UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 1 Kendra Sarkar

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Class 10 Social Science Chapter 1 केंद्र सरकार UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. संसद के कौन-कौन से अंग हैं? लोकसभा का गठन एवं उसके अधिकारों का वर्णन भी कीजिए। [2010, 14]
या
लोकसभा के अध्यक्ष का निर्वाचन किनके द्वारा होता है? सभा की बैठकों के सफल संचालन हेतु वे क्या कार्य करते हैं? [2009, 10, 11]
या
लोकसभा के अध्यक्ष की शक्तियों एवं कार्यों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। [2011]
या
लोकसभा के गठन की प्रक्रिया समझाइए। [2011]
या
लोकसभा के सदस्यों की किन्हीं दो योग्यताओं का उल्लेख कीजिए तथा उनका नियमित कार्यकाल बताइए। [2013]
या
लोकसभा की विधायी शक्तियों पर प्रकाश डालिए। [2013]
या
लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए आवश्यक योग्यताएँ क्या हैं? [2013]
या
भारत की संसद के कौन-कौन से अंग हैं? संसद के कार्यों की विवेचना कीजिए। [2016, 17]
या
लोकसभा का गठन कैसे होता है? उसके सदस्यों की अर्हता, निर्वाचन विधि तथा कार्यकाल पर प्रकाश डालिए। [2018]
या
लोकसभा के किन्हीं तीन कार्यों का उल्लेख कीजिए। [2018]
Answer: केन्द्रीय सरकार के तीन मुख्य अंग होते हैं: (1) संसद, (2) कार्यपालिका, और (3) न्यायपालिका। भारतीय संविधान में, केन्द्रीय व्यवस्थापिका को ही संसद कहा जाता है। संसद के तीन घटक (अंग) होते हैं: (i) राष्ट्रपति, (ii) राज्यसभा (जो उच्च सदन है) और (iii) लोकसभा (जो निम्न सदन है)। लोकसभा पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि राज्यसभा राज्यों और संघीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है। इन दोनों सदनों को मिलाकर ही संसद बनती है। संसद देश के लिए कानून बनाने का काम करती है।
लोकसभा का गठन
लोकसभा संसद का निचला सदन है, और इसका गठन इस प्रकार होता है:
सदस्यों की संख्या और निर्वाचन: संविधान में हुए बदलावों के बाद, अब लोकसभा में अधिक से अधिक 552 सदस्य हो सकते हैं। इनमें से 530 सदस्य राज्यों से, 20 सदस्य संघ-शासित प्रदेशों से और 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा एंग्लो-इंडियन समुदाय से चुने जा सकते हैं। वर्तमान में लोकसभा में 545 सदस्य हैं, जिनमें से 543 सदस्य भारतीय जनता द्वारा सीधे वयस्क मताधिकार से गुप्त मतदान द्वारा चुने जाते हैं। राष्ट्रपति द्वारा दो एंग्लो-इंडियन सदस्य भी मनोनीत किए जाते हैं। अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित हैं। चुने जाने के बाद, सदस्यों को राष्ट्रपति के सामने पद और गोपनीयता की शपथ लेनी होती है।
सदस्य चुने जाने के लिए योग्यता: लोकसभा का सदस्य बनने के लिए कुछ ज़रूरी शर्तें होती हैं:
(1) उसे भारत का नागरिक होना चाहिए।
(2) उसकी उम्र कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए।
(3) उसे लोकसभा के किसी चुनाव क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए।
(4) उसे पागल या दिवालिया नहीं होना चाहिए, किसी विदेशी राज्य की नागरिकता नहीं होनी चाहिए, किसी सरकारी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए, और कानून द्वारा अयोग्य घोषित नहीं किया जाना चाहिए।
कार्यकाल: लोकसभा का कार्यकाल आमतौर पर 5 वर्ष का होता है, लेकिन खास परिस्थितियों में इसे एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर 5 साल पूरे होने से पहले भी लोकसभा को भंग कर सकते हैं। लोकसभा की दो बैठकों के बीच 6 महीने से ज़्यादा का अंतर नहीं होना चाहिए। लोकसभा के एक साल में सामान्यतः तीन सत्र होते हैं।
पदाधिकारी: लोकसभा के सदस्य अपने बीच में से एक अध्यक्ष (Speaker) और एक उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) चुनते हैं। अध्यक्ष सदन की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, कार्यवाही का संचालन करते हैं, अनुशासन बनाए रखते हैं, वोट गिनते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर निर्णायक वोट भी देते हैं। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष यही सारे काम करते हैं। लोकसभा अध्यक्ष और सदस्य सभा की बैठकों को ठीक से चलाने के लिए कई काम करते हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:
लोकसभा के अधिकार (कार्य एवं शक्तियाँ)
लोकसभा के मुख्य अधिकार और शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
1. कानून निर्माण संबंधी कार्य: लोकसभा को देशहित में कानूनों में बदलाव करने और किसी कानून को खत्म करने का अधिकार है। यह संघ सूची, समवर्ती सूची, और बचे हुए विषयों (अवशिष्ट विषयों) पर कानून बनाती है। कुछ खास परिस्थितियों में इसे राज्य सूची पर भी कानून बनाने का अधिकार मिल जाता है।
2. शासन संबंधी अधिकार: संसदात्मक शासन व्यवस्था में सरकार की असली शक्ति मंत्रिपरिषद के पास होती है। मंत्रिपरिषद व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति जवाबदेह होती है। लोकसभा के सदस्य मंत्रियों से सवाल पूछकर, स्थगन प्रस्ताव और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पास करके, बिलों को अस्वीकार करके, बजट में कटौती करके, और मंत्रियों के कामों की जाँच करके उन पर नियंत्रण रखते हैं। लोकसभा मंत्रिपरिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करके उसे हटा सकती है।
3. वित्तीय अधिकार: धन विधेयक सबसे पहले लोकसभा में पेश किए जाते हैं। लोकसभा में पास होने के बाद धन विधेयक राज्यसभा के पास भेजा जाता है। अगर राज्यसभा 14 दिन तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं करती, तो धन विधेयक पास माना जाता है। इसके अलावा, लोकसभा को कुछ खर्चों को छोड़कर बाकी सभी खर्चों में कटौती करने और उन्हें अस्वीकार करने का अधिकार भी है।
4. संविधान में संशोधन का अधिकार: लोकसभा और राज्यसभा कुछ विषयों में सामान्य बहुमत से, और कुछ विषयों में दो-तिहाई बहुमत से संविधान में बदलाव कर सकती हैं।
5. निर्वाचन संबंधी अधिकार: लोकसभा के चुने हुए सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में, और सभी सदस्य उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं। लोकसभा के सदस्य अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का भी चुनाव करते हैं।
6. महाभियोग लगाने का अधिकार: लोकसभा राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग सिद्ध करके उसे पद से हटा सकती है। यह सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के किसी भी न्यायाधीश को अयोग्यता या दुराचार के प्रस्ताव द्वारा राष्ट्रपति से पद से हटवा सकती है। सभी शक्तियाँ महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे लोकतंत्र को जवाबदेह और प्रभावी बनाती हैं।
In simple words: संसद के तीन अंग राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा हैं। लोकसभा जनता द्वारा चुने गए सदस्यों से बनती है और इसका कार्यकाल 5 साल का होता है। इसके पास कानून बनाने, सरकार को नियंत्रित करने और पैसे से जुड़े फैसले लेने जैसे कई महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय संसद के तीनों अंगों और विशेषकर लोकसभा के गठन, योग्यताओं, कार्यकाल और शक्तियों को बिंदुवार स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 2. राज्यसभा का संगठन किस प्रकार होता है? उसके अधिकार क्या हैं? [2015, 16]
या
राज्यसभा के संगठन एवं कार्यों पर प्रकाश डालिए। [2015, 16]
या
राज्यसभा की संरचना का वर्णन कीजिए।
या
राज्यसभा के सदस्यों की क्या अर्हताएँ निर्धारित की गई हैं? स्पष्ट कीजिए। [2014, 18]
या
राज्यसभा के किन्हीं दो विशेष कार्यों का उल्लेख कीजिए। [2015]
Answer: राज्यसभा संसद का स्थायी, दूसरा या उच्च सदन है। इसका गठन इस प्रकार होता है:
सदस्य-संख्या और उनका निर्वाचन: संविधान के अनुसार, राज्यसभा में ज़्यादा से ज़्यादा 250 सदस्य हो सकते हैं। इनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। ये वे व्यक्ति होते हैं जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान, समाज-सेवा आदि क्षेत्रों में खास ज्ञान और अनुभव होता है। बाकी सदस्य राज्यों की विधानसभाओं द्वारा चुने जाते हैं।
राज्यों की विधानसभाएँ: हर राज्य अपनी विधानसभा से उतने ही सदस्यों को चुनता है जितना संविधान में तय किया गया है। सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर गुप्त मतदान से होता है। वर्तमान में राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं। इनमें से 233 सदस्य राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।
सदस्यों की योग्यताएँ:
(1) प्रत्याशी को भारत का नागरिक होना चाहिए।
(2) उसकी उम्र 30 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
(3) उसे संसद द्वारा तय की गई अन्य योग्यताएँ पूरी करनी चाहिए।
(4) उसे उस राज्य का निवासी होना चाहिए जहाँ से वह चुनाव लड़ना चाहता है।
कार्यकाल: राज्यसभा एक स्थायी सदन है, यानी इसे कभी भंग नहीं किया जा सकता। हर दो साल में इसके एक-तिहाई सदस्य रिटायर हो जाते हैं। इस तरह हर सदस्य 6 साल तक अपने पद पर रहता है।
पदाधिकारी: राज्यसभा में दो पदाधिकारी होते हैं: (1) सभापति और (2) उपसभापति। भारत का उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। सभापति सदन की बैठकों की अध्यक्षता करता है, अनुशासन बनाए रखता है, कार्यवाही चलाता है, वोट गिनता है, और ज़रूरत पड़ने पर निर्णायक वोट भी देता है। सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति ये सभी काम करता है।
राज्यसभा के अधिकार (कार्य एवं शक्तियाँ)
राज्यसभा को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं:
1. कानून निर्माण संबंधी अधिकार: राज्यसभा लोकसभा के साथ मिलकर संघ सूची और बचे हुए विषयों पर कानून बना सकती है। वित्त विधेयक को छोड़कर, बाकी सभी साधारण विधेयक राज्यसभा में भी पेश किए जा सकते हैं। यह लोकसभा द्वारा पास किए गए विधेयक को ज़्यादा से ज़्यादा छह महीने तक रोक सकती है।
2. वित्तीय अधिकार: वित्तीय मामलों में राज्यसभा थोड़ी कमज़ोर है। कोई भी वित्त विधेयक या बजट सबसे पहले लोकसभा में ही पेश हो सकता है, राज्यसभा में नहीं। लोकसभा से पास होने के बाद, वित्त विधेयक या बजट राज्यसभा में भेजा जाता है, जिसे वह केवल 14 दिन तक रोक सकती है। अगर राज्यसभा वित्त विधेयक को रद्द कर दे, उसमें बदलाव कर दे, या 14 दिन तक उस पर कोई कार्रवाई न करे, तो भी वह विधेयक राज्यसभा से पास माना जाता है, और उसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी के लिए भेज दिया जाता है। यह वित्तीय प्रक्रिया सरकार के खर्चों पर नज़र रखने में मदद करती है।
3. मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण: मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति जवाबदेह होती है, राज्यसभा के प्रति नहीं। राज्यसभा के सदस्य मंत्रियों से सवाल पूछकर, पूरक प्रश्न पूछकर, स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, और निंदा प्रस्ताव लाकर मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण रख सकते हैं। हालाँकि, राज्यसभा को मंत्रिपरिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करने का अधिकार नहीं है।
4. निर्वाचन संबंधी अधिकार: राज्यसभा के चुने हुए सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में, और सभी सदस्य उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं। इसके अलावा, राज्यसभा के सदस्य अपने बीच में से उपसभापति को भी चुनते हैं।
5. संविधान में संशोधन का अधिकार: संविधान में बदलाव करने के मामले में राज्यसभा और लोकसभा को बराबर अधिकार मिले हैं। संशोधन प्रस्ताव चाहे साधारण बहुमत से या दो-तिहाई बहुमत से पास होना हो, वह तभी पास माना जाएगा जब दोनों सदन उसे तय तरीके से पास करें।
6. न्यायिक अधिकार: राज्यसभा और लोकसभा दोनों को राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और मुख्य चुनाव आयुक्त को महाभियोग द्वारा पद से हटाने का अधिकार है।
7. अन्य अधिकार:
* राज्यसभा के सदस्य मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाते हैं।
* अधिवेशन के दौरान सदस्यों को सभापति की अनुमति के बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
* संसद में दिए गए भाषण के लिए उनके खिलाफ किसी न्यायालय में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि शक्तियों और कार्यों की तुलना में, राज्यसभा लोकसभा से कम शक्तिशाली सदन है, लेकिन फिर भी इसके पास इतनी शक्तियाँ हैं कि इसे एक महत्वपूर्ण सदन माना जा सकता है।
In simple words: राज्यसभा संसद का ऊपरी और स्थायी सदन है, जिसे भंग नहीं किया जा सकता। इसके सदस्य राज्यों की विधानसभाओं द्वारा चुने जाते हैं और कुछ सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं। इसका कार्यकाल 6 साल का होता है। यह कानून बनाने, संविधान बदलने और न्याय से जुड़े कुछ खास अधिकार रखती है।

🎯 Exam Tip: राज्यसभा के संगठन और उसके विशिष्ट अधिकारों को याद रखें, खासकर वित्तीय मामलों में उसकी सीमित शक्तियाँ और स्थायी सदन होने का महत्व।

 

प्रश्न 3. भारत के राष्ट्रपति की शक्तियों तथा कार्यों का वर्णन कीजिए। [2010, 12, 14, 17]
या
भारत के राष्ट्रपति के दो संवैधानिक अधिकारों का वर्णन कीजिए। [2014]
या
भारत के राष्ट्रपति के प्रमुख कार्यों की विवेचना कीजिए। [2015, 16]
या
भारत के राष्ट्रपति के दो विशेषाधिकार लिखिए। [2015]
Answer: राष्ट्रपति भारत का सबसे बड़ा अधिकारी और देश का मुखिया होता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार, राष्ट्रपति को कुछ अधिकार (कार्य) और शक्तियाँ दी गई हैं, जिनका उपयोग वह खुद या अपने नीचे काम करने वाले अधिकारियों की मदद से कर सकता है। राष्ट्रपति के इन अधिकारों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है:
(अ) सामान्य स्थिति में अधिकार
सामान्य स्थिति में राष्ट्रपति को ये अधिकार मिलते हैं:
1. कार्यपालिका या शासन-संबंधी अधिकार: राष्ट्रपति कार्यपालिका का मुखिया होता है। इसलिए उसे कार्यपालिका से जुड़े ये अधिकार प्राप्त हैं:
* केन्द्रीय सरकार के सभी काम राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं।
* राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है और उसकी सलाह से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति और उनके विभागों का बंटवारा भी करता है।
* राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, राज्यपालों, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, अटॉर्नी जनरल, नियंत्रक व महालेखा परीक्षक, केन्द्रीय क्षेत्रों का शासन चलाने के लिए चीफ कमिश्नर, उपराज्यपाल आदि को भी नियुक्त करता है।
* राष्ट्रपति विदेशों में भारतीय राजदूतों की नियुक्ति करता है और दूसरे देशों से आए राजदूतों के प्रमाण-पत्र भी देखता है।
* राष्ट्रपति ही भारतीय सेनाओं (जल, थल और वायु) का प्रमुख होता है।
* राष्ट्रपति प्रधानमंत्री से शासन से जुड़ी कोई भी जानकारी मांग सकता है। राष्ट्रपति का यह पद देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है।
2. कानून-निर्माण संबंधी अधिकार: राष्ट्रपति विधायिका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उसे कानून बनाने के क्षेत्र में भी ये अधिकार प्राप्त हैं:
* राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने, स्थगित करने और लोकसभा को भंग करने का अधिकार रखता है।
* राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को संबोधित करने या उन्हें लिखित संदेश भेजने का अधिकार रखता है।
* संसद द्वारा पास किया गया कोई भी विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना कानून नहीं बन सकता।
* जब संसद का सत्र नहीं चल रहा होता, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।
* राष्ट्रपति राज्यसभा के 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है।
* लोकसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है, लेकिन राष्ट्रपति तय समय से पहले भी लोकसभा को भंग कर सकता है।
3. धन-संबंधी अधिकार: संविधान में राष्ट्रपति को वित्तीय मामलों में भी अधिकार दिए गए हैं:
* राष्ट्रपति हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में वित्त मंत्री के माध्यम से संसद में बजट पेश करवाता है।
* राष्ट्रपति की अनुमति के बिना कोई भी वित्त विधेयक लोकसभा में पेश नहीं किया जा सकता।
* राष्ट्रपति वित्त आयोग की नियुक्ति करता है, जो देश की आर्थिक स्थिति के बारे में सलाह देता है।
* राष्ट्रपति 'आकस्मिक निधि' से सरकार को खर्च करने के लिए पैसे दे सकता है।
* राष्ट्रपति नए टैक्स लगाने और पुराने टैक्स खत्म करने की सिफारिश भी कर सकता है।
4. न्याय-संबंधी अधिकार: राष्ट्रपति किसी भी अपराधी की सज़ा कम कर सकता है, बदल सकता है या माफ कर सकता है। राष्ट्रपति को मौत की सज़ा भी माफ करने का अधिकार है। राष्ट्रपति के इस अधिकार की सीमा यह है कि यह सज़ा सैनिक न्यायालय द्वारा न दी गई हो। राष्ट्रपति की अनुमति से उच्चतम न्यायालय की बैठक दिल्ली के अलावा कहीं और भी हो सकती है।
(ब) संकटकालीन अधिकार
संविधान में राष्ट्रपति को आपातकाल में कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं। आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति संकटकाल की घोषणा करके शासन अपने हाथों में ले सकता है। राष्ट्रपति देश में संकटकाल की घोषणा इन स्थितियों में कर सकता है:
1. युद्ध, बाहरी आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह या इसकी संभावना होने पर संकट उत्पन्न हो जाने पर। 2. राज्यों में संवैधानिक शासन के विफल होने के कारण संकट उत्पन्न हो जाने पर। 3. देश में वित्तीय संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाने पर।
In simple words: भारत के राष्ट्रपति के पास कई महत्वपूर्ण शक्तियाँ हैं, जैसे देश का शासन चलाना, कानून बनाना, पैसे से जुड़े फैसले लेना, अपराधियों को माफ़ करना और आपातकाल की घोषणा करना। वह देश के मुखिया होते हैं और संविधान के नियमों के अनुसार काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की शक्तियों को कार्यपालिका, विधायिका, वित्तीय, न्यायिक और आपातकालीन श्रेणियों में बांटकर याद रखना, उत्तर को व्यवस्थित बनाने में मदद करता है।

 

प्रश्न 4. भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन किस प्रकार होता है? कार्यपालिका के सर्वोच्च अध्यक्ष होने
या
के नाते उनका क्या महत्त्व है? भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन में कौन प्रत्याशी हो सकता है? [2009, 10]
या
राष्ट्रपति पद के लिए निर्धारित अनिवार्य योग्यताओं का उल्लेख कीजिए। [2012]
या
भारत के वर्तमान राष्ट्रपति का नाम बताइए। उसके पद की अर्हताएँ क्या हैं? उसकी निर्वाचन प्रक्रिया उदाहरण सहित समझाइए। [2013]
या
राष्ट्रपति का निर्वाचन कैसे होता है? [2012]
या
भारत के राष्ट्रपति की चुनाव प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। [2015]
या
भारतीय राष्ट्रपति का निर्वाचन कैसे होता है? राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए निर्धारित तीन योग्यताओं का उल्लेख कीजिए। [2017]
Answer: राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च अधिकारी और मुखिया होता है। भारत के वर्तमान राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द थे। (जानकारी अपडेट करने के लिए, वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू हैं)।
राष्ट्रपति पद के लिए ज़रूरी योग्यताएँ (अर्हताएँ)
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए ये योग्यताएँ होनी ज़रूरी हैं:
1. वह भारत का नागरिक हो। 2. वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो। 3. वह लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो। 4. वह संसद के किसी सदन या राज्य विधानमंडल का सदस्य न हो। 5. वह केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी भी लाभ के पद पर न हो।
राष्ट्रपति की निर्वाचन-प्रक्रिया
राष्ट्रपति के चुनाव में संसद और विधानमंडलों के मनोनीत सदस्य और विधान परिषदों के सदस्यों को वोट देने का अधिकार नहीं होता है। संसद के चुने हुए सदस्यों और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों के वोटों की संख्या बराबर रखी जाती है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि संसद अपने बहुमत का उपयोग करके राज्यों पर अपनी इच्छा न थोप सके, और न ही राज्य अपने बहुमत से संसद की इच्छा के खिलाफ काम कर सकें। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व के वोटों के मूल्य में एकरूपता लाने और राज्यों तथा संघ में संतुलन बनाए रखने के लिए, संसद और हर राज्य की विधानसभा के सदस्य के वोट का मूल्य एक खास तरीके से निकाला जाता है।
3. राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत-प्रणाली द्वारा गुप्त मतदान से होता है। सभी वोट देने वालों को मत-पत्र पर अपनी प्राथमिकताएँ 1, 2, 3,... लिखनी होती हैं। चुनाव जीतने के लिए हर उम्मीदवार को कम से कम एक निश्चित संख्या में वोट पाना ज़रूरी होता है। इस निश्चित संख्या को 'निर्धारित कोटा' कहते हैं। यह कोटा वैध वोटों का स्पष्ट बहुमत होता है, यानी आधे से ज़्यादा वोट मिलने चाहिए।
वोटों की गिनती के पहले चरण में, पहली प्राथमिकताओं की गिनती की जाती है। यदि इसमें किसी उम्मीदवार को निर्धारित कोटा मिल जाता है, तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है। यदि पहले चरण में किसी को भी कोटा नहीं मिलता, तो वोटों की गिनती दूसरे और फिर तीसरे चरण तक जारी रहती है, जब तक निर्धारित कोटा नहीं मिल जाता। दूसरे चरण में, उन उम्मीदवारों के वोटों को गिना जाता है जिनके सबसे कम वोट होते हैं और जिनके जीतने की संभावना कम होती है। उनके वोटों को दूसरे उम्मीदवारों को ट्रांसफर कर दिया जाता है। जब किसी उम्मीदवार को निर्धारित कोटा मिल जाता है, तो वोटों की गिनती रोक दी जाती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि जीतने वाले उम्मीदवार को व्यापक समर्थन मिले।
भारत के राष्ट्रपति का महत्त्व
राष्ट्रपति का पद भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में सबसे ऊंचा और सम्मानजनक है। राष्ट्रपति के अधिकारों और कार्यों को लेकर हमेशा विवाद रहा है। इस संबंध में सबसे बड़ा विवाद यह है कि क्या संविधान राष्ट्रपति को सभी मामलों में केवल मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करने के लिए मजबूर करता है।
"हमारे संविधान के अनुच्छेद 53 (1) के तहत संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है। लेकिन अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति को अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होगा।" इस तरह राष्ट्रपति को कार्यपालिका का केवल औपचारिक मुखिया बनाया गया है। संविधान के 44वें संशोधन (1978) द्वारा अनुच्छेद 74 (1) में फिर से बदलाव किया गया है। अब अनुच्छेद 74 (1) कहता है:
"राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का पालन करने में ऐसी सलाह के अनुसार काम करेगा। लेकिन राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर सामान्य या अन्यथा फिर से विचार करने के लिए कह सकेगा, और राष्ट्रपति ऐसे फिर से विचार के बाद दी गई सलाह के अनुसार काम करेगा।"
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि असली कार्यपालिका शक्तियाँ मंत्रिपरिषद में होती हैं। संविधान द्वारा राष्ट्रपति को दी गई शक्तियों का उपयोग व्यवहार में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद करते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि राष्ट्रपति का पद महत्वहीन है, लेकिन यह विचार सही नहीं है। संसदीय शासन प्रणाली में राष्ट्रपति के पद का विशेष महत्व है। वह देश का प्रतीक है, लोकतंत्र का रक्षक और संरक्षक है।
In simple words: राष्ट्रपति भारत का सबसे बड़ा पद है। इस पद के लिए व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए, 35 साल का होना चाहिए और लोकसभा सदस्य बनने की योग्यता रखनी चाहिए। राष्ट्रपति का चुनाव संसद और राज्य विधानसभाओं के चुने हुए सदस्यों द्वारा होता है, जहाँ हर वोट का मूल्य अलग होता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की योग्यताओं और चुनाव प्रक्रिया को क्रमबद्ध तरीके से याद करें, खासकर आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के सिद्धांतों को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 5. धन विधेयक तथा साधारण विधेयक का अन्तर स्पष्ट कीजिए। संसद में विधेयक किस प्रकार पारित किया जाता है? वित्त विधेयक तथा साधारण विधेयक में क्या अन्तर है? [2009, 17]
या
वित्त विधेयक तथा साधारण विधेयक में दो अन्तर बताइए। [2011, 13]
या
भारतीय संसद में कानून-निर्माण की प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
संसद में साधारण विधेयक पारित किये जाने की क्या प्रक्रिया है? इसके विभिन्न सोपानों का वर्णन कीजिए। राष्ट्रपति की इसमें क्या भूमिका है? [2014]
या
वित्त विधेयक क्या है? यह साधारण विधेयक से किस प्रकार भिन्न होता है? [2015]
या
संसद में वित्त विधेयक पारित होने की क्या प्रक्रिया है? दोनों सदनों में गत्यावरोध हो जाने पर वित्त विधेयक कैसे पारित होता है? [2017]
Answer:
धन विधेयक तथा साधारण विधेयक में अंतर: जिन विधेयकों का संबंध पैसे से होता है, उन्हें धन विधेयक कहते हैं। जिन विधेयकों का संबंध पैसे से नहीं होता, उन्हें साधारण विधेयक कहते हैं। धन विधेयक, साधारण विधेयकों से कई मामलों में अलग होते हैं, जैसे:
1. धन विधेयकों को लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा प्रमाणित किया जाना ज़रूरी है, जबकि साधारण विधेयकों के लिए यह ज़रूरी नहीं होता। 2. धन विधेयक राष्ट्रपति की पहले से अनुमति के बिना संसद में पेश नहीं किए जा सकते, जबकि साधारण विधेयक बिना पूर्व अनुमति के भी पेश किए जा सकते हैं। 3. धन विधेयक सबसे पहले लोकसभा में ही पेश किए जाते हैं, जबकि साधारण विधेयक किसी भी सदन में पेश किए जा सकते हैं। 4. राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती, वह उसे केवल 14 दिनों तक अपने पास रोक सकती है। साधारण विधेयकों के बारे में अलग नियम होते हैं। एक धन विधेयक सरकार के लिए आय और व्यय का निर्धारण करता है।
संसद में विधेयक पारित होने की प्रक्रिया
संसद में दोनों प्रकार के विधेयक पारित होने की प्रक्रिया इस प्रकार है:
(क) साधारण विधेयक पारित होने की प्रक्रिया
संसद का सबसे मुख्य काम कानून बनाना है। साधारण विधेयक संसद द्वारा पास होने के बाद भी, तब तक कानून नहीं बनता जब तक उस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर नहीं हो जाते। साधारण विधेयक पारित होने की प्रक्रिया इन चरणों में पूरी होती है:
1. विधेयक का प्रस्तुतीकरण और पहला वाचन: साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। इसे पेश करने का अधिकार संसद के हर सदस्य को है, लेकिन इसके लिए सदन के अध्यक्ष को एक महीने पहले सूचना देनी होती है। तय तारीख पर विधेयक पेश करने वाला सदन को उसका शीर्षक और उद्देश्य बताता है। इसे पहला वाचन कहते हैं।
2. दूसरा वाचन: पहले वाचन के कुछ समय बाद दूसरा वाचन होता है। दूसरे वाचन के लिए विधेयक पेश करने वाला यह तय करता है कि विधेयक पर जल्दी विचार किया जाए या उसे प्रवर समिति को सौंप दिया जाए, या फिर जनमत जानने के लिए उसे जनता के सामने फैलाया जाए। आमतौर पर विधेयक पर जल्दी विचार नहीं होता है। कुछ खास विधेयकों पर ही जल्दी विचार होता है। बाकी को विचार-विमर्श के लिए प्रवर समिति के पास भेज दिया जाता है। दूसरे वाचन में विधेयक के मूल सिद्धांतों पर ही चर्चा होती है, हर अनुच्छेद पर विस्तार से चर्चा नहीं की जाती है।
3. प्रवर समिति में विधेयक: प्रवर समिति सदन के कुछ सदस्यों से मिलकर बनती है। यह समिति विधेयक का गहराई से अध्ययन करती है और ज़रूरी जगहों पर बदलाव का सुझाव देती है। सभी ज़रूरी काम पूरे करने के बाद, समिति विधेयक को अपनी रिपोर्ट के साथ सदन को वापस भेज देती है।
4. रिपोर्ट अवस्था: समिति द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर सदन में विचार-विमर्श होता है। इस समय विधेयक की हर धारा पर गंभीरता से चर्चा की जाती है। इसके परिणामस्वरूप विधेयक में कई बदलाव पेश किए जाते हैं। इस प्रकार विधेयक की हर धारा पर पूरी तरह से विचार-विमर्श होने के बाद दूसरा वाचन खत्म हो जाता है।
5. तीसरा वाचन: विधेयक का तीसरा वाचन केवल औपचारिकता होती है। इस वाचन में विधेयक की भाषा और शब्दों में बदलाव के अलावा कोई और बदलाव नहीं किया जाता। आखिर में, इस विधेयक पर वोटिंग होती है। यदि इसे उपस्थित सदस्यों का बहुमत मिल जाता है, तो विधेयक उस सदन द्वारा पास कर दिया जाता है।
6. दूसरे सदन में विधेयक: पहले सदन द्वारा पास होने के बाद, विधेयक को विचार के लिए दूसरे सदन में भेजा जाता है। वहाँ भी पहले सदन की तरह इसके तीन वाचन होते हैं। यदि यह दूसरे सदन में भी पास हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेज दिया जाता है। यह भी हो सकता है कि दूसरा सदन इसे पास न करे या कुछ ऐसे बदलाव चाहे जो पहले सदन को मंज़ूर न हों। ऐसी स्थिति में, दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाई जाती है। संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करता है। संयुक्त बैठक में बहुमत के आधार पर विधेयक पर फैसला होता है कि उसे पास किया जाए या रद्द किया जाए। राज्यसभा किसी साधारण विधेयक को पास करने में ज़्यादा से ज़्यादा छह महीने की देरी कर सकती है।
7. राष्ट्रपति की स्वीकृति: दोनों सदनों से विधेयक के पास होने के बाद, उसे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद, यह विधेयक कानून का रूप ले लेता है और एक तय तारीख को पूरे देश में लागू कर दिया जाता है। यह भी हो सकता है कि राष्ट्रपति उसमें कुछ खामियाँ महसूस करें और उसे फिर से विचार के लिए संसद को भेज दें। लेकिन अगर संसद उसे दोबारा पास करके भेजती है, तो राष्ट्रपति को उस पर अनिवार्य रूप से हस्ताक्षर करने होते हैं। यह कानून बनाने की प्रक्रिया एक लंबी लेकिन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
(ख) धन-संबंधी या वित्तीय विधेयक पारित होने की प्रक्रिया
धन-संबंधी विधेयक एक खास तरीके से पास होता है। ये विधेयक केवल लोकसभा में ही मंत्रियों द्वारा पेश किए जा सकते हैं, और इन्हें पेश करने से पहले राष्ट्रपति की पूर्व-मंज़ूरी ज़रूरी होती है। लोकसभा में पास होने के बाद, ये विधेयक राज्यसभा में भेजे जाते हैं। राज्यसभा विधेयक पर विचार करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा 14 दिन तक रोक सकती है, यानी उसे 14 दिन के अंदर इस विधेयक को लोकसभा को वापस लौटा देना होता है। यदि राज्यसभा विधेयक को तय समय में पास कर देती है, तो दोनों सदनों से यह विधेयक पास माना जाता है। एक और खास बात यह है कि राज्यसभा के किसी बदलाव को मानने के लिए लोकसभा बाध्य नहीं होती। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि राज्यसभा इस विधेयक को तय समय में नहीं लौटाती, तो भी यह विधेयक 14 दिन के बाद पास माना जाता है। इस प्रकार, राज्यसभा वित्त-विधेयक को केवल 14 दिन तक ही रोक सकती है। दोनों सदनों में पास हो जाने के बाद, विधेयक को राष्ट्रपति के पास औपचारिक मंज़ूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति इस विधेयक पर अपनी मंज़ूरी देने के लिए बाध्य होता है, और उसके हस्ताक्षर होने के बाद यह विधेयक कानून बन जाता है।
In simple words: धन विधेयक पैसे से जुड़े होते हैं और सिर्फ लोकसभा में पेश होते हैं, जबकि साधारण विधेयक किसी भी सदन में पेश हो सकते हैं। कानून बनाने के लिए एक विधेयक को कई चरणों से गुजरना पड़ता है, जिसमें दोनों सदनों में चर्चा और वोटिंग होती है, और अंत में राष्ट्रपति की मंज़ूरी ज़रूरी होती है।

🎯 Exam Tip: धन विधेयक और साधारण विधेयक के बीच के मुख्य अंतरों को याद रखें, खासकर प्रस्तुति, राज्यसभा की शक्तियाँ और राष्ट्रपति की भूमिका के संदर्भ में।

 

प्रश्न 6. भारत के राष्ट्रपति के संकटकालीन अधिकारों का उल्लेख कीजिए। [2011, 12, 13]
या
यदि भारत के किसी राज्य में संवैधानिक शासन-तन्त्र विफल हो जाए तो राष्ट्रपति अपने किस अधिकार के अन्तर्गत कार्यवाही करेगा? ऐसी कार्यवाही का क्या प्रभाव पड़ेगा? राष्ट्रपति किन परिस्थितियों में देश में संकटकालीन स्थिति घोषित कर सकता है? संविधान द्वारा यदि उसे ये अधिकार न प्रदान किए गए होते तो देश में क्या स्थिति उत्पन्न हो सकती। [2011, 14, 18]
या
भारत में राष्ट्रपति बनने के लिए कौन-सी योग्यताएँ आवश्यक हैं? राष्ट्रपति की। आपातकालीन शक्तियों का वर्णन कीजिए। [2012]
या
राष्ट्रपति किन तीन प्रकार की स्थितियों में आपातकाल घोषित कर सकता है? क्या वह ऐसा स्वेच्छा से कर सकता है? [2012]
या
भारत के राष्ट्रपति के किन्हीं दो संकटकालीन अधिकारों पर प्रकाश डालिए। [2013]
या
राष्ट्रपति के तीन संकटकालीन अधिकारों का उल्लेख कीजिए। [2013]
या
संक्षेप में राष्ट्रपति के आपातकालीन अधिकारों का वर्णन कीजिए। [2014, 15]
या
राष्ट्रपति किन-किन परिस्थितियों में संकटकाल की घोषणा कर सकता है? [2014]
या
उन तीन परिस्थितियों को समझाइए जब राष्ट्रपति अपनी संकटकालीन शक्तियों का प्रयोग कर सकता है? [2015, 16]
या
भारत के राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए। [2015]
या
राष्ट्रपति किन परिस्थितियों में देश में आपातकाल घोषित करता है? उनमें से किन्हीं दो को संक्षेप में लिखिए। [2016]
Answer: देश पर कभी भी कोई संकट आ सकता है, इसलिए भारतीय संविधान में राष्ट्रपति को संकटकालीन स्थिति से निपटने के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। इन अधिकारों का उपयोग केवल आपातकालीन स्थितियों में ही किया जा सकता है, न कि छोटी-मोटी हिंसक गतिविधियों पर। इन्हें आपातकालीन या संकटकालीन अधिकार कहते हैं। राष्ट्रपति के संकटकालीन अधिकारों में निम्नलिखित तीन प्रकार की आपातकालीन स्थितियाँ शामिल हैं:
1. युद्ध या बाहरी आक्रमण अथवा सशस्त्र विद्रोह के कारण उत्पन्न संकटकालीन अवस्था। 2. संवैधानिक शासन की असफलता से उत्पन्न संकट की अवस्था (राज्यों में)। 3. देशव्यापी आर्थिक अथवा वित्तीय संकट की अवस्था।
1. युद्ध या बाहरी आक्रमण अथवा सशस्त्र विद्रोह के कारण संकटकालीन अवस्था (अनुच्छेद 352): जब राष्ट्रपति को पूरा विश्वास हो जाए कि देश पर बाहरी आक्रमण, युद्ध या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति आ गई है या आने वाली है, तो वह संकटकाल की घोषणा करके पूरे देश या संकटग्रस्त क्षेत्र का शासन अपने हाथ में ले सकता है। संविधान ने राष्ट्रपति को यह घोषणा करने का अधिकार दिया है। भारत में अब तक चार बार इस प्रकार के संकटकाल की घोषणा हो चुकी है। यह शक्ति देश की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति आपातकालीन स्थिति की घोषणा तभी कर सकता है जब मंत्रिपरिषद उसे लिखित रूप में ऐसा करने का अनुरोध करे। घोषणा लागू होने के एक महीने के अंदर संसद द्वारा दो-तिहाई बहुमत से इसे मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है। अगर घोषणा के बाद लोकसभा भंग हो जाए और उसे मंज़ूरी न मिल पाए, तो राज्यसभा को एक महीने के अंदर इसे मंज़ूरी देनी पड़ती है। बाद में, जब लोकसभा का सत्र शुरू होता है, तो 30 दिन के अंदर लोकसभा से भी इसे मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है। यदि 30 दिन की अवधि में मंज़ूरी नहीं मिलती, तो यह घोषणा अपने आप खत्म मानी जाती है।
संसद के दोनों सदनों द्वारा मंज़ूरी मिलने पर यह घोषणा ज़्यादा से ज़्यादा 6 महीने तक लागू रह सकती है। इसे ज़्यादा समय तक लागू रखने के लिए हर 6 महीने बाद संसद की मंज़ूरी ज़रूरी होती है। लोकसभा साधारण बहुमत से इस संकटकालीन घोषणा को खत्म कर सकती है।
2. संवैधानिक शासन की असफलता से उत्पन्न संकट की अवस्था (अनुच्छेद 356): भारत भले ही एक संघीय देश है, लेकिन यहाँ सभी राज्यों के लिए एक जैसी शासन-व्यवस्था है। यदि किसी राज्य में संविधान के अनुसार शासन नहीं चल रहा हो, तो राष्ट्रपति उस राज्य में आपातकाल की घोषणा करके राज्य का शासन अपने हाथ में ले लेता है। ऐसी स्थिति में, उस राज्य में राष्ट्रपति का शासन लागू हो जाता है। राज्य में संकटकालीन स्थिति की सूचना राज्यपाल राष्ट्रपति तक पहुँचाते हैं, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि राज्यपाल द्वारा सूचना दिए जाने पर उस राज्य में आपातकाल की घोषणा हो ही जाए। इसका फैसला राष्ट्रपति पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, 1998 में बिहार के राज्यपाल द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद राष्ट्रपति ने वहाँ आपातकालीन स्थिति की घोषणा नहीं की थी। इस प्रकार की संकटकालीन घोषणा को भी संसद में मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है। इसे लागू रखने की भी वही शर्तें हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर संकटकालीन घोषणा के संदर्भ में तय की गई हैं। संसद की मंज़ूरी मिलने पर यह 6 महीने तक लागू रह सकती है; लेकिन 42वें संवैधानिक संशोधन (1976) के आधार पर इस अवधि को 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल कर दिया गया है। एक-एक साल बढ़ाकर संकटकालीन घोषणा की अवधि को ज़्यादा से ज़्यादा तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है।
3. देशव्यापी आर्थिक अथवा वित्तीय संकट की अवस्था (अनुच्छेद 360): संविधान की धारा 360 द्वारा राष्ट्रपति को आर्थिक संकट की घोषणा करने का अधिकार दिया गया है। राष्ट्रपति यह घोषणा तब कर सकता है जब उसे यह विश्वास हो जाए कि पूरे भारत या किसी खास राज्य में वित्तीय संकट की स्थिति है। जो शर्तें राष्ट्रीय संकटकालीन घोषणा पर लागू होती हैं, वही इस घोषणा पर भी लागू होती हैं। इसे भी एक महीने के अंदर संसद से मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है। इसे केवल राष्ट्रपति अपनी दूसरी घोषणा द्वारा ही खत्म कर सकता है। इस प्रकार की घोषणा भारत में अभी तक नहीं हुई है।
संकटकालीन अधिकारों की समीक्षा
कुछ आलोचकों का मानना है कि राष्ट्रपति के संकटकालीन अधिकारों का दुरुपयोग करके वह तानाशाह बन सकता है, इसलिए ये अधिकार लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के खिलाफ हैं। लेकिन ऐसा कहने वाले यह भूल जाते हैं कि असामान्य परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन व्यवस्था लागू करना बहुत ज़रूरी होता है। इन व्यवस्थाओं का दुरुपयोग न हो, इसके लिए संविधान में भी प्रावधान किए गए हैं।
आपातकालीन शक्तियों के प्रयोग में भी राष्ट्रपति केवल संवैधानिक मुखिया की भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रपति की यह स्थिति उनके पद को बहुत ही गौरवपूर्ण बना देती है। लेकिन व्यवहार में वह इन शक्तियों का उपयोग अपनी मर्जी से नहीं करते, बल्कि मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं। इसलिए व्यवहार में उनकी शक्तियाँ सीमित हैं।
In simple words: राष्ट्रपति तीन तरह से आपातकाल घोषित कर सकता है: युद्ध या विद्रोह होने पर, किसी राज्य में सरकार फेल होने पर, या देश में आर्थिक संकट आने पर। इन शक्तियों का उद्देश्य देश की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन इनका उपयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही होता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के तीनों प्रकार के आपातकालीन अधिकारों (अनुच्छेद 352, 356, 360) को उनके कारणों और प्रभावों सहित स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 7. भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकारों तथा राज्य के नीति-निदेशक तत्त्वों में अन्तर स्पष्ट कीजिए। [2016, 18]
Answer: भारतीय संविधान में वर्णित नीति-निदेशक सिद्धांत और मौलिक अधिकारों में निम्नलिखित अंतर पाए जाते हैं:
1. राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांतों और मौलिक अधिकारों में यह अंतर है कि मौलिक अधिकार होने के बावजूद ये निदेशक सिद्धांत न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते। निदेशक सिद्धांत सरकारी अधिकारियों के लिए नैतिक आदर्शों के रूप में हैं, जबकि मौलिक अधिकार वाद योग्य हैं। अगर मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो कोई भी व्यक्ति न्यायपालिका से मदद मांग सकता है। 2. इस प्रकार दोनों में अंतर यह है कि मौलिक अधिकारों को लागू करने में कानून की बाध्यकारी शक्ति होती है, जबकि नीति-निदेशक सिद्धांतों में केवल नैतिक शक्ति होती है। इन सिद्धांतों को मानने के लिए राज्य को बाध्य नहीं किया जा सकता। 3. मौलिक अधिकारों की प्रकृति नकारात्मक है, जबकि नीति-निदेशक सिद्धांतों की प्रकृति सकारात्मक है। ग्लैडहिल ने दोनों में अंतर बताते हुए लिखा है-"मौलिक अधिकार राज्य के लिए कुछ मनाही वाले आदेश हैं। इनके द्वारा राज्य को यह आदेश दिया गया है कि उसे लोगों के इन अधिकारों में गलत हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये लोगों के पवित्र अधिकार हैं।" इसके विपरीत, राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत बताते हैं कि राज्य को क्या करना चाहिए, जिससे समाज का भला हो सके। 4. संविधान के भाग III में मौलिक अधिकारों का वर्णन मिलता है, जबकि भाग IV में नीति-निदेशक सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। 5. जहाँ मौलिक अधिकारों द्वारा राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना की गई है, वहीं नीति-निदेशक सिद्धांतों द्वारा सामाजिक तथा आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना की गई है। ग्रेनविल ऑस्टिन ने इसी कारण निदेशक सिद्धांतों को सामाजिक-आर्थिक स्वतंत्रता की घोषणा कहा है। 6. मौलिक अधिकारों को (अनुच्छेद 20 तथा 21 में वर्णित अधिकारों को छोड़कर) अनुच्छेद 352 के तहत घोषित आपातकालीन स्थिति में स्थगित किया जा सकता है, जबकि निदेशक तत्वों को आपातकालीन स्थिति में भी स्थगित नहीं किया जा सकता है। यह दिखाता है कि संकट के समय भी कुछ सिद्धांत बने रहते हैं। 7. मौलिक अधिकार पूरी तरह से निरपेक्ष नहीं हैं, उन पर कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए हैं, जबकि निदेशक सिद्धांतों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालाँकि मौलिक अधिकारों और नीति-निदेशक तत्वों में अंतर किया जाता है, लेकिन ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ये दोनों ही अधिकार के रूप में हैं और मानव के व्यक्तित्व के विकास के लिए दोनों ज़रूरी हैं। जहाँ मौलिक अधिकार नागरिकों की राजनीतिक निरंकुशता से रक्षा करते हैं, वहीं दूसरी ओर नीति-निदेशक सिद्धांत आर्थिक निरंकुशता से रक्षा करते हैं। मौलिक अधिकार तथा नीति-निदेशक सिद्धांतों के बीच कोई विरोध नहीं है, ये एक-दूसरे के पूरक हैं।
In simple words: मौलिक अधिकार लोगों के व्यक्तिगत हक हैं जिन्हें सरकार को छीनने की अनुमति नहीं है और इन्हें अदालत से लागू करवाया जा सकता है। जबकि नीति-निदेशक सिद्धांत सरकार के लिए सलाह हैं कि वह कैसे काम करे ताकि समाज का भला हो, इन्हें अदालत से सीधे लागू नहीं कराया जा सकता।

🎯 Exam Tip: मौलिक अधिकारों और नीति-निदेशक सिद्धांतों के बीच के मुख्य अंतरों (लागू होने की प्रकृति, उद्देश्य, और संविधान में स्थान) को याद रखें और उन्हें स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु क्या है? वह कैसे निर्वाचित होता है? वह कितने वर्ष के लिए निर्वाचित होता है? [2014]
या
क्या भारत के उपराष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होने के लिए संसद का सदस्य होना अनिवार्य है? इस पद के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए? इसके निर्वाचन की प्रक्रिया समझाइए। [2018]
Answer: राष्ट्रपति के अलावा, भारत में एक उपराष्ट्रपति भी होता है। उसके चुनाव की प्रक्रिया राष्ट्रपति के चुनाव से अलग होती है। उसके चुनाव मंडल में संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य शामिल होते हैं। उपराष्ट्रपति का चुनाव वही व्यक्ति लड़ सकता है जो भारत का नागरिक हो, जिसकी उम्र 35 साल या उससे ज़्यादा हो, और जो राज्यसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों द्वारा एकल संक्रमणीय मत-पद्धति और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की विधि से गुप्त मतदान द्वारा होता है। पद संभालने से पहले उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के सामने पद और निष्ठा की शपथ लेनी होती है।
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच साल का होता है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति या बीमारी की अवस्था में वह राष्ट्रपति के कार्यों को पूरा करता है। यदि राष्ट्रपति इस्तीफा दे देता है या उनकी मृत्यु हो जाती है, तो उपराष्ट्रपति तब तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में काम करता है जब तक नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता।
संविधान में यह व्यवस्था भी है कि उपराष्ट्रपति को 14 दिन का नोटिस देकर, राज्यसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत से उसे हटाने का प्रस्ताव पास कर सकती है, लेकिन इस प्रस्ताव को लोकसभा की भी मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है। उपराष्ट्रपति को कोई वेतन या भत्ता नहीं मिलता है। उसे जो वेतन दिया जाता है, वह राज्यसभा के सभापति के रूप में मिलता है। उसका वेतन और भत्ता लोकसभा अध्यक्ष के वेतन और भत्ते के बराबर होता है। उपराष्ट्रपति का पद देश की व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: उपराष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 35 साल की उम्र होनी चाहिए। उसका चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा होता है और वह 5 साल के लिए चुना जाता है।

🎯 Exam Tip: उपराष्ट्रपति की न्यूनतम आयु, चुनाव प्रक्रिया (एकल संक्रमणीय मत प्रणाली) और कार्यकाल को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

प्रश्न 2. केन्द्रीय सरकार के विभिन्न अंगों का उल्लेख कीजिए तथा किसी एक पर टिप्पणी लिखिए।
या
भारतीय संसद के संगठन का वर्णन कीजिए।
Answer: केन्द्रीय सरकार के निम्नलिखित तीन अंग हैं:
1. संसद या विधायिका या व्यवस्थापिका (लोकसभा एवं राज्यसभा), 2. कार्यपालिका (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद), और 3. न्यायपालिका (उच्चतम या सर्वोच्च न्यायालय)।
भारतीय संविधान में यह व्यवस्था है कि भारतीय संघ में एक संसद होगी, जिसका निर्माण राष्ट्रपति और दो सदनों-लोकसभा व राज्यसभा-से मिलकर होगा।
लोकसभा: यह संसद का निचला सदन है। इसके सदस्य जनता द्वारा सीधे वयस्क मताधिकार के आधार पर चुने जाते हैं। लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 हो सकती है। इनमें से 530 सदस्य विभिन्न राज्यों से और 20 सदस्य संघ-शासित क्षेत्रों से चुने जाते हैं। राष्ट्रपति को 2 एंग्लो-इंडियन समुदाय से सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार है। लोकसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है, लेकिन प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति समय से पहले भी लोकसभा को भंग कर सकता है। लोकसभा का सभापति 'स्पीकर' कहलाता है। लोकसभा जनता की सीधी आवाज का प्रतिनिधित्व करती है।
राज्यसभा: राज्यसभा संसद का ऊपरी सदन है। यह राज्यों का प्रतिनिधि सदन है। इसके सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 होती है। इनमें से 238 सदस्य विभिन्न राज्यों तथा संघ-शासित क्षेत्रों के प्रतिनिधि होते हैं और 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं, जो कला, साहित्य, विज्ञान तथा समाज-सेवा के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त होते हैं। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जो कभी भंग नहीं होता। इसके हर सदस्य का कार्यकाल 6 साल होता है। इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल बाद अवकाश ग्रहण कर लेते हैं। भारत का उपराष्ट्रपति इसका पदेन सभापति होता है।
In simple words: केन्द्रीय सरकार के तीन अंग हैं- संसद (विधायिका), कार्यपालिका और न्यायपालिका। संसद के दो सदन लोकसभा (निचला सदन) और राज्यसभा (ऊपरी सदन) हैं, जो देश के कानून बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: केन्द्रीय सरकार के तीनों अंगों के नाम और उनके मुख्य कार्य संक्षेप में बताएं, खासकर संसद के दोनों सदनों की भूमिका पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 3. अनेक शिक्षाविद् यह माँग कर रहे हैं कि अन्य अखिल भारतीय सेवाओं की भाँति एक अखिल भारत शिक्षा सेवा भी प्रारम्भ की जाए। इसके लिए उन्हें पहले किस पर दबाव डालना चाहिए-लोकसभा पर या राज्यसभा पर? कारण भी दीजिए।
Answer: अखिल भारत शिक्षा सेवा को शुरू कराने के लिए शिक्षाविदों को राज्यसभा पर दबाव डालना चाहिए।
कारण: सेवाओं के संबंध में संविधान में अखिल भारतीय सेवाओं के निर्माण का प्रावधान है। ये अखिल भारतीय सेवाएँ केन्द्रीय सेवाओं से अलग होती हैं। केन्द्रीय सेवाएँ संघ की सेवाएँ होती हैं, जबकि अखिल भारतीय सेवाएँ पूरे देश में काम करने के लिए बनाई जाती हैं, जैसे भारतीय विदेश सेवा। अखिल भारतीय सेवा शब्द एक तकनीकी शब्द है। इसे संविधान में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और ऐसी ही अन्य सेवाओं के लिए उपयोग किया गया है। इन्हें संविधान के अनुच्छेद 312 में दिए गए तरीके से इस वर्ग में शामिल किया जा सकता है। इस अनुच्छेद में यह प्रावधान है कि यदि राज्यसभा ने उपस्थित और वोट देने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन वाले संकल्प द्वारा यह घोषणा की है कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना ज़रूरी या सही है, तो संसद कानून द्वारा संघ और राज्यों के लिए एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं के निर्माण का प्रावधान कर सकेगी। इसलिए, शिक्षाविदों को राज्यसभा पर दबाव डालना चाहिए क्योंकि अखिल भारतीय सेवाओं का गठन राज्यसभा की विशेष शक्ति के तहत होता है।
In simple words: शिक्षाविदों को अखिल भारत शिक्षा सेवा शुरू कराने के लिए राज्यसभा पर दबाव डालना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि संविधान के अनुसार, अखिल भारतीय सेवाओं का गठन करने का अधिकार राज्यसभा के पास ही है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास करना होता है।

🎯 Exam Tip: अखिल भारतीय सेवाओं के गठन में राज्यसभा की विशेष भूमिका को याद रखें और अनुच्छेद 312 का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 4. राष्ट्रपति को उसके पद से हटाए जाने की संवैधानिक प्रक्रिया समझाइए। [2013]
या
राष्ट्रपति को अपदस्थ किये जाने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। [2013]
Answer: भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, लेकिन संविधान में दी गई प्रक्रिया के अनुसार उन्हें महाभियोग लगाकर उनके पद से हटाया भी जा सकता है। राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने का अधिकार भारतीय संसद के दोनों सदनों को प्राप्त है। महाभियोग प्रस्ताव पेश करने वाले सदन के कुल सदस्यों के एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर उस अभियोग पत्र पर होना ज़रूरी है। अभियोग लगाने के 14 दिन बाद, उस सदन में उस पर विचार किया जाता है। यदि सदन के कुल सदस्यों के दो-तिहाई सदस्यों द्वारा वह प्रस्ताव मंज़ूर हो जाता है, तो उसके बाद वह अभियोग भारतीय संसद के दूसरे सदन में भेजा जाता है।
दूसरा सदन इन अभियोगों की या तो खुद जांच करता है, या इस काम के लिए एक विशेष समिति नियुक्त करता है। राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह सदन में खुद उपस्थित होकर या अपने किसी प्रतिनिधि के द्वारा महाभियोग की जांच में भाग ले सकते हैं। यदि सदन में राष्ट्रपति के खिलाफ लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं और दूसरे सदन में भी कुल सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से महाभियोग का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो राष्ट्रपति अपने पद से हट जाते हैं। इस संबंध में खास बात यह है कि इस दौरान वह अपने पद पर लगातार काम करते रहते हैं। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रपति को केवल गंभीर उल्लंघनों के लिए ही हटाया जा सके।
In simple words: राष्ट्रपति को महाभियोग द्वारा पद से हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन में शुरू हो सकती है, जिसमें एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर हों। अगर दोनों सदनों से दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास हो जाता है, तो राष्ट्रपति को अपना पद छोड़ना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: महाभियोग प्रक्रिया के चरणों (प्रस्ताव, सदन का बहुमत, दूसरे सदन की जांच, और दो-तिहाई बहुमत) को स्पष्ट रूप से याद करें।

 

प्रश्न 5. लोकसभा तथा राज्यसभा के मध्य सम्बन्ध का वर्णन कीजिए। लोकसभा राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली क्यों है?
या
संसद के दो सदन क्या हैं? इनके मध्य पारस्परिक सम्बन्धों की विवेचना कीजिए। [2011]
या
लोकसभा और राज्यसभा में से कौन-सा सदन किस प्रकार शक्तिशाली है? क्यों? [2013]
Answer: संसद के दो सदन लोकसभा और राज्यसभा हैं।
लोकसभा एवं राज्यसभा के मध्य पारस्परिक सम्बन्ध
वर्तमान में लोकसभा की सदस्य संख्या 543+2 = 545 है। राष्ट्रपति लोकसभा में दो एंग्लो-इंडियन सदस्यों को भी मनोनीत करते हैं। राज्यसभा की सदस्य संख्या वर्तमान में 245 है। लोकसभा के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा सीधे होता है और इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर इसे तय अवधि से पहले भी भंग कर सकते हैं। राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है और इसके सदस्यों का चुनाव राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्यों द्वारा होता है। यह एक स्थायी सदन है और इसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है।
केन्द्रीय मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति जवाबदेह होती है। इसलिए यही सदन उसे नियंत्रित करता है। राज्यसभा मंत्रिपरिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करके उसे पद से हटा नहीं सकती, जबकि लोकसभा ऐसा कर सकती है। राज्यसभा मंत्रियों से सवाल और पूरक प्रश्न पूछ सकती है और उनकी नीतियों की आलोचना भी कर सकती है। असल में मंत्रीगण लोकसभा के प्रति ही जवाबदेह होते हैं। धन विधेयक और बजट सबसे पहले लोकसभा में ही पेश किए जाते हैं। लोकसभा में विधेयक पास होने के बाद राज्यसभा में जाता है। वहाँ इस विधेयक की आलोचना तो की जा सकती है लेकिन इसे रद्द नहीं किया जा सकता और न ही इसमें किसी तरह की कटौती की जा सकती है। यह वित्तीय नियंत्रण की लोकसभा की शक्ति को दर्शाता है।
राष्ट्रपति पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाने में दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के अधिकार बराबर हैं। जब एक सदन राष्ट्रपति पर आरोप लगाता है, तो दूसरा सदन इस बात की जांच करता है। महाभियोग का प्रस्ताव उसी समय रखा जा सकता है, जब संबंधित सदन (महाभियोग लगाने वाला सदन) उस प्रस्ताव पर अपने कुल सदस्यों के 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर करवा लेता है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के चुने हुए सदस्य भाग लेते हैं।
लोकसभा के सदस्य अपने में से ही एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष को चुनते हैं, और राज्यसभा के सदस्य अपने में से एक उपसभापति का चुनाव करते हैं। संविधान में बदलाव करने की दृष्टि से भी दोनों सभाओं को बराबर अधिकार मिले हैं। संविधान में संशोधन संबंधी विधेयक किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है; लेकिन विधेयक के संबंध में दोनों सभाओं की स्वीकृति होना ज़रूरी है। संशोधन संबंधी किसी भी प्रस्ताव पर दोनों सदनों में मतभेद होने की स्थिति में प्रस्ताव खत्म हो जाता है। इस संबंध में संयुक्त अधिवेशन बुलाने की व्यवस्था नहीं है। संसद का सबसे महत्वपूर्ण काम कानून बनाना है। ये कानून दो प्रकार के होते हैं: (i) साधारण और (ii) वित्तीय। साधारण कानून के संदर्भ में सैद्धांतिक रूप से दोनों सदनों को बराबर अधिकार प्राप्त हैं। किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में मतभेद होने पर राष्ट्रपति संयुक्त अधिवेशन बुलाता है। संयुक्त अधिवेशन के समय लोकसभा के सदस्यों की संख्या ज़्यादा होने के कारण लोकसभा की बात ही मान्य होती है। राज्यसभा साधारण विधेयक को ज़्यादा से ज़्यादा 6 महीने तक रोक सकती है।
उच्चतम और उच्च न्यायालय के किसी भी न्यायाधीश को पद से हटाने के संदर्भ में भी दोनों सदनों की सहमति ज़रूरी है। राष्ट्रपति द्वारा जारी की गई संकटकालीन घोषणा को भी दोनों सदनों द्वारा मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है।
नई अखिल भारतीय सेवाओं के गठन का अधिकार राज्यसभा उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत के द्वारा केन्द्रीय सरकार को दे सकती है। यदि राज्यसभा उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से राज्य-सूची के किसी विषय को राष्ट्रीय महत्व का विषय घोषित कर दे, तो संसद को उस विषय पर कानून बनाने का अधिकार मिल जाता है।
इस प्रकार तुलनात्मक अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि लोकसभा राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली है। लोकसभा जनता की इच्छा का सीधा प्रतिनिधित्व करती है, जिससे उसे अधिक शक्ति मिलती है।
In simple words: लोकसभा और राज्यसभा संसद के दो सदन हैं। लोकसभा जनता का सीधा प्रतिनिधित्व करती है और ज़्यादा शक्तिशाली है, खासकर पैसे से जुड़े कानूनों में। राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है और स्थायी सदन है, लेकिन इसकी शक्तियाँ लोकसभा से कम हैं।

🎯 Exam Tip: लोकसभा और राज्यसभा के बीच संबंधों को वित्तीय शक्तियों, मंत्रिपरिषद के प्रति जवाबदेही और साधारण कानूनों पर नियंत्रण के आधार पर स्पष्ट करें।

 

Question 6. भारत के उपराष्ट्रपति के अधिकारों एवं कर्तव्यों का वर्णन कीजिए। राज्यसभा के सभापति की शक्तियाँ एवं कार्य क्या हैं? भारत के उपराष्ट्रपति के किन्हीं दो कार्यों का वर्णन कीजिए। [2013, 2016]
Answer: उपराष्ट्रपति भारत में राष्ट्रपति के बाद दूसरा सर्वोच्च पदाधिकारी होता है। वह राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उसके कार्यों को संभालता है और राज्यसभा के सभापति के रूप में सदन की कार्यवाही का संचालन करता है।
यहां उपराष्ट्रपति के प्रमुख अधिकार और कर्तव्य दिए गए हैं:
1. उपराष्ट्रपति राज्यसभा का मुखिया होता है। उसका मुख्य काम सभा की बैठकों को चलाना और उनमें शांति बनाए रखना है। यह सुनिश्चित करता है कि विधायी प्रक्रिया सुचारु रूप से चले।
2. जब राष्ट्रपति बीमार होते हैं या किसी कारण से पद पर नहीं होते, तो उपराष्ट्रपति उनका काम संभालते हैं। इस दौरान उनके पास राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ और अधिकार होते हैं।
3. अगर राज्यसभा में किसी बिल या प्रस्ताव पर बराबर वोट पड़ते हैं, तो उपराष्ट्रपति अपना निर्णायक वोट डालकर फैसला करते हैं।
4. अगर राष्ट्रपति की मौत हो जाए या वे इस्तीफा दे दें, तो उपराष्ट्रपति तब तक कार्यवाहक राष्ट्रपति का काम संभालते हैं जब तक नया राष्ट्रपति नहीं चुना जाता। उपराष्ट्रपति का पद यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रपति के पद के खाली होने पर भी देश का कामकाज सुचारु रूप से चलता रहे।
In simple words: उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की जगह काम करते हैं जब वे न हों, और राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। अगर राज्यसभा में वोट बराबर हों, तो वे अपना वोट डालकर फैसला करते हैं।

🎯 Exam Tip: उपराष्ट्रपति की भूमिका में दोहरी जिम्मेदारी होती है: राष्ट्रपति के सहायक के रूप में और राज्यसभा के प्रमुख के रूप में। इन दोनों पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 7. लोकसभा अध्यक्ष के प्रमुख कार्यों एवं शक्तियों का वर्णन कीजिए। [2014, 15, 16, 2018]
Answer: लोकसभा अध्यक्ष सदन का सबसे महत्वपूर्ण पदाधिकारी होता है, जो सदन की कार्यवाही का संचालन और अनुशासन बनाए रखता है। अध्यक्ष को लोकसभा के सदस्यों द्वारा चुना जाता है।
लोकसभा अध्यक्ष के प्रमुख कार्य और शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
1. लोकसभा अध्यक्ष का मुख्य काम लोकसभा की बैठकों की अध्यक्षता करना और कार्यवाही को चलाना है। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि बहसें नियमों के अनुसार हों।
2. वह सदन में अनुशासन और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। अगर कोई सदस्य नियम तोड़ता है, तो अध्यक्ष उसे सदन से बाहर निकाल सकते हैं।
3. अध्यक्ष ही सदस्यों को बोलने की इजाजत देते हैं, और सदस्य अपनी बात रखते समय अध्यक्ष को संबोधित करते हैं।
4. ज़रूरत पड़ने पर वे सदन की कार्यवाही रोक भी सकते हैं।
5. वह लोकसभा सदस्यों से नियमों का पालन करवाते हैं और वोटों की गिनती के बाद नतीजे घोषित करते हैं।
6. अध्यक्ष यह फैसला करते हैं कि कोई बिल पैसे से जुड़ा है (वित्त विधेयक) या सामान्य बिल (साधारण विधेयक)। उनका निर्णय अंतिम होता है।
7. वह यह भी तय करते हैं कि 'काम रोको' प्रस्ताव नियमों के अनुसार है या नहीं।
8. जब कोई बिल सदन में पास हो जाता है, तो अध्यक्ष उस पर दस्तखत करते हैं और उसे दूसरे सदन में भेजने का इंतज़ाम करते हैं।
9. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक होने पर, अध्यक्ष ही उसकी अध्यक्षता करते हैं।
10. वह सदस्यों के खास अधिकारों की रक्षा करते हैं।
11. अगर किसी मामले में बराबर वोट पड़ते हैं, तो अध्यक्ष अपना निर्णायक वोट देते हैं।
12. वह राष्ट्रपति को लोकसभा के फैसलों के बारे में भी बताते हैं। लोकसभा अध्यक्ष का पद सदन की निष्पक्षता और गरिमा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: लोकसभा अध्यक्ष सदन की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, अनुशासन बनाए रखते हैं, सदस्यों को बोलने देते हैं, और यह तय करते हैं कि कौन सा बिल वित्तीय है। वे संसद की संयुक्त बैठकों की भी अध्यक्षता करते हैं।

🎯 Exam Tip: लोकसभा अध्यक्ष की शक्तियों में सदन को चलाना, अनुशासन बनाए रखना, और बिलों को प्रमाणित करना शामिल है। इन मुख्य बिंदुओं को याद रखें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. संसद के तीन अंग कौन-कौन से हैं? संसद के दोनों सदनों के नाम लिखिए। [2014]
Answer: संसद के तीन अंग होते हैं: व्यवस्थापिका (कानून बनाने वाली), कार्यपालिका (कानून लागू करने वाली) और न्यायपालिका (न्याय करने वाली)। भारतीय संसद के दो सदन लोकसभा (निचला सदन) और राज्यसभा (ऊपरी सदन) हैं। ये तीनों अंग मिलकर देश के शासन को चलाते हैं और कानून बनाने का काम करते हैं।
In simple words: संसद के तीन अंग हैं- व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। संसद के दो सदन लोकसभा और राज्यसभा हैं।

🎯 Exam Tip: संसद के अंगों और सदनों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें; यह भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल संरचना है।

 

Question 2. राज्यसभा किसका प्रतिनिधित्व करती है ?
Answer: राज्यसभा भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है, यानी यह राज्यों की आवाज़ संसद में उठाती है। यह सुनिश्चित करता है कि राज्यों की चिंताओं और हितों को राष्ट्रीय कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल किया जा सके। इस तरह, यह राज्यों को देश की कानून बनाने की प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देती है।
In simple words: राज्यसभा भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि राज्यसभा राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि लोकसभा पूरे देश के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है।

 

Question 3. राज्यसभा में वर्तमान समय में कितने सदस्य हैं ?
Answer: राज्यसभा में अभी कुल 245 सदस्य हैं। इनमें से कुछ सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं, जबकि बाकी राज्यों की विधानसभाओं द्वारा चुने जाते हैं। यह सदन एक स्थायी निकाय है।
In simple words: राज्यसभा में अभी 245 सदस्य हैं।

🎯 Exam Tip: राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या और राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. राज्यसभा के सदस्य कितने समय के लिए चुने जाते हैं ?
Answer: राज्यसभा के सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं। हालांकि, राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसके एक तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते रहते हैं, जिससे निरंतरता बनी रहती है।
In simple words: राज्यसभा के सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: इस बात पर ध्यान दें कि राज्यसभा के सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं, लेकिन सदन कभी भंग नहीं होता।

 

Question 5. राज्यसभा का कार्यकाल कितना है ?
Answer: राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है। इसका स्थायी होना यह सुनिश्चित करता है कि विधायी प्रक्रिया में निरंतरता बनी रहे और अनुभव बना रहे।
In simple words: राज्यसभा एक स्थायी सदन है जिसका कार्यकाल 6 साल का होता है और यह कभी भंग नहीं होता।

🎯 Exam Tip: लोकसभा के विपरीत, राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके सदस्यों का कार्यकाल निश्चित होता है; यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।

 

Question 6. राज्यसभा में कितने सदस्यों को मनोनीत किया जा सकता है ?
Answer: राज्यसभा में कुल 233 सदस्य चुने जाते हैं, और राष्ट्रपति 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं। राष्ट्रपति इन 12 सदस्यों को कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से चुनते हैं, जो इन क्षेत्रों में विशेष ज्ञान और अनुभव रखते हैं।
In simple words: राज्यसभा में 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या और उनके चुने जाने वाले क्षेत्रों को याद रखें।

 

Question 7. राज्यसभा का सभापति कौन होता है ? [2011]
Answer: भारत का उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा का सभापति होता है। वह राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और सदन के कामकाज को सुचारू रूप से चलाते हुए अनुशासन बनाए रखते हैं।
In simple words: भारत का उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा का सभापति होता है।

🎯 Exam Tip: उपराष्ट्रपति का पद राज्यसभा के सभापति के रूप में उनकी प्राथमिक भूमिका है; इस तथ्य को स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 8. यदि किसी व्यक्ति की वर्तमान आयु 20 वर्ष है तो उसे राज्यसभा का सदस्य बनने की अर्हता प्राप्त करने के लिए कितने वर्ष तक प्रतीक्षा करनी होगी ? क्यों ? [2012]
Answer: यदि किसी व्यक्ति की आयु 20 वर्ष है, तो उसे राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए 10 साल इंतज़ार करना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए कम-से-कम 30 साल की उम्र पूरी होनी ज़रूरी है। यह आयु सीमा सुनिश्चित करती है कि सदस्यों के पास पर्याप्त अनुभव और परिपक्वता हो।
In simple words: उसे 10 साल और इंतज़ार करना होगा क्योंकि राज्यसभा सदस्य बनने के लिए कम से कम 30 साल की उम्र होनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: राज्यसभा सदस्य के लिए न्यूनतम आयु योग्यता (30 वर्ष) और लोकसभा सदस्य के लिए (25 वर्ष) के बीच का अंतर याद रखें।

 

Question 9. लोकसभा के पदाधिकारियों के नाम लिखिए ।
Answer: लोकसभा के मुख्य अधिकारी अध्यक्ष (स्पीकर) तथा उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) होते हैं। ये दोनों सदन की कार्यवाही को चलाने और अनुशासन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: लोकसभा के पदाधिकारी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होते हैं।

🎯 Exam Tip: लोकसभा के प्रमुख पदाधिकारियों के नाम याद रखें और उनकी मुख्य भूमिका को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 10. लोकसभा का सदस्य बनने के लिए कोई दो योग्यताएँ लिखिए।
Answer: लोकसभा का सदस्य बनने के लिए दो मुख्य योग्यताएँ ये हैं: 1. व्यक्ति की उम्र कम से कम 25 साल पूरी होनी चाहिए। 2. वह केंद्र या राज्य सरकार के किसी लाभ वाले पद पर नहीं होना चाहिए। इन योग्यताओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सदस्य अपने कर्तव्यों का निष्पक्ष रूप से पालन कर सकें और जनता के प्रति जवाबदेह रहें।
In simple words: लोकसभा सदस्य बनने के लिए व्यक्ति की उम्र कम से कम 25 साल हो और वह किसी सरकारी लाभ वाले पद पर न हो।

🎯 Exam Tip: लोकसभा सदस्यता के लिए आयु सीमा और 'लाभ के पद' की अवधारणा को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

 

Question 11. लोकसभा के अधिक-से-अधिक कितने सदस्य चुने जा सकते हैं ?
Answer: लोकसभा में ज़्यादा से ज़्यादा 550 सदस्य चुने जा सकते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रपति दो सदस्यों को मनोनीत करते हैं, जो आमतौर पर एंग्लो-इंडियन समुदाय से होते हैं, ताकि उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।
In simple words: लोकसभा में अधिक-से-अधिक 550 सदस्य चुने जा सकते हैं और 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं।

🎯 Exam Tip: लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या और मनोनीत सदस्यों की संख्या को अलग-अलग बताएँ।

 

Question 12. लोकसभा के सदस्य कितने समय के लिए चुने जाते हैं ?
Answer: लोकसभा के सदस्य 5 साल के लिए चुने जाते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर इसे 5 साल से पहले भी भंग कर सकते हैं और नए चुनाव करवा सकते हैं, खासकर यदि सरकार बहुमत खो दे।
In simple words: लोकसभा के सदस्य 5 साल के लिए चुने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल निश्चित 5 वर्ष का होता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में इसे समय से पहले भी भंग किया जा सकता है।

 

Question 13. लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव कौन करता है ?
Answer: लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्यों द्वारा ही किया जाता है। अध्यक्ष को सदन के भीतर से ही चुना जाता है और वह सदन की कार्यवाही का संचालन करने के लिए निष्पक्ष भूमिका निभाता है।
In simple words: लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्य खुद करते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव सीधे सदन के सदस्यों द्वारा ही होता है, जो उन्हें सदन में एक विशेष स्थिति प्रदान करता है।

 

Question 14. लोकसभा में कितने सदस्य नामित (मनोनीत) किये जा सकते हैं ?
Answer: राष्ट्रपति एंग्लो-इंडियन समुदाय से दो सदस्यों को लोकसभा में मनोनीत कर सकते हैं। यह मनोनयन सुनिश्चित करता है कि इस अल्पसंख्यक समुदाय का संसद में प्रतिनिधित्व बना रहे, भले ही वे चुनाव न जीत पाए हों।
In simple words: राष्ट्रपति लोकसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के दो सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: लोकसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाने वाले सदस्यों की संख्या और उनके समुदाय को स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 15. भारतीय संसद का प्रमुख कार्य क्या है ?
Answer: भारतीय संसद का सबसे प्रमुख काम देश के लिए कानून बनाना है। यह जनता की ज़रूरतों और देश की भलाई के लिए कानून बनाती है, साथ ही सरकार पर नियंत्रण भी रखती है।
In simple words: भारतीय संसद का मुख्य कार्य देश के लिए कानून बनाना है।

🎯 Exam Tip: संसद की प्राथमिक भूमिका कानून बनाने में है, लेकिन यह सरकार पर निगरानी भी रखती है।

 

Question 16. संसद द्वारा पारित साधारण विधेयक को कौन वापस भेज सकता है ?
Answer: संसद द्वारा पास किए गए साधारण बिल को राष्ट्रपति वापस भेज सकते हैं ताकि उस पर फिर से विचार किया जा सके। राष्ट्रपति इस शक्ति का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए करते हैं कि कानून बनाने में कोई त्रुटि न हो या किसी बड़े मुद्दे पर फिर से सोचा जाए।
In simple words: संसद द्वारा पास किए गए साधारण बिल को राष्ट्रपति वापस भेज सकते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की वीटो शक्ति (अस्वीकृति शक्ति) का उल्लेख करें, जो उन्हें विधेयक पर पुनर्विचार के लिए संसद को वापस भेजने की अनुमति देती है।

 

Question 17. वित्तीय विधेयक संसद के किस सदन में पेश किया जाता है ?
Answer: पैसे से जुड़े बिल (वित्तीय विधेयक) पहले संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में ही पेश किए जाते हैं। यह लोकसभा को देश के वित्तीय मामलों पर अधिक नियंत्रण देता है, क्योंकि यह जनता का सीधा प्रतिनिधित्व करती है।
In simple words: वित्तीय विधेयक पहले लोकसभा में पेश किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: वित्तीय विधेयकों की शुरुआत हमेशा लोकसभा में होती है, जबकि साधारण विधेयक किसी भी सदन में शुरू हो सकते हैं; यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।

 

Question 18. संसद-सदस्यों के कोई दो विशेषाधिकार लिखिए।
Answer: संसद के सदस्यों के दो खास अधिकार ये हैं: 1. संसद को संविधान में बदलाव करने का खास अधिकार है। 2. संसद मंत्री परिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है और राष्ट्रपति को भी महाभियोग द्वारा पद से हटा सकती है। ये विशेषाधिकार सुनिश्चित करते हैं कि संसद सरकार पर प्रभावी नियंत्रण रख सके और जवाबदेही बनी रहे।
In simple words: संसद संविधान बदल सकती है और अविश्वास प्रस्ताव से सरकार को हटा सकती है; ये सदस्यों के विशेषाधिकार हैं।

🎯 Exam Tip: संसद के विशेषाधिकारों में विधायी सर्वोच्चता और कार्यकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने की क्षमता शामिल है।

 

Question 19. संसद के अधिवेशन कौन बुलाता है ?
Answer: संसद के अधिवेशन राष्ट्रपति बुलाते हैं। राष्ट्रपति ही संसद सत्रों की शुरुआत और समापन की घोषणा करते हैं, जो भारतीय संसदीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
In simple words: संसद की बैठकें राष्ट्रपति बुलाते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति संसद के सत्र बुलाने और स्थगित करने की शक्ति रखते हैं, यह उनकी कार्यकारी शक्ति का हिस्सा है।

 

Question 20. लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता कौन करता है ?
Answer: जब लोकसभा और राज्यसभा किसी विधेयक पर मतभेद होने पर एक साथ बैठक करते हैं, तो उसकी अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करते हैं। इस संयुक्त बैठक का उद्देश्य विधेयक पर गतिरोध को तोड़ना होता है।
In simple words: लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करता है।

🎯 Exam Tip: संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं, भले ही यह दोनों सदनों की बैठक हो।

 

Question 21. संसद के किस सदन के लिए राष्ट्रपति दो सदस्य मनोनीत करता है ?
Answer: राष्ट्रपति संसद के निम्न सदन (लोकसभा) के लिए दो सदस्यों को मनोनीत करते हैं। ये दो सदस्य आमतौर पर एंग्लो-इंडियन समुदाय से होते हैं, ताकि उन्हें संसद में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
In simple words: राष्ट्रपति संसद के निचले सदन (लोकसभा) के लिए दो सदस्यों को मनोनीत करते हैं।

🎯 Exam Tip: लोकसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या और उनका समुदाय हमेशा याद रखें।

 

Question 22. लोकसभा किन विधियों से संसद पर नियन्त्रण रखती है ?
Answer: लोकसभा के सदस्य प्रश्न पूछकर, पूरक प्रश्न पूछकर, स्थगन प्रस्ताव लाकर, सरकारी बिलों को मना करके और अविश्वास प्रस्ताव पास करके संसद पर नियंत्रण रखते हैं। ये तरीके सुनिश्चित करते हैं कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह बनी रहे और उसकी शक्तियां संतुलित रहें।
In simple words: लोकसभा प्रश्न पूछकर, स्थगन प्रस्ताव लाकर और अविश्वास प्रस्ताव पास करके संसद पर नियंत्रण रखती है।

🎯 Exam Tip: लोकसभा द्वारा सरकार पर नियंत्रण रखने के मुख्य तरीकों को सूचीबद्ध करें, जैसे प्रश्नकाल और अविश्वास प्रस्ताव।

 

Question 23. भारत का प्रथम नागरिक कौन है ?
Answer: भारत का राष्ट्रपति ही देश का पहला नागरिक होता है। यह पद देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है और संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करता है।
In simple words: भारत का राष्ट्रपति ही देश का पहला नागरिक होता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति को 'भारत का प्रथम नागरिक' कहा जाता है; यह एक सीधा तथ्य है जिसे याद रखना चाहिए।

 

Question 24. भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन किस पद्धति द्वारा होता है और इसमें मतदाता कौन होते हैं? [2015, 16]
Answer: भारत के राष्ट्रपति का चुनाव सीधा नहीं होता। संसद (लोकसभा और राज्यसभा) और राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्य मिलकर एक खास तरीके से उन्हें चुनते हैं। यह तरीका आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत पद्धति कहलाता है, जो सुनिश्चित करता है कि छोटे राज्यों के वोट का भी उतना ही महत्व हो जितना बड़े राज्यों का।
In simple words: राष्ट्रपति का चुनाव संसद और राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के चुनाव में केवल निर्वाचित सदस्य ही भाग लेते हैं, मनोनीत सदस्य नहीं। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।

 

Question 25. राष्ट्रपति पद हेतु कोई दो योग्यताएँ लिखिए ।
Answer: राष्ट्रपति बनने के लिए दो योग्यताएँ ये हैं: 1. व्यक्ति भारत का नागरिक होना चाहिए। 2. उसकी उम्र कम से कम 35 साल पूरी होनी चाहिए। ये योग्यताएँ सुनिश्चित करती हैं कि पद पर बैठने वाला व्यक्ति देश के प्रति वफादार हो और पर्याप्त अनुभव रखता हो।
In simple words: राष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति भारत का नागरिक हो और उसकी उम्र कम से कम 35 साल हो।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति पद के लिए न्यूनतम आयु और नागरिकता की आवश्यकता प्रमुख योग्यताएँ हैं।

 

Question 26. राष्ट्रपति का कार्यकाल लिखिए। क्या उसे दोबारा चुना जा सकता है ?
Answer: राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का होता है। हाँ, उन्हें दोबारा भी चुना जा सकता है। संविधान में कोई सीमा तय नहीं की गई है कि एक व्यक्ति कितनी बार राष्ट्रपति बन सकता है, हालांकि आमतौर पर दो कार्यकाल एक आम चलन रहा है।
In simple words: राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का होता है और उन्हें दोबारा चुना जा सकता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के कार्यकाल की अवधि और दोबारा चुनाव की संभावना - ये दोनों महत्वपूर्ण तथ्य हैं।

 

Question 27. राष्ट्रपति का एक विशेषाधिकार लिखिए ।
Answer: राष्ट्रपति का एक खास अधिकार यह है कि वे मृत्युदंड पाए अपराधी की सज़ा माफ कर सकते हैं या उसे कम कर सकते हैं। इस शक्ति को 'क्षमादान शक्ति' कहते हैं, जिसका उपयोग मानवीय आधार पर या न्यायिक त्रुटि की संभावना पर किया जाता है।
In simple words: राष्ट्रपति मृत्युदंड पाए अपराधी की सज़ा माफ कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति उनकी न्यायिक शक्तियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; इसे विशेष रूप से उजागर करें।

 

Question 28. भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे ? [2011, 15]
Answer: भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे और पहले उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे। ये दोनों महान नेता भारत के संविधान निर्माण और शुरुआती वर्षों में देश को दिशा देने में महत्वपूर्ण रहे।
In simple words: भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।

🎯 Exam Tip: भारत के पहले राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के नाम याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सामान्य ज्ञान के प्रश्नों में पूछा जाता है।

 

Question 29. भारत में उपराष्ट्रपति का चुनाव कौन करता है? उसके निर्वाचन की प्रक्रिया क्या है? क्या कोई व्यक्ति इस पद पर दोबारा निर्वाचित हो सकता है ? [2012, 2013]
Answer: भारत के उपराष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य मिलकर चुनते हैं। यह चुनाव एक खास तरीके (आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत) से होता है। हाँ, एक व्यक्ति इस पद पर दोबारा चुनाव लड़ सकता है और निर्वाचित हो सकता है। उपराष्ट्रपति का चुनाव राष्ट्रपति के चुनाव से अलग होता है, क्योंकि इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्य शामिल नहीं होते।
In simple words: उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्य करते हैं, और उन्हें दोबारा चुना जा सकता है।

🎯 Exam Tip: उपराष्ट्रपति के चुनाव में केवल संसद के सदस्य ही भाग लेते हैं, और उनके दोबारा चुनाव की संभावना होती है।

 

Question 30. भारत के वर्तमान राष्ट्रपति का नाम लिखिए।
Answer: श्री रामनाथ कोविन्द भारत के वर्तमान राष्ट्रपति हैं। राष्ट्रपति देश के संवैधानिक मुखिया होते हैं और तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर भी होते हैं।
In simple words: भारत के वर्तमान राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति का नाम एक महत्वपूर्ण जानकारी है। ध्यान दें कि परीक्षा के समय तक यह जानकारी बदल सकती है, इसलिए अद्यतन जानकारी को भी देखें।

 

Question 31. भारत के राष्ट्रपति के दो अधिकार लिखिए ।
Answer: भारत के राष्ट्रपति के दो अधिकार ये हैं: 1. उनकी मंज़ूरी के बिना कोई भी पैसे से जुड़ा बिल या अनुदान की मांग लोकसभा में पेश नहीं की जा सकती। 2. उनकी सहमति से सुप्रीम कोर्ट की बैठक दिल्ली के अलावा कहीं और भी हो सकती है। ये अधिकार राष्ट्रपति को देश के वित्तीय और न्यायिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका देते हैं।
In simple words: राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बिना वित्त विधेयक पेश नहीं हो सकता और सुप्रीम कोर्ट की बैठकें दिल्ली के बाहर हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की वित्तीय और न्यायिक शक्तियाँ भारत की शासन प्रणाली में उनके महत्व को दर्शाती हैं।

 

Question 32. भारत के राष्ट्रपति की दो विधायी शक्तियाँ लिखिए।
Answer: राष्ट्रपति की दो कानून बनाने वाली शक्तियां ये हैं: 1. कोई भी बिल उनकी मंज़ूरी के बिना कानून नहीं बन सकता। 2. वे अध्यादेश (एक तरह का अस्थायी कानून) भी जारी कर सकते हैं जब संसद सत्र में न हो और तत्काल कानून की ज़रूरत हो।
In simple words: राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बिना कोई बिल कानून नहीं बनता और वे अध्यादेश जारी कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों में विधेयकों को कानून बनाना और अध्यादेश जारी करना प्रमुख हैं।

 

Question 33. भारत में अध्यादेश जारी करने का अधिकार किसको है ?
Answer: भारत में अध्यादेश जारी करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है। यह शक्ति राष्ट्रपति को आपातकालीन स्थितियों में तुरंत कानून बनाने में सक्षम बनाती है, जब संसद का सत्र नहीं चल रहा होता है।
In simple words: भारत में अध्यादेश जारी करने का अधिकार राष्ट्रपति को है।

🎯 Exam Tip: अध्यादेश राष्ट्रपति की एक महत्वपूर्ण आपातकालीन शक्ति है, जिसे संसद के सत्र में न होने पर लागू किया जाता है।

 

Question 34. राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
Answer: राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की कम से कम उम्र 35 साल होनी चाहिए। यह आयु सीमा सुनिश्चित करती है कि उम्मीदवार के पास देश के सर्वोच्च पद को संभालने के लिए पर्याप्त अनुभव और परिपक्वता हो।
In simple words: राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति पद के लिए आयु योग्यता (35 वर्ष) को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 35. 'अध्यादेश से आप क्या समझते हैं ?
Answer: अध्यादेश राष्ट्रपति द्वारा दिया गया एक ऐसा आदेश है जो तब जारी होता है जब संसद की बैठक नहीं चल रही होती और किसी कानून की तुरंत ज़रूरत होती है। इसकी शक्ति कानून जैसी होती है और यह ज़्यादा से ज़्यादा छह महीने तक लागू रह सकता है। यह सरकार को आपातकालीन या तत्काल महत्वपूर्ण मामलों में बिना देरी किए कार्रवाई करने की सुविधा देता है।
In simple words: अध्यादेश राष्ट्रपति का वह आदेश है जो संसद के सत्र में न होने पर कानून की तरह लागू होता है और छह महीने तक मान्य रहता है।

🎯 Exam Tip: अध्यादेश की परिभाषा, इसे कौन जारी करता है, कब जारी किया जाता है, और इसकी समय सीमा को स्पष्ट करें।

 

Question 36. राष्ट्रपति राष्ट्रीय संकटकाल की घोषणा कब कर सकता है ?
Answer: राष्ट्रपति देश में आपातकाल तब घोषित कर सकते हैं जब: 1. किसी दूसरे देश का हमला हो या देश के अंदर कोई बड़ा झगड़ा हो (युद्ध या सशस्त्र विद्रोह)। 2. राज्यों में सरकार संविधान के हिसाब से काम न कर पा रही हो (संवैधानिक तंत्र की विफलता)। 3. पूरे देश में बड़ा आर्थिक या वित्तीय संकट आ गया हो। इन स्थितियों में राष्ट्रपति देश की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष अधिकार का उपयोग करते हैं।
In simple words: राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल तब घोषित करते हैं जब युद्ध हो, राज्यों में संवैधानिक संकट हो, या देश में वित्तीय संकट हो।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने की तीन मुख्य परिस्थितियों को याद रखें- युद्ध/आक्रमण, राज्य में संवैधानिक विफलता, और वित्तीय संकट।

 

Question 37. राष्ट्रपति राज्यसभा में कितने सदस्य मनोनीत (नामांकित) कर सकता है ? [2017]
Answer: राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं। ये सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे खास क्षेत्रों से चुने जाते हैं, जो इन क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं।
In simple words: राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या (12) और उनके विशेषज्ञता के क्षेत्रों को याद रखें।

 

Question 38. कार्यपालिका का संवैधानिक प्रधान कौन है ? [2014]
Answer: कार्यपालिका का संवैधानिक मुखिया राष्ट्रपति होते हैं। हालांकि, वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती हैं, लेकिन सभी सरकारी कार्य राष्ट्रपति के नाम पर ही किए जाते हैं।
In simple words: कार्यपालिका का संवैधानिक मुखिया राष्ट्रपति होते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होते हैं।

 

Question 39. भारत में संघीय कार्यपालिका के संवैधानिक एवं वास्तविक प्रधान कौन होते हैं ? [2015, 16, 17]
Answer: भारत में संघीय कार्यपालिका के संवैधानिक मुखिया राष्ट्रपति होते हैं, जबकि असली काम करने वाले मुखिया प्रधानमंत्री होते हैं। यह प्रणाली शक्तियों को संतुलित करती है, जहाँ राष्ट्रपति नाममात्र के प्रमुख होते हैं और प्रधानमंत्री सरकार चलाते हैं तथा नीतियों को लागू करते हैं।
In simple words: भारत में संघीय कार्यपालिका के संवैधानिक मुखिया राष्ट्रपति और वास्तविक मुखिया प्रधानमंत्री होते हैं।

🎯 Exam Tip: संवैधानिक प्रमुख (राष्ट्रपति) और वास्तविक प्रमुख (प्रधानमंत्री) के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 40. भारत का उपराष्ट्रपति संसद के किस सदन का सभापतित्व करता है? उसे कौन चुनता है? [2010]
Answer: भारत के उपराष्ट्रपति संसद के ऊपरी सदन, यानी राज्यसभा की अध्यक्षता करते हैं। उनका चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों द्वारा एक खास तरीके (एकल संक्रमणीय मत और आनुपातिक प्रतिनिधित्व) से 5 साल के लिए होता है। इस चुनावी प्रक्रिया में राज्य विधानसभाओं के सदस्य शामिल नहीं होते।
In simple words: भारत के उपराष्ट्रपति राज्यसभा की अध्यक्षता करते हैं, और उन्हें संसद के दोनों सदनों के सदस्य चुनते हैं।

🎯 Exam Tip: उपराष्ट्रपति की भूमिका राज्यसभा के सभापति के रूप में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, और उनके चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा अध्यक्ष से भिन्न होती है।

 

Question 41. राज्यसभा में अधिकतम कितने निर्वाचित और कितने मनोनीत सदस्य हो सकते हैं? [2017]
Answer: राज्यसभा में ज़्यादा से ज़्यादा 233 चुने हुए सदस्य और 12 मनोनीत सदस्य हो सकते हैं। इस तरह, राज्यसभा में कुल मिलाकर अधिकतम 245 सदस्य हो सकते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि राज्यों और विशेष क्षेत्रों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व हो।
In simple words: राज्यसभा में अधिकतम 233 निर्वाचित और 12 मनोनीत सदस्य हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या, निर्वाचित सदस्यों की संख्या, और मनोनीत सदस्यों की संख्या को अलग-अलग याद रखें।

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संसद का प्रमुख कार्य है
(क) बजट पारित करना।
(ख) प्रधानमन्त्री का चुनाव करना
(ग) मन्त्रिपरिषद् का निर्माण करना ।
(घ) राष्ट्रपति का चुनाव करना।
Answer: (क) बजट पारित करना।
In simple words: भारतीय संसद का मुख्य काम देश का बजट पास करना है, जिसमें सरकार के खर्च और आय का लेखा-जोखा होता है।

🎯 Exam Tip: संसद के मुख्य कार्यों में से एक बजट को स्वीकृति देना है, जो देश के आर्थिक प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. संसदीय कार्यप्रणाली का प्रमुख अंग है
(क) प्रधानमन्त्री एवं उपराष्ट्रपति
(ख) राष्ट्रपति एवं प्रधानमन्त्री
(ग) मन्त्रिपरिषद् एवं प्रधानमन्त्री,
(घ) मन्त्रिपरिषद् और राष्ट्रपति
Answer: (ख) राष्ट्रपति एवं प्रधानमन्त्री
In simple words: संसदीय कार्यप्रणाली में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सबसे मुख्य अंग होते हैं, क्योंकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं और प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होते हैं।

🎯 Exam Tip: संसदीय प्रणाली में, राष्ट्रपति संवैधानिक मुखिया और प्रधानमंत्री सरकार के मुखिया होते हैं, दोनों का तालमेल महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य संसद नहीं करती?
(क) राष्ट्रपति की नियुक्ति
(ख) बजट प्रस्तुत करना।
(ग) विधेयक पारित करना
(घ) मन्त्रिमण्डल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव
Answer: (ख) बजट प्रस्तुत करना।
In simple words: संसद बजट पेश करने का काम नहीं करती, बल्कि बजट वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है और संसद उसे पारित करती है।

🎯 Exam Tip: संसद का काम बजट को पास करना है, न कि उसे तैयार करना; यह अंतर महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. भारतीय संसद के दो सदन हैं [2017]
(क) सीनेट एवं प्रतिनिधि सभा
(ख) विधान-परिषद् एवं विधानसभा
(ग) राज्यसभा एवं लोकसभा
(घ) लोकसभा एवं विधानसभा
Answer: (ग) राज्यसभा एवं लोकसभा
In simple words: भारतीय संसद के दो सदन हैं: राज्यसभा और लोकसभा।

🎯 Exam Tip: भारतीय संसद की द्विसदनीय संरचना को याद रखें, जिसमें राज्यसभा ऊपरी सदन और लोकसभा निचला सदन है।

 

Question 5. राज्यसभा का पदेन सभापति कौन होता है? [2012, 15, 16, 17]
(क) भारत का राष्ट्रपति ।
(ख) उच्चतम न्यायालय का प्रमुख न्यायाधीश
(ग) भारत का उपराष्ट्रपति
(घ) लोकसभा का अध्यक्ष
Answer: (ग) भारत का उपराष्ट्रपति
In simple words: भारत के उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं।

🎯 Exam Tip: उपराष्ट्रपति का पद सीधे तौर पर राज्यसभा के सभापति से जुड़ा होता है; यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था है।

 

Question 6. लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल होता है [2015, 16]
(क) 2 वर्ष
(ख) 4 वर्ष
(ग) 5 वर्ष
(घ) 6 वर्ष
Answer: (ग) 5 वर्ष
In simple words: लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल 5 साल का होता है।

🎯 Exam Tip: लोकसभा सदस्यों का कार्यकाल 5 साल का होता है, जबकि राज्यसभा सदस्यों का 6 साल का। इन दोनों के बीच अंतर याद रखें।

 

Question 7. लोकसभा की सदस्यता के लिए उम्मीदवार की आयु कम-से-कम होनी चाहिए
(क) 18 वर्ष
(ख) 21 वर्ष
(ग) 25 वर्ष
(घ) 30 वर्ष
Answer: (ग) 25 वर्ष
In simple words: लोकसभा का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार की कम से कम उम्र 25 साल होनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: लोकसभा सदस्य के लिए 25 वर्ष की न्यूनतम आयु और मतदाता बनने के लिए 18 वर्ष की आयु में अंतर स्पष्ट करें।

 

Question 8. संविधान में लोकसभा की अधिकतम निर्धारित संख्या है [2013]
(क) 500
(ख) 552
(ग) 555
(घ) 560
Answer: (ख) 552
In simple words: संविधान के अनुसार, लोकसभा में ज़्यादा से ज़्यादा 552 सदस्य हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को याद रखें, जिसमें निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य शामिल हैं।

 

Question 9. लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष थे
(क) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
(ख) श्री वी० आवलंकर
(ग) डॉ० बी० आर० अम्बेडकर
(घ) डॉ० जाकिर हुसैन
Answer: (ख) श्री वी० आवलंकर
In simple words: लोकसभा के पहले अध्यक्ष श्री जी.वी. मावलंकर थे।

🎯 Exam Tip: भारत की संसद के इतिहास में पहले लोकसभा अध्यक्ष का नाम याद रखना एक महत्वपूर्ण तथ्य है।

 

Question 10. भारत की संघीय व्यवस्थापिका का नाम है [2015, 16, 18]
(क) संसद
(ख) लोकसभा
(ग) विधानमण्डल
(घ) राज्यसभा
Answer: (क) संसद
In simple words: भारत की केंद्रीय कानून बनाने वाली संस्था का नाम संसद है।

🎯 Exam Tip: संघीय व्यवस्थापिका के रूप में 'संसद' शब्द का प्रयोग करें, जिसमें राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा तीनों शामिल हैं।

 

Question 11. भारत की सभी सेनाओं का सेनापति होता है
(क) ब्रिगेडियर
(ख) लोकसभा अध्यक्ष
(ग) राष्ट्रपति
(घ) प्रधानमन्त्री
Answer: (ग) राष्ट्रपति
In simple words: भारत की तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति होते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति भारत के तीनों सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं, यह उनकी कार्यकारी शक्तियों का हिस्सा है।

 

Question 12. भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे ? (2015)
(क) सुभाषचन्द्र बोस
(ख) लाल बहादुर शास्त्री
(ग) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
(घ) पं० जवाहरलाल नेहरू
Answer: (ग) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
In simple words: भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।

🎯 Exam Tip: भारत के पहले राष्ट्रपति का नाम हमेशा याद रखें, क्योंकि यह भारतीय इतिहास का एक बुनियादी तथ्य है।

 

Question 13. भारत में वर्तमान उपराष्ट्रपति हैं [2011, 16]
(क) भैरो सिंह शेखावत ।
(ख) मोहम्मद हामिद अन्सारी
(ग) प्रतिभा पाटिल ।
(घ) पी० चिदम्बरम्
Answer: (ख) मोहम्मद हामिद अन्सारी
In simple words: भारत में वर्तमान उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अन्सारी हैं।

🎯 Exam Tip: वर्तमान उपराष्ट्रपति का नाम एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है; परीक्षा के समय नवीनतम जानकारी की जाँच करें।

 

Question 14. राष्ट्रपति का चुनाव कौन करता है ? [2011, 13]
(क) लोकसभा के सदस्य
(ख) राज्यसभा के सदस्य
(ग) संसद के निर्वाचित सदस्य
(घ) संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
Answer: (घ) संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
In simple words: राष्ट्रपति का चुनाव संसद के चुने हुए सदस्यों और राज्य विधानसभाओं के चुने हुए सदस्यों द्वारा किया जाता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में संसद और राज्य विधानसभाओं के केवल निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।

 

Question 15. लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है [2012]
(क) लोकसभा के सदस्यों द्वारा.
(ख) राज्यसभा के सदस्यों द्वारा
(ग) लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों के सदस्यों द्वारा
(घ) उपर्युक्त में से किसी के द्वारा नहीं
Answer: (क) लोकसभा के सदस्यों द्वारा.
In simple words: लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्यों द्वारा ही किया जाता है।

🎯 Exam Tip: लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव सीधे सदन के सदस्यों द्वारा आंतरिक रूप से किया जाता है।

 

Question 16. भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ० ए०पी०जे अब्दुल कलाम किस क्षेत्र से जुड़े हुए थे?
(क) पत्रकारिता
(ख) विज्ञान
(ग) अभिनय
(घ) राजनीति
Answer: (ख) विज्ञान
In simple words: भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मुख्य रूप से विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े थे।

🎯 Exam Tip: डॉ. कलाम को उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के कारण 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' के नाम से जाना जाता है।

 

Question 17. संघ सूची में कितने विषय सम्मिलित हैं?
(क) 98
(ख) 66
(ग) 47
(घ) 26
Answer: (क) 98
In simple words: संघ सूची में 98 विषय शामिल हैं, जिन पर केंद्र सरकार कानून बना सकती है।

🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान की तीन सूचियों (संघ, राज्य, समवर्ती) में विषयों की संख्या याद रखें, जो केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बँटवारा करती हैं।

 

Question 18. राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में कितने सदस्यों को मनोनीत किया जाता है? [2016, 17]
(क) 2
(ख) 12
(ग) 14
(घ) 15
Answer: (ख) 12
In simple words: राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत किया जाता है।

🎯 Exam Tip: राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाने वाले सदस्यों की संख्या और उनके चुने जाने वाले क्षेत्रों (कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा) को याद रखें।

 

Question 19. धन विधेयक लोकसभा में पारित होने के पश्चात् भेजा जाता है- [2012, 14, 16]
(क) उपराष्ट्रपति को
(ख) राज्यसभा को
(ग) प्रधानमन्त्री को
(घ) वित्तमन्त्री को ।
Answer: (ख) राज्यसभा को
In simple words: धन विधेयक लोकसभा में पास होने के बाद राज्यसभा को भेजा जाता है।

🎯 Exam Tip: धन विधेयक पर राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित हैं; वे इसे केवल 14 दिनों तक रोक सकती हैं।

 

Question 20. भारत की संधीय कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख है [2014]
(क) लोकसभा अध्यक्ष
(ख) राष्ट्रपति
(ग) उप-राष्ट्रपति
(घ) प्रधानमन्त्री
Answer: (ख) राष्ट्रपति
In simple words: भारत की केंद्रीय कार्यपालिका का संवैधानिक मुखिया राष्ट्रपति होते हैं।

🎯 Exam Tip: संवैधानिक प्रमुख और वास्तविक प्रमुख के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझाएँ: राष्ट्रपति संवैधानिक हैं, प्रधानमंत्री वास्तविक।

 

Question 21. संसद के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता करता है [2014]
(क) लोकसभा अध्यक्ष
(ख) उप-राष्ट्रपति
(ग) राष्ट्रपति
(घ) प्रधानमंत्री
Answer: (क) लोकसभा अध्यक्ष
In simple words: संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करता है।

🎯 Exam Tip: संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं, जिससे लोकसभा का महत्व बढ़ जाता है।

 

Question 22. लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल है [2015]
(क) 6 वर्ष
(ख) 2 वर्ष
(ग) 5 वर्ष
(घ) 8 वर्ष
Answer: (ग) 5 वर्ष
In simple words: लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल 5 साल का होता है।

🎯 Exam Tip: लोकसभा का कार्यकाल निश्चित 5 वर्ष का होता है, जो चुनाव प्रणाली के माध्यम से जनता की सीधी भागीदारी को दर्शाता है।

 

Question 23. भारत के प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति थे [2015, 16, 17]
(क) फखरुद्दीन अली अहमद
(ख) डॉ० जाकिर हुसैन
(ग) सलमान खुर्शीद
(घ) डॉ० अबुल कलाम आजाद
Answer: (ख) डॉ० जाकिर हुसैन
In simple words: भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन थे।

🎯 Exam Tip: डॉ. जाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति थे और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

Question 24. भारतीय संघ में कुल कितने राज्य और संघीय क्षेत्र हैं? [2015, 2016, 2017]
(क) 28 राज्य और 6 संघीय क्षेत्र
(ख) 29 राज्य और 6 संघीय क्षेत्र
(ग) 28 राज्य और 7 संघीय क्षेत्र,
(घ) 29 राज्य और 7 संघीय क्षेत्र
Answer: (घ) 29 राज्य और 7 संघीय क्षेत्र
In simple words: भारतीय संघ में 29 राज्य और 7 संघीय क्षेत्र हैं।

🎯 Exam Tip: भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या को याद रखें, जो देश की राजनीतिक और प्रशासनिक संरचना को दर्शाती है। (नोट: परीक्षा के समय वर्तमान संख्या की जाँच करें)।

 

Question 25. लोकसभा में नामित सदस्यों की संख्या है [2015, 17]
(क) 2
(ख) 4
(ग) 12
(घ) 5
Answer: (क) 2
In simple words: लोकसभा में दो नामित सदस्य होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है।

🎯 Exam Tip: लोकसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या (2) और उनके समुदाय (एंग्लो-इंडियन) को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 26. किसकी स्वीकृति से कोई विधेयक अधिनियम बन सकता है? [2011, 16]
(क) संसद की ।
(ख) राष्ट्रपति की
(ग) सर्वोच्च न्यायालय की
(घ) प्रधानमंत्री की
Answer: (ख) राष्ट्रपति की
In simple words: कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद ही कानून बन सकता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के हस्ताक्षर किसी भी विधेयक को कानून बनाने के लिए अंतिम और अनिवार्य कदम होते हैं।

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