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Detailed Chapter 19 देसी बैंकर्स UP Board Solutions for Class 10 Commerce
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Class 10 Commerce Chapter 19 देसी बैंकर्स UP Board Solutions PDF
बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. बैंक समाधान विवरण किसके द्वारा बनाया जाता है?
(a) व्यापारी
(b) बैंक
(c) देनदार
(d) लेनदार
Answer:
(a) व्यापारी
In simple words: बैंक समाधान विवरण एक ऐसा दस्तावेज़ है जो व्यापारी (कंपनी या व्यक्ति) अपने बैंक खाते के रिकॉर्ड (कैश बुक) को बैंक के रिकॉर्ड (पास बुक) से मिलाने के लिए बनाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प को सटीक रूप से पहचानना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अवधारणा की बुनियादी समझ को दर्शाता है।
Question 2. बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है?
(a) रोकड़ पुस्तक के बैंक कॉलम शेष से
(b) रोकड़ पुस्तक के रोकड़ कॉलम शेष से
(c) रोकड़ पुस्तक के बैंक कॉलम शेष यो पास बुक के शेष से
(d) पास बुक के शेष से
Answer: (c) रोकड़ पुस्तक के बैंक कॉलम शेष या पास बुक के शेष से
In simple words: बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही के बैंक कॉलम के शेष या पास बुक के शेष को आधार मानकर तैयार किया जाता है ताकि दोनों के बीच के अंतर को समझाया जा सके।
🎯 Exam Tip: बैंक समाधान विवरण के प्रारंभिक बिंदु (रोकड़ बही या पास बुक) को समझना आवश्यक है क्योंकि इससे विवरण में मदों को जोड़ने या घटाने का तरीका बदल जाता है।
Question 3. बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है
(a) व्यापारी की इच्छानुसार
(b) अन्तिम खाते बनाने से पूर्व
(c) अन्तिम खाते बनाने के पश्चात्
(d) छमाही
Answer:
(a) व्यापारी की इच्छानुसार
In simple words: बैंक समाधान विवरण किसी कानूनी अनिवार्यता के बजाय व्यापारी की अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार तैयार किया जाता है।
🎯 Exam Tip: यद्यपि बैंक समाधान विवरण अनिवार्य नहीं है, यह वित्तीय पारदर्शिता और त्रुटियों की पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
Question 4. बैंक अधिविकर्ष होता है ।
(a) जब ग्राहक का रुपया बैंक में जमा होता है।
(b) जब बैंक ग्राहक को उसकी जमा राशि से अधिक रुपया ऋण के रूप में दे देता है।
(c) जब ग्राहक खाता बन्द कर देता है।
(d) उपरोक्त तीनों कथन सत्य हैं।
Answer: (b) जब बैंक ग्राहक को उसकी जमा राशि से अधिक रुपया ऋण के रूप में दे देता है।
In simple words: बैंक अधिविकर्ष तब होता है जब कोई ग्राहक अपने खाते में उपलब्ध राशि से अधिक पैसे निकाल लेता है, जिससे बैंक पर उसका एक निश्चित ऋण बन जाता है।
🎯 Exam Tip: अधिविकर्ष की अवधारणा को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बैंक और ग्राहक के बीच संबंध को और क्रेडिट की प्रकृति को दर्शाता है।
निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. रोकड़ पुस्तक और पास बुक के शेषों का मिलान करने के लिए तैयार किए जाने वाले विवरण का नाम लिखिए। उत्तर: बैंक समाधान विवरण
In simple words: रोकड़ पुस्तक और पास बुक के बीच के अंतर को सुलझाने के लिए बैंक समाधान विवरण बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न अक्सर एक-पंक्ति उत्तर के रूप में पूछा जाता है और इसका सीधा उत्तर 'बैंक समाधान विवरण' है।
Question 2. बैंक समाधान विवरण में कितने खाने होते हैं? उत्तरः तीन खाने
In simple words: बैंक समाधान विवरण में आमतौर पर तीन मुख्य कॉलम होते हैं - विवरण, राशि और कुल राशि।
🎯 Exam Tip: बैंक समाधान विवरण के प्रारूप और इसमें शामिल मुख्य कॉलमों की संख्या याद रखना बुनियादी अवधारणा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. रोकड़ बही में ओवरड्राफ्ट (अधिविकर्ष) से क्या तात्पर्य है? उत्तर; रोकड़ बही का क्रेडिट शेष
In simple words: रोकड़ बही में ओवरड्राफ्ट (अधिविकर्ष) का मतलब है कि बैंक खाते में जितनी राशि जमा है, उससे अधिक निकाल ली गई है, जिसे रोकड़ बही में क्रेडिट शेष के रूप में दिखाया जाता है।
🎯 Exam Tip: रोकड़ बही में डेबिट और क्रेडिट शेष का अर्थ बैंक शेष के संदर्भ में याद रखना चाहिए, क्योंकि यह पास बुक के विपरीत होता है।
Question 4. बैंक पास बुक का कौन-सा शेष अधिविकर्ष कहलाता है? उत्तरः ऋणी शेष
In simple words: बैंक पास बुक में ऋणी शेष (डेबिट बैलेंस) अधिविकर्ष (ओवरड्राफ्ट) को दर्शाता है, यानी बैंक को ग्राहक से पैसा लेना है।
🎯 Exam Tip: पास बुक और रोकड़ बही में शेष के प्रकारों (डेबिट/क्रेडिट) को अधिविकर्ष और सामान्य शेष के संदर्भ में स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।
Question 5. रोकड़ बही का डेबिट शेष क्या दर्शाता है? उत्तर: नकद रोकड़
In simple words: रोकड़ बही का डेबिट शेष यह दिखाता है कि बैंक में ग्राहक का जमा धन उपलब्ध है, जिसे नकद रोकड़ शेष कहते हैं।
🎯 Exam Tip: रोकड़ बही के डेबिट शेष और क्रेडिट शेष के पारंपरिक अर्थ को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब यह बैंक के संदर्भ में हो।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. बैंक समाधान विवरण क्या है? उत्तरः बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण' कहा जाता है।
In simple words: बैंक समाधान विवरण एक ऐसा दस्तावेज़ है जो ग्राहक की रोकड़ बही और बैंक द्वारा दी गई पास बुक के शेष में अंतर को सुलझाने और मिलान करने के लिए तैयार किया जाता है।
🎯 Exam Tip: बैंक समाधान विवरण की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक है।
Question 2. रोकड़ बही एवं बैंक पास बुक में अन्तर के कोई दो कारण लिखिए। उत्तरः रोकड़ बही एवं बैंक पास बुक में अन्तर के दो कारण निम्नलिखित
1. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए।
2. चैक बैंक में वसूली के लिए भेजे, जो अभी तक वसूल नहीं हुए।
In simple words: रोकड़ बही और पास बुक के बीच अंतर के मुख्य कारण हैं जारी किए गए चैकों का अभी तक भुगतान न होना और बैंक में जमा किए गए चैकों का अभी तक वसूल न होना।
🎯 Exam Tip: बैंक समाधान विवरण के कारणों को सूचीबद्ध करते समय, सबसे सामान्य और अक्सर पूछे जाने वाले कारणों पर ध्यान केंद्रित करें।
लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
Question 1. बैंक समाधान विवरण क्या है? यह क्यों तैयार किया जाता है? अथवा बैंक समाधान विवरण से आप क्या समझते हैं? एक व्यापारी के द्वारा यह विवरण बनाया जाना क्यों आवश्यक है? अथवा बैंक समाधान विवरण बनाने के मुख्य उद्देश्यों को बताइए। उत्तरः बैंक समाधान विवरण का अर्थ 1. बैंक समाधान विवरण से आशय बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण' कहा जाता है। रोकड़ पुस्तक की बैंक शेष तथा पास बुक की बैंक शेष में अन्तर के कारण व्यवसायी की रोकड़ पुस्तक के बैंक शेष एवं पास बुक के बैंक शेष में अन्तर के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं1. अस्वीकृत चैक या विपत्र बैंक चैक या विपत्र की राशि अन्तिम रूप से खाते में तब ही जमा करता है, जब राशि लेनदारों से वसूल हो जाती है, लेकिन व्यापारी इस प्रकार के चैकों तथा विपत्रों की राशि को रोकड़ पुस्तक की बैंक बाकी में तभी लिख देता हैं, जब वह बैंक को चैक वसूली के लिए भेजता है, जिसके कारण दोनों शेषों में अन्तर आ जाता है।
2. पास बुक में की गई अशुद्धि कई बार बैंक भूल से ग्राहक के खाते में कोई अशुद्ध प्रविष्टि कर देता है, जिसके कारण पास बुक व रोकड़ बही के शेषों में अन्तर आ जाता है।
3. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु बैंक समाधान विवरण बनाने के समय तक भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए जिस समय व्यापारी अपने किसी लेनदार को चैक काटकर देता है, तो वह उसी समय इसकी प्रविष्टि अपनी रोकड़ बही के बैंक खाते के धनी पक्ष में कर देता है। यदि बैंक समाधान विवरण की तिथि तक वह लेनदार इस चैक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करता है, तो पास बुक में ऐसे चैकों की कोई प्रविष्टि नहीं हो पाती है, जिसके कारण व्यापारी की रोकड़ बही का शेष कम हो जाता है, परन्तु पास बुक का शेष कम नहीं होता है।
4. ग्राहक के आदेशानुसार भुगतान करना बैंक अपने ग्राहक के आदेश के बिना कभी-कभी कुछ भुगतान कर देता है; जैसे - बीमा की किस्त, चन्दा, देय बिल, आदि । इनको लेखा बैंक भुगतान करते समय ही पास बुक में कर देता है, परन्तु ग्राहक इसको लेखा अपनी रोकड़ बही में सूचना प्राप्त होने पर ही करता है।
5. कुछ लिपिकीय अशुद्धियाँ रोकड़ बही या पास बुक में रकम लिखने या शेष निकालने में कोई लिपिकीय अशुद्धि हो जाती है, तो ऐसी दशा में भी दोनों पुस्तकों की बाकियों में अन्तर हो जाता है।
6. क्रेडिट शेष पर बैंक द्वारा दिया गया ब्याज जब बैंक अपने ग्राहक को जमा राशि पर ब्याज देता है, तो वह नकद न देकर यह राशि उसके खाते में जमा कर देता है। इस तरह बैंक पास बुक का शेष बढ़ जाता है, जबकि ग्राहक/व्यापारी को इसका पता बाद में ही चल पाता है।
7. चैक निर्गमित किए, लेकिन रोकड़ बही में उनका लेखा होने से छूट गया कभी-कभी व्यापारी अपने लेनदार को चैक काटकर दे देता है, लेकिन वह रोकड़ बही में चैक का लेखा करना भूल जाता है। अतः चैक का भुगतान होने के पश्चात् रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।
8. वसूली के लिए चैक जमा किए गए, परन्तु अभी तक वसूल नहीं हुए व्यापारी को जब भुगतान में या अपने देनदार से चैक प्राप्त होते हैं, तो वह इसे वसूली के लिए बैंक में भेज देता है तथा बैंक का शेष उतनी ही रकम से बढ़ा लेता है, लेकिन वास्तव में बैंक अपने ग्राहक के खाते अर्थात् पास बुक का शेष उस समय तक नहीं बढ़ाती जब तक कि वह उन चैकों का भुगतान वसूल नहीं कर लेता है। इस प्रकार, रोकड़े बही के बैंक खाने का शेष बढ़ जाता है, जबकि पास बुक में यह उतना ही बना रहता है।
9. विनियोगों पर प्राप्त ब्याज एवं लाभांश समय-समय पर बैंक अपने ग्राहकों से विनियोगों पर ब्याज व लाभांश वसूल करता रहता है, लेकिन ग्राहकों को इसकी सूचना नहीं होती है, जिसके कारण इसकी रोकड़ बही में प्रविष्टि नहीं हो पाती है
10. अवधि से पूर्व विपत्र के भुगतान पर छूट जब व्यापारी के पास देय बिल की अवधि से पहले ही धनराशि की व्यवस्था हो जाती है, तो वह बैंक को अपने द्वारा स्वीकृत बिल का भुगतान कर सकता है। इस स्थिति में बैंक अपने व्यापारी को इस अवधि के लिए कुछ छूट प्रदान करता है, जिससे व्यापारी का खाता धनी कर दिया जाता है। अतः रोकड़ बही एवं पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।
11. रकम जो बैंक द्वारा वसूल की गई बैंक ग्राहकों की ओर से कुछ भुगतान प्राप्त कर लेता है; जैसे-ब्याज, लाभांश एवं प्राप्य बिल, आदि । इनका लेखा बैंक द्वारा पास बुक में तो रकम प्राप्त होते ही कर दिया जाता है, लेकिन ग्राहक बैंक से कोई सूचना प्राप्त न होने के कारण रोकड़ बही में इसको लेखा नहीं कर पाती है।
12. व्यापारी या ग्राहकों द्वारा सीधे चैक या धनराशि बैंक में जमा करना ग्राहकों द्वारा अपने लेनदारों के खातों में धनराशि को जमा कर दिया जाता है, परन्तु इसकी सूचना व्यापारी को देर से हो पाती है। जिसके कारण पास बुक का शेष तो बढ़ जाता है, परन्तु रोकड़ बही का शेष पूर्ववत् ही रहता है।
In simple words: बैंक समाधान विवरण, रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अंतर को समझने और सुलझाने के लिए बनाया जाता है, जिससे वित्तीय रिकॉर्ड की सटीकता सुनिश्चित होती है। इसके मुख्य कारणों में चैकों का प्रस्तुत न होना या वसूल न होना, बैंक द्वारा सीधे भुगतान या प्राप्तियाँ, ब्याज या शुल्क और लेखांकन त्रुटियाँ शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में परिभाषा और उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन करना अपेक्षित है। प्रत्येक कारण को संक्षेप में समझाना और उसके प्रभाव को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
बैंक समाधान विवरण के उद्देश्य
बैंक समाधान विवरण का अर्थ इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 देखें। बैंक समाधान विवरण की उपयोगिता/उद्देश्य बैंक समाधान विवरण का बनाया जाना वैसे तो आवश्यक या अनिवार्य नहीं है, परन्तु फिर भी निम्नलिखित उपयोगिताओं/उद्देश्यों/महत्त्व के लिए इसे बनाया जाता है|
1. रोकड़ बही में उचित संशोधन रोकड़ बही तथा पास बुक का मिलान करने से रोकड़ बही में उपयुक्त संशोधन करना सम्भव हो जाता है। यदि बैंक की पास बुक में ब्याज, बैंक-व्यय, ग्राहकों से रकम तथा चैकों की सीधी प्राप्ति, आदि के लेखे किए हुए हैं, तो रोकड़ बही में इनकी प्रविष्टियाँ करके संशोधित रोकड़ बही तैयार की जाती है।
2. त्रुटि को दूर करना यदि रोकड़ बही या पास बुक में लेखा करते समय कोई भूल या त्रुटि हो गई है, तो दोनों पुस्तकों का मिलान करके त्रुटि को ज्ञात करना और उसे दूर करना सरल हो जाता है।
3. भविष्य में चैक जारी करना बैंक समाधान विवरण तैयार करने से व्यापारी को बैंक शेष की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिससे उसे भविष्य में चैक जारी करने में सुविधा होती है।
4. भूल-चूक का ज्ञान यदि व्यापारी और बैंक के द्वारा लेन-देन का लेखा करने में कोई भूल-चूक हो गई है, तो इसका ज्ञान बैंक समाधान विवरण द्वारा हो जाती है।
5. चैक वसूली में अनावश्यक देरी का ज्ञान बैंक समाधान विवरण से बैंक द्वारा चैकों की वसूली करने में हुई अनावश्यक देरी की जानकारी प्राप्त हो जाती है।
6. अन्तर के कारणों का ज्ञान होना पास बुक और रोकड़ पुस्तक के शेष में अन्तर के कारण भी बैंक समाधान विवरण द्वारा ज्ञात हो जाते हैं।
बैंक समाधान विवरण बनाने की विधि/बैंक समाधान विवरण तैयार करना
बैंक समाधान विवरण निम्नलिखित दो प्रकार के शेषों को लेकर बनाया जा सकता है
1. रोकड़ बही के शेष द्वारा रोकड़ पुस्तक के बैंक खाते का शेष दो प्रकार का हो सकता है-एक ऋणी शेष, जो बैंक में धनराशि जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा धनी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति बताता है।
(i) रोकड़ बही के ऋणी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में जोड़ दिया जाता है
1. चैक निर्गमित किए गए, लेकिन भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत ही नहीं किए गए।
2. बैंक द्वारा व्यापारी को दिया गया ब्याज ।
3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से प्राप्त किया गया कोई भुगतान ।
4. किसी ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में धनराशि जमा कर देना।
5. चैक, जो रोकड़ बही में बिना लेखा किए बैंक में भेज दिए गए।
जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में से घटा दिया जाता है
1. चैक जो वसूली के लिए जमा किए गए, परन्तु अभी वसूल नहीं हुए।
2. बैंक चार्जेज या बैंक व्यय ।
3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से किया गया कोई भुगतान ।
4. संग्रह के लिए भेजे गए चैक या बिल जो तिरस्कृत हो गए।
5. चैक जो रोकड़ बही में लिख दिए गए, लेकिन बैंक में वसूली के लिए भेजने से रह गए।
(ii) रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा विवरण तैयार करने में ऋणी शेष में जुड़ने वाली ” मदों को घटाया जाता है और घटाई जाने वाली मदों को जोड़ा जाता है।
2. पास बुक के शेष द्वारा रोकड़ बही की भाँति पास बुक का शेष भी दो प्रकार का हो सकता है-एक धनी शेष, जो बैंक में धन जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा ऋणी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति को बताता है। जब बैंक समाधान विवरण पास बुक के धनी शेष द्वारा बनाया जाता है, तो उपरोक्त विधि के अन्तर्गत जोड़ी जाने वाली मदों को घटाकर दिखाते हैं। तथा घटाई जाने वाली मदों को जोड़ते हैं। इसके विपरीत जब पास बुक के ऋणी शेष या अधिविकर्ष द्वारा बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है, तो उपरोक्त जोड़ी जाने वाली मदों को इसमें जोड़कर तथा घटाई जाने वाली मदों को घटाकर दिखाया जाता
Question 2. निम्नलिखित शब्दावलियों की सोदाहरण व्याख्या कीजिए ।
1. अधिविकर्ष
2. पास बुक
Answer:
1. अधिविकर्ष बैंक अपने चालू खाताधारकों को एक विशेष सुविधा प्रदान करता है कि यदि वे चाहें तो आवश्यकता के समय अपनी जमा की हुई धनराशि से अधिक धनराशि बैंक से निकाल सकते हैं। यह सुविधा बैंक अधिविकर्ष' कहलाती है। इसमें व्यापारी बैंक का ऋणी और बैंक व्यापार का ऋणदाता बन जाता है। उदाहरण-यदि बैंक में Rs. 2,00,000 जमा हों और व्यापारी Rs. 2,50,000 निकाल लेता है, तो Rs. 2,50,000 - Rs. 2,00,000 = Rs. 50,000 का अधिविकर्ष कहलाता है।
2. पास बुक यह एक छोटी-सी पुस्तक होती है, जिसमें ग्राहक व बैंक के बीच हए सभी लेन-देनों का लेखा किया जाता है। यह बैंक की पुस्तकों में खुले ग्राहक के खाते की प्रतिलिपि होती है। इसमें बैंक में धनराशि जमा कराने, धनराशि निकालने तथा ब्याज, आदि का तिथि के साथ विवरण दिया जाता है। उदाहरण-
| तिथि | विवरण | निकाली जाने वाली धनराशि | जमा की जाने वाली धनराशि | नाम अथवा जमा शेष | विशेष |
|---|
In simple words: अधिविकर्ष तब होता है जब कोई बैंक ग्राहक अपनी जमा राशि से अधिक निकाल लेता है, जिससे वह बैंक का देनदार बन जाता है। पास बुक एक रिकॉर्ड पुस्तिका है जो ग्राहक के सभी बैंक लेनदेन को दर्शाती है, यह बैंक खाते का विवरण होती है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दावलियों को उदाहरण के साथ समझाना महत्वपूर्ण है, ताकि उनकी स्पष्टता और व्यावहारिक उपयोगिता को दर्शाया जा सके।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)
Question 1. बैंक समाधान विवरण क्या है? रोकड़ शेष और पास बुक के शेष में अन्तर के आठ कारणों का उल्लेख कीजिए। अथवा किसी निश्चित तिथि पर पास बुक तथा रोकड़ पुस्तक के शेषों में अन्तर होने के क्या-क्या कारण होते हैं? वर्णन कीजिए। उत्तर: 1. बैंक समाधान विवरण से आशय बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण' कहा जाता है। रोकड़ पुस्तक की बैंक शेष तथा पास बुक की बैंक शेष में अन्तर के कारण व्यवसायी की रोकड़ पुस्तक के बैंक शेष एवं पास बुक के बैंक शेष में अन्तर के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं1. अस्वीकृत चैक या विपत्र बैंक चैक या विपत्र की राशि अन्तिम रूप से खाते में तब ही जमा करता है, जब राशि लेनदारों से वसूल हो जाती है, लेकिन व्यापारी इस प्रकार के चैकों तथा विपत्रों की राशि को रोकड़ पुस्तक की बैंक बाकी में तभी लिख देता हैं, जब वह बैंक को चैक वसूली के लिए भेजता है, जिसके कारण दोनों शेषों में अन्तर आ जाता है।
2. पास बुक में की गई अशुद्धि कई बार बैंक भूल से ग्राहक के खाते में कोई अशुद्ध प्रविष्टि कर देता है, जिसके कारण पास बुक व रोकड़ बही के शेषों में अन्तर आ जाता है।
3. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु बैंक समाधान विवरण बनाने के समय तक भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए जिस समय व्यापारी अपने किसी लेनदार को चैक काटकर देता है, तो वह उसी समय इसकी प्रविष्टि अपनी रोकड़ बही के बैंक खाते के धनी पक्ष में कर देता है। यदि बैंक समाधान विवरण की तिथि तक वह लेनदार इस चैक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करता है, तो पास बुक में ऐसे चैकों की कोई प्रविष्टि नहीं हो पाती है, जिसके कारण व्यापारी की रोकड़ बही का शेष कम हो जाता है, परन्तु पास बुक का शेष कम नहीं होता है।
4. ग्राहक के आदेशानुसार भुगतान करना बैंक अपने ग्राहक के आदेश के बिना कभी-कभी कुछ भुगतान कर देता है; जैसे - बीमा की किस्त, चन्दा, देय बिल, आदि । इनको लेखा बैंक भुगतान करते समय ही पास बुक में कर देता है, परन्तु ग्राहक इसको लेखा अपनी रोकड़ बही में सूचना प्राप्त होने पर ही करता है।
5. कुछ लिपिकीय अशुद्धियाँ रोकड़ बही या पास बुक में रकम लिखने या शेष निकालने में कोई लिपिकीय अशुद्धि हो जाती है, तो ऐसी दशा में भी दोनों पुस्तकों की बाकियों में अन्तर हो जाता है।
6. क्रेडिट शेष पर बैंक द्वारा दिया गया ब्याज जब बैंक अपने ग्राहक को जमा राशि पर ब्याज देता है, तो वह नकद न देकर यह राशि उसके खाते में जमा कर देता है। इस तरह बैंक पास बुक का शेष बढ़ जाता है, जबकि ग्राहक/व्यापारी को इसका पता बाद में ही चल पाता है।
7. चैक निर्गमित किए, लेकिन रोकड़ बही में उनका लेखा होने से छूट गया कभी-कभी व्यापारी अपने लेनदार को चैक काटकर दे देता है, लेकिन वह रोकड़ बही में चैक का लेखा करना भूल जाता है। अतः चैक का भुगतान होने के पश्चात् रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।
8. वसूली के लिए चैक जमा किए गए, परन्तु अभी तक वसूल नहीं हुए व्यापारी को जब भुगतान में या अपने देनदार से चैक प्राप्त होते हैं, तो वह इसे वसूली के लिए बैंक में भेज देता है तथा बैंक का शेष उतनी ही रकम से बढ़ा लेता है, लेकिन वास्तव में बैंक अपने ग्राहक के खाते अर्थात् पास बुक का शेष उस समय तक नहीं बढ़ाती जब तक कि वह उन चैकों का भुगतान वसूल नहीं कर लेता है। इस प्रकार, रोकड़े बही के बैंक खाने का शेष बढ़ जाता है, जबकि पास बुक में यह उतना ही बना रहता है।
9. विनियोगों पर प्राप्त ब्याज एवं लाभांश समय-समय पर बैंक अपने ग्राहकों से विनियोगों पर ब्याज व लाभांश वसूल करता रहता है, लेकिन ग्राहकों को इसकी सूचना नहीं होती है, जिसके कारण इसकी रोकड़ बही में प्रविष्टि नहीं हो पाती है
10. अवधि से पूर्व विपत्र के भुगतान पर छूट जब व्यापारी के पास देय बिल की अवधि से पहले ही धनराशि की व्यवस्था हो जाती है, तो वह बैंक को अपने द्वारा स्वीकृत बिल का भुगतान कर सकता है। इस स्थिति में बैंक अपने व्यापारी को इस अवधि के लिए कुछ छूट प्रदान करता है, जिससे व्यापारी का खाता धनी कर दिया जाता है। अतः रोकड़ बही एवं पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।
11. रकम जो बैंक द्वारा वसूल की गई बैंक ग्राहकों की ओर से कुछ भुगतान प्राप्त कर लेता है; जैसे-ब्याज, लाभांश एवं प्राप्य बिल, आदि । इनका लेखा बैंक द्वारा पास बुक में तो रकम प्राप्त होते ही कर दिया जाता है, लेकिन ग्राहक बैंक से कोई सूचना प्राप्त न होने के कारण रोकड़ बही में इसको लेखा नहीं कर पाती है।
12. व्यापारी या ग्राहकों द्वारा सीधे चैक या धनराशि बैंक में जमा करना ग्राहकों द्वारा अपने लेनदारों के खातों में धनराशि को जमा कर दिया जाता है, परन्तु इसकी सूचना व्यापारी को देर से हो पाती है। जिसके कारण पास बुक का शेष तो बढ़ जाता है, परन्तु रोकड़ बही का शेष पूर्ववत् ही रहता है।
In simple words: बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही और पास बुक के शेषों के बीच के अंतर को समझाने वाला एक विवरण है। यह अंतर कई कारणों से होता है, जैसे जारी किए गए चैकों का प्रस्तुत न होना, जमा किए गए चैकों का वसूल न होना, बैंक द्वारा सीधे भुगतान या प्राप्तियाँ, ब्याज या शुल्क का लेखांकन, और दोनों पुस्तकों में हुई त्रुटियाँ।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है। आपको बैंक समाधान विवरण की परिभाषा और कम से कम 8-10 अंतर के कारणों को स्पष्ट उदाहरणों के साथ याद रखना चाहिए।
Question 2. बैंक समाधान विवरण क्या है? इसकी क्या उपयोगिता है? इसको बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। उत्तरः बैंक समाधान विवरण का अर्थ इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 देखें। बैंक समाधान विवरण की उपयोगिता/उद्देश्य बैंक समाधान विवरण का बनाया जाना वैसे तो आवश्यक या अनिवार्य नहीं है, परन्तु फिर भी निम्नलिखित उपयोगिताओं/उद्देश्यों/महत्त्व के लिए इसे बनाया जाता है।
1. रोकड़ बही में उचित संशोधन रोकड़ बही तथा पास बुक का मिलान करने से रोकड़ बही में उपयुक्त संशोधन करना सम्भव हो जाता है। यदि बैंक की पास बुक में ब्याज, बैंक-व्यय, ग्राहकों से रकम तथा चैकों की सीधी प्राप्ति, आदि के लेखे किए हुए हैं, तो रोकड़ बही में इनकी प्रविष्टियाँ करके संशोधित रोकड़ बही तैयार की जाती है।
2. त्रुटि को दूर करना यदि रोकड़ बही या पास बुक में लेखा करते समय कोई भूल या त्रुटि हो गई है, तो दोनों पुस्तकों का मिलान करके त्रुटि को ज्ञात करना और उसे दूर करना सरल हो जाता है।
3. भविष्य में चैक जारी करना बैंक समाधान विवरण तैयार करने से व्यापारी को बैंक शेष की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिससे उसे भविष्य में चैक जारी करने में सुविधा होती है।
4. भूल-चूक का ज्ञान यदि व्यापारी और बैंक के द्वारा लेन-देन का लेखा करने में कोई भूल-चूक हो गई है, तो इसका ज्ञान बैंक समाधान विवरण द्वारा हो जाती है।
5. चैक वसूली में अनावश्यक देरी का ज्ञान बैंक समाधान विवरण से बैंक द्वारा चैकों की वसूली करने में हुई अनावश्यक देरी की जानकारी प्राप्त हो जाती है।
6. अन्तर के कारणों का ज्ञान होना पास बुक और रोकड़ पुस्तक के शेष में अन्तर के कारण भी बैंक समाधान विवरण द्वारा ज्ञात हो जाते हैं।
In simple words: बैंक समाधान विवरण, कैश बुक और पासबुक के बीच के अंतर को समझाता है। यह कैश बुक को सही करने, त्रुटियों को पहचानने, भविष्य की योजना बनाने और लेनदेन में अनावश्यक देरी का पता लगाने में उपयोगी है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में परिभाषा, उपयोगिता और बनाने की विधि तीनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। प्रत्येक भाग को विस्तार से और संगठित तरीके से प्रस्तुत करें।
Question 3. बैंक समाधान विवरण क्या है? यह क्यों बनाया जाता है? रोकड़ बही के शेष और पास बुक के शेष में अन्तर के किन्हीं छः कारणों का उल्लेख कीजिए। उत्तरः बैंक समाधान विवरण का अर्थ
बैंक समाधान विवरण से आशय बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण' कहा जाता है। रोकड़ पुस्तक की बैंक शेष तथा पास बुक की बैंक शेष में अन्तर के कारण व्यवसायी की रोकड़ पुस्तक के बैंक शेष एवं पास बुक के बैंक शेष में अन्तर के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
1. अस्वीकृत चैक या विपत्र बैंक चैक या विपत्र की राशि अन्तिम रूप से खाते में तब ही जमा करता है, जब राशि लेनदारों से वसूल हो जाती है, लेकिन व्यापारी इस प्रकार के चैकों तथा विपत्रों की राशि को रोकड़ पुस्तक की बैंक बाकी में तभी लिख देता हैं, जब वह बैंक को चैक वसूली के लिए भेजता है, जिसके कारण दोनों शेषों में अन्तर आ जाता है।
2. पास बुक में की गई अशुद्धि कई बार बैंक भूल से ग्राहक के खाते में कोई अशुद्ध प्रविष्टि कर देता है, जिसके कारण पास बुक व रोकड़ बही के शेषों में अन्तर आ जाता है।
3. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु बैंक समाधान विवरण बनाने के समय तक भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए जिस समय व्यापारी अपने किसी लेनदार को चैक काटकर देता है, तो वह उसी समय इसकी प्रविष्टि अपनी रोकड़ बही के बैंक खाते के धनी पक्ष में कर देता है। यदि बैंक समाधान विवरण की तिथि तक वह लेनदार इस चैक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करता है, तो पास बुक में ऐसे चैकों की कोई प्रविष्टि नहीं हो पाती है, जिसके कारण व्यापारी की रोकड़ बही का शेष कम हो जाता है, परन्तु पास बुक का शेष कम नहीं होता है।
4. ग्राहक के आदेशानुसार भुगतान करना बैंक अपने ग्राहक के आदेश के बिना कभी-कभी कुछ भुगतान कर देता है; जैसे - बीमा की किस्त, चन्दा, देय बिल, आदि । इनको लेखा बैंक भुगतान करते समय ही पास बुक में कर देता है, परन्तु ग्राहक इसको लेखा अपनी रोकड़ बही में सूचना प्राप्त होने पर ही करता है।
5. कुछ लिपिकीय अशुद्धियाँ रोकड़ बही या पास बुक में रकम लिखने या शेष निकालने में कोई लिपिकीय अशुद्धि हो जाती है, तो ऐसी दशा में भी दोनों पुस्तकों की बाकियों में अन्तर हो जाता है।
6. क्रेडिट शेष पर बैंक द्वारा दिया गया ब्याज जब बैंक अपने ग्राहक को जमा राशि पर ब्याज देता है, तो वह नकद न देकर यह राशि उसके खाते में जमा कर देता है। इस तरह बैंक पास बुक का शेष बढ़ जाता है, जबकि ग्राहक/व्यापारी को इसका पता बाद में ही चल पाता है।
7. चैक निर्गमित किए, लेकिन रोकड़ बही में उनका लेखा होने से छूट गया कभी-कभी व्यापारी अपने लेनदार को चैक काटकर दे देता है, लेकिन वह रोकड़ बही में चैक का लेखा करना भूल जाता है। अतः चैक का भुगतान होने के पश्चात् रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।
8. वसूली के लिए चैक जमा किए गए, परन्तु अभी तक वसूल नहीं हुए व्यापारी को जब भुगतान में या अपने देनदार से चैक प्राप्त होते हैं, तो वह इसे वसूली के लिए बैंक में भेज देता है तथा बैंक का शेष उतनी ही रकम से बढ़ा लेता है, लेकिन वास्तव में बैंक अपने ग्राहक के खाते अर्थात् पास बुक का शेष उस समय तक नहीं बढ़ाती जब तक कि वह उन चैकों का भुगतान वसूल नहीं कर लेता है। इस प्रकार, रोकड़े बही के बैंक खाने का शेष बढ़ जाता है, जबकि पास बुक में यह उतना ही बना रहता है।
9. विनियोगों पर प्राप्त ब्याज एवं लाभांश समय-समय पर बैंक अपने ग्राहकों से विनियोगों पर ब्याज व लाभांश वसूल करता रहता है, लेकिन ग्राहकों को इसकी सूचना नहीं होती है, जिसके कारण इसकी रोकड़ बही में प्रविष्टि नहीं हो पाती है
10. अवधि से पूर्व विपत्र के भुगतान पर छूट जब व्यापारी के पास देय बिल की अवधि से पहले ही धनराशि की व्यवस्था हो जाती है, तो वह बैंक को अपने द्वारा स्वीकृत बिल का भुगतान कर सकता है। इस स्थिति में बैंक अपने व्यापारी को इस अवधि के लिए कुछ छूट प्रदान करता है, जिससे व्यापारी का खाता धनी कर दिया जाता है। अतः रोकड़ बही एवं पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।
11. रकम जो बैंक द्वारा वसूल की गई बैंक ग्राहकों की ओर से कुछ भुगतान प्राप्त कर लेता है; जैसे-ब्याज, लाभांश एवं प्राप्य बिल, आदि । इनका लेखा बैंक द्वारा पास बुक में तो रकम प्राप्त होते ही कर दिया जाता है, लेकिन ग्राहक बैंक से कोई सूचना प्राप्त न होने के कारण रोकड़ बही में इसको लेखा नहीं कर पाती है।
12. व्यापारी या ग्राहकों द्वारा सीधे चैक या धनराशि बैंक में जमा करना ग्राहकों द्वारा अपने लेनदारों के खातों में धनराशि को जमा कर दिया जाता है, परन्तु इसकी सूचना व्यापारी को देर से हो पाती है। जिसके कारण पास बुक का शेष तो बढ़ जाता है, परन्तु रोकड़ बही का शेष पूर्ववत् ही रहता है।
In simple words: बैंक समाधान विवरण एक ऐसा दस्तावेज़ है जो ग्राहक की रोकड़ बही और बैंक द्वारा दी गई पास बुक के शेषों में अंतर को समझने और सुलझाने के लिए बनाया जाता है, और यह अंतर चैकों के अप्रस्तुत या अवसूलित होने, बैंक द्वारा सीधे किए गए भुगतानों या प्राप्तियों और लेखांकन त्रुटियों के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में बैंक समाधान विवरण की परिभाषा, इसके महत्व और अंतर के किन्हीं छह प्रमुख कारणों का स्पष्ट और संक्षिप्त विवरण देना अपेक्षित है।
बैंक समाधान विवरण बनाने के उद्देश्य
बैंक समाधान विवरण का अर्थ इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 देखें। बैंक समाधान विवरण की उपयोगिता/उद्देश्य बैंक समाधान विवरण का बनाया जाना वैसे तो आवश्यक या अनिवार्य नहीं है, परन्तु फिर भी निम्नलिखित उपयोगिताओं/उद्देश्यों/महत्त्व के लिए इसे बनाया जाता है।
1. रोकड़ बही में उचित संशोधन रोकड़ बही तथा पास बुक का मिलान करने से रोकड़ बही में उपयुक्त संशोधन करना सम्भव हो जाता है। यदि बैंक की पास बुक में ब्याज, बैंक-व्यय, ग्राहकों से रकम तथा चैकों की सीधी प्राप्ति, आदि के लेखे किए हुए हैं, तो रोकड़ बही में इनकी प्रविष्टियाँ करके संशोधित रोकड़ बही तैयार की जाती है।
2. त्रुटि को दूर करना यदि रोकड़ बही या पास बुक में लेखा करते समय कोई भूल या त्रुटि हो गई है, तो दोनों पुस्तकों का मिलान करके त्रुटि को ज्ञात करना और उसे दूर करना सरल हो जाता है।
3. भविष्य में चैक जारी करना बैंक समाधान विवरण तैयार करने से व्यापारी को बैंक शेष की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिससे उसे भविष्य में चैक जारी करने में सुविधा होती है।
4. भूल-चूक का ज्ञान यदि व्यापारी और बैंक के द्वारा लेन-देन का लेखा करने में कोई भूल-चूक हो गई है, तो इसका ज्ञान बैंक समाधान विवरण द्वारा हो जाती है।
5. चैक वसूली में अनावश्यक देरी का ज्ञान बैंक समाधान विवरण से बैंक द्वारा चैकों की वसूली करने में हुई अनावश्यक देरी की जानकारी प्राप्त हो जाती है।
6. अन्तर के कारणों का ज्ञान होना पास बुक और रोकड़ पुस्तक के शेष में अन्तर के कारण भी बैंक समाधान विवरण द्वारा ज्ञात हो जाते हैं।
रोकड़ बही के शेष और पास बुक के शेष में अन्तर के कारण
बैंक समाधान विवरण बनाने की विधि/बैंक समाधान विवरण तैयार करना
बैंक समाधान विवरण निम्नलिखित दो प्रकार के शेषों को लेकर बनाया जा सकता है
1. रोकड़ बही के शेष द्वारा रोकड़ पुस्तक के बैंक खाते का शेष दो प्रकार का हो सकता है-एक ऋणी शेष, जो बैंक में धनराशि जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा धनी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति बताता है।
(i) रोकड़ बही के ऋणी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में जोड़ दिया जाता है
1. चैक निर्गमित किए गए, लेकिन भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत ही नहीं किए गए।
2. बैंक द्वारा व्यापारी को दिया गया ब्याज ।
3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से प्राप्त किया गया कोई भुगतान ।
4. किसी ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में धनराशि जमा कर देना।
5. चैक, जो रोकड़ बही में बिना लेखा किए बैंक में भेज दिए गए।
जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में से घटा दिया जाता है
1. चैक जो वसूली के लिए जमा किए गए, परन्तु अभी वसूल नहीं हुए।
2. बैंक चार्जेज या बैंक व्यय ।
3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से किया गया कोई भुगतान ।
4. संग्रह के लिए भेजे गए चैक या बिल जो तिरस्कृत हो गए।
5. चैक जो रोकड़ बही में लिख दिए गए, लेकिन बैंक में वसूली के लिए भेजने से रह गए।
(ii) रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा विवरण तैयार करने में ऋणी शेष में जुड़ने वाली ” मदों को घटाया जाता है और घटाई जाने वाली मदों को जोड़ा जाता है।
2. पास बुक के शेष द्वारा रोकड़ बही की भाँति पास बुक का शेष भी दो प्रकार का हो सकता है-एक धनी शेष, जो बैंक में धन जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा ऋणी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति को बताता है। जब बैंक समाधान विवरण पास बुक के धनी शेष द्वारा बनाया जाता है, तो उपरोक्त विधि के अन्तर्गत जोड़ी जाने वाली मदों को घटाकर दिखाते हैं। तथा घटाई जाने वाली मदों को जोड़ते हैं। इसके विपरीत जब पास बुक के ऋणी शेष या अधिविकर्ष द्वारा बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है, तो उपरोक्त जोड़ी जाने वाली मदों को इसमें जोड़कर तथा घटाई जाने वाली मदों को घटाकर दिखाया जाता
क्रियात्मक प्रश्न (8 अंक)
Question 1. निम्नलिखित सूचना से एक बैंक समाधान विवरण 31 मार्च, 2016 को बनाइए ।
1. इस तिथि को रोकड़ बही में बैंक खाते का शेष Rs. 3,000 था।
2. Rs. 200 का चैक बैंक में जमा किया गया था, परन्तु बैंक खाते में अभी तक जमा नहीं हुआ ।
3. लेनदारों को Rs. 1,800 के दो चैक दिए थे, उनमें से बैंक के पास Rs. 800 का एक चैक ही भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया।
4. निम्नलिखित प्रविष्टियाँ पास बुक में की गई थी, परन्तु रोकड़ बही में उस तिथि तक नहीं लिखी गई थी।
• बैंक व्यय Rs. 40
• Rs. 200 का बीमा प्रीमियम बैंक द्वारा चुकाया गया था।
• एक ग्राहक द्वारा बैंक में Rs. 500 सीधे जमा कर दिए गए।
Answer:
हल बैंक समाधान विवरण
(31 मार्च, 2016 को)
| विवरण | धनराशि (Rs.) | धनराशि (Rs.) |
|---|---|---|
| रोकड़ बही के अनुसार शेष | 3,000 | |
| जोड़िए (i) चैक काटकर दिए गए, परन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए | 1,000 | |
| (ii) ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में रुपया जमा किया गया | 500 | 1,500 |
| 4,500 | ||
| घटाइए (i) चैक बैंक में जमा किया गया, परन्तु बैंक खाते में जमा नहीं हुआ | 200 | |
| (ii) बैंक व्यय का लेखा रोकड़ बही में नहीं हुआ | 40 | |
| (iii) बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम के भुगतान का लेखा रोकड़ बही में नहीं हुआ | 200 | 440 |
| पास बुक के अनुसार शेष | 4,060 |
In simple words: यह एक बैंक समाधान विवरण है जो रोकड़ बही के शेष को आधार मानकर तैयार किया गया है। इसमें उन चैकों को जोड़ा गया है जो जारी तो हुए पर प्रस्तुत नहीं हुए और ग्राहकों द्वारा सीधे जमा राशि, जबकि उन चैकों को घटाया गया है जो जमा तो हुए पर वसूल नहीं हुए, बैंक व्यय और बीमा प्रीमियम भुगतान।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, रोकड़ बही या पासबुक के शेष से शुरू करना और प्रत्येक समायोजन (जोड़ने या घटाने) को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है। संख्याओं की सटीकता पर विशेष ध्यान दें।
Question 2. निम्न से बैंक समाधान विवरण-पत्र तैयार कीजिए।
1. दिनांक 31-12-2014 को रोकड़ बही के अनुसार बैंक शेष Rs. 3,200 है।
2. बैंक व्यय Rs. 20 था।
3. बैंक ने Rs. 100 लाभांश एकत्रित किया।
4. Rs. 1,780 के चैक जारी किए गए, लेकिन भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
5. Rs. 860 के बैंक बैंक में जमा कराए, किन्तु अभी क्रेडिट नहीं हुए।
Answer:
हल बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2014 को)
| विवरण | धनराशि (Rs.) | धनराशि (Rs.) |
|---|---|---|
| रोकड़ बही के अनुसार बैंक शेष | 3,200 | |
| जोड़िए (i) बैंक ने लाभांश एकत्रित किया | 100 | |
| (ii) चैक जारी किए गए, लेकिन भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए | 1,780 | 1,880 |
| 5,080 | ||
| घटाइए (i) बैंक व्यय | 20 | |
| (ii) चैक बैंक में जमा कराए, किन्तु अभी क्रेडिट नहीं हुए | 860 | 880 |
| पास बुक के अनुसार बैंक खाते का शेष | 4,200 |
In simple words: यह बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही के बैंक शेष से शुरू होता है। इसमें बैंक द्वारा एकत्रित लाभांश और जारी किए गए, परन्तु अप्रस्तुत चैकों को जोड़ा गया है, जबकि बैंक व्यय और बैंक में जमा कराए गए, पर क्रेडिट न हुए चैकों को घटाया गया है, ताकि पास बुक का शेष मिलान हो सके।
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि आप रोकड़ बही के डेबिट और क्रेडिट प्रभावों को सही ढंग से समझते हैं और तदनुसार उन्हें बैंक समाधान विवरण में जोड़ते या घटाते हैं।
Question 3. निम्न विवरण से 31 मार्च, 2015 को बैंक समाधान विवरण-पत्र बनाइए ।
1. रोकड़ बही के बैंक खाते का क्रेडिट शेष (अधिविकर्ष) Rs. 14,400 हैं।
2. Rs. 6,160 के चैक बैंक में जमा कराए गए, परन्तु राशि जमा नहीं हुई।
3. देनदारों को Rs. 2,880 के चैक जारी किए गए, किन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
4. बैंक ने Rs. 200 अपना बैंक व्यय लगाया।
5. Rs. 4,000 एक ग्राहक ने व्यापारी के बैंक खाते में सीधे जमा करवाए।
Answer:
हल बैंक समाधान विवरण
(31 मार्च, 2015 को)
| विवरण | धनराशि (Rs.) | धनराशि (Rs.) |
|---|---|---|
| रोकड़ बही के अनुसार क्रेडिट शेष (अधिविकर्ष) | 14,400 | |
| जोड़िए (i) चैक बैंक में जमा कराए गए, परन्तु राशि जमा नहीं हुई | 6,160 | |
| (ii) बैंक व्यय | 200 | 6,360 |
| 20,760 | ||
| घटाइए (i) चैक जारी किए गए, किन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए | 2,880 | |
| (ii) ग्राहक ने बैंक खाते में सीधे जमा करवाए | 4,000 | 6,880 |
| पास बुक के अनुसार शेष | 13,880 |
In simple words: यह बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही के क्रेडिट शेष (अधिविकर्ष) से शुरू होता है। इसमें जमा किए गए पर अवसूलित चैकों और बैंक व्यय को जोड़ा गया है, जबकि जारी किए गए पर अप्रस्तुत चैकों और ग्राहकों द्वारा सीधे जमा किए गए को घटाया गया है, जिससे पास बुक का शेष प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: अधिविकर्ष (ओवरड्राफ्ट) वाले प्रश्नों को हल करते समय जोड़ने और घटाने के नियमों को ठीक से लागू करें, क्योंकि ये सामान्य डेबिट शेष से विपरीत हो सकते हैं।
Question 4. निम्नलिखित विवरण से रनवीर सिंह, मुम्बई का 31 दिसम्बर, 2013 का बैंक समाधान विवरण बनाइए ।
1. 31 दिसम्बर, 2013 को पास बुक का क्रेडिट शेष Rs. 6,225 था।
2. Rs. 2,375 का चैक संग्रह हेतु बैंक भेजा गया था, किन्तु संग्रह नहीं हुआ ।
3. 1,750 और Rs. 1,500 के दो चैकों को निर्गमित किया गया, किन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
4. बैंक द्वारा Rs. 225 ब्याज के क्रेडिट किए गए।
5. ग्राहक की ओर से Rs. 1,200 का बीमा प्रीमियम का बैंक द्वारा सीधे भुगतान किया गया।
Answer:
हल बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2013 को)
| विवरण | धनराशि (Rs.) | धनराशि (Rs.) |
|---|---|---|
| पास बुक के अनुसार क्रेडिट शेष | 6,225 | |
| जोड़िए (i) चैक संग्रह हेतु बैंक भेजा गया था, किन्तु संग्रह नहीं हुआ | 2,375 | |
| (ii) ग्राहक की ओर से बीमा प्रीमियम का बैंक द्वारा सीधे भुगतान किया गया | 1,200 | 3,575 |
| 9,800 | ||
| घटाइए (i) चैकों का भुगतान किया गया, किन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए (1,750 + 1,500) | 3,250 | |
| (ii) बैंक द्वारा ब्याज के क्रेडिट किए गए. | 225 | 3,475 |
| रोकड़ बही के अनुसार शेष | 6,325 |
In simple words: यह बैंक समाधान विवरण पास बुक के क्रेडिट शेष से शुरू होता है। इसमें संग्रह हेतु भेजे गए पर अवसूलित चैकों और ग्राहक द्वारा सीधे बीमा प्रीमियम भुगतान को जोड़ा गया है, जबकि जारी किए गए पर अप्रस्तुत चैकों और बैंक द्वारा क्रेडिट किए गए ब्याज को घटाया गया है, जिससे रोकड़ बही का शेष प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: जब पास बुक के शेष से शुरुआत की जाती है, तो रोकड़ बही के विपरीत नियमों का पालन करें। जमा की गई लेकिन असंग्रहीत मदों को जोड़ें, और जारी की गई लेकिन अप्रस्तुत मदों को घटाएं।
Question 5. निम्नलिखित विवरण से श्यामनन्दन, कानपुर का 31 दिसम्बर, 2012 का बैंक समाधान विवरण बनाइए।
1. 31 दिसम्बर, 2012 को रोकड़ बही के अनुसार Rs. 5,000 डेबिट शेष था ।
2. संग्रह हेतु भेजा गया, Rs. 1,000 के चैक का बैंक द्वारा संग्रह नहीं हुआ ।
3. Rs. 500 का एक निर्गमित चैक भुगतान हेतु प्रस्तुत नहीं किया गया।
4. बैंक द्वारा ब्याज के पास बुक में हैं Rs. 125 क्रेडिट किए गए, किन्तु रोकड़ । पुस्तक लेखा नहीं हुआ ।
5. बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम के Rs. 500 का भुगतान सीधे कर दिया गया।
Answer:
हल बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2012 को)
| विवरण | धनराशि (Rs.) | धनराशि (Rs.) |
|---|---|---|
| रोकड़ बही के अनुसार डेबिट शेष | 5,000 | |
| जोड़िए (i) निर्गमित चैक भुगतान हेतु प्रस्तुत नहीं किया गया | 500 | |
| (ii) बैंक द्वारा पास बुक में ब्याज को क्रेडिट किया गया, परन्तु रोकड़ पुस्तक में लेखा नहीं हुआ | 125 | 625 |
| 5,625 | ||
| घटाइए (i) संग्रह हेतु चैक भेजा गया, परन्तु संग्रह नहीं हुआ | 1,000 | |
| (ii) बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम का भुगतान सीधा कर दिया गया | 500 | 1,500 |
| पास बुक के अनुसार बैंक खाते का शेष | 4,125 |
In simple words: यह बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही के डेबिट शेष से शुरू होता है। इसमें निर्गमित पर अप्रस्तुत चैक और बैंक द्वारा क्रेडिट किए गए ब्याज को जोड़ा गया है, जबकि संग्रह हेतु भेजे गए पर असंग्रहीत चैक और बैंक द्वारा सीधे बीमा प्रीमियम भुगतान को घटाया गया है, जिससे पास बुक का शेष मिलान होता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक लेनदेन के प्रभाव को ध्यान से विश्लेषित करें कि वह रोकड़ बही और पास बुक में कैसे दर्ज किया गया होगा और फिर सही समायोजन लागू करें।
Question 6. निम्नलिखित विवरण से मै, अमर चन्द्र, कुँवर चन्द्र, वाराणसी का 31 दिसम्बर, 2011 को बैंक समाधान विवरण बनाइए ।
1. 31 दिसम्बर, 2011 को रोकड़ बही के अनुसार Rs. 6,023 का डेबिट शेष था ।
2. बैंक में संग्रह हेतु Rs. 1,420 का चैक भेजा गया था जिसका संग्रह नहीं हुआ था।
3. Rs. 3,000 के चैक निर्गमित किए गए थे, किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत नहीं किए गए।
4. Rs. 1,850 बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम के लिए सीधे भुगतान किए गए।
5. Rs. 120 बैंक ने ब्याज के क्रेडिट किए।
Answer:
हल बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2011 को)
| विवरण | धनराशि (Rs.) | धनराशि (Rs.) |
|---|---|---|
| रोकड़ बही के अनुसार डेबिट शेष | 6,023 | |
| जोड़िए (i) चैक निर्गमित किए गए, किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत नहीं किए गए | 3,000 | |
| (ii) बैंक ने ब्याज के क्रेडिट किए | 120 | 3,120 |
| 9,143 | ||
| घटाइए (i) बैंक में संग्रह के लिए चैक भेजा गया था, जिसका संग्रह नहीं हुआ था | 1,420 | |
| (ii) बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम के लिए सीधे भुगतान किए गए | 1,850 | 3,270 |
| पास बुक के अनुसार बैंक खाते का शेष | 5,873 |
In simple words: यह बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही के डेबिट शेष से शुरू होता है। इसमें जारी किए गए पर अप्रस्तुत चैकों और बैंक द्वारा क्रेडिट किए गए ब्याज को जोड़ा गया है, जबकि संग्रह हेतु भेजे गए पर अवसूलित चैकों और बैंक द्वारा सीधे बीमा प्रीमियम भुगतान को घटाया गया है, जिससे पास बुक का शेष प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि आप रोकड़ बही के शेष के साथ शुरू करते समय मदों को सही ढंग से जोड़ते और घटाते हैं। विशेष रूप से, बैंक द्वारा सीधे किए गए भुगतानों को घटाया जाता है और प्राप्तियों को जोड़ा जाता है।
Question 1. निम्नलिखित सूचनाओं से 31 दिसम्बर, 2010 को एक बैंक समाधान विवरण तैयार कीजिए।
1. रोकड़ पुस्तक के अनुसार शेष Rs. 8,000 था।
2. Rs. 11,000 का चैक संग्रह हेतु बैंक भेजा गया, किन्तु संग्रह नहीं हुआ ।
3. Rs. 12,000 के चैक निर्गमित किए गए, किन्तु भुगतान के लिए केवल Rs. 10,000 के चैक प्रस्तुत किए गए।
4. एक ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में Rs. 4,000 जमा कर दिए गए।
5. बैंक द्वारा ब्याज के लिए हैं Rs. 500 क्रेडिट किए गए।
6. बैंक द्वारा Rs. 1,500 बीमा प्रीमियम के लिए भुगतान किया गया ।
Answer:
हल बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2010 को)
| विवरण | धनराशि (Rs.) | धनराशि (Rs.) |
|---|---|---|
| रोकड़ बही के अनुसार शेष | 8,000 | |
| जोड़िए (i) चैक निर्गमित किए गए, किन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए (12,000 - 10,000) | 2,000 | |
| (ii) एक ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में जमा कर दिए गए | 4,000 | |
| (iii) बैंक द्वारा ब्याज के क्रेडिट किए गए | 500 | 6,500 |
| 14,500 | ||
| घटाइए (i) चैक संग्रह हेतु बैंक भेजा गया, किन्तु संग्रह नहीं हुआ | 11,000 | |
| (ii) बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम का भुगतान किया गया | 1,500 | 12,500 |
| पास बुक के अनुसार बैंक खाते का शेष | 2,000 |
In simple words: यह बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही के शेष से शुरू होता है। इसमें अप्रस्तुत चैकों, ग्राहकों द्वारा सीधे जमा और बैंक द्वारा क्रेडिट किए गए ब्याज को जोड़ा गया है, जबकि अवसूलित चैकों और बैंक द्वारा सीधे बीमा प्रीमियम भुगतान को घटाया गया है, जिससे पास बुक का शेष प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: जारी किए गए और प्रस्तुत किए गए चैकों के बीच के अंतर को सही ढंग से गणना करें। सीधे बैंक लेनदेन (जैसे ब्याज, बीमा प्रीमियम, सीधे जमा) को रोकड़ बही में दर्ज न होने के प्रभाव को समझें।
Question 9. निम्नलिखित सूचनाओं के आधार पर 31 दिसम्बर, 2005 को बैंक समाधान विवरण तैयार कीजिए।
1. पास बुक के अनुसार क्रेडिट शेष Rs. 9,000 था।
2. Rs. 7,000 के चैक वसूली के लिए भेजे गए, किन्तु वसूल नहीं हुए।
3. बैंक व्यय के Rs. 60 डेबिट किए गए, किन्तु रोकड़ पुस्तक में लेखा नहीं हुआ ।
4. Rs. 9,600 के चैक निर्गमित किए गए, किन्तु भुगतान हेतु उन्हें प्रस्तुत नहीं किया गया।
5. पास बुक में गलती से Rs. 3,000 डेबिट हो गए।
Answer:
हल बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2005 को)
| विवरण | धनराशि (Rs.) | धनराशि (Rs.) |
|---|---|---|
| पास बुक के अनुसार क्रेडिट शेष | 9,000 | |
| जोड़िए (i) चैक वसूली के लिए भेजे गए, किन्तु वसूल नहीं हुए | 7,000 | |
| (ii) बैंक व्यय के डेबिट किए गए, किन्तु रोकड़ पुस्तक में लेखा नहीं हुआ | 60 | |
| (iii) पास बुक में गलती से डेबिट हो गए | 3,000 | 10,060 |
| 19,060 | ||
| घटाइए (i) चैक निर्गमित किए गए, किन्तु भुगतान हेतु उन्हें प्रस्तुत नहीं किया गया | 9,600 | 9,600 |
| रोकड़ बही के अनुसार शेष | 9,460 |
In simple words: यह बैंक समाधान विवरण पास बुक के क्रेडिट शेष से शुरू होता है। इसमें वसूल न हुए चैकों, रोकड़ बही में दर्ज न हुए बैंक व्यय, और पास बुक में हुई त्रुटि (डेबिट) को जोड़ा गया है, जबकि अप्रस्तुत चैकों को घटाया गया है, जिससे रोकड़ बही का शेष प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: पास बुक के शेष से शुरू करते समय, रोकड़ बही के नियमों के विपरीत समायोजन करें। बैंक की गलतियों को सही करने के लिए उन्हें पास बुक पर पड़ने वाले प्रभाव के अनुसार समायोजित करें।
Question 10. निम्नलिखित सूचनाओं के आधार पर बैंक समाधान विवरण तैयार कीजिए। 31 दिसम्बर, 2004 को मोहन की पास बुक में Rs. 8,000 का डेबिट शेष था। रोकड़ बही से मिलान करने पर निम्नलिखित अन्तर ज्ञात हुए
1. बैंक में जमा किया गया Rs. 1,000 का चैक अभी तक वसूल नहीं हुआ ।
2. Rs. 1,000 के चैक निर्गमित किए गए, परन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
3. ग्राहक ने Rs. 1,000 सीधे मोहन के खाते में जमा कर दिए।
4. Rs. 500 विनियोग पर ब्याज बैंक ने वसूल किया।
In simple words: यह एक क्रियात्मक प्रश्न है जिसमें मोहन की पास बुक के डेबिट शेष से शुरू करके बैंक समाधान विवरण बनाना है। इसमें चैक जमा पर वसूल न होना, जारी चैक का प्रस्तुत न होना, ग्राहक द्वारा सीधे जमा और बैंक द्वारा ब्याज वसूली जैसी मदों का समायोजन किया जाएगा।
🎯 Exam Tip: पास बुक के डेबिट शेष (अधिविकर्ष) से शुरू करते समय, 'जोड़ने' और 'घटाने' के नियमों को विशेष ध्यान से लागू करें, क्योंकि ये सामान्य क्रेडिट शेष के नियमों से विपरीत होते हैं।
Question 11. निम्न से बैंक समाधान विवरण-पत्र तैयार कीजिए।
(1) दिनांक 31.12.2017 को पास बुक के अनुसार बैंक शेष (जमा) Rs. 6,428 था।
(2) बैंक व्यय Rs. 120 था।
(3) बैंक ने Rs. 1,000 लाभांश एकत्रित किया।
(4) Rs. 2,600 के चैक जारी किए गए, लेकिन भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
(5) Rs. 1,600 के चैक बैंक में जमा कराए, किन्तु अभी तक क्रेडिट नहीं हुए।
Answer:
हल बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2017 को)
| विवरण | धनराशि (Rs.) | धनराशि (Rs.) |
|---|---|---|
| पास बुक के अनुसार बैंक शेष (जमा) | 6,428 | |
| जोड़िए | ||
| (i) बैंक व्यय | 120 | |
| (ii) चैक जमा कराए, परन्तु बैंक में जमा नहीं हुए | 1,600 | 1,720 |
| 8,148 | ||
| घटाइए | ||
| (i) बैंक ने लाभांश एकत्रित किया | 1,000 | |
| (ii) चैक जारी किए, परन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए | 2,600 | 3,600 |
| रोकड़ बही के अनुसार शेष | 4,548 |
In simple words: बैंक समाधान विवरण एक ऐसा स्टेटमेंट है जो रोकड़ बही (कैश बुक) और पास बुक के शेषों में अंतर को समझने और सुलझाने में मदद करता है। इसमें बैंक द्वारा किए गए लेनदेन और व्यापारी द्वारा दर्ज किए गए लेनदेन के बीच के सभी अंतरों को समायोजित किया जाता है, ताकि दोनों शेषों को मिलाया जा सके।
🎯 Exam Tip: बैंक समाधान विवरण तैयार करते समय, आपको रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अंतर के कारणों को सही ढंग से पहचानना और समायोजित करना सीखना होगा, क्योंकि यह लेखांकन का एक महत्वपूर्ण कौशल है।
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