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Detailed Chapter 12 कपड़ों की धुलाई और उनकी देखभाल UP Board Solutions for Class 10 Home Science
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Class 10 Home Science Chapter 12 कपड़ों की धुलाई और उनकी देखभाल UP Board Solutions PDF
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. सिलाई किट से आप क्या समझती हैं? सिलाई-किट में प्रयोग होने वाली आवश्यक सामग्री की सूची बनाइए एवं उसकी उपयोगिता लिखिए।
या
सिलाई किट से क्या अभिप्राय है? इसके आवश्यक उपकरणों का भी उल्लेख कीजिए।
या
सिलाई किट की आवश्यक सामग्री की सूची बनाइए एवं उनका प्रयोग लिखिए।
या
सिलाई किट का उपयोग लिखिए। इस किट में रखे जाने वाले सामानों की सूची बनाइए।
या
मिल्टन चाक और मिल्टन क्लाथ में क्या अन्तर है? इनका प्रयोग कब किया जाता है?
या
निम्नलिखित में से प्रत्येक का कार्य संक्षेप में लिखिए
(क) इंच टेप,
(ख) फिंगर कैप,
(ग) सुई,
(घ) कैंची।
Answer: सफल पारिवारिक जीवन के लिए प्रत्येक महिला को विभिन्न विषयों को समुचित ज्ञान होने के साथ-साथ सिलाई सम्बन्धी आवश्यक ज्ञान प्राप्त करना भी अत्यन्त आवश्यक है। मध्यम वर्गीय महिलाओं के लिए तो यह और भी आवश्यक है, क्योंकि इससे उन्हें सिलाई के पर्याप्त पैसे बच जाने के कारण पर्याप्त आर्थिक लाभ हो जाता है। सिलाई-कार्य अपने आप में एक व्यवस्थित कार्य है तथा इस कार्य को सुचारु रूप से करने के लिए विभिन्न यन्त्रों एवं उपकरणों की आवश्यकता होती है। सिलाई-कटाई को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने से पूर्व इस कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों एवं यन्त्रों की समुचित जानकारी अर्जित कर लेना अति आवश्यक है।
सिलाई के लिए आवश्यक साधन वस्त्रों की सिलाई-कटाई का कार्य एक व्यवस्थित कार्य है। इस कार्य को सफलतापूर्वक तथा सुविधापूर्वक करने के लिए विभिन्न उपकरणों एवं साधनों की आवश्यकता होती है। सिलाई-कार्य करने वाले व्यक्ति को इन उपकरणों एवं साधनों की समुचित जानकारी होनी चाहिए तथा उन्हें सम्भालकर रखना भी आना चाहिए। सिलाई कार्य सम्बन्धी अधिकांश उपकरणों एवं सामग्री को सिलाई किट में एक साथ सम्भालकर रखा जाता है। कुछ आवश्यक साधन सिलाई किट के अतिरिक्त भी होते हैं। दोनों ही वर्गों के साधनों एवं उपकरणों का विस्तृत विवरण निम्नवर्णित है
(क) सिलाई किट सिलाई किट से तात्पर्य उस थैले अथवा डिब्बे से है जिसमें सिलाई से सम्बन्धित छोटा-मोटा आवश्यक सामान (यन्त्र एवं उपकरण) रखा जाता है। सिलाई किट सामान्य रूप से किसी मोटे कपड़े, रेक्सीन अथवा टाट से, थैले के आकार की बनाई जाती है। इसके अतिरिक्त लकड़ी, गत्ते अथवा लोहे के डिब्बे को भी सिलाई किट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सिलाई किट में रखे जाने वाले सामान्य सामान निम्नलिखित हैं
(1) कैंचियाँ: कपड़ा काटने के उपकरण को कैंची कहते हैं। वस्त्रों की सिलाई के लिए कपड़ा काटने के लिए छोटी व बड़ी कैंचियों की आवश्यकता पड़ती है। कैंचियों के उचित रख-रखाव के लिए माह में कम-से-कम एक बार इनके जोड़ों पर हल्का-सा तेल लगा देने से ये सदैव ठीक कार्य करती हैं। समय-समय पर कैंचियों में धार लगवानी भी आवश्यक होती हैं।
(2) सूइयाँ: मशीन एवं हाथ से सिलाई करने के लिए विभिन्न प्रकार की सूइयाँ प्रयुक्त की जाती हैं। ये अनेक प्रकार की विभिन्न आकारों में उपलब्ध होती हैं। मशीन की सूई में नीचे व हाथ की सूई में ऊपर की ओर धागे के लिए छिद्र होता है। लगभग सभी प्रकार की सुइयों का एक सेट सिलाई किट में रखना चाहिए।
(3) पिने: पीतल की बनी ये पिने वस्त्र की सिलाई एवं कटाई के लिए बहुत उपयोगी हैं। लकड़ी के बोर्ड अथवा मेज पर कपड़ा फैलाकर ये पिनें लगाई जाती हैं, जिससे कि काटते समय कपड़ा इधर-उधर न खिसके।
(4) फिंगर कैप: अंगुस्तान अथवा फिंगर कैप धातु अथवा प्लास्टिक का बना होता है। यह दाहिने हाथ की मध्यमा (बीच वाली अंगुली) के आकार का होता है तथा हाथ से सिलाई करते समय सूई की चुभन से सुरक्षा प्रदान करता है।
(5) धागे: सफेद एवं अन्य समस्त सामान्य रंगों के धागे सिलाई किट में सदैव उपलब्ध रहने चाहिए। कपड़े के रंग से मिलते-जुलते रंग के धागे का सिलाई में उपयोग किया जाता है। सिलाई के धागे मजबूत तथा पक्के रंग वाले ही होने चाहिए।
(6) नापने के लिए उपकरण या इंच टेपः धातु अथवा कपड़े के बने इंच-टेप अथवा मीट्रिक टेप प्रयोग में लाए जाते हैं। वस्त्र की कटाई एवं सिलाई करते समय शारीरिक माप अथवा कपड़े को नापने के लिए इनका उपयोग किया जाता है।
(7) गुनिया: यह आकार की धातु की बनी होती है तथा इस पर सेण्टीमीटर के चिह्न अंकित होते हैं। यह 16 x 30 सेण्टीमीटर की होती है। इसका मुख्य उपयोग विभिन्न आकार के कपड़े काटने में किया जाता है।
(8) मोम व मिल्टन चाकः कुछ मोटे कपड़े व जीन सिलाई करते समय कट जाते हैं; अतः इससे बचने के लिए सिलाई के स्थानों पर मोम लगाई जाती है। । विभिन्न रंगों के आयताकार मिल्टन चॉकों को उपयोग कपड़ों की कटाई करते समय विभिन्न नापों अथवा आकारों को चिह्नित करने के लिए किया जाता है। मिल्टन चॉक द्वारा कपड़े पर लगाए गए निशान बिल्कुल साफ चमकते हैं। परन्तु ये पक्के नहीं होते। अतः सिलाई कार्य कर लेने के उपरान्त ब्रश से झाड़कर इन्हें साफ किया जा सकता है।
(9) कागज, रबर व पेन्सिलः बनाये जाने वाले वस्त्रों का आकार अथवा खाका तैयार करने के लिए कागज व पेन्सिल का उपयोग किया जाता है। रबर द्वारी आवश्यकतानुसार पेन्सिल के चिह्नों को मिटाया जा सकता है।
(ख) अन्य उपकरण: वस्त्रों की कटाई एवं सिलाई के लिए कुछ ऐसे साधन एवं उपकरण भी आवश्यक होते हैं, जिन्हें सिलाई किट में नहीं रखा जातो परन्तु इस्तेमाल करना अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है। इस वर्ग के साधनों एवं उपकरणों का सामान्य परिचय निम्नलिखित है
(1) सिलाई की मशीन: यह सिलाई का सर्वाधिक उपयोगी उपकरण है। ये प्रायः दो प्रकार की होती हैं-हाथ से चलाने वाली तथा पैरों से चलाई जाने वाली। अब विद्युत चालित सिलाई मशीन भी बाजार में उपलब्ध है। सिलाई की मशीन के विभिन्न कल-पुर्जा का प्रारम्भिक ज्ञान प्राप्त करना सदैव लाभकारी रहता है। उपयोग में लाने के पश्चात् मशीन की सदैव सफाई करनी चाहिए तथा माह में कम-से-कम एक बार विभिन्न कल-पुर्जा की जड़ में तेल डालना चाहिए। इसके लिए मशीन में विभिन्न स्थानों पर छिद्र एवं चिह्न अंकित होते हैं।
(2) मिल्टन कपडाः यह एक विशेष प्रकार का ऊनी कपड़ा होता है। इसका प्रयोग कपड़ों की कटाई करते समय मेज पर बिछाने के लिए होता है। इसकी लम्बाई व चौड़ाई मेज की लम्बाई-चौड़ाई के अनुसार होनी चाहिए। उपर्युक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि मिल्टन चाक से कपड़े पर आवश्यक निशान लगाए जाते हैं। तथा मिल्टन कपड़े को कपड़ा काटने वाले स्थान पर बिछाया जाता है।
(3) मेज या पटराः प्रायः कपड़े को मेज पर फैलाकर खड़े होकर काटा जाता है। सिलाई की मेज प्रायः लकड़ी की बनी होती है। यह लगभग एक मीटर चौड़ी व डेढ़ मीटर लम्बी होती है। यदि सिलाई-कार्य भूमि पर बैठकर करना हो, तो मेज के स्थान पर एक लकड़ी का पटरा ही इस्तेमाल किया जाता है।
(4) प्रेस या इस्तरी: सिलाई क्रिया को सुचारु रूप से करने के लिए प्रेस या इस्तरी की भी आवश्यकता होती है। कपड़े की सलवटें निकालने तथा उसे सीधा करने के लिए प्रेस की आवश्यकता होती है। प्रेस दो प्रकार की हो सकती है विद्युत चालित, तथा कोयले से गर्म होने वाली।
In simple words: सिलाई किट एक थैला या डिब्बा होता है जिसमें सिलाई से संबंधित छोटे उपकरण और सामग्री रखी जाती है। इसमें कैंची, सूई, धागा, इंच टेप, मिल्टन चाक, पिन आदि होते हैं जिनका उपयोग कपड़े की कटाई और सिलाई के लिए किया जाता है ताकि काम व्यवस्थित और सुरक्षित रहे।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में सिलाई किट के प्रत्येक उपकरण के नाम और उनके उपयोगों को स्पष्ट रूप से लिखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सामग्री के व्यावहारिक ज्ञान को दर्शाता है।
Question 2. वस्त्र काटने से पहले नाप लेना क्यों आवश्यक है? नाप लेने की प्रमुख विधियों का वर्णन कीजिए।
या
वस्त्र का नाप लेना क्यों आवश्यक है?
Answer: वस्त्र बनाने से पूर्व नाप लेने के लाभ वस्त्र बनाते समय पहनने वाले व्यक्ति की नाप लेने के अनेक लाभ हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं
1. यह अनुमान लगाना सम्भव हो जाता है कि वस्त्र बनाने के लिए कितना कपड़ा पर्याप्त रहेगा।
2. कपड़े के व्यर्थ जाने की सम्भावना समाप्त हो जाती है।
3. ठीक नाप लेने से वस्त्र उपयुक्त फिटिंग के बनते हैं।
4. उचित नाप लेकर कटाई व सिलाई करने पर सस्ते कपड़े के वस्त्र भी सुन्दर दिखाई पड़ते हैं।
नाप लेते समय ध्यान देने योग्य बातें यह एक महत्त्वपूर्ण कार्य है। अतः इसके लिए निम्नलिखित सावधानियाँ अपेक्षित हैं
1. वस्त्र बनवाने वाले व्यक्ति की रुचि के अनुसार ढीले अथवा तंग फिटिंग वाली नाप लेनी चाहिए।
2. विभिन्न अंगों की अलग-अलग नाप लेने से वस्त्र अच्छी फिटिंग के बनते हैं।
3. नाप लेते समय सदैव नाप देने वाले व्यक्ति के दाहिनी ओर खड़ा होना चाहिए।
4. इंच-टेप के सिरे को बाएँ हाथ से पकड़कर, दाहिने हाथ से नाप लेनी चाहिए।
5. नाप देने वाले व्यक्ति को स्वाभाविक अवस्था में समतल स्थान पर सीधा खड़ा करना चाहिए।
6. सिकुड़ने वाले वस्त्रों (मोटे सूती कपड़े व जीन्स आदि) को नाप लेने से पूर्व धोकर सुखा लेना चाहिए।
7. व्यक्ति विशेष की विभिन्न नापों को किसी कॉपी अथवा डायरी में क्रम से लिखना चाहिए, ताकि कपड़ा काटते समय भूल पड़ने की सम्भावना ही न रहे।
[नोट-नाप लेने की विधियों के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 3 देखें ।]
In simple words: वस्त्र काटने से पहले सही नाप लेना बहुत ज़रूरी है ताकि कपड़े की बर्बादी न हो और वस्त्र सही फिटिंग के बन सकें। नाप लेते समय शरीर की स्वाभाविक स्थिति और कपड़े के सिकुड़ने की प्रवृत्ति का ध्यान रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: नाप लेने के लाभ और सावधानियों को स्पष्ट बिन्दुओं में लिखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वस्त्र निर्माण के मौलिक सिद्धांतों को दर्शाता है।
Question 3. वस्त्रों की कटाई/सिलाई के लिए नाप लेने की विधियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: नाप लेने की विधियाँ- वस्त्रों की कटाई एवं सिलाई के लिए व्यक्ति का नाप लेने की दो विधियाँ हैं। जिस व्यक्ति का कपड़ा सिलना हो, यदि वह उपस्थित है तो उसके प्रत्येक अंग की ठीक नाप ली जा सकती है और यदि व्यक्ति उपस्थित नहीं है तो केवल छाती की नाप द्वारा ही शरीर के अन्य अंगों की नाप का अनुमान लगाया जा सकता है। नाप लेने की दोनों ही विधियों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है।
(1) केवल सीने अथवा छाती की नाप लेना:
यदि वस्त्र सिलवाने वाला व्यक्ति अनुपस्थित है, तो उसके सीने अथवा छाती की नापं से ही अन्य अंगों की नाप का अनुमान लगाकरे वस्त्र तैयार किए। जा सकते हैं, परन्तु इस विधि से तैयार वस्त्र एक तो सही फिटिंग के नहीं बन पाते और दूसरे व्यक्ति का असामान्य शारीरिक गठन होने पर अन्य अनेक कठिनाइयाँ हो सकती हैं। केवल सीने की नाप से अन्य नापों का अनुमान निम्न प्रकार से लगाया जाता है
| पुरुषों के लिए (सभी नाप सेमी में) | |||||
|---|---|---|---|---|---|
| सीना | कमर | हिप | पीठ | आस्तीन | गला |
| 76 | 71 | 84 | 16 | 78 | 35 |
| 86 | 76 | 92 | 18 | 80 | 37 |
| 92 | 81 | 97 | 18 | 81 | 38 |
| महिलाओं के लिए (सभी नाप सेमी में) | |||
|---|---|---|---|
| सीना | कमर | हिप | पुट |
| 76 | 61 | 81 | 31 |
| 86 | 63 | 97 | 34 |
| 92 | 66 | 102 | 35 |
| बच्चों के लिए | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आयु (वर्षों में) | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
| सीना | 58.5 | 59.5 | 61 | 63.5 | 66 | 69 | 71 |
| कमर | 59.9 | 59.1 | 61 | 63.5 | 66 | 69 | 69 |
(2) विभिन्न अंगों की नाप लेना: वस्त्र सिलवाने वाला व्यक्ति यदि उपस्थित है, तो इंच-टेप द्वारा उसके विभिन्न अंगों की नाप निम्न प्रकार से लेकर किसी कॉपी अथवा डायरी में लिख लेनी चाहिए।
सीने की नापः इंच-टेप को सामने से प्रारम्भ करके छाती के पीछे की ओर घुमाकर दूसरी ओर से सामने तक ले आइए। इस प्रकार सीने की सही नाप ली जा सकती है।
कमर की नापः इंच-टेप से कमर के घेरे को नापना चाहिए।
तीरे या पुट की नापः रीढ़ की हड्डी के ऊपरी सिरे से लेकर कन्धे तक की नाप लेनी चाहिए।
गले की नाप: टेप के नीचे उँगली रखकर गले की नाप लेनी चाहिए।
बॉडी की नाप: गर्दन से लेकर कमर तक की नाप को बॉडी की नाप कहते हैं।
वस्त्र की लम्बाई: व्यक्ति को सीधा खड़ा करके कन्धे एवं गर्दन के जोड़ से नीचे आवश्यक निचाई तक नापना चाहिए। ब्लाउज के लिए कमर तक तथा कमीज के लिए घुटने से ऊपर तक नाप ली जाती है। सलवार के कुर्ते के लिए घुटने से कुछ नीचे तक की नाप ली जाती है।
आस्तीन की नापः पूरी आस्तीन के लिए कन्धे से कलाई तक टेप द्वारा नापा जाता है। इसके साथ कफ के घेरे की नाप लेना आवश्यक होता है। आधी या आधी से कम अथवा अधिक लम्बाई की आस्तीन के लिए कन्धे से वांछित स्थान तक टेप से नापना चाहिए।
धड़ से नीचे के वस्त्रों की लम्बाई: पायजामा, पतलून, सलवार आदि के लिए कमर से पैरों तक की लम्बाई टेप से नापनी चाहिए। नेकर अथवा हाफ-पैण्ट के लिए कमर से घुटने तक की लम्बाई नापनी चाहिए। पायजामा, पतलून व सलवार के पाँयचों के लिए इनकी मोहरी की नाप भी लेनी चाहिए।
मियानी: पायजामे तथा सलवार की मियानी का आगे व
पीछे दोनों ओर की नापः इसके लिए कूल्हे के चारों ओर टेप घुमाकर नाप लेनी चाहिए। नेकर व पतलून आदि के लिए सीट की नाप अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होती है।
In simple words: वस्त्रों के लिए नाप लेने की दो मुख्य विधियाँ हैं: केवल सीने या छाती की नाप लेकर अन्य अंगों का अनुमान लगाना (जब व्यक्ति अनुपस्थित हो) और व्यक्ति के उपस्थित होने पर इंच-टेप से प्रत्येक अंग की सटीक नाप लेना।
🎯 Exam Tip: दोनों नाप लेने की विधियों और प्रत्येक अंग के लिए नाप लेने के तरीके को स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से समझाना, विशेष रूप से तालिका डेटा के साथ, उच्च स्कोरिंग के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. सिलाई कितने प्रकार की होती है? हाथ की सिलाई का प्रयोग कहाँ-कहाँ पर किया जाता है?
या
वस्त्रों की सिलाई कितने प्रकार से की जाती है? हाथ की सिलाई के किन्हीं चार टॉकों के नाम बताइए।
या
वस्त्रों की सिलाई में किन-किन टॉकों का प्रयोग किया जाता है किन्हीं तीन टाँको के बारे में लिखिए।
या
टाँके कितने प्रकार के होते हैं? इनका प्रयोग कब और कहाँ किया जाता है?
या
तुरपन या तुरपायी किसे कहते है?
Answer:
सिलाई के प्रकार
सिलाई दो प्रकार की होती है-मशीन की सिलाई तथा हाथ की सिलाई। हाथ की सिलाई कई प्रकार की होती है और इसका मशीन की सिलाई से अधिक महत्त्व होता है। हाथ की सिलाई को आदिकाल से प्रचलन है। प्राचीनकाल में जब मशीन उपलब्ध नहीं थी, तब हाथ से ही सिलाई का कार्य किया जाता था, परन्तु आज मशीन से वस्त्र सिलने के पश्चात् भी हाथ की सिलाई का तथा वस्त्र में हाथ से कार्य करने का अपना एक अलग महत्त्व है। वस्त्रों की सिलाई में विभिन्न प्रकार के टॉकों का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग भिन्न-भिन्न प्रयोजनों के लिए किया जाता है।
हाथ की सिलाई के विभिन्न टाँके
हाथ की सिलाई के विभिन्न टॉकों का सामान्य परिचय निम्नलिखित है
(1) कच्चा टाँका: कच्चे टाँके का प्रयोग कपड़े को अस्थायी रूप से जोड़ने के लिए किया जाता है। वास्तविक सिलाई कच्चे टाँके के बाद की जाती है। यह टाँका \( \frac { 1 }{ 2 } \) से 1 सेमी लम्बा होता है। धागे में गाँठ देकर कपड़े को दायीं ओर से बायीं ओर सिला जाता है।
(2) सादा टाँका: सादा या रनिंग टाँका हाथ की स्थायी सिलाई में अधिक प्रयोग किया जाता है। यह कच्चे टाँके की भाँति होता है, परन्तु उससे छोटा होता है।
(3) बखिया: बखिया के टॉकों का प्रयोग कपड़ों की मजबूत और पक्की सिलाई करने के लिए। किया जाता है। मशीन से जो सिलाई होती है वह भी बखिया ही होती है। मशीन की बखिया दोनों तरफ एक-सी होती है तथा साफ और सुन्दर लगती है, लेकिन हाथ की बखिया सीधी और उल्टी होती है। तथा मशीन की बखिया से कहीं अधिक मजबूत होती है। कपड़ों के जोड़ पर मजबूत सिलाई करने के लिए बखिया के टॉकों की आवश्यकता होती है।
(4) तुरपाई या हैमिंग टाँका: कपड़े के धागे निकलने से रोकने के लिए किनारे को बन्द करने के लिए इस टाँके का प्रयोग किया जाता है। इसमें सूई का समान रूप से छोटा टाँका लेकर कपड़े से निकालकर फिर दोहरे मोड़े हुए कपड़े में से निकालते हैं। तुरपन हाथ से ही की जाती है। इससे टाँके दूर से स्पष्ट नहीं दिखाई देते।
(5) सम्मिलित टाँकै: ये टाँके बहुत मजबूत होते हैं। किसी भी सिलाई को मजबूत बनाने के लिए इन टॉकों का प्रयोग किया जाता है। इसमें तीन सादे टाँकों के साथ एक बखिया का टाँका भी प्रयुक्त किया जाता है।
(6) काज के टॉक: काज बनाने से ही सिलाई की शिक्षा आरम्भ हो जाती है। काज अधिकतर हाथ से बनाए जाते हैं। काज का टाँका सरल है, फिर भी सफाई से काज बनाना एक कला है।
(7) पसज के टाँकै: कपड़े के किनारों को बराबर रखने के लिए इस टॉके का प्रयोग किया जाता है। जहाँ कहीं भी कपड़े के किनारे निकलने का भय रहता है या गोट लगानी होती है, वहाँ इस टाँके का प्रयोग प्रायः किया जाता है। इसके टाँके अधिक कसकर नहीं लगाए जाते, क्योंकि कपड़े में तनाव आने का डर रहता है। दो कपड़ों को जोड़ने के लिए इस टाँके का ही प्रयोग किया जाता है।
In simple words: सिलाई दो प्रकार की होती है - मशीन सिलाई और हाथ सिलाई। हाथ सिलाई में विभिन्न प्रकार के टाँके होते हैं जैसे कच्चा टाँका (अस्थायी), सादा टाँका (स्थायी), बखिया (मजबूत सिलाई), तुरपाई (किनारे बन्द करने के लिए) और काज के टाँके। प्रत्येक टाँके का अपना विशेष उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: सिलाई के मुख्य प्रकारों और हाथ की सिलाई के विभिन्न टाँकों का वर्णन उनके विशिष्ट उपयोगों के साथ करना आवश्यक है, जो सिलाई कौशल की समझ को दर्शाता है।
Question 5. फैन्सी टॉकों (स्टिच) से कढाई करने में कौन-कौन से उपकरण किस प्रकार काम में आते हैं? फैन्सी टॉकों के प्रयोग की प्रमुख विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: फैन्सी टॉक
वस्त्रों की सुन्दरता बढ़ाने के उद्देश्य से फैन्सी टॉकों द्वारा विभिन्न प्रकार की कढ़ाई की जाती है। यह एक सरल, सस्ता एवं सुरुचिपूर्ण कार्य है। इसमें काम में आने वाले उपकरण हैं
1. कढ़ाई का वस्त्र,
2. विभिन्न रंग के कढ़ाई के धागे,
3. सूइयाँ,
4. पेन्सिल,
5. कार्बन पेपर एवं
6. कढ़ाई के लिए फ्रेम अथवा अड्डा।
उपकरणों का प्रारम्भिक उपयोगः सर्वप्रथम कार्बन पेपर को उलटकर कपड़े के सीधी ओर रखना चाहिए। अब कार्बन पेपर पर डिजाइन का कागज पिनों द्वारा स्थापित कर देते हैं। पेन्सिल को डिजाइन पर चलाने से डिजाइन कपड़े पर उतर आता है। अब कपड़े को फ्रेम में इस प्रकार कस देते हैं। कि डिजाइन फ्रेम के मध्य में रहे। अब उपयुक्त रंगों वाले धागों का प्रयोग कर सूइयों द्वारा कढ़ाई की जाती है।
फैन्सी टॉकों के प्रयोग की विभिन्न विधियाँ
विभिन्न उपयोगों में आने वाले वस्त्रों की कढ़ाई के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के फैन्सी टॉकों को प्रयोग में लाया जाता है। इनके कुछ मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं
(1) हेम स्टिचः
ये मोटे व सूती कपड़ों से बने वस्त्रों; जैसे-मेजपोश, टी०वी० कवर आदि; के लिए उपयुक्त रहते हैं। (देखें चित्र 12.1)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.1 हेम स्टिच को दर्शाता है, जिसमें टाँके सीधे और समानांतर होते हैं, आमतौर पर कपड़े के किनारों को फिनिश करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह सिलाई कपड़े के मुड़े हुए किनारों को अदृश्य रूप से पकड़ने के लिए छोटे, तिरछे टाँकों का उपयोग करती है।
(2) साटिन स्टिचः
इसका प्रयोग फूल-पत्ती तथा अन्य डिजाइनों को भरने के लिए होता है। इसकी कढ़ाई कपड़े पर उभरी हुई होती है। साड़ी इत्यादि की कढ़ाई में साटिन स्टिच का बहुधा उपयोग किया जाता है। (देखें चित्र 12.2)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.2 साटिन स्टिच को दर्शाता है, जिसमें टाँके एक-दूसरे के बहुत पास-पास होते हैं और एक चिकनी, भरी हुई सतह बनाते हैं, जिसका उपयोग आमतौर पर डिजाइन में फूल-पत्तियों जैसे आकृतियों को भरने के लिए किया जाता है। यह सिलाई सतह पर एक चमकदार और उभरी हुई बनावट देती है।
(3) बटन होल स्टिचः
इसमें काज के समान छोटे-छोटे फूल बनाए जाते हैं। सूई से आगे की ओर धागा करके बार-बार एक ही छेद से निकालते जाते हैं। (देखें चित्र 12.3)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.3 बटन होल स्टिच को दर्शाता है, जिसे बटन के छेदों को मजबूत करने और सजाने के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें धागे को बार-बार एक ही छेद से निकालकर किनारे पर एक मजबूत किनारा बनाया जाता है। यह सिलाई किनारे को fraying से बचाती है।
(4) चेन अथवा जंजीरा स्टिचः
कश्मीरी कढ़ाई में इस प्रकार के स्टिच का प्रयोग विशेष रूप से होता है। इसमें टाँकों द्वारा जंजीर अथवा चेन के समान कढ़ाई की जाती है। (देखें चित्र 12.4)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.4 चेन या जंजीरा स्टिच को दर्शाता है, जिसमें टाँके आपस में जुड़कर एक चेन जैसी रेखा बनाते हैं। यह सिलाई कश्मीरी कढ़ाई में अक्सर उपयोग की जाती है और इसे सजावटी रेखाएँ या आकृतियाँ बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
(5) लेजी डेजी स्टिच: ये लगभग चेन स्टिच के समान बनाए जाते हैं। इसका उपयोग छोटे-छोटे फूल-पत्ती बनाने में होता है। (देखें चित्र 12.5)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.5 लेजी डेजी स्टिच को दर्शाता है, जो चेन स्टिच का ही एक प्रकार है, जहाँ प्रत्येक टाँका एक छोटी पत्ती या पंखुड़ी का आकार लेता है और अक्सर छोटे फूलों या पत्तियों के समूह बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह एक सुंदर और सरल सजावटी सिलाई है।
(6) स्टेम स्टिचः इस प्रकार के स्टिचों का उपयोग दिशा, लम्बाई अथवा दूरी के अनुसार किया जाता है। (देखें चित्र 12.6)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.6 स्टेम स्टिच को दर्शाता है, जिसमें टाँके एक-दूसरे के बगल में तिरछे लगाए जाते हैं, जिससे एक मोटी, रस्सी जैसी रेखा बनती है। यह सिलाई अक्सर पौधों के तने, रूपरेखा, और अन्य सजावटी रेखाएँ बनाने के लिए उपयोग की जाती है।
In simple words: फैन्सी कढ़ाई के लिए कढ़ाई का वस्त्र, विभिन्न रंग के धागे, सुइयाँ, पेन्सिल, कार्बन पेपर और फ्रेम जैसे उपकरणों का उपयोग होता है। इसमें हेम स्टिच, साटिन स्टिच, बटन होल स्टिच, चेन स्टिच, लेजी डेजी स्टिच और स्टेम स्टिच जैसी विभिन्न विधियों का प्रयोग किया जाता है, जिनमें प्रत्येक का अपना विशिष्ट सजावटी उद्देश्य होता है।
🎯 Exam Tip: फैंसी टाँकों के उपकरण और उनकी प्रारंभिक उपयोग विधि का स्पष्ट वर्णन महत्वपूर्ण है। विभिन्न प्रकार के टाँकों को उनके उपयोग के साथ समझाना, जैसे कि हेम स्टिच, साटिन स्टिच, आदि, आपके उत्तर को प्रभावी बनाता है।
Question 6. बेबी फ्रॉक के लिए कपड़े की मात्रा का अनुमान कैसे लगाएँगी? दो वर्ष एवं पाँच वर्ष के बकी बेबी फ्रॉक बनाने की विधि सचित्र लिखिए।
या
तीन वर्ष की बालिका के बेबी फ्रॉक में कितना कपड़ा लगेगा? फ्रॉक को सुन्दर और आकर्षक बनाने के लिए आप क्या करेंगी?
या
बेबी फ्रॉक में औसतन कितना कपड़ा लगेगा? बेबी फ्रॉक के नाप के अनुसार ड्राफ्टिग कीजिए।
Answer:
बेबी फ्रॉक के लिए अनुमानित कपड़ा
बेबी फ्रॉक बनाने के लिए कपड़े का अनुमान लगाना एक लाभप्रद एवं आवश्यक कार्य है, क्योंकि आवश्यकता से अधिक कपड़ा खरीदना एक प्रकार से धन का अपव्यय ही है। बेबी फ्रॉक के लिए आवश्यक कपड़े का अनुमान निम्न प्रकार से लगाया जा सकता है मान लीजिए कि घेर की लम्बाई = 25 सेमी चोली की लम्बाई = 20 सेमी आस्तीन की लम्बाई = 15सेमी कपड़े का अर्ज = 92 सेमी तो, कपड़े की लम्बाई = घेर की लम्बाई x2 + चोली की लम्बाई + आस्तीन की लम्बाई = 25 x 2 + 20 + 15 + मोड़ने के लिए 10 सेमी = 95 सेमी यदि गले में झालर लगानी है, तो इसके लिए अतिरिक्त कपड़ा लेना होगा।
बेबी फ्रॉक की रूपरेखा
तीन वर्ष की बालिका का फ्रॉक बनाने के लिए कपड़े का अनुमान निम्नांकित तालिका के
अनुसार लगाएँ:
| 2 वर्ष का बच्चा | 5 वर्ष का बच्चा | |
|---|---|---|
| 46 सेमी | छाती | 60 सेमी |
| 36 सेमी | कुल लम्बाई | 55 सेमी |
| 11 सेमी | बॉडी की लम्बाई | 27.5 सेमी |
| 14 सेमी | तीरा कन्धा | 30 सेमी |
| 22 सेमी | घेर की लम्बाई | 35 सेमी |
| 90 सेमी | घेर की चौड़ाई | 180 सेमी |
| 11 सेमी | बॉडी अथवा चोली की नाप 1 से 2 लम्बाई 1 से 3 चौड़ाई | 27.5 सेमी |
| 13 सेमी | चेस्ट का \( \frac{1}{4} \) + \( 1\frac{1}{2} \) सेमी | 16.5 सेमी |
| 3 से 4 = 1 से 2 2 से 4 = 1 से 3 | ||
| \( 4\frac{1}{2} \) सेमी | 1 से 5 कन्धों की लम्बाई | 15 सेमी |
| 11.5 सेमी | 5 से 6 चेस्ट का \( \frac{1}{4} \) | 15 सेमी |
6 से 7 तक सीधी रेखा खींचिए
4 से 8 तक - 1 सेमी साइड कटिंग को
7 से 8 तक मिला दीजिए।
5 से 9 तक 1 सेमी
1 से 10 तक
1 से 11 तक
10 से 11 तक गोलाई में मिला दीजिए
1 से 12-1.5 सेमी पीछे की कटिंग के लिए
10 से 9 तक मिला दीजिए।
9 से 6 से 7 तक आगे की गोलाई
9 से 13 से 7 तक आगे की कटिंग
2 से 14 चेस्ट का \( \frac{1}{8} \)
14 से 15
14 से 16 = 14 से 17 = \( 1\frac{1}{2} \) सेमी
| 3 सेमी | 5 सेमी | |
| 4 सेमी | 6 सेमी | |
| - | ||
| 5.75 सेमी | 7.5 सेमी | |
| 4 सेमी | 6 सेमी |
घेर की नाप
1 से 2 तक
1 से 3 तक घेर की चौड़ाई का \( \frac{1}{2} \)
2 से 4 तक मोड़ने के लिए
| 32 सेमी | 35 सेमी | |
| 45 सेमी | 90 सेमी | |
| 10 सेमी | 10 सेमी |
आस्तीन की रूपरेखा
1 से 2 आस्तीन की लम्बाई
1 से 3 आस्तीन की चौड़ाई
2 से 5
2 से 6 चेस्ट का \( \frac{1}{2} \)
6 से 3 और 5 से 6 को मिला दीजिए
अब ड्राफ्ट के अनुसार कपड़े को काटिए।
| 10 सेमी | 15 सेमी | |
| 15 सेमी | 20 सेमी | |
| 2.5 सेमी | 2.5 सेमी | |
| 4 सेमी | 5 सेमी |
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.7 एक बेबी फ्रॉक की कटिंग का ड्राफ्टिंग पैटर्न दिखाता है। इसमें 'बॉडी की नाप' वाले भाग में गले, कंधे और आर्महोल की कटिंग के बिंदु तथा 'घेर की नाप' वाले भाग में फ्रॉक के निचले हिस्से की चौड़ाई और गोलाई दर्शाई गई है। 'आस्तीन की रूपरेखा' वाले भाग में आस्तीन के आकार को काटने के लिए आवश्यक रेखाएँ और वक्र स्पष्ट किए गए हैं।
In simple words: बेबी फ्रॉक बनाने के लिए, सबसे पहले बच्चे की उम्र के अनुसार नाप का अनुमान लगाया जाता है, जिसमें छाती, लम्बाई, तीरा, घेर की लम्बाई और चौड़ाई शामिल होती हैं। फिर इन मापों के आधार पर कपड़े पर ड्राफ्टिंग की जाती है, जिसमें शरीर के विभिन्न हिस्सों के लिए कटिंग रेखाएँ और आस्तीन व घेर के लिए विशेष आकार बनाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: बेबी फ्रॉक के लिए कपड़े की मात्रा का अनुमान और ड्राफ्टिंग की विधि को स्पष्ट तालिका और चित्र के माध्यम से समझाना उच्च स्कोरिंग के लिए महत्वपूर्ण है। नाप की इकाइयों (सेमी) का सही उपयोग करें।
Question 7. लेडीज कुर्ता सिलने की सम्पूर्ण विधि चित्र सहित समझाइए।
या
16 वर्ष की लड़की के कुर्ते में कितना कपड़ा लगेगा? कुर्ते की नाप के अनुसार ड्राफ्टिग कीजिए।
Answer:
लेडीज कुर्ता
युवतियाँ सलवार या चूडीदार पायजामे के साथ कुर्ता पहनती हैं। कुर्ता कई प्रकार से बनाया जाता है। फैशन के अनुसार कुर्ता ढीला या टाइट फिटिंग वाला पहना जा सकता है। कुर्ता बनाने के लिए इन नापों की आवश्यकता होती है- लम्बाई, चेस्ट, हिप, घेर, पुट या तीरा, कमर, गला, आस्तीन की लम्बाई, मोहरी।
18 वर्षीया युवती की औसत नापः लम्बाई 100 सेमी, चेस्ट 80 सेमी, हिप 50 सेमी, घेर घुटने पर से 90 सेमी, पुट या तीरा 35 सेमी, कमर 70 सेमी, गला 30 सेमी, आस्तीन की लम्बाई 30 सेमी या इच्छानुसार मोहरी 25 सेमी। (1) कुर्ता बनाने के लिए आगे और पीछे का भाग अलग-अलग तैयार किया जाता है। (2) कपड़े की चौड़ाई को हिप का +2 सेमी या ढीला अधिक रखना हो, तो इच्छानुसार
दोहरा करके कपड़ा लम्बाई के बराबर लेकर सामने और उसके पीछे का भाग अलग-अलग रखिए।
पीछे का भाग -
1 से 2 = पूरी लम्बाई + 5 सेमी नीचे मोड़ने के लिए
1 से 3 = हिप का \( \frac{1}{2} \) + \( 2\frac{1}{2} \) सेमी का इच्छानुसार
3 से 4 = 1 से 2
1 से 3 = 2 से 4
1 से 7 = पुट या तीरे का \( \frac{1}{2} \)
1 से 5 = चेस्ट का \( 1\frac{1}{2} \) सेमी
5 से 6 = सीधी रेखा
1 से 5 = 7 से 8 सीधी रेखा
7 से 9 = 2 सेमी
1 से 10 = गले का \( \frac{1}{4} \) या इच्छानुसार
1 से 11 = गले का \( \frac{1}{4} \) या इच्छानुसार
10 से 11 = गले के पीछे की काट
9 से 6 = आस्तीन के पीछे की गोलाई से मिलाकर
10 से 12 = 22 सेमी छोड़कर या शरीर की विशेष बनावट के अनुसार
12 से 13 = 20 सेमी प्लेट
4 से 14 = कुर्ते की लम्बाई का \( \frac{1}{4} \) या इच्छानुसार
अब 7 से 6 से 14 से 4 के चित्र के अनुसार काटो।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.8 एक कुर्ते का ड्राफ्टिंग पैटर्न प्रस्तुत करता है, जिसमें 'BACK' (पीछे का भाग) और 'FRONT' (सामने का भाग) के लिए अलग-अलग कटिंग रेखाएं और अंकन दर्शाए गए हैं। यह आर्महोल, गले की गोलाई, कंधे और साइड सीम के लिए विशिष्ट माप और वक्र दिखाता है, जो कुर्ते की सही फिटिंग सुनिश्चित करने में मदद करता है।
सामने का भाग -
1 से 2 = पूरी लम्बाई + 5 सेमी नीचे मोड़ने के लिए
1 से 3 = हिप का \( \frac{1}{2} \) + \( 2\frac{1}{2} \) सेमी या इच्छानुसार
3 से 4 = 1 से 2
1 से 3 = 2 से 4
1 से 7 = पुट तीरे का \( \frac{1}{2} \)
1 से 5 = चेस्ट का \( 1\frac{1}{2} \) सेमी
1 से 5 = 7 से 8 सीधी रेखा
5 से 6 = सीधी रेखा
7 से 9 = 2 सेमी
1 से 10 = गले का \( \frac{1}{4} \) या इच्छानुसार
1 से 11 = गले का \( \frac{1}{4} \) या इच्छानुसार
9 से 10 = सीधी रेखा
10 से 11 = गले की आगे की काट (इच्छानुसार आकार)
8 से 12 = 7 से 8 का \( \frac{1}{2} \)
12 से 13 = 2 सूत अन्दर की ओर
9 से 13 से 6 = आस्तीन के आगे की गोलाई देते हुए काट
8 से 18 = 7 सेमी प्लेट
10 से 14 = 22 सेमी छोड़कर
14 से 15 = 20 सेमी प्लेट
14 से 16 = 7 सेमी छोड़कर
16 से 17 = 20 सेमी प्लेट
6 से 20 = 12 सेमी प्लेट
29 से 19 = 14 सेमी प्लेट
4 से 21 लम्बाई का \( \frac{1}{4} \) या इच्छानुसार
In simple words: लेडीज कुर्ता सिलने के लिए, पहले लम्बाई, चेस्ट, हिप, कमर और गले की नाप ली जाती है। फिर कपड़े को दोहरा करके, पीछे और सामने के भागों के लिए अलग-अलग ड्राफ्टिंग की जाती है। इसमें प्रत्येक भाग की लंबाई, चौड़ाई और कटिंग पॉइंट्स को सटीक मापों के अनुसार चिह्नित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: कुर्ते की कटिंग के लिए पीछे और सामने के भागों की ड्राफ्टिंग प्रक्रिया को स्पष्ट मापों और चरणों के साथ वर्णित करना महत्वपूर्ण है, जो आपके व्यावहारिक ज्ञान को दर्शाता है।
Question 8. 18 वर्ष की युवती के पेटीकोट के लिए कितना कपड़ा चाहिए ? पेटीकोट की आवश्यक नाप लिखिए और सचित्र समझाइए।
या
महिला के पेटीकोट के लिए कपड़े की लम्बाई का अनुमान कैसे लगाया जाएगा? इसके लिए कपड़ा कैसे काटा जाएगा?
या
कलीदार पेटीकोट का ड्राफ्ट बनाइए।
Answer:
पेटीकोट के लिए अनुमानित कपड़ा
यह देखना चाहिए कि कपड़े की चौड़ाई में से पेटीकोट की एक तरफ अथवा दो कली निकल आयें। यदि नेफा अलग है, तो पेटीकोट के लिए लम्बाई x 2 सेमी लम्बे कपड़े की आवश्यकता पड़ेगी, क्योंकि जितना नेफा ऊपर लगेगा नीचे की ओर उतना ही पेटीकोट को मोड़ा जा सकता है। यदि कपड़े की चौड़ाई में से किनारे से नेफे का कपड़ा न निकले, तो पेटीकोट के लिए लम्बाई x 2 + नेफा कपड़ा लगेगा। यदि पेटीकोट के नीचे लेस या झालर लगानी हो तो नेफे का कपड़ा छोड़कर दो लम्बाई से कम कपड़े से भी काम चल सकता है।
पेटीकोट की रूपरेखा
कपड़े का अर्ज = 92 सेमी पेटीकोट की लम्बाई = 1 मीटर (5 सेमी कपड़ा अधिक लें) कमर का घेरा = 70 सेमी 1 से 2 = पेटीकोट की लम्बाई 100 सेमी + 5 सेमी = 105 सेमी 1 से 3 = कपड़े के अर्ज अथवा पने के अनुसार 1 से 5 = कमर का \( \frac { 1 }{ 4 } \) + 5 = लगभग 23 सेमी 4 से 6 = 1 से 5 = 23 सेमी 5 से 6 को तिरछा मिलाइए
5 से 8 = 1 से 2
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.10 एक पेटीकोट के ड्राफ्टिंग पैटर्न को दर्शाता है, जिसमें कलीदार कटिंग के लिए विभिन्न बिंदु और रेखाएं अंकित हैं। यह पैटर्न कमर के घेरे, लम्बाई और कलियों के आकार को सही ढंग से काटने के लिए गाइड करता है, जिससे पेटीकोट में उचित घेर और फिटिंग आती है।
6 से 7 = 3 से 4 अब 5 से 6 को पहले तिरछा काटिए। 7 से 9 व 8 से 10 का अधिक वाला कपड़ा काट दीजिए। म्यानी के लिए कमर की लम्बाई से 10 सेमी कपड़ा अधिक लीजिए अर्थात 70+ 10 = 80 सेमी तथा 10 सेमी चौड़ा कपड़ा लेकर ऊपर पेटीकोट में लगाइए। अब समान रंग के धागे से सिलाई कीजिए।
In simple words: पेटीकोट बनाने के लिए, सबसे पहले कपड़े की लम्बाई का अनुमान लगाया जाता है, जो नेफा और मोड़ने के लिए अतिरिक्त कपड़े को ध्यान में रखता है। फिर कमर के घेरे और लम्बाई के अनुसार कपड़े पर ड्राफ्टिंग की जाती है, जिसमें कलियों को तिरछा काटकर सिला जाता है ताकि उचित घेर बन सके।
🎯 Exam Tip: पेटीकोट के लिए कपड़े के अनुमान की गणना और ड्राफ्टिंग की विधि को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है, खासकर जब कलीदार पेटीकोट के पैटर्न का वर्णन किया जा रहा हो।
Question 9. पायजामे के लिए कपड़े की मात्रा का अनुमान आप किस प्रकार लगाएँगी? एक वयस्क पुरुष व दो वर्ष के बच्चे के पायजामे को बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।
या
एक वयस्क पुरुष के लिए पायजामा का नाप लिखकर काटने की विधि चित्र द्वारा समझाइए।
या
एक बालक के पायजामे का ड्राफ्ट बनाइए।
या
एक सादा पायजामे में कितना कपड़ा लगता है? सादा पायजामे के ड्राफ्ट का चित्र बनाइए।
या
एक 14 या 16 वर्ष के लड़के के लिए पायजामा बनाने में कितना मीटर कपड़ा लगेगा? पायजामे का ड्राफ्ट बनाइए।
Answer:
पायजामे के लिए अनुमानित कपड़ा
यदि कपड़े का अर्ज 92 सेमी है, तो कपड़े की अनुमानित मात्रा होगी, पायजामे की लम्बाई x 2 + 10 सेमी (मोहरी मोड़ व नेफे के लिए) वयस्क के लिए यदि पायजामे की लम्बाई = 105 सेमी तो आवश्यक कपड़ा = 105 x 2 +10 = 220 सेमी
वयस्क व्यक्ति के लिए पायजामा बनाने की विधि
चित्र (अ):
1 से 2 तक की लम्बाई + 5 सेमी = 110 सेमी
1 से 3 तक पाँयचे की चौड़ाई = अर्ज का 3 = 46 सेमी
1 से 5 तक नेफा मोड़ने के लिए = 5 सेमी
2 से 6 तक मोहरी मोड़ने के लिए = 5 सेमी
5 से 6 के तीन बराबर भाग किए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 12.11 एक पायजामे के ड्राफ्टिंग पैटर्न को दर्शाता है, जिसमें तीन अलग-अलग भाग (अ, ब, स) शामिल हैं। भाग (अ) पायजामे के मुख्य हिस्से की लंबाई और पाँयचे की चौड़ाई के लिए कटिंग लाइनें दिखाता है, जबकि भाग (ब) और (स) म्यानी के आकार और कटिंग को स्पष्ट करते हैं। यह पैटर्न पायजामे के प्रत्येक खंड को सही ढंग से काटने के लिए माप और रेखांकन प्रदान करता है।
चित्र (ब): ऊपर का एक भाग म्यानी के लिए (5 से 7) 4 से 10 = 3 सेमी, 8 से 7 तक सीधी रेखा खीचिए।
चित्र (स): म्यानी की चौड़ाई = 10 सेमी 1 से 3 म्यानी की लम्बाई = 20 सेमी 1 से 6 = 1.5 सेमी 4 से 5 = 1 से 6, 5 से 6 को मिलाइए 5 से 7= 4 से 2, 6 से 8 = 1 से 3
आवश्यकता से अधिक बचने वाले कपड़े को काटकर म्यानी के दोनों किनारे बराबर कर लीजिए। उपर्युक्त रूपरेखा के अनुसार कपड़े की कटिंग करके पायजामे की सिलाई कर लीजिए व प्रेस करके सलवटें दूर कीजिए।
दो वर्ष के बच्चे का पायजामाः
से 5 वर्ष तक के बच्चे का पायजामा बनाने के लिए कपड़े की एक ही लम्बाई से काम चल जाता है, क्योंकि 92 सेमी के अर्ज में दोनों पाँयचे निकल आते हैं। यदि पायजामे की लम्बाई = 60 सेमी तो आवश्यक कपड़ा = 60 + 10 (नेफे व मोहरी के लिए) = 70 सेमी
बनाने की विधिः अब बच्चे के पायजामे की रूपरेखा
In simple words: पायजामे के लिए कपड़े की मात्रा का अनुमान उसकी लंबाई को दोगुना करके और नेफे व मोहरी के लिए अतिरिक्त कपड़ा जोड़कर लगाया जाता है। वयस्क और बच्चों के पायजामे के लिए ड्राफ्टिंग में लंबाई, पाँयचे की चौड़ाई और म्यानी के माप शामिल होते हैं, जिन्हें सटीक कटिंग के लिए कपड़े पर चिह्नित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: पायजामे के लिए कपड़े की अनुमानित मात्रा की गणना और वयस्क व बच्चों के लिए ड्राफ्टिंग की विधि को स्पष्ट मापों और भागों (मुख्य भाग, म्यानी) के साथ समझाना महत्वपूर्ण है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. घर पर ही वस्त्रों की सिलाई करने के लाभ बताइए ।
Answer: घर पर ही वस्त्रों की सिलाई करने से वस्त्र कम समय में और जिस समय आवश्यकता हो, . उसी समय तैयार किए जा सकते हैं। दर्जी प्राय- समय अधिक लगाने के साथ-साथ कपड़ा भी अपेक्षाकृत अधिक लेते हैं। घर में वस्त्र नाप के अनुसार उचित रूप से बनाए जा सकते हैं। वस्त्र सिलने पर बचे कपड़े का उपयोग छोटे बच्चों के कपड़े, थैले-थैलियाँ तथा नैपकिन्स आदि बनाने में किया जा सकता है। घर पर सिलाई करने से धन की भी बचत होती है। दर्जियों के पास चक्कर काटने से धन न' मा का अपव्यय होता है। इसके अतिरिक्त अपने परिवार के सदस्यों तथा स्नेहीजनों के लिए अपने हाथों से बेशभूषा तैयार करने में एक विशेष प्रकार का भावात्मक सन्तोष तथा प्रसन्नता की भी अनुभूति होती है। इसी प्रकार घर पर ही तैयार किए गए वस्त्रों को पहनकर भी एक अद्भुत आनन्द की प्राप्ति होती है।
In simple words: घर पर सिलाई करने से समय और धन की बचत होती है, कपड़े सही नाप के बनते हैं, बचे हुए कपड़े का सदुपयोग होता है, और व्यक्तिगत संतोष मिलता है।
🎯 Exam Tip: घर पर सिलाई के वित्तीय और भावनात्मक लाभों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 2. सिलाई किट किसे कहते हैं?
Answer: सिलाई-कार्य के लिए विभिन्न उपकरणों की आवश्यकता होती है। इन उपकरणों को किसी थैले, डिब्बे अथवा बॉक्स में विधिवत् रखा जाता है। सिलाई उपकरणों सहित इस डिब्बे, थैले अथवा बॉक्स को ही सिलाई किट कहते हैं। सिलाई किट सामान्य रूप से किसी मोटे कपड़े, रेक्सीन अथवा टाट से, थैले के आकार का बनाया जाता है। इसके अतिरिक्त लकड़ी, गत्ते अथवा लोहे के डिब्बे को भी सिलाई किट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
In simple words: सिलाई किट एक थैला या डिब्बा होता है जिसमें सिलाई से संबंधित सभी छोटे और आवश्यक उपकरण तथा सामग्री व्यवस्थित रूप से रखी जाती है।
🎯 Exam Tip: सिलाई किट की परिभाषा और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का उल्लेख करें।
Question 3. सिलाई किट बनाने से क्या लाभ होता है?
या
सिलाई किट की उपयोगिता क्या है? इसमें कौन-सा सामान रहता है?
Answer: सिलाई किट में सिलाई-कटाई के लिए आवश्यक समस्त उपकरण एक स्थान पर एकत्र रहते हैं। अतः किसी उपकरण की आवश्यकता होते ही उसे तुरन्त उपलब्ध किया जा सकता है। इससे समय की बचत होती है तथा उपकरण ढूँढने की परेशानी से भी बचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त सदैव सिलाई किट में ही आवश्यक उपकरण रखने की आदत से किसी भी उपकरण के खो जाने की आशंका नहीं रहती। सिलाई किट में वस्त्रों की सिलाई के लिए आवश्यक सभी उपकरण एवं सामग्री रखी जाती है। सिलाई मशीन तथा प्रेस आदि उपकरणों को इसमें सम्मिलित नहीं किया जाता है
In simple words: सिलाई किट से सभी उपकरण एक जगह पर मिल जाते हैं, जिससे समय बचता है, चीजों को ढूंढने की परेशानी नहीं होती और उपकरण खोने का डर भी नहीं रहता।
🎯 Exam Tip: सिलाई किट के मुख्य लाभों और इसमें रखे जाने वाले सामान्य सामान (सिलाई मशीन और प्रेस को छोड़कर) पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 4. कपड़ा काटते समय आप किन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक समझती हैं?
Answer: वस्त्र बनाने के लिए कपड़ा काटते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना सदैव लाभप्रद रहता है
(1) कपड़ा काटने से पूर्व सर्वप्रथम उसकी कान अथवा तिरछापन दूर कर देना चाहिए। यह कार्य वस्त्र की रूपरेखा के चिह्न अंकित करने से पहले करना चाहिए।
(2) कपड़े पर छपे डिजाइन की सिलाई करते समय पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। डिजाइन की उपेक्षा करके सिले वस्त्र कम सुन्दर लगते हैं।
(3) अर्ज की ओर कपड़ा आड़ा व लम्बाई की ओर खड़ा कहलाता है। सही फिटिंग के वस्त्र सिलने के लिए कपड़े को सदैव खड़ा काटना चाहिए।
(4) कपड़े को सदैव समतल स्थान पर रखकर काटना चाहिए।
(5) कपड़ा काटते समय सिलाई में दबने वाले कपड़े का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
(6) वस्त्र काटते समय दाहिने हाथ में कैंची पकड़कर बाएँ हाथ से वस्त्र को दबाते हुए समान गति से कैंची चलाते हुए कपड़ा काटना चाहिए।
(7) तीव्र व मध्यम धार वाली कैची का उपयोग करना चाहिए।
(8) कपड़ा काटने से पूर्व इस्त्री (प्रेस) कर इसकी सलवटें दूर कर लेनी चाहिए।
In simple words: कपड़ा काटते समय कपड़े का तिरछापन दूर करें, डिजाइन का ध्यान रखें, कपड़े को हमेशा खड़ा काटें, समतल जगह पर काटें, और काटने से पहले प्रेस करके सलवटें हटा दें।
🎯 Exam Tip: कपड़ा काटने के महत्वपूर्ण चरणों और सावधानियों को बिंदुवार सूचीबद्ध करें।
Question 5. वस्त्रों की सिलाई करते समय मुख्य रूप से किन-किन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है?
Answer: वस्त्रों की सिलाई करते समय मुख्य रूप से अग्रलिखित बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है
1. सिलाई करने से पहले हाथ अच्छी तरह से साफ कर लें जिससे कि कपड़ा गन्दा न हो।
2. सिलाई प्रारम्भ करने से पूर्व सिलाई का सब सामान अपने पास रख लें, ताकि समय की बचत हो और असुविधा भी न हो ।।
(3) वस्त्र की सिलाई
3. आँख के बहुत पास लाकर नहीं करनी चाहिए, एक निश्चित दूरी अवश्य रखनी चाहिए।
4. सिलाई कार्य करने के स्थान पर पर्याप्त प्रकाश होना चाहिए ।
5. सिलाई करने में कपड़े के अनुसार मोटी या पतली सूइयों को प्रयोग करना चाहिए।
6. सूई को कभी भी मुंह में नहीं रखना चाहिए।
7. सूई को खोने से बचाने के लिए उसमें सदैव धागा पिरोकर ही रखना चाहिए।
In simple words: सिलाई करते समय हाथ साफ रखें, सभी सामान पास रखें, उचित दूरी और प्रकाश में काम करें, कपड़े के अनुसार सही सूई चुनें, और सूई को मुंह में न रखें तथा उसमें धागा पिरोकर सुरक्षित रखें।
🎯 Exam Tip: सिलाई करते समय स्वच्छता, सुरक्षा, और कार्यस्थल की उचित व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर करें।
Question 6. मशीन द्वारा सिलाई करते समय सूई टूटने के कारण बताइए।
Answer: सूई के टूटने के प्राय- निम्नलिखित कारण होते हैं
1. मशीन में सूई के सही प्रकार से न लगे होने पर इसके टूटने की पूर्ण सम्भावना रहती है।
2. मशीन में शटल के भली प्रकार कसी न होने पर भी प्राय- सूई टूट जाया करती है।
3. कपड़े के अनुसार मोटी अथवा पतली सूई का प्रयोग न करना प्राय- सूइयों के टूटने का कारण रहता है।
4. सिलते समय बार-बार कपड़ा खींचने से भी सूई के टूट जाने का भय रहता है।
5. नकली, घिसी, जंग लगी पुरानी सूई प्रयोग करने पर टूट सकती है और उससे शारीरिक क्षति की भी सम्भावना रहती है।
In simple words: सिलाई मशीन में सूई गलत लगने, शटल ढीला होने, कपड़े के हिसाब से गलत सूई इस्तेमाल करने, कपड़ा खींचने, या पुरानी और खराब सूई के उपयोग से सूई टूट सकती है।
🎯 Exam Tip: सूई टूटने के मुख्य यांत्रिक और उपयोगकर्ता संबंधित कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 7. सिलाई करते समय मशीन का धागा टूटने के कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: मशीन द्वारा सिलाई करते समय धागा टूट जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित होते हैं।
1. धागे का क्रम मशीन में यदि ठीक से न रखा गया हो अर्थात् धागा ठीक से न डाला गया हो, तो मशीन चलाते ही धागा टूट जाता है।
2. धागा यदि पुराना या कच्चा हो अथवा मशीन में ऊपर तथा नीचे का धागा एक समान न हो, तो भी धागा बार-बार टूटता रहता है।
3. मशीन की सूई यदि टेढ़ी अथवा गलत लगी हो तो भी धागा टूट जाता है।
4. मशीन में खिंचाव को सँभालने वाले स्प्रिंग का कसाव यदि अधिक हो, तो मशीन चलाते समय धागा टूट जाता है।
5. कपड़े की मोटाई के अनुसार यदि सही सूई एवं धागे को न अपनाया गया हो, तो भी प्राय- धागो टूट जाता है।
In simple words: धागा गलत डला होने, पुराना या खराब धागा होने, सूई टेढ़ी होने, मशीन के स्प्रिंग में ज्यादा कसाव होने, या कपड़े की मोटाई के अनुसार गलत धागा-सूई के प्रयोग से सिलाई करते समय धागा टूट सकता है।
🎯 Exam Tip: धागा टूटने के सामान्य कारणों पर ध्यान केंद्रित करें, जिसमें धागे की गुणवत्ता, मशीन की सेटिंग, और सूई का संरेखण शामिल हैं।
Question 8. मिल्टन चॉक एवं मीटर टेप का उपयोग बताइए।
या
मिल्टन चॉक का क्या उपयोग है ?
या
कपड़े पर काटने से पहले निशान लगाने के लिए किस चॉक का प्रयोग करते हैं और क्यों ?
Answer: मिल्टन चॉक एवं मीटर टेप दोनों ही वस्त्रों की कटाई-सिलाई के कार्य में प्रयोग किये जाते हैं। वस्त्रों की कटाई के लिए तथा सिलाई के लिए कपड़े पर आवश्यक निशान लगाने पड़ते हैं। कपड़े पर ये निशान लगाने के लिए मिल्टन चॉक का प्रयोग किया जाता है। मिल्टन चॉक से लगाये गये निशान बिल्कुल साफ दिखायी देते हैं तथा जब चाहें इन निशानों को सरलतापूर्वक कपड़े से छुटाया भी जा सकता है। मीटर टेप भी कपड़ों की नपाई के लिए प्रयोग किया जाता है। कपड़े को नापने के लिए तथा कपड़े पर नाप के अनुसार निशान लगाने के लिए मीटर टेप प्रयोग किया जाता है। मीटर टेप की सहायता से ही हम सही नाप का कपड़ा तैयार कर पाते हैं। कपड़ों की उत्तम सिलाई के लिए व्यक्ति के शरीर का नाप भी मीटर टेप से ही लिया जाता है।
In simple words: मिल्टन चॉक का उपयोग कपड़े पर निशान लगाने के लिए किया जाता है क्योंकि ये साफ दिखते हैं और आसानी से मिट जाते हैं। मीटर टेप का उपयोग कपड़े और शरीर की माप लेने के लिए किया जाता है ताकि सही नाप के कपड़े सिलें।
🎯 Exam Tip: मिल्टन चॉक और मीटर टेप के विशिष्ट उपयोगों और उनके महत्व को संक्षेप में स्पष्ट करें।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. सिलाई किट से क्या आशय है?
Answer: सिलाई-कटाई के कार्य के लिए आवश्यक उपकरणों एवं सामग्री को एक साथ रखने वाले डिब्बे या थैले को संयुक्त रूप से सिलाई किट कहा जाता है।
In simple words: सिलाई किट एक डिब्बा या थैला है जिसमें सिलाई से जुड़े सभी जरूरी उपकरण और सामान एक साथ रखे जाते हैं।
🎯 Exam Tip: सिलाई किट की सीधी और सरल परिभाषा दें।
Question 2. सिलाई के उपकरण कौन-कौन से होते हैं?
या
सिलाई में काम आने वाली मुख्य वस्तुओं के नाम लिखिए।
Answer: सिलाई के महत्त्वपूर्ण उपकरण निम्नलिखित हैं
1. कैंचियाँ,
2. सूइयाँ,
3. फिंगर कैप,
4. धागे,
5. इंच-टेप,
6. सिलाई मशीन,
7. मिल्टन कपड़ा,
8. गुनिया,
9. मिल्टन चॉक तथा
10. मोम, पेन्सिल, रबर, कार्बन पेपर आदि ।
In simple words: सिलाई के मुख्य उपकरणों में कैंची, सूई, धागा, इंच-टेप, सिलाई मशीन, मिल्टन चॉक, और फिंगर कैप शामिल हैं, जो सिलाई के काम को आसान बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: सिलाई के कम से कम पाँच से सात आवश्यक उपकरणों के नाम सूचीबद्ध करें।
Question 3. कपड़ा किस प्रकार के स्थान पर काटना उचित रहता है?
Answer: कपड़े को सदैव किसी समतल स्थान (मेज, पटरी, फर्श आदि) पर फैलाकर काटना चाहिए।
In simple words: कपड़े को हमेशा एक सपाट और समतल सतह पर फैलाकर काटना चाहिए ताकि कटिंग सही हो।
🎯 Exam Tip: कपड़ा काटने के लिए उचित स्थान की विशेषता पर जोर दें।
Question 4. कपड़ा काटने से पूर्व नाप लेने की क्या आवश्यकता है?
Answer: कपड़ा काटने से पूर्व सही ढंग से नाप लेना आवश्यक होता है क्योंकि इससे ज्ञात हो जाता है कि कपड़ा आवश्यकतानुसार लिया गया है या नहीं। यदि कपड़ा आवश्यकता से अधिक होता है, तो फालतू कपड़े को काटकर अलग कर लिया जाता है।
In simple words: कपड़ा काटने से पहले नाप लेना इसलिए जरूरी है ताकि पता चले कि कपड़ा सही मात्रा में है या नहीं, और अतिरिक्त कपड़े को हटाया जा सके।
🎯 Exam Tip: नाप लेने के प्राथमिक उद्देश्य और उसके लाभ को स्पष्ट करें।
Question 5. वस्त्र सिलने से पूर्व ठीक नाप लेना क्यों आवश्यक है?
Answer: वस्त्र सिलने से पूर्व ठीक नाप लेने से वस्त्र सही फिटिंग के बनते हैं तथा आरामदायक रहते हैं।
In simple words: ठीक नाप लेने से सिले हुए कपड़े सही माप के और पहनने में आरामदायक होते हैं।
🎯 Exam Tip: सही नाप के महत्व को फिटिंग और आराम के संदर्भ में बताएं।
Question 6. नाप लेने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?
Answer: नाप लेने की विधियाँ हैं
(1) छाती के नाप के आधार पर शरीर के अन्य भागों की नाप का अनुमान लगाना,
(2) प्रत्येक अंग का अलग से नाप लेना।
In simple words: नाप लेने की दो मुख्य विधियाँ हैं- छाती के माप से अन्य अंगों का अनुमान लगाना और प्रत्येक अंग का व्यक्तिगत माप लेना।
🎯 Exam Tip: नाप लेने की दोनों मुख्य विधियों का संक्षेप में उल्लेख करें।
Question 7. वस्त्र की ड्राफ्टिंग करने से क्या लाभ होता है?
Answer: वस्त्र की कटाई से पहले ड्राफ्टिंग की जाती है। ड्राफ्टिंग करके वस्त्र बनाने से वस्त्र सही नाप का बनता है तथा उसका नमूना भी सही बनती है। इससे कपड़ा भी व्यर्थ नहीं जाता।
In simple words: ड्राफ्टिंग करने से कपड़े की सही कटाई होती है, वस्त्र ठीक नाप का बनता है, और कपड़े की बर्बादी रुकती है।
🎯 Exam Tip: ड्राफ्टिंग के तीन प्रमुख लाभ-सही नाप, सही नमूना, और कपड़े की बचत-को बताएं।
Question 8. साधारण सूती कपड़ों की सिलाई के लिए आप किस नम्बर की सूई को प्रयोग करेंगी?
Answer: इसके लिए सिलाई मशीन में 14 अथवा 16 नम्बर की सूई प्रय ग में लायी जाती है।
In simple words: साधारण सूती कपड़ों की सिलाई के लिए सिलाई मशीन में 14 या 16 नम्बर की सूई का प्रयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: सूती कपड़ों के लिए उपयुक्त सूई का नम्बर याद रखें।
Question 9. सिलाई मशीन की देखभाल क्यों आवश्यक है?
Answer: मशीन को ढककर रखने व समय-समय पर इसमें तेल डालने से यह धूल से सुरक्षित रहती है तथा ठीक प्रकार से कार्य करती है।
In simple words: सिलाई मशीन की देखभाल उसे धूल से बचाने और ठीक से काम करते रहने के लिए जरूरी है, जिसके लिए उसे ढककर रखना और नियमित तेल डालना चाहिए।
🎯 Exam Tip: मशीन की देखभाल के दो मुख्य पहलू-धूल से सुरक्षा और नियमित चिकनाई-पर ध्यान दें।
Question 10. सिलाई करने के बाद कपड़े पर इस्त्री करना क्यों आवश्यक होता है?
Answer: इससे वस्त्र में इच्छित चुन्नटे (क्रीज) बनाई जा सकती हैं तथा वस्त्र की सलवटें दूर हो जाती हैं।
In simple words: सिलाई के बाद कपड़े पर इस्त्री करने से उसमें मनचाही क्रीज बनाई जा सकती है और सारी सलवटें दूर हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: इस्त्री के दो मुख्य लाभ-चुन्नट बनाना और सलवटें हटाना-पर प्रकाश डालें।
Question 11. अपने पेटीकोट के लिए कपड़े की मात्रा का अनुमान आप कैसे लगाएँगी?
Answer: पेटीकोट सिलने के लिए, पेटीकोट की लम्बाई x 2 + नेफा सूत्र के अनुसार कपड़े की मात्रा का अनुमान लगाया जाता है।
In simple words: पेटीकोट के लिए कपड़े का अनुमान लगाने के लिए 'पेटीकोट की लम्बाई x 2 + नेफा' सूत्र का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: पेटीकोट के लिए कपड़े की मात्रा निकालने का सूत्र याद रखें।
Question 12. सिलाई के टाँके कितने प्रकार के होते हैं? किन्हीं चार के नाम लिखिए।
Answer: हाथ की सिलाई के मुख्य टाँके हैं-कच्चे व सादे टाँके, काज के टाँके, नेपची टाँके, बखिया व तुरपाई इत्यादि ।
In simple words: हाथ की सिलाई में कई तरह के टाँके होते हैं जैसे कच्चा टाँका, सादा टाँका, काज टाँका, और तुरपाई टाँका।
🎯 Exam Tip: हाथ की सिलाई के किन्हीं भी चार मुख्य टाँकों के नाम याद रखें।
Question 13. मशीन की सिलाई तथा हाथ की बखिया में क्या अन्तर होता है?
Answer: मशीन की सिलाई दोनों ओर एक-सी तथा सुन्दर होती है, जबकि हाथ की बखिया में सीधा-उल्टा होता है तथा यह अधिक मजबूत नहीं होती है।
In simple words: मशीन की सिलाई दोनों तरफ एक जैसी और साफ दिखती है, जबकि हाथ की बखिया सीधी-उल्टी होती है और अक्सर कम मजबूत होती है।
🎯 Exam Tip: मशीन और हाथ की सिलाई के बीच दिखावट और मजबूती के प्रमुख अंतरों को स्पष्ट करें।
Question 14. मशीन से वस्त्रों की सिलाई करने से होने वाले कोई दो लाभ लिखिए।
Answer: ये हैं
(1) घर पर स्वयं सिलाई करने से कपड़ा कम समय में अपनी आवश्यकतानुसार तैयार हो जाता है तथा
(2) इससे धन की बचत के साथ ही अनुभव में भी वृद्धि होती है।
In simple words: मशीन से सिलाई करने से कपड़े कम समय में तैयार होते हैं, पैसे बचते हैं और सिलाई का अनुभव भी बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: मशीन सिलाई के दो मुख्य लाभों - समय और धन की बचत - पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 15. पायजामा और पेटीकोट काटने के लिए किन नापों की आवश्यकता पड़ती है?
या
पायजामा काटने के लिए किन मापों की आवश्यकता होती है?
Answer: पायजामा काटने के लिए कमर, लम्बाई, सीट तथा मोहरी की नाप आवश्यक होती है। पेटीकोट काटने के लिए कमर, लम्बाई तथा घेर की नाप आवश्यक होती है।
In simple words: पायजामा काटने के लिए कमर, लम्बाई, सीट और मोहरी की नाप चाहिए, जबकि पेटीकोट के लिए कमर, लम्बाई और घेर की नाप जरूरी है।
🎯 Exam Tip: पायजामा और पेटीकोट के लिए आवश्यक विशिष्ट नापों को अलग-अलग सूचीबद्ध करें।
Question 16. बच्चों के कपड़ों को अधिक कपड़ा दबाकर क्यों सिला जाता है?
Answer: बच्चों में शारीरिक वृद्धि बड़ी तेजी से होती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए बच्चों के कपड़ों को अधिक कपड़ा दबाकर सिला जाता है, ताकि तंग हो जाने पर इन्हें खोलकर बड़ा किया जा सके ।
In simple words: बच्चों के कपड़े थोड़े बड़े सिलने चाहिए क्योंकि वे जल्दी बढ़ते हैं, और बाद में जरूरत पड़ने पर इन कपड़ों को ढीला करके इस्तेमाल किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: बच्चों की तीव्र शारीरिक वृद्धि और कपड़ों में समायोजन की आवश्यकता को प्रमुख कारण के रूप में समझाएँ।
बहविकल्पीय प्रश्न
Question. निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्पों का चुनाव कीजिए
1. घर पर सिलाई करने से बचत होती है
(क) समय की
(ख) धन की
(ग) कपड़े की
(घ) समय, धन एवं कपड़े की
Answer: (घ) समय, धन एवं कपड़े की
In simple words: घर पर सिलाई करने से समय, धन और कपड़े तीनों की बचत होती है।
🎯 Exam Tip: घर पर सिलाई के तीनों मुख्य लाभों - समय, धन और कपड़े की बचत - को याद रखें।
2. वस्त्रों की कटाई की जानी चाहिए
(क) पहनने वाले की रुचि के अनुसार
(ख) पहनने वाले की आयु के अनुसार
(ग) पहनने वाले की नाप के अनुसार
(घ) पहनने वाले के पद के अनुसार
Answer: (ग) पहनने वाले की नाप के अनुसार
In simple words: वस्त्रों की कटाई हमेशा पहनने वाले व्यक्ति की सही नाप के अनुसार करनी चाहिए ताकि कपड़े फिट बैठें।
🎯 Exam Tip: कपड़े की कटाई के लिए 'पहनने वाले की नाप' को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानें।
3. कौन-सी वस्तु सिलाई किट में नहीं रखी जाती?
(क) धागा
(ख) सूइयाँ
(ग) कैंची।
(घ) सिलाई मशीन
Answer: (घ) सिलाई मशीन
In simple words: सिलाई किट में धागा, सूई और कैंची जैसी छोटी चीजें रखी जाती हैं, लेकिन सिलाई मशीन आमतौर पर इसमें नहीं रखी जाती क्योंकि वह बड़ी होती है।
🎯 Exam Tip: सिलाई किट में आमतौर पर रखे जाने वाले छोटे उपकरणों और बाहर रखे जाने वाले बड़े उपकरणों के बीच अंतर समझें।
4. काटने से पहले कपड़े पर किससे निशान लगाना चाहिए?
(क) फ्रेन्च चॉक
(ख) पेन्सिल
(ग) पेन
(घ) मिल्टन चॉक
Answer: (घ) मिल्टन चॉक
In simple words: कपड़े पर निशान लगाने के लिए मिल्टन चॉक का इस्तेमाल करना सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि यह साफ दिखता है और आसानी से मिट जाता है।
🎯 Exam Tip: कपड़े पर निशान लगाने के लिए सबसे उपयुक्त उपकरण के रूप में मिल्टन चॉक को याद रखें।
5. कपड़े की कटाई के लिए मिल्टन चॉक से निशान लगाया जाता है, क्योंकि
(क) निशान सरलता से छूट जाता है
(ख) निशान सुन्दर बनता है।
(ग) काटने में आसानी होती है,
(घ) निशान स्थायी होता है।
Answer: (क) निशान सरलता से छूट जाता है
In simple words: मिल्टन चॉक का उपयोग कपड़े पर निशान लगाने के लिए इसलिए किया जाता है क्योंकि इसके निशान आसानी से मिट जाते हैं।
🎯 Exam Tip: मिल्टन चॉक के प्राथमिक लाभ - आसानी से मिटने वाले निशान - पर ध्यान केंद्रित करें।
6. कपड़ा काटने का उचित स्थान है
(क) गोद में रखकर
(ख) हाथ में लेकर
(ग) मेज या पटरे पर रखकर
(घ) कहीं भी
Answer: (ग) मेज या पटरे पर रखकर
In simple words: कपड़ा काटने के लिए मेज या किसी सपाट पटरे जैसी समतल सतह का उपयोग करना सबसे सही होता है।
🎯 Exam Tip: कपड़ा काटने के लिए सबसे उपयुक्त और समतल स्थान का चयन करें।
7. कपड़ा काटने से पूर्व की जाने वाली क्रिया है
(क) कपड़े को त्रिंक करना
(ख) कपड़े को प्रेस करना
(ग) मिल्टन चॉक से आवश्यक निशान लगाना
(घ) ये सभी क्रियाएँ
Answer: (घ) ये सभी क्रियाएँ
In simple words: कपड़ा काटने से पहले कपड़े को ठीक करना, प्रेस करना और मिल्टन चॉक से निशान लगाना, ये सभी महत्वपूर्ण तैयारियाँ हैं।
🎯 Exam Tip: कपड़ा काटने से पहले की जाने वाली सभी प्रारंभिक क्रियाओं को याद रखें।
8. धड़ से नीचे के वस्त्रों के लिए आवश्यक नाप है
(क) कमर, कंधा, वक्ष
(ख) लम्बाई, सीट, पायँचा
(ग) वक्ष, कमर, गला
(घ) लम्बाई, गला, कमर
Answer: (ख) लम्बाई, सीट, पायँचा
In simple words: धड़ से नीचे पहने जाने वाले कपड़ों के लिए लम्बाई, सीट और पायँचे की नाप लेना आवश्यक होता है।
🎯 Exam Tip: धड़ से नीचे के वस्त्रों के लिए महत्वपूर्ण नापों जैसे लम्बाई, सीट, और पायँचा पर ध्यान दें।
9. सिलाई के सामान रखने के डिब्बे को क्या कहते हैं?
(क) सिलाई मशीन
(ख) मेज
(ग) बक्सा
(घ) सिलाई किट
Answer: (घ) सिलाई किट
In simple words: सिलाई का सामान जिस डिब्बे या थैले में रखा जाता है, उसे सिलाई किट कहते हैं।
🎯 Exam Tip: सिलाई के सामान के स्टोरेज के लिए सही शब्द 'सिलाई किट' है।
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