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Detailed Chapter 3 धैर्यधनः हि साधवः UP Board Solutions for Class 10 Sanskrit
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Class 10 Sanskrit Chapter 3 धैर्यधनः हि साधवः UP Board Solutions PDF
परिचय
यह पाठ एक जातक-कथा है, जो सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) के पिछले जन्मों की कहानियों से संबंधित है। बौद्ध विद्वान मानते हैं कि बुद्ध को एक ही जन्म में ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने कई जन्मों में दया, करुणा और परोपकार का अभ्यास करके यह ज्ञान प्राप्त किया। पिछले जन्मों में उन्हें बोधिसत्व कहा जाता था। जातक-कथाएँ पाली भाषा में लिखी गई हैं, जिनका बाद में संस्कृत में अनुवाद किया गया। इनकी संख्या लगभग 500 है और इन्हें चीनी भाषा में भी अनुवादित किया गया है। यह कहानी 'जातकमाला' से ली गई है, जिसे आर्यशूर नामक विद्वान ने संकलित किया है। इस कथा में बोधिसत्व एक नाविक के रूप में जन्म लेते हैं, जिनकी मुख्य विशेषताएं धर्म का पालन करना और मुश्किलों में धैर्य रखना है।
पाठ-सारांश
बोधिसत्त्व का जन्म – बोधिसत्त्व (महात्मा बुद्ध का पिछला जन्म) ने एक नाविक के रूप में जन्म लिया। वे बहुत बुद्धिमान थे और जो कुछ भी जानना चाहते थे, उसे आसानी से सीख लेते थे। वे कलाओं, दिशा ज्ञान, समुद्र ज्ञान और आने वाले खतरों को जानने में माहिर थे। उनका नाम सुपारग था और उनके शहर का नाम 'सुपारगम्' था। बूढ़े होने के बावजूद, व्यापारी उनका बहुत सम्मान करते थे और समुद्री यात्राओं के लिए उन्हें अपने साथ ले जाना शुभ मानते थे। अपने नाविक जीवन में उन्होंने समुद्र की गहराइयों और उसमें मिलने वाले रत्नों तथा मछलियों के रहस्यों को अच्छी तरह जान लिया था।
सुपारग का समुद्रयात्रा पर जाना – एक बार भरुकच्छ से कुछ व्यापारी सुपारग से नाव पर साथ चलने की विनती करने आए। बहुत बूढ़े होने पर भी महात्मा सुपारग उनके साथ जाने के लिए मान गए। व्यापारी बहुत खुश हुए और कई समुद्रों को पार करते हुए उनके साथ यात्रा करते रहे।
मार्ग में बड़वामुख समुद्र का आना – रास्ते में एक भयानक तूफान आया, जिससे वे कई दिनों तक समुद्र में भटकते रहे। उन्हें कोई किनारा नहीं मिला और व्यापारी बहुत डर गए। सुपारग ने उन्हें समझाया कि डरने से कुछ नहीं होगा, धीरज रखें। उन्होंने बताया कि यह 'खुरमाली' नाम का समुद्र है और तेज हवाओं के कारण वे इसे पार नहीं कर पा रहे हैं। किसी तरह वे उस समुद्र को पार करके 'क्षीरसागर' और फिर 'अग्निमाली' समुद्र में पहुंचे। इस तरह उन्होंने कई मुश्किलों का सामना करते हुए 'कुशमाली' और 'नलमाली' जैसे खतरनाक समुद्रों को भी पार किया। सुपारग बार-बार व्यापारियों को वापस लौटने के लिए कहते रहे, लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी वे वापस नहीं लौट पाए और बहुत भयानक, दिल दहला देने वाली आवाजें करते हुए अंततः 'बड़वामुख' नामक समुद्र में पहुंच गए। सुपारग ने उस समुद्र के बारे में बताया कि यहां से कोई भी जीवित वापस नहीं आ पाया है। व्यापारियों ने जब जीवन से उम्मीद छोड़ दी, तो उन्होंने सुपारग से सुरक्षित लौटने का उपाय बताने को कहा।
सुपारग द्वारा प्रार्थना करना – जब व्यापारियों को लगा कि उनका अंत करीब है, तो वे सब करुणा से रोने लगे। तब सुपारग ने नाव पर बैठे हुए ही घुटने टेककर तथागतों (बुद्धों) को प्रणाम किया और कहा कि उनके पुण्य और अहिंसा के बल से यह नाव सुरक्षित वापस लौट जाए।
सुपारग द्वारा रत्नसहित व्यापारियों की कुशल वापसी – इसके बाद महात्मा सुपारग के पुण्य के बल से नाव अनुकूल हवा पाकर वापस लौटने लगी। नाव को वापस आते देखकर सभी व्यापारी बहुत खुश और हैरान हुए। लौटते समय सुपारग ने व्यापारियों से कहा कि वे नलमाली समुद्र से रेत और पत्थर नाव में भर लें, क्योंकि ये रेत और पत्थर उनके लिए फायदेमंद होंगे। व्यापारियों ने सुपारग की बात मानी और समुद्री रेत व पत्थर को जहाज में भर लिया। इसके बाद वह नाव एक ही रात में भरुकच्छ पहुंच गई। सुबह व्यापारियों ने नाव को चांदी, नीलम, वैदूर्य, सोना आदि से भरा हुआ देखकर खुशी-खुशी सुपारग की पूजा की। सच में, सत्य बोलना और धर्म का सहारा लेना कभी भी दुख नहीं देता – ‘तदेवं धर्माश्रयं सत्यवचनमपि आपदं नुदति।' यह सिद्ध होता है।
चरित्र-चित्रण
सुपारग (बोधिसत्त्व)
प्राचीन काल में बोधिसत्व ने एक नाव के सहायक के रूप में जन्म लिया था। वे बहुत तेज बुद्धि वाले, कई कलाओं में माहिर, मुश्किलों में धैर्य रखने वाले, दिशाओं के जानकार और समुद्र के रहस्यों को गहराई से समझने वाले थे। समुद्र के ज्ञान के कारण उनका नाम 'सुपारग' पड़ा था। उनकी मुख्य विशेषताएं नीचे दी गई हैं:
1. समुद्रयात्रा के ज्ञाता – सुपारग को समुद्र के रहस्यों की पूरी जानकारी थी। वे एक कुशल नाविक थे और उन्होंने दूर-दूर के देशों तक समुद्री यात्राएं की थीं। उन्हें समुद्र यात्रा का गहरा अनुभव था और इसी वजह से वे बहुत प्रसिद्ध थे। यही कारण था कि वे कमजोर और बूढ़े होने पर भी व्यापारी उन्हें यात्रा पर अपने साथ ले जाते थे और हर मुसीबत में उनका साथ देते थे।
2. उदार हृदय – सुपारग बहुत दयालु व्यक्ति थे। वे प्रार्थना करने वालों की बात हमेशा मान लेते थे। इसीलिए, बूढ़े और कमजोर होने पर भी वे भरुकच्छ से आए व्यापारियों की प्रार्थना मानकर उनके साथ यात्रा करने के लिए निकल पड़े थे। यह सुपारग की उदारता दिखाता है।
3. साहसी – सुपारग बहुत साहसी व्यक्ति थे। वे कितने भी खतरनाक समुद्र की यात्रा करने में अपना साहस नहीं खोते थे। जब व्यापारी पूरी तरह से जीने की उम्मीद छोड़ चुके थे, तब भी उन्होंने साहस दिखाया और भगवान से सबकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की। उन्होंने अपने पुण्य और अहिंसा के बल से जहाज को भरुकच्छ वापस ला दिया।
4. दयावान् – सुपारग एक बहुत ही दयालु व्यक्ति थे। बूढ़े होने पर भी उन्होंने व्यापारियों की प्रार्थना पर उनके साथ समुद्री यात्रा करना स्वीकार कर लिया। जब उन्होंने व्यापारियों को जीवन से निराश देखा, तो उन्होंने जहाज को सुरक्षित लाने के लिए भगवान से प्रार्थना की। यह उनकी दयालुता को दर्शाता है।
5. अहिंसावादी – सुपारग अहिंसा के सिद्धांत को मानते थे। वे सभी जीवों की रक्षा करना अपना कर्तव्य समझते थे और इसके लिए कोशिश करते रहते थे। उन्होंने अपने अहिंसा-बल से ईश्वर से प्रार्थना करके नाव को वापस लाया और व्यापारियों के जीवन को बचाया। इस कहानी में उनका यह अहिंसक रूप साफ-साफ दिखाई देता है।
6. हितैषी और मित्र – सुपारग व्यापारियों के सच्चे हितैषी और मित्र थे। नलमाली समुद्र को पार करते समय उसके गुणों को जानने के कारण उन्होंने व्यापारियों से उसकी मिट्टी, रेत और पत्थरों को नाव में भर लेने के लिए कहा। वे जानते थे कि ये रेत और पत्थर बाद में सोने और रत्नों में बदल जाएंगे। उनका यह काम उनके व्यापारियों के प्रति हितैषी और मित्र होने को दिखाता है।
निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि सुपारग समुद्री यात्रा के जानकार, उदार हृदय, साहसी, दयावान्, अहिंसावादी जैसे गुणों से तो भरे ही थे, साथ ही उनमें दूसरों की भलाई करने की इच्छा, लोगों के हित के बारे में सोचना, दयालुता और तपस्या जैसे कई और गुण भी थे। सुपारग का चरित्र वाकई एक आदर्श पुरुष का चरित्र है।
लघु उत्तटीय प्रश्न
Question 1. कोऽयं सुपारगः ? कस्मात् तस्यायं नाम ? [2009, 15]
Answer: सुपारग बोधिसत्त्व थे। वे एक नाविक थे जो व्यापारियों को समुद्र पार उनके इच्छित स्थान तक पहुंचाते थे। इसलिए लोग उन्हें सुपारग के नाम से जानते थे। सुपारग अपने काम में बहुत निपुण थे, जिससे लोगों को उन पर भरोसा था।
In simple words: सुपारग बोधिसत्त्व थे और वे व्यापारियों को समुद्र के रास्ते सही जगह पहुंचाते थे। इसी कारण उन्हें सुपारग कहते थे।
🎯 Exam Tip: जब चरित्र-चित्रण से संबंधित प्रश्न आए, तो मुख्य चरित्र के पद और उसके गुण का सही उल्लेख करें।
Question 2. सुपारगः वणिग्साहाय्ये कथमसमर्थो जातः ?
Answer: सुपारग बहुत वृद्ध हो चुके थे और उनका शरीर कमजोर हो गया था, इसलिए वे व्यापारियों की मदद करने में असमर्थ थे। उनकी बढ़ती उम्र के कारण शारीरिक बल कम हो गया था, जिससे वे पहले जैसी फुर्ती से काम नहीं कर पा रहे थे।
In simple words: सुपारग बहुत बूढ़े और कमजोर हो गए थे, इसलिए वे व्यापारियों की उतनी मदद नहीं कर पाए।
🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय, किसी भी पात्र की असमर्थता का कारण स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 3. वणिजः कीदृशं समुद्रम् अवजगाहिरे ? [2006]
Answer: व्यापारियों ने एक ऐसे विशाल समुद्र में प्रवेश किया था, जिसमें कई तरह की मछलियों के झुंड थे और बहुत सारे रत्न थे, जिसका पानी बहुत गहरा था। यह समुद्र बहुत ही बड़ा और रहस्यमय था।
In simple words: व्यापारियों ने एक बहुत बड़े समुद्र में प्रवेश किया, जिसमें कई मछलियाँ और ढेर सारे रत्न थे।
🎯 Exam Tip: समुद्र या स्थान का वर्णन करते समय उसकी विशेषताओं (जैसे मछलियाँ, रत्न, विशालता) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. वणिजः कान्कान् समुद्रान् ददृशुः ?
Answer: व्यापारियों ने खुरमाली, क्षीरार्णव, अग्निमाली, कुशमाली, नलमाली और बडवामुख जैसे कई समुद्र देखे। हर समुद्र की अपनी अलग पहचान और चुनौतियाँ थीं।
In simple words: व्यापारियों ने खुरमाली, क्षीरार्णव, अग्निमाली, कुशमाली, नलमाली और बडवामुख जैसे समुद्र देखे।
🎯 Exam Tip: जब किसी सूची के बारे में पूछा जाए, तो सभी नामों का सही-सही उल्लेख करें।
Question 5. सायाह्नसमये वणिजः कीदृशीं समुद्रध्वनिम् अश्रौषुः ?
Answer: शाम के समय व्यापारियों ने समुद्र की ऐसी आवाज सुनी जो दिल को दहला देने वाली थी। यह आवाज इतनी भयानक थी कि उसे सुनकर हर कोई डर गया।
In simple words: शाम को व्यापारियों ने समुद्र की बहुत डरावनी और दिल दहला देने वाली आवाज सुनी।
🎯 Exam Tip: किसी घटना या समय का वर्णन करते समय, उसके प्रभाव और महसूस किए गए अनुभव को स्पष्ट करें।
Question 6. महत्या करुणया उपेतः सुपारगः वणिग्जनान् किमुवाच?
या
सुपारगः वणिग्जनान् किम् उवाच ?
Answer: महान करुणा से भरे सुपारग ने व्यापारियों से कहा, "क्या इसका कोई उपाय मुझे सूझ रहा है? तो मैं उसे अवश्य अपनाऊंगा।" वे संकट की घड़ी में भी उम्मीद बनाए रखना चाहते थे।
In simple words: दयालु सुपारग ने व्यापारियों से कहा, "अगर मुझे कोई उपाय सूझा, तो मैं उसे जरूर करूंगा।"
🎯 Exam Tip: पात्र के संवादों को लिखते समय, उसके भाव और इरादे को सही ढंग से व्यक्त करें।
Question 7. नलमालिसमुद्रेभ्यः प्राप्तबालुकाः पाषाणाश्च प्रभाते कीदृशाः जातः ?
Answer: नलमाली समुद्र से लाई गई रेत और पत्थर सुबह होते ही चांदी, इंद्रनील (नीलम), वैदूर्य और सोना बन गए थे। यह सुपारग के पुण्य का ही फल था।
In simple words: नलमाली समुद्र की रेत और पत्थर सुबह चांदी, नीलम, वैदूर्य और सोने में बदल गए।
🎯 Exam Tip: चमत्कारी या परिवर्तनशील घटनाओं का वर्णन करते समय, उनके परिणाम को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 8. धर्माश्रयं सत्यवचनम् आपदं कथं नुदति ?
Answer: धर्म का सहारा लेने वाला और सच्चा वचन बोलने वाला व्यक्ति ईश्वर के स्मरण मात्र से ही विपत्तियों को दूर कर देता है। सच्चाई और धर्म पर अटल रहने से व्यक्ति को आंतरिक शक्ति मिलती है।
In simple words: धर्म पर आधारित सच्चा वचन बोलने से, ईश्वर का ध्यान करते ही सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: नैतिक शिक्षा से जुड़े प्रश्नों में सिद्धांत और उसके प्रभाव को सरल शब्दों में स्पष्ट करें।
Question 9. सुपारगः कः आसीत्? [2009,11]
Answer: सुपारग बोधिसत्त्व थे। वे एक बहुत ज्ञानी और कुशल नाविक थे।
In simple words: सुपारग बोधिसत्त्व थे।
🎯 Exam Tip: एक-शब्द उत्तरों में भी मुख्य जानकारी को सटीक रूप से प्रस्तुत करें।
Question 10. कस्य नाम सुपारगः आसीत्?
Answer: बोधिसत्त्व का नाम सुपारग था। वे अपनी विशेषताओं के कारण इस नाम से जाने जाते थे।
In simple words: बोधिसत्त्व का नाम सुपारग था।
🎯 Exam Tip: नाम से संबंधित प्रश्नों में, वह नाम किस पात्र का है, यह स्पष्ट करना चाहिए।
Question 11. जातकमालायाः रचयिता कः? [2009, 10, 12, 13, 14, 15]
Answer: जातकमाला के रचयिता 'आर्यशूर' हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण जातक कथाओं को संकलित किया है।
In simple words: जातकमाला आर्यशूर ने लिखी है।
🎯 Exam Tip: लेखक या रचयिता के नाम को हमेशा सही वर्तनी के साथ याद रखें।
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. 'धैर्यधनाः हि साधवः' नामक पाठ किस ग्रन्थ से उधृत है ?
(क) नागानन्दम्' से
(ख) 'जातकमाला' से
(ग) भोजप्रबन्ध' से
(घ) 'प्रबोधचन्द्रोदय' से
Answer: (ख) 'जातकमाला' से
In simple words: यह पाठ 'जातकमाला' नामक किताब से लिया गया है।
🎯 Exam Tip: पाठ के स्रोत ग्रंथ का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 2. “धैर्यधनाः हि साधवः' नामक पाठ किस महान् व्यक्तित्व से सम्बन्धित है ?
(क) ईसा मसीह से
(ख) महावीर स्वामी से
(ग) गौतम बुद्ध से
(घ) भगवान् कृष्ण से
Answer: (ग) गौतम बुद्ध से
In simple words: यह पाठ गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ा है।
🎯 Exam Tip: पाठ जिस मुख्य व्यक्ति के बारे में है, उसका नाम हमेशा याद रखें।
Question 3. 'जातकमाला' नामक ग्रन्थ के रचयिता कौन हैं? [2008, 11, 15]
(क) आर्यशूर
(ख) महर्षि वाल्मीकि
(ग) हर्षवर्द्धन
(घ) महर्षि व्यास
Answer: (क) आर्यशूर
In simple words: 'जातकमाला' को आर्यशूर ने लिखा है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध ग्रंथों और उनके लेखकों के नाम को ठीक से याद करना परीक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
Question 4. 'धैर्यधनाः हि साधवः" नामक पाठ में बोधिसत्त्व का क्या नाम है ?
(क) कुपारग
(ख) अपारग
(ग) सपारग
(घ) सुपारग
Answer: (घ) सुपारग
In simple words: इस पाठ में बोधिसत्त्व का नाम सुपारग है।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्र का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. सुपारग वणिजों की सहायता करने में क्यों असमर्थ हो गये थे ?
(क) मूढाधिक्य के कारण रिण
(ख) गर्वाधिक्य के कारण
(ग) जराधिक्य के कारण
(घ) धनाधिक्य के कारण
Answer: (ग) जराधिक्य के कारण
In simple words: सुपारग बूढ़े हो चुके थे, इसलिए वे व्यापारियों की मदद नहीं कर पाए।
🎯 Exam Tip: पात्रों की शारीरिक स्थिति या सीमाओं से संबंधित कारणों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 6. व्यापारियों ने सबसे पहले कौन-सा समुद्र देखा?
(क) खुरमाली
(ख) क्षीरार्णव
(ग) कुशमाली
(घ) नलमाली
Answer: (क) खुरमाली
In simple words: व्यापारियों ने सबसे पहले खुरमाली समुद्र देखा।
🎯 Exam Tip: घटनाओं के क्रम को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब स्थानों या वस्तुओं की सूची दी गई हो।
Question 7. भयानक, दुःखदायी और हृदयविदारक गर्जना करने वाला समुद्र कौन-सा था ?
(क) नलमाली
(ख) बड़वामुख
(ग) अग्निमाली
(घ) कुशमाली
Answer: (ख) बड़वामुख
In simple words: बड़वामुख समुद्र बहुत भयानक और जोर से गरजने वाला था।
🎯 Exam Tip: विशेषणों से पहचाने जाने वाले स्थानों या वस्तुओं को उनके गुणों के साथ याद रखें।
Question 8. बड़वामुख समुद्र से नौका को लौटाने के लिए सुपारग ने क्या उपाय किया?
(क) मन्त्रों का प्रयोग किया।
(ख) ईश्वर से प्रार्थना की
(ग) नौका को वापस मोड़ लिया
(घ) नौका को स्वतन्त्र छोड़ दिया
Answer: (ख) ईश्वर से प्रार्थना की
In simple words: सुपारग ने नाव को वापस लाने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
🎯 Exam Tip: मुख्य पात्र द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों या निर्णयों को याद रखें।
Question 9. सुपारगनाव को किसके बल से लौटाने में समर्थ हुआ ?
(क) बाहुबल से
(ख) अहिंसा बल से
(ग) सत्याधिष्ठान बल से
(घ) सत्याधिष्ठान और अहिंसा के बल से
Answer: (घ) सत्याधिष्ठान और अहिंसा के बल से
In simple words: सुपारग ने अपनी नाव को सत्य और अहिंसा की शक्ति से वापस लाया।
🎯 Exam Tip: कहानी के नैतिक या आध्यात्मिक पहलुओं को दर्शाने वाले उत्तरों पर ध्यान दें।
Question 10. जल-प्रवाह के विपरीत लौटी नौका किस समुद्र में पहुँच गयी ?
(क) अग्निमाली
(ख) नलमाली
(ग) कुशमाली
(घ) क्षीरार्णव
Answer: (घ) क्षीरार्णव
In simple words: नाव जल-प्रवाह के विपरीत चलते हुए क्षीरार्णव समुद्र में पहुँच गई।
🎯 Exam Tip: नाव द्वारा तय किए गए मार्ग के विभिन्न पड़ावों को सही क्रम में याद रखें।
Question 11. किस समुद्र के रेत और पत्थरों को सुपारग ने व्यापारियों से अपनी नौका में भरने को कहा था?
(क) अग्निमाली के
(ख) नलमाली के
(ग) खुरमाली के
(घ) कुशमाली के
Answer: (ख) नलमाली के
In simple words: सुपारग ने व्यापारियों से नलमाली समुद्र की रेत और पत्थर नाव में भरने को कहा था।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष निर्देश या सुझाव को याद रखें जो पात्र द्वारा दिया गया हो।
Question 12. व्यापारियों ने नौका में भरे रेत और पत्थरों के स्थान पर क्या वस्तु पायी ?
(क) विभिन्न रत्न
(ख) विभिन्न मोती
(ग) विभिन्न मछलियाँ
(घ) विभिन्न ओषधियाँ
Answer: (क) विभिन्न रत्न
In simple words: व्यापारियों को रेत और पत्थरों की जगह कई तरह के रत्न मिले।
🎯 Exam Tip: कहानी में हुए किसी चमत्कारी या महत्वपूर्ण परिवर्तन के अंतिम परिणाम को याद रखें।
Question 13. “बोधिसत्त्वभूतः किल महासत्त्वः परमनिपुणमतिः बभूव ।” में रिक्त-स्थान की पूर्ति होगी -
(क) 'पोतचालकः' से
(ख) 'नौसारथिः' से
(ग) “सारथिः' से
(घ) “सांयात्रिकः' से
Answer: (ख) 'नौसारथिः' से
In simple words: इस वाक्य में 'नौसारथिः' शब्द आएगा, जिसका अर्थ है नाविक।
🎯 Exam Tip: रिक्त-स्थान वाले प्रश्नों में, वाक्य के अर्थ के अनुसार सही शब्द का चयन करें।
Question 14. “यतो न भेतव्यमतः किं तु अयं समुद्रः तद्यतध्वं निवर्तितुम् ।” में रिक्त-स्थान में आएगा -
(क) कुशमाली
(ख) खुरमाली
(ग) अग्निमाली
(घ) नलमाली
Answer: (ख) खुरमाली
In simple words: इस वाक्य में 'खुरमाली' शब्द आएगा, जो उस समुद्र का नाम है जिससे डरना नहीं चाहिए।
🎯 Exam Tip: दिए गए उद्धरणों में सही शब्दों या वाक्यांशों की पहचान करें।
Question 15. "अस्माकं काल इवायं नलमाली नाम सागरः ।” वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति ?
(क) कुशमाली
(ख) सुपारग
(ग) श्रीमाली
(घ) वनमाली
Answer: (ख) सुपारग
In simple words: यह बात सुपारग ने कही थी कि नलमाली समुद्र उनके समय जैसा है।
🎯 Exam Tip: उद्धरणों के वक्ता की पहचान करना कहानी के ज्ञान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Question 16. समुपेतास्थ तदेतद् बडवामुखम्।” श्लोक की चरण-पूर्ति होगी –
(क) 'शिवम्' से
(ख) 'सुन्दरम्' से
(ग) “सत्यम्' से
(घ)' अशिवम्' से
Answer: (ग) “सत्यम्' से
In simple words: इस श्लोक को पूरा करने के लिए 'सत्यम्' शब्द का उपयोग होगा, जो बताता है कि वे बड़वामुख पहुंचे।
🎯 Exam Tip: श्लोक पूर्ति के लिए श्लोक के अर्थ और उसके संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 17. “मम पुण्यबलेन अहिंसाबलेन चेयं नौः स्वस्तिविनिवर्त्तताम्।” वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति ?
(क) सुपारगः
(ख) कुशमाली
(ग) श्रीमाली
(घ) वणिकः
Answer: (क) सुपारगः
In simple words: यह वाक्य सुपारग ने कहा था, जिसमें वह अपने पुण्य और अहिंसा के बल से नाव की सुरक्षित वापसी की कामना कर रहे थे।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण संवादों के वक्ता को पहचानना कहानी की समझ के लिए आवश्यक है।
Question 18. "तदेव आश्रयं सत्यवचनमपि आपदं नुदतीति ।” में रिक्त-स्थान की पूर्ति होगी -
(क) 'सत्य' से
(ख) “अहिंसा से
(ग)'धर्म' से
(घ) “अधर्म' से
Answer: (ग)'धर्म' से
In simple words: इस वाक्य में 'धर्म' शब्द आएगा, जिसका अर्थ है कि धर्म का सहारा और सच्चाई मुश्किलों को दूर करती है।
🎯 Exam Tip: नैतिक शिक्षा वाले वाक्यों में सही नैतिक शब्द का चयन करें।
Question 19. सुपारगः आसीत् ।
(क) व्यापारी
(ख) नाविकः
(ग) सैनिकः
(घ) कविः
Answer: (ख) नाविकः
In simple words: सुपारग एक नाविक थे।
🎯 Exam Tip: पात्र के मुख्य व्यवसाय या भूमिका को स्पष्ट रूप से पहचानें।
Question 20. पूर्वजन्मनि सुपारगः आसीत्। [2006, 10]
(क) ईन्द्रः
(ख) बोधिसत्वः
(ग) नृपः
(घ) अर्जुनः
Answer: (ख) बोधिसत्वः
In simple words: सुपारग अपने पिछले जन्म में बोधिसत्त्व थे।
🎯 Exam Tip: किसी पात्र के पिछले जन्म या विशेष पहचान को याद रखें।
Question 21. सुपारगः ज्ञाता आसीत् । [2007]
(क) वेदानां शास्त्राणां
(ख) रत्नानाम् समुद्राणां
(ग) वनस्पतीनां फलानाम्
(घ) संगीतशास्त्राणाम्
Answer: (ख) रत्नानाम् समुद्राणां
In simple words: सुपारग रत्नों और समुद्रों के जानकार थे।
🎯 Exam Tip: पात्र के विशेष ज्ञान या विशेषज्ञता के क्षेत्र को पहचानें।
Question 22. सुपारगः नाम बभूव । [2008, 10]
(क) वणिजः
(ख) पत्तनस्य
(ग) ग्रामस्य
(घ) नौसारथेः
Answer: (घ) नौसारथेः
In simple words: सुपारग नाविकों का नाम था।
🎯 Exam Tip: मुख्य पात्र के नाम के साथ उसके पेशे या पहचान का संबंध याद रखें।
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