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Detailed Chapter 6 सिटिज़नशिप UP Board Solutions for Class 11 Civics
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Class 11 Civics Chapter 6 सिटिज़नशिप UP Board Solutions PDF
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता के रूप में नागरिकता में अधिकार और दायित्व दोनों शामिल हैं। समकालीन लोकतान्त्रिक राज्यों में नागरिक किन अधिकारों के उपभोग की अपेक्षा कर सकते हैं? नागरिकों के राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति क्या
दायित्व हैं?
Answer: समकालीन विश्व में राष्ट्रों ने अपने सदस्यों को एक सामूहिक राजनीतिक पहचान के साथ-साथ कुछ अधिकार भी प्रदान किए हैं। नागरिकों को प्रदत्त अधिकारों की सुस्पष्ट प्रकृति विभिन्न राष्ट्रों में भिन्न-भिन्न हो सकती है, लेकिन अधिकतर लोकतान्त्रिक देशों ने आज उनमें कुछ राजनीतिक अधिकार शामिल किए हैं। उदाहरणस्वरूप, मतदान अभिव्यक्ति या आस्था की आजादी जैसे नागरिक अधिकार और न्यूनतम मजदूरी या शिक्षा पाने से जुड़े कुछ सामाजिक-आर्थिक अधिकार अधिकारों और प्रतिष्ठा की समानता नागरिकता के बुनियादी अधिकारों में से एक है।
In simple words: Citizenship in modern democracies involves both rights (like voting, expression, social-economic benefits) and responsibilities towards the state and fellow citizens. Nations grant various rights, but the fundamental idea is equal rights and dignity for all citizens.
🎯 Exam Tip: Emphasize the dual nature of citizenship-rights and duties-and illustrate with contemporary examples for a comprehensive answer.
Question 2. सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए तो जा सकते हैं लेकिन हो सकता है कि वे इन अधिकारों का प्रयोग समानता से न कर सकें। इस कथन की व्याख्या कीजिए ।
Answer: सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर देने पर विचार करना और सुनिश्चित करना किसी सरकार के लिए सरल नहीं होता । विभिन्न समूह के लोगों की आवश्यकताएँ और समस्याएँ अलग-अलग हो सकती हैं और एक समूह के अधिकार दूसरे समूह के अधिकारों के प्रतिकूल हो सकते हैं। नागरिकों के लिए समान अधिकार का आशय यह नहीं होता कि सभी लोगों पर समान नीतियाँ लागू की दी जाएँ, क्योंकि विभिन्न समूह के लोगों की आवश्यकताएँ भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। अगर उद्देश्य केवल ऐसी नीति बनाना नहीं है जो सभी लोगों पर एक तरह से लागू हों बल्कि लोगों को अधिक बराबरी पर लाना है तो नीतियों का निर्माण करते समय विभिन्न आवश्यकताओं और दावों का ध्यान रखना होगा।
In simple words: While equal rights can be granted, achieving true equality in their exercise is complex because different groups have varying needs and sometimes conflicting interests. Policies must consider these diverse requirements to truly bring people to a more equal footing, rather than imposing a one-size-fits-all approach.
🎯 Exam Tip: When discussing equality, highlight the difference between 'formal equality' (equal rights on paper) and 'substantive equality' (equal outcomes and opportunities), and explain how diverse needs complicate the latter.
Question 3. भारत में नागरिक अधिकारों के लिए हाल के वर्षों में किए गए किन्हीं दो संघर्षों पर टिप्पणी लिखिए। इन संघर्षों में किन अधिकारों की मॉग की गई थी?
Answer:झोपड़पट्टी वाली का आन्दोलन – भारत के प्रत्येक शहर में एक बड़ी जनसंख्या झोपड़पट्टियों और अवैध कब्जे की जमीन पर बसे लोगों की हैं। यद्यपि ये लोग अपरिहार्य और उपयोगी काम अक्सर कम मजदूरी पर करते हैं फिर भी शहर की शेष
जनसंख्या उन्हें अवांछनीय अतिथि के रूप में देखती है। उन पर शहर के संसाधनों पर बोझ बनने या अपराध करने का आरोप लगाया जाता हैं।
गन्दी बस्तियों की दशा अत्यन्त दयनीय होती है। छोटे-छोटे कमरों में बहुत-से लोग हुँसे रहते हैं। यहाँ न निजी शौचालय होता है, न जलापूर्ति और न सफाई व्यवस्था । गन्दी बस्तियों में जीवन और सम्पत्ति असुरक्षित होते हैं। झोपड़ी-पट्टियों के निवासी अपने श्रम से अर्थव्यव्सथा में महत्त्वपूर्ण योगदान करते हैं। अन्य व्यवसायों के बीच ये फेरीवाले, छोटे व्यापारी, सफाई कर्मी या घरेलू नौकर, नल ठीक करने वाले या मिस्त्री होते हैं। झोपड़-पट्टियों में बेत-बुनाई या कपड़ा-हँगाई-छपाई या सिलाई जैसे छोटे व्यवसाय भी चलते हैं।
झोपड़-पटिटय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित हो रही हैं। उन्होंने इसके लिए आन्दोलन भी चलाए और अदालतों में दस्तक भी दी है। उनके लिए वोट देने जैसे बुनियादी राजनीतिक अधिकार का प्रयोग करना भी कठिन हो जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने मुम्बई की झोपड़-पट्टियों में रहने वालों के अधिकारों के बारे में समाजकर्मी ओल्गा टेलिस की जनहित याचिका (ओल्गा टेलिस बनाम बम्बई नगर निगम) पर 1985 में एक महत्त्वपूर्ण निर्णय दिया। याचिका में कार्यस्थल के निकट रहने की वैकल्पिक जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण फुटपाथ या झोपड़-पट्टियों में रहने के अधिकार का दावा किया गया था। अगर यहाँ रहने वालों को हटने के लिए मजबूर किया गया तो उन्हें आजीविका भी गंवानी पड़ेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान की धारा 21 में जीने के अधिकार की गारण्टी दी है, जिसमें आजीविका का अधिकार शामिल है। इसलिए अगर फुटपाथवासियों को बेदखल करना हो तो उन्हें आश्रय के अधिकार के अन्तर्गत पहले वैकल्पिक जगह उपलब्ध करानी होगी।
टिहरी विस्थापितों का आन्दोलन – टिहरी गढ़वाल में टिहरी बाँध के बनने से टिहरी शहर डूब गया। इसके विस्थापितों के लिए सरकार ने जो व्यवस्थाएँ की थीं वे अपर्याप्त थीं। उचित मुआवजे की माँग और उचित आवास की माँग ने जीने के अधिकार का रूप धारण कर लिया। एक बड़ा आन्दोलन चला। अन्तत: सरकार ने सभी को उनके अधिकारों के अन्तर्गत राहत प्रदान की।
In simple words: Two notable struggles for civil rights in India are the slum dwellers' movement (demanding rights to shelter and livelihood, as enshrined in Article 21 of the Constitution) and the Tehri Dam displacement movement (seeking adequate rehabilitation and compensation for those displaced, which also relates to the right to life). Both highlight the fight for basic human rights for marginalized communities.
🎯 Exam Tip: Focus on linking specific movements to the fundamental rights they sought to uphold (e.g., right to life, livelihood, and dignified rehabilitation) to demonstrate a clear understanding.
Question 4. शरणार्थियों की समस्याएँ क्या हैं? वैश्विक नागरिकता की अवधारणा किस प्रकार उनकी सहायता कर सकती है?
Answer: जब हम शरणार्थियों या अवैध अप्रवासियों के विषय में सोचते हैं तो मन में अनेक छवियाँ उभरती हैं। उसमें एशिया या अफ्रीका के ऐसे लोगों की छवि हो सकती है जिन्होंने यूरोप या अमेरिका में चोरी-छिपे घुसने के लिए दलाल को पैसे का भुगतान किया हो। इसमें जोखिम बहुत है लेकिन वे प्रयास में तत्पर दिखते हैं। एक अन्य छवि युद्ध या अकाल से विस्थापित लोगों की हो सकती है। इस प्रकार के बहुत से दृश्य हमें दूरदर्शन पर दिखाई दे जाते हैं। सूडान डरफर क्षेत्र के शरणार्थी, फिलीस्तीनी, बर्मी या बंगलादेशी शरणार्थी जैसे कई उदाहरण हैं। ये सभी ऐसे लोग हैं जो अपने ही देश या पड़ोसी देश में शरणार्थी बनने के लिए मजबूर किए गए हैं।
हम यह मान लेते हैं कि किसी देश की पूर्ण सदस्यता उन सबको उपलब्ध होनी चाहिए, जो सामान्यतया उस देश में रहते और काम करते हैं या जो नागरिकता के लिए आवेदन करते हैं। वैसे अनेक देश वैश्विक और समावेशी नागरिकता को समर्थन करते हैं लेकिन नागरिकता देने की शर्ते भी निर्धारित करते हैं। ये शर्ते साधारणतया देश के संविधान और कानूनों में लिखी होती हैं। अवांछित आगंतुकों को नागरिकता से बाहर रखने के लिए राज्य सत्ताएँ शक्ति का प्रयोग करती हैं।
अनेक प्रतिबन्ध, दीवार और बाड़ लगाने के बाद आज भी दुनिया में बड़े पैमाने पर लोगों का देशान्तरण होता है। अगर कोई देश स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होता और वे घर नहीं लौट सकते तो वे राज्यविहीन और शरणार्थी हो जाते हैं। वे शिविरों में या अवैध प्रवासी के रूप में रहने के लिए विवश किए जाते हैं। अक्सर वे कानूनी रूप से काम नहीं कर सकते या अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा नहीं सकते या सम्पत्ति अर्जित नहीं कर सकते। शरणार्थियों की समस्या इतनी गम्भीर है कि संयुक्त राष्ट्र ने शरणार्थियों की जाँच करने और सहायता करने के लिए उच्चायुक्त नियुक्त किया हुआ है।
विश्व नागरिकता की अवधारणा अभी साकार नहीं हुई है। फिर भी इसके आकर्षणों में से एक यह है कि इससे राष्ट्रीय सीमाओं के दोनों ओर की उन समस्याओं का मुकाबला करना सरल हो सकता है। जिसमें कई देशों की सरकारों और लोगों की संयुक्त कार्यवाही आवश्यक होती है। इससे शरणार्थियों की समस्या का सर्वमान्य समाधान पाना सरल हो सकता है या कम-से-कम उनके बुनियादी अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है चाहे वे किसी भी देश में रहते हों।
In simple words: Refugees face problems like statelessness, lack of basic rights (work, education, property), and living in precarious conditions due to forced displacement. The concept of global citizenship could help by fostering international cooperation to resolve these issues, ensuring basic rights and security for refugees regardless of their location, and transcending national boundaries to address shared humanitarian challenges more effectively.
🎯 Exam Tip: When discussing refugees, emphasize the humanitarian aspect and the lack of basic rights, and for global citizenship, highlight its potential for collective action and ensuring universal human rights.
Question 5. देश के अन्दर एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में लोगों के आप्रवासन का आमतौर पर स्थानीय लोग विरोध करते हैं। प्रवासी लोग स्थानीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान दे सकते हैं?
Answer: प्रवासी लोग अपने श्रम से अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान करते हैं। अन्य व्यवसायों के बीच ये प्रवासी फेरीवाले, छोटे व्यापारी, सफाईकर्मी या घरेलू नौकर, नल ठीक करने वाले या मिस्त्री होते हैं। प्रवासी लोग अपने रहने के स्थान पर बेत-बुनाई या कपड़ा-हँगाई-छपाई, कपड़ों की सिलाई जैसे छोटे कारोबार भी चलाते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रवासी मजदूरों के बिना शहरी मध्यमवर्ग के जीवन का एक दिन दिखाता है, जिसमें विभिन्न दैनिक कार्यों जैसे खाना बनाना, बच्चों को स्कूल पहुँचाना, कूड़ा फेंकना, आया का काम करना, सामान उठाना, कार धोना, झाड़ू-पोंछा करना और बर्तन साफ करना इत्यादि के लिए प्रवासी कामगारों की अनुपस्थिति से होने वाली कठिनाइयों को दर्शाया गया है। यह स्पष्ट करता है कि यदि प्रवासी लोग शहर से चले जाएँ तो शहरी जीवन के ये सभी कार्य स्वयं करने पड़ेंगे।
In simple words: Migrants contribute significantly to the local economy by filling various labor-intensive roles, such as street vendors, small traders, sanitation workers, domestic helpers, plumbers, electricians, and running small businesses like weaving, dyeing, printing, and tailoring. Their labor supports many essential services and industries.
🎯 Exam Tip: Focus on specific, tangible examples of economic contributions (e.g., labor in various service sectors) to illustrate the essential role of migrant workers in the local economy.
Question 6. भारत जैसे समान नागरिकता देने वाले देशों में भी लोकतान्त्रिक नागरिकता एक पूर्ण स्थापित तथ्य नहीं वरन एक परियोजना है। नागरिकता से जुड़े उन मुद्दों की चर्चा कीजिए जो आजकल भारत में उठाये जा रहे हैं?
Answer: भारत स्वयं को धर्मनिरपेक्ष और लोकतान्त्रिक राष्ट्र राज्य कहता है। स्वतन्त्रता आन्दोलन का आधार व्यापक था और विभिन्न धर्म, क्षेत्र और संस्कृति के लोगों को आपस में जोड़ने के कृत संकल्प प्रयास किए गए। यह सही है कि जब मुस्लिम
लीग से विवाद नहीं सुलझाया जा सका, तब 1947 ई० में देश का विभाजन हुआ। लेकिन इसने उस राष्ट्र राज्य के धर्मनिरपेक्ष ओर समावेशी चरित्र को बनाए रखने के भारतीय राष्ट्रीय नेताओं के निश्चय को और सुदृढ़ ही किया जिसके निर्माण के लिए वे प्रतिबद्ध थे। यह निश्चय संविधान में सम्मिलित किया गया।
भारतीय संविधान ने बहुत ही विविधतापूर्ण समाज को समायोजित करने का प्रयास किया है। इन विविधताओं में से कुछ उल्लेखनीय हैं- इसने अनुसूचित्र जाति और अनुसूचित जनजाति जैसे भिन्न-भिन्न समुदायों, पूर्व में समान अधिकार से वंचित रही महिलाएँ, आधुनिक सभ्यता के साथ मामूली सम्पर्क रखने वाले अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के कुछ सुदूरवर्ती समुदायों और कई अन्य समुदायों को पूर्ण और समान नागरिकता देने का प्रयास किया। इसने देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित विभिन्न भाषाओं, धर्म और रिवाजों की पहचान बनाए रखने का प्रयास किया। इसे लागों को उनकी निजी आस्था, भाषा या सांस्कृतिक रिवाजों को छोड़ने के लिए बाध्य किए बिना सभी को समान अधिकार उपलब्ध कराना था। संविधान के जरिए आरम्भ किया गया यह अद्वितीय प्रयोग था दिल्ली में गणतन्त्र दिवस परेड में विभिन्न क्षेत्र, संस्कृति और धर्म के लोगों को सम्मिलित करने के राजसत्ता के प्रयास को प्रतिबिम्बित करता है।
नागरिकता से सम्बन्धित प्रावधानों का उल्लेख संविधान के तीसरे भाग और संसद द्वारा बाद में पारित कानूनों में हुआ है। संविधान ने नागरिकता की लोकतान्त्रिक और समावेशी धारणा को अपनाया है। भारत में जन्म, वंश परम्परा, पंजीकरण, देशीकरण या किसी भू-क्षेत्र के राज क्षेत्र शामिल होने से नागरिकता प्राप्त की जा सकती है। संविधान में नागरिकों के अधिकार और दायित्वों का उल्लेख है। यह प्रावधान भी है कि राज्य को नस्ल/जाति/लिंग/जन्मस्थल में से किसी भी आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों को भी संरक्षित किया गया है। इस प्रकार के समावेशी प्रवाधानों ने संघर्ष और विवादों को जन्म दिया है। महिला आन्दोलन, दलित आन्दोलन या विकास योजनाओं से विस्थापित लोगों का संघर्ष ऐसे लोगों द्वारा चलाए जा रहे संघर्षों के कुछ उदाहरण हैं, जो मानते हैं कि उनकी नागरिकता को पूर्ण अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। भारत के अनुभवों से संकेत प्राप्त होते हैं कि किसी देश में लोकतान्त्रिक नागरिकता एक परियोजना या लक्ष्यसिद्धि का एक आदर्श है। जैसे-जैसे समाज बदल रहे हैं, वैसे-वैसे नित-नए मुद्दे भी समाने आ रहे हैं।
In simple words: Democratic citizenship in India, despite its constitutional ideals of secularism and inclusivity, remains an ongoing project due to its diverse society. Issues arise from various social movements (women's, Dalit, displaced persons) claiming their citizenship rights are incomplete, and new challenges emerge as society evolves, often concerning equal rights and non-discrimination.
🎯 Exam Tip: Focus on the concept of 'citizenship as a project' rather than a 'settled fact', illustrating how ongoing social movements continue to shape and challenge the realization of full democratic rights in India.
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
Question 1. 'कर्तव्य के उचित क्रम-निर्धारण का नाम ही नागरिकता है।' यह कथन किसका है।
(क) ए० के० सीयू को
(ख) सुकरात का
(ग) प्लेटो का
(घ) डॉ० विलियम बॉयड का
Answer: (घ) डॉ० विलियम बॉयड का।
In simple words: This statement, attributed to Dr. William Boyd, suggests that citizenship is fundamentally about correctly prioritizing and fulfilling one's duties.
🎯 Exam Tip: For quote-based questions, remember the key phrase and the associated author. This specific quote links citizenship directly to the concept of duty fulfillment.
Question 2. निम्नलिखित में से नागरिक का सामाजिक अधिकार चुनिए
(क) मताधिकार
(ख) शिक्षा का अधिकार
(ग) चुनाव लड़ने का अधिकार
(घ) न्याय प्राप्त करने का अधिकार
Answer: (ख) शिक्षा का अधिकार ।
In simple words: Among the given options, the right to education is considered a social right, as it pertains to an individual's well-being and participation in society, rather than directly in governance.
🎯 Exam Tip: Differentiate between political rights (like voting, contesting elections, justice) and social rights (like education, health, welfare) to correctly identify the category.
Question 3. निम्नांकित में कौन विदेशी है?
(क) राजनीतिक अधिकार प्राप्त
(ख) सैनिक
(ग) राजदूत
(घ) राज्य का सदस्य
Answer: (ग) राजदूत ।
In simple words: A diplomat, specifically an ambassador (राजदूत), represents their own country in a foreign land and is therefore considered a foreign national, not a citizen of the host country.
🎯 Exam Tip: Remember that a diplomat, despite residing in a foreign country, retains citizenship of their home country and enjoys special status, making them a foreign national.
Question 4. किन देशों में सम्पत्ति खरीदने पर वहाँ की नागरिकता प्राप्त हो जाती है?
(क) भारत
(ख) बांग्लादेश
(ग) दक्षिणी अमेरिका के कुछ देश
(घ) पाकिस्तान
Answer: (ग) दक्षिणी अमेरिका के कुछ देश ।
In simple words: In some South American countries, purchasing property can be a pathway to obtaining citizenship.
🎯 Exam Tip: Be aware that citizenship acquisition rules vary significantly by country; some nations offer specific incentives like property ownership for naturalization.
Question 5. आदर्श नागरिकता का तत्त्व नहीं है
(क) कर्तव्यपरायणता
(ख) जागरूकता
(ग) शिक्षा
(घ) साम्प्रदायिकता
Answer: (घ) साम्प्रदायिकता।
In simple words: Communalism (साम्प्रदायिकता) promotes division and hostility based on religious or ethnic identity, which is antithetical to the unity and inclusive spirit required for ideal citizenship.
🎯 Exam Tip: Ideal citizenship fosters unity, responsibility, and informed participation; anything that promotes division (like communalism) is a clear impediment.
Question 6. “शिक्षा, जो आत्मा का भोजन है, स्वस्थ नागरिकता की प्रथम शर्त है।” यह कथन किसका है?
(क) अब्राहम लिंकन का
(ख) सुकरात का
(ग) बाल गंगाधर तिलक को
(घ) महात्मा गांधी का
Answer: (घ) महात्मा गांधी का ।
In simple words: Mahatma Gandhi stated that education is the primary condition for healthy citizenship, likening it to food for the soul.
🎯 Exam Tip: Recognizing important quotes and their authors is crucial. This quote highlights Gandhi's emphasis on education as a foundation for responsible citizenship.
Question 7. आदर्श नागरिक के मार्ग में बाधा है
(क) अशिक्षा व अज्ञानता
(ख) अच्छा स्वास्थ्य
(ग) संयुक्त परिवार
(घ) निर्धन मित्र
Answer: (क) अशिक्षा व अज्ञानता।
In simple words: Lack of education and knowledge (अशिक्षा व अज्ञानता) are significant obstacles to ideal citizenship, as they hinder individuals from understanding their rights and responsibilities, and making informed decisions.
🎯 Exam Tip: Ignorance and illiteracy are fundamental barriers to effective participation and understanding, which are core to ideal citizenship.
Question 8. आदर्श नागरिक का गुण नहीं है
(क) सच्चरित्रता
(ख) आत्म-संयम
(ग) उग्र-राष्ट्रीयता
(घ) अधिकार-कर्तव्य का ज्ञान
Answer: (ग) उग्र-राष्ट्रीयता।
In simple words: Aggressive nationalism (उग्र-राष्ट्रीयता) is not a quality of an ideal citizen because it promotes hostility towards other nations and can lead to conflict, rather than fostering cooperation and universal human values.
🎯 Exam Tip: Ideal citizenship values balance and respect for all; extreme ideologies like aggressive nationalism contradict these principles.
Question 9. आदर्श नागरिकता के मार्ग में बाधा नहीं है
(क) साम्प्रदायिकता
(ख) अशिक्षा
(ग) निर्धनता
(घ) राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना
Answer: (घ) राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना ।
In simple words: Respect for the nation (राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना) is a positive attribute that strengthens citizenship, whereas communalism, illiteracy, and poverty are all obstacles to it.
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between constructive national pride and destructive nationalism. Respect for the nation is a positive trait that contributes to civic virtue.
Question 10. निम्नलिखित में से कौन-सा तत्त्व आदर्श नागरिकता के मार्ग में बाधक नहीं है।
(क) निर्धनता
(ख) अनुशासन
(ग) अशिक्षा
(घ) स्वार्थपरता
Answer: (ख) अनुशासन।
In simple words: Discipline (अनुशासन) is a supportive element for ideal citizenship, promoting order and responsible behavior, while poverty, illiteracy, and selfishness are hindrances.
🎯 Exam Tip: Identify qualities that promote civic virtue. Discipline helps maintain social order and individual responsibility, making it a positive factor for ideal citizenship.
Question 11. किसी राज्य में निवास करने वाले विदेशी के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(क) वह राज्य में भूमि का क्रय नहीं कर सकता
(ख) उसकी जान-माल की सुरक्षा के लिए राज्य उत्तरदायी नहीं है।
(ग) राज्य उसे अल्पकाल के लिए निवास करने की अनुमति दे सकता है।
(घ) वह अपने राज्य के प्रति निष्ठा रखता है।
Answer: (ख) उसकी जान-माल की सुरक्षा के लिए राज्य उत्तरदायी नहीं है।
In simple words: The statement that the state is not responsible for the life and property of a resident foreigner is incorrect. Every state has a fundamental responsibility to protect all individuals within its borders, including foreigners.
🎯 Exam Tip: Understand the basic obligations of a state towards all individuals present on its territory, including foreigners, especially concerning their safety and security.
Question 12. किसी देश में विदेशी को निम्नलिखित में से कौन-से अधिकार प्राप्त नहीं हैं ?
(क) राजनीतिक अधिकार
(ख) सामाजिक अधिकार
(ग) धार्मिक अधिकार
(घ) व्यापारिक अधिकार
Answer: (क) राजनीतिक अधिकार ।
In simple words: Foreigners residing in a country typically do not possess political rights, such as voting or holding public office, which are usually reserved for citizens.
🎯 Exam Tip: Differentiate between political rights (exclusive to citizens) and other universal human rights (like social, religious, and economic rights) that are generally extended to foreigners.
Question 13. आदर्श नागरिकता के मार्ग में प्रमुख बाधा क्या है ?
(क) औद्योगीकरण
(ख) शहरीकरण
(ग) साक्षरता
(घ) निर्धनता
Answer: (घ) निर्धनता ।
In simple words: Poverty (निर्धनता) is a major obstacle to ideal citizenship because it limits access to basic necessities, education, and opportunities, making it difficult for individuals to fully participate and contribute to society.
🎯 Exam Tip: Connect economic hardship directly to its impact on an individual's ability to engage fully and meaningfully as a citizen, highlighting poverty as a systemic barrier.
Question 14. संसद में भारतीय नागरिकता अधिनियम कब पारित हुआ ?
(क) 1950 ई० में
(ख) 1952 ई० में
(ग) 1955 ई० में
(घ) 1960 ई० में
Answer: (ग) 1955 ई० में ।
In simple words: The Indian Citizenship Act, which governs the acquisition and loss of Indian citizenship, was passed by the Parliament in 1955.
🎯 Exam Tip: Remember key legislative dates. The year 1955 is significant for the enactment of the foundational Indian Citizenship Act.
Question 15. “दि फिलॉस्फी ऑफ सिटिजनशिप” नामक पुस्तक के लेखक हैं
(क) एफ० जी० गोल्ड
(ख) अल्फ्रेड जे० शॉ
(ग) डॉ० ई० एम० ह्वाइट
(घ) वार्ड
Answer: (ग) डॉ० ई० एम० ह्वाइट ।
In simple words: The book "The Philosophy of Citizenship" was authored by Dr. E.M. White.
🎯 Exam Tip: For authors and their works, direct recall is essential. Link the title "The Philosophy of Citizenship" with Dr. E.M. White.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. नागरिकता प्राप्त करने के दो तरीके बताइए ।
या नागरिकता प्राप्त होने की कोई दो स्थितियाँ बताइए।
Answer: 1. जन्म द्वारा तथा 2. देशीयकरण द्वारा।
In simple words: Two common ways to acquire citizenship are by birth (jus soli or jus sanguinis) and through naturalization, where a person applies to become a citizen after fulfilling specific requirements.
🎯 Exam Tip: The two primary methods, birth and naturalization, are fundamental to understanding citizenship acquisition. Mentioning both is key.
Question 2. भारत में नागरिकता के लोप होने के कोई दो कारण लिखिए ।
या नागरिकता खोने के दो आधार बताइए ।
Answer:1. विदेश में सरकारी नौकरी करने पर तथा
2. सेना से भागने पर ।
In simple words: In India, citizenship can be lost if a person takes up government service in a foreign country without permission or if a person deserts the armed forces, demonstrating a lack of loyalty to the nation.
🎯 Exam Tip: Focus on actions that demonstrate a clear severance of loyalty or allegiance to the state, such as unauthorized foreign service or military desertion, as causes for losing citizenship.
Question 3. आदर्श नागरिक के विषय में लॉर्ड ब्राइस की परिभाषा लिखिए।
Answer: “एक लोकतन्त्रीय (आदर्श) नागरिक में बुद्धि, आत्म-संयम तथा उत्तरदायित्व होना चाहिए।'
In simple words: Lord Bryce defined an ideal democratic citizen as someone possessing intelligence, self-control, and a strong sense of responsibility.
🎯 Exam Tip: When quoting, ensure accuracy of the quote and attribution. Bryce's definition emphasizes key virtues for democratic participation.
Question 4. कोई दो स्थितियाँ बताइए जिनमें केन्द्रीय सरकार नागरिक की नागरिकता समाप्त कर | सकती है।
या एक भारतीय स्त्री की नागरिकता का लोप हो गया है। इसके दो सम्भावित कारणों का ।' उल्लेख कीजिए।
Answer:1. देशद्रोह करने पर तथा
2. लम्बे समय तक देश से अनुपस्थित रहने पर ।
In simple words: The central government can revoke a citizen's citizenship in cases of treason against the state or prolonged absence from the country without proper authorization, indicating a potential severance of ties.
🎯 Exam Tip: Highlight grave offenses (treason) or significant disengagement (prolonged absence) as reasons for citizenship revocation by the state.
Question 5. आदर्श नागरिकता के चार तत्त्व बताइए।
Answer: आदर्श नागरिकता के चार तत्त्व हैं-
1. कर्तव्यपरायणता,
2. प्रगतिशीलता,
3. व्यापक दृष्टिकोण तथा
4. जागरूकता ।
In simple words: Four elements of ideal citizenship are dutifulness, progressiveness, a broad perspective, and awareness, all contributing to a responsible and engaged member of society.
🎯 Exam Tip: List a balanced set of traits covering both personal responsibility and an outward-looking, informed engagement with society.
Question 6. भारतीय संविधान में समस्त नागरिकों के लिए कैसी नागरिकता की व्यवस्था की गयी है?
Answer: भारतीय संविधान में समस्त नागरिकों के लिए इकहरी नागरिकता की व्यवस्था की गयी है।
In simple words: The Indian Constitution provides for single citizenship for all its citizens, meaning individuals are citizens of India, not of individual states within the country.
🎯 Exam Tip: Mentioning 'single citizenship' (इकहरी नागरिकता) is the direct and correct answer for India's constitutional provision.
Question 7. नागरिक के दो प्रमुख कर्तव्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: नागरिक के दो प्रमुख कर्तव्य हैं-
1. राज्य के प्रति भक्ति एवं
2. राज्य के कानूनों का पालन करना।
In simple words: Two main duties of a citizen include loyalty and allegiance to the state, and abiding by the laws and regulations enacted by the government.
🎯 Exam Tip: Loyalty and law-abiding behavior are universal and fundamental duties of any citizen, making them excellent choices for this question.
Question 8. विदेशी किसे कहते हैं ?
Answer: विदेशी वह व्यक्ति है जो अपना देश छोड़कर किसी कारणवश अन्य देश में रहने लगा हो। उसे उस देश के सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं, राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते।
In simple words: A foreigner is someone who has left their home country to reside in another for various reasons; they typically enjoy social rights in the host country but not political rights.
🎯 Exam Tip: Define a foreigner by their non-native status and highlight the crucial distinction that they generally lack political rights in the host country.
Question 9. विदेशियों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: विदेशियों को तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-
1. स्थायी विदेशी,
2. अस्थायी विदेशी तथा
3. राजदूत ।
In simple words: Foreigners can broadly be classified into three types: permanent foreigners (those intending to settle), temporary foreigners (visitors for specific, short-term purposes), and diplomats (ambassadors and embassy staff).
🎯 Exam Tip: Provide clear categories with brief explanations of each, focusing on their duration of stay and specific roles, as in the case of diplomats.
Question 10. आदर्श नागरिकता के मार्ग में सहायक दो प्रमुख तत्त्व बताइए ।
Answer: आदर्श नागरिकता के मार्ग में सहायक दो प्रमुख तत्त्व हैं-
1. स्वतन्त्र प्रेस तथा
2. स्वस्थ राजनीतिक दल ।
In simple words: Two key factors aiding ideal citizenship are a free press, which informs citizens, and healthy political parties, which provide avenues for participation and representation.
🎯 Exam Tip: Focus on institutions that empower and enable informed and active citizen participation in a democracy.
Question 11. “शिक्षा श्रेष्ठ नागरिक जीवन के वृत्त-खण्ड की आधारशिला है।” यह कथन किस विद्वान् का है ?
Answer: यह कथन डॉ० बेनी प्रसाद नामक विद्वान् का है।
In simple words: The statement, "Education is the cornerstone of a superior civic life," is attributed to the scholar Dr. Beni Prasad.
🎯 Exam Tip: Accurately recall the author of significant quotes related to civics or political science.
Question 12. नागरिकों के कौन-से दो मुख्य प्रकार होते हैं ?
Answer: नागरिकों के दो मुख्य प्रकार हैं-
1. जन्मजात नागरिक तथा
2. देशीयकरण से नागरिकता प्राप्त नागरिक ।
In simple words: The two primary types of citizens are natural-born citizens (who acquire citizenship at birth) and naturalized citizens (who acquire it later through a legal process).
🎯 Exam Tip: Differentiate between the two fundamental ways citizenship is acquired: by birth (inherent) and by naturalization (acquired through process).
Question 13. भारत में नागरिकता अधिनियम कब बनाया गया?
Answer: भारत में नागरिकता अधिनियम 1955 ई० में बनाया गया ।
In simple words: The Citizenship Act in India, which regulates how citizenship is acquired and lost, was enacted in 1955.
🎯 Exam Tip: Knowing the year of key legislative acts is important. 1955 is the correct year for the Indian Citizenship Act.
Question 14. भारत का प्रथम नागरिक कौन है?
Answer: भारत का राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक माना जाता है।
In simple words: The President of India is considered the first citizen of India, holding the highest symbolic position in the country.
🎯 Exam Tip: The President of India, as the head of state, is traditionally recognized as the first citizen; remember this fundamental fact.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. नागरिक की विभिन्न परिभाषाओं का उल्लेख कीजिए।
Answer:'नागरिक' की परिभाषाएँ
प्राचीन यूनानी विचारक अरस्तु ने नागरिक की परिभाषा इन शब्दों में की थी, “एक नागरिक वह है, जिसने राज्य के शासन में कुछ भाग लिया हो और जो राज्य द्वारा प्रदान किए गए सम्मान का उपभोग कर सके ।”
भले ही तत्कालीन परिस्थितियों में अरस्तु की उपर्युक्त परिभाषा सटीक रही हो, लेकिन अरस्तू की यह परिभाषा आधुनिक काल में अपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि आज नगर-राज्यों का स्थान विशाल राज्यों ने ले लिया है। फलतः 'नागरिक' शब्द का अर्थ भी बहुत अधिक व्यापक हो गया है। आधुनिक विद्वानों ने 'नागरिक' शब्द की परिभाषा निम्नलिखित प्रकार से दी है ।
लॉस्की के अनुसार, “नागरिक केवल समाज का एक सदस्य ही नहीं है, वरन् वह कुछ कर्तव्यों का यान्त्रिक रूप से पालनकर्ता तथा आदेशों का बौद्धिक रूप से ग्रहणकर्ता भी है।”
गैटिल के अनुसार, “नागरिक समाज के वे सदस्य हैं, जो कुछ कर्तव्यों द्वारा समाज से बँधे रहते हैं, जो उसके प्रभुत्व को मानते हैं और उससे समान रूप से लाभ उठाते हैं।”
सीले के अनुसार, “नागरिक उस व्यक्ति को कहते हैं, जो राज्य के प्रति भक्ति रखता हो, उसे सामाजिक तथा राजनीतिक अधिकार प्राप्त हों और जन-सेवा की भावना से प्रेरित हो।”
In simple words: Definitions of a citizen have evolved; Aristotle saw a citizen as one participating in governance, while modern thinkers like Laski and Gettell emphasize duties, loyalty, and the exercise of social and political rights within a state. Seeley added the element of public service.
🎯 Exam Tip: When defining "citizen," provide a historical perspective (e.g., Aristotle) and then contrast it with modern definitions, highlighting the shift from mere participation to duties and broader rights.
Question 2. किसी देश के नागरिक को कितनी श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं? संक्षेप में वर्णन कीजिए ।
Answer: किसी देश के नागरिक को निम्नलिखित चार श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं
1. अल्प-वयस्क नागरिक- ये एक निश्चित आयु से कम आयु के व्यक्ति होते हैं। ऐसे नागरिकों को समस्त प्रकार के अधिकार प्राप्त होते हैं, लेकिन निर्धारित आयु के पूर्व वे अपने राजनीतिक अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते । भारत में 18 वर्ष की आयु से कम के व्यक्ति इस श्रेणी में आते हैं।
2. मताधिकार रहित वयस्क नागरिक- ये वे नागरिक होते हैं जो निर्धारित आयु पूर्ण करने के बाद । भी शारीरिक एवं मानसिक अयोग्यताओं के कारण मत देने के अधिकार से वंचित कर दिये जाते हैं। उदाहरणार्थ-कोढ़ी, पागल, दिवालिया व देशद्रोही इत्यादि । इन्हें सिर्फ सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं।
3. मताधिकार प्राप्त वयस्क नागरिक- इस श्रेणी में वे नागरिक आते हैं जो चारों शर्तों को पूरा करते हों, अर्थात् वे राज्य के सदस्य हों, उन्हें सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकार प्राप्त हों, उन्हें मताधिकार प्राप्त हो तथा उनमें राज्य के प्रति भक्ति-
प्रदर्शन की भावना हो।
4. देशीयकृत नागरिक- इस श्रेणी में वे नागरिक आते हैं जो पूर्व में किसी अन्य देश अथवा राज्य के नागरिक थे, लेकिन किसी देश में बहुत दिनों तक रहने एवं कुछ शर्तों को पूरा करने पर राज्य की ओर से उन्हें राजनीतिक एवं सामाजिक अधिकार दे दिये गये हों।
In simple words: Citizens can be categorized into four types: minors (possessing rights but not political ones until maturity), adults without voting rights (due to mental/physical incapacities or specific offenses), adult voters (who fulfill all conditions for full participation), and naturalized citizens (who acquired citizenship after being foreigners).
🎯 Exam Tip: Clearly delineate each category by their age, rights, and how they acquired citizenship, providing a brief example for each where applicable.
Question 3. 'विदेशी पर टिप्पणी लिखिए ।
Answer: विदेशी वह व्यक्ति है जो अस्थायी रूप से उस राज्य में निवास करता है जिसका वह सदस्य नहीं है। कोई भी व्यक्ति किसी देश में विदेशी उस समय कहा जा सकता है जब वह अल्पावधि हेतु किसी कार्यवश अपना देश छोड़कर दूसरे देश में रहने के लिए आया हो। कोई व्यक्ति व्यापार करने, शिक्षा प्राप्त करने अथवा घूमने के लिए दूसरे देश में आता है और जितने समय तक अपना देश छोड़कर बाहर रहता है, उतने समय तक उस राज्य में विदेशी कहा जाता है। उसे उस देश के राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते तथा न ही वह उस राज्य के प्रति भक्तिभाव रखता है। वह उस राज्य के प्रति भक्तिभाव रखता है जिसका वह सदस्य है। इस प्रकार विदेशी वह व्यक्ति है जो सिर्फ सामाजिक अधिकारों का उपयोग करता है। एक विदेशी को जीवन एवं सम्पत्ति की रक्षा एवं कुछ सामान्य सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं, लेकिन अन्य सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते। इन अधिकारों की प्राप्ति के बदले विदेशियों को सम्बन्धित देश के कानून का पूर्णतया पालन करना होता है।
In simple words: A foreigner is a non-citizen temporarily residing in a country for reasons like trade, education, or tourism. They do not possess political rights or allegiance to the host state but are entitled to protection of life and property, along with some social rights, provided they abide by the local laws.
🎯 Exam Tip: Emphasize the temporary nature of their stay, lack of political rights and allegiance to the host country, and their obligation to follow local laws while receiving basic protections.
Question 4. नागरिकता प्राप्त करने के सन्दर्भ में जन्म-स्थान के सिद्धान्त का विवरण दीजिए।
Answer: इस सिद्धान्त के अनुसार बालक की नागरिकता उसके जन्मस्थान के आधार पर निश्चित की जाती है। उदाहरणार्थ, यदि भारत के किसी नागरिक का बच्चा अर्जेण्टाइना की भूमि पर जन्म लेता है। तो वह बच्चा वहाँ का नागरिक माना जाएगा। लेकिन इसके विपरीत, यदि अर्जेण्टाइन के नागरिक का बच्चा भारत- भूमि पर अथवा अन्य किसी राज्य में जन्म लेता है तो वह स्वदेश की नागरिकता से वंचित रह जाएगा। यद्यपि यह सिद्धान्त अर्जेण्टाइना में प्रचलित है, लेकिन वहाँ की अपेक्षा यह इंग्लैण्ड में अधिक व्यापक है। वहाँ तो कोई बच्चा यदि इंग्लैण्ड के जहाज में भी पैदा होता है तो वह इंग्लैण्ड का नागरिक माना जाता है। इस सिद्धान्त का सबसे बड़ा दोष यह है कि कोई दम्पति विश्व-भ्रमण के लिए निकले तो हो सकता है। कि उसकी एक सन्तान जापान में हो, दूसरी भारत में तथा तीसरी संयुक्त राज्य अमेरिका में। ऐसी दशा में जन्म-स्थान नियम के अनुसार तीनों बच्चे अलग-अलग देशों के नागरिक होंगे तथा उन्हें अपने माता-पिता के देश की नागरिकता प्राप्त नहीं होगी ।
In simple words: The principle of jus soli (birthplace citizenship) grants citizenship based on where a child is born, regardless of parents' nationality. For example, a child born in Argentina is an Argentine citizen. However, a major flaw is that children of traveling parents might end up with different nationalities, lacking the citizenship of their parents' country.
🎯 Exam Tip: Clearly define 'jus soli' (citizenship by birthplace) and highlight its advantages (simplicity) and disadvantages (potential for multiple citizenships or statelessness for children of traveling parents).
Question 5. नागरिकता से आप क्या समझते हैं?
Answer:नागरिकता वह भावना है जो नागरिक में निवास करती है। यह भावना नागरिक में देशभक्ति को जाग्रत करती है और नागरिक को उसके कर्तव्य-पालन तथा उत्तरदायित्व निभाने के लिए सजग करती है। लॉस्की के कथनानुसार, “अपनी प्रशिक्षित बुद्धि को लोकहित के लिए प्रयोग करना ही नागरिकता, है।' गैटिल के विचारानुसार, “नागरिकता किसी व्यक्ति की उस स्थिति को कहते हैं, जिसके अनुसार वह अपने राज्य में सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकारों का उपभोग कर सकता है तथा कर्तव्यों का पालन करने के लिए तत्पर रहता है।”
विलियम बॉयड के अनुसार, “भक्ति भावना का उचित क्रम-निर्धारण ही नागरिकता है।” डॉ० आशीर्वादी लाल के अनुसार, नागरिकता केवल राजनीतिक कार्य ही नहीं, वरन् एक सामाजिक एवं नैतिक कर्तव्य भी है।” उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि नागरिक होने की दशा का नाम ही नागरिकता है। दूसरे शब्दों में, “जीवन की वह स्थिति,
जिसमें व्यक्ति किसी राज्य का सदस्य होने के नाते समस्त प्रकार के सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकारों का उपभोग करता है, 'नागरिकता (Citizenship) कहलाती है।”
In simple words: Citizenship is the status of being a full member of a state, entailing both social and political rights and duties towards that state. It encompasses a sense of belonging, patriotism, and the responsible exercise of one's intellect for the public good, as defined by scholars like Laski, Gettell, and Boyd.
🎯 Exam Tip: Combine the legal status with the moral and emotional dimensions. Include a few key definitions from political thinkers to strengthen your answer.
Question 6. स्थायी विदेशी तथा अस्थायी विदेशी में अन्तर बताइए ।
Answer:स्थायी विदेशी-ऐसे विदेशी जो अपना पूर्व देश छोड़कर किसी ऐसे देश में आ गये हों जहाँ वे स्थायी रूप से रहना चाहते हों तथा नागरिकता-प्राप्ति की शर्तों को पूरा कर रहे हों, स्थायी विदेशी कहलाते हैं। नागरिकता-प्राप्ति की प्रक्रिया द्वारा ये विदेशी उस देश के नागरिक बन जाते हैं। अस्थायी विदेशी–अस्थायी विदेशी विशेष कारण से अपना देश छोड़कर अल्पावधि हेतु दूसरे देश में आकर रहते हैं तथा अपना कार्य पूर्ण करके स्वदेश लौट जाते हैं। सामान्यतया इनका उद्देश्य शिक्षा, भ्रमण अथवा व्यापार होता है।
In simple words: A permanent foreigner intends to settle in a new country and often seeks citizenship, becoming a citizen through a legal process. An temporary foreigner, however, resides in a foreign country for a short duration for specific purposes like education, tourism, or business, with the intent to return to their home country.
🎯 Exam Tip: The key differentiator is 'intent of stay'-permanent for settlement and citizenship, temporary for short-term purposes with an eventual return.
Question 7. नागरिक तथा मतदाता में भेद बताइए ।
Answer: एक राज्य के अन्तर्गत नागरिक तथा मतदाता में भेद (अन्तर) होता है। एक राज्य के समस्त नागरिक मतदाता नहीं होते हैं। मतदाता कौन हो सकता है; यह राज्य के कानूनों द्वारा स्पष्ट किया जाता है। किसी भी देश के अन्तर्गत अवयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं होता है। इसके अलावा, कतिपय राज्यों में धर्म, सम्पत्ति, लिंग एवं शिक्षा के आधार पर भी कुछ नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाता है। किन्तु आधुनिक समय की प्रवृत्ति इस प्रकार के प्रतिबन्धों के प्रतिकूल है। संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, इंग्लैण्ड, पाकिस्तान, फ्रांस इत्यादि संसार के अधिकांश राज्यों में समस्त वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त है।
In simple words: While every voter is a citizen, not all citizens are voters. A citizen is a full member of the state with various rights and duties, whereas a voter is a citizen specifically endowed with the right to vote, usually after meeting criteria such as age, and not having any disqualifications.
🎯 Exam Tip: The core distinction is that citizenship is a broad status, while being a voter is a specific right within that status, subject to additional qualifications (age, mental capacity, etc.).
Question 8. नागरिकता की चार विशेषताएँ बताइए ।
Answer: नागरिकता की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. राज्य की सदस्यता- नागरिकता की सर्वप्रथम विशेषता राज्य की सदस्यता है।
2. सर्वव्यापकता- नागरिकता प्रत्येक उस व्यक्ति को प्राप्त होती है जो कि राज्य का निवासी हो, भले ही वह शहर में निवास करता हो अथवा किसी ग्राम में ।
3. राज्य के प्रति निष्ठा- नागरिकता में देशभक्ति का गुण होना परम आवश्यक है।
4. अधिकारों का प्रयोग- नागरिकता व्यक्ति को राज्य की तरफ से अधिकार प्रदान करती है।
In simple words: Four characteristics of citizenship are: being a member of the state, its universality for all residents (urban or rural), requiring loyalty and patriotism towards the state, and conferring various rights upon the individual by the state.
🎯 Exam Tip: Focus on the fundamental aspects: membership, universality within the state, allegiance, and the conferral of rights. These are comprehensive identifiers of citizenship.
Question 9. देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की चार शर्तें बताइए ।
या भारतीय नागरिकता को प्राप्त करने की दो शर्तें बताइए ।
Answer: देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की चार शर्ते निम्नलिखित हैं
1. विदेशी ऐसे राज्य का नागरिक न हो जहाँ भारतीयों पर वहाँ की नागरिकता ग्रहण करने पर प्रतिबन्ध लगाया गया हो।
2. वह प्रार्थना-पत्र देने की तिथि से पूर्व न्यूनतम एक वर्ष से लगातार भारत में निवास कर रहा हो ।
3. वह एक वर्ष से पूर्व, न्यूनतम 5 वर्षों तक भारत में रह चुका हो अथवा भारत सरकार की नौकरी में । रह चुका हो अथवा दोनों मिलाकर 7 वर्ष का समय हो, लेकिन किसी भी परिस्थिति में 4 वर्ष से कम समय न हो।
4. उसका आचरण अच्छा हो।
In simple words: To acquire citizenship by naturalization, one must not be a citizen of a country that restricts Indians from gaining their citizenship. The applicant must have resided in India for a minimum of one year continuously before applying, and for a cumulative period of at least five years (or seven years including government service) before that, with good character throughout.
🎯 Exam Tip: Highlight the key conditions: no restriction on Indians in their home country, minimum residency requirements (both continuous and cumulative), and a good moral character.
Question 10. आदर्श नागरिकता के मार्ग में अशिक्षा कैसे बाधक है?
Answer:शिक्षा तथा ज्ञान के अभाव में आदर्श नागरिकता की कल्पना करना व्यर्थ है। अशिक्षित एवं अज्ञानी व्यक्ति उचित व अनुचित में अन्तर नहीं कर पाते। वे अपने उत्तरदायित्व के बोध से अपरिचित रहते हैं। ऐसे व्यक्ति राजनीतिक तथा सार्वजनिक कर्तव्यों का निष्पादन अपनी समझ-बूझ के आधार पर न करके अन्य व्यक्तियों के बहकावे में आकर करते हैं। शिक्षा तथा ज्ञान के बिना व्यक्ति न तो अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और न ही राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकता है। मैकम ने तो यहाँ तक कहा है कि शिक्षा के बिना नागरिक अपूर्ण है।”
In simple words: Illiteracy and lack of knowledge impede ideal citizenship because uneducated individuals cannot distinguish right from wrong, are unaware of their responsibilities, and may be easily manipulated in political and public affairs, thus hindering both personal and national development.
🎯 Exam Tip: Emphasize how illiteracy directly impacts critical thinking, awareness of duties, and susceptibility to manipulation, all of which are detrimental to ideal civic engagement.
Question 11. आदर्श नागरिकता के मार्ग में साम्प्रदायिकता कैसे बाधक है?
Answer: साम्प्रदायिकता को आदर्श नागरिक की प्रबलतम शत्रु माना गया है। साम्प्रदायिकता की भावना से ही सामाजिक जीवन में कटुता पैदा हो जाती है तथा शान्ति नष्ट हो जाती है। कभी-कभी इसके वशीभूत होकर व्यक्ति अपने धार्मिक एवं राजनीतिक समुदायों को इतना अधिक महत्त्व देते हैं कि वे समाज एवं राज्य के हितों की अपेक्षा हेतु तत्पर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में आदर्श नागरिकता की प्राप्ति असम्भव हो जाती है।
In simple words: Communalism hinders ideal citizenship by fostering social discord, disrupting peace, and causing individuals to prioritize their religious or political community's interests over the larger welfare of society and the state, making true civic unity and cooperation impossible.
🎯 Exam Tip: Explain how communalism undermines the collective good by promoting narrow group interests and creating social divisions, which are antithetical to the inclusive nature of ideal citizenship.
Question 12. नागरिकता का लोप होने की किन्हीं पाँच स्थितियों का विवेचन कीजिए ।
Answer: नागरिकता का लोप सामान्यतया निम्नलिखित स्थितियों में नागरिकता का लोप हो जाता है अथवा किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त हो जाती है-
1. विदेशी नागरिकता ग्रहण करने पर- यदि कोई व्यक्ति विदेश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी अपने देश की नागरिकता स्वतः ही समाप्त हो जाती है।
2. विवाह द्वारा - यदि कोई महिला विदेशी पुरुष से विवाह कर लेती है, तो वह अपने देश की नागरिकता खो देती है।
3. अनुपस्थिति के कारण- यदि कोई व्यक्ति अपने देश से लम्बी अवधि तक अनुपस्थित रहता | है, तो उसकी नागरिकता समाप्त हो जाती है।
4. सेना से भागने पर- सेना से भागे सैनिक, देशद्रोही तथा घोर अपराधी भी नागरिकता से वंचित कर दिए जाते हैं।
5. विदेशों में नौकरी करने से- यदि कोई व्यक्ति विदेश में नौकरी कर लेता है अथवा विदेशी नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो वह अपने देश की नागरिकता खो देता है।
In simple words: Citizenship can be lost in several ways: automatically upon acquiring foreign citizenship, by marriage to a foreigner (depending on laws), through prolonged absence from the country, by desertion from the military or committing treason, or by accepting foreign government employment.
🎯 Exam Tip: Categorize reasons for loss of citizenship into voluntary (acquiring foreign citizenship), involuntary (by law, e.g., marriage in some cases), and punitive (treason, military desertion, foreign service), and provide a brief explanation for each.
Question 13. सत्रहवीं से बीसवीं सदी के बीच यूरोप के गोरे लोगों ने दक्षिण अफ्रीका के लोगों पर अपना शासन कायम रखा। 1994 तक दक्षिण अफ्रीका में अपनाई गई नीतियों के बारे में नीचे दिए गए ब्योरे को पढिए ।
श्वेत लोगों को मत देने, चुनाव लड़ने और सरकार को चुनने का अधिकार था। वे सम्पत्ति खरीदने और देश में कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतन्त्र थे। काले लोगों को ऐसे अधिकार नहीं थे । काले और गोरे लोगों के लिए पृथक मोहल्ले और कालोनियाँ बसाई गई थीं। काले लोगों को अपने पड़ोस की गोरे लोगों की बस्ती में काम करने के लिए 'पास लेने पड़ते थे। उन्हें गोरों के इलाके में अपने परिवार रखने की अनुमति नहीं थी। अलग-अलग रंग के लोगों के लिए विद्यालय भी अलग-अलग थे ।
(i) क्या अश्वेत लोगों की दक्षिण अफ्रीका में पूर्ण और समान सदस्यता मिली हुई थी? कारण सहित बताइए ।
(ii) ऊपर दिया गया ब्योरा हमें दक्षिण अफ्रीका में भिन्न समूहों के अन्तर्सम्बन्धों के बारे में क्या बताता है?
Answer: (i) नहीं, अश्वेत लोगों को दक्षिण अफ्रीका में पूर्ण समान सदस्यता प्राप्त नहीं थी। वहाँ रंगभेद नीति इसका प्रमुख कारण था । (ii) दक्षिण अफ्रीका में भिन्न समूह (गोर-काले) के अन्तर्सम्बन्ध ठीक नहीं थे। दोनों में आपस में गहरे मतभेद थे।
In simple words: (i) No, non-white people in South Africa did not have full and equal citizenship, primarily due to the apartheid policy which denied them fundamental political, social, and economic rights. (ii) The provided details indicate deeply unequal and segregated relationships between the different racial groups (white and black) in South Africa, marked by severe discrimination and conflict.
🎯 Exam Tip: For part (i), directly state "No" and clearly link the lack of equal membership to the apartheid policy. For part (ii), use terms like "unequal," "segregated," and "deep conflict" to describe the inter-group relations.
Question 14. नागरिक के लक्षणों की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
Answer: नागरिक के निम्नलिखित लक्षण या विशेषताएँ होती हैं
1. वह राज्य का सदस्य हो।
2. वह राज्य की सीमा के अन्दर रहता हो, चाहे वह नगर-निवासी हो अथवा ग्रामवासी ।
3. उसे सभी सामाजिक तथा राजनीतिक अधिकार प्राप्त हों।
4. वह राज्य की सम्प्रभुता को स्वीकार करता हो और राज्य में पूर्ण निष्ठा एवं भक्ति रखता हो।
5. उसे मताधिकार प्राप्त हो।
6. उसमें कर्तव्यपरायणता की भावना निहित हो।
7. वह राष्ट्र तथा समाज के प्रति पूर्ण निष्ठा तथा भक्ति की भावना से ओतप्रोत हो ।
In simple words: A citizen is characterized by being a member of the state, residing within its boundaries (urban or rural), possessing full social and political rights, accepting state sovereignty, exhibiting loyalty and patriotism, having the right to vote, and being dutiful towards the nation and society.
🎯 Exam Tip: List a comprehensive set of characteristics, covering legal status (membership), residence, rights, duties (loyalty, dutifulness), and political participation (franchise).
Question 15. विश्व नागरिकता की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
Answer: विश्व नागरिकता की अवधारणा आधुनिक विचारकों की देन है। जिस प्रकार विश्व-राज्य व विश्व-बन्धुत्व की कल्पना की गई है, उसी प्रकार विश्व-नागरिकता का विचार भी विकसित हुआ है। विश्व-बन्धुत्व की कल्पना को साकार बनाकर विश्व नागरिकता के विचार को व्यावहारिक रूप प्रदान किया जा सकता है, परन्तु यह काल्पनिक अवधारणा यथार्थ के धरातल पर असम्भव ही प्रतीत होती है। विश्व नागरिकता का आशय ऐसी नागरिकता से है, जो सभी राष्ट्रों द्वारा मान्य हो । संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएँ विश्व नागरिकता की अवधारणा को व्यावहारिक रूप दे सकती हैं। राजनीतिक सम्बन्ध, शान्ति की इच्छा, आवागमन के साधनों का विकास, सांस्कृतिक एकता, विश्व-बन्धुत्व की भावना व मानवाधिकार, अन्तर्राष्ट्रीय कानून और अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से विश्व नागरिकता के आदर्श को प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। नेहरू जी विश्व नागरिकता के प्रबल समर्थक थे।
In simple words: Global citizenship is a modern concept envisioning a shared identity beyond national borders, aiming for universal recognition, human rights, and cooperation among states. While seen as an ideal to address global challenges through international organizations and foster fraternity, its practical realization remains difficult due to differing national interests and sovereignties.
🎯 Exam Tip: Define global citizenship as a concept of universal rights and duties beyond national boundaries. Highlight its potential benefits (global problem-solving, human rights) and inherent challenges (sovereignty, practicality).
Question 16. आदर्श नागरिकता के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer:किसी भी देश की प्रगति का आधार वहाँ के नागरिक होते हैं। जिस देश के नागरिक आदर्श नागरिकता के गुणों से परिपूर्ण होते हैं, वह देश शीघ्र ही उन्नति के शिखर पर पहुँच जाता है। अरस्तू का कथन है, “श्रेष्ठ नागरिक ही श्रेष्ठ राज्य का निर्माण कर सकते हैं; अतः राज्य के नागरिक आदर्श होने चाहिए।” वास्तव में आदर्श नागरिकता ही राज्य के विकास का आधार बन सकती है। डॉ० आशीर्वादी के अनुसार, “नागरिकता का सम्बन्ध केवल राजनीतिक जीवन से ही नहीं है, वरन् । सामाजिक और नैतिक जीवन से भी है।”
एक आदर्श नागरिक के गुणों को व्यक्त करते हुए लॉर्ड ब्राइस ने लिखा है, “एक लोकतन्त्रीय नागरिक में बुद्धि, आत्म-संयम तथा उत्तरदायित्व की भावना होनी चाहिए ।
इसी प्रकार डॉ० ह्वाइट ने लिखा है, “आदर्श नागरिक में तीन गुण; व्यावहारिक बुद्धि, ज्ञान और भक्ति; आवश्यक हैं।”
In simple words: Ideal citizenship is crucial for a nation's progress and development, as excellent citizens form an excellent state. It encompasses not just political participation but also social and moral virtues, including intelligence, self-control, responsibility, practical wisdom, knowledge, and devotion, all of which contribute to a healthy and thriving society.
🎯 Exam Tip: Emphasize the direct correlation between ideal citizens and national development. Incorporate quotes from political thinkers to support the importance of civic virtues.
Question 17. आदर्श नागरिकता की किन्हीं चार बाधाओं का उल्लेख कीजिए ।
Answer: आदर्श नागरिकता के मार्ग की चार मुख्य बाधाएँ निम्नलिखित हैं
1. आदर्श नागरिकता के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा अशिक्षा तथा निरक्षरता है।
2. संकीर्ण धार्मिक भावनाएँ तथा साम्प्रदायिकता की मनोदशा आदर्श नागरिकता के मार्ग को अवरुद्ध कर देती हैं।
3. संकीर्ण मनोवृत्तियों पर आधारित दलीय राजनीति भी आदर्श नागरिकता को कुंठित कर देती है।
4. पूँजीवाद के अनियन्त्रित विकास ने भी समाज को निर्धन तथा अमीर दो वर्गों में विभाजित कर दिया है। अतः निर्धनता भी आदर्श नागरिकता के लिए अभिशाप है ।
In simple words: Four main obstacles to ideal citizenship are illiteracy and ignorance, narrow religious sentiments and communalism, partisan politics driven by narrow mindsets, and poverty resulting from uncontrolled capitalism, all of which hinder full and responsible civic engagement.
🎯 Exam Tip: Focus on factors that undermine an individual's capacity to participate effectively and inclusively in society, covering educational, social, political, and economic barriers.
दीर्घ लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. नागरिकता का समानता और अधिकार से क्या सम्बन्ध है?
Answer:नागरिकता केवल एक कानूनी अवधारणा नहीं है। इसका समानता और अधिकारों के व्यापक उद्देश्यों से भी घनिष्ठ सम्बन्ध है। इस सम्बन्ध का सर्वसम्मत सूत्रीकरण अंग्रेज समाजशास्त्री टी० एच० मार्शल (1893-1981) ने किया है। अपनी पुस्तक 'नागरिकता और सामाजिक वर्ग में मार्शल ने नागरिकता को किसी समुदाय के पूर्ण सदस्यों को प्रदत्त प्रतिष्ठा के रूप में परिभाषित किया है। इस प्रतिष्ठा को ग्रहण करने वाले सभी लोग प्रतिष्ठा में अन्तर्भूत अधिकारों और कर्तव्यों के मामले में समान होते हैं।
नागरिकता की मार्शल द्वारा प्रदत्त कुँजी धारणा में मूल संकल्पना 'समानता' की है। इसमें दो बातें अन्तर्निहित हैं। पहली यह कि प्रदत्त अधिकार और कर्तव्यों की गुणवत्ता बढ़े। दूसरी यह कि उन लोगों की संख्या बढ़े जिन्हें वे दिए गए हैं। मार्शल नागरिकता में तीन प्रकार के अधिकारों को शामिल मानते हैं–नागरिक, राजनीतिक और सामाजिक अधिकार । नागरिक अधिकार व्यक्ति के जीवन, स्वतन्त्रता और सम्पत्ति की रक्षा करते हैं। राजनीतिक अधिकार व्यक्ति को शासन प्रक्रिया में सहभागी बनने की शक्ति प्रदान करते हैं। सामाजिक अधिकार व्यक्ति के लिए शिक्षा और रोजगार को सुलभ बनाते हैं। कुल मिलाकर ये अधिकार नागरिक के लिए सम्मान के साथ जीवन-बसर करना सम्भव बनाते हैं।
मार्शल ने सामाजिक वर्ग को 'असमानता की व्यवस्था के रूप में चिह्नित किया। नागरिकता वर्ग पदानुक्रम के विभाजक परिणामों का प्रतिकार कर समानता सुनिश्चित करती है। इस प्रकार यह बेहतर सुबद्ध और समरस समाज रचना को सुसाध्य बनाता है।
In simple words: Citizenship, as conceptualized by T.H. Marshall, is fundamentally linked to equality and rights, defining full membership in a community. It involves civil rights (life, liberty, property), political rights (participation in governance), and social rights (education, employment), all aimed at ensuring dignified living. Citizenship strives to counteract social inequalities and foster a cohesive society by extending these rights to more people and improving their quality.
🎯 Exam Tip: Focus on T.H. Marshall's theory, explaining his three types of rights (civil, political, social) and how citizenship, through these rights, aims to achieve equality and counter social stratification.
Question 2. भारतीय नागरिकता किन आधारों पर लुप्त हो सकती है? कोई दो प्रकार बताइए ।
Answer: भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 नागरिकता के लोप के विषय में भी व्यवस्था करता है, चाहे वह भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अन्तर्गत प्राप्त की गई हो या संविधान के उपबन्धों के अनुसार प्राप्त की गई हो। इस अधिनियम के अनुसार नागरिकता का लोप निम्न प्रकार से हो सकता है
1. नागरिकता का परित्याग- कोई भी वयस्क भारतीय नागरिक जो किसी दूसरे देश का भी ' नागरिक है, भारतीय नागरिकता को त्याग सकता है। इसके लिए उसे एक घोषणा करनी होगी और उस घोषणा का पंजीकरण हो जाने पर उसकी भारतीय नागरिकता लुप्त हो जाएगी, किन्तु यदि ऐसी घोषणा किसी ऐसे युद्धकाल में की जाती है, जिसमें भारत एक पक्षकार हो, तो पंजीकरण को तब तक रोका जा सकता है, जब तक भारत सरकार उचित समझे। यह उल्लेखनीय है कि जब कोई पुरुष भारतीय नागरिकता का त्याग करता है, तो उसके साथ-साथ उसके अवयस्क बच्चे भी भारतीय नागरिकता खो देते हैं।
2. अन्य देशों की नागरिकता स्वीकार करने पर- यदि कोई भारतीय नागरिक अपनी इच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता लुप्त हो जाती है। यह नियम उन नागरिकों के सम्बन्ध में लागू नहीं होता है, जो किसी ऐसे युद्धकाल में, जिसमें भारत एक पक्षकार हो, स्वेच्छा से दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार कर लेते हैं।
In simple words: Indian citizenship can be lost in two primary ways: firstly, through renunciation, where an adult citizen voluntarily declares to give up Indian citizenship (with restrictions during wartime). Secondly, through termination, if an Indian citizen voluntarily acquires citizenship of another country, their Indian citizenship automatically ceases, unless it's during a war where India is a party and they willingly accept foreign citizenship.
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between "renunciation" (voluntary giving up) and "termination" (automatic loss upon acquiring foreign citizenship), noting specific conditions like wartime restrictions and the impact on dependents.
Question 3. नागरिक और विदेशी में अन्तर लिखिए।
Answer:
नागरिक और विदेशी में अन्तर
| क्र०स० | नागरिक | विदेशी |
| 1. | नागरिक राज्य का स्थायी सदस्य होता है। | विदेशी राज्य का अस्थायी सदस्य होता है। |
| 2. | नागरिक को राज्य से सामाजिक तथा राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं। | विदेशी को केवल सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं, राजनीतिक अधिकार नहीं। |
| 3. | नागरिक राज्य द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकरों का उपभोग करने का अधिकारी होता है। | विदेशी मौलिक अधिकारों से वंचित रखे जाते हैं। |
| 4. | नागरिक अपनी अचल सत्पत्ति का क्रय-विक्रय कर सकता है। | विदेशी इस अधिकार से वंचित रहते हैं। |
| 5. | राज्य नागरिकों को सैनिक सेवा के लिए विवश कर सकता है। | राज्य विदेशियों को सेना में भर्ती होने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। सामान्यतया प्रयास यही किया जाता है कि विदेशियों को सेना जैसे संवेदनशील विभागों में भर्ती करने से बचा जाए। |
| 6. | नागरिक अपने राज्य के प्रति अनेक कर्त्तव्यों का पालन करता है। | विदेशी राज्य के कानूनों का पालन अवश्य करता है, परन्तु वह कर्त्तव्य-पालन के लिए बाध्य नहीं है। |
| 7. | नागरिक अपने राज्य के प्रति पूर्ण भक्ति एवं निष्ठा रखता है। सुरक्षा की दृष्टि से नागरिकों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। | विदेशी से इस प्रकार की निष्ठा की अपेक्षा नहीं की जा सकती। |
| 8. | नागरिक ऐसी शर्तों से मुक्त रहते हैं, जो विदेशियों के लिए अनिवार्य होती हैं। | विदेशी राज्य के अनेक प्रतिबन्धों के बन्धन में रहते हैं। |
| 9. | जब तक नागरिक कोई अधिक गम्भीर अपराध न करे, तब तक राज्य अपने नागरिक को देश से निर्वासित नहीं कर सकता है। | विदेशी को बिना कारण बताए भी देश छोड़ने के लिए बाध्य किया जा सकता है। |
In simple words: नागरिक देश के स्थायी सदस्य होते हैं जिनके पास सामाजिक और राजनीतिक अधिकार होते हैं, जबकि विदेशी अस्थायी निवासी होते हैं जिनके पास केवल सामाजिक अधिकार होते हैं और वे राजनीतिक अधिकारों से वंचित रहते हैं।
🎯 Exam Tip: यह तुलनात्मक प्रश्न अक्सर पूछा जाता है; सारणीबद्ध रूप में उत्तर देने से अंक प्राप्त करना आसान होता है।
Question 4. नागरिक और राष्ट्र के सम्बन्ध की व्याख्या कीजिए ।
Answer: राष्ट्र राज्य की अवधारणा आधुनिक काल में विकसित हुई। राष्ट्र राज्य की सम्प्रभुता और नागरिकों के लोकतान्त्रिक अधिकारों का दावा सर्वप्रथम 1789 में फ्रांस के क्रान्तिकारियों ने किया था। राष्ट्र राज्यों का दावा है कि उनकी सीमाएँ केवल राज्यक्षेत्र को नहीं बल्कि एक अनोखी संस्कृति और साझा इतिहास को भी परिभाषित करती हैं। राष्ट्रीय पहचान को एक झण्डा, राष्ट्रगान, राष्ट्रभाषा या कुछ विशिष्ट उत्सवों के आयोजन जैसे प्रतीकों से व्यक्त किया जा सकता है। अधिकतर आधुनिक राज्य स्वयं विभिन्न धर्मों, भाषा और सांस्कृतिक परम्पराओं के लोगों को सम्मिलित करते हैं।
लेकिन एक लोकतान्त्रिक राज्य की राष्ट्रीय पहचान में नागरिकों को ऐसी राजनीतिक पहचान देने की कल्पना होती है, जिसमें राज्य के सभी सदस्य भागीदार हो सकें। लोकतान्त्रिक देश साधारणतया अपनी पहचान इस प्रकार परिभाषित करने प्रयास करते हैं कि वह यथासम्भव समावेशी हो अर्थात् जो सभी नागरिकों को राष्ट्र के अंग के रूप में स्वयं को पहचानने की अनुमति देता हो । लेकिन व्यवहार में अधिकतर देश अपनी पहचान को इस प्रकार परिभाषित करने की ओर अग्रसर हैं, जो कुछ नागरिकों के लिए राष्ट्र के साथ अपनी पहचान व सम्बन्ध बनाए रखना अन्यों की तुलना में आसान बनाता है। यह राजसत्ता के लिए भी अन्यों की तुलना में कुछ लोगों को नागरिकता देना सरल कर देता है। यह अप्रवासियों का देश होने पर गौरवान्वित होने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में भी वैसे ही सच है जैसे कि किसी अन्य देश के बारे में।
In simple words: राष्ट्र राज्य की पहचान साझा संस्कृति, इतिहास और प्रतीकों से बनती है, और नागरिक इस पहचान का अभिन्न अंग होते हैं। लोकतान्त्रिक राज्य समावेशी नागरिक पहचान बनाने का प्रयास करते हैं, ताकि सभी नागरिक राष्ट्र के साथ स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करें।
🎯 Exam Tip: राष्ट्र और नागरिकता के बीच के गहरे सम्बन्ध को समझाते हुए राष्ट्रवाद और समावेशी नीतियों के महत्व पर प्रकाश डालें।
Question 5. नागरिक अधिकार आन्दोलन के लिए मार्टिन लूथर किंग जूनियर की भूमिका की विवेचना कीजिए।
Answer: 1950 का दशक संयुक्त राज्य अमेरिका के अनेक दक्षिणी राज्यों में काली और गोरी जनसंख्या के बीच व्याप्त विषमताओं के विरुद्ध नागरिक अधिकार आन्दोलन के उत्थान का साक्षी रहा है। इस प्रकार की विषमताएँ इन राज्यों द्वारा पृथक्करण कानून के नाम से विख्यात ऐसे कानूनों द्वारा पोषित होती थीं, जिनसे काले लोगों को अनेक नागरिक और राजनीतिक अधिकारों से वंचित किया जाता था। उन कानूनों ने विभिन्न नागरिक सुविधाओं; जैसे-रेल, बस, रंगशाला, आवास, होटल, रेस्टोरेण्ट आदि में गोरे और काले लोगों के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित कर रखे थे। इन कानूनों के कारण काले और गोरे बच्चों के स्कूल भी अलग-अलग थे।
इन कानूनों के विरुद्ध हुए आन्दोलन में मार्टिन लूथर किंग जूनियर अग्रणी काले नेता थे। उन्होंने इनके विरुद्ध अनेक अकाट्य तर्क प्रस्तुत किए। पहला, आत्म गौरव व आत्म-सम्मान के मामले में विश्व की प्रत्येक जाति या वर्ण का मनुष्य बराबर है। दूसरा, किंग ने कहा कि पृथक्करण राजनीति के चेहरे पर 'सामाजिक कोढ़' की तरह है क्योंकि यह उन लोगों को गहरे मनोवैज्ञानिक घाव देता है, जो ऐसे काननों के शिकार हैं।
किंग के तर्क दिया कि पृथक्करण की प्रथा गोरे समुदाय के जीवन की गुणवत्ता भी कम करती है। किंग इसे उदाहरणों द्वारा स्पष्ट करते हैं। गोरे समुदाय ने अदालत के निर्देशानुसार कुछ सामुदायिक उद्यानों में काले लोगों को प्रवेश की आज्ञा देने के बजाय उन्हें बन्द करने का फैसला किया। इसी प्रकार कुछ बेसबॉल टीमें टूट गईं क्योंकि अधिकारी काले खिलाड़ियों को स्वीकार नहीं करना चाहते थे। तीसरे, पृथक्करण कानून लोगों के बीच कृत्रिम सीमाएँ खींचते हैं और उन्हें देश के व्यापक हित के लिए एक-दूसरे का सहयोग करने से रोकते हैं। इन कारणों से किंग ने बहस छेड़ी कि उन कानूनों को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने पृथक्करण कानूनों के विरुद्ध शान्तिपूर्ण और अहिंसक प्रतिरोध का आह्वान किया।
In simple words: मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने संयुक्त राज्य अमेरिका में काले लोगों के नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया, पृथक्करण कानूनों को चुनौती दी, और आत्म-सम्मान, सामाजिक सद्भाव तथा राष्ट्रव्यापी सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए अहिंसक विरोध का नेतृत्व किया।
🎯 Exam Tip: मार्टिन लूथर किंग जूनियर के योगदान, उनके तर्कों और अहिंसक आन्दोलन के प्रभाव को रेखांकित करें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. नागरिकता की परिभाषा देते हुए, नागरिक के प्रकार लिखिए।
या नागरिकता से आप क्या समझते हैं? नागरिक कितने प्रकार के होते हैं?
Answer:
नागरिकता की परिभाषा
नागरिकता उस स्थिति का नाम है, जिसके अन्तर्गत राज्य द्वारा व्यक्ति को नागरिक और राजनीतिक अधिकार प्रदान किए जाते हैं और व्यक्ति राज्य के प्रति विशेष निष्ठा रखता है। नागरिकता को निम्नलिखित शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है
लॉस्की के अनुसार, “अपनी प्रशिक्षित बुद्धि को लोकहित के लिए प्रयोग करना ही नागरिकता है।”
गैटिल के अनुसार, “नागरिकता व्यक्ति की वह स्थिति है, जिसके कारण वह कुछ सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों का उपभोग करता है।
विलियम बॉयड के अनुसार, “भक्ति-भावना का उचित क्रम-निर्धारण ही नागरिकता है।' नागरिकता की उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर स्पष्ट होता है कि नागरिकता जीवन की वह स्थिति है, जिसमें व्यक्ति किसी राज्य का सदस्य होने के नाते सभी प्रकार के सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों का उपभोग करता है तथा राज्य के प्रति उसके अपने कुछ कर्तव्य भी सुनिश्चित होते हैं। इस प्रकार नागरिक होने की दशा का नाम ही नागरिकता है।
नागरिक के प्रकार प्रत्येक राज्य में दो प्रकार के व्यक्ति निवास करते हैं 1. नागरिक (Citizen) और 2. विदेशी (Alien)
1. नागरिक किसी राज्य में चार प्रकार के नागरिक होते हैं-
• अल्पवयस्क नागरिक- ये एक निश्चित आयु से कम के व्यक्ति होते हैं और इन्हें मताधिकार प्राप्त नहीं होता है। भारत में 18 वर्ष की आयु से कम के व्यक्ति इस श्रेणी में आते हैं।
• वयस्क नागरिक- ये एक निश्चित आयु प्राप्त व्यक्ति होते हैं। भारत में यह आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है तथा इन्हें मताधिकार प्राप्त होता है।
• नागरिकता-प्राप्त विदेशी- ये विदेशी होते हैं, परन्तु उन्हें कुछ शर्तें पूरी करने के पश्चात् नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
• मताधिकार-रहित वयस्क नागरिक- इस वर्ग के अन्तर्गत ऐसे व्यक्ति सम्मिलित किए जाते हैं, जिनकी आयु नागरिकता प्राप्त करने की निश्चित आयु अधिक होती है, परन्तु किन्हीं विशेष कारणों से इन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
2. विदेशी विदेशी वे होते हैं, जो किसी अन्य देश के मूल निवासी होते हैं और कुछ विशेष कारणों से कुछ समय के लिए दूसरे राज्य में निवास करते हैं। विदेशी निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं
• स्थायी विदेशी- ऐसे विदेशी, जो अपना देश छोड़कर अन्य देशों में जाकर बस जाते हैं और उसी देश की नागरिकता प्राप्त कर लेते हैं, 'स्थायी विदेशी' कहलाते हैं।
• अस्थायी विदेशी अथवा विदेशी पर्यटक- ऐसे विदेशी, जो किसी विशेष कार्य के लिए कुछ समय के लिए दूसरे देश में जाते हैं और अपना कार्य पूरा करके स्वदेश लौट आते हैं, 'अस्थायी विदेशी' अथवा 'विदेशी पर्यटक' कहलाते हैं।
• राजदूत एवं राजनयिक- ये विदेशी होते हैं, तथापि इन्हें अन्य विदेशियों की अपेक्षा अधिक | सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। किसी अन्य देश में ये अपने देश का कूटनीतिक एवं राजनयिक प्रतिनिधित्व करते हैं। सम्बन्धों के आधार पर विदेशी निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-
• विदेशी शत्रु- शत्रु देशों में चोरी-छिपे घुसपैठ करने वाले विदेशी, 'विदेशी शत्रु' कहलाते हैं। प्रायः शत्रु देशों से आने वाले विदेशियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाती है और उन पर अनेक प्रतिबन्ध भी लगा दिए जाते हैं।
• विदेशी मित्र- मित्र राष्ट्रों से आने वाले विदेशी, 'विदेशी मित्र' कहलाते हैं। ये विदेशी अतिथि के रूप में आते हैं।
In simple words: नागरिकता वह स्थिति है जहाँ व्यक्ति को राज्य द्वारा सामाजिक और राजनीतिक अधिकार मिलते हैं और वह राज्य के प्रति निष्ठावान रहता है। नागरिक मुख्य रूप से अल्पवयस्क, वयस्क, नागरिकता-प्राप्त विदेशी और मताधिकार-रहित वयस्क होते हैं, जबकि विदेशी स्थायी, अस्थायी, या राजनयिक के रूप में वर्गीकृत होते हैं।
🎯 Exam Tip: नागरिकता की विभिन्न परिभाषाओं को उद्धृत करते हुए उसके प्रकारों को स्पष्टता से वर्गीकृत करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. नागरिकता को परिभाषित कीजिए। नागरिकता कैसे प्राप्त होती है तथा इसका किस प्रकार विलोपन होता है?
या नागरिकता की परिभाषा दीजिए और भारत में नागरिकता प्राप्त करने की विधियाँ बताइए ।
या नागरिकता समाप्त होने की किन्हीं चार परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए।
Answer:
नागरिकता का तात्पर्य किसी राज्य में व्यक्ति का नागरिक होने की स्थिति से है। यह उस वैधानिक या कानूनी सम्बन्ध का नाम है जो व्यक्ति को उस राज्य के साथ, जिसका वह सदस्य है, सम्बद्ध करता है।
1. लॉस्की के शब्दों में, “अपनी प्रशिक्षित बुद्धि का लोकहित में प्रयोग ही नागरिकता है।”
2. गैटिल के अनुसार, “नागरिकता व्यक्ति की उस अवस्था को कहते हैं जिसके कारण वह अपने राज्य में राष्ट्रीय और राजनीतिक अधिकारों का उपयोग कर सकता है और अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए तैयार रहता है। इस प्रकार किसी राज्य और उसके नागरिकों के उन आपसी सम्बन्धों को ही 'नागरिकता' कहा जाता है जिससे नागरिकों को राज्य की ओर से सामाजिक और राजनीतिक अधिकार मिलते हैं। तथा वे राज्य के प्रति कुछ कर्तव्यों का पालन करते हैं।
नागरिकता प्राप्त करने की विधियाँ नागरिकता प्राप्त करने की विधियों को निम्नलिखित दो भागों में विभक्त किया जा सकता है 1. जन्मजात नागरिकता की प्राप्ति तथा 2. राज्यकृत नागरिकता की प्राप्ति।
1. जन्मजात नागरिकता की प्राप्ति जन्मजात नागरिकता निम्नलिखित तरीकों से प्राप्त होती है-
• रक्त अथवा वंश सम्बन्धी सिद्धान्त- जन्मजात नागरिकता प्राप्त करने की प्रथम विधि रक्त सम्बन्ध है। इस सिद्धान्त के अनुसार बच्चे को जन्म किसी भी स्थान पर क्यों न हो, उसे अपने पिता की नागरिकता प्राप्त होती है। फ्रांस, इटली एवं स्विट्जरलैण्ड में इस सिद्धान्त को अपनाया गया है। यह सिद्धान्त न्यायसंगत और विवेकयुक्त है।
• जन्म-स्थान सिद्धान्त- इस सिद्धान्त के अनुसार बच्चे की नागरिकता का निर्णय उसके जन्म-स्थान के आधार पर किया जाता है। इस सिद्धान्त के अनुसार बच्चे को उसी देश की नागरिकता प्राप्त होती है, जिस देश की भूमि पर उसका जन्म होता है। अर्जेण्टाइना, इंग्लैण्ड तथा अमेरिका में नागरिकता का यह सिद्धान्त लागू है। यह सिद्धान्त नागरिकता का निर्णय करने में तो बहुत सरल है, किन्तु तर्कसंगत नहीं है।
• दोहरा नियम- कई देशों में दोनों सिद्धान्तों को अपनाया गया है। इंग्लैण्ड, फ्रांस एवं अमेरिका में रक्त-सम्बन्धी सिद्धान्त तथा जन्म-स्थान सिद्धान्त दोनों प्रचलित हैं। दोहरे नियम के सिद्धान्त के अनुसार जो बच्चा अंग्रेज दम्पती से उत्पन्न हुआ हो, चाहे बच्चे का जन्म भारत में हो, अंग्रेज कहलाता है। उसे अपने पिता की नागरिकता प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त यदि किसी विदेशी की इंग्लैण्ड में सन्तान पैदा होती है, तो उसे इंग्लैण्ड की भी नागरिकता प्राप्त होगी। इस सिद्धान्त में यह दोष है कि एक बच्चा एक समय में दो देशों का नागरिक बन सकता है, किन्तु वयस्क होने पर वह यह निर्णय कर सकता है कि वह किस देश की नागरिकता को अपनाये और किसका परित्याग करे।
2. राज्यकृत नागरिकता की प्राप्ति राज्यकृत नागरिकता नियमानुसार विदेशियों को प्रदान की जाती है। ऐसे व्यक्ति जिन्हें नागरिकता जन्मजात सिद्धान्त से प्राप्त नहीं होती, वरन् उस राज्य की ओर से प्राप्त होती है, जिसके कि वे मूल नागरिक नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने देश को छोड़कर किसी दूसरे देश में बस जाती है और कुछ समय पश्चात् उस देश की नागरिकताको प्राप्त कर लेता है तो उस व्यक्ति को राज्यकृत नागरिकं कहीं जाता है। नागरिकता देना अथवा न देना राज्य पर निर्भर करती है। इस सिद्धान्त के अनुसार नागरिकता की प्राप्ति निम्नलिखित रूपों में की जाती है
• निश्चित समय के लिए- यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश में जाकर एक निश्चित अवधि तक निवास करे तो वह प्रार्थना-पत्र देकर वहाँ की नागरिकता प्राप्त कर सकता है। इंग्लैण्डे और अमेरिका में निवास की अवधि 5 वर्ष है, जब कि फ्रांस में 10 वर्ष । भारत में निवास की अवधि 4 वर्ष है।
• विवाह- यदि कोई स्त्री किसी दूसरे देश के नागरिक से विवाह कर लेती है तो उसे अपने पति के देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। भारत का नागरिक पुरुष यदि इंग्लैण्ड की नागरिक महिला के साथ विवाह कर लेता है तो उस महिला को भारत की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। जापान में इसके विपरीत नियम है। यदि कोई विदेशी व्यक्ति जापान की नागरिक महिला से विवाह कर लेता है तो उस व्यक्ति को जापान की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
• सम्पत्ति खरीदना - सम्पत्ति खरीदने से भी नागरिकता प्राप्त हो जाती है। ब्राजील, पीरू और मैक्सिको में यह नियम प्रचलित है। यदि कोई विदेशी पीरू में सम्पत्ति खरीद लेता है तो उसे वहाँ की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
• गोद लेना- जब एक देश का नागरिक व्यक्ति किसी दूसरे देश के नागरिक बच्चे को गोद ले | लेता है तो गोद लिये जाने वाले बच्चे को अपने पिता के देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
• सरकारी नौकरी - कई देशों में यह नियम है कि यदि कोई विदेशी वहाँ सरकारी नौकरी कर ले तो उसे वहाँ की नागरिकता मिल जाती है। उदाहरणस्वरूप, यदि कोई भारतीय इंग्लैण्ड में सरकारी नौकरी कर लेता है तो उसे इंग्लैण्ड की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
• विद्वत्ता द्वारा- कई देशों में विदेशी विद्वानों को नागरिक बनने के लिए विशेष सुविधाएँ दी | जाती हैं। विदेशी विद्वानों के निवास की अवधि दूसरे विदेशियों के निवास की अवधि से कम | होती है। फ्रांस में वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के लिए वहाँ की नागरिकता प्राप्त करने के लिए एक वर्ष का निवास हीं पर्याप्त है।
• दोबारा नागरिकता की प्राप्ति- यदि कोई नागरिक अपने देश की नागरिकता छोड़कर दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है तो उसे दूसरे देश का नागरिक माना जाता है, परन्तु यदि वह चाहे तो कुछ शर्तें पूरी करके पुनः अपने देश की नागरिकता भी प्राप्त कर सकता है।
भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की विधियाँ निम्नलिखित विधियों में से किसी एक आधार पर भारतीय नागरिकता प्राप्त की जा सकती है
1. जन्म या वंश के आधार पर- 1992 ई० में संसद ने सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित कर ‘भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' को संशोधित किया है। 1992 ई० के पूर्व भारत के बाहर जन्मे किसी व्यक्ति को रक्त-सम्बन्ध या वंश के आधार पर भारत की नागरिकता तभी प्राप्त होती थी, जब कि उसका पिता भारत का नागरिक हो। अब व्यवस्था यह की गयी है कि भारत से बाहर जन्मे ऐसे किसी भी व्यक्ति को भारत की नागरिकता प्राप्त होगी; जिसका पिता या माता, उसके जन्म के समय भारत के नागरिक हों। इस प्रकार अब नागरिकता के प्रसंग में बच्चे की माता को पिता के 'समकक्ष स्थिति प्रदान कर दी गयी है।
2. पंजीकरण द्वारा - निम्नलिखित श्रेणी के व्यक्ति पंजीकरण के आधार पर नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं-
• जो व्यक्ति पंजीकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें अब भारत में कम-से-कम 5 वर्ष निवास करना होगा। पहले यह अवधि 6 माह थी ।
• ऐसे भारतीय जो विदेशों में जाकर बस गये हैं, भारतीय दूतावासों में आवेदन-पत्र देकर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकेंगे।
• विदेशी स्त्रियाँ, जिन्होंने भारतीय नागरिक से विवाह कर लिया हो, आवेदन-पत्र देकर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकेंगी।
• राष्ट्रमण्डलीय देशों के नागरिक, यदि वे भारत में ही रहते हों या भारत सरकार की नौकरी, कर रहे हों, आवेदन-पत्र देकर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
3. देशीयकरण द्वारा- देशीयकरण द्वारा नागरिकता तभी प्रदान की जाती है, जब कि सम्बन्धित व्यक्ति कम-से-कम 10 वर्ष तक भारत में रह चुका हो । पहले यह अवधि 5 वर्ष थी । 'नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1986' जम्मू-कश्मीर तथा असम सहित भारत के सभी राज्यों पर लागू होता है।
4. भूमि विस्तार द्वारा - यदि किसी नवीन क्षेत्र को भारत में शामिल किया जाए तो वहाँ की जनता को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो जाएगी। जैसे 1961 ई० में गोआ तथा 1975 ई० में सिक्किम को भारत में सम्मिलित किये जाने पर वहाँ की जनता को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो गयी।
नागरिकता का लोप जिस तरह नागरिकता को प्राप्त किया जा सकता है, उसी तरह कुछ स्थितियों में नागरिकता को खोया भी जा सकता है। निम्नलिखित स्थितियों में प्रायः नागरिकता का लोप हो जाता है
1. लम्बे समय तक अनुपस्थिति- कई देशों में यह नियम है कि यदि वहाँ का नागरिक लम्बे समय तक देश से बाहर रहे तो उसकी नागरिकता समाप्त कर दी जाती है। उदाहरणस्वरूप, यदि कोई फ्रांसीसी नागरिक लगातार 10 वर्ष की अवधि से अधिक फ्रांस से बाहर रहे तो उसकी नागरिकता समाप्त कर दी जाती है।
2. विवाह- महिलाएँ विदेशी नागरिकों से विवाह करके अपने देश की नागरिकता खो देती हैं।
3. विदेश में सरकारी नौकरी- यदि एक देश का नागरिक अपने देश की सरकार की आज्ञा प्राप्त | किये बिना किसी दूसरे देश में सरकारी नौकरी कर लेता है तो उसे अपने देश की नागरिकता छोड़नी पड़ती है।
4. स्वेच्छा से नागरिकता का त्याग- कई देशों की सरकारें अपने नागरिकों को उनकी इच्छा के अनुसार किसी देश का नागरिक बनने की आज्ञा प्रदान कर देती हैं। इस प्रकार के व्यक्ति अपनी जन्मजात नागरिकता त्यागकर अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर लेते हैं।
5. सेना से भाग जाने पर- यदि कोई नागरिक सेना से भागकर दूसरे देश में चला जाता है तो | उसकी नागरिकता समाप्त हो जाती है।
6. दोहरी नागरिकता प्राप्त हो जाने पर- जब किसी व्यक्ति को दो राज्यों की नागरिकता प्राप्त हो जाती है तब उसे एक राज्य की नागरिकता छोड़नी पड़ती है।
7. देश-द्रोह- जब कोई व्यक्ति राज्य के विरुद्ध विद्रोह अथवा क्रान्ति करता है तो उसकी नागरिकता छीन ली जाती है, परन्तु देश-द्रोह के आधार पर उन्हीं नागरिकों की नागरिकता को छीना जा सकता है जो राज्यकृत नागरिक हों।
8. गोद लेना- यदि कोई बच्चा किसी विदेशी द्वारा गोद ले लिया जाए तो बच्चे की अपने देश की नागरिकता समाप्त हो जाती है और वह अपने नये माता-पिता के देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है।
9. विदेशी सरकार से सम्मान प्राप्त करना- यदि कोई नागरिक अपने देश की आज्ञा के बिना किसी विदेशी सरकार द्वारा दिये गये सम्मान को स्वीकार कर लेता है तो उसे उसकी मूल नागरिकता से वंचित कर दिया जाता है।
10. पागल, दिवालिया अथवा साधु- संन्यासी होने पर- यदि कोई व्यक्ति पागल, दिवालिया अथवा साधु-संन्यासी हो जाता है तो उसका नागरिकता का अधिकार समाप्त हो जाता है।
In simple words: नागरिकता राज्य के साथ व्यक्ति के कानूनी सम्बन्ध को परिभाषित करती है, जो जन्म या देशीयकरण से प्राप्त होती है, और इसे लम्बी अनुपस्थिति, विवाह, विदेशी सेवा या देश-द्रोह जैसे कारणों से खोया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: नागरिकता प्राप्त करने और खोने की विधियों को विस्तृत उदाहरणों के साथ समझाना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से भारतीय संदर्भ में।
Question 3. 'विश्व नागरिकता की अवधारणा क्या है? इसके समर्थन में क्या तर्क प्रस्तुत किए जाते है?
Answer: हम आज एक ऐसे विश्व में रहते हैं जो आपस में जुड़ा हुआ है। संचार के इण्टरनेट, टेलीविजन, सेलफोन और सैटेलाइट फोन जैसे नए साधनों ने उन तरीकों में भारी बदलाव कर दिया है, . जिनसे हम अपने विश्व को समझते हैं। पहले विश्व के एक हिस्से की गतिविधियों की खबर अन्य हिस्सों तक पहुँचने में महीनों लग जाते थे। लेकिन संचार के नये तरीकों ने विश्व के विभिन्न भागों में घट रही घटनाओं को हमारे तत्काल सम्पर्क की सीमाओं में ला दिया है। हम अपने टेलीविजन के पर्दे पर विनाश और युद्धों को होते देख सकते हैं, इससे विश्व के विभिन्न देशों के लोगों में साझे सरोकार और सहानुभूति विकसित होने में सहायता मिली है।
विश्व नागरिकता के समर्थक तर्क प्रस्तुत करते हैं कि चाहे विश्व-कुटुम्ब और वैश्विक समाज अभी विद्यमान नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार लोग आज एक-दूसरे से जुड़ाव अनुभव करते हैं। उदाहरणार्थ-एशिया की सुनामी या अन्य बड़ी दैवी आपदाओं के पीड़ितों की सहायता के लिए विश्व के सभी हिस्सों से उमड़ा भावोद्गार विश्व-समाज की ओर उभार का संकेत है। हमें इस भावना को मजबूत करना चाहिए और एक विश्व नागरिकता की अवधारणा की दिशा में सक्रिय होना चाहिए। राष्ट्रीय नागरिकता की अवधारणा यह मानती है कि हमारी राज्यसत्ता हमें वह सुरक्षा और अधिकार दे सकती है जिनकी हमें आज विश्व में गरिमा के साथ जीने के लिए आवश्यकता है। लेकिन राजसत्ताओं के समक्ष आज अनेक ऐसी समस्याएँ हैं, जिनका मुकाबला वे अपने बल पर नहीं कर सकतीं।
विश्व नागरिकता की अवधारणा के आकर्षणों में से एक यह है कि इससे राष्ट्रीय सीमाओं के दोनों ओर की उन समस्याओं का समाधान करना आसान हो सकता है जिसमें कई देशों की सरकारों और लोगों की संयुक्त कार्यवाही आवश्यक होती है। उदाहरण के लिए, इससे प्रवासी और राज्यहीन लोगों की समस्या का सर्वमान्य समाधान पाना आसान हो सकता है या कम-से-कम उनके बुनियादी अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है चाहे वे जिस किसी देश में रहते हों।
हम अध्ययन कर चुके हैं कि एक देश के भीतर की समान नागरिकता को सामाजिक-आर्थिक असमानता या अन्य समस्याओं से खतरा हो सकता है। इन समस्याओं का समाधान अन्ततः सम्बन्धित समाज की सरकार और जनता ही कर सकती है। इसलिए लोगों के लिए आज एक राज्य की पूर्ण और समान सदस्यता महत्त्वपूर्ण है। लेकिन विश्व नागरिकता की अवधारणा हमें याद दिलाती है कि राष्ट्रीय नागरिकता को समझदारी से जोड़ने की आवश्यकता है कि हम आज अन्तर्समबद्ध विश्व में रहते हैं। और हमारे लिए यह भी आवश्यक है कि हम विश्व के विभिन्न हिस्सों के लोगों के साथ अपने सम्बन्ध सुदृढ़ करें और राष्ट्रीय सीमाओं के पार के लोगों और सरकारों के साथ काम करने के लिए तैयार हों।
In simple words: विश्व नागरिकता एक अवधारणा है जो यह मानती है कि वैश्वीकरण और संचार के कारण सभी लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और यह राष्ट्रीय सीमाओं के पार की समस्याओं जैसे प्रवासियों और राज्यविहीन लोगों के अधिकारों को हल करने में मदद कर सकती है।
🎯 Exam Tip: विश्व नागरिकता की अवधारणा को वर्तमान वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन और शरणार्थी संकट से जोड़कर समझाएँ।
Question 4. आदर्श नागरिक के गुणों की विवेचना कीजिए।
Answer:
आदर्श नागरिक के गुण
महान् दार्शनिक अरस्तू का मत है कि “श्रेष्ठ नागरिक ही श्रेष्ठ राज्य का निर्माण कर सकते हैं, इसलिए राज्य के नागरिक आदर्श होने चाहिए।” आज का युग प्रजातन्त्र का युग है, जिसमें शासन का दायित्व वहाँ के नागरिकों पर होता है। अतः आदर्श नागरिकता ही राज्य के विकास का आधार है। एक आदर्श नागरिक में अग्रलिखित गुणों का होना आवश्यक है-
1. उत्तम स्वास्थ्य- आदर्श नागरिक में उत्तम स्वास्थ्य का होना अनिवार्य है। अस्वस्थ व्यक्ति समाज पर भार स्वरूप होता है। वह न तो अपने व्यक्तिगत कर्तव्यों और न ही समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन कर सकता है।
2. सच्चरित्रता- मनुष्य के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में सच्चरित्रता का बहुत अधिक महत्त्व है। चरित्रवान् व्यक्ति ही आदर्श नागरिक बन सकता है, क्योंकि चरित्र द्वारा ही व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का सर्वोत्तम विकास कर सकता है।
3. शिक्षा- शिक्षा आदर्श नागरिक जीवन की नींव है। गांधी जी ने कहा था कि “शिक्षा, जो आत्मा का भोजन है, स्वस्थ नागरिकता की प्रथम शर्त है। शिक्षा ही अज्ञान के अन्धकार का विनाश कर ज्ञान का प्रकाश करती है। अशिक्षित नागरिक कभी भी आदर्श नागरिक नहीं बन सकता।
4. विवेक और आत्म-संयम- लॉर्ड ब्राइस के अनुसार, “विवेक आदर्श नागरिक का पहला गुण है।' विवेक के आधार पर नागरिक अच्छे-बुरे का ज्ञान प्राप्त करता है तथा अपने कर्तव्यों और अधिकारों को भली प्रकारे समझ सकता है। आदर्श नागरिक का दूसरा गुण आत्म-संयम है, अर्थात् नागरिक में अपने हितों का परित्याग कर देने की स्थिति में आत्म-संयम की भावना होनी चाहिए।
5. परिश्रमशीलता - परिश्रमशीलता वैयक्तिक विकास और सामाजिक प्रगति की आधारशिला है। इससे व्यक्ति में स्वावलम्बन की भावना उत्पन्न होती है। परिश्रमी व्यक्ति ही आदर्श नागरिक बनकर अपना, समाज का और देश का कल्याण कर सकता है।
6. कर्तव्यपरायणता - श्रेष्ठ सामाजिक जीवन के लिए कर्तव्यपरायणता की भावना बहुत महत्त्वपूर्ण है। कर्तव्यपरायणता आदर्श नागरिक जीवन की कुंजी है।
7. परोपकारिता- आदर्श नागरिक में परोपकार की भावना होनी आवश्यक है। समाज के असहाय, दीन-दुःखियों तथा अपाहिजों पर उपकार करना प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक कर्तव्य है।
8. सहानुभूति और दया- सहानुभूति और दया की भावना भी आदर्श नागरिक के अनिवार्य गुण | हैं। ये ही व्यक्ति को दूसरों की सहायता करने के लिए प्रेरित करते हैं।
9. मितव्ययिता- आवश्यक व्यय करना आदर्श नागरिक का एक महान् गुण होता है। जो व्यक्ति फिजूलखर्जी करता है, उसे अपने जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अनावश्यक खर्च करने वाला व्यक्ति स्वयं तो कष्ट उठाता ही है, साथ ही परिवार, समाज व राष्ट्र को भी हानि पहुँचाता है; अतः आदर्श नागरिक में मितव्ययिता का गुण होना आवश्यक है।
10. आज्ञापालन तथा अनुशासन- एक आदर्श नागरिक में आज्ञापालन और अनुशासन की भावना | होनी अनिवार्य है, तभी वह राज्य द्वारा बनाये गये कानूनों का निष्ठापूर्वक पालन कर सकेगा। और दूसरों को भी ऐसा करने की प्रेरणा दे सकेगा।
11. जागरूकता - आदर्श नागरिक के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने अधिकारों के कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहे। आदर्श नागरिक को अपने परिवार, ग्राम, प्रान्त तथा राष्ट्र के हितों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और उनके प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
12. प्रगतिशीलता - आधुनिक युग लोकतन्त्र का युग है; अतः यह आवश्यक है कि आदर्श नागरिक रूढ़ियों एवं कुरीतियों की उपेक्षा कर प्रगतिशील विचारों के अनुकूल आचरण करे ।
13. निःस्वार्थता- आदर्श नागरिक को स्वार्थपरता से दूर रहना चाहिए तथा उसका अन्तःकरण जन-कल्याण के उच्च आदर्शों से प्रेरित होना चाहिए।
14. मताधिकार का उचित प्रयोग- आधुनिक प्रजातान्त्रिक युग में सभी वयस्क स्त्री-पुरुषों को मताधिकार प्राप्त है। इस अधिकार का उचित प्रयोग निष्पक्षता के साथ करना प्रत्येक आदर्श नागरिक का प्रथम कर्तव्य है। इस अधिकार के अनुचित प्रयोग से शासन में भ्रष्टाचार फैल सकता है और शासन-सत्ता अयोग्य व्यक्तियों के हाथ में पहुँच सकती है।
15. देशभक्ति - आदर्श नागरिक का सर्वोच्च गुण देशभक्ति है। प्रत्येक आदर्श नागरिक में देशभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी होनी चाहिए। संकट के समय देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर नागरिक अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए तत्पर हो जाता है।
निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि आदर्श नागरिक में उपर्युक्त गुणों का होना आवश्यक है, क्योंकि आदर्श नागरिक ही समाज और देश को उन्नति के चरम शिखर पर पहुंचा सकते हैं।
In simple words: एक आदर्श नागरिक वह होता है जो शारीरिक रूप से स्वस्थ, सच्चरित्र, शिक्षित, विवेकशील, आत्म-संयमी, परिश्रमी, कर्तव्यपरायण, परोपकारी, सहानुभूतिशील, मितव्ययी, आज्ञाकारी, अनुशासित, जागरूक, प्रगतिशील, निःस्वार्थी, मताधिकार का सही प्रयोग करने वाला और देशभक्त हो।
🎯 Exam Tip: आदर्श नागरिक के गुणों को सूचीबद्ध करते हुए प्रत्येक गुण का संक्षिप्त विवरण दें और उसे राज्य के विकास से जोड़कर समझाएँ।
Question 5. भारतीय नागरिकता पर संक्षिप्त निबन्ध लिखिए ।
या भारतीय नागरिकता अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
Answer:
भारतीय नागरिकता
स्वाधीनता प्राप्ति से पूर्व भारत के नागरिक ब्रिटिश साम्राज्य के नागरिक कहलाते थे। लेकिन उन्हें वे सब अधिकार प्राप्त नहीं थे, जो उस समय एक अंग्रेज को प्राप्त थे। ब्रिटिश सरकार की अधीनता में भारतीयों को अनेक कठिनाइयों तथा असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। अंग्रेज अधिकारी भारतीयों के साथ बड़ा अमानुषिक व्यवहार करते थे। भारतीयों की भाषण एवं प्रेस की स्वतन्त्रता पर भी अनेक प्रतिबन्ध लगे हुए थे। लेकिन 15 अगस्त, 1947 ई० के बाद भारतीयों को नागरिकता सम्बन्धी वे सभी अधिकार मिल गए जिनके माध्यम से वे देश के शासन प्रबन्ध में निर्णायक भूमिका निभाने लगे ।
इकहरी नागरिकता
विश्व के सभी संघीय संविधानों में नागरिकों को दोहरी नागरिकता प्राप्त होती है-एक संघ सरकार की नागरिकता और दूसरी उस इकाई या राज्य (प्रान्त) की नागरिकता, जिसमें वह निवास करता है। लेकिन स्वतन्त्र भारत का संविधान संघात्मक होते हुए भी भारतीयों को इकहरी नागरिकता प्रदान करता है। इसका आशय यह है कि प्रत्येक भारतीय केवल भारत संघ का नागरिक, उस राज्य का नहीं जिसमें वह निवास करता है। भारतीय संविधान ने देश की अखण्डता को कायम रखने के लिए इकहरी नागरिकता की व्यवस्था को अपनाया है।
भारत का नागरिक होने का हकदार
भारतीय संविधान-निर्माताओं ने यह निश्चित नहीं किया था कि भविष्य में भारतीय नागरिकता किस प्रकार प्राप्त की जा सकती है तथा उसका लोप किस प्रकार सम्भव है। भारतीय संविधान में केवल यह वर्णित है कि 27 जनवरी, 1950 ई० को भारत के नागरिक कौन हैं। नागरिकता की प्राप्ति तथा उसके निर्णय और लुप्त लुप्त होने के सम्बन्ध में संविधान ने भारतीय संसद को पूर्ण अधिकार प्रदान कर दिए हैं। इस प्रकार संविधान ने नागरिकता सम्बन्धी नियमों के निर्माण का एकाधिकार भारतीय संसद को सौंप दिया है। भारतीय संविधान के लागू होने के समय नागरिकता सम्बन्धी सिद्धान्त निम्नवत् निर्धारित किए गए थे
1. जन्म- भारत राज्य क्षेत्र में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भारत संघ की नागरिकता प्राप्त होगी ।
2. वंश- वे सभी व्यक्ति भारत संघ के नागरिक माने जाएँगे, जिनके माता-पिता में से किसी एक ने भारत राज्य क्षेत्र में जन्म लिया है।
3. निवास- वे सभी व्यक्ति भारत संघ के नागरिक होंगे, जो संविधान लागू होने के पाँच वर्ष पूर्व से भारत राज्य क्षेत्र के सामान्य निवासी थे।
4. शरणार्थी- पाकिस्तान से भारत आने वाले व्यक्तियों में से वे व्यक्ति भारत संघ के नागरिक माने जाएँगे- (अ) जो 19 जुलाई, 1948 ई० से पूर्व भारत चले आए थे और जिनके माता या पिता का जन्म अविभाजित भारत में हुआ था। (ब) जो 19 जुलाई, 1948 ई० के बाद भारत आए हों और तत्कालीन भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कर लिए गए हों।
5. भारतीय विदेशी - भारत के संविधान में ऐसे भारतीयों को भी नागरिकों की श्रेणी में पंजीकृत करने का उल्लेख है जो भारत राज्य क्षेत्र के बाहर किसी अन्य देश में निवास करते हों। उनके लिए निम्नलिखित दो शर्ते हैं-(अ) वे या उनके माता-पिता अथवा पितामह-पितामही में से कोई एक अविभाजित भारत में जन्में हों। (ब) उन्होंने अमुक देश में रहने वाले भारतीय राजदूत के पास भारत संघ का नागरिक बनने के लिए आवेदन-पत्र दे दिया हो और उन्हें भारतीय नागरिक पंजीकृत कर दिया गया हो।
भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955
भारतीय संसद ने सन् 1955 में भारतीय नागरिकता अधिनियम पारित किया। इस अधिनियम में भारतीय नागरिकता की प्राप्ति और उसके विलोपन के प्रकार को बताया गया है। इस अधिनियम के प्रावधान निम्नलिखित हैं-
भारतीय नागरिकता की प्राप्ति
1. जन्म- उने सभी व्यक्तियों को भारत संघ की नागरिकता प्राप्त होगी, जिनका जन्म 26 जनवरी, 1950 ई० के बाद भारत राज्य क्षेत्र के किसी भी भाग में हुआ हो।
2. पाकिस्तान से आगमन या प्रव्रजन- उन सभी व्यक्तियों को, जो 26 जुलाई, 1949 ई० के बाद भारते आए हों, भारत संघ की नागरिकता प्राप्त हो जाएगी, बशर्ते वे भारतीय नागरिकों के रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करा लें और कम-से-कम एक वर्ष से भारत में अवश्य निवास | करते हों।
3. पंजीकरण- विदेशों में निवास करने वाले भारतीय भारत सरकार के दूतावास में अपना नाम | पंजीकृत कराकर भारतीय संघ की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
4. विवाह- उन सभी विदेशी स्त्रियों को, जिन्होंने भारतीयों से विवाह किया है, भारत संघ की नागरिकता प्राप्त हो जाएगी ।
5. आवेदन-पत्र- कोई भी विदेशी व्यक्ति आवेदन-पत्र देकर भारत संघ का नागरिक बन सकता है, लेकिन शर्त यह है कि वह अच्छे आचरण का हो, संविधान में वर्णित किसी एक भाषा का ज्ञाता हो, भारत में स्थायी रूप से निवास करने की इच्छा रखता हो और कम-से-कम एक वर्ष | से भारत में लगातार रह रहा हो।
6. निवास अथवा नौकरी- राष्ट्रमण्डल के सदस्य देशों के वे नागरिक जो भारत में रहते हों या भारत में नौकरी करते हों, तो वे प्रार्थना-पत्र देकर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकेंगे ।
7. भूमि विस्तार - यदि किसी नए प्रदेश को भारत में मिला लिया जाता है, तो वहाँ के निवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो जाएगी ।
भारतीय नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1986 तथा 1992
भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों की सरलता का लाभ उठाकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब और असम जैसे राज्यों में लाखों विदेशियों ने अनधिकृत रूप से भारत में प्रवेश कर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर ली। अतः केन्द्र सरकार ने भारतीय नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1986 पारित करके नागरिकता सम्बन्धी प्रावधानों को कठोर बना दिया।
सन 1986 के संशोधन अधिनियम के अनुसार कोई भी विदेशी जब तक कम-से-कम 10 वर्ष तक भारत 'राज्य-क्षेत्र का निवासी नहीं रहा होगा, भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं कर सकेगा। भारतीय नागरिकता सम्बन्धी प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर तथा असम राज्यों पर भी लागू किया गया। इस संशोधन अधिनियम में यह शर्त भी जोड़ दी गई है कि भारत में जन्म लेने वाले व्यक्ति को भारतीय नागरिकता तभी प्राप्त होगी, जबकि उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक होगा।
सन् 1992 में भारतीय संसद ने नागरिकता से सम्बन्धित दूसरा संशोधन अधिनियम पारित होगा। इस संशोधन अधिनियम के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि विदेश में निवास कर रहे किसी भारतीय दम्पती के यदि कोई सन्तान उत्पन्न होती है, तो वह भारतीय नागरिक मानी जाएगी, बशर्ते कि दम्पती में से किस एक (पति या पत्नी) ने पहले से ही भारतीय नागरिकता प्राप्त कर रखी हो। इससे पूर्व केवल पति का ही भारतीय नागरिक होना अनिवार्य था।
In simple words: भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 और उसके संशोधनों के तहत, नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण और भूमि विस्तार जैसे विभिन्न तरीकों से प्राप्त की जा सकती है, और भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है।
🎯 Exam Tip: भारतीय नागरिकता अधिनियम के मुख्य प्रावधानों और उसके संशोधनों को याद रखें, विशेषकर नागरिकता प्राप्त करने और एकल नागरिकता की अवधारणा पर।
Question 6. आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं का वर्णन कीजिए तथा उन्हें दूर करने के सुझाव दीजिए।
या आदर्श नागरिकता प्राप्त करने के मार्ग में कौन-कौन-सी बाधाएँ हैं? विवेचना कीजिए।
या आदर्श नागरिकता के मार्ग की बाधाओं के निवारण के उपायों की व्याख्या कीजिए।
Answer:
आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाएँ
कोई भी नागरिक जन्म से ही एक आदर्श नागरिक के गुणों को लेकर पैदा नहीं होता, अपितु वह बड़ा होकर अपने जीवन में इन गुणों को विकसित करता है। परिवार, समुदाय, समाज और राज्य उसके लिए उन सुविधाओं को जुटाते हैं जिनसे वह एक आदर्श नागरिक बन सकता है। किन्तु कभी-कभी आदर्श नागरिक बनने के मार्ग में अनेक बाधाएँ उपस्थित हो जाती हैं, जिसके फलस्वरूप वह आदर्श नागरिक के गुणों से वंचित रह जाता है। ये बाधाएँ अग्रलिखित हैं
1. अशिक्षा और अज्ञानता- अशिक्षा ही अज्ञानता की जड़ है। अज्ञानी व्यक्ति में उचित और अनुचित का अन्तर कर पाने का विवेक नहीं होता। अशिक्षित व्यक्ति न तो अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और न ही राष्ट्र की सेवा। अतः अशिक्षा व अज्ञानता व्यक्ति के आदर्श नागरिक बनने के मार्ग में बाधा उत्पन्न करते हैं।
2. व्यक्तिगत स्वार्थ - यह आदर्श नागरिक के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। स्वार्थी व्यक्ति अपने | स्वार्थ को सर्वोपरि मानता है और अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए समाज तथा राष्ट्र के हितों का भी बलिदान कर देता है। वह केवल अपने विषय में सोचता, कार्य करता और जीवित रहता है तथा किसी भी तरह अपने स्वार्थों की पूर्ति कर लेना ही सब कुछ मान लेता है; उदाहरणार्थ-व्यापारी के रूप में कालाबाजारी, सरकारी अधिकारी के रूप में रिश्वतखोरी आदि । निजी स्वार्थों की प्रबलता ही कुछ मुद्राओं के लिए राष्ट्रीय हितों का सौदा कर लेती है।
3. निर्धनता अथवा आर्थिक विषमता- आदर्श नागरिकता के मार्ग में आर्थिक बाधाएँ प्रबल होती हैं। आर्थिक बाधाओं में दरिद्रता, बेरोजगारी तथा आर्थिक विषमता मुख्य हैं। भूखे व्यक्ति की नैतिकता और ईमान केवल रोटी बन जाती है। गम्भीर आर्थिक विषमताएँ उनमें वर्ग-संघर्ष की भावना उत्पन्न करती हैं, जिससे व्यक्ति अपने वर्ग के हित के लिए समाज के हित को अनदेखा कर देता है।
4. अकर्मण्यता- अकर्मण्यता अथवा आलस्य व्यक्ति को कार्य करने के प्रति उदासीन बना देता है। ऐसा व्यक्ति किसी प्रकार के कार्य करने में रुचि नहीं लेता और अपने कर्तव्य-पालन से दूर रहना चाहता है। इस प्रकारे अकर्मण्यता आदर्श नागरिकता की उपलब्धि में महान् दुर्गुण है।
5. साम्प्रदायिकता एवं जातीयता- अनेक बार व्यक्ति अपने सम्प्रदाय अथवा जातिगत स्वार्थों के वशीभूत होकर समाज और राज्य के हितों की भी अवहेलना करने लगता है। इसी भावना के कारण देश के अनेक भागों में भीषण रक्तपात तथा आत्मदाह जैसी घटनाएँ घटित हुई हैं। इस प्रकार की संकुचित भावनाएँ मनुष्य को आदर्श नागरिक नहीं बनने देतीं।
6. अनुचित दलबन्दी - आधुनिक प्रजातन्त्र का आधार दलीय व्यवस्था है। स्वस्थ दलीय परम्परा प्रजातन्त्रीय शासन की सफलता में सहायक होती है तथा जनसाधारण में राजनीतिक चेतना उत्पन्न करती है; किन्तु अनुचित दलबन्दी सारे वातावरण को विषाक्त कर देती है। यहाँ तक कि विभिन्न राजनीतिक दल अपने लाभ के लिए जातीय और साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काकर दंगे भी कराते हैं। ऐसे दूषित वातावरण में आदर्श नागरिकता की कल्पना भी असम्भव है।
7. सामाजिक कुप्रथाएँ और रूढ़िवादिता- कुछ सामाजिक कुप्रथाएँ भी आदर्श नागरिकता के मार्ग | में बाधा बन जाती हैं। भारतीय समाज में छुआछूत, जाति-पाँति का भेद, बाल-विवाह, दहेज-प्रथा, सती- प्रथा, विधवा-विवाह आदि ऐसी ही सामाजिक कुप्रथाएँ हैं।
8. उग्र-राष्ट्रीयता और साम्राज्यवाद- उग्र-राष्ट्रीयता के कारण नागरिक अपने राष्ट्र को ऊँचा समझते हैं तथा दूसरे राष्ट्रों से घृणा करते हैं। वे अपने राष्ट्र के क्षुद्र स्वार्थ के लिए पड़ोसी राष्ट्रों में साम्प्रदायिक वैमनस्य और आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। इसके अतिरिक्त साम्राज्यवादी प्रवृत्ति भी आदर्श नागरिक जीवन की प्रबल शत्रु है। साम्राज्यवादी देश छोटे राज्यों को पराधीन कर लेते । हैं, जिसके कारण युद्ध होते हैं; उदाहरणार्थ-इराक की साम्राज्यवादी कार्यवाही के कारण इराक व बहुराष्ट्रीय सेनाओं में हुआ भीषण युद्ध ।
आदर्श नागरिकता की बाधाओं को दूर करने के उपाय
आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाओं को निम्नलिखित उपायों द्वारा समाप्त किया जा सकता है
1. उचित शिक्षा को प्रसार- शिक्षा के प्रसार से व्यक्ति की बौद्धिक और सांस्कृतिक उन्नति होती है, अज्ञानता समाप्त होती है और उसमें विवेक जाग्रत होता है। शिक्षित व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहता है। इसलिए शिक्षा के अधिकाधिक विकास से अज्ञानता को । दूर करके व्यक्ति को आदर्श नागरिक बनने में सहायता की जा सकती है।
2. निर्धनता का विनाश- ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे सभी व्यक्ति अपने भोजन, वस्त्र, निवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकें। ऐसा होने पर ही | वे अपने सार्वजनिक कर्तव्यों का सम्पादन कर सकते हैं। अतः आर्थिक विषमताओं का अन्त ।। करके अधिकाधिके रूप में आर्थिक समानता स्थापित की जानी चाहिए ।
3. नैतिकता का उत्थान- नागरिकों को उत्तम चरित्र ही राष्ट्र की अमूल्य निधि है। जिस देश के नागरिकों में नैतिक मूल्यों का समावेश होगा, उस देश का सर्वांगीण विकास होगा। व्यक्ति को निजी स्वार्थों का त्याग करके जनहित को सर्वोपरि मानना चाहिए ।
4. समाज- सुधार और रूढ़िवादिता का अन्त-समाज में प्रचलित कुप्रथाओं को सरकार द्वारा . समाज-सुधारकों की सहायता से समाप्त किया जाना चाहिए। ऐसा करने पर ही आदर्श नागरिकता का विकास सम्भव है।
5. स्वतन्त्र और शक्तिशाली प्रेस- आदर्श नागरिकता के विकास के लिए स्वतन्त्र और शक्तिशाली प्रेस का होना बहुत आवश्यक है। विभिन्न घटनाओं और गतिविधियों की सही जानकारी नागरिकों को स्वतन्त्र रूप से विचार करने के प्रेरित करती है, किन्तु ऐसा तभी सम्भव है जब प्रेस सरकारी नियन्त्रण से मुक्त हो ।
6. स्वस्थ राजनीतिक दलों की स्थापना- देश में राजनीतिक दलों को संगठन विशुद्ध राजनीतिक व आर्थिक आधार पर किया जाना चाहिए। ऐसा होने पर राजनीतिक दल समाज व राष्ट्र के हितों को दृष्टि में रखकर काम करेंगे। ऐसे राजनीतिक दल ही नागरिकों को प्रत्येक विषय पर सार्वजनिक हित की दृष्टि से सोचने की दिशा में अग्रसर करेंगे।
7. विश्व-बन्धुत्व की भावना उग्र- राष्ट्रीयता तथा साम्राज्यवाद के दोषों से बचने के लिए विश्व बन्धुत्व की भावना को अपनाना अत्यन्त आवश्यक है। 'जीओ और जीने दो' तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' आदर्श नागरिकता के महान् सन्देश हैं, जो परस्पर सहयोग और सह-अस्तित्व की धारणा पर अवलम्बित हैं। इस भावना को अपनाकर एक आदर्श नागरिक अपने देश के विकास के लिए इस प्रकार कार्य करता है कि वह अन्य देशों की प्रगति में बाधक न हो।
In simple words: आदर्श नागरिकता के मार्ग में अशिक्षा, स्वार्थ, निर्धनता, अकर्मण्यता, साम्प्रदायिकता, अनुचित दलबन्दी, सामाजिक कुप्रथाएँ और उग्र-राष्ट्रीयता जैसी बाधाएँ आती हैं, जिन्हें शिक्षा के प्रसार, निर्धनता उन्मूलन, नैतिकता के उत्थान, समाज सुधार, स्वतन्त्र प्रेस, स्वस्थ राजनीतिक दल और विश्व-बन्धुत्व की भावना को बढ़ावा देकर दूर किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: बाधाओं और उनके निवारण के उपायों को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें, ताकि उत्तर संरचनात्मक और आसानी से याद रखने योग्य हो।
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