी से दूर रहती हैं, जबकि आयनिक समूह (\(OSO_3^- Na^+\), \(N^+(CH_3)_3 Br^-\)) या ऑक्सीजन युक्त पॉलीथीन ग्लाइकॉल श्रृंखलाएं जलरागी भाग होती हैं, जो पानी से आकर्षित होती हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न अपमार्जक अणुओं में जलरागी (ध्रुवीय) और जलविरागी (अध्रुवीय) भागों की पहचान करना सीखें, जो उनकी सफाई क्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. डाइजीन (digene) है।
(i) पीड़ाहारी
(ii) पूतिरोधी
(iii) प्रतिअम्ल
(iv) प्रतिहिस्टैमिन
Answer: (iii) प्रतिअम्ल
In simple words: डाइजीन एक प्रतिअम्ल है, जिसका उपयोग पेट की अम्लता को कम करने और एसिडिटी से राहत दिलाने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: सामान्य औषधों के मुख्य वर्गीकरण (जैसे प्रतिअम्ल, पीड़ाहारी) और उनके उपयोग को याद रखें।

 

Question 2. निम्न में से कौन-सा प्रतिअम्ल है?
(i) ग्रास्त्रीवॉल
(ii) फीनॉल
(iii) ओमेप्राजोल
(iv) डेटॉल
Answer: (iii) ओमेप्राजोल
In simple words: ओमेप्राजोल एक प्रतिअम्ल है जो पेट में एसिड उत्पादन को कम करके एसिडिटी का इलाज करता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न रासायनिक यौगिकों के औषधीय उपयोगों को पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. डूगों का वह वर्ग जिसका प्रयोग तनाव के उपचार के लिए किया जाता है, है।
(i) पीड़ाहारी
(ii) पूतिरोधी
(iii) प्रतिहिस्टैमिन
(iv) प्रशांतक
Answer: (iv) प्रशांतक
In simple words: प्रशांतक दवाओं का वह वर्ग है जिसका उपयोग तनाव और चिंता को कम करने के लिए किया जाता है, जिससे व्यक्ति को आराम मिलता है।

🎯 Exam Tip: औषधों के विभिन्न वर्गों (जैसे प्रशांतक, पीड़ाहारी) और उनके विशिष्ट प्रभावों को याद रखें।

 

Question 4. निम्न में से किसका प्रयोग प्रशांतक के रूप में किया जाता है?
(i) नेप्रोक्सेन
(ii) टेट्रासाइक्लिन
(iii) क्लोरफेनेरामाइन
(iv) इक्वैनिल
Answer: (iv) इक्वैनिल
In simple words: इक्वैनिल एक प्रशांतक है जिसका उपयोग तनाव, चिंता और हल्के अवसाद के इलाज में किया जाता है।

🎯 Exam Tip: कुछ सामान्य प्रशांतक दवाओं के नाम और उनके उपयोगों को जानना आवश्यक है।

 

Question 5. बार्बिटयूरिक अम्ल का प्रयोग किस रूप में होता है?
(i) ज्वरनाशी
(ii) पूतिरोधी
(iii) पोड़ाहारी
(iv) प्रशांतक
Answer: (iv) प्रशांतक
In simple words: बार्बिटयूरिक अम्ल का उपयोग प्रशांतक के रूप में किया जाता है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को अवसादित करके नींद और शांत प्रभाव उत्पन्न करते हैं।

🎯 Exam Tip: बार्बिटयूरिक अम्ल जैसे पदार्थों के प्रमुख औषधीय उपयोगों को याद रखें।

 

Question 6. निम्न में से सम्भवतः किसका प्रयोग बिना व्यसन उत्पन्न किए पीड़ाहारी के रूप में किया जाता है?
(i) मॉर्फीन
(ii) N-ऐसीटिल-पैरा-ऐमीनोफीनॉल
(iii) डाइजीपाम
(iv) मेथिल सैलिसिलेट
Answer: (ii) N-ऐसीटिल-पैरा-ऐमीनोफीनॉल
In simple words: N-ऐसीटिल-पैरा-ऐमीनोफीनॉल (पैरासिटामोल) एक पीड़ाहारी है जिसका उपयोग बिना व्यसन बनाए दर्द से राहत के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: व्यसनकारी बनाम गैर-व्यसनकारी पीड़ाहारियों के बीच का अंतर और उनके सामान्य उदाहरणों को जानें।

 

Question 7. ऐसीटॉक्सी बेंजोइक अम्ल कार्य करता है।
(i) पीड़ाहारी
(ii) ज्वरनाशी
(iii) पूतिरोधी
(iv) प्रतिजैविक
Answer: (i) पीड़ाहारी
In simple words: ऐसीटॉक्सी बेंजोइक अम्ल एक पीड़ाहारी है, जो दर्द को कम करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: रासायनिक नाम और उनके औषधीय प्रभावों के बीच संबंध को समझें।

 

Question 8. ऐस्प्रिन है।
(i) प्रतिजैविक
(ii) ज्वरनाशी
(iii) पूतिरोधी
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ii) ज्वरनाशी
In simple words: एस्प्रिन एक ज्वरनाशी है, जिसका उपयोग बुखार को कम करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: एस्प्रिन के बहुपयोगी गुणों को याद रखें, जिसमें ज्वरनाशी, पीड़ाहारी और सूजनरोधी गुण शामिल हैं।

 

Question 9. ऐसीटिल सैलिसिलिक ऐसिड कहलाता है।
(i) पूतिरोधी
(ii) ऐस्प्रिन
(iii) प्रतिजैविक
(iv) रंजक
Answer: (ii) ऐस्प्रिन
In simple words: ऐसीटिल सैलिसिलिक एसिड को आमतौर पर एस्प्रिन के नाम से जाना जाता है।

🎯 Exam Tip: औषधों के रासायनिक नाम और उनके सामान्य नामों के बीच संबंध को याद रखें।

 

Question 10. निम्न में से कौन शरीर का ताप कम करता है?
(i) ज्वरनाशी
(ii) पीड़ाहारी
(iii) प्रतिजैविक
(iv) वैलियम
Answer: (i) ज्वरनाशी
In simple words: ज्वरनाशी वे औषधियाँ होती हैं जो शरीर के बढ़े हुए तापमान (बुखार) को कम करती हैं।

🎯 Exam Tip: ज्वरनाशी दवाओं के कार्य और उदाहरणों को जानें।

 

Question 11. ऐसीटिल सैलिसिलिक ऐसिड का प्रयोग किस रूप में होता है?
(i) प्रतिमलेरियल
(ii) प्रति अवसादक
(iii) पूतिरोधी
(iv) ज्वरनाशी
Answer: (iv) ज्वरनाशी
In simple words: ऐसीटिल सैलिसिलिक एसिड, जिसे एस्प्रिन भी कहते हैं, मुख्य रूप से ज्वरनाशी के रूप में प्रयोग किया जाता है, जो बुखार को कम करता है।

🎯 Exam Tip: एस्प्रिन के विभिन्न औषधीय उपयोगों को याद रखें, जिसमें ज्वरनाशी एक प्रमुख भूमिका है।

 

Question 12. टिंक्चर आयोडीन है।
(i) I2 का जलीय विलयन
(ii) जलीय KI में I2 का विलयन
(iii) I2 का ऐल्कोहॉलीय विलयन
(iv) KI का जलीय विलयन
Answer: (iii) I2 का ऐल्कोहॉलीय विलयन
In simple words: टिंक्चर आयोडीन, आयोडीन का ऐल्कोहॉलीय विलयन है, जिसका उपयोग पूतिरोधी के रूप में किया जाता है।

🎯 Exam Tip: टिंक्चर आयोडीन की सही संरचना (घोलने वाला विलायक) को याद रखें।

 

Question 13. निम्न में से कौन प्रतिजैविक नहीं है?
(i) पेनिसिलीन
(ii) ऑक्सीटॉसिन
(iii) टेट्रासाइक्लीन
(iv) एरिथ्रोमाइसिन
Answer: (ii) ऑक्सीटॉसिन
In simple words: ऑक्सीटॉसिन एक हार्मोन है, न कि प्रतिजैविक; पेनिसिलीन, टेट्रासाइक्लिन और एरिथ्रोमाइसिन सभी प्रतिजैविक हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की दवाओं (हार्मोन, प्रतिजैविक) को पहचानना सीखें।

 

Question 14. बीटाडीन है।
(i) पूतिरोधी
(ii) प्रशांतक
(iii) विसंक्रामी
(iv) प्रतिजैविक
Answer: (i) पूतिरोधी
In simple words: बीटाडीन एक पूतिरोधी है, जिसका उपयोग घावों को संक्रमण से बचाने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: बीटाडीन जैसे सामान्य एंटीसेप्टिक के कार्य को याद रखें।

 

Question 15. पैरासीटेमॉल प्रयुक्त होता है।
(i) प्रतिजैविक के रूप में
(ii) मलेरिया रोधी के रूप में
(iii) ज्वरनाशी के रूप में
(iv) पूतिरोधी के रूप में
Answer: (iii) ज्वरनाशी के रूप में
In simple words: पैरासिटामोल का उपयोग मुख्य रूप से ज्वरनाशी के रूप में बुखार कम करने और हल्के से मध्यम दर्द को दूर करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: पैरासिटामोल के प्रमुख औषधीय उपयोगों को जानें, जिसमें ज्वरनाशी और पीड़ाहारी प्रभाव शामिल हैं।

 

Question 16. पेनिसिलीन है
(i) पूतिरोधी
(ii) ज्वरनाशी
(iii) ऐण्टीबायोटिक
(iv) खाद्य परिरक्षक
Answer: (iii) ऐण्टीबायोटिक
In simple words: पेनिसिलीन एक ऐण्टीबायोटिक है, जिसका उपयोग जीवाणु संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: पेनिसिलीन जैसे प्रसिद्ध प्रतिजैविक के वर्गीकरण और उपयोग को याद रखें।

 

Question 17. फीनॉल का 0.2% विलयन निम्न रूप में कार्य करता है।
(i) दर्दनाशक
(ii) ऐण्टीसेप्टिक
(iii) संक्रमण रोधी
(iv) एण्टीबायोटिक
Answer: (ii) ऐण्टीसेप्टिक
In simple words: फीनॉल का 0.2% विलयन एक ऐण्टीसेप्टिक के रूप में कार्य करता है, जिसका उपयोग जीवित ऊतकों पर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: फीनॉल की सांद्रता के आधार पर उसके विभिन्न उपयोगों (ऐण्टीसेप्टिक बनाम विसंक्रामी) को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 18. डेटॉल है एक
(i) प्रतिजैविक
(ii) ज्वररोधी
(iii) दर्दनाशक
(iv) पूतिरोधी
Answer: (iv) पूतिरोधी
In simple words: डेटॉल एक पूतिरोधी है जिसका उपयोग त्वचा और घावों पर सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने या उनकी वृद्धि को रोकने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: डेटॉल के वर्गीकरण और प्राथमिक उपयोग को याद रखें।

 

Question 19. पैरासीटामोल की संरचना है।
(i)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना N-(2-एमिनोएथिल)बेंजामाइड क्लोरो डेरिवेटिव को दर्शाती है, जो पैरासिटामोल की संरचना नहीं है।
\(Cl-C_6H_4-CONH_2CH_2\)
(ii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना N-मेथिल-N-(4-क्लोरोबेंज़ोयल)एमाइड को दर्शाती है, जो पैरासिटामोल की संरचना नहीं है।
\(Cl-C_6H_4-CO-NH-CH_3\)
(iii)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना N-(4-हाइड्रॉक्सीफेनिल)एसिटामिड को दर्शाती है, जो पैरासिटामोल की सही संरचना है। इसमें एक पैरा-हाइड्रॉक्सीफेनिल समूह और एक एसिटामिड समूह होता है।
\(HO-C_6H_4-NHCOCH_3\)
(iv)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना (4-हाइड्रॉक्सीफेनिल)मेथिलऐमीन को दर्शाती है, जो पैरासिटामोल की संरचना नहीं है।
\(H-O-C_6H_4-CH_2NH_2\)
Answer: (iii) HO-C6H4-NHCOCH3
In simple words: पैरासिटामोल की संरचना N-(4-हाइड्रॉक्सीफेनिल)एसिटामिड है, जिसमें एक हाइड्रोक्सिल समूह और एक एसिटामिड समूह होता है।

🎯 Exam Tip: सामान्य औषधों, जैसे पैरासिटामोल, की रासायनिक संरचनाओं को पहचानना और याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 20. पूतिरोधी तथा विसंक्रामी सूक्ष्मजीवों का विनाश करते हैं या उनकी वृद्धि को रोकते हैं। निम्न में से जो कथन सही नहीं है, उसको पहचानिए ।
(i) क्लोरीन व आयोडीन प्रबल विसंक्रामी की तरह प्रयोग में आते हैं।
(ii) बोरिक अम्ल व हाइड्रोजन परॉक्साइड का तनु विलयन प्रबल पूतिरोधी होता है।
(iii) विसंक्रामी जीवित ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं।
(iv) फीनॉल का 0.2% विलयन पूतिरोधी है, जबकि 1% विलयन विसंक्रामी है।
Answer: (ii) बोरिक अम्ल व हाइड्रोजन परॉक्साइड का तनु विलयन प्रबल पूतिरोधी होता है।
In simple words: गलत कथन यह है कि बोरिक अम्ल और हाइड्रोजन परॉक्साइड का तनु विलयन प्रबल पूतिरोधी होता है; ये हल्के पूतिरोधी हैं, प्रबल नहीं।

🎯 Exam Tip: पूतिरोधी और विसंक्रामी की प्रबलता और उनके उपयोगों के बारे में सटीक जानकारी रखें।

 

Question 21. निम्न में से किसका प्रयोग ‘मॉर्निंग ऑफ्टर पिल' के रूप में किया जाता है?
(i) एथिनिलएस्ट्राडाइऑल
(ii) मिफैप्रिस्टोन
(iii) बाइथायोनल
(iv) प्रोमैथेजिन
Answer: (ii) मिफैप्रिस्टोन
In simple words: मिफैप्रिस्टोन का प्रयोग 'मॉर्निंग आफ्टर पिल' के रूप में किया जाता है, जो आपातकालीन गर्भनिरोधक के लिए एक हार्मोनल दवा है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न गर्भनिरोधक दवाओं के प्रकार और उनके विशिष्ट उपयोगों को जानें।

 

Question 22. क्लोरीन मुक्त कृत्रिम मधुरक जिसकी दिखावट और स्वाद शर्करा (sugar) के समान होता है और जो पकाने के ताप पर स्थायी होता है, है।
(i) एस्पार्टेम
(ii) सैकेरिन
(iii) सुक्रोलोस
(iv) ऐलीटेम
Answer: (iii) सुक्रोलोस
In simple words: सुक्रोलोस एक क्लोरीन मुक्त कृत्रिम मधुरक है जो चीनी जैसा दिखता और स्वाद देता है, और यह खाना पकाने के तापमान पर भी स्थिर रहता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न कृत्रिम मधुरकों के गुणों (जैसे तापीय स्थिरता, मिठास की तीव्रता) और उनके उपयोगों को समझें।

 

Question 23. सॉर्बिक अम्ल और प्रोपिओनिक अम्ल हैं।
(i) प्रतिऑक्सीकारक
(ii) खाद्य परिरक्षक
(iii) पोषक पूरक
(iv) अपमार्जक
Answer: (ii) खाद्य परिरक्षक
In simple words: सॉर्बिक अम्ल और प्रोपिओनिक अम्ल दोनों खाद्य परिरक्षक हैं, जिनका उपयोग भोजन को सूक्ष्मजीवों द्वारा खराब होने से बचाने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न खाद्य परिरक्षकों के उदाहरणों और उनके कार्य को जानें।

 

Question 24. केश कंडीशनरों में प्रयुक्त कार्बनिक अपमार्जक है।
(i) सोडियम लॉरिल सल्फेट
(ii) सोडियम डोडेसिलबेंजीन सल्फोनेट
(iii) सोडियम स्टेरिल सल्फेट
(iv) सेटिलट्राइमेथिलअमोनियम ब्रोमाइड
Answer: (iv) सेटिलट्राइमेथिलअमोनियम ब्रोमाइड
In simple words: केश कंडीशनरों में सेटिलट्राइमेथिलअमोनियम ब्रोमाइड एक कार्बनिक अपमार्जक के रूप में उपयोग किया जाता है, जो बालों को मुलायम और चमकदार बनाता है।

🎯 Exam Tip: केश कंडीशनरों में प्रयुक्त धनायनिक अपमार्जकों के उदाहरणों और उनके कार्य को याद रखें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. ड्रग क्या है?
Answer: वह रासायनिक पदार्थ जो रोग का उपचार करता है और जिसके प्रयोग से व्यक्ति उसका आदि हो जाता है, ड्रग कहलाता है।
In simple words: ड्रग एक रासायनिक पदार्थ है जो रोग के इलाज में मदद करता है, लेकिन इसके उपयोग से व्यक्ति को उसकी लत लग सकती है।

🎯 Exam Tip: ड्रग की परिभाषा और उसके व्यसनकारी पहलू को समझें।

 

Question 2. ड्रग का अणुभार कितना होता है?
Answer: 100-500 u.
In simple words: आमतौर पर, ड्रग्स का अणुभार 100 से 500 परमाणु द्रव्यमान इकाइयों (u) के बीच होता है, जिससे वे शरीर में विशिष्ट जैविक लक्ष्यों के साथ परस्पर क्रिया कर सकें।

🎯 Exam Tip: ड्रग के औसत अणुभार की सीमा को याद रखें।

 

Question 3. एंजाइम क्या हैं?
Answer: प्रोटीन जो जैव उत्प्रेरकों की तरह कार्य करते हैं तथा शरीर में होने वाली विभिन्न अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं, एंजाइम कहलाते हैं।
In simple words: एंजाइम प्रोटीन होते हैं जो शरीर में जैविक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं, रासायनिक अभिक्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: एंजाइम की परिभाषा, उनकी प्रोटीन प्रकृति और उत्प्रेरक के रूप में उनके कार्य को याद रखें।

 

Question 4. ग्राही कहाँ स्थित होते हैं?
Answer: ग्राही कोशिका कला की बाहरी सतह पर स्थित होते हैं।
In simple words: ग्राही कोशिका झिल्ली की बाहरी सतह पर स्थित होते हैं और विशिष्ट रासायनिक संदेशों को प्राप्त करने का कार्य करते हैं।

🎯 Exam Tip: ग्राही की स्थिति और उनके कार्य को शरीर की संचार प्रणाली के संदर्भ में समझें।

 

Question 5. ऐलोस्टैरिक स्थान से क्या तात्पर्य है?
Answer: एंजाइम का वह स्थान (सक्रिय स्थान से अलग) जहाँ पर एक अणु जुड़कर सक्रिय स्थान की आकृति को परिवर्तित कर देता है, ऐलोस्टैरिक स्थान कहलाता है।
In simple words: ऐलोस्टैरिक स्थान एंजाइम पर सक्रिय स्थान से भिन्न एक ऐसा स्थल होता है, जहाँ किसी अणु के जुड़ने से एंजाइम के सक्रिय स्थान की आकृति बदल जाती है, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

🎯 Exam Tip: ऐलोस्टैरिक स्थान की परिभाषा और इसकी एंजाइम के कार्य पर पड़ने वाले प्रभाव को याद रखें।

 

Question 6. ओमेप्राजोल किस प्रकार प्रतिअम्ल का कार्य करती है?
Answer: ओमेप्राजोल आमाशय में HCl के बनने को रोककर प्रतिअम्ल का कार्य करती है।
In simple words: ओमेप्राजोल पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के उत्पादन को रोककर प्रतिअम्ल के रूप में कार्य करता है, जिससे एसिडिटी कम होती है।

🎯 Exam Tip: ओमेप्राजोल जैसे विशिष्ट प्रतिअम्लों के कार्यप्रणाली को याद रखें।

 

Question 7. किस औषध का प्रयोग हृदयाघातों को रोकने के लिए किया जाता है?
Answer: एस्पिरिन ।
In simple words: एस्पिरिन का प्रयोग हृदयाघातों को रोकने के लिए किया जाता है क्योंकि यह रक्त पतला करने का कार्य करती है।

🎯 Exam Tip: एस्पिरिन के हृदय रोगों में उपयोग की भूमिका को जानें।

 

Question 8. एस्पिरिन किस प्रकार पीड़ाहारी का कार्य करती है?
Answer: ऐस्पिरिन प्रोस्टाग्लैन्डिन के संश्लेषण को रोककर पीड़ाहारी का कार्य करती है। प्रोस्टाग्लैन्डिन ऊतकों की सूजन में वृद्धि कर दर्द उत्पन्न करते हैं।
In simple words: एस्पिरिन प्रोस्टाग्लैन्डिन के उत्पादन को बाधित करके पीड़ाहारी के रूप में कार्य करती है, क्योंकि प्रोस्टाग्लैन्डिन दर्द और सूजन का कारण बनते हैं।

🎯 Exam Tip: एस्पिरिन की कार्यप्रणाली को प्रोस्टाग्लैन्डिन संश्लेषण के अवरोध से जोड़कर समझें।

 

Question 9. एक पदार्थ का नाम लिखिए जो दोनों के समान कार्य करता है।
1. पीड़ाहारी और ज्वरनाशी तथा
2. पूतिरोधी और विसंक्रामी ।
Answer:
1. एस्पिरिन
2. फीनॉल
In simple words: एस्पिरिन एक ही समय में दर्द कम करने (पीड़ाहारी) और बुखार उतारने (ज्वरनाशी) का कार्य करती है, जबकि फीनॉल एक ही पदार्थ है जिसे विभिन्न सांद्रताओं पर पूतिरोधी और विसंक्रामी दोनों के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे पदार्थों के उदाहरणों को याद रखें जिनके दोहरे औषधीय गुण होते हैं, जैसे एस्पिरिन और फीनॉल।

 

Question 10. प्रतिसूक्ष्मजैविक क्या होते हैं? या प्रतिजैविक क्या होते हैं? किन्हीं दो प्रतिजैविकों के नाम लिखिए।
Answer: वे ड्रग जिनका प्रयोग सूक्ष्मजीवों; जैसे-जीवाणु, वाइरस, कवक आदि के द्वारा उत्पन्न रोगों के निवारण के लिए किया जाता है, प्रतिसूक्ष्मजैविक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ : पेनिसिलीन तथा स्ट्रेप्टोमाइसिन ।
In simple words: प्रतिसूक्ष्मजैविक वे दवाएँ हैं जो बैक्टीरिया, वायरस, या कवक जैसे सूक्ष्मजीवों के कारण होने वाली बीमारियों का इलाज करती हैं, जैसे पेनिसिलीन और स्ट्रेप्टोमाइसिन।

🎯 Exam Tip: प्रतिसूक्ष्मजैविकों की परिभाषा और उनके उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 11. अतिअम्तृता किस प्रकार हानिकारक है?
Answer: अतिअम्लता से व्रण (ulcers) हो जाते हैं।
In simple words: अत्यधिक अम्लता पेट में घाव (अल्सर) पैदा कर सकती है, जिससे दर्द और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: अतिअम्लता के मुख्य हानिकारक प्रभाव को याद रखें।

 

Question 12. एक विस्तृत परास वाले प्रतिजैविक का नाम लिखिए।
Answer: क्लोरमफेनिकॉल।
In simple words: क्लोरमफेनिकॉल एक विस्तृत परास वाला प्रतिजैविक है, जो विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया के संक्रमणों के खिलाफ प्रभावी होता है।

🎯 Exam Tip: विस्तृत परास वाले प्रतिजैविकों के उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 13. सल्फा ड्रग का मूल यौगिक क्या है?
Answer: सल्फोनिलेमाइड
In simple words: सल्फा ड्रग्स का मूल यौगिक सल्फोनिलेमाइड है, जिससे विभिन्न प्रकार की सल्फा दवाएँ बनाई जाती हैं।

🎯 Exam Tip: सल्फा ड्रग्स के रासायनिक आधार को जानें।

 

Question 14. सल्फा ड्रग्स प्रतिजैविकों की तरह कार्य करती हैं लेकिन प्रतिजैविक नहीं होती हैं। क्या यह कथन सत्य है और क्यों?
Answer: यह कथन सत्य है। सल्फा ड्रग्स सूक्ष्मजीवियों के प्रति प्रतिजैविकों के समान व्यवहार करती हैं। लेकिन सूक्ष्मजीवियों से प्राप्त नहीं होती हैं।
In simple words: यह कथन सत्य है कि सल्फा ड्रग्स प्रतिजैविकों की तरह कार्य करती हैं लेकिन प्रतिजैविक नहीं हैं, क्योंकि वे सूक्ष्मजीवों को नष्ट करती हैं पर उनका उत्पादन सूक्ष्मजीवों से नहीं होता, जो प्रतिजैविकों की परिभाषा का मुख्य हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: प्रतिजैविकों की परिभाषा और सल्फा ड्रग्स से उनके अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 15. आँखों के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले पूतिरोधी का नाम लिखिए ।
Answer: बोरिक अम्ल (\(H_3 BO_3\)) का प्रयोग आँखों के लिए प्रतिरोधी के रूप में किया जाता है।
In simple words: बोरिक अम्ल एक हल्का पूतिरोधी है जिसका उपयोग आँखों में संक्रमण रोकने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: आँखों के लिए उपयोग किए जाने वाले विशिष्ट पूतिरोधियों को याद रखें।

 

Question 16. रासायनिक रूप से सैकेरिन क्या है?
Answer: ऑथोंसल्फोबेन्जीमाइड ।
In simple words: सैकरीन का रासायनिक नाम ऑर्थोसल्फोबेन्जीमाइड है, जो एक कृत्रिम मधुरक है।

🎯 Exam Tip: सैकरीन जैसे सामान्य कृत्रिम मधुरकों के रासायनिक नाम को याद रखें।

 

Question 17. एक कृत्रिम मधुरक का नाम लिखिए जो सुक्रोस का व्युत्पन्न है ।
Answer: सुक्रोलोस ।
In simple words: सुक्रोलोस एक कृत्रिम मधुरक है जो सुक्रोस से व्युत्पन्न होता है और इसमें कोई कैलोरी नहीं होती।

🎯 Exam Tip: सुक्रोस के व्युत्पन्न कृत्रिम मधुरक के नाम को याद रखें।

 

Question 18. D – शर्कराएँ अन्तर्ग्रहीत कैलोरी बढ़ाती हैं, जबकि L – शर्कराएँ नहीं, क्यों?
Answer: L – शर्कराएँ अन्तर्ग्रहीत कैलोरी नहीं बढ़ातीं क्योंकि हमारे शरीर में इनका उपापचय करने वाले । एंजाइम नहीं पाए जाते हैं; अतः ये पूर्वावस्था में ही उत्सर्जित हो जाती हैं।
In simple words: D-शर्कराएँ कैलोरी बढ़ाती हैं क्योंकि शरीर उन्हें पचा सकता है, जबकि L-शर्कराएँ कैलोरी नहीं बढ़ातीं क्योंकि मानव शरीर में उन्हें पचाने वाले एंजाइम नहीं होते, और वे बिना उपापचयित हुए उत्सर्जित हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: D और L-शर्कराओं के बीच के अंतर को, विशेष रूप से उनके उपापचय और कैलोरी मान के संदर्भ में समझें।

 

Question 19. दो अम्लों के नाम लिखिए जिनके सोडियम लवण खाद्य परिरक्षकों की भाँति प्रयोग किए जाते हैं।
Answer: बेन्जोइक अम्ल तथा सॉर्बिक अम्ल ।
In simple words: बेन्जोइक अम्ल और सॉर्बिक अम्ल के सोडियम लवणों का उपयोग खाद्य परिरक्षकों के रूप में किया जाता है ताकि भोजन को सूक्ष्मजीवों से खराब होने से बचाया जा सके।

🎯 Exam Tip: खाद्य परिरक्षकों के रूप में उपयोग किए जाने वाले कार्बनिक अम्लों के उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 20. संश्लेषित अपमार्जक क्या होते हैं? किन्हीं दो अपर्माजकों के नाम लिखिए।
Answer: यह एक विशेष प्रकार का कृत्रिम आयनिक कार्बनिक पदार्थ है जिसमें साबुन की तरह मैल घोलने का गुण पाया जाता है। इसका प्रयोग कठोर एवं मृदु दोनों प्रकार के जल के साथ किया जा सकता है। यह प्रबल कार्बनिक अम्ल और प्रबल कार्बनिक क्षारक से बने हुए अति उच्च अणुभार के लवण होते हैं। जिसके धनायन या ऋणायन में 12 से 18 कार्बनिक परमाणुओं वाली हाइड्रोकार्बन शृंखला और जल विरोधी व जल स्नेही दोनों प्रकार उपस्थित होते हैं। उदाहरण :
(i) सोडियम लॉरिल सल्फेट
(ii) सोडियम P डोडेसिलबेन्जीन सल्फोनेट
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह सोडियम डोडेसिलबेंजीन सल्फोनेट (SDS) की संरचना को दर्शाता है, जिसमें एक लंबी जलविरागी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला और एक जलरागी सल्फोनेट समूह होता है। यह एक आयनिक डिटर्जेंट है जो कठोर और मृदु दोनों जल में प्रभावी है।
\(CH_3(CH_2)_{10}CH_2-C_6H_4-S-O^-Na^+\)
In simple words: संश्लेषित अपमार्जक कृत्रिम आयनिक कार्बनिक पदार्थ होते हैं जो कठोर और मृदु दोनों प्रकार के जल में प्रभावी रूप से मैल हटाते हैं, और इनमें लंबी जलविरागी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला तथा जलरागी आयनिक भाग होते हैं, जैसे सोडियम लॉरिल सल्फेट।

🎯 Exam Tip: संश्लेषित अपमार्जकों की परिभाषा, उनकी संरचनात्मक विशेषताएँ (जलविरागी/जलरागी भाग), और उनके उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 21. मृदु साबुन से क्या तात्पर्य है?
Answer: ओलिक अम्ल, पामीटिक अम्ल, स्टियरिक अम्ल आदि वसीय अम्लों के पोटैशियम लवण मृदु . साबुन कहलाते हैं।
In simple words: मृदु साबुन वसीय अम्लों के पोटेशियम लवण होते हैं, जो आमतौर पर नहाने के साबुन के रूप में उपयोग किए जाते हैं क्योंकि वे त्वचा पर कोमल होते हैं।

🎯 Exam Tip: मृदु साबुन की परिभाषा और उन्हें बनाने वाले वसीय अम्लों के पोटेशियम लवणों के नाम याद रखें।

 

Question 22. साबुनों में बाइथायोनल क्यों मिलाया जाता है?
Answer: बाइथायोनल एक पूतिरोधी है। यह त्वचा पर जैव पदार्थों के जीवाणुओं द्वारा अपघटन से उत्पन्न दुर्गंध को समाप्त कर देता है इसलिए इसका प्रयोग साबुनों में किया जाता है।
In simple words: साबुनों में बाइथायोनल मिलाया जाता है क्योंकि यह एक पूतिरोधी है जो त्वचा पर जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न दुर्गंध को खत्म करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: साबुनों में विभिन्न योजकों (additives) के उद्देश्य को जानें।

 

Question 23. किस प्रकार के अपमार्जक का उपयोग कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता है?
Answer: धनायनिक अपमार्जकों का।
In simple words: कीटाणुनाशक के रूप में धनायनिक अपमार्जकों का उपयोग किया जाता है क्योंकि वे सूक्ष्मजीवों को प्रभावी ढंग से नष्ट करते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के अपमार्जकों के विशिष्ट उपयोगों को याद रखें।

 

Question 24. किन अपमार्जकों को बर्तन धोने के लिए प्रयोग किया जाता है?
Answer: अन-आयनिक अपमार्जकों को ।
In simple words: बर्तन धोने के लिए अनायनिक अपमार्जकों का उपयोग किया जाता है क्योंकि वे झाग कम बनाते हैं और तेल तथा चिकनाई को अच्छी तरह हटाते हैं।

🎯 Exam Tip: अनायनिक अपमार्जकों के गुणों और उनके सामान्य घरेलू उपयोगों को जानें।

 

Question 25. किस प्रकार के अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय होते हैं?
Answer: अत्यधिक शाखित अपमार्जक ।
In simple words: अत्यधिक शाखित श्रृंखला वाले अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय होते हैं क्योंकि जीवाणु उन्हें आसानी से विघटित नहीं कर पाते, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण होता है।

🎯 Exam Tip: अपमार्जक की जैव-निम्नीकरणीयता को उनकी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला की संरचना (शाखित बनाम सीधी) से जोड़कर समझें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. प्रतिहिस्टैमिन क्या होते हैं। दो उदाहरण दीजिए। समझाइए कि ये मानव शरीर पर कैसे कार्य करते हैं?
Answer: वे ड्रग जो हिस्टैमिन के प्रभावों को समाप्त करने के लिए प्रयोग की जाती हैं, प्रतिहिस्टैमिन कहलाती हैं। उदाहरणार्थ : ब्रोमफेनिरामिन, टरफेनाडिन, डाइफेनिलहाइड्रेजीन, क्लोरफेनिरैमीन मैलिएट आदि । प्रतिहिस्टैमिन हिस्टैमिन के साथ 'ग्राही की उस बंधनी सतह के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं जिस पर हिस्टैमिन अपना प्रभाव डालती हैं। इस प्रकार ये हिस्टैमिन के प्राकृतिक कार्य में बाधा डालती हैं तथा हमारे । शरीर को उनके प्रभावों से मुक्ति दिलाती हैं।
In simple words: प्रतिहिस्टैमिन वे दवाएं हैं जो शरीर में हिस्टैमिन के प्रभावों को रोकती हैं, जैसे कि एलर्जी के लक्षणों को कम करना। ये दवाएं हिस्टैमिन ग्राही स्थलों पर हिस्टैमिन के साथ प्रतिस्पर्धा करके कार्य करती हैं, जिससे हिस्टैमिन अपना प्रभाव नहीं दिखा पाता।

🎯 Exam Tip: प्रतिहिस्टैमिन की परिभाषा, कार्यप्रणाली (ग्राही अवरोधन) और सामान्य उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 2. ऐण्टीफर्टीलिटी ड्रग्स (antifertility drugs) से आप क्या समझते हैं? समझाइए ।
Answer: वे रासायनिक पदार्थ जो जनन अथवा उत्पादकता (productivity) पर नियन्त्रण रखते हैं, प्रतिजनन क्षमता औषधि (antifertility drugs) कहलाते हैं। इनको विकसित करने का उद्देश्य विश्व की बढ़ती हुई आबादी को कम करना एवं उसको नियन्त्रित करना है। इस दिशा में प्रयोग चूहे, मानव, खरगोश एवं बन्दरों पर करके सार्थक परिणाम निकाले गए। जनन नियन्त्रण औषधियों में संश्लेषित ऐस्ट्रोजन (estrogen) तथा प्रोजेस्टेरोन (progesterone) व्युत्पन्नों का मिश्रण होता है। संश्लेषित प्रोजेस्टोरोन व्युत्पन्न प्राकृतिक प्रोजेस्टेरोन से अधिक प्रभावशाली होते हैं। दोनों ही यौगिक हॉर्मोन होते हैं।
(1) संश्लेषित एस्ट्रोजन : मौखिक गर्भ निरोधकों के रूप में दो संश्लेषित एस्ट्रोजन प्रयोग किए जा रहे हैं; जैसे-एथाइनिल एस्ट्रोडाइऑल (ethynyl estradiol)।
(2) संश्लेषित प्रोजेस्टेरोन : ये तीन प्रकार के होते हैं— प्रेगानेन, ओएस्ट्रॉन और गोनॉन । इनमें प्रेगानेन लम्बे समय तक नहीं दी जाती है क्योंकि स्तन कैंसर का भय रहता है। इसी प्रकार ओएस्ट्रॉन जिसे 19 – नॉरटेस्टोस्टेरोन भी कहते हैं, का अधिक समय तक प्रयोग नहीं किया जाता है। गोनॉन सबसे पसंदीदा गर्भ निरोधक हॉर्मोन है जो आजकल प्रयुक्त की जा रही है।
प्रोजेस्टेरोन अण्डोत्सर्ग को निरोधित करता है। नॉरएथिनड्रॉन (norethindrone) संश्लेषित प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न को एक उदाहरण है जो व्यापक रूप से जनन नियन्त्रण गोलियों में प्रयोग होता है। एथाइनिलएस्ट्राडाइऑल (ethynylestradiol) एक एस्ट्रोजन व्युत्पन्न है जो प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न के साथ जनन नियन्त्रण गोलियों में प्रयुक्त होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह नॉरएथिनड्रॉन और एथाइनिलएस्ट्राडाइऑल की रासायनिक संरचनाओं को दर्शाता है। नॉरएथिनड्रॉन एक संश्लेषित प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न है जो गर्भनिरोधक गोलियों में उपयोग होता है, जबकि एथाइनिलएस्ट्राडाइऑल एक एस्ट्रोजन व्युत्पन्न है जो अक्सर प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न के साथ मिलकर गर्भनिरोधक के रूप में कार्य करता है।

माइफप्रिस्टॉन एक संश्लेषित स्टेरॉयड है। यह प्रोजेस्टेरोन के प्रभाव को अवरोधित करके गर्भ नियन्त्रण का कार्य करता है।
In simple words: ऐण्टीफर्टीलिटी ड्रग्स ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करते हैं और गर्भधारण को रोकते हैं, अक्सर संश्लेषित एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्नों के मिश्रण होते हैं जो अंडे के उत्पादन को बाधित करके कार्य करते हैं।

🎯 Exam Tip: ऐण्टीफर्टीलिटी ड्रग्स की परिभाषा, उनके प्रमुख घटकों (संश्लेषित एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) और उनके कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाएँ।

 

Question 3. प्रतिऑक्सीकारक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: प्रतिऑक्सीकारक : वे रासायनिक पदार्थ जो वसा तथा वसा युक्त पदार्थों से मिलकर उनके ऑक्सीकरण को रोकते हैं और उनके जीवनकाल को बढ़ाते हैं, प्रतिऑक्सीकारक कहलाते हैं। ये ऑक्सीजन के प्रति अत्यन्त क्रियाशील होते हैं। प्रतिस्थापी फीनॉलिक (phenolic) यौगिकों का उपयोग । प्रतिऑक्सीकारक के रूप में होता है। ब्यूटिल हाइड्रॉक्सी ऐनिसोल (BHA) (butyl hydroxy anisol) एक अविषैला (non-toxic) प्रतिऑक्सीकारक है जिसका व्यापारिक नाम सस्टेन (sustane) है। यह मक्खन के लिए अच्छा ऑक्सीकारक है। इसके अतिरिक्त ब्यूटिल हाइड्रॉक्सी टॉलूईन (BHT) 2, 3 - डाइतृतीयक ब्यूटिल p-ऐनिसॉल (2, 3 - ditertiary butyl p anisol) (BHA) तथा प्रोपिल-3, 4, 5-ट्राइहाइड्रॉक्सी बेन्जोएट (propyl-3, 4, 5 -trihydroxy benzoate) जिसे प्रोपिल गैलेट (propyl gallate) या (PG) भी कहते हैं, आदि प्रतिऑक्सीकारक हैं। ये बहुत कम सान्द्रता (< 0.01%) पर प्रभावी होते हैं। ये भोज्य पदार्थ में उपस्थित आवश्यक वसीय अम्ल (fatty acids) तथा विटामिन (vitamins) के पौष्टिक मान (nutritional value) को बराबर रखते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ब्यूटिल हाइड्रॉक्सी ऐनिसोल (BHA), ब्यूटिल हाइड्रॉक्सी टॉलूईन (BHT) और प्रोपिल गैलेट (PG) के रासायनिक संरचनात्मक सूत्रों को दर्शाता है। ये सभी यौगिक प्रतिऑक्सीकारक के रूप में कार्य करते हैं और इनकी संरचनात्मक भिन्नताओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करते हैं, जिनमें हाइड्रोक्सिल और एस्टर समूह प्रमुख हैं। अतिरिक्त, विटामिन E, सल्फर डाइऑक्साइड तथा ऐस्कॉर्बिक अम्ल विटामिन C को भी प्रतिऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है। इनका उपयोग सामान्य रूप में शराब व बीयर, मीठे तरल पदार्थ, सब्जी तथा कटे, छिले शुष्क फलों के लिए प्रतिऑक्सीकारकों के रूप में किया जाता है। ऐस्कॉर्बिक अम्ल एन्जाइमकृत फेनिल यौगिक के ऑक्सीकरण से उत्पन्न भूरेपन को रोकता है।In simple words: प्रतिऑक्सीकारक ऐसे रसायन होते हैं जो वसायुक्त खाद्य पदार्थों को ऑक्सीकरण से खराब होने से बचाते हैं, जिससे उनका जीवनकाल बढ़ जाता है। इनमें BHA, BHT, और प्रोपिल गैलेट जैसे यौगिक शामिल हैं जो खाद्य पदार्थों में वसा के ऑक्सीकरण को रोककर उनकी गुणवत्ता बनाए रखते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रतिऑक्सीकारक की परिभाषा और उनके प्रमुख उदाहरणों (जैसे BHA, BHT, PG) को याद रखना महत्वपूर्ण है, साथ ही उनके उपयोग और कार्यप्रणाली पर भी ध्यान दें।

 

Question 4. निम्न पर टिप्पणी लिखिए |
(i) ऐस्प्रिन औषधि हृदयाघात से बचाती है।
(ii) डायबिटीज रोगियों को प्राकृतिक मधुरकों के स्थान पर कृत्रिम मधुरक लेने की सलाह दी जाती है।
(iii) अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय होते हैं जबकि साबुन जैव निम्नीकरणीय होते हैं।
Answer:(i) ऐस्प्रिन औषधि हृदयाघात से बचाती है, क्योंकि यह रक्त स्कन्दन रोधी होती है अर्थात् यह रक्त के स्कन्दित होने को कम करती है और स्कन्दित रक्त को तरल में परिवर्तित करती है जिससे रक्त का सुचारु प्रवाह शरीर में होता रहता है और हम हृदयाघात से बच जाते हैं।
(ii) डायबिटीज रोगियों को प्राकृतिक मधुरकों के स्थान पर कृत्रिम मधुरक लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि प्राकृतिक मधुरक रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाते हैं, जबकि कृत्रिम मधुरक रक्त शर्करा का स्तर नहीं बढ़ाते हैं जिससे रोगी स्वस्थ रहता है।
(iii) अपमार्जकों में अत्यधिक शाखित हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाएँ होती हैं जिन्हें जीवाणु अपघटित नहीं कर पाते हैं, जबकि साबुन को जीवाणु आसानी से अपघटित कर देते हैं। इसलिए अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय व साबुन जैव निम्नीकरण होते हैं।In simple words: ऐस्प्रिन रक्त के थक्के जमने से रोककर हृदयाघात से बचाव करती है। मधुमेह रोगियों को कृत्रिम मधुरक सुझाए जाते हैं क्योंकि वे रक्त शर्करा नहीं बढ़ाते, प्राकृतिक मधुरकों के विपरीत। अपमार्जक अपनी शाखित श्रृंखला के कारण जीवाणुओं द्वारा अपघटित नहीं होते, जिससे वे जैव-अनिम्नीकरणीय होते हैं, जबकि साबुन आसानी से अपघटित हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: इन तीन महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्यों को समझने और संक्षेप में व्याख्या करने की क्षमता पर अंक दिए जाते हैं। प्रत्येक बिंदु के पीछे के रासायनिक या जैविक कारण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. औषध तथा एन्जाइम के मध्य अन्योन्यक्रिया को समझाइए।
Answer:1. औषध तथा एन्जाइम के मध्य अन्योन्यक्रिया (Interaction between Drug and Enzyme) : जैविक वृहद्-अणु शरीर में विभिन्न कार्य करते हैं जैसे जैव उत्प्रेरक का कार्य करने वाले प्रोटीन्स को एन्जाइम कहते हैं तथा जो प्रोटीन शरीर की संचार व्यवस्था में निर्णायक होते हैं, उन्हें ग्राही कहते हैं। औषध साधारणतया इन वृहद्-अणुओं से अन्योन्यक्रिया करती हैं। औषध तथा एन्जाइम के मध्य अन्योन्यक्रिया को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि एन्जाइम अभिक्रिया का उत्प्रेरण कैसे करते हैं। 2. एन्जाइम का उत्प्रेरण कार्य (Catalytic Function of Enzyme) : उत्प्रेरण क्रिया में एन्जाइम दो प्रमुख कार्य करते हैं जो निम्नलिखित हैं
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एन्जाइम की उत्प्रेरण क्रियाविधि को दर्शाता है, जहाँ (क) एन्जाइम की सक्रिय सतह, (ख) क्रियाधार, और (ग) क्रियाधार का एन्जाइम की सक्रिय सतह पर बंधन दिखाया गया है। यह स्पष्ट करता है कि क्रियाधार कैसे एन्जाइम से जुड़कर अभिक्रिया के लिए तैयार होता है। (i) एन्जाइम का पहला कार्य क्रियाधार (सबस्ट्रेट) को रासायनिक अभिक्रिया के लिए बाँधे रखना है। एन्जाइम की सक्रिय सतह क्रियाधार अणु को उपयुक्त स्थिति में बाँधे रखती है जिससे इस पर अभिक्रियक द्वारा प्रभावकारी आक्रमण हो सके। क्रियाधार एन्जाइम की सक्रिय सतह पर विभिन्न प्रकार की अन्योन्यक्रियाओं द्वारा बँधते हैं; जैसे-आयनिक आबन्ध, हाइड्रोजन आबन्ध, वान्डरवाल्स अन्योन्यक्रिया या द्विध्रुव-द्विध्रुव बल । (ii) एन्जाइम का दूसरा कार्य क्रियाधार पर आक्रमण करके रासायनिक अभिक्रिया करने के लिए प्रकार्यात्मक समूह उपलब्ध कराना है, जो क्रियाधार पर आक्रमण करके रासायनिक अभिक्रिया करेगा। औषध-एन्जाइम अन्योन्यक्रिया 3. (Drug-Enzyme Interaction) : औषध एन्जाइम की उपर्युक्त गतिविधियों में से किसी में भी अवरोध उत्पन्न करती हैं। ये एन्जाइम की बन्धनी सतह को अवरुद्ध कर सकती हैं और क्रियाधार के आबन्धन में रुकावट डाल सकती हैं अथवा ये एन्जाइम के उत्प्रेरक कार्य में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं, ऐसी औषधों को एन्जाइम संदमक (enzyme inhibitors) कहते हैं । औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह पर क्रियाधार के संयोजन में दो प्रकार से अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं (i) औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह पर संयोजन के लिए वास्तविक क्रियाधार से स्पर्धा करती हैं। ऐसी औषधों को स्पर्धा संदमक (competitive inhibitors) कहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रतिस्पर्धात्मक संदमन (competitive inhibition) को समझाता है, जहाँ औषध और क्रियाधार दोनों एन्जाइम की एक ही सक्रिय सतह पर जुड़ने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। यह दर्शाता है कि कैसे औषध सक्रिय सतह को अवरुद्ध कर सकती है, जिससे क्रियाधार का बंधन बाधित होता है। (ii) कुछ औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह पर संयोजन नहीं करतीं। ये एन्जाइम की भिन्न सतह पर संयोजन करती हैं जिसे ऐलोस्टीरिक सतह कहते हैं। इस प्रकार संदमके के ऐलोस्टीरिक सतह पर संयोजन से सक्रिय सतह की आकृति इस प्रकार परिवर्तित हो जाती है कि क्रियाधार इसे पहचान नहीं
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र अस्पर्धात्मक संदमन (non-competitive inhibition) को प्रदर्शित करता है, जहाँ औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह के बजाय एक भिन्न ऐलोस्टीरिक सतह पर जुड़ती है। यह बंधन सक्रिय सतह की आकृति को बदल देता है, जिससे क्रियाधार उसे पहचान नहीं पाता और अभिक्रिया बाधित होती है। संदमक के बीच बना आबन्ध मजबूत सहसंयोजी आबन्ध हो और आसानी से तोड़ा न जा सके तो एन्जाइम स्थायी रूप से अवरुद्ध हो जाता है, तब शरीर एन्जाइम-संदमक संकुल को निम्नीकृत कर देता है और नया एन्जाइम बनाता है।In simple words: औषधियाँ शरीर में एन्जाइमों के साथ बातचीत करके काम करती हैं। एन्जाइम दो तरीकों से रासायनिक अभिक्रियाओं को गति देते हैं: क्रियाधार को अपनी सक्रिय सतह पर बाँधकर और उसे प्रतिक्रिया के लिए तैयार करके। औषधियाँ इस प्रक्रिया को रोककर काम करती हैं, या तो सक्रिय सतह को अवरुद्ध करके (स्पर्धात्मक संदमन) या किसी और स्थान (ऐलोस्टीरिक सतह) पर जुड़कर सक्रिय सतह का आकार बदलकर (अस्पर्धात्मक संदमन) ताकि क्रियाधार जुड़ न सके।

🎯 Exam Tip: औषध-एन्जाइम अन्योन्यक्रिया, एन्जाइमों के उत्प्रेरक कार्य, और संदमन के प्रकारों (स्पर्धात्मक और अस्पर्धात्मक) को उदाहरणों और आरेखों की मदद से विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है। स्पष्टीकरण में प्रयुक्त शब्दावली और क्रियाविधि का सटीक वर्णन उच्च अंक प्राप्त करने में सहायक होगा।

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