UP Board Solutions Class 11 Geography Chapter 2 Map Scale

Official UP Board Solutions for Class 11 Geography: Chapter 02 मानचित्र पैमाना

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Chapter-wise Solutions for Geography: Chapter 02 मानचित्र पैमाना

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनें
(1) निम्नलिखित में से कौन-सी विधि मापनी की सार्वत्रिक विधि है? |
(क) साधारण प्रकथन
(ख) निरूपक भिन्न
(ग) आलेखी विधि ।
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) निरूपक भिन्न
In simple words: निरूपक भिन्न विधि को सबसे सार्वभौमिक माना जाता है क्योंकि इसमें माप की कोई विशिष्ट इकाई नहीं होती, जिससे किसी भी देश में इसका उपयोग करना आसान होता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में मापनी की सार्वत्रिक विधि की पहचान करना महत्त्वपूर्ण है।

 

(ii) मानचित्र की दूरी को मापनी में किस रूप में जाना जाता है?
(क) अंश ।
(ख) हर
(ग) मापनी का प्रकथन ।
(घ) निरूपक भिन्न
Answer: (क) अंश
In simple words: मानचित्र पर दिखाई गई दूरी को मापनी में अंश के रूप में जाना जाता है, जो मापी गई दूरी का ऊपरी भाग होता है।

🎯 Exam Tip: मापनी के अंश और हर के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये मानचित्र और धरातल की दूरियों को दर्शाते हैं।

 

(iii) मापनी में अंश व्यक्त करता है
(क) धरातल की दूरी
(ख) मानचित्र पर दूरी
(ग) दोनों दूरियाँ ।
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) मानचित्र पर दूरी
In simple words: मापनी का अंश हमेशा मानचित्र पर मापी गई दूरी को दर्शाता है, जो वास्तविक धरातलीय दूरी का एक छोटा प्रतिनिधित्व होता है।

🎯 Exam Tip: अंश और हर का सही अर्थ याद रखना आवश्यक है, क्योंकि यह मापनी की अवधारणा का मूल है।

 

Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें,
(i) मापक की दो विभिन्न प्रणालियाँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: मापक की दो विभिन्न प्रणालियाँ निम्नलिखित हैं- 1. मेट्रिक प्रणाली तथा 2. अंग्रेजी प्रणाली ।
In simple words: माप की मुख्य रूप से दो प्रणालियाँ हैं - मेट्रिक प्रणाली (जैसे किलोमीटर) और अंग्रेजी प्रणाली (जैसे मील)।

🎯 Exam Tip: मापक प्रणालियों के नाम सही से याद रखें।

 

(ii) मेट्रिक एवं अंग्रेजी प्रणाली में मापनी के एक-एक उदाहरण दें।
Answer: उदाहरण-1 किमी = 1,000 मीटर, 1 मीटर = 100 सेमी आदि मापक की मेट्रिक प्रणाली कहलाती है; जबकि 1 मील = 8 फर्लोग, 1 फर्लांग = 220 यार्ड (गज) आदि मापक की अंग्रेजी प्रणाली है।
In simple words: मेट्रिक प्रणाली में किलोमीटर, मीटर और सेंटीमीटर जैसी इकाइयाँ होती हैं, जबकि अंग्रेजी प्रणाली में मील, फर्लांग और यार्ड जैसी इकाइयाँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: दोनों प्रणालियों की मुख्य इकाइयों और उनके आपसी रूपांतरण को समझना महत्वपूर्ण है।

 

(iii) निरूपक भिन्न विधि को सार्वत्रिक विधि क्यों कहा जाता है?
Answer: निरूपक भिन्न विधि को सार्वत्रिक विधि इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस भिन्न के लिए किसी भी प्रकार की इकाई नहीं लिखी होती है। इस भिन्न का अंश सदैव 1 इकाई होता है, जिसे किसी भी देश में वहाँ प्रचलित मापक प्रणाली के आधार पर पढ़ा जाता है। जैसे-1 सेमी = 1 इंच आदि ।
In simple words: निरूपक भिन्न सार्वभौमिक होती है क्योंकि इसमें कोई विशिष्ट इकाई नहीं होती, जिससे इसे किसी भी देश की स्थानीय मापक प्रणाली में आसानी से समझा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: निरूपक भिन्न के 'इकाई-रहित' होने का गुण ही इसे सार्वत्रिक बनाता है, इस बिंदु पर ध्यान दें।

 

(iv) आलेखी विधि के मुख्य उपयोग क्या हैं?
Answer: आलेखी विधि में मानचित्र की दूरी के लिए धरातल की दूरी दी गई होती है। इसके माध्यम से दो स्थानों की दूरी आसानी से ज्ञात की जा सकती है। इस विधि को मुख्य उपयोग यह भी है कि यह मानचित्र के छोटा या बड़ा करने पर भी उसी अनुपात में छोटी या बड़ी हो जाती है। अतः मानचित्र छोटा या बड़ा किए जाने पर मापक को सरलता से जाना जा सकता है।
In simple words: आलेखी विधि का उपयोग मानचित्र पर वास्तविक दूरियाँ आसानी से मापने के लिए होता है, और इसकी खासियत यह है कि मानचित्र का आकार बदलने पर भी मापनी सही रहती है।

🎯 Exam Tip: आलेखी विधि का मुख्य लाभ यह है कि मानचित्र के आकार में परिवर्तन के साथ भी मापनी सही रहती है, जो इसे व्यावहारिक बनाती है।

 

Question 3. निम्नलिखित मापनी के प्रकथन को निरूपक भिन्न में बदलें
(i) 5 सेण्टीमीटर, 10 किलोमीटर को व्यक्त करता है।
Answer: 5 सेण्टीमीटर व्यक्त करता है = 10 किलोमीटर
1 सेण्टीमीटर व्यक्त करेगा = \( \frac{10}{5} \) = 2 किलोमीटर
अतः 1 सेमी = 2 किमी
चूँकि निरूपक भिन्न में अंश तथा हर सदा एक ही इकाई में होते हैं,
इसलिए : प्रदर्शक भिन्न = \( \frac{\text{मानचित्र की दूरी}}{\text{धरातल की दूरी}} \) (एक ही इकाई में)
उपर्युक्त सूत्र के आधार पर = \( \frac{1 \text{ सेमी}}{2 \text{ किमी} \times 1,00,000} \)
(क्योंकि 1 किमी को सेमी में बदलना है तथा 1 किमी = 1,00,000 सेमी होते हैं।)
इस प्रकार = \( \frac{1}{2 \times 1,00,000} \) = नि० भि० = \( \frac{1}{2,00,000} \)
In simple words: इस प्रश्न में, 5 सेंटीमीटर मानचित्र पर 10 किलोमीटर वास्तविक दूरी को दर्शाता है। इसे निरूपक भिन्न में बदलने के लिए, हमें दोनों दूरियों को एक ही इकाई (जैसे सेंटीमीटर) में बदलकर 1:200,000 का अनुपात मिलता है।

🎯 Exam Tip: निरूपक भिन्न बदलते समय सभी इकाइयों को एक समान बनाना और अनुपात को 1 के अंश के साथ लिखना सुनिश्चित करें।

 

(ii) 2 इंच के द्वारा 4 मील व्यक्त होता है।
Answer: प्रश्न संख्या (i) के उत्तर में अपनाई गई विधि के आधार पर
2 इंच व्यक्त करता है = 4 मील
1 इंच व्यक्त करेगा = \( \frac{4}{2} \) = 2 मील
अतः 1 इंच = 2 मील
नि० भि० = \( \frac{1 \text{ इंच}}{2 \text{ मील} \times 63,360 \text{ इंच/मील}} \) = \( \frac{1}{126,720} \)
In simple words: यदि 2 इंच मानचित्र पर 4 मील को दर्शाता है, तो 1 इंच 2 मील को दर्शाएगा। इसे निरूपक भिन्न में बदलने के लिए, मील को इंच में बदलकर हमें 1:126,720 का अनुपात मिलता है।

🎯 Exam Tip: अंग्रेजी इकाइयों (इंच, मील) को निरूपक भिन्न में बदलते समय, 1 मील = 63,360 इंच के रूपांतरण कारक को याद रखें।

 

(iii) 1 इंच के द्वारा 1 गज व्यक्त होता है।
Answer: 1 इंच व्यक्त करता है = 1 गज
अतः नि० भि० = \( \frac{1 \text{ इंच}}{1 \text{ गज} \times 36 \text{ इंच/गज}} \) = \( \frac{1}{36} \)
In simple words: जब 1 इंच मानचित्र पर 1 गज को दर्शाता है, तो इसे निरूपक भिन्न में बदलने के लिए, गज को इंच में (1 गज = 36 इंच) रूपांतरित करने पर हमें 1:36 का अनुपात मिलता है।

🎯 Exam Tip: इंच और गज के बीच के रूपांतरण कारक (1 गज = 36 इंच) को सही ढंग से लागू करना इस प्रकार के प्रश्नों में महत्वपूर्ण है।

 

(iv) 1 सेण्टीमीटर 100 मीटर को व्यक्त करता है।
Answer: 1 सेण्टीमीटर व्यक्त करता है = 100 मीटर
अतः नि० भि० = \( \frac{1 \text{ सेण्टीमीटर}}{100 \text{ मीटर} \times 100 \text{ सेण्टीमीटर/मीटर}} \) = \( \frac{1}{10,000} \)
In simple words: यदि 1 सेंटीमीटर मानचित्र पर 100 मीटर को दर्शाता है, तो मीटर को सेंटीमीटर में बदलकर (1 मीटर = 100 सेंटीमीटर), हमें 1:10,000 का निरूपक भिन्न प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: मेट्रिक इकाइयों (सेंटीमीटर, मीटर) को निरूपक भिन्न में बदलते समय, 1 मीटर = 100 सेंटीमीटर के रूपांतरण कारक का सही उपयोग करें।

 

Question 4. निरूपक भिन्न को कोष्ठक में दी गई माप-प्रणाली के अनुसार मापनी के प्रकथन में परिवर्तित करें :
(i) 1:1,00,000 (किलोमीटर में)
Answer: 1 सेमी व्यक्त करता है 1 किलोमीटर को।
In simple words: निरूपक भिन्न 1:1,00,000 का अर्थ है कि मानचित्र पर 1 सेंटीमीटर की दूरी धरातल पर 1 किलोमीटर की वास्तविक दूरी को दर्शाती है।

🎯 Exam Tip: निरूपक भिन्न को प्रकथन में बदलते समय, हर में दी गई संख्या को उपयुक्त इकाई (जैसे 100,000 सेमी को 1 किमी) में रूपांतरित करना होता है।

 

(ii) 1: 31,680 (फर्लांग में)
Answer: 1 इंच व्यक्त करता है 4 फर्लांग को। (क्योंकि 1 मील = 8 फर्लंग या 1 मील = 63,360 इंच तथा 1 फर्लाग =7,920 इंच; अतः यदि 31,680 को 7,920 से भाग दिया जाता है तो =4 फर्लाग आता है ।)
In simple words: 1:31,680 के निरूपक भिन्न का मतलब है कि मानचित्र पर 1 इंच, वास्तविक धरातल पर 4 फर्लांग की दूरी को दर्शाता है, क्योंकि 31,680 इंच को 7,920 इंच प्रति फर्लांग से भाग देने पर 4 फर्लांग आता है।

🎯 Exam Tip: अंग्रेजी इकाइयों के बीच के रूपांतरणों (जैसे मील, फर्लांग और इंच) को सही ढंग से जानना और लागू करना महत्वपूर्ण है।

 

(iii) 1:1,26,720 (मील में)
Answer: 1 इंच व्यक्त करता है = 2 मील को । (1,26,720 ÷ 63,360 = 2 मील) ।
In simple words: 1:1,26,720 की निरूपक भिन्न का अर्थ है कि मानचित्र पर 1 इंच, वास्तविक धरातल पर 2 मील की दूरी को दर्शाता है, क्योंकि 1,26,720 इंच को 63,360 इंच प्रति मील से भाग देने पर 2 मील आता है।

🎯 Exam Tip: मील और इंच के बीच के मानक रूपांतरण कारक (1 मील = 63,360 इंच) को याद रखना इस गणना के लिए महत्वपूर्ण है।

 

(iv) 1:50,000 (मीटर में)
Answer: 1 सेमी व्यक्त करता है = 500 मीटर को । (50,000 ÷ 100 सेमी = 500 मीटर)।
In simple words: 1:50,000 की निरूपक भिन्न का मतलब है कि मानचित्र पर 1 सेंटीमीटर, वास्तविक धरातल पर 500 मीटर की दूरी को दर्शाता है, क्योंकि 50,000 सेंटीमीटर को 100 सेंटीमीटर प्रति मीटर से भाग देने पर 500 मीटर आता है।

🎯 Exam Tip: निरूपक भिन्न को प्रकथन में बदलने के लिए, हर में दिए गए सेंटीमीटर को मीटर में बदलने के लिए 100 से भाग दें।

 

Question 5. 1 : 50,000 मापक पर एक आलेखी मापनी की रचना कीजिए जिसमें किलोमीटर एवं मीटर पढ़े जा सकें ।
Answer: नि० भि० (R. F.) = 1/50,000
1 सेमी व्यक्त करता है = 50,000 सेमी
1 सेमी व्यक्त करता है = 0.5 किलोमीटर
15 सेमी व्यक्त करेगा = 15 \( \times \) 0.5 किमी = 7.5 किमी
7.5 किमी अपूर्ण संख्या है; अतः इसे पूर्णांक संख्या 8 मान लेना चाहिए ।
7.5 किमी व्यक्त होता है = 15 सेमी के द्वारा
8 किमी व्यक्त होगा = \( \frac{8}{7.5} \times 15 \) = 16 सेमी
अतः 16 सेमी लम्बी रेखा द्वारा 8 किमी की दूरी पढ़ी जाएगी, जिसे निम्नांकित रेखाचित्र द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक आलेखी मापनी को दर्शाता है, जिसका निरूपक भिन्न 1:50,000 है। मापनी रेखा की कुल लंबाई 16 सेमी है, जो 8 किमी की दूरी को प्रदर्शित करती है। रेखा को 0 से 14 किमी तक के मुख्य खंडों में विभाजित किया गया है, जिसमें 2000, 1000, 0, 2, 4, 6, 8, 10, 12, 14 किमी के निशान हैं, और बाईं ओर मीटर में उप-विभाजन दिखाए गए हैं।
In simple words: 1:50,000 की आलेखी मापनी बनाने के लिए, पहले 1 सेंटीमीटर को 0.5 किलोमीटर के बराबर निर्धारित किया जाता है। फिर, 8 किलोमीटर की दूरी के लिए 16 सेंटीमीटर की एक रेखा खींची जाती है, जिसे मुख्य किलोमीटर खंडों और बाईं ओर मीटर के उप-खंडों में विभाजित किया जाता है ताकि मानचित्र पर दूरियों को पढ़ा जा सके।

🎯 Exam Tip: आलेखी मापनी की रचना में, निरूपक भिन्न को समझना, रेखा की उपयुक्त लंबाई का निर्धारण करना, और मुख्य तथा उप-भागों में सही विभाजन करना महत्त्वपूर्ण चरण हैं।

 

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

Question 1. मापक का महत्त्व एवं प्रकार बताइए तथा मानचित्र पर मापक प्रकट करने की विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: मापक का महत्त्व
1. मापक के माध्यम से छोटे क्षेत्रों को बड़े आकार में तथा बड़े क्षेत्रों को छोटे आकार में मानचित्रों के द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।
2. मापक द्वारा किसी भी मानचित्र में दो स्थानों (बिन्दुओं) के मध्य धरातल की वास्तविक दूरी ज्ञात की जा सकती है।
3. मापक के माध्यम से एक मानचित्रकार अपने उद्देश्य के अनुसार किसी भी क्षेत्र का छोटा या बड़ा मानचित्र तैयार कर सकता है।
मापक के प्रकार
साधारण रूप से मानचित्रों में दो प्रकार के मापक प्रयोग में लाए जाते हैं-
1. दीर्घ मापक मानचित्र-इन मापकों में धरातल की छोटी दूरियों को मानचित्र पर बड़ी माप से प्रदर्शित किया जाता है; जैसे-5 सेमी = 1 किमी या 10" = 1 मील ।
2. लघु मापक मानचित्र-इन मापकों में धरातल की विशालतम दूरियों को मानचित्र में लघुतम दूरी से प्रकट किया जाता है; जैसे-1 सेमी = 1,000 किमी या 1" = 100 मील । लघु मापकों का चुनाव विशाल क्षेत्रों के मानचित्र बनाने के लिए किया जाता है।
मानचित्र पर मापक प्रकट करने की विधियाँ
मापक अभिव्यक्त करने की निम्नलिखित तीन विधियाँ हैं
(I) कथनात्मक विधि: मापक प्रकट करने की यह सरलतम विधि है। इस विधि में मापक को शब्दों द्वारा संक्षेप में व्यक्त किया जा सकता है। यह विधि विभिन्न देशों में प्रचलित माप की इकाई के अनुरूप व्यक्त की जाती है।
उदाहरण के लिए-1 सेमी = 5 किमी, 1" = 10 मील आदि । इस विधि में दोनों दूरियाँ अलग-अलग इकाइयों में प्रदर्शित की जाती हैं।
(II) प्रदर्शक भिन्न विधि: इस विधि में मापक का प्रदर्शन एक भिन्न द्वारा किया जाता है। भिन्न का अंश सदैव एक रहता है जो मानचित्र की दूरी प्रकट करता है तथा हर उसी इकाई में क्षेत्र की वास्तविक दूरी को प्रकट करता है। इसे अनुपात को माप की विभिन्न इकाइयों में सरलता से परिवर्तित किया जा सकता है। यद्यपि इस विधि में एक इकाई के द्वारा अनेक इकाइयों का प्रतिनिधित्व किया जाता है; अतः इसे प्रतिनिधि भिन्न या निरूपक भिन्न (R. F.) कहते हैं; जैसे प्र० भि० = में मानचित्र की 1 इकाई धारातल की 2,000 इकाइयों का प्रतिनिधित्व कर रही है।
प्रदर्शक भिन्न ज्ञात करने का सूत्र
प्र० भि० = \( \frac{\text{मानचित्र की दूरी (दो स्थानों के बीच)}}{\text{धरातल की वास्तविक दूरी (धरातल पर उन्हीं दो स्थानों के बीच)}} \) (एक ही इकाई में)
मापक प्रकट करने की इस विधि को भिन्नात्मक या R. F. विधि भी कहते हैं।
मापक परिवर्तन
उदाहरण 1-5 सेमी = 12.5 मीटर को प्र० भि० में बदलो ।
हल - प्र० भि० = \( \frac{5 \text{ सेमी}}{12.5 \times 100 \text{ सेमी}} \) (संकेत : 1 मीटर = 100 सेमी)
= \( \frac{5}{1250} \) = \( \frac{1}{250} \) अथवा 1:250
उदाहरण 2-2" प्रति मील को प्र० भि० में बदलो ।
हल - प्र० भि० = \( \frac{2}{1 \times 63,360} \) = \( \frac{1}{31,680} \) अथवा 1:31,680
(संकेत : 1 मील = 63,360 इंच)
हल :- 1 सेमी प्रकट करता है = 2,50,000 सेमी
1 सेमी प्रकट करेगा = \( \frac{2,50,000}{1,00,000} \) = 2.5 किमी
(संकेत : 1 किमी = 1,00,000 सेमी)
कथनात्मक मापक 1 सेमी =2.5 किमी ।
प्रदर्शक भिन्न विधि का महत्त्व-यह विधि मापक प्रदर्शित करने की अन्तर्राष्ट्रीय विधि है, क्योंकि इस विधि का अन्तर्राष्ट्रीय जगत में उपयोग किया जाता है। इस विधि को विश्व के प्रत्येक राष्ट्र में समझा जा सकता है, क्योंकि इनमें माप की कोई भी इकाई अंकित नहीं होती वरन् यह केवल भिन्नात्मक अनुपात होता है। इस अनुपात को प्रत्येक राष्ट्र अपनी माप की इकाई में बदलकर पढ़ सकती है। इससे मापक की सभी देशों में सार्थकता बनी रहती है।
(III) रेखात्मक विधि: इस विधि में मापक की दूरियाँ एक निश्चित रेखा द्वारा प्रदर्शित की जाती हैं। इस रेखा को समान भागों एवं उपविभागों में बाँट लिया जाता है तथा उस पर विभिन्न माप की दूरियाँ अंकित कर दी जाती हैं। इस मापक विधि के द्वारा बिना किसी गणना किए हुए ही वास्तविक दूरी ज्ञात की जा सकती है। मानचित्र को फोटो द्वारा घटाने या बढ़ाने पर भी रेखात्मक मापनी शुद्ध रहती है, क्योंकि मापनी भी मानचित्र के साथ उसी अनुपात में घट या बढ़ जाती है।
रैखिक मापक बनाने में ध्यान रखने योग्य सावधानियाँ:
• रेखा की लम्बाई मापन के अनुसार प्रायः 6" या 15 सेमी अधिक सुविधाजनक रहती है।
• रेखा को सावधानी से सुविधानुसार समान भागों एवं उपविभागों में विधिवत् विभक्त करना चाहिए।
• रेखा का विभाजन पूर्णांक संख्या में ही किया जाना चाहिए।
• रेखा की मोटाई प्रत्येक स्थान पर एकसमान होनी चाहिए।
• बाईं ओर के उपांश को लघु इकाई में दिखाने के लिए प्रयुक्त करना चाहिए तथा एकान्तर भाग को छाया से रँग देना चाहिए। इसी प्रकार दाईं ओर के समान भागों पर मापे की इकाई अंकित कर देनी चाहिए तथा एकान्तर भाग को छाया से रंग देना चाहिए ।
• रेखा को समान भागों में विभाजित करने के लिए ज्यामितीय विधियों का प्रयोग करना चाहिए।
• रेखा के मुख्य भागों एवं बाईं ओर के उपांशों पर माप की इकाई अंकित कर देनी चाहिए।
• मापक के ऊपर लगभग मध्य में प्र० भि० अंकित कर देनी चाहिए।
रेखा विभाजन की विधि-दी हुई रेखा के एक सिरे पर न्यूनकोण बनाइए। न्यूनकोण वाली रेखा को परकार में ली गई किसी भी उचित दूरी से उतने ही सम भागों में विभक्त कीजिए जितने भागों में रेखा को बाँटना है। कोण वाली रेखा के अन्तिम भाग को सरल रेखा के अन्तिम भाग से मिला दीजिए । शेष भागों पर समकोण गुनिया की सहायता से, इसी रेखा के सामान्तर रेखाएँ खींचिए। समानान्तर रेखाएँ सरल रेखा को अपेक्षित समान भागों में बाँट देंगी।
रैखिक मापक के प्रकार
रैखिक मापक के निम्नलिखित प्रकार होते हैं-
1. साधारण मापक-यह सबसे सरल मापक है। इस मापक में दो इकाइयाँ एक साथ प्रदर्शित की जाती हैं; जैसे-मील एवं फर्लांग, गज एवं फुट, किमी एवं हेक्टोमीटर तथा डेकामीटर एवं मीटर आदि । इस मापक में इकाई के दसवें भाग तक को सरलता से पढ़ा जा सकता है। सभी मानचित्रों पर यह मापक बनाया जा सकता है।
2. तुलनात्मक मापक-तुलनात्मक मापक में एक साथ दो या दो से अधिक इकाइयों के साधारण मापक एक ही प्रदर्शक भिन्न पर प्रकट किए जाते हैं तथा इनकी पारस्परिक तुलना की जाती है। प्रत्येक इकाई को प्रदर्शित करने के लिए अलग-अलग मापकों की रचना की जाती है तथा उन्हें एक साथ इस प्रकार रखा जाता है कि सभी मापकों का शून्य एक सीध में रहे। इस
मापक में प्रायः मील एवं किमी, गज एवं मीटर, जरीब एवं कदम आदि इकाइयों की तुलना के लिए एक साथ मापक बनाए जा सकते हैं। दो इकाइयों की तुलना के लिए मापक प्रदर्शन की सर्वोत्तम विधि है।
3. कर्णवत मापक-कर्णवत मापक में उपांश को समान भागों में विभक्त करने के लिए आयत के विकर्ण खींचे जाते हैं तथा कर्ण के सहारे-सहारे दूरियाँ प्रकट की जाती हैं; अतः इसे विकर्ण मापक या कर्णवत मापक कहते हैं। एक साथ तीन इकाइयों अथवा इकाई के सौवें भाग तक के प्रदर्शन के लिए कर्णवत मापक का प्रयोग किया जाता है।
In simple words: मापक मानचित्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे छोटे या बड़े क्षेत्रों को उचित आकार में दर्शाते हैं, वास्तविक दूरियों की गणना करने में मदद करते हैं, और मानचित्रकार को अपने उद्देश्य के अनुसार मानचित्र बनाने की सुविधा देते हैं। इसके मुख्य प्रकार दीर्घ और लघु मापक हैं, जिन्हें कथनात्मक, प्रदर्शक भिन्न और रेखात्मक विधियों द्वारा प्रकट किया जा सकता है। रेखात्मक मापकों में साधारण, तुलनात्मक, और कर्णवत मापक शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: मापक के महत्व को स्पष्ट रूप से समझाना, उसके विभिन्न प्रकारों का उल्लेख करना, और मानचित्र पर मापक को प्रदर्शित करने की तीनों विधियों (कथनात्मक, निरूपक भिन्न, रेखात्मक) का विस्तृत वर्णन करना उच्च अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

साधारण मापक की रचना

उदाहरण 1-किसी मानचित्र पर दो नगरों के बीच की दूरी को 12 सेमी से प्रकट किया गया है, जबकि उनकी वास्तविक दूरी 420 किमी है। मापक की प्र० भि० ज्ञात कीजिए तथा किमी का साधारण मापक बनाइए ।
हल-प्र० भि० = \( \frac{12 \text{ सेमी}}{420 \text{ किमी}} = \frac{12 \text{ सेमी}}{420 \times 100000 \text{ सेमी}} = \frac{1}{3,500,000} \) या 1:35,00,000
मापक की रचना के लिए गणना-
1 सेमी प्रकट करता है = 35,00,000 सेमी
15 सेमी प्रकट करेंगे = \( \frac{15 \times 35,00,000}{100000} \) किमी = 525 किमी
चूँकि 525 किमी की निकटतम पूर्णांक संख्या 500 है; अतः 500 किमी की दूरी प्रदर्शित करने के लिए रेखा की लम्बाई की गणना निम्नलिखित प्रकार से होगी
525 किमी प्रदर्शित होते हैं = 15 सेमी की रेखा द्वारा ।
1 किमी प्रदर्शित होगा = \( \frac{15}{525} \) सेमी की रेखा द्वारा
500 किमी प्रदर्शित होंगे = \( \frac{15}{525} \times 500 \) सेमी की रेखा द्वारा
= \( \frac{7500}{525} \) = 14.28 सेमी की रेखा द्वारा
रचना-14.28 या 14.3 सेमी की रेखा खींचकर उसे 5 समान भागों में विभाजित कीजिए । प्रत्येक भाग 100 किमी की दूरी प्रकट करेगा, पुनः बाएँ उपांश को 10 बराबर भागों में बाँटिए। प्रत्येक उपांश 10 किमी की दूरी प्रकट करेगा (देखें चित्र 2.2)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक साधारण मापक को दर्शाता है जिसका निरूपक भिन्न 1:3,50,000 है। मापनी रेखा को 0 से 400 किमी तक मुख्य किलोमीटर खंडों में विभाजित किया गया है, जिसमें 100 किमी के अंतराल पर निशान हैं। बाईं ओर 0 से 100 किमी तक के उप-खंड दिखाए गए हैं।

 

उदाहरण 2-1:200 की प्र० भि० पर मीटर तथा डेसीमीटर प्रदर्शित करने के लिए एक साधारण मापक बनाइए ।
हल-1 सेमी प्रकट करता है = 200 सेमी
1 सेमी = 2 मीटर (1 मीटर = 100 सेमी)
15 सेमी प्रकट करेंगे = \( 15 \times 2 \) = 30 मीटर अतः 15 सेमी की रेखा 30 मीटर प्रकट करेगी।
रचना-15 सेमी एक रेखा खींचकर उसे 6 समान भागों में विभाजित कीजिए। प्रत्येक भाग 5 मीटर की दूरी प्रकट करेगा। पुनः बाएँ उपांश को 5 बराबर भागों में बाँटिए । प्रत्येक भाग 10 डेसीमीटर की दूरी प्रकट करेगा (देखें चित्र 2.3)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक साधारण मापक को दर्शाता है जिसका निरूपक भिन्न 1:200 है। मापनी रेखा पर 0 से 25 मीटर तक के मुख्य मीटर खंडों में विभाजन किया गया है, जिसमें 5 मीटर के अंतराल पर निशान हैं। बाईं ओर 0 से 50 डेसीमीटर तक के उप-खंड दिखाए गए हैं, जिसमें 10-10 डेसीमीटर के निशान हैं।

 

उदाहरण 3-एक आलेखी मापनी की रचना कीजिए जिसकी मापनी का प्रकथन 1 मील = 1 इंच है और जिसे मील एवं फर्लांग में पढ़ा जा सके ।
हल-नोट: मील या फर्लाग में आलेखी मापक बनाने के लिए प्रायः 6 इंच की लम्बाई ली जाती है।
गणना : नि० भि० (R.F.) 1 इंच = 1 मील या 1/63,360 ।
1 इंच व्यक्त करता हैं = 1 मील को ।
6 इंच व्यक्त करेगा = \( 6 \times 1 \) = 6 मील को ।
अतः 6 इंच लम्बी एक सीधी रेखा खीचें और उसे 6 बराबर भागों में विभाजित करें। प्रत्येक भाग 1 मील को दर्शाएगा। अब बाएँ भाग को चार बराबर भागों में विभाजित करें (1 मील = 8 फर्लांग) । प्रत्येक भाग 2 फर्लंग को प्रदर्शित करेगा (देखिए चित्र 2.4)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक आलेखी मापनी को दर्शाता है, जिसमें 1 मील = 1 इंच का प्रकथन है। मापनी रेखा 6 इंच लंबी है, जो 6 मील की दूरी को प्रदर्शित करती है। इसे 0 से 5 मील तक के मुख्य खंडों में विभाजित किया गया है, और बाईं ओर 8 से 0 फर्लांग तक के उप-खंड (2 फर्लांग के अंतराल पर) दिखाए गए हैं।

 

उदाहरण 4-एक आलेखी मापनी बनाएँ जिसमें दिया गया निरूपक भिन्न 1: 50,000 है तथा दूरियों को मील एवं फर्लांग में व्यक्त करें।
हल-गणना-नि० भि० (R.F.) 1 : 50,000
1 इंच व्यक्त करता है = 50,000 इंच
1 इंच = \( \frac{50,000}{63,360} \) मील \( \approx \) 0.7891 मील
6 इंच व्यक्त करेगा = \( 6 \times \frac{50,000}{63,360} \) \( \approx \) 4.73 मील
4.73 मील अपूर्ण संख्या है; अतः इसे पूर्णांक संख्या 5 मान लिया जाना चाहिए; अतः रेखा की लम्बाई ज्ञात करें
यदि 4.73 मील 6 इंच की रेखा द्वारा व्यक्त किया जाता है।
तो 5 मील व्यक्त होगा = \( \frac{5}{4.73} \times 6 \) इंच
अतः 6.34 इंच लम्बाई की रेखा पर 5 मील की दूरी प्रदर्शित की जाएगी।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक आलेखी मापनी को दर्शाता है, जिसमें निरूपक भिन्न 1:50,000 है और दूरियों को मील एवं फर्लांग में व्यक्त किया गया है। मापनी रेखा की कुल लंबाई 6.34 इंच है, जो 5 मील की दूरी को प्रदर्शित करती है। इसे 0 से 4 मील तक के मुख्य मील खंडों में विभाजित किया गया है, और बाईं ओर 8 से 0 फर्लांग तक के उप-खंड (4 फर्लांग के अंतराल पर) दिखाए गए हैं।

 

मौखिक परीक्षा के लिए प्रश्नोत्तर

Question 1. मापक से आप क्या समझते हैं?
Answer: “मापक, मानचित्र पर दो स्थानों के बीच की दूरी एवं धरातल पर उन्हीं दोनों स्थानों के बीच की वास्तविक दूरी के मध्य का अनुपात है, जिसे मानचित्र पर प्रदर्शित किया जाता है।”
In simple words: मापक वह अनुपात है जो मानचित्र पर दो बिंदुओं के बीच की दूरी और उन्हीं बिंदुओं की जमीन पर वास्तविक दूरी को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: मापक की परिभाषा को सटीक और स्पष्ट रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मानचित्रकला की मूल अवधारणा है।

 

Question 2. मापक प्रकट करने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?
Answer: मापक प्रकट करने की निम्नलिखित तीन विधियाँ हैं
1. कथनात्मक विधि,
2. प्रदर्शक भिन्न विधि तथा
3. रेखात्मक विधि ।
In simple words: मापक को मानचित्रों पर दर्शाने की तीन मुख्य विधियाँ हैं: शब्दों में बताना (कथनात्मक), अनुपात के रूप में दिखाना (प्रदर्शक भिन्न), और एक रेखाचित्र के रूप में प्रस्तुत करना (रेखात्मक)।

🎯 Exam Tip: मापक प्रदर्शित करने की तीनों विधियों के नाम और उनके मूल अंतर को समझना आवश्यक है।

 

Question 3. प्रदर्शक भिन्न क्या है?
Answer: “मापक को भिन्न द्वारा प्रकट करने वाली इकाई को प्रदर्शक भिन्न कहते हैं; जैसे - या - आदि ।” इसमें अंश से मानचित्र की दूरी तथा हर से धरातल की वास्तविक दूरी प्रकट की जाती है। इस भिन्न का अंश सदैव 1 रहता है। इसे प्र० भि० या नि० भि० (R.F.) भी कहते हैं।
In simple words: प्रदर्शक भिन्न वह विधि है जिसमें मापक को एक साधारण भिन्न के रूप में दिखाया जाता है, जहाँ अंश हमेशा 1 होता है और मानचित्र पर दूरी तथा हर धरातल की वास्तविक दूरी को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: प्रदर्शक भिन्न की परिभाषा, उसके '1' अंश के महत्व और इसे 'प्र० भि०' या 'नि० भि०' कहने के कारण को याद रखें।

 

Question 4. प्रदर्शक भिन्न ज्ञात करने का सूत्र क्या है?
Answer: प्रदर्शक भिन्न ज्ञात करने का सूत्र निम्नलिखित है
प्र० भि० = \( \frac{\text{मानचित्र की दूरी (दो स्थानों के बीच)}}{\text{वास्तविक दूरी (धरातल पर उन्हीं दो स्थानों के बीच)}} \) (एक ही इकाई में)
In simple words: प्रदर्शक भिन्न ज्ञात करने का सूत्र है: मानचित्र पर दो स्थानों के बीच की दूरी को धरातल पर उन्हीं दो स्थानों की वास्तविक दूरी से भाग देना, सुनिश्चित करते हुए कि दोनों दूरियाँ एक ही इकाई में हों।

🎯 Exam Tip: प्रदर्शक भिन्न का सूत्र और 'एक ही इकाई में' की शर्त को स्पष्ट रूप से याद रखना गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. रेखात्मक मापक में रेखा की लम्बाई कितनी होनी चाहिए?
Answer: रेखात्मक मापक में रेखा की लम्बाई 6 इंच अथवा 15 सेमी उपयुक्त रहती है।
In simple words: रेखात्मक मापक बनाते समय, रेखा की आदर्श लंबाई आमतौर पर 6 इंच या 15 सेंटीमीटर होती है, ताकि वह सुविधाजनक और स्पष्ट रहे।

🎯 Exam Tip: रेखात्मक मापक बनाते समय रेखा की मानक लंबाई (6 इंच या 15 सेमी) याद रखना व्यावहारिक दृष्टि से उपयोगी है।

 

Question 6. रैखिक मापक कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: रैखिक मापक चार प्रकार के होते हैं।
In simple words: रैखिक मापक चार मुख्य प्रकार के होते हैं, जिनमें साधारण, तुलनात्मक, कर्णवत और वर्नियर मापक शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: रैखिक मापक के चार प्रकारों के नाम याद रखना वर्गीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. कर्णवत मापक क्या है?
Answer: लघुतम दूरियाँ प्रकट करने के लिए कर्णवत मापक बनाया जाता है। इसमें एक साथ माप की तीन इकाइयाँ प्रकट की जाती हैं अर्थात् माप इकाई के सौवें भाग तक पढ़ा जा सकता है। कर्णवत मापक में कोई भी दूरी दशमलव के दो अंकों तक मापी जा सकती है। इस मापक में उपांश पर बनाए गए आयतों के विकर्ण बनाए जाते हैं जिसके सहारे तीसरी दूरी प्रकट की जाती है।
In simple words: कर्णवत मापक एक विशेष प्रकार का रैखिक मापक है जिसका उपयोग बहुत छोटी दूरियों को मापने के लिए किया जाता है, जहाँ एक साथ तीन इकाइयों या इकाई के सौवें भाग तक की दूरी को दशमलव के दो अंकों तक पढ़ा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: कर्णवत मापक की मुख्य विशेषता (लघुतम दूरियों का मापन, तीन इकाइयों का प्रदर्शन, दशमलव के दो अंकों तक शुद्धता) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. साधारण मापक तथा विकर्ण मापक में क्या अन्तर है?
Answer: प्रथम, साधारण मापक में एक साथ माप की केवल दो इकाइयाँ ही प्रकट की जा सकती हैं, जबकि विकर्ण मापक में नाप की तीन इकाइयाँ एक साथ प्रदर्शित की जा सकती हैं। द्वितीय, साधारण मापक में इकाई के दसवें भाग तक ही प्रकट किया जा सकता है, जबकि विकर्ण मापक में इकाई के सौवें भाग तक की सूक्ष्म दूरी पढ़ी जा सकती है।
In simple words: साधारण मापक केवल दो इकाइयों तक माप सकता है और दसवें भाग तक की शुद्धता देता है, जबकि विकर्ण मापक तीन इकाइयों तक माप सकता है और इकाई के सौवें भाग तक की अधिक सूक्ष्म दूरी पढ़ सकता है।

🎯 Exam Tip: साधारण और विकर्ण मापक के बीच के मुख्य अंतरों (इकाइयों की संख्या और मापन की शुद्धता) को तुलनात्मक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. मापक से क्या लाभ हैं?
Answer: मापक से निम्नलिखित लाभ हैं-
1. मापक द्वारा छोटे क्षेत्रों को बड़े तथा बड़े क्षेत्रों को छोटे आकार में दर्शाया जा सकता है।
2. मापक द्वारा मानचित्र पर किन्हीं भी दो स्थानों के मध्य की वास्तविक धरातलीय दूरी ज्ञात की जा सकती है।
In simple words: मापक के दो मुख्य लाभ हैं: यह मानचित्रों पर छोटे या बड़े क्षेत्रों को सही अनुपात में दर्शाने में मदद करता है, और इससे मानचित्र पर किन्हीं भी दो बिंदुओं के बीच की वास्तविक दूरी को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: मापक के व्यावहारिक उपयोगों (क्षेत्रों का प्रदर्शन और दूरी मापन) को समझना इसके महत्व को दर्शाता है।

 

Question 10. मापनी बनाने की आवश्यकता क्यों होती है?
Answer: मापनी द्वारा बहुत बड़े क्षेत्रों को छोटा या छोटे क्षेत्रों को बड़े आकार में प्रदर्शित किया जा सकता है, जो अन्यथा सम्भव नहीं है। इसके द्वारा मानचित्र पर प्रदर्शित क्षेत्र से वास्तविक क्षेत्रफल ज्ञात किया जा सकता है।
In simple words: मापनी की आवश्यकता इसलिए होती है ताकि विशाल क्षेत्रों को मानचित्र पर संक्षिप्त रूप में या छोटे क्षेत्रों को विस्तृत रूप में दर्शाया जा सके, और इससे मानचित्र पर प्रदर्शित किसी भी क्षेत्र का वास्तविक क्षेत्रफल भी ज्ञात किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: मापनी की आवश्यकता के दो मुख्य बिंदुओं (क्षेत्रों को स्केल करना और वास्तविक क्षेत्रफल ज्ञात करना) पर ध्यान दें।

 

Question 11. भारतवर्ष में कथनात्मक विधि का प्रयोग प्रायः किस प्रकार के मानचित्र में किया जाता है?
Answer: भूसम्पत्ति मानचित्रों एवं भवनों के प्लानों में प्रायः इस विधि का प्रयोग किया जाता है।
In simple words: भारत में, कथनात्मक विधि का उपयोग मुख्य रूप से भू-संपत्ति मानचित्रों और भवनों के खाकों में किया जाता है, जहाँ माप को शब्दों में व्यक्त किया जाता है।

🎯 Exam Tip: कथनात्मक विधि के विशिष्ट अनुप्रयोगों को याद रखें, जैसे भू-संपत्ति और भवन प्लान।

 

Question 12. रेखात्मक मापनी की क्या विशेषता है?
Answer: रेखात्मक मापनी वाले मानचित्र को किसी भी आकार में मुद्रित करने पर मुद्रित मानचित्र की मापनी शुद्ध बनी रहती है, क्योंकि जिस अनुपात में मानचित्र का आकार बदलता है, उसी अनुपात में मापनी की लम्बाई भी बदल जाती है।
In simple words: रेखात्मक मापनी की मुख्य विशेषता यह है कि मानचित्र का आकार बदलने (जैसे छोटा या बड़ा करने) पर भी यह सही अनुपात में बनी रहती है, जिससे मापक की शुद्धता बनी रहती है।

🎯 Exam Tip: रेखात्मक मापनी की यह अद्वितीय विशेषता कि वह मानचित्र के पुनरुत्पादन के बाद भी अपनी शुद्धता बनाए रखती है, महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. प्र० भि० विधि की क्या उपयोगिता है?
Answer: इस विधि के मापक का अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व है, क्योंकि इस पर किसी भी देश में प्रचलित इकाई को पढ़ा जा सकता है।
In simple words: प्रदर्शक भिन्न (R.F.) विधि का उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है क्योंकि यह इकाई-मुक्त होती है, जिससे किसी भी देश के लोग इसे अपनी स्थानीय माप प्रणाली में आसानी से समझ सकते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रदर्शक भिन्न की 'इकाई-रहित' प्रकृति और उसके परिणामस्वरूप मिलने वाली 'अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्यता' पर जोर दें।

 

Question 14. मापक के दो प्रकार बताइए ।
Answer: 1. लघु मापक तथा 2. व्यापक या दीर्घ मापक ।
In simple words: मापक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: लघु मापक (जो बड़े क्षेत्रों को छोटे मानचित्र पर दिखाता है) और व्यापक या दीर्घ मापक (जो छोटे क्षेत्रों को बड़े मानचित्र पर दिखाता है)।

🎯 Exam Tip: मापक के दो मुख्य वर्गीकरण (लघु और दीर्घ/व्यापक) और उनके अर्थ को याद रखें।

 

Question 15. रेखात्मक मापक के मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
Answer: रेखात्मक मापक के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. साधारण मापक,
2. तुलनात्मक मापक,
3. कर्णवत मापक तथा
4. वर्नियर मापक ।
In simple words: रेखात्मक मापक के मुख्य चार प्रकार हैं: साधारण मापक (एक इकाई), तुलनात्मक मापक (दो या अधिक इकाइयाँ), कर्णवत मापक (तीन इकाइयाँ, उच्च शुद्धता), और वर्नियर मापक।

🎯 Exam Tip: रेखात्मक मापक के सभी चार प्रकारों के नाम और उनके बीच के सूक्ष्म अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।

 

लम्बाई सम्बन्धी महत्त्वपूर्ण मापक ( इकाइयाँ)

10 मिलीमीटर=1 सेण्टीमीटर
10 सेण्टीमीटर=1 डेसीमीटर
10 डेसीमीटर=1 मीटर
10 मीटर=1 डेकामीटर
10 डेकामीटर=1 हेक्टोमीटर
10 हेक्टोमीटर=1 किमी
1,000 मीटर=1 किमी
1,00,000 सेमी=1 किमी
10,000 सेमी=1 हेक्टोमीटर
100 सेमी=1 मीटर
8 फर्लांग=1 मील
1,760 गज=1 मील
63,360 इंच=1 मील
1 मीटर=1.094 गज
1 मील=1.609 किमी
1 एकड़=4,840 वर्ग गज
1 एकड़=10 वर्ग जरीब (गण्टर्स)
1 एकड़=0.40,467 हेक्टेयर
1 हेक्टेयर=100 एयर (Ares)
1 वर्ग किमी=100 हेक्टेयर

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