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Detailed Chapter 6 रुसी क्रांति करण तथा परिणम् UP Board Solutions for Class 10 Social Science
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Class 10 Social Science Chapter 6 रुसी क्रांति करण तथा परिणम् UP Board Solutions PDF
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. रूस की क्रान्ति के पूर्व रूस की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
Answer: क्रान्ति से पहले रूस की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालत बहुत खराब थी। इसका संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:
1. **रूस की सामाजिक दशा:** सन् 1861 से पहले रूस में सामन्तवाद का बोलबाला था। सामन्त लोग किसानों (भूमि-दास या अर्द्ध-दास) से बिना वेतन लिए अपनी ज़मीनों पर खेती करवाते थे। इन भूमि-दासों को सामन्तों के कई जुल्म सहने पड़ते थे। रूस में कुछ छोटे किसान भी थे, जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें भरपेट खाना भी मुश्किल से मिलता था। पीटर महान के प्रयासों से रूस में उद्योग-धंधे शुरू हुए, जिससे कारखानों में काम करने वाला एक नया वर्ग बन गया। इस प्रकार, क्रान्ति से पहले रूसी समाज में तीन मुख्य वर्ग थे: सामन्त और कुलीन (बड़े सामन्त, ज़ारशाही सदस्य, उच्च अधिकारी), मध्यम वर्ग (लेखक, विचारक, डॉक्टर, वकील, व्यापारी), और किसान व मजदूर। किसानों और मजदूरों की हालत सबसे खराब थी, उन्हें समाज में कोई इज़्ज़त नहीं मिलती थी। कुलीन और मध्यम वर्ग के लोग उन्हें नीचा समझते थे। ज़्यादातर रूसी जनता अनपढ़ और अंधविश्वासी थी। चर्च की ताकत के कारण पादरी वर्ग भी बहुत महत्वपूर्ण था और वह भी आम लोगों का शोषण करता था। लोगों का शोषण हर स्तर पर हो रहा था, जिससे असंतोष बढ़ रहा था।
2. **रूस की आर्थिक दशा:** उद्योग-धंधे शुरू होने से पहले, रूसी लोगों का मुख्य काम खेती था। रूस में किसानों की हालत बहुत दयालु थी। बहुत गरीब होने के कारण उन्हें गरीबी और भूखमरी का जीवन जीना पड़ता था। उनके खेत बहुत छोटे थे और उन्हें खेती के नए तरीकों का ज्ञान भी नहीं था। पैसे की कमी के कारण वे आधुनिक मशीनें नहीं खरीद पाते थे। कड़ी मेहनत करने के बाद भी उन्हें भरपेट खाना नहीं मिलता था, क्योंकि उनकी ज़्यादातर फसल सामन्त और सरकारी कर्मचारी ले लेते थे। पीटर महान के समय में रूस में औद्योगीकरण शुरू हुआ। यूरोपीय देशों के संपर्क में आने से रूस में कारखाने लगने लगे। लेकिन इन कारखानों और उद्योगों में ज़्यादातर विदेशी पैसा लगा हुआ था और विदेशी पूंजीपतियों का एकमात्र लक्ष्य ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफा कमाना था। उन्हें गरीब रूसी जनता के प्रति कोई हमदर्दी नहीं थी और न ही वे रूसी श्रमिकों और मजदूरों को कोई सुविधा देते थे। इन हालातों में रूस में अनाज, कपड़े और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की कमी होने लगी और श्रमिकों तथा मजदूरों की हालत जानवरों से भी बदतर हो गई। ज़ारशाही सरकार ने श्रमिकों, मजदूरों और किसानों की आर्थिक हालत सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया। सरकारी अफसरों के भ्रष्टाचार और सैनिकों के जुल्म ने स्थिति को रोज़-ब-रोज़ और गंभीर बनाना शुरू कर दिया।
3. **रूस की राजनीतिक दशा:** ज़ार निकोलस द्वितीय एक बहुत ही प्रतिक्रियावादी और अपनी मनमानी करने वाला शासक था। उसने संसद के निचले सदनों (ड्यूमाओं) को भी अपनी मनमानी का शिकार बनाया। ज़ार के मनमाने आदेशों से ड्यूमाओं को निलंबित किया जाता था, उनके सदस्यों को जेल में डाला जाता था और देश से निकाल दिया जाता था। इस कारण ड्यूमा केवल सलाहकार संस्थाएँ बनकर रह गई थीं। निकोलस द्वितीय की सेना की कमज़ोरी क्रीमिया और रूस-जापान युद्ध (1905 ई०) में पहले ही दिख चुकी थी। इसके बावजूद 1915 ई० में विश्व युद्ध में सेना की हार के बाद उसने सेना की कमान अपने हाथों में ले ली। रूस भले ही युद्ध जीत गया, लेकिन उसे जो भारी नुकसान हुआ, उसका दोष भी ज़ार के सिर पर आया। इस प्रकार, क्रान्ति से पहले रूस में राजशाही के खत्म होने के लिए पूरी तरह से हालात तैयार हो चुके थे। जब रोमानोव शासक ने गद्दी छोड़ी, तब सामन्तीय तत्वों ने कोई विरोध नहीं किया। रूस की क्रान्ति फ्रांस की क्रान्ति की तरह अपने आप नहीं हुई थी, बल्कि इसके पास एक योग्य नेतृत्व और एक निश्चित योजना थी।
In simple words: क्रान्ति से पहले रूस में लोग गरीबी, ज़ुल्म और असमानता झेल रहे थे। ज़ार निकोलस द्वितीय की सरकार भ्रष्ट और निरंकुश थी, जिससे जनता में बहुत गुस्सा था।
🎯 Exam Tip: जब सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों को अलग-अलग लिखें, तो प्रत्येक कारण को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से समझाएँ ताकि परीक्षक को सभी पहलुओं की समझ हो।
Question 2. 1917 ई० की रूस की क्रान्ति के कारणों का विश्लेषण कीजिए। (2017)
Answer: रूस की अक्टूबर क्रान्ति (1917 ई०) से पहले रूसी जनता में बहुत असंतोष था, जिसके कारण क्रान्ति हुई। इसके कुछ मुख्य कारण इस प्रकार थे:
1. **व्यावसायिक क्रान्ति का प्रभाव:** औद्योगिक क्रान्ति के कारण रूस में भी बड़े-बड़े कारखाने स्थापित हुए। इनमें काम करने वाले हजारों मजदूर गाँवों और कस्बों से शहरों में आकर कारखानों के पास रहने लगे। शहर के नए माहौल ने उनकी अज्ञानता खत्म कर दी और वे राजनीति में दिलचस्पी लेने लगे। उन्होंने अपने क्लब बनाए, जहाँ वे विभिन्न विषयों पर चर्चा करते थे। 19वीं सदी के अंत में, इन क्लबों में कार्ल मार्क्स के समाजवादी सिद्धांतों का प्रचार करने के लिए क्रांतिकारी नेता भी आने लगे और रूसी मजदूरों ने उनके विचारों में रुचि लेनी शुरू कर दी। इस समाजवादी प्रचार ने देश के मजदूरों में ज़ारशाही के प्रति बहुत असंतोष और नफरत पैदा कर दी।
2. **राजनीतिक चेतना का उदय:** समाजवादी प्रचार के कारण रूस में 1883 ई० में रूसी समाजवादी लोकतंत्र की स्थापना हुई। सन् 1903 ई० में यह दल दो भागों में बँट गया। पहला दल मेनशेविक था, जिसके प्रमुख नेता करेन्स्की थे, और वे संवैधानिक तरीके से शासन बदलना चाहते थे। दूसरा दल बोल्शेविक था, जिसके प्रमुख नेता लेनिन थे, और वे खूनी क्रान्ति के द्वारा ज़ारशाही को पूरी तरह खत्म करके देश में मजदूरों का शासन स्थापित करना चाहते थे। यह विचारधारागत विभाजन क्रान्ति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण था।
3. **किसानों की हीनदशा:** 1861 ई० में सामन्तवादी प्रथा खत्म होने के बाद भी किसानों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उनके पास छोटे-छोटे खेत थे जिन पर वे पुराने तरीकों से खेती करते थे। उन पर करों का भारी बोझ था और वे हमेशा कर्ज में डूबे रहते थे। उन्हें दिन में दो बार का खाना भी नहीं मिलता था। उनकी ज़्यादातर उपज सामन्त और ज़ार छीन लेते थे।
4. **श्रमिकों की दयनीय दशा:** 19वीं सदी के अंत में औद्योगिक क्रान्ति शुरू हुई। इसके बाद इसका तेज़ी से विकास हुआ, लेकिन निवेश के लिए पैसा विदेशों से आया। विदेशी पूंजीपति ज़्यादा लाभ कमाना चाहते थे। उन्होंने मजदूरों की हालत पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। पूंजीपति मजदूरों को कम-से-कम वेतन देकर ज़्यादा-से-ज़्यादा काम लेते थे और उनसे बुरा व्यवहार करते थे। उन्हें कोई राजनीतिक अधिकार भी नहीं था, जिससे उनमें असंतोष बढ़ता जा रहा था।
5. **जारों की निरंकुशता:** रूस के ज़ार (शासक) बहुत निरंकुश थे। वे जनता पर जुल्म करते थे और उन्हें दबाते रहते थे। निरंकुशता और जुल्म के कारण आम लोगों के दिलों में क्रान्ति की आग भड़क उठी। 1905 ई० की क्रान्ति के बाद भी ज़ार अपनी दमनकारी नीति में कोई बदलाव नहीं कर सके। वे अपने गुप्तचरों की मदद से जनता का मुँह बंद करने की कोशिश करते रहे।
6. **रूसी विचारकों का योगदान:** कई रूसी विचारक यूरोप में हो रहे बदलावों से बहुत प्रभावित थे। कार्ल मार्क्स, टॉल्सटॉय, तुर्गनेव और दाँस्तोवेस्की जैसे विद्वानों ने अपने विचारों से लोगों को बहुत प्रेरित किया। उन्होंने किसानों और मजदूरों में जागरूकता लाने और संगठित होने के विचार फैलाए। इन विचारकों की शिक्षाएँ जनता को एकजुट करने में सहायक सिद्ध हुईं।
7. **जार निकोलस द्वितीय की अयोग्यता:** रूस का आखिरी ज़ार निकोलस द्वितीय था। वह और उसकी पत्नी एलिक्स दोनों विलासी और बुद्धिहीन थे। उनके दरबार में पाखंडी लोग भरे हुए थे। रासपुटिन नामक साधु का रानी पर बहुत ज़्यादा प्रभाव था। वह बड़ा भ्रष्टाचारी था, लेकिन राजा का विश्वासपात्र बना हुआ था। ज़ार उसके कहने पर चलता था। रासपुटिन राजा को कठोरता और दमन से शासन करने की सलाह देता रहता था। राजा की दमनकारी नीतियों के कारण जनता में असंतोष बढ़ता गया।
8. **सरकार व सेना में भ्रष्टाचार:** ज़ार द्वारा नियुक्त उच्च अधिकारी भी अयोग्य, भ्रष्ट और विलासी थे। सैनिक भी भ्रष्ट और विलासी हो गए थे। जनता में विद्रोह की आग भड़कने पर ऐसी सरकार और सेना उसे दबा नहीं सकी। इससे जनता का विश्वास व्यवस्था से उठ गया।
9. **प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेना:** प्रथम विश्व युद्ध 1914 ई० में शुरू हुआ था। उन दिनों इटली, ऑस्ट्रिया और जर्मनी एक गुट में थे, जबकि इंग्लैण्ड, फ्रांस और रूस दूसरे गुट में। रूस के पास इस युद्ध के लिए कोई खास तैयारी नहीं थी, लेकिन उसे मजबूरी में इसमें कूदना पड़ा। इस युद्ध में रूस को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उसके 6 लाख सैनिक मारे गए और 20 लाख सैनिक बंदी बना लिए गए। इससे सैनिकों में असंतोष फैल गया। जनता और सैनिक दोनों ने तत्कालीन रूसी शासन को उखाड़ फेंकने का मन बना लिया।
10. **जापान से रूस की पराजय:** 1904-05 ई० में रूस और जापान के बीच युद्ध हुआ। जापान जैसे छोटे देश से भी रूस हार गया। इससे जनता को ज़ारों की अयोग्यता का पता चल गया और वे उनके खिलाफ हो गए। यह पराजय ज़ारशाही की प्रतिष्ठा के लिए एक बड़ा झटका थी।
11. **अकाल:** 1916-17 ई० में रूस में भारी अकाल पड़ा। लोग भूख से मरने लगे। देश में बीमारियाँ फैल गईं। दूसरी तरफ, ज़ार और दरबारी दावतें उड़ा रहे थे और देश के पैसे को पानी की तरह बहा रहे थे। पूंजीपति किसानों और श्रमिकों का शोषण करने में लगे हुए थे। इस अकाल ने आग में घी का काम किया। इसने जनता के असंतोष और गुस्से को चरम सीमा पर पहुँचा दिया। अकाल ने लोगों को एकजुट होने के लिए मजबूर कर दिया।
In simple words: 1917 की रूसी क्रान्ति के मुख्य कारण थे औद्योगिक बदलावों का असर, मजदूरों और किसानों की खराब हालत, ज़ार का जुल्मी शासन, और युद्धों में मिली हार। इन सबने जनता में भारी असंतोष पैदा किया।
🎯 Exam Tip: क्रान्ति के कारणों को लिखते समय, प्रत्येक कारण को स्पष्ट शीर्षक दें और उसके तहत संक्षिप्त जानकारी दें, साथ ही घटनाक्रम और प्रमुख व्यक्तियों का उल्लेख करें।
Question 3. रूस की क्रान्ति के परिणामों का वर्णन कीजिए। [2012, 17]
Answer: सन् 1917 ई० की रूसी क्रान्ति विश्व इतिहास की एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। इसने न केवल रूस में ज़ार के रोमानोव वंश के शासन को खत्म किया, बल्कि पूरे विश्व की सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था को भी प्रभावित किया। इसीलिए इसे विश्व की महान घटना कहते हैं। रूसी क्रान्ति के रूस पर कुछ मुख्य प्रभाव (परिणाम) इस प्रकार थे:
1. **निरंकुश जारशाही का अंत:** रूसी क्रान्ति की सबसे पहली सफलता निरंकुश शासन का खत्म होना था। इसने अमीर वर्ग और चर्च की ताकत को भी खत्म कर दिया। यह सत्ता के केंद्रीकरण को तोड़कर जनता के हाथों में शक्ति लाई।
2. **प्रथम समाजवादी समाज का निर्माण:** रूस में ज़ार के साम्राज्य को 'सोवियत समाजवादी गणराज्यों के संघ' नामक एक नए राज्य का रूप दे दिया गया। इस क्रान्ति के बाद सत्ता में आई नई सरकार ने कार्ल मार्क्स के सिद्धांतों को लागू किया। इस नए राज्य का उद्देश्य था कि 'प्रत्येक व्यक्ति से उसकी क्षमता के अनुसार काम लिया जाए और प्रत्येक को उसके काम के अनुसार मज़दूरी दी जाए'। इस उद्देश्य से उत्पादन के साधनों पर निजी मालिकाना हक खत्म कर दिया गया; यानी निजी लाभ की भावना को उत्पादन व्यवस्था से हटाना ही समाज का लक्ष्य था।
3. **आर्थिक नियोजन:** नई सरकार के सामने पहला काम तकनीकी रूप से एक अच्छी अर्थव्यवस्था बनाना था। इसके लिए आर्थिक नियोजन की विधि अपनाई गई। 19वीं सदी में यूरोप का आर्थिक विकास पूंजीपतियों की पहल का नतीजा था, लेकिन सोवियत संघ में पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा औद्योगीकरण किया गया। इन योजनाओं के तहत तेज़ी से आर्थिक विकास के लिए अर्थव्यवस्था के सभी साधन जुटाए गए और आर्थिक विकास का लक्ष्य सामाजिक-आर्थिक समानता प्राप्त करना तय किया गया। यह एक केंद्रीकृत अर्थव्यवस्था की नींव थी।
4. **सामाजिक असमानता की समाप्ति:** क्रान्ति के परिणामस्वरूप संघ में एक नई तरह की सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था का विकास हुआ। निजी मालिकाना हक और मुनाफे की भावना के खत्म होने से समाज में एक-दूसरे के विरोधी हितों वाले वर्गों का अस्तित्व भी खत्म हो गया। इस प्रकार, समाज में फैली बड़ी असमानताओं का अंत हो गया। काम करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए ज़रूरी हो गया और प्रत्येक व्यक्ति को काम देना समाज और राज्य का कर्तव्य बन गया।
5. **शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में विकास:** सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को खत्म करने के साथ-साथ शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में भी विकास हुए। शिक्षा के प्रसार से आर्थिक विकास, अंधविश्वासों का खात्मा और वैज्ञानिक सोच के विकास में मदद मिली। विज्ञान और कला के इस विकास ने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तेज किया। इससे समाज में ज्ञान का स्तर बढ़ा।
6. **गैर-रूसी जातियों को लाभ:** ज़ार के अधीन रूस में रहने वाली गैर-रूसी जातियों पर बहुत जुल्म किया गया था, लेकिन क्रान्ति के बाद ये जातियाँ गणराज्यों के रूप में सोवियत संघ का हिस्सा बन गईं। सोवियत संघ में शामिल सभी जातियों की समानता को 1924 ई० और 1936 ई० में बनाए गए संविधान में कानूनी रूप दिया गया। इन जातियों द्वारा स्थापित गणराज्यों को भी काफी स्वायत्तता दी गई जिससे उनकी भाषाओं और संस्कृतियों का विकास हो सके। इससे क्षेत्रीय पहचान को सम्मान मिला।
**रूस की क्रान्ति के विश्व पर प्रभाव** रूसी क्रान्ति के विश्व पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े –
1. **राष्ट्रवाद का उदय:** 1917 ई० की रूसी क्रान्ति ने अफ्रीका और एशिया के लोगों में जागरूकता पैदा की। ये लोग साम्राज्यवादी यूरोपीय देशों के शोषण का शिकार हो रहे थे। रूसी क्रान्ति ने उनमें राष्ट्रीयता की भावना जगाई, जिससे उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किए। इसने उपनिवेशवाद के खिलाफ एक बड़ी प्रेरणा दी।
2. **समाजवाद का उदय:** रूसी क्रान्ति ने यूरोप के कई देशों; जैसे-पोलैण्ड, पूर्वी जर्मनी, यूगोस्लाविया, चेकोस्लोवाकिया, बल्गारिया और एशियाई देश चीन में समाजवाद की नींव डाली। इसने दुनिया भर में समाजवादी आंदोलनों को बढ़ावा दिया।
3. **वर्ग-संघर्ष:** रूसी क्रान्ति ने साम्यवादी सिद्धांतों के आधार पर एक नए समाज को जन्म दिया तथा एक नया सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। इसने दुनिया को पूंजीवादी और समाजवादी विचारधाराओं में विभाजित किया।
4. **लोकतन्त्र की नई परिभाषा:** रूसी क्रान्ति की सफलता ने लोकतन्त्र की एक नई परिभाषा दी। पूंजीवादी देश भी यह सोचने को मजबूर हुए कि वास्तविक लोकतन्त्र की स्थापना के लिए संपत्ति, जाति, रंग और लिंग के आधार पर भेदभाव अनुचित है। इसने समावेशी शासन की आवश्यकता पर जोर दिया।
5. **अन्तर्राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार:** रूसी क्रान्ति ने समाजवाद को जन्म दिया। समाजवाद प्रगति के लिए राष्ट्रों में आपसी सहयोग पर जोर देता था। इस प्रकार रूसी क्रान्ति ने विश्व के सभी राष्ट्रों के बीच आपसी भाईचारे और अन्तर्राष्ट्रीयता की भावना को विकसित किया। इसने वैश्विक एकजुटता की अवधारणा को मजबूत किया।
6. **लोक-कल्याणकारी भावनाओं तथा मानव-अधिकारों को सिद्धान्त:** रूसी सरकार की देखा-देखी विश्व की अन्य सरकारों ने भी लोक-कल्याणकारी योजनाएँ शुरू कर दीं, जिनमें शिक्षा, चिकित्सा आदि प्रमुख थीं। मानव-अधिकारों के सिद्धांतों की रक्षा के लिए रूस ने अपने अधीन सभी उपनिवेशों को मुक्त कर दिया तथा विश्व में चल रहे स्वतंत्रता आंदोलनों को नैतिक समर्थन दिया। इससे कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का विकास हुआ।
In simple words: रूसी क्रान्ति ने ज़ारशाही को खत्म किया, समाजवादी समाज बनाया, और दुनिया भर में राष्ट्रवाद व समाजवाद को बढ़ावा दिया। इसने दुनिया को दिखाया कि सामाजिक समानता और न्याय संभव है।
🎯 Exam Tip: क्रान्ति के परिणामों को लिखते समय, रूस पर प्रभाव और विश्व पर प्रभाव को अलग-अलग शीर्षक के तहत सूचीबद्ध करें। प्रत्येक परिणाम को एक या दो वाक्यों में समझाएँ।
Question 4. रूसी क्रान्तिकारियों के मुख्य उद्देश्य क्या थे ?
Answer: सन् 1917 ई० में रूस में सफल क्रान्ति हुई, जो रूसी जनता तथा क्रान्तिकारियों की माँगों का परिणाम थी। क्रान्तिकारियों के प्रमुख उद्देश्य (माँगें) निम्नलिखित थीं:
1. **शान्ति की इच्छा:** ज़ार ने रूस को पहले विश्व युद्ध में झोंका था। रूसी सेना को भारी हार का सामना करना पड़ रहा था। फरवरी, 1917 ई० तक 6 लाख सैनिक युद्ध में मारे जा चुके थे। क्रान्तिकारी रूस को युद्ध से अलग रखना चाहते थे। इसलिए देश में शान्ति स्थापित करना उनका मुख्य उद्देश्य था। युद्ध ने देश की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन को बहुत प्रभावित किया था।
2. **जोतने वालों की जमीन:** क्रान्तिकारी सामन्तवाद से प्रभावित थे। रूस में ज़मीन ज़मींदारों, चर्च और ज़ार के पास थी। किसान ज़मीन पर काम करते थे, लेकिन उनके पास बहुत कम ज़मीन थी। वे ज़मीन से लगभग वंचित ही थे। क्रान्तिकारियों का नारा था, 'भूमि पर काम करने वाले भूमि के स्वामी होने चाहिए।' वे चाहते थे कि ज़मीन का वितरण न्यायपूर्ण हो।
3. **उद्योगों पर मजदूरों का नियन्त्रण:** रूस के क्रान्तिकारी सामन्तवादी व्यवस्था से दुखी होकर एक ही नारा लगा रहे थे- कारखानों पर मजदूरों का स्वामित्व स्वीकार किया जाए। वे सोचते थे कि कपड़ा बनाने वाले फटे-पुराने कपड़े क्यों पहनें, और पूंजी अर्जित करने वाला पूंजीपतियों का दास क्यों रहे। वे चाहते थे कि उत्पादन के साधन मजदूरों के नियंत्रण में हों।
4. **गैर-रूसी राष्ट्रों को समानता का स्तर:** रूस में पड़ोसी देशों के कई हिस्से थे, जिन्हें ज़ारों ने जीता था। इन राष्ट्रों के लोगों को रूसी लोगों के समान अधिकार प्राप्त नहीं थे। उनका दमन किया जाता था। क्रान्तिकारियों का उद्देश्य इन गैर-रूसी राष्ट्रों को भी समानता का दर्जा दिलाना था। वे चाहते थे कि गैर-रूसी राष्ट्रों की जनता, रूसी जनता के समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त करे। यह आत्मनिर्णय के अधिकार पर जोर देता था।
5. **कार्ल मार्क्स के विचारों को लागू करना:** रूस की क्रान्ति के पीछे मुख्य विचार कार्ल मार्क्स के थे। उनकी किताब 'दास कैपिटल' उनके क्रान्तिकारी विचारों का लेखा-जोखा है। वह पूंजीवाद का विरोधी और समाजवाद का प्रबल समर्थक था। उसका कहना था कि उत्पादन के सभी साधनों पर समाज या सरकार का अधिकार होना चाहिए तथा मजदूर स्वयं ही क्रान्ति के द्वारा पूंजीवाद को समाप्त कर समाजवाद की स्थापना कर सकते हैं। मजदूरों को मार्क्स के इन विचारों में आशा की झलक दिखाई देती थी; अतः क्रान्तिकारियों का एक मुख्य उद्देश्य कार्ल मार्क्स के विचारों का समाज बनाना भी था।
In simple words: रूसी क्रान्तिकारियों के मुख्य लक्ष्य थे युद्ध खत्म करना, किसानों को ज़मीन देना, मजदूरों को कारखानों पर नियंत्रण देना, सभी जातियों को समान अधिकार देना और कार्ल मार्क्स के समाजवादी विचारों को लागू करना।
🎯 Exam Tip: क्रान्तिकारियों के उद्देश्यों को संक्षिप्त वाक्यों में समझाएँ और यह बताएं कि प्रत्येक उद्देश्य तत्कालीन सामाजिक-आर्थिक स्थिति से कैसे जुड़ा था।
Question 5. 'खूनी रविवार की घटना के विषय में आप क्या जानते हैं? क्या यह घटना रूस की क्रान्ति का कारण थी ? अपने विचार लिखिए ।
Answer: जब किसी देश के शासक, अधिकारी, पूंजीपति आदि उच्च वर्ग के लोग निरंकुश हो जाते हैं और गरीब तथा असहाय जनता पर जुल्म करते हैं, तो क्रान्ति का जन्म होता है। रूस की क्रान्ति में भी ऐसे ही कुछ कारणों में से एक प्रमुख कारण 'खूनी रविवार' था। रूस में ज़ारशाही निरंकुशता का बोलबाला था। ज़ार-सम्राट के अधिकारी आम जनता पर बहुत जुल्म करते थे। वर्ष 1904-05 ई० में रूस, जापान जैसे छोटे देश से भी हार गया था। इन सभी बातों से गुस्सा होकर 22 जनवरी, 1905 ई० को कई श्रमिकों ने अपनी माँगें रखीं। माँगें प्रस्तुत करने के लिए ये सभी श्रमिक सेंट पीटर्सबर्ग के दुर्ग में इकट्ठा हुए। उन्होंने ज़ार के सामने अपनी माँगें रखीं, लेकिन ज़ार के आदेश से शाही सैनिकों ने उन पर गोली चला दी, जिसके परिणामस्वरूप बहुत-से निहत्थे श्रमिकों का खून बह गया। यह घटना रविवार को हुई थी; अतः रूस के इतिहास में इसे 'खूनी रविवार' के नाम से जाना जाता है। यह घटना भारत के अमृतसर नामक नगर में हुए जलियाँवाला बाग हत्याकांड की याद दिलाती है, क्योंकि इस कांड में ब्रिटिश सैनिकों द्वारा निहत्थे भारतीयों पर गोलियाँ बरसाकर उनकी सामूहिक हत्या कर दी गई थी। 22 जनवरी, 1905 ई० का यह दिन रूसी इतिहास में 'लाल रविवार' या 'खूनी रविवार' के नाम से कुख्यात है। इस घटना से पूरे देश में क्रान्ति की लहर दौड़ गई। सेना तथा नौसेना के एक हिस्से ने भी क्रान्ति कर दी, लेकिन शीघ्र ही इस क्रान्ति को दबा दिया गया। फिर भी क्रान्ति की चिंगारियाँ अंदर-ही-अंदर सुलगती रहीं, जो आगे चलकर 1917 ई० में महान क्रान्ति के रूप में उभरीं। इसीलिए 1905 ई० की क्रान्ति को 1917 ई० की क्रान्ति की जननी कहा जाता है। यह घटना सीधे तौर पर 1917 की क्रान्ति का एक महत्वपूर्ण कारण बनी।
In simple words: 'खूनी रविवार' 22 जनवरी, 1905 को हुआ, जब ज़ार के सैनिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर गोली चला दी। इस घटना में कई लोग मारे गए और इसने रूस में क्रान्ति की आग को और भड़का दिया।
🎯 Exam Tip: 'खूनी रविवार' की घटना का वर्णन करते समय, तारीख, स्थान और घटना के परिणामों को स्पष्ट रूप से बताएं। यह भी स्पष्ट करें कि यह कैसे 1917 की क्रान्ति का एक महत्वपूर्ण कारण बनी।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. रूस में क्रान्तिकारी आन्दोलन के विकास में लेनिन की क्या देन थी?
Answer: लेनिन (1870-1924 ई०) का असली नाम ब्लादिमीर इलिच यूलियनाव था। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1895 ई० में रूस छोड़कर बाहर चले गए और वहाँ से चोरी-छिपे क्रान्तिकारी साहित्य रूस भेजने लगे। इस अपराध में उन्हें पहले 14 महीने की जेल हुई, फिर तीन साल के लिए साइबेरिया भेज दिया गया। सन् 1898 ई० में लेनिन ने 'रूसी समाजवादी प्रजातान्त्रिक दल' की स्थापना की। इसके बाद लगभग 20 साल तक उन्होंने यूरोप के विभिन्न देशों में निर्वासन में जीवन बिताया। सन् 1917 ई० में वह वापस आए और करेन्स्की की सरकार को भंग करके अक्टूबर की क्रान्ति को सफल बनाया। सन् 1924 ई० तक लेनिन रूस के निर्माता और भाग्य-विधाता बने रहे। उन्हें एक सक्रिय मार्क्सवादी और जन्मजात क्रान्तिकारी के रूप में अमर प्रसिद्धि मिली। लेनिन ने रूसी क्रान्ति (1917 ई०) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। क्रान्ति से पहले ही रूस के निरंकुश ज़ार (शासक) का पतन हो चुका था। रूस में करेन्स्की की सरकार जनता की माँगें पूरी करने में सफल नहीं रही थी। ऐसे समय में लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविक पार्टी ने युद्ध को समाप्त करने और 'सारी सत्ता सोवियतों को सौंपने' का नारा दिया। लेनिन ने यह घोषणा की कि गैर-रूसी जनगणों को समान अधिकार दिए बिना सच्चा जनतंत्र स्थापित नहीं हो सकता। यही रूसी क्रान्ति के असली उद्देश्य थे, जिन्हें लेनिन ने पूरा कर दिखाया। इसीलिए रूसी क्रान्ति लेनिन के नाम के साथ जुड़ी हुई है। लेनिन की दूरदर्शिता और संगठनात्मक क्षमता ने क्रान्ति को सही दिशा दी।
In simple words: लेनिन रूसी क्रान्ति के एक प्रमुख नेता थे जिन्होंने बोल्शेविक पार्टी का नेतृत्व किया। उन्होंने युद्ध खत्म करने, किसानों को ज़मीन देने और सोवियतों को सत्ता सौंपने जैसे मुख्य उद्देश्य पूरे किए, जिससे रूस में समाजवादी व्यवस्था स्थापित हुई।
🎯 Exam Tip: लेनिन के योगदान का वर्णन करते समय, उनके मुख्य उद्देश्यों और बोल्शेविक पार्टी के साथ उनके जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 2. कार्ल मार्क्स कौन था ? उसने कौन-सी पुस्तक लिखी ?
Answer: कार्ल मार्क्स जर्मनी के निवासी और वैज्ञानिक समाजवाद के जनक थे। रूसी क्रान्ति लाने में शायद ही किसी और विचारक का इतना हाथ रहा हो जितना कार्ल मार्क्स का। कार्ल मार्क्स की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक 'दास कैपिटल' है। इस पुस्तक में उन्होंने अपने विचारों को संक्षेप में दिया है। उन्होंने लिखा है:
1. पूंजीवाद मजदूरों और किसानों के शोषण का एक तरीका है।
2. पूंजीवाद को खत्म करने के लिए मजदूरों को क्रान्तियाँ लानी पड़ेंगी।
3. उत्पादन के सभी साधनों पर मजदूरों तथा किसानों का अधिकार होना ज़रूरी है। यह अधिकार उन्हें छीनना पड़ेगा।
4. मजदूरों और किसानों को अपना अधिनायकवाद स्थापित करना पड़ेगा, भले ही इसके लिए उन्हें हथियार ही क्यों न उठाने पड़ें।
कार्ल मार्क्स के अलावा कई दार्शनिकों ने भी तार्किक तरीके से आम लोगों को प्रभावित किया। इनमें फ्रेडरिक एंजिल्स के विचार मार्क्स से मिलते-जुलते थे। टॉल्सटॉय के विचारों का प्रभाव पढ़े-लिखे लोगों पर पड़ा। बाकुनिन, क्रोपॉटकिन, दाँस्तोवेस्की और तुर्गनेव जैसे विचारक आम लोगों के आदर्श बने। इन विचारकों ने जनता में बदलाव की भावना पैदा की।
In simple words: कार्ल मार्क्स जर्मनी के एक बड़े विचारक थे जिन्होंने 'दास कैपिटल' नाम की किताब लिखी। उनके विचारों ने बताया कि पूंजीवाद मजदूरों का शोषण करता है और मजदूरों को क्रान्ति करके अपनी सत्ता बनानी चाहिए।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स का परिचय देते समय, उनकी राष्ट्रीयता, मुख्य विचार और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक का नाम ज़रूर बताएं। उनके सिद्धांतों के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करें।
Question 3. रूस की क्रान्ति के सामाजिक एवं आर्थिक कारण क्या थे ? (2018)
Answer: रूस की क्रान्ति के सामाजिक एवं आर्थिक कारण निम्नलिखित थे:
1. **सामाजिक कारण:** क्रान्ति से पहले रूसी समाज मुख्य रूप से तीन वर्गों में बँटा था: किसान, मध्यम और कुलीन। किसान वर्ग के लोगों की हालत बहुत खराब थी। समाज में इस वर्ग को कोई स्थान प्राप्त नहीं था। कुलीन और मध्यम वर्ग के लोग इन्हें नीची और घृणा की दृष्टि से देखते थे। पादरी वर्ग भी कई तरह से आम लोगों का शोषण करता था। आगे चलकर यही वर्ग-संघर्ष रूसी क्रान्ति का मुख्य कारण बना। सामाजिक असमानता ने लोगों में असंतोष पैदा किया।
2. **आर्थिक कारण:** औद्योगीकरण से पहले रूसी लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती था। रूस में किसानों की हालत बहुत दयालु थी। बहुत गरीब होने के कारण उन्हें गरीबी और भूखमरी का जीवन जीना पड़ता था। वे सामाजिक और आर्थिक बदलाव की तरफ उम्मीद से देख रहे थे। दूसरी ओर, रूसी कारखानों और उद्योगों में विदेशी पूंजी लगी हुई थी और विदेशी पूंजीपतियों का एकमात्र लक्ष्य ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफा कमाना था। इन हालातों में रूस में अनाज, कपड़े और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की कमी होने लगी। ज़ारशाही ने भी श्रमिकों और किसानों की आर्थिक हालत सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया। अंत में, यह आर्थिक हालत भी रूसी क्रान्ति का कारण बनी। आर्थिक शोषण ने लोगों को एकजुट होने पर मजबूर किया।
In simple words: रूसी क्रान्ति के सामाजिक कारण थे वर्गों में गहरी असमानता और किसानों-मजदूरों का शोषण। आर्थिक कारण थे गरीब किसानों की दयनीय हालत, विदेशी पूंजी का प्रभुत्व और ज़ारशाही का जनता की समस्याओं को अनदेखा करना।
🎯 Exam Tip: सामाजिक और आर्थिक कारणों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग करें और प्रत्येक श्रेणी के तहत मुख्य बिंदुओं को सूचीबद्ध करें। यह सुनिश्चित करें कि आप प्रमुख सामाजिक वर्ग और आर्थिक गतिविधियों का उल्लेख करें।
Question 4. रूस के समाज के दो वर्ग कौन-कौन से थे ? उनका उल्लेख कीजिए।
Answer: क्रान्ति से पहले रूस के समाज के दो मुख्य वर्ग निम्नलिखित थे:
1. **उच्च वर्ग:** उच्च वर्ग में ज़ारशाही के सदस्य, उच्च सामन्त और बहुत अमीर लोग थे। ये लोग बहुत ही शानदार और ऐशो-आराम वाला जीवन जीते थे। उनका जीवन विलासिता से भरा था। वे अपनी ज़मीनों पर अर्द्ध-दासों से खेती करवाते थे और शिकार आदि करके मनोरंजन करते थे। इस वर्ग को समाज में बहुत सम्मान मिलता था और इनके पास सारी शक्ति थी।
2. **मध्यम वर्ग:** इस वर्ग में लेखक, विचारक, छोटे व्यापारी और छोटे सामन्त आदि शामिल थे। इनकी स्थिति उच्च वर्ग के लोगों से नीची थी। इन्हें किसी भी तरह के विशेष अधिकार प्राप्त न होने के कारण इनकी स्थिति बहुत ही दयनीय रहती थी। उन्हें अपनी योग्यताओं के अनुसार अवसर नहीं मिलते थे।
In simple words: क्रान्ति से पहले रूस में दो मुख्य वर्ग थे: उच्च वर्ग (ज़ारशाही, सामन्त) जो ऐशो-आराम का जीवन जीते थे, और मध्यम वर्ग (लेखक, व्यापारी) जिनकी हालत उच्च वर्ग से बहुत नीची थी और उन्हें कोई अधिकार नहीं मिलते थे।
🎯 Exam Tip: जब समाज के वर्गों का वर्णन करें, तो प्रत्येक वर्ग के प्रमुख सदस्यों, उनकी जीवनशैली और उनके अधिकारों या अभावों को स्पष्ट रूप से बताएं।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. रूस की क्रान्ति कब प्रारम्भ हुई? इसके नायक कौन थे? [2012, 18]
Answer: रूसी क्रान्ति सन् 1917 ई० में प्रारम्भ हुई। इसके नायक लेनिन थे। यह क्रान्ति दुनिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी।
In simple words: रूस में क्रान्ति साल 1917 में शुरू हुई और लेनिन इसके सबसे बड़े नेता थे।
🎯 Exam Tip: क्रान्ति की तारीख और प्रमुख नेता का नाम याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सीधा सवाल होता है।
Question 2. रूस की संसद का क्या नाम था ?
Answer: रूस की संसद का नाम ड्यूमा था। यह एक विधायी निकाय था जो ज़ार के शासनकाल में स्थापित हुआ था।
In simple words: रूस की संसद को ड्यूमा कहा जाता था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्थाओं के नाम याद रखें। 'ड्यूमा' रूस की संसद का विशिष्ट नाम था।
Question 3. 1917 ई० की रूसी क्रान्ति सबसे अधिक किस विचारधारा से प्रभावित थी ?
Answer: 1917 ई० की रूसी क्रान्ति सबसे अधिक लेनिन की विचारधारा से प्रभावित थी। लेनिन ने मार्क्सवादी सिद्धांतों को रूसी परिस्थितियों के अनुकूल बनाया।
In simple words: साल 1917 की रूसी क्रान्ति पर लेनिन के विचारों का सबसे ज़्यादा असर था।
🎯 Exam Tip: क्रान्ति के पीछे की प्रमुख विचारधारा और उसके मुख्य नेता का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. क्रान्ति के पूर्व रूस में किस प्रकार की शासन व्यवस्था थी ?
Answer: क्रान्ति से पहले रूस में ज़ारशाही शासन व्यवस्था थी। यह एक निरंकुश राजशाही थी जहाँ ज़ार को पूर्ण शक्ति प्राप्त थी।
In simple words: क्रान्ति से पहले रूस में ज़ारशाही नामक राजा का शासन था।
🎯 Exam Tip: किसी भी क्रान्ति के कारणों को समझने के लिए, क्रान्ति से पहले की शासन प्रणाली को जानना ज़रूरी है।
Question 5. क्रान्ति के पूर्व रूस का समाज कितने वर्गों में बँटा था ?
Answer: क्रान्ति से पहले रूस का समाज तीन वर्गों में बँटा था। ये वर्ग थे: कुलीन वर्ग, मध्यम वर्ग और किसान व मजदूर वर्ग।
In simple words: क्रान्ति से पहले रूस का समाज तीन बड़े हिस्सों में बंटा हुआ था।
🎯 Exam Tip: समाज के मुख्य वर्गों को याद रखना आपको सामाजिक कारणों को समझाने में मदद करेगा।
Question 6. ड्यूमा किसे कहते थे ?
Answer: रूस की संसद का नाम ड्यूमा था। यह रूस की एक विधायी सभा थी जो ज़ार के शासनकाल में बनाई गई थी।
In simple words: ड्यूमा रूस की संसद का नाम था।
🎯 Exam Tip: ड्यूमा रूस की राजनीतिक संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, इसका नाम और कार्य याद रखें।
Question 7. लेनिन कौन था ? उसका सम्बन्ध किस क्रान्ति से था ? [2012]
Answer: लेनिन रूस में बोल्शेविक दल का प्रमुख नेता था। उसका सम्बन्ध रूसी क्रान्ति से था। वह क्रान्ति के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में से एक था।
In simple words: लेनिन बोल्शेविक दल का नेता था और उसका रिश्ता रूसी क्रान्ति से था।
🎯 Exam Tip: लेनिन जैसे प्रमुख व्यक्तियों के बारे में प्रश्नों में उनके दल और क्रान्ति में उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 8. रूस का अन्तिम जार कौन था ?
Answer: रूस का अन्तिम जार (सम्राट) निकोलस द्वितीय था। उसके शासनकाल में रूसी क्रान्ति हुई थी।
In simple words: रूस का आखिरी राजा निकोलस द्वितीय था।
🎯 Exam Tip: क्रान्ति के समय के शासक का नाम अक्सर पूछा जाता है।
Question 9. रूस के बोल्शेविक दल के सर्वप्रथम नेता कौन थे ?
Answer: रूस के बोल्शेविक दल के सर्वप्रथम नेता लेनिन थे, जिनका वास्तविक नाम ब्लादिमीर इलिच यूलियनाव था। उन्होंने दल को क्रान्ति के लिए तैयार किया।
In simple words: बोल्शेविक दल के पहले नेता लेनिन थे, जिनका असली नाम ब्लादिमीर इलिच यूलियनाव था।
🎯 Exam Tip: बोल्शेविक दल के नेता का नाम और उसका महत्व याद रखें क्योंकि यह क्रान्ति में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
Question 10. रूसी क्रान्ति को प्रभावित करने वालों के नाम लिखिए।
Answer: रूसी क्रान्ति को प्रभावित करने वालों में लेनिन, कार्ल मार्क्स, टॉल्सटॉय, मैक्सिम गोर्की, बाकुनिन, तुर्गनेव, दाँस्तोवेस्की आदि प्रमुख थे। इन विचारकों ने जनता में बदलाव की चेतना जगाई।
In simple words: रूसी क्रान्ति को लेनिन, कार्ल मार्क्स और टॉल्सटॉय जैसे बड़े विचारकों ने प्रभावित किया था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख विचारकों और नेताओं के नाम याद रखें जिन्होंने क्रान्ति की दिशा तय की।
Question 11. रूस में बौद्धिक क्रान्ति लाने वाले दो प्रमुख लेखकों के नाम लिखिए।
Answer: रूस में बौद्धिक क्रान्ति लाने वाले दो प्रमुख लेखक थे-टॉल्सटॉय तथा दाँस्तोवेस्की। इन लेखकों ने अपनी रचनाओं से समाज में नई सोच पैदा की।
In simple words: टॉल्सटॉय और दाँस्तोवेस्की रूस में बौद्धिक क्रांति लाने वाले दो खास लेखक थे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख साहित्यिक और बौद्धिक हस्तियों के नाम याद रखें जिन्होंने सामाजिक बदलाव में योगदान दिया।
Question 12. फरवरी क्रान्ति का क्या अभिप्राय है ? [2011]
Answer: 7 मार्च, 1917 ई० की बड़ी घटना ने रूस में क्रान्ति को भड़का दिया। इस क्रान्ति को 'फरवरी क्रान्ति' कहा गया। इस क्रान्ति के कारण ज़ारशाही का पतन हुआ।
In simple words: फरवरी क्रान्ति उस घटना को कहते हैं जब 7 मार्च, 1917 को रूस में एक बड़ा विद्रोह हुआ, जिससे ज़ार का शासन खत्म हो गया।
🎯 Exam Tip: फरवरी क्रान्ति की तारीख और उसके मुख्य परिणाम (ज़ारशाही का पतन) पर ध्यान दें।
Question 13. 'प्रत्येक क्रान्ति में महान विचारकों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है।' इस कथन की पुष्टि में फ्रांस और रूस की क्रान्ति से सम्बन्धित एक-एक विचारक का नाम लिखिए। [2013]
Answer: इस कथन की पुष्टि में फ्रांस की क्रान्ति से सम्बन्धित विचारक रूसो थे, और रूस की क्रान्ति से सम्बन्धित विचारक कार्ल मार्क्स थे। इन विचारकों ने क्रान्ति के लिए वैचारिक आधार तैयार किया।
In simple words: फ्रांस की क्रान्ति के लिए रूसो और रूस की क्रान्ति के लिए कार्ल मार्क्स जैसे विचारकों ने जनता में बदलाव की सोच पैदा की।
🎯 Exam Tip: विभिन्न क्रान्तियों के प्रमुख विचारकों को सही क्रान्ति से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 14. यूरोप की दो महान राज्य क्रान्तियों के नाम लिखिए। [2014]
Answer: यूरोप की दो महान राज्य क्रान्तियों के नाम हैं:
1. इंग्लैण्ड की क्रान्ति।
2. फ्रांस की क्रान्ति।
ये क्रान्तियाँ यूरोपीय इतिहास में बड़े बदलाव लाईं।
In simple words: इंग्लैण्ड की क्रान्ति और फ्रांस की क्रान्ति यूरोप की दो बड़ी क्रांतियाँ थीं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न देशों में हुई महत्वपूर्ण क्रान्तियों के नाम याद रखें, खासकर वे जो विश्व इतिहास में बड़ी मानी जाती हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. रूस की क्रान्ति के समय रूस के सम्राट को कहा जाता था
(क) एम्परर
(ख) प्रिन्स
(ग) जार
(घ) डयूक
Answer: (ग) जार
In simple words: रूस में राजा को जार कहा जाता था, जो सम्राट के बराबर होता था।
🎯 Exam Tip: रूस में शासक के लिए प्रयोग किए जाने वाले विशिष्ट शब्द 'जार' को याद रखना ज़रूरी है।
Question 2. 1917 ई० की रूसी क्रान्ति के समय रूस का जार था
(क) निकोलस प्रथम
(ख) निकोलस द्वितीय
(ग) पीटर महान
(घ) लेनिन
Answer: (ख) निकोलस द्वितीय
In simple words: 1917 की रूसी क्रान्ति के समय निकोलस द्वितीय रूस का राजा था।
🎯 Exam Tip: रूसी क्रान्ति के समय शासक का नाम एक महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 3. रूसी क्रान्ति के समय लेनिन किस दल का नेता था?
(क) जिरोदिस्त
(ख) बोल्शेविक
(ग) जैकोबिन
(घ) मेनशेविक
Answer: (ख) बोल्शेविक
In simple words: लेनिन रूसी क्रान्ति के दौरान बोल्शेविक नामक राजनीतिक दल के नेता थे।
🎯 Exam Tip: लेनिन जिस दल का नेतृत्व कर रहे थे, उसका नाम जानना क्रान्ति की दिशा और परिणामों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. रूसी क्रान्ति के समय रूस में भीषण अकाल कब पड़ा?
(क) 1904-05 ई० में
(ख) 1910-11 ई० में
(ग) 1916-17 ई० में
(घ) 1918-19 ई० में
Answer: (ग) 1916-17 ई० में
In simple words: रूसी क्रान्ति के समय 1916-17 के सालों में रूस में बहुत बड़ा अकाल पड़ा था।
🎯 Exam Tip: अकाल जैसे प्रमुख घटनाओं की तारीखें याद रखें क्योंकि ये क्रान्ति के महत्वपूर्ण कारणों में से एक थीं।
Question 5. रूस की क्रान्ति का प्रमुख कारण क्या था?
(क) सैनिक दुर्बलता
(ख) रूस की पराजय
(ग) जार की निरंकुशता
(घ) देश का पिछड़ापन
Answer: (ग) जार की निरंकुशता
In simple words: रूस की क्रान्ति का सबसे बड़ा कारण यह था कि ज़ार अपनी मनमानी करता था और लोगों की सुनता नहीं था।
🎯 Exam Tip: रूसी क्रान्ति के कई कारण थे, लेकिन 'ज़ार की निरंकुशता' को अक्सर सबसे मुख्य कारण माना जाता है।
Question 6. रूस की क्रान्ति कब प्रारम्भ हुई थी? [2012]
(क) 1927 ई० में
(ख) 1917 ई० में
(ग) 1907 ई० में
(घ) 1911 ई० में
Answer: (ख) 1917 ई० में
In simple words: रूस में क्रान्ति साल 1917 में शुरू हुई थी।
🎯 Exam Tip: रूसी क्रान्ति की शुरुआत का वर्ष एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य है।
Question 7. 'खूनी रविवार' की घटना कहाँ हुई?
(क) पेरिस में
(ख) मास्को में
(ग) लन्दन में
(घ) सेण्ट पीटर्सबर्ग में
Answer: (घ) सेण्ट पीटर्सबर्ग में
In simple words: 'खूनी रविवार' की घटना रूस के सेण्ट पीटर्सबर्ग शहर में हुई थी।
🎯 Exam Tip: 'खूनी रविवार' जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं के स्थान को याद रखना चाहिए।
Question 8. समाजवाद का जन्मदाता कौन था?
(क) लेनिन
(ख) कार्ल मार्क्स
(ग) रूसो
(घ) स्टालिन
Answer: (ख) कार्ल मार्क्स
In simple words: कार्ल मार्क्स को समाजवाद की सोच को जन्म देने वाला मुख्य व्यक्ति माना जाता है।
🎯 Exam Tip: समाजवाद जैसे प्रमुख राजनीतिक दर्शनों के संस्थापकों के नाम याद रखें।
Question 9. क्रान्ति की सफलता के बाद रूस में कौन-सी व्यवस्था लागू की गई?
(क) पूँजीवादी
(ख) जनतन्त्र
(ग) साम्यवादी
(घ) तानाशाही
Answer: (ग) साम्यवादी
In simple words: क्रान्ति सफल होने के बाद रूस में साम्यवादी व्यवस्था लागू की गई, जिसमें सब कुछ सरकार के नियंत्रण में होता था।
🎯 Exam Tip: क्रान्ति के बाद स्थापित राजनीतिक और आर्थिक प्रणाली का नाम जानना महत्वपूर्ण है।
Question 10. जार साम्राज्य का पतन कब हुआ?
(क) 15 मार्च, 1917 ई० में
(ख) 27 फरवरी, 1930 ई० में
(ग) 2 अप्रैल, 1930 ई० में
(घ) 5 जनवरी, 1922 ई० में
Answer: (क) 15 मार्च, 1917 ई० में
In simple words: रूस में ज़ार का शासन 15 मार्च, 1917 को खत्म हो गया था।
🎯 Exam Tip: ज़ारशाही के पतन की सटीक तारीख एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है।
Question 11. निम्नलिखित में से कौन रूस की क्रान्ति से सम्बन्धित था? [2011)
(क) लेनिन
(ख) अब्राहम लिंकन
(ग) रूसो
(घ) बिस्मार्क
Answer: (क) लेनिन
In simple words: लेनिन रूसी क्रान्ति के मुख्य नेताओं में से एक थे।
🎯 Exam Tip: रूसी क्रान्ति से जुड़े प्रमुख व्यक्ति का नाम जानना आवश्यक है।
Question 12. मेनशेविक दल का प्रमुख नेता था
(क) लेनिन
(ख) करेन्स्की
(ग) रूसो
(घ) कार्ल मार्क्स
Answer: (ख) करेन्स्की
In simple words: करेन्स्की मेनशेविक दल के मुख्य नेता थे, जबकि लेनिन बोल्शेविक दल के नेता थे।
🎯 Exam Tip: रूसी क्रान्ति के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के नाम और उनकी विचारधारा को समझना महत्वपूर्ण है।
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