Download UP Board Solutions for Class 11 Hindi प्रत्यय प्रकारन
Access comprehensive textbook solutions for प्रत्यय प्रकारन using the official curriculum guides for Class 11 Hindi. Designed to align with the 2026 27 UP Board standards, these detailed answers help students reinforce core academic concepts.
Access UP Board Solutions and Answers
Navigate directly to the solved Hindi textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.
प्रत्यय-प्रकरण
संस्कृत में धातु या शब्दों के बाद प्रत्यय जोड़कर नये शब्दों का निर्माण होता है। प्रत्यय मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं (अ) कृत् प्रत्यय तथा (ब) तद्धित प्रत्यय ।
(अ) कृत् प्रत्यय
जिस प्रत्यय को धातु से जोड़कर संज्ञा, विशेषण अथवा अव्यय बनाया जाता है, उसको कृत् प्रत्यय कहते हैं। कृत् प्रत्यय के योग से बनने वाले शब्दों को कृदन्त (अर्थात् जिनके अन्त में कृत् प्रत्यय है) कहते हैं; जैसे - 'कृ' धातु में तृच् प्रत्यय जोड़ने से 'कर्तृ' शब्द बनता है, यह कृदन्त है। यह संज्ञा शब्द है और इसके रूप अन्य संज्ञाओं की तरह विभिन्न विभक्तियों में चलेंगे (जैसे - प्रथमा विभक्ति में कर्ता, कर्तारौ, कर्तारः आदि) । यहाँ यह द्रष्टव्य है कि जो कृदन्त शब्द संज्ञा या विशेषण होते हैं, उनके रूप तो चलते हैं, पर अव्यय सदा एक रूप रहते हैं (उनके रूप नहीं चलते)।
(क) क्त (तु) - भूतकालिक क्रिया और विशेषण शब्द बनाने के लिए 'क्त' प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। 'क्त' प्रत्यय का प्रयोग कर्मवाच्य एवं भाववाच्य में किया जाता है। इसका प्रयोग करते समय कर्ता में तृतीया विभक्ति तथा कर्म में प्रथमा विभक्ति रखी जाती है। 'क्त' प्रत्ययान्त शब्दों का प्रयोग कर्म के लिङ्ग, विभक्ति और वचनों के अनुसार होता है। कर्ता के लिङ्ग और वचन का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता; जैसे
1. रामेण पुस्तकं पठितम् ।
2. सीतया ग्रन्थः पठितः ।
3. मया पुस्तिका पठिता।
“क्त' प्रत्यय से बने क्रिया-रूपों के कुछ उदाहरण ।
| धातु | पुंल्लिङ्ग | स्त्रीलिङ्ग | नपुंसकलिङ्ग |
|---|---|---|---|
| भू + क्त | भूतः | भूता | भूतम् |
| कृ + क्त | कृतः | कृता | कृतम् |
| पा + क्त | पीतः | पीता | पीतम् |
| दा + क्त | दत्तः | दत्ता | दत्तम् |
| गम् + क्त | गतः | गता | गतम् |
| हन् + क्त | हतः | हता | हतम् |
| पठ् + क्त | पठितः | पठिता | पठितम् |
| नी + क्त | नीतः | नीता | नीतम् |
| हस् + क्त | हसितः | हसिता | हसितम् |
| दृश् + क्त | दृष्टः | दृष्टा | दृष्टम् |
| स्नै + क्त | स्नातः | स्नाता | स्नातम् |
| द्यू + क्त | द्यूतः | द्यूता | द्यूतम् |
| प्रेष् + क्त | प्रेषितः | प्रेषिता | प्रेषितम् |
| कथ् + क्त | कथितः | कथिता | कथितम् |
| श्रु + क्त | श्रुतः | श्रुता | श्रुतम् |
| लिख् + क्त | लिखितः | लिखिता | लिखितम् |
| हृ + क्त | हृतः | हृता | हृतम् |
(ख) क्त्वा (त्वा) - जब किसी क्रिया के हो जाने पर दूसरी क्रिया आरम्भ होती है, तब सम्पन्न हुई क्रिया को, 'पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं। हिन्दी में इसका बोध करके' लगाकर होता है। पूर्वकालिक क्रिया का बोध कराने के . लिए संस्कृत में धातु के आगे क्त्वा (त्वा) प्रत्यय जोड़ा जाता है। क्त्वा (त्वा) प्रत्ययान्त धातुओं के रूप नहीं चलते ।
'क्त्त्वा' (त्वा) प्रत्यय लगाकर धातुओं के रूप
| धातु | कृदन्त | धातु | कृदन्त |
|---|---|---|---|
| कृ + क्त्वा | कृत्वा | ग्रह् + क्त्वा | गृहीत्वा |
| आप् + क्त्वा | आप्त्वा | लभ् + क्त्वा | लब्ध्वा |
| क्री + क्त्वा | क्रीत्वा | पा + क्त्वा | पीत्वा |
| दा + क्त्वा | दत्वा | हन् + क्त्वा | हत्वा |
| दृश् + क्त्वा | दृष्ट्वा | जि + क्त्वा | जित्वा |
| धृ + क्त्वा | धृत्वा | भू + क्त्वा | भूत्वा |
| नम् + क्त्वा | नत्वा | स्था + क्त्वा | स्थित्वा |
| पच् + क्त्वा | पक्त्वा | शी + क्त्वा | शयित्वा |
| गम् + क्त्वा | गत्वा | वच् + क्त्वा | उक्त्वा |
| श्रु + क्त्वा | श्रुत्वा | पठ् + क्त्वा | पठित्वा |
| धा + क्त्वा | धात्वा | पूज् + क्त्वा | पूजयित्वा |
| नी + क्त्वा | नीत्वा | जग् + क्त्वा | जगत्वा |
| खाद + क्त्वा | खादित्वा | लिख् + क्त्वा | लिखित्वा |
(ग) तव्यत् (तव्य), अनीयर् (अनीय) - सामान्यतः क्रिया में विधिलिङ् लकार चाहिए' के अर्थ में तव्यत् और अनीयर् प्रत्ययों का प्रयोग होता है। इन शब्दों का प्रयोग सकर्मक धातुओं के कर्मवाच्य में तथा अकर्मक धातुओं के भाववाच्य में होता है।
कर्तृवाच्य में इनका प्रयोग नहीं होता। ये शब्द योग्य के अर्थ में भी प्रयुक्त होते हैं; जैसे
पठ् + तव्यत् (तव्य) = पठितव्य (पढ़नी चाहिए) । पठ् + अनीयर् (अनीय) = पठनीय (पढ़नी चाहिए या पढ़ने योग्य)। मया पुस्तकं पठितव्यम् (पठनीयम्) = मेरे द्वारा पुस्तक पढ़ी जानी चाहिए (या, मुझे पुस्तक पढ़नी चाहिए)। इन प्रत्ययों से बने शब्दों का प्रयोग लिंग, वचन और विभक्ति के अनुसार किया जाता है। इनके रूप पुंल्लिङ्ग में 'बालक', नपुंसकलिङ्ग में 'फल और स्त्रीलिङ्ग में 'बाला' के समान बनेंगे। तव्यत् और अनीयर् प्रत्यय से निर्मित उदाहरण
| धातु | तव्यत् | अनीयर् |
|---|---|---|
| कृ | कर्त्तव्यः कर्त्तव्यम् | करणीयः करणीयम् |
| भू | भवितव्य | भवनीयः |
| पा | पातव्यः | पानीयः, पानीयम् |
| दा | दातव्यः, दातव्यम् | दानीयः |
| नी | नेतव्यः | नयनीयः |
| हस् | हसितव्यः | हसनीयः |
| पठ् | पठितव्यः पठितव्यम् | पठनीयः पठनीया पठनीयम् |
| गम् | गन्तव्यः गन्तव्यम् | गमनीयः, गमनीयम् |
| पच् | पक्तव्यः | पचनीयः, पचनीयम् |
| मन् | मन्तव्यः | मननीयः |
| दृश् | द्रष्टव्यः | दर्शनीयः, दर्शनीयम् |
| लिख् | लिखितव्य | लेखनीयः |
| कथ् | कथितव्यः | कथनीयः |
| वन्द् | वन्दितव्यः | वन्दनीयः |
| स्था | स्थातव्यः | स्थानीयः |
| भज् | भोक्तव्यः | भजनीयः |
| पूज् | पूजितव्यः | पूजनीयः |
| श्रू | श्रोतव्यम् | श्रवणीय |
(घ) क्तवतु (तवत्) - 'क्त' प्रत्ययान्त शब्दों के परिवर्तनों के अनुसार ही 'क्तवतु' प्रत्ययान्त शब्दों के रूपों में भी परिवर्तन होते हैं। केवल उनके अन्त में 'वत्' और जोड़ दिया जाता है, क्योंकि इस प्रत्यय का प्रारम्भिक अक्षर भी 'क्त ही है। 'क्तवतु' प्रत्यय का भी उन्हीं धातुओं के साथ प्रयोग होता है, जिनके साथ 'क्त का प्रयोग होता है। इस प्रत्यय से निर्मित शब्दों का प्रयोग भूतकालिक क्रिया की भाँति 'कर्तृवाच्य में होता है। इस प्रत्यय से निर्मित शब्दों के रूप पुंल्लिग में 'श्रीमत् के समान, स्त्रीलिंग में नदी के समान तथा नपुंसकलिंग में जगत् के समान होते हैं।
“क्तवतु' प्रत्यय से बने क्रिया-रूपों के कुछ उदाहरण
| धातु+प्रत्यय | पुंल्लिङ्ग | स्त्रीलिङ्ग | नपुंसकलिङ्ग |
|---|---|---|---|
| भू + क्तवतु | भूतवान् | भूतवती | भूतवत् |
| पठ् + क्तवतु | पठितवान् | पठितवती | पठितवत् |
| गम् + क्तवतु | गतवान् | गतवती | गतवत् |
| नी + क्तवतु | नीतवान् | नीतवती | नीतवत् |
| पा + क्तवतु | पीतवान् | पीतवती | पीतवत् |
| दा + क्तवतु | दत्तवान् | दत्तवती | दत्तवत् |
(ब) तद्धित प्रत्यय
तद्धित प्रत्यय सदा किसी सिद्ध (अर्थात् बनाये हुए) संज्ञा, विशेषण, अव्यय या क्रिया के अनन्तर जोड़कर उससे अन्य संज्ञा, विशेषण, अव्यय, क्रिया आदि बनाने में प्रयुक्त होता है। यह ध्यान रखना चाहिए कि कृत् प्रत्यय सदा धातु में ही जोड़े जाते हैं, किसी सिद्ध शब्द में नहीं।
(क) मतुप्, वतुप् - संज्ञा से 'वाला', 'वाली' (गाड़ी वाला, बुद्धि वाली आदि) अर्थ प्रकट करने के लिए 'मतुप्' (मत्) तथा वतुप् (वत्) प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। जिन शब्दों के अन्त में 'अ' या 'आ' होता है, उनमें 'वत्' तथा जिन शब्दों के अन्त में ह्रस्व अथवा दीर्घ 'ई', 'उ', 'ऋ' होता है, उनमें 'मत्' जुड़ता है। किन्तु यदि अन्त में आने वाले 'इ', उ' व्यंजन 'म' में लगे हों तो 'वत्' ही जुड़ता है। 'मतुप्' या 'वतुप्' प्रत्ययान्त शब्दों के रूप पुंल्लिङ्ग में 'भवत्' के समान, स्त्रीलिङ्ग में नदी के समान और नपुंसकलिङ्ग में 'जगत् के समान होते हैं; जैसे
| पुंल्लिङ्ग | स्त्रीलिङ्ग | नपुंसकलिङ्ग | |||
|---|---|---|---|---|---|
| श्री + मतुप् (मत्) श्रीमत् | = | श्रीमान् | श्रीमती | श्रीमत् | |
| बल + वतुप् | बलवत् | = | बलवान् | बलवती | बलवत् |
| रूप + वतुप् | रूपवत् | = | रूपवान् | रूपवती | रूपवत् |
| दया + वतुप् | दयावत् | = | दयावान् | दयावती | दयावत् |
| धन + वतुप् | धनवत् | = | धनवान् | धनवती | धनवत् |
| गुण + वतुप् | गुणवत् | = | गुणवान् | गुणवती | गुणवत् |
| विद्या + वतुप् | विद्यावत् | = | विद्यावान् | विद्यावती | विद्यावत् |
| मति + मतुप् | मतिमत् | = | मतिमान् | मतिमती | मतिमत् |
| धी + मतुप् | धीमत् | = | धीमान् | धीमती | धीमत् |
| बुद्धि + मतुप् | बुद्धिमत् | = | बुद्धिमान् | बुद्धिमती | बुद्धिमत् |
| भग + वतुप् | भगवत् | = | भगवान् | भगवती | भगवत् |
| पुत्र + वतुष् | पुत्रवत् | = | पुत्रवान् | पुत्रवती | पुत्रवत् |
| गति + मतुप् | गतिमत् | = | गतिमान् | गतिमती | गतिमत् |
| रस + वतुप् | रसवत् | = | रसवान् | रसवती | रसवत् |
| शुचि + मतुप् | शुचिमत् | = | शुचिमान् | शुचिमती | शुचिमत् |
| महिमा + वतुप् | महिमावत् | = | महिमावान् | महिमावती | महिमावत् |
| अर्थ + वतुप् | अर्थवत् | = | अर्थवान् | अर्थवती | अर्थवत् |
| शील + वतुप् | शीलवत् | = | शीलवान् | शीलवती | शीलवत् |
| ज्ञान + वतुप् | ज्ञानवत् | = | ज्ञानवान् | ज्ञानवती | ज्ञानवत् |
ये शब्द विशेषण होते हैं, इसलिए ये अपने विशेष्य के अनुसार ही लिङ्ङ्ग, वचन और विभक्ति ग्रहण करते हैं। उदाहरणार्थ, 'श्रीमत् के पुंल्लिङ्ग में प्रथमा विभक्ति के तीनों वचनों के रूप इस प्रकार होंगे
श्रीमान् श्रीमन्तौ श्रीमन्तः ।
(ख) त्व, तल् प्रत्यय - संज्ञा और विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए त्व' और 'तलु' प्रत्ययों का प्रयोग होता है। 'त्व' प्रत्ययान्त शब्द नपुंसकलिङ्ग तथा 'तल्' प्रत्ययान्त शब्द स्त्रीलिङ्ग होते हैं। इनके रूप भी क्रमशः 'फलम्' और 'बाला' के समान चलते हैं।
| संज्ञा या विशेषण | त्व प्रत्यय से बने रूप | तल् प्रत्यय से बने रूप |
|---|---|---|
| महत् | महत्त्वम् | महत्ता |
| प्रभु | प्रभुत्वम् | प्रभुता |
| गुरु | गुरुत्वम् | गुरुता |
| लघु | लघुत्वम् | लघुता |
| पशु | पशुत्वम् | पशुता |
| पुरुष | पुरुषत्वम् | पुरुषता |
| ब्राह्मण | ब्राह्मणत्वम् | - |
| मानव | मानवत्वम् | मानवता |
| मूर्ख | मूर्खत्वम् | मूर्खता |
| विद्वान् | विद्वत्त्वम् | विद्वत्ता |
| अमर | अमरत्वम् | अमरता |
| दीन | - | दीनता |
| कुटु | - | कटुता |
| कवि | कवित्वम् | - |
Question 1. प्रथम - दिये गये पदों में से किन्हीं दो के सम्बन्ध में स्पष्ट कीजिए कि वे किस धातु अथवा शब्द में किस प्रत्यय के योग से बने हैं - गतः, पठनीयम्, बुद्धिमान् ।
Answer:
| पद | धातु/शब्द | प्रत्यय |
|---|---|---|
| गतः | गम् धातु | क्त |
| पठनीयम् | पठ् धातु | अनीयर् |
| बुद्धिमान् | बुद्धि शब्द | मतुप् |
🎯 Exam Tip: When analyzing words formed with suffixes, clearly identify the base धातु (root verb) or शब्द (noun/adjective) and the specific प्रत्यय (suffix) used. Understanding the function of each प्रत्यय (e.g., past participle, gerund, etc.) is crucial for accurate analysis.
Question 2. द्वितीय - दिये गये पदों में से किन्हीं दो धातु में 'क्त' या 'क्तवतु' प्रत्यय लगाकर उसके प्रथमा पुंल्लिङ्ग एकवचन और द्विवचन के रूप लिखिए-पठ्, गम्, दा, प्रेष् ।
Answer:
| पुंल्लिङ्ग रूप | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| पठ् + क्त = पठितः | पठितः | पठितौ | पठिताः |
| गम् + क्त = गतः | गतः | गतौ | गताः |
| दा + क्त = दत्तः | दत्तः | दत्तौ | दत्ताः |
| प्रेष् + क्त = प्रेषितः | प्रेषितः | प्रेषितौ | प्रेषिताः |
🎯 Exam Tip: Pay close attention to the gender and number requirements when forming words with suffixes. For 'क्त' and 'क्तवतु' प्रत्यय, mastering the changes in endings for singular, dual, and plural in masculine gender is key.
Question 3. तृतीय - दिये गये शब्दों में से किसी एक शब्द में उसके सामने लिखा प्रत्यय जोड़कर शब्द का यथानिर्दिष्ट रूप लिखिए-धन + मतुप् (पुंल्लिङ्ग रूप), पठ् + अनीयर् (नपुंसकलिङ्ग रूप)
Answer:
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| धन + वतुप् = धनवान् (पुंल्लिङ्ग) | धनवान् | धनवन्तौ | धनवन्तः |
| पठ् + अनीयर् = पठनीय (नपुंसकलिङ्ग) | पठनीयम् | पठनीये | पठनीयानि |
🎯 Exam Tip: Always remember the final gender and number specified for the derived word, as suffixes like 'मतुप्'/'वतुप्' and 'अनीयर्' change form based on these grammatical properties. Practice different combinations to solidify understanding.
पाठ्य-पुस्तक 'संस्कृत दिग्दर्शिका' में आये प्रत्यययुक्त शब्द
पाठ 2:
| धातु/शब्द | प्रत्यय | |
|---|---|---|
| स्नात्वा | स्ना | क्त्वा |
| उषित्वा | उष् (वस्) | क्त्वा |
| आनीय | आ + नी | ल्यप् |
पाठ 3:
| धातु/शब्द | प्रत्यय | |
|---|---|---|
| श्रुत्वा | श्रु | क्त्वा |
| गत्वा | गम् | क्त्वा |
| पठितुम् | पठ् | तुमुन् |
| आदाय | आ + दा | ल्यप् |
पाठ 4:
| धातु/शब्द | प्रत्यय | |
|---|---|---|
| आगत्य | आ + गम् | ल्यप् |
| दत्वा | दा | क्त्वा |
| गच्छन् | गम् | शतृ |
| प्रष्टुम् | प्रच्छ | तुमुन् |
पाठ 6:
| धातु/शब्द | प्रत्यय | |
|---|---|---|
| मन्त्रयित्वा | मन्त्र | क्त्वा |
| गृहीत्वा | ग्रह | क्त्वा |
पाठ 7:
| बद्ध्वा | बध् | क्त्वा |
| कर्तुम् | कृ | तुमुन् |
| ज्ञातव्या | ज्ञा | तव्यत् |
| दाहयित्वा | दाह | क्त्वा |
| आदिष्टवान् | आ + दिश् | क्तवतु |
| मारणीयम् | मृ | अनीयर् |
पाठ 9:
पाठ 10:
| धातु/शब्द | प्रत्यय | |
|---|---|---|
| समुत्थाय | सम् + स्था | ल्यप् |
| प्राप्य | प्र + आप् | ल्यप् |
| उत्तीर्य | उत् + तृ | ल्यप् |
| भीताः | भी | क्त |
| उक्त्वावद् क्त्वा |
Free study material for Hindi
Free UP Board Textbook Explanations: Class 11 Hindi प्रत्यय प्रकारन
Accessing प्रत्यय प्रकारन Solutions
Access structured UP Board textbook solutions for प्रत्यय प्रकारन. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 11 Hindi, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.
Concept-Driven Answers for Class 11 Hindi
Each solution includes detailed reasoning to foster genuine comprehension of प्रत्यय प्रकारन concepts. Reviewing these step-by-step breakdowns allows learners to master both analytical and descriptive questions expected in school evaluations.
Maximizing Study Efficiency
These resources act as an effective roadmap for daily homework tasks and independent study. Supplement your review of प्रत्यय प्रकारन with official sample papers and interactive practice tests available on our platform free of charge.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 11 Hindi प्रत्यय प्रकारन is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Hindi are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 11 Hindi प्रत्यय प्रकारन as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 11 Hindi प्रत्यय प्रकारन will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 11 Hindi. You can access UP Board Solutions Class 11 Hindi प्रत्यय प्रकारन in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 11 Hindi प्रत्यय प्रकारन in printable PDF format for offline study on any device.