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Step-by-Step UP Board Solutions: Class 10 Science Chapter 12 बिजली
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Chapter 12 बिजली Answers & Solutions for Class 10 Science (UP Board)
UP Board Solutions For Class 10 Science Chapter 12 Electricity (विद्युत)
पाठगत हल प्रश्न
[NCERT In-Text Questions Solved]
खण्ड 12.1 (पृष्ठ संख्या 222)
Question 1. विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है?
Answer: किसी विद्युत धारा के सतत् तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं। इससे विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है परंतु यदि परिपथ कहीं से टूट जाए या स्विच ऑफ कर दिया जाए, तो धारा का प्रवाह बंद हो जाता है।
In simple words: विद्युत परिपथ एक बंद और सतत मार्ग होता है जिसके माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। यदि यह मार्ग कहीं से भी टूट जाए, तो धारा का प्रवाह रुक जाता है।
🎯 Exam Tip: विद्युत परिपथ की परिभाषा महत्वपूर्ण है और अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछी जाती है। इसे स्पष्ट और सटीक शब्दों में याद करें।
Question 2. विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।
Answer: विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर है। यदि किसी चालक से प्रति सेकंड 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो विद्युत धारा का मान 1 ऐम्पियर कहलाता है। अतः
\[ 1\,A = \frac{1\,C}{1\,S} \]In simple words: 1 ऐम्पियर विद्युत धारा वह होती है जब 1 कूलॉम आवेश 1 सेकंड में किसी चालक के एक बिंदु से गुजरता है। यह विद्युत धारा की इकाई है।
🎯 Exam Tip: ऐम्पियर की परिभाषा और उसका सूत्र परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं। मात्रक की स्पष्ट समझ होना आवश्यक है।
Question 3. एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।
Answer: हमें ज्ञात है कि 1 इलेक्ट्रॉन पर आवेश का मान \( e = 1.6 \times 10^{-19}\,C \) होता है।
अतः 1C आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( (n) = 6.25 \times 10^{18} \) इलेक्ट्रॉन
In simple words: एक कूलॉम आवेश बनाने के लिए बहुत बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है, जो कि लगभग 6.25 ट्रिलियन बिलियन इलेक्ट्रॉन होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के संख्यात्मक प्रश्न सीधे सूत्र \( Q = ne \) पर आधारित होते हैं, जहाँ \( Q \) कुल आवेश, \( n \) इलेक्ट्रॉनों की संख्या और \( e \) एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश है। सूत्र को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है।
खण्ड 12.2 (पृष्ठ संख्या 224)
Question 1. उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।
Answer: चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने वाली उस युक्ति का नाम बैट्री है, जो एक या अधिक विद्युत सेलों से बनी होती है।
In simple words: बैट्री वह युक्ति है जो किसी परिपथ में दो बिंदुओं के बीच लगातार वोल्टेज का अंतर बनाए रखती है, जिससे विद्युत धारा प्रवाहित होती रहती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर एक सीधा-साधा ज्ञान-आधारित तथ्य है। बैट्री या सेल का नाम याद रखना पर्याप्त होगा।
Question 2. यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1V है?
Answer: जब हम कहते हैं दो बिंदुओं के बीच विभवांतर \( 1\,V \) है, तो इसका यह तात्पर्य है कि एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक 1 कूलॉम \( (1\,C) \) आवेश को ले जाने में 1 जूल \( (1\,J) \) कार्य करना पड़ेगा।
In simple words: 1 वोल्ट का विभवांतर का मतलब है कि अगर आपको 1 कूलॉम के आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाना है, तो आपको 1 जूल ऊर्जा खर्च करनी पड़ेगी।
🎯 Exam Tip: विभवांतर की परिभाषा (कार्य प्रति इकाई आवेश) को स्पष्ट रूप से समझाएं। 1 वोल्ट की परिभाषा इस अवधारणा का एक विशेष मामला है।
Question 3. \(6\,V\) बैट्री से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?
Answer: आवेश \( (Q) = 1\,C \), विभवांतर \( (V) = 6\,V \)
अतः प्रत्येक आवेश को दी गई ऊर्जा \( = \) किया गया कार्य \( (W) = Q \cdot V = 6\,V \times 1\,C = 6\,J \)
In simple words: जब एक कूलॉम आवेश \(6\,V\) की बैटरी से गुजरता है, तो बैटरी उस आवेश को \(6\) जूल की ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे वह परिपथ में कार्य कर सके।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा या कार्य \( (W) \) की गणना के लिए सूत्र \( W = Q \cdot V \) का उपयोग करें। इकाइयों को सही ढंग से लिखना सुनिश्चित करें।
खण्ड 12.5 (पृष्ठ संख्या 232)
Question 1. किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?
Answer: किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है
(1) चालक तार की लंबाई- चालक तार का प्रतिरोध तार की लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है। i.e., \( R \propto l \)
(2) चालक तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल- प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल \( (A) \) का व्युत्क्रमानुपाती होता है।
(3) पदार्थ की प्रकृति- उदाहरण के लिए निक्रोम के तार का प्रतिरोध कॉपर के तार से लगभग 60 गुना अधिक है।
(4) तापमान पर- शुद्ध धातुओं का प्रतिरोध ताप बढ़ाने पर बढ़ता है तथा ताप कम करने पर कम हो जाता है।
In simple words: एक तार का प्रतिरोध उसकी लंबाई, मोटाई (अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल), वह किस धातु से बना है, और उसके तापमान पर निर्भर करता है। लंबा और पतला तार अधिक प्रतिरोध करता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारकों को सूचीबद्ध करना और उनके संबंध को समझाना महत्वपूर्ण है। सूत्र \( R = \rho \frac{L}{A} \) को ध्यान में रखें।
Question 2. समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो, तो इनमें से किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है? क्यों?
Answer: हम जानते हैं कि किसी चालक तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्
चूँकि मोटे तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल अधिक होता है।
अतः मोटे तार का प्रतिरोध पतले तार के प्रतिरोध की अपेक्षा कम होगा, जिसके फलस्वरूप मोटे तार से विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी।
In simple words: मोटे तार से बिजली आसानी से प्रवाहित होती है क्योंकि उसका रास्ता चौड़ा होता है, जिससे उसे कम प्रतिरोध मिलता है। पतले तार में प्रतिरोध अधिक होता है क्योंकि रास्ता संकरा होता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोध और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती संबंध को समझाएं। यह तर्क को मजबूत करता है और पूर्ण अंक दिलाता है।
Question 3. मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूर्व के विभवांतर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा में क्या परिवर्तन होगा?
Answer: चूँकि प्रतिरोध, \( R \) नियत रहता है। ओम के नियम से:
\( \frac{V_1}{I_1} = R \)
\( \frac{V_2}{I_2} = R \)
\( \implies \frac{V_1}{I_1} = \frac{V_2}{I_2} \)
दिया है कि विभवांतर आधा कर दिया जाता है, यानी \( V_2 = \frac{V_1}{2} \)
\( \implies \frac{V_1}{I_1} = \frac{V_1/2}{I_2} \)
\( \implies \frac{1}{I_1} = \frac{1}{2 I_2} \)
\( \implies 2 I_2 = I_1 \)
\( \implies I_2 = \frac{I_1}{2} \)
अतः विभवांतर आधा हो जाने पर धारा भी आधी हो जाएगी ।
In simple words: यदि किसी उपकरण का वोल्टेज आधा कर दिया जाए और उसका प्रतिरोध न बदले, तो उसमें बहने वाली विद्युत धारा भी आधी हो जाएगी। यह ओम के नियम \(V=IR\) का सीधा परिणाम है।
🎯 Exam Tip: ओम के नियम \( (V=IR) \) का उपयोग करके गणितीय रूप से प्रदर्शित करना सबसे प्रभावी तरीका है। सुनिश्चित करें कि आप चरणों को स्पष्ट रूप से दिखाएं।
Question 4. विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्र धातु (या मिश्रातु) के क्यों बनाए जाते हैं?
Answer: विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु (या मिश्रातु) के इसलिए बनाए जाते हैं क्योंकि-
1. मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है तथा ताप वृद्धि के कारण इसकी प्रतिरोधकता में नगण्य परिवर्तन होता है।
2. मिश्रातुओं (मिश्रधातुओं) का अपचयन (दहन) उच्च ताप पर शीघ्र नहीं होता है।
In simple words: मिश्रधातुओं का उपयोग हीटिंग उपकरणों में इसलिए किया जाता है क्योंकि वे शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक गर्म होती हैं और उच्च तापमान पर जल्दी खराब नहीं होतीं, जिससे उपकरण अधिक कुशल और टिकाऊ बनते हैं।
🎯 Exam Tip: मिश्रधातुओं की उच्च प्रतिरोधकता और ऑक्सीकरण के प्रति प्रतिरोध का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है। ये दो मुख्य कारण हैं।
Question 5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तालिका 12.2 में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए ।
(a) आयरन (Fe) तथा मर्करी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत चालक है?
(b) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है।
Answer:
1. हम जानते हैं कि अच्छे चालकों की प्रतिरोधकता कम होती है। अतः आयरन \( (Fe) \), मर्करी \( (Hg) \) से एक अच्छा चालक है ।
2. तालिका \( (12.2) \) के आधार पर सिल्वर \( (Ag) \) एक सर्वश्रेष्ठ चालक है, क्योंकि तालिका में सबसे ऊपर स्थित है।
In simple words:
(a) आयरन मर्करी से बेहतर विद्युत चालक है क्योंकि इसकी प्रतिरोधकता कम होती है।
(b) सिल्वर सबसे अच्छा चालक है क्योंकि इसकी प्रतिरोधकता अन्य धातुओं की तुलना में सबसे कम होती है।
🎯 Exam Tip: चालकता का संबंध प्रतिरोधकता से है - कम प्रतिरोधकता का अर्थ है बेहतर चालकता। तालिका के डेटा का उपयोग करके तुलना करना सुनिश्चित करें।
खण्ड 12.6 (पृष्ठ संख्या 237)
Question 1. किसी विद्युत परिपथ की व्यवस्था आरेख खीचिए जिसमें \(2\,V\) के तीन सेलों की बैट्री, एक \(5\Omega\) प्रतिरोधक, एक \(8\Omega\) प्रतिरोधक, एक \(12\Omega\) प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों ।
Answer: श्रेणी क्रम में संयोजन के लिए व्यवस्था आरेख-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में एक श्रेणीबद्ध विद्युत परिपथ दिखाया गया है। इसमें एक \(6\,V\) की बैटरी (जो तीन \(2\,V\) सेल से बनी है), एक प्लग कुंजी \(K\), और तीन प्रतिरोधक \(R_1 = 5\Omega\), \(R_2 = 8\Omega\), तथा \(R_3 = 12\Omega\) एक साथ श्रेणी क्रम में जुड़े हुए हैं। परिपथ में विद्युत धारा \(I\) की दिशा भी तीर से इंगित की गई है।
In simple words: इस परिपथ में, तीन अलग-अलग प्रतिरोधक और एक बैटरी (तीन छोटे सेल से बनी) को एक के बाद एक जोड़ा गया है, साथ में एक स्विच भी है। इसे श्रेणीक्रम संयोजन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: परिपथ आरेख बनाते समय सभी घटकों के सही प्रतीक और उनके श्रेणीक्रम संयोजन को स्पष्ट रूप से दर्शाएं। बैटरी के वोल्टेज को सही ढंग से जोड़ना न भूलें।
Question 2. प्रश्न 1 का परिपथ दुबारा खीचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा \(12\Omega\) के प्रतिरोधक सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठयांक होंगे?
Answer: यहाँ ऐमीटर को श्रेणीक्रम तथा वोल्टमीटर को \(12\Omega\) के प्रतिरोधक के पार्श्वक्रम में संयोजित किया गया है।
बैट्री का कुल विभवांतर \( V = 3 \times 2 = 6\,V \)
बैट्री प्रतिरोध \( R = R_1 + R_2 + R_3 = 5\Omega + 8\Omega + 12\Omega = 25\Omega \)
ऐमीटर का पाठ्यांक \( = \) परिपथ में प्रवाहित धारा \( (I) = \frac{V}{R} = \frac{6}{25} = 0.24\,A \)
वोल्टमीटर का पाठ्यांक \( = 12\Omega \) वाले प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर \( = I \times R_3 = 0.24 \times 12 = 2.88\,V \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र पिछले परिपथ का ही विस्तारित रूप है। इसमें तीन प्रतिरोधक \(R_1 = 5\Omega\), \(R_2 = 8\Omega\), \(R_3 = 12\Omega\) श्रेणीक्रम में एक \(6\,V\) की बैटरी और कुंजी \(K\) के साथ जुड़े हैं। परिपथ में कुल धारा मापने के लिए एक ऐमीटर \(A\) को श्रेणीक्रम में लगाया गया है, और \(12\Omega\) के प्रतिरोधक \(R_3\) के सिरों पर विभवांतर मापने के लिए एक वोल्टमीटर \(V\) को समांतर (पार्श्वक्रम) में जोड़ा गया है।
In simple words: इस परिपथ में, कुल विद्युत धारा \(0.24\,A\) होगी क्योंकि ऐमीटर पूरे परिपथ में जुड़ा है। \(12\Omega\) वाले प्रतिरोधक पर वोल्टेज \(2.88\,V\) होगा, क्योंकि वोल्टमीटर केवल उसी प्रतिरोधक पर वोल्टेज मापता है।
🎯 Exam Tip: ऐमीटर को हमेशा श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर को हमेशा पार्श्वक्रम में जोड़ना याद रखें। कुल प्रतिरोध और ओम के नियम का उपयोग करके सही गणनाएं करें।
खण्ड 12.6 (पृष्ठ संख्या 240)
Question 1. जब (a) \(1\Omega\) तथा \(10^6\Omega\) और (b) \(1\Omega\), \(10^3\Omega\) तथा \(10^6\Omega\) के प्रतिरोध पाश्र्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं, तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निर्णय करेंगे।
Answer: यदि \( R_1, R_2, R_3, \dots \) पार्श्वक्रम में संयोजित हैं तब इसके तुल्य प्रतिरोध \( [R_p] \) का मान होगा-
(a) \( R_1 = 1\Omega \), \( R_2 = 10^6\Omega \)
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} \)
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{1} + \frac{1}{10^6} \)
\( = \frac{1000000+1}{1000000} = \frac{1000001}{1000000} \)
\( R_p = \frac{1000000}{1000001} \)
(b) \( R_1 = 1\Omega \), \( R_2 = 10^3\Omega \), \( R_3 = 10^6\Omega \)
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} \)
\( = \frac{1}{1} + \frac{1}{10^3} + \frac{1}{10^6} \)
\( = \frac{1000000+1000+1}{1000000} = \frac{1001001}{1000000} \)
\( R_p = \frac{1000000}{1001001} \)
स्पष्टतः पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध का मान संयोजन में जुड़े अल्पतम प्रतिरोध से भी कम होता है।
In simple words: जब प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है, तो कुल प्रतिरोध हमेशा सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी कम होता है। यह बिजली के प्रवाह के लिए कुल रास्ता बड़ा कर देता है।
🎯 Exam Tip: पार्श्वक्रम संयोजन में तुल्य प्रतिरोध हमेशा सबसे छोटे प्रतिरोधक के मान से भी कम होता है। यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 2. \(100\Omega\) का एक विद्युत लैम्प, \(50\Omega\) का एक विद्युत टोस्टर तथा \(500\Omega\) का एक जल फिल्टर \(220\,V\) के विद्युत स्रोत से पाश्र्वक्रम में संयोजित है। उस विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध क्या है, जिसे यदि समान स्रोत के साथ संयोजित कर दें, तो वह इतनी ही विद्युत धारा लेती है, जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं? यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत इस्तरी से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होती है?
Answer: दिया है: \( R_1 = 100\Omega \), \( R_2 = 50\Omega \), \( R_3 = 500\Omega \) तथा \( V = 220\,V \)
चूँकि \(R_1, R_2\) तथा \(R_3\) पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। इसलिए तुल्य प्रतिरोध \( (R_p) \) का मान होगा-
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} \)
\( = \frac{1}{100} + \frac{1}{50} + \frac{1}{500} \)
\( = \frac{5+10+1}{500} = \frac{16}{500} = \frac{4}{125}\,\Omega \)
\( R_p = \frac{125}{4} = 31.25\,\Omega \)
माना कि विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध \( R \) है, जो उतनी ही विद्युत धारा लेती है, जितनी तीनों दी गई युक्तियाँ लेती हैं।
तब \( R = R_p = 31.25\,\Omega \)
विद्युत धारा \( I = \frac{V}{R} = \frac{220\,V}{31.25\,\Omega} = 7.04\,A \)
In simple words: जब तीन उपकरण पार्श्वक्रम में जुड़े होते हैं, तो कुल प्रतिरोध कम हो जाता है। एक इस्तरी जो उतनी ही धारा लेती है, उसका प्रतिरोध कुल प्रतिरोध के बराबर होगा। इस प्रतिरोध और वोल्टेज का उपयोग करके इस्तरी द्वारा ली गई कुल धारा की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: पार्श्वक्रम में प्रतिरोधों के तुल्य प्रतिरोध की गणना के लिए सूत्र \( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \dots \) का उपयोग करें। फिर ओम के नियम का उपयोग करके धारा की गणना करें।
Question 3. श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्तियों को पाश्र्वक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं?
Answer: वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के निम्नलिखित लाभ हैं-
1. प्रत्येक युक्ति के लिए विभवांतर समान होगा तथा युक्तियाँ अपने प्रतिरोध के अनुसार धारा ग्रहण कर सकती हैं।
2. पार्श्वक्रम में प्रत्येक युक्ति के लिए अलग-अलग ऑन/ऑफ स्विच लगा सकते हैं।
3. पार्श्वक्रम में यदि किसी कारणवश कोई एक युक्ति खराब भी हो जाए तो अन्य युक्तियाँ प्रभावित नहीं होती हैं। वे सुचारू रूप से कार्य करती रहेंगी।
In simple words: घरों में बिजली के उपकरणों को समांतर क्रम में जोड़ा जाता है ताकि हर उपकरण को पूरा वोल्टेज मिले, हर उपकरण को अलग से चालू या बंद किया जा सके, और अगर एक उपकरण खराब हो जाए तो बाकी काम करते रहें।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न है। प्रत्येक लाभ को स्पष्ट रूप से समझाएं, खासकर वोल्टेज की समानता और व्यक्तिगत नियंत्रण के बिंदु।
Question 4. \(2\Omega\), \(3\Omega\) तथा \(6\Omega\) के तीन प्रतिरोधों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध
(a) \(4\Omega\)
(b) \(1\Omega\) हो?
Answer:
(a) माना कि \( R_1 = 2\Omega \), \( R_2 = 3\Omega \) तथा \( R_3 = 6\Omega \) है।
\(R_2\) तथा \(R_3\) को पार्श्वक्रम में संयोजित करने पर तुल्य प्रतिरोध \( (R) \)-
\( \frac{1}{R} = \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} = \frac{1}{3} + \frac{1}{6} = \frac{2+1}{6} = \frac{3}{6} = \frac{1}{2} \)
\( R = 2\Omega \)
अब \(R\) तथा \(R_1\) को श्रेणीक्रम में संयोजित करने पर तुल्य प्रतिरोध \( (R') \)
\( R' = R + R_1 = 2\Omega + 2\Omega = 4\Omega \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस परिपथ में, \(3\Omega\) और \(6\Omega\) के दो प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जुड़े हैं। इस पार्श्वक्रम संयोजन का कुल प्रतिरोध \(2\Omega\) होता है। फिर, इस \(2\Omega\) के तुल्य प्रतिरोध को एक तीसरे \(2\Omega\) प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है, जिससे पूरे संयोजन का कुल प्रतिरोध \(4\Omega\) प्राप्त होता है।
(b) \(R_1, R_2\) तथा \(R_3\) को पार्श्वक्रम में संयोजित करने पर हमें प्राप्त होता है।
\( \frac{1}{R} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} = \frac{1}{2} + \frac{1}{3} + \frac{1}{6} = \frac{3+2+1}{6} = \frac{6}{6} = 1 \)
\( R = 1\Omega \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस परिपथ में, तीनों प्रतिरोधक \(2\Omega\), \(3\Omega\), और \(6\Omega\) एक साथ पार्श्वक्रम में जुड़े हुए हैं। इस संयोजन के कारण कुल प्रतिरोध सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध \( (2\Omega) \) से भी कम होकर \(1\Omega\) हो जाता है।
In simple words:
(a) \(4\Omega\) प्रतिरोध पाने के लिए, \(3\Omega\) और \(6\Omega\) को समांतर में जोड़ें, फिर इस परिणाम को \(2\Omega\) के साथ श्रेणी में जोड़ें।
(b) \(1\Omega\) प्रतिरोध पाने के लिए, तीनों प्रतिरोधों \(2\Omega\), \(3\Omega\), और \(6\Omega\) को समांतर में जोड़ें।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्न में, आपको विभिन्न संयोजनों (श्रेणी और पार्श्वक्रम) का उपयोग करके वांछित तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने का तरीका प्रदर्शित करना होगा। अपनी गणनाएँ स्पष्ट रूप से दिखाएं।
Question 5. \(4\Omega\), \(8\Omega\), \(12\Omega\) तथा \(24\Omega\) प्रतिरोध की चार कुंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से
(a) अधिकतम
(b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके?
Answer: माना कि \( R_1 = 4\Omega \), \( R_2 = 8\Omega \), \( R_3 = 12\Omega \) तथा \( R_4 = 24\Omega \) है।
(a) अधिकतम तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए \(R_1, R_2, R_3\) तथा \(R_4\) को श्रेणीक्रम में संयोजित करेंगे।
\( R = R_1 + R_2 + R_3 + R_4 = 4 + 8 + 12 + 24 = 48\Omega \) (तुल्य प्रतिरोध का अधिकतम मान)
(b) निम्नतम तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए चारों प्रतिरोधों को पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा।
अतः
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} + \frac{1}{R_4} \)
\( = \frac{1}{4} + \frac{1}{8} + \frac{1}{12} + \frac{1}{24} \)
\( = \frac{6+3+2+1}{24} = \frac{12}{24} = \frac{1}{2} \)
\( R_p = 2\Omega \) (तुल्य प्रतिरोध का निम्नतम मान)
In simple words: (a) अधिकतम प्रतिरोध पाने के लिए सभी प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ें।
(b) निम्नतम प्रतिरोध पाने के लिए सभी प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ें।
🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि श्रेणीक्रम संयोजन में प्रतिरोध जुड़ते हैं (अधिकतम प्रतिरोध के लिए), जबकि पार्श्वक्रम संयोजन में प्रतिरोधों के व्युत्क्रम जुड़ते हैं (न्यूनतम प्रतिरोध के लिए)।
खण्ड 12.7 (पृष्ठ संख्या 242)
Question 1. किसी विद्युत हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है?
Answer: विद्युत डोरी तथा तापन अवयव दोनों श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं जिससे दोनों में समान धारा प्रवाहित होती है परंतु डोरी का प्रतिरोध अत्यंत कम होता है जबकि तापन अवयव विशुद्ध रूप से प्रतिरोधक है जिसका प्रतिरोध काफी ज्यादा होता है। अतः जूल के नियम से \( H \propto I^2 R t \) होता है। इसलिए विद्युत स्रोत की ऊर्जा पूर्ण रूप से ऊष्मा में बदलकर तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है जबकि डोरी के ताप में नगण्य वृद्धि होती है।
In simple words: हीटर का तार गर्म होता है क्योंकि उसका प्रतिरोध बहुत ज़्यादा होता है, जिससे ज़्यादा ऊष्मा पैदा होती है। वहीं, हीटर की डोरी का प्रतिरोध बहुत कम होता है, इसलिए वह ज़्यादा गर्म नहीं होती।
🎯 Exam Tip: जूल के तापन नियम \( (H = I^2 R t) \) को स्पष्ट रूप से समझाएं। प्रतिरोध \( (R) \) का महत्व और डोरी तथा तापन अवयव के प्रतिरोधों के बीच के अंतर पर जोर दें।
Question 2. एक घंटे में \(50\,V\) विभवांतर से \(96000\) कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए ।
Answer: आवेश \( Q = 96000\,C \)
समय \( t = 1 \) घंटा \( = (60 \times 60) \) सेकंड \( = 3600 \) सेकंड
विभवांतर \( V = 50\,V \)
उत्पन्न ऊष्मा \( H = VIt \)
\( = 50 \times \frac{96000}{3600} \times 3600 = 50 \times 96000 = 4800000\,J = 4.8 \times 10^6\,J \)
In simple words: एक घंटे तक \(50\,V\) के वोल्टेज पर \(96000\) कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में लगभग \(4.8\) मिलियन जूल ऊर्जा उत्सर्जित होती है, क्योंकि ऊर्जा वोल्टेज और आवेश के गुणनफल पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा की गणना के लिए सूत्र \( H = VIt \) (या \( H = QV \)) का प्रयोग करें। सभी इकाइयों को SI इकाइयों में बदलना सुनिश्चित करें, जैसे घंटे को सेकंड में।
Question 3. \(20\Omega\) प्रतिरोध की कोई विद्युत इस्तरी \(5\,A\) विद्युत धारा लेती है। \(30\,s\) में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।
Answer: \( R = 20\Omega \), \( I = 5\,A \) तथा \( t = 30\,s \)
उत्पन्न ऊष्मा \( H = I^2Rt \) (जूल के तापन नियम द्वारा)
\( = (5\,A)^2 \times 20\Omega \times 30\,s = 25 \times 20 \times 30 = 15000 \) जूल \( = 1.5 \times 10^4\,J \)
In simple words: एक इस्तरी से \(5\,A\) की धारा 30 सेकंड के लिए प्रवाहित होने पर, उसके \(20\Omega\) प्रतिरोध के कारण \(15000\) जूल या \(1.5 \times 10^4\) जूल ऊष्मा उत्पन्न होती है।
🎯 Exam Tip: जूल के तापन नियम \( H = I^2 R t \) का उपयोग करके सीधी गणना करें। वर्ग \( I^2 \) को सही ढंग से लागू करना और इकाइयों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।
खण्ड 12.8 (पृष्ठ संख्या 245)
Question 1. विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है?
Answer: किसी विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर विद्युत शक्ति \( (P) \) के द्वारा निर्धारित होती है।
In simple words: विद्युत ऊर्जा की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं, जो यह बताती है कि प्रति सेकंड कितनी ऊर्जा का उपयोग या उत्पादन हो रहा है।
🎯 Exam Tip: विद्युत शक्ति को ऊर्जा के प्रवाह की दर के रूप में परिभाषित करें। यह एक मूलभूत अवधारणा है।
Question 2. कोई विद्युत मोटर \(220\,V\) के विद्युत स्रोत से \(5.0\,A\) विद्युत धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा \(2\) घंटे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।
Answer: \( I = 5\,A \); \( V = 220\,V \); \( t = 2 \) घंटे
मोटर की शक्ति \( (P) = V \times I \)
\( = 220 \times 5 = 1100 \) वाट \( = \frac{1100}{1000}\,KW = 1.1\,KW \)
उपभुक्त ऊर्जा \( E = P \times t \)
\( = 1.1\,KW \times 2\,hr = 2.2\,Kwh \)
In simple words: यह मोटर \(1.1\) किलोवाट बिजली का उपयोग करती है। यदि इसे 2 घंटे चलाया जाए, तो यह कुल \(2.2\) किलोवाट-घंटे ऊर्जा की खपत करेगी।
🎯 Exam Tip: विद्युत शक्ति के लिए सूत्र \( P = VI \) और उपभुक्त ऊर्जा के लिए \( E = Pt \) का उपयोग करें। इकाइयों को वाट से किलोवाट और जूल से किलोवाट-घंटे में बदलना याद रखें यदि आवश्यक हो।
पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न
[NCERT Textbook Questions Solved]
Question 1. प्रतिरोध \(R\) के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पाश्र्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन को तुल्य प्रतिरोध \(R'\) है, तो \(R/R'\) अनुपात का मान क्या है।
(a) 1/25
(b) 1/5
(c) 5
(d) 25
Answer:
(d) 25
संकेत- [प्रत्येक भाग का प्रतिरोध \( R_1 = R_2 = R_3 = R_4 = R_5 = \frac{R}{5} \) है।
\( \frac{1}{R'} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} + \frac{1}{R_4} + \frac{1}{R_5} \)
\( = \frac{1}{R/5} + \frac{1}{R/5} + \frac{1}{R/5} + \frac{1}{R/5} + \frac{1}{R/5} = \frac{5}{R/5} = \frac{25}{R} \)
i.e., \( \frac{1}{R'} = \frac{25}{R} \)
\( \implies \frac{R}{R'} = 25 \)
In simple words: यदि किसी तार को 5 टुकड़ों में काटकर समांतर क्रम में जोड़ दिया जाए, तो कुल प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का 1/25 गुना हो जाएगा, इसलिए \(R/R'\) का अनुपात 25 होगा।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। याद रखें कि जब एक तार को \(n\) बराबर भागों में काटा जाता है और उन्हें पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है, तो नया तुल्य प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का \(1/n^2\) गुना होता है।
Question 2. निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता?
(a) \(I^2R\)
(b) \(IR\)
(c) \(VI\)
(d) \(V^2/R\)
Answer:
(b) IR
In simple words: विद्युत शक्ति को \(I^2R\), \(VI\) या \(V^2/R\) के रूप में दर्शाया जा सकता है। \(IR\) ओम के नियम के अनुसार वोल्टेज \(V\) के बराबर होता है, यह शक्ति को नहीं दर्शाता।
🎯 Exam Tip: विद्युत शक्ति के सभी सामान्य सूत्रों \( (P = VI, P = I^2R, P = V^2/R) \) को याद रखें। इससे इस तरह के प्रश्न को हल करना आसान हो जाएगा।
Question 3. किसी विद्युत बल्ब का अनुमतांक \(220\,V\) \(100\,W\) है। जब इसे \(110\,V\) पर प्रचालित करते हैं, तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है?
(a) 100w
(b) 75W
(c) 50w
(d) 25w
Answer:
(d) 25w
संकेत- [चूँकि अनुमतांक \(220\,V\), \(100\,W\) है।
\( P = \frac{V^2}{R} \implies R = \frac{V^2}{P} \)
\( R = \frac{220 \times 220}{100} = 484\Omega \)
जब बल्ब \(110\,V\) पर प्रचालित करते हैं-
\( P' = \frac{(V')^2}{R} \)
\( P' = \frac{110 \times 110}{484} = 25\,W \)
In simple words: यदि बल्ब को उसकी रेटेड वोल्टेज के आधे पर चलाया जाए, तो उसकी खपत की शक्ति एक-चौथाई हो जाती है। \(220\,V\) पर \(100\,W\) वाला बल्ब \(110\,V\) पर \(25\,W\) का उपयोग करेगा।
🎯 Exam Tip: बल्ब का प्रतिरोध उसके अनुमतांक से निर्धारित होता है और यह स्थिर रहता है। शक्ति की गणना के लिए \( P = V^2/R \) सूत्र का उपयोग करें, क्योंकि प्रतिरोध स्थिर है।
Question 4. दो चालक तार जिनके पदार्थ, लंबाई तथा व्यास समान हैं, किसी विद्युत परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पाश्र्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा?
(a) 1:2
(b) 2:1
(c) 1:4
(d) 4:1
Answer:
(c) 1:4
संकेत - श्रेणीक्रम में- \( R_s = R_1 + R_2 = 2R_1 \) (चूँकि \( R_1 = R_2 \) है)
पार्श्वक्रम में- \( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} \)
\( = \frac{1+1}{R_1} = \frac{2}{R_1} \)
\( \implies R_p = \frac{R_1}{2} \)
जहाँ, \( H_s = \) श्रेणी क्रम में उत्पन्न ऊष्मा तथा \( H_p = \) पार्श्वक्रम में उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा है।
\( H_s = \frac{V^2}{R_s} \cdot t \)
\( H_p = \frac{V^2}{R_p} \cdot t \)
\( \frac{H_s}{H_p} = \frac{V^2/R_s \cdot t}{V^2/R_p \cdot t} = \frac{R_p}{R_s} \)
\( = \frac{R_1/2}{2R_1} = \frac{1}{4} \)
In simple words: जब दो समान तारों को पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है, तो श्रेणीक्रम में उत्पन्न ऊष्मा का पार्श्वक्रम में उत्पन्न ऊष्मा से अनुपात \(1:4\) होता है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न ऊष्मा उत्पादन के लिए शक्ति के सूत्र \( P = V^2/R \) का उपयोग करता है। श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोधों की गणना करें, फिर ऊष्मा के अनुपात के लिए \( R_p/R_s \) का उपयोग करें।
Question 5. किसी विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर किस प्रकार संयोजित किया जाता है?
Answer: विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को दो बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है।
In simple words: वोल्टमीटर को हमेशा उस घटक के साथ समांतर (पार्श्वक्रम) में जोड़ा जाता है जिसके आर-पार वोल्टेज मापना होता है, क्योंकि यह अधिक प्रतिरोध वाला होता है और धारा को सीधे प्रभावित नहीं करता।
🎯 Exam Tip: वोल्टमीटर के संयोजन का सिद्धांत हमेशा पार्श्वक्रम में होता है। यह एक सीधा तथ्य है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 6. किसी ताँबे के तार का व्यास \(0.5\,mm\) तथा प्रतिरोधकता \(1.6 \times 10^{-8}\,\Omega\,m\) है। \(10\Omega\) प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दो गुने व्यास का तार लें, तो प्रतिरोध में क्या अंतर आएगा?
Answer: तार का व्यास \( d = 0.5\,mm \)
तार की त्रिज्या \( r = \frac{0.5\,mm}{2} = \frac{5}{2} \times 10^{-4}\,m \)
चूँकि प्रतिरोधकता \( \rho = 1.6 \times 10^{-8}\,\Omega\,m \) तथा प्रतिरोध \( R = 10\Omega \) है।
\( R = \frac{\rho l}{A} = \frac{\rho l}{\pi r^2} \)
\( l = \frac{R\pi r^2}{\rho} \)
\( = \frac{10 \times \frac{22}{7} \times (\frac{5}{2} \times 10^{-4})^2}{1.6 \times 10^{-8}} = 122.7\,m \)
यदि तार का व्यास दुगुना कर दिया जाए तो नया व्यास \(d_2 = 2d_1\) होगा।
नया प्रतिरोध \(R' = \frac{\rho l}{A'}\)
क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 = \pi (d/2)^2 \propto d^2 \)
यदि व्यास दुगुना \( (2d) \) हो जाता है, तो क्षेत्रफल \( (2d)^2 = 4d^2 \) यानी 4 गुना हो जाता है।
चूँकि प्रतिरोध क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है \( (R \propto 1/A) \)।
\( \implies R' = \frac{R}{4} \)
अतः तार का नया प्रतिरोध \( = \frac{10}{4} = 2.5\Omega \)
यदि तार का व्यास दुगुना कर दिया जाए तो प्रतिरोध का मान घटकर एक चौथाई हो जाएगा।
In simple words: \(10\Omega\) प्रतिरोध बनाने के लिए लगभग \(122.7\) मीटर तांबे के तार की आवश्यकता होगी। यदि तार का व्यास दोगुना कर दिया जाए, तो उसका प्रतिरोध एक चौथाई कम हो जाएगा।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोध के सूत्र \( R = \rho \frac{L}{A} \) का उपयोग करें और सभी इकाइयों को SI प्रणाली में बदलें। यह भी याद रखें कि प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, जो व्यास के वर्ग के समानुपाती होता है।
Question 7. किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर \(V\) के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत धाराओं \(I\) के संगत मान नीचे दिए गए हैं।
\(V\) तथा \(I\) के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए ।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): एक V-I ग्राफ दिखाया गया है जहाँ वोल्टेज (V) x-अक्ष पर और धारा (I) y-अक्ष पर है। ग्राफ मूल बिंदु से गुजरने वाली एक सीधी रेखा है, जो ओम के नियम का पालन करने वाले एक ओमिक प्रतिरोधक को दर्शाती है। ग्राफ पर दो बिंदु A और B चिह्नित हैं, जो क्रमशः (6V, 1.75A) और (12V, 3.5A) के संगत हैं।
प्रतिरोधक का प्रतिरोध \( R = \frac{V_A - V_B}{I_A - I_B} \)
\( = \frac{12\,V - 6\,V}{3.5\,A - 1.75\,A} = \frac{6\,V}{1.75\,A} \approx 3.4\Omega \)
In simple words: V-I ग्राफ का उपयोग करके, आप किन्हीं दो बिंदुओं के बीच वोल्टेज और धारा में परिवर्तन से प्रतिरोध की गणना कर सकते हैं। यहाँ, प्रतिरोध लगभग \(3.4\Omega\) है।
🎯 Exam Tip: V-I ग्राफ की ढलान प्रतिरोध को दर्शाती है। किन्हीं दो स्पष्ट बिंदुओं का उपयोग करके ढलान \( (\Delta V / \Delta I) \) की गणना करें। ग्राफ को लेबल करना और इकाइयों को दर्शाना न भूलें।
Question 8. किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से \(12\,V\) की बैट्री को संयोजित करने पर परिपथ में \(2.5\,mA\) विद्युत धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।
Answer: दिया है:
विभवांतर \( V = 12\,V \)
विद्युत धारा \( I = 2.5\,mA = 2.5 \times 10^{-3}\,A \)
ओम के नियम से प्रतिरोध \( R = \frac{V}{I} = \frac{12\,V}{2.5 \times 10^{-3}\,A} = 4800\,\Omega = 4.8\,k\Omega \)
In simple words: जब \(12\,V\) की बैटरी से \(2.5\,mA\) की धारा प्रवाहित होती है, तो अज्ञात प्रतिरोध \(4800\,\Omega\) या \(4.8\,k\Omega\) होता है।
🎯 Exam Tip: ओम के नियम \( R = V/I \) का उपयोग करें। मिलीएम्पियर \( (mA) \) को एम्पियर \( (A) \) में बदलना न भूलें \( (1\,mA = 10^{-3}\,A) \)।
Question 9. \(9\,V\) की किसी बैट्री को \(0.2\Omega\), \(0.3\Omega\), \(0.4\Omega\), \(0.5\Omega\) तथा \(12\Omega\) के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता है। \(12\Omega\) के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी?
Answer: दिया है-
बैट्री की वोल्टता \( V = 9\,V \)
\( R_1 = 0.2\Omega \), \( R_2 = 0.3\Omega \)
\( R_3 = 0.4\Omega \), \( R_4 = 0.5\Omega \) तथा \( R_5 = 12\Omega \)
चूँकि \(R_1, R_2, R_3, R_4\) तथा \(R_5\) श्रेणीक्रम में संयोजित हैं-
तुल्य प्रतिरोध \( R = R_1 + R_2 + R_3 + R_4 + R_5 \)
\( = (0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12)\Omega = 13.4\Omega \)
अतः परिपथ से प्रवाहित धारा \( (I) = \frac{V}{R} \) (ओम के नियम से)
\( = \frac{9}{13.4} \approx 0.67\,A \)
जानते हैं कि श्रेणीक्रम में संयोजित सभी प्रतिरोधकों से समान धारा प्रवाहित होती है। अतः \(12\Omega\) के प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा का मान \( I = 0.67\,A \) होगी ।
In simple words: सभी प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध \(13.4\Omega\) होता है। \(9\,V\) की बैटरी से इसमें लगभग \(0.67\,A\) की धारा प्रवाहित होगी, और श्रेणीक्रम में होने के कारण यही धारा \(12\Omega\) वाले प्रतिरोधक से भी गुजरेगी।
🎯 Exam Tip: श्रेणीक्रम संयोजन की मुख्य विशेषता यह है कि सभी घटकों से समान विद्युत धारा प्रवाहित होती है। पहले कुल प्रतिरोध ज्ञात करें, फिर कुल धारा की गणना करें।
Question 10. \(176\Omega\) प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करें कि \(220\,V\) के विद्युत स्रोत से संयोजन से \(5\,A\) विद्युत धारा प्रवाहित हो?
Answer: माना कि \(176\Omega\) प्रतिरोध वाले \(n\) प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित किए गए हैं।
अतः तुल्य प्रतिरोध \( (R_p) \) का मान होगा-
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{176} + \frac{1}{176} + \dots n \) बार
\( \frac{1}{R_p} = n \cdot \frac{1}{176} \)
\( \implies R_p = \frac{176}{n}\,\Omega \)
दिया है-
\( V = 220\,V \) तथा \( I = 5\,A \)
ओम के नियम द्वारा- \( R_p = \frac{V}{I} = \frac{220}{5} = 44\Omega \)
समीकरण \( (1) \) में \( R_p \) का मान प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है-
\( 44 = \frac{176}{n} \)
\( \implies n = \frac{176}{44} = 4 \)
अतः प्रतिरोधकों की संख्या \( (n) = 4 \)
In simple words: \(220\,V\) के स्रोत से \(5\,A\) की धारा प्राप्त करने के लिए, \(176\Omega\) के 4 प्रतिरोधकों को समांतर क्रम में जोड़ना होगा।
🎯 Exam Tip: पार्श्वक्रम संयोजन के लिए तुल्य प्रतिरोध का सूत्र \( \frac{1}{R_p} = \frac{n}{R} \) (जब \(n\) समान प्रतिरोध \(R\) पार्श्वक्रम में हों) का उपयोग करें और ओम के नियम से आवश्यक तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करें।
Question 11. यह दर्शाइए कि आप \(6\Omega\) प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध
(i) \(9\Omega\)
(ii) \(4\Omega\) हो ।
Answer: दिया है \( R_1 = R_2 = R_3 = 6\Omega \) है।
(i) \(9\Omega\) तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए निम्न आकृति के अनुसार संयोजन करते हैं।
\(6\Omega\) वाले दो प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ा गया है। इसलिए इनके तुल्य प्रतिरोध \( (R_p) \) का मान होगा-
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{6} + \frac{1}{6} = \frac{2}{6} = \frac{1}{3} \)
\( R_p = 3\Omega \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस परिपथ में, दो \(6\Omega\) प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जुड़े हैं, जिनका तुल्य प्रतिरोध \(3\Omega\) है। इस \(3\Omega\) के तुल्य प्रतिरोध को तीसरे \(6\Omega\) प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है, जिससे पूरे संयोजन का कुल प्रतिरोध \(9\Omega\) प्राप्त होता है।
चूँकि \( (R_p) \) तथा \(6\Omega\) के प्रतिरोध श्रेणीक्रम में संयोजित हैं। अतः कुल प्रतिरोध \( = 3\Omega + 6\Omega = 9\Omega \)
(ii) \(4\Omega\) कुल प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए निम्न आकृति के अनुसार ।
\(6\Omega\) वाले दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में तथा शेष बचे एक प्रतिरोध को पार्श्वक्रम में।
\( R_s = 6\Omega + 6\Omega = 12\Omega \) [चूँकि \(6\Omega\) वाले दो प्रतिरोधक श्रेणी क्रम में हैं।]
तथा \(12\Omega\) और शेष बचे \(6\Omega\) का तुल्य प्रतिरोध (पार्श्वक्रम में) होगा:
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{12} + \frac{1}{6} = \frac{1+2}{12} = \frac{3}{12} = \frac{1}{4} \)
\( \implies R_p = 4\Omega \)
In simple words: (i) \(9\Omega\) प्राप्त करने के लिए, दो \(6\Omega\) को समांतर में जोड़ें, फिर इस परिणाम को तीसरे \(6\Omega\) के साथ श्रेणी में जोड़ें। (ii) \(4\Omega\) प्राप्त करने के लिए, दो \(6\Omega\) को श्रेणी में जोड़ें, फिर इस परिणाम को तीसरे \(6\Omega\) के साथ समांतर में जोड़ें।
🎯 Exam Tip: यह एक संयोजन-आधारित प्रश्न है। श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम संयोजनों के सूत्रों का सही ढंग से उपयोग करके विभिन्न संयोजनों को प्रदर्शित करना और सही परिणाम प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
Question 12. \(220\,V\) की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक \(10\,W\) है। यदि \(220\,V\) लाइन से अनुमन अधिकतम विद्युतधारा \(5\,A\) है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पाश्र्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?
Answer: दिया है—प्रत्येक बल्ब की शक्ति \( P = 10\,W \) और वोल्टता \( V = 220\,V \) है।
अतः प्रत्येक बल्ब द्वारा उपभुक्त विद्युत धारा \( I = \frac{P}{V} \) [चूँकि \( P = VI \)]
\( I = \frac{10\,W}{220\,V} = \frac{1}{22}\,A \)
चूँकि \(220\,V\) लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत धारा \( I_{max} = 5\,A \) है।
पार्श्वक्रम में संयोजित बल्बों की संख्या \( = \frac{I_{max}}{I} = \frac{5\,A}{1/22\,A} = \frac{5 \times 22}{1} = 110 \) बल्ब
In simple words: \(220\,V\) की बिजली लाइन पर, प्रत्येक \(10\,W\) का बल्ब बहुत कम धारा लेता है। चूंकि लाइन की अधिकतम धारा सीमा \(5\,A\) है, इसलिए इस लाइन पर \(110\) ऐसे बल्बों को समांतर क्रम में सुरक्षित रूप से जोड़ा जा सकता है।
🎯 Exam Tip: पहले एक बल्ब द्वारा ली गई धारा की गणना करें, फिर कुल अनुमत धारा को एक बल्ब की धारा से विभाजित करके बल्बों की अधिकतम संख्या ज्ञात करें।
Question 13. किसी विद्युत भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियाँ A तथा B की बनी हैं, जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध \(24\Omega\) है तथा इन्हें पृथक-पृथक, श्रेणीक्रम में अथवा पाश्र्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जाता है। यदि यह भट्टी \(220\,V\) विद्युत स्रोत से संयोजित की जाती है, तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत धाराएँ क्या हैं?
Answer: दिया है
विद्युत स्रोत की वोल्टता \( V = 220\,V \)
कुंडली A का प्रतिरोध \( R_1 = 24\Omega \)
कुंडली B का प्रतिरोध \( R_2 = 24\Omega \)
(a) पहले प्रकरण में- जब इन कुंडलियों को पृथक-पृथक विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है, तब
प्रवाहित धारा \( I = \frac{V}{R_1} = \frac{V}{R_2} = \frac{220}{24} \approx 9.2\,A \)
अतः प्रत्येक कुंडली से प्रवाहित धारा \( = 9.2\,A \)
(b) दूसरे प्रकरण में- जब इन्हें श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता है। तब कुल प्रतिरोध-
\( R = R_1 + R_2 = 24\Omega + 24\Omega = 48\Omega \)
इसलिए, प्रवाहित विद्युत धारा \( I = \frac{V}{R} = \frac{220\,V}{48\Omega} \approx 4.58\,A \approx 4.6\,A \)
(c) तीसरे प्रकरण में- जब कुंडलियों को पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है, तब कुल प्रतिरोध होगा-
\( \frac{1}{R} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} = \frac{1}{24} + \frac{1}{24} = \frac{2}{24} \)
या \( R = \frac{24}{2} = 12\Omega \)
अतः प्रवाहित विद्युत धारा \( I = \frac{V}{R} = \frac{220\,V}{12\Omega} \approx 18.33\,A \approx 18.3\,A \)
In simple words:
(a) यदि कुंडलियों को अलग-अलग जोड़ा जाए, तो प्रत्येक से लगभग \(9.2\,A\) धारा प्रवाहित होगी।
(b) श्रेणीक्रम में जोड़ने पर कुल धारा लगभग \(4.6\,A\) होगी।
(c) पार्श्वक्रम में जोड़ने पर कुल धारा लगभग \(18.3\,A\) होगी।
🎯 Exam Tip: ओम के नियम और श्रेणी/पार्श्वक्रम संयोजन के सूत्रों का उपयोग करें। तीनों स्थितियों के लिए कुल प्रतिरोध और फिर धारा की गणना अलग-अलग करें।
Question 14. निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में \(2\Omega\) प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए ।
(i) \(6\,V\) की बैट्री से संयोजित \(1\Omega\) तथा \(2\Omega\) श्रेणीक्रम संयोजन
(ii) \(4\,V\) बैट्री से संयोजित \(12\Omega\) तथा \(2\Omega\) का पार्श्वक्रम संयोजन ।
Answer:
(i) बैट्री की वोल्टता \( V = 6\,V \)
श्रेणीक्रम में \(1\Omega\) तथा \(2\Omega\) के संयोजन से प्राप्त कुल प्रतिरोध
\( R_s = R_1 + R_2 = 1\Omega + 2\Omega = 3\Omega \)
परिपथ से प्रवाहित धारा \( I = \frac{V}{R_s} = \frac{6\,V}{3\Omega} = 2\,A \)
चूंकि श्रेणीक्रम में संयोजित सभी प्रतिरोधों से समान विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
इसलिए, \(2\Omega\) के प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति \( P_1 = I^2R = (2\,A)^2 \times 2\Omega = 8\,W \)
(ii) यहाँ \( V = 4\,V \), \( R_1 = 12\Omega \) तथा \( R_2 = 2\Omega \) है।
पार्श्वक्रम में अलग-अलग प्रतिरोधों से प्रवाहित धारा भिन्न-भिन्न होती है परंतु सिरों के बीच विभवांतर समान रहती है।
अतः \(2\Omega\) के प्रतिरोध द्वारा उपभुक्त शक्ति \( P_2 = \frac{V^2}{R_2} = \frac{(4\,V)^2}{2\Omega} = \frac{16}{2}\,\Omega = 8\,W \)
अतः दोनों प्रकरणों में \(2\Omega\) प्रतिरोधक समान विद्युत शक्ति उपभुक्त करेगी।
i.e., \( P_1 = P_2 \)
In simple words: दोनों ही स्थितियों में, \(2\Omega\) प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति \(8\,W\) होगी। पहले मामले में, यह श्रेणीक्रम में धारा के वर्ग से, और दूसरे मामले में, यह समांतर में सीधे वोल्टेज के वर्ग से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: शक्ति के सूत्रों \( P = I^2R \) (श्रेणीक्रम के लिए) और \( P = V^2/R \) (पार्श्वक्रम के लिए) का उपयोग करें। यह महत्वपूर्ण है कि आप समझें कि श्रेणीक्रम में धारा समान होती है जबकि पार्श्वक्रम में विभवांतर समान होता है।
Question 15. दो विद्युत लैम्प जिनमें से एक का अनुमतांक \(100\,W\), \(220\,V\) तथा दूसरे का \(60\,W\), \(220\,V\) है, विद्युत मेन्स के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। यदि विद्युत आपूर्ति की वोल्टता \(220\,V\) है, तो विद्युत मेन्स से कितनी धारा ली जाती है?
Answer: अनुमतांक \(100\,W\); \(220\,V\) वाले लैम्प द्वारा ली गई विद्युत धारा-
\( P_1 = VI_1 \)
\( I_1 = \frac{P_1}{V} = \frac{100}{220} = \frac{5}{11}\,A \)
इसी प्रकार, अनुमतांक \(60\,W\); \(220\,V\) वाले विद्युत लैम्प द्वारा ली गई विद्युत धारा का मान-
\( P_2 = VI_2 \implies I_2 = \frac{P_2}{V} = \frac{60}{220} = \frac{3}{11}\,A \)
अतः विद्युत मेन्स द्वारा ली गई कुल धारा \( I = I_1 + I_2 = \frac{5}{11} + \frac{3}{11} = \frac{8}{11}\,A \approx 0.73\,A \)
In simple words: जब \(100\,W\) और \(60\,W\) के दो बल्ब \(220\,V\) पर समांतर क्रम में जुड़े होते हैं, तो वे कुल लगभग \(0.73\,A\) की धारा खींचते हैं।
🎯 Exam Tip: पार्श्वक्रम में जुड़े उपकरणों के लिए, प्रत्येक उपकरण द्वारा ली गई धारा की अलग-अलग गणना करें, फिर कुल धारा के लिए सभी धाराओं को जोड़ दें।
Question 16. किसमें अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है- \(250\,W\) का टी.वी. सेट जो एक घंटे तक चलाया जाता है अथवा \(120\,W\) का विद्युत हीटर जो \(10\) मिनट के लिए चलाया जाता है?
Answer: TV सेट के लिए-
दिया है-
T.V. सेट की शक्ति \( P_1 = 250\,W \)
समय \( t_1 = 1 \) घंटा
T.V. सेट द्वारा उपभुक्त ऊर्जा \( E_1 = P_1 \times t_1 = 250 \times 1 = 250\,Wh \)
इसी प्रकार, विद्युत हीटर के लिए-
\( P_2 = 120\,W \), \( t_2 = 10 \) मिनट \( = \frac{10}{60}\,h \)
\( E_2 = P_2 \times t_2 = 120 \times \frac{10}{60} = 20\,Wh \)
स्पष्टतः \( E_1 > E_2 \)
इसलिए T.V. सेट द्वारा अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है।
In simple words: \(250\,W\) का टी.वी. एक घंटे में \(250\,Wh\) ऊर्जा लेता है, जबकि \(120\,W\) का हीटर 10 मिनट में केवल \(20\,Wh\) ऊर्जा लेता है। इसलिए, टी.वी. अधिक ऊर्जा खपत करता है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा \( (E) \) की गणना के लिए सूत्र \( E = P \times t \) का उपयोग करें। समय की इकाइयों को संगत रूप से (जैसे घंटे में) बदलना सुनिश्चित करें ताकि सीधी तुलना की जा सके।
Question 17. \(8\Omega\) प्रतिरोध का कोई विद्युत हीटर विद्युत मेन्स से \(2\) घंटे तक \(15\,A\) विद्युत धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।
Answer: हीटर का प्रतिरोध \( R = 8\Omega \)
हीटर द्वारा ली गई विद्युत धारा \( I = 15\,A \)
समय \( t = 2 \) घंटे \( = (2 \times 60 \times 60) \) सेकंड \( = 7200 \) सेकंड
उत्पन्न ऊष्मा की दर (शक्ति) \( P = I^2 R \)
\( P = (15\,A)^2 \times 8\Omega = 225 \times 8 = 1800\,W = 1.8\,kW \)
In simple words: हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर उसकी शक्ति होती है। \(15\,A\) की धारा और \(8\Omega\) प्रतिरोध के साथ, हीटर की शक्ति \(1800\,W\) या \(1.8\,kW\) है।
🎯 Exam Tip: ऊष्मा की दर का अर्थ शक्ति है। शक्ति की गणना के लिए \( P = I^2R \) सूत्र का उपयोग करें। समय यहाँ प्रासंगिक नहीं है क्योंकि यह दर का प्रश्न है, कुल ऊष्मा का नहीं।
Question 18. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए
(a) विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है?
(b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्र धातुओं (मिश्रातुओं) के क्यों बनाए जाते हैं?
(c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है?
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?
(e) विद्युत संचारण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?
Answer:
(a) विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र धातु टंगस्टन का उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह उच्च गलनांक \( (3380^\circ C) \) की एक प्रबल धातु है, जो अत्यंत तप्त होकर प्रकाश उत्पन्न करते हैं, परंतु पिघलते नहीं।
In simple words: टंगस्टन का उपयोग बल्बों में किया जाता है क्योंकि इसका गलनांक बहुत ऊँचा होता है और यह बहुत गर्म होने पर भी पिघलता नहीं, जिससे यह पर्याप्त प्रकाश उत्पन्न कर पाता है।
🎯 Exam Tip: टंगस्टन के उच्च गलनांक और उच्च तापमान पर प्रकाश उत्सर्जित करने की क्षमता को मुख्य बिंदुओं के रूप में याद रखें।
(b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं (मिश्र धातुओं) के निम्न कारणों से बनाए जाते हैं।
1. मिश्र धातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है।
2. उच्च ताप पर मिश्रातुओं का उपचयन (ऑक्सीकरण) शीघ्र नहीं होता है।
3. ताप वृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता में नगण्य परिवर्तन होता है।
In simple words: हीटिंग उपकरणों में मिश्रधातुओं का उपयोग इसलिए होता है क्योंकि वे ज़्यादा प्रतिरोधक होती हैं, उच्च तापमान पर ऑक्सीजन से जल्दी प्रतिक्रिया नहीं करतीं, और तापमान बदलने पर भी उनका प्रतिरोध बहुत कम बदलता है।
🎯 Exam Tip: मिश्रधातुओं की उच्च प्रतिरोधकता, उच्च तापमान पर ऑक्सीकरण प्रतिरोध, और तापमान के साथ नगण्य प्रतिरोधकता परिवर्तन को मुख्य कारणों के रूप में याद रखें।
(c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग निम्नलिखित कारणों से नहीं किया जाता है
1. विभिन्न उपकरणों (युक्तियों) के साथ अलग-अलग स्विच ऑन/ऑफ के लिए नहीं लगा सकते। एक उपकरण खराब होने पर दूसरा भी कार्य करना बंद कर देता है ।
2. श्रेणीक्रम संयोजन में सभी युक्तियों या उपकरणों से समान धारा प्रवाहित होती है, जिसकी हमें आवश्यकता नहीं है।
3. परिपथ का कुल प्रतिरोध \( (R = R_1 + R_2 + \dots) \) अधिक होने के कारण धारा का मान अत्यंत कम हो जाता है।
In simple words: घरों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि इससे सभी उपकरणों को एक साथ चालू या बंद करना पड़ता है, एक के खराब होने पर सब बंद हो जाते हैं, और उपकरणों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलती।
🎯 Exam Tip: घरेलू परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन के नुकसानों को स्पष्ट रूप से बताएं: व्यक्तिगत नियंत्रण का अभाव, एक उपकरण की विफलता से पूरे परिपथ का बंद होना, और कुल प्रतिरोध बढ़ने से धारा का कम होना।
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?
Answer: किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
i.e., जैसे-जैसे तार की मोटाई बढ़ेगी (अर्थात् तार का व्यास बढ़ेगा) अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा और तार के प्रतिरोध का मान कम हो जाएगा।
In simple words: तार का प्रतिरोध उसकी मोटाई के विपरीत होता है। यदि तार मोटा होता है (क्षेत्रफल अधिक), तो प्रतिरोध कम होता है, और यदि तार पतला होता है (क्षेत्रफल कम), तो प्रतिरोध अधिक होता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरोध \( (R) \) और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल \( (A) \) के बीच व्युत्क्रमानुपाती संबंध \( (R \propto 1/A) \) को याद रखें। इसे स्पष्ट रूप से बताएं।
(e) विद्युत संचारण के लिए प्राय: कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग करते हैं क्योंकि
1. ये विद्युत के बहुत अच्छे चालक हैं।
2. इनकी प्रतिरोधकता बहुत कम है, जिसके कारण तार जल्द गर्म नहीं होते हैं।
3. इनसे सुगमतापूर्वक तार बनाए जा सकते हैं।
In simple words: बिजली के तार बनाने के लिए कॉपर और एल्यूमीनियम का उपयोग किया जाता है क्योंकि ये बिजली के अच्छे चालक हैं, इनका प्रतिरोध कम होने के कारण ये जल्दी गर्म नहीं होते, और इनसे आसानी से तार बनाए जा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: कॉपर और एल्यूमीनियम के अच्छे चालक होने, कम प्रतिरोधकता और नम्यता (तार बनाने की आसानी) जैसे गुणों पर जोर दें।
Question 18. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए
(a) विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है?
(b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्र धातुओं (मिश्रातुओं) के क्यों बनाए जाते हैं?
(c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है?
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?
(e) विद्युत संचारण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?
Answer:
(a) विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र धातु टंगस्टन का उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह उच्च गलनांक (\(3380^\circ \text{C}\)) की एक प्रबल धातु है, जो अत्यंत तप्त होकर प्रकाश उत्पन्न करते हैं, परंतु पिघलते नहीं।
(b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं (मिश्र धातुओं) के निम्न कारणों से बनाए जाते हैं।
1. मिश्र धातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है।
2. उच्च ताप पर मिश्रातुओं का उपचयन (ऑक्सीकरण) शीघ्र नहीं होता है।
3. ताप वृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता में नगण्य परिवर्तन होता है।
(c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग निम्नलिखित कारणों से नहीं किया जाता है
1. विभिन्न उपकरणों (युक्तियों) के साथ अलग-अलग स्विच ऑन/ऑफ के लिए नहीं लगा सकते। एक उपकरण खराब होने पर दूसरा भी कार्य करना बंद कर देता है।
2. श्रेणीक्रम संयोजन में सभी युक्तियों या उपकरणों से समान धारा प्रवाहित होती है, जिसकी हमें आवश्यकता नहीं है।
3. परिपथ का कुल प्रतिरोध (\(R = R_1+ R_2 + ......\)) अधिक होने के कारण धारा का मान अत्यंत कम हो जाता है।
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
i.e., जैसे-जैसे तार की मोटाई बढ़ेगी (अर्थात् तार का व्यास बढ़ेगा) अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा और तार के प्रतिरोध का मान कम हो जाएगा।
(e) विद्युत संचारण के लिए प्राय: कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग करते हैं क्योंकि
1. ये विद्युत के बहुत अच्छे चालक हैं।
2. इनकी प्रतिरोधकता बहुत कम है, जिसके कारण तार जल्द गर्म नहीं होते हैं।
3. इनसे सुगमतापूर्वक तार बनाए जा सकते हैं।
In simple words: टंगस्टन का उपयोग बल्ब फिलामेंट में उसके उच्च गलनांक के कारण होता है। हीटिंग उपकरणों में मिश्र धातुएं उपयोग की जाती हैं क्योंकि इनकी प्रतिरोधकता अधिक और उच्च ताप पर स्थिर होती है। घरेलू परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन अव्यवहारिक है क्योंकि सभी उपकरण एक साथ नियंत्रित होते हैं और किसी एक की खराबी पूरे परिपथ को बंद कर देती है। तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, यानी मोटा तार कम प्रतिरोध वाला होता है। विद्युत संचारण के लिए कॉपर और एल्यूमीनियम का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि वे अच्छे चालक हैं और इनका प्रतिरोध कम होता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में विभिन्न विद्युत घटकों के भौतिक गुणों और उनके अनुप्रयोगों से संबंधित मौलिक सिद्धांतों को समझना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक भाग में विशिष्ट कारण और प्रभाव संबंधों पर ध्यान दें।
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