UP Board Solutions Class 11 Hindi Chapter Vibhakti prakaran

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Hindi Vibhakti विभक्ति प्रकरण

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विभक्ति-प्रकरण

नवीनतम पाठयक्रम में कुछ उपपद विभक्ति के नियम निर्धारित है। इसके अन्तर्गत 2 अके प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में रखाकित शब्दों में लगी विभक्ति तथा उससे सम्बन्धित सूत्र का उल्लेख करने को कहा जाता है। कभी सूत्र की व्याख्या कर उदाहरण देने को भी कहा जाता है। नीचे निर्धारित नियम दिये जा रहे हैं। इन्हीं नियमों के आधार पर अनुवाद के वाक्य भी पूछे जाएंगे। ध्यान दे - तारांकित (*) सूत्र नवीनतम पाठयक्रम में निर्धारित नहीं हैं। पारस्परिक सम्बद्धता के कारण इनसे भी प्रश्न पूछ लिये जाते हैं। अतः यहां दिये जा रहे हैं।

 

सूत्र - अभितः परितः समया निकषा हा प्रतियोगेऽपि ।
अभितः (चारों ओर या सभी ओर), परितः (सभी ओर), समया (समीप), निकष (समीप), हा (शोक के । लिए प्रयुक्त शब्द), प्रति (ओर, तरफ) शब्दों के योग में द्वितीया विभक्ति होती है।
उदाहरणः
• आश्रमम् अभितः वनम् अस्ति। आश्रम के चारों ओर वन हैं।
ग्रामं परितः उपवनानि सन्ति । गाँव के सब ओर उपवन हैं।
लङ्का समया (निकषा वा)। लंका के समीप।
हा! कृष्णाभक्तम्। कृष्ण के अभक्त पर खेद है।
सः ग्रामं प्रति गच्छति। वह गाँव की ओर जा रहा है।
शिक्षकः कक्षाम् प्रति गच्छति। शिक्षक कक्षा की ओर जा रहा है।
गृहं परितः वृक्षाः सन्ति। घर के चारों ओर वृक्ष हैं।
ग्रामं निकषा नदी वहति। गाँव के निकट नदी बहती है।
ग्राम निकषा। गाँव के निकट।
विद्यालयम् अभितः। विद्यालय के चारों ओर।
विद्यालयं परितः। विद्यालय के सब ओर।
बुभुक्षितं न प्रतिभाति किंचित्। कोई भूखा नहीं दिखता।
विद्यालयं समया। विद्यालय के समीप ।
कृष्णं परितः गावः सन्ति। कृष्ण के सब और गाएँ हैं।
सीता भवनं प्रति गच्छति । सीता भवन की ओर जाती है।
मन्दिरं निकषा वाटिका अस्ति। मन्दिर के निकट वाटिका है।
ग्रामं समया विद्यालयः अस्ति। ग्राम के समीप विद्यालय है।
नगरं निकषा। नगर के निकट।
ग्रामं परितः वृक्षाः सन्ति। गाँव के सब ओर वृक्ष हैं।
विद्यालयं परितः बालकाः क्रीडन्ति । विद्यालय के सभी ओर बालक खेलते हैं।
अयोध्यां निकषा । अयोध्या के निकट ।
ग्रामं परितः। गाँव के सब ओर।
धनुर्धरः हरिणं प्रति अपश्यत्। धनुर्धर ने हिरण की ओर देखा।
पुष्पं परितः भ्रमराः सन्ति। फूल के चारों ओर भौरें हैं।
माधवी विद्यालयं प्रति याति । माधवी विद्यालय की ओर जा रही है।
परितः कृष्णम् । कृष्ण के चारों ओर।
नदीम् अभितः क्षेत्राणि सन्ति। नदी के दोनों ओर खेत हैं।
विद्यालयं परितः उद्यानमस्ति। विद्यालय के चारों ओर बगीचा है।
तडागम परितः वृक्षाः सन्ति। तालाब के सब ओर वृक्ष हैं।
नदीं समया पशवः सन्ति। नदी के पास पशु है।
विद्यालयं उभयतः राजमार्गंम अस्ति । विद्यालय के दोनों ओर राजमार्ग है।
ग्रामं समया नदी वहति। गाँव के पास नदी बहती है।
विद्यालयम् उभयतः वृक्षाः सन्ति। विद्यालय के दोनों ओर वृक्ष हैं।
ग्रामम् अभितः वृक्षा सन्ति। गाँव के चारों ओर वृक्ष हैं।
ग्रामम् अभितः क्षेत्राणि सन्ति। गाँव के चारों ओर खेत हैं।
विद्यालयं परितः वनम् अस्ति। विद्यालय के सभी ओर जंगल हैं।
ग्रामम् वारितः उद्यानम् अस्ति। गाँव के चारों ओर बगीचा है।
विद्यालयं निकषा जलाशयः अस्ति। विद्यालय के निकट जलाशय है।
मातुः हृदयं कन्यां प्रति स्निग्धं भवति। माता का हृदय कन्या की ओर स्निग्ध रहता है।
In simple words: जब भी 'अभितः, परितः, समया, निकषा, हा, प्रति' जैसे शब्द वाक्य में प्रयोग होते हैं, तो उनके साथ आने वाले शब्द में द्वितीया विभक्ति का उपयोग किया जाता है, जो निकटता, चारों ओर या किसी की ओर जाने का भाव व्यक्त करता है।

🎯 Exam Tip: इन अव्यय शब्दों के प्रयोग को पहचानना और उनके साथ द्वितीया विभक्ति का सही प्रयोग करना परीक्षा में महत्वपूर्ण होता है, खासकर जब वाक्य निर्माण या अनुवाद करना हो।

 

सूत्र - येनाङ्गविकारः ।
जिस अंग में विकार होने से शरीर विकृत दिखाई दे, उस विकारयुक्त अंग में तृतीया विभक्ति होती है।
उदाहरणः
शिरसा खल्वाटः। सिर से गंजा।
कर्णाभ्यां बधिरः। कानों का बहरा।
नेत्रेण/अक्ष्णाः काणः। आँख का काना।
पादेन खञ्जः। पैर का लँगड़ा।
कर्णेन बधिरः। कान का बहरा।
सः शिरसा खल्वाटः अस्ति। वह सिर से गंजा है।
सः पादेन खञ्जः अस्ति। वह पैर से लँगड़ा है।
पृष्ठेन कुब्जा। पीठ से कुबड़ा।
भिक्षुकः पादेन खञ्जः अस्ति। भिखारी पैर से लँगड़ा है।
सुरेशः शिरसा खल्वाटः अस्ति। सुरेश सिर से गंजा है।
सुधीरः कट्या कुब्जः अस्ति। सुधीर कमर से कुबड़ा है।
सा वृद्धा कर्णाभ्याम् बधिरा अस्ति। वह वृद्धा कानों से बहरी है।
वृक्षात् पतितं पत्रम् आनय। वृक्ष से गिरा हुआ पत्ता लाओ।
कट्या वक्र। कमर से टेढ़ा (कुबड़ा)।
नरेशः अक्ष्णा काणः अस्ति। नरेश आँख से काना है।
भिक्षुकः नेत्रेण काणः अस्ति। भिखारी आँख से काना है।
In simple words: जब किसी व्यक्ति या वस्तु के किसी अंग में कोई दोष या विकार दिखाया जाता है, तो उस विकारग्रस्त अंग को व्यक्त करने वाले शब्द में तृतीया विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र का प्रयोग करते समय विकारग्रस्त अंग को पहचानने और उसमें तृतीया विभक्ति का प्रयोग करने पर विशेष ध्यान दें, यह अनुवाद और शुद्ध वाक्य रचना में सहायक है।

 

सूत्र - सहयुक्तेऽप्रधाने।
साथ अर्थ वाले सह, साकम्, सार्धम्, समम् शब्दों के योग में अप्रधान (जिसके साथ जाने वाला जाए) में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
उदाहरणः
रामः लक्ष्मणेन सह वनम् अगच्छत्। राम लक्ष्मण के साथ वन में गये।
अहमपि त्वया सार्धं यास्यामि। मैं भी तुम्हारे साथ जाऊँगा।
सः पित्रा सह विद्यालयं गच्छति। वह पिता के साथ विद्यालय जाता है।
पुत्रेण सह। पुत्र के साथ।
छात्रेण सह। छात्र के साथ।
मृगाः मृगैः सङ्गमनुव्रजन्ति । मृग मृगों के साथ गमन करते हैं।
जनकेन सह। जनक के साथ।
नैकेनापिः समं गता वसुमती। वसुमती के साथ एक भी नहीं गयी।
माता पुत्रेण सह गच्छति। माता पुत्र के साथ जाती है।
रामेण सह सीता वनमगच्छत्। राम के साथ सीता वन गयी।
लक्ष्मणेऽपि रामेण सह वनं गतवान्। लक्ष्मण भी राम के साथ वन गये।
सः बालिकाभिः सह कन्दुकं क्रीडति । वह लड़कियों के साथ गेंद नहीं खेलता है।
माता पुत्रेण साकं श्वः आगमिष्यति। माता पुत्र के साथ कल आएगी।
हरिणा सह राधा नृत्यति। हरि के साथ राधा नाचती है।
सः मया सह कदापि न गच्छति। वह मेरे साथ कभी नहीं जाता है।
गुरुणा सह शिष्य अपि आगच्छति । गुरु के साथ शिष्य भी आता है।
बालकाभिः सह जननी गृहं गच्छति। बालकों के साथ माता घर जाती है।
पुत्री मात्रा सह आपणं गच्छति। पुत्री माता के साथ बाजार जाती है।
रामेण सह मोहनः गच्छति। राम के साथ मोहन जाता है।
पित्रा सह पुत्रः गच्छति। पिता के साथ पुत्र जाता है।
In simple words: जब किसी वाक्य में 'सह', 'साकम्', 'सार्धम्' या 'समम्' शब्दों का प्रयोग 'साथ' के अर्थ में होता है, तो जिसके साथ कोई क्रिया की जा रही है, उस अप्रधान कर्ता में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।

🎯 Exam Tip: 'सह' और उसके पर्यायवाची शब्दों को पहचानना और उनके साथ प्रयोग होने वाले अप्रधान पद में तृतीया विभक्ति लगाना संस्कृत व्याकरण में एक महत्वपूर्ण नियम है।

 

सूत्र - साधकतमं करणम् ।
जिसकी सहायता से कार्य पूर्ण होता है, उसमें तृतीया विभक्ति होती है।
उदाहरणः
In simple words: संस्कृत व्याकरण में, जिस साधन या माध्यम से कोई क्रिया सबसे कुशलता से सम्पन्न होती है, उसे 'करण' कहते हैं और उसमें तृतीया विभक्ति का प्रयोग किया जाता है। यह क्रिया की पूर्णता में सहायक होता है।

🎯 Exam Tip: यह सूत्र क्रिया के सबसे प्रभावी सहायक (करण) को पहचानने और उसमें तृतीया विभक्ति लगाने के लिए महत्वपूर्ण है। सही 'करण' का चुनाव वाक्य को व्याकरणिक रूप से शुद्ध बनाता है।

 

सूत्र - नमः स्वस्तिस्वाहास्वधाऽलंवषट्योगाच्च ।
नमः (नमस्कार), स्वस्ति (कल्याण), स्वाहा (आहुति), स्वधा (बलि), अलं (समर्थ, पर्याप्त), वषट् । (आहुति)-इन शब्दों के योग में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।
उदाहरणः
देवेभ्यः नमः। देवों को नमस्कार।
श्रीगुरवे नमः । श्रीगुरु को नमस्कार।
स्वस्ति तुभ्यम् भवते। तुम्हारा कल्याण हो।
अग्नये स्वाहा। अग्नि के लिए स्वाहा।
इन्द्राय स्वाहा। इन्द्र के लिए स्वाहा।
पितृभ्यः स्वधा। पितरों के लिए स्वधा ।
दैत्येभ्यः हरिः अलम्। दैत्यों के लिए हरि पर्याप्त हैं।
दुर्गादेव्यै नमः। दुर्गा देवी के लिए नमस्कार।
दुर्गायै स्वाहा। दुर्गा देवी के लिए स्वाहा।
राधाकृष्णाय वषट्। राधा-कृष्ण के लिए भेंट।
विष्णवे वषट्। विष्णु के लिए भेंट।
प्रजाभ्यः स्वस्ति। प्रजा का कल्याण हो।
नमः व्यासाय। व्यास को नमस्कार।
श्रीगणेशाय नमः। श्रीगणेश को नमस्कार।
आकाशाय नमः। आकाश को नमस्कार।
कृष्णाय नमः। कृष्ण को नमस्कार।
अलं मल्लो मल्लाय। मल्ल के लिए मल्ल पर्याप्त है।
हरिः दैत्येभ्यः अलम्। दैत्यों के लिए हरि पर्याप्त हैं।
स्वस्ति भवते । कल्याण हो।
हरये नमः। हरि को नमस्कार।
राजा ब्राह्मणेभ्यः धनं ददाति । राजा ब्राह्मणों को धन देता है।
विष्णवे स्वाहा। विष्णु के लिए स्वाहा।
तस्मै श्री गुरवे नमः। 'उन श्री गुरु को नमस्कार।
शुकदेवाय नमः। शुकदेव के लिए नमस्कार।
पुत्राय स्वस्ति । पुत्र का कल्याण हो।
रामाय नमः। राम को नमस्कार।
इन्द्राय वषट्। इन्द्र को भेंट।
नमो भगवते वासुदेवाय । भगवान वासुदेव को नमस्कार।
गुरुभ्यः नमः। गुरुओं को नमस्कार।
राधावल्लभाय नमः। राधावल्लभ को नमस्कार।
गणपतये स्वाहा। गणपति के लिए स्वाहा।
हनुमते नमः। हनुमान के लिए नमस्कार।
रामचन्द्राय नमः। रामचन्द्र के लिए नमस्कार।
सूर्याय स्वाहा। सूर्य के लिए स्वाहा।
In simple words: नमः, स्वस्ति, स्वाहा, स्वधा, अलं और वषट् जैसे शब्दों के प्रयोग में हमेशा चतुर्थी विभक्ति का उपयोग होता है, जो किसी के प्रति आदर, कल्याण, आहुति या पर्याप्तता का भाव व्यक्त करता है।

🎯 Exam Tip: इन विशेष शब्दों को याद रखना और उनके साथ चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग करना अनुवाद तथा वाक्य शुद्धिकरण में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक निश्चित नियम है।

 

सूत्र - ध्रुवमपायेऽपादानम्।
स्वयं से अलग करने वाले अर्थात् ध्रुव (मूल) में पञ्चमी विभक्ति होती है; जैसे-वृक्ष से पत्ते गिरते हैं। इस वाक्य में पत्तों को स्वयं से अलग करने वाला वृक्ष है; अतः वृक्ष में पञ्चमी विभक्ति होगी ।
उदाहरणः
वृक्षेभ्यः फलानि पतन्ति। वृक्षों से फल गिरते हैं।
गङ्गा हिमालयात् निःसरति। गंगा हिमालय से निकलती है।
सः ग्रामात् आगच्छति। वह गाँव से आता है।
रामः कूपात् जलम् आनयति। राम कुएँ से पानी लाता है।
रामः विद्यालयात् गृहं गच्छति। राम विद्यालय से घर जाता है।
वृक्षात पतितं पत्रम् आनय। वृक्ष से गिरा हुआ पत्ता लाओ।
वृक्षात् फलं पतति। वृक्ष से फल गिरता है।
In simple words: जब कोई वस्तु या व्यक्ति किसी स्थिर स्थान (ध्रुव) से अलग होता है, तो उस स्थिर स्थान (अपादान) में पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है।

🎯 Exam Tip: अलगाव (separatiion) के भाव को समझने और जिसमें से अलगाव हो रहा है, उस पद में पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग करने पर ध्यान दें; यह सूत्र 'से' कारक चिन्ह के भिन्न अर्थों को समझने में मदद करता है।

 

सूत्र - आख्यातोपयोगे ।
नियमपूर्वक विद्या ग्रहण करने में जिससे विद्या ग्रहण की जाती है, उसमें पंचमी विभक्ति होती है।
उदाहरणः उपाध्यायात् अधीते । उपाध्याय से पढ़ता है।
In simple words: जब कोई छात्र किसी गुरु या शिक्षक से नियमित रूप से विद्या ग्रहण करता है, तो उस गुरु या शिक्षक (उपदेशक) में पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र का उपयोग तब होता है जब सीखने की प्रक्रिया औपचारिक और नियमबद्ध हो। 'उपाध्याय' जैसे शब्दों में पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है।

 

सूत्र - भीत्रार्थानां भयहेतुः ।
'भय' तथा 'रक्षा' अर्थ वाली धातुओं के योग में जिससे डरा जाता है या जिससे रक्षा की जाती है, उसमें पंचमी विभक्ति होती है।
उदाहरणः सिंहात् बिभेति । सिंह से डरता है।
In simple words: जब किसी को किसी चीज़ से भय लगे या किसी से रक्षा की जाए, तो भय के कारण या जिससे रक्षा की जा रही हो, उसमें पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है।

🎯 Exam Tip: 'भी' (डरना) और 'त्रा' (रक्षा करना) धातु वाले वाक्यों में, जिससे भय या रक्षा हो रही है, उसमें पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग अनिवार्य है, इसे पहचानने से वाक्य शुद्ध बनते हैं।

 

सूत्र - षष्ठी शेषे ।
छ: कारकों के अतिरिक्त सम्बन्ध अर्थ शेष बचता है। सम्बन्ध अर्थ में षष्ठी विभक्ति होती है।
उदाहरणः
राज्ञः पुत्रः । राजा का पुत्र।
गृहस्य अन्तरे। घर के अन्दर।
समुद्रस्य तटम् । समुद्र का तट।
सुमित्रा लक्ष्मणस्य माता अस्ति। सुमित्रा लक्ष्मण की माता है।
राज्ञः पुरुषः। राजा का पुरुष।
बालकस्य माता। बालक की माता।
गङ्गायाः उदकम्। गंगा का जल।
श्रूयतां धर्म सर्वस्वम्। धर्मों के सार को सुनो।
सुग्रीवस्य भ्राता बालिः आसीत्। सुग्रीव का भाई बालि था।
कृष्णस्य पिता वसुदेव। कृष्ण के पिता वसुदेव।
सुदामा कृष्णस्य मित्रम् आसीत्। सुदामा कृष्ण के मित्र थे।
यशोदा नन्दस्य पत्नी आसीत्। यशोदा नन्द की पत्नी थी।
इदं रमेशस्य पुस्तकम् अस्ति। यह रमेश की पुस्तक है।
छात्रस्य पुस्तकम् अस्ति। छात्र की पुस्तक है।
रामस्य गृहं अस्ति। राम का घर है।
सुवर्णस्य आभूषणम् बहुमूल्यम् अस्ति। सोने का आभूषण बहुमूल्य है।
In simple words: कारक (कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, अधिकरण) के संबंधों के अलावा जो भी संबंध बचते हैं, उन्हें 'शेष' कहा जाता है और ऐसे संबंधों को दर्शाने के लिए षष्ठी विभक्ति का प्रयोग होता है, जो 'का, के, की' का अर्थ देती है।

🎯 Exam Tip: षष्ठी विभक्ति का प्रयोग मुख्यतः 'संबंध' दर्शाने के लिए होता है, जो किसी वस्तु या व्यक्ति के दूसरे से संबंध को बताता है। इसे अन्य कारकों से अलग पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

सूत्र - यतश्च निर्धारणम् ।
जहाँ बहुतों में से किसी एक को छाँटा जाए, वहाँ जिसमें से छाँटा जाये, उसमें षष्ठी और सप्तमी विभक्तियाँ होती हैं।
उदाहरणः
गवां/गोषु कपिला श्रेष्ठा। गायों में कपिला श्रेष्ठ है।
बालकानों/बालकेषु वा रामः ज्येष्ठः । बालकों में राम सबसे बड़ा है।
कन्यानां/कन्यासु वा लता कनिष्ठा। कन्याओं में लता सबसे छोटी है।
कवीनां/कविषु कालिदासः श्रेष्ठः। कवियों में कालिदास श्रेष्ठ हैं।
छात्राणां/छात्रासु रत्ना श्रेष्ठा। छात्राओं में रत्ना श्रेष्ठ है।
पुष्पिका छात्राणां श्रेष्ठा अस्ति । छात्राओं में पुष्पिका श्रेष्ठ है।
छात्रेषु अनिलः श्रेष्ठः । छात्रों में अनिल श्रेष्ठ है।
अश्वेषु श्वेतः श्रेष्ठः । अश्वों में सफेद श्रेष्ठ है।
बालकेषु अरविन्दः श्रेष्ठः । बालकों में अरविन्द श्रेष्ठ है।
दिलीपः नरेषु श्रेष्ठः आसीत् । दिलीप राजाओं में श्रेष्ठ थे।
काव्येषु नाटकं रम्यं । काव्यों में नाटक सुन्दर है।
गवां कृष्णा बहुक्षीरा। काली गाय बहुत दूध देती है।
बालकेषु आशीषः श्रेष्ठः। बालकों में अरविन्द श्रेष्ठ है।
सरित्सु गंगा श्रेष्ठा। नदियों में गंगा श्रेष्ठ है।
ललिताः बालिकानां श्रेष्ठा अस्ति । ललिता बालिकाओं में श्रेष्ठ है।
बालिकासु लता श्रेष्ठा। बालिकाओं में लता श्रेष्ठ है।
नदीषु गङ्गा पवित्रतमा अस्ति। नदियों में गंगा सबसे पवित्र है।
In simple words: जब किसी समूह (बहुत से) में से किसी एक वस्तु या व्यक्ति को उसकी किसी विशेषता के कारण श्रेष्ठ या निर्धारित किया जाता है, तो उस समूह को दर्शाने के लिए षष्ठी या सप्तमी विभक्ति का प्रयोग होता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र का प्रयोग चयन या निर्धारण के संदर्भ में होता है। समूहवाचक संज्ञाओं में षष्ठी या सप्तमी विभक्ति का विकल्प प्रयोग एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक बिंदु है जिसे याद रखना चाहिए।

Step-by-Step Textbook Answers: Class 11 Hindi Vibhakti विभक्ति प्रकरण

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