UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 2 Kendriya Mantriparishad ka Gathan evam Karya

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Detailed Chapter 2 केन्द्रीय मंत्रिपरिषद का गाथा एवं कार्य UP Board Solutions for Class 10 Social Science

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Class 10 Social Science Chapter 2 केन्द्रीय मंत्रिपरिषद का गाथा एवं कार्य UP Board Solutions PDF

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् का गठन कैसे होता है? इसके प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार, राष्ट्रपति को अपने काम में मदद और सलाह देने के लिए एक मन्त्रिपरिषद् होगी, जिसका मुखिया प्रधानमन्त्री होगा। यह मिलकर देश के शासन को संभालते हैं।
गठन (Formation):
लोकसभा में जिस पार्टी को सबसे ज़्यादा वोट मिलते हैं, उसके नेता को राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री बनाते हैं। प्रधानमन्त्री की सलाह पर राष्ट्रपति दूसरे मन्त्रियों को चुनते हैं और उन्हें अलग-अलग विभाग देते हैं। मन्त्री तीन तरह के होते हैं: (1) कैबिनेट मन्त्री, (2) राज्य मन्त्री, और (3) उपमन्त्री। अगर लोकसभा में किसी भी पार्टी को साफ बहुमत नहीं मिलता, तो राष्ट्रपति अपने विवेक से प्रधानमन्त्री चुन सकते हैं।
मन्त्रियों की योग्यताएँ (Qualifications of Ministers):
प्रधानमन्त्री और बाकी मन्त्रियों को संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य होना ज़रूरी है। अगर कोई मन्त्री सदस्य नहीं है, तो उसे 6 महीने के अंदर सदस्य बनना होगा, नहीं तो उसे अपना मन्त्री-पद छोड़ना पड़ेगा। यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि सभी मन्त्री जनता या राज्यों के प्रतिनिधियों के रूप में जवाबदेह हों।
मन्त्रियों द्वारा शपथ (Oath by Ministers):
हर मन्त्री को अपना पद संभालने से पहले राष्ट्रपति के सामने संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा, अपने कर्तव्यों का पालन करने और मन्त्रिपरिषद् के सभी फैसलों को गुप्त रखने की शपथ लेनी पड़ती है। राष्ट्रपति और मन्त्रियों के सरकारी रजिस्टर में साइन करने के बाद केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् का गठन पूरा हो जाता है।
मन्त्रिपरिषद् के कार्य (Functions of the Council of Ministers):
संविधान ने राष्ट्रपति को जो शासन चलाने के अधिकार दिए हैं, उनका इस्तेमाल मन्त्रिपरिषद् ही करती है। राष्ट्रपति के नाम पर देश का शासन यही चलाती है। इसके लिए मन्त्रिपरिषद् मुख्य रूप से ये काम करती है:
• **राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देना:** मन्त्रिपरिषद् का मुख्य काम राष्ट्रपति को उनके काम में मदद करना और सलाह देना है।
• **राष्ट्रीय नीतियाँ बनाना:** मन्त्रिपरिषद् देश और विदेश के लिए सबसे ज़रूरी नीतियाँ बनाती है।
• **अपने विभाग के काम संभालना:** केन्द्रीय प्रशासन कई विभागों में बंटा होता है, और हर मन्त्री अपने विभाग के प्रशासनिक कामों को देखता है।
• **वित्तीय काम करना:** मन्त्रिपरिषद् हर साल बजट बनाती है, उसे संसद में पेश करती है और पास करवाती है। देश की आर्थिक नीतियाँ भी यही तय करती है।
• **कानून बनाना:** हर मन्त्री अपने विभाग से जुड़े बिल तैयार करके संसद में पेश करता है, ताकि वे कानून बन सकें।
• **संसद में सरकार का प्रतिनिधित्व:** संसद की बैठकों में मन्त्री सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, सदस्यों के सवालों और आलोचनाओं का जवाब देते हैं और सरकार की नीतियों का समर्थन करते हैं।
• **संविधान में बदलाव:** संविधान में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव मन्त्रिपरिषद् द्वारा ही पेश और पास किए जाते हैं।
• **व्यवस्थापिका के काम:** लोकसभा और राज्यसभा की बैठकों की तारीखें तय करना, बिल पेश करने का क्रम तय करना जैसे काम मन्त्रिपरिषद् ही करती है।
• **नियुक्ति संबंधी काम:** राष्ट्रपति जिन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करते हैं, उन सभी में मन्त्रिपरिषद् की सलाह ली जाती है।
• **सूचना देना:** मन्त्रिपरिषद् अपनी नीतियों और कामों के बारे में राष्ट्रपति को लगातार जानकारी देती रहती है। राष्ट्रपति किसी भी प्रशासनिक जानकारी को मांग सकते हैं।
• **जनमत बनाना:** मन्त्रिपरिषद् के सदस्य सरकारी नीतियों के पक्ष में लोगों की राय बनाने की कोशिश करते हैं ताकि सरकार लोकप्रिय हो।
• **युद्ध या शांति की घोषणाएँ:** युद्ध और शांति से जुड़ी घोषणाएँ मन्त्रिपरिषद् ही करती है और यह भी तय करती है कि दूसरे देशों से किस तरह के सैन्य और व्यापारिक संबंध होंगे।
• **अन्य कार्य:** मन्त्रिपरिषद् अपराधियों को माफ़ करने और भारत रत्न, पद्मभूषण जैसे सम्मान देने के बारे में राष्ट्रपति को सलाह देती है।In simple words: केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् देश का शासन चलाने वाली सबसे खास टीम है, जिसका मुखिया प्रधानमन्त्री होता है। इसका काम नीतियाँ बनाना, कानून लागू करना और राष्ट्रपति को सलाह देना है, ताकि देश का विकास ठीक से हो सके।

🎯 Exam Tip: इस तरह के व्यापक प्रश्नों में, उत्तर को बिन्दुओं में बांटना और हर बिन्दु को स्पष्ट रूप से समझाना बहुत ज़रूरी है ताकि परीक्षक को आपके ज्ञान का प्रदर्शन हो सके।

 

Question 2. प्रधानमन्त्री की नियुक्ति कैसे होती है? उसके अधिकारों एवं कार्यों (कर्तव्यों) का वर्णन कीजिए।
Answer: प्रधानमन्त्री केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् का मुखिया होता है। संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री को चुनते हैं। व्यवहार में, राष्ट्रपति उस राजनीतिक दल के नेता को प्रधानमन्त्री बनाते हैं जिसे लोकसभा में सबसे ज़्यादा बहुमत मिला हो। यदि किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो राष्ट्रपति अपने विवेक से किसी को भी प्रधानमन्त्री नियुक्त कर सकते हैं, जैसा कि जुलाई 1979 में चौ. चरण सिंह की नियुक्ति के समय हुआ था। इस चयन प्रक्रिया से सुनिश्चित होता है कि देश में एक स्थिर सरकार बन सके।
**प्रधानमन्त्री के कार्य (शक्तियाँ) तथा महत्त्व:**
प्रधानमन्त्री के काम और शक्तियों से उनके महत्व का अनुमान लगाया जा सकता है:
1. **मन्त्रिपरिषद् के निर्माता:** राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री को नियुक्त करते हैं, और फिर प्रधानमन्त्री की सलाह पर अन्य मन्त्रियों को चुनते हैं और उन्हें विभाग बांटते हैं। प्रधानमन्त्री किसी भी मन्त्री के विभाग में बदलाव कर सकते हैं।
2. **मन्त्रिपरिषद् के अध्यक्ष:** प्रधानमन्त्री केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् के मुखिया और नेता होते हैं। वे मन्त्रिपरिषद् की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और उनके कामों को संभालते हैं। मन्त्रिपरिषद् के सभी निर्णय उनकी इच्छा से प्रभावित होते हैं। अगर कोई मन्त्री प्रधानमन्त्री की राय से सहमत नहीं होता है, तो प्रधानमन्त्री उसे इस्तीफा देने के लिए कह सकते हैं या राष्ट्रपति से उसे हटाने का अनुरोध कर सकते हैं।
3. **कार्यपालिका के प्रधान:** राष्ट्रपति देश की कार्यपालिका के सिर्फ नाममात्र के प्रधान होते हैं। कार्यपालिका की असली शक्ति प्रधानमन्त्री के पास होती है। इसलिए, अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानमन्त्री ही देश के मुख्य शासक होते हैं।
4. **शासन के प्रमुख प्रबन्धक:** देश की शासन व्यवस्था को अलग-अलग विभागों और मंत्रालयों में बांटना, मन्त्रियों को विभाग देना, नीतियां तय करना और उनमें समय-समय पर बदलाव करना—ये सब प्रधानमन्त्री की इच्छा और निर्देश पर निर्भर करता है। इस प्रकार, प्रधानमन्त्री ही देश के शासन के मुख्य प्रबंधक होते हैं।
5. **लोकसभा के नेता:** लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी के नेता होने के कारण, प्रधानमन्त्री लोकसभा के सत्र बुलाने, कार्यक्रम तय करने और सत्र स्थगित करने का निर्णय लेते हैं। वे लोकसभा में अपने मंत्रिमंडल का नेतृत्व करते हैं और शासन संबंधी नीतियों की घोषणा करते हैं। वे राष्ट्रपति को लोकसभा भंग करने की सलाह भी दे सकते हैं।
6. **राष्ट्रपति और मन्त्रिपरिषद् तथा राष्ट्रपति और संसद के बीच की कड़ी:** प्रधानमन्त्री राष्ट्रपति और मन्त्रिपरिषद् के बीच एक पुल का काम करते हैं। वे मंत्रिमंडल की नीतियों और निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को देते हैं और राष्ट्रपति के निर्णयों से मन्त्रियों को अवगत कराते हैं। इसी तरह, वे राष्ट्रपति और संसद के बीच भी कड़ी का काम करते हैं, संसद की कार्यवाही से राष्ट्रपति को अवगत कराते हैं और राष्ट्रपति के सुझावों को संसद तक पहुंचाते हैं।
7. **नियुक्तियाँ संबंधी अधिकार:** राष्ट्रपति द्वारा की जाने वाली सभी नियुक्तियाँ, जैसे मन्त्रियों, राज्यपालों, न्यायाधीशों, राजदूतों, विभिन्न आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों की, प्रधानमन्त्री की सलाह पर होती हैं।
8. **अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व:** अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भारतीय प्रधानमन्त्री की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। भले ही विदेश विभाग उनके पास हो या न हो, वे ही विदेश नीति के अंतिम निर्णय लेते हैं। भारत की गुटनिरपेक्षता की विदेश नीति हमारे पहले प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू जी की देन है।
9. **शासन के प्रमुख प्रवक्ता:** देश और विदेश में प्रधानमन्त्री ही शासन की नीतियों के मुख्य और अधिकृत प्रवक्ता होते हैं। अगर संसद में दो मन्त्रियों के बयानों में कोई भ्रम या विवाद हो, तो प्रधानमन्त्री का बयान ही उसे खत्म कर सकता है।
10. **देश का सर्वोच्च नेता तथा शासक:** प्रधानमन्त्री देश के सर्वोच्च नेता और शासक होते हैं। देश का पूरा शासन उनकी इच्छा के अनुसार चलता है। वे व्यवस्थापिका से अपनी इच्छा के अनुसार कानून बनवा सकते हैं और संविधान में ज़रूरी संशोधन भी करवा सकते हैं।
11. **आम चुनाव प्रधानमन्त्री के नाम पर:** देश के आम चुनाव प्रधानमन्त्री के नाम पर ही कराए जाते हैं। इस तरह आम चुनाव प्रधानमन्त्री की प्रतिष्ठा और शक्ति को बहुत बढ़ा देते हैं।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि प्रधानमन्त्री राष्ट्र के नेता होते हैं, क्योंकि देश के शासन की पूरी बागडोर उनके हाथ में होती है। व्यवहार में, देश का पूरा शासन उनकी इच्छा के अनुसार चलता है।In simple words: प्रधानमन्त्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो लोकसभा में बहुमत दल के नेता होते हैं। प्रधानमन्त्री देश के असली मुखिया होते हैं, जो मन्त्रिपरिषद् बनाते हैं, शासन का प्रबंधन करते हैं, नीतियां बनाते हैं और देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधानमन्त्री की शक्तियों को समझाते समय, प्रत्येक बिन्दु को छोटे, स्पष्ट वाक्यों में लिखें और उदाहरण या महत्व का एक संक्षिप्त उल्लेख करें।

 

Question 3. भारतीय प्रधानमन्त्री के राष्ट्रपति और संसद से सम्बन्ध का वर्णन कीजिए।
Answer: संसदीय शासन-प्रणाली में मन्त्रिपरिषद् ही असल में कार्यपालिका की मुखिया होती है, क्योंकि प्रधानमन्त्री मन्त्रिपरिषद् के प्रमुख होते हैं। इसलिए, प्रधानमन्त्री का पद बहुत महत्वपूर्ण है। भारत में संसदीय प्रणाली होने के कारण प्रधानमन्त्री का पद भी बहुत खास है। भारत के राष्ट्रपति की स्थिति ग्रेट ब्रिटेन के राजा या रानी जैसी है; वे सिर्फ संवैधानिक प्रमुख हैं। डॉ. अम्बेडकर के अनुसार, "राष्ट्रपति राष्ट्र के प्रमुख हैं, कार्यपालिका के प्रमुख नहीं।" राष्ट्रपति अपनी सभी शक्तियों का उपयोग मन्त्रिपरिषद् की सलाह से ही करते हैं। भारतीय व्यवस्था में संसद का भी महत्वपूर्ण स्थान है। संसद पूरे सिस्टम के नियमों के लिए जिम्मेदार है। हालांकि, भारत में संसद पूरी तरह से आज़ाद नहीं है, इसका मुख्य कारण प्रधानमन्त्री और मंत्रिमंडल का संसद पर दबाव बनाए रखना है।
**प्रधानमन्त्री एवं राष्ट्रपति का सम्बन्ध:**
भारत में कार्यपालिका के अध्यक्ष राष्ट्रपति होते हैं। सिद्धांत में, प्रधानमन्त्री की मन्त्रिपरिषद् का गठन राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए किया जाता है, लेकिन असल में स्थिति अलग है। मन्त्रिपरिषद् के निर्णय और सलाह राष्ट्रपति को मानने पड़ते हैं। हालांकि राष्ट्रपति अपनी असहमति दिखा सकते हैं, लेकिन उन्हें मन्त्रिपरिषद् के निर्णयों को मानना पड़ता है। 42वें और 44वें संविधान संशोधनों से पहले, राष्ट्रपति मन्त्रिपरिषद् की राय मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य थे। इन संशोधनों के बाद, यह व्यवस्था कर दी गई कि राष्ट्रपति को अपनी मन्त्रिपरिषद् की राय मानने के लिए मजबूर किया गया है। वे केवल मंत्रिमंडल से एक बार पुनर्विचार के लिए कह सकते हैं, लेकिन फिर भी वे मन्त्रिपरिषद् की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं, यह उनके व्यक्तित्व पर निर्भर करता है। मन्त्रिपरिषद् के सभी निर्णयों से राष्ट्रपति को अवगत कराया जाता है, और राष्ट्रपति मंत्रिमंडल से किसी भी तरह की जानकारी मांग सकते हैं। प्रधानमन्त्री की सलाह पर राष्ट्रपति अन्य मन्त्रियों को नियुक्त करते हैं और उन्हें शपथ दिलाते हैं। प्रधानमन्त्री की सलाह पर वे किसी भी मन्त्री को पद से हटा सकते हैं।
**प्रधानमन्त्री और संसद का सम्बन्ध:**
प्रधानमन्त्री और संसद के बीच गहरे संबंध हैं। प्रधानमन्त्री और उनकी मन्त्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोकसभा (संसद का पहला सदन) के प्रति उत्तरदायी होती है। संसद सवाल पूछकर, पूरक प्रश्न, निन्दा प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव और काम रोको प्रस्ताव जैसे तरीकों से प्रधानमन्त्री और उनके मंत्रिमंडल पर नियंत्रण रखती है। भारत में संसदीय शासन-व्यवस्था अपनाई गई है, जिसमें व्यवस्थापिका (संसद) और कार्यपालिका आपस में जुड़ी होती हैं, और कार्यपालिका व्यवस्थापिका के प्रति जवाबदेह होती है। जवाबदेही का मतलब है कि प्रधानमन्त्री और उनकी मन्त्रिपरिषद् संसद (लोकसभा) के अधीन हैं। वे उसकी इच्छा के अनुसार ही काम करते हैं और तब तक पद पर रहते हैं जब तक उन्हें लोकसभा में बहुमत का विश्वास प्राप्त हो।
व्यवहारिक रूप से, संसद प्रधानमन्त्री और उसकी मन्त्रिपरिषद् पर नियंत्रण नहीं रखती, क्योंकि प्रधानमन्त्री बहुमत वाली पार्टी के नेता होते हैं और उनके पीछे संसद का बहुमत हमेशा रहता है। संसद पर प्रधानमन्त्री के नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण तरीका प्रधानमन्त्री के हाथ में लोकसभा को भंग करने की सिफारिश का अधिकार है। राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री की सलाह पर लोकसभा को भंग कर फिर से चुनाव करा सकते हैं।In simple words: प्रधानमन्त्री राष्ट्रपति को मन्त्रिपरिषद् के फैसले बताते हैं और राष्ट्रपति के निर्णयों से मन्त्रियों को अवगत कराते हैं, जिससे वे दोनों के बीच की कड़ी बनते हैं। संसद पर प्रधानमन्त्री का नियंत्रण होता है क्योंकि वह बहुमत दल के नेता होते हैं, और अगर ज़रूरी हो तो वे लोकसभा को भंग करने की सलाह भी दे सकते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री के बीच के संबंध को स्पष्ट करते समय संवैधानिक प्रावधानों (जैसे अनुच्छेद 74, 75) का उल्लेख करें और वास्तविक कार्यप्रणाली को भी समझाएं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् के सामूहिक उत्तरदायित्व का क्या अर्थ है? मन्त्रिपरिषद् किसके प्रति उत्तरदायी है?
Answer: भारत में संसदीय शासन-प्रणाली है, जिसमें मन्त्रिपरिषद् की सामूहिक जवाबदेही होती है। सामूहिक उत्तरदायित्व का मतलब है कि मन्त्रिपरिषद् के सभी सदस्य अपने कामों के लिए संसद के प्रति व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह तो होते ही हैं, साथ ही वे प्रशासनिक नीतियों और सभी प्रशासनिक कामों के लिए भी सामूहिक रूप से संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं। इसका मतलब साफ है कि पूरी मन्त्रिपरिषद् एक टीम की तरह काम करती है, और सभी मन्त्री एक-दूसरे के फैसलों और कामों के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसलिए, मंत्रिमंडल की सफलता या असफलता का भार किसी एक मन्त्री पर नहीं पड़ता, बल्कि सभी मन्त्रियों पर पड़ता है। वे सब एक साथ तैरते हैं और एक साथ ही डूबते हैं, जिसका अर्थ है कि अगर एक मन्त्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होता है, तो पूरी मन्त्रिपरिषद् को इस्तीफा देना पड़ता है।In simple words: केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् की सामूहिक जवाबदेही का मतलब है कि सभी मन्त्री मिलकर एक टीम की तरह काम करते हैं और अपने सभी कामों के लिए लोकसभा के प्रति जिम्मेदार होते हैं। अगर एक मन्त्री की गलती होती है, तो उसका असर पूरी टीम पर पड़ता है।

🎯 Exam Tip: सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ स्पष्ट करने के लिए "एक साथ तैरते हैं और एक साथ डूबते हैं" मुहावरे का प्रयोग करें और बताएं कि यह लोकसभा के प्रति है।

 

Question 2. केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् पर संसद किस प्रकार नियन्त्रण रखती है? इसके द्वारा अपनाये जाने वाले किन्हीं तीन तरीकों का उल्लेख कीजिए।
Answer: केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् संसद के प्रति जवाबदेह होती है, इसलिए संसद उस पर नीचे दिए गए तरीकों से नियंत्रण रखती है:
1. **नीतियों की आलोचना:** संसद सदस्य मन्त्रिपरिषद् के कामों और नीतियों की आलोचना करते हैं, जिससे उन्हें जवाबदेह ठहराया जाता है।
2. **वित्तीय बिलों पर नियंत्रण:** मन्त्रिपरिषद् द्वारा पेश किए गए वित्तीय बिलों पर संसद का पूरा नियंत्रण होता है, क्योंकि संसद में पास होने पर ही वे लागू होते हैं।
3. **सामूहिक उत्तरदायित्व:** मन्त्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति भी जवाबदेह होती है। अगर संसद में अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाता है, तो मन्त्रिपरिषद् को इस्तीफा देना पड़ता है।
4. **ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और प्रश्नकाल:** ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, प्रश्नकाल और पूरक प्रश्नों के माध्यम से संसद मन्त्रिपरिषद् पर पूरी तरह से नियंत्रण रखती है। प्रश्नकाल में मन्त्री अपने विभागों से जुड़े सवालों का जवाब देते हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है।In simple words: संसद मन्त्रिपरिषद् पर नियंत्रण रखने के लिए सवाल पूछती है, उनकी नीतियों की आलोचना करती है, और अविश्वास प्रस्ताव जैसे तरीकों का इस्तेमाल करती है। बजट पास करने का अधिकार भी संसद के पास होता है।

🎯 Exam Tip: नियंत्रण के तरीकों को स्पष्ट रूप से बताएं, जैसे प्रश्नकाल, अविश्वास प्रस्ताव और वित्तीय नियंत्रण, जो संसद की शक्ति को दर्शाते हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भारत के प्रथम प्रधानमंन्त्री का नाम बताइए।
Answer: भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री पं० जवाहरलाल नेहरू थे। वे स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता थे और भारत के पहले प्रधानमन्त्री बने।In simple words: भारत के सबसे पहले प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू थे।

🎯 Exam Tip: प्रथम व्यक्तियों के नाम याद रखना सामान्य ज्ञान और इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. मन्त्रियों की कितनी श्रेणियाँ होती हैं?
Answer: मन्त्रियों की तीन श्रेणियाँ होती हैं: कैबिनेट मन्त्री, राज्य मन्त्री और उपमन्त्री। ये श्रेणियां उनके पद और जिम्मेदारियों के आधार पर तय होती हैं।In simple words: मन्त्री तीन तरह के होते हैं - कैबिनेट, राज्य और उपमन्त्री।

🎯 Exam Tip: मन्त्रियों की श्रेणियों को याद रखें, क्योंकि यह मन्त्रिपरिषद् की संरचना को समझने में मदद करता है।

 

Question 3. कौन-से संविधान संशोधन द्वारा मन्त्रिपरिषद् में सदस्यों की संख्या सीमित कर दी गयी है?
Answer: 91वें संविधान संशोधन (2003) द्वारा मन्त्रिपरिषद् में सदस्यों की संख्या सीमित कर दी गयी है। इस संशोधन का उद्देश्य बड़े मंत्रिमंडल को रोकना और शासन को अधिक प्रभावी बनाना था।In simple words: 91वें संविधान संशोधन (2003) के बाद मन्त्रिपरिषद् में मन्त्रियों की संख्या तय कर दी गई।

🎯 Exam Tip: संविधान संशोधनों से संबंधित प्रश्नों में संशोधन संख्या और वर्ष याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. संविधान के अनुसार मन्त्रिपरिषद् का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कार्य क्या है?
Answer: संविधान के अनुसार मन्त्रिपरिषद् का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कार्य देश तथा विदेश के लिए शासन संबंधी नीतियाँ बनाना और राष्ट्रपति को सलाह देना है। यह देश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।In simple words: मन्त्रिपरिषद् का सबसे ज़रूरी काम देश और विदेश के लिए नीतियाँ बनाना और राष्ट्रपति को सलाह देना है।

🎯 Exam Tip: मन्त्रिपरिषद् के मुख्य कार्य को याद रखें, जो नीति निर्माण और राष्ट्रपति को सहायता देना है।

 

Question 5. भारत में कुल कितने राज्य हैं? हाल में ही नये बनाए गए राज्य की राजधानी का नाम लिखिए। (2015)
Answer: वर्ष 2015 के अनुसार, भारत में कुल 29 राज्य थे। उस समय हाल ही में बने राज्य तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद थी। यह जानकारी 2015 के संदर्भ में है।In simple words: 2015 में भारत में 29 राज्य थे। नए बने राज्य की राजधानी हैदराबाद थी।

🎯 Exam Tip: भौगोलिक और राजनीतिक जानकारी के लिए, प्रश्न में दिए गए वर्ष के संदर्भ को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् में अधिक-से-अधिक कितने मंत्री हो सकते हैं? उनकी नियुक्ति कौन करता है? (2015)
Answer: केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् में मन्त्रियों की संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के अधिकतम 15% तक हो सकती है। इन मन्त्रियों की नियुक्ति प्रधानमन्त्री की सलाह पर राष्ट्रपति करते हैं। मन्त्रिपरिषद् में मुख्य रूप से तीन प्रकार के मन्त्री होते हैं- कैबिनेट स्तर के मन्त्री, राज्य मन्त्री और उपमन्त्री।In simple words: मन्त्रिपरिषद् में लोकसभा के कुल सदस्यों के 15% से ज़्यादा मन्त्री नहीं हो सकते। राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री की सलाह पर इनकी नियुक्ति करते हैं।

🎯 Exam Tip: मन्त्रिपरिषद् के आकार की सीमा (15%) और नियुक्ति प्रक्रिया को याद रखें, क्योंकि यह सरकार की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. प्रधानमन्त्री की नियुक्ति करता है
(a) राष्ट्रपति
(b) लोकसभा अध्यक्ष
(c) उपराष्ट्रपति
(d) जनता
Answer: (a) राष्ट्रपति
In simple words: प्रधानमन्त्री को भारत के राष्ट्रपति चुनते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रधानमन्त्री की औपचारिक नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, भले ही वे बहुमत दल के नेता हों।

 

Question 2. मन्त्रिपरिषद् सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?
(a) लोकसभा के प्रति
(b) प्रधानमन्त्री के प्रति
(c) उपराष्ट्रपति के प्रति
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) लोकसभा के प्रति
In simple words: मन्त्रिपरिषद् अपने सभी कामों के लिए लोकसभा के प्रति जवाबदेह होती है।

🎯 Exam Tip: "सामूहिक उत्तरदायित्व" का अर्थ है कि पूरी मन्त्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति जिम्मेदार होती है।

 

Question 3. मन्त्रिपरिषद्का अध्यक्ष कौन होता है?
(a) राष्ट्रपति
(b) उपराष्ट्रपति
(c) प्रधानमन्त्री
(d) लोकसभा अध्यक्ष
Answer: (c) प्रधानमन्त्री
In simple words: प्रधानमन्त्री ही मन्त्रिपरिषद् के मुखिया होते हैं और बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधानमन्त्री मन्त्रिपरिषद् के नेता और अध्यक्ष होते हैं, यह उनकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।

 

Question 4. यदि मन्त्रिपरिषद् की कोई सदस्य संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं है, तो वह अधिकतम कितने दिनों तक मन्त्री रह सकता है?
(a) 2 माह
(b) 6 माह
(c) 10 माह
(d) एक वर्ष
Answer: (b) 6 माह
In simple words: अगर कोई व्यक्ति मन्त्री बन जाता है लेकिन संसद का सदस्य नहीं है, तो उसे 6 महीने के अंदर सदस्य बनना ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: 6 महीने की अवधि मन्त्रियों के लिए संसद की सदस्यता प्राप्त करने की अनिवार्य समय-सीमा है।

 

Question 5. दो बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमन्त्री कौन थे ?
(a) लाल बहादुर शास्त्री
(b) मोरारजी देसाई
(c) चरण सिंह
(d) गुलजारी लाल नन्दा
Answer: (d) गुलजारी लाल नन्दा
In simple words: गुलजारी लाल नन्दा ने दो बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमन्त्री के रूप में काम किया था।

🎯 Exam Tip: भारत के कार्यवाहक प्रधानमन्त्री का नाम याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।

 

Question 6. भारत का प्रधानमन्त्री किसके प्रति उत्तरदायी होता है?
(a) राष्ट्रपति के प्रति ।
(b) राज्यसभा के प्रति
(c) लोकसभा के प्रति
(d) सर्वोच्च न्यायालय के प्रति
Answer: (c) लोकसभा के प्रति
In simple words: भारत का प्रधानमन्त्री लोकसभा के प्रति जवाबदेह होता है, क्योंकि वह बहुमत दल का नेता होता है।

🎯 Exam Tip: प्रधानमन्त्री का उत्तरदायित्व सीधे लोकसभा के प्रति होता है, जो संसदीय प्रणाली की एक प्रमुख विशेषता है।

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Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 2 केन्द्रीय मंत्रिपरिषद का गाथा एवं कार्य will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 2 केन्द्रीय मंत्रिपरिषद का गाथा एवं कार्य in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Social Science. You can access UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 2 केन्द्रीय मंत्रिपरिषद का गाथा एवं कार्य in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Social Science UP Board solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 2 केन्द्रीय मंत्रिपरिषद का गाथा एवं कार्य in printable PDF format for offline study on any device.