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Detailed Mishrit Bahuvikalpiy मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न UP Board Solutions for Class 11 Hindi
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Class 11 Hindi Mishrit Bahuvikalpiy मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न UP Board Solutions PDF
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Question 1. 'साहित्यालोचन' और 'हिन्दी साहित्य निर्माता' इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) श्यामसुन्दर दास
Answer: (घ) श्यामसुन्दर दास
In simple words: 'साहित्यालोचन' और 'हिन्दी साहित्य निर्माता' श्यामसुन्दर दास की महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियाँ हैं, जो आलोचना और साहित्यिक इतिहास के क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाती हैं।
🎯 Exam Tip: लेखकों और उनकी प्रमुख रचनाओं को याद रखना परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे एक ही लेखक की दो प्रसिद्ध कृतियाँ हों।
Question 2. 'काशी नागरी प्रचारिणी सभा' की स्थापना में इनका सराहनीय योगदान रहा है या 'काशी नागरी प्रचारिणी सभा' की स्थापना किसने की ?
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) श्यामसुन्दर दास
(घ) डॉ० सम्पूर्णानन्द
Answer: (ग) श्यामसुन्दर दास
In simple words: श्यामसुन्दर दास ने 'काशी नागरी प्रचारिणी सभा' की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए स्थापित एक प्रमुख संस्था थी।
🎯 Exam Tip: हिन्दी साहित्य के इतिहास में महत्वपूर्ण संस्थाओं और उनके संस्थापकों या प्रमुख योगदानकर्ताओं से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 3. निम्नलिखित में से कौन द्विवेदीयुगीन गद्य लेखक/लेखिका हैं ?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) यशपाल
(घ) भगवतीचरण वर्मा
Answer: (ख) श्यामसुन्दर दास
In simple words: श्यामसुन्दर दास द्विवेदी युग के एक प्रमुख गद्य लेखक थे, जिन्होंने उस कालखंड में अपनी रचनाओं से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया और भाषा के मानकीकरण में भी योगदान दिया।
🎯 Exam Tip: विभिन्न साहित्यिक युगों के प्रमुख लेखकों और उनकी विशिष्ट शैलियों को जानना आवश्यक है ताकि आप सही कालखंड से संबंधित लेखक को पहचान सकें।
Question 4. 'रूपक रहस्य' के लेखक कौन हैं ? यह किस विधा की रचना है ?
(क) वियोगी हरि-नाटक
(ख) रामचन्द्र शुक्ल-निबन्ध
(ग) श्यामसुन्दर दास-आलोचना
(घ) प्रतापनारायण मिश्र-निबन्ध
Answer: (ग) श्यामसुन्दर दास-आलोचना
In simple words: 'रूपक रहस्य' श्यामसुन्दर दास द्वारा लिखित एक आलोचनात्मक कृति है, जो साहित्य में रूपक तत्वों का गहराई से विश्लेषण करती है।
🎯 Exam Tip: लेखक, उनकी रचना और उसकी विधा (विधा) का सही ज्ञान परीक्षा में निर्णायक होता है, विशेषकर जब विकल्पों में विधा का स्पष्ट उल्लेख हो।
Question 5. श्यामसुन्दर दास द्वारा किस पत्रिका का सम्पादन किया गया ?
(क) हिन्दी प्रदीप
(ख) माधुरी
(ग) इन्दु
(घ) नागरी प्रचारिणी पत्रिका
Answer: (घ) नागरी प्रचारिणी पत्रिका
In simple words: श्यामसुन्दर दास ने 'नागरी प्रचारिणी पत्रिका' का सम्पादन किया, जो हिन्दी भाषा और देवनागरी लिपि के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली एक प्रतिष्ठित पत्रिका थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्यकारों और उनके द्वारा सम्पादित पत्रिकाओं के नाम याद रखें; यह अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Question 6. 'नासिकेतोपाख्यान' शीर्षक से श्यामसुन्दर दास के अतिरिक्त किस लेखक ने गद्य-रचना की है?
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) सदल मिश्र
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी
Answer: (ख) सदल मिश्र
In simple words: सदल मिश्र ने 'नासिकेतोपाख्यान' नामक गद्य रचना की है, जो हिन्दी गद्य साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण मानी जाती है और खड़ी बोली गद्य के प्रारंभिक लेखकों में से एक हैं।
🎯 Exam Tip: एक ही नाम की रचना करने वाले विभिन्न लेखकों की पहचान करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संबंधित प्रश्न भ्रमित कर सकते हैं।
Question 7. श्यामसुन्दर दास का जन्म-काल है-...
(क) सन् 1875 ई०
(ख) सन् 1884 ई०
(ग) सन् 1892 ई०
(घ) सन् 1907 ई०
Answer: (क) सन् 1875 ई०
In simple words: श्यामसुन्दर दास का जन्म वर्ष 1875 है, जो उनके साहित्यिक योगदान के कालखंड को समझने में मदद करता है, विशेषकर द्विवेदी युग में।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्यकारों के जन्म और मृत्यु की तिथियाँ अक्सर सामान्य ज्ञान के प्रश्नों में पूछी जाती हैं, इसलिए इन्हें याद रखना उपयोगी है।
Question 8. मुंशी प्रेमचन्द का जन्म-काल है
(क) 1870 ई
(ख) 1875 ई०
(ग) 1880 ई०
(घ) 1879 ई०
Answer: (ग) 1880 ई०
In simple words: मुंशी प्रेमचन्द, जो हिन्दी साहित्य के एक महान उपन्यासकार और कहानीकार हैं, का जन्म 1880 ई० में हुआ था, जिससे उनके लेखन काल की शुरुआत हुई।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध लेखकों के जन्म वर्ष को याद रखना उनकी कृतियों और साहित्यिक योगदान के संदर्भ को समझने में सहायक होता है।
Question 9. सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन का जन्म-काल है
(क) 1892 ई०
(ख) 1907 ई०
(ग) 1911 ई०
(घ) 1920 ई०
Answer: (ग) 1911 ई०
In simple words: सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन, जिन्हें 'अज्ञेय' के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म वर्ष 1911 है, जो आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
🎯 Exam Tip: लेखकों के पूर्ण नाम, उनके उपनामों और जन्म तिथियों का ज्ञान परीक्षा में सहायक होता है, खासकर जब वे साहित्यिक आंदोलन से जुड़े हों।
Question 10. इनके द्वारा 'भारत कला भवन' नाम के एक विशाल संग्रहालय की स्थापना की गयी
(क) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(घ) राय कृष्णदास
Answer: (घ) राय कृष्णदास
In simple words: राय कृष्णदास ने 'भारत कला भवन' नामक एक महत्वपूर्ण संग्रहालय की स्थापना की, जो भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक है और वाराणसी में स्थित है।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक संस्थाओं और उनके संस्थापकों या प्रमुख योगदानकर्ताओं से संबंधित प्रश्न अक्सर सामान्य ज्ञान का हिस्सा होते हैं, जो छात्रों की व्यापक जानकारी का परीक्षण करते हैं।
Question 11. इन्होंने हिन्दी में गद्यगीत विधा का प्रवर्तन किया
(क) हरिशंकर परसाई
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(घ) राय कृष्णदास
Answer: (घ) राय कृष्णदास
In simple words: राय कृष्णदास को हिन्दी साहित्य में गद्यगीत विधा के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है, जहाँ गद्य में कविता के भावों और लयात्मकता का समावेश होता है।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक विधाओं के प्रवर्तक और उनके योगदान को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह साहित्यिक विकास के क्रम को दर्शाता है।
Question 12. 'भारत की चित्रकला' तथा ' भारतीय मूर्तिकला' इनके प्रामाणिक ग्रन्थ हैं
(क) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(ख) राहुल सांकृत्यायन
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) राय कृष्णदास
Answer: (घ) राय कृष्णदास
In simple words: 'भारत की चित्रकला' और 'भारतीय मूर्तिकला' राय कृष्णदास के महत्वपूर्ण और प्रामाणिक ग्रन्थ हैं, जो भारतीय कला के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत और गहन जानकारी प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: कला और साहित्य से संबंधित विशेषज्ञ कृतियों और उनके लेखकों को पहचानना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे प्रामाणिक शोध पर आधारित हों।
Question 13. 'साधना' नामक गद्यगीतों के संग्रह के रचयिता कौन हैं ?
(क) वृन्दावनलाल वर्मा
(ख) मोहन राकेश
(ग) राय कृष्णदास
(घ) विनय मोहन शर्मा
Answer: (ग) राय कृष्णदास
In simple words: 'साधना' राय कृष्णदास द्वारा रचित गद्यगीतों का एक प्रसिद्ध संग्रह है, जिसमें भावनात्मक और काव्यात्मक गद्य का प्रयोग कर गहरी अनुभूतियों को व्यक्त किया गया है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख रचनाओं और उनके लेखकों को विधा के साथ याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह छात्रों के साहित्यिक ज्ञान का परीक्षण करता है।
Question 14. राय कृष्णदास का लेखन-युग है
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग
Answer: (ग) छायावाद युग
In simple words: राय कृष्णदास छायावाद युग के एक महत्वपूर्ण लेखक थे, जिन्होंने इस काल की साहित्यिक प्रवृत्तियों को अपनी रचनाओं में दर्शाया, विशेषकर गद्यगीतों के माध्यम से।
🎯 Exam Tip: लेखकों को उनके संबंधित साहित्यिक युगों के साथ जोड़ना साहित्यिक इतिहास को समझने और उनके योगदान को सही संदर्भ में देखने के लिए आवश्यक है।
Question 15. प्रेमचन्दोत्तर युग के श्रेष्ठ कथाकार के रूप में जाने जाते हैं
(क) सरदार पूर्णसिंह
(ख) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) जैनेन्द्र कुमार
Answer: (घ) जैनेन्द्र कुमार
In simple words: जैनेन्द्र कुमार प्रेमचन्दोत्तर युग के एक प्रमुख कथाकार हैं, जिन्होंने अपनी मनोवैज्ञानिक कहानियों और उपन्यासों से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया और व्यक्ति के आंतरिक मन का विश्लेषण किया।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक कालखंडों के अनुसार प्रमुख कथाकारों और उनकी पहचान को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे एक नए साहित्यिक धारा के प्रवर्तक हों।
Question 16. जैनेन्द्र कुमार की कौन-सी रचना उपन्यास नहीं है ?
(क) कल्याणी
(ख) जयवर्धन
(ग) मुक्तिबोध
(घ) वातायन
Answer: (घ) वातायन
In simple words: 'वातायन' जैनेन्द्र कुमार का उपन्यास नहीं है; यह उनकी कहानियों का एक संग्रह है, जबकि 'कल्याणी', 'जयवर्धन' और 'मुक्तिबोध' उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं।
🎯 Exam Tip: किसी लेखक की विभिन्न विधाओं में लिखी गई रचनाओं को पहचानना और भेद करना परीक्षा के लिए आवश्यक है ताकि सही विकल्प का चयन किया जा सके।
Question 17. निम्नलिखित रचनाओं में से कौन-सी रचना नाटक है?
(क) मजदूरी और प्रेम
(ख) रस-मीमांसा
(ग) पाप और प्रकाश
(घ) भारत की एकता
Answer: (ग) पाप और प्रकाश
In simple words: 'पाप और प्रकाश' एक नाटक है, जबकि अन्य विकल्प निबंध या आलोचनात्मक कृतियाँ हैं, जो विभिन्न साहित्यिक विधाओं को दर्शाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्यिक कृतियों और उनकी सही विधा (नाटक, निबंध, कहानी, उपन्यास) का ज्ञान आवश्यक है, क्योंकि इससे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 18. जैनेन्द्र कुमार द्वारा रचित निबन्ध-संग्रह है
(क) पृथिवी-पुत्र और वाग्धारा
(ख) पूर्वोदय और प्रस्तुत प्रश्न
(ग) कुली
(घ) पथ के साथी
Answer: (ख) पूर्वोदय और प्रस्तुत प्रश्न
In simple words: 'पूर्वोदय और प्रस्तुत प्रश्न' जैनेन्द्र कुमार का एक प्रसिद्ध निबंध-संग्रह है, जिसमें उनके गहन विचारों और दार्शनिक चिंतन का समावेश है, जो उनकी बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: लेखकों के निबंध संग्रहों के नामों को याद रखना साहित्यिक विधाओं के ज्ञान को दर्शाता है और परीक्षा में सटीक उत्तर देने में मदद करता है।
Question 19. 'त्यागपत्र' किस लेखक की उपन्यास-विधा की रचना है ?
(क) प्रेमचन्द
(ख) यशपाल
(ग) जैनेन्द्र कुमार
(घ) मोहन राकेश
Answer: (ग) जैनेन्द्र कुमार
In simple words: 'त्यागपत्र' जैनेन्द्र कुमार का एक मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जो उनके साहित्यिक करियर की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है और हिन्दी साहित्य में मील का पत्थर है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध उपन्यासों और उनके लेखकों के नामों को विधा सहित याद रखना परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि यह साहित्यिक कृतियों की पहचान में मदद करता है।
Question 20. 'साहित्य का श्रेय और प्रेय' किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) आलोचना
(ग) निबन्ध
(घ) संस्मरण
Answer: (ग) निबन्ध
In simple words: 'साहित्य का श्रेय और प्रेय' एक निबंध है, जिसमें साहित्य के मूल्यों, महत्व और उसकी नैतिक तथा कलात्मक उपयोगिता पर विचार किया गया है।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक कृतियों की विधा को पहचानना और संबंधित लेखकों को जानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रश्न अक्सर अवधारणात्मक समझ पर आधारित होते हैं।
Question 21. 'अज्ञेय' का वास्तविक नाम (पूरा नाम) है
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ग) कन्हैयालाल मिश्र
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन
Answer: (घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन
In simple words: 'अज्ञेय' एक प्रसिद्ध साहित्यिक उपनाम है, जिनका वास्तविक नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन था और वे आधुनिक हिन्दी साहित्य के एक प्रमुख कवि, उपन्यासकार और विचारक थे।
🎯 Exam Tip: लेखकों के उपनाम और उनके पूरे नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे अपने उपनाम से अधिक प्रसिद्ध हों।
Question 22. 'विशाल भारत', 'सैनिक', 'प्रतीक', 'वाक्' तथा 'दिनमान' पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया -
(क) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने
(ख) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' ने
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी ने
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने
Answer: (घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने
In simple words: सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने कई महत्वपूर्ण पत्रिकाओं जैसे 'विशाल भारत', 'सैनिक', 'प्रतीक', 'वाक्' और 'दिनमान' का सम्पादन किया, जिससे हिन्दी पत्रकारिता और साहित्यिक आलोचना को नई दिशा मिली।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्यकारों द्वारा सम्पादित पत्रिकाओं के नाम याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके बहुआयामी योगदान को दर्शाता है।
Question 23. 'उत्तर प्रियदर्शी' नाटक के लेखक हैं
(क) मोहन राकेश
(ख) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय'
Answer: (घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय'
In simple words: 'उत्तर प्रियदर्शी' सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' द्वारा रचित एक प्रसिद्ध नाटक है, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है और आधुनिक नाट्य साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
🎯 Exam Tip: लेखकों की विभिन्न विधाओं में लिखी गई प्रमुख रचनाओं और उनके नामों को याद रखना आवश्यक है, खासकर जब वे नाटक जैसी महत्वपूर्ण विधा में हों।
Question 24. 'अरे यायावर रहेगा याद' किस विधा की रचना है ?
(क) उपन्यास
(ख) नाटक
(ग) कहानी
(घ) यात्रा-साहित्य
Answer: (घ) यात्रा-साहित्य
In simple words: 'अरे यायावर रहेगा याद' सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' द्वारा लिखित एक यात्रा-साहित्य है, जिसमें उनके विभिन्न यात्रा अनुभवों और दार्शनिक विचारों का वर्णन है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध यात्रा-साहित्य कृतियों और उनके लेखकों को पहचानना और उनकी विधा का ज्ञान रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह साहित्यिक विधाओं की विविधता को दर्शाता है।
Question 25. अज्ञेय जी द्वारा रचित निम्नलिखित में से कौन-सी रचना निबन्ध-विधा की रचना नहीं है ?
(क) विपथगा
(ख) आत्मनेपद
(ग) त्रिशंकु
(घ) लिखि कागद कोरे
Answer: (घ) लिखि कागद कोरे
In simple words: 'लिखि कागद कोरे' अज्ञेय की कविता संग्रह है, जबकि 'विपथगा', 'आत्मनेपद' और 'त्रिशंकु' उनके निबंध संग्रह हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि 'लिखि कागद कोरे' निबंध नहीं है।
🎯 Exam Tip: किसी लेखक की कविताओं और निबंधों जैसी विभिन्न विधाओं को अलग-अलग पहचानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संबंधित प्रश्न अक्सर भ्रमित कर सकते हैं।
Question 26. इन्होंने भाषा सम्बन्धी विविध प्रयोग किये और शैली के क्षेत्र में भी नये प्रतिमान स्थापित किये
(क) स०.ही० वात्स्यायन 'अज्ञेय'
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(घ) श्रीराम शर्मा
Answer: (क) स० . ही० वात्स्यायन 'अज्ञेय'
In simple words: सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने भाषा और शैली के क्षेत्र में कई नवीन प्रयोग किए, जिससे हिन्दी साहित्य में आधुनिकता और प्रयोगशीलता आई।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक प्रवृत्तियों और भाषा-शैली के प्रयोगों के लिए जाने जाने वाले लेखकों को याद रखें, क्योंकि उनका योगदान साहित्यिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 27. अज्ञेय जी को ज्ञानपीठ पुरस्कार से किस रचना के लिए सम्मानित किया गया था ?
(क) जयदल
(ख) कितनी नावों में कितनी बार
(ग) एक बूंद सहसा उछली
(घ) अरी ओ करुणा प्रभामय
Answer: (ख) कितनी नावों में कितनी बार
In simple words: अज्ञेय को उनकी प्रसिद्ध काव्यकृति 'कितनी नावों में कितनी बार' के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो उनकी साहित्यिक उत्कृष्टता का प्रतीक है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्य पुरस्कारों और उनसे सम्मानित कृतियों तथा लेखकों को याद रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अक्सर सामान्य ज्ञान और साहित्यिक इतिहास के प्रश्नों में आता है।
Question 28. 'सन्नाटा' के रचनाकार हैं
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ख) राय कृष्णदास
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) स० ही० वात्स्यायन 'अज्ञेय
Answer: (घ) स० ही० वात्स्यायन 'अज्ञेय'
In simple words: 'सन्नाटा' सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' की एक रचना है, जो उनकी सूक्ष्म भावाभिव्यक्ति और प्रतीकात्मक लेखन का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण लघु रचनाओं और उनके लेखकों के नाम याद रखना परीक्षा में मदद करता है, क्योंकि ये अक्सर विशिष्ट साहित्यिक शैली को दर्शाते हैं।
Question 29. 'हरिऔध' का पूरा नाम क्या है ?
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) अयोध्यासिंह उपाध्याय
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन
Answer: (ग) अयोध्यासिंह उपाध्याय
In simple words: 'हरिऔध' अयोध्यासिंह उपाध्याय का लोकप्रिय उपनाम है, जो द्विवेदी युग के एक प्रमुख कवि और लेखक थे, जिन्होंने 'प्रियप्रवास' जैसे महाकाव्य की रचना की।
🎯 Exam Tip: लेखकों के उपनाम और उनके पूरे नामों को याद रखना सामान्य ज्ञान और साहित्यिक समझ दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर जब उपनाम प्रसिद्ध हो।
Question 30. 'कामायनी' की रचना-विधा क्या है ?
(क) खण्डकाव्य
(ख) नाटिका
(ग) उपन्यास
(घ) महाकाव्य
Answer: (घ) महाकाव्य
In simple words: जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित 'कामायनी' हिन्दी साहित्य का एक उत्कृष्ट महाकाव्य है, जो छायावाद युग की प्रमुख कृति मानी जाती है और इसमें मानव सभ्यता के विकास का प्रतीकात्मक वर्णन है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्यिक कृतियों की विधा को सटीक रूप से पहचानना परीक्षा के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह साहित्यिक वर्गीकरण की समझ को दर्शाता है।
Question 31. 'भाषा योग-वाशिष्ठ' के रचयिता हैं
(क) रामप्रसाद निरंजनी
(ख) सदासुख मुंशीलाल ‘नियाज'
(ग) सदल मिश्र
(घ) इंशा अल्ला खाँ
Answer: (क) रामप्रसाद निरंजनी
In simple words: 'भाषा योग-वाशिष्ठ' रामप्रसाद निरंजनी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है, जिसे खड़ी बोली गद्य की प्रारंभिक और महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक माना जाता है।
🎯 Exam Tip: हिन्दी गद्य के प्रारंभिक लेखकों और उनकी कृतियों को याद रखना साहित्यिक इतिहास के लिए आवश्यक है, क्योंकि ये भाषा के विकास की नींव हैं।
Question 32. डॉ० रघुवीर सिंह का लेखन-युग है
(क) छायावाद युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) छायावादोत्तर युग
Answer: (ख) द्विवेदी युग
In simple words: डॉ० रघुवीर सिंह द्विवेदी युग के एक प्रमुख लेखक थे, जिन्होंने इस कालखंड में हिन्दी साहित्य में अपना योगदान दिया, विशेषकर ऐतिहासिक और साहित्यिक शोध के क्षेत्र में।
🎯 Exam Tip: लेखकों को उनके संबंधित साहित्यिक युगों के साथ जोड़ना साहित्यिक इतिहास को समझने और उनके विशिष्ट योगदान को जानने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 33. द्विवेदी युग का ख्याति प्राप्त तिलिस्मी उपन्यास है
(क) आत्मदाह
(ख) गबन
(ग) नूतन ब्रह्मचारी
(घ) चन्द्रकान्ता सन्तति
Answer: (घ) चन्द्रकान्ता सन्तति
In simple words: 'चन्द्रकान्ता सन्तति' द्विवेदी युग का एक अत्यंत लोकप्रिय और तिलिस्मी उपन्यास है, जिसे देवकीनन्दन खत्री ने लिखा था और इसने पाठकों में बहुत उत्साह पैदा किया।
🎯 Exam Tip: विभिन्न साहित्यिक युगों की विशिष्ट रचनाओं और उनकी लोकप्रियता के कारणों को जानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उस काल की सामाजिक और साहित्यिक रुचि को दर्शाता है।
Question 34. 'भारतेन्दु युग' की कालावधि मानी जाती है।
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1868 से 1900 ई०
(घ) 1868 ई० तक
Answer: (ग) 1868 से 1900 ई०
In simple words: भारतेन्दु युग हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल का प्रारंभिक चरण है, जिसकी समयावधि 1868 से 1900 ईस्वी तक मानी जाती है, जिसमें गद्य और पत्रकारिता का विकास हुआ।
🎯 Exam Tip: विभिन्न साहित्यिक युगों की सटीक समय-सीमाओं को याद रखना हिन्दी साहित्य के इतिहास को समझने के लिए मौलिक है, क्योंकि ये युगों का विभाजन बिंदु होते हैं।
Question 35. 'द्विवेदी युग' की कालावधि मानी जाती है
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1868 से 1900 ई०
(घ) 1938 ई० से अब तक
Answer: (क) 1900 से 1922 ई०
In simple words: द्विवेदी युग हिन्दी साहित्य में एक महत्वपूर्ण सुधारवादी काल था, जिसकी समयावधि 1900 से 1922 ईस्वी तक है, और इसमें भाषा के मानकीकरण पर विशेष जोर दिया गया।
🎯 Exam Tip: हिन्दी साहित्य के विभिन्न युगों की समय-सीमाएँ और उनकी प्रमुख विशेषताओं को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये साहित्यिक विकास की आधारशिला हैं।
Question 36. 'तितली' उपन्यास के रचनाकार हैं
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) प्रेमचन्द
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(घ) जयशंकर प्रसाद
Answer: (घ) जयशंकर प्रसाद
In simple words: 'तितली' जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण उपन्यास है, जो छायावादी युग की प्रमुख साहित्यिक कृतियों में से एक है और प्रेम तथा मानवीय संबंधों पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध उपन्यासों और उनके लेखकों के नामों को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी प्रमुख साहित्यिक आंदोलन से जुड़े हों।
Question 37. 'शुक्ल युग' ( छायावाद युग) की कालावधि मानी जाती है,
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1938 से 1947 ई०
(घ) 1947 ई० से अब तक
Answer: (ख) 1919 से 1938 ई०
In simple words: 'शुक्ल युग', जिसे छायावाद युग भी कहा जाता है, हिन्दी साहित्य के उस कालखंड को संदर्भित करता है जो 1919 से 1938 ईस्वी तक फैला हुआ था और आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के साहित्यिक वर्चस्व को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक युगों की समयावधि और उनके वैकल्पिक नामों को समझना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हिन्दी साहित्य के इतिहास की आधारभूत जानकारी है।
Question 38. 'शुक्लोत्तर युग' (छायावादोत्तर युग) की कालावधि मानी जाती है
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1938 से 1947 ई०
(घ) 1947 ई० से अब तक
Answer: (ग) 1938 से 1947 ई०
In simple words: 'शुक्लोत्तर युग' या 'छायावादोत्तर युग' हिन्दी साहित्य का वह काल है जो 1938 से 1947 ईस्वी तक चला, जिसमें प्रगतिवाद और प्रयोगवाद जैसी नई साहित्यिक प्रवृत्तियाँ उभरीं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न साहित्यिक युगों की क्रोनोलॉजी और उनकी प्रमुख विशेषताओं को जानना साहित्यिक इतिहास के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह साहित्यिक विकास के चरणबद्ध अध्ययन में मदद करता है।
Question 39. 'द्विवेदी युग' और 'छायावादी युग' दोनों युगों में लेखन-कार्य करने वाले लेखक-द्वय हैं
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी व गुलाबराय
(ख) प्रतापनारायण मिश्र व प्रेमचन्द
(ग) गुलाबराय व जयशंकर प्रसाद
(घ) जयशंकर प्रसाद व जैनेन्द्र कुमार
Answer: (ग) गुलाबराय व जयशंकर प्रसाद
In simple words: गुलाबराय और जयशंकर प्रसाद दोनों ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने द्विवेदी युग और छायावादी युग दोनों में महत्वपूर्ण लेखन कार्य किया, जिससे उनकी साहित्यिक बहुमुखी प्रतिभा प्रदर्शित होती है।
🎯 Exam Tip: ऐसे लेखकों को पहचानना जो एक से अधिक साहित्यिक युगों में सक्रिय रहे, उनकी साहित्यिक यात्रा और विभिन्न प्रवृत्तियों पर उनके प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 40. 'छायावाद युग' और 'छायावादोत्तर युग' दोनों युगों में अपनी रचनाधर्मिता से हिन्दी साहित्य में विशेष योगदान करने वाले लेखक हैं
(क) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) स० ही० वात्स्यायन 'अज्ञेय
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) डॉ० नगेन्द्र
Answer: (क) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
In simple words: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने छायावाद युग और छायावादोत्तर युग दोनों में अपनी रचनाओं से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया, विशेषकर निबंध, आलोचना और ऐतिहासिक शोध के क्षेत्र में।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक युगों के बीच की निरंतरता और उन लेखकों को समझना महत्वपूर्ण है जिन्होंने दोनों कालखंडों में योगदान दिया, क्योंकि वे साहित्यिक संक्रमण के महत्वपूर्ण बिंदु होते हैं।
Question 41. किस युग की रचनाएँ मार्क्सवाद से सर्वाधिक प्रभावित हुई हैं ?
(क) छायावादी युग
(ख) छायावादोत्तर युग
(ग) शुक्ल युग
(घ) द्विवेदी युग
Answer: (ख) छायावादोत्तर युग
In simple words: छायावादोत्तर युग में मार्क्सवादी विचारधारा का प्रभाव हिन्दी साहित्य पर गहरा हुआ, जिससे सामाजिक यथार्थवाद और प्रगतिशील लेखन को बढ़ावा मिला, और कविताओं व कहानियों में श्रमिक वर्ग के जीवन को दर्शाया गया।
🎯 Exam Tip: विभिन्न साहित्यिक युगों पर पड़ने वाले दार्शनिक और राजनीतिक प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये साहित्यिक प्रवृत्तियों को निर्धारित करते हैं।
Question 42. गद्य की विधा जो नहीं है
(क) निबन्ध
(ख) आलोचना
(ग) उपन्यास
(घ) गद्यकाव्य
Answer: (घ) गद्यकाव्य
In simple words: गद्यकाव्य गद्य की एक विधा नहीं है, बल्कि यह एक काव्य रूप है जिसमें गद्य की तरह वाक्य रचना होती है लेकिन भाव कविता के होते हैं, जबकि निबंध, आलोचना और उपन्यास शुद्ध गद्य विधाएँ हैं।
🎯 Exam Tip: हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं और उनके सटीक वर्गीकरण का ज्ञान होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह साहित्यिक संरचना की आधारभूत समझ को दर्शाता है।
Question 43. हिन्दी की गद्य और पद्य विधाओं में समान रूप से लिखने वाले विद्वान् हैं
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) विष्णु प्रभाकर
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) तीनों में से कोई नहीं
Answer: (ग) जयशंकर प्रसाद
In simple words: जयशंकर प्रसाद एक बहुमुखी साहित्यकार थे जिन्होंने गद्य (उपन्यास, नाटक) और पद्य (कविता, महाकाव्य) दोनों विधाओं में उत्कृष्ट रचनाएँ कीं, जिससे उन्हें दोनों क्षेत्रों में महारत हासिल थी।
🎯 Exam Tip: ऐसे साहित्यकारों को पहचानना महत्वपूर्ण है जिनकी दोनों विधाओं- गद्य और पद्य- पर समान पकड़ थी, क्योंकि यह उनकी व्यापक साहित्यिक क्षमता को दर्शाता है।
Question 44. छायावादी युग के लेखक कौन नहीं हैं ?
(क) वियोगी हेरि
(ख) भगवतीचरण वर्मा
(ग) नन्ददुलारे वाजपेयी
(घ) डॉ० रघुवीर सिंह
Answer: (ख) भगवतीचरण वर्मा
In simple words: भगवतीचरण वर्मा मुख्यतः प्रगतिवादी धारा से जुड़े थे और छायावादी युग के प्रमुख लेखकों में नहीं गिने जाते हैं, जबकि अन्य विकल्प छायावाद से संबंधित हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न साहित्यिक युगों के प्रमुख लेखकों और उनके योगदान को समझना महत्वपूर्ण है ताकि आप सही कालखंड से संबंधित न होने वाले लेखक को पहचान सकें।
Question 45. निम्नलिखित में से कौन-सा साहित्यकार छायावादी नहीं है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रामधारी सिंह दिनकर
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) महादेवी वर्मा
Answer: (ख) रामधारी सिंह दिनकर
In simple words: रामधारी सिंह दिनकर छायावादी कवि नहीं थे, बल्कि वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय चेतना और प्रगतिवादी काव्यधारा से संबंधित थे, जबकि जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानन्दन पन्त और महादेवी वर्मा छायावाद के प्रमुख स्तंभ हैं।
🎯 Exam Tip: छायावाद के चार स्तंभों को याद रखना और अन्य कवियों को उनके सही युगों से जोड़ना महत्वपूर्ण है ताकि आप साहित्यिक कालखंडों को सही ढंग से वर्गीकृत कर सकें।
Question 46. 'संस्कृति के चार अध्याय' किस युग की रचना है ?
(क) भारतेन्दु युग
(ब) द्विवेदी युग
(ग) छायावादोत्तर युग
(घ) छायावाद युग
Answer: (ग) छायावादोत्तर युग
In simple words: रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित 'संस्कृति के चार अध्याय' छायावादोत्तर युग की एक महत्वपूर्ण कृति है, जो भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करती है और राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख रचनाओं को उनके संबंधित साहित्यिक युगों के साथ जोड़ना साहित्यिक इतिहास की समझ को मजबूत करता है और उनके ऐतिहासिक संदर्भ को भी बताता है।
Question 47. 'हमीर हठ' किस प्रकार की रचना है ?
(क) निबन्ध
(ख) कथा-साहित्य
(ग) आलोचना
(घ) इतिहास
Answer: (घ) इतिहास
In simple words: 'हमीर हठ' एक ऐतिहासिक रचना है, जो रणथंभौर के शासक हमीरदेव चौहान के पराक्रम और हठधर्मिता पर आधारित है, जिसका वर्णन विभिन्न कवियों ने किया है।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक कृतियों की विधा के साथ-साथ उनके ऐतिहासिक संदर्भ को भी समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई रचनाएँ इतिहास पर आधारित होती हैं।
Question 48. 'खड़ी बोली' गद्य के विकास का प्रारम्भिक युग कौन-सा है ?
(क) द्विवेदी युग
(ख) छायावाद युग
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) छायावादोत्तर युग
Answer: (ग) भारतेन्दु युग
In simple words: भारतेन्दु युग को खड़ी बोली गद्य के विकास का प्रारंभिक चरण माना जाता है, जहाँ आधुनिक हिन्दी गद्य की नींव रखी गई और पत्रकारिता व निबंध लेखन का सूत्रपात हुआ।
🎯 Exam Tip: हिन्दी गद्य के क्रमिक विकास और विभिन्न युगों की भूमिका को समझना साहित्यिक इतिहास के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह भाषा के आधुनिक स्वरूप का आधार है।
Question 49. निम्नलिखित में से किस निबन्धकार को ललित निबन्धकार माना जाता है ?
(क) कुबेरनाथ राय
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय'
(घ) सरदार पूर्णसिंह
Answer: (क) कुबेरनाथ राय
In simple words: कुबेरनाथ राय हिन्दी साहित्य के प्रमुख ललित निबन्धकारों में से एक हैं, जिनकी रचनाओं में कलात्मकता, वैयक्तिक अनुभूतियों और सांस्कृतिक चिंतन का सुन्दर समन्वय मिलता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न निबंध शैलियों (जैसे ललित निबंध, विचारात्मक निबंध) और उनके प्रमुख रचनाकारों को जानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह निबंध साहित्य की विविधता को दर्शाता है।
Question 50. निम्नलिखित में असत्य कथन है
(क) गद्य व्याकरण सम्मत वाक्यबद्ध रचना है।
(ख) गद्य प्रधानतया विचार, तर्क चिन्तन एवं विश्लेषण प्रधान होता है।
(ग) गदा में लय, यति एवं गति आदि को महत्त्व होता है।
(घ) आज का युग गद्य प्रधान है
Answer: (ग) गद्य में लय, यति एवं गति आदि को महत्त्व होता है।
In simple words: गद्य में लय, यति और गति का महत्व नहीं होता है; यह विशेषताएँ मुख्यतः पद्य (कविता) की हैं, जबकि गद्य में व्याकरण, विचार और तर्क का महत्व होता है।
🎯 Exam Tip: गद्य और पद्य की मौलिक विशेषताओं को समझना और उनके बीच के अंतर को पहचानना आवश्यक है, क्योंकि यह साहित्यिक विधाओं की बुनियादी समझ को मजबूत करता है।
Question 51. कौन-सा युग हिन्दी गद्य के उत्कर्ष का सूर्योदय-काल था ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग
Answer: (ख) द्विवेदी युग
In simple words: द्विवेदी युग को हिन्दी गद्य के उत्कर्ष का सूर्योदय-काल माना जाता है, क्योंकि इस काल में गद्य की भाषा परिष्कृत हुई और विभिन्न गद्य विधाओं का व्यवस्थित विकास हुआ।
🎯 Exam Tip: विभिन्न साहित्यिक युगों की महत्वपूर्ण प्रवृत्तियों और उनके योगदान को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हिन्दी साहित्य के समग्र विकास को दर्शाता है।
Question 52. छायावादोत्तर युग के लेखक नहीं
(क) भीष्म साहनी
(ख) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(ग) वासुदेवशरण अग्रवाल
(घ) बालकृष्ण भट्ट
Answer: (घ) बालकृष्ण भट्ट
In simple words: बालकृष्ण भट्ट भारतेन्दु युग के प्रमुख लेखक थे, जबकि भीष्म साहनी, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और वासुदेवशरण अग्रवाल छायावादोत्तर युग से संबंधित हैं, इसलिए बालकृष्ण भट्ट इस युग के लेखक नहीं हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न साहित्यिक युगों के लेखकों को सही ढंग से वर्गीकृत करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संबंधित प्रश्न अक्सर उनकी साहित्यिक पहचान का परीक्षण करते हैं।
Question 53. 'द्विवेदी पत्रावली' के संकलनकर्ता हैं
(क) बैजनाथ सिंह
(ख) बनारसी दास चतुर्वेदी
(ग) पद्मसिंह शर्मा
(घ) वियोगी हरि
Answer: (क) बैजनाथ सिंह
In simple words: बैजनाथ सिंह ने 'द्विवेदी पत्रावली' का संकलन किया, जिसमें महावीरप्रसाद द्विवेदी के पत्रों का संग्रह है, जो उनके विचारों और साहित्यिक संपर्कों को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक पत्रावलियों और उनके संकलनकर्ताओं के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये साहित्यिक जीवनी और संदर्भ के लिए मूल्यवान स्रोत होते हैं।
Question 54. हिन्दी साहित्य के आधुनिक काले को गद्य काल की संज्ञा किसने दी ?
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(घ) बाबू श्यामसुन्दर दास
Answer: (ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
In simple words: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल को 'गद्य काल' की संज्ञा दी, क्योंकि इस काल में गद्य का अभूतपूर्व विकास हुआ और यह पद्य की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो गया।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक कालखंडों के नामकरण और उनसे जुड़े प्रमुख आलोचकों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे साहित्यिक इतिहास के आधार स्तंभ होते हैं।
Question 55. 'बड़ों के प्रेरणादायक पत्र' पत्र संकलन किसने प्रकाशित कराया ?
(क) बैजनाथ सिंह
(ख) बनारसीदास चतुर्वेदी
(ग) वियोगी हरि
(घ) हरिवंशराय बच्चन
Answer: (ग) वियोगी हरि
In simple words: 'बड़ों के प्रेरणादायक पत्र' का संकलन वियोगी हरि ने प्रकाशित कराया था, जिसमें विभिन्न महानुभावों के प्रेरणादायी पत्रों का संग्रह है, जो पाठकों को मार्गदर्शन प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण पत्र-संकलनों और उनके संपादकों को याद रखना साहित्यिक जानकारी के लिए आवश्यक है, क्योंकि ये व्यक्तिगत और ऐतिहासिक संदर्भ प्रदान करते हैं।
Question 56. 'नूतन ब्रह्मचारी' किस विधा की रचना है ?
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) जीवनी
(घ) आलोचना
Answer: (ख) उपन्यास
In simple words: 'नूतन ब्रह्मचारी' बालकृष्ण भट्ट द्वारा रचित एक उपन्यास है, जो भारतेन्दु युग की प्रमुख कृतियों में से एक है और समाज सुधार के विचारों पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों की विधा को पहचानना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह साहित्यिक वर्गीकरण की आधारभूत समझ को दर्शाता है।
Question 57. 'हिन्दी प्रगतिशील लेखक संघ' का प्रथम अधिवेशन हुआया प्रेमचन्द की अध्यक्षता में प्रगतिशील लेखक संघ' का अधिवेशन हुआ
(क) सन् 1932 में
(ख) सन् 1936 में
(ग) सन् 1938 में
(घ) सन् 1940 में
Answer: (क) सन् 1932 में
In simple words: 'हिन्दी प्रगतिशील लेखक संघ' का पहला अधिवेशन 1932 में प्रेमचन्द की अध्यक्षता में हुआ था, जिसने हिन्दी साहित्य में प्रगतिवाद की नींव रखी।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक आन्दोलनों से जुड़े प्रमुख घटनाओं और उनके वर्षों को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये साहित्यिक इतिहास के निर्णायक क्षण होते हैं।
Question 58. प्रारम्भिक गद्य लेखकों में दो राजाओं में से एक हैं
(क) सदासुख लाल
(ख) सदल मिश्र
(ग) शिवप्रसाद सितारेहिन्द
(घ) लल्लूलाल
Answer: (ग) शिवप्रसाद सितारेहिन्द
In simple words: राजा शिवप्रसाद सितारेहिन्द और राजा लक्ष्मण सिंह हिन्दी गद्य के प्रारंभिक दौर के 'दो राजा' माने जाते हैं, जिन्होंने गद्य के विकास और उसे जनसामान्य तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🎯 Exam Tip: हिन्दी गद्य के प्रारंभिक विकास में 'दो राजाओं' के योगदान को समझना साहित्यिक इतिहास के लिए आवश्यक है, क्योंकि वे खड़ी बोली गद्य के प्रवर्तकों में से थे।
Question 59. 'दि मैड मैन' का 'पगला' नाम से हिन्दी में अनुवाद किया है-
(क) वासुदेवशरण अग्रवाल ने
(ख) रायकृष्ण दास ने
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द ने
(घ) जी० सुन्दर रेड्डी ने
Answer: (ख) रायकृष्ण दास ने
In simple words: रायकृष्ण दास ने 'दि मैड मैन' का हिन्दी में 'पगला' नाम से अनुवाद किया, जो उनकी अनुवाद कला का एक उदाहरण है और उन्होंने पश्चिमी साहित्य को हिन्दी पाठकों तक पहुँचाया।
🎯 Exam Tip: अनुवाद कार्य और उसके मूल तथा अनूदित शीर्षकों के साथ-साथ अनुवादक को याद रखना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भाषाई आदान-प्रदान को दर्शाता है।
Question 60. निम्नलिखित में से सदल मिश्र की रचना है-
(क) सनी केतकी की कहानी
(ख) नासिकेतोपाख्यान
(ग) राजा भोज का सपना
(घ) सत्यार्थ प्रकाश
Answer: (ख) नासिकेतोपाख्यान
In simple words: सदल मिश्र द्वारा रचित 'नासिकेतोपाख्यान' हिन्दी गद्य की प्रारंभिक महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक है, जो खड़ी बोली गद्य के विकास में मील का पत्थर है।
🎯 Exam Tip: प्रारंभिक हिन्दी गद्य लेखकों और उनकी प्रमुख कृतियों को याद रखना साहित्यिक इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये भाषा के आधुनिक स्वरूप के निर्माण में सहायक थे।
Question 61. कौन-सी रचना धर्मवीर भारती की है ?
(क) अफ्मिा
(ख) अपरा
(ग) अन्धा-युग
(घ) अर्चना
Answer: (ग) अन्धा-युग
In simple words: धर्मवीर भारती का 'अन्धा-युग' एक प्रसिद्ध काव्य-नाटक है, जो महाभारत युद्ध के अंतिम दिन पर आधारित है और आधुनिक हिन्दी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध लेखकों और उनकी विशिष्ट कृतियों को विधा के साथ याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी नए साहित्यिक प्रयोग को दर्शाते हों।
Question 62. 'भारत-भारती' की रचना-विधा है
(क) कहानी
(ख) उपन्यास
(ग) नाटक
(घ) काव्य
Answer: (घ) काव्य
In simple words: मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'भारत-भारती' एक प्रसिद्ध काव्यकृति है, जिसने राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और द्विवेदी युग में अत्यंत लोकप्रिय हुई।
🎯 Exam Tip: प्रमुख राष्ट्रीय काव्य कृतियों और उनकी विधा को पहचानना साहित्यिक और ऐतिहासिक संदर्भ के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राष्ट्रप्रेम की भावना को दर्शाता है।
Question 63. निम्नलिखित में असत्य कथन है
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी निबन्धकार एवं उपन्यासकार हैं।
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी 'सरस्वती' पत्रिका के सम्पादक थे।
(ग) रामचन्द्र शुक्ल 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' ग्रन्थ के लेखक हैं।
(घ) प्रतापनारायण मिश्र 'हिन्दी प्रदीप' के सम्पादक थे।
Answer: (घ) प्रतापनारायण मिश्र 'हिन्दी प्रदीप' के सम्पादक थे।
In simple words: 'हिन्दी प्रदीप' के सम्पादक बालकृष्ण भट्ट थे, न कि प्रतापनारायण मिश्र, जो 'ब्राह्मण' पत्रिका के सम्पादक थे। यह कथन असत्य है क्योंकि इसने गलत संपादक का उल्लेख किया है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्यकारों, उनकी कृतियों और उनके द्वारा सम्पादित पत्रिकाओं से संबंधित सटीक जानकारी होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर ऐसे प्रश्न गलत तथ्यों को पहचानने के लिए होते हैं।
Question 64. 'खड़ी बोली गद्य' की प्रथम रचना है
(क) कविवचन सुधा
(ख) गोरा बादल की कथा
(ग) कामायनी
(घ) चिदम्बरा
Answer: (ख) गोरा बादल की कथा
In simple words: जटमल द्वारा रचित 'गोरा बादल की कथा' को हिन्दी खड़ी बोली गद्य की प्रारंभिक रचनाओं में से एक माना जाता है, जिसने गद्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🎯 Exam Tip: हिन्दी खड़ी बोली गद्य के विकास और उसकी प्रथम रचनाओं को जानना साहित्यिक इतिहास के लिए मौलिक है, क्योंकि यह भाषा के आधुनिक स्वरूप का प्रारंभिक चरण है।
Question 65. 'त्यागपत्र' विधा की दृष्टि से रचना है
(क) कहानी
(ख) निबन्ध
(ग) उपन्यास
(घ) नाटक
Answer: (ग) उपन्यास
In simple words: 'त्यागपत्र' जैनेन्द्र कुमार द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध उपन्यास है, जो मनोवैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित है और मानव मन की गहराइयों को छूता है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्यिक कृतियों की विधा को पहचानना परीक्षा के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह साहित्यिक वर्गीकरण की आधारभूत समझ को दर्शाता है।
Question 66. 'अतिचार' रचना के सम्पादक हैं
(क) बालमुकुन्द गुप्त
(ख) मुनि जिनविजय
(ग) किशोरीलाल गोस्वामी
(घ) नाभादास
Answer: (ख) मुनि जिनविजय
In simple words: 'अतिचार' रचना के सम्पादक मुनि जिनविजय हैं, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति को संकलित और प्रस्तुत किया, जो जैन साहित्य से संबंधित हो सकती है।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक कृतियों के संपादकों को याद रखना उनकी प्रामाणिकता और संदर्भ को समझने में सहायक होता है, खासकर जब वे दुर्लभ या प्राचीन ग्रंथों से संबंधित हों।
Question 67. 'श्रृंगार-रस-मंडन' के रचनाकार हैं
(क) नाभादास
(ख) चतुर्भुज दास
(ग) बिट्ठलनाथ
(घ) ज्योतिरीश्वर ठाकुर
Answer: (ग) बिट्ठलनाथ
In simple words: 'श्रृंगार-रस-मंडन' बिट्ठलनाथ द्वारा रचित एक प्रसिद्ध कृति है, जो श्रृंगार रस के विभिन्न पहलुओं का वर्णन करती है और भक्तिकाल के महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख रसवादी कृतियों और उनके रचनाकारों के नाम याद रखना हिन्दी साहित्य के रीतिकालीन संदर्भ के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह रस सिद्धांत की समझ को बढ़ाता है।
Question 68. 'राधाकृष्णदास' लेखक थे-
(क) भारतेन्दु युग के
(ख) द्विवेदी युग के
(ग) छायावाद युग के
(घ) छायावादोत्तर युग के
Answer: (क) भारतेन्दु युग के
In simple words: राधाकृष्णदास भारतेन्दु युग के एक महत्वपूर्ण लेखक थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं से इस काल के साहित्यिक विकास में योगदान दिया और नाटक व उपन्यास लेखन में सक्रिय रहे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्यकारों को उनके सही साहित्यिक युगों के साथ जोड़ना साहित्यिक इतिहास की समझ के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह उनकी साहित्यिक पहचान का आधार है।
Question 69. 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' के लेखक हैं
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) रामचन्द्र शुक्ल
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) डॉ० रामकुमार वर्मा
Answer: (ख) रामचन्द्र शुक्ल
In simple words: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा रचित 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' हिन्दी साहित्य के इतिहास पर एक अत्यंत प्रामाणिक और आधारभूत ग्रन्थ है, जिसे आज भी मानक संदर्भ ग्रंथ माना जाता है।
🎯 Exam Tip: हिन्दी साहित्य के इतिहास से संबंधित मौलिक ग्रंथों और उनके लेखकों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह साहित्यिक अध्ययन का प्रारंभिक बिंदु है।
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