UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 2 Mamta

Download UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 02 ममता

Explore reliable textbook solutions for Chapter 02 ममता tailored for Class 10 learners. Utilizing these Hindi answers ensures thorough preparation and strengthens foundational knowledge before final UP Board evaluations.

Access UP Board Solutions and Answers

Navigate directly to the solved Hindi textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.

जीवन-परिचय एवं कृतियाँ

 

Question 1. जयशंकर प्रसाद के जीवन-परिचय एवं रचनाओं पर प्रकाश डालिए। [2009, 10, 11]
या
जयशंकर प्रसाद का जीवन-परिचय दीजिए तथा उनकी एक रचना का नाम लिखिए। [2011, 12, 13, 14, 15, 16, 18]

Answer: जयशंकर प्रसाद जी का हिन्दी साहित्य में बहुत बड़ा योगदान है, उनकी रचनाएँ एक नए युग की शुरुआत थीं। ऐसा लगता है जैसे वे हिन्दी साहित्य को बेहतर बनाने के लिए ही आए थे। इसी कारण हिन्दी साहित्य का हर पहलू उनकी कलम से सम्मानित हुआ है। वे हिन्दी के महान कवि, नाटककार, कहानीकार और निबंधकार के रूप में जाने जाते हैं। हिन्दी साहित्य उन्हें हमेशा याद रखेगा।

जीवन-परिचय: हिन्दी साहित्य के महान कवि, नाटककार, कहानीकार और निबंधकार श्री जयशंकर प्रसाद जी का जन्म 1889 ईस्वी में वाराणसी के प्रसिद्ध सुंघनी साहू परिवार में हुआ था। उनके पिता बाबू देवीप्रसाद काशी के एक सम्मानीय और धनी व्यक्ति थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई घर पर ही हुई थी और उन्होंने खुद ही अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू और फारसी का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने वेद, पुराण, इतिहास, दर्शन आदि का भी गहरा अध्ययन किया। माता-पिता और बड़े भाई की मृत्यु के बाद उन्होंने परिवार का व्यवसाय संभाला। युवावस्था से पहले ही उनकी भाभी और एक के बाद एक पत्नियों की मृत्यु हो गई, जिससे उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। नतीजतन, उनका धनी परिवार कर्ज में डूब गया। उन्हें जीवनभर मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और साहित्य की सेवा करते रहे। लगातार चिंताओं के कारण प्रसाद जी का शरीर कमजोर होता गया और आखिर में वे क्षय रोग से ग्रस्त हो गए। 14 नवंबर, 1937 ईस्वी को केवल 48 साल की उम्र में वे हिन्दी साहित्य जगत को सूना करके इस दुनिया से चले गए। उनका असमय निधन हिन्दी साहित्य के लिए एक बड़ी क्षति थी।

कृतियाँ: प्रसाद जी ने कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबंधों की रचना की। उनकी मुख्य कृतियों का विवरण नीचे दिया गया है:

(1) नाटक: 'स्कंदगुप्त', 'अजातशत्रु', 'चंद्रगुप्त', 'विशाख', 'ध्रुवस्वामिनी', 'कामना', 'राज्यश्री', 'जनमेजय का नागयज्ञ', 'करुणालय', 'एक घूँट', 'सज्जन', 'कल्याणी-परिणय' आदि उनके प्रसिद्ध नाटक हैं। प्रसाद जी के नाटकों में भारतीय और पश्चिमी नाट्य-कला का सुंदर मेल है। उनके नाटकों में राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास का सजीव वर्णन किया गया है।

(2) कहानी संग्रह: 'छाया', 'प्रतिध्वनि', 'आकाशदीप' और 'इंद्रजाल' प्रसाद जी की कहानियों के संग्रह हैं। उनकी कहानियों में इंसान के मूल्यों और भावनाओं का सुंदर चित्रण मिलता है।

(3) उपन्यास: कंकाल, तितली और इरावती (अधूरा)। प्रसाद जी ने अपने इन उपन्यासों में जीवन की सच्चाई को आदर्शवादी तरीके से दिखाया है।

(4) निबंध संग्रह: 'काव्यकला तथा अन्य निबंध'। इस निबंध संग्रह में प्रसाद जी की गहरी सोच और साहित्य के प्रति उनके अच्छे विचार सामने आते हैं।

(5) काव्य: 'कामायनी' (महाकाव्य), 'आँसू', 'झरना', 'लहर' आदि प्रसिद्ध काव्य हैं। 'कामायनी' सबसे बेहतरीन छायावादी महाकाव्य है, जो उनकी कविताओं का शिखर माना जाता है।

साहित्य में स्थान: प्रसाद जी छायावादी युग के जनक और प्रवर्तक रचनाकार हैं। अपनी अनेक प्रतिभाओं के कारण उन्होंने मौलिक नाटक, अच्छी कहानियाँ, उत्कृष्ट निबंध और उपन्यास लिखकर हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। आधुनिक हिन्दी के सबसे प्रमुख साहित्यकारों में प्रसाद जी का विशेष स्थान है। आचार्य नंददुलारे वाजपेयी जी ने कहा था कि भारत के कुछ बेहतरीन साहित्यकारों में प्रसाद जी का स्थान हमेशा ऊँचा रहेगा। उनके बारे में किसी कवि ने ठीक ही कहा है कि सदियों तक साहित्य यह नहीं समझ पाएगा कि आप इंसान थे या इंसानियत के महाकाव्य।
In simple words: जयशंकर प्रसाद का जन्म 1889 में वाराणसी में हुआ था। वे हिन्दी के महान कवि, नाटककार और कहानीकार थे। उन्होंने 'कामायनी', 'स्कंदगुप्त', 'छाया' जैसे कई महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे। वे 48 साल की उम्र में ही चल बसे, पर हिन्दी साहित्य में उनका स्थान बहुत ऊँचा है।

🎯 Exam Tip: जीवन-परिचय लिखते समय जन्म-मृत्यु की तारीखें, माता-पिता का नाम और प्रमुख रचनाएँ ठीक से याद रखना बहुत जरूरी है।

गद्यांशों पर आधारित प्रश्न

 

Question 1. रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठी हुई युवती ममता, शोण के तीक्ष्ण गम्भीर प्रवाह को देख रही है। ममता विधवा थी। उसका यौवन शोण के समान ही उमड़ रहा था। मन में वेदना, मस्तक में आँधी, आँखों में पानी की बरसात लिये, वह सुख के कंटक-शयन में विकल थी। वह रोहतास दुर्गपति के मन्त्री चूडामणि की अकेली दुहिता थी, फिर उसके लिए कुछ अभाव होना असम्भव था, परन्तु वह विधवा थी-हिन्दू-विधवा संसार में सबसे तुच्छ-निराश्रय प्राणी है- तब उसकी विडम्बना का कहाँ अन्त था ? [2012, 14]
(अ) प्रस्तुत अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए ।
(ब) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए ।
(स) 1. प्रस्तुत गद्यांश में किसके बारे में और क्या कहा गया है ?
2. हिन्दू-विधवा को तुच्छ-निराश्रय प्राणी क्यों कहा गया है ?
या
उपर्युक्त गद्यांश में हिन्दू-विधवा की स्थिति कैसी है ?
3. ममता की वेदना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए ।
4. ममता कौन थी? वह क्या देख रही थी?

Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'गद्य-खण्ड' में 'ममता' नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक छायावादी युग के श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं। यह कहानी सामाजिक स्थितियों को दर्शाती है।

(ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या: जयशंकर प्रसाद जी कहते हैं कि ममता रोहतास राजमहल के मुख्य दरवाजे के पास अपने कमरे में बैठकर सोन नदी के तेज बहाव को देख रही थी। वह एक विधवा थी और उसकी जवानी सोन नदी के तेज प्रवाह की तरह उमड़ रही थी। युवावस्था में ही विधवा हो जाने के कारण उसका मन दुख से भरा था। उसके दिमाग में आने वाले जीवन की चिंताओं से जुड़े कई विचार तेजी से घूम रहे थे। उसकी आँखों से दुख के आँसू लगातार बह रहे थे और राजमहल की सारी सुख-सुविधाएँ उसे काँटे की तरह चुभ रही थीं। मुलायम बिस्तर पर सोना भी उसे काँटों के बिस्तर जैसा लगता था।

द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या: श्री जयशंकर प्रसाद जी बताते हैं कि ममता रोहतास दुर्ग के मालिक मंत्री चूडामणि की इकलौती बेटी थी। इसलिए उसे कभी सुख-सुविधाओं की कमी नहीं हो सकती थी, यानी उसके पास सभी सुख मौजूद थे। लेकिन वह सुखी नहीं थी, क्योंकि वह एक हिन्दू बाल विधवा थी। हिन्दू समाज में विधवाओं का जीवन दुखद, उपेक्षित और अनाथ जैसा होता है। इसी कारण उनका जीवन उनके लिए बोझ बन जाता है। दुनिया की सारी सुख-सुविधाएँ भी उन्हें शांति नहीं दे पातीं। ममता के दुख भी ऐसी ही मुश्किल परिस्थितियों से भरे हुए थे।

(स) 1. प्रस्तुत गद्यांश में रोहतास दुर्ग के मालिक मंत्री चूडामणि की इकलौती बेटी ममता के बारे में बात की गई है। ममता युवावस्था में ही विधवा हो गई थी। सभी तरह की सुख-सुविधाएँ होने के बाद भी उसकी परेशानियाँ खत्म नहीं हुई थीं।

(स) 2. सामाजिक हालात के कारण आज भी हिन्दू समाज में विधवा का जीवन दुखद, उपेक्षित और बेसहारा होता है। इसी वजह से उनका जीवन उनके लिए बोझ बन जाता है। इस कारण हिन्दू विधवा को तुच्छ और बेसहारा प्राणी कहा गया है, क्योंकि उन्हें समाज में बहुत कम सहारा मिलता है।

(स) 3. ममता रोहतास दुर्ग के मालिक मंत्री चूडामणि की इकलौती बेटी थी। उसके पास सभी सुख के साधन मौजूद थे। फिर भी उसके मन में पीड़ा थी, उसके दिमाग में विचारों का तूफान चल रहा था, आँखों से आँसू बह रहे थे और आरामदायक बिस्तर भी उसे काँटों के बिस्तर जैसा दर्द दे रहा था। वह मन ही मन में बहुत दुखी थी।

(स) 4. ममता रोहतास दुर्ग के मालिक मंत्री चूडामणि की इकलौती बेटी थी। वह विधवा हो चुकी थी। वह राजमहल के मुख्य दरवाजे के पास अपने कमरे में बैठी हुई सोन नदी के तेज बहाव को देख रही थी। नदी का दृश्य उसे अपने जीवन की अस्थिरता की याद दिला रहा था।
In simple words: यह कहानी 'ममता' नाम की युवती के बारे में है, जो विधवा थी और बहुत दुखी थी। वह एक अमीर मंत्री की बेटी थी, पर विधवा होने के कारण खुद को बेसहारा मानती थी। वह सोन नदी के किनारे बैठकर अपनी ज़िंदगी के बारे में सोच रही थी।

🎯 Exam Tip: गद्यांश की व्याख्या करते समय, मुख्य बिंदुओं को समझना और उन्हें सरल शब्दों में अपने तरीके से बताना महत्वपूर्ण है। पात्र के आंतरिक संघर्ष को उजागर करें।

 

Question 2. “हे भगवान्! तब के लिए! विपद के लिए! इतना आयोजन! परमपिता की इच्छा के विरुद्ध इतना साहस । पिताजी, क्या भीख न मिलेगी? क्या कोई हिन्दू भू-पृष्ठ पर न बचा रह जाएगा, जो ब्राह्मण को दो मुट्ठी अन्न दे सके? यह असम्भव है। फेर दीजिए पिताजी, मैं काँप रही हूँ इसकी चमक आँखों को अंधा बना रही है।” [2013]
(अ) प्रस्तुत अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स) 1. किस वस्तु की चमक ममता की आँखों को अन्धा बना रही थी ?
2. 'परमपिता की इच्छा के विरुद्ध इतना साहस ।' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
3. इस गद्यांश में ममता की किस मनोवृत्ति को स्पष्ट किया गया है ?

Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'गद्य-खण्ड' में 'ममता' नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं। यह अंश ममता के नैतिक विचारों को दर्शाता है।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: जयशंकर प्रसाद जी कहते हैं कि जब ममता ने सोने के आभूषणों से भरा थाल देखा, तो वह हैरान रह गई। वह अपने पिता से आश्चर्य से पूछती है कि आप विपत्ति के लिए इतना धन क्यों इकट्ठा कर रहे हैं। ममता कहती है कि यह भगवान की इच्छा के खिलाफ एक बहुत बड़ा दुस्साहस है। हम ब्राह्मण हैं। क्या इस धरती पर कोई हिन्दू ऐसा नहीं बचेगा जो किसी ब्राह्मण की भूख शांत करने के लिए थोड़ी सी भिक्षा न दे सके? पिताजी, यह बात असंभव है कि धरती पर कोई हिन्दू (एक ही धर्म वाला) न मिले और ब्राह्मण को भिक्षा न मिले। ममता को लगता था कि धन से अधिक धर्म महत्वपूर्ण है।

(स) 1. थाल में रखे सोने के सिक्कों की चमक, जो ममता के पिता ने शेरशाह से रिश्वत (घूस) के रूप में स्वीकार किए थे, ममता की आँखों को अंधा बना रही थी। इसका मतलब यह है कि गैर-धर्मी लोगों से रिश्वत के रूप में आए सोने से उत्पन्न संभावित डर के कारण उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा गया था। उसे लग रहा था कि यह धन संकट ला सकता है।

(स) 2. 'परमपिता की इच्छा के विरुद्ध इतना साहस' का मतलब है कि ईश्वर की इच्छा के खिलाफ किया जाने वाला दुस्साहस। तात्पर्य यह है कि यदि ईश्वर हमें मुसीबत में डालना चाहते हैं, तो हमें उनकी इच्छा के खिलाफ कोई कोशिश नहीं करनी चाहिए। भगवान की मर्जी के खिलाफ जाने से और भी बड़ी मुसीबत आ सकती है।

(स) 3. इस गद्यांश में ममता की लालचहीनता, गलत धन के प्रति अरुचि और ईश्वर तथा ब्राह्मणत्व में विश्वास की मनोवृत्ति को स्पष्ट किया गया है। वह धर्म और नैतिकता को धन से ऊपर मानती थी।
In simple words: ममता अपने पिता द्वारा रिश्वत के रूप में लाए गए सोने के सिक्कों को देखकर डर जाती है। वह कहती है कि भगवान की इच्छा के खिलाफ इतना धन इकट्ठा करना पाप है। उसे लगता है कि ब्राह्मणों को कभी भूखा नहीं रहना पड़ेगा और कोई न कोई हमेशा मदद करेगा।

🎯 Exam Tip: व्याख्या करते समय, पात्र के मनोभावों (जैसे डर, क्रोध, पश्चाताप) को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें और उन्हें कहानी के मुख्य संदेश से जोड़ें।

 

Question 3. काशी के उत्तर में धर्मचक्र विहार मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्ति का खण्डहर था। भग्न चूड़ा, तृण-गुल्मों से ढके हुए प्राचीर, ईंटों के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति, ग्रीष्म की चन्द्रिका में अपने को शीतल कर रही थी। जहाँ पंचवर्गीय भिक्षु गौतम का उपदेश ग्रहण करने के लिए पहले मिले थे, उसी स्तूप के भग्नावशेष की मलिन छाया में एक झोपड़ी के दीपालोक में एक स्त्री पाठ कर रही थी – “अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।” [2011]
(अ) प्रस्तुत अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए ।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स) 1. स्तूप के अवशेष की छाया में स्त्री क्या पढ़ रही थी ? उसका अर्थ लिखिए ।
2. पंचवर्गीय भिक्षु कौन थे ? ये गौतम से क्यों और कहाँ मिले थे ?
3. धर्मचक्र कहाँ स्थित था ?

Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'गद्य-खण्ड' में 'ममता' नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं। यह अंश प्राचीन विरासत के महत्व को दर्शाता है।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: श्री जयशंकर प्रसाद जी कहते हैं कि काशी भारत का एक पवित्र तीर्थ स्थान है। इसके उत्तर में सारनाथ है, जहाँ बौद्ध भिक्षुओं के बौद्ध-विहार टूटकर खंडहर में बदल गए थे। इन बौद्ध-विहारों को मौर्यवंश के राजाओं और गुप्तकाल के सम्राटों ने बनवाया था। इन बौद्ध-विहारों में उस समय की वास्तुकला और मूर्तिकला के बेजोड़ नमूने अब भी साफ दिखाई देते हैं, जो मौर्य और गुप्त वंश के सम्राटों की प्रसिद्धि का गुणगान करते हुए लगते हैं। इन इमारतों के शिखर टूट चुके थे। खंडहरों की दीवारों पर घास-फूस और लताएँ उग आई थीं। टूटी-फूटी ईंटों के ढेर इधर-उधर बिखरे पड़े थे और इन ईंटों में उस समय की शानदार भारतीय मूर्तिकला दिखाई दे रही थी। गर्मी के मौसम की ठंडी चाँदनी में यह अद्भुत मूर्तिकला अब खुद को भी ठंडा कर रही थी, जैसे प्रकृति भी इसकी सुंदरता को महसूस कर रही हो।

(स) 1. स्तूप के बचे हुए हिस्से की छाया में दीपक के प्रकाश में बैठी एक स्त्री 'अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते' पढ़ रही थी, जिसका अर्थ है, 'जो भक्त अनन्य भावना से मेरा चिंतन करते हैं और मेरी उपासना करते हैं, उनका योग-क्षेम मैं स्वयं वहन करता हूँ।' यह श्लोक भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा था, जिसका अर्थ है कि भगवान अपने भक्तों की सारी चिंताएँ खुद उठाते हैं।

(स) 2. पंचवर्गीय भिक्षु गौतम बुद्ध के पहले पाँच शिष्य थे। वे उनका उपदेश सुनने के लिए काशी के उत्तर में स्थित सारनाथ नामक स्थान पर (गद्यांश में बताया गया है) खंडहरों में मिले थे। यह बौद्ध धर्म के प्रचार की शुरुआत थी।

(स) 3. धर्मचक्र मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्ति के अवशेष के रूप में काशी के उत्तर में (सारनाथ नामक स्थान पर) स्थित था। यह स्थान बौद्ध धर्म के इतिहास में महत्वपूर्ण है।
In simple words: काशी के पास एक पुरानी जगह, सारनाथ, जहाँ मौर्य और गुप्त राजाओं के बनाए बौद्ध विहार अब खंडहर बन गए हैं। वहाँ एक झोपड़ी में एक स्त्री दीपक की रोशनी में वेद मंत्र पढ़ रही थी। यह वही जगह थी जहाँ गौतम बुद्ध ने अपने पाँच शिष्यों को उपदेश दिया था।

🎯 Exam Tip: किसी भी प्राचीन स्थल का वर्णन करते समय उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, कला और महत्व को स्पष्ट रूप से बताएं। संस्कृत श्लोक का अर्थ भी सही से लिखें।

 

Question 4. “गला सूख रहा है, साथी छूट गये हैं, अश्व गिर पड़ा है— इतना थका हुआ हूँ इतना !” कहते-कहते वह व्यक्ति धम से बैठ गया और उसके सामने ब्रह्माण्ड घूमने लगा। स्त्री ने सोचा, यह विपत्ति कहाँ से आयी! उसने जल दिया, मुगल के प्राणों की रक्षा हुई। वह सोचने लगी-“सब विधर्मी दया के पात्र नहीं-मेरे पिता का वध करने वाले आततायी!” घृणा से उसका मन विरक्त हो गया । [2009]
(अ) प्रस्तुत अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए ।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।
(स) 1. गद्यांश में वर्णित व्यक्ति कौन है ?
2. व्यक्ति की व्यथा-कथा का वर्णन अपने शब्दों में लिखिए ।

Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'गद्य-खण्ड' में 'ममता' नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं। यह अंश मानवीय संवेदना और संघर्ष को दर्शाता है।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: श्री जयशंकर प्रसाद जी कहते हैं कि सारनाथ के बौद्ध विहार के खंडहरों में रहने वाली ममता ने मन ही मन सोचा कि यह मुसीबत अचानक कहाँ से आ गई। ममता ब्राह्मणी थी, उसे हुमायूँ पर दया आ गई। उसने हुमायूँ को पानी दिया। पानी पीने के बाद हुमायूँ को होश आया। ममता अपने मन में सोचने लगी कि मैंने इस मुगल को पानी देकर सही नहीं किया। उसके प्राण तो बच गए, लेकिन क्या पता अब वह मेरे साथ कैसा व्यवहार करेगा, क्योंकि सभी विधर्मी दया के लायक नहीं होते। अपने पिता की हत्या का स्मरण करके उसका मन घृणा से भर गया, क्योंकि पिता के हत्यारे को कभी भी आश्रय नहीं देना चाहिए। यह ममता के नैतिक दुविधा को दिखाता है।

(स) 1. गद्यांश में वर्णित व्यक्ति बाबर का बेटा हुमायूँ है। हुमायूँ चौसा के युद्ध में शेरशाह से हारने के बाद भाग रहा था और सारनाथ के खंडहरों में आश्रय लेता है। वह ममता से उसकी कुटिया में आराम करने की अनुमति माँगता है।

(स) 2. व्यक्ति (हुमायूँ) कहता है कि वह युद्ध में हार गया है। प्यास के कारण उसका गला सूख रहा है। उसके साथी उससे बिछड़ गए हैं। थकावट के कारण उसका घोड़ा गिर गया है। वह इतना थक गया है कि चलने में भी असमर्थ है। यह कहते हुए वह जमीन पर ही बैठ जाता है। उसके सामने पूरी दुनिया घूमती हुई महसूस होने लगती है, यानी उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा जाता है। उसकी हालत बहुत खराब थी।
In simple words: एक थका हुआ व्यक्ति, जिसका गला सूख रहा था और जिसके साथी बिछड़ गए थे, अचानक गिर पड़ा। ममता, जो एक ब्राह्मणी थी, ने उसे पानी पिलाया। बाद में उसे याद आया कि यह एक विधर्मी है और उसके पिता का हत्यारा था, तो उसका मन घृणा से भर गया।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के मन की दुविधा या आंतरिक संघर्ष का वर्णन करते समय, उसके विचारों और भावनाओं को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करें।

 

Question 5. “मैं ब्राह्मणी हूँ, मुझे तो अपने धर्म-अतिथि–देव की उपासना का पालन करना चाहिए, परन्तु यहाँ नहीं-नहीं सब विधर्मी दया के पात्र नहीं। परन्तु यह दया तो नहीं कर्तव्य करना है। तब?”
मुगल अपनी तलवार टेककर उठ खड़ा हुआ। ममता ने कहा-“क्या आश्चर्य है कि तुम भी छल करो; ठहरो ।”
छल! नहीं, तब नहीं, स्त्री! जाता हूँ, तैमूर का वंशधर स्त्री से छल करेगा? जाता हूँ। भाग्य का खेल है।” [2009]

(अ) प्रस्तुत अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स) 1. “क्या आश्चर्य है कि तुम भी छल करो।” वाक्य किसने कहा और क्यों ?
2. “छल ! नहीं, तब नहीं स्त्री जाता हूँ।” वाक्य किसने किससे कहा और क्यों ?

Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'गद्य-खण्ड' में 'ममता' नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं। यह अंश धर्म और मानवीयता के बीच के संघर्ष को दर्शाता है।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: ममता अपने मन में सोचती है कि मैं तो ब्राह्मणी हूँ और एक सच्चे ब्राह्मण को अपने धर्म से कभी नहीं मुकरना चाहिए। मुझे अपने अतिथि धर्म का पालन करना चाहिए और इस व्यक्ति को आराम करने की अनुमति दे देनी चाहिए। अगले ही पल उसके मन में विचार आता है कि यह तो धर्मभ्रष्ट मुगल है। मुगलों ने ही उसके पिता की हत्या की थी। अगर कोई और विधर्मी होता तो उसके प्रति दया दिखाकर उसे आश्रय दिया जा सकता था। लेकिन अपने पिता के हत्यारे को कभी आश्रय नहीं देना चाहिए। तभी उसके मन में फिर से हलचल होती है कि मैं तो इस पर कोई दया नहीं दिखाऊँगी, बल्कि अतिथि धर्म का पालन करके अपने कर्तव्य को ही निभाऊँगी। यह ममता के मजबूत नैतिक मूल्यों को दिखाता है।

(स) 1. "क्या आश्चर्य है कि तुम भी छल करो।" यह वाक्य ममता ने मुगल हुमायूँ से कहा था, क्योंकि उसके पिता की हत्या भी विधर्मियों, यानी मुगलों ने ही की थी। वह दोनों मुगलवंशियों में कोई फर्क नहीं कर पाई थी। उसे लगा कि हुमायूँ भी उसे धोखा दे रहा है।

(स) 2. "छल ! नहीं, तब नहीं स्त्री ! जाता हूँ।" यह वाक्य मुगल हुमायूँ ने ममता से कहा था। हुमायूँ तैमूर का वंशज था। उसका मानना था कि तैमूर का वंशज कुछ भी कर सकता था, लेकिन किसी स्त्री के साथ धोखा कभी नहीं कर सकता था। वह अपने सम्मान का ख्याल रखता था।
In simple words: ममता ने पहले सोचा कि वह ब्राह्मणी है, इसलिए अतिथि धर्म निभाए। पर फिर उसे याद आया कि यह मुगल वही हैं जिन्होंने उसके पिता को मारा था। तभी मुगल हुमायूँ ने अपनी तलवार टिकाकर कहा कि वह किसी स्त्री से छल नहीं करेगा।

🎯 Exam Tip: संवाद आधारित प्रश्नों में, कौन किससे कह रहा है और कहने के पीछे का भाव स्पष्ट करना बहुत महत्वपूर्ण है। पात्रों के मन की स्थिति को सरल शब्दों में व्यक्त करें।

 

Question 6. चौसा के मुगल-पठान युद्ध को बहुत दिन बीत गये । ममता अब सत्तर वर्ष की वृद्धा है। वह अपनी झोपड़ी में एक दिन पड़ी थी। शीतकाल का प्रभात था। उसका जीर्ण कंकाल खाँसी से गूंज रहा था। ममता की सेवा के लिए गाँव की दो-तीन स्त्रियाँ उसे घेरकर बैठी थीं; क्योंकि वह आजीवन सबके सुख-दुःख की सहभागिनी रही ।
(अ) प्रस्तुत अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स) 1. 'मुगल-पठान युद्ध' से क्या आशय है ? यह किनके बीच हुआ था ?
2. 'जीर्ण-कंकाल खाँसी से गूंज रहा था।' से क्या आशय है ?

Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'गद्य-खण्ड' में 'ममता' नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं। यह अंश ममता के बुढ़ापे और उसके अंतिम समय को दर्शाता है।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक कहते हैं कि सर्दी का सुबह का समय था। ममता को खाँसी हो रही थी। खाँसी के कारण उसे साँस लेने में भी मुश्किल हो रही थी। उसका गला भारी था। साँस के साथ बलगम की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। ममता अकेली थी। उसका इस दुनिया में किसी से खून का रिश्ता नहीं था और न ही उसका कोई रिश्तेदार था। जीवन के दुख भरे इन अंतिम पलों में यदि कोई उसकी मदद करने वाला था, तो वे केवल उस गाँव की दो या तीन औरतें थीं जो उसकी सेवा करने में लगी हुई थीं। वे उसे घेरे हुए बैठी थीं, क्योंकि ममता भी इंसानियत की साक्षात मूर्ति थी। उसने भी बेसहारा लोगों को सहारा दिया था। वह हमेशा सबके सुख-दुःख में साथ देती रही थी। यह ममता के परोपकारी स्वभाव को दिखाता है।

(स) 1. 'मुगल-पठान युद्ध' से मतलब हुमायूँ (मुगल) और शेरशाह (पठान) के बीच हुए चौसा के युद्ध से है। यह युद्ध सन् 1536 ईस्वी के आसपास हुआ था। यह युद्ध भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

(स) 2. 'जीर्ण कंकाल' से मतलब है शरीर का हड्डियों का ढाँचा मात्र रह जाना। ममता को इतनी तेज खाँसी आ रही थी कि उसका केवल हड्डियों का ढाँचा रह गया शरीर खाँसी से गूँजता हुआ महसूस हो रहा था। यह उसके अत्यधिक बुढ़ापे और शारीरिक कमजोरी को दिखाता है।
In simple words: चौसा के युद्ध को बहुत साल हो गए थे। ममता अब सत्तर साल की बूढ़ी हो गई थी और खाँसी से उसका शरीर कमजोर हो गया था। सर्दियों की सुबह थी और गाँव की कुछ औरतें उसकी देखभाल कर रही थीं, क्योंकि ममता हमेशा सबकी मदद करती थी।

🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक घटना का जिक्र करते समय उसका संदर्भ और किसके बीच हुई थी, यह स्पष्ट करें। लाक्षणिक प्रयोगों (जैसे 'जीर्ण कंकाल') का अर्थ सरल भाषा में समझाएं।

 

Question 7. अश्वारोही पास आया । ममता ने रुक-रुककर कहा- “मैं नहीं जानती कि वह शहंशाह था, या साधारण मुगल; पर एक दिन इसी झोपड़ी के नीचे वह रहा। मैंने सुना था कि वह मेरा घर बनवाने की आज्ञा दे चुका था। मैं आजीवन अपनी झोपड़ी के खोदे जाने के डर से भयभीत रही। भगवान् ने सुन लिया, मैं आज .. इसे छोड़े जाती हूँ। तुम इसका मकान बनाओ या महल, मैं अपने चिर-विश्राम-गृह में जाती हूँ।” [2010, 12]
(अ) प्रस्तुत अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए ।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स) 1. शहंशाह शब्द किसके लिए प्रयोग किया गया है ?
2. 'चिर-विश्राम-गृह' से क्या आशय है ?
3. वह (ममता) आजीवन क्यों भयभीत रही ?

Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'गद्य-खण्ड' में 'ममता' नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं। यह अंश ममता के अंतिम समय की शांति और त्याग को दर्शाता है।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: श्री जयशंकर प्रसाद जी कहते हैं कि ममता ने घुड़सवार को बुलाकर उससे कहा कि उस व्यक्ति ने मेरे घर का नया निर्माण कराने का आदेश अपने एक अधीनस्थ को दिया था। मैं अपनी पूरी जिंदगी इस डर से डरी रही कि कहीं मैं अपने इस मामूली घर से भी बेघर न हो जाऊँ। लेकिन ईश्वर ने मेरी प्रार्थना सुन ली और मुझे जीते जी बेघर होने से बचा लिया। आज मैं इस घर को छोड़कर जा रही हूँ; यानी अब मेरे जीवन का अंतिम समय पास आ गया है। अब तुम यहाँ पर मकान बनाओ या महल, मुझे कोई चिंता नहीं; क्योंकि अब मैं अपने उस घर में जा रही हूँ जहाँ मुझे हमेशा के लिए आराम मिलेगा। यह ममता के मृत्यु के प्रति स्वीकार्यता को दर्शाता है।

(स) 1. प्रस्तुत गद्यांश में 'शहंशाह' शब्द मुगल सल्तनत के बाबर के बेटे और अकबर के पिता हुमायूँ के लिए प्रयोग किया गया है। हुमायूँ एक शक्तिशाली शासक था, लेकिन ममता उसे केवल एक व्यक्ति मानती थी।

(स) 2. 'चिर-विश्राम-गृह' से मतलब ऐसा घर है जहाँ इंसान हमेशा के लिए आराम कर सके, यानी मृत्यु के बाद का स्थान। यह ऐसा घर है जिसका अस्तित्व कभी खत्म न हो, और जहाँ व्यक्ति हमेशा के लिए आराम कर सके। यह मोक्ष या शांति का प्रतीक है।

(स) 3. ममता अपने जीवन भर अपनी झोपड़ी के खोद दिए जाने के डर से भयभीत रही, क्योंकि मुगल (हुमायूँ) ने उसके घर को बनवाने का आदेश दिया था। उसे डर था कि कहीं उसके छोटे से घर के बदले में कुछ बड़ा बनाने के चक्कर में वह बेघर न हो जाए।
In simple words: घुड़सवार पास आया, तो ममता ने कहा कि उसे नहीं पता था कि वह शहंशाह था, पर वह एक दिन उसकी झोपड़ी में रहा था। उसे पता चला कि उसने उसका घर बनवाने का आदेश दिया था। ममता अपनी झोपड़ी के टूटने के डर से ज़िंदगी भर डरी रही, पर अब वह कहती है कि भगवान ने सुन ली और वह अपने "चिर-विश्राम-गृह" (मृत्यु) में जा रही है।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक शब्दों (जैसे 'चिर-विश्राम-गृह') का अर्थ स्पष्ट रूप से समझाएं। पात्र के भावों और उसके पीछे के कारणों को सरल भाषा में व्यक्त करें।

व्याकरण एवं रचना-बोध

 

Question 1. निम्नलिखित में से उपसर्ग और प्रत्यय से बने शब्दों को अलग-अलग छाँटिए तथा उनसे उपसर्ग और प्रत्यय को अलग कीजिए- व्यथित, दुश्चिन्ता, पीलापन, अनर्थ, मन्त्रित्व, भारतीय, पंचवर्गीय, उपदेश, विरक्त, अतिथि, आजीवन, अनन्त ।

Answer:

सोपसर्ग शब्दउपसर्गप्रत्यययुक्त शब्दप्रत्यय
दुश्चिन्तादुस्व्यथितइत
अनर्थअन्पीलापनपन
उपदेशउपमन्त्रित्वत्व
विरक्तविभारतीयईय
अतिथिअपंचवर्गीयईय
आजीवनआअनन्तअन्

In simple words: कुछ शब्द उपसर्ग से बनते हैं, जो शब्द के आगे जुड़ते हैं, और कुछ प्रत्यय से, जो शब्द के पीछे लगते हैं। ये शब्द का अर्थ बदल देते हैं।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग और प्रत्यय पहचानते समय, मूल शब्द (जो स्वतंत्र अर्थ रखता है) को अलग करें। फिर देखें कि शब्द के पहले या बाद में क्या जोड़ा गया है।

 

Question 2. निम्नलिखित पदों में नियम-निर्देशपूर्वक सन्धि-विच्छेद कीजिए- निराश्रय, दुश्चिन्ता, पतनोन्मुख, भग्नावशेष, दीपालोक, हताशा, अश्वारोही ।

Answer:

पदसन्धि-विच्छेदनियम
निराश्रयनिः + आश्रयविसर्ग + आ = रा
दुश्चिन्तादुस् + चिन्तास + च = श्च
पतनोन्मुखपतन + उन्मुखअ + उ = ओ
भग्नावशेषभग्न + अवशेषअ + अ = आ
दीपालोकदीप + आलोकअ + आ = आ
हताशाहत + आशाअ + आ = आ
अश्वारोहीअश्व + आरोहीअ + आ = आ

In simple words: संधि-विच्छेद का मतलब है दो शब्दों को जोड़कर एक नया शब्द बनाना या एक शब्द को उसके मूल भागों में तोड़ना। इसमें स्वर, व्यंजन या विसर्ग संधि के नियम लगते हैं।

🎯 Exam Tip: संधि-विच्छेद करते समय शब्दों के मूल अर्थ को समझना और उन नियमों को याद रखना महत्वपूर्ण है जिनसे दो ध्वनियाँ जुड़ती या अलग होती हैं।

 

Question 3. निम्नलिखित पदों का नामसहित समास-विग्रह कीजिए- कंटक-शयन, दुर्गपति, अनर्थ, तृण-गुल्म, वंशधर, शीतकाल, आजीवन, अनन्त, अष्टकोण।

Answer:

पदसमास-विग्रहसमास-नाम
कंटक-शयनकंटकों पर शयनसप्तमी तत्पुरुष
दुर्गपतिदुर्ग का पतिषष्ठी तत्पुरुष
अनर्थन अर्थनञ् तत्पुरुष
तृण-गुल्मतृणों का गुल्मषष्ठी तत्पुरुष
वंशधरवंश को धारण करने वाला है (जो अर्थात संतान वाला है)बहुव्रीहि
शीतकालशीत का कालषष्ठी तत्पुरुष
आजीवनजीवन के रहने तकअव्ययीभाव
अनन्तन अन्तनञ् तत्पुरुष
अष्टकोणअष्ट कोणों का समूहद्विगु समास

In simple words: समास-विग्रह का मतलब है किसी सामासिक शब्द को उसके मूल अर्थ के साथ अलग-अलग करना। इसमें अलग-अलग समास के नियम होते हैं, जैसे तत्पुरुष, बहुव्रीहि, अव्ययीभाव, और द्विगु समास।

🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय, सामासिक पद में कौन सा कारक चिन्ह या अर्थ छिपा है, इसे पहचानें और उसके अनुसार सही समास का नाम लिखें।

Free UP Board Textbook Explanations: Class 10 Hindi Chapter 02 ममता

Accessing Chapter 02 ममता Solutions

Access structured UP Board textbook solutions for Chapter 02 ममता. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 10 Hindi, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.

Concept-Driven Answers for Class 10 Hindi

Each solution includes detailed reasoning to foster genuine comprehension of Chapter 02 ममता concepts. Reviewing these step-by-step breakdowns allows learners to master both analytical and descriptive questions expected in school evaluations.

Maximizing Study Efficiency

Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 10 Hindi.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 2 ममता for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 2 ममता is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Hindi are as per latest UP Board curriculum.

Are the Hindi UP Board solutions for Class 10 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 2 ममता as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 10 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 2 ममता will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 2 ममता in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Hindi. You can access UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 2 ममता in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi UP Board solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 2 ममता in printable PDF format for offline study on any device.