UP Board Solutions Class 11 Physics Chapter 14 Oscillations

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Detailed Chapter 14 दोलनों UP Board Solutions for Class 11 Physics

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Class 11 Physics Chapter 14 दोलनों UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 11 Physics Chapter 14 Oscillations (दोलन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

Question 1. नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन आवर्ती गति को निरूपित करता है? (i) किसी तैराक द्वारा नदी के एक तट से दूसरे तट तक जाना और अपनी एक वापसी यात्रा पूरी करना । (ii) किसी स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाए गए दण्ड चुम्बक को उसकी N-S दिशा से विस्थापित कर छोड़ देना । (iii) अपने द्रव्यमान केन्द्र के परितः घूर्णी गति करता कोई हाइड्रोजन अणु। (iv) किसी कमान से छोड़ा गया तीर ।
Answer: (i) यह आवश्यक नहीं है कि तैराक को प्रत्येक बार वापस लौटने में समान समय ही लगे; अतः यह गति आवर्ती गति नहीं है। (ii) दण्ड चुम्बक को विस्थापित करके छोड़ने पर उसकी गति आवर्ती गति होगी। (iii) यह एक आवर्ती गति है। (iv) तीर छूटने के बाद कभी-भी वापस प्रारम्भिक स्थिति में नहीं लौटता; अतः यह आवर्ती गति नहीं है।
In simple words: आवर्ती गति वह होती है जिसमें वस्तु अपनी गति को एक निश्चित समय अंतराल पर दोहराती है। तैराक और तीर की गति आवर्ती नहीं होती क्योंकि वे निश्चित समय या पथ नहीं दोहराते। दंड चुम्बक और हाइड्रोजन अणु की गति आवर्ती होती है क्योंकि वे संतुलन के इर्द-गिर्द निश्चित समय में दोलन करते हैं।

🎯 Exam Tip: आवर्ती गति की परिभाषा और उसके उदाहरणों को समझना महत्वपूर्ण है। निश्चित समयावधि और मार्ग का दोहराव मुख्य पहचान है।

 

Question 2. नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन (लगभग) सरल आवर्त गति को तथा कौन आवर्ती परन्तु सरल आवर्त गति निरूपित नहीं करते हैं? (i) पृथ्वी की अपने अक्ष के परितः घूर्णन गति ।। (ii) किसी U-नली में दोलायमान पारे के स्तम्भ की गति । (iii) किसी चिकने वक्रीय कटोरे के भीतर एक बॉल बेयरिंग की गति जब उसे निम्नतम बिन्द से कुछ ऊपर के बिन्दु से मुक्त रूप से छोड़ा जाए। (iv) किसी बहुपरमाणुक अणु की अपनी साम्यावस्था की स्थिति के परितः व्यापक कम्पन।
Answer: (i) आवर्ती गति परन्तु सरल आवर्त गति नहीं। (ii) सरल आवर्त गति । (iii) सरल आवर्त गति । (iv) आवर्ती गति परन्तु सरल आवर्तः गति नहीं।
In simple words: सरल आवर्त गति एक विशेष प्रकार की आवर्ती गति है जहाँ प्रत्यानयन बल विस्थापन के समानुपाती और विपरीत होता है। पृथ्वी का घूर्णन और अणु का कंपन आवर्ती है लेकिन सरल आवर्त गति नहीं क्योंकि बल-विस्थापन संबंध भिन्न होता है। U-नली में पारा और कटोरे में बॉल की गति सरल आवर्त गति के निकट होती है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति (SHM) की शर्त (बल F \( \propto \) -x) को पहचानना महत्वपूर्ण है। आवर्ती गति में सिर्फ दोहराव होता है, जबकि SHM में एक विशिष्ट बल नियम होता है।

 

Question 3. चित्र-14.1 में किसी कण की रैखिक गति के लिए चार x-t आरेख दिए गए हैं। इनमें से कौन-सा आरेख आवर्ती गति का निरूपण करता है? उस गति का आवर्तकाल क्या है? (आवर्ती गति वाली गति का)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.1 में चार अलग-अलग ग्राफ़ (a, b, c, d) दिए गए हैं जो समय (t) के साथ एक कण के विस्थापन (x) को दर्शाते हैं। ये ग्राफ़ कण की रैखिक गति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें कण की स्थिति समय के साथ कैसे बदलती है यह दिखाया गया है।
Answer: (a) ग्राफ से स्पष्ट है कि कण कभी भी अपनी गति की पुनरावृत्ति नहीं करता है; अतः यह गति, आवर्ती गति नहीं है। (b) ग्राफ से ज्ञात है कि कण प्रत्येक 2s के बाद अपनी गति की पुनरावृत्ति करता है; अतः यह गति एक आवर्ती गति है जिसका आवर्तकाल 2s है । (c) यद्यपि कण प्रत्येक 3s के बाद अपनी प्रारम्भिक स्थिति में लौट रहा है परन्तु दो क्रमागत प्रारम्भिक स्थितियों के बीच कण अपनी गति की पुनरावृत्ति नहीं करता; अतः यह गति आवर्त गति नहीं है। (d) कण प्रत्येक 2s के बाद अपनी गति को दोहराता है; अतः यह गति एक आवर्ती गति है जिसका आवर्तकाले 2s है।
In simple words: आवर्ती गति वह होती है जिसमें कण एक निश्चित समय अंतराल (आवर्तकाल) के बाद अपनी गति को दोहराता है। ग्राफ़ (b) और (d) आवर्ती गति दिखाते हैं क्योंकि कण हर 2 सेकंड में अपनी गति दोहराता है, जबकि (a) और (c) नहीं दोहराते या पूरी तरह से नहीं दोहराते।

🎯 Exam Tip: आवर्ती गति की पहचान ग्राफ से करनी आनी चाहिए। x-t ग्राफ में पैटर्न का दोहराव और उसके समय अंतराल से आवर्तकाल ज्ञात करना एक महत्वपूर्ण कौशल है।

 

Question 4. नीचे दिए गए समय के फलनों में कौन
(a) सरल आवर्त गति
(b) आवर्ती परन्तु सरल आवर्त गति नहीं, तथा (e) अनावर्ती गति का निरूपण करते हैं। प्रत्येक आवर्ती गति का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए: (w कोई धनात्मक अचर है)
Answer: (a) दिया गया फलन \( x = \sin \omega t - \cos \omega t \)
(e) तथा (f) में दिए गए दोनों फलन न तो आवर्त गति निरूपित करते हैं और न ही सरल आवर्त गति निरूपित करते हैं।
In simple words: दिए गए फलनों को उनके गणितीय रूप के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। यदि फलन साइन या कोसाइन के रूप में हो तो वह सरल आवर्त गति दर्शाता है, बशर्ते कि विस्थापन बल के समानुपाती हो। अन्य जटिल या अपरिभाषित फलन अनावर्ती हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति के फलन को पहचानना (आमतौर पर \( \sin(\omega t + \phi) \) या \( \cos(\omega t + \phi) \) के रूप में) और आवर्ती गति के लिए उसकी आवधिकता को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. कोई कण एक-दूसरे से 10 cm दूरी पर स्थित दो बिन्दुओं A तथा B के बीच रैखिक सरल आवर्त गति कर रहा है। A से B की ओर की दिशा को धनात्मक दिशा मानकर वेग, त्वरण तथा कण पर लगे बल के चिह्न ज्ञात कीजिए जबकि यह कण
(a) A सिरे पर है,
(b) B सिरे पर है।
(c) A की ओर जाते हुए AB के मध्य बिन्दु पर है,
(d) A की ओर जाते हुए B से 2 cm दूर है, (e) B की ओर जाते हुए से 3 cm दूर है, तथा (f) A की ओर जाते हुए B से 4 cm दूर है।
Answer: स्पष्ट है कि बिन्दु A तथा बिन्दु B अधिकतम विस्थापन की स्थितियाँ हैं तथा इनका मध्य बिन्दु O (मोना), सरल आवर्त गति का केन्द्र है।
(a) .. बिन्दु A पर कण का वेग शून्य होगा। कण के त्वरण की दिशा बिन्दु A से साम्यावस्था O की ओर होगी; अतः त्वरण धनात्मक होगा। कण पर बल, त्वरण की ही दिशा में होगा; अतः बल धनात्मक होगा ।
(b) बिन्दु B पर भी कण का वेग शून्य होगा। कण का त्वरण B से साम्यावस्था O की ओर दिष्ट होगा; अतः त्वरण ऋणात्मक होगा। बल भी ऋणात्मक होगा।
(c) AB का मध्य बिन्दु O सरल आवर्त गति का केन्द्र है। .. कण B से A की ओर चलते हुए O से गुजरता है; अतः वेग BA के अनुदिश है, अर्थात् वेग ऋणात्मक है। बिन्दु O पर त्वरण तथा बल दोनों शून्य हैं।
(d) B से 2 cm दूरी पर कण B तथा O के बीच होगा। .. कण B से A की ओर जा रहा है; अतः वेग ऋणात्मक होगा। यहाँ त्वरण भी B से O की ओर दिष्ट है; अतः त्वरण भी ऋणात्मक है। 'बले भी ऋणात्मक है।
(e) .. कण-B की ओर जा रहा है; अतः वेग धनात्मक है। .. कण A व O के बीच है; अतः त्वरण A से O की ओर दिष्ट है; अतः त्वरण भी धनात्मक है। बल भी धनात्मक है ।
(f) ... कण A की ओर जा रहा है; अतः वेग ऋणात्मक है। कण B तथा O के बीच है तथा त्वरण B से O की ओर (अर्थात् B से A की ओर दिष्ट है; अतः त्वरण ऋणात्मक है। बल भी ऋणात्मक है।
In simple words: सरल आवर्त गति में, कण का वेग चरम बिंदुओं पर शून्य होता है और साम्यावस्था पर अधिकतम। त्वरण और बल हमेशा साम्यावस्था की ओर होते हैं और विस्थापन के विपरीत दिशा में होते हैं। इसलिए, धनात्मक दिशा में विस्थापन के लिए त्वरण ऋणात्मक और ऋणात्मक दिशा में विस्थापन के लिए त्वरण धनात्मक होता है।

🎯 Exam Tip: SHM में वेग, त्वरण और बल की दिशा और मान को समझना महत्वपूर्ण है। साम्यावस्था (O) पर वेग अधिकतम और त्वरण शून्य होता है, जबकि चरम बिंदुओं (A, B) पर वेग शून्य और त्वरण अधिकतम होता है। बल हमेशा साम्यावस्था की ओर लगता है।

 

Question 6. नीचे दिए गए किसी कण के त्वरण तथा विस्थापन के बीच सम्बन्धों में से किससे सरल आवर्त गति सम्बद्ध है:
(a) \( a = 0.7x \)
(b) \( a = -200x^2 \)
(c) \( a = -10 \)
(d) \( a = 100x^3 \)
Answer: उपर्युक्त में से केवल सम्बन्ध (c) में \( a = -10x \) अर्थात् त्वरण विस्थापन के अनुक्रमानुपाती है तथा विस्थापन के विपरीत दिशा में है; अतः केवल यही सम्बन्ध सरल आवर्त गति को निरूपित करता है।
In simple words: सरल आवर्त गति के लिए त्वरण हमेशा विस्थापन के समानुपाती और उसकी विपरीत दिशा में होना चाहिए। गणितीय रूप से, यह \( a \propto -x \) या \( a = -kx \) (जहाँ k एक धनात्मक स्थिरांक है) के रूप में व्यक्त किया जाता है। विकल्प (c) इस शर्त को पूरा करता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति की मूल शर्त \( a \propto -x \) को पहचानना महत्वपूर्ण है। त्वरण (a) विस्थापन (x) के समानुपाती और विपरीत दिशा में होना चाहिए।

 

Question 7. सरल आवर्त गति करते किसी कण की गति का वर्णन नीचे दिए गए विस्थापन फलन द्वारा किया जाता है। \( x(t) = A \cos (\omega t + \phi) \) यदि कण की आरम्भिक ( \( t = 0 \) ) स्थिति 1 cm तथा उसका आरम्भिक वेग \( \pi \text{cm} \cdot \text{s}^{-1} \) है। तो कण का आयाम तथा आरम्भिक कला कोण क्या है? कण की कोणीय आवृत्ति \( \pi \text{s}^{-1} \) है। यदि सरल आवर्त गति का वर्णन करने के लिए कोज्या (\( \cos \)) फलन के स्थान पर हम ज्या (\( \sin \)) फूलन चुनें; \( x = B \sin (\omega t + \alpha) \), तो उपर्युक्त आरम्भिक प्रतिबन्धों में कण का आयाम तथा आरम्भिक कला कोण क्या होगा?
Answer: हल- दिया है : कोणीय आवृत्ति \( \omega = \pi \text{ rad s}^{-1} \), \( t = 0 \) पर \( x = 1 \text{ cm} \) तथा प्रारम्भिक वेग \( u = \pi \text{ cm s}^{-1} \) सरल आवर्त गति की समीकरण \( x = A \cos (\omega t + \phi) \) \( x = A \cos (\pi t + \phi) \) \( t = 0 \) तथा \( x = 1 \) रखने पर, \( 1 = A \cos \phi \)...(1)
In simple words: सरल आवर्त गति के समीकरण में दिए गए प्रारंभिक मानों (स्थिति, वेग और कोणीय आवृत्ति) का उपयोग करके हम आयाम (A) और प्रारंभिक कला कोण (\( \phi \)) का मान ज्ञात कर सकते हैं। यह समीकरण को हल करके किया जाता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति के समीकरण \( x = A \cos(\omega t + \phi) \) या \( x = A \sin(\omega t + \phi) \) में प्रारंभिक स्थितियों को रखकर आयाम A और कला कोण \( \phi \) का मान ज्ञात करना एक महत्वपूर्ण गणितीय कौशल है।

 

Question 8. किसी कमानीदार तुलां का पैमानी 0 से 50 kg तक अंकित है और पैमाने की लम्बाई 20 cm है। इस तुला से लटकाया गया कोई पिण्ड, जब विस्थापित करके मुक्त किया जाता है, 0.6s के आवर्तकाल से दोलन करता है। पिण्ड का भार कितना है?
Answer: हल-
In simple words: कमानीदार तुला का पैमाना उसकी अधिकतम क्षमता और लम्बाई बताता है। जब एक पिण्ड इससे लटक कर दोलन करता है, तो उसके दोलन का आवर्तकाल ज्ञात होता है। इस जानकारी से पिण्ड का द्रव्यमान और अंततः उसका भार (द्रव्यमान \( \times \) गुरुत्वीय त्वरण) निकाला जा सकता है।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली के आवर्तकाल \( T = 2\pi \sqrt{m/k} \) सूत्र का उपयोग करें। स्प्रिंग स्थिरांक (k) तुला के कैलिब्रेशन (अधिकतम भार और लम्बाई) से निकाला जा सकता है।

 

Question 9. 1200 \( \text{N} \cdot \text{m}^{-1} \) कमानी-स्थिरांक की कोई कमानी चित्र-14.3 में दर्शाए अनुसार किसी क्षैतिज मेज से जड़ी है। कमानी के मुक्त । सिरे से 3kg द्रव्यमान का कोई पिण्ड जुड़ा है। इस पिण्ड को एक ओर 2.0 cm दूरी तक खींचकर मुक्त किया जाता है,
(i) पिण्ड के दोलन की आवृत्ति,
(ii) पिण्ड का अधिकतम त्वरण, तथा ।
(iii) पिण्ड की अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.3 में एक क्षैतिज मेज पर एक स्प्रिंग (कमानी) का एक सिरा स्थिर किया गया है। स्प्रिंग के दूसरे मुक्त सिरे से एक द्रव्यमान (पिण्ड) जुड़ा हुआ है। यह व्यवस्था एक स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली को दर्शाती है, जिसे खींचकर छोड़ने पर वह सरल आवर्त गति में दोलन करती है।
Answer: हल- यहाँ बृल नियतांक \( k = 1200 \text{ न्यूटन} \cdot \text{मीटर}^{-1} \), \( m = 3 \text{ किग्रा} \); कमानी का अधिकतम विस्तार अर्थात् आयाम \( a = 2.0 \text{ सेमी} = 2 \times 10^{-2} \text{ मीटर} \)
In simple words: दिए गए स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली के लिए, स्प्रिंग स्थिरांक (k) और द्रव्यमान (m) का उपयोग करके दोलन की कोणीय आवृत्ति \( \omega = \sqrt{k/m} \) ज्ञात की जा सकती है। इससे आवृत्ति (\( f = \omega / 2\pi \)), अधिकतम त्वरण (\( a_{max} = \omega^2 a \)) और अधिकतम चाल (\( v_{max} = \omega a \)) की गणना की जाती है, जहाँ 'a' आयाम है।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली के लिए आवर्तकाल, आवृत्ति, अधिकतम वेग और अधिकतम त्वरण के सूत्रों को याद रखें और उन्हें सही ढंग से लागू करना सीखें।

 

Question 10. अभ्यास प्रश्न 9 में, मान लीजिए जब कमानी अतानित अवस्था में है तब पिण्ड की स्थिति \( x = 0 \) है तथा बाएँ से दाएँ की दिशा x-अक्ष की धनात्मक दिशा है। दोलन करते पिण्ड के विस्थापन x को समय के फलन के रूप में दर्शाइए, जबकि विराम घड़ी को आरम्भ (\( t = 0 \)) करते समय पिण्ड,
(a) अपनी माध्य स्थिति,
(b) अधिकतम तानित स्थिति, तथा
(c) अधिकतम सम्पीडन की स्थिति पर है। सरल आवर्त गति के लिए ये फलन एक-दूसरे से आवृत्ति में, आयाम में अथवा आरम्भिक कला में किस रूप में भिन्न है ।
Answer: हल- उपर्युक्त प्रश्न में आयाम \( a = 0.20 \text{ मीटर} = 2 \text{ सेमी} \)।
In simple words: सरल आवर्त गति में, विस्थापन को समय के फलन के रूप में \( x(t) = A \sin(\omega t + \phi) \) या \( x(t) = A \cos(\omega t + \phi) \) से दर्शाया जाता है। प्रारंभिक स्थिति (माध्य स्थिति, अधिकतम तानित या सम्पीडित) के आधार पर, कला कोण \( \phi \) का मान बदलता है, जिससे फलन का स्वरूप भी बदल जाता है। आवृत्ति और आयाम स्थिर रहते हैं।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति के विस्थापन समीकरण में प्रारंभिक कला कोण का महत्व समझें। \( \phi \) का मान इस बात पर निर्भर करता है कि \( t=0 \) पर कण कहाँ और किस दिशा में गति कर रहा था।

 

Question 11. चित्र-14.4 में दिए गए दो आरेख दो वर्तुल गतियों के तद्नुरूपी हैं। प्रत्येक आरेख पर वृत्त की त्रिज्या परिक्रमण-काल, आरम्भिक स्थिति और परिक्रमण की दिशा दर्शाई गई है। प्रत्येक प्रकरण में, परिक्रमण करते कण के त्रिज्य-सदिश के x-अक्ष पर प्रक्षेप की तदनुरूपी सरल आवर्त गति ज्ञात कीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.4 में दो अलग-अलग वृत्तीय गति आरेख दिखाए गए हैं। प्रत्येक आरेख में एक वृत्त है जिसकी त्रिज्या, परिक्रमण काल, कण की प्रारंभिक स्थिति, और परिक्रमण की दिशा (जैसे वामावर्त) को दर्शाया गया है। इसमें वृत्त पर गति करते हुए एक कण के त्रिज्य-सदिश के x-अक्ष पर प्रक्षेप को सरल आवर्त गति के रूप में दिखाया गया है।
Answer: हल- (a) माना वृत्त पर गति करता हुआ कण किसी समय । पर P से स्थिति A में पहुँच जाता है। माना \( \angle \text{POA} = 0 \) AB, बिन्दु A से x-अक्ष पर लम्ब है। तब \( \angle \text{BAO} = 0 \) आवर्तकाल \( T = 2\text{s} \)
In simple words: सरल आवर्त गति को एक निर्देश वृत्त पर एकसमान वृत्तीय गति के प्रक्षेप के रूप में समझा जा सकता है। कण के त्रिज्य-सदिश का x-अक्ष पर प्रक्षेप उस कण की सरल आवर्त गति का विस्थापन दर्शाता है जो उसी आवृत्ति और आयाम से दोलन कर रहा है। प्रारंभिक स्थिति और परिक्रमण काल से समीकरण ज्ञात किया जाता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति और एकसमान वृत्तीय गति के बीच संबंध को समझें। वृत्तीय गति के प्रक्षेप का उपयोग करके SHM समीकरणों को प्राप्त करना और उनके मापदंडों (आयाम, आवर्तकाल, कला कोण) को पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. नीचे दी गई प्रत्येक सरल आवर्त गति के लिए तदनुरूपी निर्देश वृत्त का आरेख खींचिएं। घूर्णी कण की आरम्भिक (\( t = 0 \)) स्थिति, वृत्त की त्रिज्या तथा कोणीय चाल दर्शाइए। सुगमता के लिए प्रत्येक प्रकरण में परिक्रमण की दिशा वामावर्त लीजिए। (\( x \) को cm में तथा \( t \) को s में लीजिए।)।
Answer: हल- (a) दिया है : सरल आवर्त गति का समीकरण यह गति समय का ज्या (\( \sin \)) फलन है; अतः कोणीय विस्थापन, y-अक्ष से नापा जाएगा। दिए गए समीकरण में \( t = 0 \) रखने पर,
In simple words: किसी सरल आवर्त गति के लिए, एक काल्पनिक निर्देश वृत्त का उपयोग किया जाता है। वृत्त की त्रिज्या आयाम के बराबर होती है, और कण की कोणीय चाल सरल आवर्त गति की कोणीय आवृत्ति के बराबर होती है। \( t=0 \) पर कण की प्रारंभिक स्थिति (कला कोण) निर्धारित करके निर्देश वृत्त पर उसकी स्थिति दर्शायी जा सकती है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति को निर्देश वृत्त से जोड़ना एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह वेग, त्वरण और विस्थापन के कला संबंधों को समझने में मदद करता है।

 

Question 13. चित्र-14.7(a) में \( k \) बल-स्थिरांक की किसी कमानी के । एक सिरे को किसी दृढे आधार से जकड़ा तथा दूसरे मुक्त । सिरे से एक द्रव्यमान \( m \) जुड़ा दर्शाया गया है। कमानी के मुक्त सिरे पर बल \( F \) आरोपित करने से कमानी तन जाती है चित्र-14.7 (b) में उसी कमानी के दोनों मुक्त सिरों से द्रव्यमान जुड़ा दर्शाया गया है। कमानी के दोनों सिरों को चित्र-14.7 में समान बल \( F \) द्वारा तानित किया गया है।
(i) दोनों प्रकरणों में कमानी का अधिकतम विस्तार क्या है?
(ii) यदि (a) का द्रव्यमान तथा (b) के दोनों द्रव्यमानों को मुक्त छोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक प्रकरण में दोलन का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.7 के भाग (a) में एक स्प्रिंग का एक सिरा एक दीवार से जुड़ा है और दूसरे सिरे से एक द्रव्यमान m जुड़ा है। भाग (b) में उसी स्प्रिंग के दोनों सिरों से द्रव्यमान जुड़े हुए हैं। दोनों स्थितियों में स्प्रिंग पर बल F लगाकर उसे खींचा जाता है, जिससे उसका विस्तार होता है।
Answer: हल- (i) माना कमानी का अधिकतम विस्तार \( X_{\max} \) है, तब चित्र (a) (b) में-चूँकि इस बार कमानी किसी स्थिर वस्तु से सम्बद्ध नहीं है; अतः दूसरे पिण्ड पर लगे बल का कार्य केवल कमानी को स्थिर रखना है। अतः विस्तार अभी भी केवल एक ही बल के कारण होगा। (ii) चित्र (a) में माना कि पिण्ड को खींचकर छोड़ने पर, वापसी की गति करता पिण्ड किसी क्षण साम्यावस्था से \( x \) दूरी पर है तब कमानी में प्रत्यानयन बल \( F = -kx \) होगा। यदि पिण्ड का त्वरण ‘a है तो \( F = ma \) चित्र (b) में-इस दशा में, निकाय का द्रव्यमान केन्द्र अर्थात् कमानी का मध्य बिन्दु स्थिर रहेगा और दोनों पिण्ड दोलन करेंगे। इस अवस्था में हम मान सकते हैं कि प्रत्येक पिण्ड मूल कमानी की आधी लम्बाई से जुड़ा है तथा ऐसे प्रत्येक भाग का कमानी स्थिरांक \( 2k \) होगा। यदि किसी क्षण, कोई पिण्ड साम्यावस्था से \( x \) दूरी पर है तो कमानी के संगत भाग में प्रत्यानयन बल \( F = -2kx \) होगा। यदि पिण्ड का त्वरण \( a \) है तो \( ma = F \implies ma = -2kx \) या ।
In simple words: स्प्रिंग के अधिकतम विस्तार की गणना हुक के नियम (\( F = kx \)) का उपयोग करके की जाती है। दोलन का आवर्तकाल स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली के लिए \( T = 2\pi \sqrt{m/k_{eff}} \) सूत्र से मिलता है, जहाँ प्रभावी स्प्रिंग स्थिरांक (\( k_{eff} \)) प्रणाली की संरचना (एक सिरा बंधा या दोनों सिरे मुक्त) के आधार पर बदलता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणालियों के लिए प्रभावी स्प्रिंग स्थिरांक (\( k_{eff} \)) की गणना करना सीखें। यह विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण है जब स्प्रिंग को कई भागों में माना जाता है या जब द्रव्यमान दोनों सिरों पर होते हैं।

 

Question 14. किसी रेलगाड़ी के इंजन के सिलिण्डर हैड में पिस्टन का स्ट्रोक (आयाम को दोगुना) 1.0m का है। यदि पिस्टन 200 rad/min की कोणीय आवृत्ति से सरल आवर्त गति करता है तो उसकी अधिकतम चाल कितनी है?
Answer: हल- पिस्टन का आयाम \( a = \text{स्ट्रोक}/2 = 1.0 \text{ मी}/2 = 0.5 \text{ मीटर} \) तथा इसकी कोणीय आवृत्ति \( \omega = 200 \text{ रेडियन}/\text{मिनट} = (200/60) \text{ रे/से} = 10/3 \text{ रे/से} \) पिस्टन की अधिकतम चाल \( U_{\max} = a\omega = 20 = 0.5 \text{ मीटर} \times (10/3) \text{ रे/से} = 1.67 \text{ मी} \cdot \text{से}^{-1} \)
In simple words: पिस्टन का स्ट्रोक सरल आवर्त गति के आयाम का दोगुना होता है। अधिकतम चाल कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) और आयाम (a) के गुणनफल (\( v_{max} = \omega a \)) से ज्ञात की जाती है। कोणीय आवृत्ति को रेडियन प्रति मिनट से रेडियन प्रति सेकंड में बदलना महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: अधिकतम चाल \( v_{max} = \omega a \) सूत्र का उपयोग करते समय इकाइयों का ध्यान रखें। कोणीय आवृत्ति को रेडियन प्रति सेकंड में व्यक्त करना अनिवार्य है। स्ट्रोक को आयाम का दोगुना मानें।

 

Question 15. चन्द्रमा के पृष्ठ पर गुरुत्वीय त्वरण \( 1.7 \text{ ms}^{-2} \) है। यदि किसी सरल लोलक का पृथ्वी के पृष्ठ पर आवर्तकाल 3.5 s है तो उसका चन्द्रमा के पृष्ठ पर आवर्तकाल कितना होगा? (पृथ्वी के पृष्ठ पर \( g = 9.8 \text{ ms}^{-2} \))
Answer: हल- सरल लोलक का आवर्तकाल लोलक विशेष के लिए नियत; अतः \( T \propto 1/\sqrt{g} \) इसलिए यदि पृथ्वी एवं चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण क्रमशः \( g_e \) व \( g_m \) एवं आवर्तकाल क्रमशः \( T_e \) व \( T_m \) हो
In simple words: सरल लोलक का आवर्तकाल गुरुत्वीय त्वरण के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। पृथ्वी और चंद्रमा पर अलग-अलग गुरुत्वीय त्वरण मान दिए गए हैं। इन मानों का उपयोग करके, चंद्रमा पर आवर्तकाल की गणना पृथ्वी पर दिए गए आवर्तकाल के साथ अनुपात बनाकर की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: सरल लोलक के आवर्तकाल का सूत्र \( T = 2\pi \sqrt{L/g} \) याद रखें। जब g बदलता है तो T कैसे बदलता है, यह समझने के लिए अनुपात विधि का उपयोग करें।

 

Question 16. नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) किसी कण की सरल आवर्त गति के आवर्तकाल का मान उस कण के द्रव्यमान तथा बल-स्थिरांक पर निर्भर करता है: । कोई सरल लोलक सन्निकट सरल आवर्त गति करता है। तब फिर किसी लोलक का आवर्तकाल लोलक के द्रव्यमान पर निर्भर क्यों नहीं करता?
(b) किसी सरल लोलक की गति छोटे कोण के सभी दोलनों के लिए सन्निकट सरल आवर्त गति होती है। बड़े कोणों के दोलनों के लिए एक अधिक गूढ विश्लेषण यह दर्शाता है कि का मान से अधिक होता है। इस परिणाम को समझने के लिए किसी गुणात्मक कारण का चिन्तन कीजिए।
(c) कोई व्यक्ति कलाई घड़ी बाँधे किसी मीनार की चोटी से गिरता है। क्या मुक्त रूप से गिरते समय उसकी घड़ी यथार्थ समय बताती है?
(d) गुरुत्व बल के अन्तर्गत मुक्त रूप से गिरते किसी केबिन में लगे सरल लोलक के दोलन की आवृत्ति क्या होती है?
Answer: उत्तर- (a) जब दोलन स्प्रिंग के द्वारा होते हैं तो बल नियंताक \( k \) का मान केवल स्प्रिंग पर निर्भर करता है। न कि गतिमान कण के द्रव्यमान पर। इसके विपरीत सरल लोलक के लिए बल नियतांक कण के द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती होता है; अतः का मान नियत बना रहता है। इसलिए आवर्तकाल \( m \) पर निर्भर नहीं करता।
(b) सरल लोलक के लिए प्रत्यानयन बल \( F = -mg \sin \theta \) यदि \( \theta \) छोटा है तो \( \sin \theta \approx \theta = \) अर्थात् यह गति सरल आवर्त होगी तथा आवर्तकाल यदि \( \theta \) छोटा नहीं है तो हम \( \sin \theta \approx \theta \) नहीं ले सकेंगे तब गति सरल आवर्त नहीं रहेगी; अतः आवर्तकाल से बड़ा होगा।
(c) हाँ, क्योकि कलाई घड़ी का आवर्तकाल गुरुत्वीय त्वरण के मान में परिवर्तन से प्रभावित नहीं होता।
(d) मुक्त रूप से गिरते केबिन में गुरुत्वीय त्वरण का प्रभावी मान \( g' = 0 \) होगा। .. लोलक का आवर्तकाल अनन्त हो जाएगा तथा आवृत्ति शून्य हो जाएगी।
In simple words:
(a) स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली में आवर्तकाल द्रव्यमान पर निर्भर करता है, लेकिन सरल लोलक में प्रभावी बल स्थिरांक द्रव्यमान के समानुपाती होता है, जिससे द्रव्यमान का प्रभाव रद्द हो जाता है और आवर्तकाल केवल लम्बाई और g पर निर्भर करता है।
(b) सरल लोलक केवल छोटे कोणों के लिए SHM होता है, बड़े कोणों पर \( \sin \theta \approx \theta \) मान्य नहीं होता, जिससे आवर्तकाल बढ़ जाता है।
(c) कलाई घड़ी का आवर्तकाल g पर निर्भर नहीं करता, इसलिए वह सही समय बताएगी।
(d) मुक्त पतन में प्रभावी गुरुत्व शून्य होता है, जिससे लोलक का आवर्तकाल अनंत और आवृत्ति शून्य हो जाती है।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग और सरल लोलक के आवर्तकाल के सूत्रों में द्रव्यमान और गुरुत्वीय त्वरण की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझें। मुक्त पतन के दौरान प्रभावी गुरुत्व शून्य होता है, जिससे दोलन की प्रकृति बदल जाती है।

 

Question 17. किसी कार की छत से । लम्बाई का कोई सरल लोलक, जिसके लोलक का द्रव्यमान M है, लटकाया गया है। कार R त्रिज्या की वृत्तीय पथ पर एकसमान चाल \( u \) से गतिमान है। यदि लोलक त्रिज्य दिशा में अपनी साम्यावस्था की स्थिति के इधर-उधर छोटे दोलन करता है तो इसका आवर्तकाल क्या होगा?
Answer: उत्तर- कार जब मोड़ पर मुड़ती है तो उसकी गति में त्वरण, (अभिकेन्द्र त्वरण) होता है। इस प्रकार कार एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र है। इसलिए गोलक पर एक छद्म बल वृत्तीय पथ के बाहर की ओर लगेगा जिसके कारण लोलक ऊर्ध्वाधर रहने के स्थान पर थोड़ा तिरछा हो जाएगा। इस समय गोलक पर दो बले क्रमशः भार \( \text{mg} \) तथा अपकेन्द्र बल लगेंगे । यदि गोलक के लिए \( \text{g} \) का प्रभावी मान \( \text{g'} \) है तो गोलक पर प्रभावी बल \( \text{mg'} \) होगा जो कि उक्त दो बलों का परिणामी है।।
In simple words: जब कार वृत्तीय पथ पर चलती है, तो लोलक पर गुरुत्वाकर्षण बल के अलावा एक अपकेन्द्रीय बल भी लगता है। इन दोनों बलों का परिणामी प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण (\( g' \)) निर्धारित करता है। लोलक का आवर्तकाल इस प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करेगा, \( T = 2\pi \sqrt{L/g'} \)।

🎯 Exam Tip: अजड़त्वीय निर्देश तंत्रों में प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण (\( g_{eff} \)) की गणना करना सीखें। अपकेन्द्रीय बल या अन्य छद्म बलों को गुरुत्वाकर्षण बल के साथ वेक्टर रूप से संयोजित करके \( g_{eff} \) प्राप्त किया जाता है।

 

Question 18. आधार क्षेत्रफल A तथा ऊँचाई \( h \) के एक कॉर्क का बेलनाकार टुकड़ा \( p_1 \) घनत्व के किसी द्रव में तैर रहा है। कॉर्क को थोड़ा नीचे दबाकर स्वतन्त्र छोड़ देते हैं, यह दर्शाइए कि कॉर्क ऊपर-नीचे सरल आवर्त दोलन करता है जिसका आवर्तकाल है।
Answer: यहाँ \( p \) कॉर्क का घनत्व है (द्रव की श्यानता के कारण अवमन्दन को नगण्य मानिए ।) उत्तर- द्रव में तैरते बेलनाकार बर्तन के दोलन-माना कॉर्क के टुकड़े का द्रव्यमान \( m \) है। माना साम्यावस्था में इसकी । लम्बाई द्रव में डूबी है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.9 में एक द्रव में तैरते हुए बेलनाकार कॉर्क को दर्शाया गया है। यह दिखाता है कि जब कॉर्क साम्यावस्था में होता है, तो उसकी कितनी लम्बाई द्रव में डूबी होती है। यदि कॉर्क को थोड़ा नीचे दबाकर छोड़ा जाए, तो यह ऊपर-नीचे दोलन करना शुरू कर देगा, जो सरल आवर्त गति को दर्शाता है।
Answer: तैरने के सिद्धान्त से, कॉर्क के डूबे भाग द्वारा हटाए गए द्रव का भार कॉर्क के भार के बराबर होगा, जब कॉर्क को द्रव में नीचे की ओर दबाकर छोड़ा जाता है तो यह ऊपर-नीचे दोलन करने लगता है। माना किसी क्षण इसका साम्यावस्था से नीचे की ओर विस्थापन \( y \) है। इस स्थिति में, इसकी \( y \) लम्बाई द्वारा विस्थापित द्रव का उत्क्षेप बेलनाकार बर्तन को प्रत्यानयन बल (\( F \)) प्रदान करेगा। अतः \( F = -A y p_1 g \) यहाँ पर ऋण चिह्न यह प्रदर्शित करता है कि प्रत्यानयन बल \( F \), कॉर्क के टुकड़े के विस्थापन के विपरीत दिशा में लग रहा है; अतः टुकड़े का त्वरण
In simple words: जब एक तैरते हुए कॉर्क को उसकी संतुलन स्थिति से थोड़ा नीचे धकेला जाता है, तो उत्प्लावन बल में परिवर्तन होता है। यह परिवर्तन एक प्रत्यानयन बल के रूप में कार्य करता है जो विस्थापन के समानुपाती और विपरीत होता है, जिससे कॉर्क सरल आवर्त गति करता है।

🎯 Exam Tip: प्लवनशीलता (उत्प्लावन बल) और प्रत्यानयन बल के संबंध को समझें। जब एक वस्तु द्रव में दोलन करती है, तो अतिरिक्त उत्प्लावन बल ही प्रत्यानयन बल होता है, जो SHM के लिए आवश्यक शर्त (\( F \propto -y \)) को पूरा करता है।

 

Question 19. पारे से भरी किसी U नली का एक सिरा किसी चूषण पम्प से जुड़ा है तथा दूसरा सिरा वायुमण्डल में खुला छोड़ दिया गया है। दोनों स्तम्भों में कुछ दाबान्तर बनाए रखा जाता है। यह दर्शाइए कि जब चूषण पम्प को हटा देते हैं, तब U नली में पारे का स्तम्भ सरल आवर्त गति करता है।
Answer: उत्तर- सामान्यतः U नली में द्रव (पारा) भरने पर उसके दोनों स्तम्भों व में पारे का तल समान होगा। परन्तु चूषण पम्प द्वारा दाबान्तर बनाये रखने की स्थिति में यदि स्तम्भ में पारे का तल सामान्य स्थिति से \( y \) दूरी नीचे है । तो दूसरे स्तम्भ में यह सामान्य स्थिति से \( y \) दूरी ऊपर होगा। अतः दोनों । । स्तम्भ में पारे के तलों का अन्तर = \( 2y \), चूषण पम्प हटा लेने पर U नली के दायें स्तम्भ में पारे पर नीचे की ओर कार्य करने वाला बल = \( 2y \) ऊँचाई के पारा स्तम्भ का भार = \( 2y \rho g a \). जहाँ \( a = \text{U} \) नली स्तम्भों की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( \rho = \text{पारे का घनत्व}; g = \text{गुरुत्वीय त्वरण} \) अतः बायीं भुजा में पारा ऊपर की ओर चढ़ेगा तथा इस पर कार्य करने वाला प्रत्यानयन बल (जिसके अन्तर्गत यह गति करेगा) \( F = -2y\rho ga \), दोनों स्तम्भों में पारे के स्तम्भ की ऊँचाई समान होने की स्थिति में यदि ऊँचाई \( h \) हो तो U नली में भरे पारे के स्तम्भ की कुल लम्बाई = \( 2h \) अतः पारे का कुल द्रव्यमान \( m = 2h \times \rho \times a \)
In simple words: जब U-नली में पारे के एक स्तम्भ को विस्थापित किया जाता है, तो दो स्तम्भों के बीच ऊँचाई का अंतर एक दाब अंतर पैदा करता है। यह दाब एक प्रत्यानयन बल बनाता है जो पारे को वापस साम्यावस्था में लाने की कोशिश करता है। क्योंकि यह बल विस्थापन के समानुपाती होता है, पारे का दोलन सरल आवर्त गति करता है।

🎯 Exam Tip: U-नली में द्रव के दोलन के लिए प्रत्यानयन बल की गणना करना सीखें। प्रत्यानयन बल द्रव के विस्थापित द्रव्यमान के कारण दाब अंतर से उत्पन्न होता है। यह दर्शाता है कि \( F \propto -x \)।

अतिरिक्त अभ्यास

 

Question 20. चित्र-14.11 में दर्शाए अनुसार V आयतन के किसी वायु कक्ष की ग्रीवा (गर्दन) की अनुप्रस्थ कोर्ट का क्षेत्रफल \( a \) है। इस ग्रीवा में \( m \) द्रव्यमान की कोई गोली बिना किसी घर्षण के ऊपर-नीचे गति कर सकती है। यह दर्शाइए कि जब गोली को थोड़ा नीचे दबाकर मुक्त छोड़ देते हैं तो वह सरल आवर्त गति करती है। दाब-आयतन विचरण को समतापी मानकर दोलनों के आवर्तकाल का व्यंजक ज्ञात कीजिए (चित्र-14.11 देखिए) ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.11 में एक वायु कक्ष दिखाया गया है, जिसका आयतन V है और ग्रीवा (गर्दन) का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल a है। ग्रीवा में m द्रव्यमान की एक गोली रखी गई है जो बिना घर्षण के ऊपर-नीचे गति कर सकती है। जब गोली को थोड़ा नीचे दबाकर छोड़ा जाता है, तो यह सरल आवर्त गति में दोलन करती है।
Answer: वायु । उत्तर- माना साम्यावस्था में जब गैस का आयतन \( V \) है तो इसका दाब \( P \) है। साम्यावस्था से गेंद को अल्पविस्थापन \( x \) देने पर माना गैस का दाब बढ़कर \( (P + \Delta P) \) तथा आयतन घटकर \( V - \Delta V \) रह जाता है। समतापीय परिवर्तन के लिए बॉयल के नियम से । \( P \times V = (P + \Delta P)(V - \Delta V) \) अथवा \( PV = PV - P \cdot \Delta V + \Delta P \cdot V - \Delta P \cdot \Delta V \) चूँकि \( \Delta P \) व \( \Delta V \) अल्प राशियाँ हैं, अतः \( \Delta P \cdot \Delta V \) को नगण्य मानते हुए \( 0 = -P \Delta V + \Delta P \cdot V \)
In simple words: जब गोली को वायु कक्ष में दबाया जाता है, तो गैस का आयतन कम हो जाता है और दाब बढ़ जाता है। यह दाब अंतर गोली पर एक प्रत्यानयन बल पैदा करता है। यदि दाब-आयतन विचरण समतापी हो, तो यह बल विस्थापन के समानुपाती होता है, जिससे गोली सरल आवर्त गति करती है।

🎯 Exam Tip: गैस के दाब-आयतन परिवर्तनों और उनसे उत्पन्न प्रत्यानयन बल को समझना महत्वपूर्ण है। समतापी या रुद्धोष्म प्रक्रियाओं के लिए बॉयल के नियम का उपयोग करके सरल आवर्त गति की शर्तों को प्राप्त किया जा सकता है।

 

Question 21. आप किसी 3000 kg द्रव्यमान के स्वचालित वाहन पर सवार हैं। यह मानिए कि आप इस । वाहन की निलम्बन प्रणाली के दोलनी अभिलक्षणों का परीक्षण कर रहे हैं। जब समस्त । वाहन इस पर रखा जाता है, तब निलम्बन 15 cm आनमित होता है। साथ ही, एक पूर्ण दोलन की अवधि में दोलन के आयाम में 50% घटोतरी हो जाती है, निम्नलिखित के मानों को आकलन कीजिए
(a) कमानी स्थिरांक तथा
(b) कमानी तथा एक पहिए के प्रघात अवशोषक तन्त्र के लिए अवमन्दन स्थिरांक b. यह मानिए कि प्रत्येक पहिया 750 kg द्रव्यमान वहन करता है।
Answer: हल- (a) दिया है : वाहन का द्रव्यमान, \( M = 3000 \text{ kg} \), निलम्बन का झुकाव \( x = 15 \text{ cm} \) वाहन में चार कमानियाँ होती हैं; अतः प्रत्येक कमानी पर कुल भार को एक-चौथाई भार पड़ेगा। अतः . एक कमानी हेतु \( F = kx \) से,
In simple words: वाहन के कुल द्रव्यमान और निलंबन के झुकाव से हुक के नियम (\( F=kx \)) का उपयोग करके प्रति कमानी स्थिरांक ज्ञात किया जा सकता है। अवमंदित दोलन के लिए, आयाम में कमी की दर का उपयोग अवमंदन स्थिरांक (\( b \)) की गणना के लिए किया जाता है, जो ऊर्जा क्षय को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग स्थिरांक की गणना करते समय कुल द्रव्यमान को स्प्रिंग की संख्या से विभाजित करके प्रत्येक स्प्रिंग पर लगने वाले भार को ध्यान में रखें। अवमंदित दोलनों में आयाम के घातीय क्षय के सूत्र को याद रखें।

 

Question 22. यह दर्शाइए कि रैखिक सरल आवर्त गति करते किसी कण के लिए दोलन की किसी अवधि की औसत गतिज ऊर्जा उसी अवधि की औसत स्थितिज ऊर्जा के समान होती है।
Answer: उत्तर- माना \( m \) द्रव्यमान का कोई कण \( \omega \) कोणीय आवृत्ति से सरल आवर्त गति कर रहा है जिसका आयाम \( a \) है। माना गति अधिकतम विस्थापन की स्थिति से प्रारम्भ होती है तब \( t \) समय में कण का विस्थापन \( x = a \cos \omega t \)...(1) इस क्षण कण की गतिज ऊर्जा ।
In simple words: सरल आवर्त गति में, एक पूर्ण दोलन काल में कण की औसत गतिज ऊर्जा और औसत स्थितिज ऊर्जा बराबर होती हैं। यह ऊर्जा के संरक्षण का परिणाम है, जहाँ गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में और स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में लगातार परिवर्तित होती रहती है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों को समझें। गतिज और स्थितिज ऊर्जा के सूत्रों को याद रखें और औसत मानों की गणना करने के लिए समाकलन (integration) का उपयोग करें।

 

Question 23. 10 kg द्रव्यमान की कोई वृत्तीय चक्रिका अपने केन्द्र से जुड़े किसी तार से लटकी है। चक्रिका को घूर्णन देकर तार में ऐंठन उत्पन्न करके मुक्त कर दिया जाता है। मरोड़ी दोलन का आवर्तकाल 1.5s है। चक्रिका की त्रिज्या 15 cm है। तार का मरोड़ी कमानी नियतांक ज्ञात कीजिए। [मरोड़ी कमानी नियतांक \( \alpha \) सम्बन्ध \( J = -\alpha \theta \) द्वारा परिभाषित किया जाता है, यहाँ \( J \) प्रत्यानयन बल युग्म है तथा \( \theta \) ऐंठन कोण है।
Answer: हल- दिया है : चक्रिका का द्रव्यमान \( m = 10 \text{ kg} \), मरोड़ी दोलन का आवर्तकाल \( T = 1.5\text{s} \), चक्रिका की त्रिज्या \( r = 15 \text{ cm} = 0.15\text{ m} \) केन्द्र से जाने वाली तथा तेल के लम्बवत् अक्ष के परितः चक्रिका का
In simple words: मरोड़ी दोलन में, तार में ऐंठन से उत्पन्न प्रत्यानयन बल युग्म ऐंठन कोण के समानुपाती होता है। चक्रिका के द्रव्यमान, त्रिज्या और मरोड़ी दोलन के आवर्तकाल का उपयोग करके, हम तार के मरोड़ी कमानी नियतांक की गणना कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: मरोड़ी दोलन के लिए आवर्तकाल \( T = 2\pi \sqrt{I/\alpha} \) सूत्र का उपयोग करें, जहाँ \( I \) जड़त्व आघूर्ण है और \( \alpha \) मरोड़ी कमानी नियतांक है। चक्रिका के लिए जड़त्व आघूर्ण \( I = mr^2/2 \) होता है।

 

Question 24. कोई वस्तु 5 cm के आयाम तथा 0.2 सेकण्ड के आवर्तकाल से सरल आवर्त गति करती है। वस्तु का त्वरण तथा वेग ज्ञात कीजिए जब वस्तु का विस्थापन
(a) 5 cm,
(b) 3 cm,
(c) 0 cm हो ।
Answer: हल- यहाँ वस्तु का आयाम \( a = 5 \text{ सेमी} = 0.05 \text{ मीटर} \), आवर्तकाल \( T = 0.2 \text{ सेकण्ड} \) ... कोणीय आवृत्ति \( \omega = 2\pi/T = 2\pi/0.2 \text{ सेकण्ड} = 10\pi \text{ रे/से} = 10\pi \text{ से}^{-1} \) (a) यहाँ विस्थापन \( y = 5 \text{ सेमी} = 5 \times 10^{-2} \text{ मीटर} = 0.05 \text{ मीटर} \)
In simple words: सरल आवर्त गति में, वेग \( v = \omega \sqrt{a^2 - y^2} \) और त्वरण \( a_t = -\omega^2 y \) सूत्रों का उपयोग करके किसी भी विस्थापन \( y \) पर वेग और त्वरण की गणना की जा सकती है। यहाँ \( a \) आयाम है और \( \omega \) कोणीय आवृत्ति है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में विस्थापन, वेग और त्वरण के बीच के संबंधों के सूत्रों को याद रखें। चरम बिंदुओं ( \( y = \pm a \) ) और साम्यावस्था (\( y = 0 \)) पर इन राशियों के मान विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 25. किसी कमानी से लटका एक पिण्ड एक क्षैतिज तल में कोणीय वेग \( \tilde{\omega} \) से घर्षण या अवमन्दन रहित दोलन कर सकता है। इसे जब \( x_0 \) दूरी तक खींचते हैं और खींचकर छोड़ देते हैं तो यह सन्तुलन केन्द्र से समय \( t = 0 \) पर \( v_0 \) वेग से गुजरता है। प्राचल \( \omega, x_0 \), तथा \( v_0 \) के पदों में परिणामी दोलन का आयाम ज्ञात कीजिए। (संकेतः समीकरण \( x = a \cos (\omega t + \phi) \) से प्रारंभ कीजिए। ध्यान रहे कि प्रारम्भिक वेग ऋणात्मक है ।)
Answer: हल- माना सरल आवर्त गति का समीकरण ।
In simple words: सरल आवर्त गति के आयाम की गणना करने के लिए, प्रारंभिक विस्थापन (\( x_0 \)), प्रारंभिक वेग (\( v_0 \)), और कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) का उपयोग किया जाता है। विस्थापन और वेग के लिए \( x(t) = a \cos(\omega t + \phi) \) और \( v(t) = -a\omega \sin(\omega t + \phi) \) समीकरणों को \( t=0 \) पर लगाकर आयाम निकाला जा सकता है।

🎯 Exam Tip: प्रारंभिक वेग और विस्थापन दिए होने पर सरल आवर्त गति का आयाम और कला कोण ज्ञात करने के लिए समीकरणों का उपयोग करना सीखें। यह अक्सर दो समीकरणों को हल करके किया जाता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. सरल आवर्त गति करते हुए कण का आवर्तकाल होता है।
Answer: उत्तर-
In simple words: सरल आवर्त गति में, आवर्तकाल वह समय होता है जो कण को एक पूर्ण दोलन पूरा करने में लगता है। यह आयाम, द्रव्यमान और स्प्रिंग स्थिरांक या लोलक की लंबाई और गुरुत्वीय त्वरण जैसे कारकों पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति के आवर्तकाल की परिभाषा को समझें। यह एक मौलिक अवधारणा है जिसके आधार पर SHM के अन्य गुणधर्मों को परिभाषित किया जाता है।

 

Question 2. सरल लोलक का आवर्तकाल दोगुना हो जायेगा जब उसकी प्रभावी लम्बाई कर दी जाती है
(i) दोगुनी ।
(ii) आधी
(iii) चार गुनी
(iv) चौथाई
Answer: (iii) चार गुनी ।
In simple words: सरल लोलक का आवर्तकाल उसकी प्रभावी लंबाई के वर्गमूल के समानुपाती होता है (\( T \propto \sqrt{L} \))। यदि आवर्तकाल को दोगुना करना है, तो प्रभावी लंबाई को \( (2)^2 = 4 \) गुना करना होगा।

🎯 Exam Tip: सरल लोलक के आवर्तकाल के सूत्र \( T = 2\pi \sqrt{L/g} \) को याद रखें। यह सूत्र लंबाई और आवर्तकाल के बीच के संबंध को दर्शाता है।

 

Question 3. सरल लोलक के आवर्तकाल का सूत्र है जहाँ संकेतों के अर्थ सामान्य हैं ।। तथा T के बीच खींचा गया ग्राफ होगा
(i) सरल रेखा
(ii) परवलय
(iii) वृत्त
(iv) दीर्घवृत्त
Answer: (ii) परवलय
In simple words: सरल लोलक का आवर्तकाल (T) उसकी प्रभावी लंबाई (L) के वर्गमूल के समानुपाती होता है। यदि हम T को y-अक्ष पर और \( \sqrt{L} \) को x-अक्ष पर लें, तो ग्राफ एक सीधी रेखा होगी। लेकिन T और L के बीच का ग्राफ परवलयिक होता है क्योंकि \( T^2 \propto L \)।

🎯 Exam Tip: भौतिक राशियों के बीच संबंधों को ग्राफ के माध्यम से समझना महत्वपूर्ण है। \( T \propto \sqrt{L} \) का अर्थ है कि T बनाम L का ग्राफ एक परवलय होगा, जबकि \( T^2 \) बनाम L का ग्राफ एक सीधी रेखा होगी।

 

Question 4. अनुनाद के लिए बाह्य आवर्ती बल की आवृत्ति तथा कम्पन करने वाली वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति का अनुपात होगा।
(i) 1
(ii) शून्य
(iii) 1 से अधिक
(iv) 1 से कम
Answer: (i) 1
In simple words: अनुनाद तब होता है जब किसी वस्तु पर लगाए गए बाह्य बल की आवृत्ति वस्तु की प्राकृतिक दोलन आवृत्ति के बराबर हो जाती है। इस स्थिति में, दोलनों का आयाम अधिकतम हो जाता है।

🎯 Exam Tip: अनुनाद की परिभाषा को स्पष्ट रूप से समझें। यह तब होता है जब बाह्य आवृत्ति और प्राकृतिक आवृत्ति बराबर होती हैं, जिससे ऊर्जा का स्थानांतरण अधिकतम होता है।

 

Question 5. अनुनाद की दशा में दोलनों का आयाम
(i) न्यूनतम होता है।
(ii) अधिकतम होता है।
(ii) शून्य होता है।
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (i) अधिकतम होता है ।
In simple words: अनुनाद की स्थिति में, दोलन करने वाली वस्तु द्वारा बाह्य बल से ऊर्जा अवशोषण अधिकतम होता है, जिसके परिणामस्वरूप दोलन का आयाम सबसे बड़ा हो जाता है।

🎯 Exam Tip: अनुनाद की स्थिति में आयाम हमेशा अधिकतम होता है। यह अनुनाद की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

 

Question 6. एक कण सरल आवर्त गति कर रहा है जिसका आयाम A है। एक पूर्ण दोलन में कण द्वारा चली गयी दूरी है।
(i) 2A
(ii) 0
(iii) A
(iv) 4A
Answer: (iv) 4A
In simple words: एक पूर्ण सरल आवर्त दोलन में, कण अपनी साम्यावस्था से एक चरम बिंदु तक जाता है (A), फिर वापस साम्यावस्था में आता है (A), फिर दूसरे चरम बिंदु तक जाता है (A), और अंत में वापस साम्यावस्था में आता है (A)। इस प्रकार, कुल दूरी \( A + A + A + A = 4A \) होती है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में एक पूर्ण दोलन में तय की गई दूरी और विस्थापन के बीच अंतर करें। विस्थापन शून्य होता है, लेकिन तय की गई दूरी आयाम का चार गुना होती है।

 

Question 7. किसी सरल आवर्त गति का आयाम \( a \) है तथा आवर्तकाल \( T \) है। अधिकतम तात्कालिक वेग होगा
Answer: उत्तर- (iii)
In simple words: सरल आवर्त गति में अधिकतम तात्कालिक वेग साम्यावस्था की स्थिति में होता है। इसका मान आयाम (\( a \)) और कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) के गुणनफल के बराबर होता है (\( v_{max} = a\omega \))। कोणीय आवृत्ति \( \omega = 2\pi/T \) होती है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में वेग के लिए सूत्र \( v = \omega \sqrt{a^2 - y^2} \) याद रखें। अधिकतम वेग तब होता है जब \( y = 0 \) (साम्यावस्था पर)।

 

Question 8. सरल आवर्त गति करते कण का अधिकतम विस्थापन की स्थिति में त्वरण होता है।
(i) अधिकतम
(ii) न्यूनतम
(iii) शून्य
(iv) न अधिकतम और न न्यूनतम
Answer: (i) अधिकतम
In simple words: सरल आवर्त गति में त्वरण विस्थापन के समानुपाती और विपरीत होता है (\( a = -\omega^2 y \))। अधिकतम विस्थापन (\( y = \pm a \)) पर, त्वरण का मान भी अधिकतम होता है (\( a_{max} = \omega^2 a \))।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में त्वरण के लिए सूत्र \( a = -\omega^2 y \) को समझें। यह दर्शाता है कि त्वरण विस्थापन के चरम मान पर अधिकतम होता है और साम्यावस्था पर शून्य होता है।

 

Question 9. सरल आवर्त गति करते हुए कण की साम्य स्थिति से दूरी पर स्थितिज ऊर्जा होती है।
Answer: उत्तर- (ii)
In simple words: सरल आवर्त गति में कण की स्थितिज ऊर्जा साम्यावस्था से उसके विस्थापन के वर्ग के समानुपाती होती है (\( U = \frac{1}{2} k y^2 \))। साम्यावस्था पर स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है और अधिकतम विस्थापन पर अधिकतम होती है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में गतिज और स्थितिज ऊर्जा के सूत्रों को जानें। कुल यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है और यह आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. आवर्ती गति से क्या तात्पर्य है?
Answer: उत्तर- जब कोई वस्तु एक निश्चित समयान्तराल में एक निश्चित पथ पर बार-बार अपनी गति को दोहराती है, तो उसकी गति आवर्ती गति कहलाती है।
In simple words: आवर्ती गति वह गति होती है जिसमें एक वस्तु नियमित समय के बाद अपने पथ को दोहराती है।

🎯 Exam Tip: आवर्ती गति की परिभाषा में 'निश्चित समयान्तराल' और 'निश्चित पथ' ये दो महत्वपूर्ण शब्द हैं। इन्हें याद रखें।

 

Question 2. सरल आवर्त गति की विशेषताएँ लिखिए।
Answer: उत्तर- (i) यह गति एक निश्चित बिन्दु (कण की माध्य स्थिति) के इधर-उधर होती है। (ii) कण पर कार्यरत् प्रत्यानयन बल अर्थात् कण का त्वरण सदैव माध्य स्थिति से कण के विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है। (iii) प्रत्यानयन बल (अर्थात् त्वरण) की दिशा सदैव माध्य स्थिति की ओर दिष्ट रहती है ।
In simple words: सरल आवर्त गति में कण एक निश्चित मध्य बिंदु के इर्द-गिर्द दोलन करता है, और उस पर लगने वाला बल या उसका त्वरण हमेशा मध्य बिंदु की ओर होता है और विस्थापन के समानुपाती होता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति की मुख्य विशेषताएं हैं: माध्य स्थिति के इर्द-गिर्द गति, बल/त्वरण का विस्थापन के समानुपाती होना और बल/त्वरण का हमेशा माध्य स्थिति की ओर निर्देशित होना।

 

Question 3. संरल लोलक के अलावा सरल आवर्त गति के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: उत्तर- (1) स्प्रिंग से लटके द्रव्यमान की गति तथा (2) जल पर तैरते लकड़ी के बेलन को थोड़ा जल में दबाकर छोड़ देने पर उसकी गति ।
In simple words: सरल लोलक के अलावा, स्प्रिंग से जुड़े द्रव्यमान का दोलन और द्रव में तैरती हुई वस्तु का ऊर्ध्वाधर दोलन सरल आवर्त गति के सामान्य उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति के विभिन्न भौतिक उदाहरणों को याद रखना छात्रों को अवधारणा को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।

 

Question 4. सेकण्ड पेण्डुलम क्या होता है?
Answer: उत्तर- वह सरल लोलक जिसका आवर्तकाल 2 सेकण्ड होता है, सेकण्ड लोलक (पेण्डुलम) कहलाता है।
In simple words: सेकण्ड लोलक एक विशेष प्रकार का सरल लोलक होता है जिसका एक पूर्ण दोलन पूरा करने में ठीक 2 सेकंड लगते हैं।

🎯 Exam Tip: सेकण्ड लोलक की परिभाषा में '2 सेकण्ड' का आवर्तकाल मुख्य पहचान है। इसका उपयोग अक्सर प्रयोगशाला में g का मान ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

 

Question 5. आवर्तकाल किसे कहते हैं?
Answer: उत्तर- एक दोलन पूरा करने में कोई वस्तु जितना समय लेती है उसे उसका आवर्तकाल कहते हैं। इसे \( T \) से प्रदर्शित करते हैं।
In simple words: आवर्तकाल वह समय है जो किसी दोलन करती हुई वस्तु को एक पूरा चक्र या दोलन पूरा करने में लगता है। इसे \( T \) अक्षर से दर्शाया जाता है।

🎯 Exam Tip: आवर्तकाल (T) आवर्ती गति का एक महत्वपूर्ण गुण है। इसकी इकाई सेकंड होती है और यह आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है।

 

Question 6. आवृत्ति तथा आवर्तकाल में सम्बन्ध लिखिए ।
Answer: उत्तर- आवृत्ति = 1/ आवर्तकाल
In simple words: आवृत्ति और आवर्तकाल एक दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं। आवृत्ति बताती है कि प्रति सेकंड कितने दोलन होते हैं, जबकि आवर्तकाल बताता है कि एक दोलन में कितना समय लगता है।

🎯 Exam Tip: आवृत्ति (\( f \)) और आवर्तकाल (\( T \)) के बीच का संबंध \( f = 1/T \) या \( T = 1/f \) है। यह एक मूल सूत्र है जिसे याद रखना चाहिए।

 

Question 7. सरल आवर्त गति करते हुए कण का साम्य स्थिति से 5 सेमी की दूरी पर त्वरण 20 सेमी/से\(^2\) है। इसका आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
In simple words: सरल आवर्त गति में त्वरण (\( a \)) विस्थापन (\( y \)) और कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) से संबंधित होता है: \( a = \omega^2 y \)। दिए गए त्वरण और विस्थापन मानों का उपयोग करके, कोणीय आवृत्ति ज्ञात की जा सकती है, और फिर आवर्तकाल (\( T = 2\pi/\omega \)) की गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: \( a = \omega^2 y \) और \( \omega = 2\pi/T \) सूत्रों का उपयोग करके आवर्तकाल की गणना करें। इकाइयों को संगत रखना सुनिश्चित करें (जैसे सेमी/सेकंड)।

 

Question 8. एक कण सरल आवर्त गति कर रहा है तथा उसका त्वरण, जहाँ कण की साम्य स्थिति से उसका विस्थापन है। कण का आवर्तकाल निकालिए।
Answer: हल-
In simple words: सरल आवर्त गति में त्वरण विस्थापन के समानुपाती होता है। इस संबंध का उपयोग करके कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) ज्ञात की जा सकती है, जिससे आवर्तकाल (\( T = 2\pi/\omega \)) की गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: त्वरण और विस्थापन के बीच संबंध (\( a = -\omega^2 x \)) को पहचानें। इसमें, कोणीय आवृत्ति \( \omega = \sqrt{|a/x|} \) होती है, जिससे आवर्तकाल आसानी से निकाला जा सकता है।

 

Question 9. सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण का आयाम 5 सेमी तथा आवर्तकाल 2 सेकण्ड है। कण के त्वरण का अधिकतम मान निकालिए।
Answer: हल-
In simple words: अधिकतम त्वरण आयाम और कोणीय आवृत्ति के वर्ग का गुणनफल होता है (\( a_{max} = \omega^2 a \))। आवर्तकाल से कोणीय आवृत्ति (\( \omega = 2\pi/T \)) ज्ञात की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: अधिकतम त्वरण (\( a_{max} \)) और कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) के सूत्रों को याद रखें। गणना करते समय इकाइयों (जैसे सेमी और सेकंड) का ध्यान रखें।

 

Question 10. सरल आवर्त गति का समीकरण \( y = 2\sin 200\pi t \) है। दोलन की आवृत्ति का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- दिया है, \( y = 2\sin 200\pi t \) सरल आवर्त गति के समीकरण से उपर्युक्त समीकरण की तुलना करने पर \( \implies 2n = 200 \) \( n = 100 \)
In simple words: दिए गए सरल आवर्त गति समीकरण (\( y = A \sin(\omega t) \)) की तुलना मानक समीकरण से करके कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) ज्ञात की जाती है। फिर, आवृत्ति (\( n \)) को \( \omega = 2\pi n \) सूत्र का उपयोग करके निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति के मानक समीकरण \( y = A \sin(\omega t + \phi) \) को पहचानें। इसमें \( \omega \) कोणीय आवृत्ति है, और \( \omega = 2\pi n \) संबंध का उपयोग करके आवृत्ति (\( n \)) प्राप्त की जा सकती है।

 

Question 11. सरल आवर्त गति करने वाले कण का विस्थापन समीकरण लिखिए तथा इसके दो चक्करों के लिए समय-विस्थापन वक्र खीचिए ।
Answer: उत्तर- सरल आवर्त गति करने वाले कण का विस्थापन समीकरण \( y = a\sin \omega t \)...(1) समी० (1) में, \( \omega = 2\pi/T \) रखने पर इस समीकरण की सहायता से हमेसरले आवर्त गति करते किसी कण के विस्थापन \( y \) तथा समय \( t \) है के बीच ग्राफ खींच सकते हैं। इसके लिए हम समीकरण (1) के द्वारा विभिन्न समयों पर विस्थापन ज्ञात करते हैं।
In simple words: सरल आवर्त गति का विस्थापन समीकरण \( y = a\sin(\omega t) \) या \( y = a\cos(\omega t) \) होता है, जहाँ \( a \) आयाम है और \( \omega \) कोणीय आवृत्ति है। इस समीकरण का उपयोग करके विभिन्न समयों पर विस्थापन मान ज्ञात कर सकते हैं और फिर एक साइन या कोसाइन तरंग के रूप में समय-विस्थापन ग्राफ बना सकते हैं।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति के विस्थापन समीकरण को समझना और उससे समय-विस्थापन ग्राफ बनाना महत्वपूर्ण है। ग्राफ एक साइनसोइडल तरंग होगी जो आयाम \( a \) और आवर्तकाल \( T \) को दर्शाएगी।

 

Question 12. सरल आवर्त गति करने वाले कण के वेग का सूत्र लिखिए तथा इसका समय-वेग वक्र खीचिए। या सरल आवर्त गति के लिए समय और वेग में ग्राफ प्रदर्शित कीजिए।
Answer: उत्तर- सरल आवर्त गति करने वाले कण के वेग का सूत्र
In simple words: सरल आवर्त गति में वेग का सूत्र \( v = a\omega \cos(\omega t + \phi) \) या \( v = \pm \omega \sqrt{a^2 - y^2} \) होता है। वेग का समय-ग्राफ भी एक साइनसोइडल तरंग होता है, लेकिन यह विस्थापन ग्राफ से \( \pi/2 \) कला में आगे होता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में वेग, विस्थापन और त्वरण के लिए समीकरणों को याद रखें। समय-वेग ग्राफ विस्थापन ग्राफ से \( 90^\circ \) (या \( \pi/2 \) रेडियन) कला में आगे होता है।

 

Question 13. एक कण ‘\( r \)” त्रिज्या के वृत्त की परिधि पर 'V' चाल से गति करता है। आधे तथा पूरे आवर्तकाल के बाद इसका विस्थापन ज्ञात कीजिए ।
Answer: उत्तर- आधे आवर्तकाल के कण का विस्थापन \( r+r = 2r \) होगा तथा पूरे आवर्तकाल के बाद इसका विस्थापन शून्य होगा।
In simple words: वृत्तीय गति में, आधे आवर्तकाल के बाद कण वृत्त के व्यास के पार चला जाता है, इसलिए विस्थापन \( 2r \) होता है। पूरे आवर्तकाल के बाद, कण अपनी प्रारंभिक स्थिति पर वापस आ जाता है, जिससे कुल विस्थापन शून्य हो जाता है।

🎯 Exam Tip: विस्थापन एक सदिश राशि है। इसलिए, वृत्तीय गति में आधे और पूरे चक्कर के लिए विस्थापन की गणना करते समय दिशा का ध्यान रखें।

 

Question 14. सरल आवर्त गति के लिए समय और विस्थापन में ग्राफ प्रदर्शित कीजिए।
Answer: उत्तर
In simple words: सरल आवर्त गति में विस्थापन का समय के साथ ग्राफ एक साइन या कोसाइन वक्र होता है। यह वक्र आयाम (\( a \)) और आवर्तकाल (\( T \)) को दर्शाता है, जिसमें विस्थापन नियमित रूप से \( \pm a \) के बीच बदलता रहता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति के लिए x-t, v-t, और a-t ग्राफ की आकृतियों और उनके कला संबंधों को समझना आवश्यक है। x-t ग्राफ एक साइन या कोसाइन तरंग होती है।

 

Question 15. सरल आवर्त गति करने वाले कण के वेग का सूत्र लिखिए तथा इसका समय-त्वरण ग्राफ खीचिए।
Answer: उत्तर- सरल आवर्त गति करने वाले कण के वेग का सूत्र,
In simple words: सरल आवर्त गति में वेग का सूत्र \( v = a\omega \cos(\omega t + \phi) \) है, और त्वरण का सूत्र \( a = -a\omega^2 \sin(\omega t + \phi) \) है। वेग और त्वरण का समय-ग्राफ एक-दूसरे से \( \pi/2 \) (या \( 90^\circ \)) कला में भिन्न होते हैं, त्वरण वेग से \( \pi/2 \) पीछे होता है।

🎯 Exam Tip: वेग और त्वरण के लिए गणितीय अभिव्यक्तियों को याद रखें। समय-त्वरण ग्राफ, समय-वेग ग्राफ से \( 90^\circ \) (या \( \pi/2 \) रेडियन) कला में पीछे होता है।

 

Question 16. पृथ्वी पर सेकण्ड लोलक की लम्बाई की गणना कीजिए। पृथ्वी पर \( g \) का मान 9.8 मी/से\(^2\) है। (\( \pi = 3.14 \))
Answer: हल- अतः पृथ्वी तल पर सेकण्ड लोलक की लम्बाई लगभग 1 मीटर होती है।
In simple words: सेकण्ड लोलक का आवर्तकाल 2 सेकंड होता है। इस आवर्तकाल और पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण (\( g \)) के मान का उपयोग करके सरल लोलक की लंबाई \( L = gT^2 / (4\pi^2) \) सूत्र से ज्ञात की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: सेकण्ड लोलक की लंबाई की गणना के लिए \( T = 2\pi \sqrt{L/g} \) सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करना सीखें। \( T = 2 \) सेकंड का मान हमेशा याद रखें।

 

Question 17. 500 ग्राम का एक गोला, 1.0 मीटर लम्बी डोरी से लटका है। क्षैतिज स्थिति से मुक्त करने पर यह ऊर्ध्वतल में दोलन करने लगता है। दोलनों के दौरान जब डोरी ऊर्ध्व से \( 60^\circ \) कोण पर है। तब डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- दिया है, गोले का द्रव्यमान (\( m \)) = 500 ग्राम = 0.5 किग्रा * डोरी क्षैतिज स्थिति में है, अत: डोरी में तनाव \( T = mg \cos \theta \) \( T = 0.5 \times 10 \times \cos 60 = 0.5 \times 10 \times = 2.5 \text{ न्यूटन} \)
In simple words: जब एक लोलक क्षैतिज स्थिति से मुक्त होकर दोलन करता है, तो किसी भी क्षण डोरी में तनाव गुरुत्वाकर्षण बल और गति के कारण होने वाले अभिकेन्द्र बल का परिणामी होता है। तनाव की गणना के लिए ऊर्जा संरक्षण और गति के समीकरणों का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: दोलन करते लोलक में किसी भी कोण पर डोरी में तनाव की गणना के लिए बल संतुलन और ऊर्जा संरक्षण दोनों सिद्धांतों का उपयोग करें। अभिकेन्द्र बल की अवधारणा को न भूलें।

 

Question 18. एक कण सरल आवर्त गति कर रहा है। किसी क्षण इसका विस्थापन \( y = a/2 \) है। कण मध्यमान स्थिति से गति प्रारम्भ करता है। इस स्थिति के लिए कला की गणना कीजिए।
Answer: हल- कला-विस्थापन का समीकरण ।
In simple words: सरल आवर्त गति में, कला कोण कण की प्रारंभिक स्थिति को दर्शाता है। यदि कण मध्यमान स्थिति से गति प्रारंभ करता है, तो विस्थापन समीकरण \( y = a \sin(\omega t) \) होता है। दिए गए विस्थापन मान (\( y = a/2 \)) का उपयोग करके कला कोण (\( \omega t \)) ज्ञात किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति के लिए विस्थापन समीकरण (\( y = a \sin(\omega t + \phi) \) या \( y = a \cos(\omega t + \phi) \)) को समझें। कला कोण (\( \phi \)) प्रारंभिक स्थिति पर निर्भर करता है, और इसे प्रारंभिक स्थितियों को समीकरण में रखकर ज्ञात किया जा सकता है।

 

Question 19. किसी लिफ्ट में लटकाये गए एक सरल लोलक के दोलन के आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ता है जब लिफ्ट एक त्वरण \( a \) से ऊपर चढ़ रही है?
Answer: उत्तर- जब लिफ्ट \( a \) त्वरण से ऊपर की ओर त्वरित होती है तो प्रभावी \( g \) का मान बढ़कर \( (g + a) \) हो जाता है। अतः आवर्तकाल \( T \) घट जाता है।
In simple words: जब लिफ्ट ऊपर की ओर त्वरित होती है, तो लोलक पर प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण बढ़ जाता है (\( g_{eff} = g + a \))। चूंकि आवर्तकाल \( T = 2\pi \sqrt{L/g_{eff}} \) होता है, प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण बढ़ने से आवर्तकाल घट जाता है।

🎯 Exam Tip: लिफ्ट में लोलक के आवर्तकाल की गणना करते समय प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण (\( g_{eff} \)) की अवधारणा को समझें। लिफ्ट के त्वरण की दिशा के आधार पर \( g_{eff} \) बदलता है।

 

Question 20. किसी स्प्रिंग के बल नियतांक की परिभाषा दीजिए।
Answer: हल- यदि किसी स्प्रिंग पर \( F \) बल लगाने से उसकी लम्बाई में \( x \) वृद्धि हो जाए तो \( F \propto x \) या \( F = kx \) जहाँ \( k = \text{स्प्रिंग का बल नियतांक} \)। यदि \( x = 1 \) तो \( k = F \), अतः किसी स्प्रिंग का बल नियतांक उस बल के बैराबर है जो उसकी लम्बाई में एकांक वृद्धि कर दे। इसका मात्रक न्यूटन/मीटर है।
In simple words: स्प्रिंग का बल नियतांक (\( k \)) वह स्थिरांक है जो स्प्रिंग को उसकी मूल लंबाई से एक इकाई विस्थापन के लिए आवश्यक बल को दर्शाता है। यह हुक के नियम (\( F = kx \)) में पाया जाता है और इसकी इकाई न्यूटन प्रति मीटर (\( \text{N/m} \)) होती है।

🎯 Exam Tip: बल नियतांक (\( k \)) की परिभाषा और उसकी इकाई को याद रखें। यह स्प्रिंग की कठोरता का माप है।

 

Question 21. प्रणोदित दोलन क्या होते हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। या प्रणोदित कम्पन क्या है? इनके दो उदाहरण दीजिए।
Answer: उत्तर- प्रणोदित दोलन (Forced oscillations)-जब किसी दोलन करने वाली वस्तु पर कोई ऐसा बाह्य आवर्त बल लगाते हैं जिसकी आवृत्ति, वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति से भिन्न हो, तो वस्तु आवर्त बल की आवृत्ति से दोलन करने लगती है। ऐसे दोलनों को प्रणोदित दोलन (forced oscillations) कहते हैं। उदाहरणार्थ-(i) जब तने हुए पतले तार में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित की जाती है और तार को चुम्बक के ध्रुवों के बीच रखते हैं तो तार प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति से कम्पन करने लगता है। (ii) सितार, वायलिन व स्वरमापी के तार पर जब किसी आवृत्ति का स्वर उत्पन्न किया जाता है तो इसके कम्पन, सेतु द्वारा खोखले ध्वनि बोर्ड में पहुँच जाते हैं। इससे बोर्ड के अन्दर की वायु में प्रणोदित दोलन उत्पन्न हो जाते हैं।
In simple words: प्रणोदित दोलन तब होते हैं जब एक दोलनशील वस्तु पर बाहरी आवर्ती बल लगाया जाता है, जिससे वस्तु उस बाहरी बल की आवृत्ति से दोलन करने लगती है। उदाहरणों में विद्युत धारा से तार का कंपन या वाद्य यंत्रों में ध्वनि से उत्पन्न कंपन शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: प्रणोदित दोलनों की परिभाषा में 'बाह्य आवर्त बल' और 'बाह्य बल की आवृत्ति से दोलन' मुख्य बिंदु हैं। दैनिक जीवन से संबंधित उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 22. प्रणोदित तथा अनुनादी कम्पनों में क्या अन्तर है?
Answer: उत्तर- अनुनादी कम्पन प्रणोदित कम्पनों की ही एक विशेष अवस्था है। प्रणोदित कम्पन में वस्तु पर आरोपित आवर्त बल की आवृत्ति कम्पन करने वाली वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति से भिन्न होती है तथा कम्पन का आयाम छोटा होता है, जबकि अनुनादी कम्पन से आरोपित आवर्त बल की आवृत्ति वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर होती है तथा कम्पनों का आयाम महत्तम होता है।
In simple words: प्रणोदित कंपन तब होते हैं जब एक बाहरी बल किसी वस्तु को उसकी प्राकृतिक आवृत्ति से अलग आवृत्ति पर कंपन करने के लिए मजबूर करता है। अनुनाद एक विशेष प्रकार का प्रणोदित कंपन है जहाँ बाहरी बल की आवृत्ति वस्तु की प्राकृतिक आवृत्ति के ठीक बराबर होती है, जिससे कंपन का आयाम बहुत बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रणोदित दोलनों और अनुनाद के बीच का मुख्य अंतर आवृत्ति के संबंध में है: प्रणोदित में बाहरी आवृत्ति प्राकृतिक आवृत्ति से भिन्न होती है, जबकि अनुनाद में ये बराबर होती हैं।

 

Question 23. मुक्त तथा प्रणोदित दोलनों में प्रत्येक का एक-एक उदाहरण देकर अन्तर समझाइए।
Answer: उत्तर मुक्त तथा प्रणोदित दोलन में अन्तर । मुक्त दोलन
In simple words: मुक्त दोलन वे होते हैं जो किसी बाहरी बल के बिना होते हैं, जैसे एक लोलक को खींचकर छोड़ना। प्रणोदित दोलन वे होते हैं जब बाहरी बल वस्तु को किसी विशेष आवृत्ति पर दोलन करने के लिए मजबूर करता है, जैसे गिटार के तार का कंपन जब उस पर ध्वनि तरंगें पड़ती हैं।

🎯 Exam Tip: मुक्त दोलन में कोई बाहरी बल नहीं होता जबकि प्रणोदित दोलन में बाहरी आवर्त बल मौजूद होता है। उदाहरणों से इन दोनों अवधारणाओं को स्पष्ट करना सीखें।

 

Question 24. तार वाले वाद्य-यन्त्रों में प्रधान तार के साथ अन्य तार क्यों लगाये जाते हैं?
Answer: उत्तर- प्रधान तार से उत्पन्न आवृत्ति के साथ अनुनादित होकर स्वर की तीव्रता बढ़ाने के लिए प्रधान तार के साथ अन्य तार लगाये जाते हैं जो विभिन्न आवृत्तियों के लिए समस्वरित (tuned) रहते हैं।
In simple words: तार वाले वाद्य यंत्रों में अतिरिक्त तार इसलिए लगाए जाते हैं ताकि वे मुख्य तार से उत्पन्न होने वाली आवृत्तियों के साथ अनुनाद कर सकें। यह अनुनाद ध्वनि की तीव्रता को बढ़ाता है और एक समृद्ध, पूर्ण ध्वनि उत्पन्न करता है।

🎯 Exam Tip: अनुनाद के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझें। वाद्य यंत्रों में अनुनाद का उपयोग ध्वनि की गुणवत्ता और तीव्रता बढ़ाने के लिए किया जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. एक सरल लोलक का गोलक एक जल से भरी गेंद है। गेंद की तली में एक बारीक छेद कर देने पर गोलक के आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: उत्तर- जैसे-जैसे जल बाहर निकलेगा, लोलक का गुरुत्व केन्द्र नीचे आता जाएगा और लोलक की प्रभावी लम्बाई बढ़ती जाएगी, जिससे आवर्तकाल बढ़ता जाएगा। जब गेंद आधे से अधिक खाली हो जाएगी तब लोलक का गुरुत्व केन्द्र पुनः ऊपर उठने लगेगा और लोलक की प्रभावी लम्बाई पुनः घटने लगेगी तथा आवर्तकाल भी घटने लगेगा। जब गेंद पूरी खाली हो जाएगी, तब लोलक का गुरुत्व केन्द्र पुनः गेंद के केन्द्र पर आ जाएगा तथा आवर्तकाल को मान प्रारम्भिक मान के बराबर हो जाएगा।
In simple words: जब जल से भरी गेंद से पानी निकलता है, तो लोलक का द्रव्यमान केंद्र पहले नीचे जाता है (लंबाई बढ़ती है, आवर्तकाल बढ़ता है)। फिर, जब गेंद खाली होने लगती है, तो द्रव्यमान केंद्र वापस ऊपर आता है (लंबाई घटती है, आवर्तकाल घटता है)। अंत में, जब गेंद पूरी तरह से खाली हो जाती है, तो आवर्तकाल प्रारंभिक मान पर लौट आता है।

🎯 Exam Tip: सरल लोलक के आवर्तकाल पर द्रव्यमान केंद्र की स्थिति के प्रभाव को समझें। प्रभावी लंबाई (\( L \)) द्रव्यमान केंद्र से निलंबन बिंदु तक की दूरी होती है, और \( T \propto \sqrt{L} \) होता है।

 

Question 2. एक कण 6.0 सेमी आयाम तथा 6.0 सेकण्ड के आवर्तकाल से सरल आवर्त गति कर रहा है। अधिकतम विस्थापन की स्थिति से आयाम के आधे तक आने में यह कितना समय लेगा?
Answer: हल- अधिकतम विस्थापन की स्थिति में कण का विस्थापन समीकरण :
In simple words: अधिकतम विस्थापन से आयाम के आधे तक पहुँचने में लगने वाले समय की गणना करने के लिए, सरल आवर्त गति के विस्थापन समीकरण (\( x = A \cos(\omega t) \) या \( x = A \sin(\omega t) \)) का उपयोग करें। कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) आवर्तकाल (\( T \)) से ज्ञात की जाती है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में कण द्वारा विभिन्न स्थितियों तक पहुँचने में लगने वाले समय की गणना के लिए कला कोण और कोणीय आवृत्ति का उपयोग करना सीखें।

 

Question 3. सरल आवर्त गति करते हुए एक कण का साम्य स्थिति में 4 सेमी दूरी पर त्वरण 16 सेमी सेकण्ड\(^2\) है। इसका आवर्तकाल ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल- सरल आवर्त गति करते हुए कण का आवर्तकाल
In simple words: सरल आवर्त गति में, त्वरण (\( a \)) विस्थापन (\( x \)) के समानुपाती होता है (\( a = \omega^2 x \))। दिए गए त्वरण और विस्थापन मानों से कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) ज्ञात की जा सकती है, और फिर आवर्तकाल (\( T = 2\pi/\omega \)) की गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: त्वरण और विस्थापन के बीच संबंध (\( a = \omega^2 x \)) का उपयोग करके आवर्तकाल की गणना करें। यह संबंध SHM की पहचान है।

 

Question 4. सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण का अधिकतम वेग 100 सेमी/से तथा अधिकतम त्वरण 157 सेमी/से\(^2\) है। कण का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- अधिकतम वेग \( a\omega = 100 \text{ सेमी/से} \)।
In simple words: अधिकतम वेग (\( v_{max} = a\omega \)) और अधिकतम त्वरण (\( a_{max} = a\omega^2 \)) के सूत्रों का उपयोग करके आवर्तकाल ज्ञात किया जा सकता है। दोनों समीकरणों को एक दूसरे से विभाजित करके कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) प्राप्त की जा सकती है, जिससे आवर्तकाल (\( T = 2\pi/\omega \)) की गणना होती है।

🎯 Exam Tip: \( v_{max} = a\omega \) और \( a_{max} = a\omega^2 \) के बीच संबंधों को याद रखें। इन दो समीकरणों का अनुपात लेकर \( \omega \) को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।

 

Question 5. एक सेकण्ड लोलक को ऐसे स्थान पर ले जाया जाता है जहाँg का मान 981 सेमी/से\(^2\) के स्थान पर 436 सेमी/से\(^2\) है। लोलक का उस स्थान पर आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- सेकण्ड लोलक का आवर्तकाल ...(1) स्थान बदलने पर आवर्तकाल ....(2)
In simple words: सरल लोलक का आवर्तकाल गुरुत्वीय त्वरण के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है (\( T \propto 1/\sqrt{g} \))। सेकण्ड लोलक का आवर्तकाल 2 सेकंड होता है। जब गुरुत्वीय त्वरण बदलता है, तो नया आवर्तकाल पुराने आवर्तकाल और गुरुत्वीय त्वरणों के अनुपात का उपयोग करके निकाला जा सकता है।

🎯 Exam Tip: \( T = 2\pi \sqrt{L/g} \) सूत्र का उपयोग करके आवर्तकाल में g के परिवर्तन का प्रभाव समझें। अनुपात विधि \( T_1/T_2 = \sqrt{g_2/g_1} \) गणना को सरल बनाती है।

 

Question 6. 2 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड भारहीन स्प्रिंग जिसका बल नियतांक 200 न्यूटन /मी है, से लटका है। पिण्ड को नीचे की ओर 20 सेमी विस्थापित करके छोड़ दिया जाता है। ज्ञात कीजिए (i) पिण्ड की अधिकतम चाल, (ii) पिण्ड-स्प्रिंग निकाय की कुल ऊर्जा ।
Answer: हल- (i) स्प्रिंग में अधिकतम खिंचाव \( X_{max} = 20 \text{ सेमी} = 0.20 \text{ मी} \) पिण्ड को नीचे की उपर्युक्त दूरी से विस्थापित करके छोड़ देने पर यदि इसकी अधिकतम चाल \( U_{max} \) हो तो । पिण्ड की अधिकतम गतिज ऊर्जा = स्प्रिंग के अधिकतम खिंचाव पर प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (ii) स्प्रिंग से लटके पिण्ड को खींचकर छोड़ देने पर स्प्रिंग की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा पिण्ड की गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा परस्पर परिवर्तित होती रहती है। पिण्ड-स्प्रिंग निकाय की कुल ऊर्जा = अधिकतम खिंचाव पर स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा
In simple words: (i) अधिकतम चाल की गणना ऊर्जा संरक्षण के नियम से की जाती है, जहाँ अधिकतम स्थितिज ऊर्जा (खींचने पर) अधिकतम गतिज ऊर्जा (साम्यावस्था पर) में परिवर्तित हो जाती है। (ii) पिण्ड-स्प्रिंग निकाय की कुल ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है, और यह अधिकतम विस्थापन पर स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा के बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली में ऊर्जा संरक्षण के नियम को लागू करें। अधिकतम गतिज ऊर्जा (\( \frac{1}{2}mv_{max}^2 \)) अधिकतम स्थितिज ऊर्जा (\( \frac{1}{2}kx_{max}^2 \)) के बराबर होती है। कुल ऊर्जा प्रणाली के लिए एक स्थिर मान होती है।

 

Question 7. जब एक भारहीन स्प्रिंग से 0.5 किग्रा का बाट लटकाया जाता है, तो उसकी लम्बाई में 0.02 मीटर की वृद्धि हो जाती है। स्प्रिंग का बल नियतांक एवं उसमें संचित ऊर्जा की गणना कीजिए। \( G = 9.8 \text{ मी/से}^2 \) )
Answer: हल-
In simple words: स्प्रिंग का बल नियतांक (\( k \)) ज्ञात करने के लिए, हुक के नियम (\( F = kx \)) का उपयोग करें, जहाँ \( F = mg \) और \( x \) लंबाई में वृद्धि है। संचित ऊर्जा की गणना \( U = \frac{1}{2}kx^2 \) सूत्र से की जाती है।

🎯 Exam Tip: हुक के नियम \( F = kx \) और स्प्रिंग में संचित स्थितिज ऊर्जा \( U = \frac{1}{2}kx^2 \) के सूत्रों को याद रखें। मानों को SI इकाइयों में बदलें।

 

Question 8. एक स्प्रिंग पर 0.60 किग्रा का पिण्ड लटकाने पर उसकी लम्बाई 0.25 मी बढ़ जाती है। यदि स्प्रिंग से 0.24 किग्रा का एक पिण्ड लटकाकर नीचे खींचकर छोड़ दिया जाए तो स्प्रिंग का आवर्तकाल कितना होगा? (\( g = 10 \text{ मी/से}^2 \))
Answer: हल- \( M=0.60 \text{ किग्रा}, g = 10 \text{ मी/से}^2 \) । स्प्रिंग की लम्बाई में वृद्धि \( \Delta x = 0.25 \text{ मी} \)
In simple words: पहले पिण्ड के द्रव्यमान और लंबाई में वृद्धि का उपयोग करके स्प्रिंग का बल नियतांक (\( k \)) ज्ञात करें (\( mg = k\Delta x \))। फिर, दूसरे पिण्ड के द्रव्यमान और ज्ञात \( k \) मान का उपयोग करके आवर्तकाल (\( T = 2\pi \sqrt{m/k} \)) की गणना करें।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग के बल नियतांक को निर्धारित करने के लिए दिए गए डेटा का उपयोग करें। यह \( k \) मान स्प्रिंग का एक आंतरिक गुण है और फिर इसका उपयोग किसी भी संलग्न द्रव्यमान के लिए आवर्तकाल की गणना के लिए किया जा सकता है।

 

Question 9. 0.25 किग्रा द्रव्यमान की एक वस्तु जब किसी स्प्रिंग से लटकायी जाती है तो स्प्रिंग की। लम्बाई 5 सेमी बढ़ जाती है। जब 0.4 किग्रा की वस्तु इससे लटकांयी जाती है तब स्प्रिंग के दोलन का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए। (\( g = 10 \text{ मी/से}^2 \))
Answer: हल- वस्तु को द्रव्यमान (\( M \)) = 0.25 किग्रा, \( g = 10 \text{ मी/से}^2 \) स्प्रिंग की लम्बाई में वृद्धि \( \Delta x = 5 \text{ सेमी} = 5 \times 10^{-2} \text{ मीटर} \)
In simple words: स्प्रिंग का बल नियतांक (\( k \)) पहले द्रव्यमान और विस्थापन के डेटा से ज्ञात किया जाता है। फिर, इस \( k \) मान और दूसरे द्रव्यमान का उपयोग करके स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली के आवर्तकाल (\( T = 2\pi \sqrt{m/k} \)) की गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग के बल नियतांक (\( k \)) की गणना हुक के नियम से करें (\( k = mg/\Delta x \))। फिर इस \( k \) का उपयोग किसी भी अन्य द्रव्यमान के लिए आवर्तकाल (\( T = 2\pi \sqrt{m/k} \)) निकालने के लिए करें।

 

Question 10. 0.40 किग्रा द्रव्यमान के एक पिण्ड को एक आदर्श स्प्रिंग से लटकाने पर स्प्रिंग की लम्बाई 2.0 सेमी बढ़ जाती है। यदि इस स्प्रिंग से 2.0 किग्रा द्रव्यमान के पिण्ड को लटकाया जाए तो दोलन का आवर्तकाल क्या होगा? (\( g = 10 \text{ मी/से}^2 \))
Answer: हल- पिण्ड का द्रव्यमान (\( M \)) = 0.40 किग्रा, \( g = 10 \text{ मी/से}^2 \) स्प्रिंग की लम्बाई में वृद्धि \( \Delta x = 2 \text{ सेमी} = 2 \times 10^{-2} \text{ मीटर} \)
In simple words: पहले द्रव्यमान और विस्थापन का उपयोग करके स्प्रिंग का बल नियतांक (\( k \)) ज्ञात करें। फिर, दूसरे द्रव्यमान और इस \( k \) मान का उपयोग करके स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली के आवर्तकाल की गणना करें।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग स्थिरांक (\( k \)) एक भौतिक स्थिरांक है जो स्प्रिंग के गुणों पर निर्भर करता है, न कि लटके हुए द्रव्यमान पर। एक बार \( k \) ज्ञात हो जाने पर, इसे किसी भी द्रव्यमान के लिए आवर्तकाल की गणना में उपयोग किया जा सकता है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. सरल आवर्त गति से आप क्या समझते हैं। सरल लोलक के आवर्तकाल के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: उत्तर- सरल आवर्त गति-जब किसी कण की अपनी साम्य स्थिति के इधर-उधर एक सरल रेखा में गति इस प्रकार की होती है कि इस पर लग रहा त्वरण (अथवा बल) प्रत्येक स्थिति में कण के विस्थापन के अनुक्रमानुपाती रहती है तथा सदैव साम्य स्थिति की ओर दिष्ट होता है तो कण की गति को सरल आवर्त गति कहते हैं। सरल लोलक के आवर्तकाल का व्यंजक-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.18 एक सरल लोलक को दर्शाता है जिसमें एक गोलक (द्रव्यमान m) एक डोरी (प्रभावी लंबाई l) से लटका हुआ है। गोलक को एक बिंदु S से निलंबित किया गया है, और इसकी साम्यावस्था की स्थिति O है। जब गोलक दोलन करता हुआ किसी क्षण स्थिति A पर होता है, तो उसका विस्थापन OA = x होता है। इस स्थिति में डोरी ऊर्ध्वाधर से \( \theta \) कोण बनाती है।
Answer: चित्र 14.18 में एक सरल लोलक दर्शाया गया है जिसकी प्रभावी लम्बाई \( l \) है तथा उसके गोलक का द्रव्यमान \( m \) है। गोलक को बिन्दु \( S \) से लटकाया गया है तथा गोलक की साम्य स्थिति \( O \) है। मान लीजिए दोलन करते समय गोलक किसी क्षण स्थिति \( A \) में है, जबकि इसका विस्थापन \( \text{OA} = x \) है। इस स्थिति में धागा ऊर्ध्वाधर से \( \theta \) कोण बनाता है तथा गोलक पर । निम्नलिखित दो बल लगते है- . 1. गोलक का भार \( \text{mg} \) जो उसके गुरुत्व केन्द्र पर ठीक नीचे की ओर ऊध्वाधर दिशा में लगता है। 2. धागे में तनाव का बल \( T' \) जो धागे के अनुदिश निलम्बन बिन्दु \( S \) की ओर लगता है। भार \( \text{mg} \) को दो भागों में वियोजित किया जा सकता है : घटक \( \text{mg } \cos \theta \) जो कि धागे के अनुदिश \( T' \) की विपरीत दिशा में लगता है तथा घटक \( \text{mg } \sin \theta \) जो कि धागे की लम्बवत् दिशा में लगता है। धागे में तनाव \( T' \) तथा घटक \( \text{mg } \cos \theta \) का परिणामी \( (T' - \text{mg } \cos \theta) \), गोलक को। त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर चलने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल \( (mv^2/l) \) प्रदान करता है; जबकि घटक \( \text{mg } \sin \theta \) गोलक को साम्य स्थिति \( O \) में लौटाने का प्रयत्न करता है। यही गोलक पर कार्य करने वाला प्रत्यानयन बल (restoring force) है। अतः गोलक पर प्रत्यनियन बल \( F = -\text{mg } \sin \theta \) (जबकि \( \theta \), कोणीय विस्थापन से छोटा है एवं इसे रेडियन में नापा जाता है ।) ऋण चिह्न यह व्यक्त करता है कि बल \( F \), विस्थापन \( \theta \) के घटने की दिशा में है अर्थात् साम्य स्थिति की ओर को दिष्ट है। त्वरण समीकरण (1) में \( (g/l) \) किसी निश्चित स्थान पर किसी दी हुई प्रभावी लम्बाई के सरल लोलक के लिए नियतांक है; अतः त्वरण \( \propto \) - (विस्थापन) स्पष्ट है कि गोलक का त्वरण विस्थापन के अनुक्रमानुपाती है तथा उसकी दिशा विस्थापन \( x \) के विपरीत है। क्योंकि \( \theta \) का मान कम रखा जाता है, अतः चाप \( \text{OA} \) लगभग ऋजु-रेखीय होगा। इस प्रकार लोलक सरल रेखा में गति करेगा। अतः गोलक की गति सरल आवर्त गति है।
In simple words: सरल आवर्त गति में, एक कण एक मध्य बिंदु के इर्द-गिर्द इस तरह से दोलन करता है कि उस पर लगने वाला प्रत्यानयन बल या त्वरण विस्थापन के समानुपाती और विपरीत दिशा में होता है। सरल लोलक में, गुरुत्वाकर्षण बल का एक घटक प्रत्यानयन बल के रूप में कार्य करता है। छोटे कोणों के लिए, \( \sin \theta \approx \theta \), जिससे यह बल विस्थापन के समानुपाती हो जाता है और लोलक सरल आवर्त गति करता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति की परिभाषा को बल-विस्थापन संबंध के संदर्भ में स्पष्ट करें। सरल लोलक के लिए आवर्तकाल का व्यंजक प्राप्त करते समय बल घटकों को सही ढंग से विश्लेषित करें और \( \sin \theta \approx \theta \) सन्निकटन का उपयोग करें।

 

Question 2. सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण के वेग का सूत्र प्राप्त कीजिए।
Answer: उत्तर- सरल आवर्त गति में कण का वेग (Velocity of a particle in S.H.M.) –
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.19 एक निर्देश वृत्त को दर्शाता है जिस पर एक कण P एकसमान वृत्तीय गति से घूम रहा है। कण P के त्रिज्य-सदिश के x-अक्ष पर प्रक्षेप (N) की गति, सरल आवर्त गति का प्रतिनिधित्व करती है। कण P का वेग v, वृत्त की स्पर्शरेखा के अनुदिश दर्शाया गया है, जिसे दो लंबवत घटकों में वियोजित किया गया है।
Answer: निर्देश वृत्त की परिधि पर चलते कण \( P \) के वेग \( v \) को परस्पर दो लम्बवत् घटकों में वियोजित करने पर (चित्र 14.19); \( v \) का \( \text{PN} \) के समान्तर घटक = \( v \sin \theta \) \( v \) का \( \text{PN} \) के लम्बवत् घटक = \( v \cos \theta \) घटक \( v \cos \theta \), कण \( P \) से वृत्त के व्यास पर खींचे गये लम्ब के पाद \( N \) की गति की दिशा \( \text{OA} \) के समान्तर है। अतः यह पाद \( N \) के वेग के बराबर है। इस प्रकार, पाद \( N \) का वेग \( u = v \cos \theta \) इस समीकरण से यह पता चलता है कि सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण का वेग (\( u \)) उसके विस्थापन (\( y \)) के साथ-साथ बदलता है। जब विस्थापन शून्य होता है (\( y = 0 \)) अर्थात् जब । कण अपनी साम्य स्थिति से गुजरता है तब वेग अधिकतम होता है (\( U_{max} = a\omega \)) तथा जब विस्थापन अधिकतम होता है (\( y = a \)) तब वेग शून्य होता है (\( u = 0 \)).
In simple words: सरल आवर्त गति करते हुए कण का वेग ज्ञात करने के लिए, हम एक निर्देश वृत्त का उपयोग कर सकते हैं। वृत्त पर एकसमान गति करते कण के वेग के x-घटक को SHM के वेग के रूप में देखा जाता है। यह वेग समीकरण \( v = \pm \omega \sqrt{a^2 - y^2} \) के रूप में प्राप्त होता है, जो दर्शाता है कि वेग साम्यावस्था पर अधिकतम और चरम बिंदुओं पर शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में वेग के सूत्र को निर्देश वृत्त विधि से प्राप्त करना सीखें। यह विधि वेग, विस्थापन और त्वरण के बीच कला संबंधों को समझने में सहायक है।

 

Question 3. यदि पृथ्वी के केन्द्र से होकर पृथ्वी के आर-पार एक सुरंग बनाई जाए तथा उस सुरंग में एक पिण्ड छोड़ा जाए तो दिखाइए कि पिण्ड का त्वरण सदैव सुरंग के मध्य बिन्दु (अर्थात पृथ्वी के केन्द्र) से विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है । यह भी सिद्ध कीजिए कि इसका आवर्तकाल पृथ्वी के समीप परिक्रमा करते हुए उपग्रह के आवर्तकाल के बराबर होगा।
Answer: उत्तर-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.20 पृथ्वी के केंद्र से गुजरने वाली एक काल्पनिक सुरंग AB को दर्शाता है। O पृथ्वी का केंद्र है। एक द्रव्यमान m के पिंड को इस सुरंग में छोड़ा जाता है। जब पिंड किसी क्षण बिंदु P पर होता है, जो केंद्र O से x दूरी पर है, तो पिंड पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल उसकी गति का कारण बनता है।
Answer: चित्र 14.20 में पृथ्वी के केन्द्र से गुजरने वाली एक सुरंग \( \text{AB} \) को प्रदर्शित किया गया है तथा \( \text{O} \) पृथ्वी का केन्द्र है। \( m \) द्रव्यमान के एक पिण्ड को इस सुरंग के भीतर गति करने के लिए छोड़ा गया है। माना किसी क्षण पिण्ड बिन्दु \( P \) पर है, जहाँ इसका पृथ्वी के केन्द्र \( \text{O} \) से विस्थापन \( x \) है। इस समय पिण्डे \( x \) त्रिज्या के ठोस गोले के बाह्य पृष्ठ पर स्थित है। अतः पिण्ड पर पृथ्वी का गुरुत्वीय बल \( x \) त्रिज्या के गोले के गुरुत्वीय बल के बराबर होगा, जो \( P \) से \( O \) की दिशा में कार्य करेगा। इस प्रकार, पिण्ड का त्वरण \( a \), विस्थापन \( x \) के अनुक्रमानुपाती है तथा इसकी दिशा विस्थापन \( x \) के विपरीत है। अतः पिण्ड की गति सरल आवर्त गति है।
In simple words: पृथ्वी के केंद्र से गुजरने वाली सुरंग में गिराया गया पिंड सरल आवर्त गति करता है क्योंकि उस पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल विस्थापन के समानुपाती और केंद्र की ओर होता है। इसका आवर्तकाल पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करने वाले उपग्रह के आवर्तकाल के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी के अंदर गुरुत्वीय त्वरण \( g' = gx/R \) के सूत्र को समझें, जहाँ \( R \) पृथ्वी की त्रिज्या है। यह दर्शाता है कि \( g' \propto x \)। फिर SHM की शर्त \( a \propto -x \) का उपयोग करके आवर्तकाल निकालें।

 

Question 4. एक कण सरल आवर्त गति कर रहा है। यदि माध्य स्थिति से \( x_1 \) तथा \( x_2 \) दूरियों पर कण का वेग क्रमशः \( u_1 \) तथा \( u_2 \) हैं, तो सिद्ध कीजिए कि इसका आवर्तकाल होगा।
Answer: हल-
In simple words: सरल आवर्त गति में वेग और विस्थापन के बीच संबंध (\( v^2 = \omega^2(a^2 - x^2) \)) का उपयोग करके, दिए गए दो वेग-विस्थापन युग्मों के लिए दो समीकरण बनाए जा सकते हैं। इन समीकरणों को हल करके कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) और फिर आवर्तकाल (\( T = 2\pi/\omega \)) ज्ञात किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में वेग (\( v \)), आयाम (\( a \)), कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)), और विस्थापन (\( x \)) के बीच संबंध \( v^2 = \omega^2(a^2 - x^2) \) को याद रखें। यह सूत्र ऐसे प्रश्नों को हल करने में बहुत उपयोगी है।

 

Question 5. सरल आवर्त गति करते हुए पिण्ड की दोलन गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा तथा सम्पूर्ण ऊर्जा के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: उत्तर- गतिज ऊर्जा (Kinetic energy)-सरल आवर्त गति करते हुए कण को जब किसी क्षण उसकी साम्य स्थिति से विस्थापन \( y \) हो तो उस क्षण उसका वेग \( \text{latex s=2]u=\omega \sqrt { \left( { a }^{ 2 }-{ y }^{2} \right) } } \), जहाँ \( a = \text{कण का आयाम} \) तथा \( \omega = \text{कण की कोणीय आवृत्ति} \)। यदि पिण्ड (कण) का द्रव्यमान \( m \) हो स्थितिज ऊर्जा (Potential energy)-सरल आवर्त गति करते हुए कण । का जब किसी क्षण उसकी साम्य स्थिति से विस्थापन \( y \) है तो उस क्षण ।। उसका त्वरण \( a = - \omega^2 y \) (जहाँ \( \omega = \text{कोणीय आवृत्ति} \))। यदि कण का द्रव्यमान \( m \) हो तो इस क्षण कण पर लगने वाला प्रत्यानयन बल \( F = \text{द्रव्यमान} \times \text{त्वरण} \) \( F = mx a = m \times (-\omega^2 y) = -m\omega^2 y \) ऋण चिह्न केवल बल की दिशा (विस्थापन \( y \) के विपरीत) का प्रतीक है।' अतः बल का परिमाण \( F = m\omega^2 y \) यदि हम कण पर लगे बल \( F \) तथा कण के विस्थापन \( y \) के बीच एक ग्राफ खींचे तो
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.21 एक बल-विस्थापन ग्राफ को दर्शाता है। x-अक्ष पर विस्थापन और y-अक्ष पर प्रत्यानयन बल F है। यह एक सीधी रेखा है जो मूल बिंदु से गुजरती है, जिसका ढलान बल नियतांक k के बराबर है। ग्राफ के तहत का क्षेत्रफल उस बल द्वारा किए गए कार्य या संचित स्थितिज ऊर्जा को दर्शाता है।
Answer: चित्र 14.21 की भाँति एक सरल रेखा प्राप्त होती है। यह एक बल विस्थापन ग्राफ है। अतः इस ग्राफ (सरल रेखा) तथा विस्थापन अक्ष के बीच घिरा क्षेत्रफल कण पर किये गये कार्य अर्थात् कण की स्थितिज ऊर्जा को व्यक्त करेगा। इस प्रकार समी० (4) से स्पष्ट है कि सरल आवर्त गति करते कण (पिण्ड) की कुल ऊर्जा आयाम के वर्ग (\( a^2 \)) के तथा आवृत्ति के वर्ग (\( n^2 \)) के अनुक्रमानुपाती होती है।
In simple words: सरल आवर्त गति में, गतिज ऊर्जा कण के वेग पर निर्भर करती है (\( \frac{1}{2}mv^2 \)) और स्थितिज ऊर्जा विस्थापन पर निर्भर करती है (\( \frac{1}{2}ky^2 \))। कुल ऊर्जा गतिज और स्थितिज ऊर्जा का योग होती है और यह हमेशा स्थिर रहती है, जो आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा और कुल ऊर्जा के लिए व्यंजक (सूत्रों) को याद रखें। ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को भी समझें।

 

Question 6. बल नियतांक \( k \) की भारहीन स्प्रिंग से लटके हुए एक द्रव्यमान \( m \) के पिण्ड के ऊध्वाधर दोलनों के आवर्तकाल के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: उत्तर- स्प्रिंग से लटके पिण्ड की गति (Motion of a body suspended by a spring) –
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 14.22 का भाग (a) एक हल्की (भारहीन) स्प्रिंग को दर्शाता है जिसकी सामान्य लम्बाई L है और यह एक दृढ़ आधार से लटकी है। भाग (b) दिखाता है कि जब स्प्रिंग से m द्रव्यमान का एक पिण्ड लटकाया जाता है, तो पिण्ड के भार के कारण स्प्रिंग में खिंचाव उत्पन्न होता है। यह चित्र इस प्रणाली की साम्यावस्था को दर्शाता है, जहाँ भार mg प्रत्यानयन बल F = kl के बराबर होता है।
Answer: चित्रं 14.22 (a) में एक हल्की (भारहीन) स्प्रिंग दर्शायी गई है, जिसकी सामान्य लम्बाई \( L \) है तथा यह एक दृढ़ आधार से लटकी है। जब इसके निचले सिरे पर \( m \) द्रव्यमान का एक पिण्ड लटकाया जाता है तो पिण्ड के भार से इसमें खिंचाव उत्पन्न होता है। माना यह खिंचाव अथवा स्प्रिंग की लम्बाई में वृद्धि। है । चित्र 14.22 (b) में स्प्रिंग अपनी प्रत्यास्थता के कारण द्रव्यमान \( m \) पर एक प्रत्यानयन बल \( F \) ऊपर ऊर्ध्व दिशा में लगाती है। हम जानते हैं कि स्प्रिंग के लिए हुक का नियम सत्य होता है। अतः हुक के नियम से \( F = -kl \). जहाँ \( k \) स्प्रिंग का बल नियतांक है। इसे स्प्रिंग नियतांक (spring constant) भी कहते हैं। इसका मात्रक 'न्यूटन/मीटर' होता है। उपर्युक्त समीकरण में ऋण चिह्न इस बात का संकेत करता है कि प्रत्यानयन बल \( F \) विस्थापन के विपरीत दिशा में है। इस स्थिति में पिण्ड पर लगने वाला एक दूसरा बल पिण्ड का भार \( \text{mg} \) है। चूंकि इस स्थिति में पिण्ड स्थायी सन्तुलन अवस्था में है, अतः इस पर परिणामी बल शून्य होना चाहिए। अत: \( F + mg = 0 \)
In simple words: स्प्रिंग से लटके हुए द्रव्यमान के दोलनों का आवर्तकाल इस तथ्य पर आधारित है कि विस्थापन के कारण उत्पन्न प्रत्यानयन बल विस्थापन के समानुपाती और विपरीत होता है। हुक के नियम और न्यूटन के द्वितीय नियम का उपयोग करके आवर्तकाल के लिए व्यंजक \( T = 2\pi \sqrt{m/k} \) प्राप्त किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली के लिए आवर्तकाल का व्यंजक प्राप्त करते समय हुक के नियम (\( F=-kx \)) और न्यूटन के द्वितीय नियम (\( F=ma \)) का सही ढंग से अनुप्रयोग करें। साम्यावस्था की स्थिति को पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. आरेख की सहायता से अवमन्दित कम्पन को समझाइए। अवमन्दित कम्पन के दो उदाहरण दीजिए। अवमन्दित कम्पन को प्रणोदित कम्पन में बदलने के लिए क्या करना पड़ता है?
Answer: उत्तर- अवमन्दित कम्पन (Damped Vibrations)-किसी वस्तु के कम्पन करते समय कोई-न-कोई बाह्य अवमन्दक बल (damping force) अवश्य विद्यमान रहता है जिसके कारण कम्पन करती वस्तु की ऊर्जा लगातार घटती रहती है, इसके परिणामस्वरूप वस्तु के कम्पन का आयाम भी निरन्तर घटता जाता है या कुछ समय पश्चात् वस्तु कम्पन करना बन्द कर देती है। यह वह स्थिति है जब वस्तु को दी गयी कुल ऊर्जा समाप्त हो चुकी होती है। इस प्रकार बाह्य अवमन्दक बलों के विरुद्ध दोलन करने, वाली वस्तु की ऊर्जा का निरन्तर कम होते रहना ऊर्जा क्षय कहलाता है। इस ऊर्जा क्षय के कारण ही कम्पित वस्तु के कम्पनों का आयाम धीरे-धीरे घटता जाता है। ऐसे कम्पन को जिनका ओयार्म समय के साथ घटता जाता है, अवमन्दित कम्पन (damped vibrations) कहते है। उदाहरणार्थ- (i) सरल लोलक के गोलक के दोलन करते समय लोलक को लटकाने वाले दृढ़ आधार का घर्षण तथा वायु की श्यानता बाह्य अवमन्दक का कार्य करते हैं जिससे इसके दोलनों का आयाम धीरे-धीरे घटता जाता है तथा अन्त में गोलक दोलन करना बन्द कर देता है। (ii) ऊध्वाधर स्प्रिंग से लटके पिण्ड को थोड़ा नीचे खींचकर छोड़ देने पर पिण्ड के दोलन अवमन्दित दोलन हैं। यहाँ पिण्ड का वायु के साथ घर्षण (श्यानता) अवमन्दक-बल का कार्य करता है। अवमन्दित कम्पन को प्रणोदित कम्पन में बदलने के लिए कम्पित 'वस्तु पर बाह्य आवर्त बल आरोपित करना होता है।
In simple words: अवमंदित कंपन वे होते हैं जिनमें घर्षण या वायु प्रतिरोध जैसे बाहरी अवमंदक बल के कारण ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती जाती है, जिससे कंपन का आयाम समय के साथ घटता जाता है और अंततः दोलन रुक जाते हैं। इसे प्रणोदित कंपन में बदलने के लिए, हमें बाहरी आवर्ती बल लगाना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: अवमंदित कंपन की परिभाषा को समझें जिसमें आयाम में कमी और ऊर्जा क्षय शामिल है। इसके उदाहरणों को याद रखें और प्रणोदित कंपन से इसके अंतर को जानें।

 

Question 8. अनुनाद से क्या तात्पर्य है? व्याख्या कीजिए। ध्वनि अनुनाद, यान्त्रिक अनुनाद तथा विद्युत चुम्बकीय अनुनाद के एक-एक उदाहरण दीजिए।
Answer: उत्तर- जब किसी दोलन करने वाली वस्तु पर कोई बाह्य आवर्त बल लगाया जाता है तो वस्तु बल की आवृत्ति से प्रणोदित दोलन करने लगती है। यदि बाह्य बल की आवृत्तिवस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर (अथवा इसकी पूर्ण गुणज) हो तो वस्तु के प्रणोदित दोलनों का आयाम बहुत बढ़ जाता है। इस घटना को अनुनाद (resonance) कहते हैं। बाह्य बल और वस्तु की आवृत्ति में थोड़ा-सा ही अन्तर होने पर आयाम बहुत कम हो जाता है।
In simple words: अनुनाद एक ऐसी घटना है जहाँ एक दोलनशील वस्तु पर लगाए गए बाहरी बल की आवृत्ति उसकी प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर हो जाती है, जिससे दोलनों का आयाम नाटकीय रूप से बढ़ जाता है। यह ध्वनि, यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय प्रणालियों में देखा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: अनुनाद की परिभाषा को स्पष्ट रूप से समझें जिसमें 'बाह्य आवृत्ति का प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर होना' और 'आयाम का अत्यधिक बढ़ना' मुख्य बिंदु हैं। विभिन्न प्रकार के अनुनाद के उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 8. अनुनाद से क्या तात्पर्य है? व्याख्या कीजिए। ध्वनि अनुनाद, यान्त्रिक अनुनाद तथा विद्युत चुम्बकीय अनुनाद के एक-एक उदाहरण दीजिए।
Answer: जब किसी दोलन करने वाली वस्तु पर कोई बाह्य आवर्त बल लगाया जाता है तो वस्तु बल की आवृत्ति से प्रणोदित दोलन करने लगती है। यदि बाह्य बल की आवृत्तिवस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर (अथवा इसकी पूर्ण गुणज) हो तो वस्तु के प्रणोदित दोलनों का आयाम बहुत बढ़ जाता है। इस घटना को अनुनाद (resonance) कहते हैं। बाह्य बल और वस्तु की आवृत्ति में थोड़ा-सा ही अन्तर होने पर आयाम बहुत कम हो जाता है। स्पष्ट है कि अनुनाद, प्रणोदित दोलनों की ही एक विशेष अवस्था है। अनुनाद की व्याख्या-जब बाह्य बल की आवृत्ति वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर होती है तो दोनों समान कला में कम्पन करते हैं। अतः आवर्त बल द्वारा लगाये गये उत्तरोत्तर आवेग वस्तु की ऊर्जा लगातार बढ़ाते जाते हैं और वस्तु का आयाम लगातार बढ़ता जाता है। सिद्धान्त रूप से वस्तु का आयाम अनन्त तक बढ़ता रहना चाहिए, परन्तु व्यवहार में दोलन करती हुई वस्तु में वायु के घर्षण तथा ध्वनि विकिरण के कारण ऊर्जा-क्षय होता रहता है। दोलन आयाम बढ़ने के साथ-साथ ऊर्जा-क्षय भी बढ़ता जाता है और एक ऐसी स्थिति आ जाती है कि बाह्य बल द्वारा प्रति दोलन दी गई ऊर्जा, वस्तु द्वारा प्रति । दोलन में ऊर्जा-क्षय के बराबर हो जाती है। इस स्थिति में आयाम का बढ़ना रुक जाता है। उदाहरणार्थ 1. ध्वनि अनुनाद
(i) डोरियों में कम्पन-यदि समान आवृत्ति की दो डोरियाँ एक ही बोर्ड पर तनी हों तथा उनमें से एक को कम्पित किया जाये तो दूसरी स्वयं कम्पन करने लगती है।
(ii) बर्तन में जल भरना-काँच के एक लम्बे जार के मुँह पर किसी स्वरित्र को बजाकर रखने पर एक धीमी ध्वनि सुनाई देती है। जार में पानी भरना शुरू कर देने पर जार के वायु-स्तम्भ की लम्बाई कम होने लगती है एवं एक निश्चित लम्बाई पर तेज ध्वनि सुनाई पड़ती है। इसका कारण यह है कि एक निश्चित लम्बाई पर वायु-स्तम्भ की स्वाभाविक आवृत्ति, स्वरित्र की आवृत्ति के बराबर हो जाती है और अनुनाद के कारण वायु-स्तम्भ में बड़े आयाम के कम्पन होते हैं जिससे ध्वनि तेज सुनाई देती है।
(iii) वातावरण के कम्पन-कान के ऊपर खाली गिलास रखने पर गुनगुन की ध्वनि सुनाई पड़ती है। इसका कारण यह है कि वातावरण में अनेक प्रकार के कम्पन उपस्थित रहते हैं। इन कम्पनों में से जिसकी आवृत्ति गिलास के भीतर वायु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर होती है, वे वायु को अनुनादित करते हैं।

2. यान्त्रिक अनुनाद सेना का पुल पार करना-जब सेना किसी पुल को पार करती है तब सैनिक कदम मिलाकर नहीं चलते । इसका कारण यह है कि यदि सैनिकों के कदमों की आवृत्ति, पुल की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर हो जायेगी तो पुल में बड़े आयाम के कम्पन होने लगेंगे और पुल के टूटने का खतरा हो जाएगा।

3. विद्युत-चुम्बकीय अनुनाद रेडियो-यह विद्युत अनुनाद का उदाहरण है। विभिन्न प्रसारण केन्द्रों से अलग-अलग आवृत्तियों पर तरंगें प्रसारित की जाती हैं। रेडियो पर एक L-C परिपथ लगा होता है। इसमें लगे संधारित्र की धारिता (C) बदलने पर L-C परिपथ की आवृत्ति बदल जाती है। जब इस विद्युत परिपथ की का आवृत्ति किसी प्रसारण केन्द्र (स्टेशन) की आवृत्ति के बराबर हो जाती है तो विद्युत परिपथ उन तरंगों को ग्रहण कर लेता है और स्टेशन से प्रोग्राम सुनाई देने लगती है।
In simple words: अनुनाद वह घटना है जिसमें बाह्य बल की आवृत्ति वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति से मेल खाती है, जिससे दोलनों का आयाम अत्यधिक बढ़ जाता है। इसके उदाहरणों में ध्वनि, यांत्रिक और विद्युत-चुंबकीय अनुनाद शामिल हैं, जैसे संगीत वाद्ययंत्रों में ध्वनि का बढ़ना या रेडियो में स्टेशन ट्यून करना।

🎯 Exam Tip: अनुनाद की परिभाषा, उसकी शर्त (आवृत्तियों का मिलान), और विभिन्न प्रकारों (ध्वनि, यांत्रिक, विद्युत-चुंबकीय) के साथ उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है ताकि पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकें।

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