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Detailed Chapter 10 मानवीय संसाधन व्यावसाय UP Board Solutions for Class 10 Social Science
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Class 10 Social Science Chapter 10 मानवीय संसाधन व्यावसाय UP Board Solutions PDF
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. प्राथमिक व्यवसाय से आप क्या समझते हैं ? किन्हीं दो प्राथमिक व्यवसायों का वर्णन कीजिए ।
Answer: प्राथमिक व्यवसाय उन कार्यों को कहते हैं जो मनुष्य भोजन पाने और जीवित रहने के लिए सीधे प्रकृति से जुड़े होते हैं। पहले के समय में मनुष्य को अपना भोजन पाने के लिए जानवरों की तरह भटकना पड़ता था। समय के साथ, मनुष्य ने काम बांटना सीखा। कुछ लोग खाना उगाते थे, जबकि दूसरे समाज की बाकी ज़रूरतों को पूरा करते थे। इसी तरह के कामों को प्राथमिक व्यवसाय कहा जाता है। इसमें शिकार करना, पशु पालना, मछली पकड़ना, खेती करना और खनन जैसे काम शामिल हैं। ये सभी काम सीधे धरती और प्रकृति से जुड़े हैं।
प्राथमिक व्यवसायों का वर्णन:
**1. आखेट एवं संग्रहण (शिकार और इकट्ठा करना):** यह समाज में सबसे पुराना काम था। शुरुआती इंसान छोटे समूहों में रहते थे और शिकार करके अपना पेट भरते थे। जब उन्हें जंगली जानवरों से डर लगने लगा, तो उन्होंने उन्हें मारना और शिकार करना सीख लिया। इस तरह, शिकार सबसे पुराना मानव व्यवसाय बन गया। आज भी धरती पर कुछ जगहों के लोग बहुत साधारण जीवन जीते हैं। वे खाने की चीज़ें ढूंढने के लिए घूमते रहते हैं। वे जानवरों को मारकर और नदियों से मछलियां पकड़कर अपना पेट भरते हैं और ज़रूरी पोषक तत्व भी पाते हैं। वे शिकार के लिए भाले, धनुष-बाण और जाल जैसे साधारण हथियार इस्तेमाल करते हैं। अफ्रीका के पिग्मी और मलेशिया के सेमांग लोग घने जंगलों में रहते हैं। अफ्रीका के बुशमैन और ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी सूखे रेगिस्तानों में, और इनुइट व लैप्स उत्तरी ध्रुवीय इलाकों में रहते हैं। भारत में शिकार का महत्व बहुत कम हो गया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा और दक्षिण भारत के कुछ आदिवासी समूह आज भी शिकार करके ही गुज़ारा करते हैं। जानवरों की संख्या कम होने के कारण सरकार ने शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया है, और पर्यावरण बचाने के लिए भी यह काम अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
**2. पशुपालन:** भारत में पशुपालन खेती के साथ-साथ किया जाता है। यह पश्चिमी देशों के बड़े वाणिज्यिक पशुपालन से अलग है। हमारे देश में लगभग दो-तिहाई किसान अपनी रोज़ी-रोटी के लिए गाय, बैल, भैंस जैसे जानवर पालते हैं, जो उनके खेती के काम में भी मदद करते हैं। कुछ आदिवासी समूह भी पशुपालन से कमाते हैं। पशुपालन से जुड़े मुख्य उद्योग दूध और डेयरी उत्पाद हैं। हालांकि, हमारे देश में गायों और भैंसों से दूध का उत्पादन विदेशों के मुकाबले कम है, लेकिन जानवरों की संख्या ज़्यादा होने के कारण भारत 1999-2000 में दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया। 2000-01 में 81 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल से 3 मिलियन टन ज़्यादा था। पशुपालन से देश में 9.8 मिलियन लोगों को और सहायक क्षेत्र में 8.6 मिलियन लोगों को रोज़गार मिलता है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अनुसार, पिछले ढाई दशकों में दूध उत्पादन तीन गुना बढ़ गया है। यह 'श्वेत क्रान्ति' या 'ऑपरेशन फ्लड' के कारण संभव हुआ है। इस समय देश में लगभग 7 करोड़ दूध उत्पादक हैं। दूध उत्पादन में भैंसों का सबसे ज़्यादा योगदान है। भारत में दुनिया की 57% भैंसें और 16% गायें हैं।
In simple words: प्राथमिक व्यवसाय वे काम हैं जो सीधे प्रकृति से जुड़कर भोजन और जीवन के लिए किए जाते हैं, जैसे शिकार, पशुपालन, खेती और खनन। भारत में पशुपालन खेती का एक ज़रूरी हिस्सा है और इसने देश को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद की है।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक व्यवसायों की परिभाषा देते समय, हमेशा प्रकृति पर सीधी निर्भरता पर ज़ोर दें और उनके मुख्य उदाहरणों को स्पष्ट करें।
प्रश्न 2. खनन व्यवसाय क्या है ? भारतीय खनन व्यवसाय की विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।
या
खनन व्यवसाय में लगे प्रमुख राज्यों का वर्णन कीजिए। खनन व्यवसाय में किये जाने वाले सुधारों के लिए उपाय लिखिए।
Answer: खनन व्यवसाय का मतलब है ज़मीन खोदकर खनिज पदार्थ निकालना। भारत में बहुत सारे खनिज जैसे लोहा, मैंगनीज़, अभ्रक, तांबा और कोयला खदानों से निकाले जाते हैं। आजकल खनन एक प्राथमिक काम से ज़्यादा एक सहायक काम बन गया है। अब खनन के काम में बहुत सारे लोग लगे हुए हैं।
**विशेषताएँ:**
1. भारत खनिजों के मामले में भाग्यशाली है, लेकिन यहाँ खनन में आधुनिक तरीकों का कम इस्तेमाल होता है। देश में 3,600 खदानों में से केवल 880 खदानें ही मशीनों से चलती हैं, जो 85% खनिजों का उत्पादन करती हैं। बाकी 2,720 खदानें केवल 15% खनिज पैदा करती हैं।
2. भारत में ज़्यादातर खनन निजी हाथों में है, इसलिए यह ठीक से व्यवस्थित नहीं है। इसी वजह से भारत सरकार ने अभ्रक और कोयले की खदानों को सरकार के अधीन कर दिया है।
3. भारत के ज़्यादातर खनिज छोटा नागपुर के पठार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं। कुछ राज्य ऐसे हैं जहाँ कोई खनिज नहीं मिलता, जबकि ओडिशा, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, असम, कर्नाटक और गोवा जैसे राज्यों में अलग-अलग तरह के खनिज पदार्थ मिलते हैं।
4. भारत के हिमालयी क्षेत्र में खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत में बॉम्बे-हाई से कच्चा तेल भी मिलता है। यहाँ कई जगहों पर खनिजों की खोज चल रही है।
5. भारत में लोहा-अयस्क, मैंगनीज़ और अभ्रक के बड़े भंडार हैं। भारत इन खनिजों का निर्यात भी करता है।
**खनन व्यवसाय में लगे प्रमुख राज्य:**
दक्षिण भारत का पठार भारत के खनिज पदार्थों का मुख्य स्रोत है। खनन व्यवसाय में लगे राज्यों का विवरण इस प्रकार है-
1. **झारखंड:** खनन के मामले में झारखंड सबसे आगे है। अभ्रक और कोयले के उत्पादन में यह राज्य भारत में पहले नंबर पर है, और लोहे व बॉक्साइट के उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। झारखंड को देश की कुल खनिज संपत्ति का 33% हिस्सा मिलता है।
2. **पश्चिम बंगाल:** यहाँ लोहे, कोयले, अभ्रक, चूने का पत्थर और मैंगनीज़ जैसे खनिजों के बड़े भंडार हैं। देश की कुल खनिज संपत्ति का 16% हिस्सा यहाँ से आता है।
3. **अन्य राज्य:** मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से देश की खनिज-संपदा के मूल्य का 14% मिलता है, ओडिशा से 8% और आंध्र प्रदेश से 6% मिलता है। बाकी 23% हिस्सा महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और असम राज्यों से आता है।
**सुधार के उपाय:** भारत में खनिज संपत्ति का सही उपयोग करने के लिए खनन व्यवसाय में पिछड़ेपन को दूर करके उसे बेहतर बनाना ज़रूरी है। भारत के खनन व्यवसाय में सुधार के लिए ये उपाय किए जाने चाहिए:
* भारत में ज़्यादा से ज़्यादा खदानों को मशीनों से चलाना चाहिए, जिससे खनिज उत्पादन बढ़ सके।
* कोयले और अभ्रक की खदानों की तरह दूसरे ज़रूरी खनिज पदार्थों की खदानों को भी सरकार के अधीन कर लेना चाहिए।
* खदानों की खुदाई का काम व्यवस्थित तरीके से होना चाहिए।
* खनिज पदार्थों का उपयोग बढ़ाने के लिए परिवहन को बेहतर बनाना चाहिए।
* खनिज पदार्थों को खोदने और निकालने में नए तरीके इस्तेमाल करने चाहिए, ताकि खनिज बर्बाद न हों।
* खनिजों का ज़रूरत से ज़्यादा उत्पादन नहीं करना चाहिए और अयस्कों को खुले में इकट्ठा नहीं करना चाहिए। इससे उनकी गुणवत्ता खराब होती है।
In simple words: खनन का मतलब है ज़मीन से खनिज निकालना। भारत में खनिजों की भरमार है, लेकिन पुराने तरीकों और निजी नियंत्रण के कारण यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। झारखंड और पश्चिम बंगाल प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। इसमें सुधार के लिए मशीनीकरण, सरकारी नियंत्रण और बेहतर परिवहन ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: खनन व्यवसाय की विशेषताओं और सुधार के उपायों को बताते समय, प्रमुख खनिज-उत्पादक राज्यों के नाम और उनका योगदान याद रखें।
प्रश्न 3. मत्स्य व्यवसाय के प्रमुख क्षेत्र कहाँ-कहाँ हैं ? इनका विवरण दीजिए।
या
भारत में मत्स्य व्यवसाय की समीक्षा कीजिए ।
Answer: मछली पकड़ना भारत के मुख्य प्राथमिक व्यवसायों में से एक है। देश के पास 20 लाख वर्ग किलोमीटर का बड़ा मछली पकड़ने का क्षेत्र है, जिससे बहुत सारी मछलियां मिलती हैं। भारत के पास लंबी तटरेखा, सक्रिय समुद्री धाराएं और बड़ी नदियां हैं, जो समुद्र में मछलियों के लिए भोजन पहुंचाती हैं। इन अच्छी प्राकृतिक स्थितियों के कारण भारत में मछली पकड़ने के व्यवसाय का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में लगभग 60 लाख लोग मछली पकड़ने के क्षेत्र में काम करते हैं।
भारत में दो तरह के मछली संसाधन हैं: आंतरिक या ताज़े पानी के मछली क्षेत्र (यमुना, शारदा, गंगा जैसी नदियाँ, झीलें और तालाब) और समुद्री मछली क्षेत्र। 1950-51 से 2000-01 के बीच आंतरिक मछली क्षेत्र में चौदह गुना वृद्धि हुई है, जबकि समुद्री मछली क्षेत्र में पांच गुना वृद्धि हुई। मछली पकड़ने के व्यवसाय ने लोगों को रोज़गार और आय के साधन दिए हैं। 2003-04 में भारत को मछलियों के निर्यात से 5,739 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा मिली। वर्तमान में भारत दुनिया के मछली उत्पादक देशों में चौथे स्थान पर है। केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल प्रमुख मछली उत्पादक राज्य हैं। भारत में मछली पकड़ने का व्यवसाय भी कई समस्याओं से घिरा है, जिन्हें दूर करने के लिए भारत सरकार कई कदम उठा रही है। इन उपायों में मछुआरों को आर्थिक और वित्तीय सहायता देना, बड़ी मछली पकड़ने वाली नौकाएं उपलब्ध कराना और मछलियों को रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की सुविधाएँ देना प्रमुख हैं।
सरकार समय-समय पर पंचवर्षीय योजनाओं के ज़रिए मछली उद्योग को बढ़ावा देती रही है। पिछले कुछ सालों में मछली उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। मछली उद्योग के वैज्ञानिक विकास और अनुसंधान के लिए 1961 में मुंबई (अब मुंबई) में एक केंद्रीय मछली शिक्षण संस्थान खोला गया और समुद्री मछलियों के अध्ययन के लिए एक अनुसंधानशाला भी बनाई गई। इस तरह कहा जा सकता है कि देश का मछली व्यवसाय धीरे-धीरे विकसित हो रहा है।
In simple words: मछली पकड़ना भारत का एक प्रमुख व्यवसाय है, जिसमें देश की लंबी तटरेखा और नदियों के कारण समुद्री और ताज़े पानी दोनों तरह की मछलियां पकड़ी जाती हैं। यह रोज़गार देता है और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
🎯 Exam Tip: मछली व्यवसाय के प्रमुख क्षेत्रों को बताते समय, भारत की तटरेखा और नदी प्रणालियों के महत्व पर ज़ोर दें और प्रमुख उत्पादक राज्यों के नाम याद रखें।
प्रश्न 4. हरित क्रान्ति का वर्णन करते हुए इसको सफल बनाने के लिए उपयुक्त सुझाव दीजिए ।
या
हरित क्रान्ति को परिभाषित कीजिए एवं इसके कोई चार तत्त्व लिखिए। [2010]
या
भारत में हरित क्रान्ति को सफल बनाने के लिए कोई दो उपाय सुझाइए। [2013]
या
हरित क्रान्ति किसे कहते हैं? [2015]
या
हरित क्रान्ति से आप क्या समझते हैं? भारत में हरित क्रान्ति को सफल बनाने के लिए चार सुझाव दीजिए। [2018]
Answer: हरित क्रान्ति का मतलब है खेती में वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके ज़्यादा उपज देने वाले और अच्छी क्वालिटी के बीज, रासायनिक खाद का उपयोग करना, कई फसलें उगाना और सिंचाई की सुविधाओं को बढ़ाना, जिससे कृषि उत्पादन में बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी हो। देश में पुराने खेती के तरीकों को सुधारने के लिए 1958 में 'इंडियन सोसायटी ऑफ़ एग्रोनॉमी' की स्थापना हुई थी। इसके प्रयासों से देश में पहली बार 120 लाख टन गेहूं की जगह 170 लाख टन गेहूं पैदा हुआ। पचास लाख टन की इस अचानक वृद्धि को अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक श्री बोरलॉग ने 'हरित क्रान्ति' का नाम दिया। इसके बाद भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं की कई नई किस्में विकसित कीं, जिनकी प्रति हेक्टेयर उपज बहुत अच्छी रही। धान की किस्मों के साथ भी ऐसा ही हुआ। इस तरह 1960 के बाद देश में हरित क्रान्ति फैलने लगी और देश खाद्यान्नों के मामले में आत्मनिर्भर बन गया। हरित क्रान्ति के दौरान सरकार ने 1964-65 में 'गहन कृषि कार्यक्रम' चलाया। इस कार्यक्रम में खास फसलों के उत्पादन पर ध्यान दिया गया। 1966-67 में भयंकर अकाल का सामना करने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए 'अधिक उपज बीज कार्यक्रम' चलाया गया। बाद में इसमें 'बहुफसली कार्यक्रम' को भी शामिल कर लिया गया।
हरित क्रान्ति से देश में कृषि उत्पादन में बहुत ज़्यादा वृद्धि हो सकती है। हरित क्रान्ति के मुख्य घटक या तत्व इस प्रकार हैं:
* ज़्यादा उत्पादन देने वाली फसलें बोना।
* रासायनिक खादों का ज़्यादा इस्तेमाल करना।
* खेती में अच्छे बीज और वैज्ञानिक उपकरण इस्तेमाल करना।
* किसानों को खेती के बारे में शिक्षित करना।
* खेती के अनुसंधान की व्यवस्था करना।
* फसलों को कीटनाशक, कृमिनाशक और खरपतवारनाशक से बचाना।
* गहन कृषि जिला कार्यक्रम अपनाना।
* सिंचाई की सुविधाओं को बढ़ाना और ज़मीन सुधारना।
* खेती में नए और आधुनिक तरीके और तकनीक इस्तेमाल करना।
* फसलों के भंडारण और बेचने की सुविधाओं को बढ़ाना।
* पर्याप्त कृषि-ऋण की व्यवस्था करना।
* गहन कृषि क्षेत्र कार्यक्रम शुरू करना।
* बहुफसली कार्यक्रम लागू करना।
भारत में हरित क्रान्ति को सफल बनाने के लिए ये सुझाव दिए जा सकते हैं:
* कृषि उत्पादन से जुड़े सरकारी विभागों के बीच अच्छा तालमेल होना चाहिए।
* खाद और अच्छे बीजों को सही ढंग से बांटना चाहिए और किसानों को उनके उपयोग के बारे में ठीक से सिखाना चाहिए।
* खेती के लिए पैसे की सही व्यवस्था होनी चाहिए।
* सिंचाई की सुविधाओं को बढ़ाना चाहिए और मिट्टी के कटाव को रोकना चाहिए।
* कृषि उत्पादों को बेचने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।
* ज़मीन का ज़्यादा से ज़्यादा और सबसे अच्छा उपयोग किया जाना चाहिए।
* ज़मीन सुधार के कार्यक्रमों को अच्छे से लागू करना चाहिए।
* प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
* फसल बीमा योजना को जल्दी और बड़े पैमाने पर लागू करना चाहिए।
In simple words: हरित क्रान्ति खेती में उन्नत बीज, खाद और आधुनिक तरीकों का उपयोग करके ज़्यादा फसल उगाने को कहते हैं। इससे देश खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बन गया। इसे सफल बनाने के लिए सिंचाई, अच्छे बीज और किसानों की शिक्षा ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: हरित क्रान्ति के तत्वों को याद करते समय, 'उच्च उपज वाले बीज', 'रासायनिक उर्वरक', 'सिंचाई', और 'वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
प्रश्न 5. भारतीय कृषि के विकास में प्रयोग की जाने वाली नवीन तकनीकों का उल्लेख कीजिए तथा भारतीय कृषि की भावी सम्भावनाओं पर प्रकाश डालिए [2009]
Answer: भारतीय कृषि में आज़ादी के बाद से नई तकनीकों और बदलावों के कारण बहुत तरक्की हुई है। इसके मुख्य कारण ये हैं:
* खेतों की चकबंदी (छोटे-छोटे खेतों को एक जगह इकट्ठा करना) का काम बढ़ गया है।
* अच्छी क्वालिटी के बीजों का इस्तेमाल होने लगा है।
* रासायनिक खाद, जैविक खाद और कीटनाशक दवाओं का प्रयोग बढ़ गया है।
* खेतों की जुताई के वैज्ञानिक तरीके और सिंचाई के साधन बढ़ गए हैं।
* मिट्टी की जांच की सुविधा और कृषि उत्पादों के भंडारण की व्यवस्था हो गई है।
* किसानों को कृषि ऋण (खेती के लिए कर्ज़) की व्यवस्था और उत्पादों का अच्छा दाम मिलने लगा है।
* कृषि विकास में अलग-अलग संस्थाओं का योगदान बढ़ा है और नए कृषि यंत्र व उपकरण इस्तेमाल होने लगे हैं।
* सहकारी खेती का चलन बढ़ा है और व्यावसायिक फसलों का क्षेत्र बढ़ गया है।
इन सभी कोशिशों के कारण भारतीय कृषि अब एक उद्योग की तरह बनती जा रही है। तकनीक के बढ़ने से कृषि उत्पादन में भी बहुत वृद्धि हुई है।
**कृषि विकास की भावी सम्भावनाएँ:**
भोजन मनुष्य की सबसे ज़रूरी ज़रूरत है, जिसकी पूर्ति किसान अनाज उगाकर करते हैं। भारत में 1999-2000 में 208.9 मिलियन टन अनाज पैदा हुआ था, लेकिन 2000-01 में खराब मौसम के कारण यह लगभग 50 मिलियन टन कम हो गया। किसी भी देश में अनाज की ज़रूरत उसकी जनसंख्या और लोगों के जीवन स्तर पर निर्भर करती है। अनुमान है कि 2050 तक भारत की जनसंख्या 150 करोड़ हो जाएगी, जिसके लिए 40 करोड़ टन अनाज की ज़रूरत होगी। यह लक्ष्य पाना मुश्किल नहीं है, लेकिन हमारे सीमित आर्थिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ेगा। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी ज़रूरी विकास-सेवाओं के लिए पर्याप्त धन नहीं मिलेगा। खेती को व्यावसायिक और औद्योगिक रूप देने में भी दिक्कत आएगी, क्योंकि हमें अपनी बड़ी जनसंख्या के लिए ज़्यादा ज़मीन पर अनाज ही उगाना पड़ेगा। इससे हम व्यावसायिक फसलों के उत्पादन के लिए ज़मीन का क्षेत्रफल नहीं बढ़ा पाएंगे। व्यावसायिक फसलें विदेशी मुद्रा कमाने का अच्छा ज़रिया हैं। इसलिए, भारत में कृषि के विकास की अच्छी संभावनाएं हैं, लेकिन इसे औद्योगिक रूप देने की संभावनाएं उतनी अच्छी नहीं मानी जा सकतीं। यह तभी संभव है जब हम जनसंख्या वृद्धि को रोक सकें।
In simple words: भारत में खेती ने उन्नत बीजों, खादों, सिंचाई और मशीनों के उपयोग से बहुत प्रगति की है। भविष्य में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करके ही हम अपनी खाद्यान्न ज़रूरतों को पूरा कर पाएंगे और कृषि को और विकसित कर पाएंगे।
🎯 Exam Tip: भारतीय कृषि में नई तकनीकों का वर्णन करते समय, हमेशा विकास के कारणों और भविष्य की चुनौतियों, खासकर जनसंख्या वृद्धि के प्रभावों को उजागर करें।
प्रश्न 6. गेहूं की खेती के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए । भारत में इसके वितरण का वर्णन कीजिए ।
या
गेहूँ की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा भारत में इसके उत्पादन क्षेत्र बताइए ।
या
भारत में गेहूं की खेती का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए-[2009, 12]
1. अनुकूल भौगोलिक दशाएँ,
2. उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र,
3. उत्पादन ।
Answer: गेहूं भारत की एक प्रमुख और महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। भारत दुनिया का 10% गेहूं पैदा करता है और पांचवें स्थान पर है। भारत की कुल खेती वाली ज़मीन के 12.4% हिस्से पर और खाद्यान्न उगाने वाली ज़मीन के 18.7% हिस्से पर गेहूं उगाया जाता है। 'हरित क्रान्ति' से भारत में गेहूं के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। अब भारत इस क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है और निर्यात भी करता है। भारत में प्रति हेक्टेयर गेहूं का उत्पादन लगभग 2,750 किलोग्राम है।
**अनुकूल भौगोलिक दशाएँ –** गेहूं की उपज के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाएं इस प्रकार हैं:
**1. जलवायु:** गेहूं समशीतोष्ण जलवायु की मुख्य फसल है। इसकी खेती के लिए ये जलवायु दशाएं अच्छी होती हैं:
* **तापमान –** गेहूं की खेती के लिए 10° से 25° सेल्सियस तापमान अच्छा रहता है। इसकी खेती के लिए मौसम साफ होना चाहिए। पाला, कोहरा, ओले और तेज़ व सूखी हवाएं इसकी फसल को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं।
* **वर्षा –** गेहूं की खेती के लिए 50 से 75 सेंटीमीटर तक वर्षा की ज़रूरत होती है। वर्षा धीरे-धीरे लगातार होती रहनी चाहिए। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई से भी गेहूं का उत्पादन किया जाता है।
**2. मिट्टी:** गेहूं की खेती के लिए हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। इस मिट्टी में चूने और नाइट्रोजन की मात्रा गेहूं की खेती के लिए फायदेमंद होती है। साथ ही, मिट्टी समतल और भुरभुरी होनी चाहिए। ज़्यादा उपज पाने के लिए मिट्टी में खाद, यूरिया और अमोनियम सल्फेट जैसे रासायनिक खादों का इस्तेमाल करते रहना फायदेमंद रहता है।
**3. मानवीय श्रम:** गेहूं उत्पादन के लिए ज़्यादा मानवीय श्रम की ज़रूरत होती है। खेत जोतने, बोने, निराई-गुड़ाई करने, कटाई, और गहाई जैसे कामों में पर्याप्त मज़दूरों की ज़रूरत पड़ती है। हालांकि, जिन देशों में गेहूं उत्पादन में मशीनों का उपयोग होता है, वहाँ मानवीय श्रम की कम ज़रूरत होती है। भारत में मशीनों का कम उपयोग होने के कारण गेहूं की खेती घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों में की जाती है।
**गेहूं के उपज-क्षेत्र अथवा वितरण-** उत्तर के बड़े मैदानों में, खासकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दोमट मिट्टी में गेहूं की अच्छी पैदावार होती है। देश के बाकी हिस्सों जैसे मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी गेहूं उगाया जाता है। इस तरह, उत्तरी भारत गेहूं की प्रमुख फसल है, जहाँ देश का 70% गेहूं उगाया जाता है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है, जहाँ देश का 35.5% गेहूं पैदा होता है। पंजाब दूसरा बड़ा गेहूं उत्पादक है, जो देश का 25% गेहूं पैदा करता है। मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान अन्य प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य हैं।
**गेहूं का उत्पादन–** वर्ष 1950-51 में 97 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर गेहूं की खेती की गई थी, जो बढ़कर 2004-05 में 265 लाख हेक्टेयर हो गई। इसी दौरान गेहूं का उत्पादन 64 लाख टन से बढ़कर 720 लाख टन हो गया। प्रति हेक्टेयर उपज भी 6.6 क्विंटल से बढ़कर 27.18 क्विंटल हो गई। इस तरह, इस अवधि में प्रति हेक्टेयर उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ गया। भारत में गेहूं उत्पादन में वृद्धि एक सफल क्रांति है, जिसके परिणामस्वरूप 2011-12 (अनुमानित) में 902.32 टन हो गया। दुनिया के गेहूं उत्पादन में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और कनाडा के बाद भारत पांचवें स्थान पर है। भारत में हुई हरित क्रांति को वास्तव में गेहूं क्रांति ही कहा जाना चाहिए।
In simple words: गेहूं भारत की एक मुख्य फसल है, जिसके लिए ठंडा-गर्म मौसम, मध्यम वर्षा और दोमट मिट्टी अच्छी होती है। उत्तरी भारत, खासकर उत्तर प्रदेश और पंजाब, इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। हरित क्रांति के कारण भारत गेहूं उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है।
🎯 Exam Tip: गेहूं की खेती के लिए भौगोलिक दशाओं को बताते समय, तापमान, वर्षा, मिट्टी और मानवीय श्रम के आदर्श स्तरों को याद रखें।
प्रश्न 7. चावल की फसल का विवरण निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए
(क) अनुकूल भौगोलिक दशाएँ तथा (ख) प्रमुख उत्पादक राज्य और वितरण ।
या
भारत की खाद्यान्न फसलें कौन-सी हैं? चावल उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियों, उपज क्षेत्रों तथा उनके उत्पादन के बारे में बताइए ।
Answer: भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसलें गेहूं, चावल (धान), मक्का, ज्वार, बाजरा, जौ, रागी आदि हैं। इनमें गेहूं और चावल मुख्य और महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसलें हैं।
चावल गेहूं के बाद भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल और प्रमुख खाद्यान्न है। देश की कुल कृषि भूमि के 25% हिस्से पर चावल उगाया जाता है और यह दुनिया का 21% चावल पैदा करता है, जिससे भारत चीन के बाद चावल उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। हालांकि, यहाँ चीन से ज़्यादा ज़मीन पर चावल बोया जाता है, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होने के कारण यहाँ वार्षिक उत्पादन चीन से कम है।
**भौगोलिक परिस्थितियाँ -** चावल उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियाँ इस प्रकार हैं:
**1. जलवायु:** चावल गर्म और नम जलवायु की फसल है। मानसूनी जलवायु इसकी खेती के लिए सबसे अच्छी है। चावल की खेती के लिए ये जलवायु दशाएं ज़रूरी हैं:
* **तापमान –** चावल की खेती के लिए आमतौर पर 20° से 27° सेल्सियस तापमान ज़रूरी होता है।
* **वर्षा –** चावल की खेती के लिए ज़्यादा नमी की ज़रूरत होती है, क्योंकि इसके पौधे पूरी तरह पानी से भरे खेतों में लगाए जाते हैं। इसके लिए 100 से 200 सेंटीमीटर वर्षा ज़रूरी होती है। कम वर्षा वाले इलाकों में सिंचाई की ज़रूरत पड़ती है।
**2. मिट्टी:** चावल की खेती के लिए समतल और उपजाऊ डेल्टाई (नदियों के मुहाने वाली) और जलोढ़ मिट्टी सबसे अच्छी होती है। कांप वाली मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। नदियों के डेल्टा, बाढ़ के मैदान और सागरतटीय क्षेत्र चावल की खेती के लिए सबसे उपयुक्त रहते हैं। चावल की ज़्यादा उपज लेने के लिए मिट्टी में रासायनिक खादों का प्रयोग फायदेमंद रहता है।
**3. मानवीय श्रम:** चावल उत्पादन के लिए बड़ी संख्या में सस्ते मज़दूरों की ज़रूरत पड़ती है, क्योंकि फसलों की पौध लगाने, जुताई, बुवाई, कटाई जैसे कामों में मानवीय श्रम का ज़्यादा महत्व होता है। खेतों में फसल उगने के दौरान नमी बनी रहने के कारण मशीनों का उपयोग नहीं हो पाता है; इसलिए इसकी खेती में श्रम का बहुत ज़्यादा महत्व है। यही कारण है कि दुनिया का 95% चावल दक्षिण-पूर्वी एशिया के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ही पैदा होता है।
**उपज (उत्पादन) के क्षेत्र तथा वितरण –** चावल की खेती (उत्पादन) प्रायद्वीप के तटवर्ती भागों, पूर्वी-गंगा के मैदान, ब्रह्मपुत्र घाटी, हिमालय की तलहटी, पूर्वी मध्य प्रदेश और पंजाब में ज़्यादा होती है। महानदी डेल्टा (ओडिशा), गोदावरी और कृष्णा डेल्टा (आंध्र प्रदेश) और कावेरी डेल्टा (तमिलनाडु) में चावल की दो या तीन फसलें प्रति वर्ष प्राप्त की जाती हैं। नई तकनीक, उन्नत किस्म के बीज, सिंचाई की सुविधाएँ और खादों के ज़्यादा उपयोग से अब पंजाब चावल का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है।
In simple words: चावल भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल है, जिसके लिए गर्म-नम जलवायु, ज़्यादा वर्षा और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी ज़रूरी है। यह मुख्य रूप से दक्षिणी और पूर्वी भारत के डेल्टा क्षेत्रों में उगाया जाता है, लेकिन अब पंजाब भी एक बड़ा उत्पादक बन गया है।
🎯 Exam Tip: चावल की खेती की भौगोलिक दशाओं का वर्णन करते समय, 'गर्म-नम जलवायु', 'ज़्यादा वर्षा' और 'समतल, जलोढ़ मिट्टी' जैसे मुख्य शब्दों पर विशेष ध्यान दें।
प्रश्न 8. गन्ने की कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं, प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों तथा उत्पादन का वर्णन कीजिए। [2018]
या
गन्ने की उपज के लिए आवश्यक तापमान तथा वर्षा की दशाओं का वर्णन कीजिए। गन्ना उत्पादन के दो मुख्य राज्यों के नाम बताइए ।
या
भारत में गन्ना उत्पादन क्षेत्रों का वर्णन कीजिए तथा गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त दो भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए ।
या
गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त तापक्रम, वर्षा एवं मिट्टी का उल्लेख कीजिए। [2013]
Answer: गन्ने के उत्पादन के लिए ये भौगोलिक दशाएं ज़रूरी हैं:
**1. जलवायु:** गन्ना गर्म और नम जलवायु की फसल है। गन्ने की खेती के लिए ये जलवायु दशाएं उपयुक्त रहती हैं:
* **तापमान -** गर्म कटिबंधीय पौधा होने के कारण गन्ने की फसल के लिए ज़्यादा तापमान; यानी लगभग 20° से 35° सेल्सियस की ज़रूरत होती है। गन्ने की फसल को तैयार होने में लगभग एक साल लगता है। कोहरा और पाला इसकी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
* **वर्षा –** गन्ने की फसल के लिए ज़्यादा नमी की ज़रूरत होती है। इसलिए गन्ना 100 से 150 सेंटीमीटर वर्षा वाले इलाकों में उगाया जाता है। इसके लिए वर्षा साल भर धीमी गति से होती रहे तो अच्छा है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई से गन्ना उगाया जाता है। इसी कारण नहरों और नलकूपों से सिंचित क्षेत्र गन्ने के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र बन गए हैं।
**2. मिट्टी:** गन्ने की खेती के लिए उपजाऊ दोमट और नम व चिकनी मिट्टी अच्छी रहती है। दक्षिणी भारत की लावायुक्त मिट्टी में गन्ना अच्छा पैदा होता है। चूना और फॉस्फोरस वाली मिट्टी गन्ने की खेती के लिए खास तौर पर उपयोगी होती है। गन्ना मिट्टी से पोषक तत्वों को ज़्यादा सोखता है; इसलिए इसके लिए रासायनिक खादों का लगातार इस्तेमाल करते रहना चाहिए।
**3. मानवीय श्रम:** गन्ने के खेत तैयार करने, बोने, निराई-गुड़ाई करने और उसे काटकर मिलों तक पहुंचाने के लिए कुशल और सस्ते मज़दूरों की ज़रूरत होती है। इसी कारण गन्ना घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ही उगाया जाता है।
**प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र –** भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में गन्ना उगाया जाता है, लेकिन उत्तरी भारत गन्ना उगाने का मुख्य क्षेत्र है। देश का तीन-चौथाई से ज़्यादा गन्ना उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में उगाया जाता है। अन्य प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में आंध्र प्रदेश, बिहार और झारखंड मुख्य हैं। पंजाब, हरियाणा, गुजरात, ओडिशा और राजस्थान राज्यों के क्षेत्रों में भी गन्ना उगाया जाता है। उत्तर प्रदेश देश का 50%, पंजाब और हरियाणा 15% और बिहार व झारखंड 12% गन्ना पैदा करते हैं। पिछले दो दशकों से दक्षिणी राज्यों में गन्ना उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है।
**उत्पादन –** गन्ना भारत की एक प्रमुख औद्योगिक फसल है। यहाँ गन्ने का क्षेत्रफल और उत्पादन दुनिया में सबसे ज़्यादा रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों से ब्राजील गन्ना उत्पादन में पहले स्थान पर आ गया है। दुनिया के कुल गन्ने का 20% क्षेत्रफल भारत में है। यहाँ दुनिया का 22.4% गन्ना पैदा होता है। भारतीय किसानों के लिए गन्ना एक नकदी फसल है। वर्ष 2000-01 में भारत में 4.2 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र पर गन्ने की खेती की गई थी और 299.2 मिलियन टन गन्ना पैदा हुआ था। 2009-10 में भी भारत में 4.2 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र पर गन्ने की खेती की गई और 19.0 मिलियन टन गन्ना पैदा हुआ। भारत में गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज 71 टन तक पहुंच गई है।
In simple words: गन्ना एक गर्म-नम फसल है जिसके लिए 20-35°C तापमान, 100-150 सेमी वर्षा और उपजाऊ दोमट मिट्टी ज़रूरी है। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य हैं।
🎯 Exam Tip: गन्ने की खेती की भौगोलिक आवश्यकताओं को याद करते समय, उष्णकटिबंधीय प्रकृति, ज़्यादा तापमान, अच्छी वर्षा वितरण, और उपजाऊ मिट्टी पर ज़ोर दें।
प्रश्न 9. कपास की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा भारत में उसके उत्पादन के क्षेत्रों पर प्रकाश डालिए। [2009]
या
भारत में कपास किन राज्यों में पैदा होती है? इसकी खेती के लिए दो उपयुक्त भौगोलिक दशाएँ बताइट ।
या
भारत में कपास की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी एवं वर्षा की दशाओं का वर्णन कीजिए तथा तीन राज्यों में कपास के उत्पादन का विवरण दीजिए।
या
कपास की खेती के लिए उपयुक्त तापक्रम, वर्षा एवं मिट्टी का उल्लेख कीजिए। [2013]
Answer: कपास की खेती के लिए ये भौगोलिक दशाएं ज़रूरी हैं:
**1. तापमान:** कपास के पौधे के लिए आमतौर पर 20° से 35° सेल्सियस तापमान की ज़रूरत होती है। पाला और ओले इसकी फसल के लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए इसकी खेती के लिए 200 दिन पाले रहित मौसम ज़रूरी होता है। कपास की बॉंडियां (फल) खिलने के समय साफ आकाश और तेज़ व चमकदार धूप होनी चाहिए, जिससे रेशे में पूरी चमक आ सके।
**2. वर्षा:** कपास की खेती के लिए आमतौर पर 50 से 100 सेंटीमीटर वर्षा पर्याप्त होती है, लेकिन यह वर्षा कुछ अंतराल पर होनी चाहिए। ज़्यादा वर्षा हानिकारक होती है, जबकि 50 सेंटीमीटर से कम वर्षा वाले इलाकों में सिंचाई की मदद से कपास का उत्पादन किया जाता है।
**3. मिट्टी:** कपास के उत्पादन के लिए नमी वाली चिकनी और गहरी काली मिट्टी सबसे ज़्यादा फायदेमंद होती है, जिससे पौधों की जड़ों में पानी रुकता नहीं और उन्हें पर्याप्त नमी मिलती रहती है। इस लिहाज़ से दक्षिणी भारत की काली मिट्टी कपास के लिए बहुत उपयोगी है।
**4. मानवीय श्रम:** कपास की खेती के लिए बोने, निराई-गुड़ाई करने और बॉंडियां चुनने के लिए सस्ते और पर्याप्त मज़दूरों की ज़रूरत होती है। कपास चुनने के लिए ज़्यादातर महिलाएं मज़दूर के तौर पर उपयुक्त रहती हैं।
**उत्पादक क्षेत्र:** गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश राज्य मिलकर देश की 65% कपास का उत्पादन करते हैं। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पंजाब और राजस्थान अन्य प्रमुख कपास उत्पादक राज्य हैं। देश की कृषि योग्य भूमि का लगभग 6% हिस्सा कपास उत्पादन में लगा है। पिछले 50 सालों में कपास उत्पादन क्षेत्र में लगभग डेढ़ गुना वृद्धि हुई है।
कपास के उत्पादन के लिए लावा से बनी काली मिट्टी सबसे अच्छी होती है; इसलिए भारत में कपास का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य महाराष्ट्र है, जो देश की लगभग एक-चौथाई (25%) कपास पैदा करता है। गुजरात के लावा से बनी मिट्टी के क्षेत्र में भी कपास की अच्छी पैदावार होती है। यह राज्य देश की 15% कपास पैदा करता है। पिछले कुछ सालों में पंजाब में कपास की खेती का बहुत विकास हुआ है। यह राज्य देश की 14% से ज़्यादा कपास पैदा करता है। आंध्र प्रदेश लगभग 13% कपास उगाता है। हरियाणा (10%), राजस्थान (8%), कर्नाटक (7%) और तमिलनाडु (4%) अन्य महत्वपूर्ण कपास उत्पादक राज्य हैं।
In simple words: कपास के लिए 20-35°C तापमान, 50-100 सेमी वर्षा और काली मिट्टी सबसे अच्छी है। महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्य हैं।
🎯 Exam Tip: कपास की खेती की भौगोलिक आवश्यकताओं को याद करते समय, 'गर्म तापमान', 'मध्यम वर्षा' और 'काली मिट्टी' जैसे प्रमुख तत्वों पर ध्यान दें।
प्रश्न 10. भारत में कहवा की खेती के लिए भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए। कहवा उत्पादक क्षेत्रों का भी वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में कहवा (कॉफी) की खेती विधिवत रूप से 1830 में शुरू हुई थी। इसका पहला बाग मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) में लगाया गया था।
**आवश्यक भौगोलिक दशाएँ -** कहवा की खेती के लिए ये भौगोलिक दशाएं ज़रूरी होती हैं:
**1. तापमान:** कहवा के उत्पादन के लिए औसत वार्षिक तापमान 15° से 18° सेल्सियस ज़रूरी होता है। कहवा का पौधा ज़्यादा धूप सहन नहीं कर पाता। इसी कारण इसे छायादार पेड़ों के साथ उगाया जाता है।
**2. वर्षा:** कहवा के लिए 150 से 200 सेंटीमीटर वर्षा पर्याप्त रहती है। जिन क्षेत्रों में वर्षा का वितरण समान होता है, वहाँ 300 सेंटीमीटर वर्षा भी पर्याप्त रहती है। आमतौर पर इसकी खेती 900 मीटर से 1,800 मीटर की ऊंचाई वाले भागों में छायादार पेड़ों के साथ की जाती है। इसके लिए जंगलों को साफ करके बनाई गई ज़मीन ज़्यादा उपयुक्त रहती है, क्योंकि इसमें उपजाऊ तत्व ज़्यादा होते हैं।
**3. मिट्टी:** कहवा के लिए दोमट और ज्वालामुखी के फटने से बनी लावा से निर्मित मिट्टी ज़्यादा उपयुक्त रहती है, जिसमें जीवांश और लोहांश मिले होते हैं। कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्यों की लैटेराइट मिट्टियों में कहवे का उत्पादन किया जाता है।
**4. मानवीय श्रम:** कहवे के पौधों को लगाने, निराई-गुड़ाई करने, बीज तोड़ने, सुखाने, और पीसने जैसे कामों के लिए पर्याप्त संख्या में सस्ते और कुशल मज़दूरों की ज़रूरत पड़ती है। इन कामों के लिए बच्चे और महिलाएं मज़दूर के तौर पर ज़्यादा उपयुक्त रहती हैं।
**उत्पादक क्षेत्र –** भारत के प्रमुख कहवा उत्पादक राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल हैं। आंध्र प्रदेश में भी पिछले कुछ सालों में कहवे के बागान लगाए गए हैं।
* **कर्नाटक:** देश में सबसे पहले कहवा उत्पादन इसी राज्य में हुआ था। कुर्ग, चिकमंगलूर, हसन, शिमोगा, और दक्षिणी कर्नाटक प्रमुख उत्पादक ज़िले हैं। कर्नाटक का देश के कुल कहवा उत्पादन में पहला स्थान है। देश के कुल उत्पादन का 56% हिस्सा यहीं पैदा होता है।
* **केरल:** यहाँ वायनाद, इडुकी, कोट्टायम, अर्नाकुलम, पालघाट, क्विलोन, और अलप्पी प्रमुख कहवा उत्पादक ज़िले हैं।
* **तमिलनाडु:** यहाँ मदुरै, तिरुनेलवेली, नीलगिरि, कोयंबटूर, और सलेम प्रमुख कहवा उत्पादक ज़िले हैं।
* **आंध्र प्रदेश:** यहाँ का विशाखापत्तनम ज़िला मुख्य कहवा उत्पादक स्थान है।
In simple words: कहवा की खेती के लिए 15-18°C तापमान, 150-200 सेमी वर्षा, और दोमट मिट्टी ज़रूरी है। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
🎯 Exam Tip: कहवा की खेती की भौगोलिक दशाओं में तापमान, वर्षा, मिट्टी और मानवीय श्रम के साथ-साथ, 'छायादार वृक्षों' और 'पहाड़ी ढलानों' का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 11. भारत में जूट की कृषि के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन करते हुए उसके उत्पादन के क्षेत्रों पर प्रकाश डालिए । [2014]
या
भारत में पटसन उद्योग के विकास के लिए उत्तरदायी दो कारकों का उल्लेख कीजिए । [2010]
या
भारत में जूट उद्योग का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए- [2009, 10]
(i) स्थानीयकरण के कारक, (ii) प्रमुख केन्द्र ।
Answer: जूट एक प्रमुख व्यापारिक और विदेशी मुद्रा कमाने वाली फसल है। भारत में जूट की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाएं इस प्रकार हैं:
**1. तापमान:** जूट उष्ण कटिबंधीय, गर्म और नम जलवायु की फसल है। इसके पौधों के लिए ज़्यादा तापमान की ज़रूरत होती है। इसके लिए आमतौर पर 25° से 35° सेल्सियस तापमान ज़रूरी होता है। भारत की जलवायु ऐसी ही दशाएं बनाती है।
**2. वर्षा:** जूट की खेती के लिए ज़्यादा तापमान के साथ-साथ ज़्यादा नमी की भी ज़रूरत होती है। इसकी खेती के लिए आमतौर पर 100 से 200 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा ज़रूरी होती है। जूट के पौधों के बढ़ने के समय वर्षा समान गति से लगातार होती रहनी चाहिए। वर्षा की ये दशाएं भारत में उपलब्ध हैं।
**3. मिट्टी:** जूट की खेती के लिए उपजाऊ कांप या चिकनी मिट्टी अच्छी होती है। जूट का पौधा मिट्टी से ज़्यादा पोषक तत्व लेता है; इसलिए जूट की खेती नदियों के डेल्टाई इलाकों में की जाती है। भारत में, गंगा और ब्रह्मपुत्र के डेल्टाई इलाके इसकी खेती के लिए बहुत उपयुक्त हैं। यहाँ नदियों की बाढ़ हर साल नई उपजाऊ कांप मिट्टी जमा करती रहती है। इस मिट्टी में नमी की मात्रा भी ज़्यादा होती है।
**4. श्रमिक:** भारत एक बड़ी आबादी वाला कृषि प्रधान देश है, जहाँ जूट बोने, गलाने, रेशा अलग करने, धोने और सुखाने के लिए सस्ते और पर्याप्त मज़दूर आसानी से मिल जाते हैं। यही कारण है कि जूट की खेती घनी आबादी वाले क्षेत्रों जैसे पश्चिम बंगाल और बिहार में की जाती है।
**उत्पादक क्षेत्र एवं उत्पादन –** भारत में जूट का उत्पादक क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। भारत के जूट उत्पादक क्षेत्र वर्ष 1950-51 में 5.7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1999-2000 में 8.5 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था। भारत में जूट उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं:
**1. पश्चिम बंगाल:** जूट उत्पादन में पश्चिम बंगाल राज्य भारत में पहले स्थान पर है। यहाँ बर्धमान, हुगली, हावड़ा, मुर्शिदाबाद, मिदनापुर, कूच-बिहार, चौबीस परगना, मालदा, नादिया, और बांकुड़ा जैसे ज़िलों में जूट उगाया जाता है। यहाँ भारत का कुल 60% जूट पैदा होता है।
**2. बिहार:** भारत का दूसरा प्रमुख जूट उत्पादक राज्य बिहार है। यहाँ चंपारण, दरभंगा, पूर्णिया, सारण, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और संथाल परगना जैसे ज़िलों में जूट की खेती की जाती है। यह देश के कुल उत्पादन का 15% जूट पैदा करता है।
**3. असम:** असम में ब्रह्मपुत्र नदी की निचली घाटी में जूट की खेती की जाती है। नौगांव, गोलपाड़ा, कछार, और कामरूप जैसे ज़िलों में मुख्य रूप से जूट उगाया जाता है। यहाँ कृषि योग्य भूमि के 95% हिस्से पर देश का लगभग 10% जूट पैदा होता है।
**अन्य जूट उत्पादक राज्य:** ओडिशा, मेघालय, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश हैं। इन सभी राज्यों में जूट के स्थानीयकरण के प्रमुख कारण ऊपर बताई गई भौगोलिक दशाएं ही हैं। वर्तमान समय में भारत दुनिया में 40% जूट का उत्पादन कर पहले स्थान पर है। भारत में जूट का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1,907 किलोग्राम है। वर्ष 2004-05 में 96 लाख गांठ (1 गांठ = 180 किलोग्राम) और 2011-12 में 110.00 लाख गांठ (1 गांठ = 180 किलोग्राम) जूट का उत्पादन किया गया था।
In simple words: जूट एक गर्म, नम जलवायु और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी वाली फसल है, जिसे उगने के लिए बहुत सारे सस्ते मज़दूर चाहिए। पश्चिम बंगाल और बिहार भारत के सबसे बड़े जूट उत्पादक राज्य हैं।
🎯 Exam Tip: जूट की खेती के लिए भौगोलिक दशाओं को बताते समय, 'उच्च तापमान', 'अधिक वर्षा', 'उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी' और 'पर्याप्त मानवीय श्रम' पर विशेष ज़ोर दें।
प्रश्न 12. भारतीय कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।
Answer: कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। आज भी भारत की दो-तिहाई जनसंख्या अपनी रोज़ी-रोटी के लिए खेती पर निर्भर करती है। भारतीय कृषि में ज़्यादातर खाद्यान्न फसलें उगाई जाती हैं और अधिकांश उत्पादन घर के इस्तेमाल के लिए होता है। अब कई कोशिशों के बाद भारतीय कृषि धीरे-धीरे घर की ज़रूरतें पूरी करने से आगे बढ़कर व्यावसायिक रूप ले रही है। भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. **छोटे और बिखरे खेत:** भारत में कृषि जोतों का आकार बहुत छोटा है। लगभग 51 प्रतिशत खेत एक हेक्टेयर से भी कम के हैं। फिर ये खेत एक-दूसरे से दूर-दूर बिखरे हुए हैं। छोटे खेतों पर वैज्ञानिक तरीके से खेती करना संभव नहीं होता और न ही सिंचाई की सही व्यवस्था हो पाती है।
2. **वर्षा पर निर्भरता:** आज भी भारतीय कृषि का लगभग 80% हिस्सा वर्षा पर निर्भर करता है। वर्षा की अनिश्चितता और अनियमितता के कारण भारतीय कृषि को 'मानसून का जुआ' कहते हैं। देश के कुछ हिस्सों में ज़्यादा बारिश और बाढ़ के कारण फसलें खराब हो जाती हैं।
3. **ज़मीन पर ज़्यादा जनसंख्या का दबाव:** जनसंख्या में तेज़ी से वृद्धि के कारण ज़मीन पर जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ रहा है। परिणामस्वरूप, प्रति व्यक्ति उपलब्ध ज़मीन कम हो गई है, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी हुई बेरोज़गारी और कम रोज़गार की समस्याएं बढ़ी हैं, और किसानों की गरीबी व कर्ज़ भी बढ़े हैं।
4. **सिंचाई सुविधाओं की कमी:** भारत में केवल 33.14% क्षेत्र ही सिंचित है। असिंचित क्षेत्रों में किसान अपनी ज़मीन पर एक ही फसल उगा पाते हैं, जिस कारण भारतीय कृषि की उत्पादकता कम है।
5. **पुराने कृषि-यंत्र:** पश्चिमी देशों में खेती में आधुनिक यंत्र इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि भारत के कई क्षेत्रों में आज भी हल, पटेला, दरांती, और कस्सी जैसे पुराने यंत्रों से खेती की जाती है, जिस कारण भारतीय कृषि की उत्पादकता कम है।
6. **खराब भूमि-व्यवस्था:** भारत में कई सालों तक लगभग 40% ज़मीन ज़मींदारों और जागीरदारों जैसे बिचौलियों के पास रही। किसान इन बिचौलियों के किरायेदार होते थे। आज़ादी के बाद इन बिचौलियों को खत्म करने के बावजूद छोटे किसानों की हालत में खास सुधार नहीं हो पाया है। आज भी ऐसे कई किसान हैं जो दूसरों की ज़मीन पर खेती करते हैं।
7. **किसानों की अशिक्षा और गरीबी:** गरीबी के कारण देश के किसान आधुनिक यंत्र, अच्छे बीज, खाद आदि खरीदने और उनका उपयोग करने में असमर्थ हैं। शिक्षा की कमी के कारण वे आधुनिक खेती के तरीके भी अपना नहीं पाते। भारत में ज़्यादा उपज देने वाले अच्छे बीजों की भी कमी है। वित्तीय सुविधाओं की कमी के कारण किसान अपना समय, शक्ति और पैसा खेती की उन्नति में नहीं लगा पाते।
8. **फसलों के रोग:** फसलों से संबंधित अलग-अलग बीमारियों की सही रोकथाम न हो पाने के कारण भी भारतीय कृषि की उत्पादकता कम है। हर साल कीड़े और जंगली पशु-पक्षी करोड़ों रुपये की फसलों को नष्ट कर देते हैं।
9. **अन्य कारण:** मिट्टी का कटाव, जलभराव, नाइट्रोजन की कमी आदि के कारण भी भारतीय कृषि की उत्पादकता कम है।
**कृषि-उत्पादन बढ़ाने के उपाय -**
भारत में कृषि-उत्पादन बढ़ाने के लिए ये उपाय किए जाने चाहिए:
1. **जनसंख्या में तेज़ी से वृद्धि पर नियंत्रण:** ज़मीन पर जनसंख्या के ज़्यादा दबाव को कम करने और कृषि जोतों के उपविभाजन और विखंडन को रोकने के लिए देश की जनसंख्या में तेज़ी से हो रही वृद्धि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना ज़रूरी है।
2. **सिंचाई सुविधाओं का विकास:** गांवों में कुएं, ट्यूबवेल, नहरों आदि की सही व्यवस्था करके सिंचाई सुविधाओं का विकास और विस्तार किया जा सकता है।
3. **उन्नत बीजों और खाद की सही व्यवस्था:** सरकारी बीज-गोदामों की स्थापना करके किसानों को उचित मूल्य पर अच्छे बीज दिए जाने चाहिए। रासायनिक खाद के उत्पादन में वृद्धि करके उसे किसानों को उचित मूल्य पर गांवों में ही उपलब्ध कराना चाहिए।
4. **फसलों की रक्षा:** जंगली पशुओं, कीटाणुओं और रोगों से कृषि-उपजों का बचाव किया जाना चाहिए। बचाव के उपायों का गांवों में प्रदर्शन और प्रचार होना चाहिए और कीटनाशक दवाएं उचित मूल्य पर गांवों में उपलब्ध करानी चाहिए।
5. **भूमि संरक्षण:** पेड़ लगाना, बांध बनाना, मेड़बंदी आदि उपायों द्वारा मिट्टी का संरक्षण किया जाना चाहिए और किसानों को इसके लाभ-हानि के बारे में बताना चाहिए।
6. **आधुनिक कृषि-यंत्रों का प्रबंधन:** किसानों को खेती के पुराने औज़ारों के नुकसान बताकर आधुनिक कृषि-यंत्रों का उपयोग समझाना चाहिए और इनको उचित कीमतों पर गांवों में उपलब्ध कराना चाहिए।
7. **छोटे और बिखरे खेतों का एकीकरण:** चकबंदी की सहायता से छोटे और बिखरे खेतों को एक करके उन्हें आर्थिक जोतों में बदला जा सकता है। सहकारी खेती को अपनाकर भी खेतों के आकार को बड़ा करके बड़े पैमाने पर खेती की जा सकती है और कृषि उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।
8. **साख-सुविधाओं का विस्तार:** किसानों को कम ब्याज पर अच्छे बीज, रासायनिक खाद, और आधुनिक यंत्र आदि खरीदने के लिए पर्याप्त कर्ज़ मिलना चाहिए। इसके लिए सहकारी साख समितियों का विकास करना चाहिए। भूमि विकास बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या बढ़ानी चाहिए और प्राकृतिक आपदाओं के समय सरकार द्वारा किसानों को ज़्यादा सहायता देनी चाहिए।
9. **शिक्षा का प्रसार:** किसानों में शिक्षा का प्रसार करके कृषि से संबंधित अलग-अलग समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। शिक्षा के प्रसार से किसानों को आधुनिक कृषि-यंत्रों और नई उत्पादन-विधियों का ज्ञान कराया जा सकता है।
In simple words: भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएं छोटे खेत, वर्षा पर निर्भरता, जनसंख्या का दबाव, पुरानी तकनीक और सिंचाई की कमी हैं। इसे सुधारने के लिए जनसंख्या नियंत्रण, सिंचाई का विकास, अच्छे बीज, और किसानों को शिक्षा देना ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: भारतीय कृषि की विशेषताओं और समस्याओं को एक साथ समझें, क्योंकि ये अक्सर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। सुधार के उपायों को समस्याओं के समाधान के रूप में प्रस्तुत करें।
प्रश्न 13. स्वतन्त्रता के बाद कृषि की उन्नति के लिए किये गये सरकार के प्रयासों का वर्णन कीजिए ।
या
भारतीय कृषि की दशा सुधारने के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा किये गये किन्हीं पाँच मुख्य उपायों का उल्लेख कीजिए ।
या
भारत में कृषि के विकास के लिए सरकार द्वारा किये गये कोई दो कार्य लिखिए।
Answer: आज़ादी के बाद सरकार ने भारतीय कृषि को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें से मुख्य उपाय इस प्रकार हैं:
**1. ज़मींदारी प्रथा का अंत:** ज़मींदारी प्रथा भारतीय किसानों के लिए एक बड़ी समस्या थी। भारत सरकार ने इस व्यवस्था को खत्म करके ज़मीन के सभी अधिकार असली किसानों को दे दिए। खेती वाली ज़मीन के सही वितरण को पक्का करने के लिए 'भूमि संपत्ति सीमा कानून' भी लागू किया गया।
**2. चकबंदी:** संपत्ति उत्तराधिकार कानून के कारण खेती वाली ज़मीन के बंटवारे से किसानों के खेत छोटे और बिखरे हुए हो जाते थे, जो आर्थिक रूप से किसी काम के नहीं होते थे। इसलिए सरकार ने ऐसे बिखरे खेतों को फिर से इकट्ठा करने के लिए चकबंदी व्यवस्था लागू की और किसानों में उन्हें बांट दिया।
**3. सिंचाई सुविधाओं का विकास:** भारतीय कृषि को 'मानसून का जुआ' कहा जाता है। मानसून के अनियमित स्वभाव से किसानों को बचाने के लिए सरकार ने कई सिंचाई परियोजनाओं का विकास किया है।
**4. उन्नत बीजों का वितरण:** सरकार ने ज़्यादा उपज देने वाली उन्नत किस्म के बीजों का विकास करने के लिए कई कृषि विश्वविद्यालय, शोध संस्थान और प्रदर्शन फार्म स्थापित किए हैं।
**5. पौध संरक्षण के लिए कीट-रोगनाशकों का प्रयोग:** कई तरह के कृषि-रोगों, कीटों और टिड्डी दलों को रोकने के लिए किसानों में दवाएं और कीटनाशक बांटने की व्यवस्था की गई है।
**6. रासायनिक उर्वरकों का वितरण:** सरकार ने रासायनिक खादों के उत्पादन के लिए कई कारखाने लगाए हैं। इन खादों को किसानों को सस्ते दाम पर उपलब्ध कराया जाता है।
**7. कृषि का आधुनिकीकरण:** कृषि को आधुनिक बनाने के लिए नए उपकरण और यंत्र विकसित किए गए हैं। बड़े (अमीर) किसान इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, कई तरह की तकनीकें जैसे सूखी खेती, बहुफसली खेती, अंतर-फसल खेती, फसलों के हेर-फेर आदि विकसित की गई हैं। इससे कृषि की उत्पादकता और उर्वरता में वृद्धि हुई है।
**8. सहकारी सोसायटी और बैंकों का विकास:** सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कई उद्देश्य वाली सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना की है, जिससे किसानों का कल्याण हो सके और उन्हें वित्तीय सहायता मिल सके।
**9. फसल बीमा योजनाएं:** किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कई तरह की फसल बीमा योजनाएं शुरू की गई हैं।
**10. समर्थन मूल्य:** किसानों को कर्ज़ देने वालों और बिचौलियों द्वारा शोषण से बचाने के लिए कृषि मूल्य आयोग हर साल अलग-अलग फसलों के लिए समर्थन मूल्य घोषित करता है। भारतीय खाद्य निगम किसानों से सीधे खाद्यान्न खरीदता है।
हालांकि, भारतीय कृषि की हालत सुधारने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने कई कोशिशें की हैं, फिर भी ये सभी कोशिशें इतनी मददगार नहीं रहीं कि भारतीय कृषि की स्थिति में पर्याप्त सुधार हो सके। उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी के स्तर को पाने के लिए इसमें और सुधार किए जाने चाहिए।
In simple words: आज़ादी के बाद सरकार ने ज़मींदारी प्रथा खत्म की, चकबंदी लागू की, सिंचाई बढ़ाई, अच्छे बीज और खाद दिए, और किसानों को कर्ज़ और बीमा सुविधाएं दीं। इससे खेती में सुधार आया है।
🎯 Exam Tip: सरकार के प्रयासों को याद करते समय, 'ज़मींदारी उन्मूलन', 'चकबंदी', 'सिंचाई विस्तार', 'उन्नत बीज' और 'समर्थन मूल्य' जैसे मुख्य उपायों पर ध्यान दें।
प्रश्न 14. स्वतन्त्रता के पश्चात् प्रमुख फसलों के उत्पादन और प्रति हेक्टेयर उपज में हुई प्रगति का विवरण दीजिए।
या
क्या भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है ? सप्रमाण अपने कथन की पुष्टि कीजिए ।
Answer: 1947 में आज़ादी के समय भारत की कृषि बहुत पिछड़ी हुई थी। परिणामस्वरूप, देश की खाद्यान्न ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हमें कई सालों तक करोड़ों रुपये के अनाज का विदेशों से आयात करना पड़ा। देश की खाद्य समस्या को देखते हुए भारत सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं के ज़रिए देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े और गंभीर प्रयास किए, जिसके फलस्वरूप 1967-68 में हरित क्रांति शुरू हुई। इस क्रांति के कारण देश के कृषि उत्पादन में असाधारण वृद्धि हुई और अनाजों के आयात में कमी आई। हालांकि, 1975 में फिर से 74 लाख टन अनाज का आयात करना पड़ा। 1978 से 1980 तक अनाज का आयात नहीं किया गया। 1981-82 में देश को फिर अनाज का आयात करना पड़ा। वर्तमान समय में भारत खाद्यान्नों के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है। ज़्यादा उपज देने वाले बीज, खाद और उर्वरकों का प्रयोग, सिंचाई सुविधाओं में विस्तार और कृषि के मशीनीकरण ने उत्पादों की मात्राओं में बहुत वृद्धि की है। इस बात की पुष्टि के लिए प्रमुख फसलों के उत्पादन और प्रति हेक्टेयर उपज में हुई प्रगति का विवरण इस प्रकार है:
**1. चावल:** चावल उत्पादन में भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। 1960-61 में 34.1 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में 2000-01 में 44.3 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में चावल बोया गया। इस अवधि में चावल का उत्पादन 34.6 मिलियन टन से 84.9 मिलियन टन हो गया और उपज 10.13 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 19.13 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गई। देश में 2011-12 (अनुमानित) में 1034.06 टन चावल का उत्पादन हुआ था।
**2. गेहूँ:** गेहूं भारत की एक प्रमुख और महत्वपूर्ण खाद्यान्न है। यह सबसे पौष्टिक आहार माना जाता है। विश्व के गेहूं उत्पादन का 9.9% हिस्सा भारत से प्राप्त होता है। गेहूं के उत्पादन में भारत दुनिया में पांचवें स्थान पर है (चीन, अमेरिका, रूस और कनाडा के बाद)। वर्ष 2004-05 में गेहूं का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2,718 किलोग्राम था और गेहूं की खेती 26.5 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर की गई थी, जिस पर 72 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हुआ। खाद्यान्नों के उत्पादन में लगी कुल भूमि के 18.7% हिस्से पर गेहूं उगाया जाता है, जो देश की कृषि भूमि का 12.4% हिस्सा घेरता है। कुल खाद्यान्नों में गेहूं का हिस्सा लगभग 30% है। भारत में गेहूं उत्पादन में वृद्धि एक सफल क्रांति है, जिसके फलस्वरूप 2011-12 (अनुमानित) में 902.32 टन हो गया। वास्तव में हरित क्रांति ही गेहूं-क्रांति है।
**3. दलहन एवं तिलहन:** भारत दलहन का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। 1960-61 में दलहन का उत्पादन क्षेत्र लगभग 23.6 मिलियन हेक्टेयर था, जो 2000-01 में घटकर लगभग 20 मिलियन हेक्टेयर रह गया। फिर भी 2008-09 में भारत में 14.57 मिलियन टन दालों का उत्पादन हुआ था। दलहन की तरह तिलहन भी बहुत महत्वपूर्ण फसल है। यह भी हमारे भोजन का एक मुख्य अंग है। मूंगफली, तिल, सरसों और अरंडी प्रमुख तिलहन फसलें हैं। भारत में विश्व की लगभग 75% मूंगफली, 25% तिल, 20% अरंडी और 17% सरसों पैदा होती है। अलसी, राई, बिनौला, सूरजमुखी आदि अन्य तिलहन फसलें हैं। यहाँ लगभग 67 लाख हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली की खेती की जाती है। सरसों और राई की खेती लगभग 73 लाख हेक्टेयर भूमि पर की जाती है। वर्ष 1960-61 में भारत में तिलहन का कुल उत्पादन 7.0 मिलियन टन था, जो 2000-01 में बढ़कर 18.4 मिलियन टन हो गया।
**4. ज्वार, बाजरा (मोटे अनाज):** ज्वार, बाजरे और मोटे अनाजों के उत्पादन में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है। इन फसलों के खेती वाले क्षेत्रफल में कोई वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन उत्पादन में दो-तीन गुना वृद्धि हुई है।
**5. मक्का:** भारत में मक्के की खेती कुछ समय बाद शुरू हुई, लेकिन प्रति हेक्टेयर ज़्यादा उत्पादन के कारण इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। शुरुआत में जहाँ मक्के की खेती 32 लाख (3.2 मिलियन) हेक्टेयर भूमि पर की जा रही थी, वहाँ उत्पादन 20 लाख (2 मिलियन) टन था। वर्ष 2008-09 में 7.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र पर मक्के की खेती की गई, जिसमें 19.73 मिलियन टन का उत्पादन प्राप्त हुआ।
**निष्कर्ष -** ऊपर दिए गए तथ्यों से साफ है कि भारत खाद्यान्न के उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है, लेकिन देश की जनसंख्या में तेज़ी से वृद्धि के कारण विद्वानों का अनुमान है कि भारत खाद्यान्न के मामले में ज़्यादा समय तक आत्मनिर्भर नहीं रह पाएगा। इसलिए देश की आत्मनिर्भरता को बनाए रखने के लिए जनसंख्या में हो रही लगातार तेज़ी से वृद्धि को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी है।
In simple words: आज़ादी के बाद भारत ने हरित क्रांति के ज़रिए खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी तरक्की की है, जिससे चावल, गेहूं, दालें, मक्का और मोटे अनाज की पैदावार बढ़ी है। अब भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर है, पर बढ़ती जनसंख्या के लिए निरंतर प्रयासों की ज़रूरत है।
🎯 Exam Tip: खाद्यान्न उत्पादन में हुई प्रगति को बताते समय, प्रमुख फसलों के नाम और उनके उत्पादन में हुई वृद्धि के आँकड़े याद रखें, और हरित क्रांति के प्रभाव को भी शामिल करें।
Question 15. भारत में प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होने के क्या कारण हैं ? कृषि उत्पादन को बढ़ाने के उपाय लिखिए। [2010, 11]
Answer: भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसकी लगभग 72% जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। अन्य देशों की तुलना में भारत में प्रति हेक्टेयर कृषि उत्पादन बहुत कम है। इसके कई कारण हैं:
कम उत्पादन के कारण:
1. छोटे कृषि जोत: भारत में खेत छोटे होते हैं और अक्सर एक-दूसरे से दूर-दूर बिखरे होते हैं। इन छोटे खेतों पर वैज्ञानिक तरीके से खेती करना और सिंचाई की सही व्यवस्था करना मुश्किल होता है। छोटे खेत आधुनिक मशीनों के उपयोग को मुश्किल बनाते हैं।
2. वर्षा पर निर्भरता: भारतीय कृषि का लगभग 80% भाग आज भी बारिश पर निर्भर करता है। बारिश के अनिश्चित होने के कारण भारतीय कृषि को 'मानसून का जुआ' कहा जाता है। कुछ क्षेत्रों में ज्यादा बारिश और बाढ़ से फसलें खराब हो जाती हैं।
3. भूमि पर जनसंख्या का अधिक भार: जनसंख्या तेजी से बढ़ने के कारण भूमि पर लोगों का भार लगातार बढ़ा है। इससे प्रति व्यक्ति उपलब्ध भूमि कम हो गई है। ग्रामीण इलाकों में छुपी हुई बेरोजगारी और कम रोजगार की समस्याएँ बढ़ी हैं, जिससे किसानों की गरीबी और कर्ज में वृद्धि हुई है।
4. सिंचाई सुविधाओं की कमी: भारत में केवल 33.14% क्षेत्र में ही सिंचाई की सुविधा है। जहाँ सिंचाई नहीं है, वहाँ किसान केवल एक फसल उगा पाते हैं, जिससे कृषि उत्पादकता कम रहती है।
5. पुराने कृषि यंत्र: जहाँ पश्चिमी देशों में आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग होता है, वहीं भारत के कई क्षेत्रों में आज भी हल, पटेला, दराँती, कस्सी जैसे बहुत पुराने यंत्रों का उपयोग किया जाता है। इससे भारतीय कृषि की उत्पादकता कम हो जाती है।
6. खराब भूमि व्यवस्था: भारत में कई सालों तक लगभग 40% भूमि जमींदारों या बिचौलियों के पास रही। आजादी के बाद इन बिचौलियों को खत्म करने के बावजूद भी छोटे किसानों की स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है। आज भी कई किसान दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं।
7. किसानों की अशिक्षा और गरीबी: किसान गरीब होने के कारण आधुनिक यंत्र, अच्छे बीज और खाद खरीदने और उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं। शिक्षा की कमी के कारण वे नई कृषि विधियों का भी प्रयोग नहीं कर पाते। उन्हें खेती के लिए कर्ज भी आसानी से नहीं मिल पाता, जिससे वे कृषि में निवेश नहीं कर पाते।
8. फसलों के रोग: फसलों में लगने वाले रोगों की सही रोकथाम न होने के कारण भी भारतीय कृषि की उत्पादकता कम होती है। हर साल कीट और जंगली जानवर करोड़ों रुपये की फसलें नष्ट कर देते हैं।
9. अन्य कारण: मिट्टी का कटाव, जलजमाव, नाइट्रोजन की कमी जैसे कारण भी भारतीय कृषि की उत्पादकता को कम करते हैं।
कृषि-उत्पादन बढ़ाने के उपाय:
1. जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण: भूमि पर जनसंख्या के अत्यधिक दबाव को कम करने और छोटे-बिखरे खेतों को रोकने के लिए देश की बढ़ती जनसंख्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना बहुत जरूरी है।
2. सिंचाई सुविधाओं का विकास: गांवों में कुएं, ट्यूबवेल, नहरों आदि की उचित व्यवस्था करके सिंचाई सुविधाओं का विकास और विस्तार किया जाना चाहिए।
3. अच्छे बीज और खाद की उचित व्यवस्था: सरकार को बीज-गोदाम स्थापित करके किसानों को उचित मूल्य पर अच्छे बीज उपलब्ध कराने चाहिए। रासायनिक खाद का उत्पादन बढ़ाकर उसे गांवों में किसानों को उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना चाहिए।
4. फसलों की रक्षा: जंगली जानवरों, कीटों और रोगों से फसलों को बचाना चाहिए। बचाव के तरीकों का गांवों में प्रदर्शन और प्रचार होना चाहिए। कीटनाशक दवाइयाँ उचित मूल्य पर गांवों में उपलब्ध करानी चाहिए।
5. भूमि संरक्षण: वृक्षारोपण, बांध, मेड़ आदि तरीकों से भूमि का संरक्षण करना चाहिए। किसानों को इनके लाभ और हानियों के बारे में बताना चाहिए।
6. आधुनिक कृषि: किसानों को पुराने खेती के औजारों के नुकसान बताकर आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग सिखाना चाहिए। ये यंत्र गांवों में उचित कीमतों पर उपलब्ध होने चाहिए।
7. छोटे और बिखरे खेतों का एकीकरण: चकबंदी की मदद से छोटे और बिखरे खेतों को एक जगह इकट्ठा किया जा सकता है। सहकारी खेती अपनाकर भी खेतों का आकार बड़ा किया जा सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर खेती और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
8. ऋण सुविधाओं का विस्तार: किसानों को कम ब्याज पर अच्छे बीज, रासायनिक खाद और आधुनिक यंत्र खरीदने के लिए पर्याप्त कर्ज मिलना चाहिए। इसके लिए सहकारी साख समितियों, भूमि विकास बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या बढ़ानी चाहिए। प्राकृतिक आपदाओं के समय सरकार को किसानों को अधिक सहायता देनी चाहिए।
9. शिक्षा का प्रसार: किसानों में शिक्षा का प्रसार करके कृषि से संबंधित विभिन्न समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। शिक्षा के प्रसार से किसानों को आधुनिक कृषि-यंत्रों और नई उत्पादन-विधियों का ज्ञान कराया जा सकता है।
In simple words: भारत में खेती से कम पैदावार होने के कई कारण हैं, जैसे छोटे खेत, बारिश पर निर्भरता, ज्यादा लोग, कम सिंचाई और पुराने यंत्र। इसे सुधारने के लिए जनसंख्या को कंट्रोल करना, सिंचाई बढ़ाना, अच्छे बीज देना, फसलों को बचाना, जमीन का ध्यान रखना और किसानों को सिखाना जरूरी है।
🎯 Exam Tip: जब कृषि उत्पादकता के कारणों और उपायों पर प्रश्न आए, तो मुख्य समस्याओं (जैसे छोटे जोत, वर्षा निर्भरता) और उनके सीधे समाधानों (जैसे चकबंदी, सिंचाई) को स्पष्ट रूप से बताएं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. कृषि का भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या महत्त्व है ? [2010]
Answer: भारत एक कृषि प्रधान देश है और कृषि इसकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रही है, क्योंकि:
• भारत में कुल भूमि का 51% हिस्सा खेती के लायक है, जबकि दुनिया का औसत केवल 11% है।
• भारतीय जनसंख्या का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अपनी रोजी-रोटी के लिए कृषि पर निर्भर करता है।
• पशुपालन, मछली पकड़ना और वानिकी को कृषि में शामिल करने पर देश के कुल घरेलू उत्पाद का 26% हिस्सा इन्हीं से आता है।
• ज़्यादातर उद्योगों के लिए कच्चा माल कृषि से ही मिलता है, जैसे सूती कपड़े, चीनी, जूट, काजू, चाय, कॉफी आदि। सूती वस्त्र, चीनी, जूट और चाय के उत्पादन में भारत दुनिया में प्रमुख स्थान रखता है।
• कृषि उत्पादों के निर्यात से भारत को काफी विदेशी मुद्रा मिलती है। कुल निर्यात में कृषि का योगदान 18% है।
• कृषि उत्पादों पर आधारित उद्योगों में लोगों को पर्याप्त रोजगार के अवसर मिलते हैं।
इन सभी कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का बहुत अधिक महत्व है।
In simple words: भारत में ज़्यादातर लोग खेती पर निर्भर हैं, यह देश के कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा है, उद्योगों को कच्चा माल देती है और विदेशी मुद्रा कमाती है। इसलिए, कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
🎯 Exam Tip: भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के महत्व को दर्शाने के लिए रोजगार, जीडीपी में योगदान, औद्योगिक कच्चे माल और निर्यात जैसे प्रमुख बिंदुओं को याद रखें।
Question 2. कृषि व्यवसाय की समस्याओं का संक्षिप्त वर्णन करते हुए चकबन्दी के लाभों पर प्रकाश डालिए ।
Answer: कृषि व्यवसाय की कुछ मुख्य समस्याएँ हैं। जनसंख्या में तेज वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल कम हो रहा है। इस वजह से ज़्यादातर किसानों के खेत आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रहे हैं। जंगलों और चरागाहों की कमी से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के स्रोत भी कम हो गए हैं। हमारे किसान अभी भी बहुफसली खेती, मिश्रित खेती और फसलों के वैज्ञानिक हेर-फेर को पूरी तरह से नहीं अपना पाए हैं।
आर्थिक रूप से अलाभकारी खेतों की समस्या को दूर करने के लिए चकबंदी कार्यक्रम चलाया गया है। चकबंदी का मतलब है एक ही परिवार के बिखरे हुए खेतों को एक जगह इकट्ठा करना। देश में ज़्यादातर भूमि की चकबंदी हो चुकी है।
चकबंदी के निम्नलिखित लाभ हैं:
1. चकबंदी से छोटे और बिखरे खेत एक बड़े खेत में बदल जाते हैं।
2. खेत बड़े होने से मेड़ और रास्ते बनाने में कम जमीन बेकार होती है।
3. खेती करने में समय और मेहनत दोनों की बचत होती है, क्योंकि किसान को अलग-अलग जगहों पर नहीं जाना पड़ता।
4. बड़े खेतों में जुताई, बुवाई और सिंचाई करना आसान हो जाता है। ट्रैक्टरों से बड़े पैमाने पर खेती और एक ही नलकूप से सिंचाई की जा सकती है।
5. एक ही खेत की सुरक्षा करना आसान होता है।
6. आधुनिक कृषि-विधियों का प्रयोग, बड़े पैमाने पर खेती और भूमि की बचत के कारण कृषि उत्पादन बढ़ता है। उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय बढ़ती है और उनका रहन-सहन सुधरता है।
7. चकबंदी से मुकदमेबाजी कम हो जाती है, जिससे किसानों का पैसा बर्बाद होने से बचता है।
In simple words: कृषि की मुख्य समस्याएँ छोटे खेत और बारिश पर निर्भरता हैं। चकबंदी इन बिखरे खेतों को एक करती है, जिससे खेती आसान होती है, समय और पैसा बचता है, और उत्पादन बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: चकबंदी के लाभों को बताते समय, यह स्पष्ट करें कि यह कैसे खेती को अधिक कुशल और लाभदायक बनाती है।
Question 3. पशुधन को भारत के लिए क्या महत्त्व है ?
Answer: भारत में दुनिया में सबसे ज़्यादा पशुधन पाया जाता है। यहां गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़े, खच्चर, गधे, सूअर, ऊंट, याक आदि पशु पाए जाते हैं, जो कई तरह से उपयोगी हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में मवेशी पाए जाते हैं।
भारतीय किसानों के लिए पशुओं का महत्व निम्नलिखित है:
• ये कृषि कार्यों में बहुत मदद करते हैं, जैसे जुताई, बुवाई, गहाई में।
• ये यातायात और कृषि उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में भी काम आते हैं।
• गाय और भैंसों से दूध मिलता है। इनके गोबर से खाद और ईंधन बनता है।
• पशुओं की खालें, चमड़ा और ऊन जैसे उत्पाद भी मिलते हैं, जो निर्यात करके विदेशी मुद्रा कमाते हैं।
• ऊन उद्योग, जूता उद्योग जैसे कई उद्योग पशुधन पर आधारित हैं।
लगभग 1 करोड़ 80 लाख लोग पशुधन क्षेत्रों में सीधे या सहायक रूप से काम करते हैं। पशुधन क्षेत्रों और संबंधित उत्पादों से निर्यात आय लगातार बढ़ रही है।
In simple words: भारत में पशुधन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये किसानों को खेती, परिवहन और दूध जैसे उत्पाद देते हैं। ये लोगों को रोजगार भी देते हैं और देश के लिए विदेशी मुद्रा भी कमाते हैं।
🎯 Exam Tip: पशुधन के महत्व को बताते समय, उनके बहुमुखी उपयोग (कृषि, परिवहन, उत्पाद, रोजगार) पर जोर दें, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 4. 'श्वेत क्रान्ति' या 'ऑपरेशन फ्लड क्या है और इसका क्या महत्त्व है ?
Answer: 'ऑपरेशन फ्लड' या 'श्वेत क्रांति' का मतलब दूध के उत्पादन में बहुत बड़ी वृद्धि होना है। यह ग्रामीण विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
• देश में दूध और दूध से बने उत्पादों (दही, मक्खन, पनीर, घी आदि) का उत्पादन बढ़ाना।
• छोटे किसानों की आय बढ़ाना।
• देश में दूध इकट्ठा करने और बांटने की व्यवस्था करना।
• ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना।
बढ़ती जनसंख्या और शहरी आवश्यकताओं को देखते हुए दूध उत्पादन में और वृद्धि की जरूरत है। इसके लिए 'ऑपरेशन फ्लड' कार्यक्रम को भारत के हर राज्य में तेजी से चलाना जरूरी है।
'श्वेत क्रांति' के विस्तार की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:
• देश में दूध और दूध उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डेयरी विकास आवश्यक है।
• यह क्रांति छोटे और सीमांत किसानों को अतिरिक्त आय कमाने में मदद करेगी।
• पशुधन के विकास से खेतों के लिए खाद और बायोगैस मिलेगी।
• यह क्रांति ग्रामीण लोगों की गरीबी दूर करेगी और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित करेगी।
ग्रामीण विकास में इसके योगदान या महत्व निम्नलिखित हैं:
• सहकारी समितियां दूध इकट्ठा करती हैं और बेचती हैं। इससे लोगों में सहयोग की भावना बढ़ी है।
• डेयरी व्यवसाय के विकास से ग्रामीण और शहरी नागरिकों को एक-दूसरे को समझने में काफी मदद मिली है।
In simple words: श्वेत क्रांति का मतलब है दूध उत्पादन को बहुत बढ़ाना। इसका उद्देश्य दूध के उत्पाद को बढ़ाना, किसानों की कमाई बढ़ाना, दूध को अच्छे से जमा करना और ग्रामीण इलाकों का विकास करना है।
🎯 Exam Tip: 'ऑपरेशन फ्लड' के उद्देश्यों और ग्रामीण विकास में इसके योगदान को स्पष्ट रूप से बताएं, खासकर दूध उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि पर जोर दें।
Question 5. हरित क्रान्ति की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ? [2015, 16]
Answer: हरित क्रांति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
• ज़्यादा उत्पादन देने वाली फसलों का इस्तेमाल करना।
• फसलों में रासायनिक खादों का ज़्यादा उपयोग करना।
• खेती में उन्नत बीजों और वैज्ञानिक यंत्रों का इस्तेमाल करना।
• कृषि शिक्षा का प्रचार और प्रसार करना।
• कृषि अनुसंधानों की व्यवस्था करना।
• पौधों को कीटों, कृमिनाशकों और खरपतवारनाशकों से बचाने के लिए कीटनाशकों का ज़्यादा उपयोग करना।
• सघन कृषि जिला कार्यक्रम को अपनाना।
In simple words: हरित क्रांति की मुख्य बातें थीं - अच्छे बीज, रासायनिक खाद और आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करना, साथ ही खेती की जानकारी फैलाना और पौधों को रोगों से बचाना।
🎯 Exam Tip: हरित क्रांति की विशेषताओं को सूचीबद्ध करते समय, मुख्य तकनीकी बदलावों जैसे उन्नत बीज और रासायनिक उर्वरकों पर विशेष ध्यान दें।
Question 6. भारत में हरित क्रान्ति का विस्तार क्यों आवश्यक है?
Answer: भारत में हरित क्रांति के विस्तार की आवश्यकता कई कारणों से है, जिनमें मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. हमारे देश की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। हर 35 साल में यह लगभग दोगुनी हो जाती है। इस बढ़ती जनसंख्या को पूरा पोषण देने के लिए बहुत ज़्यादा भोजन की आवश्यकता होती है और यह काम केवल हरित क्रांति से ही संभव है।
2. हरित क्रांति संपन्नता का प्रतीक है, लेकिन फिलहाल यह क्रांति देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से तक ही सीमित है। देश के कई हिस्सों में कृषि की स्थिति अभी भी खराब है। इस कारण कई राज्यों का विकास असंतुलित है। पूरे देश को कृषि के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए हरित क्रांति का पूरे देश में विस्तार करना बहुत जरूरी है।
3. भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। कई उद्योग और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भी कृषि के विकास पर निर्भर करते हैं। इसलिए कृषि के विकास के लिए हरित क्रांति का विस्तार आवश्यक है।
In simple words: भारत की बढ़ती जनसंख्या को खाना खिलाने, पूरे देश को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि पर निर्भर उद्योगों को चलाने के लिए हरित क्रांति को और फैलाना बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: हरित क्रांति के विस्तार की आवश्यकता को जनसंख्या वृद्धि, क्षेत्रीय असंतुलन और कृषि के आर्थिक महत्व के संदर्भ में समझाएं।
Question 7. भारत में खनन व्यवसाय के पिछड़ेपन के क्या कारण हैं ?
Answer: भारत में खनन व्यवसाय के पिछड़ेपन के कई कारण निम्नलिखित हैं:
• भारत की ज़्यादातर खदानों में खनन के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग नहीं किया जाता। हमारे देश की कुल 3,600 खदानों में से केवल 880 खदानें ही मशीनों वाली हैं, जो देश के 85% खनिजों का उत्पादन करती हैं। बाकी 2,720 खदानों से केवल 15% उत्पादन होता है।
• भारत का 65% खनन व्यवसाय निजी हाथों में है, जिसके कारण खदानों की खुदाई व्यवस्थित तरीके से नहीं होती। इससे खनिजों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। इसी वजह से भारत सरकार ने अभ्रक और कोयले की खदानों का राष्ट्रीयकरण किया है।
• देश में अंदरूनी जलमार्गों की कमी के कारण भारी खनिजों के परिवहन पर बहुत ज़्यादा खर्च आता है।
• भारत में अभी खनिज पदार्थों का पूरा सर्वेक्षण नहीं हुआ है। हिमालय के मुश्किल क्षेत्रों में खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं।
• देश में खनिजों का पूरा उपयोग करने के साधनों की कमी है।
In simple words: भारत में खनन उद्योग पिछड़ा है क्योंकि आधुनिक मशीनें कम हैं, निजी क्षेत्रों में अव्यवस्था है, परिवहन महंगा है, सर्वेक्षण पूरा नहीं हुआ है और खनिजों के पूरे उपयोग के साधन नहीं हैं।
🎯 Exam Tip: खनन व्यवसाय के पिछड़ेपन के कारणों में तकनीकी कमी, संगठनात्मक समस्याएँ और बुनियादी ढाँचे की कमियाँ शामिल हैं।
Question 8. भारत में चाय उत्पन्न करने वाले दो प्रमुख राज्यों के नाम बताए। इसके उत्पादन के लिए उपयुक्त दो भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत में चाय का उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्य असम (53%) और पश्चिम बंगाल (22%) हैं।
चाय उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ:
1. जलवायु: चाय उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु की फसल है। इसके लिए 25° से 30° सेल्सियस तापमान जरूरी होता है। पाला, कोहरा और ठंडी हवाएं इसकी फसल के लिए हानिकारक होती हैं। पाले से बचाव के लिए चाय के पौधे पहाड़ी ढलानों पर लगाए जाते हैं। चाय के लिए 150 से 250 सेमी बारिश अच्छी होती है। दक्षिणी भारत में 500 सेमी बारिश वाले पहाड़ी ढलानों पर चाय की खेती की जाती है। चाय के पौधों की जड़ों में पानी रुकना नहीं चाहिए। यही कारण है कि चाय के पौधे काफी ऊँचाई वाले भागों में ही लगाए जाते हैं।
2. मिट्टी: चाय की खेती के लिए दोमट मिट्टी जिसमें पोटाश, लोहा और जैविक पदार्थों की अधिकता हो, सबसे अच्छी होती है। जंगलों को साफ करके मिली भूमि चाय की खेती के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।
In simple words: असम और पश्चिम बंगाल भारत के मुख्य चाय उत्पादक राज्य हैं। चाय के लिए गर्म, नम जलवायु और ढलान वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है जहाँ पानी जमा न हो।
🎯 Exam Tip: चाय की खेती के लिए तापमान, वर्षा और मिट्टी की आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान दें, खासकर पानी के जमाव से बचने के लिए ढलानदार भूमि का महत्व।
Question 9. असम (असोम) चाय की खेती के लिए प्रसिद्ध है, क्यों ?
Answer: असम राज्य चाय के उत्पादन में पहला स्थान रखता है। यहां देश की 50% से ज़्यादा चाय का उत्पादन होता है। यह राज्य भारत में चाय उत्पादन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसके कई कारण हैं:
• यहां चाय की खेती के लिए लाल, कछारी, उपजाऊ और ढलान वाली भूमि पाई जाती है।
• इस राज्य की मिट्टी में पोटाश, लोहांश और जैविक पदार्थों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है, जो चाय उत्पादन के लिए बहुत जरूरी है।
• असम में चाय की खेती के लिए तापमान 20° से 30° सेल्सियस और औसत वार्षिक वर्षा 250 सेमी से ज़्यादा होती है।
• यहां चाय के बागान ढलान वाली भूमि पर लगाए जाते हैं, जिससे पौधों की जड़ों में पानी नहीं रुकता।
• असम की चाय स्वादिष्ट और रंग में बेहतर होती है, इसलिए इसकी विदेशों में बहुत मांग रहती है।
• असम में उत्पादित चाय के निर्यात से भारत को काफी विदेशी मुद्रा मिलती है।
In simple words: असम चाय के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ की जलवायु (20-30°C तापमान, 250 सेमी वर्षा), मिट्टी (लाल, उपजाऊ), और ढलानदार जमीन चाय की खेती के लिए बिल्कुल सही हैं। यहाँ की चाय स्वादिष्ट होती है और इससे देश को विदेशी पैसे मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: असम की भौगोलिक विशेषताओं (मिट्टी, जलवायु, ढलान) और चाय की गुणवत्ता पर ध्यान दें, जो इसे चाय उत्पादन के लिए आदर्श बनाती हैं।
Question 10. भारत में कपास का उत्पादन मुख्यतः गुजरात तथा महाराष्ट्र राज्यों में होता है। दो कारण लिखिए।
Answer: गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों में कपास उत्पादन के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. जलवायु: कपास उष्णकटिबंधीय जलवायु का पौधा है। कपास उत्पादन के लिए गुजरात और महाराष्ट्र में 20° से 30° सेल्सियस तापमान और 75 सेमी से ज़्यादा वर्षा उपलब्ध होती है। यहाँ पाला रहित मौसम भी कपास की खेती के लिए उपयुक्त है। पाला कपास की फसल के लिए हानिकारक होता है।
2. मिट्टी: कपास के लिए लावा से बनी उपजाऊ, गहरी काली और मध्यम काली मिट्टी सबसे अच्छी होती है। गुजरात और महाराष्ट्र में ऐसी मिट्टी बहुत ज़्यादा पाई जाती है।
इन्हीं कारणों से यहाँ बड़ी मात्रा में कपास उगाया जाता है।
In simple words: गुजरात और महाराष्ट्र में कपास ज्यादा होती है क्योंकि वहाँ का मौसम (गर्म, पर्याप्त बारिश और पाला रहित दिन) और मिट्टी (लावा से बनी काली मिट्टी) कपास की खेती के लिए बहुत अच्छी हैं।
🎯 Exam Tip: कपास की खेती के लिए पाला रहित मौसम और काली मिट्टी की उपलब्धता को प्रमुख कारणों के रूप में उजागर करें।
Question 11. भारत में जूट की खेती के प्रमुख दो राज्यों के नाम बताइए। वहाँ इसकी खेती क्यों होती है ?
Answer: भारत में जूट की खेती प्रमुख रूप से पश्चिम बंगाल और बिहार में होती है।
इन राज्यों में जूट की खेती के कारण:
जूट के उत्पादन के लिए गर्म और नम जलवायु की आवश्यकता होती है। आमतौर पर 25° से 35° सेल्सियस तापमान इसके लिए जरूरी होता है। जूट के पौधे के अंकुर निकलने के बाद ज़्यादा पानी की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए इसकी खेती के लिए 100 से 200 सेमी या उससे ज़्यादा वर्षा आवश्यक होती है। हर हफ्ते 2 से 3 सेमी वर्षा होनी चाहिए।
जूट की खेती भूमि के पोषक तत्वों को खत्म कर देती है। इसलिए इसकी खेती उन्हीं इलाकों में की जाती है जहाँ हर साल नदियाँ अपनी बाढ़ से उपजाऊ मिट्टी जमा करती रहती हैं। इसी कारण जूट की खेती डेल्टा वाले हिस्सों में की जाती है। दोमट, कॉप और बलुई मिट्टी भी इसके लिए उपयुक्त होती हैं।
जूट की खेती के लिए सस्ते और पर्याप्त संख्या में मजदूरों की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि तैयार पौधों को काटने और उपयोग के लिए तैयार करने में ज़्यादा मेहनत लगती है। ये सभी सुविधाएँ पश्चिम बंगाल और बिहार में उपलब्ध हैं। इसीलिए इन दोनों राज्यों में जूट की खेती मुख्य रूप से होती है।
In simple words: पश्चिम बंगाल और बिहार जूट के मुख्य उत्पादक राज्य हैं। यहाँ जूट उगाने के लिए गर्म-नम मौसम, पर्याप्त वर्षा, हर साल नई उपजाऊ मिट्टी (जो नदियों की बाढ़ से आती है) और सस्ते मजदूर आसानी से मिल जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जूट की खेती के लिए अनुकूल जलवायु, मिट्टी की नवीनीकरण प्रक्रिया (डेल्टा क्षेत्र) और सस्ते श्रम की उपलब्धता को प्रमुख बिंदुओं के रूप में बताएं।
Question 12. भारत में मक्का एवं ज्वार-बाजरे की उपज के क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में मक्का और ज्वार-बाजरे की उपज के क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
• मक्का: मक्का खरीफ की फसल है और इसके लिए गहरी दोमट मिट्टी, 50 से 100 सेमी तक वर्षा और 25° से 30° सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है। भारत में इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और राजस्थान हैं।
• ज्वार-बाजरा: ज्वार-बाजरा भी खरीफ की फसल है। इसके लिए बलुई मिट्टी, 50 से 70 सेमी तक वर्षा और 25° से 35° सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है। भारत में इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश हैं।
In simple words: मक्का और ज्वार-बाजरा दोनों ही खरीफ की फसलें हैं। मक्का मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और राजस्थान में उगता है, जबकि ज्वार-बाजरा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है।
🎯 Exam Tip: मक्का और ज्वार-बाजरा दोनों के लिए मुख्य भौगोलिक आवश्यकताओं और उत्पादक राज्यों को याद रखें, विशेषकर खरीफ फसल के रूप में।
Question 13. कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्यों कहा जाता है?
Answer: कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कहा जाता है क्योंकि:
• भारत एक कृषि-प्रधान देश है। देश की लगभग 70% श्रमशक्ति अपनी आजीविका कृषि से प्राप्त करती है।
• वर्तमान में कृषि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 22% का योगदान करती है।
• देश के कुल निर्यात में कृषि का योगदान 14% है।
• कई उद्योगों के लिए कच्चा माल कृषि से ही प्राप्त होता है।
• भारत में कृषि से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बनी है।
इसलिए, कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है।
In simple words: कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कहा जाता है क्योंकि यह ज़्यादातर लोगों को रोजगार देती है, देश की कमाई में योगदान करती है, उद्योगों को कच्चा माल देती है और निर्यात से पैसा कमाती है।
🎯 Exam Tip: कृषि के महत्व को दर्शाने के लिए रोजगार, GDP योगदान, औद्योगिक कच्चे माल और निर्यात आय जैसे प्रमुख बिंदुओं को बताएं।
Question 14. भारतीय फसलों में विविधता पाए जाने के क्या कारण हैं?
Answer: भारत विभिन्न प्रकार की फसलों के उत्पादन में पूरी तरह सक्षम है, जिसके लिए निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:
1. भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 51% हिस्सा कृषि योग्य है। यह कृषि योग्य क्षेत्र विशाल मैदानों, तटीय मैदानों, नदी-घाटियों और डेल्टा क्षेत्रों में फैला हुआ है।
2. भारतीय कृषि 'मानसून का जुआ' कहलाती है। इसलिए बढ़ते हुए मानसून और लौटते हुए मानसूनों से कई तरह की फसलें पैदा होती हैं।
3. देश में पूरे साल फसलें बोई जा सकती हैं, यानी किसी भी समय फसल बोई जा सकती है। इसके परिणामस्वरूप कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं।
4. भारत में कृषि फसलों के उत्पादन में मिट्टी की प्रमुख भूमिका रहती है। देश में मिट्टियों की विविधता के कारण फसलों में भी विविधता पाई जाती है।
5. देश में जलवायु की अलग-अलग दशाओं के कारण फसलों के उत्पादन में भी विविधता पाई जाती है।
In simple words: भारत में अलग-अलग फसलें उगाने के कई कारण हैं, जैसे यहाँ की ज़्यादातर जमीन खेती योग्य है, मानसून की वजह से अलग-अलग मौसम होते हैं, पूरे साल खेती हो सकती है, अलग-अलग तरह की मिट्टी पाई जाती है और जलवायु में विविधता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय फसलों में विविधता के लिए भौगोलिक, जलवायु और मौसमी कारकों पर ध्यान दें।
Question 15. भारतीय कृषि में शुष्क कृषि का विकास क्यों अनिवार्य है?
Answer: आज भी भारतीय कृषि मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है और इसे 'मानसून का जुआ' कहा जाता है। हालांकि देश में सिंचाई के साधन काफी विकसित हो चुके हैं, फिर भी सभी प्रयासों के बाद केवल 35.7% क्षेत्रफल में ही सिंचाई हो पाती है। भारत में कृषि योग्य भूमि के केवल 10% क्षेत्रफल में ही पर्याप्त वर्षा होती है और 30% क्षेत्रों में सामान्य से बहुत कम वर्षा होती है।
भारत में कम वर्षा वाले ज़्यादातर क्षेत्रों में आज भी सिंचाई का पानी नहीं मिल पाता है। इसलिए ऐसे क्षेत्रों में शुष्क कृषि का विकास करना बहुत जरूरी है।
'शुष्क कृषि' खेती की एक ऐसी विधि है, जिसमें भूमि की नमी को बनाए रखा जाता है और फसलों को सूखने नहीं दिया जाता है। इसके लिए वर्षा से पहले खेतों को जोत लिया जाता है और उनकी मेड़बंदी कर दी जाती है। खेतों की जुताई भी समोच्च (एक समान ऊँचाई) विधि से करनी चाहिए। ऐसा करने से वर्षा का पानी बह नहीं पाएगा और मिट्टी उस पानी को पर्याप्त मात्रा में सोख लेगी। खेतों में जुताई-बुवाई के बाद पटेला (भूमि को समतल बनाना) देना चाहिए, जिससे मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण न हो सके।
In simple words: भारत में शुष्क कृषि जरूरी है क्योंकि ज़्यादातर खेती बारिश पर निर्भर है और कई इलाकों में पानी कम होता है। शुष्क कृषि में जमीन की नमी बचाई जाती है, जिससे फसलें बिना ज़्यादा पानी के भी उग सकें।
🎯 Exam Tip: शुष्क कृषि की अनिवार्यता को कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कृषि की निर्भरता और जल संरक्षण के महत्व से जोड़ें।
तिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. भारत के लिए कृषि का क्या महत्त्व है ?
Answer: कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल आधार है। आज भी भारत की दो-तिहाई जनसंख्या का मुख्य आधार कृषि ही है। भारतीय कृषि में खाद्यान्न फसलों को ज़्यादा महत्व दिया जाता है और ज़्यादातर उत्पादन घरेलू खपत के लिए होता है। अब भारतीय कृषि, कई प्रयासों के बाद, जीविका कमाने वाले स्वरूप से व्यावसायिक स्वरूप में बदल रही है।
In simple words: कृषि भारत के ज़्यादातर लोगों को रोजगार देती है और यह देश की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: कृषि के महत्व को दर्शाने के लिए जनसंख्या की आजीविका और अर्थव्यवस्था के मूल आधार जैसे बिंदुओं पर जोर दें।
Question 2. भारत में कृषि की दो मुख्य ऋतुएँ कौन-सी हैं ? प्रत्येक ऋतु की दो फसलों के नाम लिखिए।
Answer: भारत में कृषि की दो मुख्य ऋतुएँ रबी (शीतकालीन) और खरीफ (ग्रीष्मकालीन) हैं।
• रबी की फसलें: गेहूँ और जौ।
• खरीफ की फसलें: चावल और मक्का।
In simple words: भारत में खेती की दो मुख्य ऋतुएँ हैं- रबी (सर्दियों में) और खरीफ (गर्मियों में)। रबी की फसलें गेहूँ और जौ हैं, जबकि खरीफ की फसलें चावल और मक्का हैं।
🎯 Exam Tip: रबी और खरीफ की पहचान उनके मौसम और प्रमुख फसलों के उदाहरणों से करें।
Question 3. रबी की तीन मुख्य फसलों के नाम लिखिए। [2010, 12]
Answer: रबी की मुख्य फसलें गेहूँ, जौ, मटर, सरसों, अलसी, मसूर और चना हैं। ये फसलें अक्टूबर और नवम्बर में बोई जाती हैं।
In simple words: रबी की मुख्य फसलें गेहूँ, जौ और मटर हैं, जिन्हें अक्टूबर-नवम्बर में बोया जाता है।
🎯 Exam Tip: रबी की फसलों के उदाहरण देते समय, उनके बोने के समय का भी उल्लेख करें।
Question 4. खरीफ की तीन मुख्य फसलों के नाम लिखिए ।
Answer: खरीफ की मुख्य फसलें चावल, कपास और जूट हैं।
In simple words: चावल, कपास और जूट खरीफ की मुख्य फसलें हैं।
🎯 Exam Tip: खरीफ की फसलों को याद रखते हुए, यह ध्यान रखें कि ये मानसून के मौसम में बोई जाती हैं।
Question 5. रेशेदार फसलों के तीन उदाहरण दीजिए ।
Answer: कपास, जूट और नारियल प्रमुख रेशेदार फसलें हैं।
In simple words: कपास, जूट और नारियल रेशेदार फसलों के उदाहरण हैं, जिनसे धागे या रस्सियाँ बनती हैं।
🎯 Exam Tip: रेशेदार फसलों के उदाहरणों को याद करते समय, उन फसलों को चुनें जिनसे सीधे रेशे प्राप्त होते हैं।
Question 6. नकदी या व्यापारिक फसलों के तीन उदाहरण दीजिए। [2014, 17]
Answer: कपास, जूट और गन्ना भारत की प्रमुख नकदी या व्यापारिक फसलें हैं।
In simple words: कपास, जूट और गन्ना ऐसी फसलें हैं जिन्हें किसान बेचने के लिए उगाते हैं ताकि पैसे कमा सकें, न कि सिर्फ अपने खाने के लिए।
🎯 Exam Tip: नकदी फसलों के उदाहरणों में उन फसलों को शामिल करें जिन्हें मुख्य रूप से बाजार में बेचने और आय अर्जित करने के लिए उगाया जाता है।
Question 7. दक्षिण भारत के किन राज्यों में कहवा मुख्यतः उगाया जाता है ?
Answer: दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में पहाड़ी ढलानों पर मुख्य रूप से कहवा (कॉफी) उगाया जाता है।
In simple words: दक्षिण भारत में कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं जहाँ कॉफी ज्यादा उगाई जाती है।
🎯 Exam Tip: कॉफी उत्पादक राज्यों के रूप में दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों को याद रखें।
Question 8. भारत में रबड़ का उत्पादन किस राज्य में सर्वाधिक होता है ?
Answer: भारत में रबड़ का सर्वाधिक उत्पादन केरल राज्य में होता है।
In simple words: केरल राज्य भारत में सबसे ज़्यादा रबड़ का उत्पादन करता है।
🎯 Exam Tip: भारत में रबड़ के उत्पादन के लिए केरल को प्रमुख राज्य के रूप में याद रखें।
Question 9. भारत में हरित क्रान्ति की सफलता में किसने सहायता की ?
Answer: भारत में हरित क्रांति की सफलता में अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक श्री बोरलॉग ने सहायता की।
In simple words: डॉ. नॉर्मन बोरलॉग नाम के एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने भारत में हरित क्रांति को सफल बनाने में मदद की।
🎯 Exam Tip: हरित क्रांति के जनक और उसके भारत में प्रसार में उनकी भूमिका को याद रखें।
Question 10. हरित क्रान्ति' के जन्मदाता कौन थे ?
Answer: हरित क्रांति के जन्मदाता अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक श्री बोरलॉग थे।
In simple words: हरित क्रांति की शुरुआत करने वाले वैज्ञानिक श्री बोरलॉग थे।
🎯 Exam Tip: हरित क्रांति के जनक के रूप में नॉर्मन बोरलॉग का नाम याद रखें।
Question 11. भारत में सर्वप्रथम आदर्श सहकारी दुग्ध संस्था कहाँ स्थापित की गयी थी ?
Answer: भारत में सबसे पहले आदर्श सहकारी दुग्ध संस्था गुजरात राज्य के खेड़ा जिले के आनंद में स्थापित की गई थी।
In simple words: भारत की पहली सहकारी दूध संस्था गुजरात के आनंद शहर में खोली गई थी।
🎯 Exam Tip: भारत में सहकारी दुग्ध आंदोलन के शुरुआती स्थल के रूप में आनंद, गुजरात को याद रखें।
Question 12. मत्स्य-ग्रहण (मत्स्योत्पादन) के दो मुख्य प्रकार कौन-से हैं ?
Answer: मत्स्य-ग्रहण (मत्स्योत्पादन) के दो मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
• सागरीय मत्स्य-ग्रहण (समुद्री मछली पकड़ना)
• आन्तरिक या स्वच्छ जलीय मत्स्य-ग्रहण (ताजे पानी की मछली पकड़ना)
In simple words: मछली पकड़ने के दो मुख्य तरीके हैं: समुद्र से मछली पकड़ना और नदियों या तालाबों जैसे ताजे पानी से मछली पकड़ना।
🎯 Exam Tip: मत्स्योत्पादन के दो मुख्य प्रकारों को समुद्री और ताजे पानी के स्रोत के आधार पर वर्गीकृत करें।
Question 13. भारतीय किसानों के लिए पशुओं का क्या महत्त्व है ?
Answer: भारतीय किसानों के लिए पशुओं के निम्नलिखित महत्व हैं:
• बैल और भैंसे का उपयोग बोझ ढोने के लिए किया जाता है। वे खेत जोतने, बुवाई करने, गहाई करने और कृषि उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में भी काम आते हैं।
• गाय और भैंसों से दूध मिलता है। उनके गोबर से खाद बनती है, जो खेतों के लिए बहुत उपयोगी है।
In simple words: किसानों के लिए पशु बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे खेत में काम करने, सामान ढोने और दूध तथा खाद जैसे उपयोगी उत्पाद देने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: पशुधन के महत्व को कृषि कार्य, परिवहन और डेयरी उत्पादों के संदर्भ में बताएं।
Question 14. भारत में चाय उत्पन्न करने वाले दो प्रमुख राज्यों के नाम लिखिए।
Answer: असम (53%) और पश्चिम बंगाल (22%) चाय उत्पन्न करने वाले दो प्रमुख राज्य हैं।
In simple words: भारत में सबसे ज़्यादा चाय असम और पश्चिम बंगाल में पैदा होती है।
🎯 Exam Tip: भारत में चाय उत्पादन के मुख्य राज्यों के रूप में असम और पश्चिम बंगाल को याद रखें।
Question 15. जूट उत्पादन करने वाले प्रमुख दो राज्यों के नाम लिखिए।
Answer: जूट का उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्यों के नाम हैं:
• पश्चिम बंगाल
• बिहार
In simple words: जूट का सबसे ज़्यादा उत्पादन पश्चिम बंगाल और बिहार राज्यों में होता है।
🎯 Exam Tip: जूट उत्पादन के लिए पश्चिम बंगाल और बिहार को प्रमुख राज्यों के रूप में याद रखें।
Question 16. पीली क्रान्ति किससे सम्बन्धित है ?
Answer: 'पीली क्रांति' तिलहनों (तेल वाली फसलें) के उत्पादन से संबंधित है। इसके तहत तिलहन उत्पादन कार्यक्रम 23 राज्यों के 337 जिलों में शुरू किया गया था।
In simple words: पीली क्रांति का संबंध तेल बनाने वाली फसलों, जैसे सरसों और मूंगफली, के उत्पादन को बढ़ाने से है।
🎯 Exam Tip: 'पीली क्रांति' को हमेशा तिलहन उत्पादन से जोड़कर याद रखें।
Question 17. कृषि की प्रमुख समस्या का वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय कृषि की सबसे बड़ी समस्या प्रति हेक्टेयर निम्न (कम) उत्पादकता है, यानी प्रति एकड़ या हेक्टेयर जमीन से कम फसल पैदा होती है।
In simple words: भारत में खेती की सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्रति खेत से बहुत कम फसल पैदा होती है।
🎯 Exam Tip: भारतीय कृषि की प्रमुख समस्या के रूप में 'निम्न उत्पादकता' को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 18. भारत में कहवा उत्पन्न करने वाले किन्हीं दो राज्यों के नाम लिखिए।
Answer: भारत में कहवा (कॉफी) का उत्पादन करने वाले दो राज्य हैं:
• कर्नाटक
• केरल
In simple words: भारत में कर्नाटक और केरल दो मुख्य राज्य हैं जहाँ कॉफी उगाई जाती है।
🎯 Exam Tip: भारत में कहवा उत्पादन के लिए कर्नाटक और केरल को प्रमुख राज्यों के रूप में याद रखें।
Question 19. भारत में गन्ने का उत्पादन करने वाले किन्हीं दो राज्यों के नाम लिखिए।
Answer: भारत में गन्ने का उत्पादन करने वाले दो राज्य हैं:
• उत्तर प्रदेश
• तमिलनाडु
In simple words: उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भारत में गन्ना उगाने वाले दो मुख्य राज्य हैं।
🎯 Exam Tip: गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के महत्व को याद रखें।
Question 20. भारत के किन्हीं दो प्रमुख भूमि-सुधारों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत के दो प्रमुख भूमि सुधार हैं:
• जमींदारी उन्मूलन (जमींदारी प्रथा को खत्म करना)
• चकबन्दी (खेतों को एक जगह इकट्ठा करना)
In simple words: भारत में जमीन को सुधारने के लिए दो मुख्य काम हुए: जमींदारी प्रथा को हटाना और छोटे, बिखरे खेतों को एक बड़ा खेत बनाना।
🎯 Exam Tip: भूमि सुधारों में जमींदारी उन्मूलन और चकबंदी जैसे ऐतिहासिक कदमों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 21. प्राथमिक व्यवसाय के दो उदाहरण दीजिए ।
Answer: प्राथमिक व्यवसाय के दो उदाहरण हैं:
• कृषि
• मत्स्य-पालन
In simple words: खेती करना और मछली पकड़ना प्राथमिक व्यवसायों के उदाहरण हैं, जहाँ लोग सीधे प्रकृति से चीजें प्राप्त करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक व्यवसायों में वे गतिविधियाँ शामिल होती हैं जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी होती हैं।
Question 22. भारत में गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन किस प्रदेश में होता है ? [2009, 11]
Answer: भारत में गेहूँ का सर्वाधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है।
In simple words: उत्तर प्रदेश राज्य में भारत में सबसे ज़्यादा गेहूँ उगाया जाता है।
🎯 Exam Tip: गेहूँ उत्पादन में उत्तर प्रदेश को प्रमुख राज्य के रूप में याद रखें।
Question 23. भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य में संलग्न है?
Answer: भारत की 66% जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।
In simple words: भारत में 100 में से लगभग 66 लोग खेती के काम से जुड़े हुए हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय जनसंख्या में कृषि पर निर्भरता के प्रतिशत को सटीक रूप से याद रखें।
Question 24. भारत की दो प्रमुख खाद्यान्न फसलें कौन-कौन सी हैं?
Answer: चावल और गेहूँ भारत की दो प्रमुख खाद्यान्न फसलें हैं।
In simple words: भारत के लोगों के खाने के लिए चावल और गेहूँ सबसे मुख्य फसलें हैं।
🎯 Exam Tip: भारत की दो सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों के रूप में चावल और गेहूँ को याद रखें।
Question 25. भारत में कपास उत्पादन के दो प्रमुख क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
Answer: गुजरात और महाराष्ट्र कपास उत्पादन के दो प्रमुख क्षेत्र हैं।
In simple words: गुजरात और महाराष्ट्र भारत के दो बड़े इलाके हैं जहाँ कपास उगाई जाती है।
🎯 Exam Tip: भारत में कपास उत्पादन के मुख्य क्षेत्रों के रूप में गुजरात और महाराष्ट्र को याद रखें।
Question 26. मानव के प्राथमिक व्यवसाय कौन-कौन से हैं?
Answer: आखेट (शिकार), पशुपालन, मत्स्य पालन (मछली पकड़ना), कृषि (खेती) और खनन मानव के प्राथमिक व्यवसाय हैं।
In simple words: शिकार करना, पशु पालना, मछली पकड़ना, खेती करना और खनिज निकालना ये सब मानव के सबसे पुराने और सीधे प्रकृति से जुड़े काम हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक व्यवसायों को उन गतिविधियों के रूप में समझें जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों के निष्कर्षण या उपयोग से संबंधित होती हैं।
Question 27. भारतीय जनसंख्या की जीविका का मूल आधार क्या है?
Answer: भारतीय जनसंख्या की जीविका का मूल आधार कृषि है।
In simple words: भारत में ज़्यादातर लोगों की कमाई और जीवन का मुख्य सहारा खेती है।
🎯 Exam Tip: भारतीय जनसंख्या के लिए 'कृषि' को जीविका के मूल आधार के रूप में याद रखें।
Question 28. कृषि पर आधारित किन्हीं दो प्रमुख उद्योगों के नाम लिखिए। [2012, 14]
Answer: कृषि पर आधारित दो प्रमुख उद्योग हैं:
• चीनी उद्योग
• वस्त्र उद्योग
In simple words: चीनी और वस्त्र उद्योग ऐसे बड़े कारखाने हैं जो खेती से मिलने वाले सामान (गन्ना, कपास) का इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: कृषि-आधारित उद्योगों के उदाहरणों में चीनी (गन्ना से) और वस्त्र (कपास से) जैसे बड़े उद्योग शामिल करें।
Question 29. भारत में चाय तथा कहवा के उत्पादन क्षेत्र बताइए । [2013]
Answer: चाय उत्पादन के क्षेत्र: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल।
कहवा (कॉफी) उत्पादन के क्षेत्र: कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश।
In simple words: चाय मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और असम में, जबकि कॉफी कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में उगाई जाती है।
🎯 Exam Tip: चाय और कहवा के प्रमुख उत्पादक राज्यों को अलग-अलग याद रखें।
Question 30. दुधारु पशु तथा भारवाहक पशु में क्या अन्तर है?
Answer: दुधारु पशु दूध देते हैं, जबकि भारवाहक पशु (जैसे बैल) बोझा ढोने का काम करते हैं।
In simple words: दूध देने वाले पशुओं से दूध मिलता है, जबकि भारवाहक पशु सामान ढोते हैं।
🎯 Exam Tip: दुधारु और भारवाहक पशुओं के बीच का अंतर उनके मुख्य कार्य (दूध देना बनाम काम करना) के आधार पर स्पष्ट करें।
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. भारत में हरित क्रान्ति का सूत्रपात बीसवीं शताब्दी के किस दशक में हुआ था ?
(क) आठवें
(ख) छठवें
(ग) सातवें
(घ) पाँचवें
Answer: (ख) छठवें
In simple words: भारत में हरित क्रांति बीसवीं सदी के 1960 के दशक में शुरू हुई थी।
🎯 Exam Tip: हरित क्रांति की शुरुआत का दशक (1960 का दशक) याद रखें।
Question 2. भारत में सर्वाधिक चाय उत्पादक राज्य है
(क) तमिलनाडु
(ख) असोम
(ग) केरल
(घ) पश्चिम बंगाल
Answer: (ख) असोम
In simple words: भारत में सबसे ज़्यादा चाय असम राज्य में पैदा होती है।
🎯 Exam Tip: भारत के सबसे बड़े चाय उत्पादक राज्य के रूप में असम को पहचानें।
Question 3. निम्नलिखित में से कौन-सा जूट उत्पादक राज्य है? [2018]
(क) केरल
(ख) गुजरात
(ग) पश्चिम बंगाल
(घ) उत्तर प्रदेश
Answer: (ग) पश्चिम बंगाल
In simple words: पश्चिम बंगाल जूट का सबसे बड़ा उत्पादन करने वाला राज्य है।
🎯 Exam Tip: जूट उत्पादन में पश्चिम बंगाल की अग्रणी भूमिका को याद रखें।
Question 4. ऑपरेशन फ्लड (श्वेत क्रान्ति) किससे सम्बन्धित है? [2010, 13, 17]
(क) गेहूँ उत्पादन
(ख) दुग्ध उत्पादन
(ग) चीनी उत्पादन
(घ) वस्त्र उत्पादन
Answer: (ख) दुग्ध उत्पादन
In simple words: ऑपरेशन फ्लड, जिसे श्वेत क्रांति भी कहते हैं, दूध के उत्पादन को बढ़ाने से जुड़ा है।
🎯 Exam Tip: 'ऑपरेशन फ्लड' या 'श्वेत क्रांति' को हमेशा दुग्ध उत्पादन से जोड़कर याद रखें।
Question 5. निम्न में से कौन-सी बागाती फसल है?
(क) चावल
(ख) चाय
(ग) चना,
(घ) गेहूँ
Answer: (ख) चाय
In simple words: चाय एक बागाती फसल है, जो बड़े-बड़े बागानों में उगाई जाती है।
🎯 Exam Tip: बागाती फसलें वे होती हैं जिनकी खेती बड़े बागानों में की जाती है, जैसे चाय, कॉफी और रबड़।
Question 6. निम्नलिखित में कौन-सी आर्थिक क्रिया प्राथमिक व्यवसाय नहीं है?
(क) लोहा-इस्पात उद्योग
(ख) मत्स्य व्यवसाय
(ग) खनन
(घ) कृषि
Answer: (क) लोहा-इस्पात उद्योग
In simple words: लोहा-इस्पात उद्योग प्राथमिक व्यवसाय नहीं है क्योंकि यह कच्चे माल को बदलकर नया उत्पाद बनाता है, जबकि अन्य विकल्प सीधे प्रकृति से जुड़े हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक व्यवसाय वे होते हैं जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित होते हैं, जबकि द्वितीयक व्यवसाय कच्चे माल को तैयार उत्पादों में बदलते हैं।
Question 7. भारत की कार्यशील जनसंख्या का कितना प्रतिशत भाग कृषि कार्यों में संलग्न है?
(क) लगभग 40%
(ख) लगभग 55%
(ग) लगभग 65%
(घ) लगभग 85%
Answer: (ग) लगभग 65%
In simple words: भारत में काम करने वाले लोगों में से करीब 65% खेती के काम से जुड़े हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय कार्यशील जनसंख्या में कृषि क्षेत्र के बड़े हिस्से को याद रखें।
Question 8. भारत में खरीफ की फसल के बाद कौन-सी फसली ऋतु आती है?
(क) जायद
(ख) पतझड़
(ग) रबी
(घ) शरद
Answer: (ग) रबी
In simple words: खरीफ की फसलें काटने के बाद रबी की फसलें बोई जाती हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय फसल चक्र में खरीफ के बाद रबी और फिर जायद का क्रम याद रखें।
Question 9. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल रबी की है?
(क) चना
(ख) चावल
(ग) कपास
(घ) ज्वार-बाजरा
Answer: (क) चना
In simple words: चना सर्दियों में बोई जाने वाली रबी की फसल है।
🎯 Exam Tip: रबी की फसलों के उदाहरणों में चना, गेहूँ और सरसों को मुख्य रूप से याद रखें।
Question 10. भारत में आजीविका का प्रमुख स्रोत है [2012]
(क) सेवाएँ।
(ख) कृषि
(ग) उद्योग
(घ) व्यापार
Answer: (ख) कृषि
In simple words: भारत में ज़्यादातर लोगों के जीवन का मुख्य सहारा खेती है।
🎯 Exam Tip: भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजगार में कृषि की केंद्रीय भूमिका को समझें।
Question 11. निम्नलिखित में से किस प्रदेश में गेहूं का उत्पादन सर्वाधिक होता है? [2011]
(क) पंजाब
(ख) हरियाणा
(ग) बिहार
(घ) उत्तर प्रदेश
Answer: (घ) उत्तर प्रदेश
In simple words: उत्तर प्रदेश राज्य भारत में सबसे ज़्यादा गेहूँ उगाता है।
🎯 Exam Tip: गेहूँ उत्पादन में उत्तर प्रदेश की अग्रणी स्थिति को याद रखें।
Question 12. चाय की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त है? [2011]
(क) पर्वतीय मिट्टी
(ख) दोमट मिट्टी
(ग) जलोढ़ मिट्टी
(घ) लैटेराइट मिट्टी
Answer: (क) पर्वतीय मिट्टी
In simple words: चाय की खेती के लिए पहाड़ी ढलानों वाली मिट्टी सबसे अच्छी होती है जहाँ पानी जमा नहीं होता।
🎯 Exam Tip: चाय की खेती के लिए ढलानदार, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी (जैसे पर्वतीय मिट्टी) का महत्व याद रखें।
Question 13. कपास की खेती के लिए निम्नलिखित में से सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी कौन-सी है? [2013, 15]
(क) लाल मिट्टी
(ख) काली मिट्टी
(ग) लैटेराइट मिट्टी
(घ) जलोढ़ मिट्टी
Answer: (ख) काली मिट्टी
In simple words: कपास उगाने के लिए काली मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है।
🎯 Exam Tip: कपास की खेती के लिए 'काली मिट्टी' के महत्व पर विशेष ध्यान दें।
Question 14. नीली क्रांति सम्बन्धित है [2014]
(क) कृषि से
(ख) आकाश से
(ग) जल से
(घ) मत्स्य से
Answer: (घ) मत्स्य से
In simple words: नीली क्रांति मछली उत्पादन को बढ़ाने से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: नीली क्रांति को हमेशा मत्स्य उत्पादन (मछली पालन) से जोड़कर याद रखें।
Question 15. निम्नलिखित में से कौन-सी बागानी फसल है? [2015]
(क) गन्ना
(ख) कपास
(ग) जूट
(घ) कहवा
Answer: (घ) कहवा
In simple words: कहवा (कॉफी) एक बागाती फसल है जिसे बड़े बागानों में उगाया जाता है।
🎯 Exam Tip: बागाती फसलें वे होती हैं जिनकी खेती बड़े बागानों में की जाती है, जैसे चाय, कॉफी और रबड़।
Question 16. निम्नलिखित में से सबसे अधिक कपास उत्पन्न करने वाला राज्य कौन है? [2015, 18]
(क) हरियाणा
(ख) गुजरात
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) उत्तर प्रदेश
Answer: (ख) गुजरात
In simple words: गुजरात राज्य भारत में सबसे ज़्यादा कपास उगाता है।
🎯 Exam Tip: कपास उत्पादन में गुजरात की अग्रणी भूमिका को याद रखें।
Question 17. निम्नलिखित में से कौन औद्योगिक फसल है? [2015]
(क) गेहूँ
(ख) दालें
(ग) मक्का
(घ) चाय
Answer: (घ) चाय
In simple words: चाय एक औद्योगिक फसल है क्योंकि इसे सीधे कारखानों में प्रक्रिया करके बेचा जाता है।
🎯 Exam Tip: औद्योगिक फसलें वे होती हैं जो सीधे उद्योगों में कच्चे माल के रूप में उपयोग होती हैं।
Question 15. निम्नलिखित में से कौन-सी बागानी फसल है? [2015]
(क) गन्ना
(ख) कपास
(ग) जूट
(घ) कहवा
Answer: (घ) कहवा
In simple words: बागानी फसलें वे होती हैं जिन्हें बड़े खेतों या बागानों में उगाया जाता है, खासकर व्यावसायिक उपयोग के लिए। कहवा (कॉफी) ऐसी ही एक फसल है।
🎯 Exam Tip: बागानी फसलों में चाय, कहवा (कॉफी), रबर और मसाले जैसे उत्पाद शामिल होते हैं, जिनकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
Question 16. निम्नलिखित में से सबसे अधिक कपास उत्पन्न करने वाला राज्य कौन है? [2015, 18]
(क) हरियाणा
(ख) गुजरात
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) उत्तर प्रदेश
Answer: (ख) गुजरात
In simple words: भारत में कपास का सबसे ज्यादा उत्पादन गुजरात राज्य में होता है। यहाँ की मिट्टी और जलवायु कपास की खेती के लिए बहुत अच्छी है।
🎯 Exam Tip: कपास की खेती के लिए काली मिट्टी और गर्म मौसम बहुत जरूरी होता है, जिससे पौधे अच्छे से उगते हैं।
Question 17. निम्नलिखित में से कौन औद्योगिक फसल है? [2015]
(क) गेहूँ
(ख) दालें
(ग) मक्का
(घ) चाय
Answer: (घ) चाय
In simple words: औद्योगिक फसलें वे होती हैं जिनका उपयोग सीधे खाने के बजाय किसी उद्योग में कुछ बनाने के लिए किया जाता है। चाय एक ऐसी ही फसल है।
🎯 Exam Tip: औद्योगिक फसलें अक्सर नकदी फसलें होती हैं, जो किसानों को अच्छी कमाई देती हैं और उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराती हैं।
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