UP Board Solutions Class 11 Geography Chapter 8 Weather Instruments. Maps and Charts

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Detailed Chapter 8 मौसम संबंधी उपकरण। मानचित्र और चार्ट UP Board Solutions for Class 11 Geography

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Class 11 Geography Chapter 8 मौसम संबंधी उपकरण। मानचित्र और चार्ट UP Board Solutions PDF

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।
(i) प्रत्येक दिन के लिए भारत के मौसम मानचित्र का निर्माण कौन-सा विभाग करता है?
(क) विश्व मौसम संगठन
(ख) भारतीय मौसम विभाग
(ग) भारतीय सर्वेक्षण विभाग
(घ) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ख) भारतीय मौसम विभाग
In simple words: भारत में दैनिक मौसम मानचित्रों का निर्माण भारतीय मौसम विभाग द्वारा किया जाता है ताकि मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध हो सके।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्न में अक्सर सरकारी विभागों या संगठनों के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें जो सीधे देश से संबंधित हों।

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।
(ii) उच्च एवं निम्न तापमानों में कौन-से द्रवों का प्रयोग किया जाता है?
(क) पारी एवं जल
(ख) जल एवं अल्कोहल ।
(ग) पारा एवं अल्कोहल
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
Answer: (ग) पारा एवं अल्कोहल
In simple words: तापमापी में पारा और अल्कोहल का उपयोग किया जाता है क्योंकि ये द्रव तापमान के साथ नियमित रूप से फैलते और सिकुड़ते हैं, जिससे सटीक माप संभव होता है।

🎯 Exam Tip: तापमापी में उपयोग होने वाले पदार्थों की भौतिक विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके जमने और उबलने के बिंदु।

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।
(iii) समान दाब वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखाओं को क्या कहा जाता है?
(क) समदाब रेखाएँ
(ख) समवर्षा रेखाएँ
(ग) समताप रेखाएँ
(घ) आइसोहेल रेखाएँ।
Answer: (क) समदाब रेखाएँ
In simple words: समदाब रेखाएँ मानचित्रों पर उन स्थानों को जोड़ती हैं जहाँ वायुमंडलीय दाब समान होता है, जिससे दाब के वितरण को समझने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न आइसोलाइन (सम-रेखाओं) के अर्थ को समझना महत्वपूर्ण है, जैसे समदाब (दाब), समताप (तापमान), और समवर्षा (वर्षा)।

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।
(iv) मौसम पूर्वानुमान का प्राथमिक यन्त्र है
(क) तापमापी
(ख) दाबमापी
(ग) मानचित्र
(घ) मौसम चार्ट
Answer: (घ) मौसम चार्ट
In simple words: मौसम चार्ट प्राथमिक उपकरण है जो विभिन्न मौसमी तत्वों और वायुमंडलीय दशाओं को दर्शाकर मौसम का पूर्वानुमान लगाने में सहायता करता है।

🎯 Exam Tip: मौसम पूर्वानुमान के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न उपकरणों और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।
(v) अगर वायु में आर्द्रता अधिक है, तब आई एवं शुष्क बल्ब के बीच पाठचांक का अन्तर होगा
(क) कम ।
(ख) अधिक
(ग) समान
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) कम
In simple words: जब वायु में आर्द्रता अधिक होती है, तो गीले बल्ब से वाष्पीकरण कम होता है, जिससे गीले बल्ब का तापमान सूखे बल्ब के तापमान के करीब होता है और दोनों के पाठ्यांक में अंतर कम हो जाता है।

🎯 Exam Tip: शुष्क और आर्द्र बल्ब तापमापी के सिद्धांत को समझना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से आर्द्रता और वाष्पीकरण के बीच संबंध को।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(i) मौसम के मूल तत्त्व क्या हैं?
Answer: मौसम तत्त्वों के अन्तर्गत तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता तथा मेघों की दशाएँ सम्मिलित हैं। इन तत्त्वों के आधार पर वायुमण्डलीय दशाओं में कम समय अन्तराल पर परिवर्तन होता रहता है। इन्हीं तत्त्वों के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है।
In simple words: मौसम के मूल तत्वों में तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता और बादल शामिल हैं, जो वायुमंडलीय परिस्थितियों को निर्धारित करते हैं और जिनके आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है।

🎯 Exam Tip: मौसम के प्रमुख तत्वों को याद रखें और समझें कि ये तत्व एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(ii) मौसम चार्ट क्या है?
Answer: मौसम पूर्वानुमान के लिए मौसम चार्ट प्राथमिक यन्त्र है। ये विभिन्न वायुमण्डलीय दशाओं; जैसे-वायुराशियों, वायुदाब यन्त्रों, वाताग्रों तथा वर्षण को जानने एवं पहचानने में सहयोग करते हैं।
In simple words: मौसम चार्ट एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो वायुराशियों, वायुदाब और वर्षा जैसी विभिन्न वायुमंडलीय स्थितियों को दर्शाकर मौसम के पूर्वानुमान में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: मौसम चार्ट की परिभाषा और उसके मुख्य उपयोगों को याद रखना चाहिए, खासकर मौसम पूर्वानुमान में उसकी भूमिका।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(iii) वर्ग 1 के वेधशालाओं में सामान्यतः कौन-सा यन्त्र मौसम परिघटनाओं को मापने के लिए होता है?
Answer: भारत में मौसम वेधशालाओं को उनके यन्त्रों तथा प्रतिदिन लिए गए प्रेक्षणों की संख्या के आधार पर पाँच वर्गों में विभाजित किया जाता है। इनमें उच्चतम वर्ग-1 की वेधशाला है। वर्ग-1 की वेधशाला में अग्रलिखित यन्त्रों द्वारा मौसम के तत्त्वों को मापन किया जाता है
1. अधिकतम एवं न्यूनतम तापमापी,
2. पनवेग तथा वात-दिग्दर्शी,
3. शुष्क एवं आर्द्र बल्ब तापमाण,
4. वर्षामापी तथा
5. वायुदाबमापी ।
In simple words: वर्ग-1 की वेधशालाएँ मौसम के विभिन्न तत्वों जैसे तापमान, पवन की दिशा और गति, आर्द्रता, वर्षा और वायुदाब को मापने के लिए कई उन्नत उपकरणों का उपयोग करती हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न वेधशाला वर्गों और उनमें उपयोग होने वाले प्रमुख उपकरणों की सूची को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(iv) समताप रेखाएँ क्या हैं?
Answer: मानचित्र पर समान तापमान वाले स्थानों को मिलाकर खींची गई रेखाएँ समताप रेखाएँ कहलाती हैं।
In simple words: समताप रेखाएँ मानचित्र पर उन बिंदुओं को जोड़ती हैं जहाँ तापमान समान होता है, जिससे पूरे क्षेत्र में तापमान के वितरण को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: आइसोथर्म (समताप रेखाएं) की परिभाषा और उनके महत्व को समझें, विशेष रूप से तापमान के क्षेत्रीय वितरण को दर्शाने में।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(v) निम्नलिखित को मौसम मानचित्र पर चिह्नित करने के लिए किस प्रकार के मौसम प्रतीकों का प्रयोग किया जाता है?
(क) धुन्ध, (ख) सूर्य का प्रकाश, (ग) तड़ित, (घ) मेघों से ढका आकाश
Answer:

वर्णनप्रतीक
(क) धुन्ध
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक धुंध को दर्शाता है, जिसमें हवा में छोटी-छोटी पानी की बूंदें होती हैं जिससे दृश्यता कम हो जाती है।
(ख) सूर्य का प्रकाश
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक सूर्य के प्रकाश को दर्शाता है, जो स्पष्ट और धूप वाले मौसम का संकेत देता है।
(ग) तड़ित
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक तड़ित (बिजली) को दर्शाता है, जो तूफान और बिजली गिरने की संभावना का संकेत देता है।
(घ) मेघों से ढका आकाश
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक मेघों से ढके आकाश को दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि आकाश पूरी तरह या आंशिक रूप से बादलों से घिरा हुआ है।

In simple words: मौसम मानचित्र पर विभिन्न मौसमी घटनाओं जैसे धुंध, सूर्य प्रकाश, तड़ित और मेघाच्छादित आकाश को दर्शाने के लिए विशिष्ट प्रतीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे मौसम की स्थिति को आसानी से समझा जा सके।

🎯 Exam Tip: मौसम मानचित्रों पर उपयोग होने वाले सामान्य प्रतीकों को पहचानना और उनके अर्थ को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर सीधे पूछे जाते हैं।

 

Question 3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 125 शब्दों में दें
(i) मौसम मानचित्रों एवं चार्टी को किस प्रकार तैयार किया जाता है तथा ये हमारे लिए कैसे उपयोगी हैं?
Answer: मौसम मानचित्र पृथ्वी या उसके किसी भाग का अल्प समय (एक दिन) के मौसमी परिघटनाओं का समतल धरातल पर प्रदर्शन है। इन मानचित्रों पर एक निश्चित दिन के विभिन्न मौसम तत्त्वों; जैसे- तापमान, वर्षा, सूर्य का प्रकाश, मेघमयता, वायु की दिशा एवं वेग, वायुदाब इत्यादि को दर्शाया जाता है। इनको तैयार करने में केन्द्रीय कार्यालय द्वारा प्राप्त सूचनाओं, अभिलेख, निर्धारित प्रतीक या चिह्न और मौसम मानचित्र विधियों का प्रयोग किया जाता है। अतः मौसम मानचित्र बनाने के लिए मौसम सम्बन्धी सूचनाओं और प्रतीकों का सम्यक् ज्ञान आवश्यक है। इन्हीं चिह्नों या प्रतीकों को विभिन्न स्थानों की सूचनाओं के साथ निर्धारित केन्द्रों पर अवस्थित किया जाता है। भारत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना के बाद से मौसम मानचित्र एवं चार्यों को नियमित रूप से तैयार किया जाता है। मौसम चार्ट में मौसम सम्बन्धी सूचनाओं एवं प्रतीकों को प्रदर्शित किया जाता है। इस चार्ट के माध्यम से कम स्थान पर मौसम सम्बन्धी अधिकतम सूचनाएँ प्राप्त हो जाती हैं। इनको तैयार करने में मानचित्र की आवश्यकता नहीं होती, केवल मौसम सूचनाओं को प्रतीकों द्वारा क्रमबद्ध रूप से संयोजन किया जाता है। मौसम मानचित्र एवं मौसम चार्ट सम्बन्धित स्थान की मौसम दशाओं को समझने में अत्यन्त उपयोगी हैं। इनके आधार पर निर्धारित स्थान की मौसम दशाओं के आधार पर कृषि एवं अन्य कार्यों की विशेष योजनाएँ तैयार की जा सकती हैं जो सामाजिक-आर्थिक विकास की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होती हैं।
In simple words: मौसम मानचित्र और चार्ट विभिन्न मौसम तत्वों को प्रतीकों और विधियों का उपयोग करके दर्शाते हैं, जिससे मौसम की स्थिति को समझने और कृषि तथा अन्य गतिविधियों के लिए योजना बनाने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: मौसम मानचित्रों की तैयारी की प्रक्रिया और उनके सामाजिक-आर्थिक महत्व को विस्तार से समझें, क्योंकि यह एक व्यापक विषय है।

 

मानचित्र पठन

 

Question 1. पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 एवं 8.13 को पढे एवं निम्न प्रश्नों के उत्तर दें
(i) इन मानचित्रों में किन ऋतुओं को दर्शाया गया है?
Answer: मानचित्र 8.12 में शीत ऋतु (जनवरी माह) की दशाओं को तथा मानचित्र 8.13 में ग्रीष्म ऋतु (जुलाई माह) की दशाएँ दर्शाई गई हैं।
In simple words: चित्र 8.12 जनवरी की शीत ऋतु को और चित्र 8.13 जुलाई की ग्रीष्म ऋतु को दर्शाता है, जिससे इन महीनों की मौसमी दशाओं की तुलना की जा सके।

🎯 Exam Tip: मानचित्रों में दर्शाई गई ऋतुओं की पहचान करना और उन ऋतुओं की प्रमुख विशेषताओं को जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 एवं 8.13 को पढे एवं निम्न प्रश्नों के उत्तर दें
(ii) पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 में अधिकतम समदाब रेखा का मान क्या है तथा यह देश के किस भाग से गुजर रही है?
Answer: पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 में अधिकतम समदाब रेखा का मान '1020 है। यह देश के उत्तरी-पश्चिमी भाग (जम्मू-कश्मीर) से गुजरती है।
In simple words: चित्र 8.12 में सबसे अधिक समदाब रेखा का मान 1020 मिलीबार है, जो भारत के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से, विशेषकर जम्मू-कश्मीर से होकर गुजरती है, जो उस क्षेत्र में उच्च दाब को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: मानचित्रों पर समदाब रेखाओं के मान और उनके मार्ग को ध्यान से पढ़ना सीखें, क्योंकि यह वायुमंडलीय दाब के वितरण को समझने में मदद करता है।

 

Question 1. पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 एवं 8.13 को पढे एवं निम्न प्रश्नों के उत्तर दें
(iii) पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.13 में सबसे अधिक एवं सबसे कम समदाब रेखाओं का मान क्या है। तथा ये कहाँ स्थित हैं?
Answer: पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.13 में सबसे अधिक 1010 की समदाब रेखा दक्षिण-पश्चिम (केरल) भारत में तथा सबसे न्यून समदाब रेखा 997 उत्तर-पश्चिमी भारत (राजथान से जम्मू-कश्मीर के सीमान्त भाग) में स्थित है।
In simple words: चित्र 8.13 में केरल में अधिकतम समदाब रेखा (1010 मिलीबार) और उत्तर-पश्चिमी भारत (राजस्थान से जम्मू-कश्मीर) में न्यूनतम समदाब रेखा (997 मिलीबार) स्थित है, जो ग्रीष्मकालीन दाब वितरण को दर्शाती है।

🎯 Exam Tip: मानचित्रों पर उच्च और निम्न दाब क्षेत्रों की पहचान करना सीखें, क्योंकि ये पवनों की दिशा और मौसम प्रणालियों को प्रभावित करते हैं।

 

Question 1. पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 एवं 8.13 को पढे एवं निम्न प्रश्नों के उत्तर दें
(iv) दोनों मानचित्रों में तापमान वितरण का प्रतिरूप क्या है?
Answer: पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 में उत्तर की ओर तापमान घटता जाता है तथा चित्रे 8.13 में तापमान उत्तर एवं दक्षिण में अधिक है ।
In simple words: चित्र 8.12 (शीत ऋतु) में तापमान उत्तर की ओर घटता है, जबकि चित्र 8.13 (ग्रीष्म ऋतु) में तापमान उत्तर और दक्षिण दोनों भागों में अधिक पाया जाता है, जो मौसमी भिन्नता को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: तापमान वितरण के प्रतिरूपों को समझना महत्वपूर्ण है, विशेषकर शीत और ग्रीष्म ऋतु में, क्योंकि यह जलवायु के क्षेत्रीय अंतरों को दर्शाता है।

 

Question 1. पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 एवं 8.13 को पढे एवं निम्न प्रश्नों के उत्तर दें
(v) पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 में किस भाग का अधिकतम औसत तापमान तथा न्यूनतम औसत तापमान आप देखते हैं?
Answer: अधिकतम औसत तापमान दक्षिण भारत (25°C तमिलनाडु) में तथा न्यूनतम औसत तापमान (10°C जम्मू-कश्मीर) उत्तरी भारत में है।
In simple words: चित्र 8.12 में अधिकतम औसत तापमान दक्षिणी भारत के तमिलनाडु में (25°C) और न्यूनतम औसत तापमान उत्तरी भारत के जम्मू-कश्मीर में (10°C) दर्ज किया गया है, जो शीत ऋतु में क्षेत्रीय तापमान भिन्नता को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: मानचित्रों से अधिकतम और न्यूनतम तापमान मानों को सटीक रूप से पढ़ना और उन्हें संबंधित भौगोलिक क्षेत्रों से जोड़ना सीखें।

 

Question 1. पाठ्य-पुस्तक चित्र 8.12 एवं 8.13 को पढे एवं निम्न प्रश्नों के उत्तर दें
(vi) दोनों मानचित्रों में आप तापमान वितरण एवं वायुदाब के बीच क्या सम्बन्ध देखते हैं?
Answer: तापमान बढ़ता है और वायुदाब कम होता जाता है।
In simple words: दोनों मानचित्रों में तापमान बढ़ने पर वायुदाब कम होता है, जो एक सामान्य वायुमंडलीय संबंध है क्योंकि गर्म हवा फैलती है और हल्की होकर ऊपर उठती है, जिससे सतह पर दाब कम हो जाता है।

🎯 Exam Tip: तापमान और वायुदाब के बीच व्युत्क्रम संबंध को समझना महत्वपूर्ण है, यह कई मौसमी घटनाओं का आधार है।

 

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

 

Question 1. मौसम मानचित्र क्या है? इसका प्रकाशन किस प्रकार होता है?
Answer: मौसम मानचित्र प्रायः किसी स्थान की एक समय-विशेष की वायुमण्डलीय दशाओं के योग को मौसम कहा जाता है। तापमान, वायुदाबे, आर्द्रता, वर्षा, पवनें तथा आकाशीय दशाएँ वायुमण्डल के प्रमुख अंग हैं, जिन्हें जलवायु या मौसम के प्रमुख तत्त्व कहा जाता है। जिन मानचित्रों में मौसम-चिह्नों की सहायता से मौसम के विभिन्न तत्त्वों का प्रदर्शन किया जाता है, उन्हें मौसम मानचित्र कहा जाता है। मौसम मानचित्र की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है- 'मौसम मानचित्र उन मानचित्रों को कहते हैं जिनमें किसी क्षेत्र के निश्चित समय के तापमान, वायुदाब, पवन-संचार, वर्षा आदि के विवरण प्रकाशित किए गए हों।' मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए इने मानचित्रों की विशेष सहायता ली जाती है।

मौसम मानचित्रों का प्रकाशन

मौसम मानचित्रों की उपयोगिता को देखते हुए भारत सरकार ने इनके नियमित प्रकाशन हेतु मौसम विज्ञान की स्थापना की है। इस विभाग का मुख्य कार्यालय पुणे (महाराष्ट्र) में है। उत्तरी भारत में मौसम निदेशालय (Directorate of Meteorology) की स्थापना लोधी रोड, नई दिल्ली में की गई है। इस विभाग द्वारा देश के विभिन्न भागों में स्थित वेधशालाओं से मौसम सम्बन्धी आँकड़े एवं विवरण प्राप्त किए जाते हैं, उन्हीं के आधार पर प्रतिदिन मौसम मानचित्रों की रचना की जाती है। मौसम मनिचित्रों में मौसम सम्बन्धी विवरण मौसम-चिह्नों की सहायता से प्रकाशित किए जाते हैं। यह विभाग मौसम मानचित्रों के साथ-साथ प्रतिदिन मौसम भविष्यवाणियों का रेडियो तथा दूरदर्शन से प्रसारण भी करता है।
In simple words: मौसम मानचित्र एक विशेष समय पर किसी स्थान की वायुमंडलीय स्थितियों को दर्शाते हैं, जिसमें तापमान, दाब, पवन और वर्षा जैसे तत्व शामिल होते हैं, और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा नियमित रूप से प्रकाशित किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: मौसम मानचित्र की परिभाषा, उसके प्रमुख तत्व और भारत में उसके प्रकाशन की प्रक्रिया को जानें, क्योंकि यह भौगोलिक अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question 2. मौसम मानचित्रों में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार के मौसम चिह्न या प्रतीक बनाइए।
या मौसम चिह्न क्या हैं? विभिन्न प्रकार के मौसम चिह्नों को प्रदर्शित कीजिए ।
Answer: मौसम चिह्न मौसम मानचित्रों में मौसम के विभिन्न विवरण दर्शाने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें मौसम चिह्न कहते हैं। चिह्नों के अभाव में मानचित्रों की उपयोगिता समाप्त हो जाती है। वस्तुतः मौसम मानचित्रों का अध्ययन अधूरा है। मौसम-चिह्नों का प्रयोग सर्वप्रथम एडमिरल ब्यूफोर्ट ने 1805 ई० में किया था। 1935 ई० में वारसा में सम्पन्न अन्तर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान सम्मेलन ने इन चिह्नों को मान्यता प्रदान कर दी है। अब इनका प्रयोग अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों में प्रकाशित होने वाले मौसम मानचित्रों में किया जाने लगा है। महत्त्वपूर्ण मौसम चिह्न अग्रांकित हैं-

वर्णनप्रतीकवर्णनप्रतीकवर्णनप्रतीक
शुद्ध हवा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक साफ और शांत हवा को दर्शाता है, जहाँ कोई वायुमंडलीय विक्षोभ नहीं होता है।
हिम की बौछार
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक बर्फ की बौछार को दर्शाता है, जिसमें बर्फ के टुकड़े अचानक और तीव्र गति से गिरते हैं।
धवल तुषार (पाला)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक धवल तुषार या पाले को दर्शाता है, जो ठंडी सतहों पर जमे हुए पानी के क्रिस्टल होते हैं।
धुँध
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक धुंध को दर्शाता है, जिसमें छोटी पानी की बूंदें हवा में निलंबित होती हैं, जिससे दृश्यता कम हो जाती है।
सहिम वृष्टि और बर्फ की बौछार
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक सहिम वृष्टि और बर्फ की बौछार दोनों को एक साथ दर्शाता है, जो ठंडे मौसम की स्थिति है।
काचाभ तुषार
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक काचाभ तुषार को दर्शाता है, जो ठंडी सतहों पर बनने वाले बर्फ की एक चिकनी, पारदर्शी परत होती है।
कुहासा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक कुहासा दर्शाता है, जो धुंध से कम घना होता है लेकिन दृश्यता को प्रभावित करता है।
साधारण वर्षा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक सामान्य और हल्की वर्षा को दर्शाता है।
मुलायम तुहिन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक मुलायम तुहिन (फ्रोस्ट) को दर्शाता है, जो ठंडी और नम हवा में बनता है।
कुहरा V < 1 किमी
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि कुहरा है और दृश्यता 1 किलोमीटर से कम है, जो घनी धुंध की स्थिति है।
मुलायम ओले
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक मुलायम ओलों को दर्शाता है, जो बर्फ के नरम गोले होते हैं।
कठोर तुहिन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक कठोर तुहिन को दर्शाता है, जो ठंडी हवा में बनने वाले बर्फ के ठोस क्रिस्टल होते हैं।
हल्का कुहरा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक हल्की कुहरे की स्थिति को दर्शाता है, जहाँ दृश्यता थोड़ी कम होती है लेकिन बहुत अधिक नहीं।
छोटे ओले
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक छोटे ओलों को दर्शाता है, जो आमतौर पर बर्फ के छोटे टुकड़ों के रूप में गिरते हैं।
झंझा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक झंझा (तेज तूफान) को दर्शाता है, जिसमें तेज हवाएं और अचानक मौसम परिवर्तन होते हैं।
धरातलीय कुहरा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक धरातल पर बनी कुहरे को दर्शाता है, जो जमीन के करीब बनती है और ऊपर का आकाश साफ हो सकता है।
ओला
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक ओला दर्शाता है, जो बड़े बर्फ के गोले होते हैं और अक्सर गंभीर तूफानों से जुड़े होते हैं।
सूर्य प्रकाश (धूप)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक स्पष्ट सूर्य के प्रकाश और धूप वाले मौसम को दर्शाता है।
तुषार कुहरा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक ठंडी हवा में बनने वाले तुषार कुहरे को दर्शाता है, जिसमें बर्फ के छोटे क्रिस्टल होते हैं।
दूर में बिजली चमकना
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दूर से चमकती हुई बिजली को दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि तूफान पास में है।
सौर प्रभामंडल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक सूर्य के चारों ओर बनने वाले प्रभामंडल को दर्शाता है, जो वायुमंडलीय प्रकाशिकी घटना है।
फुहार
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक हल्की और बारीक बारिश की फुहार को दर्शाता है।
तड़ित झंझा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक तड़ित झंझा (गरज-चमक) को दर्शाता है, जिसमें बिजली, गरज और अक्सर तेज हवा और बारिश होती है।
चन्द्र प्रभामंडल
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक चंद्रमा के चारों ओर बनने वाले प्रभामंडल को दर्शाता है, जो वायुमंडलीय प्रकाशिकी घटना है।
वर्षा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक सामान्य बारिश को दर्शाता है, जिसमें पानी की बूंदें आकाश से गिरती हैं।
अपवाही हिम (ऊपर)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक हवा में ऊपर की ओर बहती हुई बर्फ को दर्शाता है, जिससे दृश्यता कम हो सकती है।
सौर किरीट
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक सूर्य के किरीट (कोरोना) को दर्शाता है, जो सूर्य ग्रहण के दौरान दिखाई देता है।
हिमपात
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक बर्फबारी को दर्शाता है, जहाँ बर्फ के टुकड़े आकाश से गिरते हैं।
हिम झंझा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक हिम झंझा (बर्फ़ीला तूफान) को दर्शाता है, जिसमें तेज हवा और बर्फबारी होती है।
चन्द्र किरीट
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक चंद्रमा के किरीट को दर्शाता है, जो चंद्रमा के चारों ओर प्रकाश का एक घेरा होता है।
सहिम वृष्टि
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक बर्फ के साथ बारिश को दर्शाता है, जिसमें पानी की बूंदें जमने लगती हैं।
अपवाही हिम (धरती के समीप)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक जमीन के करीब बहती हुई बर्फ को दर्शाता है, जिससे जमीनी स्तर पर दृश्यता कम हो जाती है।
इन्द्रधनुष
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक इन्द्रधनुष को दर्शाता है, जो बारिश के बाद सूर्य के प्रकाश के अपवर्तन से बनता है।
बर्फ के कण
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक बर्फ के छोटे कणों को दर्शाता है, जो हवा में निलंबित होते हैं।
धूल भरी आँधी
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक धूल भरी आँधी को दर्शाता है, जिसमें तेज हवा के साथ धूल और रेत उड़ती है, जिससे दृश्यता बहुत कम हो जाती है।
उत्तर ध्रुवीय ज्योति
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक उत्तर ध्रुवीय ज्योति (ऑरोरा बोरियालिस) को दर्शाता है, जो ध्रुवीय क्षेत्रों में आकाश में दिखने वाली रंगीन रोशनी है।
बर्फ के टुकड़े
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़ों को दर्शाता है, जो आमतौर पर ओलों से छोटे होते हैं।
अंधड़
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक अंधड़ (रेत के तूफान) को दर्शाता है, जिसमें तेज हवाएं और धूल होती है, जिससे दृश्यता बेहद कम हो जाती है।
मरीचिका
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक मरीचिका को दर्शाता है, जो वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण बनने वाला एक प्रकाशीय भ्रम है।
बर्फ सूई
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक बर्फ की सूइयों को दर्शाता है, जो ठंडी हवा में बनते हुए बर्फ के क्रिस्टल होते हैं।
हिमाच्छादित
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक हिमाच्छादित स्थिति को दर्शाता है, जहाँ सतह बर्फ या पाले से ढकी होती है।
राशि वक्रीय प्रकाश
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक राशि वक्रीय प्रकाश को दर्शाता है, जो गोधूलि के बाद या भोर से पहले आकाश में दिखाई देने वाली एक हल्की चमक है।
वर्षा की बौछार
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक बारिश की छोटी और तीव्र बौछार को दर्शाता है, जो कम समय के लिए होती है।
ओस
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक ओस को दर्शाता है, जो सतहों पर संघनित जल की छोटी बूंदें होती हैं।
स्वच्छ आकाश
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक पूरी तरह से साफ आकाश को दर्शाता है, जिसमें कोई बादल नहीं होता है।

मेघ दशाचिह

मेघ की दशाओं या मेघाच्छादन की मात्रा के चिह्न निम्नांकित चित्र 8.2 में दर्शाए गए हैं
मेघाच्छादन के चिह्नमेघाच्छादन की मात्रामेघाच्छादन के चिह्नमेघाच्छादन की मात्रा

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि आकाश का केवल 1/8वां भाग बादलों से ढका हुआ है, यानी अधिकतर आकाश साफ है।
1/8 आकाश मेघाच्छादित
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि आकाश का 3/4वां भाग बादलों से ढका हुआ है, यानी बहुत अधिक बादल छाए हुए हैं।
3/4 आकाश मेघाच्छादित

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि आकाश का 1/4वां भाग बादलों से ढका हुआ है, यानी आंशिक रूप से बादल छाए हुए हैं।
1/4 आकाश मेघाच्छादित
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि आकाश का 7/8वां भाग बादलों से ढका हुआ है, यानी लगभग पूरा आकाश बादलों से ढका है।
7/8 आकाश मेघाच्छादित

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि आकाश का 3/8वां भाग बादलों से ढका हुआ है, जिससे मध्यम बादल छाए हुए प्रतीत होते हैं।
3/8 आकाश मेघाच्छादित
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि आकाश पूरी तरह से बादलों से ढका हुआ है, जहाँ कोई नीला आकाश नहीं दिखाई देता है।
पूर्णतः मेघाच्छादित

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि आकाश का आधा भाग बादलों से ढका हुआ है, जिससे आधे बादल छाए हुए प्रतीत होते हैं।
1/2 आकाश मेघाच्छादित
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि आकाश बादलों से ढका हुआ है और बादल इतने घने हैं कि आकाश धुंधला दिखाई देता है।
मेघों से धुंधला आकाश

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक दर्शाता है कि आकाश का 5/8वां भाग बादलों से ढका हुआ है, यानी अधिकांश आकाश बादलों से घिरा है।
5/8 आकाश मेघाच्छादित
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक पूरी तरह से साफ आकाश को दर्शाता है, जिसमें कोई बादल नहीं होता है।
स्वच्छ आकाश

ब्यूफोर्ट वायुगति चिह

ब्यूफोर्ट संख्यावायुतीरवायु की गतिवायुगति के ध्यानाकर्षक प्रभाव
0.शान्त वायु
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक शांत वायु को दर्शाता है, जहाँ कोई स्पष्ट हवा नहीं होती।
0शान्त, धुएँ का ऊर्ध्वाधर उठना।
1.मन्द वायु
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक हल्की मंद वायु को दर्शाता है, जहाँ हवा की गति बहुत कम होती है।
1-5हवा की दिशा का ज्ञान, धुएँ के प्रवाह की दिशा से होना, परन्तु वातादिक् सूचक द्वारा नहीं।
2.मन्द समीर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक मंद समीर को दर्शाता है, जहाँ हवा की गति थोड़ी बढ़ जाती है।
6-11हवा के कारण वातादिक् सूचक, हिलना, हवा को चेहरे पर महसूस करना, पत्तों से सरसराहट।
3.धीर समीर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक धीर समीर को दर्शाता है, जहाँ हवा की गति मध्यम होती है।
12-19पत्तो और फुनगियों में लगातार गति, हल्के झंडे फहराते हैं।
4.अल्प बल समीर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक अल्प बल समीर को दर्शाता है, जहाँ हवा की गति और तेज़ होती है।
20-28धूल और कागजों को उड़ा देना, छोटी टहनियों का हिलना।
5.सबल समीर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक सबल समीर को दर्शाता है, जहाँ हवा की गति काफी तेज होती है।
29-38छोटे पेड़-पौधों का झूमना।
6.प्रबल समीर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक प्रबल समीर को दर्शाता है, जहाँ हवा की गति बहुत तेज़ होती है।
39-49बड़ी टहनियों में गति, टेलीग्राफ के तारों में हलचल, छतरियों के प्रयोग में कठिनाई।
7.अल्प बल झंझा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक अल्प बल झंझा को दर्शाता है, जिसमें तूफानी हवा की शुरुआत होती है।
50-61सम्पूर्ण वृक्षों में गति, पवन के विपरीत चलने की दिशा में असुविधा।
8.सबल झंझा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक सबल झंझा को दर्शाता है, जिसमें तेज़ तूफानी हवाएं चलती हैं।
62-74छोटी टहनियों का टूटना, चलने में बाधा।
9.प्रबल झंझा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक प्रबल झंझा को दर्शाता है, जिसमें बहुत तेज़ और विनाशकारी हवाएं होती हैं।
75-88कुछ मकान क्षतिग्रस्त होते हैं, चिमनी के सिरे तथा लटकती वस्तुएँ; दुकानों के बोर्ड गिर जाते हैं।
10.पूर्ण झंझा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक पूर्ण झंझा को दर्शाता है, जिसमें अत्यधिक तेज़ और विनाशकारी तूफान की स्थिति होती है।
89-102पेड़ों का जड़ों से उखड़ना, मकानों में काफी क्षति।
11.तूफान
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक तूफान को दर्शाता है, जिसमें अत्यंत तेज़ हवाएं और संभावित व्यापक क्षति होती है।
103-117कभी-कभी आते हैं, बहुत अधिक क्षति।
12.हरिकेन या प्रभंजन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह प्रतीक हरिकेन या प्रभंजन को दर्शाता है, जो सबसे तेज़ और अत्यधिक विनाशकारी तूफानी हवाएं होती हैं।
118 से ऊपरअत्यधिक विनाशकारी।

In simple words: मौसम मानचित्रों में धुंध, वर्षा, पवन दिशा और बादल जैसी विभिन्न मौसमी घटनाओं को दर्शाने के लिए विशिष्ट प्रतीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे मौसम की स्थिति को सरलता से पढ़ा और समझा जा सके।

🎯 Exam Tip: मौसम संबंधी प्रतीकों और ब्यूफोर्ट वायुगति पैमाने को अच्छी तरह से याद रखें, क्योंकि यह मौसम मानचित्रों को समझने के लिए मूलभूत ज्ञान है।

 

Question 3. निम्नलिखित मौसम यन्त्रों का सचित्र वर्णन कीजिए
(i) तापमापी, (ii) वायुदाबमापी, (iii) वातदिग्दर्शी, (iv) पवन वेगमापी, (v) वर्षामापी ।
Answer: (i) तापमापी
किसी स्थान का तापमान थर्मामीटर द्वारा नापा जाता है। अधिकांश तापमापी संकीर्ण बन्द शीशे की नली के रूप में होते हैं, जिनके एक सिरे पर प्रसारित बल्ब होता है। नली के निचले भाग एवं बल्ब में तरल पदार्थ (जैसे- अल्कोहल या पारा) भरा होता है। तापमापी का बल्ब जो वायु के सम्पर्क में रहता है। तात्कालिक अवस्था के परिणामस्वरूप गर्म या ठण्डा होता है। गर्म होने पर पारा ऊपर की ओर चढ़ता है, जबकि ठण्डा होने पर नीचे की ओर गिरता है। शीशे की नली पर एक मापनी बनी होती है, जिससे तापमान पढ़ी जाता है। यह मापनी सेण्टीग्रेड तथा फॉरेनहाइट में तापमान बताती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक अधिकतम तापमापी दर्शाता है, जिसका उपयोग दिन के उच्चतम तापमान को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है। इसमें पारे का उपयोग होता है जो तापमान बढ़ने पर फैलता है और एक सूचक को धकेलता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक न्यूनतम तापमापी दर्शाता है, जिसका उपयोग रात के न्यूनतम तापमान को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है। इसमें अल्कोहल का उपयोग होता है जो तापमान गिरने पर सिकुड़ता है और एक सूचक को खींचता है। वायु के तापमान को मापने के लिए उच्च तापमापी (चित्र 8.4) तथा निम्न तापमापी (चित्र 8.5) का उपयोग किया जाता है, जबकि वायु की आर्द्रता मापने के लिए शुष्क बल्ब एवं आर्द्र बल्ब तापमापी प्रयोग में लाई जाती है। इस तापमापी में दो भुजाएँ होती हैं जिनमें पारा भरा होता है। एक भुजा का निचला भाग पानी की बोतल में डूबा हुआ होता है तथा दूसरा शुष्क होने के कारण काँच की थैली के रूप में होता है (चित्र 8.6)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र शुष्क और आर्द्र बल्ब तापमापी को दर्शाता है, जिसका उपयोग वायु की आर्द्रता मापने के लिए किया जाता है। इसमें दो थर्मामीटर होते हैं - एक सूखा और दूसरा गीले कपड़े से ढका हुआ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संयुक्त न्यूनतम और अधिकतम तापमापी को दर्शाता है, जो एक ही उपकरण में दिन के उच्चतम और न्यूनतम तापमान दोनों को रिकॉर्ड करता है। इसमें पारे और अल्कोहल दोनों का उपयोग होता है और यू-आकार की नली होती है।
In simple words: तापमापी एक उपकरण है जो तापमान को मापने के लिए पारा या अल्कोहल का उपयोग करता है, जो तापमान परिवर्तन के साथ फैलता या सिकुड़ता है, और इसमें अधिकतम, न्यूनतम, शुष्क और आर्द्र बल्ब तापमापी जैसे विभिन्न प्रकार होते हैं।

🎯 Exam Tip: तापमापी के विभिन्न प्रकारों, उनके कार्य सिद्धांत (पारा और अल्कोहल का विस्तार) और उनके उपयोगों को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. निम्नलिखित मौसम यन्त्रों का सचित्र वर्णन कीजिए
(ii) वायुदाबमापी
Answer: वायुमण्डलीय दाब को मापने के लिए वायुदाबमापी का प्रयोग किया जाता है। ये विभिन्न प्रकार के होते हैं, पर सबसे अधिक पारद वायुदाबमापी, निद्रव वायुदाबमापी तथा वायुदाब लेखीयन्त्र का उपयोग किया जाता है। वायुदाब मापने की इकाई मिलीबार होती है। पारद वायुदाबमापी एक यथार्थ यन्त्र है। इसका उपयोग मानक के रूप में किया जाता है। निद्रव वायुदाबमापी को एनीरोइड बैरोमीटर भी कहा जाता है। यह शुष्क बैरोमीटर है। इसका आकार घड़ीनुमा होता है जिसे आसानी से जेब में रखकर कहीं भी ले जा सकते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक निर्द्रव (एनीरोइड) बैरोमीटर को दर्शाता है, जिसका उपयोग वायुमंडलीय दबाव को मापने के लिए किया जाता है। इसमें धातु का एक सीलबंद डिब्बा होता है जो दबाव के साथ फैलता और सिकुड़ता है, जिससे एक सुई डायल पर दबाव दिखाती है। यह धातु को बना डिब्बा होता है, जिसे वायु से खाली कर दिया जाता है। इसके अन्दर के भाग में सिंप्रग लगी होती है। ऊपर के भागमें एक डायल होता है जिस पर अंक अंकित होते हैं। मध्य भाग में एक बटन लगा होता है जिससे सुइयाँ सम्बन्धित होती हैं। यह सुई वायु के दबाव से प्रभावित होकर चलती है जिससे वायु को कम या अधिक वायुदाब ज्ञात होता है (चित्र 8.8)।
In simple words: वायुदाबमापी वायुमंडलीय दाब को मिलीबार में मापने के लिए उपयोग किया जाने वाला उपकरण है, जिसमें पारे वाले और एनीरोइड जैसे विभिन्न प्रकार शामिल हैं, जो दाब परिवर्तनों को रिकॉर्ड करते हैं।

🎯 Exam Tip: वायुदाबमापी के विभिन्न प्रकारों (विशेषकर एनीरोइड बैरोमीटर) और उनकी कार्यप्रणाली को समझें, साथ ही वायुदाब की इकाई मिलीबार को भी याद रखें।

 

Question 3. निम्नलिखित मौसम यन्त्रों का सचित्र वर्णन कीजिए
(iii) वातदिग्दर्शी
Answer: इस यन्त्र द्वारा वायु की दिशा ज्ञात की जाती है। यह यन्त्र किसी ऊँचे स्थान पर जैसे किसी भवन की सबसे ऊपरी मंजिल पर लगाया जाता है। इस यन्त्र के ऊपरी भाग में लगे तीर की नोंक वायु दिशा का संकेत देती है। यन्त्र के निचले भाग में सूचक लोहे की छड़े लगी होती हैं। इन छड़ों की तुलना से तीर की नोंक की स्थिति का निरीक्षण करके वायु की दिशा ज्ञात करते हैं (चित्र 8.9)। वायुदिशा ज्ञात करने का एक अन्य यन्त्र भी होता है जिसमें ऊपर एक मुर्गा बना होता है, जो वायु की दिशा के साथ घूमता है। जिस ओर मुर्गे का मुँह होता है, उस दिशा को पढ़कर दिशा का ज्ञान हो जाता है। इस यन्त्र को वैदर कॉक कहते हैं (चित्र 8.10)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वातदिग्दर्शी (विंड वेन) को दर्शाता है, जिसका उपयोग हवा की दिशा निर्धारित करने के लिए किया जाता है। इसमें एक तीर या सूचक होता है जो हवा के साथ घूमता है और दिशाओं को इंगित करता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वैदर-कॉक को दर्शाता है, जो एक प्रकार का वातदिग्दर्शी है जिसमें मुर्गे जैसी आकृति होती है। यह हवा की दिशा को इंगित करने के लिए घूमता है।
In simple words: वातदिग्दर्शी एक उपकरण है जिसका उपयोग वायु की दिशा जानने के लिए किया जाता है, जिसमें एक घूमने वाला तीर या वेदर कॉक होता है जो हवा के साथ घूमता है और दिशाओं को इंगित करता है।

🎯 Exam Tip: वातदिग्दर्शी के कार्य सिद्धांत और उसके विभिन्न रूपों (जैसे वेदर कॉक) को जानें, साथ ही यह भी समझें कि यह कैसे वायु दिशा को प्रदर्शित करता है।

 

Question 3. निम्नलिखित मौसम यन्त्रों का सचित्र वर्णन कीजिए
(iv) पवनवेगमापी
Answer: वायु की गति मापने के लिए पवनवेगमापी (एनीमोमीटर) का प्रयोग किया जाता है। इस यन्त्र को खुले में किसी ऊँचे स्थान पर लगाते हैं। यह यन्त्र एक डिब्बे के अन्दर स्थित धुरी के रूप में होता है। इस धुरी के ऊपरी भाग में चार अर्द्धवृत्ताकार कटोरियाँ लगी होती हैं। वायु भर जाने पर ये कटोरी घूमती हैं तथा धुरी के निचले भाग द्वारा सम्बन्धित अंकित डायल पर मील या किमी प्रति घण्टा के रूप में वायु व्यक्त करती है (चित्र 8.11)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक पवनवेगमापी (एनीमोमीटर) को दर्शाता है, जिसका उपयोग हवा की गति को मापने के लिए किया जाता है। इसमें घूमने वाले कप होते हैं जो हवा से घूमते हैं और गति को रिकॉर्ड करते हैं।
In simple words: पवनवेगमापी, जिसे एनीमोमीटर भी कहते हैं, एक उपकरण है जिसमें घूमने वाले कप होते हैं और यह वायु की गति को मील या किलोमीटर प्रति घंटा में मापता है।

🎯 Exam Tip: पवनवेगमापी की कार्यप्रणाली (घूमने वाले कप) और उससे मापी जाने वाली इकाई (गति) पर ध्यान दें।

 

Question 3. निम्नलिखित मौसम यन्त्रों का सचित्र वर्णन कीजिए
(v) वर्षामापी
Answer: वर्षामापी द्वारा वर्षा का मापन किया जाता है। सामान्यतः यह एक धातु का बेलनाकार पात्र होता है, जिसमें एक कीप' लगी होती है। इस कीप पर पड़ने वाली वर्षा की बूंदें पात्र के अन्दर रखी बोतल में एकत्र होती रहती हैं। इस प्रकार 24 घण्टे में होने वाली वर्षा को नापने वाले पात्र जिसमें इंच व सेमी के निशान बने होते हैं, डालकर वर्षा का मापन करते हैं (चित्र 8.12)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वर्षामापी यंत्र को दर्शाता है, जिसका उपयोग बारिश की मात्रा को मापने के लिए किया जाता है। इसमें एक कीप और एक मापने वाला सिलेंडर होता है जो गिरे हुए पानी को इकट्ठा करता है।
In simple words: वर्षामापी एक उपकरण है जो बेलनाकार पात्र और कीप का उपयोग करके 24 घंटे में हुई वर्षा की मात्रा को इंच या सेंटीमीटर में मापता है।

🎯 Exam Tip: वर्षामापी के डिज़ाइन (कीप और मापने वाले पात्र) और वर्षा की मात्रा को मापने की उसकी क्षमता को समझें।

 

Question 4. जनवरी के मौसम मानचित्र के आधार पर वायुमण्डलीय दशाओं का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: जनवरी के मौसम मानचित्र का अध्ययन (1) प्रारम्भिक सूचना : यह दैनिक मौसम मानचित्र बुधवार, 1 जनवरी, 1986 ई० (पोष 11 शक, 1908) को भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार प्रातः 8.30 बजे (ग्रीनविच औसत समय-GMT 0300 बजे) की मौसम सम्बन्धी दशाओं को प्रदर्शित कर रहा है। इस मानचित्र में प्रातः 8.30 बजे मंगलवार 31 दिसम्बर से प्रातः 8.30 बजे बुधवार, 1 जनवरी तक अर्थात् पिछले 24 घण्टे की वर्षा की मात्रा एवं वायुदाब को दिखाया गया है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 1 जनवरी 1986 का एक दैनिक मौसम मानचित्र दर्शाता है, जिसमें भारत में वायुदाब, पवन दिशा और वर्षा जैसी मौसमी दशाओं को प्रदर्शित किया गया है। इसमें उच्च (H) और निम्न (L) दाब क्षेत्रों को भी दर्शाया गया है। (II) वायुमण्डलीय दबाव प्रस्तुत मौसम मानचित्र के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि दक्षिणी भारत में 1014 मिबा से और पूर्वी भारत में 1016 मिबा से घिरे निम्न दाब के क्षेत्र से उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी भारत की ओर वायुदाब बढ़ता चला गया है। अफगानिस्तान में यह 1024 मिबा हो गया है, जबकि उत्तरी राजस्थान में 1020 मिबा से घिरा उच्च दाब का क्षेत्र स्थापित है। अरब सागर में निकोबार द्वीपसमूह के पास 1010 मिबा से घिरा निम्न दाब का क्षेत्र उपस्थित है। H अक्षर द्वारा उत्तरी राजस्थान में उच्च वायुमण्डलीय दाब तथा L अक्षर द्वारा निकोबार द्वीपसमूह में निम्न वायुमण्डलीय दाब दर्शाया गया है।
1. समदाब रेखाओं की प्रवृत्ति-प्रस्तुत मानचित्र के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि मानचित्र के उत्तर-पश्चिमी भाग की समदाबे रेखाएँ बहुत दूर-दूर हैं। पश्चिमी विक्षोभ, जो पहले उत्तरी पाकिस्तान और निकटवर्ती अफगानिस्तान में था, अब जम्मू-कश्मीर में प्रवेश कर गया है।
2. दाब प्रवणता-उत्तरी भारत में दक्षिणी भारत की अपेक्षा दाब प्रवणता बहुत कम है। समदाब रेखाओं को दूर-दूर होना दाबे प्रवणता की कमी को तथा पास-पास होना दाब प्रवणता की अधिकता को प्रदर्शित करता है।
(III) पवनें मौसम मानचित्र में पवनों की दिशा एवं वेग पर उच्च और निम्न वायुदाब के क्षेत्रों की स्थिति तथा दाब प्रवणता का गहरा प्रभाव पड़ता है।
1. पवनों की दिशा-प्रस्तुत मानचित्र से यह स्पष्ट होता है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पछुवा पवनें चल रही हैं। उत्तर-पूर्वी भारत में उत्तर-पूर्व से पवनें चल रही हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उत्तर और उत्तर-पूर्व से तथा दक्षिणी भारत में उत्तर-पूर्व और उत्तर से पवनें चल रही
2. पवनों का वेग-समस्त उत्तरी भारत में पवनों का वेग 5 नॉट गति/घण्टा से कम है। उत्तर-पूर्व । और दक्षिणी भारत में स्थल पर वायु वेगे 5 नॉट प्रति घण्टा से लेकर 10 नॉट प्रति घण्टा तक है। (IV) समुद्र की दशा प्रस्तुत मानचित्र के अध्ययन से ज्ञात होता है कि दक्षिणी अरब सागर में कोचीन पत्तन के पश्चिम में सागर की स्थिति सामान्य तरंगित है, जबकि मिनीकॉय द्वीप के पास क्षुब्ध सागर दिखाया गया है।
(V) आकाश की दशा
1. देश के विभिन्न भागों में आकाश की दशा निर्मल आकाश से लेकर पूर्ण मेघाच्छादन तक है। मेघरहित आकाश बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, दक्षिणी मध्य प्रदेश, दक्षिणी गुजरात और तमिलनाडु में पाया जाता है। जम्मू-कश्मीर में 7/8 आकाश; हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में आधे से 3/4 भाग तक आकाश बादलों से आच्छादित है। मानचित्र में सभी मेघ निम्न ऊँचाई वाले हैं।
2. अन्य वायुमण्डलीय दशाएँ-प्रस्तुत मानचित्र के दिल्ली, ग्वालियर, इलाहाबाद, डाल्टनगंज, सिलचर, इम्फाल, कोलकाता, आसनसोल, भोपाल, इन्दौर, रायपुर, नागपुर, विशाखपट्टनम, बंगलुरु, मुम्बई, नासिक, कोच्चि और तिरुवनन्तपुरम नगरों में धुन्ध छाई हुई है। लखनऊ, गोरखपुर, गोहाटी और हैदराबाद नगरों के आस-पास में कोहरा प्रदर्शित किया गया है।
(VI) वर्षण देश के किसी भी भाग में पिछले 24 घण्टों में वर्षा नहीं हुई तथा न ही हिमपात हुआ है।
(VII) न्यूनतम ताप का प्रसामान्य ताप से विचलन न्यूनतम ताप का प्रसामान्य ताप से विचलन का अर्थ है किसी स्थान पर किसी तिथि का न्यूनतम तापमान उसी स्थान के उसी तिथि के पिछले 30 वर्षों के औसत न्यूनतम ताप (सामान्य न्यूनतम तापमान) से कितने अंश सेल्सियस अधिक या कम है। इसे समान विचलन वाले स्थानों को मिलाकर खींची गई सम विचलन रेखाओं द्वारा प्रदर्शित करते हैं (देखिए चित्र 8.14)।
* 1 नॉट = 1.84 किमी ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र जनवरी माह के न्यूनतम तापमान का प्रसामान्य ताप से विचलन दर्शाता है। इसमें धनात्मक और ऋणात्मक मानों के साथ रंगीन या छायांकित क्षेत्र हैं जो यह बताते हैं कि तापमान औसत से कितना अधिक या कम है। इस मानचित्र में उत्तरी ओडिशा, बिहार के मैदान और जम्मू में रात्रि का तापमान प्रसामान्य से 4° से लेकर 5° सेल्सियस तक कम है। कुछ भागों में तापमान की यह कमी 2° से लेकर 3° सेल्सियस तक है। प्रायद्वीपीय भारत में कोरोमण्डल तट के साथ और वहाँ से भीतर की ओर बढ़े हुए भाग में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2° सेल्सियस तक अधिक है।
(VIII) अधिकतम ताप का सामान्य ताप से विचलन किसी भी स्थान के 30 या अधिक वर्षों के तापमान का औसत वहाँ का सामान्य (Normal) तापमान होता है। अधिकतम
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र जनवरी माह के अधिकतम तापमान का प्रसामान्य ताप से विचलन दर्शाता है। इसमें धनात्मक और ऋणात्मक मानों को दर्शाया गया है, जिससे यह पता चलता है कि अधिकतम तापमान औसत से कितना अधिक या कम रहा है। तिथि के पिछले लगभग 30 वर्षों के औसत अधिकतम तापमान से अन्तर को प्रकट करता है। अधिकतम तापमान उस तिथि के औसत अधिकतम तापमान से अधिक भी हो सकता है और कम भी । कम को ऋणात्मक चिह्न (-) से और अधिक को धनात्मक चिह्न (+) से प्रदर्शित करते हैं (देखिए चित्र 8.15) इस मानचित्र के उत्तरी भाग में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4° सेल्सियस तक नीचे कित किया गया है तथा नेपाल में 6° सेल्सियस तक नीचे है। प्रायद्वीपीय भारत में तटों पर सामान्य से लेकर . भीतरी भाग में 2° सेल्सियस तापमान अधिक पाया जाता है।
अगले 24 घण्टे का पूर्वानुमान प्रस्तुत मौसम-मानचित्र के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखण्ड की उत्तरी पहाड़ियों में व्यापक रूप से हिमपात और वर्षा होने की सम्भावनाएँ हैं। अण्डमान व निकोबार द्वीपसमूह, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैण्ड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, तटीय तमिलनाडु, दक्षिणी केरल और लक्षद्वीप में कहीं-कहीं वर्षा हो सकती है तथा तेज पवनों के साथ झंझावात आने की प्रबल सम्भावना है।
In simple words: जनवरी के मौसम मानचित्र से वायुमंडलीय दाब, पवनों की दिशा और वेग, समुद्र की स्थिति, आकाश की दशा, वर्षण और तापमान विचलन की जानकारी मिलती है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में मौसमी परिस्थितियों और आगामी 24 घंटों के लिए पूर्वानुमान का विस्तृत वर्णन किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: जनवरी जैसे शीतकालीन मौसम मानचित्र का विश्लेषण करते समय, उच्च और निम्न दाब क्षेत्रों, पवनों की दिशा, तापमान विचलन और पूर्वानुमानित वर्षा/हिमपात जैसे मुख्य तत्वों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

मौखिक परीक्षा के लिए प्रश्नोत्तर

 

Question 1. मौसम विज्ञान किसे कहते हैं?
Answer: मौसम की विभिन्न दशाओं एवं उनसे सम्बन्धित लक्षणों का अध्ययन करने वाले शास्त्र को मौसम-विज्ञान कहते हैं।
In simple words: मौसम विज्ञान वह अध्ययन है जो मौसम की विभिन्न अवस्थाओं और संबंधित घटनाओं को समझने पर केंद्रित है।

🎯 Exam Tip: मौसम विज्ञान की परिभाषा और इसके दायरे को स्पष्ट रूप से समझें, क्योंकि यह विषय का आधार है।

 

Question 2. मौसम क्या है?
Answer: किसी स्थान-विशेष की अल्पकालीन वायुमण्डलीय दशाओं; जैसे-तापमान, वर्षा, वायु वेग एवं दिशा, ओला, कोहरा, ओस आदि को मौसम कहते हैं।
In simple words: मौसम किसी विशेष स्थान पर थोड़े समय के लिए वायुमंडलीय स्थितियों का वर्णन है, जिसमें तापमान, वर्षा, हवा और बादल जैसी चीजें शामिल होती हैं।

🎯 Exam Tip: मौसम और जलवायु के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें- मौसम अल्पकालिक होता है, जबकि जलवायु दीर्घकालिक।

 

Question 3. मौसम के प्रमुख तत्त्व कौन-कौन से हैं?
Answer: तापमान, वायुदाब, वायु-दिशा एवं गति, वर्षा तथा आर्द्रता आदि मौसम के प्रमुख तत्त्व हैं।
In simple words: मौसम के मुख्य तत्वों में तापमान, वायुदाब, हवा की दिशा और गति, वर्षा और आर्द्रता शामिल हैं, जो एक साथ मिलकर किसी स्थान पर मौसम को परिभाषित करते हैं।

🎯 Exam Tip: मौसम के मूलभूत तत्वों को याद रखें, क्योंकि ये किसी भी मौसम विश्लेषण का आधार होते हैं।

 

Question 4. तापमान किस यन्त्र से नापा जाता है?
Answer: तापमान को तापमापी (थर्मामीटर) नामक यन्त्र से नापा जाता है।
In simple words: तापमान को मापने के लिए तापमापी का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रमुख मौसम उपकरणों और उनके मापन कार्यों को सीधे याद रखें।

 

Question 5. तापमापी कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: तापमापी तीन प्रकार के होते हैं
• साधारण तापमापी,
• उच्चतम न्यूनतम तापमापी एवं
• आर्द्र एवं शुष्क बल्ब तापमापी ।
In simple words: तापमापी मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं- साधारण, अधिकतम-न्यूनतम, और शुष्क-आर्द्र बल्ब तापमापी, जिनमें से प्रत्येक का विशिष्ट उपयोग होता है।

🎯 Exam Tip: तापमापी के विभिन्न प्रकारों और उनके विशिष्ट उपयोगों को जानें, जैसे अधिकतम और न्यूनतम तापमान को मापना।

 

Question 6. आर्द्रता किस यन्त्र से ज्ञात की जाती है?
Answer: आर्द्रता, आर्द्र एवं शुष्क बल्ब तापमापी द्वारा ज्ञात की जाती है।
In simple words: हवा में नमी या आर्द्रता को शुष्क और आर्द्र बल्ब तापमापी का उपयोग करके मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: आर्द्रता मापने के लिए विशेष उपकरण का नाम याद रखें और इसके कार्य सिद्धांत को भी समझें।

 

Question 7. बैरोमीटर क्या है?
Answer: बैरोमीटर, वायुमण्डल का वायुदाब नापने का यन्त्र है।
In simple words: बैरोमीटर वह उपकरण है जो वायुमंडलीय दाब को मापता है।

🎯 Exam Tip: बैरोमीटर की परिभाषा और उसका मुख्य कार्य याद रखें।

 

Question 8. बैरोमीटर कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: बैरोमीटर तीन प्रकार के होते हैं
• साधारण बैरोमीटर,
• फोर्टिन बैरोमीटर एवं
• एनीरोइड बैरोमीटर।
In simple words: बैरोमीटर के तीन मुख्य प्रकार हैं- साधारण, फोर्टिन और एनीरोइड बैरोमीटर, जिनमें से प्रत्येक की अपनी विशिष्ट संरचना और उपयोग है।

🎯 Exam Tip: बैरोमीटर के विभिन्न प्रकारों के नाम याद रखें और संभव हो तो उनके उपयोगों में अंतर को भी समझें।

 

Question 9. बैरोमीटर का उपयोग बताइए ।
Answer: बैरोमीटर का उपयोग निम्नलिखित तथ्यों को ज्ञात करने के लिए किया जाता है
• वायुदाब की माप,
• आगामी मौसम का ज्ञान,
• ऊँचाई का ज्ञान एवं
• तापमान का अनुमान ।
In simple words: बैरोमीटर का उपयोग वायुदाब मापने, मौसम का पूर्वानुमान लगाने, ऊँचाई निर्धारित करने और तापमान का अनुमान लगाने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: बैरोमीटर के बहुआयामी उपयोगों को समझें, विशेष रूप से मौसम और ऊंचाई से संबंधित।

 

Question 10. वर्षा किस यन्त्र से नापी जाती है?
Answer: वर्षा, वर्षामापी यन्त्र द्वारा नापी जाती है।
In simple words: वर्षा की मात्रा को मापने के लिए वर्षामापी का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: वर्षामापी जैसे सीधे माप उपकरणों के नाम और उनके कार्य को जानें।

 

Question 11. वायु दिक्सूचक क्या है?
Answer: वायु दिक्सूचक द्वारा वायु के चलने की दिशा का ज्ञान प्राप्त होता है।
In simple words: वायु दिक्सूचक एक उपकरण है जो हवा की दिशा को इंगित करता है।

🎯 Exam Tip: वायु दिक्सूचक का कार्य और महत्व, विशेषकर हवा की दिशा निर्धारित करने में, स्पष्ट होना चाहिए।

 

Question 12. पवन वेगमापी क्या है?
Answer: पवन की गति ज्ञात करने वाले यन्त्र को पवन वेगमापी यन्त्र कहते हैं।
In simple words: पवन वेगमापी वह उपकरण है जिसका उपयोग हवा की गति को मापने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: पवन वेगमापी की परिभाषा और उसके मुख्य कार्य को याद रखें।

 

Question 13. सामान्य तापमान का क्या अर्थ है?
Answer: सामान्य तापमान लगभग 30-35 वर्षों का औसत तापमान होता है।
In simple words: सामान्य तापमान किसी विशेष स्थान पर 30-35 वर्षों के दौरान दर्ज किए गए औसत तापमान को संदर्भित करता है, जो उस क्षेत्र की औसत जलवायु स्थिति को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: 'सामान्य तापमान' की अवधारणा और इसकी गणना के लिए आवश्यक समय-अवधि को समझें।

 

Question 14. अधिकतम तापमान का प्रसामान्य से विचलन किसे कहते हैं?
Answer: किसी स्थान पर किसी तिथि के अधिकतम तापमान को उस स्थान के औसत अधिकतम तापमान से अन्तर को प्रसामान्य से विचलन कहते हैं। यह धनात्मक (+) अथवा ऋणात्मक (-) दोनों ही हो सकते हैं।
In simple words: अधिकतम तापमान का प्रसामान्य से विचलन यह दर्शाता है कि किसी दिए गए दिन का अधिकतम तापमान अपने दीर्घकालिक औसत से कितना अधिक या कम है, जिसे धनात्मक या ऋणात्मक मानों में व्यक्त किया जाता है।

🎯 Exam Tip: तापमान के विचलन की अवधारणा, उसके धनात्मक और ऋणात्मक मानों के अर्थ को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 15. मौसम मानचित्रों में H और L. अक्षरों से क्या प्रकट होता है?
Answer: मौसम मानचित्रों में H अक्षर उच्च दाब और L अक्षर निम्न दाब को प्रकट करता है।
In simple words: मौसम मानचित्रों पर 'H' उच्च वायुदाब क्षेत्र को और 'L' निम्न वायुदाब क्षेत्र को दर्शाता है, जो मौसमी प्रणालियों को समझने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: मौसम मानचित्रों पर प्रयुक्त होने वाले मानक प्रतीकों (जैसे H और L) और उनके अर्थ को याद रखें।

 

Question 16. NLM का क्या अर्थ है?
Answer: NLM का अर्थ मानसून की उत्तरी सीमा है। इसे प्रकट करने के लिए जुलाई के मानचित्र में दोहरी खण्डित रेखाओं का प्रयोग किया जाता है।
In simple words: NLM (Northern Limit of Monsoon) मानसून की उत्तरी सीमा को दर्शाता है, जिसे आमतौर पर जुलाई के मौसम मानचित्रों पर खंडित रेखाओं से दिखाया जाता है।

🎯 Exam Tip: NLM का पूर्ण रूप और इसका महत्व, विशेष रूप से भारतीय मानसून के संदर्भ में, महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. IST से क्या अभिप्राय है?
Answer: भारतीय मानक समय को संक्षेप में IST कहते हैं।
In simple words: IST का अर्थ भारतीय मानक समय है, जो भारत के लिए आधिकारिक समय क्षेत्र है।

🎯 Exam Tip: IST और GMT जैसे समय-क्षेत्रीय संक्षिप्ताक्षरों के पूर्ण रूप और उनके महत्व को जानें।

 

Question 18. GMT का क्या अभिप्राय है?
Answer: ग्रीनविच औसत समय GMT कहलाता है।
In simple words: GMT का अर्थ ग्रीनविच औसत समय है, जो प्रधान मध्याह्न रेखा (Prime Meridian) पर आधारित एक मानक समय है।

🎯 Exam Tip: GMT की परिभाषा और इसकी वैश्विक समय निर्धारण में भूमिका को समझें।

 

Question 19. भारतीय मौसम विभाग का मुख्यालय कहाँ है?
Answer: भारतीय मौसम विभाग का मुख्यालय पुणे में स्थित है।
In simple words: भारतीय मौसम विभाग का मुख्य कार्यालय पुणे में स्थित है, जो देश के मौसम संबंधी गतिविधियों का केंद्र है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थानों और उनके मुख्यालयों को याद रखें।

 

Question 20. मौसम चिह्नों का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया था?
Answer: मौसम चिह्नों का सर्वप्रथम प्रयोग एडमिरल ब्यूफोर्ट (1805) ने किया था।
In simple words: मौसम चिह्नों का उपयोग पहली बार एडमिरल ब्यूफोर्ट द्वारा 1805 में किया गया था।

🎯 Exam Tip: मौसम विज्ञान के इतिहास और प्रमुख योगदानकर्ताओं को जानें, विशेष रूप से मौसम प्रतीकों के विकास में।

 

Question 21. तापमान मापने की कौन-कौन सी इकाइयाँ हैं?
Answer: तापमान को फारेनहाइट, सेण्टीग्रेड तथा यूमर में मापा जाता है। इन इकाइयों को निम्नलिखित सूत्र से एक-दूसरे में परिवर्तित कर सकते हैं - \[ \frac{F-32}{180} = \frac{^{\circ}C}{100} = \frac{^{\circ}R}{80} \] अथवा \[ \frac{F-32}{9} = \frac{^{\circ}C}{5} = \frac{^{\circ}R}{4} \]
In simple words: तापमान को मापने के लिए मुख्य इकाइयाँ फारेनहाइट, सेण्टीग्रेड (सेल्सियस) और यूमर हैं, जिन्हें दिए गए सूत्रों का उपयोग करके एक-दूसरे में बदला जा सकता है।

🎯 Exam Tip: तापमान की विभिन्न इकाइयों (सेल्सियस, फारेनहाइट, यूमर) को जानें और उनके रूपांतरण सूत्रों को याद रखें, क्योंकि यह गणितीय समस्याओं में उपयोगी हो सकता है।

UP Board Solutions Class 11 Geography Chapter 8 मौसम संबंधी उपकरण। मानचित्र और चार्ट

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