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Detailed Chapter 5 खानाबदोश साम्राज्य UP Board Solutions for Class 11 History
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Class 11 History Chapter 5 खानाबदोश साम्राज्य UP Board Solutions PDF
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
संक्षेप में उत्तर दीजिए
Question 1. मंगोलों के लिए व्यापार क्यों इतना महत्त्वपूर्ण था?
Answer: स्टैपी प्रदेशों में मूल आवश्यकताओं की वस्तुओं के स्रोतों की कमी के कारण मंगोलों और मध्य एशिया के यायावरों को व्यापार और वस्तुओं के विनिमय के लिए चीनवासियों के पास जाना पड़ता था। यह व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए लाभकारी थी। यायावर कबीले खेती से प्राप्त उत्पादों और लोहे के उपकरणों को चीन से लाते थे और घोड़े, फर और शिकार का व्यापार (विनिमय) करते थे। जब मंगोल कबीलों के लोगों के साथ मिलकर व्यापार करते थे तो वे अपने चीनी पड़ोसियों से व्यापार में लाभकारी शर्ते और व्यापारिक सम्बन्ध रखते थे। इन सभी परिस्थितियों के कारण मंगोलों के लिए व्यापार महत्त्वपूर्ण था ।
In simple words: मंगोलों के लिए व्यापार इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि स्टेपी प्रदेशों में आवश्यक वस्तुओं की कमी के कारण उन्हें चीन से व्यापार करना पड़ता था। यह व्यापार दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद था, जहाँ वे खेती के उत्पाद, लोहे के उपकरण, घोड़े, फर और शिकार का आदान-प्रदान करते थे, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ और व्यापारिक संबंध बनाने में मदद मिलती थी।
🎯 Exam Tip: व्यापारिक आवश्यकताओं और भौगोलिक कारकों पर ध्यान केंद्रित करें जो मंगोलों के लिए चीन के साथ व्यापार को महत्वपूर्ण बनाते थे।
Question 2. चंगेज खान ने यह क्यों अनुभव किया कि मंगोल कबीलों को नवीन सामाजिक और सैनिक इकाइयों में विभक्त करने की आवश्यकता है?
Answer: मंगोलों के विभिन्न निकायों में अलग-अलग प्रकार के लोगों का एक विशाल समूह सम्मिलित था जिन्होंने चंगेज खान की सत्ता को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया था। इसमें पराजित लोग भी शामिल थे। चंगेज खान इन विभिन्न जनजातीय समूहों की पहचान को क्रमबद्ध रूप से मिटाकर उन्हें एक नई पहचान देना चाहता था। इसलिए उसे मंगोल कबीलों को नवीन सामाजिक और सैनिक इकाइयों में विभक्त करने की आवश्यकता अनुभव दुई ।
In simple words: चंगेज खान ने मंगोल कबीलों को नई सामाजिक और सैनिक इकाइयों में बांटना आवश्यक समझा क्योंकि उसके अधीन कई जनजातीय समूह थे, जिनमें पराजित लोग भी शामिल थे। वह इन विविध पहचानों को मिटाकर एक एकीकृत मंगोल पहचान बनाना चाहता था ताकि एक मजबूत और एकजुट साम्राज्य का निर्माण हो सके।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान के एकीकरण के उद्देश्य और विभिन्न कबीलों को एक साझा पहचान में ढालने की उसकी रणनीति पर प्रकाश डालें।
Question 3. यास के बारे में परवर्ती मंगोलों का चिन्तन किस तरह चंगेज खान की स्मृति के साथ जुड़े- हुए उनके तनावपूर्ण सम्बन्धों को उजागर करता है?
Answer: 'यास' एक प्रकार की नियम-संहिता है। चंगेज खान ने 1206 ई० में यह संहिता किरिलताई में लागू की थी। अपने प्रारम्भिक स्वरूप में यास को यसाक (Yasaq) लिखा जाता था जिसका अर्थ था विधि, आज्ञप्ति व आदेश। वास्तव में जो थोड़ा-बहुत विवरण यसाक के बारे में हमें मिला है उसका सम्बन्ध प्रशासनिक विनियमों से है; जैसे-आखेट, सैन्य और डाक-प्रणाली का संगठन। 13वीं सदी के मध्य तक, किसी तरह से मंगोलों ने 'यास' शब्द का प्रयोग अधिक सामान्य रूप से करना प्रारम्भ कर दिया। इसका मतलब था-चंगेज खान की विधि संहिता। 16वीं शताब्दी के अन्त में चंगेज खान के सबसे बड़े पुत्र जोची का एक दूर का वंशज अब्दुल्लाह खान बुखारा के उत्सव मैदान में गया वहाँ उसने छुट्टी की नमाज अदा की और यास के नियमों का उल्लंघन किया। परवर्ती मंगोलों का चिन्तन यास के विषय में बदल गया था।
In simple words: 'यास' चंगेज खान द्वारा 1206 ई० में लागू की गई एक नियम-संहिता थी, जिसे मूलतः यसाक कहा जाता था, जिसका अर्थ विधि और आदेश था। यह प्रशासनिक नियमों जैसे शिकार, सैन्य और डाक-प्रणाली के संगठन से संबंधित था, लेकिन 13वीं सदी तक इसे चंगेज खान की विधि संहिता के रूप में सामान्यीकृत किया गया। परवर्ती मंगोलों का इसके प्रति दृष्टिकोण बदल गया, जैसा कि 16वीं सदी में जोची के वंशज अब्दुल्लाह खान बुखारा द्वारा इसके नियमों का उल्लंघन करने से स्पष्ट होता है।
🎯 Exam Tip: यास की उत्पत्ति, उसके मूल उद्देश्य और समय के साथ उसके अर्थ और महत्व में आए परिवर्तनों को स्पष्ट करें।
परीक्षोपयोगी अन्य महत्व बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. यायावरी लोगों में कौन-सा गुण नहीं होता?
(क) घुमक्कड़ी
(ख) आखेटक
(ग) संग्रही
(घ) स्थायी निवास
Answer: (घ) स्थायी निवास
In simple words: यायावरी लोग एक स्थान पर स्थिर होकर नहीं रहते हैं; वे हमेशा घूमते रहते हैं। इसलिए, स्थायी निवास यायावरी लोगों का गुण नहीं होता है।
🎯 Exam Tip: यायावरी जीवन शैली की मुख्य विशेषताओं को याद रखें, जैसे घुमक्कड़ी और आखेटक प्रवृत्ति, ताकि स्थायी निवास जैसे विरोधी गुणों को पहचान सकें।
Question 2. मंगोल मूलतः कहाँ के निवासी थे?
(क) स्टेपी प्रदेश
(ख) भारत
(ग) चीन
(घ) पाकिस्तान
Answer: (क) स्टेपी प्रदेश
In simple words: मंगोल लोग मूल रूप से मध्य एशिया के विस्तृत घास के मैदानों, जिन्हें स्टेपी प्रदेश कहा जाता है, के निवासी थे।
🎯 Exam Tip: मंगोलों के भौगोलिक मूल स्थान को याद रखें, जो स्टेपी प्रदेश था, क्योंकि यह उनकी जीवनशैली और सैन्य रणनीति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. चंगेज खान का प्रारम्भिक नाम था
(क) तेमुजिन
(ख) च्यांग
(ग) बाटू
(घ) ओगोदेई
Answer: (क) तेमुजिन
In simple words: चंगेज खान, जो बाद में मंगोल साम्राज्य के महान संस्थापक बने, का जन्म का नाम तेमुजिन था।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान के प्रारंभिक जीवन और उसके जन्म के नाम को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उसके बाद के उपाधि "चंगेज खान" से अलग पहचान प्रदान करता है।
Question 4. मंगोलिया गणराज्य कब बना?
(क) सन् 1921 में
(ख) सन् 1922 में
(ग) सन् 1923 में
(घ) सन् 1924 में
Answer: (क) सन् 1921 में
In simple words: मंगोलिया ने 1921 में अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और एक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ।
🎯 Exam Tip: मंगोलिया के आधुनिक इतिहास में उसके गणराज्य बनने के वर्ष को याद रखें।
Question 5. चंगेज खान का वंशज था
(क) तैमूर
(ख) अकबर
(ग) जहाँगीर
(घ) औरंगजेब
Answer: (क) तैमूर
In simple words: तैमूर, जिसे तैमूर लंग के नाम से भी जाना जाता है, चंगेज खान का एक वंशज था और उसने 14वीं शताब्दी में एक बड़ा साम्राज्य स्थापित किया।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान के प्रमुख वंशजों को जानें, खासकर उन लोगों को जिन्होंने बड़े साम्राज्य स्थापित किए, जैसे तैमूर।
Question 6. चंगेज खान की मृत्यु कब हुई?
(क) 1224 में
(ख) 1226 में
(ग) 1227 में
(घ) 1238 में
Answer: (ग) 1227 में
In simple words: मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज खान की मृत्यु 1227 ईस्वी में हुई, जिसके बाद उसके विशाल साम्राज्य को उसके वंशजों ने संभाला।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान की मृत्यु के वर्ष को याद रखें, क्योंकि यह मंगोल साम्राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. चंगेज खान कौन था और उसका साम्राज्य किन-किन महाद्वीपों में था?
Answer: चंगेज खान मंगोल साम्राज्य का संस्थापक था। उसका साम्राज्य यूरोप और एशिया महाद्वीप तक विस्तृत था।
In simple words: चंगेज खान मंगोल साम्राज्य का संस्थापक था, जिसका विशाल साम्राज्य यूरोप और एशिया दोनों महाद्वीपों तक फैला हुआ था।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान की पहचान और उसके साम्राज्य के भौगोलिक विस्तार को सटीक रूप से बताएं।
Question 2. मार्को पोलो कौन था?
Answer: मार्को पोलो इटली का यात्री था। इसने अपने यात्रा वृत्तान्तों में मंगोलों के विषय में बहुत कुछ लिखा है।
In simple words: मार्को पोलो एक प्रसिद्ध इटालियन यात्री था जिसने अपनी यात्राओं में मंगोलों और उनके साम्राज्य के बारे में विस्तृत विवरण लिखे।
🎯 Exam Tip: मार्को पोलो की राष्ट्रीयता और मंगोलों के बारे में उसके योगदान को याद रखें।
Question 3. बाटू के विषय में आप क्या जानते हैं?
Answer: बाटू चंगेज खान का पौत्र था जिसने 1236 से 1241 तक शासन किया। उसने अपने अभियान " में रूस की भूमि को मास्को तक जीत लिया था।
In simple words: बाटू चंगेज खान का पोता था, जिसने 1236 से 1241 तक शासन किया और रूस के बड़े हिस्से, जिसमें मास्को भी शामिल था, पर विजय प्राप्त की।
🎯 Exam Tip: बाटू के चंगेज खान से संबंध और उसके प्रमुख सैन्य अभियानों, खासकर रूस में, को रेखांकित करें।
Question 4. सुल्तान महमूद कौन था? चंगेज खान उससे क्यों नाराज था?
Answer: सुल्तान महमूद ख्वारिज्म का शासक था। उसने मंगोल दूत की हत्या कर दी थी। इसलिए चंगेज खान उससे नाराज था और उसकी हत्या करने के लिए उसका पीछा करता रहा।
In simple words: सुल्तान महमूद ख्वारिज्म का शासक था, और चंगेज खान उससे इसलिए नाराज था क्योंकि महमूद ने एक मंगोल दूत की हत्या कर दी थी, जिसके कारण चंगेज खान ने उसका पीछा किया।
🎯 Exam Tip: सुल्तान महमूद की पहचान और चंगेज खान के साथ उसके संघर्ष के मूल कारण को स्पष्ट करें।
Question 5. बाबर का मंगोलों से क्या सम्बन्ध था?
Answer: जहीरुद्दीन बाबर तैमूर और चंगेज खान का वंशज था। उसने तैमूर के राज्य फरगान ओर समरकन्द में सफलता प्राप्त की। वहाँ से उसे निर्वासित किया गया। उसने 1526 ई० में काबुल, दिल्ली और आगरा पर अधिकार कर लिया और भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की थी।
In simple words: बाबर तैमूर और चंगेज खान दोनों का वंशज था, जिसने भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की थी।
🎯 Exam Tip: बाबर के वंशावली संबंधों को चंगेज खान और तैमूर दोनों से जोड़ें और भारत में उसके महत्वपूर्ण योगदान, यानी मुगल साम्राज्य की स्थापना, को याद रखें।
Question 6. उलुस किसे कहते हैं?
Answer: चंगेज खान ने नवविजित प्रदेशों के शासन का कार्य चार पुत्रों में बाँट दिया प्रत्येक को उलुस कहा जाता था।
In simple words: उलुस वे क्षेत्र थे जिन्हें चंगेज खान ने अपने जीते हुए प्रदेशों को अपने चार पुत्रों के बीच बांटा था, और प्रत्येक क्षेत्र को एक उलुस कहा जाता था।
🎯 Exam Tip: उलुस की परिभाषा और उसके चंगेज खान के साम्राज्य के प्रशासनिक विभाजन में भूमिका को स्पष्ट करें।
Question 7. तैमूर ने भारत पर आक्रमण कब किया था?
Answer: तैमूर ने सन् 1398 में भारत पर आक्रमण किया था।
In simple words: तैमूर ने भारत पर 1398 ईस्वी में आक्रमण किया, जिससे भारतीय इतिहास पर गहरा प्रभाव पड़ा।
🎯 Exam Tip: तैमूर के भारत पर आक्रमण के वर्ष को सटीक रूप से याद रखें।
Question 8. तैमूर के आक्रमण का घातक प्रभाव किस पर पड़ा?
Answer: तैमूर के भारतीय आक्रमण को सबसे घातक प्रभाव तुगलक वंश पर पड़ा। उसकी शक्ति और प्रतिष्ठा धूल में मिल गई।
In simple words: तैमूर के आक्रमण का सबसे बुरा प्रभाव तुगलक वंश पर पड़ा, जिससे उसकी शक्ति और प्रतिष्ठा पूरी तरह से समाप्त हो गई।
🎯 Exam Tip: तैमूर के आक्रमण से प्रभावित प्रमुख भारतीय राजवंश और उसके परिणामों को स्पष्ट करें।
Question 9. मंगोल कौन थे?
Answer: मंगोल का शाब्दिक अर्थ ‘दिलेर' या 'बहादुर' होता है। मंगोल मध्य एशिया की एक असभ्य और बर्बर जाति थी।
In simple words: मंगोल मध्य एशिया की एक असभ्य और बर्बर जनजाति थी, जिसका शाब्दिक अर्थ 'दिलेर' या 'बहादुर' होता है।
🎯 Exam Tip: मंगोलों की मूल पहचान और उनके नाम के शाब्दिक अर्थ को याद रखें।
Question 10. तैमूर के भारत पर आक्रमण के क्या उद्देश्य थे?
Answer: तैमूर के भारत पर आक्रमण के उद्देश्य निम्नलिखित थे
1. ख्याति अर्जित करना।
2. धन लूटना।
3. इस्लाम धर्म का प्रचार करना।
In simple words: तैमूर के भारत पर आक्रमण के मुख्य उद्देश्य अपनी ख्याति बढ़ाना, भारत की धन-संपदा लूटना और इस्लाम धर्म का प्रचार करना था।
🎯 Exam Tip: तैमूर के आक्रमण के पीछे के प्रमुख प्रेरणास्रोतों को सूचीबद्ध करें, खासकर उसकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और धार्मिक उद्देश्यों पर ध्यान दें।
Question 11. क्वारिलताई संस्था क्या थी?
Answer: चंगेज खान के परिवार के सदस्यों में राज्य के उत्तरदायित्व का निर्धारण क्वारिलताई नामक परिषद् करती थी। यह मुखियाओं की परिषद् होती थी। उत्तरदायित्व के अन्तर्गत राज्य के भविष्य के निर्णय, अभियान, लूट के माल का बँटवारा, चरागाह भूमि का प्रबन्ध आदि आता था।
In simple words: क्वारिलताई मंगोल साम्राज्य की एक परिषद् थी, जिसमें चंगेज खान के परिवार के सदस्य और मुखिया शामिल थे, और यह राज्य के महत्वपूर्ण निर्णयों, जैसे भविष्य की योजनाओं, सैन्य अभियानों, लूटे गए माल के बँटवारे और चरागाह भूमि के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार थी।
🎯 Exam Tip: क्वारिलताई की संरचना और उसके मुख्य कार्यों को याद रखें, जो मंगोल साम्राज्य के शासन के लिए महत्वपूर्ण थे।
Question 12. चंगेज खान किस देश का राष्ट्रनायक है?
Answer: चंगेज खान मंगोलिया का राष्ट्रनायक है।
In simple words: चंगेज खान को मंगोलिया का राष्ट्रनायक माना जाता है, जहाँ उसे आधुनिक राष्ट्र के संस्थापक के रूप में सम्मान प्राप्त है।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान के आधुनिक मंगोलिया में राष्ट्रीय महत्व को स्पष्ट करें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. 'बर्बर' से क्या आशय है?
Answer: बर्बर (अंग्रेजी में बारबेरियन) शब्द यूनानी भाषा के बारबरोस (Barbaros) शब्द से उत्पन्न हुआ है, जिसका आशय गैर-यूनानी लोगों से है जिनकी भाषा यूनानियों को बेतरतीब कोलाहल 'बर-बर' के समान लगती थी। यूनानी ग्रन्थों में बर्बरों को बच्चों के समान दिखाया गया है जो सुचारू रूप से बोलने या सोचने में असमर्थ, डरपोक, विलासप्रिय, निष्ठुर, आलसी, लालची और स्वशासन चलाने में असमर्थ थे।
In simple words: 'बर्बर' शब्द यूनानी भाषा के 'बारबरोस' से आया है और इसका उपयोग उन गैर-यूनानी लोगों के लिए किया जाता था जिनकी भाषा यूनानियों को अव्यवस्थित लगती थी। यूनानी ग्रंथों में, बर्बरों को ऐसे लोगों के रूप में चित्रित किया गया था जो बोलने, सोचने, शासन करने में अक्षम, डरपोक, विलासप्रिय और लालची थे।
🎯 Exam Tip: 'बर्बर' शब्द की उत्पत्ति, उसके शाब्दिक अर्थ और यूनानियों द्वारा इस शब्द के माध्यम से व्यक्त किए गए नकारात्मक रूढ़िवादी विचारों को स्पष्ट करें।
Question 2. मंगोलों की सामाजिक दशा के बारे में आप क्या जानते हैं?
Answer: मंगोलों की सामाजिक दशा
1. नृजातीय सम्बन्धों और एक भाषा ने मंगोल लोगों को आपस में जोड़े रखा था। समाज अनेक पितृवंशीय पक्षों में विभाजित था ।
2. धनी लोगों के परिवार विशाल होते थे। उनके पास अधिक भू-क्षेत्र था, वे स्थानीय राजनीति में भी पर्याप्त दखल रखते थे।
3. खाद्य-सामग्री की समाप्ति, अकाल या सूखे की स्थिति में मंगोलों को भोजन की तलाश में यहाँ-वहाँ भटकना पड़ता था।
4. लूटपाट करने या आक्रमण करने के लिए मंगोल लोग आपस में परिसंघ भी बना लेते थे।
In simple words: मंगोल समाज जातीय संबंधों और साझा भाषा से एकजुट था, लेकिन कई पितृवंशीय समूहों में बंटा हुआ था। धनी परिवारों के पास अधिक भूमि और राजनीतिक प्रभाव था, जबकि खाद्य संकट के समय लोग भोजन की तलाश में भटकते थे और लूटपाट या आक्रमण के लिए परिसंघ बनाते थे।
🎯 Exam Tip: मंगोलों की सामाजिक संरचना, आर्थिक मजबूरियों और जनजातीय संघों के महत्व पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 3. चंगेज खान के सैन्य संगठन का वर्णन कीजिए।
Answer: चंगेज खान का सैन्य संगठन
1. प्रारम्भ में चंगेज खान की सेना स्टैपी मैदानों की पुरानी दशमलव पद्धति के अनुसार गठित की गई थी 10,100,10000,10000 सैनिकों में विभाजित थी ।
2. चंगेज खान ने बाद में इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया। उसने नवीन सैन्य इकाइयों की स्थापना की।
3. उसकी सेना अनुशासित थी। आज्ञा का उल्लंघन करने पर दण्ड दिया जाता था।
4. चंगेज खान अपने सैनिकों से पुत्रवत् प्रेम करता था।
In simple words: चंगेज खान ने अपनी सेना को दशमलव प्रणाली के आधार पर संगठित किया था, बाद में उसने नवीन सैन्य इकाइयों की स्थापना की। उसकी सेना अत्यधिक अनुशासित थी और वह अपने सैनिकों के प्रति पुत्रवत् व्यवहार करता था।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान की सैन्य प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं को याद रखें, जैसे दशमलव संगठन, अनुशासन और नेतृत्व की शैली।
Question 4. 'यास क्या है? इसकी उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
Answer: 'यास' को चंगेज खान की विधिसंहिता कहा जाता है। इस बात की पूरी सम्भावना है कि 'यास मंगोल जाति की ही प्रथागत परम्पराओं का एक संकलन था। ‘यास मंगोलों को समान आस्था रखने के आधार पर संयुक्त करने में सफल हुआ। यास ने मंगोलों को आत्मविश्वास प्रदान किया। निश्चित रूप से यास एक शक्तिशाली सिद्धान्त था जिसने मंगोल साम्राज्य की संरचना में अहम् भूमिका निभाई थी ।
In simple words: 'यास' चंगेज खान द्वारा बनाई गई एक कानूनी संहिता थी, जो संभवतः मंगोलों की पारंपरिक प्रथाओं का संकलन थी। इसने मंगोलों को एक साझा आस्था के आधार पर एकजुट करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और मंगोल साम्राज्य की संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद की।
🎯 Exam Tip: यास की परिभाषा, उसकी उत्पत्ति, और मंगोल समाज और साम्राज्य को एकजुट करने में उसकी भूमिका पर ध्यान दें।
Question 5. मंगोलों की पराजय के दो प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए ।
Answer: मंगोलों की पराजय के कई कारण थे, जिनमें से दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
1. मंगोल सेना की निर्बलताएँ- यद्यपि मंगोल सेना संख्या में अधिक होती थी, परन्तु मंगोल सैनिक संगठित एवं नियोजित रूप में युद्ध करने की कला से अनभिज्ञ थे। उनमें धैर्य एवं सहनशीलता का भी पर्याप्त अंभाव था। यही कारण है कि कई बार दिल्ली के समीप आकर भी बिना युद्ध किए ही वापस लौट गए।
2. मंगोल सेनापतियों में योग्यता का अभाव-अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में भारत पर मंगोलों के जो भी आक्रमण हुए, उन सबका संचालन करने वाले सेनापतियों में युद्ध संचालन करने की योग्यता का पूर्ण अभाव था। वे अपने कुशल नेतृत्व और कूटनीति द्वारा मंगोल सेनाओं को युद्ध में सफलता प्राप्त कराने की दृष्टि से पूर्णतः अयोग्य सिद्ध हुए।
In simple words: मंगोलों की पराजय के मुख्य कारण उनकी सैन्य निर्बलताएँ थीं, जैसे युद्ध कला में संगठन और नियोजन की कमी, साथ ही धैर्य का अभाव। दूसरा कारण मंगोल सेनापतियों में कुशल नेतृत्व और रणनीतिक योग्यता की कमी थी, जिसके कारण वे भारत में अलाउद्दीन खिलजी जैसे शासकों के खिलाफ सफल नहीं हो सके।
🎯 Exam Tip: मंगोलों की सैन्य कमजोरियों और उनके नेतृत्व की अक्षमता को उनके पराजय के मुख्य कारणों के रूप में याद रखें।
Question 6. तैमूर के भारतीय आक्रमण के प्रभावों को रेखांकित कीजिए।
Answer: तैमूर के भारतीय आक्रमण के प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित थे
1. तुगलक वंश पर घातक प्रहार-तैमूर के आक्रमण का सबसे प्रमुख परिणाम यह हुआ कि इससे तुगलक वंश पर घातक प्रहार हुआ और उसका पतन हो गया।
2. अकाल तथा रोगों का प्रकोप-तैमूर ने लाखों व्यक्तियों को मौत के घाट उतार दिया। उनकी लाशों के सड़ने से महामारी फैल गई और हजारों व्यक्ति मारे गए। तैमूर की. लूटमार से अनेक . गाँव तथा नगर उजड़ गए और वहाँ अकाल की स्थिति पैदा हो गई।
In simple words: तैमूर के भारतीय आक्रमण से तुगलक वंश पर घातक प्रहार हुआ, जिससे उसका पतन हो गया। इसके अतिरिक्त, इस आक्रमण के कारण लाखों लोगों की मृत्यु हुई, जिससे महामारी और अकाल फैल गया, और कई गाँव तथा नगर उजड़ गए।
🎯 Exam Tip: तैमूर के आक्रमण के राजनीतिक (वंश का पतन) और सामाजिक-आर्थिक (महामारी, अकाल, विनाश) प्रभावों को स्पष्ट करें।
Question 7. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए
(अ) चंगेज खान
(ब) तैमूर
Answer: (अ) चंगेज खान : चंगेज खान मंगोल सरदार हलाकू खान का भतीजा था। वह बड़ा ही क्रूर तथा अत्याचारी था। चंगेज खान ने अपनी वीरता व शौर्य से सम्पूर्ण मध्य एशिया को रौंद डाला। उसे 'पृथ्वी का प्रकोप' कहा जाता था। 1221 ई० में उसने भारत पर भी आक्रमण किया था, लेकिन भीषण गर्मी व इल्तुतमिश की दूरदर्शिता के कारण वह वापस लौट गया था।
(ब) तैमूर : तैमूर बरलास तुर्क शाखा का एक प्रभावशाली नेता था। उसे बचपन से कुरान पढ़ने, तलवार चलाने और घोड़े पर चढ़ने का शौक था। तैमूर लंग शक्ति और तलवार का धनी था। उसने भारत पर 1398 ई० में आक्रमण करते हुए कहा था, “भारत पर आक्रमण करने का हमारा उद्देश्य काफिरों के विरुद्ध लड़ाई करना, पैगम्बर के आदेशानुसार उन्हें इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए बाध्य करना, उस देश को बहुदेववाद और अन्धविश्वास से छुटकारा दिलाना तथा मंदिरों की मूर्तियों को तोड़-फोड़ करना है।” वस्तुतः तैमूर लंग का मूल उद्देश्य भारत की अपार सम्पत्ति एवं धन लूटना भी था। इसलिए तैमूर ने अपने आक्रमणों के अंतर्गत पंजाब एवं दिल्ली के आस-पास के क्षेत्रों को भी जी-भरकर लूटा था। उसने दिल्ली में तीन दिन तक सामूहिक कत्लेआम करवाया था और इस कत्लेआम में एक लाख सैनिकों को भी मरवा दिया था। तैमूर के आक्रमण के परिणामस्वरूप हिन्दू और मुस्लिमों में विनाशकारी द्वेष की भावना जाग्रत हो गई। हिन्दुओं के मंदिरों को बहुत अधिक क्षति पहुँचाई गई और बहुत-से हिंदुओं को मुसलमान बना दिया गया, जिससे हिन्दू जनता की धार्मिक भावना को बहुत अधिक ठेस पहुँची । तैमूर ने भारत को बुरी तरह लूटा और यहाँ के मन्दिरों को लूटकर देश को निर्धन बना दिया।
In simple words: चंगेज खान एक क्रूर और शक्तिशाली मंगोल सरदार था जिसने मध्य एशिया पर विजय प्राप्त की और उसे 'पृथ्वी का प्रकोप' कहा जाता था। तैमूर, एक प्रभावशाली तुर्क नेता था, जिसने 1398 ईस्वी में भारत पर आक्रमण किया, जिसका उद्देश्य धन लूटना और इस्लाम का प्रचार करना था, जिससे भारी विनाश और सांप्रदायिक विद्वेष फैल गया।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान और तैमूर दोनों के व्यक्तित्व, सैन्य अभियानों और उनके संबंधित साम्राज्यों पर उनके प्रभाव को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. चंगेज खान का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उसके साम्राज्य विस्तार की विवेचना कीजिए ।
Answer: चंगेज खान का जन्म 1162 ई० के लगभग आधुनिक मंगोलिया के उत्तरी भाग में ओनोन नदी के निकट हुआ था । उसका प्रारम्भिक नाम तेमुजिन था। उसके पिता कियात कबीले के मुखिया थे। उसके पिता की हत्या कर दी गई थी। तेमुजिन की माता ने उसका तथा उसके अन्य भाइयों का पालन-पोषण बड़ी कठिनाई से किया था। युवा होने पर तेमुजिन ने कैराइटे लोगों के शासक व अपने पिता के सगे भाई जो वृद्ध थे, तुगरिल ऊर्फ ओंग खान के साथ पुराने रिश्तों को स्थापित किया। 1180 और 1190 के दशकों में तेमुजिन और ओंग खाने में मित्रवत् सम्बन्ध रहे। उसने अपने पिता के हत्यारे शक्तिशाली तातार कैराइट और ओंग खान के विरुद्ध 1203 में युद्ध छेड़ा। 1206 तक तमाम शक्तिशाली लोगों को परास्त करने के बाद तेमुजिन स्टेपी प्रदेश की राजनीति में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में उभरा। उसकी इस प्रतिष्ठा को मंगोल कबीले के सरदार (कुरिलताई) की एक सभा में मान्यता प्राप्त हुई और उसे चंगेज खान' की उपाधि के साथ मंगोलों का महानायक घोषित किया गया। 1206 ई० में कुरिलताई में मान्यता मिलने से पूर्व चंगेज खान ने मंगोल लोगों को एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में संगठित कर लिया था। चंगेज खान की पहली इच्छा चीन पर विजय प्राप्त करने की थी। चीन उस समय तीन भागों में विभक्त था। ये थे-उत्तरी-पश्चिमी प्रान्तों के तिब्बती मूल के सी सिआ लोग, जरचेन लोगों का चिन राजवंश और दक्षिण चीन जिसे पर शुंग राजवंश का शासन था।1209 में सी-सिआ परास्त हो गए। 1213 में चीन की महान् दीवार का अतिक्रमण हो गया। 1215 में पेकिंग नगर को लूटा गया। चिन वंश के विरुद्ध 1234 तक लम्बी लड़ाइयाँ चलीं पर चंगेज खान अपने अभियानों की प्रगति से पूरी तरह सन्तुष्ट था। 1218 तक मंगोलों का साम्राज्य अमू दरिया, तुरान और ख्वारज्म राज्यों तक विस्तृत हो गया था। 1219 और 1221 ई० तक के अभियानों में बड़े नगरों ओट्रार, बुखारा, समरकन्द, बल्ख, गुरगंज, मर्व, निशापुर और हेरात ने मंगोल सेनाओं के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अपने जीवन का अधिकांश भाग युद्धों में व्यतीत कर देने के बाद 1227 में चंगेज खान की मृत्यु हो गई।
In simple words: तेमुजिन, जिसका जन्म 1162 ईस्वी में हुआ था, ने अपनी युवावस्था में संघर्षों का सामना किया, लेकिन अंततः विभिन्न कबीलों को परास्त कर 1206 में 'चंगेज खान' की उपाधि प्राप्त की। उसने चीन के विभिन्न राज्यों को जीतकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया और 1218 तक अमू दरिया, तुरान और ख्वारज्म क्षेत्रों को भी इसमें शामिल कर लिया। 1227 में अपनी मृत्यु तक, उसने एक विशाल मंगोल साम्राज्य की स्थापना की थी।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान के प्रारंभिक जीवन की चुनौतियों, उसके सैन्य एकीकरण और उसके साम्राज्य के विस्तार के महत्वपूर्ण चरणों पर ध्यान दें।
Question 2. चंगेज खान और मंगोलों का विश्व इतिहास में क्या स्थान है? संक्षेप में लिखिए।
Answer: तेरहवीं शताब्दी ई० के चीन, ईरान और पूर्वी यूरोप के शहरों के बहुत-से निवासी चंगेज खान द्वारा किए गए स्टैपी के नर-संहारों को भय और घृणा की दृष्टि से देखते थे। फिर भी मंगोलों के लिए चंगेज खान अब तक का सर्वाधिक महान् शासक था। उसने मंगोलों को एकजुट किया। लम्बे समय से चले आ रहे जनजातीय संघर्षों और चीनियों के शोषण से मुक्ति दिलवाई साथ ही उन्हें समृद्ध बनाया। एक शानदार पार महाद्वीपीय साम्राज्य गठित किया और व्यापार के रास्तों और बाजारों को खोल दिया। मंगोलों और किसी भी घुमक्कड़ शासन प्रणाली से सम्बन्धित जिस तरह के प्रलेख प्राप्त हुए हैं- उनसे यह समझना वास्तव में कठिन है कि वह कौन-सा ऐसा प्रेरणा स्रोत था जिसने व्यक्तियों के विभाजित हुए समूहों को संगठित कर साम्राज्य निर्माण की महत्त्वाकांक्षा को जाग्रत किया। मंगोल साम्राज्य के संस्थापक की प्रेरणा एक प्रभावशाली शक्ति बनी रही । चौदहवीं शताब्दी ई० के अन्त में एक अन्य राजा तैमूर, जो एक विश्वव्यापी राज्य की आकांक्षा रखता था, ने स्वयं को राजा घोषित करने में संकोच का अनुभव किया, क्योंकि वह चंगेज खान का वंशज नहीं था। जब उसने अपने स्वतन्त्र प्रभुत्व की घोषणा की तो स्वयं को चंगेज खान का दामाद बताया। वर्तमान में दो दशकों के रूसी नियन्त्रण के पश्चात् मंगोलिया एक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। उसने चंगेज खान को एक राष्ट्र-नायक के रूप में लिया है जिसका जनता सम्मान करती है और जिसकी उपलब्धियों का वर्णन अभिमान के साथ किया जाता है। मंगोलिया के इतिहास में इस निर्णायक समय पर चंगेज खान एक बार फिर मंगोलों के लिए एक आराध्य प्रतिमा के रूप में उभरकर सामने आया है, जो महान् अतीत की स्मृतियों को जाग्रत कर राष्ट्र की पहचान बनाने की दिशा में शक्ति प्रदान करेगा।
In simple words: चंगेज खान को कुछ लोग विनाशक मानते थे, लेकिन मंगोलों के लिए वह महानतम शासक था जिसने उन्हें एकजुट किया, उत्पीड़न से मुक्ति दिलाई और एक विशाल साम्राज्य बनाया। उसने व्यापार मार्गों को खोला और एक नई पहचान दी। तैमूर जैसे परवर्ती शासकों ने भी चंगेज खान के नाम का उपयोग अपनी वैधता के लिए किया। आधुनिक मंगोलिया में भी चंगेज खान को राष्ट्र-नायक के रूप में सम्मानित किया जाता है, जो राष्ट्र की पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: चंगेज खान के विभिन्न दृष्टिकोणों (विनाशक बनाम राष्ट्र-निर्माता) और उसके साम्राज्य के विश्व इतिहास पर दूरगामी प्रभावों, जैसे एकीकरण और व्यापार, को स्पष्ट करें।
Question 3. तैमूर के आक्रमण का वर्णन करते हुए उसके प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।
Answer: तैमूर का परिचय तैमूर का जन्म 1336 ई० में ट्रांस ऑक्सियाना प्रदेश के केश नामक स्थान पर हुआ था। उसके पिता का नाम अमीर तुर्गे था जो वरलास शाखा को प्रमुख था। 1369 ई० में तैमूर ने समरकन्द के सिंहासन पर अधिकार कर लिया। सिंहासन पर अधिकार करने के उपरान्त उसने ईरान, अफगानिस्तान, इराक, ख्वारिज्म आदि देशों को जीत लिया। इसके बाद उसने भारत पर आक्रमण करने की योजना बनाई ।
तैमूर के भारत पर आक्रमण के उद्देश्य
तैमूर के भारत पर आक्रमण करने के निम्नलिखित उद्देश्य थे
1. ख्याति अर्जित करना : तैमूर अत्यधिक महत्त्वाकांक्षी था। वह भारत पर विजय प्राप्त करके ख्याति प्राप्त करना चाहता था।
2. धन लूटना-तैमूर भारत की धन : सम्पदा की ओर भी आकर्षित हुआ था; अतः धन लूटने की | लालसा से प्रेरित होकर भी उसने भारत पर आक्रमण किया।
3. इस्लाम धर्म का प्रसार : तैमूर ने स्वयं ही यह घोषित किया था कि भारत पर आक्रमण करने का उसका उद्देश्य इस्लाम धर्म को प्रचार करना है।
तैमूर का भारत पर आक्रमण
सन् 1398 ई० में तैमूर ने 92,000 सैनिकों सहित भारत पर आक्रमण किया उस समय दिल्ली का सुल्तान मुहम्मद तुगलक था। उसने तैमूर का सामना किया, परन्तु वह तैमूर से परास्त होकर गुजरात की ओर भाग गया। तैमूर ने इस युद्ध से पूर्व एक लाख युद्धबन्दियों को कत्ल करवा दिया। तैमूर 15 दिन तक दिल्ली में रहा, वहाँ उसने खूब लूटमार मचायी। वह फिरोजाबाद, मेरठ, हरिद्वार होता हुआ काँगड़ा तथा जम्मू को लूटता हुआ समरकन्द लौट गया। इस मध्य उसने हजारों व्यक्तियों को दास बना लिया। वह अनेक कलाकारों को भी पकड़कर अपने साथ समरकन्द ले गया। उसने खिज्र खाँ को मुल्तान, लाहौर तथा दिमालपुर का शासक नियुक्त किया।
तैमूर के आक्रमण का प्रभाव
तैमूर के आक्रमण के प्रभाव निम्नलिखित थे
1. तुगलक वंश का पतन-तैमूर के भारतीय आक्रमण का सबसे घातक प्रभाव तुगलक वंश पर | पड़ा। उसकी शक्ति और प्रतिष्ठा धूल में मिल गई और 1414 ई० में मुहम्मद तुगलक की मृत्यु के पश्चात् तुगलक वंश का अन्त हो गया।
2. दिल्ली सल्तनत का विघटन तैमूर का आक्रमण दिल्ली सल्तनत के लिए पक्षाघात का रोग सिद्ध हुआ। दिल्ली सल्तनत को ऐसा धक्का लगा कि इसके बाद उसकी स्थिति में सुधार न हो पाया। जौनपुर, मालवा, गुजरात और अन्य प्रान्त स्वतन्त्र हो गए। सम्पूर्ण भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त हो गया केन्द्रीय शक्ति पूर्णतः नष्ट हो गई तथा सर्वत्र अव्यवस्था फैल गई।
3. अकाल तथा रोगों का प्रकोप-तैमूर ने कई नगरों तथा गाँवों को लूटा तथा उन्हें उजाड़ दिया। उसने हजारों लोगों को मार डाला जिससे चारों ओर अकाल तथा रोगों का प्रकोप छा गया।
4. कला पर प्रभाव-तैमूर के आक्रमण से भारतीय कला और साहित्य की प्रगति अवरुद्ध हो गई । तैमूर अनेक बहुमूल्य कलाकृतियों और शिल्पियों को अपने साथ समरकन्द ले गया, किन्तु इससे भारतीय कला और शैली का विस्तार मध्य एशिया तक अवश्य हुआ ।
5. आर्थिक प्रभाव-तैमूर के आक्रमण से उत्तरी भारत की आर्थिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई, तैमूर अपने साथ भारत का बहुत-सा धन ले गया। तैमूर के आक्रमण से कृषि की व्यवस्था भी बिगड़ गई थी। इस प्रकार, तैमूर का आक्रमण दिल्ली सल्तनत के लिए पक्षाघात का रोग सिद्ध हुआ। डॉ० आशीर्वादीलाल श्रीवास्तव ने तैमूर के आक्रमण के विषय में ठीक ही लिखा है, “भारत को 'जितनी क्षति और दुःख तैमूर ने पहुँचाया, उतना उससे पहले किसी आक्रमणकारी ने एक आक्रमण में नहीं पहुँचाया।”
In simple words: तैमूर, जो 1336 में ट्रांस ऑक्सियाना में जन्मा था, 1369 में समरकंद पर अधिकार कर लिया और बाद में भारत पर आक्रमण की योजना बनाई। 1398 में भारत पर उसके आक्रमण के मुख्य उद्देश्य ख्याति, धन लूटना और इस्लाम का प्रसार करना था, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली में भारी विनाश, नरसंहार और लूटपाट हुई। इसके प्रभावों में तुगलक वंश का पतन, दिल्ली सल्तनत का विघटन, अकाल, महामारी, कला और आर्थिक व्यवस्था का विनाश शामिल था, जिससे भारत बुरी तरह प्रभावित हुआ।
🎯 Exam Tip: तैमूर के जीवन परिचय, उसके भारत पर आक्रमण के उद्देश्यों, आक्रमण की विस्तृत घटनाओं और इसके बहुआयामी प्रभावों (राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक) का विस्तृत मूल्यांकन करें।
Question 4. सल्तनत काल में भारत पर मंगोल आक्रमणों तथा उनके परिणामों का वर्णन कीजिए। अथवा अलाउद्दीन खिलजी की मंगोल नीति का परीक्षण कीजिए। अथवा बलबन तथा अलाउद्दीन खिलजी की मंगल नीतियों की तुलना कीजिए।
Answer: मंगोलों का परिचय मंगोल का शाब्दिक अर्थ 'दिलेर या 'बहादुर' होता है। मंगोल मध्य एशिया की एक असभ्य और बर्बर जाति थी। इस जाति के लोग अत्यन्त वीर, लड़ाकू, साहसी, अत्याचारी और निर्दयी होते थे। उन्हें व्यक्तियों के सिरों की मीनार बनाने, नगरों को जलाकर राख करने में बड़ा आनन्द आता था। उनकी आकृति भयानक, रंग पीला, चेहरा चपटा और चौड़ा, बाल काले, आँखे तिरछी, गाल की हड्डियाँ उभरी हुई, कान बड़े और खोपड़ी गोल होती थी। इनका प्रमुख नेता चंगेज खान था जिसके नेतृत्व में मंगोलों ने कुछ ही वर्षों में बल्ख, बुखारा, समरकन्द चीन तथा मध्य एशिया के अनेक राज्यों को लूटकर और जलाकर पूरी तरह नष्ट-भ्रष्ट कर दिया था।
दिल्ली सुल्तानों की मंगोल नीति
भारत एक दुर्ग के समान है। इसमें प्रवेश करने का एकमात्र स्थल मार्ग उत्तर-पश्चिम से ही है। इसी मार्ग से भारत पर सिकन्दर, महमूद गजनवी तथा मुहम्मद गोरी आदि ने आक्रमण किए थे। सल्तनत काल का आरम्भ होने के समय से ही इस सीमा से प्रविष्ट होने वाले मंगोलों के आक्रमण होने लगे थे। ख्वारिज्म के शाह ने पंजाब को अपने साम्राज्य का अंग बना लिया था। मंगोलों ने अफगानिस्तान, गजनी तथा पेशावर तक अपनी विजय-पताका फहराकर भारत पर सुनियोजित ढंग से आक्रमण करना आरम्भ कर दिया था। अतएव दिल्ली सल्तनत काल के आरम्भ में ही, मंगोलों के आक्रमण से सीमा को सुरक्षित रखने की समस्या सुल्तानों के समक्ष उत्पन्न हुई। इस समस्या को हल करने के लिए विभिन्न राजवंशों के सुल्तानों ने अपनी विभिन्न नीतियों का प्रयोग किया।
(क)
दास वंश
दास वंश के शासकों के समय हुए मंगोल आक्रमणों और इन आक्रमणों को रोकने हेतु दास वंश के शासकों द्वारा किए गए प्रयासों का संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है
1. इल्तुतमिश का शासनकाल : दास वंश का प्रथम शासक कुतुबद्दीन ऐबक था। अल्प आयु में ही मृत्यु हो जाने के कारण वह शासन के कार्यों को भली-भाँति न देख सका। उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश के शासनकाल (1221 ई०) में मंगोल नेता चंगेज खाने, ख्वारिज्म के शाह जलालुद्दीन मगबर्नी का पीछा करता हुआ भारत की ओर आया था। शाह जलालुद्दीन ने सिन्ध को पार करके दोआब प्रदेश को अपना शरण-स्थल बनाना चाहा था, किन्तु दूरदर्शी इल्तुतमिश ने शाह जलालुद्दीन को सहायता नहीं दी। अतः इल्तुतमिश ने कूटनीति से कार्य करते हुए चंगेज खान से शत्रुता मोल नहीं ली थी। अतः चंगेज खान ने सिन्धु नदी को पार नहीं किया और वह वापस लौट गया। इस प्रकार, मंगोलों की भयंकर आँधी टल गई।
2. रजिया के उत्तराधिकारियों का शासनकाल : चंगेज खान के चले जाने के बाद मंगोलों ने अफगानिस्तान को केन्द्र बनाकर भारत पर आक्रमण किया। मंगोलों ने सिन्धु नदी के पार स्थित प्रदेशों पर अनेक आक्रमण किए। इन प्रदेशों ने रजिया से समझौता करना चाहा, किन्तु दूरदर्शी सुल्ताना रजिया ने तटस्थ नीति का पालन किया और अपने साम्राज्य को मंगोलों के आक्रमणों से बचाए रखा।
3. रजिया के उत्तराधिकारियों का शासनकाल : रजिया का पतन 1240 ई० में अमीरों की दलबन्दी के कारण हुआ । उसके शासनकाल के उपरान्त 1241 ई० में मंगोल सरदार बहादुर ताहिर' ने लाहौर को लूटा। 1245 ई० में मुल्तान पर हसन कार्लंग' ने और सिन्ध पर कबीर खाँ के वंशजों ने अधिकार कर लिया। 1247 ई० में मंगोल नेता सली बहादुर ने मुल्तान को घेरकर लाहौर पर आक्रमण किया। लाहौर के अमीरों ने सली बहादुर के सामने आत्म-समर्पण कर दिया। इस प्रकार, मुल्तान व सिन्ध के प्रदेश दिल्ली सल्तनत से कुछ समय तक कट गए। 1250 ई० में इन पर पुनः दासवंशीय शासकों की विजय पताका फहराने लगी, फिर भी प्रान्तीय सूबेदारों के षडयन्त्र मंगोलों के साहस में निरन्तर वृद्धि करते रहे।
4. मंगोल सरदार हलाकू का अभियान : सुल्तान नासिरुद्दीन के शासनकाल में मंगोल नेता हलाकू ने दिल्ली से मित्रता बनाए रखी, किन्तु बलबन के सुल्तान होते ही मंगोलों ने भारत पर पुनः आक्रमण करने आरम्भ कर दिए। बलबन ने हलाकू आक्रमणों को रोकने के लिए सीमान्त प्रदेशों पर छावनियों की व्यवस्था का कार्य अपने पुत्रों को सौंप दिया । उन्होंने इन प्रदेशों में । मंगोलों की गतिविधियों को रोकने के लिए विशाल दुर्गों का निर्माण कराया।
5. तैमूर खाँ का आक्रमण : 1285 ई० में मंगोल सरदार तैमूर खाँ ने आक्रमण किया। इस | आक्रमण में बलबन का पुत्र मुहम्मद मारा गया था।
(ख)
खिलजी व अन्य वंश
खिलजी वंश तथा तुगलक वंश के शासकों के समय में होने वाले मंगोल आक्रमणों का उल्लेख अग्रवत् । है
1. खिलजी का शासनकाल-अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में मंगोलों ने बार-बार आक्रमण किए। 1299 ई० में साल्दी व कुतलुग ख्वाजा, 1303 ई० में तार्गी औरी 1305 ई० में अलीबेग, 1306 ई० में कूबक और 1307 ई० में इकबाल मन्दा के नेतृत्व में मंगोलों ने आक्रमण किए, किन्तु अलाउद्दीन की विशाल सेना के सामने इन मंगोल आक्रमणकारियों का सदैव नतमस्तक होना पड़ा।
2. निर्बल सुल्तानों का काल- अलाउद्दीन खिलजी के बाद दिल्ली सल्तनत का पतन आरम्भ हो गया । तुगलक शासकों के काल में भी मंगोलों के आक्रमण का ताँता बँधा रहा। इस काल में तरमाशीरीन के नेतृत्व में मंगोलों का आक्रमण महत्त्वपूर्ण रहा। कालान्तर में 1398 ई० में तैमूर लंग ने दिल्ली को तहस-नहस कर डाला और वहाँ भयंकर रक्तपात किया। कई महीनों तक दिल्ली उजाड़ श्मशान-सी दिखाई देती रही। अन्ततः मंगोलों के आक्रमण दिल्ली सल्तनत के विघटन का एक महत्त्वपूर्ण कारण सिद्ध हुए।
मंगोलों के आक्रमण का प्रभाव
मंगोलों के आक्रमण के निम्नलिखित प्रभाव हुए
1. मंगोलों के आक्रमणों को रोकने में व्यस्त रहने के कारण सुल्तान प्रशासकीय कार्यों के प्रति जागरूक न रह सके।
2. इन्हीं आक्रमणों के कारण प्रान्तीय सूबेदार स्वतन्त्र रूप से विद्रोह करते रहे, क्योंकि सुल्तान इन मंगोल आक्रमणों को दबाने में लगे रहते थे।
3. सुल्तानों को विवश होकर दमेन नीति का आश्रय लेना पड़ा था, जिसके कारण प्रजा सुल्तानों से अप्रसन्न रही।
कुछ सुल्तानों ने सीमा नीति की उपेक्षा भी की, जिससे मंगोलों के आक्रमण निरन्तर जारी रहे और विद्रोहों की भी अधिकता रही। इतना ही नहीं, एक सुल्तान की मृत्यु पर दूसरे सुल्तान का सिंहासनारोहण तलवार के द्वारा ही सम्भव था। इन कारणों से मंगोलों को भारतीय आक्रमणों के समय कभी-कभी अपार सफलता मिलती थी, जो उन्हें पूर्वी आक्रमण के लिए प्रेरणा देती थी।
In simple words: मंगोल मध्य एशिया की एक वीर और क्रूर जाति थी जिसने चंगेज खान के नेतृत्व में कई क्षेत्रों को तबाह किया। सल्तनत काल में, भारत पर मंगोल आक्रमण उत्तर-पश्चिमी सीमा से हुए, जिससे दिल्ली के सुल्तानों को अपनी नीतियों को अनुकूलित करना पड़ा। इल्तुतमिश ने कूटनीति से मंगोल खतरे को टाला, जबकि रजिया ने तटस्थता बरती। बलबन ने सीमांत क्षेत्रों में मजबूत रक्षा व्यवस्था बनाई। अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों को बार-बार हराया, लेकिन कमजोर सुल्तानों के समय तैमूर लंग ने दिल्ली को भारी नुकसान पहुँचाया। इन आक्रमणों से सुल्तानों का ध्यान प्रशासनिक कार्यों से हटा, प्रांतीय सूबेदारों ने विद्रोह किए, दमनकारी नीतियां अपनाई गईं और दिल्ली सल्तनत का विघटन हुआ।
🎯 Exam Tip: मंगोलों की पृष्ठभूमि, विभिन्न सल्तनत शासकों (इल्तुतमिश, रजिया, बलबन, अलाउद्दीन खिलजी) की मंगोल नीति और इन आक्रमणों के दीर्घकालिक राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण करें।
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