UP Board Solutions Class 11 Geography Chapter 3 Drainage System

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Detailed Chapter 3 जल निकासी प्रणाली UP Board Solutions for Class 11 Geography

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Class 11 Geography Chapter 3 जल निकासी प्रणाली UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions for Class 11 Geography: Indian Physical Environment Chapter 3 Drainage System (अपवाह तंत्र)

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए.
(i) निम्नलिखित में से कौन-सी नदी बंगाल का शोक के नाम से जानी जाती थी?
(क) गंडक
(ख) कोसी
(ग) सोन
(घ) दामोदर
Answer: (घ) दामोदर
In simple words: दामोदर नदी को बंगाल का शोक कहा जाता था क्योंकि यह अक्सर बाढ़ लाती थी, जिससे क्षेत्र में भारी विनाश होता था.

🎯 Exam Tip: "बंगाल का शोक" जैसे क्षेत्रीय उपनाम वाली नदियां अक्सर परीक्षा में पूछी जाती हैं, खासकर उनके भौगोलिक या ऐतिहासिक प्रभावों के कारण.

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए.
(ii) निम्नलिखित में से किस नदी की द्रोणी भारत में सबसे बड़ी है?
(क) सिन्धु
(ख) ब्रह्मपुत्र
(ग) गंगा
(घ) कृष्णा
Answer: (ग) गंगा
In simple words: गंगा नदी की द्रोणी (बेसिन) भारत में सबसे बड़ी है, जो देश के एक बड़े हिस्से को कवर करती है और कई सहायक नदियों को पोषित करती है.

🎯 Exam Tip: भारत की सबसे बड़ी नदी द्रोणियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश के जल संसाधनों और भौगोलिक महत्व को दर्शाता है.

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए.
(iii) निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पंचनद में शामिल नहीं है?
(क) रावी
(ख) सिन्धु
(ग) चेनाब
(घ) झेलम
Answer: (ख) सिन्धु
In simple words: पंचनद पांच मुख्य नदियों (झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलुज) का समूह है जो सिन्धु नदी की सहायक नदियाँ हैं, जबकि सिन्धु स्वयं इस समूह का हिस्सा नहीं है.

🎯 Exam Tip: पंचनद और सिन्धु नदी प्रणाली के प्रमुख घटक और उनके अंतर को समझना भौगोलिक ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए.
(iv) निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पंचनद भ्रंश घाटी में बहती है?
(क) सोन
(ख) यमुना
(ग) नर्मदा
(घ) लूनी
Answer: (ग) नर्मदा
In simple words: नर्मदा नदी एक भ्रंश घाटी में बहती है, जो भारतीय प्रायद्वीप की उन कुछ नदियों में से एक है जो पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है.

🎯 Exam Tip: भ्रंश घाटी में बहने वाली नदियों की विशिष्टता और उनके सामान्य प्रवाह पैटर्न से विचलन को ध्यान में रखना चाहिए.

 

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए.
(v) निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान अलकनन्दा व भागीरथी का संगम स्थल है?
(क) विष्णुप्रयाग
(ख) रुद्रप्रयाग
(ग) कर्णप्रयाग
(घ) देवप्रयाग
Answer: (घ) देवप्रयाग
In simple words: देवप्रयाग वह पवित्र स्थान है जहाँ अलकनन्दा और भागीरथी नदियाँ मिलती हैं, और इस संगम के बाद यह धारा गंगा नदी के नाम से जानी जाती है.

🎯 Exam Tip: भारतीय नदियों के प्रमुख संगम स्थलों और उनके धार्मिक/भौगोलिक महत्व को जानना आवश्यक है.

 

Question 2. निम्न में अन्तर स्पष्ट करें
(i) नदी द्रोणी और जल-संभर,
(ii) वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप,
(iii) अपकेन्द्रीय और अभिकेन्द्रीय अपवाह प्रारूप,
(iv) डेल्टा और ज्वारनदमुख.
Answer:
(i) **नदी द्रोणी और जल-संभर में अन्तर-** बड़ी नदियों के जलग्रहण क्षेत्र को नदी द्रोणी कहते हैं, जबकि छोटी नदियों व नालों द्वारा अपवाहित क्षेत्र जल-संभर कहलाता है। वास्तव में नदी द्रोणी का आकार बड़ा होता है तथा जल-संभर का आकार छोटा।
(ii) **वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप में अन्तर-** वृक्षाकार अपवाह क्षेत्र में नदी अपवाह प्रतिरूप वृक्षाकार आकृति में होता है। इस प्रकार के नदी अपवाह में एक मुख्य नदी धारा से विभिन्न शाखाओं में उपधाराएँ प्रवाहित होती हैं। जालीनुमा अपवाह प्रारूप में प्राथमिक सहायक नदियाँ समानान्तर एवं गौण शाखाएँ समकोण पर काटती हुई प्रवाहित होती हैं।
(iii) **अपकेन्द्रीय और अभिकेन्द्रीय अपवाह प्रारूप में अन्तर-** जब किसी उच्च भाग से नदियों का प्रवाह चारों ओर हो तो उसे अपकेन्द्रीय या अरीय अपवाह प्रारूप कहते हैं। ऐसी प्रणालियाँ किसी ज्वालामुखी पर्वत पर गुम्बद पर या उच्च टीले पर विकसित होती हैं।
जब किसी भू-भाग में ऐसा क्षेत्र पाया जाए जो चारों ओर से ऊँचा हो किन्तु बीच में निचला हो तो नदियाँ चारों ओर से बहकर मध्य भाग की ओर आती हैं अर्थात् नदियाँ किसी झील या दलदल में समाप्त हो जाती हैं। इस प्रकार की नदी प्रणाली को अभिकेन्द्रीय अपवाह कहा जाता है। रेगिस्तानी क्षेत्रों में जहाँ अन्तःस्थानीय अपवाह मिलता है, ऐसी अपवाह प्रणाली देखने को मिलती है। तिब्बत का पठार की तथा लद्दाख में भी ऐसी प्रणालियाँ दृष्टिगोचर होती हैं।
(iv) **डेल्टा और ज्वारनदमुख में अन्तर-** डेल्टा काँप मिट्टी का विशाल निक्षेप है। इसकी आकृतित्रिभुजाकार, पंजाकार या पंखाकार होती है। इसका निर्माण नदी के निचले मार्ग में वहाँ होता है जहाँ दाब नाममात्र का होता है। यह नदी की वृद्धावस्था में बनता है। अतः नदी अपने साथ बहाकर लाई गई अवसाद को ढोने में असमर्थ रहती है तथा विभिन्न शाखाओं में विभक्त होकर अवसाद का निक्षेप करने लगती है। इस प्रकार समुद्री मुहाने पर मिट्टी तथा बालू के महीन कणों से त्रिभुजाकार रूप में निर्मित अवसाद डेल्टा कहलाता है। ज्वारनदमुख के निर्माण में नदियाँ अपने साथ लाए हुए अवसाद को मुहाने पर जमा नहीं करतीं, बल्कि अवसाद को समुद्र में अन्दर तक ले जाती हैं। नदी में इस प्रकार बना मुहाना ज्वारनदमुख या एस्च्युरी कहलाता है। नर्मदा नदी इसी प्रकार की मुहाने का निर्माण करती है।
In simple words: नदी द्रोणी एक बड़ी नदी का जलग्रहण क्षेत्र है, जबकि जल-संभर एक छोटी नदी या नाले का क्षेत्र है; वृक्षाकार प्रारूप वृक्ष की शाखाओं जैसा है, जबकि जालीनुमा में नदियाँ समकोण पर मिलती हैं; अपकेन्द्रीय अपवाह उच्च बिंदु से बाहर की ओर होता है, जबकि अभिकेन्द्रीय अपवाह निचले बिंदु की ओर होता है; डेल्टा नदी द्वारा जमा की गई मिट्टी से बनता है, जबकि ज्वारनदमुख वह जगह है जहाँ ज्वार-भाटा नदी के तलछट को समुद्र में ले जाता है.

🎯 Exam Tip: इन भौगोलिक अवधारणाओं के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नदी प्रणालियों के गठन और विशेषताओं को समझने में मदद करता है.

 

Question 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(i) भारत में नदियों को आपस में जोड़ने के सामाजिक-आर्थिक लाभ क्या हैं?
Answer: भारत में नदियाँ प्रतिक्ष जल की विशाल मात्रा का वहन करती हैं, किन्तु समय वे स्थान की दृष्टि से इसका वितरण समान नहीं है। इसी कारण वर्षा ऋतु में अधिकांश जल व्यर्थ बह जाता है अथवा बाढ़ की समस्या उत्पन्न करता है। जब देश के एक भाग में बाढ़ आती है तो दूसरे भाग में सूखा उत्पन्न हो जाता है। वास्तव में जले प्रबन्धन द्वारा इस समस्या को समाप्त किया जा सकता है। यह तभी सम्भव है जब जल आधिक्य क्षमता वाली नदियों को अल्प जल क्षमता वाली नदियों से जोड़ दिया जाए। उदाहरण के लिए-हिमालय नदियों को प्रायद्वीपीय नदियों से जोड़ने की योजना बनाई जा सकती है; जैसे- गंगा-कावेरी योजना। इस योजना से आर्थिक क्षति समाप्त होगी तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि होकर आर्थिक-सामाजिक समृद्धि आएगी।
In simple words: नदियों को जोड़ने से बाढ़ और सूखे की समस्या कम होती है, जल वितरण संतुलित होता है, और कृषि उत्पादन बढ़कर समग्र आर्थिक-सामाजिक समृद्धि आती है.

🎯 Exam Tip: नदी-जोड़ो परियोजना के लाभ और चुनौतियाँ दोनों ही महत्वपूर्ण हैं; उत्तर लिखते समय सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर ध्यान दें.

 

Question 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(ii) प्रायद्वीपीय नदी के तीन लक्षण लिखें.
Answer: प्रायद्वीपीय नदियों के तीन लक्षण निम्नलिखित हैं (i) प्रायद्वीपीय नदियाँ वर्षा जल पर आश्रित रहती हैं। (ii) ये नदियाँ सदानीरा नहीं हैं। (iii) प्रायद्वीपीय नदियाँ प्रौढ़ हैं तथा इनकी घाटियाँ सन्तुलित एवं उथली हैं।
In simple words: प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर करती हैं, इसलिए वे बारहमासी नहीं होतीं और उनकी घाटियाँ पुरानी व उथली होती हैं.

🎯 Exam Tip: प्रायद्वीपीय और हिमालयी नदियों के बीच के अंतर को समझना भूगोल में एक मुख्य अवधारणा है, विशेष रूप से उनकी विशेषताओं पर ध्यान देना.

 

Question 4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों से अधिक में न दें
(i) उत्तर भारतीय नदियों की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ क्या हैं? ये प्रायद्वीपीय नदियों से किस प्रकार भिन्न हैं?
Answer: उत्तर भारतीय नदियों की प्रायद्वीपीय नदियों से भिन्नता

क्रु०सं०भिन्नता के आधारउत्तर भारतीय नदियाँ (विशेषताएँ)प्रायद्वीपीय नदियाँ
1.उत्पत्तिउत्तरी भारत की नदियों की उत्पत्ति हिमानियों से हुई है।ये नदियाँ हिमपात न होने के कारण भूमिगत जल या वर्षाजल पर निर्भर हैं। इन नदियों की उत्पत्ति मध्यवर्ती उच्च भूमि से हुई है।
2.अपवाह क्षेत्रइन नदियों का अपवाह क्षेत्र विशाल है। जैसे- गंगा ब्रह्मपुत्र नदियों का अपवाह क्षेत्र।प्रायद्वीपीय नदियों का अपवाह क्षेत्र छोटा है। जैसे- कृष्णा एवं कावेरी नदियों का अपवाह क्षेत्र।
3.परिवहन मार्गउत्तरी भारत की नदियों के मार्ग मोड़दार तथा परिवर्तित हैं।इन नदियों के मार्ग सीधे एवं रेखीब हैं।
4.उपयोगउत्तरी भारत की नदियाँ सिंचाई के सर्वोत्तम स्रोत हैं।प्रायद्वीपीय नदियाँ विद्युत उत्पादने की दृष्टि से अपेक्षाकृत अधिक उपयोगी हैं।
5.अन्य लक्षणउत्तरी भारत की नदियाँ 'V' आकार की घाटियाँ, ऊँचे जल प्रपात और विशाल डेल्टा बनाती हैं। पूर्ववर्ती व अनुवर्ती प्रवाह मैदानी भाग में वृक्षाकार प्रारूप।इनकी घाटियाँ उथली हैं। ये नदियाँ छोटी प्रपात बनाती हैं तथा डेल्टा और ज्वारनदमुख बनाती हैं। अध्यारोपित अरीय व आयताकार प्रवाह।

In simple words: उत्तर भारतीय नदियाँ हिमालयी हिमानियों से निकलती हैं, वर्षा और बर्फ दोनों से पानी प्राप्त करती हैं, विशाल द्रोणियाँ बनाती हैं, और सिंचाई के लिए उपयोगी हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर करती हैं, छोटी द्रोणियाँ बनाती हैं, और जल विद्युत उत्पादन के लिए अधिक उपयुक्त हैं.

🎯 Exam Tip: यह तुलनात्मक विश्लेषण भारत की भौगोलिक विविधता और नदी प्रणालियों के उपयोग को समझने के लिए महत्वपूर्ण है; सारणीबद्ध रूप में उत्तर देने से अंक प्राप्त करना आसान होता है.

 

Question 4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों से अधिक में न दें
(ii) मान लीजिए आप हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वार से सिलीगुडी तक यात्रा कर रहे हैं। इस मार्ग में आने वाली मुख्य नदियों के नाम बताएँ। इनमें से किसी एक नदी की विशेषताओं का भी वर्णन करें.
Answer: हरिद्वार उत्तरी भारत में गंगा नदी के किनारे स्थित है, जबकि सिलीगुडी पश्चिम बंगाल में स्थित है। हिमालय के गिरिपद के साथ हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक की यात्रा करने पर हमें उत्तरी भारत की अधिकांश सभी नदियों तथा उन नदियों को भी पार करना होगा जो हिमालय से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। इन नदियों के नाम हैं-गंगा, यमुना, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी एवं महानदी।
**गंगा नदी की विशेषताएँ**
गंगा नदी उत्तरी भारत ही नहीं, विश्व की सर्वप्रमुख नदी मानी जाती है। इस पवित्र मानी जाने वाली नदी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. गंगा अपनी द्रोणी और सांस्कृतिक महत्त्व दोनों के दृष्टिकोण से भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है।
2. यह नदी उत्तराखण्ड राज्य में उत्तरकाशी जिले में गोमुख के निकट गंगोत्री हिमनद से 3,900 मीटर- की ऊँचाई से निकलती है। यहाँ इसे भागीरथी कहते हैं।
3. देव प्रयाग में भागीरथी में अलकनन्दा नदी मिलती है, इसके बाद यह गंगा कहलाती है।
4. गंगा नदी हरिद्वार से मैदान में प्रवेश करते हुए उत्तराखण्ड में 110 किमी उत्तर प्रदेश में 1,450 किमी, बिहार में 445 किमी और पश्चिम बंगाल में 520 किमी की दूरी तय कर अन्त में बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
5. गंगा द्रोणी केवल भारत में लगभग 8.6 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हुई है। यह भारत का सबसे बड़ा अपवाह तन्त्र बनाती है जिसमें उत्तर में हिमालय से निकलने वाली नदियाँ तथा दक्षिण प्रायद्वीप से निकलने वाली अनित्यवाही नदियाँ भी सम्मिलित हैं।
6. यमुना, सोना, रामगंगा, घाघरा, गोमती, गंडक, कोसी, महानन्दा, चम्बल आदि इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।
In simple words: हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक की यात्रा में गंगा, यमुना, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी और महानदी जैसी कई प्रमुख नदियाँ पार करनी होंगी; गंगा नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदी है, जो गंगोत्री हिमनद से निकलकर देवप्रयाग में अलकनन्दा से मिलकर गंगा बनती है, और इसकी विशाल द्रोणी भारत का सबसे बड़ा अपवाह तंत्र बनाती है.

🎯 Exam Tip: नदियों के उद्गम, संगम, प्रवाह मार्ग और सहायक नदियों के साथ-साथ उनके सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व पर ध्यान दें, विशेष रूप से गंगा जैसी प्रमुख नदियों के लिए.

 

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

Question 1. बड़ी नदियों के जलग्रहण क्षेत्र को क्या कहते हैं?
(क) जल-संभर
(ख) नदी द्रोणी
(ग) जल-संकर
(घ) ये सभी
Answer: (ख) नदी द्रोणी
In simple words: बड़ी नदियों के पूरे जलग्रहण क्षेत्र को नदी द्रोणी कहा जाता है, जिसमें मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा सिंचित पूरा इलाका शामिल होता है.

🎯 Exam Tip: जल-संभर और नदी द्रोणी के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर एक जैसे लगते हैं लेकिन उनके पैमाने में भिन्नता होती है.

 

Question 2. डेल्टा नदी की ........: में बनता है.
(क) वृद्धावस्था
(ख) प्रौढ़ावस्था
(ग) यौवनावस्था
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) वृद्धावस्था
In simple words: डेल्टा का निर्माण नदी के जीवनचक्र की अंतिम अवस्था, यानी वृद्धावस्था में होता है, जब नदी का वेग कम हो जाता है और वह अपने साथ लाए गए अवसादों को मुहाने पर जमा करने लगती है.

🎯 Exam Tip: नदी के जीवनचक्र की विभिन्न अवस्थाओं (यौवनावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था) और उनसे जुड़े भू-आकृतियों को याद रखना चाहिए.

 

Question 3. प्रायद्वीपीय नदियाँ...... जल पर आश्रित रहती हैं.
(क) नलकूप
(ख) वर्षा
(ग) कुएँ
(घ) ये सभी
Answer: (ख) वर्षा
In simple words: प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ मुख्य रूप से मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती हैं, इसलिए वे बारहमासी नहीं होतीं और गर्मियों में सूख जाती हैं.

🎯 Exam Tip: हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों के जल स्रोत में अंतर को समझना महत्वपूर्ण है; यह उनकी जल उपलब्धता और मौसमी प्रवाह को प्रभावित करता है.

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. नदी अपवाह प्रतिरूप किसे कहते हैं?
Answer: नदी एवं उसकी सहायक नदियों के विन्यास से विकसित प्राकृतिक अपवाह नदी उपवाह तन्त्र या प्रतिरूप कहा जाता है।
In simple words: नदी अपवाह प्रतिरूप नदियों और उनकी सहायक नदियों के भूमि पर फैलाव के विशेष पैटर्न को दर्शाता है.

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के अपवाह प्रतिरूप (जैसे वृक्षाकार, जालीनुमा, अरीय) को उदाहरणों सहित समझना परीक्षा के लिए उपयोगी है.

 

Question 2. अपवाह द्रोणी किसे कहते हैं?
Answer: विशाल नदियों के जल संभर (Water Shed) को नदी द्रोणी या अपवाह द्रोणी कहा जाता है।
In simple words: अपवाह द्रोणी एक बड़ी नदी प्रणाली का कुल जलग्रहण क्षेत्र होता है, जहाँ से सारी जलधाराएँ एक मुख्य नदी में मिलती हैं.

🎯 Exam Tip: अपवाह द्रोणी का आकार और इसका महत्व अक्सर भारत की प्रमुख नदी प्रणालियों के संदर्भ में पूछा जाता है.

 

Question 3. सिन्धु नदी का उद्गम स्थल कहाँ है? इसकी पाँच सहायक नदियों के नाम बताइए.
Answer: सिन्धु नदी हिमालय पर तिब्बत के क्षेत्र में मानसरोवर झील के निकट निकलती है। सतलुज, रावी, व्यास, चेनाब तथा झेलम इसकी पाँच प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।
In simple words: सिन्धु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास से निकलती है, और इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ सतलुज, रावी, व्यास, चेनाब और झेलम हैं.

🎯 Exam Tip: सिन्धु नदी प्रणाली, उसके उद्गम और पंचनद (सहायक नदियाँ) का ज्ञान भारत के भूगोल के लिए आवश्यक है.

 

Question 4. डेल्टा किसे कहते हैं?
Answer: समुद्री मुहाने पर नदी की निक्षेपण क्रिया द्वारा मिट्टी एवं बालू के महीन कणों से निर्मित अवसाद की त्रिभुजाकार आकृति 'डेल्टा' कहलाती है।
In simple words: डेल्टा एक त्रिभुजाकार भूमि निर्माण है जो नदी के मुहाने पर तब बनता है जब नदी अपने साथ लाए गए तलछट को समुद्र में जमा करती है.

🎯 Exam Tip: डेल्टा के निर्माण की प्रक्रिया और उसके प्रमुख उदाहरण (जैसे गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा) को समझना महत्वपूर्ण है.

 

Question 5. ज्वारनदमुख से क्या अभिप्राय है?
Answer: जिन नदियों के मुहानों पर ज्वार-भाटा अधिक सक्रिय रहते हैं, वे नदियों द्वारा निक्षेपित पदार्थों को अपने साथ बहाकर ले जाते हैं जिससे नदियाँ डेलटाओं की रचना नहीं कर पातीं। ऐसी नदियों के मुहाने 'ज्वारनदमुख' (एस्चुअरी) कहलाते हैं।
In simple words: ज्वारनदमुख नदी का वह मुहाना होता है जहाँ ज्वार-भाटा सक्रिय होने के कारण नदी अपने तलछट को समुद्र में जमा नहीं कर पाती, जिससे डेल्टा नहीं बन पाता.

🎯 Exam Tip: डेल्टा और ज्वारनदमुख के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर ज्वारीय क्रिया के प्रभाव पर ध्यान दें.

 

Question 6. नदियाँ प्रदूषित क्यों हैं?
Answer: नदियाँ औद्योगिक कूड़ा-करकट, शमशान घाट की राख एवं त्योहारों पर फूल एवं अन्य सामग्री के जल में विसर्जन, बड़े पैमाने पर स्नान और कपड़े धोने तथा नगरीय बस्तियों की गन्दगी को नदी में डालने से प्रदूषित होती हैं।
In simple words: नदियाँ औद्योगिक कचरे, घरेलू अपशिष्ट, धार्मिक अनुष्ठानों की सामग्री, स्नान और कपड़े धोने जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण प्रदूषित होती हैं.

🎯 Exam Tip: नदी प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों और उसके पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इसके कारणों को जानना महत्वपूर्ण है.

 

Question 7. गंगा नदी कहाँ से निकलती है?
Answer: गंगा नदी उत्तराखण्ड राज्य में हिमालय के गंगोत्री नाम की हिमानी से निकलती है।
In simple words: गंगा नदी हिमालय में स्थित गंगोत्री हिमनद से निकलती है, जिसे उद्गम स्थल पर भागीरथी के नाम से जाना जाता है.

🎯 Exam Tip: भारत की प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों को याद रखना भूगोल के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 8. बंगाल की खाड़ी में गिरते समय ब्रह्मपुत्र किस नाम से पुकारी जाती है?
Answer: मेघना।
In simple words: ब्रह्मपुत्र नदी बांग्लादेश में गंगा से मिलने के बाद बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले मेघना नदी के नाम से जानी जाती है.

🎯 Exam Tip: नदियों के विभिन्न नामों को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे विभिन्न देशों या क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं.

 

Question 9. सिन्धु नदी का कितना भाग भारत में स्थित है?
Answer: 33 प्रतिशत भाग (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब)।
In simple words: सिन्धु नदी का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा भारत में बहता है, मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब राज्यों से.

🎯 Exam Tip: भारत से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय नदियों (जैसे सिन्धु, ब्रह्मपुत्र) के भारतीय हिस्से को जानना महत्वपूर्ण है.

 

Question 10. गंगा नदी की कुल लम्बाई किलनी है?
Answer: 2,830 किमी से अधिक।
In simple words: गंगा नदी की कुल लंबाई 2,830 किलोमीटर से अधिक है, जो इसे भारत की सबसे लंबी नदियों में से एक बनाती है.

🎯 Exam Tip: भारत की प्रमुख नदियों की लंबाई और उनके कुल अपवाह क्षेत्र को जानना महत्वपूर्ण है.

 

Question 11. सिन्धु नदी की कुल लम्बाई कितनी है?
Answer: 2,900 किमी।
In simple words: सिन्धु नदी की कुल लंबाई 2,900 किलोमीटर है, जिसमें से अधिकांश भाग पाकिस्तान में पड़ता है.

🎯 Exam Tip: सिन्धु जैसी अंतरराष्ट्रीय नदियों की कुल लंबाई और उनके विभिन्न देशों में फैलाव को याद रखना आवश्यक है.

 

Question 12. गंगा कार्य योजना क्यों बनाई गई?
Answer: गंगा का प्रदूषण कम करने के लिए।
In simple words: गंगा कार्य योजना गंगा नदी के बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और इसके जल की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी.

🎯 Exam Tip: भारत में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रमुख योजनाओं और उनके उद्देश्यों को जानना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 13. जल प्रवृत्ति किसे कहते हैं?
Answer: किसी नदी में जल के वस्तुनिष्ठ प्रवाह के प्रतिरूप को इसकी प्रवृत्ति कहते हैं।
In simple words: जल प्रवृत्ति एक नदी में पानी के प्रवाह के पैटर्न और उसकी मात्रा के नियमित उतार-चढ़ाव को संदर्भित करती है.

🎯 Exam Tip: नदी प्रवाह की प्रवृत्ति को प्रभावित करने वाले कारकों (जैसे वर्षा, बर्फ पिघलना) को समझना आवश्यक है.

 

Question 14. पश्चिम की ओर प्रवाहित छोटी नदियों के नाम लिखिए.
Answer: माही, साबरमती, कालिंदी, भरतपूझा, पेरियार, शरावती तथा ढाढर।
In simple words: माही, साबरमती, कालिंदी, भरतपूझा, पेरियार, शरावती और ढाढर भारत की कुछ छोटी नदियाँ हैं जो पश्चिमी घाट से निकलकर अरब सागर में पश्चिम की ओर बहती हैं.

🎯 Exam Tip: पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ (जो डेल्टा नहीं बनातीं) और पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ (जो डेल्टा बनाती हैं) के बीच का अंतर अक्सर पूछा जाता है.

 

Question 15. घाघरा नदी का उद्गम एवं सहायक नदियों के नाम लिखिए.
Answer: घाघरा नदी मापचाचूँगों हिमनद से निकलती है। इसकी सहायक नदियों में तिला, सेती व बेरी मुख्य हैं।
In simple words: घाघरा नदी मापचाचूँगों हिमनद से निकलती है और इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ तिला, सेती और बेरी हैं.

🎯 Exam Tip: गंगा की प्रमुख सहायक नदियों, उनके उद्गम और उनकी सहायक नदियों को जानना भारतीय भूगोल के लिए महत्वपूर्ण है.

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. सहायक नदी तथा जल वितरिका में अन्तर स्पष्ट कीजिए.
Answer: सहायक नदी तथा जल वितरिका में निम्नलिखित अन्तर हैं

क्र०सं०सहायक नदीजल वितरिका
1.यह एक छोटी नदी (नाला) होती है जो मुख्य नदी से मिल जाती है तो सहायक नदी कहलाती है।जब एक प्रमुख नदी कई छोटी-छोटी नदियों में विभक्त हो जाती है तो इसे जल वितरिका कहते हैं।
2.सहायक नदियों का निर्माण नदी के ऊपरी या मध्य मार्ग में होता है।इनका निर्माण नदी के निचले मार्ग में होता है।
3.यमुना नदी गंगा नदी की एक सहायक नदी है।गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले कई जल वितरिकाओं में विभाजित हो जाती है।
4.सहायक नदी के मिलने से मुख्य नदी में जल की मात्रा बढ़ जाती है।वितरिका के कारण मुख्य धारा में जल की मात्रा कम हो जाती है।

In simple words: सहायक नदियाँ मुख्य नदी में मिलकर उसके जल प्रवाह को बढ़ाती हैं, जबकि जल वितरिकाएँ मुख्य नदी से अलग होकर उसके जल प्रवाह को कम करती हैं, खासकर निचले डेल्टा क्षेत्रों में.

🎯 Exam Tip: सहायक नदियों और वितरिकाओं के बीच का अंतर नदी प्रणालियों के अध्ययन में मौलिक है; उनके कार्य और निर्माण स्थल को याद रखें.

 

Question 2. डेल्टा तथा ज्वारनदमुख में चार अन्तर बताइए.
Answer: डेल्टा तथा ज्वारनदमुख में निम्नलिखित अन्तर हैं

क्र०सं०डेल्टाज्वारनदमुख
1.डेल्टा बहुत ही समतल और उपजाऊ मैदान है।ज्वारनदमुख बनाने वाली नदियों का मार्ग गहरा और सँकरा होने के कारण अवसादों का जमाव नहीं होता है। इसलिए ये नदियाँ मैदानों का निर्माण नहीं करती हैं।
2.डेल्टा प्रदेश में नदी कई उपनदियों या जल वितरिकाओं में विभाजित हो जाती है।इसमें मुख्य नदी उपनदियाँ या जल वितरिकाओं में विभाजित नहीं होती है।
3.डेल्टा वाले क्षेत्रों में कृत्रिम जल पत्तन होते हैं।ज्वारनदमुख वाले क्षेत्रों में प्राकृतिक जल पत्तन के लिए अधिक उपयुक्त क्षेत्र होते हैं।
4.गंगा, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, कृष्णा, गोदावरी व महानदी नदियाँ डेल्टा बनाती हैं।भारत में नर्मदा व ताप्ती नदियाँ ज्वारनदमुख बनाती हैं।

In simple words: डेल्टा नदियों द्वारा तलछट जमा करके बनाए गए उपजाऊ त्रिकोणीय भूमि क्षेत्र होते हैं, जबकि ज्वारनदमुख नदी के वे मुहाने होते हैं जहाँ तेज ज्वार तलछट को समुद्र में ले जाते हैं, जिससे भूमि का निर्माण नहीं होता.

🎯 Exam Tip: डेल्टा और ज्वारनदमुख के निर्माण की प्रक्रिया, भौगोलिक विशेषताएँ और उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नदी-समुद्र अंतःक्रिया का एक प्रमुख पहलू है.

 

Question 3. राजस्थान में प्रवाहित नदी क्रम का वर्णन कीजिए.
Answer: राजस्थान शुष्क प्रदेश है। यहाँ पर लूनी नदी तन्त्र ही महत्त्वपूर्ण है। अरावली के पश्चिम में लूनी राजस्थान का सबसे बड़ा नदी तन्त्र है। यह पुष्कर के समीप दो धाराओं (सरस्वती और साबरमती) के रूप में उत्पन्न होती है, जो गोविन्दगढ़ के निकट परस्पर मिल जाती है और लूनी कहलाती है। तलवाड़ा तक यह पश्चिम दिशा में बहती है और तत्पश्चात् दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती हुई कच्छ के रन में जा मिलती है। यह सम्पूर्ण नदी तन्त्र अल्पकालिक है।
In simple words: राजस्थान का प्रमुख नदी तंत्र लूनी नदी है, जो अरावली के पश्चिम में पुष्कर के पास उत्पन्न होती है और कच्छ के रन में समाप्त हो जाती है, यह एक अल्पकालिक नदी प्रणाली है.

🎯 Exam Tip: राजस्थान की आंतरिक जल निकासी प्रणाली और लूनी जैसी नदियों की विशिष्टताओं को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके मौसमी प्रवाह और अंतर्देशीय समाप्ति के कारण.

 

Question 4. भारत के दक्षिण-पश्चिम की ओर प्रवाहित छोटी नदी प्रणाली का वर्णन कीजिए.
Answer: भारत के दक्षिण-पश्चिम की ओर प्रवाहित नदियों में अरब सागर की ओर बहने वाली नदियों का जलमार्ग छोटा है। शेतरूनीजी एक ऐसी ही नदी है जो अमरावती जिले में डलकाहवा से निकलती है। भद्रा नदी राजकोट जिले के अनियाली गाँव के निकट से निकलती है। ढाढर नदी पंचमहल जिले के घंटार गाँव से निकलती है। साबरमती और माही गुजरात की दो प्रसिद्ध नदियाँ हैं। महाराष्ट्र में नासिक जिले में त्रिबंक पहाड़ियों से वैतरणा नदी निकलती है। कालिंदी नदी बेलगाँव जिले से निकलकर करवाड़ की खाड़ी में गिरती है। शरावती पश्चिम की ओर बहने वाली कर्नाटक की एक अन्य महत्त्वपूर्ण नदी है। यह नदी कर्नाटक के शिमोगा जिले से निकलती है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 2,209 वर्ग किमी है। गोवा में ऐसी ही दो नदियाँ हैं। इनमें एक का नाम मांडवी और दूसरी जुआरी है। केरल में सबसे बड़ी नदी भरतपूझा अन्नामलाई पहाड़ियों से निकलती है। पेरियार केरल की दूसरी बड़ी नदी है। केरल की अन्य महत्त्वपूर्ण नदी पांबा है जो वेबनाद झील में गिरती है।
In simple words: भारत के दक्षिण-पश्चिम में कई छोटी नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं, जिनमें गुजरात की साबरमती और माही, महाराष्ट्र की वैतरणा, कर्नाटक की शरावती, गोवा की मांडवी और जुआरी, तथा केरल की भरतपूझा और पेरियार प्रमुख हैं.

🎯 Exam Tip: पश्चिमी तट की नदियों की छोटी लंबाई, तेज बहाव और ज्वारनदमुख बनाने की प्रवृत्ति को ध्यान में रखें, क्योंकि ये अक्सर प्रायद्वीपीय नदियों से अंतर में पूछी जाती हैं.

 

Question 5. नदियों की बहाव प्रवृत्ति से आप क्या समझते हैं? गंगा नदी की बहाव प्रवृत्ति का वर्णन कीजिए.
Answer: नदी में बहने वाले जल की मात्रा को सामान्य नदी की बहाव प्रवृत्ति कहते हैं, किन्तु वास्तव में एक नदी के चैनल में वर्षपर्यन्त जल प्रवाह का प्रारूप नदी बहाव प्रवृत्ति (River regime) कहलाता है। गंगा नदी में न्यूनतम जल प्रवाह जनवरी से जून की अवधि में होता है, जबकि अधिकतम प्रवाह अगस्त या सितम्बर में होता है। सितम्बर के बाद प्रवाह में लगातार कमी होती जाती है। इस प्रकार गंगा नदी का जल प्रवाह वर्षा ऋतु या मानसून पर निर्भर है। गंगा द्रोणी के पूर्वी या पश्चिमी भागों की जल बहाव प्रवृत्ति में चौंकाने वाले अन्तर नजर आते हैं। बर्फ पिघलने के कारण गंगा नदी का प्रवाह मानसून आने से पहले भी काफी बड़ा होता है। फरक्का में गंगा नदी का औसत अधिकतम जल प्रवाह लगभग 55,000 क्यूसेक्स है, जबकि न्यूनतम औसत केवल 1,300 क्यूसेक्स है।
In simple words: नदी बहाव प्रवृत्ति एक नदी में पूरे वर्ष जल प्रवाह के पैटर्न को संदर्भित करती है; गंगा नदी में न्यूनतम प्रवाह जनवरी-जून में होता है और अधिकतम प्रवाह मानसून के दौरान अगस्त-सितम्बर में होता है, जो बर्फ पिघलने और मानसूनी वर्षा दोनों से प्रभावित होता है.

🎯 Exam Tip: नदी बहाव प्रवृत्ति का मौसमी विश्लेषण, विशेष रूप से मानसून और बर्फ पिघलने के प्रभावों को उजागर करना, परीक्षा में अच्छे अंक दिला सकता है.

 

Question 6. भारत की नदियाँ किस प्रकार देश के लिए वरदान हैं?
Answer: नदियाँ जल का स्थायी स्रोत मानी जाती हैं, इसलिए नदियों को जीवन रेखा कहा गया है। भारत की नदियाँ वास्तव में जीवन रेखा ही हैं। इस सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण तर्क निम्नलिखित हैं 1. नदियाँ देश का आधारभूत आर्थिक संसाधन एवं सामाजिक व सांस्कृतिक विकास को आधार हैं। सभी प्रकार की आर्थिक क्रियाएँ और सामाजिक-सांस्कृतिक परम्पराएँ नदियों या जल से सम्बद्ध- होती हैं। 2. नदियाँ पेयजल, कृषि की सिंचाई के लिए जल, उद्योगों में उत्पादन के लिए जल और परिवहन के लिए जलमार्ग उपलब्ध कराती हैं। 3. नदियों के जल को बाँध के रूप में बदलकर जल विद्युत का उत्पादन किया जाता है जो वर्तमान आर्थिक विकास का आधार है।
In simple words: नदियाँ भारत के लिए जीवन रेखा हैं क्योंकि वे पीने का पानी, सिंचाई, औद्योगिक उपयोग और परिवहन के लिए जलमार्ग प्रदान करती हैं, साथ ही बाँधों के माध्यम से जलविद्युत का उत्पादन करके देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं.

🎯 Exam Tip: नदियों के बहुमुखी उपयोग और उनके सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक महत्व पर ध्यान केंद्रित करें; यह एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण प्रश्न है.

 

Question 7. कावेरी नदी द्रोणी की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए.
Answer: कावेरी नदी कर्नाटक के कुर्ग जिले की 1,341 मीटर ऊँची ब्रह्मगिरि पहाड़ियों से निकलती है। इस नदी में वर्ष भर जल प्रवाह बना रहता है क्योंकि इसके प्रवाह क्षेत्र में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से वर्षा होती रहती है। कावेरी नदी द्रोणी का 3 प्रतिशत क्षेत्र केरल, 41 प्रतिशत कर्नाटक तथा 56 प्रतिशत तमिलनाडु में स्थित है। इस नदी की लम्बाई 800 किलोमीटर है और यह 81,155 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अपवाहित करती है। कावेरी नदी की सहायक नदियों में काबीनी, भवानी और अमरावती मुख्य हैं।
In simple words: कावेरी नदी कर्नाटक की ब्रह्मगिरि पहाड़ियों से निकलती है, पूरे साल जलप्रवाह बनाए रखती है, और इसकी द्रोणी केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों में फैली हुई है, जिसमें काबीनी, भवानी और अमरावती इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं.

🎯 Exam Tip: कावेरी नदी की साल भर जल उपलब्धता और इसके जल बँटवारे को लेकर राज्यों के बीच विवाद, इसके महत्व को बढ़ाते हैं; उद्गम, प्रवाह क्षेत्र और सहायक नदियों को याद रखें.

 

Question 8. गोदावरी दक्षिणी भारत की गंगा कहलाती है। स्पष्ट कीजिए.
Answer: गंगा भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। यह नदी भारत में धार्मिक आस्था का आधार मानी जाती है। इसके समरूप दक्षिण भारत में भी गोदावरी नदी को गंगा के समतुल्य माना जाता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
1. उत्तरी भारत में गंगा के समान ही गोदावरी नदी भी दक्षिणी भारत की सबसे लम्बी नदी है और इस नदी के प्रति भी पवित्र गंगा के समान ही जनसामान्य में श्रद्धा पाई जाती है।
2. दक्षिणी भारत में गोदावरी नदी पर भी गंगा के समान धार्मिक आयोजन होते हैं।
3. गोदावरी नदी की लम्बाई 1,456 किलोमीटर है जो दक्षिणी भारत की अन्य नदियों से अधिक है-। इसीलिए इसे दक्षिणी भारत की गंगा कहा जाता है।
4. वेनगंगा, पूर्णा, प्रवरा तथा ईन्द्रावती गोदावरी की सहायक नदियाँ हैं। इसका अपवाह क्षेत्र 3,12,812 वर्ग किमी है। अतः इसके विशाल आकार, विस्तार व पवित्रता आदि के कारण इसे दक्षिणी भारत की गंगा कहा जाना उपयुक्त है।
In simple words: गोदावरी नदी को 'दक्षिणी भारत की गंगा' कहा जाता है क्योंकि यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है (1,456 किमी), धार्मिक रूप से पूजनीय है, और इसका अपवाह क्षेत्र विशाल है, जो उत्तरी भारत की गंगा के समान महत्व रखता है.

🎯 Exam Tip: 'दक्षिणी भारत की गंगा' जैसे उपनाम वाली नदियों के भौगोलिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को समझना महत्वपूर्ण है.

 

Question 9. क्या कारण है कि पश्चिमी तट की नदियाँ भारी मात्रा में अवसाद बहाकर लाती हैं, किन्तु डेल्टा का निर्माण नहीं करतीं। स्पष्ट कीजिए.
Answer: पश्चिमी तट पर बहने वाली प्रमुख नदियाँ नर्मदा तथा ताप्ती हैं। इसके अतिरिक्त अनेक छोटी-छोटी नदियाँ भी पश्चिमी घाट से निकलकर पश्चिमी तटीय मैदान में बहती हुई अरब सागर में गिरती हैं। यद्यपि ये नदियाँ पश्चिमी घाट से पर्याप्त मात्रा में तलछट बहाकर लाती हैं, परन्तु ये डेल्टा नहीं बनाती हैं। इसके निम्नलिखित कारण हैं-
1. ये नदियाँ संकीर्ण मैदान में प्रवाहित होती हैं, अतः इनका वेग अधिक होता है। इसलिए अवसाद निक्षेप की आदर्श दशाएँ नहीं बनती हैं।
2. इन नदियों के मार्ग की ढाल प्रवणता अधिक होने के कारण ये तीव्र वेग से बहती हैं जिससे इनके मुहाने पर तलछट का निक्षेप नहीं हो पाता है।
In simple words: पश्चिमी तट की नदियाँ, जैसे नर्मदा और ताप्ती, भारी तलछट लाती हैं लेकिन संकीर्ण मैदानों और तीव्र ढाल के कारण डेल्टा नहीं बनातीं; उनका तेज वेग तलछट को सीधे समुद्र में बहा ले जाता है.

🎯 Exam Tip: पश्चिमी तट की नदियों की विशिष्ट भौगोलिक विशेषताओं (संकीर्ण मैदान, तीव्र ढाल) को समझना महत्वपूर्ण है, जो उन्हें डेल्टा के बजाय ज्वारनदमुख बनाने पर मजबूर करती हैं.

 

Question 10. हिमालय के तीन प्रमुख नदी तन्त्रों के नाम, इनके स्रोत तथा प्रमुख सहायक नदियों का उल्लेख कीजिए.
Answer: हिमालय के तीन प्रमुख नदी तन्त्र निम्नलिखित हैं।
1. गंगा नदी तन्त्र-इसका उद्गम गंगोत्री हिमानी है। गंगा की सहायक नदियों में-यमुना, सोना, घाघरा, गंडक, कोसी, रामगंगा आदि हैं।
2. ब्रह्मपुत्र नदी तन्त्र – यह नदी मानसरोवर झील (तिब्बत हिमालय) से निकलती है। इसकी सहायक नदियों में लोहित तथा दिहांग प्रमुख हैं।
3. सिन्धु नदी तन्त्र-सिन्धु नदी भी मानसरोवर झील के निकट से निकलती है। सतलुज, जास्करे, झेलम, चेनाब, रावी, व्यास तथा गिलगित आदि इस नदी तन्त्र की प्रमुख नदियाँ हैं।
In simple words: हिमालय में तीन प्रमुख नदी तंत्र हैं: गंगा (गंगोत्री से, सहायक: यमुना, घाघरा), ब्रह्मपुत्र (मानसरोवर झील से, सहायक: लोहित, दिहांग), और सिन्धु (मानसरोवर झील से, सहायक: सतलुज, झेलम, चेनाब).

🎯 Exam Tip: हिमालयी नदी प्रणालियों के उद्गम, प्रवाह मार्ग और प्रमुख सहायक नदियों को याद रखना भारतीय भूगोल में एक आधारभूत अवधारणा है.

 

Question 11. प्रायद्वीपीय अपवाह तन्त्र की विवेचना कीजिए तथा इसके उदविकास की मुख्य घटनाओं का वर्णन कीजिए.
Answer: प्रायद्वीपीय अपवाह-तन्त्र प्रायद्वीपीय अपवाह-तन्त्र हिमालयी अपवाह तन्त्र से पुराना है। यह तथ्य नदियों की प्रौढ़ावस्था और नदी घाटियों के चौड़ा व उथला होने से प्रमाणित होता है। नर्मदा और ताप्ती को छोड़कर अधिकतर प्रायद्वीप नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं। प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषता है कि ये एक सुनिश्चित मार्ग पर चलती हैं, विसर्प नहीं बनातीं और ये बारहमासी नहीं हैं। यद्यपि भ्रंश घाटियों में बहने वाली नर्मदा और ताप्ती इसका अपवाद हैं।
**प्रायद्वीपीय अपवाह-तन्त्र का उदविकास**
प्रायद्वीपीय अपवाह-तन्त्र के उविकास एवं स्वरूप निर्धारण में निम्नलिखित तीन भूगर्भिक घटनाएँ। महत्त्वपूर्ण हैं 1.
आरम्भिक टर्शियरी काल की अवधि में प्रायद्वीपीय पश्चिमी पार्श्व का अवतलन या धंसाव जिससे यह समुद्र तल से नीचे चला गया। इससे मूल जल-संभर के दोनों ओर नदियों की सामान्यत सममित योजना में असन्तुलन उत्पन्न हो गया।
2. हिमालय में होने वाले प्रोत्थान के कारण प्रायद्वीप खण्ड के उत्तरी भाग का अवतलन हुआ और परिणामस्वरूप भ्रंश द्रोणियों का निर्माण हुआ। नर्मदा और ताप्ती इन्हीं भ्रंश घाटियों में बह रही हैं। इसलिए इन नदियों में जलोढ़ व डेल्टा निक्षेप की कमी पाई जाती है।
3. इसी काल में प्रायद्वीपीय खण्ड उत्तर-पश्चिम दिशा से दक्षिण-पूर्व दिशा में झुक गया। परिणामस्वरूप इसका अपवाह बंगाल की खाड़ी की ओर उन्मुख हो गया।
In simple words: प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र हिमालयी तंत्र से पुराना है, जिसमें अधिकांश नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं, लेकिन नर्मदा और ताप्ती भ्रंश घाटियों में पश्चिम की ओर बहती हैं; इसका विकास टेरिटरी काल में पश्चिमी पार्श्व के धंसने, हिमालय के उत्थान से उत्तरी भाग के अवतलन, और प्रायद्वीप के दक्षिण-पूर्व की ओर झुकाव के कारण हुआ.

🎯 Exam Tip: प्रायद्वीपीय नदियों की विशिष्ट भूवैज्ञानिक उत्पत्ति और उनके प्रवाह पैटर्न में क्षेत्रीय भिन्नताओं (जैसे नर्मदा और ताप्ती) को समझना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 12. प्रायद्वीपीय नदी तन्त्र की मुख्य नदी द्रोणियों का वर्णन कीजिए.
Answer: प्रायद्वीपीय अपवाह में अनेक नदी द्रोणी हैं। इनमें प्रमुख नदी तन्त्रों का विवरण इस प्रकार है 1. गोदावरी नदी तन्त्र–प्रायद्वीपीय खण्ड में गोदावरी सबसे बड़ी नदी तन्त्र है। इसे दक्षिण की गंगा कहते हैं। गोदावरी नदी महाराष्ट्र में नासिक जिले से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह 1,465 किमी लम्बी नदी है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 3.13 लाख वर्ग किमी है। इसकी सहायक नदियों में पेनगंगा, इन्द्रावती, प्राणहिता और मंजरा हैं।
2. महानदी नदी तन्त्र-महानदी छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में सिहावा के निकट निकलती है और उड़ीसा में प्रवाहित होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह नदी 851 किलोमीटर लम्बी है और इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 1.42 लाख वर्ग किमी है।
3. कृष्णा नदी तन्त्र-कृष्णा पूर्व दिशा में बहने वाली दूसरी बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है, जो सह्याद्रि में महाबलेश्वर के निकट निकलती है। इसकी लम्बाई 1,401 किमी है। कोयना, तुंगभद्रा और भीमा इसकी प्रमुख सहायक नदिया हैं।
4. कावेरी नदी तन्त्र-कावेरी नदी कर्नाटक के कोगाड़ जिले में ब्रह्मगिरि पहाड़ियों से निकलती है। इसकी लम्बाई 800 किमी है। यह 81,155 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अपवाहित करती है। काबीनी, भावानी और अमरावती इसकी मुख्य सहायक नदियाँ हैं।
5. नर्मदा नदी तन्त्र—यह नदी कर्नाटक पठार के पश्चिमी पार्श्व से लगभग 1,057 मीटर की ऊँचाई से निकलती है। लगभग 1,312 किमी की दूरी में बहने के बाद यह भड़ौच के दक्षिण में अरब सागर में मिलती है और 27 किमी लम्बी ज्वारनदमुख बनाती है।
6. ताप्ती नदी तन्त्र-ताप्ती पश्चिमी दिशा में बहने वाली प्रायद्वीप की एक अन्य महत्त्वपूर्ण नदी है। यह मध्य प्रदेश में बेतूल जिले में मुलताई से निकलती है। यह 724 किमी लम्बी है और 65,145 वर्ग किमी क्षेत्र को अपवाहित करती है।
In simple words: प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख नदी द्रोणियों में गोदावरी (सबसे बड़ी), महानदी, कृष्णा, कावेरी (सभी पूर्व की ओर बहने वाली), और नर्मदा व ताप्ती (पश्चिम की ओर बहने वाली, भ्रंश घाटियों में) शामिल हैं; इन सभी की अपनी-अपनी लंबाई, उद्गम, और सहायक नदियाँ हैं.

🎯 Exam Tip: प्रायद्वीपीय भारत की प्रत्येक प्रमुख नदी प्रणाली के उद्गम, लंबाई, अपवाह क्षेत्र, और सहायक नदियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अक्सर विस्तृत उत्तरों में पूछा जाता है.

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

Question 1. भारत के अपवाहं-तन्त्र के स्वरूप का विवरण दीजिए तथा उत्तरी भारत के पश्चिमी नदी तन्त्र का वर्णन कीजिए.
Answer: किसी भी देश अथवा प्रदेश की छोटी-बड़ी सभी नदियों, नालों एवं सरिताओं आदि की समग्र अपवाह प्रणाली को अपवाह-तन्त्र की संज्ञा दी जाती है। किसी भी क्षेत्र का अपवाह-तन्त्र उस क्षेत्र की भौतिक संरचना, भू-भाग के ढाल, जल-प्रवाह का वेग एवं आकार आदि तथ्यों पर निर्भर करता है। भारत एक विशाल देश है जिसकी धरातलीय संरचना एवं भूस्वरूप में सर्वत्र अनेक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। इसका प्रभाव यहाँ के अपवाह-तन्त्र पर भी पड़ा है। यही कारण है कि भारत में अपवाह-तन्त्र के अनेक स्वरूप देखने को मिलते हैं।
**भारत के अपवाह-तन्त्र**
उद्गम के आधार पर भारत की नदियों के अपवाह-तन्त्र को दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता हैं- 1. उत्तरी भारत या बृहत् मैदान का अपवाह-तन्त्र (i) सिन्धु नदी अपवाह-तन्त्र, (ii) गंगा नदी अपवाह-तन्त्र तथा हि-तन्त्र तथा (iii) ब्रह्मपुत्र नदी अपवाह-तन्त्र।
2. प्रायद्वीपीय भारत का अपवाह-तन्त्र-
(क) पश्चिमोगामी अपवाह-तन्त्र
(i) नर्मदा नदी अपवाह-तन्त्र,
(ii) ताप्ती नदी अपवाह-तन्त्र,
(ख) पूर्वगामी अपवाह तन्त्र (iii) महानदी अपवाह-तन्त्र, (iv) दामोदर नदी अपवाह-तन्त्र, (v) गोदावरी नदी अपवाह-तन्त्र, (vi) कृष्णा नदी अपवाह-तन्त्र, (vii) कावेरी नदी अपवाह-तन्त्र। उत्तरी भारत के पश्चिमी नदी तन्त्र में सिन्धु एवं सतलज नदियाँ महत्त्वपूर्ण हैं। इनका विवरण अग्र प्रकार है-
**सिन्धु नदी-** सिन्धु नदी तिब्बत के पठार के निकलकर 2,880 किमी की दूरी तक प्रवाहित होती हुई अरब सागर से मिल जाती है। हमारे देश में यह नदी मात्र 709 किमी की दूरी तय करती है। इसकी मुख्य सहायक नदियाँ सतलुज, व्यास, झेलम, चिनाब तथा रावी हैं। भारत-विभाजन के फलस्वरूप सिन्धु नदी तन्त्र के मुख्य भाग पाकिस्तान में चले गए। सिन्धु की सहायक नदियों में सतलुज नदी भारत में सबसे अधिक जल प्रदान करती है।
**सतलुज नदी-** नदी कैलास पर्वत से निकलकर लगभग 1,440 किमी की दूरी में प्रवाहित होती हुई सिन्धु नदी में मिल जाती है। झेलम कश्मीर राज्य की प्रमुख नदी है। पर्वतीय प्रदेश से मैदान की ओर मुड़ने पर इसका जल प्रवाह मन्द हो जाता है। कश्मीर की प्रसिद्ध हरी-भरी सुखद घाटी झेलम नदी के मोड़ के समीप स्थित है। नदियों ने इस मैदान को बहुत ही उपजाऊ बना दिया है। इस भाग में नहरी सिंचाई की सघनतम जाल पाया जाता है।
In simple words: भारत का अपवाह तंत्र उसकी भौतिक संरचना, ढाल और जल प्रवाह पर निर्भर करता है, जिसे मुख्य रूप से उत्तरी भारत (सिन्धु, गंगा, ब्रह्मपुत्र) और प्रायद्वीपीय भारत (पश्चिमोगामी-नर्मदा, ताप्ती; पूर्वगामी-महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) के नदी तंत्रों में बांटा गया है; सिन्धु और सतलुज पश्चिमी हिमालयी नदियों में प्रमुख हैं.

🎯 Exam Tip: भारत के अपवाह तंत्र का वर्गीकरण, उनके उद्गम के आधार पर, और प्रत्येक प्रमुख नदी तंत्र की विशेषताओं (लंबाई, सहायक नदियाँ, महत्व) को जानना महत्वपूर्ण है.

 

Question 2. भारत के पूर्वी नदी तन्त्र का वर्णन कीजिए.
Answer: भारत के पूर्वी विशाल नदी-तन्त्र को निम्नलिखित उप-तन्त्रों में विभाजित किया जा सकता है 1. गंगा नदी तन्त्र-गंगा भारत की प्रसिद्ध एवं धार्मिक महत्त्व वाली नदी है जो हिमालय के गंगोत्री या गोमुख हिमानी से निकलती है। हरिद्वार से गंगा नदी की मैदानी यात्रा आरम्भ होती है तथा इसकी गति भी मन्द पड़ जाती है। मैदानी भाग में इसकी चौड़ाई अधिक है। प्रयाग (इलाहाबाद) में यमुना व अदृश्य सरस्वती नदियाँ इसमें आकर मिलती हैं तथा इससे आगे इसके ढाल में कमी आनी आरम्भ हो जाती है। डेल्टा के समीप गंगा नदी का ढाल बहुत ही मन्द हो जाता है। गंगा नदी का डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है। गंगा भारत की सबसे पवित्र नदी मानी जाती है जिसकी लम्बाई 2,510 किमी है। इसके तट पर हरिद्वार, कानपुर, प्रयाग (इलाहाबाद), वाराणसी, पटना एवं कोलकाता जैसे बड़े नगर स्थित हैं। गंगा नदी का अपवाह क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा अपवाह क्षेत्र है। गोमती, सोन, घाघरा, गंडक एवं कोसी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।
2. यमुना नदी तन्त्र-यमुना नदी हिमालय पर्वत के यमुनोत्री हिमानी से निकलकर गंगा नदी के समानान्तर प्रवाहित होती हुई प्रयाग में गंगा नदी से मिल जाती है। प्रयाग तक इसकी लम्बाई 1,375 किमी है। दिल्ली, मथुरा एवं आगरा यमुना नदी के किनारे स्थित महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक नगर हैं। सिन्धु, बेतवा, केन एवं चम्बल इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। ये सभी दक्षिण के उत्तर की ओर प्रवाहित होती हुई यमुना नदी से मिल जाती हैं।
3. ब्रह्मपुत्र नदी तन्त्र-ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में स्थित मानसरोवर झील के निकट कैलास पर्वत श्रेणी से निकलती है। यह नदी दक्षिणी तिब्बत में बढ़ती हुई पूर्वी हिमालय के नामचबरवा शिखर के समीप अचानक दक्षिणे की ओर मुड़कर भारत में प्रवेश करती है। तिब्बत में इसे सांगपो नदी के नाम से जाना जाता है। असम में इसे दिहांग कहा जाता है। दिहांग तथा लोहित इसकी सहायक नदियाँ हैं जो विपरीत दिशाओं से आकर इसमें मिल जाती हैं। ब्रह्मपुत्र नदी असम राज्य में प्रवाहित होती हुई गंगा नदी से मिल जाती है। बंगाल की खाड़ी से लेकर डिब्रूगढ़ तक इसमें नावें एवं जलयान चल सकते हैं। गोहाटी एवं डिब्रूगढ़ ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे पर स्थित प्रमुख नगर हैं। यह नदी अपनी बाढ़ों तथा प्रवाह मार्ग में परिवर्तन के लिए विख्यात है। इसकी बाढ़ों से प्रतिवर्ष धन-जन की बहुत अधिक हानि होती है। ब्रह्मपुत्र नदी की कुल लम्बाई 2,880 किमी है।
In simple words: भारत के पूर्वी नदी तंत्र में गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र नदियाँ शामिल हैं; गंगा गंगोत्री से निकलकर भारत की सबसे पवित्र और लंबी नदी है, यमुना यमुनोत्री से निकलकर गंगा में मिलती है, और ब्रह्मपुत्र मानसरोवर झील से निकलकर असम से होते हुए गंगा में मिलती है, जो बाढ़ों के लिए कुख्यात है.

🎯 Exam Tip: पूर्वी नदी तंत्र की प्रत्येक नदी (गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र) के उद्गम, प्रवाह मार्ग, प्रमुख शहरों और उनके पर्यावरणीय प्रभावों पर विस्तृत जानकारी आवश्यक है.

 

Question 3. हिमालय से निकलने वाली नदियों की तुलना प्रायद्वीपीय भारत की नदियों से कीजिए.
Answer: हिमालय से निकलने वाली नदियों की प्रायद्वीपीय भारत की नदियों से तुलना

क्र०सं०आधारहिमालय से निकलने वाली नदियाँप्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ
1.उत्पत्तिहिमालय से निकलने वाली अधिकांश नदियों का जन्म एवं उत्पत्ति हिमानियों (glaciers) से हुई है।प्रायद्वीपीय भारत की सभी नदियाँ वर्षाजल या भूमिगत जल पर निर्भर हैं, क्योंकि यहाँ हिमपात नहीं होता है।
2.जल उपलब्धताहिमाच्छादित प्रदेशों से निकलने के कारण हिमालय से निकलने वाली नदियाँ वर्षभर सततवाहिनी एवं सदानीरा रहती हैं।प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ निम्न पहाड़ियों तथा पठारों से निकलती हैं। अतः वर्षभर जल की आपूर्ति न होने के कारण ग्रीष्म ऋतु में सूख जाती हैं। इन नदियों में वर्षा ऋतु में ही जल रहता है जिस कारण ये सततवाहिनी एवं सदानीरा नहीं हैं।
3.परिवहनहिमालय से निकलने वाली नदियाँ समतल मैदानी क्षेत्रों में बहुत ही मन्द गति से प्रवाहित होती हैं। ये नदियाँ जल-परिवहन की दृष्टि से बहुत ही उपयोगी हैं।प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ असमतल, ऊबड़-खाबड़ पथरीले भागों में तीव्र गति से प्रवाहित होती हैं। अतः प्रवाह-क्षेत्र की विषमता के कारण जल-परिवहन की दृष्टि से अनुपयोगी हैं।
4.अप्रवाह क्षेत्रहिमालय से निकलने वाली नदियों का अपवाह क्षेत्र विशाल है; जैसे- गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदियों का।प्रायद्वीपीय भारत की नदियों के अपवाह क्षेत्र बहुत ही छोटे हैं; जैसे- कृष्णा एवं कावेरी नदियो के।
5.स्थलाकृतिये नदियाँ काँप मिट्टी का निक्षेप कर विशाल, समतल तथा उपजाऊ मैदानों का निर्माण करती हैं।ये नदियाँ छोटे-छोटे, परन्तु उपंजाऊ डेल्टाई मैदानों का निर्माण करती हैं।
6.जलविद्युत व्ययइन नदियों के समतल मैदानी भागों में प्रवाहित होने के कारण प्राकृतिक जल-प्रपातों का अभाव पाया जाता है जिस कारण कृत्रिम प्रपात बनाकर जल-विद्युत शक्ति उत्पादन में भारी व्यय करना पड़ता है।ये नदियाँ असमतल, ऊँचे-ऊँचे पथरीले भागों से प्रवाहित होने के कारण अपने प्रवाह मार्ग में प्राकृतिक प्रपातों का निर्माण करती हैं, जिससे जल विद्युत शक्ति का उत्पादन सुगम एवं सस्ता पड़ता है।
7.सिंचाई क्षमताहिमालय से निकलने वाली सततवाहिनी एवं सदानीरा नदियों के प्रवाह क्षेत्र समतल हैं। अतः इनसे नहरें निकालना बहुत सरल है, जो सिंचन कार्यों में प्रयुक्त की जाती हैं।सदानीरा न होने के कारण इन नदियों से नहरें नहीं निकाली जा सकती हैं। अतः इनसे सीमित क्षेत्रों में ही सिंचित कार्य सम्भव हो पाया है।

In simple words: हिमालयी नदियाँ हिमनदों से निकलती हैं, बारहमासी होती हैं, विशाल द्रोणियाँ बनाती हैं, सिंचाई के लिए बेहतर हैं और बड़े डेल्टा बनाती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ वर्षा पर निर्भर करती हैं, मौसमी होती हैं, छोटी द्रोणियाँ बनाती हैं, प्राकृतिक प्रपातों के कारण जलविद्युत के लिए अधिक उपयुक्त हैं, और छोटे डेल्टा बनाती हैं.

🎯 Exam Tip: इस तुलनात्मक तालिका को अच्छी तरह से तैयार करें, क्योंकि यह भारत की दो प्रमुख नदी प्रणालियों के बीच के मौलिक अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाता है और अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है.

UP Board Solutions Class 11 Geography Chapter 3 जल निकासी प्रणाली

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