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Detailed Chapter 3 डेटा का संगठन UP Board Solutions for Class 11 Economics
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Class 11 Economics Chapter 3 डेटा का संगठन UP Board Solutions PDF
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सही है
(i) एक वर्ग मध्यबिन्दु बराबर है
(क) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के
(ख) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के गुणनफल के
(ग) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्म सीमा के अनुपात के
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (क) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के
(ii) दो चरों के बारम्बारता वितरण को इस नाम से जानते हैं
(क) एकविचर वितरण
(ख) द्विचर वितरण
(ग) बहुचर वितरण
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) द्विचेर वितरण
(iii) वर्गीकृत आँकड़ों में सांख्यिकीय परिकलन आधारित होता है
(क) प्रेक्षणों के वास्तविक मानों पर
(ख) उच्च वर्ग सीमाओं पर
(ग) निम्ने वर्ग सीमाओं पर
(घ) वर्ग के मध्य बिन्दुओं पर
Answer: (घ) वर्ग के मध्य बिन्दुओं पर
(iv) अपवर्जी विधि के अन्तर्गत
(क) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अन्तराल में समावेशित नहीं करते।
(ख) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अन्तराल में समायोजित करते हैं।
(ग) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अन्तराल में समावेशित नहीं करते
(घ) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अन्तराल में समावेशित करते हैं।
Answer: (क) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग-अन्तराल में समावेशित नहीं करते।
(v) परास का अर्थ है
(क) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों के बीच अन्तर
(ख) न्यूनतम एवं अधिकतम प्रेक्षणों के बीच अन्तर
(ग) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों को औसत
(घ) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का अनुपात
Answer: (क) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों के बीच अन्तर
In simple words: एक वर्ग के मध्यबिन्दु, दो चरों के बारम्बारता वितरण, सांख्यिकीय परिकलन, अपवर्जी विधि और परास जैसे मूलभूत अवधारणाओं को समझना सांख्यिकी के आधारशिला के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: सांख्यिकी में इन बुनियादी शब्दों और अवधारणाओं की परिभाषाओं को याद रखना और उनके अनुप्रयोगों को समझना उच्च अंक प्राप्त करने में सहायक होता है।
Question 2. वस्तुओं को वर्गीकृत करने में क्या कोई लाभ हो सकता है? अपने दैनिक जीवन से एक उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए।
Answer: वर्गीकरण का तात्पर्य एकसमान वस्तुओं को समूह या वर्गों में व्यवस्थित करने से है; जैसे-पुस्तकालयों में पुस्तकों को विषयवार रखना वर्गीकरण है। जब आपको भूगोल की किसी विशेष पुस्तक की आवश्यकता पड़ती है तो आपको केवल यह करना है कि 'भूगोल, समूह में उस पुस्तक को खोजें। अन्यथा आपको अपनी यह विशेष पुस्तक सारी पुस्तकों के ढेर में खोजनी पड़ेगी ।
In simple words: वर्गीकरण वस्तुओं को व्यवस्थित करने की एक प्रक्रिया है, जिससे जानकारी खोजना और समझना आसान हो जाता है, जैसे पुस्तकालय में किताबों को विषयों के अनुसार रखना।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण की परिभाषा और दैनिक जीवन में इसके महत्व का स्पष्ट उदाहरण देकर समझाना, बेहतर अंक दिला सकता है।
Question 3. चर क्या है? एक संतत तथा विविक्त चर के बीच भेद कीजिए ।
Answer: चर – वे मूल्य जिनका मान एक मद से दूसरे मद में बदलता रहता है और जो संख्यात्मक रूप में मापे जा सकते हैं उन्हें चर कहते हैं।
संतत तथा विविक्त चर में भेद – संतत चर का कोई भी संख्यात्मक मान हो सकता है; जैसे 1, 2, \( \frac{1}{2} \), \( \frac{3}{4} \), \( \sqrt{2} \), 1.732 आदि । जबकि विविक्त चर केवल निश्चित मान वाले हो सकते हैं; जैसे- छात्रों की संख्या, परिवार के सदस्यों की संख्या ।
In simple words: चर वे मान हैं जो बदलते रहते हैं और संख्यात्मक रूप में मापे जा सकते हैं। संतत चर कोई भी मान ले सकते हैं, जबकि विविक्त चर केवल निश्चित, अलग-अलग मान लेते हैं।
🎯 Exam Tip: चर की परिभाषा, और संतत (continuous) व विविक्त (discrete) चर के बीच के अंतर को उदाहरणों सहित स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. आँकड़ों के वर्गीकरण में प्रयुक्त अपवर्जी तथा समावेशी विधियों की व्याख्या कीजिए।
Answer: अपवर्जी विधि – इस विधि के द्वारा वर्गों का गठन इस प्रकार से किया जाता है कि एक वर्ग की उच्च वर्ग सीमा, अगले वर्ग की निम्न वर्ग सीमा के बराबर होती है। इस विधि से आँकड़ों की संततता बनी रहती है। इस विधि के अन्तर्गत, उच्च वर्ग सीमा को छोड़ देते हैं, परन्तु एक वर्ग की निम्न सीमा को शामिल कर लिया जाता है।
समावेशी विधि - अपवर्जी विधि की तुलना में समावेशी विधि किसी वर्ग अन्तराल में उच्च वर्ग सीमा को नहीं छोड़ती। इस विधि में किसी वर्ग में उच्च – सीमा को सम्मिलित किया जाता है। अतः दोनों वर्ग सीमाएँ वर्ग अन्तराल का हिस्सा होती हैं।
In simple words: अपवर्जी विधि में एक वर्ग की ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा बन जाती है और उसे उस वर्ग में शामिल नहीं किया जाता, जबकि समावेशी विधि में ऊपरी सीमा को भी उसी वर्ग में शामिल किया जाता है।
🎯 Exam Tip: अपवर्जी और समावेशी विधियों की परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से समझाना और उनके बीच के अंतर को उदाहरणों के साथ बताना महत्वपूर्ण है।
Question 5. सारणी 3.2 के आँकड़ों का प्रयोग करें, जो 50 परिवारों के भोजन पर मासिक व्यय (Rs. में) को दिखलाती है, और (क) भोजन पर मासिक पारिवारिक व्यय का प्रसार ज्ञात कीजिए। (ख) परास को वर्ग अन्तराल की उचित संख्याओं में विभाजित करें तथा व्यय का बारम्बारता वितरण प्राप्त करें।
उन परिवारों की संख्या पता कीजिए जिनका भोजन पर मासिक व्यय
उत्तर-
(क) Rs. 2000/- से कम है । (ख) Rs. 3000/- से अधिक है। (ग) Rs. 1500/- और Rs. 2500/- के बीच है।
| सारणी 3.2 : 50 परिवारों के भोजन पर मासिक व्यय (Rs. में) | ||||
|---|---|---|---|---|
| 1904 | 1559 | 3473 | 1735 | 2760 |
| 2041 | 1612 | 1753 | 1855 | 4429 |
| 5090 | 1085 | 1823 | 2346 | 1523 |
| 1211 | 1360 | 1110 | 2152 | 1183 |
| 1218 | 1315 | 1105 | 2628 | 2712 |
| 4248 | 1812 | 1264 | 1183 | 1171 |
| 1007 | 1180 | 1953 | 1137 | 2048 |
| 2025 | 1583 | 1324 | 2621 | 3676 |
| 1397 | 1832 | 1962 | 2177 | 2575 |
| 1293 | 1365 | 1146 | 3222 | 1396 |
Answer: (क) अधिकतम मूल्य = Rs. 5090
न्यूनतम मूल्य = Rs. 1007 विस्तार = अधिकतम मूल्य- न्यूनतम मूल्य
= 5090-1007 = 4083
(ख)
| वर्गान्तराल | मिलान बिन्दु | बारम्बारता |
|---|---|---|
| 1000-1500 | ZZZZ | 20 |
| 1500-2000 | 圣三 | 13 |
| 2000-2500 | IN | 06 |
| 2500-3000 | IN | 05 |
| 3000-3500 | II | 02 |
| 3500-4000 | - | 01 |
| 4000-4500 | II | 02 |
| 4500-5000 | - | 00 |
| 5000-5500 | - | 01 |
| कुल | = 50 |
उन परिवारों की संख्या जिनका भोजन पर मासिक व्यय
(क) Rs. 2000/- से कम है = 33 (ख) Rs. 3000/- से अधिक है = 06 (ग) Rs. 1500/- और Rs. 2500/- के बीच है = 19
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए डेटा से भोजन पर मासिक व्यय का प्रसार (उच्चतम और न्यूनतम मूल्यों का अंतर) ज्ञात करना और फिर उसे विभिन्न वर्ग अंतरालों में वर्गीकृत करके बारम्बारता वितरण सारणी बनाना सिखाया गया है।
🎯 Exam Tip: डेटा से प्रसार की गणना, वर्ग अंतराल बनाना और बारम्बारता वितरण सारणी तैयार करना सांख्यिकी के महत्वपूर्ण अभ्यास हैं; इसमें सटीकता पर ध्यान दें।
Question 6. एक शहर में, यह जानने हेतु 45 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया कि वे अपने घरों में कितनी संख्या में घरेलू उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। नीचे दिए गए उनके उत्तरों के आधार पर एक बारम्बारता सारणी तैयार कीजिए ।
1 3 2 2 2 1 2 1 2 2 3 3 3 3
3 3 2 3 2 2 6 1 6 2 1 5 1 5 3
2 4 2 7 4 2 4 3 4 2 0 3 1 4 3
Answer:
बारम्बारता सारणी
| घरेलू उपकरणों की संख्या | परिवारों की संख्या |
|---|---|
| 0 | 1 |
| 1 | 7 |
| 2 | 15 |
| 3 | 12 |
| 4 | 05 |
| 5 | 02 |
| 6 | 02 |
| 7 | 01 |
| योग | = 45 |
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए डेटा से, घरेलू उपकरणों की संख्या के आधार पर परिवारों की बारम्बारता को सारणीबद्ध किया गया है, जिससे यह पता चलता है कि कितने परिवार कितने उपकरण इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: बारम्बारता सारणी बनाते समय, प्रत्येक डेटा बिंदु को सही वर्ग में गिनना और कुल योग सही निकालना महत्वपूर्ण है।
Question 7. वर्गीकृत आँकड़ों में सूचना की क्षति का क्या अर्थ है?
Answer: बारम्बारता वितरण के रूप में आँकड़ों के वर्गीकरण में एक अन्तर्निहित दोष पाया जाता है। यह अपरिष्कृत आँकड़ों का सारांश प्रस्तुत कर उन्हें संक्षिप्त एवं बोधगम्य तो बनाता है, परन्तु इसमें वे विस्तृत विवरण नहीं हो पाते जो अपेक्षाकृत आँकड़ों में पाए जाते हैं। आवृत्ति वितरण के द्वारा आँकड़े संक्षिप्त हो जाते हैं वर्गीकृत होने से आँकड़ों से सूचना की क्षति होती है। एक बार आँकड़ों का वर्गीकरण हो जाने पर व्यक्तिगत आँकड़ों का अस्तित्व खत्म हो जाता हैं सांख्यिकीय गणनाएँ वास्तविक मूल्य पर आधारित नहीं होती हैं।
In simple words: वर्गीकृत आँकड़ों में सूचना की क्षति का अर्थ है कि मूल, विस्तृत डेटा को समूहों में बांटने से कुछ बारीक जानकारी खो जाती है, क्योंकि व्यक्तिगत मानों के बजाय वर्ग के औसत या प्रतिनिधि मानों का उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: सूचना की क्षति (loss of information) की अवधारणा को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना और उसके निहितार्थों को समझाना, विशेष रूप से बारम्बारता वितरण के संदर्भ में, महत्वपूर्ण है।
Question 8. क्या आप इस बात से सहमत हैं कि अपरिष्कृत आँकड़ों की अपेक्षा वर्गीकृत आँकड़े बेहतर होते हैं?
Answer: अपरिष्कृत आँकड़े अत्यधिक अव्यवस्थित होते हैं, जिन्हें सँभालना कठिन होता है। इनसे सार्थक निष्कर्ष निकालना श्रम-साध्य कार्य है, क्योंकि सांख्यिकीय विधियों को इन पर सरलता से प्रयोग नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर वर्गीकृत आँकड़े सामान्य एवं संक्षिप्त होते हैं। उनसे अर्थपूर्ण निष्कर्ष निकालना आसान होता है। हम वर्गीकृत आँकड़ों को आसानी से चिह्नित कर सकते हैं। बिना किसी बाधा के उनसे निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। इस प्रकार वर्गीकृत आँकड़े अपरिष्कृत आँकड़ों से बेहतर होते हैं।
In simple words: हाँ, वर्गीकृत आँकड़े अपरिष्कृत आँकड़ों से बेहतर होते हैं क्योंकि वे व्यवस्थित, संक्षिप्त और विश्लेषण करने में आसान होते हैं, जिससे निष्कर्ष निकालना सरल हो जाता है।
🎯 Exam Tip: अपरिष्कृत और वर्गीकृत आँकड़ों के बीच तुलना करते समय, वर्गीकरण के लाभों (व्यवस्थित, संक्षिप्त, विश्लेषण में आसान) को उजागर करना चाहिए।
Question 9. एकविचर एवं द्धिचर बारम्बारता वितरण के बीच अन्तर बताइए ।
Answer: एकल चर के बारम्बारता वितरण को एकविचर वितरण कहा जाता है जैसे किसी छात्र के प्राप्तांक एकल चर के एकविचर विचरण को प्रदर्शित करते हैं। जबकि एक द्विचर बारम्बारता वितरण दो चरों का बारम्बारता वितरण है जैसे किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों का वजन ।
In simple words: एकविचर वितरण केवल एक चर (जैसे छात्रों के अंक) की बारम्बारता दिखाता है, जबकि द्विचर वितरण दो चरों (जैसे किसी क्षेत्र में लोगों का वजन और ऊँचाई) के बीच संबंध की बारम्बारता दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: एकविचर और द्विचर बारम्बारता वितरण की परिभाषाओं और उनके उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 10. निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर 7 का वर्ग-अन्तराल लेकर समावेशी विधि द्वारा एक बारम्बारता वितरण तैयार कीजिए
28 17 15 22 29 21 23 27 18 12 7 2 9 4 6
1 8 3 10 5 20 16 12 8 4 33 27 21 15 9
3 36 27 18 9 2 4 6 32 31 29 18 14 13 15
11 9 7 1 5 37 32 28 26 24 20 19 25 19 20
Answer:
| वर्ग अन्तराल | मिलान चिह्न | बारम्बारता |
|---|---|---|
| 0-7 | 川 | 14 |
| 7-14 | 川 | 13 |
| 14-21 | 圣三 | 13 |
| 21-28 | Z | 10 |
| 28-35 | II | 08 |
| 35-42 | II | 02 |
| कुल | = 60 |
In simple words: दिए गए आँकड़ों को समावेशी विधि का उपयोग करके 7 के वर्ग-अंतराल के साथ बारम्बारता वितरण सारणी में व्यवस्थित किया गया है, जिसमें प्रत्येक वर्ग में निचली और ऊपरी दोनों सीमाएं शामिल होती हैं।
🎯 Exam Tip: समावेशी विधि में वर्ग-अंतराल बनाते समय, ऊपरी सीमा को अगले वर्ग में न गिनकर उसी वर्ग में गिनने का ध्यान रखें, और मिलान चिह्नों का सही ढंग से उपयोग करें।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. गुणात्मक वर्गीकरण कितने प्रकार का होता है?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
Answer: (क) दो
In simple words: गुणात्मक वर्गीकरण दो प्रकार का होता है: सरल या द्वैत वर्गीकरण और बहुगुणी वर्गीकरण, जो गुणों पर आधारित होते हैं।
🎯 Exam Tip: गुणात्मक वर्गीकरण के प्रकारों को याद रखना और उनके बीच का अंतर समझना बहुविकल्पीय प्रश्नों में सहायक होता है।
Question 2. “वर्गीकरण समंकों को उनकी सामान्य विशेषताओं के आधार पर क्रम अथवा समूहों में क्रमबद्ध व विभिन्न परन्तु सम्बद्ध भागों में अलग-अलग करने की विधि है।” यह परिभाषा किसने दी?
(क) बोनिनि ने ।
(ख) होरेस सेक्राइस्ट ने
(ग) पीटर एच० मन ने
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) होरेस सेक्राइस्ट ने
In simple words: वर्गीकरण की यह विशिष्ट परिभाषा होरेस सेक्राइस्ट ने दी है, जिसमें समंकों को उनकी समान विशेषताओं के आधार पर समूहों में व्यवस्थित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण सांख्यिकीय परिभाषाओं को उनके संबंधित अर्थशास्त्रियों के साथ याद रखना परीक्षा में सटीक उत्तर देने में मदद करता है।
Question 3. आय, व्यय, लम्बाई, चौड़ाई के आधार पर वर्गीकरण अथवा तथ्यों को आवृत्ति विवरण हैं।
(क) गणनात्मक वर्गीकरण
(ख) गुणात्मक वर्गीकरण
(ग) ऋणात्मक वर्गीकरण
(घ) ये सभी
Answer: (क) गणनात्मक वर्गीकरण
In simple words: आय, व्यय, लम्बाई और चौड़ाई जैसी संख्यात्मक विशेषताओं के आधार पर किया गया वर्गीकरण गणनात्मक वर्गीकरण कहलाता है।
🎯 Exam Tip: गणनात्मक और गुणात्मक वर्गीकरण के बीच के अंतर को उदाहरणों के साथ समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मूल डेटा विशेषताओं पर आधारित होता है।
Question 4. जहाँ परिवर्तनशील विशेषताएँ संख्याओं में मापी जा सकें वहाँ प्रयोग किया जाता है
(क) चर पद का
(ख) अचर पद का
(ग) (क) तथा (ख) दोनों का
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) चर पद को
In simple words: जब किसी विशेषता को संख्याओं में मापा जा सकता है और उसके मान बदल सकते हैं, तो उसे चर (variable) कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: 'चर पद' की परिभाषा और उसके अनुप्रयोग को समझना सांख्यिकी की मूलभूत अवधारणाओं को स्पष्ट करता है।
Question 5. प्रत्येक 10 वर्ष बाद की जाने वाली जनगणना किस आधार का उदाहरण है?
(क) गुणात्मक
(ख) गणनात्मक
(ग) सामयिक
(घ) भौगोलिक
Answer: (ग) सामयिक
In simple words: हर 10 साल पर होने वाली जनगणना सामयिक वर्गीकरण का उदाहरण है क्योंकि यह समय-आधारित डेटा संग्रह पर केंद्रित होती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न वर्गीकरण आधारों (गुणात्मक, गणनात्मक, सामयिक, भौगोलिक) के उदाहरणों को याद रखना इस प्रकार के प्रश्नों में मदद करता है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वर्गीकरण किसे कहते हैं?
Answer: वर्गीकरण एक क्रिया है जिसके द्वारा समान तथा असमान आँकड़ों को विभिन्न वर्गों के क्रम के अनुसार प्रस्तुत किया जाता है।
In simple words: वर्गीकरण एक प्रक्रिया है जिसमें समान विशेषताओं वाले आँकड़ों को एक साथ और असमान विशेषताओं वाले आँकड़ों को अलग-अलग वर्गों में व्यवस्थित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण की परिभाषा को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से व्यक्त करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. वर्गीकरण की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए ।
Answer:
• आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बाँटा जाता है।
• समान इकाइयों को एक वर्ग में तथा असमान इकाइयों को दूसरे वर्ग में रखा जाता है।
In simple words: वर्गीकरण की दो मुख्य विशेषताएँ हैं कि इसमें आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बांटा जाता है, और समान चीजें एक वर्ग में तथा अलग चीजें दूसरे वर्ग में रखी जाती हैं।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण की विशेषताओं को याद रखना इसकी मूलभूत प्रकृति को समझने में मदद करता है।
Question 3. वर्गीकरण के दो उद्देश्य बताइए ।
Answer:
• आँकड़ों को सरल एवं संक्षिप्त रूप में प्रकट करना।
• ऑकड़ों को व्यवस्थित रूप में वैज्ञानिक आधार प्रदान करना।
In simple words: वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य डेटा को सरल और समझने योग्य बनाना, साथ ही उसे वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए व्यवस्थित करना है।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करना और संक्षेप में समझाना आवश्यक है।
Question 4. भौगोलिक वर्गीकरण से क्या आशय है?
Answer: जब वर्गीकरण; आँकड़ों की स्थिति अथवा भौगोलिक भिन्नता के आधार पर किया जाता है तो यह भौगोलिक वर्गीकरण कहलाता है।
In simple words: भौगोलिक वर्गीकरण का अर्थ है आँकड़ों को उनके स्थान या भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार समूहों में बांटना, जैसे विभिन्न राज्यों या शहरों की जनसंख्या का वर्गीकरण।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक वर्गीकरण की परिभाषा को भौगोलिक भिन्नता के संदर्भ में स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 5. समयानुसार वर्गीकरण से क्या आशय है?
Answer: जब आँकड़ों का वर्गीकरण समय के आधार पर किया जाता है तो इसको समयानुसार वर्गीकरण कहते हैं।
In simple words: समयानुसार वर्गीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें आँकड़ों को समय के विभिन्न बिंदुओं या अवधियों (जैसे वर्ष, महीने) के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: समयानुसार वर्गीकरण की परिभाषा को समय-आधारित व्यवस्था के रूप में याद रखना चाहिए।
Question 6. गुणात्मक वर्गीकरण से क्या आशय है?
Answer: जब आँकड़ों को गुणों (विशेषताओं) के आधार पर (धर्म, बौद्धिक स्तर) वर्गीकृत किया जाता है। तो इसे-गुणात्मक वर्गीकरण कहा जाता है।
In simple words: गुणात्मक वर्गीकरण का अर्थ है आँकड़ों को उनके गुणों या विशेषताओं (जैसे धर्म या बौद्धिक स्तर) के आधार पर समूहों में बांटना, न कि संख्यात्मक मानों पर।
🎯 Exam Tip: गुणात्मक वर्गीकरण को गुणों या विशेषताओं पर आधारित वर्गीकरण के रूप में परिभाषित करें।
Question 7. चर किसे कहते हैं।
Answer: किसी तथ्य की वह विशेषता जिसे संख्याओं के रूप में मापा जा सकता है, चर (variable) कहलाती है।
In simple words: चर वह विशेषता है जिसे संख्या में मापा जा सकता है और जिसका मान बदल सकता है।
🎯 Exam Tip: चर की परिभाषा को याद रखें कि यह एक संख्यात्मक रूप से मापी जा सकने वाली और परिवर्तनशील विशेषता है।
Question 8. खण्डित या विच्छिन्न चर से क्या आशय है?
Answer: वे चर जिनके मूल्य पूर्णांकों में प्रकट किए जाते हैं, खण्डित चर (discrete variable) कहलाते हैं। ये निश्चित संख्या में व्यक्त किए जाते हैं, भिन्नात्मक (fractional) संख्या में नहीं।
In simple words: खण्डित चर वे चर होते हैं जिनके मान केवल पूर्ण संख्याओं में होते हैं और भिन्नात्मक नहीं हो सकते, जैसे छात्रों की संख्या।
🎯 Exam Tip: खण्डित चर को पूर्णांक मानों वाले चर के रूप में परिभाषित करें और उदाहरण दें।
Question 9. अखण्डित या अविच्छिन्न चर से क्या आशय है?
Answer: वे चर जो निरन्तर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, अखण्डित चर कहलाते हैं। ये भिन्नात्मक (fractional) होते हैं अर्थात् निश्चित सीमाओं के अन्दर इनका कोई भी मूल्य हो सकता है।
In simple words: अखण्डित चर वे चर होते हैं जिनके मान एक सीमा के भीतर कोई भी भिन्नात्मक मूल्य ले सकते हैं और धीरे-धीरे बदलते रहते हैं, जैसे ऊँचाई या वजन।
🎯 Exam Tip: अखण्डित चर को भिन्नात्मक मानों वाले चर के रूप में परिभाषित करें और उदाहरण दें।
Question 10. श्रृंखला (series) को परिभाषित कीजिए ।
Answer: “श्रृंखला उन आँकड़ों या आँकड़ों के गुणों को कहते हैं जो किसी तर्कपूर्ण क्रम के अनुसार व्यवस्थित किए जाते हैं।” होरेस सेक्राइस्ट
In simple words: श्रृंखला आँकड़ों का एक तर्कपूर्ण और व्यवस्थित क्रम है जो विश्लेषण को आसान बनाता है।
🎯 Exam Tip: श्रृंखला की परिभाषा को उसके 'तर्कपूर्ण क्रम में व्यवस्थित आँकड़ों' के गुण के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 11. निम्नलिखित आँकड़े 11वीं कक्षा में अर्थशास्त्र में प्राप्त अंकों के हैं 50 37 24 30 42 18 25 15 35 45 उपर्युक्त श्रृंखला को आरोही व अवरोही क्रम में लिखो ।
Answer:
आरोही क्रम - 15 18 24 25 30 35 37 42 45 50 ।
अवरोही क्रम - 50 45 42 37 35 30 25 24 18 15
In simple words: दिए गए अंकों को छोटे से बड़े (आरोही) और बड़े से छोटे (अवरोही) क्रम में व्यवस्थित करना डेटा को क्रमबद्ध करने का एक बुनियादी तरीका है।
🎯 Exam Tip: आरोही और अवरोही क्रम में संख्याओं को व्यवस्थित करते समय, किसी भी अंक को छोड़ने या दोहराने से बचें।
Question 12. आवृत्ति frequency) किसे कहते हैं?
Answer: किसी समग्र में एक मद जितनी बार आती है अर्थात् जितनी बार उसकी पुनरावृत्ति होती है, उसे उस मद की आवृत्ति कहा जाता है।
In simple words: आवृत्ति का मतलब है कि कोई विशेष डेटा मान एक समूह में कितनी बार दोहराया जाता है।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति की परिभाषा को 'किसी मद की पुनरावृत्ति की संख्या' के रूप में याद रखें।
Question 13. आवृत्ति विन्यास एवं आवृत्ति वितरण में मुख्य अन्तर बताइए।
Answer: आवृत्ति विन्यास में X चर एक खण्डित चर होता है जबकि आवृत्ति वितरण में X चर एक खण्डित चर न होकर विभिन्न वर्ग आवृत्तियों का वितरण होता है। इस प्रकार आवृत्ति विन्यास से अभिप्राय खण्डित श्रृंखला से है जबकि आवृत्ति वितरण से अभिप्राय अखण्डित श्रृंखला से है।
In simple words: आवृत्ति विन्यास खण्डित चरों (अलग-अलग मानों) के लिए होता है, जबकि आवृत्ति वितरण अखण्डित चरों (वर्ग अंतरालों में फैले मानों) के लिए उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति विन्यास (discrete series) और आवृत्ति वितरण (continuous series) के बीच के अंतर को उनके चर के प्रकार (खण्डित बनाम अखण्डित) के आधार पर स्पष्ट करें।
Question 14. वर्ग (class) किसे कहते हैं?
Answer: संख्याओं के किसी निश्चित समूह को जिसमें मदें शामिल होती हैं, वर्ग कहते हैं जैसे 0-10, 10-20 आदि ।
In simple words: वर्ग संख्याओं का एक समूह है जिसमें समान विशेषता वाले डेटा मान शामिल होते हैं, जैसे 0 से 10 के बीच की संख्याएँ।
🎯 Exam Tip: वर्ग की परिभाषा को उदाहरण के साथ स्पष्ट करें, जिसमें संख्यात्मक डेटा के समूह को शामिल किया जाता है।
Question 15. वर्ग विस्तार किसे कहते हैं?
Answer: किसी वर्ग की ऊपरी व निचली सीमा में अन्तर को वर्ग विस्तार कहते हैं जैसे–10-20 वर्ग का विस्तार 20 – 10 = 10 होगा।
In simple words: वर्ग विस्तार किसी वर्ग की ऊपरी और निचली सीमा के बीच का अंतर होता है, जो उस वर्ग की चौड़ाई दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: वर्ग विस्तार की गणना के लिए ऊपरी और निचली सीमा के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 16. मध्य मूल्य किसे कहते हैं?
Answer: किसी वर्ग की ऊपरी सीमा व निचली सीमा के औसत मूल्य को मध्य मूल्य कहते हैं; जैसे-10-20 वर्ग का मध्य मूल्य = \( \frac{20+10}{2} \) = 15 होगा।
In simple words: मध्य मूल्य किसी वर्ग की ऊपरी और निचली सीमा का औसत होता है, जो उस वर्ग के बीच का मान दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: मध्य मूल्य की परिभाषा और उसकी गणना विधि (ऊपरी सीमा + निचली सीमा / 2) को याद रखना आवश्यक है।
Question 17. अपवर्जी श्रृंखला (Exclusive Series) से क्या आशय है?
Answer: अपवर्जी श्रृंखला वह श्रृंखला है जिसमें एक वर्ग की ऊपरी सीमा दूसरे वर्ग की निचली सीमा होती। है तथा प्रत्येक वर्गान्तर की ऊपरी सीमा के मूल्य स्तर वाला मद उस वर्ग में सम्मिलित न होकर अगले वर्गान्तर की निचली सीमा में सम्मिलित होता है।
In simple words: अपवर्जी श्रृंखला वह है जहाँ एक वर्ग की ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा बन जाती है, और ऊपरी सीमा को उस वर्ग में शामिल नहीं किया जाता।
🎯 Exam Tip: अपवर्जी श्रृंखला में यह स्पष्ट करें कि ऊपरी वर्ग सीमा को वर्तमान वर्ग में शामिल नहीं किया जाता है, बल्कि अगले वर्ग की निचली सीमा के रूप में देखा जाता है।
Question 18. समावेशी श्रृंखला (Inclusive Series) से क्या आशय है?
Answer: समावेशी श्रृंखला वह श्रृंखला है जिसमें एक वर्ग की ऊपरी सीमा दूसरे वर्ग की निचली सीमा के बराबर नहीं होती। अतः इसमें एक वर्ग की ऊपरी सीमा का मूल्य भी उसी वर्ग में शामिल होता है।
In simple words: समावेशी श्रृंखला वह है जहाँ एक वर्ग की ऊपरी सीमा को भी उसी वर्ग में शामिल किया जाता है, और यह अगले वर्ग की निचली सीमा के बराबर नहीं होती।
🎯 Exam Tip: समावेशी श्रृंखला में यह महत्वपूर्ण है कि ऊपरी वर्ग सीमा को वर्तमान वर्ग में ही शामिल किया जाता है।
Question 19. खुले सिरे वाली श्रृंखला (Open End series) से क्या आशय है?
Answer: खुले सिरे वाली श्रृंखला वह श्रृंखला है जिसमें न तो प्रथम वर्ग की निम्न सीमा दी हुई होती है और न ही अन्तिम वर्ग की उच्च सीमा। अर्थात् इसमें प्रथम वर्ग की निचली सीमा के स्थान पर 'से कम' एवं अन्तिम वर्ग की ऊपरी सीमा के स्थान पर से अधिक' लिखा होता है।
In simple words: खुले सिरे वाली श्रृंखला वह होती है जिसमें पहले वर्ग की निचली सीमा या अंतिम वर्ग की ऊपरी सीमा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं होती, बल्कि 'से कम' या 'से अधिक' जैसे वाक्यांशों का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: खुले सिरे वाली श्रृंखला की पहचान 'से कम' और 'से अधिक' जैसे वाक्यांशों का उपयोग करके करें, जो वर्ग सीमाओं की अनिश्चितता दर्शाते हैं।
Question 20. संचयी आवृत्ति क्या है?
Answer: वे आवृत्तियाँ जिन्हें वर्गानुसार अलग-अलग न रखकर संचयी रूप से जोड़ कर रखा जाता है, संचयी आवृत्तियाँ कहलाती हैं।
In simple words: संचयी आवृत्ति वह आवृत्ति है जिसमें वर्तमान वर्ग और उससे पहले के सभी वर्गों की आवृत्तियों को जोड़ा जाता है, जिससे कुल योग बढ़ता जाता है।
🎯 Exam Tip: संचयी आवृत्ति की परिभाषा को 'क्रमिक वर्गों की आवृत्तियों के कुल योग' के रूप में याद रखें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वर्गीकरण के मुख्य आधार क्या हैं?
Answer: वर्गीकरण के मुख्य आधार
अनुसन्धान क्रिया में सामान्यतया निम्नलिखित प्रमुख आधारों को सामने रखकर वर्गीकरण किया जाता है 1. गुणात्मक आधार – इसके अनुसार, वर्गीकरण किसी गुण के आधार पर किया जाता है। उदाहरण के लिए जाति, प्रजाति, धर्म, वैवाहिक स्थिति, शैक्षणिक योग्यता, व्यवसाय आदि विशेषताओं के आधार पर किया गया वर्गीकरण गुणात्मक वर्गीकरण' कहा जाएगा।
2. गणनात्मक आधार – यदि एकत्रित आँकड़े ऐसे हैं कि उन्हें गुणों के आधार पर व्यक्त करने की अपेक्षा संख्याओं में व्यक्त करना सरल है तो गणनात्मक आधार का सहारा लिया जाता है। उदाहरण के लिए ऊँचाई, वजन, आयु, आय, व्यय, उत्पादन आदि के आधार पर किया गया वर्गीकरण 'गणनात्मक वर्गीकरण' कहा जाएगा।
3. सामयिक आधार – आँकड़ों का वर्गीकरण समय के आधार पर भी किया जाता है। इन्हें समय, दिन, सप्ताह, माह अथवा वर्षों में व्यक्त किया जा सकता है। प्रत्येक 10 वर्ष बाद की जाने वाली जनगणना सामयिक आधार का ही उदाहरण है।
4. भौगोलिक आधार – विभिन्न स्थानों के आधार पर भी समंकों का वर्गीकरण किया जाता है। विभिन्न प्रान्तों अथवा किसी एक प्रान्त के जिलों में जनसंख्या का वर्गीकरण ‘भौगोलिक वर्गीकरण कहलाता है।
In simple words: वर्गीकरण के मुख्य आधार गुणात्मक (गुणों पर आधारित), गणनात्मक (संख्याओं पर आधारित), सामयिक (समय पर आधारित) और भौगोलिक (स्थान पर आधारित) होते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के चारों मुख्य आधारों की स्पष्ट परिभाषा और प्रत्येक का एक-एक उदाहरण याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. 20 विद्यार्थियों के सांख्यिकी में निम्नलिखित प्राप्तांकों को सतत आवृत्ति वितरण के रूप में प्रस्तुत कीजिए। अपवर्जी (Exclusive) और समावेशी (Inclusive) दोनों वर्गान्तर स्पष्ट कीजिए
10 2 6 11 10 7 14 18 20 5
17 14 1 13 22 12 10 9 13 16
Answer:
हल-
| अपवर्जी रीति | समावेशी रीति | ||
|---|---|---|---|
| वर्ग अन्तराल | आवृत्ति | वर्ग अन्तराल | आवृत्ति |
| 0-5 | 2 | 1-5 | 3 |
| 5-10 | 4 | 6-10 | 6 |
| 10-15 | 9 | 11-15 | 6 |
| 15-20 | 3 | 16-20 | 4 |
| 20-25 | 2 | 21-25 | 1 |
| 20 | 20 |
In simple words: दिए गए प्राप्तांकों को अपवर्जी और समावेशी दोनों विधियों का उपयोग करके सतत आवृत्ति वितरण में व्यवस्थित किया गया है, जहाँ अपवर्जी में ऊपरी सीमा अगले वर्ग में जाती है और समावेशी में ऊपरी सीमा उसी वर्ग में रहती है।
🎯 Exam Tip: अपवर्जी और समावेशी दोनों विधियों में वर्ग अंतराल बनाने और संबंधित आवृत्तियों की गणना करते समय नियमों का सही ढंग से पालन करना सुनिश्चित करें।
Question 3. 70 विद्यार्थियों के भार (पौण्ड में) के निम्नलिखित आँकड़ों को ऐसे आवृत्ति वितरण के रूप में प्रस्तुत कीजिए, जिसमें पहला वर्गान्तर 60-69 हो
61 69 103 92 90 118 87 86 115 98
73 96 84 102 86 95 89 106 85 67
93 72 84 91 113 63 92 107 98 82
107 80 106 101 101 99 107 62 93 104
112 88 91 90 114 82 111 94 109 88
76 96 75 77 72 100 76 73 97 88
78 109 91 105 77 106 83 108 74 92
Answer:
हल-
| वर्ग अन्तराल | आवृत्ति |
|---|---|
| 60-69 | 5 |
| 70-79 | 11 |
| 80-89 | 14 |
| 90-99 | 18 |
| 100-109 | 16 |
| 110-119 | 6 |
| 70 |
In simple words: 70 विद्यार्थियों के भार (पौण्ड में) के आँकड़ों को 60-69 के पहले वर्ग-अंतराल से शुरू करते हुए एक आवृत्ति वितरण सारणी में व्यवस्थित किया गया है, जिससे प्रत्येक भार श्रेणी में विद्यार्थियों की संख्या पता चलती है।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति वितरण सारणी बनाते समय, वर्ग-अंतरालों की निरंतरता और प्रत्येक वर्ग में डेटा बिंदुओं की सही गणना सुनिश्चित करें।
Question 4. निम्नलिखित श्रेणियों को साधारण अविच्छिन्न श्रेणी (Simple Continuous series) में बदलिए |
| (a) | (b) | (c) | |||
|---|---|---|---|---|---|
| से कम प्राप्तांक | विद्यार्थियों की संख्या | से अधिक आय (Rs.) | विद्यार्थियों की संख्या | मध्य मूल्य | आवृत्ति |
| 10 | 30 | 0 | 700 | 10.5 | 3 |
| 20 | 70 | 50 | 607 | 17.5 | 7 |
| 30 | 120 | 100 | 402 | 24.5 | 15 |
| 40 | 168 | 150 | 245 | 31.5 | 25 |
| 50 | 192 | 200 | 136 | 38.5 | 40 |
| 60 | 354 | 250 | 72 | 45.5 | 18 |
| 70 | 486 | 300 | 31 | 52.5 | 12 |
| 80 | 500 | 350 | 9 | 59.5 | 10 |
Answer:
हल :
| (a) | (b) | (c) | |||
|---|---|---|---|---|---|
| वर्ग अन्तराल | आवृत्ति | वर्ग अन्तराल | आवृत्ति | वर्ग अन्तराल | आवृत्ति |
| 0-10 | 39 | 0-50 | 53 | 7-14 | 3 |
| 10-20 | 40 | 50-100 | 205 | 14-21 | 7 |
| 20-30 | 45 | 100-150 | 157 | 21-28 | 15 |
| 30-40 | 48 | 150-200 | 109 | 28-35 | 25 |
| 40-50 | 24 | 200-250 | 64 | 35-42 | 40 |
| 50-60 | 162 | 250-300 | 41 | 42-49 | 18 |
| 60-70 | 132 | 300-350 | 22 | 49-56 | 12 |
| 70-80 | 14 | 350-400 | 9 | 56-63 | 10 |
In simple words: 'से कम', 'से अधिक' और मध्य मूल्य आधारित श्रेणियों को मानक अविच्छिन्न आवृत्ति वितरण में बदला गया है, जहाँ प्रत्येक श्रेणी को वर्ग अंतराल और उसकी आवृत्ति से दर्शाया गया है।
🎯 Exam Tip: 'से कम' और 'से अधिक' प्रकार की संचयी आवृत्तियों को साधारण आवृत्ति वितरण में बदलने के लिए आवृत्तियों को घटाने या जोड़ने की प्रक्रिया को ध्यान से समझें। मध्य मूल्य से आवृत्ति वितरण बनाने के लिए वर्ग-अंतराल की गणना सही ढंग से करें।
Question 5. 50 परीक्षार्थियों के सांख्यिकी में प्राप्तांक (पूर्णांक 100) निम्नलिखित हैं
70 55 51 42 57
45 60 47 63 '53
33 65 39 82 55
64 58 61 65 42
50 52 53 45 45.
25 36 59 63 39
65 45 49 54 64
75 42 41 52 35
30 35 15 48 26
20 40 55 46 18
10-10 प्राप्तांकों का वर्ग विस्तार लेते हुए एक आवृत्ति वितरण की रचना कीजिए । प्रथम वर्गान्तर 0-10 रखिए।
Answer:
हल :
| वर्ग अन्तराल | आवृत्ति |
|---|---|
| 0-10 | 0 |
| 10-20 | 2 |
| 20-30 | 3 |
| 30-40 | 7 |
| 40-50 | 13 |
| 50-60 | 13 |
| 60-70 | 9 |
| 70-80 | 2 |
| 80-90 | 1 |
In simple words: 50 परीक्षार्थियों के प्राप्तांकों को 10 के वर्ग विस्तार के साथ आवृत्ति वितरण सारणी में व्यवस्थित किया गया है, जहाँ 0-10 पहला वर्ग अंतराल है।
🎯 Exam Tip: दिए गए डेटा को वर्ग-अंतराल में वर्गीकृत करते समय, प्रत्येक डेटा बिंदु को सही वर्ग में रखना और प्रत्येक वर्ग के लिए आवृत्ति की सटीक गणना करना महत्वपूर्ण है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वर्गीकरण का अर्थ एवं उद्देश्य बताइए। एक अच्छे वर्गीकरण की क्या विशेषताएँ हैं?
Answer: आर्थिक अनुसन्धान किसी समस्या से आरम्भ होता है। समस्या से सम्बन्धित उपकल्पनाएँ बनाई जाती हैं तथा इनका परीक्षण करने के लिए विभिन्न अनुसन्धान प्रविधियों में से सबसे उपयुक्त प्रविधियों का चयन करके आँकड़ों का संकलन किया जाता है। आँकड़े एकत्रित कर लेने के पश्चात् आँकड़ों को व्यवस्थित करना अनिवार्य है ताकि अर्थपूर्ण ढंग से आँकड़ों पर आधारित निष्कर्ष निकाले जा सकें। वर्गीकरण का उद्देश्य बिखरे हुए आँकड़ों को व्यवस्थित करना होता है।
वर्गीकरण का अर्थ व परिभाषा
वर्गीकरण का अर्थ विभिन्न वस्तुओं अथवा बिखरी हुई सामग्री को समान गुणों (अथवा विशेषताओं) के आधार पर विभिन्न श्रेणियों अथवा वर्गों में विभाजित करना है। इस प्रकार वर्गीकरण एकरूपता एवं समानताओं के आधार पर तथ्यों का विभिन्न श्रेणियों में विभाजन है।
पीटर एच० मन के अनुसार-“वर्गीकरण अनिवार्य रूप से वस्तुओं को उनकी समान विशेषताओं के आधार पर एक-साथ रखने का प्रकार है ताकि उन्हें सरलता से समझा जा सके।”
एल० आर० कॉनर के शब्दों में-“वर्गीकरण वस्तुओं को उनकी विशेषताओं अथवा गुणों के आधार पर समूहों एवं वर्गों में क्रमबद्ध करने की एक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य विभिन्नताओं के बीच समान वस्तुओं को खोजकर एक-साथ रखना है।”
होरेस सेक्राइस्ट के शब्दों में-“वर्गीकरण समंकों को उनकी सामान्य विशेषताओं के आधार पर क्रम अथवा समूहों में क्रमबद्ध व विभिन्न परन्तु सम्बद्ध भागों में अलग-अलग करने की विधि है।” स्पर तथा बोनिनि के अनुसार-“वर्गीकरण तथ्यों का वर्गों में, जिन्हें महत्त्वपूर्ण विशेषताओं के आधार पर किया जाता है, समूहीकरण है।” उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि वर्गीकरण एकत्रित आँकड़ों को समान गुणों के आधार पर विभिन्न वर्गों अथवा श्रेणियों में विभाजित करने की प्रक्रिया है ताकि आँकड़ों को व्यवस्थित करके निष्कर्ष निकालने में सहायता मिल सके।
वर्गीकरण के उद्देश्य
1. तथ्यों की प्रकृति स्पष्ट करना – वर्गीकरण का प्रमुख उद्देश्य एकत्रित तथ्यों की प्रकृति को स्पष्ट करना है अर्थात् यह बताना है कि इनमें क्या समानताएँ वे असमानताएँ हैं।
2. तथ्यों को संक्षिप्त एवं बोधगम्य बनाना – वर्गीकरण का दूसरा उद्देश्य तथ्यों को तार्किकता के आधार पर समूहों एवं श्रेणियों में बाँटना है और इस प्रकार तथ्यों को संक्षिप्त तथा बोधगम्य बनाना
3. तथ्यों के विश्लेषण में सहायता देना – वर्गीकरण का एक उद्देश्य तथ्यों एवं आँकड़ों को विश्लेषण के लिए उपयुक्त बनाना है।
4. सामान्यीकरण में सहायता देना – वर्गीकरण का उद्देश्य सामान्यीकरण की प्रक्रिया को संक्षिप्त एवं सरल बनाना है।
5. तुलना में सहायता देना – वर्गीकरण का उद्देश्य संकलित सामग्री को तुलनात्मक अध्ययनों के लिए उपयुक्त बनाना है।
6. पारस्परिक सम्बन्ध स्पष्ट करना – वर्गीकरण द्वारा घटना के कारण और परिणाम में सम्बन्ध ज्ञात करने में सहायता मिलती है।
7. सारणीयन का आधार प्रस्तुत करना – वर्गीकरण सांख्यिकीय सामग्री के सारणीयन तथा सांख्यिकीय विश्लेषण की अन्य क्रियाओं के लिए समुचित आधार प्रस्तुत करता है।
एक अच्छे वर्गीकरण की विशेषताएँ
एक अच्छे वर्गीकरण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
• वर्गीकरण स्पष्ट होना चाहिए।
• विभिन्न वर्ग एक-दूसरे से भिन्न होने चाहिए ।
• वर्गीकरण का आधार एक होना चाहिए ।
• वर्गीकरण में स्थायित्व होना चाहिए।
• वर्गों अथवी श्रेणियों का आधार उपयुक्त होना चाहिए।
• वर्गीकरण व्यापक होना चाहिए।
• वर्गीकरण में परिवर्तनशीलता होनी चाहिए।
In simple words: वर्गीकरण का अर्थ है डेटा को समान विशेषताओं के आधार पर व्यवस्थित करना, जिसका उद्देश्य तथ्यों को स्पष्ट, संक्षिप्त, विश्लेषण योग्य बनाना, और सामान्यीकरण, तुलना तथा संबंध स्थापित करने में मदद करना है, एक अच्छे वर्गीकरण में स्पष्टता, भिन्नता और उपयुक्त आधार जैसी विशेषताएँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण की परिभाषा, उसके उद्देश्यों (जैसे स्पष्टता, संक्षिप्तता, विश्लेषण में सहायता) और एक अच्छे वर्गीकरण की विशेषताओं (जैसे स्पष्ट, भिन्न, स्थायी) को विस्तार से समझाना दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. गुणात्मक वर्गीकरण क्या है? यह कितने प्रकार का होता है? प्रत्येक को चार्ट के आधार पर समझाइए।
Answer: गुणात्मक वर्गीकरण
विभिन्न गुणों के आधार पर तथ्यों का वर्गीकरण 'गुणात्मक वर्गीकरण' कहा जाता है। यह दो प्रकार का होता है (अ) सरल या द्वैत वर्गीकरण – इस प्रकार के वर्गीकरण में आँकड़ों को किसी एक गुण के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित कर दिया जाता है। दूसरे शब्दों में, जिन आँकड़ों में वह गुण है, उन्हें एक श्रेणी में तथा जिनमें वह गुण नहीं है उन्हें दूसरी श्रेणी में रखा जाता है। ये दोनों श्रेणियाँ पूर्णतया अपवर्जी अर्थात् एक-दूसरे से भिन्न होती हैं। उदाहरण के लिए निम्नलिखित वर्गीकरण द्वैत वर्गीकरण है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख जनसंख्या को 'पुरुष' और 'स्त्री' दो वर्गों में विभाजित करके सरल या द्वैत वर्गीकरण का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ गुण की उपस्थिति (पुरुष) और अनुपस्थिति (स्त्री) के आधार पर वर्गीकरण किया गया है। यह दिखाता है कि कैसे एक विशेषता के आधार पर डेटा को दो परस्पर अनन्य समूहों में बांटा जाता है।
ऐसे वर्गीकरण में गुण की उपस्थिति या गुण की अनुपस्थिति से ही वर्ग बनाए जाते हैं।
की उपस्थिति या गुण की अनुपस्थिति से ही वर्ग बनाए जाते हैं।
(ब) बहुगुणी वर्गीकरण – इसमें तथ्यों को एक से अधिक गुणों के आधार पर, वर्गीकृत किया जाता है। इसके फलस्वरूप दो से अधिक वर्ग बनते हैं। यदि किसी स्थान की जनसंख्या को वयस्कता (A), पुल्लिग (B), शिक्षित (C) गुणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाए तो यह बहुगुणी वर्गीकरण कहलाएगा और वर्गीकरण इस प्रकार होगा
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख किसी स्थान की जनसंख्या का बहुगुणी वर्गीकरण दिखाता है, जहाँ 'वयस्कता' (A), 'पुरुष' (B), और 'शिक्षित' (C) जैसे कई गुणों के आधार पर जनसंख्या को विभिन्न उप-समूहों (जैसे ABC, aBc, abC, आदि) में विभाजित किया गया है। यह दर्शाता है कि कैसे एक से अधिक विशेषताओं का उपयोग करके डेटा को अधिक विस्तृत श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
दो बातों पर विशेष ध्यान रखा जाता है-
• गुण को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए।
• गुणों में होने वाले परिवर्तनों का ध्यान रखा जाए।
In simple words: गुणात्मक वर्गीकरण डेटा को गुणों के आधार पर बांटता है, जो दो प्रकार का होता है: सरल वर्गीकरण (एक गुण पर आधारित) और बहुगुणी वर्गीकरण (कई गुणों पर आधारित)।
🎯 Exam Tip: गुणात्मक वर्गीकरण के दोनों प्रकारों (सरल और बहुगुणी) को उनकी परिभाषाओं और आरेखीय प्रतिनिधित्व के साथ स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है, साथ ही वर्गीकरण करते समय गुणों की स्पष्टता पर जोर देना।
Question 3. संख्यात्मक वर्गीकरण क्या है? यह कितने प्रकार का होता है? प्रत्येक को स्पष्ट रूप से समझाइए।
Answer: गणनात्मक अथवा संख्यात्मक वर्गीकरण
इसमें सामग्री को अंकों अर्थात् संख्याओं में प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरण के लिए आय, व्यय, लम्बाई, चौड़ाई के आधार पर वर्गीकरण करना अथवा तथ्यों का आवृत्ति वितरण ‘गणनात्मक वर्गीकरण है। इस प्रकार का वर्गीकरण सांख्यिकीय श्रेणियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह वर्गीकरण निम्नवर्णित हो सकता है (अ) खण्डित अथवा विच्छिन्न माला के अनुसार वर्गीकरण – इस प्रकार के वर्गीकरण में मूल्यों की आवृत्ति जितनी बार होती है, उसे उसी संख्या के सामने लिखकर एक आवृत्ति सारणी के रूप में दिखाया जाता है; जैसे ।
| सदस्य संख्या | परिवारों की संख्या (आवृत्ति) |
|---|---|
| 2 | 12 |
| 3 | 20 |
| 4 | 10 |
| 5 | 13 |
| 6 | 17 |
| 7 | 15 |
| कुल योग | 87 |
(ब) सतत माला अथवा वर्गान्तर के अनुसार वर्गीकरण-इनमें आँकड़ों को पृथक् पृथक् प्रस्तुत न करके वर्गों में प्रस्तुत किया जाता है। वर्ग अथवा वर्गान्तर की सीमाएँ स्वैच्छिक तौर पर निश्चित की जाती हैं; जैसे
| आयु वर्षों में | अवृत्ति |
|---|---|
| 15-20 | 300 |
| 20-25 | 150 |
| 25-30 | 200 |
| 30-35 | 90 |
| above 35 | 60 |
| कुल योग | 800 |
In simple words: संख्यात्मक वर्गीकरण डेटा को संख्यात्मक मानों (जैसे आय, व्यय) के आधार पर व्यवस्थित करता है। यह दो प्रकार का होता है: खण्डित (जहाँ मान अलग-अलग होते हैं) और सतत (जहाँ मान वर्ग अंतरालों में होते हैं)।
🎯 Exam Tip: संख्यात्मक वर्गीकरण के दो मुख्य प्रकारों (खण्डित और सतत) को उनकी परिभाषाओं और तालिकाबद्ध उदाहरणों के साथ समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 4. वर्गीकरण की अपवर्जी विधि व समावेशी विधि को सोदाहरण समझाइए । समावेशी वर्गान्तर को अपवर्जी वर्गान्तर में कैसे बदला जाता है?
Answer: वर्गान्तरों के वर्गीकरण की दो विधियाँ हैं-
(अ) अपवर्जी विधि तथा
(ब) समावेशी विधि ।
(अ) अपवर्जी विधि – इसमें पहले वर्ग की उच्च सीमा (upper limit) तथा दूसरे वर्ग की निम्न सीमा (lower limit) समान हाती है। अतः यह समस्या उत्पन्न होती है कि उच्च सीमा को किस वर्ग में रखा जाए। इस विधि में किसी वर्ग की उच्च सीमा को उस वर्ग के अन्तर्गत शामिल न करके, उसके बाद वाले वर्ग में शामिल किया जाता है। उदाहरण के लिए|
| मासिक मजदूरी (Rs. में) | मजदूरों की संख्या |
|---|---|
| 0 से अधिक लेकिन 10 से अधिक नहीं | 2 |
| 10 से अधिक लेकिन 20 से अधिक नहीं | 3 |
| 20 से अधिक लेकिन 30 से अधिक नहीं | 10 |
| 30 से अधिक लेकिन 40 से अधिक नहीं | 24 |
| 40 से अधिक लेकिन 50 से अधिक नहीं | 11 |
| योग | 50 |
कभी निचली सीमा को भी अपवर्जी कर दिया जाता है।
| I | II |
|---|---|
| 0 परन्तु 10 से कम | 0-9.99 |
| 10 परन्तु 20 से कम | 10-19.9 |
| 20 परन्तु 30 से कम | 20-29.99 |
| 30 परन्तु 40 से कम | 30-39.99 |
| 40 परन्तु 50 से कम | 40-49.99 |
(ब) समावेशी विधि - इसमें निम्न सीमा व उच्च सीमा दोनों को उसी वर्ग में सम्मिलित कर लिया जाता है। इसमें दो बातों का ध्यान रखा जाता है
• किसी वर्गान्तर की ऊपरी सीमा उससे अगले वर्गान्तर की निचली सीमा के बराबर न हो ।
• इन दोनों में अधिकतम अन्तर 1 संख्या का हो।
समावेशी रीति का उदाहरण निम्नलिखित है
| प्राप्तांक | छात्रों की संख्या (आवृत्ति) |
|---|---|
| 0-9 | 11 |
| 10-19 | 9 |
| 20-29 | 15 |
| 30-39 | 25 |
| 40-49 | 30 |
| 50-59 | 15 |
| 60-69 | 5 |
| योग | 110 |
समावेशी वर्गान्तरों को अपवर्जी वर्गान्तर में बदलना – यदि वर्गान्तर समावेशी हैं, तो उन्हें तुरन्त अपवर्जी वर्गान्तरों में बदल देना चाहिए। इसका नियम यह है कि एक वर्ग की उच्च सीमा तथा अगले वर्ग की निम्न सीमा के अन्तर का आधा करके उसे निचली सीमा में से घटा दिया जाता है और ऊपरी सीमा में जोड़ दिया जाता है। उपर्युक्त उदाहरण के आधार पर
| समावेशी वर्गान्तर | अपवर्जी वर्गान्तर |
|---|---|
| 0-9 | 0-9.5 |
| 10-19 | 9.5-19.5 |
| 20-29 | 19.5-29.5 |
| 30-39 | 29.5-39.5 |
| 40-49 | 39.5-49.5 |
| 50-59 | 49.5-59.5 |
| 60-69 | 59.5-69.5 |
In simple words: अपवर्जी विधि में ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा होती है, जबकि समावेशी विधि में ऊपरी सीमा उसी वर्ग में शामिल होती है। समावेशी को अपवर्जी में बदलने के लिए, वर्ग सीमाओं के बीच के अंतर का आधा करके उसे निचली सीमा से घटाया और ऊपरी सीमा में जोड़ा जाता है।
🎯 Exam Tip: अपवर्जी और समावेशी विधियों की परिभाषाओं, उनके उदाहरणों और समावेशी वर्गान्तर को अपवर्जी में बदलने की विधि को स्पष्ट रूप से समझें और उसका अभ्यास करें, क्योंकि यह गणनात्मक सांख्यिकी में महत्वपूर्ण है।
Question 5. चर किसे कहते हैं? चर के प्रकार बताते हुए चर तथा गुण के बीच अन्तर लिखिए।
Answer: चर की अवधारणा
किसी तथ्य की वह विशेषता या प्रक्रिया जिसे संख्याओं के रूप में मापा जा सकता है चर कहलाती है। चर से अभिप्राय उस मात्रा से है जिसमें परिवर्तन होते रहते हैं तथा जिन्हें किसी इकाई द्वारा मापा जा सकता है। यदि किसी कक्षा के विद्यार्थियों के वजन को मापते हैं तो विद्यार्थियों का वजन चर कहलाएगा। चर दो प्रकार के हो सकते हैं 1. खण्डित या विच्छिन्न चर - खण्डित चर वे चर हैं जिनके मूल्य पूर्णांकों के रूप में प्रकट किए जाते हैं अर्थात् जो एक निश्चित मात्रा में होते हैं भिन्नात्मक नहीं होते। इसके एक मूल्य से दूसरे मूल्य के बीच कुछ अन्तर पाया जाता है, इसीलिए इन्हें खण्डित कहा जाता है। उदाहरण के लिए किसी कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या 1, 2, 3, 10, 11, 15 या 20 हो सकती है परन्तु यह \(1\frac { 1 }{ 4 }\), \(1\frac { 1 }{ 2 }\), \(1\frac { 3 }{ 4 }\) या \(1\frac { 3 }{ 2 }\) नहीं हो सकती। अन्य शब्दों में खण्डित चर पूरे अंकों के रूप में बढ़ते हैं; जैसे - 1 या 2 या 3 या 4 । ये 1 से \(1\frac { 1 }{ 4 }\) या \(1\frac { 3 }{ 4 }\) अर्थात् निरन्तर धीरे-धीरे नहीं बढ़ते ।
2. अखण्डित या अविच्छिन्न चर - अखण्डित चर वे चर हैं जो निरन्तर धीरे-धीरे बढ़ते हैं। यह भिन्नात्मक होते हैं। इनका निश्चित सीमाओं के अन्तर्गत कोई भी मूल्य हो सकता है। इनके मूल्य से दूसरे मूल्य के मध्य कोई निश्चित अन्तर नहीं होता। उदाहरण के लिए विद्यार्थियों की ऊँचाई 5'1", 5'2", 5'3 \(\frac { 1 }{ 4 }\)", 5'4" हो सकती है।
खण्डित चर तथा अखण्डित चर में मुख्य अन्तर
खण्डित चर तथा अखण्डित चर में मुख्य अन्तर यह है कि खण्डित चर का मूल्य पूर्णांकों जैसे 2, 4, 6, 8 आदि के रूप में व्यक्त किया जाता है जबकि अखण्डित श्रृंखला के चर का मूल्य, भिन्नों के रूप में जैसे 2.4, 4.6 तथा 6.8 या 2-4, 4-6 आदि वर्गान्तरों के मूल्य के रूप में प्रकट किया जाता है।
चर तथा गुण के बीच अन्तर
सामान्य भाषा में, 'चर' पद से आशय ऐसी विशेषताओं से है जो परिवर्तनशील होती हैं। परन्तु सांख्यिकी में 'चर' का यह अर्थ नहीं होता। मनुष्य के बालों का रंग समय के साथ परिवर्तित होता है। क्या यह एक चर है? नहीं, यह चर नहीं है क्योंकि बालों में होने वाले परिवर्तन का संख्याओं में वर्णन नहीं किया जा सकता। 'चर पद' का प्रयोग तभी किया जाता है जब ये परिवर्तनशील विशेषताएँ संख्याओं में मापी जा सकें ।
उदाहरण के लिए वर्ष 2016 में दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों की औसत लम्बाई 56” थी जबकि पिछले वर्ष 5'5" थी । गुणात्मक परिवर्तन, उन परिवर्तनों को जिन्हें संख्यात्मक रूप में नहीं मापा जा सकता, उन्हें गुण कहा जाता है। उदाहरण के लिए दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों की बुद्धिमत्ता में परिवर्तन । गुणात्मक परिवर्तन का गुणों की कोटियों के आधार पर वर्गीकरण कर सकते हैं; जैसे-प्रथम, द्वितीय, तृतीय। जहाँ 'प्रथम' का अर्थ है अति उत्तम, 'द्वितीय' का अर्थ है उत्तम तथा 'तृतीय' का अर्थ है अच्छा ।
In simple words: एक 'चर' वह विशेषता या प्रक्रिया है जिसे संख्याओं में मापा जा सकता है और जो बदलती रहती है, जैसे विद्यार्थियों का वजन। यह दो प्रकार का होता है: 'खण्डित चर' जिसके मान पूर्णांक में होते हैं (जैसे 1, 2, 3), और 'अखण्डित चर' जिसके मान धीरे-धीरे बढ़ते हैं और भिन्नात्मक भी हो सकते हैं (जैसे ऊँचाई 5'1", 5'2")। 'गुण' वे विशेषताएँ होती हैं जिन्हें संख्यात्मक रूप में नहीं मापा जा सकता, जैसे बुद्धिमत्ता या बालों का रंग।
🎯 Exam Tip: चर और गुण के बीच के अन्तर को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सांख्यिकी में डेटा वर्गीकरण की एक मूलभूत अवधारणा है।
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