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Detailed Chapter 6 हवाई तस्वीरों का परिचय UP Board Solutions for Class 11 Geography
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Class 11 Geography Chapter 6 हवाई तस्वीरों का परिचय UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 11 Geography: Practical Work In Geography Chapter 6 Introduction To Aerial Photographs (वायव फोटो का परिचय)
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. नीचे दिए गए प्रश्नों के चार विकल्पों में से सही विकल्प को चुनें
(i) निम्नलिखित में से किन वायव फोटो में क्षितिज तल प्रतीत होता है ?
(क) ऊध्वाधर
(ख) लगभग ऊध्वाधर
(ग) अल्प तिर्यक
(घ) अति तिर्यक
Answer: (घ) अति तिर्यक
In simple words: अति तिर्यक वायव फोटो ऐसे होते हैं जिनमें कैमरे का अक्ष काफी झुका होता है, जिससे क्षितिज रेखा भी तस्वीर में दिखाई देती है।
🎯 Exam Tip: अति तिर्यक फोटो की मुख्य पहचान क्षितिज तल का दिखना है, जो उच्च उड़ान ऊँचाई पर विस्तृत कवरेज के लिए उपयोगी होते हैं।
(ii) निम्नलिखित में से किस वायव फोटो में अधोबिन्दु एवं प्रधान बिन्दु एक-दूसरे से मिल जाते
(क) ऊर्ध्वाधर
(ख) लगभग ऊर्ध्वाधर
(ग) अल्प तिर्यक
(घ) अति तिर्यक
Answer: (क) ऊर्ध्वाधर
In simple words: ऊर्ध्वाधर वायव फोटो में कैमरा सीधे नीचे की ओर होता है, जिससे इमेज सेंटर (प्रधान बिंदु) और जमीन पर इमेज के नीचे का बिंदु (अधोबिंदु) एक ही जगह पर मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: ऊर्ध्वाधर फोटो में ज्यामितीय विरूपण न्यूनतम होता है, क्योंकि कैमरा पूरी तरह से सीधा होता है, जिससे मापन अधिक सटीक होता है।
(iii) वायव फोटो निम्नलिखित प्रक्षेपों में से किसका एक प्रकार है ?
(क) समान्तर
(ख) लम्बकोणीय ।
(ग) केन्द्रक
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ग) केन्द्रक
In simple words: वायव फोटो केंद्रीय प्रक्षेप पर आधारित होते हैं, जिसका अर्थ है कि एक ही बिंदु से प्रकाश की किरणें निकलकर फोटो पर प्रतिबिंब बनाती हैं, जिससे वस्तुओं का त्रिविम (3D) प्रभाव दिखता है।
🎯 Exam Tip: केंद्रीय प्रक्षेप वायव फोटो की ज्यामिति का आधार है, जो मानचित्रों में उपयोग होने वाले लम्बकोणीय प्रक्षेप से भिन्न होता है और इसलिए इसमें परिप्रेक्ष्य विरूपण होता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वायव फोटो किस प्रकार खींचे जाते हैं ?
Answer: वायव फोटो वायुयान या हैलीकॉप्टर में लगे परिशुद्ध कैमरे के द्वारा लिए जाते हैं। इस तरह से प्राप्त किए गए फोटोग्राफ स्थलाकृतिक मानचित्रों को बनाने तथा लक्ष्यों की व्याख्या करने के लिए उपयोगी होते हैं।
In simple words: वायव फोटो हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर में लगे खास कैमरों से खींची जाती हैं, और इनका उपयोग नक्शे बनाने और जमीन की चीजों को समझने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: वायव फोटो खींचने की प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले कैमरे की परिशुद्धता और उड़ान की ऊँचाई मापनी की सटीकता के लिए महत्वपूर्ण होती है।
Question 2. भारत में वायव फोटो का संक्षिप्त में वर्णन करें ।
Answer: भारत में वायव फोटो का इतिहास पुराना नहीं है। यहाँ सर्वप्रथम 1920 में बड़े पैमाने पर आगरा शहर का वायव फोटो लिया गया था। उसके बाद भारतीय सर्वेक्षण विभाग के वायु सर्वेक्षण द्वारा इरावदी डेल्टा के वनों का वायु सर्वेक्षण किया गया जो 1923-24 में पूरा हुआ था। इसके बाद इस प्रकार के अनेक सर्वेक्षण किए गए। इनका उपयोग उन्नत मानचित्र बनाने में किया गया। वर्तमान में पूरे देश का वाथव फोटो सर्वेक्षण 'वायव फोटो वायु सर्वेक्षण निदेशालय, नई दिल्ली की देख-रेख में किया जाता है। भारत में तीन उड्डयन एजेन्सियाँ वायु फोटोग्राफ लेने के लिए अधिकृत हैं
1. भारतीय वायुसेना,
2. वायु सर्वेक्षण कम्पनी (कोलकाता) तथा
3. राष्ट्रीय सुदूर संवेदी संस्था (हैदराबाद)।
In simple words: भारत में वायव फोटो का इतिहास 1920 में आगरा से शुरू हुआ, और अब भारतीय वायुसेना, वायु सर्वेक्षण कम्पनी (कोलकाता) और राष्ट्रीय सुदूर संवेदी संस्था (हैदराबाद) जैसी संस्थाएँ इसके लिए अधिकृत हैं।
🎯 Exam Tip: वायव फोटो सर्वेक्षण का इतिहास और इसमें शामिल प्रमुख भारतीय एजेंसियां याद रखना, भारत में रिमोट सेंसिंग के विकास को समझने में मदद करता है।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दें
(क) वायव फोटो के महत्त्वपूर्ण उपयोग कौन-कौन से हैं?
Answer: वायव फोटो के महत्त्वपूर्ण उपयोग वायव फोटो भौगोलिक अध्ययनों के लिए बहू-उपयोगी हैं। इनका उपयोग स्थलाकृतिक मानचित्रों को बनाने एवं उनमें अद्यतन सूचनाएँ अंकित करने में किया जाता है। वायव फोटो के दो विभिन्न उपयोग स्थलाकृतिक मानचित्रों को बनाने और उनका निर्वचन करने के कारण ही फोटोग्राममिति तथा । फोटो/प्रतिबिम्ब निर्वचन के रूप में दो स्वतन्त्र किन्तु एक-दूसरे से सम्बन्धित विज्ञानों का विकास हुआ है। वायव फोटो के कुछ महत्त्वपूर्ण उपयोग एवं लाभ निम्नलिखित हैं
1. वायव फोटों से पृथ्वी के विहंगम दृश्य प्राप्त होते हैं जो सतह की आकृतियों को स्थानिक सन्दर्भ में समझने के लिए उपयोगी हैं।
2. वायव फोटो ऐतिहासिक अभिलेखन के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं।
3. वायव फोटो धरातलीय दृश्यों का त्रिविम स्वरूप प्रदान करते हैं जो भौगोलिक अध्ययन के लिए अत्यन्त उपयोगी है।
4. किसी क्षेत्र के भूमि उपयोग सर्वेक्षण को समझने और उस क्षेत्र के नियोजन की रूपरेखा तैयार करने में यह एक विश्वसनीय विधा है।
5. इसके द्वारा किसी क्षेत्र का समकालिक भौगोलिक अध्ययन करना अत्यन्त सरल है।
In simple words: वायव फोटो का उपयोग स्थलाकृतिक मानचित्र बनाने, भूमि उपयोग का सर्वेक्षण करने, ऐतिहासिक अभिलेखन, और भौगोलिक अध्ययनों में किया जाता है, क्योंकि ये पृथ्वी का एक विहंगम और त्रिविम दृश्य प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: वायव फोटो के मुख्य उपयोगों में मानचित्रण और भौगोलिक विश्लेषण शामिल हैं, जो इनकी बहुमुखी प्रकृति को दर्शाते हैं।
(ख) मापनी को निर्धारित करने की विभिन्न विधियाँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: मापनी को निर्धारित करने की विभिन्न विधियाँ वायव फोटो की व्याख्या के लिए क्षेत्रों एवं उनकी लम्बाइयों के विषय में जानकारी आवश्यक होती है, जिसके लिए फोटो की मापनी की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। वायव फोटो की मापनी की संकल्पना मानचित्रों की मापनी के समान ही है। वायंव फोटों पर किन्हीं दो स्थानों के बीच की दूरी एवं उनकी वास्तविक धरातल पर दूरी के मध्य अनुपात को मापक कहते हैं। इसे इकाई समतुल्यता के रूप में अभिव्यक्त किया जा सकता है; जैसे 1 =1,000 फुट या 12,000 इंच या निरूपक भिन्न 1/12,000. वायव फोटो की मापनी को निर्धारित करने की निम्नलिखित तीन विधियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं
(1) प्रथम विधि : फोटो एवं धरातलीय दूरी के मध्य सम्बन्ध स्थापित करना यह विधि तब उपयोगी होती है जब वायव फोटो में कोई अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध है; जैसे-धरातल पर दो पहचानने योग्य बिन्दुओं की दूरी, तो एक ऊर्ध्वाधर फोटो की मापनी सरलता से प्राप्त हो जाती है। यदि वायव फोटो पर मापी गई दूरी (Dp) के साथ धरातल (Dg) की संगत से दूरी ज्ञात हो तो वायव फोटो की मापनी को इन दोनों के अनुपात अर्थात् Dp/Dg में मापा जाएगा।
(2) द्वितीय विधि : फोटो दूरी एवं मानचित्र दूरी में सम्बन्ध स्थापित करना विधि का उपयोग तब किया जाता है जब जिस क्षेत्र के फोटो में मापनी की गणना करनी है उस क्षेत्र को मानचित्र उपलब्ध हो। दूसरे शब्दों में, मानचित्र एवं वायव फोटो पर पहचाने जाने वाले दो बिन्दुओं के बीच की दूरी हमें वायव फोटो (Sp) की मापनी की गणना करने में सहायता प्रदान करती है। इन दोनों दूरियों के बीच के सम्बन्ध को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है (फोटो मापनी : मानचित्र मापनी) (फोटो दूरी : मानचित्र दूरी) अतएव फोटो मापनी (Sp) = फोटो दूरी (Dp) : मानचित्र दूरी (Dm) x मानचित्र मापनी कारक (mst)
(3) तृतीय विधि : फोकस दूरी (f) एवं वायुयान की उड़ान ऊँचाई (H) के बीच सम्बन्ध स्थापित करना
चित्र 6.1 के अनुसार ऊर्ध्वाधर फोटो में कैमरे की फोकस दूरी (f) तथा वायुयान की उड़ान (H) को सीमान्त जानकारी के रूप में लिया जाता है।
फोटो मापनी सूत्र को ज्ञात करने के लिए चित्र 6.1 का उपयोग निम्न प्रकार से किया जा सकता है
फोकस दूरी (f) : उड़ान ऊँचाई (H) = फोटो दूरी (Dp) : धरातलीय दूरी (Dg)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र वायव फोटोग्राफी में कैमरे की फोकस दूरी (f) और वायुयान की उड़ान ऊँचाई (H) के बीच संबंध को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि कैसे किसी वस्तु (B) से निकली किरणें लेंस (P) से होकर फोटों तल (f) पर प्रतिबिंब (b) बनाती हैं, जबकि वायुयान की ऊंचाई धरातल (A) से (H) होती है। इससे फोटोग्राफ की मापनी (scale) निर्धारित करने में मदद मिलती है।
In simple words: वायव फोटो की मापनी निकालने के तीन मुख्य तरीके हैं: फोटो और जमीन की वास्तविक दूरी की तुलना करके, फोटो और उपलब्ध मानचित्र की दूरी की तुलना करके, और कैमरे की फोकस दूरी व वायुयान की उड़ान ऊँचाई का उपयोग करके।
🎯 Exam Tip: वायव फोटो की मापनी का निर्धारण, विभिन्न विधियों और उनके सूत्रों को समझना, फोटोग्राममिति के मूल्यांकन में उच्च स्कोरिंग के लिए महत्वपूर्ण है।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
Question 1. एक वायव फोटो में दो बिन्दुओं के बीच की दूरी को 2 सेमी मापा जाता है। उन्हीं दो बिन्दुओं के बीच धरातल पर वास्तविक दूरी 1 किमी है तो वायव फोटो (Sp) की मापनी की गणना करें।
Answer: हल-Sp = Dp : Dg (Sp = वायवे फोटो, Dp = फोटो में दो बिन्दुओं के बीच की दूरी, Dg = उन्हीं दो बिन्दुओं के बीच धरातल पर वास्तविक दूरी)
Sp = Dp : Dg
\( = 2 \) सेमी : \( 1 \) किमी
\( = 2 \) सेमी : \( 1 \times 1,00,000 \) सेमी (क्योंकि \( 1 \) किमी = \( 1,00,000 \) सेमी):
\( = 1 : 1,00,000/2 \)
\( = 50,000 \) सेमी
\( = 1 \) इकाई \( 50,000 \) इकाई को प्रदर्शित करती है। इसलिए
Sp = \( 1: 50,000 \)
In simple words: यदि फोटो पर 2 सेमी की दूरी जमीन पर 1 किमी (100000 सेमी) के बराबर है, तो फोटो की मापनी 1:50,000 होगी।
🎯 Exam Tip: वायव फोटो की मापनी की गणना के लिए फोटो पर मापी गई दूरी को धरातल पर वास्तविक दूरी से अनुपात में व्यक्त करना आवश्यक है, ध्यान रहे कि दोनों दूरियां एक ही इकाई में हों।
Question 2. एक मानचित्र पर दो बिन्दुओं के बीच की दूरी का माप 2 सेमी है। वायव फोटो पर संगत दूरी 10 सेमी है। फोटोग्राफ की मापनी की गणना कीजिए, जबकि मानचित्र की मापनी | 1:50,000 है।
Answer: हल-Sp = Dp : Dm x msf (Sp = वायव फोटो, Dp = वायव फोटो की संगत दूरी, Dm = मानचित्र पर दो बिन्दुओं के बीच दूरी, msf = मानचित्र की मापनी)
Sp = Dp : Dm x msf
\( = 10 \) सेमी : \( 2 \) सेमी \( \times 50,000 \)
\( = 10 \) सेमी : \( 1,00,000 \) सेमी अथवा \( 1 : 1,00,000/10 \)
\( = 10,000 \) सेमी या \( 1 \) इकाई = \( 10,000 \) इकाई को व्यक्त करती है।
इसलिए Sp = \( 1 : 10,000 \)
In simple words: मानचित्र पर दी गई दूरी और मापनी का उपयोग करके, हम वायव फोटो की मापनी की गणना कर सकते हैं, जिससे हमें पता चलता है कि फोटो पर 10 सेमी जमीन पर 100000 सेमी (या 100000 सेमी को 10 से भाग देने पर) के बराबर है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार की गणना में, सुनिश्चित करें कि सभी दूरियां एक ही इकाई में हों और मानचित्र की मापनी को सही ढंग से गुणा किया गया हो।
Question 3. एक वायव फोटो की मापनी की गणना कीजिए, जबकि वायुयान की उड्डयन 'तुंगता 7,500 मीटर है तथा कैमरे की फोकस दूरी 15 सेमी है।
Answer: हल-Sp = f : H
Sp = \( 15 \) सेमी : \( 7,500 \times 100 \) सेमी
(क्योंकि \( 1 \) मीटर = \( 100 \) सेमी)
\( = 1 : 50,000 \)
इसलिए Sp = \( 1 : 50,000 \)
In simple words: कैमरे की फोकस दूरी (15 सेमी) और वायुयान की ऊंचाई (7,500 मीटर या 750000 सेमी) का अनुपात निकालकर हम वायव फोटो की मापनी 1:50,000 पाते हैं।
🎯 Exam Tip: मापनी की गणना करते समय, फोकस दूरी और उड़ान की ऊंचाई दोनों को समान इकाइयों (जैसे सेमी) में बदलना महत्वपूर्ण है ताकि अनुपात सटीक रहे।
Question 4. फोटोग्राममिति (Photogrammetry) एवं प्रतिबिम्ब निर्वचन (Image Interpretation) से आप क्या समझते हैं? इनकी उपयोगिता बताइए ।
Answer: उत्तर-फोटोग्राममिति । यह वायव फोटो द्वारा विश्वसनीय मापन का विज्ञान एवं तकनीक है। फोटोग्राममिति के सिद्धान्त ही वायव फोटो की परिशुद्ध लम्बाई, चौड़ाई एवं ऊँचाई की माप प्रदान करते हैं। यह तकनीक स्थलाकृतिक मानचित्रों को तैयार करने और उनको अद्यतन बनाने में उपयोगी होती है।
प्रतिबिम्ब निर्वचन प्रतिबिम्ब निर्वचन का अर्थ है फोटोग्राममिति द्वारा प्राप्त चित्र का अध्ययन एवं व्याख्या करना। अतः यह वस्तुओं के स्वरूपों को पहचानने तथा उनके सापेक्षिक महत्त्व से सम्बन्धित निर्णय लेने की प्रक्रिया हैं। इसका उपयोग किसी क्षेत्र के वायव फोटो या सुदूर संवेदन चित्र के द्वारा भौगोलिक जानकारी और उनकी व्याख्या करने के लिए किया जाता है। किसी क्षेत्र की स्थलाकृतियों, वनस्पति, भूमि उपयोग, मिट्टी का प्रकार तथा अन्य भौतिक एवं सांस्कृतिक तत्त्वों का सटीक अध्ययन द्वारा संसाधन, प्रबन्धन एवं नियोजन के लिए प्रतिबिम्ब निर्वचन अत्यन्त उपयोगी होते हैं।
In simple words: फोटोग्राममिति वायव फोटो से सटीक मापन का विज्ञान है, जबकि प्रतिबिम्ब निर्वचन उन फोटो का विश्लेषण कर भौगोलिक जानकारी निकालने और वस्तुओं को पहचानने की कला है। दोनों ही मानचित्रण और क्षेत्रीय नियोजन में महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: फोटोग्राममिति और इमेज इंटरप्रिटेशन दोनों के अलग-अलग उद्देश्य और अनुप्रयोग हैं, लेकिन वे वायव फोटो के उपयोग में एक दूसरे के पूरक हैं।
Question 5. वायव फोटो के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए ।
Answer: उत्तर-वायव फोटो के प्रकार वायव फोटो का वर्गीकरण कैमरा अक्ष, मापनी, व्याप्त क्षेत्र के कोणीय विस्तार एवं इनके उपयोग और प्रयोग फट तल में लाई गई फिल्म के आधार पर किया जाता है। कैमरे के प्रकाशिक अक्ष तथा मापक के आधार पर वायव फोटो निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक ऊर्ध्वाधर वायव फोटो की ज्यामिति को दर्शाता है। इसमें फोटो तल, कैमरा लेंस, कैमरा अक्ष और ऊर्ध्वाधर अक्ष एक-दूसरे के समानांतर होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आवर्त क्षेत्र का स्पष्ट और सीधा दृश्य प्राप्त होता है। यह दर्शाता है कि कैमरे का अक्ष पूरी तरह से ऊर्ध्वाधर होता है, जिससे न्यूनतम विरूपण (distortion) के साथ तस्वीरें मिलती हैं।
1. कैमरा अक्ष की स्थिति के आधार पर वायव फोटो के प्रकार ।
कैमॅरी अक्ष की स्थिति के आधार पर वायव फोटो निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं-
(i) ऊर्ध्वाधर फोटोग्राफ – जब फोटो की सतह को धरातलीय सतह के समान्तर रखा जाता है, तब दोनों अक्ष (धरातलीय जल तथा फोटोतल) एक-दूसरे से मिल जाते हैं। इस आवर्त क्षेत्र प्रकार प्राप्त फोटो को ऊर्ध्वाधर वायव फोटो कहते हैं (चित्र 6.2)।
(ii) अल्प तिर्यक फोटोग्राफ ऊर्ध्वाधर अक्ष से कैमरा अक्ष में 15 से 30° के अभिकल्पित विचलन । के साथ लिए गए वायव फोटो को अल्प तिर्यक फोटोग्राफ कहते हैं (चित्र 6.3)। इस प्रकार के फोटोग्राफ प्रारम्भिक सर्वेक्षण में उपयोगी होते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): ये चित्र अल्प तिर्यक और अति तिर्यक वायव फोटो की ज्यामिति को दर्शाते हैं। अल्प तिर्यक फोटो में कैमरा अक्ष ऊर्ध्वाधर अक्ष से 15° से 30° तक झुका होता है, जबकि अति तिर्यक फोटो में यह लगभग 60° तक झुका होता है, जिससे क्षितिज तल भी दिखाई देता है। ये झुकाव विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षणों और भू-भाग के विस्तृत कवरेज के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इनमें अधिक ज्यामितीय विरूपण होता है।
(iii) अति तिर्यक फोटोग्राफ-ऊर्ध्वाधर अक्षं से कैमरे की धुरी को लगभग 60° झुकाने पर एक । तिर्यक फोटोग्राफ प्राप्त होता है। इस प्रकार के फोटोग्राफ भी प्रारम्भिक सर्वेक्षण में प्रयोग किए जाते हैं (चित्र 6.4) ।
2. मापनी के आधार पर वायव फोटो के प्रकार
मापक के आधार पर वायव फोटो निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं-
(i) वृहत मापनी फोटोग्राफ-वृहत् मापनी वायव फोटोग्राफ की मापनी 1 : 15,000 तथा इससे अधिक होती है।
(ii) मध्यम मापनी फोटोग्राफ-मध्यम मापक वायव फोटोग्राफ 1 : 15,000 से 1 : 30,000 के मध्य होते हैं।
(iii) लघु मापनी फोटोग्राफ-लघुमापक वायव फोटोग्राफ 1 : 30,000 पर बने होते हैं।
In simple words: वायव फोटो को कैमरे की स्थिति (ऊर्ध्वाधर, अल्प तिर्यक, अति तिर्यक) और फोटो की मापनी (वृहत्, मध्यम, लघु) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
🎯 Exam Tip: वायव फोटो के विभिन्न प्रकारों को उनके कैमरे के झुकाव और परिणामी मापनी के आधार पर पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 6. वायव फोटो की ज्यामिति का वर्णन कीजिए ।
Answer: उत्तर-धरातल के सापेक्ष किसी वायव फोटोग्राफ की अनुस्थापना को जानने के लिए वायव फोटो की ज्यामिति की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रत्येक वायव छायाचित्र केन्द्रीय प्रक्षेप पर होता है, क्योंकि विभिन्न धरातलीय लक्ष्यों से निःसृत किरणें उड़ान रेखा पर स्थित सन्दर्श केन्द्र से होकर गुजरती हैं। केन्द्रीय प्रक्षेप की इन्हीं विशेषताओं के आधार पर धरतलीय भू-भाग के छाया चित्रण को चित्र 6.5 एवं 6.6 में केन्द्रीय प्रक्षेप के उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है। चित्र 6.5 में प्रक्षेपित किरणें Aa, Bb एवं Cc एक ही बिन्दु () से गुजरती है जिसे सन्दर्श केन्द्र कहते हैं। एक लेंस के ति को केन्द्रीय प्रक्षेप माना जाता है। ऊध्वाधर फोटोग्राफ की ज्यामिति को
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र केन्द्रीय प्रक्षेप को दर्शाता है, जहाँ धरातल (A, B, C) से निकली किरणें एक संदर्श केंद्र (S) से होकर गुजरती हैं और फोटो तल (a, b, c) पर प्रतिबिंब बनाती हैं। यह मॉडल दर्शाता है कि वायव फोटोग्राफ किस प्रकार एक केंद्रीय बिंदु से वस्तुओं को प्रोजेक्ट करते हैं, जिससे त्रिविम दृश्य और परिप्रेक्ष्य विरूपण उत्पन्न होता है।
स्पष्ट किया गया है। चित्र में 'S' कैमरा लेंस का केन्द्र है। धरातलीय सतह से आती हुई किरण पुंज इस बिन्दु पर । अभिसृत हो जाती है तथा वस्तुओं के चित्र बनाने के लिए नेगेटिव (फोटो) की सतह की ओर अपसरित हो जाती है। इस प्रकार सिद्ध होता है कि केन्द्रीय प्रक्षेप में संगत बिन्दुओं को मिलाने वाली सभी सीधी . रेखाएँ, जो वस्तु एवं आकृति के संगत बिन्दुओं को जोड़ती हैं, एक ही बिन्दु से होकर गुजरती हैं।
यदि कैमरा अक्ष से होते हुए नेगेटिव की सतह पर एक लम्ब खींचा जाए तो जिस बिन्दु पर लम्ब मिलता है, उसे प्रधान बिन्दु कहते हैं। जब इस रेखा को बढ़ाकर धरातल पर लाते हैं तो चित्र के अनुसार PG बिन्दु पर मिलेगी, किन्तु नेगेटिव पर मिलने पर यही बिन्दु अधोबिन्दु कहलाता है (देखिए चित्र 6.6)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ऊर्ध्वाधर फोटोग्राफ की ज्यामिति का विस्तृत वर्णन करता है, जिसमें संदर्श केंद्र, अधोबिंदु (नेगेटिव और पॉजिटिव तल पर) और प्रधान बिंदु जैसे महत्वपूर्ण ज्यामितीय तत्वों को दिखाया गया है। यह दर्शाता है कि कैसे वस्तुएं (Di, Ci, Bi, Ai) संदर्श केंद्र से प्रक्षेपित होकर फोटो तल पर (d, c, b, a) प्रतिबिंबित होती हैं, और भूमि अधोबिंदु (PG) से कैसे संबंधित हैं, जिससे ज्यामितीय शुद्धता का आकलन किया जा सके।
In simple words: वायव फोटो की ज्यामिति यह समझने में मदद करती है कि फोटो कैसे बनता है, जिसमें केंद्रीय प्रक्षेप महत्वपूर्ण होता है। इसमें एक संदर्श केंद्र होता है जिससे किरणें निकलती हैं और फोटो पर वस्तुओं का प्रतिबिंब बनता है, साथ ही प्रधान बिंदु और अधोबिंदु जैसे तत्व भी फोटो की स्थानिक शुद्धता को परिभाषित करते हैं।
🎯 Exam Tip: वायव फोटो की ज्यामिति, विशेषकर केंद्रीय प्रक्षेप, प्रधान बिंदु और अधोबिंदु की अवधारणाओं को समझना, फोटो विश्लेषण के लिए आधारभूत है।
Question 7. विभिन्न विशेषताओं के आधार पर वायव फोटोग्राफ के प्रकारों की संक्षेप में तुलना कीजिए।
Answer: उत्तर-वायव फोटोग्राफ के प्रकारों की तुलना
| क्र० सं० | विशेषताएँ | ऊर्ध्वाधर फोटो | अल्प तिर्यक फोटो | अति तिर्यक फोटो |
|---|---|---|---|---|
| 1. | अक्ष | 3° से कम | ऊर्ध्वाधर से 30° का विचलन | ऊर्ध्वाधर अक्ष से 30° से अधिक विचलन |
| 2. | गुण | क्षितिज नहीं | क्षितिज नहीं | क्षितिज |
| 3. | विस्तार | छोटे क्षेत्र में | बड़े क्षेत्र में | बहुत बड़े क्षेत्र में |
| 4. | फोटोग्राफीय क्षेत्र का वर्ग + विस्तार | समलम्बी | समलम्बी | |
| 5. | मापनी | समतल क्षेत्र में एक-समान | सामने की सतह से पीछे की ओर घटता हुआ | सामने की सतह से पीछे की ओर घटता हुआ |
| 6. | मानचित्र से तुलना करने पर | सबसे कम | सापेक्षिक रूप से अधिक | सबसे अधिक |
| 7. | लाभ | स्थलाकृतिक थिमैटिक मानचित्र में उपयोगी | एवं आवीक्षी सर्वेक्षण | व्याख्यात्मक |
In simple words: वायव फोटो को उनके कैमरे के झुकाव (अक्ष), क्षितिज के दिखना या न दिखना, कवरेज क्षेत्र, मापनी की एकरूपता और मानचित्र से तुलना के आधार पर तीन मुख्य प्रकारों (ऊर्ध्वाधर, अल्प तिर्यक, अति तिर्यक) में बांटा जा सकता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न वायव फोटो प्रकारों की विशेषताओं की तुलना करते समय, अक्ष के झुकाव और क्षितिज की दृश्यता जैसे मुख्य अंतरों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 8. मानचित्र एवं वायव फोटो में अन्नर बताइए।
Answer: उत्तर-मानचित्र एवं वायव फोटो में अन्तर
| मानचित्र | वायव फोटो |
|---|---|
| 1. मानचित्र लम्बकोणीय प्रक्षेप पर निर्मित होते हैं। | वायव फोटो केन्द्रीय प्रक्षेप पर निर्मित होते हैं। |
| 2. मानचित्र पृथ्वी के प्रक्षेपित भाग का ज्यामितीय प्रदर्शन है। | यह ज्यामितीय रूप में अशुद्ध होते हैं। इसमें केन्द्र से किनारे की ओर विकृतियाँ अधिक होती हैं। |
| 3. मानचित्र की मापनी एकसमान होती है। | वायव फोटो की मापनी एकसमान नहीं होती। |
| 4. मानचित्र को पुनः निर्मित कर ही विवर्धन/लघुकरण किया जा सकता है तथा विषय-सामग्री यथावत् रहती है। | विवर्धन व लघुकरण किया जा सकता है तथा विषय-सामग्री यथावत् रहती है। |
| 5. अगम्य एवं अवास्य क्षेत्रों का मानचित्र तैयार करना असम्भव या अत्यन्त कठिन है। | अगम्य एवं अवास्य क्षेत्रों का वायव फोटो सरलता से लिया जा सकता है तथा अध्ययन भी किया जा सकता है। |
In simple words: मानचित्र लम्बकोणीय प्रक्षेप पर आधारित होते हैं और उनकी मापनी एकसमान होती है, जबकि वायव फोटो केंद्रीय प्रक्षेप पर होते हैं, जिनकी मापनी एकसमान नहीं होती और इनमें ज्यामितीय विरूपण होता है। वायव फोटो अगम्य क्षेत्रों के अध्ययन के लिए अधिक उपयोगी हैं।
🎯 Exam Tip: मानचित्र और वायव फोटो के बीच मुख्य अंतरों को उनके प्रक्षेप, मापनी की एकरूपता और ज्यामितीय शुद्धता के संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण है।
मौखिक परीक्षा के लिए प्रश्नोत्तर
Question 1. वायव फोटोग्राफ क्या है?
Answer: वायुयान में लगे कैमरे द्वारा लिए गए फोटोग्राफ वायव फोटोग्राफ कहलाते हैं।
In simple words: वायव फोटोग्राफ वे तस्वीरें हैं जो हवाई जहाज में लगे कैमरों से जमीन की ली जाती हैं।
🎯 Exam Tip: वायव फोटोग्राफ की सरल परिभाषा याद रखना मौखिक परीक्षा के लिए उपयोगी हो सकता है।
Question 2. प्रथम वायव फोटोग्राफ के विषय में बताइए ।
Answer: प्रथम वायव फोटो 1858 में फ्रांस में एक गुब्बारे द्वारा लिया गया था। वायव फोटो खींचने के लिए वायुयान का प्रयोग पहली बार 1909 में इटली के एक नगर का फोटो खींचने में किया गया था।
In simple words: पहला वायव फोटो 1858 में फ्रांस में गुब्बारे से लिया गया था, जबकि हवाई जहाज का उपयोग करके पहली बार 1909 में इटली में फोटो खींचा गया।
🎯 Exam Tip: वायव फोटोग्राफी के इतिहास में गुब्बारे और वायुयान के पहले उपयोग की तारीखें और स्थान याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. भारत में शैक्षणिक उद्देश्य के लिए वायव फोटोग्राफ की क्या व्यवस्था है?
Answer: भारत में शैक्षणिक उद्देश्य के लिए वायव फोटो को APFS पार्टी नं० 73 को भारतीय सर्वेक्षण विभाग के वायु सर्वेक्षण निदेशालय के साथ जोड़कर सुलभता प्रदान की गई है।
In simple words: भारत में, छात्रों के लिए वायव फोटो भारतीय सर्वेक्षण विभाग के वायु सर्वेक्षण निदेशालय द्वारा APFS पार्टी नं० 73 के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: भारत में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए वायव फोटो तक पहुँच के लिए जिम्मेदार संस्थानों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. नत फोटोग्राफ क्या है?
Answer: ऊध्वाधर अक्ष से प्रकाशीय अक्ष में 3°से अधिक विचलन वाले फोटोग्राफ को नत फोटोग्राफ कहा जाता है।
In simple words: नत फोटोग्राफ वे होते हैं जिनमें कैमरे का अक्ष सीधा ऊर्ध्वाधर न होकर 3° से अधिक झुका होता है।
🎯 Exam Tip: नत फोटोग्राफ की परिभाषा में कैमरे के अक्ष के झुकाव की डिग्री (3° से अधिक) को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. क्या वायव फोटो से मानचित्र को अनुरेखित किया जा सकता है?
Answer: नहीं, क्योंकि प्रक्षेप तथा एक मानचित्र के सन्दर्भ एवं एक वायव फोटो के मध्य मूलभूत अन्तर होता है।
In simple words: नहीं, वायव फोटो से सीधे मानचित्र बनाना संभव नहीं है क्योंकि उनके ज्यामितीय प्रक्षेप (केंद्रीय बनाम लम्बकोणीय) में बुनियादी अंतर होता है।
🎯 Exam Tip: वायव फोटो और मानचित्र के बीच के मौलिक ज्यामितीय अंतर को पहचानना महत्वपूर्ण है, जो सीधे अनुरेखण को असंभव बनाता है।
Question 6. ऑर्थोफोटो क्या है?
Answer: वायव फोटो से मानचित्र बनाने के पूर्व सन्दर्श दृश्य से समतलमिति दृश्य में परिवर्तन आवश्यक होता है। इस तरह के रूपान्तरित चित्रों को ऑर्थोफोटो कहा जाता है।
In simple words: ऑर्थोफोटो वायव फोटो के ऐसे सुधारे हुए संस्करण होते हैं जिन्हें ज्यामितीय विरूपण हटाकर मानचित्र की तरह समतल और मापनीय बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: ऑर्थोफोटो वायव फोटो से मानचित्र बनाने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें ज्यामितीय सुधार शामिल हैं।
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