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Step-by-Step UP Board Solutions: Class 11 Hindi Hindi Gadya हिंदी गद्य के विकास की परीक्षोपयोगी प्रमुख बातें
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(क) हिन्दी-गद्य का काल-विभाजन
| 1. पूर्व भारतेन्दु युग | 13वीं शताब्दी के मध्य से 1868 ई० तक |
| 2. भारतेन्दु युग | 1868 ई० से 1900 ई० तक |
| 3. द्विवेदी युग | 1900 ई० से 1922 ई० तक |
| 4. छायावादी युग (शुक्ल युग) | 1919 ई० से 1938 ई० तक |
| 5. छायावादोत्तर युग (शुक्लोत्तर युग) | 1938 ई० से 1947 ई० तक |
| 6. स्वातन्त्र्योत्तर युग | 1947 ई० से आज तक |
(ख) विभिन्न विधाओं की प्रथम रचना और रचनाकार
| विधा | रचना | रचनाकार |
|---|---|---|
| 1. खड़ी बोली हिन्दी की प्रथम रचना | गोरा बादल की कथा | जटमल |
| 2. हिन्दी का प्रथम नाटक | नहुष | गोपालचन्द्र गिरिधरदास |
| 3. हिन्दी का प्रथम उपन्यास | परीक्षा-गुरु | लाला श्रीनिवासदास |
| 4. हिन्दी की प्रथम कहानी | इन्दुमती | किशोरीलाल गोस्वामी |
| 5. हिन्दी का प्रथम यात्रावृत्त | सरयू पार की यात्रा | भारतेन्दु हरिश्चन्द्र |
| 6. हिन्दी का प्रथम आधुनिक एकांकी | पृथ्वीराज की आँखें | डॉ० रामकुमार वर्मा |
| 7. हिन्दी की प्रथम आत्मकथा | अर्द्धकथा | बनारसीदास (जैन कवि) |
| 8. हिन्दी का प्रथम रिपोर्ताज | लक्ष्मीपुरा | डॉ० शिवदान सिंह चौहान |
| 9. हिन्दी की प्रथम डायरी | नरदेव शास्त्री 'वेदतीर्थ' की जेल डायरी | नरदेव शास्त्री 'वेदतीर्थ' |
| 10. हिन्दी की प्रथम भेंटवार्त्ता | रत्नाकर तथा प्रेमचन्द | बनारसीदास चतुर्वेदी |
| 11. हिन्दी का प्रथम पत्र-संग्रह | स्वामी दयानन्द से सम्बद्ध पत्र-संकलन | महात्मा मुंशीराम |
| 12. हिन्दी का प्रथम गद्यकाव्य | साधना | राय कृष्णदास |
(ग) विभिन्न गद्य-विधाओं के दो-दो प्रसिद्ध रचनाकार एवं उनकी रचनाएँ
| विधा का नाम | प्रमुख रचनाकार | मुख्य रचना |
|---|---|---|
| 1. नाटक | (1) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (2) जयशंकर प्रसाद | (1) सत्य हरिश्चन्द्र, (2) श्रीचन्द्रावली (1) चन्द्रगुप्त, (2) ध्रुवस्वामिनी |
| 2. एकांकी | (1) डॉ० रामकुमार वर्मा (2) उपेन्द्रनाथ 'अश्क' | (1) पृथ्वीराज की आँखें, (2) दीपदान (1) पर्दा उठाओ पर्दा गिराओ, (2) चरवाहे |
| 3. कहानी | (1) प्रेमचन्द (2) जयशंकर प्रसाद | (1) पंच परमेश्वर, (2) ईदगाह (1) आकाशदीप, (2) गुण्डा |
| 4. उपन्यास | (1) प्रेमचन्द (2) भगवतीचरण वर्मा | (1) गोदान, (2) गबन (1) चित्रलेखा, (2) भूले-बिसरे चित्र |
| 5. निबन्ध | (1) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (2) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी | (1) चिन्तामणि, (2) रस-मीमांसा (1) आलोक पर्व, (2) कल्पलता |
| 6. आलोचना | (1) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी (2) बाबू श्यामसुन्दर दास | (1) कालिदास की निरंकुशता, (2) रसज्ञ-रंजन (1) साहित्यालोचन, (2) रूपक रहस्य |
| 7. आत्मकथा | (1) कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशा (2) यशपाल | (1) आधे रास्ते और सीधी चट्टान (1) सिंहावलोकन |
| 8. जीवनी | (1) अमृतराय (2) विष्णु प्रभाकर | (1) कलम का सिपाही (प्रेमचन्द की जीवनी) (1) आवारा मसीहा (शरत् चन्द्र की जीवनी) |
| 9. संस्मरण | (1) राहुल सांकृत्यायन (2) रामवृक्ष बेनीपुरी | (1) जिनका मैं कृतज्ञ, (2) मेरे असहयोग के साथी (1) जजीरें और दीवारें, (2) मील के पत्थर |
| 10. यात्रावृत्त | (1) राहुल सांकृत्यायन (2) रामवृक्ष बेनीपुरी | (1) हिमालय परिचय, (2) घुमक्कड़शास्त्र (1) पैरों में पंख बाँधकर, (2) उड़ते चलें |
| 11. रेखाचित्र | (1) रामवृक्ष बेनीपुरी (2) महादेवी वर्मा | (1) माटी की मूरतें, (2) लाल तारा (1) अतीत के चलचित्र, (2) स्मृति की रेखाएँ |
| 12. गद्यगीत | (1) राय कृष्णदास (2) वियोगी हरि | (1) साधना, (2) छायापथ (1) तरंगिणी, (2) श्रद्धाकण |
| 13. रिपोर्ताज | (1) रांगेय राघव (2) धर्मवीर भारती | (1) तूफानों के बीच (1) युद्ध यात्रा |
| 14. भेंटवार्त्ता | (1) लक्ष्मीचन्द्र जैन (2) राजेन्द्र यादव | (1) भगवान् महावीर : एक इण्टरव्यू (1) चेखव : एक इण्टरव्यू |
| 15. पत्र साहित्य | (1) हरिवंशराय बच्चन (2) वियोगी हरि | (1) पन्त के दो सौ पत्र बच्चन के नाम (1) बड़ों के प्रेरणादायक कुछ पत्र |
| 16. डायरी | (1) मोहन राकेश (2) सुन्दरलाल त्रिपाठी | (1) मोहन राकेश की डायरी (1) दैनन्दिनी |
(घ) युगानुसार प्रमुख विधाओं के दो-दो रचनाकार और उनकी एक-एक रचनाएँ
| काल | निबन्धकार | उपन्यासकार | नाटककार | कहानीकार | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| लेखक | रचना | लेखक | रचना | लेखक | रचना | लेखक | रचना | |
| भारतेन्दु युग | (1) प्रतापनारायण मिश्र | धोखा | (1) लाला श्रीनिवास द्रास | परीक्षा-गुरु | (1) अम्बिकादत्त व्यास | कथा-कुसुम-कलिका | (1) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र | नील देवी |
| (2) बालकृष्ण भट्ट | राजा और प्रजा | (2) बालकृष्ण भट्ट | नूतन ब्रह्मचारी | (2) चण्डीप्रसाद सिंह | हास्य-रतन | (2) बालकृष्ण भट्ट | नल-दमयन्ती स्वयंवर | |
| द्विवेदी युग | (1) माधवप्रसाद मिश्र | माधवमिश्र निबन्ध-माला | (1) देवकीनन्दन खत्री | चन्द्रकान्ता | (1) राजा राधिकारमण-प्रसाद सिंह | कानों में कंगना | (1) लक्ष्मीप्रसाद | उर्वशी |
| (2) चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' | कछुवा धर्म | (2) किशोरीलाल गोस्वामी | तारा | (2) विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक' | रक्षाबन्धन | (2) शिवनन्दन सहाय | सुदामा | |
| शुक्ल युग (छायावादी युग) | (1) रामचन्द्र शुक्ल | चिन्तामणि | (1) प्रेमचन्द | गबन | (1) जयशंकर प्रसाद | पुरस्कार | (1) जयशंकर प्रसाद | चन्द्रगुप्त |
| (2) गुलाबराय | ठलुआ क्लब | (2) चतुरसेन शास्त्री | आत्मदाह | (2) प्रेमचन्द | पंच परमेश्वर | (2) हरिकृष्ण 'प्रेमी' | प्रतिशोध | |
| शुक्लोत्तर युग (छायावादोत्तर युग) | (1) हजारीप्रसाद द्विवेदी | कल्पलता | (1) यशपाल | झूठा सच | (1) इलाचन्द्र जोशी | आहुति | (1) उपेन्द्रनाथ 'अश्क' | जय-पराजय |
| (2) जैनेन्द्र कुमार | जड़ की बात | (2) भगवतीचरण वर्मा | भूले-बिसरे चित्र | (2) भगवतशरण उपाध्याय | सवेरा | (2) विष्णु प्रभाकर | कुहासा और किरण | |
| स्वातन्त्र्योत्तर युग | (1) विद्यानिवास मिश्र | तुम चन्दन हम पानी | (1) स० ही० वात्स्यायन 'अज्ञेय' | शेखर : एक जीवनी | (1) भीष्म साहनी | वाङ् चू | (1) विष्णु प्रभाकर | नव प्रभात |
| (2) रामधारी सिंह 'दिनकर' | संस्कृति के चार अध्याय | (2) धर्मवीर भारती | गुनाहों का देवता | (2) कमलेश्वर | कस्बे का राजा | (2) विनोद रस्तोगी | बर्फ की मीनार |
(ङ) हिन्दी-गद्य-साहित्य का इतिहास : एक दृष्टि में
| युग का नाम | कालावधि | प्रमुख लेखक | प्रमुख रचनाएँ | प्रमुख विधाएँ | प्रमुख भाषा | विशेष |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1. प्राचीन युग या आदि युग | 13वीं शताब्दी से सन् 1868 ई० | मुनि जिनविजय, संग्राम सिंह | राजस्थानी गद्य | जैन धर्म के उपदेश और सिद्धान्तों की रचना | ||
| (ख) ब्रजभाषा गद्य | 16वीं-17वीं शताब्दी | बिठ्ठलदास, गोकुलनाथ, नाभादास, बैकुण्ठमणि शुक्ल, बनारसीदास, वैष्णवदास | श्रृंगार रस-मण्डन, चौरासी वार्ता, वैष्णवन की वार्ता, दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता, अष्टयाम, चरितकथा, वार्ता बनारसी विलास, अगहन माहात्म्य, वैशाख माहात्म्य, भक्तमाल प्रसंग | टीकाएँ, कथाएँ, जीवनी आदि | ब्रजभाषा गद्य | ब्रजभाषा का अपरिमार्जित गद्य ही प्रयुक्त हुआ है। यह गद्य मौलिक, अनूदित, टीकात्मक व पद्यप्रधान है। |
| (ग) खड़ी बोली का जागरण युग | 17वीं-18वीं शताब्दी | जटमल, कवि गंग, रामप्रसाद निरंजनी, पं० दौलतराम | गोरा बादल की कथा, चन्द-छन्द-बरनन की महिमा, भाषा-योग-वाशिष्ठ, पद्मपुराण | कथा वार्ता | ब्रजमिश्रित खड़ी बोली | |
| (घ) खड़ी बोली का उन्नयन | 18वीं शताब्दी | मुंशी सदासुखलाल, इंशा अल्ला खाँ, लल्लूलाल, सदल मिश्र | सुखसागर, प्रेमसागर, रानी केतकी की कहानी, नासिकेतोपाख्यान | कहानी, उपन्यास, आख्यान | ब्रजमिश्रित खड़ी बोली | |
| (ङ) पूर्व भारतेन्दु युग | 19वीं शताब्दी के मध्य सन् 1868 ई० तक | राजा शिवप्रसाद 'सितारेहिन्द', राजा लक्ष्मणसिंह | अभिज्ञानशाकुन्तलम् | अनुवाद | अरबी-फारसी मिश्रित खड़ी बोली | समाचार पत्रों के प्रकाशन का आरम्भ |
| 2. भारतेन्दु-युग | 19वीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध (सन् 1868 से 1900 ई० तक) | भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, बालकृष्ण भट्ट, प्रतापनारायण मिश्र, बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन', किशोरीलाल गोस्वामी आदि। | भारत-दुर्दशा, कलिकौतुक, काव्य-मीमांसा, महाराणा प्रताप, आनन्द-रघुनन्दन, नहुष, इन्दुमति। | नाटक, कहानी, निबन्ध, आलोचना | विदेशी शब्दों तथा ब्रजभाषा से युक्त खड़ी बोली | हरिश्चन्द्र मैगजीन, हरिश्चन्द्र चन्द्रिका, कविवचन-सुधा, ब्राह्मण, आनन्द कादम्बिनी, हिन्दी-प्रदीप आदि पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन हुआ। |
| 3. द्विवेदी-युग | सन् 1900 ई० से सन् 1922 ई० तक | महावीरप्रसाद द्विवेदी, श्यामसुन्दर दास, गुलाबराय, जयशंकर प्रसाद, सरदार पूर्णसिंह, चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी', मिश्रबन्धु, बालमुकुन्द गुप्त आदि। | रसज्ञ-रंजन, हिन्दी-भाषा की उत्पत्ति, हिन्दी-भाषा और साहित्य साहित्यालोचन, | रूपक-रहस्य, कहानी, उपन्यास, निबन्ध, आलोचना, नाटक, जीवनी | परिमार्जित व परिष्कृत खड़ी बोली | अनेक पत्रिकाओं का प्रकाशन, भाषा परिष्कार का महत्त्वपूर्ण कार्य, सरस्वती, इन्दु, मर्यादा, समालोचक, सुदर्शन, प्रभा, माधुरी आदि पत्रिकाओं का प्रकाशन हुआ। |
| 4. शुक्ल-युग (छायावादयुगीन गद्य) | सन् 1919 ई० से सन् 1938 ई० तक | आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, राय कृष्णदास, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचन्द, गुलाबराय, हजारीप्रसाद द्विवेदी, नन्ददुलारे वाजपेयी, हरिकृष्ण प्रेमी, पन्त, माखनलाल चतुर्वेदी, पाण्डेय बेचन शर्मा 'उग्र', 'निराला', महादेवी वर्मा | चिन्तामणि, चन्द्रगुप्त, गोदान, कर्मभूमि, पुनर्नवा, हिन्दी साहित्य का मान, एकांकी, हिन्दी साहित्य का इतिहास, उपन्यास, आदिकाल जीवनी, रेखाचित्र, संस्मरण आदि। | नाटक, आलंकारिकता कहानी, से परिपूर्ण खड़ी बोली | निबन्ध के विकास का महत्त्वपूर्ण युग | |
| 5. शुक्लोत्तर-युग (छायावादोत्तर युग) | सन् 1938 ई० से सन् 1947 ई० तक | आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, अमृतलाल नागर, वृन्दावनलाल वर्मा, सेठ गोविन्ददास, अज्ञेय, इलाचन्द्र जोशी, जैनेन्द्र कुमार, रांगेय राघव, यशपाल, नन्ददुलारे वाजपेयी, फणीश्वरनाथ रेणु, लक्ष्मीनारायण मिश्र, रामवृक्ष बेनीपुरी | बाणभट्ट की आत्मकथा, मृगनयनी, स्मृति की रेखाएँ, विराटा की पद्मिनी, मैला आँचल, सुनीता, सुखदा, अशोक के फूल, अतीत के चलचित्र, श्रृंखला की कड़ियाँ आदि। | नाटक, निबन्ध, एकांकी, कहानी, उपन्यास, आलोचना, रेखाचित्र, संस्मरण, रिपोर्ताज, ललित-निबन्ध, रेडियो-रूपक, गद्यगीत आदि। | शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग, चिन्तन की प्रधानता | इस युग को प्रगतिवादी युग भी कहा जाता है। |
| 6. स्वातन्त्र्योत्तर युग | सन् 1947 ई० से आज तक | रामधारी सिंह 'दिनकर', अज्ञेय, उपेन्द्रनाथ अश्क, डॉ० नगेन्द्र, विद्यानिवास मिश्र, भगवतीचरण वर्मा, धर्मवीर भारती, विष्णु प्रभाकर, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, शिवानी, उषादेवी मित्रा। | संस्कृति के चार अध्याय, विचार और वितर्क, विचार और विवेचन, लहरों के राजहंस, सारा आकाश, साहित्य की चेतना, आवारा मसीहा, गुनाहों के देवता, नदी के द्वीप, शेखर : एक जीवनी आदि। | नाटक, विश्लेषण, कहानी, उपन्यास, आलोचना, रेखाचित्र, संस्मरण, ललित निबन्ध, रिपोर्ताज, आत्मकथा, डायरी, भेंटवार्ता, जीवनी आदि | प्रधान, प्रांजल और साहित्यिक खड़ी बोली | विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन। धर्मयुग, कादम्बिनी जैसी महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं का निरन्तर प्रकाशन। पिछले कुछ वर्षों से हंस नामक साहित्यिक पत्र का प्रकाशन हो रहा है तथा धर्मयुग का प्रकाशन बाधित है। |
विशेष -
(1) भारतेन्दु युग का प्रारम्भ उनकी प्रथम पत्रिका 'कवि वचन सुधा' के प्रकाशन से माना गया है।
(2) एक ही लेखक दो विभिन्न युगों में भी लिखते रहे हैं, इसीलिए उनका नाम दोनों युगों में दिया गया है।
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