NCERT Solutions for Class 10 Commerce: Chapter 14 बैंक जन्म परिभाषा कार्य एवम महत्त्व
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Practice Class 10 Commerce Solutions: Chapter 14 बैंक जन्म परिभाषा कार्य एवम महत्त्व
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बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. भारत में देशी बैंकर्स के कार्य हैं
(a) जमा स्वीकार करना
(b) ऋण देना
(c) हुण्डियों का व्यवसाय करना
(d) ये सभी
Answer: (d) ये सभी
In simple words: देशी बैंकर्स कई वित्तीय कार्य करते हैं, जिनमें जमा लेना, ऋण देना और हुण्डियों का व्यापार करना शामिल है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहयोग मिलता है।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स के बहुमुखी कार्यों को पहचानना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी ग्रामीण वित्तीय प्रणाली में भूमिका को दर्शाता है।
Question 2. देशी बैंकर्स पर नियन्त्रण होता है
(a) केन्द्रीय सरकार का
(b) भारतीय रिज़र्व बैंक का
(c) भारतीय स्टेट बैंक का
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (d) इनमें से कोई नहीं
In simple words: देशी बैंकर्स किसी भी सरकारी निकाय जैसे केन्द्रीय सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक, या भारतीय स्टेट बैंक के प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह समझना कि देशी बैंकर्स अनियंत्रित हैं, उनकी कार्यप्रणाली और ग्रामीण क्षेत्रों में उनके प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. देशी बैंकर्स का कार्यक्षेत्र केवल शहरों/गाँवों तक ही सीमित रहता है। उत्तरः गाँवों तक
Answer: गाँवों तक
In simple words: देशी बैंकर्स मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ प्रदान करते हैं, शहरों में उनकी पहुँच सीमित होती है।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स का कार्यक्षेत्र उनकी ग्रामीण जड़ता और पहुँच को दर्शाता है।
Question 2. क्या देशी बैंकर्स की ब्याज दर ऊँची होती है? उत्तरः हाँ
Answer: हाँ
In simple words: देशी बैंकर्स द्वारा वसूले जाने वाले ऋण पर ब्याज दर अक्सर आधुनिक बैंकों की तुलना में अधिक होती है।
🎯 Exam Tip: उच्च ब्याज दर देशी बैंकर्स के शोषणकारी पहलू को उजागर करती है, जो ऋणियों के लिए एक महत्वपूर्ण विचारणीय बिंदु है।
Question 3. सभी देशी बैंकर्स की कार्यप्रणाली समान होती है/भिन्न-भिन्न होती है। उत्तरः भिन्न-भिन्न होती है
Answer: भिन्न-भिन्न होती है
In simple words: देशी बैंकर्स एक संगठित प्रणाली के तहत काम नहीं करते हैं, बल्कि उनकी कार्यप्रणाली व्यक्तिगत और स्थानीय कारकों के आधार पर भिन्न होती है।
🎯 Exam Tip: उनकी कार्यप्रणाली में भिन्नता उनकी अनियमित प्रकृति और स्थानीय अनुकूलनशीलता को दर्शाती है।
Question 4. क्या देशी बैंकर्स के पास पूँजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती है? उत्तरः नहीं
Answer: नहीं
In simple words: देशी बैंकर्स के पास अक्सर पर्याप्त पूँजी का अभाव होता है, जिससे वे बड़े पैमाने पर या दीर्घकालिक ऋण प्रदान करने में सक्षम नहीं होते।
🎯 Exam Tip: पूँजी की कमी देशी बैंकर्स की सीमा को दर्शाती है, विशेष रूप से बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए।
Question 5. देशी बैंकर्स भारतीय रिज़र्व बैंक के नियन्त्रण में हैं, नहीं हैं। उत्तरः नहीं हैं
Answer: नहीं हैं
In simple words: देशी बैंकर्स भारतीय रिज़र्व बैंक के नियामक दायरे से बाहर काम करते हैं, जिसका अर्थ है कि वे केंद्रीय बैंक के नियमों और पर्यवेक्षण का पालन नहीं करते हैं।
🎯 Exam Tip: यह तथ्य कि वे RBI के नियंत्रण में नहीं हैं, उनकी स्वायत्तता और विनियमन की कमी को दर्शाता है।
Question 6. क्या भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स का महत्त्वपूर्ण स्थान है? उत्तरः हाँ
Answer: हाँ
In simple words: देशी बैंकर्स भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण वित्तीय भूमिका निभाते हैं, खासकर उन जगहों पर जहाँ आधुनिक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच कम है।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स की भूमिका उनकी पहुँच और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने की क्षमता के कारण महत्वपूर्ण है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. देशी बैंकर्स से क्या आशय है?
Answer: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। ये बैंकर्स किसानों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन तथा दीर्घकालीन ऋण देते हैं। देशी बैंकरों को भारत में अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न नामों से जाना जाता है।
In simple words: देशी बैंकर्स वे व्यक्ति या फर्म हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनकी तत्काल, मध्यम और लंबी अवधि की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ऋण प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स की परिभाषा उनकी ऋण प्रदान करने की भूमिका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनके महत्व पर केंद्रित होनी चाहिए।
Question 2. देशी बैंकर्स की चार विशेषताएँ लिखिए।
Answer: देशी बैंकर्स की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(i) सरल कार्य-प्रणाली देशी बैंकर्स के कार्य करने का तरीका सरल होता है। इससे ऋण लेने की प्रक्रिया भी सरलता व शीघ्रता से पूर्ण हो जाती है।
(ii) भारतीय बहीखाता प्रणाली देशी बैंकर्स अपने हिसाब-किताब का लेखा भारतीय बहीखाता प्रणाली के अनुसार करते हैं।
(iii) गोपनीयता देशी बैंकर्स अपने ग्राहकों के लेन-देन के विवरणों की गोपनीयता बनाए रखते हैं, जिससे इनकी प्रतिष्ठा बनी रहती है।
(iv) सीमित क्षेत्र इनके कार्य करने का क्षेत्र प्रायः गाँवों तक ही सीमित होता है।
In simple words: देशी बैंकर्स की कार्यप्रणाली सरल, लेखा-जोखा भारतीय पद्धति में, ग्राहकों के लेन-देन में गोपनीयता और उनका कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से गाँवों तक सीमित होता है।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स की मुख्य विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे उनकी विशिष्ट कार्यशैली और पहुँच को परिभाषित करते हैं।
Question 3. देशी बैंकर्स के दो कार्य बताइए।
Answer: देशी बैंकर्स के दो कार्य निम्नलिखित हैं-
(i) देशी बैंकर्स आवश्यकतानुसार जमाएँ स्वीकार करते हैं।
(ii) देशी बैंकर्स ऋण प्रदान करते हैं।
In simple words: देशी बैंकर्स का मुख्य कार्य लोगों से जमाएँ स्वीकार करना और उन्हें उनकी विभिन्न जरूरतों के लिए ऋण देना है।
🎯 Exam Tip: जमा स्वीकार करना और ऋण प्रदान करना देशी बैंकर्स के दो मौलिक कार्य हैं, जो उनकी वित्तीय भूमिका को रेखांकित करते हैं।
Question 4. देशी बैंकरों के चार गुण लिखिए।
Answer: देशी बैंकरों के गुण निम्नलिखित हैं-
(i) बिना जमानत के ऋण प्रदान करना।
(ii) उचित बीज एवं यन्त्रों की आपूर्ति करना।
(iii) अनुत्पादक कार्यों हेतु ऋण प्रदान करना।
(iv) सरल विधि द्वारा लेन-देन ।
In simple words: देशी बैंकर्स बिना जमानत के भी ऋण देते हैं, बीज व उपकरणों की आपूर्ति करते हैं, व्यक्तिगत अनुत्पादक जरूरतों के लिए भी ऋण प्रदान करते हैं, और उनकी लेन-देन प्रक्रिया सरल होती है।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकरों के गुण उनकी ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रियता के कारणों को उजागर करते हैं, खासकर उनकी लचीली नीतियों के कारण।
Question 5. देशी बैंकर्स के चार दोष लिखिए।
Answer: देशी बैंकर्स के चार दोष निम्नलिखित हैं
(i) इनके द्वारा ऋणियों का शोषण किया जाता है।
(ii) ये धोखापूर्ण कार्य-प्रणाली से कार्य करते हैं।
(iii) इनकी कार्यप्रणाली दोषपूर्ण होती है।
(iv) इनके पास पूँजी का अभाव रहता है।
In simple words: देशी बैंकर्स अक्सर ऋणियों का शोषण करते हैं, उनकी कार्यप्रणाली में धोखेबाजी और दोषपूर्णता देखी जाती है, और उनके पास पर्याप्त पूँजी का अभाव होता है।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स के दोषों को समझना महत्वपूर्ण है ताकि उनकी कमियों और ग्रामीण वित्त पर उनके नकारात्मक प्रभावों को पहचाना जा सके।
लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
Question 1. देशी बैंकर्स क्या हैं? इनके दो दोषों का वर्णन कीजिए।
Answer: देशी बैंकर्स से आशय भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। ये बैंकर्स किसानों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन तथा दीर्घकालीन ऋण प्रदान करते हैं। देशी बैंकर्स को भारत में अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न नामों से जाना जाता है।
भारतीय केन्द्रीय बैंक जाँच समिति (1929) के अनुसार, “देशी बैंकर वह व्यक्ति या व्यक्तिगत फर्म है, जो जमाओं को स्वीकार करती है, हुण्डियों में व्यापार करती है अथवा ऋण देने का कार्य करती है।”
भारतीय बैंकिंग आयोग (1972) के अनुसार, “वे व्यक्ति अथवा फर्म, जो निक्षेप स्वीकार करते हैं अथवा अपने व्यवसाय के लिए बैंक साख पर निर्भर करते हैं, संगठित मुद्रा बाजार से निकट का सम्बन्ध रखते हैं तथा वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन एवं वितरण के लिए अल्पकालीन साख-पत्रों की व्यवसाय करते हैं, 'देशी बैंकर' कहलाते हैं।”
देशी बैंकर्स के दोष देशी बैंकर्स के दो दोष निम्नलिखित हैं-
(i) बैंकिंग सिद्धान्तों की उपेक्षा देशी बैंकर्स बैंकिंग सिद्धान्तों की अवहेलना करते हैं। ये बिना जमानत के ही ऋण प्रदान कर देते हैं।
(ii) ऋणियों का शोषण इनके द्वारा वसूल की जाने वाली ब्याज की दर अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिससे ऋणियों का शोषण होता है।
In simple words: देशी बैंकर्स ग्रामीण भारत में किसानों को अल्प, मध्य और दीर्घकालिक ऋण प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण वित्तीय मध्यस्थ हैं, लेकिन वे आधुनिक बैंकिंग सिद्धांतों की उपेक्षा करते हैं और अक्सर उच्च ब्याज दरों के माध्यम से ऋणियों का शोषण करते हैं।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स की परिभाषा के साथ उनके प्रमुख दोषों को उजागर करना उनकी समग्र भूमिका के आलोचनात्मक विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. देशी बैंकर्स के कार्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: देशी बैंकर्स के कार्य देशी बैंकर्स के कार्य निम्नलिखित हैं-
(i) जमा स्वीकार करना देशी बैंकर्स आवश्यकता के अनुसार जनता से जमा के रूप में धन स्वीकार करते हैं। ये इन जमाओं पर 9% से 15% तक ब्याज भी देते हैं। इस जमा राशि का भुगतान ग्राहक को माँगने पर तुरन्त कर दिया जाता है।
(ii) ऋण प्रदान करना देशी बैंकर्स का मुख्य कार्य ऋण प्रदान करना होता है। ये किसानों, कारीगरों, मजदूरों, व्यापारियों, आदि को प्रत्येक प्रकार की जमानत पर ऋण देते हैं। ये उत्पादन कार्यों के साथ उपभोग कार्यों के लिए भी ऋण देते हैं। ये प्रतिज्ञा-पत्रों के आधार पर भी ऋण उपलब्ध करवाते हैं। इनकी ब्याज की दर जमानत के आधार पर तय की जाती है। इनकी ब्याज की दर 14% से 50% तक हो सकती है।
(iii) हुण्डियों का व्यवसाय करना देशी बैंकर्स हुण्डियों को खरीदने, बेचने व भुनाने की कार्य भी करते हैं। जिन देशी बैंकर्स की बाजार में अधिक प्रतिष्ठा होती है, उनकी हुण्डियाँ बाजार में अधिक बिकती हैं।
(iv) अन्य कार्य करना ये उपरोक्त कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्य भी करते हैं
• आयात-निर्यात में सहायता ये आयात-निर्यात के माल को बन्दरगाहों से देश में लाने तथा ले जाने के व्यय वहन करते हैं।
• धन हस्तान्तरण में सुविधा एक स्थान से दूसरे स्थान पर धन भेजने में देशी बैंकर्स सहायक होते हैं।
• परिकल्पना व्यापार करना ये परिकल्पना व्यापार अर्थात् सट्टा व्यापार करना; जैसे-सोना, चाँदी एवं शेयर्स, आदि में भी अपना धन लगाते हैं।
• अन्य वस्तुओं में व्यापार करना देशी बैंकर्स अनाज, घी, आदि कई वस्तुओं का व्यापार भी करते हैं।
In simple words: देशी बैंकर्स जनता से जमाएँ स्वीकार करते हैं, किसानों और व्यापारियों को ऋण प्रदान करते हैं, हुण्डियों का व्यापार करते हैं, और आयात-निर्यात में सहायता, धन हस्तांतरण, सट्टा व्यापार और अन्य वस्तुओं में व्यापार जैसे कई सहायक कार्य भी करते हैं।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स के कार्यों का विस्तृत वर्णन उनकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बहुमुखी भूमिका को दर्शाता है, जिसमें वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों सेवाएँ शामिल हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)
Question 1. देशी बैंकर्स के कार्यों, गुण एवं दोषों का वर्णन कीजिए ।
Answer: देशी बैंकर्स के कार्य
देशी बैंकर्स के कार्य निम्नलिखित हैं-
(i) जमा स्वीकार करना देशी बैंकर्स आवश्यकता के अनुसार जनता से जमा के रूप में धन स्वीकार करते हैं। ये इन जमाओं पर 9% से 15% तक ब्याज भी देते हैं। इस जमा राशि का भुगतान ग्राहक को माँगने पर तुरन्त कर दिया जाता है।
(ii) ऋण प्रदान करना देशी बैंकर्स का मुख्य कार्य ऋण प्रदान करना होता है। ये किसानों, कारीगरों, मजदूरों, व्यापारियों, आदि को प्रत्येक प्रकार की जमानत पर ऋण देते हैं। ये उत्पादन कार्यों के साथ उपभोग कार्यों के लिए भी ऋण देते हैं। ये प्रतिज्ञा-पत्रों के आधार पर भी ऋण उपलब्ध करवाते हैं। इनकी ब्याज की दर जमानत के आधार पर तय की जाती है। इनकी ब्याज की दर 14% से 50% तक हो सकती है।
(iii) हुण्डियों का व्यवसाय करना देशी बैंकर्स हुण्डियों को खरीदने, बेचने व भुनाने की कार्य भी करते हैं। जिन देशी बैंकर्स की बाजार में अधिक प्रतिष्ठा होती है, उनकी हुण्डियाँ बाजार में अधिक बिकती हैं।
(iv) अन्य कार्य करना ये उपरोक्त कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्य भी करते हैं
• आयात-निर्यात में सहायता ये आयात-निर्यात के माल को बन्दरगाहों से देश में लाने तथा ले जाने के व्यय वहन करते हैं।
• धन हस्तान्तरण में सुविधा एक स्थान से दूसरे स्थान पर धन भेजने में देशी बैंकर्स सहायक होते हैं।
• परिकल्पना व्यापार करना ये परिकल्पना व्यापार अर्थात् सट्टा व्यापार करना; जैसे-सोना, चाँदी एवं शेयर्स, आदि में भी अपना धन लगाते हैं।
• अन्य वस्तुओं में व्यापार करना देशी बैंकर्स अनाज, घी, आदि कई वस्तुओं का व्यापार भी करते हैं।
देशी बैंकर्स के गुण एवं दोष
देशी बैंकर्स के गुण देशी बैंकर्स के प्रमुख गुण निम्नलिखित होते हैं-
(i) बिना जमानत के ऋण प्रदान करना ये किसानों, कारीगरों, व्यापारियों, आदि को व्यक्तिगत जमानत के आधार पर ऋण प्रदान करते हैं। ये उन्हें अपने पास किसी वस्तु को धरोहर के रूप में रखने के लिए बाध्य नहीं करते हैं।
(ii) कार्य-प्रणाली सरल और लचीली इनकी कार्यप्रणाली सरल और लचीली होती है, जिससे अशिक्षित व्यक्ति भी इससे सरलतापूर्वक लेन-देन कर सकता है।
(iii) बीज, खाद व यन्त्र, आदि की सुविधा देना देशी बैंकर्स किसानों के लिए बीज, खाद व कृषि यन्त्रों, आदि को उचित मूल्य पर उपलब्ध करवाते हैं व उन्हें आवश्यक ऋण भी प्रदान करते हैं।
(iv) गोपनीयता इनके द्वारा किए गए लेन-देन को गोपनीय रखा जाता है।
(v) अनुत्पादक कार्यों के लिए ऋण देना देशी बैंकर्स निर्धन, गरीब किसानों व कारीगरों को उनके सामाजिक उत्सवों; जैसे-विवाह, मुण्डन, श्राद्ध, मृत्यु भोज, आदि अनुत्पादक कार्यों के लिए भी ऋण प्रदान करते हैं।
(vi) कुटीर उद्योगों के लिए ऋण ये कुटीर उद्योगों; जैसे-मछलीपालन, मुर्गीपालन, आदि के लिए भी ऋण प्रदान करके इनके विकास में सहायक होते हैं।
(vii) किस्तों में भुगतान स्वीकार करना देशी बैंकर्स ऋण का भुगतान ऋणी की सुविधानुसार सरल किस्तों में प्राप्त करते हैं।
(viii) माल का क्रय करना ये किसानों की फसल उचित मूल्य पर क्रय करके उन्हें मण्डी या बाजार में जाने की परेशानी से बचाते हैं।
(ix) घरेलू उद्योगों को पूँजी प्रदान करना ये घरेलू उद्योगों को चलाने हेतु ऋण प्रदान करते हैं।
देशी बैंकर्स के दोष/कमियाँ देशी बैंकर्स के दोष/कमियाँ निम्नलिखित हैं
(i) बैंकिंग सिद्धान्तों की उपेक्षा देशी बैंकर्स बैंकिंग सिद्धान्तों की अवहेलना करते हैं। ये बिना जमानत के ही ऋण प्रदान कर देते हैं।
(ii) ऊँची ब्याज दर इनके द्वारा वसूल की जाने वाली ब्याज की दर अपेक्षाकृत अधिक एवं चक्रवृद्धि ब्याज दर होती है, जिससे ऋणियों का शोषण होता है।
(iii) धोखापूर्ण कार्य-प्रणाली इस कार्य-पद्धति में धोखेबाजी की सम्भावना अधिक रहती है, क्योंकि इसमें लेन-देन करने वाले सभी ग्राहक अशिक्षित होते हैं। देशी बैंकर्स ऋण देते समय अनुचित व्यवहार करते हैं।
(iv) दोषपूर्ण कार्य-प्रणाली यह प्रणाली शोषण एवं धोखेबाजी के कार्यों से भरपूर है। इसमें ऋण लेने वालों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है।
(v) पूँजी का अभाव इनके पास पर्याप्त पूँजी का अभाव पाया जाता है, जिससे किसानों को उनकी आवश्यकता के समय पर्याप्त मात्रा में ऋण उपलब्ध नहीं हो पाता है।
(vi) सामाजिक बुराइयों को बढ़ावा ये उपभोग कार्यों के लिए भी ऋण देते हैं, जिससे लोगों में अपव्ययिता व फिजूलखर्ची में वृद्धि होती है। अतः इससे सामाजिक बुराइयों को भी बढ़ावा मिलता है।
(vii) मजदूरी लेना ये किसानों व अन्य ऋणियों से विवाह आदि के अवसर पर मजदूरी या बेगार भी लेते हैं।
(viii) परिकल्पना अथवा सट्टे का कार्य करना इनके द्वारा सट्टे का कार्य करने से इनकी बैंकिंग कार्यक्षमता में कमी होती है।
(ix) खातों का अप्रकाशन देशी बैंकर्स खातों का नियमित रूप से अंकेक्षण नहीं करते हैं व खातों की सूचनाओं का प्रकाशन भी नहीं करते हैं, जिससे इनकी आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है।
(x) परम्परागत कार्य-प्रणाली देशी बैंकर्स द्वारा परम्परागत आधार पर कार्य किया जाता है, जिससे इनका निरीक्षण भी नहीं किया जा सकता है।
(xi) जमाओं को प्रोत्साहन प्रदान न करना ये लोगों की बचत को जमा कराने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते हैं।
(xii) सरकारी अनियन्त्रण देशी बैंकर्स पर सरकारी नियन्त्रण नहीं होने के कारण ये मनमानी करते हैं।
In simple words: देशी बैंकर्स ग्रामीण भारत में जमा स्वीकार करने, ऋण देने, हुण्डियों का व्यापार करने और आयात-निर्यात जैसी कई सेवाएँ प्रदान करते हैं। उनके गुणों में बिना जमानत के ऋण, सरल प्रक्रिया, और गोपनीयता शामिल है, लेकिन उनके दोषों में उच्च ब्याज दर, शोषणकारी प्रथाएँ, पूंजी की कमी, और सरकारी नियंत्रण का अभाव प्रमुख हैं।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स के कार्यों, गुणों और दोषों का एक संतुलित विश्लेषण उनकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जटिल भूमिका को दर्शाता है, जिसमें उनकी उपयोगिता और कमियाँ दोनों शामिल हैं।
Question 2. देशी बैंकर्स कौन होते हैं? भारत में देशी बैंकरों के गुण व दोषों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: देशी बैंकर्स से आशय देशी बैंकर्स से आशय भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। ये बैंकर्स किसानों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन तथा दीर्घकालीन ऋण प्रदान करते हैं। देशी बैंकर्स को भारत में अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न नामों से जाना जाता है।
भारतीय केन्द्रीय बैंक जाँच समिति (1929) के अनुसार, “देशी बैंकर वह व्यक्ति या व्यक्तिगत फर्म है, जो जमाओं को स्वीकार करती है, हुण्डियों में व्यापार करती है अथवा ऋण देने का कार्य करती है।”
भारतीय बैंकिंग आयोग (1972) के अनुसार, “वे व्यक्ति अथवा फर्म, जो निक्षेप स्वीकार करते हैं अथवा अपने व्यवसाय के लिए बैंक साख पर निर्भर करते हैं, संगठित मुद्रा बाजार से निकट का सम्बन्ध रखते हैं तथा वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन एवं वितरण के लिए अल्पकालीन साख-पत्रों की व्यवसाय करते हैं, 'देशी बैंकर' कहलाते हैं।”
देशी बैंकर्स के दोष देशी बैंकर्स के दो दोष निम्नलिखित हैं-
(i) बैंकिंग सिद्धान्तों की उपेक्षा देशी बैंकर्स बैंकिंग सिद्धान्तों की अवहेलना करते हैं। ये बिना जमानत के ही ऋण प्रदान कर देते हैं।
(ii) ऋणियों का शोषण इनके द्वारा वसूल की जाने वाली ब्याज की दर अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिससे ऋणियों का शोषण होता है।
देशी बैंकर्स के गुण देशी बैंकर्स के प्रमुख गुण निम्नलिखित होते हैं-
(i) बिना जमानत के ऋण प्रदान करना ये किसानों, कारीगरों, व्यापारियों, आदि को व्यक्तिगत जमानत के आधार पर ऋण प्रदान करते हैं। ये उन्हें अपने पास किसी वस्तु को धरोहर के रूप में रखने के लिए बाध्य नहीं करते हैं।
(ii) कार्य-प्रणाली सरल और लचीली इनकी कार्यप्रणाली सरल और लचीली होती है, जिससे अशिक्षित व्यक्ति भी इससे सरलतापूर्वक लेन-देन कर सकता है।
In simple words: देशी बैंकर्स ग्रामीण भारत में अल्पकालीन, मध्यकालीन और दीर्घकालीन ऋण प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण वित्तीय मध्यस्थ हैं, जिनकी मुख्य विशेषताएँ बिना जमानत के ऋण और सरल कार्यप्रणाली हैं, लेकिन वे आधुनिक बैंकिंग सिद्धांतों की उपेक्षा करते हैं और ऋणियों का शोषण कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स की परिभाषा के साथ उनके संक्षिप्त गुण और दोषों का वर्णन उनकी ग्रामीण वित्तीय प्रणाली में उनकी स्थिति और प्रभाव को स्पष्ट करता है।
Question 3. देशी बैंकर्स से क्या आशय है? देशी बैंकर्स व आधुनिक बैंकर्स में क्या अन्तर है? देशी बैंकर्स के महत्त्व का भी वर्णन कीजिए।
Answer: देशी बैंकर्स से आशय
देशी बैंकर्स से आशय भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। ये बैंकर्स किसानों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन तथा दीर्घकालीन ऋण प्रदान करते हैं। देशी बैंकर्स को भारत में अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न नामों से जाना जाता है।
भारतीय केन्द्रीय बैंक जाँच समिति (1929) के अनुसार, “देशी बैंकर वह व्यक्ति या व्यक्तिगत फर्म है, जो जमाओं को स्वीकार करती है, हुण्डियों में व्यापार करती है अथवा ऋण देने का कार्य करती है।”
भारतीय बैंकिंग आयोग (1972) के अनुसार, “वे व्यक्ति अथवा फर्म, जो निक्षेप स्वीकार करते हैं अथवा अपने व्यवसाय के लिए बैंक साख पर निर्भर करते हैं, संगठित मुद्रा बाजार से निकट का सम्बन्ध रखते हैं तथा वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन एवं वितरण के लिए अल्पकालीन साख-पत्रों की व्यवसाय करते हैं, 'देशी बैंकर' कहलाते हैं।”
देशी बैंकर्स एवं आधुनिक बैंकर्स में अन्तर
| अन्तर का आधार | देशी बैंकर्स | आधुनिक बैंकर्स |
| कार्य का समय | ये हर समय कार्य करते हैं। | इनके कार्य करने का निश्चित समय होता है। |
| पूँजी के स्रोत | ये स्वयं की पूँजी से कार्य करते हैं। | ये जनता से जमा पर धन प्राप्त करके कार्य करते हैं। |
| हिसाब-किताब का लेखा | ये अपने हिसाब-किताब का लेखा देशी तरीके से करते हैं। | ये अपने हिसाब का लेखांकन अंग्रेजी तरीके से करते हैं। |
| बिलों को भुनाना | ये बिलों को बट्टे पर नहीं भुनाते हैं। | ये बिलों को बट्टे पर भुनाते हैं। |
| चैक का प्रयोग | इनमें चैक का प्रयोग नहीं किया जाता है। | इनमें चैक का प्रयोग किया जाता है। |
| व्यवसाय | ये बैंकिंग व्यवसाय के साथ अन्य व्यवसाय भी करते हैं। | ये सिर्फ बैंकिंग व्यवसाय करते हैं। |
| भारतीय रिज़र्व बैंक का नियन्त्रण | इन पर भारतीय रिज़र्व बैंक का किसी प्रकार का नियन्त्रण नहीं होता है। | इन पर भारतीय रिज़र्व बैंक का नियन्त्रण होता है। |
| शाखाएँ | इनकी शाखाएँ नहीं होती हैं। | इनकी शाखाएँ विभिन्न स्थानों पर होती हैं। |
| ब्याज दर | इनकी ब्याज दर ऊँची होती है। | इनकी ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होती है। |
| भारतीय रिज़र्व बैंक की सदस्यता | ये भारतीय रिज़र्व बैंक के सदस्य नहीं होते हैं। | ये भारतीय रिज़र्व बैंक के सदस्य होते हैं। |
| ऋण की अवधि | ये अल्पकालीन व दीर्घकालीन दोनों प्रकार के ऋण प्रदान करते हैं। | ये अल्पकालीन ऋण ही देते हैं। |
| जमा की रसीद | ये रुपये जमा कराने की रसीद नहीं देते हैं। | ये रुपये जमा कराने की रसीद देते हैं। |
| धरोहर | ये बिना धरोहर लिए ऋण प्रदान कर देते हैं। | ये धरोहर के बिना ऋण प्रदान नहीं करते हैं। |
| पूँजी की मात्रा | इनकी पूँजी सीमित मात्रा में होती है। | इनकी पूँजी देशी बैंकर्स की तुलना में अधिक होती है। |
| निर्यात व्यापार में सहायता | ये निर्यात व्यापार में सहायता नहीं करते हैं। | ये निर्यात व्यापार का वित्त-प्रबन्धन करते हैं। |
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स का महत्त्व देशी बैंकर्स की भूमिका को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया गया है
(i) कृषि विकास में सहायक देशी बैंकर्स मुख्य रूप से किसानों को ऋण प्रदान करते हैं। इस ऋण के माध्यम से किसान अपनी आवश्यकतानुसार वस्तुओं को सरलता से प्राप्त कर लेते हैं, जिससे कृषि विकास सुलभ हो जाता है।
(ii) जमाएँ स्वीकार करना ये बैंकर्स जनता की जमाओं को भी स्वीकार करते हैं। ये किसानों की बचतों को जमा करके उन्हें सुरक्षित रखते हैं। साथ ही ये इन जमाओं पर ब्याज भी देते हैं।
(iii) सरल कार्य-प्रणाली देशी बैंकर्स की कार्यप्रणाली को एक साधारण व्यक्ति भी समझ सकता है। इससे किसानों को ऋण लेने में शीघ्रता व सुलभता प्राप्त होती है।
(iv) आपत्तिकाल में सहायक देशी बैंकर्स किसानों की आवश्यकता के समय हमेशा ऋण देने को तत्पर रहते हैं। इससे किसानों के आवश्यक कार्य समय पर पूर्ण हो जाते हैं।
(v) उपभोग हेतु ऋण की सुविधाएँ देशी बैंकर्स किसानों को दैनिक जीवन व सामाजिक कार्यों हेतु भी ऋण की सुविधा प्रदान करते हैं।
(vi) उदार ऋण नीति देशी बैंकर्स किसानों को ऋण प्रदान करने में अनावश्यक औपचारिकताएँ नहीं करते हैं। ये किसानों को बिना जमानत के ऋण प्रदान कर देते हैं।
(vii) आधुनिक बैंकों की सुविधाएँ ये बैंकर्स अन्य व्यापारिक बैंकों से भी लेन-देन का कार्य करते हैं, जिससे इनके ग्राहकों को आधुनिक बैंकों की सुविधाएँ सरलता से प्राप्त हो जाती हैं।
(viii) कुटीर उद्योगों को सहायता देशी बैंकर्स कुटीर उद्योगों को संचालित करने व उनका विकास करने के लिए भी ऋण प्रदान करते हैं।
In simple words: देशी बैंकर्स ग्रामीण भारत में अल्पकालीन, मध्यकालीन और दीर्घकालीन ऋण प्रदान करते हैं। वे आधुनिक बैंकों से भिन्न होते हैं क्योंकि वे हर समय कार्य करते हैं, अपनी पूँजी पर निर्भर रहते हैं, देशी बहीखाता प्रणाली का उपयोग करते हैं, और RBI के नियंत्रण में नहीं होते। उनका महत्व कृषि विकास, जमा स्वीकार करने, सरल ऋण प्रक्रियाओं और आपातकालीन सहायता में निहित है।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकर्स की परिभाषा, आधुनिक बैंकों के साथ उनके अंतर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनके महत्व को विस्तार से समझाना, उनकी भूमिका का व्यापक मूल्यांकन प्रदान करता है।
Question 4. भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स की भूमिका का परीक्षण कीजिए। अथवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स की भूमिका का वर्णन कीजिए।
Answer: भारत एक कृषिप्रधान देश है। भारत के अधिकतर किसान गरीब होते हैं। यहाँ के किसान वित्त व्यवस्था के लिए साहूकारों पर निर्भर रहते हैं। भारत में प्राचीनकाल से ही उधार लेन-देन की प्रथा प्रचलन में थी। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक बैंकों का विकास नहीं होने के कारण किसानों को देशी बैंकर्स पर ही निर्भर रहना पड़ता है। भारत में कृषि साख की 20% पूर्ति देशी बैंकरों द्वारा की जाती है। ये बैंकर्स किसानों को बीज, खाद, कृषि उपकरण, आदि को खरीदने के लिए ऋण प्रदान करते हैं। ये बैंकर्स या संस्था किसानों को उनकी आवश्यकतानुसार समय-समय पर ऋण उपलब्ध करवाते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स की भूमिका (महत्त्व)
(i) कृषि विकास में सहायक देशी बैंकर्स मुख्य रूप से किसानों को ऋण प्रदान करते हैं। इस ऋण के माध्यम से किसान अपनी आवश्यकतानुसार वस्तुओं को सरलता से प्राप्त कर लेते हैं, जिससे कृषि विकास सुलभ हो जाता है।
(ii) जमाएँ स्वीकार करना ये बैंकर्स जनता की जमाओं को भी स्वीकार करते हैं। ये किसानों की बचतों को जमा करके उन्हें सुरक्षित रखते हैं। साथ ही ये इन जमाओं पर ब्याज भी देते हैं।
(iii) सरल कार्य-प्रणाली देशी बैंकर्स की कार्यप्रणाली को एक साधारण व्यक्ति भी समझ सकता है। इससे किसानों को ऋण लेने में शीघ्रता व सुलभता प्राप्त होती है।
(iv) आपत्तिकाल में सहायक देशी बैंकर्स किसानों की आवश्यकता के समय हमेशा ऋण देने को तत्पर रहते हैं। इससे किसानों के आवश्यक कार्य समय पर पूर्ण हो जाते हैं।
(v) उपभोग हेतु ऋण की सुविधाएँ देशी बैंकर्स किसानों को दैनिक जीवन व सामाजिक कार्यों हेतु भी ऋण की सुविधा प्रदान करते हैं।
(vi) उदार ऋण नीति देशी बैंकर्स किसानों को ऋण प्रदान करने में अनावश्यक औपचारिकताएँ नहीं करते हैं। ये किसानों को बिना जमानत के ऋण प्रदान कर देते हैं।
(vii) आधुनिक बैंकों की सुविधाएँ ये बैंकर्स अन्य व्यापारिक बैंकों से भी लेन-देन का कार्य करते हैं, जिससे इनके ग्राहकों को आधुनिक बैंकों की सुविधाएँ सरलता से प्राप्त हो जाती हैं।
(viii) कुटीर उद्योगों को सहायता देशी बैंकर्स कुटीर उद्योगों को संचालित करने व उनका विकास करने के लिए भी ऋण प्रदान करते हैं।
In simple words: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे किसानों को बीज, खाद, कृषि उपकरण खरीदने और उनकी अन्य जरूरतों के लिए ऋण प्रदान करके कृषि विकास में सहायता करते हैं। वे जमा स्वीकार करते हैं, उनकी कार्यप्रणाली सरल होती है, और वे आपातकाल में भी ऋण उपलब्ध कराकर ग्रामीण लोगों की मदद करते हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ आधुनिक बैंकों की पहुँच सीमित है।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स की भूमिका का विश्लेषण करते समय, उनकी पहुंच, लचीली ऋण नीति और विभिन्न प्रकार की सहायता पर जोर देना महत्वपूर्ण है, साथ ही यह भी बताना कि वे कुल कृषि साख का 20% पूरा करते हैं।
Question 5. 'देशी बैंकर' पर एक लेख लिखिए।
Answer: देशी बैंकर्स
देशी बैंकर्स से आशय भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। ये बैंकर्स किसानों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन तथा दीर्घकालीन ऋण प्रदान करते हैं। देशी बैंकर्स को भारत में अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न नामों से जाना जाता है।
भारतीय केन्द्रीय बैंक जाँच समिति (1929) के अनुसार, “देशी बैंकर वह व्यक्ति या व्यक्तिगत फर्म है, जो जमाओं को स्वीकार करती है, हुण्डियों में व्यापार करती है अथवा ऋण देने का कार्य करती है।”
भारतीय बैंकिंग आयोग (1972) के अनुसार, “वे व्यक्ति अथवा फर्म, जो निक्षेप स्वीकार करते हैं अथवा अपने व्यवसाय के लिए बैंक साख पर निर्भर करते हैं, संगठित मुद्रा बाजार से निकट का सम्बन्ध रखते हैं तथा वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन एवं वितरण के लिए अल्पकालीन साख-पत्रों की व्यवसाय करते हैं, 'देशी बैंकर' कहलाते हैं।"
देशी बैंकर्स के दोष देशी बैंकर्स के दो दोष निम्नलिखित हैं-
(i) बैंकिंग सिद्धान्तों की उपेक्षा देशी बैंकर्स बैंकिंग सिद्धान्तों की अवहेलना करते हैं। ये बिना जमानत के ही ऋण प्रदान कर देते हैं।
(ii) ऋणियों का शोषण इनके द्वारा वसूल की जाने वाली ब्याज की दर अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिससे ऋणियों का शोषण होता है।
देशी बैंकर्स के कार्यदेशी बैंकर्स के कार्य निम्नलिखित हैं-
(i) जमा स्वीकार करना देशी बैंकर्स आवश्यकता के अनुसार जनता से जमा के रूप में धन स्वीकार करते हैं। ये इन जमाओं पर 9% से 15% तक ब्याज भी देते हैं। इस जमा राशि का भुगतान ग्राहक को माँगने पर तुरन्त कर दिया जाता है।
(ii) ऋण प्रदान करना देशी बैंकर्स का मुख्य कार्य ऋण प्रदान करना होता है। ये किसानों, कारीगरों, मजदूरों, व्यापारियों, आदि को प्रत्येक प्रकार की जमानत पर ऋण देते हैं। ये उत्पादन कार्यों के साथ उपभोग कार्यों के लिए भी ऋण देते हैं। ये प्रतिज्ञा-पत्रों के आधार पर भी ऋण उपलब्ध करवाते हैं। इनकी ब्याज की दर जमानत के आधार पर तय की जाती है। इनकी ब्याज की दर 14% से 50% तक हो सकती है।
(iii) हुण्डियों का व्यवसाय करना देशी बैंकर्स हुण्डियों को खरीदने, बेचने व भुनाने की कार्य भी करते हैं। जिन देशी बैंकर्स की बाजार में अधिक प्रतिष्ठा होती है, उनकी हुण्डियाँ बाजार में अधिक बिकती हैं।
(iv) अन्य कार्य करना ये उपरोक्त कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्य भी करते हैं
• आयात-निर्यात में सहायता ये आयात-निर्यात के माल को बन्दरगाहों से देश में लाने तथा ले जाने के व्यय वहन करते हैं।
• धन हस्तान्तरण में सुविधा एक स्थान से दूसरे स्थान पर धन भेजने में देशी बैंकर्स सहायक होते हैं।
• परिकल्पना व्यापार करना ये परिकल्पना व्यापार अर्थात् सट्टा व्यापार करना; जैसे-सोना, चाँदी एवं शेयर्स, आदि में भी अपना धन लगाते हैं।
• अन्य वस्तुओं में व्यापार करना देशी बैंकर्स अनाज, घी, आदि कई वस्तुओं का व्यापार भी करते हैं।
देशी बैंकर्स के गुण व दोषदेशी बैंकर्स से आशय भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में देशी बैंकर्स का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। ये बैंकर्स किसानों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन तथा दीर्घकालीन ऋण प्रदान करते हैं। देशी बैंकर्स को भारत में अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न नामों से जाना जाता है।
भारतीय केन्द्रीय बैंक जाँच समिति (1929) के अनुसार, “देशी बैंकर वह व्यक्ति या व्यक्तिगत फर्म है, जो जमाओं को स्वीकार करती है, हुण्डियों में व्यापार करती है अथवा ऋण देने का कार्य करती है।”
भारतीय बैंकिंग आयोग (1972) के अनुसार, “वे व्यक्ति अथवा फर्म, जो निक्षेप स्वीकार करते हैं अथवा अपने व्यवसाय के लिए बैंक साख पर निर्भर करते हैं, संगठित मुद्रा बाजार से निकट का सम्बन्ध रखते हैं तथा वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन एवं वितरण के लिए अल्पकालीन साख-पत्रों की व्यवसाय करते हैं, 'देशी बैंकर' कहलाते हैं।"
देशी बैंकर्स के दोष देशी बैंकर्स के दो दोष निम्नलिखित हैं-
(i) बैंकिंग सिद्धान्तों की उपेक्षा देशी बैंकर्स बैंकिंग सिद्धान्तों की अवहेलना करते हैं। ये बिना जमानत के ही ऋण प्रदान कर देते हैं।
(ii) ऋणियों का शोषण इनके द्वारा वसूल की जाने वाली ब्याज की दर अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिससे ऋणियों का शोषण होता है।
देशी बैंकर्स के गुण देशी बैंकर्स के प्रमुख गुण निम्नलिखित होते हैं-
(i) बिना जमानत के ऋण प्रदान करना ये किसानों, कारीगरों, व्यापारियों, आदि को व्यक्तिगत जमानत के आधार पर ऋण प्रदान करते हैं। ये उन्हें अपने पास किसी वस्तु को धरोहर के रूप में रखने के लिए बाध्य नहीं करते हैं।
(ii) कार्य-प्रणाली सरल और लचीली इनकी कार्यप्रणाली सरल और लचीली होती है, जिससे अशिक्षित व्यक्ति भी इससे सरलतापूर्वक लेन-देन कर सकता है।
(iii) बीज, खाद व यन्त्र, आदि की सुविधा देना देशी बैंकर्स किसानों के लिए बीज, खाद व कृषि यन्त्रों, आदि को उचित मूल्य पर उपलब्ध करवाते हैं व उन्हें आवश्यक ऋण भी प्रदान करते हैं।
(iv) गोपनीयता इनके द्वारा किए गए लेन-देन को गोपनीय रखा जाता है।
(v) अनुत्पादक कार्यों के लिए ऋण देना देशी बैंकर्स निर्धन, गरीब किसानों व कारीगरों को उनके सामाजिक उत्सवों; जैसे-विवाह, मुण्डन, श्राद्ध, मृत्यु भोज, आदि अनुत्पादक कार्यों के लिए भी ऋण प्रदान करते हैं।
(vi) कुटीर उद्योगों के लिए ऋण ये कुटीर उद्योगों; जैसे-मछलीपालन, मुर्गीपालन, आदि के लिए भी ऋण प्रदान करके इनके विकास में सहायक होते हैं।
(vii) किस्तों में भुगतान स्वीकार करना देशी बैंकर्स ऋण का भुगतान ऋणी की सुविधानुसार सरल किस्तों में प्राप्त करते हैं।
(viii) माल का क्रय करना ये किसानों की फसल उचित मूल्य पर क्रय करके उन्हें मण्डी या बाजार में जाने की परेशानी से बचाते हैं।
(ix) घरेलू उद्योगों को पूँजी प्रदान करना ये घरेलू उद्योगों को चलाने हेतु ऋण प्रदान करते हैं।
देशी बैंकर्स के दोष/कमियाँ देशी बैंकर्स के दोष/कमियाँ निम्नलिखित हैं-
(i) बैंकिंग सिद्धान्तों की उपेक्षा देशी बैंकर्स बैंकिंग सिद्धान्तों की अवहेलना करते हैं। ये बिना जमानत के ही ऋण प्रदान कर देते हैं।
(ii) ऊँची ब्याज दर इनके द्वारा वसूल की जाने वाली ब्याज की दर अपेक्षाकृत अधिक एवं चक्रवृद्धि ब्याज दर होती है, जिससे ऋणियों का शोषण होता है।
(iii) धोखापूर्ण कार्य-प्रणाली इस कार्य-पद्धति में धोखेबाजी की सम्भावना अधिक रहती है, क्योंकि इसमें लेन-देन करने वाले सभी ग्राहक अशिक्षित होते हैं। देशी बैंकर्स ऋण देते समय अनुचित व्यवहार करते हैं।
(iv) दोषपूर्ण कार्य-प्रणाली यह प्रणाली शोषण एवं धोखेबाजी के कार्यों से भरपूर है। इसमें ऋण लेने वालों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है।
(v) पूँजी का अभाव इनके पास पर्याप्त पूँजी का अभाव पाया जाता है, जिससे किसानों को उनकी आवश्यकता के समय पर्याप्त मात्रा में ऋण उपलब्ध नहीं हो पाता है।
(vi) सामाजिक बुराइयों को बढ़ावा ये उपभोग कार्यों के लिए भी ऋण देते हैं, जिससे लोगों में अपव्ययिता व फिजूलखर्ची में वृद्धि होती है। अतः इससे सामाजिक बुराइयों को भी बढ़ावा मिलता है।
(vii) मजदूरी लेना ये किसानों व अन्य ऋणियों से विवाह आदि के अवसर पर मजदूरी या बेगार भी लेते हैं।
(viii) परिकल्पना अथवा सट्टे का कार्य करना इनके द्वारा सट्टे का कार्य करने से इनकी बैंकिंग कार्यक्षमता में कमी होती है।
(ix) खातों का अप्रकाशन देशी बैंकर्स खातों का नियमित रूप से अंकेक्षण नहीं करते हैं व खातों की सूचनाओं का प्रकाशन भी नहीं करते हैं, जिससे इनकी आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है।
(x) परम्परागत कार्य-प्रणाली देशी बैंकर्स द्वारा परम्परागत आधार पर कार्य किया जाता है, जिससे इनका निरीक्षण भी नहीं किया जा सकता है।
(xi) जमाओं को प्रोत्साहन प्रदान न करना ये लोगों की बचत को जमा कराने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते हैं।
(xii) सरकारी अनियन्त्रण देशी बैंकर्स पर सरकारी नियन्त्रण नहीं होने के कारण ये मनमानी करते हैं।
In simple words: देशी बैंकर्स ग्रामीण भारत में किसानों को ऋण, जमा और हुण्डी व्यापार जैसी वित्तीय सेवाएँ प्रदान करते हैं। उनके गुणों में बिना जमानत के ऋण, सरल प्रक्रिया और गोपनीयता शामिल है, जबकि उनके दोषों में उच्च ब्याज दर, शोषणकारी व्यवहार, पूंजी की कमी, सरकारी नियंत्रण का अभाव और परम्परागत कार्यप्रणाली प्रमुख हैं।
🎯 Exam Tip: देशी बैंकरों पर एक विस्तृत लेख में उनकी परिभाषा, कार्य, गुण और दोषों का समावेश उनकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जटिल भूमिका को पूर्ण रूप से प्रस्तुत करता है।
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