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Detailed Chapter 11 पी ब्लॉक के तत्व UP Board Solutions for Class 11 Chemistry
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Class 11 Chemistry Chapter 11 पी ब्लॉक के तत्व UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 11 The p-block Elements (p-ब्लॉक के तत्त्व)
पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. (क) B से Tl तक तथा (ख) C से Pb तक की ऑक्सीकरण अवस्थाओं की भिन्नता के क्रम की व्याख्या कीजिए।
Answer:
(क) B से Tl तक (बोरॉन परिवार) ऑक्सीकरण अवस्था [Oxidation state from B to Tl (Boron family)]
बोरॉन परिवार (वर्ग 13) के तत्वों का विन्यास ns²p¹ होता है। इसका तात्पर्य यह है कि बन्ध निर्माण के लिए तीन संयोजी इलेक्ट्रॉन उपलब्ध हैं। इन इलेक्ट्रॉनों का त्याग करके ये परमाणु अपने यौगिकों में +3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। यद्यपि इन तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था में निम्नलिखित प्रवृत्ति प्रेक्षित होती है-
1. प्रथम दो तत्व बोरॉन तथा ऐलुमिनियम यौगिकों में केवल +3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं, परन्तु शेष तत्व-गैलियम, इण्डियम तथा थैलियम +3 ऑक्सीकरण अवस्था के साथ-साथ +1 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करते हैं अर्थात् ये परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
2. +3 ऑक्सीकरण अवस्था को स्थायित्व ऐलुमिनियम से आगे जाने पर घटता है तथा अन्तिम तत्व थैलियम की स्थिति में, +1 ऑक्सीकरण अवस्था, +3 ऑक्सीकरण अवस्था से अधिक स्थायी होती है। इसका अर्थ यह है कि TlCl, TlCl₃ से अधिक स्थायी होता है।
(ख) C से Pb तक (कार्बन परिवार) ऑक्सीकरण अवस्था [Oxidation state from C to Pb (Carbon family)]
कार्बन परिवार (समूह 14) के तत्वों का विन्यास ns²p² होता है। स्पष्ट है कि इन तत्वों के परमाणुओं के बाह्यतम कोश में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं। इन तत्वों द्वारा सामान्यतः +4 तथा +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाई जाती है। कार्बन ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है। चूंकि प्रथम चार आयनन एन्थैल्पी का योग अति उच्च होता है; अतः +4 ऑक्सीकरण अवस्था में अधिकतर यौगिक सहसंयोजक प्रकृति के होते हैं। इस समूह के गुरुतर तत्वों में Ge< Sn
1. SnCl₄ तथा PbCl₄ की तुलना में SnCl₂ तथा PbCl₂ अधिक सरलता से बनते हैं।
2. PbCl₂, SnCl₂ से अधिक स्थायी होता है चूंकि इसमें अक्रिय युग्म प्रभाव की परिमाण अधिक होता है।
चतु:संयोजी अवस्था में अणु के केन्द्रीय परमाणु पर आठ इलेक्ट्रॉन होते हैं। इलेक्ट्रॉन परिपूर्ण अणु होने के कारण सामान्यतया इलेक्ट्रॉनग्राही या इलेक्ट्रॉनदाता स्पीशीज की अपेक्षा इनसे नहीं की जाती है। यद्यपि कार्बन अपनी सहसंयोजकता +4 का अतिक्रमण नहीं कर सकता है, परन्तु समूह के अन्य तत्व ऐसा करते हैं। यह उन तत्वों में 4-कक्षकों की उपस्थिति के कारण होता है। यही कारण है कि ऐसे तत्वों के हैलाइड जल-अपघटन के उपरान्त दाता स्पीशीज (donor species) से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके संकुल बनाते हैं। उदाहरणार्थ-कुछ स्पीशीज; जैसे-(SiF₆)²-, (GeCl₆)²- तथा Sn(OH)₆²-- ऐसी होती हैं, जिनके केन्द्रीय परमाणु sp³d² संकरित होते हैं।
In simple words: बोरॉन परिवार (वर्ग 13) के तत्व +3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं, लेकिन नीचे जाने पर थैलियम में +1 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थिर हो जाती है। कार्बन परिवार (वर्ग 14) के तत्व +4 और +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं, जिसमें अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण भारी तत्वों में +2 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अवस्थाओं में भिन्नता की व्याख्या करते समय अक्रिय युग्म प्रभाव (inert pair effect) और परमाणुओं के आकार का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. TlCl₃ की तुलना में BCl₃ के उच्च स्थायित्व को आप कैसे समझाएँगे?
Answer: उत्तेजित अवस्था में बोरॉन की संयोजक कोश (valence shell) में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं जो तीन Cl परमाणु से सहसंयोजक आबन्ध द्वारा जुड़कर BCl₃ अणु का निर्माण करते हैं। BCl₃ में बोरोन +3 ऑक्सीकरण अवस्था और sp² संकरित अवस्था में पाया जाता है। pπ-pπ back bonding BCl₃ अणु को आंशिक रूप से स्थायी बनाती है। दूसरी ओर अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण Tl के 6s इलेक्ट्रॉन युग्म बन्ध बनाने में रूचि नहीं रखते। इस कारण Tl की +1 ऑक्सीकरण अवस्था +3 ऑक्सीकरण अवस्था से अधिक स्थाई है। इसलिए +3 ऑक्सीकरण अवस्था में निर्मित TlCl₃, अधिक स्थाई नहीं होता। इस कारण BCl₃ TlCl₃ से अधिक स्थाई होता है।
In simple words: BCl₃ में बोरॉन का pπ-pπ बैक बॉन्डिंग उसे अधिक स्थायी बनाता है, जबकि TlCl₃ में थैलियम का अक्रिय युग्म प्रभाव +3 ऑक्सीकरण अवस्था को कम स्थायी बनाता है, जिससे BCl₃ अधिक स्थायी हो जाता है।
🎯 Exam Tip: बैक बॉन्डिंग और अक्रिय युग्म प्रभाव जैसे अवधारणाओं का उपयोग करके स्थायित्व की तुलना करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड लूइस अम्ल के समान व्यवहार क्यों प्रदर्शित करता है?
Answer: बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड BF₃ अणु में F परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों से साझा करके केन्द्रीय बोरॉन परमाणु के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों की संख्या 6 (तीन युग्म) होती है। अतः यह एक इलेक्ट्रॉन-न्यून अणु है तथा यह स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करके लूइस अम्ल के समान व्यवहार प्रदर्शित करता है।
उदाहरणार्थ-बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड सरलतापूर्वक अमोनिया से एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करके BF₃.NH₃ उपसहसंयोजक यौगिक बनाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड (BF₃) और अमोनिया (NH₃) के बीच अभिक्रिया को दर्शाता है। BF₃, एक लुईस अम्ल है जिसमें बोरॉन इलेक्ट्रॉन-न्यून है, अमोनिया के नाइट्रोजन से एक इलेक्ट्रॉन युग्म (लुईस क्षारक) स्वीकार करता है। इससे एक योगात्मक यौगिक BF₃.NH₃ बनता है, जहाँ एक उपसहसंयोजक बंध के माध्यम से इलेक्ट्रॉन साझा होते हैं।
\[ F-B + :N-H \implies F-B-N-H \]
\[ F \quad H \quad \quad \quad F \quad H \]
(लूइस अम्ल) (लूइस क्षारक) (योगात्मक यौगिक)
In simple words: BF₃ में बोरॉन के पास सिर्फ 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे यह इलेक्ट्रॉन-न्यून होता है और एक इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करके लूइस अम्ल की तरह व्यवहार करता है।
🎯 Exam Tip: लुईस अम्ल की परिभाषा और BF₃ के इलेक्ट्रॉन-न्यून स्वभाव को स्पष्ट रूप से समझाएं, उदाहरण सहित।
Question 4. BCl₃ तथा CCl₄, यौगिकों का उदाहरण देते हुए जल के प्रति इनके व्यवहार के औचित्य को समझाइए ।
Answer: BCl₃ के केन्द्रीय परमाणु B के संयोजक कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए यह इलेक्ट्रॉन न्यून अणु है और H₂O द्वारा दिये गये इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर लेता है। अतः जब BCl₃ को जल में घोला जाता है तो यह जल-अपघटित (hydrolysis) होकर बोरिक अम्ल और HCl देता है।
\[ BCl₃ + 3H₂O \implies H₃BO₃ + 3HCl \]
CCl₄ में C का अष्टक पूर्ण होता है और यह इलेक्ट्रॉन युग्म त्यागने अथवा ग्रहण करने की प्रवृत्ति नहीं रखता है। अतः यह जल से कोई क्रिया नहीं करता है।
In simple words: BCl₃ जल के साथ अभिक्रिया करके बोरिक अम्ल और HCl बनाता है क्योंकि बोरॉन इलेक्ट्रॉन-न्यून होता है, जबकि CCl₄ जल के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करता क्योंकि कार्बन का अष्टक पूर्ण होता है और यह इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण या त्यागने की प्रवृत्ति नहीं रखता।
🎯 Exam Tip: जल-अपघटन की व्याख्या करते समय केन्द्रीय परमाणु की इलेक्ट्रॉन न्यूनता या अष्टक पूर्णता को उजागर करें।
Question 5. क्या बोरिक अम्ल प्रोटोनी अम्ल है? समझाइए ।
Answer: नहीं, बोरिक अम्ल प्रोटोनी अम्ल नहीं है, क्योंकि यह जल में आयनित होकर H⁺ तथा OH¯ नहीं देता है। B के छोटे आकार और उसके संयोजक कोश में 6 इलेक्ट्रॉन उपस्थित होने के कारण H₃BO₃ एक लूइस अम्ल (Lewis acid) की तरह व्यवहार करता है। जब यह जल में मिलाया जाता है। तो यह H₂O के O परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन युग्म प्राप्त करके \( [B(OH)₄]⁻ \) का निर्माण करता है।
\[ (HO)₃B + :O_{H}^{H} \implies (HO)₃B \leftarrow O_{H}^{H} \implies [B(OH)₄]⁻ + H⁺ \]
इस अभिक्रिया में एक H⁺ के उद्गम के कारण यह एक दुर्बल मोनोबेसिक अम्ल की भाँति व्यवहार करता है।
In simple words: बोरिक अम्ल प्रोटोनी अम्ल नहीं है, बल्कि एक लुईस अम्ल है। यह पानी से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करके \( [B(OH)₄]⁻ \) बनाता है और H⁺ आयन मुक्त करता है, जिससे यह एक दुर्बल मोनोबेसिक अम्ल के रूप में कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: प्रोटोनी अम्ल और लुईस अम्ल के बीच के अंतर को स्पष्ट करें, खासकर बोरिक अम्ल के संदर्भ में।
Question 6. क्या होता है, जब बोरिक अम्ल को गर्म किया जाता है?
Answer: 370 K से अधिक ताप पर गर्म किए जाने पर बोरिक अम्ल (ऑर्थोबोरिक अम्ल) मेटाबोरिक अम्ल (HBO₂) बनाता है, जो और अधिक गर्म करने पर बोरिक ऑक्साइड (B₂O₃) में परिवर्तित हो जाता है।
In simple words: बोरिक अम्ल को गर्म करने पर पहले मेटाबोरिक अम्ल और फिर बोरिक ऑक्साइड बनता है।
🎯 Exam Tip: बोरिक अम्ल के तापीय अपघटन के चरणों और उत्पादों को सही ढंग से याद रखें।
Question 7. BF₃ तथा BH⁻₄ की आकृति की व्याख्या कीजिए। इन स्पीशीज में बोरॉन के संकरण को निर्दिष्ट कीजिए ।
Answer: बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड (Boron trifluoride, BF₃) - इसमें केन्द्रीय परमाणु बोरॉन है। जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s², 2s² 2p¹ है। तलस्थ अवस्था में इसमें केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है जिसके आधार पर केवल एक सहसंयोजक बन्ध ही बन सकता है। अतः BF₃ अणु बनने में यह अवश्य ही उत्तेजित अवस्था में होगा जिस स्थिति में एक s-इलेक्ट्रॉन p-कक्षक में उन्नत हो जाएगा-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र बोरॉन के तलस्थ (ground) और उत्तेजित (excited) अवस्थाओं में इलेक्ट्रॉन विन्यास को दर्शाता है। तलस्थ अवस्था में 2s कक्षक में दो इलेक्ट्रॉन और 2p कक्षक में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है। उत्तेजित अवस्था में 2s का एक इलेक्ट्रॉन 2p कक्षक में चला जाता है, जिससे एक 2s कक्षक और दो 2p कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो sp² संकरण के लिए उपलब्ध होते हैं।
2s 2p
आद्य अथवा तलस्थ अवस्था : B \( \quad \uparrow\downarrow \quad \uparrow\quad \quad \quad \)
उत्तेजित अवस्था : B \( \quad \uparrow\quad \quad \uparrow\quad \uparrow\quad \quad \)
उत्तेजित बोरॉन में तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं जिससे यह तीन सहसंयोजक बन्ध बना सकता है। तीन फ्लुओरीन BF₃ में युग्मन के लिए तीन इलेक्ट्रॉन प्रदान करते हैं।
इसमें एक बन्ध -इलेक्ट्रॉन के माध्यम से है तथा अन्य दो बन्ध दो p-इलेक्ट्रॉनों के माध्यम से हैं। अतः तीनों बन्ध समान नहीं होने चाहिए। s तथा pₓ व pᵧ कक्षकों की ऊर्जा का संचय होकर तीनों कक्षकों में बराबर राशि में वितरित हो जाता है। इस प्रकार तीन sp²- संकर कक्षकों का उद्भव होता है। इन कक्षकों के बीच 120° का, कोण होता है जिससे इलेक्ट्रॉन युग्मों में पारस्परिक प्रतिकर्षण न्यूनतम रहता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र BF₃ अणु की संरचना को दर्शाता है। बोरॉन परमाणु sp² संकरित होता है और तीन फ्लोरीन परमाणुओं से बंध बनाता है, जिससे 120° का बंध कोण बनता है। अणु त्रिकोणीय समतलीय होता है, जिसमें F-B और F-B के बीच 120 डिग्री का कोण दर्शाया गया है। प्रत्येक B-F बंध (σ-आबंध) sp²-p अतिव्यापन से बनता है।
बोरॉन टेट्रा हाइड्राइडो ऋणायन (BH⁻₄) - वर्ग 13 के तत्व MH; प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं। ये हाइड्राइड दुर्बल लूइस अम्ल होते हैं तथा प्रबल लूइस क्षारकों (:B) के साथ MH₃ : B प्रकार के योग उत्पाद बनाते हैं (M = B, Al, Ga) । इन हाइड्राइडों का निर्माण इनके बाह्यतम कोश में उपस्थित रिक्त । p-कक्षकों के कारण होता है जो हाइड्राइड आयन (H⁻) से तुरन्त इलेक्ट्रॉन युग्म लेकर टेट्रा हाइड्राइडो ऋणायन बनाते हैं। BH⁻₄ की संरचना संकरण के प्रकार के आधार पर निर्धारित की जा सकती है। संकरण का प्रकार निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है
H = [V + M - C + A]
जहाँ H= संकरण में सम्मिलित कक्षकों की संख्या, V= केन्द्रीय परमाणु के संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या, M= एकल संयोजी परमाणुओं की संख्याए, C = धनायन पर आवेश, A = ऋणायन पर आवेश इस प्रकार
H = [3+4-0+1]=4
चूँकि संकरण में भाग लेने वाले कक्षकों की संख्या 4 है; अतः यह sp³ संकरण है। sp³ संकरण में एक s-कक्षक तथा तीन p-कक्षकों के सम्मिश्रण से चार समतुल्य संकर कक्षक बनते हैं। इन चारों कक्षकों में अल्पतम प्रतिकर्षण होने के लिए वे एक समचतुष्फलक के चारों कोनों की ओर दिष्ट होते हैं। तथा परस्पर 109°28′ का कोण बनाते हैं। अतः BH⁻₄ की आकृति निम्नवत् होगी-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र \( [BH₄]⁻ \) की चतुष्फलकीय संरचना को दर्शाता है। बोरॉन परमाणु केंद्र में स्थित होता है और चार हाइड्रोजन परमाणु इसके चारों ओर समचतुष्फलकीय रूप से जुड़े होते हैं। सभी बंध कोण लगभग 109°28' होते हैं, जो sp³ संकरण के अनुरूप हैं।
In simple words: BF₃ में बोरॉन sp² संकरित होता है और इसकी आकृति त्रिकोणीय समतलीय होती है। BH⁻₄ में बोरॉन sp³ संकरित होता है और इसकी आकृति चतुष्फलकीय होती है।
🎯 Exam Tip: संकरण की गणना के लिए सूत्र और VSEPR सिद्धांत का उपयोग करके अणुओं की ज्यामिति का निर्धारण करें।
Question 8. ऐलुमिनियम के उभयधर्मी व्यवहार दर्शाने वाली अभिक्रियाएँ दीजिए।
Answer: ऐलुमिनियम अम्लों तथा क्षारों दोनों से क्रिया कर उभयधर्मी व्यवहार दर्शाता है।
उदाहरणार्थ-
\[ 2Al(s) + 6HCl(aq) \implies 2AlCl₃ (aq) + 3H₂(g) \]
\[ 2Al(s) + 2NaOH(aq) + 6H₂O(l) \implies 2Na[Al(OH)₄] (aq) + 3H₂(g) \]
Sodium tetrahydroxo aluminate (iii)
In simple words: ऐलुमिनियम अम्लों और क्षारों दोनों के साथ अभिक्रिया करके उभयधर्मी व्यवहार दिखाता है, जिससे क्रमशः लवण और हाइड्रोजन गैस बनती है।
🎯 Exam Tip: उभयधर्मी पदार्थों की अभिक्रियाओं में अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया के समीकरणों को याद रखें।
Question 9. इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक क्या होते हैं? क्या BCl₃ तथा SiCl₄ इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक हैं? समझाइए ।
Answer: जिन स्पीशीज में केन्द्रीय परमाणु का अष्टक पूर्ण नहीं होता (अर्थात् संयोजक कोश में आठ इलेक्ट्रॉन नहीं होते), वे इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक कहलाते हैं।
BCl₃ के केन्द्रीय परमाणु में मात्र 6 इलेक्ट्रॉन हैं। इसलिए यह इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक है। SiCl₄ में । केन्द्रीय परमाणु Si (silicon) के पास 8 इलेक्ट्रॉन हैं। इसलिए उपर्युक्त परिभाषा के अनुसार यह इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक नहीं है।
In simple words: इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक वे होते हैं जिनके केंद्रीय परमाणु का अष्टक अपूर्ण होता है। BCl₃ इलेक्ट्रॉन न्यून है क्योंकि बोरॉन के पास 6 इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि SiCl₄ इलेक्ट्रॉन न्यून नहीं है क्योंकि सिलिकॉन के पास 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिकों को पहचानने के लिए केन्द्रीय परमाणु के संयोजक कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या गिनना महत्वपूर्ण है।
Question 10. CO₃²⁻ तथा HCO₃⁻ की अनुनादी संरचनाएँ लिखिए ।
Answer: CO₃²⁻ आयन की अनुनाद संरचनाएँ-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र कार्बोनेट आयन (CO₃²⁻) की तीन अनुनादी संरचनाओं को दर्शाता है। प्रत्येक संरचना में एक कार्बन परमाणु केंद्र में होता है जो तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से जुड़ा होता है। एक संरचना में एक ऑक्सीजन के साथ दोहरा बंध और अन्य दो ऑक्सीजन के साथ एकल बंध होते हैं, जबकि एकल बंध वाले ऑक्सीजन पर ऋण आवेश होता है। इन संरचनाओं में दोहरा बंध और ऋण आवेश की स्थिति भिन्न होती है, जो अनुनाद को दर्शाती है।
HCO₃⁻ की अनुनाद संरचनाएँ-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र बाइकार्बोनेट आयन (HCO₃⁻) की दो अनुनादी संरचनाओं को दर्शाता है। एक कार्बन परमाणु केंद्र में है, जो एक हाइड्रोजन से जुड़े ऑक्सीजन, एक अन्य ऑक्सीजन पर ऋण आवेश और एक ऑक्सीजन के साथ दोहरे बंध से जुड़ा होता है। दूसरी संरचना में, दोहरा बंध और ऋण आवेश की स्थिति आपस में बदल जाती है, जो अनुनाद को दर्शाती है।
In simple words: CO₃²⁻ और HCO₃⁻ आयन कई अनुनादी संरचनाएं प्रदर्शित करते हैं जहाँ डबल बॉन्ड और नेगेटिव चार्ज विभिन्न ऑक्सीजन परमाणुओं के बीच विस्थापित होते रहते हैं।
🎯 Exam Tip: अनुनादी संरचनाएं बनाते समय इलेक्ट्रॉनों के स्थानीयकरण और आवेश के वितरण को सही ढंग से दर्शाएं।
Question 11. (क) CO₃²⁻, (ख) हीरा तथा (ग) ग्रेफाइट में कार्बन की संकरण-अवस्था क्या होती है?
Answer:
(क) sp²
(ख) sp³
(ग) sp²
In simple words: CO₃²⁻ और ग्रेफाइट में कार्बन sp² संकरित होता है, जबकि हीरे में कार्बन sp³ संकरित होता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न अणुओं और अपररूपों में कार्बन के संकरण को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनकी संरचना और गुणों को निर्धारित करता है।
Question 12. संरचना के आधार पर हीरा तथा ग्रेफाइट के गुणों में निहित भिन्नता को समझाइए ।
Answer: हीरा तथा ग्रेफाइट में संरचनात्मक भिन्नता (Structural differences between Diamond and Graphite)
| क्र०सं० | हीरा | ग्रेफाइट |
| (1) | हीरे में क्रिस्टलीय जालक होता है। इसमें एक-दूसरे से बँधे कार्बन परमाणुओं का जाल होता है। | ग्रेफाइट में पर्तें 340 pm की दूरी पर पृथक्कृत रहती हैं। इन पर्तों के बीच यह अत्यधिक दूरी प्रदर्शित करती है कि केवल दुर्बल वाण्डरवाल्स बल इन पर्तों को बाँधे रखते हैं। |
| (2) | प्रत्येक कार्बन परमाणु sp³ संकरित होता है तथा एकल सहसंयोजी बन्ध द्वारा चार अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा रहता है। | ग्रेफाइट में, प्रत्येक कार्बन परमाणु sp² संकरण प्रदर्शित करता है तथा तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजी रूप से जुड़ा रहता है। |
| (3) | प्रत्येक कार्बन परमाणु चतुष्फलक के केन्द्र पर स्थित होता है तथा अन्य चार कार्बन परमाणु चतुष्फलक के चारों कोनों पर स्थित होते हैं। | प्रत्येक कार्बन परमाणु में चौथा इलेक्ट्रॉन π-बन्ध बनाता है। अतः यह द्विविमीय षट्कोणीय वलय रखता है। |
| (4) | C-C बन्ध लम्बाई 154 pm होती है। इसलिए हीरे में प्रबल सहसंयोजी बन्धों का त्रिविमीय जाल होता है। | वलय में C-C सहसंयोजी दूरी 142 pm होती है जो प्रबल बन्ध को व्यक्त करती है। इन वलयों की व्यवस्था पर्तें बनाती है। |
| (5) | यह अत्यन्त कठोर होता है। इसका गलनांक उच्च होता है। | यह अत्यन्त कोमल होता है। इसे मशीनों में शुष्क स्नेहक की भाँति प्रयोग किया जा सकता है। |
In simple words: हीरा sp³ संकरित होता है और एक त्रिविमीय कठोर जालक संरचना बनाता है, जबकि ग्रेफाइट sp² संकरित होता है और परतीय संरचना बनाता है जिसमें परतें दुर्बल वाण्डरवाल्स बलों से जुड़ी होती हैं, जिससे यह नरम और चिकना होता है।
🎯 Exam Tip: हीरा और ग्रेफाइट की संरचनात्मक भिन्नताओं को संकरण, बंधों के प्रकार और परिणामी भौतिक गुणों के आधार पर स्पष्ट करें।
Question 13. निम्नलिखित कथनों को युक्तिसंगत कीजिए तथा रासायनिक समीकरण दीजिए (क) लेड (II) क्लोराइड Cl₂ से क्रिया करके PbCl₄ देता है। (ख) लेड (IV) क्लोराइड ऊष्मा के प्रति अत्यधिक अस्थायी है। (ग) लेड एक आयोडाइड PbI₄ नहीं बनाता है।
Answer:
(क) लेड (II) क्लोराइड, PbCl₂ क्लोरीन से क्रिया करके PbCl₄ नहीं बनाती है। इसका कारण यह है कि अक्रिय युग्म प्रभाव (inert pair effect) के कारण Pb की +2 ऑक्सीकरण अवस्था +4 ऑक्सीकरण अवस्था से अधिक स्थायी होती है। दूसरे शब्दों में, PbCl₂, PbCl₄ से अधिक स्थायी है।
(ख) अक्रिय युग्म प्रभाव (inert pair effect) के कारण, Pb की +4 ऑक्सीकरण अवस्था +2 ऑक्सीकरण अवस्था से कम स्थायी है। इस कारण लेड (IV) क्लोराइड गर्म करने पर विघटित होकर अधिक स्थायी लेड (II) क्लोराइड बनाता है।
\[ PbCl₄ \xrightarrow{\Delta} PbCl₂ + Cl₂ \uparrow \]
Lead (IV) chloride Lead (II) chloride
(Less stable) (More stable)
(ग) PbI₄ का अस्तित्व ज्ञात नहीं है। इसका कारण Pb⁴⁺ की ऑक्सीकरण प्रकृति और I⁻ की अपचायक प्रकृति का संयुक्त प्रभाव है।
In simple words: PbCl₂ क्लोरीन से क्रिया करके PbCl₄ नहीं बनाता क्योंकि Pb की +2 ऑक्सीकरण अवस्था अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण +4 से अधिक स्थायी है। PbCl₄ ऊष्मा के प्रति अस्थिर है और गर्म करने पर PbCl₂ में विघटित हो जाता है। PbI₄ नहीं बनता है क्योंकि Pb⁴⁺ ऑक्सीकारक है और I⁻ अपचायक है।
🎯 Exam Tip: अक्रिय युग्म प्रभाव की अवधारणा को ऑक्सीकरण अवस्थाओं के स्थायित्व और यौगिकों के अस्तित्व की व्याख्या करने के लिए उपयोग करें।
Question 14. BF₃ में तथा BF⁻₄ में बन्ध लम्बाई क्रमशः 130 pm तथा 143 pm होने के कारण बताइए ।
Answer: BF₃ अणु-में pπ-pπ back bonding के कारण B-F आबन्ध की लम्बाई को कम कर देते। हैं। BF⁻₄ में B-F बन्ध शुद्ध एकल आबन्ध होता है और इसकी आबन्ध लम्बाई अधिक होती है। इसी कारण BF₃ में B-F आबन्ध लम्बाई BF⁻₄ से कम होती है।
In simple words: BF₃ में B-F बंध की लंबाई कम होती है क्योंकि इसमें pπ-pπ बैक बॉन्डिंग होती है जो बंध में आंशिक डबल बॉन्ड चरित्र लाती है, जबकि BF⁻₄ में B-F बंध शुद्ध एकल बंध होता है और इसलिए इसकी लंबाई अधिक होती है।
🎯 Exam Tip: बैक बॉन्डिंग की अवधारणा को बंध की लंबाई और बंध की प्रकृति को समझाने के लिए उपयोग करें।
Question 15. B-Cl आबन्ध द्विध्रुव आघूर्ण रखता है, किन्तु BCl₃ अणु का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। क्यों?
Answer: बोरॉन की विद्युत ऋणात्मकता 2, जबकि Cl की 3 होती है। विद्युत ऋणात्मक में अन्तर के कारण, B-Cl बन्ध पोलर हो जाता है और निश्चित द्विध्रुव आघूर्ण रखता है। BCl₃ अणु में B परमाणु के sp² संकरित होने के कारण यह एक त्रिकोणीय समतलीय अणु है। BCl₃ में तीन B-Cl बन्ध 120° पर एक ही तल में होते हैं। इसलिए दो B-Cl बन्धों के द्विध्रुव आघूर्ण का परिमाण तीसरे B-Cl बन्ध के द्विध्रुव आघूर्ण के परिमाण के बराबर तथा विपरीत दिशा में होता है। परिणामस्वरूप BCl₃ का शुद्ध द्विध्रुव आघूर्ण शून्य हो जाता है जैसा निम्नांकित से स्पष्ट है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र BCl₃ अणु की त्रिकोणीय समतलीय संरचना को दर्शाता है, जहाँ बोरॉन केंद्र में है और तीन क्लोरीन परमाणु 120° के कोण पर जुड़े हुए हैं। प्रत्येक B-Cl बंध में द्विध्रुव आघूर्ण होता है, लेकिन क्योंकि तीनों बंध द्विध्रुव आघूर्ण समान परिमाण के होते हैं और एक दूसरे से 120° पर व्यवस्थित होते हैं, वे एक दूसरे को रद्द कर देते हैं। इस प्रकार, BCl₃ अणु का कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य (μ = 0) होता है।
\[ \quad \quad Cl \]
\[ Cl \stackrel{B}{\longleftrightarrow} Cl \quad \text{Resultant of the two B-Cl bonds} \]
\[ \quad \mu = 0 \]
In simple words: B-Cl बंध ध्रुवीय होता है क्योंकि बोरॉन और क्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता में अंतर होता है। हालांकि, BCl₃ अणु का कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है क्योंकि इसकी त्रिकोणीय समतलीय ज्यामिति के कारण तीनों बंधों के द्विध्रुव आघूर्ण एक दूसरे को रद्द कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: अणु की ज्यामिति और बंधों की ध्रुवीयता के संयोजन का उपयोग करके कुल द्विध्रुव आघूर्ण को समझाएं।
Question 16. निर्जलीय HF में ऐलुमिनियम ट्राइफ्लुओराइड अविलेय है, परन्तु NaF मिलाने पर घुल जाता है। गैसीय BF₃ को प्रवाहित करने पर परिणामी विलयन में से ऐलुमिनियम ट्राइफ्लुओराइडे अवक्षेपित हो जाता है। इसका कारण बताइए।
Answer: AlF₃ निर्जलीय HF में नहीं घुलता क्योंकि HF एक सहसंयोजक और प्रबल रूप से हाइड्रोजन आबन्ध युक्त यौगिक है। NaF एक आयनिक यौगिक और F⁻ आयन देता है जो AlF₃ से संयुक्त होकर जल में विलेय जटिल यौगिर्क Na₃AlF₆ का निर्माण करता है। इसलिए AlF₃, NaF की उपस्थिति में घुल जाता है।
जब परिणामी विलयन में BF₃ गैस प्रवाहित की जाती है तो B (बोरॉन) अपने छोटे आकार और उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण Na₃[AlF₆] में प्रवेश कर जाता है और Al को निष्कासित कर देता है। इसलिए AlF₃ अवक्षेपित हो जाता है।
\[ Na₃[AlF₆] + 3BF₃ \implies 3Na[BF₄] + AlF₃ \downarrow \]
Sodium tetrafluoroborate (III)
(soluble)
In simple words: AlF₃ निर्जल HF में अघुलनशील है लेकिन NaF की उपस्थिति में घुल जाता है क्योंकि NaF, F⁻ आयन प्रदान करता है जिससे घुलनशील \( Na₃AlF₆ \) जटिल बनता है। जब BF₃ मिलाया जाता है, तो BF₃ एल्यूमीनियम को विस्थापित करके \( Na₃[AlF₆] \) से बंध बनाता है और AlF₃ अवक्षेपित हो जाता है।
🎯 Exam Tip: जटिल आयन निर्माण और केन्द्रीय परमाणुओं के आकार व विद्युत ऋणात्मकता के प्रभाव को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 17. CO के विषैली होने का एक कारण बताइए ।
Answer: रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन शरीर के ऊतकों को O₂, पहुँचाने का कार्य करता है। CO का रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन के साथ जुड़कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (carboxyhaemoglobin) बनाती है जो ऑक्सीहीमोग्लोबिन (oxyheamoglobin) से 300 गुना अधिक स्थिर है। यह शरीर के विभिन्न अंगों में हीमोग्लोबिन की O₂ वाहक क्षमता को समाप्त कर देता है। फलस्वरूप ऑक्सीजन की कमी के कारण व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
\[ Haemoglobin + CO \implies Carboxyhaemoglobin \]
(300 times more stable than oxyhaemoglobin)
In simple words: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) हीमोग्लोबिन के साथ ऑक्सीजन की तुलना में अधिक दृढ़ता से जुड़कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है, जिससे रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जो विषाक्तता और मृत्यु का कारण बनती है।
🎯 Exam Tip: CO की विषाक्तता को हीमोग्लोबिन के साथ इसकी प्रबल बंध-निर्माण क्षमता और इसके जैविक परिणामों के संदर्भ में समझाएं।
Question 18. CO₂ की अधिक मात्रा भूमण्डलीय तापवृद्धि के लिए उत्तरदायी कैसे है?
Answer: CO₂ चक्र के कारण प्राकृतिक रूप से वातावरण में CO₂ की सान्द्रता स्थिर रहती है लेकिन, जब वातावरण में CO₂ की सान्द्रता मानवीय क्रियाओं के कारण एक निश्चित स्तर से अधिक हो जाती है, तो वायुमण्डल में उपस्थित CO₂ का आधिक्य पृथ्वी द्वारा विकरणित ऊष्मा को अवशोषित कर लेता है। अवशोषित ऊष्मा का कुछ भाग वायुमण्डल में निस्तारित हो जाता है और शेष भाग पृथ्वी पर वापस विकरणित हो जाता है जिससे पृथ्वी की सतह का तापमान बढ़ जाता है और भूमण्डलीय ताप में वृद्धि होती है। इस प्रभाव को ग्रीन हाउस प्रभाव कहा जाता है।
In simple words: CO₂ की अधिक मात्रा ग्रीनहाउस गैस के रूप में कार्य करती है, जो पृथ्वी से विकिरित ऊष्मा को अवशोषित करके उसे वायुमंडल में रोक लेती है। इससे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है, जिसे भूमंडलीय तापवृद्धि या ग्रीनहाउस प्रभाव कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ग्रीनहाउस प्रभाव की अवधारणा और CO₂ के ताप-अवशोषक गुणों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 19. डाइबोरेन तथा बोरिक अम्ल की संरचना समझाइए ।
Answer:
(क) डाइबोरेन की संरचना (Structure of Diborane) डाइबोरेन की संरचना को चित्र-4 (क) द्वारा दर्शाया गया है। इसमें सिरे वाले चार हाइड्रोजन परमाणु तथा दो बोरॉन परमाणु एक ही तल में होते हैं। इस तल के ऊपर तथा नीचे दो सेतुबन्ध (bridging) हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। सिरे वाले चार B-H बन्ध सामान्य द्विकेन्द्रीय-द्विइलेक्ट्रॉन (two centre-two electron) बन्ध भिन्न प्रकार के होते हैं जिन्हें 'त्रिकेन्द्रीय-द्विइलेक्ट्रॉन बन्ध' कहते हैं। चित्र-4 (ख)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र डाइबोरेन (B₂H₆) की संरचना को दर्शाता है, जिसमें दो बोरॉन परमाणु होते हैं और छह हाइड्रोजन परमाणु उनसे जुड़े होते हैं। चार हाइड्रोजन परमाणु बोरॉन परमाणुओं से सीधे जुड़े होते हैं (टर्मिनल हाइड्रोजन), जबकि दो हाइड्रोजन परमाणु बोरॉन परमाणुओं के बीच एक सेतु बनाते हैं (ब्रिजिंग हाइड्रोजन)। ब्रिजिंग हाइड्रोजन परमाणु बोरॉन के साथ त्रिकेन्द्रीय-द्विइलेक्ट्रॉन बंध बनाते हैं, जिसे 'केला बंध' भी कहते हैं। टर्मिनल B-H बंध सामान्य 2e-2c बंध होते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र डाइबोरेन में बंधन को दर्शाता है। प्रत्येक बोरॉन परमाणु sp³ संकरित होता है। टर्मिनल B-H बंधन सामान्य द्विकेन्द्रीय-द्विइलेक्ट्रॉन (2e-2c) बंधन हैं, जबकि दो सेतुबन्ध B-H-B त्रिकेन्द्रीय-द्विइलेक्ट्रॉन (3c-2e) बंधन हैं, जिन्हें 'केला बंध' भी कहते हैं। बिन्दुकृत रेखाएँ इलेक्ट्रॉन रहित कक्षकों को दर्शाती हैं।
(ख) बोरिक अम्ल की संरचना (Structure of Boric acid) ठोस अवस्था में, बोरिक अम्ल की पर्तीय संरचना होती है, जहाँ समतलीय BO₃ की इकाइयाँ हाइड्रोजन बन्ध द्वारा एक-दूसरे से 318 pm की दूरी पर जुड़ी रहती हैं (चित्र-5)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ठोस अवस्था में बोरिक अम्ल की पर्तीय संरचना को दर्शाता है। इसमें समतलीय BO₃ इकाइयाँ होती हैं जो हाइड्रोजन बंधों (बिन्दुकृत रेखाओं से दर्शाए गए) द्वारा एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। प्रत्येक बोरॉन परमाणु से तीन -OH समूह जुड़े होते हैं, और ये -OH समूह पड़ोसी बोरिक अम्ल अणुओं के ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बनाते हैं, जिससे एक विस्तृत परतीय जालक संरचना बनती है।
In simple words: डाइबोरेन में दो बोरॉन परमाणु और छह हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, जिसमें चार टर्मिनल B-H और दो ब्रिजिंग B-H-B 'केला बंध' होते हैं। बोरिक अम्ल एक परतीय संरचना में मौजूद होता है जहाँ समतलीय BO₃ इकाइयाँ हाइड्रोजन बंधों से जुड़ी होती हैं।
🎯 Exam Tip: डाइबोरेन के 'केला बंध' और बोरिक अम्ल की परतीय हाइड्रोजन-बंधित संरचना को स्पष्ट रूप से वर्णित करें।
Question 20. क्या होता है, जब?
(क) बोरेक्स को अधिक गर्म किया जाता है।
(ख) बोरिक अम्ल को जल में मिलाया जाता है।
(ग) ऐलुमिनियम की तनु NaOH से अभिक्रिया कराई जाती है।
(घ) BF₃ की क्रिया अमोनिया से की जाती है।
Answer:
(क) जब बोरेक्स के चूर्ण को बुन्सन बर्नर की ज्वाला में अधिक गर्म किया जाता है, सर्वप्रथम यह जल के अणु का निष्कासन कर्के फूल जाता है। पुनः गर्म करने पर यह एक पारदर्शी द्रव में परिवर्तित हो जाता है, जो काँच के समान एक ठोस में परिवर्तित हो जाता है। इसे बोरेक्स मनका कहते हैं।
\[ Na₂B₄O₇.10H₂O \xrightarrow{\Delta} Na₂B₄O₇ \implies 2NaBO₂ + B₂O₃ \]
पारदर्शी मनका
(ख) यह जल में घुल जाता है; क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक है।
(ग) ऐलुमिनियम NaOH विलयन में घुल कर एक विलेय संकुल बनाता है तथा हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।
(घ) BF (व्यवहार में लूइस अम्ल) NH₃ (व्यवहार में लूइस-क्षारक) के साथ योगात्मक यौगिक बनाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र BF₃ (लुईस अम्ल) और NH₃ (लुईस क्षारक) के बीच की अभिक्रिया को दर्शाता है। बोरॉन ट्राइफ्लोराइड में बोरॉन इलेक्ट्रॉन-न्यून होता है, जबकि अमोनिया में नाइट्रोजन पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है। नाइट्रोजन अपने इलेक्ट्रॉन युग्म को बोरॉन को दान करता है, जिससे एक उपसहसंयोजक बंध बनता है और BF₃.NH₃ नामक योगात्मक यौगिक प्राप्त होता है।
\[ F-B + :N-H \implies F-B-N-H \]
\[ F \quad H \quad \quad \quad F \quad H \]
(लूइस अम्ल) (लूइस क्षारक) (योगात्मक यौगिक)
In simple words: (क) बोरेक्स को गर्म करने पर वह जल खोकर फूल जाता है और फिर पारदर्शी बोरेक्स मनका (सोडियम मेटाबोरेट और बोरिक एनहाइड्राइड) बनाता है। (ख) बोरिक अम्ल जल में घुल जाता है। (ग) एल्यूमीनियम तनु NaOH के साथ क्रिया करके घुलनशील संकुल और हाइड्रोजन गैस बनाता है। (घ) BF₃ और NH₃ एक योगात्मक यौगिक बनाते हैं क्योंकि BF₃ एक लुईस अम्ल है और NH₃ एक लुईस क्षारक है।
🎯 Exam Tip: रासायनिक परिवर्तनों के उत्पादों को उनके कारणों (जैसे इलेक्ट्रॉन न्यूनता, तापीय अपघटन) सहित याद रखें।
Question 21. निम्नलिखित अभिक्रियाओं को समझाइए-
(क) कॉपर की उपस्थिति में उच्च ताप पर सिलिकन को मेथिल क्लोराइड के साथ गर्म किया जाता है।
(ख) सिलिकन डाइऑक्साइड की क्रिया हाइड्रोजन फ्लुओराइड के साथ की जाती है।
(ग) CO को ZnO के साथ गर्म किया जाता है।
(घ) जलीय ऐलुमिना की क्रिया जलीय NaOH के साथ की जाती है।
Answer:
(क) जब सिलिकन को मेथिल क्लोराइड के साथ उच्च ताप पर Cu की उपस्थिति में गर्म किया जाता है, तो मोनो, डाइ तथा ट्राइमिथाइलक्लोरोसाइलेन और थोड़ी मात्रा में टेट्रामिथाइलक्लोरोसाइलेन युक्त एक मिश्रण प्राप्त होता है।
(ख) जब SiO₂ की क्रिया HF से की जाती है तो सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड बनता है, जो HF में घुल कर हाइड्रोफ्लोरो सिलिसिक अम्ल (hydrofluorosilicic acid) बनाता है।
\[ SiO₂ + 4HF \implies SiF₄ + 2H₂O \]
\[ SiF₄ + 2HF \implies H₂SiF₆ \]
(Hydrofluorosilicic acid)
(ग) जब कार्बन मोनोऑक्साइड को जिंक ऑक्साइड के साथ गर्म किया जाता है, तो ZnO अपचयित होकर जिंक धातु बनाता है।
(घ) जब जलयोजित ऐलुमिना (hydrated alumina) को NaOH के जलीय विलयन के साथ गर्म किया जाता है तो सोडियम टेट्राहाइड्रॉक्सी ऐलुमिनेट (III) बनता है।
\[ Al₂O₃.2H₂O(s) + 2NaOH(aq) + H₂O(l) \xrightarrow{\Delta} 2Na[Al(OH)₄]aq \]
Sodium tetrahydroxo aluminate (III)
अथवा
\[ Al₂O₃.2H₂O(s) + 2NaOH(aq) \xrightarrow{\Delta} 2NaAlO₂ (aq) + 3H₂O(l) \]
Sodium metaaluminate
In simple words: (क) सिलिकन और मेथिल क्लोराइड की Cu की उपस्थिति में अभिक्रिया से विभिन्न मिथाइलक्लोरोसाइलेन का मिश्रण बनता है। (ख) सिलिकन डाइऑक्साइड HF के साथ अभिक्रिया करके SiF₄ और फिर हाइड्रोफ्लोरोसिलिसिक अम्ल बनाता है। (ग) CO, ZnO को गर्म करने पर जिंक धातु में अपचयित करता है। (घ) जलयोजित एल्यूमिना NaOH के साथ गर्म करने पर सोडियम टेट्राहाइड्रॉक्सीएल्यूमिनेट या सोडियम मेटाएल्यूमिनेट बनाता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक अभिक्रिया के अभिकारकों, उत्पादों और विशिष्ट परिस्थितियों (जैसे तापमान, उत्प्रेरक) पर ध्यान दें।
Question 22. कारण बताइए
(क) सान्द्र HNO₃ का परिवहन ऐलुमिनियम के पात्र द्वारा किया जा सकता है।
(ख) तनु NaOH तथा ऐलुमिनियम के टुकड़ों के मिश्रण का प्रयोग प्रवाहिका खोलने के लिए किया जाता है।
(ग) ग्रेफाइट शुष्क स्नेहक के रूप में प्रयुक्त होता है।
(घ) हीरा का प्रयोग अपघर्षक के रूप में होता है।
(ङ) वायुयान बनाने में ऐलुमिनियम मिश्रधातु का उपयोग होता है।
(च) जल को ऐलुमिनियम पात्र में पूरी रात नहीं रखना चाहिए।
(छ) संचरण केबल बनाने में ऐलुमिनियम तार का प्रयोग होता है।
Answer:
(क) सान्द्र HNO₃ ऐलुमिनियम (Al) से क्रिया करके इसकी सतह पर ऐलुमिनियम ऑक्साइड की एक पतली परत बनाता है जो Al की सान्द्र HNO₃ से पुनः क्रिया को रोकती है। दूसरे शब्दों में, Al सान्द्र HNO₃ के प्रभाव से निष्क्रिय हो जाता है।
अतः सान्द्र HNO₃ के परिवहन में Al कन्टेनर का उपयोग किया जाता है।
(ख) Al तनु NaOH से क्रिया करने पर हाइड्रोजन मुक्त करता है। इस प्रकार उच्च दाब पर विमुक्त H₂, का उपयोग बन्द नालियों (closed drains) को खोलने में किया जा सकता है।
\[ 2Al(s) + 2NaOH(aq) + 6H₂O(l) \implies 2Na⁺[Al(OH)₄]⁻ (aq) + 3H₂(g) \]
(ग) ग्रेफाइट (graphite) की संरचना एक परतीय संरचना होती है जिसमें षटकोणीय वलय (hexagonal ring) की विशाल परतें एक-दूसरे से दुर्बल वाण्डर वाल्स बलों (weak van der Waals' forces) द्वारा सम्बन्धित होती हैं। ये परतें एक-दूसरे से स्थायी रूप से नहीं जुड़ी होती हैं और एक-दूसरे पर फिसलती रहती हैं। यही कारण है कि ग्रेफाइट मुलायम होता है और एक शुष्क स्नेहक (dry lubricant) की भाँति प्रयोग किया जाता है।
(घ) हीरे की संरचना एक त्रिविमीय नेटवर्क संरचना है जिसमें sp³ संकरित कार्बन परमाणु एक-दूसरे से मजबूत सहसंयोजक आबन्धों द्वारा जुड़े रहते हैं। इसका नेटवर्क बहुत कठोर होता है। यही कारण है कि हीरा अत्यधिक कठोर होता है और इसका उपयोग एक अपघर्षक (abrasive) के रूप में किया जाता है।
(ङ) ऐलुमिनियम की मिश्र धातुएँ (alloys) हल्की होती हैं और ये अत्यन्त मजबूत एवं क्षय प्रतिरोधी होती हैं। इसलिए इनका उपयोग हवाई जहाजों को बनाने में किया जाता है।
(च) ऐलुमिनियम जल से तथा घुलित ऑक्सीजन से क्रिया कर अपनी सतह पर ऐलुमिनियम ऑक्साइड की एक पर्त बनाता है।
\[ 2Al(s) + O₂(g) + H₂O(l) \implies Al₂O₃ (s) + H₂(g) \]
इस परत में स्थित कुछ Al³⁺ आयन पानी में घुल कर एक विलयन बनाते हैं। Al³⁺ आयन विषैला होता है और पीने के पानी व खाने के पदार्थों में इसकी उपस्थिति अवांछित है।
(छ) ऐलुमिनियम विद्युत धारा का अच्छा चालक है। भारानुसार यह Cu की तुलना में दो गुनी अधिक विद्युत धारा को संचालित कर सकता है। Al के तार हल्के और सस्ते होते हैं। इसलिए Al का उपयोग संचरण केबिल (transmission cables) बनाने में किया जाता है।
In simple words: (क) सान्द्र HNO₃ एल्यूमीनियम को निष्क्रिय कर देता है। (ख) NaOH के साथ एल्यूमीनियम की अभिक्रिया से उत्पन्न H₂ गैस ड्रेनेज पाइप खोलने में मदद करती है। (ग) ग्रेफाइट परतीय संरचना के कारण नरम होता है, इसलिए शुष्क स्नेहक के रूप में उपयोग होता है। (घ) हीरे की त्रिविमीय कठोर संरचना इसे अपघर्षक बनाती है। (ङ) एल्यूमीनियम मिश्रधातुएँ हल्की और मजबूत होती हैं, इसलिए हवाई जहाज में उपयोग होती हैं। (च) एल्यूमीनियम पानी के साथ अभिक्रिया कर विषैले Al³⁺ आयन बनाता है। (छ) एल्यूमीनियम हल्का और अच्छा विद्युत चालक है, इसलिए केबल में उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक कथन के लिए विशिष्ट रासायनिक या भौतिक गुण को कारण के रूप में स्पष्ट करें।
Question 23. कार्बन से सिलिकॉन तक आयनीकरण एन्थैल्पी में प्रघटनीय कमी होती है। क्यों?
Answer: कार्बन से सिलिकॉन तक आयनीकरण में प्रघटनीय कमी होती है; क्योंकि कार्बन की परमाणु त्रिज्या (77pm) की तुलना में सिलिकॉन की परमाणु त्रिज्या अधिक (118 pm) होती है। इसलिए इलेक्ट्रॉनों का निष्कासन सरलतापूर्वक हो जाता है। सिलिकॉन से जर्मेनियम तक आयनन एन्थैल्पी में कमी प्रघटनीय नहीं होती; क्योंकि तत्वों के परमाणु आकार एकसमान रूप से बढ़ते हैं।
In simple words: कार्बन से सिलिकॉन तक आयनीकरण एन्थैल्पी घटती है क्योंकि सिलिकॉन की परमाणु त्रिज्या कार्बन से बड़ी होती है, जिससे इलेक्ट्रॉनों को निकालना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: आयनीकरण एन्थैल्पी में परिवर्तन की व्याख्या करते समय परमाणु त्रिज्या और परिरक्षण प्रभाव जैसे कारकों पर ध्यान दें।
Question 24. Al की तुलना में Ga की कम परमाण्वीय त्रिज्या को आप कैसे समझाएँगे?
Answer: ऐलुमिनियम (Al) की तुलना में Ga की कम परमाण्वीय त्रिज्या को प्रथम संक्रमण श्रेणी (Z=21 से 30) के दस तत्वों की उपस्थिति के आधार पर समझाया जा सकता है। इनमें इलेक्ट्रॉन 3d-कक्षकों में होते हैं। चूँकि 4-कक्षकों का आकार d-कक्षकों की तुलना में अधिक होता है; अतः अन्तरस्थ इलेक्ट्रॉनों के पास नाभिकीय आवेश में वृद्धि के प्रभाव को निरस्त करने के लिए पर्याप्त परिरक्षण प्रभाव नहीं होता। इसलिए Ga की स्थिति में प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान कम होता है। इससे अपवादस्वरूप Ga का परमाणु आकार घट जाता है जिसे वास्तव में बढ़ा होना चाहिए था।
In simple words: एल्यूमीनियम की तुलना में गैलियम की परमाण्वीय त्रिज्या कम होती है क्योंकि गैलियम में 3d-कक्षक मौजूद होते हैं, जो खराब परिरक्षण प्रभाव डालते हैं, जिससे नाभिकीय आवेश इलेक्ट्रॉनों पर अधिक खींचता है और परमाणु आकार कम हो जाता है।
🎯 Exam Tip: d-ब्लॉक तत्वों के खराब परिरक्षण प्रभाव और प्रभावी नाभिकीय आवेश के बीच संबंध को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 25. अपररूप क्या होता है? कार्बन के दो महत्त्वपूर्ण अपररूप हीरा तथा ग्रेफाइट की संरचना का चित्र बनाइए। इन दोनों अपरूपोंक्षे, भौतिक गुणों पर संरचना का क्या प्रभाव पड़ता, है?
Answer: अपररूप (Allotropes) प्रकृति में शुद्ध कार्बन दो रूपों में पाया जाता है-हीरा तथा ग्रेफाइट। यदि हीरे अथवा ग्रेफाइट को वायु में अत्यधिक गर्म किया जाए तो यह पूर्ण रूप से जल जाते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनाते हैं। जब हीरे तथा ग्रेफाइट की समान मात्रा दहन की जाती है, तब कार्बन डाइऑक्साइड की बराबर मात्रा उत्पन्न होती है तथा कोई अवशेष नहीं बचता। इन तथ्यों से स्पष्ट है कि ह्मस तथा ग्रेफाइट रासायनिक रूप से एकसमान हैं तथा केवल कार्बन परमाणुओं बने हैं। इनके नैतिक गुण अत्यधिक भिन्न होते हैं। अतः इस प्रकार के गुणों को प्रदर्शित करने वाले तत्वों को अपररूप कहते हैं।
हीरा (Diamond)
हीरा में क्रिस्टलीय जालक होता है। इसमें प्रत्येक परमाणु sp³-संकरित होता है तथा चतुष्फलकीय ज्यामिति से अन्य चार कार्बन परमाणुओं से जुड़ा रहता है। इसमें कार्बन-कार्बन बन्ध लम्बाई 154 pm होती है। कार्बन परमाणु दिक (space) में दृढ़ त्रिविमीय जालक (rigid three dimensional network) का निर्माण करते हैं। इस संरचना (चित्र-6) में सम्पूर्ण जालक में दिशात्मक सहसंयोजक बन्ध उपस्थित रहते हैं। इस प्रकार विस्तृत सहसंयोजक बन्धन को तोड़ना कठिन कार्य होता है। अतः हीरा पृथ्वी पर पाया जाने वाला सर्वाधिक कठोर पदार्थ है। इसका उपयोग धार तेज करने के लिए अपघर्षक (abrasive) के रूप में, रूपदा (dies) बनाने में तथा विद्युत-प्रकाश लैम्प में टंगस्टन तन्तु (filament) बनाने में होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र हीरे की त्रिविमीय जालक संरचना को दर्शाता है। प्रत्येक कार्बन परमाणु sp³ संकरित होता है और चतुष्फलकीय रूप से चार अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है। कार्बन-कार्बन बंध की लंबाई 154 pm है। यह संरचना एक अत्यंत कठोर, दृढ़ नेटवर्क बनाती है, जो हीरे की उच्च कठोरता के लिए जिम्मेदार है।
ग्रेफाइट (Graphite)
ग्रेफाइट की पर्तीय संरचना (layered structure) होती है। ये पर्ते वाण्डर वाल्स बल द्वारा जुड़ी रहती हैं। इस कारण ग्रेफाइट चिकना (slippery) तथा मुलायम (soft) होता है। दो पर्तों के मध्य की दूरी 340 pm होती है। प्रत्येक पर्त में कार्बन परमाणु षट्कोणीय वलय (hexagonal rings) के रूप में व्यवस्थित होते हैं जिसमें C-C बन्ध लम्बाई 141-5 pm होती है। षट्कोणीय वलय में प्रत्येक कार्बन परमाणु sp²-संकरित होता है। प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन निकटवर्ती कार्बन परमाणुओं से तीन सिग्मा बन्ध बनाता है (चित्र-7)। इसका चौथा इलेक्ट्रॉन π-बन्ध बनाता है। सम्पूर्ण पर्त में इलेक्ट्रॉन विस्थानीकृत। होते हैं। इलेक्ट्रॉन गतिशील होते हैं; अतः ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है। उच्च ताप पर जिन मशीनों में तेल का प्रयोग स्नेहक (lubricant) के रूप में नहीं हो सकता है, उनमें ग्रेफाइट शुष्क स्नेहक का कार्य करता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र ग्रेफाइट की परतीय संरचना को दर्शाता है। इसमें षट्कोणीय वलय की परतें होती हैं, जहां प्रत्येक कार्बन परमाणु sp² संकरित होता है और तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है। परतों के बीच की दूरी 340 pm है और परत के भीतर C-C बंध की लंबाई 141.5 pm है। परतें दुर्बल वाण्डरवाल्स बलों द्वारा जुड़ी होती हैं, जिससे ग्रेफाइट नरम और फिसलन भरा होता है।
In simple words: अपररूप एक ही तत्व के विभिन्न रूप होते हैं जिनकी रासायनिक प्रकृति समान होती है लेकिन भौतिक गुण भिन्न होते हैं। हीरा (sp³ संकरित, त्रिविमीय जालक) अत्यंत कठोर होता है, जबकि ग्रेफाइट (sp² संकरित, परतीय संरचना) नरम और विद्युत का सुचालक होता है।
🎯 Exam Tip: कार्बन के अपररूपों की संरचना, संकरण और परिणामस्वरूप उनके भौतिक गुणों के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 26. (क) निम्नलिखित ऑक्साइड को उदासीन, अम्लीय, क्षारीय तथा उभयधर्मी ऑक्साइड के रूप में वर्गीकृत कीजिए- CO, B₂O₃, SiO₂, CO₂, Al₂O₃, PbO₂, Tl₂O₃ (ख) इनकी प्रकृति को दर्शाने वाली रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
Answer:
(क) उदासीन ऑक्साइड : CO
अम्लीय ऑक्साइड : B₂O₃, SiO₂, CO₂
उभयधर्मी ऑक्साइड : Al₂O₃, PbO₂
क्षारीय ऑक्साइड : Tl₂O₃
(ख)
(i) अम्लीय ऑक्साइडों की क्षारों के साथ अभिक्रिया
\[ B₂O₃ + 2NaOH \implies 2NaBO₂ + H₂O \]
Sodium metaborate
\[ SiO₂ + 2NaOH \implies Na₂SiO₃ + H₂O \]
Sodium silicate
\[ CO₂ + 2NaOH \implies 2Na₂CO₃ + H₂O \]
(ii) उभयधर्मी ऑक्साइडों की अम्लों व क्षारों के साथ अभिक्रिया
\[ Al₂O₃ + 3H₂SO₄ \implies Al₂(SO₄)₃ + 3H₂O \]
\[ Al₂O₃ + 2NaOH \implies 2NaAlO₂ + H₂O \]
Sodium metaaluminate
\[ PbO₂ + 2HNO₃ \implies Pb(NO₃)₂ + H₂O + \frac{1}{2}O₂ \]
\[ PbO₂ + 2NaOH \implies Na₂PbO₃ + H₂O \]
Sodium plumbate
(iii) क्षारीय ऑक्साइड की अम्ल के साथ अभिक्रिया
\[ Tl₂O₃ + 3H₂SO₄ + 4H₂O \implies Tl₂(SO₄)₃.7H₂O \]
Thallium sulphate heptahydrate
In simple words: ऑक्साइडों को उनकी रासायनिक प्रकृति (उदासीन, अम्लीय, क्षारीय, उभयधर्मी) के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। अम्लीय ऑक्साइड क्षार से, क्षारीय ऑक्साइड अम्ल से, और उभयधर्मी ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं, जबकि उदासीन ऑक्साइड किसी से भी अभिक्रिया नहीं करते।
🎯 Exam Tip: विभिन्न ऑक्साइडों की प्रकृति को याद रखें और प्रत्येक प्रकार के लिए एक-एक प्रतिनिधि रासायनिक अभिक्रिया दें।
Question 27. कुछ अभिक्रियाओं में थैलियम, ऐलुमिनियम से समानता दर्शाता है, जबकि अन्य में यह समूह-। के धातुओं से समानता दर्शाता है। इस तथ्य को कुछ प्रमाणों के द्वारा सिद्धे करें।
Answer: ऐलुमिनियम के समाने, थैलियम Tl₂O₃, TlCl₃, Tl₂(SO₄)₃ आदि में +3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है। Al तथा Tl के जटिल यौगिक भी समान प्रकार के होते हैं। जैसे- \( [AlF₆]³⁻ \) तथा \( [TlF₆]³⁻ \)।
अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण यह समूह 1 ग्रुप की क्षार धातुओं के समान +1 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है। +1 ऑक्सीकरण अवस्था में यह Tl₂O, TlCl आदि यौगिकों का निर्माण करता है जो Na₂O, NaCl आदि यौगिकों के समान है। Tl₂O, Na₂O के समान प्रबल क्षार हैं। अतः यह समूह 1 की धातुओं से भी समानता प्रदर्शित करता है।
In simple words: थैलियम एल्यूमीनियम के समान +3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है और जटिल यौगिक बनाता है। हालांकि, अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण यह क्षार धातुओं की तरह +1 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है, जिससे ऑक्साइड और क्लोराइड जैसे यौगिकों में समानता दिखती है।
🎯 Exam Tip: अक्रिय युग्म प्रभाव की अवधारणा का उपयोग करके थैलियम की दोहरी रासायनिक प्रकृति (+1 और +3 ऑक्सीकरण अवस्थाएं) को समझाएं।
Question 28. जब धातु X की क्रिया सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ की जाती है तो श्वेत अवक्षेप (A) प्राप्त होता है, जो NaOH के आधिक्य में विलेय होकर विलेय संकुल (B) बनाता है। यौगिक (A) तनु HCl में घुल कर यौगिक (C) बनाता है। यौगिक (A) को अधिक गर्म किए जाने पर यौगिक (D) बनता है, जो एक निष्कर्षित धातु के रूप में प्रयुक्त होता है। X, A, B, C तथा D को पहचानिए तथा इनकी पहचान के समर्थन में उपयुक्त समीकरण दीजिए ।
Answer: दी गई अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करती हैं कि धातु X ऐलुमिनियम है। अभिक्रियाओं को निम्न प्रकार लिखा जा सकता है-
\[ 2Al(s) + 3NaOH(aq) \implies Al(OH)₃ + 3Na⁺(aq) \]
[X] Alum. hydroxide
(white ppt.)
\[ Al(OH)₃ (s) + NaOH(aq) \implies Na[Al(OH)₄] (aq) \]
[A] Sodium tetrahydroxoaluminate (III)
[B]
\[ Al(OH)₃ + HCl(aq) \implies AlCl₃ (aq) + H₂O \]
Aluminium chloride
[C]
\[ Al(OH)₃ (s) \xrightarrow{\Delta} Al₂O₃(s) + 3H₂O \]
[A] Alumina
[D]
अतः [X] = Al, [A] = Al(OH)₃, [B] = \( Na[Al(OH)₄] \), [C] = AlCl₃ और [D] = Al₂O₃
In simple words: X एल्यूमीनियम (Al) है। यह NaOH के साथ क्रिया करके एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड (A) का श्वेत अवक्षेप बनाता है, जो अधिक NaOH में घुल कर सोडियम टेट्राहाइड्रॉक्सीएल्यूमिनेट (B) बनाता है। अवक्षेप A तनु HCl में घुल कर एल्यूमीनियम क्लोराइड (C) बनाता है। A को गर्म करने पर एल्यूमिना (D) बनता है।
🎯 Exam Tip: अज्ञात पदार्थों को पहचानने के लिए दी गई अभिक्रियाओं और उनके विशिष्ट गुणों (जैसे रंग, घुलनशीलता) का ध्यानपूर्वक विश्लेषण करें।
Question 29. निम्नलिखित से आप क्या समझते हैं?
(क) अक्रिय युग्म प्रभाव,
(ख) अपररूप,
(ग) श्रृंखलन ।
Answer:
(क) अक्रिय युग्म प्रभाव (Inert pair effect)-कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, \((n-1)d^{10} ns^2np^1\) वाले तत्व में, 4-कक्षक के इलेक्ट्रॉन दुर्बल परिरक्षण प्रभाव प्रस्तावित करते हैं। इसलिए \(ns^2\) इलेक्ट्रॉन नाभिक के धनावेश द्वारा अधिक दृढ़ता से बँधे रहते हैं। इस प्रबल आकर्षण के परिणामस्वरूप, ns इलेक्ट्रॉन युग्मित रहते हैं तथा बन्ध में भाग नहीं लेते हैं अर्थात् अक्रिय रहते हैं। यह प्रभाव अक्रिय युग्म प्रभाव कहलाता है। इस स्थिति में, \(ns^2np^1\) विन्यास में, तीन इलेक्ट्रॉनों में से केवल एक इलेक्ट्रॉन बन्ध-निर्माण में भाग लेता है।
(ख) अपररूप (Allotropes)-किसी तत्व का समान रासायनिक अवस्था में दो या अधिक भिन्न-रूपों में पाया जाना अपररूपता कहलाता है। तत्व के ये विभिन्न रूप अपररूप कहलाते हैं। किसी तत्व के सभी अपररूपों के समान रासायनिक गुण होते हैं, परन्तु इनके भौतिक गुणों में अन्तर होता है।
(ग) श्रृंखलन (Catenation)-कार्बन में अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बन्ध द्वारा जुड़कर लम्बी श्रृंखला या वलय बनाने की प्रवृत्ति होती है। इस प्रवृत्ति को श्रृंखलन कहते हैं। C-C बन्ध अधिक प्रबल होने के कारण ऐसा होता है।
In simple words: अक्रिय युग्म प्रभाव में भारी तत्वों के ns इलेक्ट्रॉन्स बंधन में भाग नहीं लेते, जिससे उनकी कम ऑक्सीकरण अवस्थाएँ स्थिर होती हैं। अपररूपता किसी तत्व का एक से अधिक रूपों में मौजूद होना है, जिनके रासायनिक गुण समान पर भौतिक गुण भिन्न होते हैं। श्रृंखलन वह क्षमता है जिसमें परमाणु एक-दूसरे से जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ या वलय बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: अक्रिय युग्म प्रभाव, अपररूपता और श्रृंखलन की परिभाषाएँ तथा उनके उदाहरण स्पष्ट रूप से याद करें। इन अवधारणाओं को समझने से तत्वों के रासायनिक व्यवहार की बेहतर व्याख्या की जा सकती है।
Question 30. एक लवण x निम्नलिखित परिणाम देता है
(क) इसका जलीय विलयन लिटमस के प्रति क्षारीय होता है।
(ख) तीव्र गर्म किए जाने पर यह काँच के समान ठोस में स्वेदित हो जाता है।
(ग) जब X के गर्म विलयन में सान्द्र H2SO4 मिलाया जाता है तो एक अम्ल Z का श्वेत क्रिस्टल बनता है। उपर्युक्त अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए और X, Y तथा Z को पहचानिए ।
Answer:
(क) चूंकि दिये गये लवण का जलीय विलयन लिटमस के प्रति क्षारीय है तो यह सुनिश्चित है कि यह प्रबल क्षार और दुर्बल अम्ल से मिलकर बना लवण है।
(ख) लवण [X] गर्म करने पर फूल जाता है और काँच जैसे पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है । इसलिए [Y] को बोरेक्स (borax) और [Y] को सोडियम मेटाबोरेट और बोरिक ऐनहाइड्राइड का मिश्रण होना चाहिए।
(ग) जब बोरेक्सा [X] के गर्म विलयन में सान्द्र H2SO4 मिलाया जाता है, तो ऑथ्रो बोरिक अम्ल [Z] के सफेद क्रिस्टल प्राप्त होते हैं।
अतः, [X]= Na2B4O7-10H2O, [Y]= NaBO2 + B2O3 और [Z]= H3BO3 । अभिक्रियाओं को निम्न प्रकार लिखा जा सकता है-
\[ \text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 \cdot 10\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{जल अपघटन (Strong base)}} 2\text{NaOH} + \text{H}_3\text{B}_4\text{O}_7 + 8\text{H}_2\text{O} \]
\[ \text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 \cdot 10\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\Delta \text{ 1013 K}} \text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 \]
\[ \text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 \xrightarrow{\Delta} 2\text{NaBO}_2 + \text{B}_2\text{O}_3 \]
\[ \text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 \cdot 10\text{H}_2\text{O} + \text{H}_2\text{SO}_4 \longrightarrow 4\text{H}_3\text{BO}_3 + \text{Na}_2\text{SO}_4 \]
In simple words: प्रश्न में वर्णित गुणों के आधार पर, लवण X बोरेक्स (\(Na_2B_4O_7 \cdot 10H_2O\)) है। इसे गर्म करने पर यह सोडियम मेटाबोरेट और बोरिक एनहाइड्राइड (\(Y\)) में बदलता है, और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया करने पर ऑर्थोबोरिक अम्ल (\(H_3BO_3\), जिसे Z कहा गया है) बनता है।
🎯 Exam Tip: बोरेक्स की पहचान और उसकी रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जल-अपघटन और अम्ल से क्रिया करके बोरिक अम्ल बनने की प्रक्रिया।
Question 31. सन्तुलित समीकरण दीजिए-
(क) BF3 + LiH →
(ख) B2H6 + H2O→
(ग) NaH + B2H6 →
(घ)
(ङ) Al + NaOH →
(च) B2H6 + NH3 →
Answer:
(क) \(2\text{BF}_3 + 6\text{LiH} \longrightarrow \text{B}_2\text{H}_6 + 6\text{LiF}\)
(ख) \(\text{B}_2\text{H}_6 + 6\text{H}_2\text{O} \longrightarrow 2\text{H}_3\text{BO}_3 + 6\text{H}_2\)
(ग) \(2\text{NaH} + \text{B}_2\text{H}_6 \longrightarrow 2\text{Na}^+[\text{BH}_4]^-\)
(घ) \(2\text{H}_3\text{BO}_3 \xrightarrow{\Delta} 2\text{HBO}_2 + 2\text{H}_2\text{O}\)
\(4\text{HBO}_2 \xrightarrow{\Delta} \text{H}_2\text{B}_4\text{O}_7 + \text{H}_2\text{O}\)
\(\text{H}_2\text{B}_4\text{O}_7 \xrightarrow{\Delta} 2\text{B}_2\text{O}_3 + \text{H}_2\text{O}\)
(ङ) \(2\text{Al} + 2\text{NaOH} + 6\text{H}_2\text{O} \longrightarrow 2\text{Na}^+[\text{Al(OH)}_4]^- + 3\text{H}_2\)
(च) \(3\text{B}_2\text{H}_6 + 6\text{NH}_3 \xrightarrow{\text{Heat}} 3[\text{BH}_2(\text{NH}_3)_2]^+[\text{BH}_4]^- \longrightarrow 2\text{B}_3\text{N}_3\text{H}_6 + 12\text{H}_2\)
In simple words: यह प्रश्न बोरॉन और ऐलुमिनियम से संबंधित विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं के संतुलित समीकरणों को दर्शाता है, जिसमें बोरॉन के फ्लोराइड और हाइड्राइड की क्रियाएँ, बोरिक अम्ल का तापीय अपघटन, ऐलुमिनियम की क्षारों से क्रिया, और डाइबोरेन की अमोनिया से अभिक्रिया शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: इन अभिक्रियाओं के उत्पादों और अभिकारकों को सही रासायनिक सूत्रों के साथ संतुलित रूप में लिखना याद रखें। विशेष रूप से बोरॉन यौगिकों की प्रतिक्रियाएँ अक्सर पूछी जाती हैं।
Question 32. CO तथा CO2 प्रत्येक के संश्लेषण के लिए एक प्रयोगशाला तथा एक औद्योगिक विधि दीजिए ।
Answer:
(क) कार्बन मोनोक्साइड (Carbon monoxide)
प्रयोगशाला विधि (Laboratory method)-सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल का 373 K पर फॉर्मिक अम्ल के द्वारा निर्जलीकरण कराने पर अल्प मात्रा में शुद्ध कार्बन मोनोक्साइड प्राप्त होती है।
\[ \text{HCOOH} \xrightarrow{\text{373K, सान्द्र H}_2\text{SO}_4} \text{H}_2\text{O} + \text{CO}\uparrow \]
औद्योगिक विधि (Industrial method)-औद्योगिक रूप से इसे कोक पर भाप (steam) प्रवाहित करके बनाया जाता है। इस प्रकार CO तथा H2 का प्राप्त मिश्रण 'वाटर गैस' अथवा 'संश्लेषण गैस' (synthesis gas) कहलाता है।
\[ \text{C(s)} + \text{H}_2\text{O(g)} \xrightarrow{\text{473-1273 K}} \text{CO (g)} + \text{H}_2\text{ (g)} \]
जब भाप के स्थान पर वायु का प्रयोग किया जाता है, तब CO तथा N2 का मिश्रण प्राप्त होता है। इसे प्रोड्यूसर गैस कहते हैं।
\[ 2\text{C (s)} + \text{O}_2\text{(g)} + 4\text{N}_2\text{(g)} \xrightarrow{\text{1273K}} 2\text{CO(g)} + 4\text{N}_2\text{(g)} \]
(ख) कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide)
प्रयोगशाला विधि (Laboratory method) — प्रयोगशाला में इसे कैल्सियम कार्बोनेट पर तनु HC1 की अभिक्रिया द्वारा बनाया जाता है।
\[ \text{CaCO}_3\text{(s)} + 2\text{HCl(aq)} \longrightarrow \text{CaCl}_2\text{ (aq)} + \text{CO}_2\text{(g)} + \text{H}_2\text{O(l)} \]
औद्योगिक विधि (Industrial method)-औद्योगिक रूप में चूना पत्थर (lime stone) को गर्म करके CO2 बनाई जा सकती है।
In simple words: कार्बन मोनोऑक्साइड को फॉर्मिक अम्ल के निर्जलीकरण या कोक पर भाप/वायु प्रवाहित करके बनाया जाता है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड को कैल्शियम कार्बोनेट पर तनु HCl की क्रिया से या चूना पत्थर को गर्म करके उत्पादित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: कार्बन मोनोऑक्साइड और डाइऑक्साइड के प्रयोगशाला और औद्योगिक संश्लेषण विधियों को उनके संबंधित संतुलित रासायनिक समीकरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है। अभिकारकों और प्रतिक्रिया की स्थितियों पर विशेष ध्यान दें।
Question 33. बोरेक्स के जलीय विलयन की प्रकृति कौन-सी होती है?
(क) उदासीन
(ख) उभयधर्मी
(ग) क्षारीय
(घ) अम्लीय
Answer: (ग) क्षारीय
ऐसा इसलिए है क्योंकि बोरेक्स प्रबल क्षार (NaOH) और दुर्बल अम्ल (H3BO3) से बना लवण है। जल में, यह जल अपघटित होकर क्षारीय विलयन बनाता है।
In simple words: बोरेक्स का जलीय विलयन क्षारीय होता है क्योंकि यह एक प्रबल क्षार और एक दुर्बल अम्ल से बना लवण है, और जल में इसका जल-अपघटन क्षारीय प्रभाव उत्पन्न करता है।
🎯 Exam Tip: बोरेक्स जैसे लवणों की जल-अपघटन प्रकृति और उनके जलीय विलयनों के pH को समझने के लिए प्रबल और दुर्बल अम्ल/क्षार के संयोजन को याद रखें।
Question 34. बोरिक अम्ल के बहुलकीय होने का कारण
(क) इसकी अम्लीय प्रकृति है।
(ख) इसमें हाइड्रोजन बन्धों की उपस्थिति है।
(ग) इसकी ऐकक्षारीय प्रकृति है।
(घ) इसकी ज्यामिति है।
Answer: (ख) इसमें हाइड्रोजन बन्धों की उपस्थिति है।
In simple words: बोरिक अम्ल बहुलकीय होता है क्योंकि इसमें हाइड्रोजन बंधन पाए जाते हैं, जिससे इसकी परतीय संरचना बनती है और अणु एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन बंधन एक महत्वपूर्ण अंतर-आणविक बल है जो कई यौगिकों के भौतिक गुणों, जैसे बहुलकीय प्रकृति और उच्च गलनांक को प्रभावित करता है। इसे ध्यान में रखें।
Question 35. डाइबोरेन में बोरॉन का संकरण कौन-सा होता है?
(क) sp
(ख) sp2
(ग) sp3
(घ) dsp2
Answer: (ग) sp3
In simple words: डाइबोरेन (\(B_2H_6\)) में बोरॉन परमाणु \(sp^3\) संकरित होता है, जिससे यह चार बॉन्डिंग ऑर्बिटल्स बनाता है, जिनमें से कुछ हाइड्रोजन के साथ त्रिकेंद्रीय-द्विइलेक्ट्रॉन बॉन्ड बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: डाइबोरेन की संरचना और बोरॉन के संकरण को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें अद्वितीय 'केला बंधन' (banana bond) होते हैं जो सामान्य सहसंयोजक बंधनों से भिन्न होते हैं।
Question 36. ऊष्मागतिकीय रूप से कार्बन का सर्वाधिक स्थायी रूप कौन-सा है?
(क) हीरा
(ख) ग्रेफाइट
(ग) फुलरीन्स
(घ) कोयला
Answer: (ख) ग्रेफाइट
In simple words: कार्बन का ग्रेफाइट अपररूप ऊष्मागतिकीय रूप से सबसे अधिक स्थिर है, जिसका अर्थ है कि यह सबसे कम ऊर्जा अवस्था में होता है और अन्य कार्बन अपररूपों की तुलना में अधिक स्थायी है।
🎯 Exam Tip: कार्बन के विभिन्न अपररूपों जैसे हीरा, ग्रेफाइट और फुलरीन के भौतिक और रासायनिक गुणों के साथ-साथ उनकी सापेक्ष स्थिरता को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 37. निम्नलिखित में से समूह-14 के तत्वों के लिए कौन-सा कथन सत्य है?
(क) +4 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं।
(ख) +2 तथा +4 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं।
(ग) M²- तथा M4+ आयन बनाते हैं।
(घ) M2+ तथा M4- आयन बनाते हैं।
Answer: (ख) +2 तथा +4 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं।
In simple words: समूह-14 के तत्व, विशेषकर भारी तत्व, अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण +2 और +4 दोनों ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाते हैं, हालांकि +4 ऑक्सीकरण अवस्था आमतौर पर अधिक सामान्य होती है।
🎯 Exam Tip: अक्रिय युग्म प्रभाव की अवधारणा को समझना महत्वपूर्ण है, जो समूह-14 के भारी तत्वों में +2 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता के लिए जिम्मेदार है। यह परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।
Question 38. यदि सिलिकॉन निर्माण में प्रारम्भिक पदार्थ RSiCI3 है तो बनने वाले उत्पाद की संरचना बताइए ।
Answer: यदि अभिक्रिया में प्रारम्भिक पदार्थ RSiCI3 है तो अन्तिम उत्पाद एक क्रॉस लिन्कड सिलिकॉन (cross-linked silicone) होगा, जैसा कि निम्न से स्पष्ट है-
\[ \text{RCl-Si-Cl} + 3\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{Hydrolysis, -3HCl}} \text{RHO-Si-OH} \]
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख RSiCl3 से क्रॉस-लिंक्ड सिलिकॉन के निर्माण की प्रक्रिया को दर्शाता है। पहले चरण में, RSiCl3 का जल-अपघटन होकर RSi(OH)3 बनाता है। दूसरे चरण में, ये RSi(OH)3 इकाइयाँ संघनन के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़कर एक जटिल त्रि-आयामी क्रॉस-लिंक्ड सिलिकॉन संरचना बनाती हैं।
In simple words: जब RSiCl3 को प्रारंभिक पदार्थ के रूप में उपयोग किया जाता है, तो जल-अपघटन और संघनन से अंततः एक क्रॉस-लिंक्ड सिलिकॉन बनता है, जिसमें R समूह सिलिकॉन श्रृंखला से जुड़े होते हैं, जिससे एक जटिल जाली जैसी संरचना बनती है।
🎯 Exam Tip: सिलिकॉन के निर्माण में RSiCl3 जैसे प्रारंभिक पदार्थों का उपयोग और उनसे बनने वाली विभिन्न प्रकार की सिलिकॉन संरचनाओं को समझना महत्वपूर्ण है। जल-अपघटन और संघनन अभिक्रियाओं पर ध्यान दें।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. ऐलुमिनियम का विकर्ण सम्बन्ध है।
(i) Li से
(ii) Be से
(iii) B से
(iv) Si से
Answer: (ii) Be से
In simple words: ऐलुमिनियम का विकर्ण संबंध बेरिलियम (Be) से होता है, जिसका अर्थ है कि इन दोनों तत्वों के गुणों में आवर्त सारणी में विकर्ण रूप से समानताएं पाई जाती हैं।
🎯 Exam Tip: विकर्ण संबंध को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आवर्त सारणी में कुछ तत्वों के असामान्य व्यवहार और उनके गुणों में पैटर्न को दर्शाता है, विशेषकर लिथियम और मैग्नीशियम, बेरिलियम और ऐलुमिनियम आदि के बीच।
Question 2. निम्नलिखित में अम्लीय ऑक्साइड है।
(i) B2O3
(ii) Al2O3
(iii) In2O3
(iv) Ga2O3
Answer: (i) B2O3
In simple words: बोरॉन ट्राइऑक्साइड (\(B_2O_3\)) एक अम्लीय ऑक्साइड है, जबकि अन्य दिए गए ऑक्साइड अधिक उभयधर्मी या क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
🎯 Exam Tip: आवर्त सारणी में तत्वों के ऑक्साइडों की अम्लीय, क्षारीय या उभयधर्मी प्रकृति को याद रखना और संबंधित रासायनिक अभिक्रियाओं को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. B2O3 है।
(i) आयनिक
(ii) क्षारीय
(iii) अम्लीय
(iv) उभयधर्मी
Answer: (iii) अम्लीय
In simple words: \(B_2O_3\) एक अम्लीय ऑक्साइड है क्योंकि यह जल में अम्लीय घोल बनाता है और क्षारों के साथ अभिक्रिया करता है।
🎯 Exam Tip: तत्वों के ऑक्साइडों की प्रकृति (अम्लीय, क्षारीय, उभयधर्मी) आवर्त सारणी में उनकी स्थिति के आधार पर निर्धारित होती है। बोरॉन एक अधातु है, इसलिए उसका ऑक्साइड अम्लीय होता है।
Question 4. बोरॉन की सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया कराने पर बनता है।
(i) Na3BO3
(ii) Na3BO2
(iii) Na2B4O7
(iv) NaBO3
Answer: (i) Na3BO3
In simple words: बोरॉन जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो सोडियम ऑर्थोबोरट (\(Na_3BO_3\)) बनाता है।
🎯 Exam Tip: बोरॉन की क्षारों से अभिक्रियाओं के उत्पादों को याद रखना महत्वपूर्ण है। ऐसी अभिक्रियाएँ अक्सर रासायनिक समीकरणों या उत्पाद पहचान के प्रश्नों में पूछी जाती हैं।
Question 5. BF3 अणु है।
(i) लुईस अम्ल
(ii) लुईस क्षारक
(iii) उदासीन लवण
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (i) लुईस अम्ल
In simple words: \(BF_3\) एक लुईस अम्ल है क्योंकि बोरॉन परमाणु का अष्टक अपूर्ण होता है, और यह इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकता है।
🎯 Exam Tip: लुईस अम्ल और क्षारों की अवधारणा को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर उन अणुओं के लिए जिनमें केंद्रीय परमाणु का अष्टक पूरा नहीं होता है, जैसे \(BF_3\)।
Question 6. बोरेक्स है।
(i) सोडियम मेटाबोरेट
(ii) सोडियम बोरेट
(iii) सोडियम टेट्राबोरेट
(iv) सोडियम बाइबोरेट
Answer: (iii) सोडियम टेट्राबोरेट ।
In simple words: बोरेक्स का रासायनिक नाम सोडियम टेट्राबोरेट है, जो बोरॉन का एक महत्वपूर्ण यौगिक है।
🎯 Exam Tip: सामान्य रसायनों के रासायनिक नाम और सूत्र जानना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। बोरेक्स का उपयोग और संरचना भी अक्सर पूछी जाती है।
Question 7. बोरेक्स (सुहागा) का अणुसूत्र है।
(i) Na2B4O7
(ii) Na2B4O7-4H2O
(iii) Na2B4O7-7H2O
(iv) Na2B4O7-10H2O
Answer: (iv) Na2B4O7-10H2O
In simple words: बोरेक्स (सुहागा) का सही अणुसूत्र \(\text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 \cdot 10\text{H}_2\text{O}\) है, जिसमें दस अणु क्रिस्टलन जल होते हैं।
🎯 Exam Tip: क्रिस्टलन जल वाले यौगिकों के सही अणुसूत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि जल के अणुओं की संख्या उनके गुणों और पहचान में अंतर कर सकती है।
Question 8. धातु लवणों की पहचान के लिए बोरेक्स मनका परीक्षण करते हैं।
(i) श्वेत लवण से
(ii) रंगीन लवण से
(iii) जलयोजित लवण से
(iv) अम्लीय लवण से
Answer: (ii) रंगीन लवण से
In simple words: बोरेक्स मनका परीक्षण का उपयोग मुख्य रूप से रंगीन धातु लवणों की पहचान के लिए किया जाता है, क्योंकि यह परीक्षण गर्म करने पर विशिष्ट रंग के मनके बनाता है।
🎯 Exam Tip: बोरेक्स मनका परीक्षण एक गुणात्मक विश्लेषण विधि है। इसमें विभिन्न धातु आयनों द्वारा उत्पन्न विशिष्ट मनका रंगों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जो उनकी पहचान में सहायक होता है।
Question 9. बोरेक्स बीड परीक्षण में नीली बीड बनाएगा।
(i) Cr
(ii) Co2+
(iii) Ni2+
(iv) Cd2+
Answer: (ii) Co2+
In simple words: कोबाल्ट आयन (\(\text{Co}^{2+}\)) बोरेक्स मनका परीक्षण में नीली बीड बनाता है, जो कोबाल्ट मेटाबोरेट के बनने के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: बोरेक्स मनका परीक्षण में विभिन्न धातु आयनों द्वारा उत्पन्न विशिष्ट रंगीन मनकों को याद रखें। यह गुणात्मक विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।
Question 10. बोरिक अम्ल के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?
(i) यह बोरेक्स के जलीय विलयन को अम्लीकृत करके तैयार किया जाता है।
(ii) इसकी संरचना परतीय होती है जिसमें समतल BO3 इकाई हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा जुड़ी होती है।
(iii) यह एक प्रबल त्रि-क्षारकी अम्ल है ।
(iv) यह प्रोटॉन दाता के रूप में कार्य नहीं करता, परन्तु हाइड्रॉक्सिल आयन स्वीकार करके एक लुईस अम्ल की तरह कार्य करता है।
Answer: (iii) यह एक प्रबल त्रि-क्षारकी अम्ल है ।
In simple words: बोरिक अम्ल वास्तव में एक प्रबल त्रि-क्षारकी अम्ल नहीं है; यह एक दुर्बल, एकक्षारकी लुईस अम्ल है जो सीधे प्रोटॉन दान करने के बजाय हाइड्रॉक्सिल आयन स्वीकार करता है।
🎯 Exam Tip: बोरिक अम्ल की प्रकृति और संरचना पर ध्यान दें। यह समझना कि यह एक लुईस अम्ल है और प्रोटॉन दाता नहीं, बल्कि हाइड्रॉक्सिल आयन स्वीकारक है, महत्वपूर्ण है। इसकी परतीय संरचना और हाइड्रोजन बंधन भी अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 11. बोरिक अम्ल के सम्बन्ध में कौन-सा कथन गलत है?
(i) यह एक एकक्षारकी (monobasic) अम्ल की भाँति कार्य करता है।
(ii) यह बोरॉन के हैलाइडों के जल-अपघटन से बनता है।
(iii) इसकी संरचना समतलीय है।
(iv) यह एक त्रि-क्षारकी अम्ल की भाँति कार्य करता है।
Answer: (iv) यह एक त्रि-क्षारकी अंम्ल की भाँति कार्य करता है।
In simple words: बोरिक अम्ल एक एकक्षारकी लुईस अम्ल है, त्रि-क्षारकी अम्ल नहीं। यह हाइड्रॉक्सिल आयन को स्वीकार करके कार्य करता है, सीधे प्रोटॉन का दान नहीं करता।
🎯 Exam Tip: बोरिक अम्ल की वास्तविक अम्लीय प्रकृति को समझना महत्वपूर्ण है- यह एक लुईस अम्ल है और प्रोटॉन दाता नहीं, बल्कि हाइड्रॉक्सिल आयन स्वीकारक है, जो इसे एकक्षारकी बनाता है।
Question 12. बोरेक्स पर किसकी अभिक्रिया के द्वारा बोरिक अम्ल बनाया जाता है?
(i) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
(ii) सोडियम हाइड्रॉक्साइड
(iii) कार्बन डाइऑक्साइड
(iv) सोडियम कार्बोनेट
Answer: (i) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
In simple words: बोरिक अम्ल बनाने के लिए बोरेक्स पर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जैसे किसी प्रबल अम्ल की अभिक्रिया कराई जाती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न यौगिकों के संश्लेषण विधियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर सामान्य प्रयोगशाला तैयारी के तरीके। बोरेक्स से बोरिक अम्ल बनाने की विधि एक मानक प्रक्रिया है।
Question 13. ऑर्थोबोरिक अम्ल को गर्म करने पर प्राप्त होता है।
(i) मेटाबोरिक अम्ल
(ii) पाइरोबोरिक अम्ल
(iii) जलयोजित लवण
(iv) अम्लीय लवण
Answer: (i) मेटाबोरिक अम्ल
In simple words: ऑर्थोबोरिक अम्ल को गर्म करने पर मेटाबोरिक अम्ल प्राप्त होता है, जो आगे गर्म करने पर बोरिक एनहाइड्राइड में परिवर्तित हो जाता है।
🎯 Exam Tip: बोरिक अम्ल के तापीय अपघटन के चरणों और संबंधित उत्पादों (मेटाबोरिक अम्ल, टेट्राबोरिक अम्ल, बोरिक एनहाइड्राइड) को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 14. BCI3 की LiAIH4 से अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है।
(i) B2H6
(ii) AlCl3
(iii) LICI
(iv) तीनों उत्पाद
Answer: (i) B2H6
In simple words: \(\text{BCl}_3\) की \(\text{LiAlH}_4\) से अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद डाइबोरेन (\(\text{B}_2\text{H}_6\)) है, जो बोरॉन-हाइड्राइड यौगिकों के संश्लेषण की एक महत्वपूर्ण विधि है।
🎯 Exam Tip: \(\text{LiAlH}_4\) जैसे अपचायक अभिकर्मकों की अभिक्रियाएँ और उनके विशिष्ट उत्पाद जानना महत्वपूर्ण है, खासकर बोरॉन यौगिकों के संदर्भ में।
Question 15. B2H6 से निम्नलिखित में से किसे नहीं बनाया जा सकता है?
(i) H3BO3
(ii) B2(CH3)4H2
(iii) B2(CH3) 6
(iv) NaBH4
Answer: (iii) B2(CH3) 6
In simple words: डाइबोरेन (\(\text{B}_2\text{H}_6\)) का उपयोग ऑर्थोबोरिक अम्ल, मेथिल-प्रतिस्थापित डाइबोरेन जैसे \(\text{B}_2(\text{CH}_3)_4\text{H}_2\), और सोडियम बोरोहाइड्राइड (\(\text{NaBH}_4\)) बनाने में किया जा सकता है, लेकिन यह \(\text{B}_2(\text{CH}_3)_6\) नहीं बनाता है।
🎯 Exam Tip: डाइबोरेन की रासायनिक अभिक्रियाओं और उसके अनुप्रयोगों को समझना महत्वपूर्ण है। यह ध्यान रखें कि \(\text{B}_2(\text{CH}_3)_6\) एक स्थिर यौगिक नहीं है और डाइबोरेन से आसानी से नहीं बनता है।
Question 16. निम्न में से कौन-सा ऑक्साइड उदासीन है?
(i) CO
(ii) SnO2
(iii) ZnO
(iv) SiO2
Answer: (i) CO
In simple words: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) एक उदासीन ऑक्साइड है, जिसका अर्थ है कि यह न तो अम्लीय और न ही क्षारीय गुण दर्शाता है, जबकि अन्य दिए गए ऑक्साइड अम्लीय या उभयधर्मी होते हैं।
🎯 Exam Tip: तत्वों के ऑक्साइडों की प्रकृति (उदासीन, अम्लीय, क्षारीय, उभयधर्मी) को पहचानना महत्वपूर्ण है। कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और नाइट्रस ऑक्साइड (\(\text{N}_2\text{O}\)) कुछ सामान्य उदासीन ऑक्साइड हैं।
Question 17. ऊष्मागतिकीय रूप के कार्बन का सर्वाधिक स्थायी रूप कौन-सा है?
(i) हीरा
(ii) ग्रेफाइट
(iii) फुलरीन
(iv) कोयला
Answer: (ii) ग्रेफाइट
In simple words: ऊष्मागतिकीय रूप से कार्बन का सबसे स्थायी रूप ग्रेफाइट है, जिसका अर्थ है कि यह सबसे कम ऊर्जा अवस्था में मौजूद होता है।
🎯 Exam Tip: कार्बन के अपररूपों की स्थिरता का तुलनात्मक अध्ययन महत्वपूर्ण है। ग्रेफाइट की परतदार संरचना उसे उच्च स्थिरता प्रदान करती है।
Question 18. शुष्क बर्फ है।
(i) फ्रीऑन
(ii) द्रव क्लोरीन
(iii) ठोस कार्बन डाइऑक्साइड
(iv) प्लास्टर ऑफ पेरिस
Answer: (iii) ठोस कार्बन डाइऑक्साइड
In simple words: शुष्क बर्फ ठोस कार्बन डाइऑक्साइड का सामान्य नाम है, जिसका उपयोग शीतलक के रूप में किया जाता है क्योंकि यह सीधे गैस में उर्ध्वपातित हो जाती है।
🎯 Exam Tip: सामान्य रासायनिक पदार्थों के सामान्य नामों और उनके रासायनिक सूत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है। शुष्क बर्फ का उपयोग और गुण भी अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 19. निम्न में कौन-सा पदार्थ अर्द्धचालक के रूप में प्रयुक्त होता है?
(i) Au
(ii) Ge
(iii) Pt
(iv) Si
Answer: (iv) Si
In simple words: सिलिकॉन (Si) एक अर्द्धचालक पदार्थ है और इसका व्यापक रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: अर्धचालक वे पदार्थ होते हैं जिनकी चालकता धातुओं और कुचालकों के बीच होती है। सिलिकॉन और जर्मेनियम सबसे अधिक ज्ञात अर्धचालक तत्व हैं।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. निर्जल AICIs नम वायु को धूम क्यों देता है? समझाइए ।
Answer: निर्जल \(\text{AlCl}_3\) नम वायु (\(\text{H}_2\text{O}\)) से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन क्लोराइड गैस की तेज धूम देता है।
\[ 2\text{AlCl}_3 + 6\text{HOH} \longrightarrow 2\text{Al(OH)}_3\downarrow + 6\text{HCl}\downarrow \]In simple words: निर्जल एल्यूमीनियम क्लोराइड नम हवा में पानी के साथ प्रतिक्रिया करके एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन क्लोराइड गैस बनाता है, और यह हाइड्रोजन क्लोराइड गैस हवा में नमी के साथ मिलकर सफेद धुआं देती है।
🎯 Exam Tip: धातुओं के हैलाइडों की जल-अपघटन अभिक्रियाएँ महत्वपूर्ण हैं, विशेषकर \(\text{AlCl}_3\) की नम हवा के साथ अभिक्रिया का समीकरण और परिणामी धूम्र का कारण याद रखें।
Question 2. ऐलुमिनियम का वैद्युत-अपघटन गलित अवस्था में किया जाता है, जलीय विलयन में नहीं, क्यों? स्पष्ट कीजिए।
Answer: ऐलुमिनियम को वैद्युत-अपघंटन जलीय विलयन में नहीं किया जा सकता; क्योंकि प्राप्त ऐलुमिनियम उबलते हुए जल से क्रिया कर ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड बनाता है, जो स्वयं विच्छेदित होकर पुनः ऐलुमिना में बदल जाता हैं।
\[ 2\text{Al} + 6\text{H}_2\text{O} \longrightarrow 2\text{Al(OH)}_3\uparrow + 3\text{H}_2\uparrow \]
\[ 2\text{Al(OH)}_3 \xrightarrow{\text{गर्म करने पर}} \text{Al}_2\text{O}_3 + 3\text{H}_2\text{O} \]In simple words: एल्यूमीनियम का विद्युत अपघटन केवल गलित अवस्था में किया जाता है क्योंकि जलीय विलयन में बनने वाला एल्यूमीनियम पानी के साथ अभिक्रिया करके एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड बनाता है, जो स्थिर नहीं होता और एल्यूमिना में बदल जाता है, जिससे शुद्ध एल्यूमीनियम प्राप्त नहीं होता।
🎯 Exam Tip: धातुओं के विद्युत अपघटन में माध्यम (गलित या जलीय) का महत्व समझें। एल्यूमीनियम के मामले में, जल की उपस्थिति में अवांछित उत्पादों के बनने के कारण गलित लवण का उपयोग करना अनिवार्य है।
Question 3. क्या होता है जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन धीरे-धीरे ऐलुमिनियम क्लोराइड विलयन में डाला जाता है?
Answer: इसमें पहले ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड का सफेद अवक्षेप प्राप्त होता है जो \(\text{NaOH}\) के आधिक्य में घुलकर सोडियम मेटाऐलुमिनेट देता है।
\[ \text{AlCl}_3 + 3\text{NaOH} \longrightarrow \text{Al(OH)}_3\downarrow + 3\text{NaCl} \]
\[ \text{Al(OH)}_3 + \text{NaOH} \longrightarrow \text{NaAlO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \]In simple words: जब एल्यूमीनियम क्लोराइड के घोल में सोडियम हाइड्रॉक्साइड मिलाया जाता है, तो पहले एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड का सफेद अवक्षेप बनता है, जो बाद में अधिक सोडियम हाइड्रॉक्साइड में घुल कर सोडियम मेटाएल्यूमिनेट बनाता है।
🎯 Exam Tip: उभयधर्मी हाइड्रॉक्साइडों की क्षारों के साथ अभिक्रियाओं के चरणों को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें पहले अवक्षेप का बनना और फिर आधिक्य में घुलना शामिल है।
Question 4. निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड का फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया में उपयोग दीजिए।
Answer: निर्जल \(\text{AlCl}_3\), ऐल्किल हैलाइड या ऐसिड क्लोराइड को इलेक्ट्रोफाइल पर परिवर्तित करके फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया दर्शाता है। निर्जल \(\text{AlCl}_3\), का फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में उपयोग होता है।
In simple words: निर्जल एल्यूमीनियम क्लोराइड का उपयोग फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रियाओं में एक लुईस अम्ल उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है, जो ऐल्किल या एसिल हैलाइडों को इलेक्ट्रोफाइल में परिवर्तित करके एरोमैटिक यौगिकों के ऐल्किलीकरण या ऐसीलीकरण को बढ़ावा देता है।
🎯 Exam Tip: फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया और उसमें निर्जल \(\text{AlCl}_3\) की भूमिका को याद रखना महत्वपूर्ण है। \(\text{AlCl}_3\) एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है जो अभिकारकों को सक्रिय करता है।
Question 5. ऐलुमिनियम सल्फेट को ऐलुमिनियम क्लोराइड में कैसे परिवर्तित करोगे, समीकरण दीजिए।
Answer:
\[ \text{Al}_2(\text{SO}_4)_3 + 6\text{NaOH} \longrightarrow 2\text{Al(OH)}_3\downarrow + 3\text{Na}_2\text{SO}_4 \]
\[ 2\text{Al(OH)}_3 \xrightarrow{\Delta} \text{Al}_2\text{O}_3 + 3\text{H}_2\text{O} \]
\[ \text{Al}_2\text{O}_3 + 3\text{CO} + 3\text{Cl}_2 \longrightarrow 2\text{AlCl}_3 + 3\text{CO}_2\uparrow \]In simple words: ऐलुमिनियम सल्फेट को ऐलुमिनियम क्लोराइड में बदलने के लिए, पहले ऐलुमिनियम सल्फेट को सोडियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया कराकर ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड में, फिर गर्म करके ऐलुमिना में, और अंत में ऐलुमिना को कार्बन मोनोऑक्साइड और क्लोरीन के मिश्रण से अभिकृत कर ऐलुमिनियम क्लोराइड में परिवर्तित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न रासायनिक यौगिकों के बीच रूपांतरण की प्रक्रियाएँ, विशेषकर बहु-चरणीय अभिक्रियाएँ, परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। प्रत्येक चरण के अभिकारकों, उत्पादों और स्थितियों को याद रखें।
Question 6. क्या होता है जब बोरेक्स को जल में घोला जाता है?
Answer: \(\text{NaOH}\) बनने के कारण क्षारीय विलयन प्राप्त होता है।
In simple words: जब बोरेक्स को जल में घोला जाता है, तो यह जल-अपघटन से सोडियम हाइड्रॉक्साइड और बोरिक अम्ल बनाता है, जिससे विलयन की प्रकृति क्षारीय हो जाती है।
🎯 Exam Tip: बोरेक्स के जल-अपघटन की अभिक्रिया और उसके परिणामस्वरूप बनने वाले क्षारीय घोल को याद रखें। यह बोरेक्स के गुणों और अनुप्रयोगों के लिए एक मूलभूत अवधारणा है।
Question 7. बोरिक अम्ल के दो प्रमुख उपयोग लिखिए ।
Answer:
1. पूतिरोधी (antiseptic) के रूप में।
2. आँखों की औषधि के निर्माण में ।
In simple words: बोरिक अम्ल का उपयोग मुख्य रूप से एक हल्के पूतिरोधी के रूप में और आंखों की दवाओं के निर्माण में किया जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख रासायनिक यौगिकों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को जानना महत्वपूर्ण है। बोरिक अम्ल के उपयोग अक्सर छोटे प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
Question 8. कृत्रिम गोल्ड (रोल्ड गोल्ड) का संघटन तथा उपयोग लिखिए।
Answer: कृत्रिम गोल्ड (ऐलुमिनियम ब्रांज) में 10% \(\text{Al}\) तथा शेष कॉपर होता है। यह बर्तन, मुद्राएँ, कृत्रिम आभूषण, पेन्ट आदि बनाने में प्रयुक्त होता है।
In simple words: कृत्रिम गोल्ड, जिसे एल्यूमीनियम कांस्य भी कहते हैं, मुख्य रूप से कॉपर और 10% एल्यूमीनियम से बना होता है, जिसका उपयोग बर्तन, सिक्के, कृत्रिम आभूषण और पेंट बनाने में किया जाता है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण मिश्रधातुओं के संघटन (घटक तत्वों का प्रतिशत) और उनके विशिष्ट उपयोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 9. हीरा एक कुचालक है परन्तु ग्रेफाइट विद्युत का अच्छा चालक है। समझाइए ।
Answer: हीरे की आन्तरिक संरचना इस प्रकार होती है कि इसमें सभी इलेक्ट्रॉन सहसंयोजक बन्ध बनाने में भाग लेते हैं। कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होता है इसलिए यह विद्युत का कुचालक है। जबकि ग्रेफाइट की संरचना इस प्रकार होती है कि उसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं इसलिए ग्रेफाइट विद्युत का चालक है। चालक है।
In simple words: हीरे में सभी संयोजी इलेक्ट्रॉन सहसंयोजक बंध बनाने में लगे होते हैं, जिससे कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं बचता और यह विद्युत का कुचालक होता है। ग्रेफाइट में, प्रत्येक कार्बन परमाणु केवल तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है, जिससे एक इलेक्ट्रॉन मुक्त रहता है जो इसे विद्युत का सुचालक बनाता है।
🎯 Exam Tip: कार्बन के अपररूपों-हीरा और ग्रेफाइट की संरचना और उनके विद्युत चालकता में अंतर को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। यह उनके बंधन और मुक्त इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति पर आधारित है।
Question 10. सिलिकॉन कार्बाइड बनाने का रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer:
\[ \text{SiO}_2 + 3\text{C} \xrightarrow{\Delta} \text{SiC} + 2\text{CO} \]In simple words: सिलिकॉन कार्बाइड, जिसे कार्बोरंडम भी कहते हैं, सिलिकॉन डाइऑक्साइड (\(\text{SiO}_2\)) और कार्बन (कोक) को उच्च तापमान पर गर्म करके बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: सिलिकॉन कार्बाइड के संश्लेषण की विधि और रासायनिक समीकरण को याद रखें। यह एक बहुत कठोर पदार्थ है और इसके उपयोग भी महत्वपूर्ण हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वर्ग 13 के तत्वों की अभिक्रियाशीलता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Answer: बोरॉन साधारण ताप पर अनअभिक्रियाशील (unreactive) है। अक्रिस्टलीय बोरॉन उच्च ताप पर नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सल्फर और हैलोजन से सीधे संयोग करके नाइट्राइड (\(\text{BN}\)), ऑक्साइड (\(\text{B}_2\text{O}_3\)), सल्फाइड (\(\text{B}_2\text{S}_3\)) और हैलाइड (\(\text{BCl}_3\)) बनाता है। यह रक्त-तप्त पर जल-वाष्प (steam) को हाइड्रोजन में अपचयित करता है। गर्म सान्द्र नाइट्रिक अम्ल अक्रिस्टलीय बोरॉन को ऑर्थोबोरिक अम्ल में ऑक्सीकृत करता है।
\[ \text{B} + 3\text{HNO}_3 \xrightarrow{\text{गर्म}} \text{H}_3\text{BO}_3 + 3\text{NO}_2 \]
अक्रिस्टलीय बोरॉन गलित सोडियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया करके बोरेट बनाता है।
\[ 2\text{B} + 2\text{NaOH} + 2\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{उच्च ताप}} 2\text{NaBO}_2 + 3\text{H}_2 \]
ऐलुमिनियम साधारण ताप पर वायु से अभिक्रिया करता है, ऐलुमिनियम के पृष्ठ पर ऑक्साइड की एक कठोर व चीमड़ (tough) पतली परत बन जाती है जो धातु की रासायनिक अभिकर्मकों के आक्रमण से रक्षा करती है। ऐलुमिनियम उच्च ताप पर गर्म करने पर ऑक्सीजन, सल्फर, नाइट्रोजन और हैलोजनों से सीधे संयोग करके ऑक्साइड (\(\text{Al}_2\text{O}_3\)), सल्फाइड (\(\text{Al}_2\text{S}_3\)), नाइट्राइड (\(\text{AlN}\)) और हैलाइड (\(\text{AlF}_3, \text{Al}_2\text{Cl}_6\)) बनाता है। ऐलुमिनियम जल से अभिक्रिया नहीं करता है, क्योंकि उसके पृष्ठ पर ऐलुमिनियम ऑक्साइड की पतली परत जम जाती है। ऐलुमिनियम गर्म सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन से अभिक्रिया करके सोडियम मेटाऐलुमिनेट बनाता है और हाइड्रोजन गैस निकलती है।
\[ 2\text{Al} + 2\text{H}_2\text{O} + 2\text{NaOH} \xrightarrow{\text{गर्म}} 2\text{NaAlO}_2 + 3\text{H}_2 \]
ऐलुमिनियम नाइट्रिक अम्ल द्वारा निष्क्रिय (passive) हो जाता है, क्योंकि उसके पृष्ठ पर ऐलुमिनियम ऑक्साइड की अभेद्य परत बन जाती है। ऐलुमिनियम सान्द्र \(\text{HCl}\) और गर्म सान्द्र \(\text{H}_2\text{SO}_4\) से अभिक्रिया करता है।
\[ 2\text{Al} + 6\text{HCl} \longrightarrow 2\text{AlCl}_3 + 3\text{H}_2 \]
\[ 2\text{Al} + 6\text{H}_2\text{SO}_4 \longrightarrow \text{Al}_2(\text{SO}_4)_3 + 6\text{H}_2\text{O} + 3\text{SO}_2 \]
वर्ग में \(\text{Ga, In}\) और \(\text{Tl}\) रासायनिक व्यवहार में समानता प्रदर्शित करते हैं। गैलियम और इन्डियम वायु द्वारा प्रभावित नहीं होते हैं। थैलियम उनके अपेक्षाकृत कुछ अधिक अभिक्रियाशील है और पृष्ठ पर ऑक्साइड बनाता है।
In simple words: वर्ग 13 के तत्व, जैसे बोरॉन और ऐलुमिनियम, विभिन्न अभिकारकों (ऑक्सीजन, हैलोजन, अम्ल और क्षार) के साथ अलग-अलग परिस्थितियों में प्रतिक्रिया करते हैं। बोरॉन उच्च ताप पर अभिक्रियाशील होता है, जबकि ऐलुमिनियम अपनी सतह पर ऑक्साइड परत बनाकर निष्क्रिय हो जाता है, हालांकि गर्म अवस्था में यह सक्रिय रहता है।
🎯 Exam Tip: वर्ग 13 के तत्वों की अभिक्रियाशीलता को उनकी ऑक्सीकरण अवस्थाओं, ऑक्साइड परत के निर्माण और विभिन्न अभिकारकों के साथ प्रतिक्रियाओं के माध्यम से समझें। प्रत्येक तत्व की विशिष्ट अभिक्रियाओं और समीकरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. बोरॉन एवं ऐलुमिनियम के असंगत गुणधर्मों की व्याख्या कीजिए ।
Answer: बोरॉन और ऐलुमिनियम दोनों तत्वों के बाह्यतम कोश का विन्यास 'p' है, अतः उनके गुणों में कई समानताएँ हैं, परन्तु उनके पिछले कोश में, बोरॉन में 2 इलेक्ट्रॉन और ऐलुमिनियम में 8 इलेक्ट्रॉन हैं। इस भिन्नता के कारण बोरॉन और ऐलुमिनियम कई गुणों में असमानताएँ प्रदर्शित करते हैं। जो निम्नलिखित हैं-
1. बोरॉन अधातु है, ऐलुमिनियम धातु है।
2. बोरॉन विद्युत अचालक (bad conductor) है, ऐलुमिनियम बहुत अच्छा विद्युत चालक है।
3. बोरॉन अपररूपता प्रदर्शित करता है, ऐलुमिनियम अपररूपता प्रदर्शित नहीं करता है।
4. ऐलुमिनियम की तुलना में बोरॉन अति उच्च गलनांक का अधात्विक ठोस है।
5. बोरॉन ट्राइऑक्साइड (\(\text{B}_2\text{O}_3\)) अम्लीय ऑक्साइड है। ऐलुमिनियम ट्राइऑक्साइड (\(\text{Al}_2\text{O}_3\)) उभयधर्मी (amphoteric) ऑक्साइड है।
6. बोरॉन के हाइड्रॉक्सी यौगिक, जैसे, \(\text{H}_3\text{BO}_3\) अम्ल है। ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड \(\text{Al(OH)}_3\) उभयधर्मी (armphoteric) है।
7. \(\text{Al}_2(\text{SO}_4)_3, \text{Al(NO}_2)_3\) आदि स्थाई लवण हैं। बोरॉने इनके संगत लवण नहीं बनाता है। ऐलुमिनियम द्विक सल्फेट जैसे पोटाश फिटकरी \(\text{K}_2\text{SO}_4 \cdot \text{Al}_2(\text{SO}_4)_3 \cdot 24\text{H}_2\text{O}\), बनाता है। बोरॉन फिटकरियाँ (alums) नहीं बनाता है।
8. बोरॉन तनु अम्लों से क्रिया नहीं करता है। ऐलुमिनियम तनु अम्लों से क्रिया करके हाइड्रोजन विस्थापित करता है।
9. गर्म सान्द्र \(\text{HNO}_3\) बोरॉन को बोरिक अम्ल में ऑक्सीकृत करता है। सान्द्र \(\text{HNO}_3\) से क्रिया कराने पर ऐलुमिनियम निष्क्रिय (passive) हो जाता है।
10. बोरॉन बड़ी संख्या में सहसंयोजक हाइड्राइड बनाता है। ऐलुमिनियम स्थाई हाईड्राइड नहीं बनाता है।
11. बोरॉन के हैलाइड, \(\text{BX}_3\) सूत्र के सहसंयोजक यौगिक हैं जिनकी त्रिकोणीय समतल संरचना है। ये जल से क्रिया कराने पर ऑर्थोबोरिक अम्ल में जल-अपघटित हो जाते हैं। निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड (\(\text{Al}_2\text{Cl}_6\)) सूत्र का सहसंयोजक यौगिक हैं जिसकी क्लोरीन-ब्रिज संरचना है। हाइड्रेटेड ऐलुमिनियम क्लोराइड (\(\text{AlCl}_3 : 6\text{H}_2\text{O}\)), जलीय विलयन में \(\text{Al}^{3+}\) और \(\text{Cl}^-\) आयनों में वियोजित होता है।
12. बोरॉन कार्बाइड (\(\text{B}_4\text{C}\)) अति उच्च गलनांक का बहुत कठोर सहसंयोजक ठोस है एवं रासायनिक रूप से अक्रिये (inert) है।
In simple words: बोरॉन और ऐलुमिनियम, एक ही वर्ग के तत्व होने के बावजूद, अपने छोटे आकार, उच्च आयनन ऊर्जा और \("d"\) कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण बोरॉन में, तथा \("d"\) कक्षकों की उपस्थिति के कारण ऐलुमिनियम में कई असंगत गुणधर्म दर्शाते हैं, जैसे धातु-अधातु प्रकृति, ऑक्साइडों की अम्लता और हाइड्राइडों की स्थिरता।
🎯 Exam Tip: बोरॉन और ऐलुमिनियम के असंगत व्यवहार के मुख्य कारणों (आकार में अंतर, d-कक्षकों की अनुपस्थिति/उपस्थिति) को समझें। इन भिन्नताओं से संबंधित प्रत्येक बिंदु (भौतिक गुण, रासायनिक प्रकृति, यौगिकों का प्रकार) को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. कोलमैनाइट द्वारा बोरेक्स बनाने की विधि एवं रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
Answer: कोलमैनाइट को सोडियम कार्बोनेट के सान्द्र विलयन के साथ उबालने पर बोरेक्स बनती है।
विलयन को छानकर उसका क्रिस्टलीकरण करने पर बोरेक्स के क्रिस्टल प्राप्त होते हैं। क्रिस्टलों को पृथक् करके मातृ द्रव में \(\text{CO}_2\) प्रवाहित करने पर सोडियम मेटाबोरेट, बोरेक्स में बदल जाता है।
\[ 4\text{NaBO}_2 + \text{CO}_2 \longrightarrow \text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 + \text{Na}_2\text{CO}_3 \]In simple words: कोलमैनाइट से बोरेक्स बनाने के लिए, कोलमैनाइट को सोडियम कार्बोनेट के घोल के साथ उबालकर सोडियम मेटाबोरेट बनाया जाता है। फिर, इस मेटाबोरेट के घोल में कार्बन डाइऑक्साइड प्रवाहित करके बोरेक्स प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: कोलमैनाइट से बोरेक्स संश्लेषण की विधि और रासायनिक समीकरण को याद रखें। यह बोरेक्स के औद्योगिक उत्पादन का एक महत्वपूर्ण तरीका है और अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
Question 4. बोरिक अम्ल बनाने की विधि एवं इसके दो रासायनिक गुण लिखिए। सम्बन्धित रासायनिक समीकरण भी दीजिए।
Answer: बोरिक अम्ल बनाने की विधि-बोरेक्स के सीन्द्र जलीय विलयन पर \(\text{HCl}\) या \(\text{H}_2\text{SO}_4\) अम्ल की क्रिया से बोरिक अम्ल बनता है।
\[ \text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 + \text{H}_2\text{SO}_4 + 5\text{H}_2\text{O} \longrightarrow \text{Na}_2\text{SO}_4 + 4\text{H}_3\text{BO}_3 \]
\[ \text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 + 2\text{HCl} + 5\text{H}_2\text{O} \longrightarrow 2\text{NaCl} + 4\text{H}_3\text{BO}_3 \]
रासायनिक गुण
1. बोरिक अम्ल को गर्म करने पर बोरिक ऐनहाइड्राइड बनता है।
2. बोरिक अम्ल को सान्द्र \(\text{H}_2\text{SO}_4\) की उपस्थिति में एथिल ऐल्कोहॉल के साथ गर्म करने पर एथिल बोरेट की वाष्प बनती है जो जलाए जाने पर हरे रंग की ज्वाला से जलती है।
\[ \text{H}_3\text{BO}_3 + 3\text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \xrightarrow{\text{सान्द्र H}_2\text{SO}_4, \Delta} (\text{C}_2\text{H}_5)_3\text{BO}_3 + 3\text{H}_2\text{O} \]In simple words: बोरिक अम्ल को बोरेक्स के जलीय विलयन पर सान्द्र \(\text{HCl}\) या \(\text{H}_2\text{SO}_4\) की क्रिया से बनाया जाता है। इसके रासायनिक गुणों में गर्म करने पर बोरिक एनहाइड्राइड में बदलना और सान्द्र \(\text{H}_2\text{SO}_4\) की उपस्थिति में एथिल अल्कोहल के साथ एथिल बोरेट बनाना शामिल है, जो हरे रंग की ज्वाला से जलता है।
🎯 Exam Tip: बोरिक अम्ल के संश्लेषण और उसकी महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है। तापीय अपघटन और एथिल बोरेट बनने वाली अभिक्रिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
Question 5. बोरिक अम्ल से प्रारम्भ करके निम्नलिखित यौगिकों को कैसे प्राप्त करोगे?
1. बोरॉन ऐनहाइड्राइड
2. बोरॉन ट्राइक्लोराइड
3. बोरॉन हाइड्राइड
4. बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड ।
Answer:
1. बोरिक अम्ल से बोरॉन ऐनहाइड्राइड में परिर्वतन-बोरिक अम्ल को रक्त तप्त करने पर बोरॉन ऐनहाइड्राइड प्राप्त होता है।
\[ 2\text{H}_3\text{BO}_3 \xrightarrow{\text{रक्त तप्त}} \text{B}_2\text{O}_3 + 3\text{H}_2\text{O} \]
2. बोरिक अम्ल से बोरॉन ट्राइक्लोराइड में परिवर्तन-उपर्युक्त विधि से सबसे पहले बोरॉन ऐनहाइड्राइड को प्राप्त कर लिया जाता है। बोरॉन ऐनहाइड्राइड को कार्बन के साथ मिलाकर रक्त तप्त करने पर, क्लोरीन गैस प्रवाहित की जाती है, तो बोरॉन ट्राइक्लोराइड प्राप्त हो जाता है।
\[ \text{B}_2\text{O}_3 + 3\text{C} + 3\text{Cl}_2 \xrightarrow{\text{रक्त तप्त}} 2\text{BCl}_3 + 3\text{CO}\uparrow \]
3. बोरिक अम्ल से बोरॉन हाइड्राइड में परिवर्तन-उपर्युक्त विधि से प्राप्त बोरॉन ऐनहाइड्राइड को मैग्नीशियम चूर्ण के साथ गर्म करके मैग्नीशियम बोराइड प्राप्त कर लिया जाता है। मैग्नीशियम बोराइड तनु \(\text{HCl}\) से अभिक्रिया करके वाष्पशील हाइड्राइडों का मिश्रण देता है।
\[ \text{B}_2\text{O}_3 + 6\text{Mg} \longrightarrow \text{Mg}_3\text{B}_2 + 3\text{MgO} \]
\[ 2\text{Mg}_3\text{B}_2 + 12\text{HCl} \xrightarrow{\text{(तनु)}} 6\text{MgCl}_2 + \text{B}_4\text{H}_{10} + \text{H}_2\uparrow \]
4. बोरिक अम्ल से बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड़ में परिवर्तन-जब बोरिक अम्ल को सान्द्र \(\text{H}_2\text{SO}_4\) और \(\text{CaF}_2\) के साथ गर्म किया जाता है; तो बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड की वाष्प प्राप्त हो जाती है।
\[ \text{CaF}_2 + \text{H}_2\text{SO}_4 \longrightarrow \text{CaSO}_4 + \text{H}_2\text{F}_2 \]
\[ 3\text{H}_2\text{F}_2 + 2\text{H}_3\text{BO}_3 \longrightarrow 2\text{BF}_3\uparrow + 6\text{H}_2\text{O} \]In simple words: बोरिक अम्ल को गर्म करने पर बोरॉन एनहाइड्राइड, कार्बन और क्लोरीन के साथ प्रतिक्रिया करके बोरॉन ट्राइक्लोराइड, मैग्नीशियम के साथ प्रतिक्रिया करके बोरॉन हाइड्राइड, और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल व कैल्शियम फ्लोराइड के साथ प्रतिक्रिया करके बोरॉन ट्राइफ्लोराइड प्राप्त किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: बोरिक अम्ल से विभिन्न बोरॉन यौगिकों के संश्लेषण के लिए इन बहु-चरणीय अभिक्रियाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक चरण के अभिकारकों, उत्पादों और तापमान जैसी स्थितियों पर ध्यान दें।
Question 6. वर्ग 14 के तत्वों की अभिक्रियाशीलता को समझाइए ।
Answer: वर्ग 14 में कार्बन की रासायनिक प्रवृत्ति अन्य तत्वों से भिन्न है। सिलिकन वर्ग के अन्य तत्वों से गुणों में भिन्नता प्रदर्शित करता है। वर्ग 14 में Ge, Sn और Pb तीनों \(O_2\), \(Cl_2\), S, सान्द्र \(HNO_2\) और गर्म सान्द्र \(NaOH\) विलयन से अभिक्रिया करते हैं। \[ \text{Ge} + O_2 \xrightarrow{\Delta} \text{GeO}_2 \] \[ \text{Sn} + O_2 \xrightarrow{\Delta} \text{SnO}_2 \] \[ \text{Pb} + O_2 \xrightarrow{450^\circ C} \text{PbO} \implies \text{Pb}_3O_4 \] \[ \text{Ge} + 2Cl_2 \implies \text{GeCl}_4 \] \[ \text{Sn} + 2Cl_2 \implies \text{SnCl}_4 \] \[ \text{Pb} + Cl_2 \xrightarrow{\Delta} \text{PbCl}_2 \] \[ \text{Ge} + 2S \xrightarrow{\Delta} \text{GeS}_2 \] \[ \text{Sn} + 2S \xrightarrow{\Delta} \text{SnS}_2 \] \[ \text{Pb} + 2S \xrightarrow{\Delta} \text{PbS} \] \[ \text{Ge} + \text{HNO}_3 \implies \text{GeO}_2 \cdot xH_2O \] (सान्द्र) (हाइड्रेटेड) \[ \text{Sn} + \text{HNO}_3 \implies \text{SnO}_2 \cdot xH_2O \] (सान्द्र) (हाइड्रेटेड) \[ \text{Pb} + \text{HNO}_3 \implies \text{Pb(NO}_3)_2 \] (सान्द्र) \[ \text{Ge} + 2\text{NaOH} + H_2O \xrightarrow{\Delta} \text{Na}_2 \text{GeO}_3 + 2H_2 \] (सान्द्र) \[ \text{Sn} + 2\text{NaOH} + H_2O \xrightarrow{\Delta} \text{Na}_2 \text{SnO}_3 + 2H_2 \] (सान्द्र) \[ \text{Pb} + 2\text{NaOH} \xrightarrow{\Delta} \text{Na}_2 \text{PbO}_2 + H_2 \] (सान्द्र)In simple words: Group 14 elements show varying reactivity with oxygen, halogens, acids, and bases. Their reactions involve forming oxides, chlorides, sulfides, and hydroxides, often requiring heat.
🎯 Exam Tip: Remember specific reaction conditions (like presence of heat, concentration of acid) and the different products formed for each element in Group 14.
Question 7. ‘वर्ग 14 के प्रथम तत्व अर्थात कार्बन के असंगत व्यवहार पर टिपणी लिखिए।
Answer: वर्ग 14 में स्थित सभी तत्वों के बाह्यतम कोश का विन्यास \(s^2p^2\) है। इस समानता के कारण वर्ग 14 के तत्व कई गुणों में समानताएँ प्रदर्शित करते हैं, परन्तु बाह्यतम कोश से पिछले कोश में, C(6) में 2, Si (14) में 8, Ge (32), Sn (50) और Pb (82) में 18 इलेक्ट्रॉन हैं। इस भिन्नता के कारण कार्बन (C) और सिलिकन (Si) के गुणों में तथा Si और Ge, Sn, Pb के गुणों में बहुत असमानताएँ हैं। कार्बन वर्ग 14 का प्रथम तत्व है तथा यह छोटी परमाणु त्रिज्या, उच्च विद्युत ऋणात्मकता, पिछले कोश में 2 इलेक्ट्रॉन और बाह्यतम कोश में केवल s और p ऑर्बिटलों की उपस्थिति के कारण सिलिकन और वर्ग के अन्य तत्वों से गुणों में भिन्नताएँ प्रदर्शित करता है। ये भिन्नताएँ निम्नवत् हैं-
(1) C (6) की विद्युत ऋणात्मकता 2.5 और Si (14) की 1.8 है।
(2) कार्बन की परमाणु त्रिज्या 0.77A और Si की 1.17A है।
(3) C-C बन्ध की बन्धन ऊर्जा 85 kcal mol-1 और Si-Si बन्ध की 53 kcal mol-1 है। कार्बन में श्रृंखलित होने की प्रवृत्ति सिलिकन की अपेक्षा बहुत प्रबल है। इस गुण के कारण कार्बन के यौगिकों की संख्या बहुत अधिक है।
(4) कार्बन परमाणु एक-दूसरे के साथ तथा ऑक्सीजन, सल्फर और नाइट्रोजन परमाणुओं से द्वि-बन्ध या त्रि-बन्ध बना सकते हैं, किन्तु सिलिकन द्वि-बन्ध और त्रि-बन्ध नहीं बनाता है।
(5) कार्बन के संयोजी कोश में केवल 5 और 2 ऑर्बिटल हैं। संयोजी कोश में 4 ऑर्बिटलों की अनुपस्थिति के कारण कार्बन अपने बाह्यतम कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं रख सकता है। अत: कार्बन की अधिकतम सहसंयोजकता 4 है। सिलिकन के बाह्यतम कोश में d ऑर्बिटलों की उपस्थिति के कारण सिलिकन अपने बाह्यतम कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन रख सकता है। सिलिकन की अधिकतम सहसंयोजकता 6 है। अत: कार्बन के \(CX_4\) प्रकार के यौगिक पूर्णतः संतृप्त और स्थाई हैं। सिलिकन के \(SiX_4\) प्रकार के यौगिक असंतृप्त और अस्थाई हैं और ये यौगिक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म युक्त अणुओं, जैसे- आदि से अभिक्रिया करके योगात्मक यौगिक बनाते हैं।In simple words: Carbon, being the first element of Group 14, shows anomalous behavior compared to other elements due to its small size, high electronegativity, and absence of d-orbitals. This leads to differences in catenation, multiple bond formation, and maximum covalency.
🎯 Exam Tip: Focus on the reasons for anomalous behavior: small size, high electronegativity, and non-availability of d-orbitals in carbon. Compare carbon's unique properties (like strong catenation and multiple bond formation) with those of silicon and heavier elements.
Question 8. कार्बन-कार्बन में श्रृंखला के गुण को समझाइए ।
या
श्रृंखलित होने के गुण से आप क्या समझते हैं। चौदहवें समूह के उस तत्त्व का नाम लिखिए जो सबसे ज्यादा शृंखलित होने का गुण रखता है।
Answer: किसी तत्त्व के समान परमाणुओं के द्वारा परस्पर मिलकर लम्बी श्रृंखला बनाने के गुण को श्रृंखलन कहते हैं। तत्त्वों की इस प्रवृत्ति को श्रृंखलन प्रवृत्ति कहते हैं। चौदहवें समूह के कार्बन में श्रृंखलित होने का गुण सर्वाधिक होता है। इसीलिए ये बन्द तथा खुली श्रृंखला के यौगिक बनाते हैं। श्रृंखलन गुण के कारण ही कार्बनिक यौगिकों की संख्या बहुत अधिक है। कार्बन-कार्बन आबन्ध की बन्धन ऊर्जा सर्वाधिक 85 जूल किलो कैलोरी/मोल होती है।In simple words: Catenation is the ability of an element's atoms to form long chains or rings with each other. Carbon exhibits the highest catenation among Group 14 elements due to the strong C-C bond energy, leading to a vast number of organic compounds.
🎯 Exam Tip: Understand that strong bond energy (like C-C) is key to catenation. Recognize carbon as the element with the highest catenation in Group 14 and its significance in organic chemistry.
Question 9. कार्बन मोनोक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड के दो-दो रासायनिक गुण लिखिए।
Answer:
कार्बन मोनोक्साइड के रासायनिक गुण
(1) कार्बन मोनॉक्साइड गैस वायु में नीली ज्वाला के साथ जलती है तथा \(CO_2\) गैस बनती है। \[ 2\text{CO}+O_2 \implies 2\text{CO} \] कार्बन मोनोक्साइड और वायु का मिश्रण विस्फोटक होता है।
(2) कार्बन मोनोक्साइड सक्रियत चारकोल की उपस्थिति में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिल क्लोराइड (फॉस्जीन) बनाती है।।
कार्बन डाइऑक्साइड के रासायनिक गुण
(1) मैग्नीशियम का तार प्रज्वलित करने पर कार्बन डाइऑक्साइड में जलता है। \[ \text{CO}_2 \implies 2\text{Mg} + 2\text{MgO}+\text{C} \]
(2) अमोनियम के आधिक्य में कार्बन डाइऑक्साइड के साथ 200°C ताप और 200 वायुमण्डलीय दाब पर गर्म करने पर यूरिया बनता है।In simple words: Carbon monoxide burns in air to form carbon dioxide and reacts with chlorine to form phosgene. Carbon dioxide reacts with magnesium to produce magnesium oxide and carbon, and with excess ammonia to form urea.
🎯 Exam Tip: For chemical properties, focus on balanced equations and key reaction conditions (e.g., combustion, specific catalysts or temperatures). Knowing the products is crucial.
Question 10. कार्बन डाइऑक्साइड एवं कार्बन मोनॉक्साइड के उपयोग लिखिए ।
Answer: कार्बन डाइऑक्साइड के प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं
(1) यूरिया \([\text{CO(NH}_2)_2]\) उर्वरक के निर्माण में ।
(2) धातु कार्बोनेटों और बाइकार्बोनेटों के निर्माण में; जैसे-\(NaHCO_3\), \(Na_2CO_3\) अवक्षेपित \(CaCO_3\) आदि के निर्माण में ।
(3) ऑक्सीजन से मुक्त वातावरण प्राप्त करने में।
(4) शुष्क बर्फ (dry ice) बनाने में।
कार्बन मोनॉक्साइड के प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं-
(1) धातु निष्कर्षण में, जैसे-मॉण्ड प्रक्रम द्वारा निकिल का निष्कर्षण ।
(2) धातुओं के शोधन में, जैसे-Ni और Fe का शोधन ।।
(3) धातु कार्बोनिल, जैसे- \(Ni(CO)_4\) \(Fe(CO)_5\) बनाने में ।
(4) धातु ऑक्साइडों के अपचयन में, जैसे – \(Fe0+ CO \implies Fe+CO_2\)
(5) ईंधन के रूप में ।
(6) फॉस्जीन \((COCl_2)\) बनाने में।In simple words: Carbon dioxide is used in making urea, carbonates, and dry ice, and for creating inert atmospheres. Carbon monoxide is used in metal extraction, refining, forming metal carbonyls, and as a fuel.
🎯 Exam Tip: Memorize 2-3 key uses for each compound for quick recall. Group similar applications (e.g., metal processes for CO) to aid memory.
Question 11. कार्बन सबऑक्साइड पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Answer: मेलोनिक अम्ल का वायु की अनुपस्थिति में फॉस्फोरस पेन्टॉक्साइड द्वारा 140°C पर निर्जलीकरण कराने पर कार्बन सबऑक्साइड गैस बनती है।
गुण
(1) कार्बन सबऑक्साइड अक्रिय गन्ध की रंगहीन गैस है।
(2) गर्म करने पर 200°C पर यह कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन में अपघटित हो जाती है। \[ C_3 O_2 \xrightarrow{\Delta} \text{CO}_2 + 2\text{C} \] कार्बन सबऑक्साइड की निम्न संरचना है। \(O= C=C=C=O\)In simple words: Carbon suboxide (\(C_3O_2\)) is formed by the dehydration of malonic acid using phosphorus pentoxide. It's a colorless, odorless gas that decomposes into carbon dioxide and carbon upon heating.
🎯 Exam Tip: Understand its formation reaction and its simple decomposition upon heating. Remember its linear molecular structure.
Question 12. कार्बन के हैलोजन यौगिकों के उपयोग लिखिए ।
Answer: कार्बन के प्रमुख हैलोजन यौगिक एवं उनके उपयोग निम्नवत् हैं-
(1) कार्बन टेट्राक्लोराइड \((CCl_4)\)-कार्बन टेट्राक्लोराइड के कुछ उपयोग निम्नलिखित हैं|
(1) अग्निशामक (Fire extinguisher) के रूप में कार्बन टेट्राक्लोराइड की वाष्प अज्वलनशील और वायु से भारी होती है। अतः कार्बन टेट्राक्लोराइड का उपयोग अग्निशामक के रूप में किया जाता है। \(CCl_4\) को पाइरीन (pyrene) कहते हैं।
(2) विलायक के रूप में कार्बन टेट्राक्लोराइड का उपयोग तेल, वसा, रेजिन, आयोडीन, ब्रोमीन आदि के लिए विलायक के रूप में किया जाता है।
(2) फ्रेऑन (Freons)-मेथेन और एथेन के क्लोरोफ्लुओरो व्युत्पन्न फ्रेऑन कहलाते हैं। फ्रेऑन का उपयोग प्रशीतक के रूप में और वातानुकूलन में किया जाता है। डाइक्लोरोडाइफ्लुओरोमेथेन–(फ्रेऑन-12), \(CCl_2F_2\) और ट्राइक्लोरोफ्लुओरोमेथेन (फ्रेऑन-11), \(CFCl_3\) : ये दोनों यौगिक अविषैली एवं बहुत स्थायी और अज्वलनशील (non-inflammable) गैसें हैं। ये सुगमता से द्रवित हो जाती हैं। ये रासायनिक रूप से निष्क्रिय हैं। इनका उपयोग प्रशीतक (refrigerant) के रूप में एवं वातानुकूलन (air conditioning) में किया जाता है।In simple words: Carbon-halogen compounds like carbon tetrachloride are used as fire extinguishers and solvents. Freons, such as dichlorodifluoromethane and trichlorofluoromethane, are widely used as refrigerants and in air conditioning systems due to their stable and non-flammable nature.
🎯 Exam Tip: Note the primary uses of \(CCl_4\) (fire extinguisher, solvent) and Freons (refrigerants, AC). Understand the properties that make them suitable for these applications, like non-flammability and stability.
Question 13. सिलिकन कार्बाइड (कार्बोरण्डम) के उपयोग लिखिए ।
Answer: बहुत कठोर होने के कारण सिलिकन कार्बाइड का उपयोग अपघर्षी चूर्ण (abrasive powder), होनस्टोन (honestone), घर्षण व्हील (grinding wheels), वेटस्टोन (whetstone), पॉलिश स्टोन (polishing stone), पॉलिश क्लॉथ (polishing cloths), रेगमाल (sand paper) आदि वस्तुएँ। बनाने में होता है। अति उच्च तापसह एवं दुर्गलनीय (refractory) प्रकृति तथा उच्च ऊष्मा चालकता होने के कारण सिलिकन कार्बाइड का उपयोग धातुओं को गलाने के लिए क्रूसिबल (crucible) बनाने में होता है। कार्बोरन्डम की छड़ों (rods) के रूप में प्रतिरोध हीटर (resistance heaters), औद्योगिक भट्टियों में प्रयुक्त किए जाते हैं।In simple words: Silicon carbide, known as carborundum, is extremely hard, making it useful as an abrasive in various grinding and polishing tools. Its high temperature resistance and thermal conductivity also make it suitable for crucibles and heating elements in industries.
🎯 Exam Tip: Remember silicon carbide's key properties: extreme hardness and high thermal stability. These properties directly translate to its applications as an abrasive and refractory material.
Question 14. सिलिकेटों के मुख्य वर्ग, सूत्र और उनकी संरचनाओं को दर्शाइए ।
Answer: सिलिकेटों के मुख्य वर्गों, सूत्रों तथा संरचनाओं को निम्नंकित सारणी में दर्शाया गया है-
| वर्ग का नाम | सूत्र | संरचना |
|---|---|---|
| ऑर्थोसिलिकेट | \(SiO_4^{4-}\) | ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक केंद्रीय सिलिकॉन परमाणु को चार ऑक्सीजन परमाणुओं से घिरा हुआ दर्शाता है, जो सभी एकल ऋण आवेशित हैं। यह संरचना एक स्वतंत्र टेट्राहेड्रल इकाई को दर्शाती है। |
| पाइरोसिलिकेट | \(Si_2O_7^{6-}\) | ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह दो सिलिकॉन-ऑक्सीजन टेट्राहेड्रल इकाइयों को एक ऑक्सीजन परमाणु के माध्यम से जुड़ा हुआ दिखाता है, जिससे एक \(Si-O-Si\) सेतु बनता है और शेष ऑक्सीजन परमाणु एकल ऋण आवेशित होते हैं। |
| चक्रीय सिलिकेट | \(Si_3O_9^{6-}\) या \((SiO_3)_n^{2n-}\) | ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह तीन सिलिकॉन-ऑक्सीजन टेट्राहेड्रल इकाइयों को एक वलय संरचना में जुड़ा हुआ दर्शाता है, जहाँ प्रत्येक सिलिकॉन दो ऑक्सीजन परमाणुओं को साझा करता है और शेष ऑक्सीजन परमाणु एकल ऋण आवेशित होते हैं, एक चक्रीय त्रि-सिलिकेट इकाई बनाते हैं। |
| पायरॉक्सिन सिलिकेट | \((SiO_3)_n^{2n-}\) | ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह सिलिकॉन-ऑक्सीजन टेट्राहेड्रल इकाइयों की एक लंबी एकल श्रृंखला को दर्शाता है, जहाँ प्रत्येक सिलिकॉन परमाणु दो ऑक्सीजन परमाणुओं को साझा करता है, जिससे एक रेखीय बहुलक बनता है। |
| अनन्त परतीय सिलिकेट | \((Si_2O_5)_n^{2n-}\) या \(Si_4O_{10}^{4-}\) | ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक द्वि-आयामी परतदार संरचना को दर्शाता है जहाँ सिलिकॉन-ऑक्सीजन टेट्राहेड्रल इकाइयाँ एक बड़ी शीट बनाने के लिए एक नेटवर्क में जुड़ी होती हैं, प्रत्येक सिलिकॉन परमाणु तीन ऑक्सीजन परमाणुओं को साझा करता है। |
🎯 Exam Tip: Focus on understanding the basic \(SiO_4^{4-}\) tetrahedral unit. The number of shared oxygen atoms between these tetrahedra determines the class and general formula of the silicate.
Question 15. जियोलाइट पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए ।
Answer: जियोलाइट खुली संरचना के हाइड्रेटेड त्रिविम ऐलुमिनोसिलिकेट हैं जो आण्विक छन्नी (molecular sieve) के रूप में कार्य करने के अतिरिक्त, अपने धनायनों का विलयन में उपस्थित धनायनों से विनिमय (exchange) कर सकते हैं। जियोलाइट में पंजर (cages) बहुत सममित और परिशुद्ध आकार (precise size) के होते हैं। जियोलाइट आकृति वर्णात्मक (shape selective) विषमांगी उत्प्रेरण के लिए भी प्रयुक्त किए जाते हैं। उदाहणार्थ-आण्विक छन्नी ZSM-5 का ऑर्थोजाइलीन को संश्लेषण करने में उपयोग किया जाता है, ऑर्थोंजाइलीन के साथ अन्य जाईलीने नहीं बनती हैं, क्योंकि उत्प्रेरक प्रक्रम जियोलाइट के पंजरों (cages) और उसकी सुरंगों (tunnels) के आकार और आकृति द्वारा नियन्त्रित होता है। औद्योगिक प्रयोजनों के लिए वर्णात्मक आकार और आकृति के संश्लेषित जियोलाइट (synthetic zeolites) बनाए गए हैं। कुछ आण्विक छन्नियाँ (molecular sieves) और जियोलाइटों के संघटन निम्नलिखित हैं-
\(Na_{12}[(\text{AlO}_2)_{12}(\text{SiO}_2)_{12}] \cdot xH_2O\)
\(Ca_{22}[(\text{AlO}_4)_4 (\text{SiO}_2)_8] \cdot xH_2O\)
\(Na_3[(\text{AlO}_2)_3(\text{SiO}_2)] \cdot xH_2O\) निम्न खनिज भी जियोलाइट हैं- ऐनलसाइट (Analcite), \(Na[\text{AlSi}_2O_6] \cdot H_2O\) सोडालाइट (Sodalite), \(Na_6[(\text{Al}_6\text{Si}_6O_{24}] \cdot 2H_2O\) प्राकृतिक और संश्लिष्ट (synthetic) दोनों प्रकार के जियोलाइट बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी पदार्थ हैं जिनके रसायन एवं उद्योग में कई अनुप्रयोग हैं। खुली संरचना के कारण (1) जियोलाइट धनायन विनिमायक (cation exchanger) का कार्य करते हैं। कठोर जल के मृदुकरण में जियोलाइटों का उपयोग होता है। (2) जियोलाइट आण्विक छन्नियों (molecular sieves) का कार्य करते हैं, क्योंकि इनकी गुहिकाओं और चैनलों में से अणु स्वतन्त्रतापूर्वक अभिगमन कर सकते हैं। छिद्रों के आकार से बहुत बड़े अणु प्रभावित नहीं होते हैं। वांछित आकार के छिद्रों की गुहिकाओं के जियोलाइट संश्लेषित किए गए हैं जिनका उपयोग कार्बनिक यौगिकों के पृथक्करण, शोधन आदि में किया गया है। उदाहरणार्थ-एक संश्लिष्ट जियोलाइट ऋजु-श्रृंखला (straight chain) ऐल्केनों को तो अधिशोषित करता है, परन्तु शाखित श्रृंखला ऐल्केनों और ऐरोमैटिक यौगिकों को नहीं करता है।In simple words: Zeolites are hydrated aluminosilicates with a porous, open three-dimensional structure, acting as molecular sieves and ion exchangers. Their precise pore and cage sizes allow them to selectively absorb molecules, making them useful in water softening and shape-selective catalysis for various industrial applications.
🎯 Exam Tip: Focus on zeolites' dual role as molecular sieves (due to shape-selective properties) and ion exchangers. Provide examples like ZSM-5 for shape-selective catalysis and their use in water softening.
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में बोरॉन परिवार (वर्ग 13) की स्थिति की विवेचना कीजिए ।
Answer: आवर्त सारणी में p-ब्लॉक के वर्ग 13 में पाँच तत्व हैं— बोरॉन (B), ऐलुमिनियम (Al), गैलियम (Ga), इण्डियम (In) और थैलियम (Tl)। बोरॉन को छोड़कर सभी तत्व धातु हैं। इन तत्वों के बाह्यतम कोश को विन्यास \(ns^2np^1\) है, परन्तु निम्नतम क्रोड भिन्न है। इन तत्वों के आन्तरिक कोश पूर्ण भरे होते हैं। बाह्यतम कोश का विन्यास \(ns^2np^1\) होने के कारण ही उन्हें p ब्लॉक के वर्ग 13 में रखा गया है। बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में समानता होने के कारण ये तत्व गुणों में समानताएँ प्रदर्शित करते हैं। बोरॉन परिवार के तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नवत् हैं-
\(^5 B = 1s^2, 2s^2 2p^1\)
\(^{13} Al = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^1\)
\(^{31} Ga = 1s^2 2s^2 2p^6 3s^2 3p^6 3d^{10} 4s^2 4p^1\)
\(^{49} In = 1s^2, 2s^2 2p^6 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^6 4d^{10}, 5s^2 5p^1\)
\(^{81} Tl=1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^6 4d^{10}4f^{14}, 5s^2 5p^65d^{10}, 6s^2 6p^1\)
गुणों में समानता
(1) बोरॉन को छोड़करे सभी तत्व धातु हैं।
(2) ये प्रकृति में मुक्त अवस्था में भी मिलते हैं।
(3) बोरॉन परिवार के तत्वों की वर्ग संयोजकता 3 है।
(4) ये सभी तत्व त्रि-संयोजीयौगिक बनाते हैं।
(5) इन तत्वों की आयनन ऊर्जाएँ उच्च हैं।
गुणों में क्रमिक परिवर्तन
(1) वर्ग में नीचे जाने पर तत्वों (M) के परमाणु साइज में वृद्धि होने के साथ M-x बन्ध की बन्धन ऊर्जा घटती है। वर्ग में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ उच्च ऑक्सीकरण अवस्था निम्न ऑक्सीकरण अवस्था की तुलना में कम स्थायी होती जाती है।
(2) वर्ग में नीचे की ओर जाने पर अधात्विक लक्षण घटता है तथा धात्विक लक्षण बढ़ता है।
(3) वर्ग में धन विद्युत लक्षण B से Tl तक बढ़ता है।
(4) वर्ग में नीचे की ओर जाने पर परमाणु त्रिज्याएँ बढ़ती हैं।
(5) वर्ग में नीचे की ओर जाने पर आयनिक त्रिज्याएँ बढ़ती हैं।
(6) वर्ग में तत्वों का घनत्व B में Tl तक बढ़ता है। अतः इनके गुणों से समानता तथा गुणों के क्रमिक परिवर्तन तत्वों को एक ही उपवर्ग में रखे जाने की पुष्टि करते हैं।In simple words: The boron family (Group 13) elements share a common outer electronic configuration of \(ns^2np^1\), leading to similarities in their valency and compound formation. However, variations in inner core electrons cause gradual changes in properties like atomic size, ionization energy, electronegativity, and metallic character down the group.
🎯 Exam Tip: Pay close attention to the general electronic configuration \(ns^2np^1\). Understand how the presence of d and f electrons in heavier elements (Ga, In, Tl) causes deviations from expected trends in atomic size and ionization energy due to poor shielding.
Question 2. बोरॉन के निर्माण की विधि, भौतिक गुण एवं रासायनिक गुण लिखिए।
Answer: प्रकृति में बोरॉन मुख्यतः बोरेक्स और कोलमैनाइट के रूप में पाया जाता है। यह अपररूपता प्रदर्शित करता है। बोरॉन के दो अपररूप निम्नवत् हैं-
1. अक्रिस्टलीय बोरॉन
निर्माण विधि-बोरिक ऐनहाइड्राइड \((B_2SO_4)\) का उच्च ताप पर सोडियम, पोटैशियम या मैग्नीशियम द्वारा अपचयन कराने पर बोरॉन भूरे-काले रंग के अक्रिस्टलीय (amorphous) चूर्ण के रूप में प्राप्त होता है। \[ B_2O_3(s) + 3\text{Mg} (s) \xrightarrow{\Delta} 2B(s) + 3\text{MgO}(s) \] 'बोरॉन ट्राइऑक्साइड मैग्नीशियम अक्रिस्टलीय बोरॉन मैग्नीशियम (बोरिक ऐनहाइड्राइड) (भूरे-काले रंग का चूर्ण) ऑक्साइड बोरॉन ट्राइऑक्साइड को सोडियम, पोटैशियम या मैग्नीशियम रिबन के टुकड़ों के साथ एक ढके हुए क्रूसिबल में तेज गर्म करते हैं। संगलित द्रव्य को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ उबालकर छानने पर अक्रिस्टलीय बोरॉन का गहरा भूरा ठोस अवशेष प्राप्त होता है। बोरॉन के प्रमुख भौतिक निम्नवत् हैं-(1) यह भूरे-काले रंग का चूर्ण है।
(2) इसका आपेक्षिक घनत्व 1.73 है।
(3) इसका गलनांक 2100°C है।
(4) इसका क्वथनांक 2150°C है। बोरॉन के प्रमुख रासायनिक गुण गुण निम्नवत् हैं- बोरॉन का अक्रिस्टलीय रूप अभिक्रियाशील है। यह उच्च ताप पर नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सल्फर और हैलोजनों \((F_2, Cl_2, Br_2)\) से सीधे संयोग करके नाइट्राइड, ऑक्साइड, सल्फाइड और हैलाइड बनाता है।
(1) बोरॉन नाइट्राइड, ऑक्साइड और सल्फाइड की वृहत् अणु संरचनाएँ हैं जिनमें सम्पूर्ण क्रिस्टल में परमाणु एक-दूसरे से सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़े होते हैं। \[ 2B(s) + N_2 (g) \xrightarrow{\Delta} 2BN(s) \] \[ 4B(s) + 3O_2 (g) \xrightarrow{\Delta} 2B_2O_3(s) \] \[ 4B(s) + 6S(s) \xrightarrow{\Delta} 2B_2S_3 (5) \] \[ 2B(s) + 3Cl_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2BCl_3 (5) \]
(2) अक्रिस्टलीय बोरॉन रक्त-तप्त ताप पर जल-वाष्प (steam) को हाइड्रोजन में अपचयित करता है। \[ 2B + 3H_2O \xrightarrow{\Delta} B_2O_3 + H_2 \]
(3) गर्म सान्द्र नाइट्रिक अम्ल अक्रिस्टलीय बोरॉन को ऑर्थोबोरिक अम्ल में ऑक्सीकृत करता है। \[ B + 3\text{HNO}_3 \xrightarrow{\Delta} H_3BO_3 + 3NO_2 \]
(4) अक्रिस्टलीय बोरॉन उच्च ताप पर कई ऑक्साइडों, सल्फाइडों और क्लोराइडों को अपचयित करता है।
(5) अक्रिस्टलीय बोरॉन गलित सोडियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया करके मेटाबोरेट बनाता है। और हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है। \[ 2B + 2\text{NaOH} + 2H_2O \xrightarrow{\Delta} 2\text{NaBO}_2 + 3H_2 \]
2. क्रिस्टलीय बोरॉन निर्माण विधि-क्रिस्टलीय बोरॉन वैद्युत-तप्त टैनटेलम फिलामेन्ट पर 1000-1300°C पर बोरॉन ट्राइब्रोमाइड वाष्प का और हाइड्रोजन के मिश्रण को प्रवाहित करके या बोरॉन ट्राइआयोडाइड वाष्प और हाइड्रोजन के मिश्रण के तापीय अपघटन द्वारा बनाया जाता है।
\[ 2\text{BI}_3 \xrightarrow{\text{तप्त Ta}} 2B(s) + 3I_2 \] \[ 2\text{BBr}_3 + 3H_2 \xrightarrow{\text{तप्त Ta}} 2B + 6\text{HBr} \]गुण-क्रिस्टलीय बोरॉन बहुत कठोर और रासायनिक रूप से निष्क्रिय काला क्रिस्टलीय ठोस है।
In simple words: Boron exists in amorphous (brown-black powder, reactive at high temps) and crystalline (hard, inert black solid) forms. It's prepared by reducing boron anhydride with magnesium or by thermal decomposition of boron halides with hydrogen. Chemically, it reacts with non-metals (N, O, S, halogens) at high temperatures and reduces steam and hot concentrated nitric acid.🎯 Exam Tip: Distinguish between amorphous and crystalline boron's properties and preparation methods. Focus on the typical high-temperature reactions of amorphous boron with various non-metals and oxidizing agents, and include balanced chemical equations.
Question 3. ऐलुमिनियम के गुण तथा उपयोगों का वर्णन कीजिए।
Answer: भौतिक गुण-ऐलुमिनियम में सफेद रंग की धात्वीय चमक होती है। यह विद्युत और ऊष्मा का सुचालक होता है। इसका घनत्व 2.7 ग्राम प्रति घन सेमी होता है। इसका गलनांक 600°C है। रासायनिक गुण-ऐलुमिनियम के मुख्य रासायनिक गुण निम्नलिखित हैं-
(1) वायु का प्रभाव वायु में जलाने पर यह तीव्र प्रकाश से जलता है तथा \(Al_2O_3\) बनाता है और बहुत अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
(2) जल से क्रिया-यह उबलते हुए जल को अपघटित कर \(H_2\) उत्पन्न करता है।
(3) अम्लों से क्रिया-
(a) यह तनु या सान्द्र HCl से क्रिया करके क्लोराइड बनाता है और \(H_2\) गैस निकालता है।
(b) यह तनु \(H_2SO_4\) से क्रिया करके \(H_2\) निकालता है और गर्म तथा सान्द्र \(H_2SO_4\) के साथ \(SO_2\) निकालता है। \[ 2\text{Al} + 3H_2SO_4 \implies \text{Al}_2(\text{SO}_4)_3 + 3H_2\uparrow \] \[ 2\text{Al} + 6H_2SO_4 \implies \text{Al}_2(\text{SO}_4)_3+3\text{SO}_2\uparrow + 6H_2O \]
(c) यह तनु \(HNO_3\) से धीरे-धीरे क्रिया करके नाइट्रेट बनाता है, परन्तु सान्द्र \(HNO_3\) का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता ।
(4) क्षारों के साथ क्रिया-यह कॉस्टिक क्षारों के गर्म विलयन के साथ क्रिया करके सोडियम, मेटाऐलुमिनेट बनाता है और \(H_2\) निकलती है।
(5) हैलोजन से क्रिया-Al के गर्म चूर्ण पर हैलोजन प्रवाहित करने पर ऐलुमिनियम हैलाइड बनता है। \[ 2\text{Al} + 3\text{Cl}_2 \implies 2\text{AlCl}_3 \] \[ 2\text{Al} + \text{Br}_2 \implies 2\text{AlBr}_3 \]
(6) नाइट्रोजन के साथ क्रिया-Al के गर्म चूर्ण पर \(N_2\) प्रवाहित करने पर ऐलुमिनियम नाइट्राइड बनता है।
(7) धातु ऑक्साइडों का अपचयन-Al की ऑक्सीजन के प्रति अधिक बन्धुता होने के कारण । यह धातु ऑक्साइडों का धातु में अपचयन कर देता है। \[ \text{Fe}_2O_3 + 2\text{Al} \implies \text{Al}_2O_3 + 2\text{Fe}\downarrow \] \[ \text{Cr}_2O_3 + 2\text{Al} \implies \text{Al}_2O_3 + 2\text{Cr}\downarrow \] \[ 3\text{Mn}_3O_4 + 8\text{Al} \implies 4\text{Al}_2O_3 + 9\text{Mn}\downarrow \] उपयोग-ऐलुमिनियम के प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं-
(1) ऐलुमिनियम की चादर व बर्तन बनाने में,
(2) बिजली के तार बनाने में,
(3) थर्माइट वेल्डिंग में,
(4) क्रोमियम, लोहा तथा मैंगनीज धातु के निष्कर्षण में,
(5) हवाई जहाज तथा मोटर आदि में लगने वाली मिश्रधातुओं के बनाने में,
(6) इसके पत्र (foils) साबुन, सिगरेट आदि लपेटने में प्रयुक्त होते हैं,
(7) ऐलुमिनियम पाउडर तेल के साथ मिलाकर पेन्ट बनाने के काम आता है।In simple words: Aluminum is a lustrous white metal, a good conductor of heat and electricity. It reacts with air to form aluminum oxide, with acids and bases to produce hydrogen, and acts as a reducing agent for metal oxides. Its key uses include manufacturing sheets, wires, thermite welding, and alloys for aircraft.
🎯 Exam Tip: When describing properties, link physical characteristics (e.g., conductivity, density) to chemical reactivity. For chemical reactions, include specific examples with balanced equations. For uses, list diverse applications that highlight its key properties (lightweight, conductive, corrosion-resistant).
Question 4. एक अकार्बनिक लुइस अम्ल (x) निम्नलिखित अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करता है-
(i) यह नम वायु में धुआँ देता है।
(ii) \(NH_4OH\) में भीगी हुई छड़ को इसके समीप लाने पर धुएँ की तीव्रता बढ़ जाती है।
(iii) (x) के अम्लीय घोल में \(NH_4Cl\) तथा \(NH_4OH\) मिलाकर \(NaOH\) मिलाने पर यह घुल जाता है।
(iv) (x) का अम्लीय घोल \(H_2S\) के साथ अवक्षेप नहीं देता है। (x) को पहचानिए तथा (G) से (iii) पदों पर होने वाली अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण दीजिए ।
Answer:
(i) \[ \text{AlCl}_3 + 3H_2O \implies \text{Al(OH)}_3\downarrow + 3\text{HCl} \] (x) (धूम्र)
(ii) \[ \text{HCl} + \text{NH}_4\text{OH} \implies \text{NH}_4\text{Cl} + H_2O \] (\(\text{NH}_4\text{Cl}\))
(iii) \[ \text{AlCl}_3 + 3\text{NH}_4\text{OH} \implies \text{Al(OH)}_3\downarrow +3\text{NH}_4\text{Cl} \] \[ \text{Al(OH)}_3 + \text{NaOH} \implies \text{NaAlO}_2 + 2H_2O \]In simple words: The inorganic Lewis acid (x) is aluminum chloride (\(AlCl_3\)). It hydrolyzes in moist air to produce HCl fumes, reacts with ammonium hydroxide to form a precipitate of aluminum hydroxide which then dissolves in excess NaOH, and does not precipitate with \(H_2S\).
🎯 Exam Tip: Identify the compound (AlCl3) from the given properties, especially its hydrolysis to produce fumes and its amphoteric nature (reacting with both acid and base). Ensure all chemical equations are balanced and products are correctly identified.
Question 5. (i) जब एक खनिज (A) को \(Na_2CO_3\) के विलयन के साथ उबाला जाता है, तो एक सफेद अवक्षेप (B) बनता है।
(ii) अवक्षेप को छानने पर छनित में दो यौगिक (C) तथा (D) उपस्थित होते हैं। यौगिक (C) को | क्रिस्टलीकरण (crystallisation) द्वारा पृथक् किया जाता है मातृ द्रव (mother liquor) में \(CO_2\) प्रवाहित करने पर (D) का (C) में परिवर्तन हो जाता है।
(iii) यौगिक (C), प्रबल गर्म करने पर दो यौगिक (D) और (E) देता है।
(iv) (E) को कोबाल्ट ऑक्साइड के साथ गर्म करने पर नीले रंग का एक पदार्थ (F) प्राप्त होता है। (A) से (F) को पहचानिए तथा (i) से (iv) पदों में होने वाली अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण दीजिए।
Answer:
(i) \[ \text{Ca }_2\text{B}_6O_{11} + 2\text{Na}_2\text{CO}_3 \implies 2\text{CaCO}_3\downarrow + \text{Na}_2\text{B}_4O_7 + 2\text{NaBO}_2 \] (A) (B) (C) (D) कोलीमेनाइट (सफेद अवक्षेप) (विलेय) (विलेय)
(ii) \[ 4\text{NaBO}_2 + \text{CO}_2 \implies \text{Na}_2\text{CO}_3 + \text{Na}_2\text{B}_4O_7 \] (D) (C) सोडियम मेटाबोरेट बोरेक्स
(iii) \[ \text{Na }_2\text{B}_4O_7 \xrightarrow{\text{प्रबल गर्म}} 2\text{NaBO}_2 + \text{B}_2O_3 \] (C) (D) (E) बोरेक्स बोरिक ऐनहाइड्राइड
(iv) \[ \text{CoO}+\text{B}_2O_3 \implies \text{Co(BO}_2)_2 \] (E) (F) कोबाल्ट बोरेट (नीला रंग)In simple words: This problem describes the extraction and reactions of boron compounds. Mineral (A) is colemanite, which reacts with sodium carbonate to form calcium carbonate (B), borax (C), and sodium metaborate (D). Borax (C) on strong heating yields sodium metaborate (D) and boric anhydride (E). Boric anhydride (E) then reacts with cobalt oxide to form cobalt borate (F), a blue substance.
🎯 Exam Tip: This question tests knowledge of borate chemistry, especially the Borax bead test. Understand the sequence of reactions, correctly identify intermediates (A-F), and ensure all chemical equations are balanced.
Question 6. निम्नलिखित में (A) तथा (B) की पहचान कीजिए तथा इसके सूत्र उत्तर-पुस्तिका में लिखिए
Answer:\[ \text{Ca }_2\text{B}_6 O_{11} + 2\text{Na }_2\text{CO}_3 \implies \text{Na}_2\text{B}_4O_7 + 2\text{Na }_2 \text{BO}_2 \] कोलीमेनाइट \(-2\text{CaCO}_3\) \[ \text{Na}_2\text{B}_4O_7 + H_2SO_4 + 5H_2O \implies \text{Na}_2\text{SO}_4 + 4H_3BO_3 \] \[ \text{Na}_2\text{B}_4O_7 + 2\text{HCl} + 5H_2O \implies 2\text{NaCl} + 4H_3BO_3 \] अत : (A) \(Na_2CO_3\), (B) \(H_2SO_4/\text{HCl}\) है।In simple words: The reactions show colemanite reacting with sodium carbonate to produce borax, and then borax reacting with sulfuric acid or hydrochloric acid to form boric acid. Therefore, (A) is sodium carbonate and (B) is sulfuric acid or hydrochloric acid, which are used to convert borax into boric acid.
🎯 Exam Tip: Focus on the industrial preparation of borax from colemanite and the subsequent conversion of borax to boric acid using strong acids. Balancing these key reactions is essential.
Question 7. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में कार्बन परिवार (वर्ग i4) की स्थिति की विवेचना कीजिए ।
Answer: कार्बन, सिलिकन तथा लेड को आवर्त सारणी के IV समूह में रखा गया है। IV समूह दो उपसमूहों में विभाजित है। कार्बन इस समूह का प्रारूपिक तत्त्व है, जो सिलिकन के साथ उपसमूह A तथा B में से किसी भी उपसमूह का सदस्य बन सकता है, परन्तु रासायनिक गुणों एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर यह उपसमूह-A का सदस्य माना जाता है; अतः कार्बन, सिलिकन व लेड IVA समूह के तत्त्वों को कार्बन परिवार (carbon family) के तत्त्व कहते हैं, जिनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार है।
\(^6C = 1s^2, 2s^2 2p^2\)
\(^{14}\text{Si} = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^2\)
\(^{32}\text{Ge} = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^2\)
\(^{50}\text{Sn} = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^6 4d^{10}, 5s^2 5p^2\)
\(^{82}\text{Pb} = 1s^2, 2s^2 2p^6, 3s^2 3p^6 3d^{10}, 4s^2 4p^6 4d^{10}4f^{14}, 5s^2 5p^65d^{10}, 6s^2 6p^2\) उपर्युक्त इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से स्पष्ट है कि सभी तत्त्वों के बाह्य कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं और बाह्य कोश की संरचना as up है; अतः इन्हें एक ही उपवर्ग में रखा जाना उचित है। समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होने के कारण ये समान गुण प्रदर्शित करते हैं तथा परमाणु क्रमांक बढ़ने पर उनमें श्रेणीबद्ध परिवर्तन होता है।
गुणों में समानता
(1) उपवर्ग के सभी तत्त्वों की मुख्य संयोजकता 4 है, परन्तु इनमें कुछ तत्त्वों में 2 संयोजकता भी पाई जाती है।
(2) कार्बन व लेड के अतिरिक्त सभी तत्त्व जटिल यौगिक बनाते हैं।
(3) सभी तत्त्व सहसंयोजक हाइड्राइड बनाते हैं, जिनका स्थायित्व \(CH_4\) से \(PbH_4\) तक घटता है।
(4) सभी तत्त्व डाइऑक्साइड बनाते हैं, परन्तु इनके कुछ तत्त्व मोनोऑक्साइड भी बनाते हैं।
(5) सभी तत्त्व चतुष्फलकीय सह-संयोजक हैलाइड बनाते हैं।
(6) ये सभी तत्त्व ऑक्सी अम्ल बनाते हैं।
गुणों में क्रमिक परिवर्तन
(1) इन तत्त्वों के आयनन विभव उच्च हैं तथा कार्बन से लेड की ओर कम होते जाते हैं।
(2) इंनकी विद्युत ऋणात्मकता नियमित क्रम से नहीं बदलती। कार्बन की विद्युत ऋणात्मकता 2.5 तथा शेष सभी (Si, Ge, Sn, Pb) की लगभग 2.8 है।
(3) कार्बन से लेड की ओर चलने पर धात्विक गुण; घनत्व, परमाणु त्रिज्या तथा परमाणु आयतनों में वृद्धि होती है।
(4) ऑक्साइडों का अम्लीय स्वभाव कार्बन से लेड की ओर कम होता जाता है।
(5) इन तत्त्वों में लेड को छोड़कर अन्य सभी तत्त्वों की श्रृंखला बनाने की क्षमता होती है। यह क्षमता कार्बन से लेड तक घटती हैं। अतः इनके गुणों में समानता तथा गुणों में क्रमिक परिवर्तन तत्त्वों को एक ही उपवर्ग में रखे जाने की पुष्टि करते हैं।In simple words: The carbon family (Group 14) elements, with a common \(ns^2np^2\) outer electronic configuration, exhibit similar valency and compound formation. However, the presence of d and f electrons in heavier elements influences properties like ionization energy, electronegativity, metallic character, and catenation down the group.
🎯 Exam Tip: Understand how the electronic configuration dictates group placement and general chemical behavior. Highlight the `inert pair effect` which leads to the varying stability of +2 and +4 oxidation states down the group, especially for lead.
Question 8. कार्बन के भौतिक एवं रासायनिक गुणों का वर्णन कीजिए ।
Answer:
कार्बन के प्रमुख भौतिक गुण निम्नवत् हैं-
(1) कार्बन के तीन अपररूप हैं—
(a) डायमण्ड (हीरा),
(b) ग्रेफाइट तथा
(c) फुलरीन
(2) इसका गलनांक 3570°C है।।
(3) इनका क्वथनांक 4827°C है।
(4) इसका घनत्व 293 K पर डायमण्ड के लिए 3.5 तथा ग्रेफाइट के लिए 2.22 है।
(5) भूपर्पटी में इनकी बहुतयता 0.08 (प्रतिशत द्रव्यमान से) है।
कार्बन के प्रमुख रासायनिक गुण निम्नवत् हैं-
(1) वायु या ऑक्सीजन से क्रिया-कार्बन को वायु या ऑक्सीजन में जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। \[ 2\text{C}+O_2 \implies 2\text{CO} \] \[ 2\text{CO} + O_2 \implies 2\text{CO}_2 \]
(2) सल्फर से क्रिया-कार्बन को सल्फर के साथ विद्युत भट्टी में गर्म करने पर कार्बन डाइसल्फाइड बनती है। \[ \text{C} + 2\text{S} \xrightarrow{\Delta} \text{CS }_2 \]
(3) सान्द्र नाइट्रिक अम्ल से क्रिया-गर्म सान्द्र नाइट्रिक अम्ल द्वारा कार्बन कार्बन, डाइऑक्साइड में ऑक्सीकृत हो जाता है।
(4) सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल से क्रिया-सन्द्रि सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करने पर कार्बन \(H_2SO_4\) को \(SO_2\) में अपचयित कर देता है। \[ \text{C} + 2H_2SO_4 \xrightarrow{\Delta} \text{CO}_2 + 2\text{SO}_2 + 2H_2O \]
(5) भाप (steam) से क्रिया-रक्त-तप्त कार्बन (कोक) पर भाप प्रवाहित करने पर कार्बन, मोनॉक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण बनता है जिसे जल-गैस (water gas) कहते हैं। \[ \text{C} + H_2O \implies \text{CO} + H_2 \]In simple words: Carbon exists as diamond, graphite, and fullerenes, with distinct physical properties like melting point, boiling point, and density. Chemically, it reacts with oxygen to form CO or \(CO_2\), with sulfur to form carbon disulfide, and with concentrated acids like nitric and sulfuric acid to get oxidized. It also reacts with steam to form water gas.
🎯 Exam Tip: Emphasize the allotropic forms of carbon (diamond, graphite, fullerenes) and their differing physical properties. For chemical properties, remember key reactions with oxygen, sulfur, and concentrated acids, and their balanced chemical equations.
Question 9. सिलिकोन्स क्या हैं? इनके गुणों व उपयोगों का वर्णन कीजिए ।
Answer: सिलिकोन्स-सिलिकोन्स कार्बनिक सिलिकॉन बहुलक होते हैं। इनमें R2SiO इकाइयाँ एक-दूसरे से SiO-बन्ध (Si-O) द्वारा जुड़ी होती हैं। इनका सामान्य सूत्र (R2SiO)n होता है। यहाँ R ऐल्किल या ऐरिल समूह होता है। चूंकि इन बहुलकों के सामान्य सूत्र (R2SiO) कीटोन के सामान्य सूत्र R2CO के समान होते है; इसलिए इन्हें सिलिकोन्स कहते हैं। सिलिकोन्स मुख्यतः निम्न हैं-
(i) रेखीय सिलिकोन्स ।
(ii) चक्रीय सिलिकोन्स ।
(iii) शाखायुक्त सिलिकोन्स ।
सिलिकोन्स के प्रमुख गुण निम्नवत् हैं
(i) ये रासायनिक दृष्टि से अक्रिय होते हैं।
(ii) ये विषैले नहीं होते हैं तथा जल को प्रतिकर्षित करते हैं।
(iii) ताप परिवर्तन से इनकी श्यानता प्रभावित नहीं होती है।
उपयोग-
(i) उच्चताप सह तेल बाध तथा निर्वात् पम्पों के निर्माण में ।
(ii) विद्युत कुचालक के रूप में।
(iii) जलरोधी कपड़े बनाने में तथा कागज के निर्माण में।In simple words: Silicones are organic silicon polymers with an R2SiO repeating unit forming Si-O-Si chains. They are chemically inert, repel water, and maintain viscosity over temperature changes, making them useful in lubricants, electrical insulation, and waterproofing.
🎯 Exam Tip: Understanding the unique properties of silicones stemming from their Si-O-Si backbone and organic groups is crucial for scoring. Emphasize their inertness and thermal stability in explanations.
Question 10. सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड के विरचन की विधियाँ, गुणों एवं उपयोगों का वर्णन कीजिए ।
Answer: विरचन की विधियाँ सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड को निम्न में से किसी भी विधि द्वारा बनाया जा सकता है-
(i) सिलिकॉन को क्लोरीन के साथ गर्म करने पर सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड वाष्प बनती है जिसे द्रवित करने पर सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड द्रव प्राप्त होता है।
(ii) कार्बन और सिलिका के मिश्रण को क्लोरीन की धारा में गर्म करने पर टेट्राक्लोराइड वाष्प बनती है जिसे द्रवित करने पर सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड द्रव प्राप्त होता है। द्रव को मर्करी के साथ हिलाकर पुनः आसवित करने पर क्लोरीन की अशुद्धि दूर हो जाती है और शुद्ध सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड प्राप्त होता है।
सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड के प्रमुख भौतिक एवं रासायनिक गुण निम्नवत् हैं-
(i) सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड रंगहीन सधूम द्रव (fuming liquid) है, जो वायु में धूम देता है।
(ii) सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड का क्वथनांक 59.6°C और हिमांक -70°C है।
(iii) सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड जल द्वारा सिलिका में अपघटित हो जाता है। \(SiCl_4 + 2H_2O \rightarrow SiO_2 + 4HCl\) कार्बन टेट्राक्लोराइड जल द्वारा अपघटित नहीं होता है।
(iv) सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड वाष्प को हाइड्रोजन गैस की उपस्थिति में गलित ऐलुमिनियम धातु पर । प्रवाहित करने पर सिलिकॉन प्राप्त होता है।
(v) सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड की लीथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड से अभिक्रिया कराने पर मोनोसिलेन (SiH4) बनती है। । \(SiCl_4 (l) + LiAlH_4 \rightarrow SiH_4 (g) + LiCl + AlCl_3\)
सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड के प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं-
(i) शुद्ध सिलिका के उत्पादन में।
(ii) सिलिसिक अम्ल के एस्टर (esters) बनाने में।
(iii) सिलिकॉन (silicones) के निर्माण में।In simple words: Silicon tetrachloride is a fuming liquid prepared by reacting silicon with chlorine or heating a mixture of carbon and silica in a chlorine stream. It hydrolyzes in water and reacts with LiAlH4 to form silane. Its uses include producing pure silica, silicic acid esters, and silicones.
🎯 Exam Tip: Remember the key reactions for preparing SiCl4 and its characteristic hydrolysis with water. Also, be able to list its main applications in industry.
Question 11. SiCl4 से प्रारम्भ करके निम्नलिखित के निर्माण की विधि, कोष्ठकों में दिए गए। अधिकतम पदों की सीमा को ध्यान में रखकर (केवल रासायनिक समीकरण दीजिए)
(i) सिलिकन (Silicon) (एक पद में)।
(ii) रेखीय सिलिकोन्स (silicones) जिसमें केवल मेथिल समूह है। (4 पदों में)
(iii) Na2SiO3 (3 पदों में)
Answer:
(i) \(3SiCl_4 + 4Al(l) \xrightarrow{H_2/\Delta} 3Si + 2Al_2Cl_6\)
या \(SiCl_4 + 2Zn \xrightarrow{\Delta} Si + 2ZnCl_2\)
(ii) \(SiCl_4 + 2CH_3MgCl \rightarrow Si(CH_3)_2Cl_2 + 2MgCl_2\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र (CH3)2SiCl2 के जल-अपघटन और संघनन से रेखीय सिलिकॉन के निर्माण को दर्शाता है। पहले (CH3)2SiCl2 पानी से क्रिया करके (CH3)2Si(OH)2 बनाता है, फिर ये अणु आपस में संघनित होकर जल के अणुओं को बाहर निकालते हुए लंबी Si-O-Si शृंखला वाले रेखीय सिलिकॉन बहुलक का निर्माण करते हैं, जिसमें प्रत्येक सिलिकॉन परमाणु से दो मेथिल समूह जुड़े होते हैं।
(iii) *[No chemical reaction provided in the source text for Na2SiO3 formation from SiCl4]*In simple words: Silicon can be made from SiCl4 by reduction with aluminum or zinc. Linear silicones with methyl groups are formed by reacting SiCl4 with methyl Grignard reagent followed by hydrolysis and polymerization.
🎯 Exam Tip: For synthesis reactions, ensure all reactants, products, and conditions (like heat or catalysts) are correctly represented. Pay close attention to the stoichiometry and the type of product requested (e.g., linear vs. cyclic silicones). The diagram description for silicones shows the formation from a precursor through hydrolysis and condensation polymerization, which is a key concept. For part (iii), if a reaction is missing, state it directly.
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